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राज लेट गया। डॉली उसके ऊपर चढ़ गई। उसने अपनी पायजामी नहीं उतारी। वह चाहती थी कि कपड़े की रगड़ राज को तड़पाए।
उसने अपने भारी स्तनों को राज के मुँह पर लटका दिया।
"इन्हें पियो," उसने कहा। "और नीचे... नीचे मैं अपना काम करूँगी।"
डॉली ने राज के लिंग को अपनी जांघों के बीच फंसा लिया। उसकी चूड़ीदार पायजामी का कपड़ा रेशमी था। राज का लिंग उसकी रानों के बीच रगड़ खा रहा था।
ऊपर राज डॉली के स्तनों को चूस रहा था, उन्हें काट रहा था, और नीचे डॉली उसे अपनी जांघों से मसल रही थी।
"राज... तुम बहुत बड़े हो..." डॉली हाँफ रही थी। "आज मैं तुम्हें पूरा खोलूँगी। आगे से भी, और पीछे से भी।"
कुछ देर बाद, डॉली उठी। उसने अपनी पायजामी उतार दी। अब वह पूरी तरह नंगी थी। उसका भरा-पूरा, मलाईदार बदन राज के सांवले शरीर के ऊपर चमक रहा था।
राज ने उसे पलट दिया। वह बिस्तर पर बैठ गया और डॉली को अपने सामने बैठा लिया।
"रुको," राज ने कहा। "पहले रस्म पूरी करनी है। जो वादा किया था।"
उसने अपनी पतलून की जेब से (जो फर्श पर पड़ी थी) वह सिंदूर की डिब्बी निकाली।
डॉली की आँखें चमक उठीं। "तुम लाए..."
"हाँ," राज ने डिब्बी खोली। लाल रंग एसी की रोशनी में चमक रहा था। "लेकिन मांग में नहीं। मांग दुनिया के लिए है।"
"तो कहाँ?" डॉली ने पूछा।
राज ने अपनी उंगली सिंदूर में डुबोई।
उसने डॉली के दोनों स्तनों के बीच, उस गहरी घाटी में एक लंबी, लाल लकीर खींच दी। लाल रंग गोरी त्वचा पर खून जैसा लग रहा था। फिर उसने डॉली की नाभि के चारों ओर सिंदूर से एक गोला बनाया। और अंत में... उसने डॉली की जांघों को फैलाया और उसकी योनि के ऊपर के बालों पर थोड़ा सा सिंदूर छिड़क दिया।
"यह मेरा इलाका है," राज ने कहा, अपनी सिंदूर वाली उंगली को चूमते हुए। "यह दिल, यह नाभि और यह कोख... यह मेरी जागीर है।"
डॉली काँप उठी। यह अधिकार, यह मालिकाना हक उसे पागल कर रहा था। उसे लगा जैसे राज ने उसे खरीद लिया हो।
"मुझे ले लो राज," उसने कहा, राज के चरणों में गिरकर। "घोड़ी बनाओ मुझे। मुझे जानवर की तरह लो। मुझे बताओ कि मैं किसकी हूँ।"
डॉली बिस्तर पर घुटनों और हाथों के बल हो गई।
उसका विशाल, गोरा पिछवाड़ा हवा में था। वह इतना चौड़ा और भारी था कि राज को लगा वह किसी पहाड़ के सामने खड़ा है। उसकी योनि पीछे से साफ दिख रही थी, गुलाबी और गीली।
राज उसके पीछे खड़ा हो गया। उसने डॉली के नितंबों पर अपनी सिंदूर वाली उंगली से एक 'R' लिख दिया।
"राज की अमानत," उसने कहा और एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा।
चटाक!
आवाज़ कमरे में गूंज गई। डॉली का पूरा मांसल शरीर हिल गया।
"आह! और मारो! लाल कर दो!" डॉली चिल्लाई।
राज ने अपने लिंग को डॉली के पीछे से सेट किया।
"डालो..." डॉली ने पीछे मुड़कर अपनी नशीली आँखों से देखा। "पूरा जड़ तक। रहम मत करना।"
राज ने डॉली की कमर को कसकर पकड़ा और एक ही झटके में प्रवेश किया।
धप्प!
"आह्ह्ह्ह्ह!" डॉली का सिर गद्दे में धंस गया। उसने तकिए को दांतों से पकड़ लिया। "माँ! कलेजा हिला दिया! उफ्फ... कितना भरा हुआ है..."
राज ने उसे पेलना शुरू किया।
थप-थप-थप!
उसके जांघ डॉली के भारी नितंबों से टकरा रहे थे। हर टक्कर पर एक गूंज हो रही थी। राज ने डॉली की कमर को पकड़ रखा था और उसे पीछे खींच रहा था ताकि वह और गहराई तक जा सके। डॉली के स्तन हवा में झूल रहे थे और हिल रहे थे।
"जोर से राज! और जोर से!" डॉली चिल्ला रही थी। "मुझे बताओ कि तुम शहर से क्या सीखकर आए हो! मुझे तोड़ दो!"
