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Adultery दिव्या का सफ़र

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दिव्या और कर्नल दोनों ऊपर आ जाते हैं. थोड़ी देर में कर्नल दिव्या को एक बॉक्स लाकर देता है जिसपर राजेश के नाम की चिट लगी थी. दिव्या को लगता है की ये राजेश ने भेजा है.

लाला: अरे भाई राजेश ने क्या भेजा है गिफ्ट में? हमें भी तो दिखाओ.

दिव्या: बाद में बताउंगी अंकल.

लाला: अरे मेरे सामने ही खोल लो न. इसमें क्या है या फिर कोई सेक्सी नाईटी मंगाई है उसने तुम्हारे लिए.

दिव्या: मेरे लिए तो सरप्राइज है अंकल अब जो भी हो. मैं तो अकेले में ही देखूँगी.

लाला: ठीक है लेकिन बताना जरूर की क्या भेजा है. मैं ऐसा ही गिफ्ट फिर रेणुका को भी दूंगा.

कर्नल ये बोल कर चला जाता है. दिव्या डोर लॉक करके बॉक्स खोलती है. बॉक्स में एक रिमोट वाला वाइब्रेटर था जिसे देख कर उसे राजेश के ऊपर काफी गुस्सा आता है. हालाँकि वो खुद भी कई बार इस बारे में सोच चुकी थी लेकिन शर्म के कारण कभी उसने ये मंगवाया नहीं था.

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दिव्या उसी समय राजेश को फ़ोन लगा देती है.

राजेश: हाँ जान कैसी हो.

दिव्या: ये क्या बदतमीजी है राजेश.

राजेश: अरे क्या हुआ जानू.

दिव्या: बनो मत. तुमने इतनी गन्दी चीज मुझे कैसे भेजी. मैं तुमको ऐसी औरत लगती हूँ जो सेक्स टॉय इस्तेमाल करेगी.

राजेश समझता है की शायद कर्नल ने दिव्या को डिलडो दे दिया है. वो मन ही मन सोचता है की उसने तो हाँ नहीं बोला था जो कर्नल ने ऐसी हरकत की है. फिर उसे याद आता है की वो मना भी नहीं कर पाया था तो शायद कर्नल ने समझा हो की मैं ये दिव्या को देना चाहता हूँ. अब उसको समझ नहीं आता की वो दिव्या को क्या बोले.

राजेश: वो मुझे लगा की मैं तुमसे दूर... न जाने क्यों मैंने मंगवा लिया... अच्छा तुम नाराज़ न हो. मैं जब लौटूंगा तो उसको वापस करवा दूंगा.

दिव्या: लेकिन तुम्हारे मन में ये लेने का ख्याल आया ही क्यों?

राजेश: वो एक दोस्त ने अपनी वाइफ के लिए मंगवाया था तो मैंने सोचा की मैं भी एक ले लूं. प्लीज अब नाराज न हो.

दिव्या: तुम वापस कब आ रहे हो.

राजेश: थोडा टाइम लगेगा. अच्छा अपनी एक पिक भेजो न वो वाली.

दिव्या: जब आना तब देखना. अब सो जाओ.

राजेश: अच्छा! चलो फिर गुड नाईट.
 
राजेश फोन रख देता है. दिव्या को लगता है की राजेश अगर उसे थोडा मनाता तो वो अपनी न्यूड पिक राजेश को भेज देती लेकिन राजेश तो एकदम रोमांटिक नहीं है. तभी उसे कर्नल का ख्याल आता है की वो इस उम्र में भी कितना रोमांटिक है.

कैसे वो रेणुका के लिए तड़प रहे है. रह रह कर उसको कर्नल के साथ अपना डांस याद आ रहा था. वो सोचती है की क्यों कर्नल के छूने से अलग फील करती है जबकि कर्नल रेणुका को चाहता है. यही सब सोच कर वो सोने की कोशिश करती है लेकिन उसे नींद नहीं आती तो वो मोबाइल में पोर्न देखने लगती है.

थोड़ी देर पोर्न देख कर वो बहुत गरम हो जाती है और वाइब्रेटर का बॉक्स खोलकर वाइब्रेटर अपनी चूत में डाल कर ऑन कर देती है.

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वाइब्रेटर चालू होते ही दिव्या को लगता है की सलमान उसे चोद रहा है. ये ख्याल आते ही वो वासना के चरम पर पहुँच जाती है और फ़ौरन झड जाती है.

दूसरी तरफ कर्नल का भी बुरा हाल था.वो जितना दिव्या के करीब आ रहा था उसे भोगने की लालसा उसमे उतनी ही भड़कती जा रही थी. आज उसने दिव्या के बदन की गर्मी को महसूस किया था और अब उसे नींद नहीं आ रही थी.