राज ने रफ़्तार बढ़ा दी। वह उसे बुरी तरह ठोक रहा था।
"तेरा यह मटका..." राज ने उसके नितंबों को मसलते हुए कहा, "आज मैं इसे भर दूँगा।"
अचानक, डॉली ने कहा, "राज... रुको।"
राज रुक गया। वह हांफ रहा था। "क्या हुआ?"
डॉली ने अपनी उंगली पीछे की तरफ की। अपने गुदा द्वार की तरफ।
"वहां..." उसने फुसफुसाया। "पिछला दरवाज़ा।"
राज हैरान रह गया। "पक्का? दर्द होगा डॉली। मेरा साइज़..."
"मुझे दर्द चाहिए," डॉली ने जिद की। "मुझे पूरा खुलना है। आज कोई छेद मत छोड़ना। मुझे अपनी रखैल बना लो।"
राज ने साइड टेबल से बॉडी लोशन उठाया और डॉली के नितंबों के बीच डाल दिया। उसने अपनी उंगली से वहां रास्ता बनाया। डॉली ने दांत भींच लिए।
"डालो..." उसने कहा।
राज ने अपना लिंग सेट किया। और दबाव बनाया।
रास्ता बहुत तंग था। डॉली का शरीर अकड़ गया।
"आह... उफ्फ..." डॉली सिसकी।
राज ने एक झटका मारा। टोपा अंदर गया।
"आह्ह्ह्ह्ह्ह!" डॉली चीख पड़ी। "फट गया! राज! बहुत मोटा है! निकालो!"
"रिलैक्स..." राज ने उसे नहीं निकाला, बल्कि उसके नितंबों को फैलाया। "साँस लो। ढीला छोड़ो।"
उसने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए।
कुछ ही पलों में, वह पूरा अंदर था। डॉली का शरीर कमान की तरह तन गया था। उसे लगा जैसे उसके पेट में कोई लोहे की रॉड डाल दी गई हो।
"हिलाओ..." डॉली ने कहा, दर्द और मजे के बीच झूलते हुए। "रुकना मत।"
राज ने गुदा मैथुन शुरू किया।
यह बहुत टाइट था। डॉली की मांसपेशियां राज के लिंग को किसी रबर बैंड की तरह निचोड़ रही थीं। राज को जन्नत का अहसास हो रहा था।
"ओह गॉड... डॉली..." राज गुर्राया। "तेरी पिछली गुफा तो कमाल है..."
"मारो! रगड़ो इसे!" डॉली ने अपने हाथ गद्दे में गड़ा दिए। "मेरी आंतों तक आ जाओ!"
उसने अपने भारी स्तनों को राज के मुँह पर लटका दिया।
"इन्हें पियो," उसने कहा। "और नीचे... नीचे मैं अपना काम करूँगी।"
डॉली ने राज के लिंग को अपनी जांघों के बीच फंसा लिया। उसकी चूड़ीदार पायजामी का कपड़ा रेशमी था। राज का लिंग उसकी रानों के बीच रगड़ खा रहा था।
ऊपर राज डॉली के स्तनों को चूस रहा था, उन्हें काट रहा था, और नीचे डॉली उसे अपनी जांघों से मसल रही थी।
"राज... तुम बहुत बड़े हो..." डॉली हाँफ रही थी। "आज मैं तुम्हें पूरा खोलूँगी। आगे से भी, और पीछे से भी।"
कुछ देर बाद, डॉली उठी। उसने अपनी पायजामी उतार दी। अब वह पूरी तरह नंगी थी। उसका भरा-पूरा, मलाईदार बदन राज के सांवले शरीर के ऊपर चमक रहा था।
राज ने उसे पलट दिया। वह बिस्तर पर बैठ गया और डॉली को अपने सामने बैठा लिया।
"रुको," राज ने कहा। "पहले रस्म पूरी करनी है। जो वादा किया था।"
उसने अपनी पतलून की जेब से (जो फर्श पर पड़ी थी) वह सिंदूर की डिब्बी निकाली।
डॉली की आँखें चमक उठीं। "तुम लाए..."