कर्नल रेणुका को फोन करके अपने फ्लैट में बुलाता है और उसे बोलता है की वो वही साड़ी पेहेन कर आये जो उसने दी थी.

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फ्लैट पर आते ही रेणुका दरवाजे को बंद कर कर्नल के पास जाती है जो नशे में नंगा बैठा हुआ था. रेनुका भी अपनी साड़ी उतारने लगती है पर कर्नल उसे रोकता है. कर्नल अपना हाथ रेणुका की गर्दन से फेरता हुआ उसके बालों में डाल कर उसे नीचे की तरफ झुकाता है. रेणुका कर्नल का इशारा समझ कर नीचे झुक जाती है और कर्नल के हलब्बी लंड को अपने मुंह में भर लेती है.

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रेणुका बड़ी अच्छी तरह कर्नल का लंड मुंह में भर कर चूस रही थी लेकिन कर्नल के मन में सिर्फ दिव्या का ख्याल था. रेणुका लंड के साथ साथ कर्नल के आंड भी चाटने लगती है.

लाला: आह्ह्ह रेणुका और अन्दर लेकर चूस आह्ह्ह

रेणुका गले तक लेकर कर्नल का लंड चूसने लगती है.
 
लाला: चल अब तैयार हो जा मेरा लंड लेने के लिए.

रेणुका कर्नल का लंड छोड़कर खड़ी हो जाती है और अपनी साड़ी निकालने लगती है. कर्नल का लंड पूरी तरह से गीला हो गया था.

लाला: आज नंगी मत हो मेरी जान. बस ऐसे ही कुतिया बन जा मेरे लिए.

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रेणुका बिना कुछ कहे बेड पर घोड़ी की तरह पोज़ ले लेती है. कर्नल भी अब बिना कुछ बोले उसकी साड़ी उठा कर अपना लंड उसकी चूत में डाल देता है और जोर जोर से रेणुका को चोदने लगता है. जब कर्नल रुकता तो रेणुका खुद अपनी गांड पीछे करके उसके लंड पर झटके मारती है.

लाला: आह रेणुका, इतना मजा तेरे पति ने कभी दिया था क्या.

रेणुका: आःह नहीई लेकिन वो मेरे पति है. आप अपना वादा मत भूलना.

लाला: मैं कभी अपना वादा नहीं तोड़ता बस आगे से जैसे मैं बोलूं करती जाना.

रेणुका: हान्न्न थीक्क्क है अआझ्ह्ह

रेणुका अपनी स्पीड बढ़ा देती है.

लाला: झड़ने वाली है क्या कुतिया?

कर्नल भी अपनी स्पीड बढ़ा देता है और कुछ ही पलों में रेणुका अपना सारा रस कर्नल के लंड पर छोड़ देती है.

लाला: ये क्या किया. मुझसे पहले ही झड गयी और मेरा लंड पूरा भिगो दिया. अब इसको साफ़ कौन करेगा.

रेणुका झट से सीधी हो कर कर्नल का लंड चाट चाट कर साफ़ करने लगती है और कर्नल भी झड़ने लगता है और अपने वीर्य की एक एक बूँद रेणुका को पिला देता है और उसको बाँहों में भरकर बिस्तर पर लेट कर सो जाता है.
 
अगले दिन दिव्या सुबह स्कूल चली जाती है. स्कूल में मदन उसको अपने ऑफिस में बुलाता है.

मदन: दिव्या जी कौन बच्चे सेलेक्ट हुए हैं स्कॉलरशिप के लिए?

दिव्या: सर इंटरनल टेस्ट के हिसाब से तो दो बच्चे हैं. एक तो पूजा जिसने टॉप किया है और दूसरा मनीष. उसने भी काफी बेहतर किया है.

मदन पूजा का नाम सुनकर हैरान नहीं होता क्योंकि उसने ही पूजा को सारे पेपर्स दिए थे लेकिन मनीष का नाम सुनकर उसे लगता है की ये लड़का कैसे इतने नंबर ले आया लेकिन वो दिव्या को फाइनल एग्जाम की तैयारी के लिए कहता है.

मदन: दिव्या जी अब आप फाइनल्स की तैयारी में लग जाइए. आई होप की आपको कोई तकलीफ नहीं हो रही होगी फिर भी अगर जरूरत हो तो आप स्टाफ में किसी की भी हेल्प ले सकती हैं. आप सभी सब्जेक्ट के सैंपल पेपर्स टीचर्स की हेल्प से बना लीजिये. उनको मैं फाइनल कर लूँगा लेकिन अपने सब्जेक्ट के फाइनल पेपर्स आप ही बना दीजियेगा. ठीक हैं न.

दिव्या: नो प्रॉब्लम सर. मैं आज से ही काम शुरू कर देती हूँ.