"हाँ," राज ने डिब्बी खोली। लाल रंग एसी की रोशनी में चमक रहा था। "लेकिन मांग में नहीं। मांग दुनिया के लिए है।"
"तो कहाँ?" डॉली ने पूछा।
राज ने अपनी उंगली सिंदूर में डुबोई।
उसने डॉली के दोनों स्तनों के बीच, उस गहरी घाटी में एक लंबी, लाल लकीर खींच दी। लाल रंग गोरी त्वचा पर खून जैसा लग रहा था। फिर उसने डॉली की नाभि के चारों ओर सिंदूर से एक गोला बनाया। और अंत में... उसने डॉली की जांघों को फैलाया और उसकी योनि के ऊपर के बालों पर थोड़ा सा सिंदूर छिड़क दिया।
"यह मेरा इलाका है," राज ने कहा, अपनी सिंदूर वाली उंगली को चूमते हुए। "यह दिल, यह नाभि और यह कोख... यह मेरी जागीर है।"
डॉली काँप उठी। यह अधिकार, यह मालिकाना हक उसे पागल कर रहा था। उसे लगा जैसे राज ने उसे खरीद लिया हो।
"मुझे ले लो राज," उसने कहा, राज के चरणों में गिरकर। "घोड़ी बनाओ मुझे। मुझे जानवर की तरह लो। मुझे बताओ कि मैं किसकी हूँ।"
डॉली बिस्तर पर घुटनों और हाथों के बल हो गई।
उसका विशाल, गोरा पिछवाड़ा हवा में था। वह इतना चौड़ा और भारी था कि राज को लगा वह किसी पहाड़ के सामने खड़ा है। उसकी योनि पीछे से साफ दिख रही थी, गुलाबी और गीली।
राज उसके पीछे खड़ा हो गया। उसने डॉली के नितंबों पर अपनी सिंदूर वाली उंगली से एक 'R' लिख दिया।
"राज की अमानत," उसने कहा और एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा।
चटाक!
आवाज़ कमरे में गूंज गई। डॉली का पूरा मांसल शरीर हिल गया।
"आह! और मारो! लाल कर दो!" डॉली चिल्लाई।
राज ने अपने लिंग को डॉली के पीछे से सेट किया।
"डालो..." डॉली ने पीछे मुड़कर अपनी नशीली आँखों से देखा। "पूरा जड़ तक। रहम मत करना।"
राज ने डॉली की कमर को कसकर पकड़ा और एक ही झटके में प्रवेश किया।
धप्प!
"आह्ह्ह्ह्ह!" डॉली का सिर गद्दे में धंस गया। उसने तकिए को दांतों से पकड़ लिया। "माँ! कलेजा हिला दिया! उफ्फ... कितना भरा हुआ है..."
राज ने उसे पेलना शुरू किया।
थप-थप-थप!
उसके जांघ डॉली के भारी नितंबों से टकरा रहे थे। हर टक्कर पर एक गूंज हो रही थी। राज ने डॉली की कमर को पकड़ रखा था और उसे पीछे खींच रहा था ताकि वह और गहराई तक जा सके। डॉली के स्तन हवा में झूल रहे थे और हिल रहे थे।
"जोर से राज! और जोर से!" डॉली चिल्ला रही थी। "मुझे बताओ कि तुम शहर से क्या सीखकर आए हो! मुझे तोड़ दो!"
राज ने रफ़्तार बढ़ा दी। वह उसे बुरी तरह ठोक रहा था।
"तेरा यह मटका..." राज ने उसके नितंबों को मसलते हुए कहा, "आज मैं इसे भर दूँगा।"
अचानक, डॉली ने कहा, "राज... रुको।"
राज रुक गया। वह हांफ रहा था। "क्या हुआ?"
डॉली ने अपनी उंगली पीछे की तरफ की। अपने गुदा द्वार की तरफ।
"वहां..." उसने फुसफुसाया। "पिछला दरवाज़ा।"
राज हैरान रह गया। "पक्का? दर्द होगा डॉली। मेरा साइज़..."
"मुझे दर्द चाहिए," डॉली ने जिद की। "मुझे पूरा खुलना है। आज कोई छेद मत छोड़ना। मुझे अपनी रखैल बना लो।"
राज ने साइड टेबल से बॉडी लोशन उठाया और डॉली के नितंबों के बीच डाल दिया। उसने अपनी उंगली से वहां रास्ता बनाया। डॉली ने दांत भींच लिए।
"डालो..." उसने कहा।
राज ने अपना लिंग सेट किया। और दबाव बनाया।
रास्ता बहुत तंग था। डॉली का शरीर अकड़ गया।
"आह... उफ्फ..." डॉली सिसकी।
राज ने एक झटका मारा। टोपा अंदर गया।
"आह्ह्ह्ह्ह्ह!" डॉली चीख पड़ी। "फट गया! राज! बहुत मोटा है! निकालो!"
"रिलैक्स..." राज ने उसे नहीं निकाला, बल्कि उसके नितंबों को फैलाया। "साँस लो। ढीला छोड़ो।"
उसने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए।
कुछ ही पलों में, वह पूरा अंदर था। डॉली का शरीर कमान की तरह तन गया था। उसे लगा जैसे उसके पेट में कोई लोहे की रॉड डाल दी गई हो।
"हिलाओ..." डॉली ने कहा, दर्द और मजे के बीच झूलते हुए। "रुकना मत।"
राज ने गुदा मैथुन शुरू किया।
यह बहुत टाइट था। डॉली की मांसपेशियां राज के लिंग को किसी रबर बैंड की तरह निचोड़ रही थीं। राज को जन्नत का अहसास हो रहा था।
"ओह गॉड... डॉली..." राज गुर्राया। "तेरी पिछली गुफा तो कमाल है..."
"मारो! रगड़ो इसे!" डॉली ने अपने हाथ गद्दे में गड़ा दिए। "मेरी आंतों तक आ जाओ!"