दिव्या का बाकी दिन सारे टीचर्स से बात करने में ही निकल जाता है और छुट्टी के समय जब वो स्कूल से निकलने लगती है तब वो मनीष को ऊपर की मंजिल की तरफ जाते देखती है. उसे लगता है की शायद आज फिर से मनीष पूजा के साथ टॉयलेट में सेक्स करेगा. पहले तो दिव्या इगनोर करने की कोशिश करती है लेकिन उसका मन नहीं मानता तो वो भी चुपके से ऊपर चली जाती है. ऊपर पहुँच कर दिव्या मनीष को एक टॉयलेट में घुसते देखती है. वो भी थोड़ी देर रुक कर चुपके से उसके बगल वाले टॉयलेट में घुस जाती है और दीवार के छेद से अन्दर झाँक कर देखती है. अन्दर देखते ही उसके होश उड़ जाते हैं क्योंकि अन्दर पूजा नहीं बल्कि रश्मि मनीष का लंड चूस रही थी.

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ये नज़ारा देख कर दिव्या को रश्मि से एक अजीब सी जलन का एहसास होता है साथ ही उसको मनीष पर गुस्सा भी आता है की उसने रश्मि को लेकर उससे क्या नहीं कहा था और अब वो खुद रश्मि के साथ लगा हुआ है. उसको लगता की वो मनीष से रश्मि के बारे में पूछेगी लेकिन फिर वो सोचती है की उसने तो तय किया था की अब वो मनीष से मतलब नहीं रखेगी तो वो चुपचाप वहां से निकल जाती है.
 
सोसाइटी के गेट पर ही उसे रेणुका मिल जाती है.

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रेणुका उसको देख कर स्माइल करती है तो दिव्या भी उससे बात करने लगती है. रेणुका दिव्या को चाय पीने के लिये अपने फ्लैट पर ले आती है. दिव्या सोचती है की वो रेणुका से कर्नल की बात करे लेकिन उसको समझ नहीं आता की क्या बोले.

दिव्या: रेणुका एक बात पूछूँ.

रेणुका: हाँ हाँ बोलो न.

दिव्या: तुमने मुझे कर्नल अंकल से दूर रहने को क्यों कहा था. क्या मैं तुम्हे पसंद नहीं हूँ.

रेणुका: नहीं नहीं. ये बात नहीं है. मैं तुम्हे ठीक से जानती नहीं थी इसीलिए बोल दिया. मुझे माफ़ करना.

दिव्या: तो क्या तुम अंकल को पसंद करती हो?

रेणुका: पसंद तो करती हूँ लेकिन किसी गलत तरीके से नहीं. मैं उनकी इज्जत करती हूँ क्योंकि मेरे ख़राब समय में उन्होंने मेरी काफी मदद की है.

दिव्या: हम्म. अकेले रहने में काफी दिक्कत होती है. मैं जानती हूँ. मेरे हबी भी काफी टाइम बाहर रहते हैं.

रेणुका: तुम अपने पति को बोलो न की वो तुम्हारे साथ रहा करें.

दिव्या: उनका कुछ टाइम में यहाँ का ही काम हो जायेगा फिर उनके ये टूर बंद हो जायेंगे. अच्छा तुमको जब मन हो, बोर महसूस करो तो मेरे पास आ जाना. हिचकिचाना नहीं.

रेणुका: थैंक यू.

दिव्या: तुमने दूसरी शादी का क्यों नहीं सोचा?

रेणुका: हुह इस उम्र में कौन मुझसे शादी करेगा.

दिव्या: अरे अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है. जवान हो खूबसूरत हो. शादी करने वालों की लाइन लग जाएगी. तुम्हारा मन नहीं करता की कोई तुम्हारी जिंदगी में हो.

रेणुका: मन किसका नहीं करता लेकिन... क्या तुम्हारा नहीं करता? सुना तुम बेड में बहुत गरम हो. हा हा हा...

दिव्या: अरे ये तुमसे किसने कहा?

रेणुका: तुम्हारे पति उस दिन कर्नल साब से तुम्हारी बहुत तारीफ कर रहे थे की तभी उनके मुंह से निकल गया की तुम बेड में बहुत हॉट हो.

दिव्या: उफ़ ये राजेश भी न. अपनी बीवी के बारे में दुसरे आदमी को कोई ये सब बोलता है. कोई और फालतू बात की राजेश ने?
 
दोनों निकल कर लिफ्ट से ऊपर चले जाते हैं. रेणुका कर्नल के फ्लैट में चली जाती है और दिव्या अपने फ्लैट का दरवाजा खोलने लगती है. अचानक उसकी नजर नीचे पड़े एक बॉक्स पर पड़ती है जिस पर उसका नाम लिखा है. वो बॉक्स उठा कर अन्दर ले आती है तो देखती है की भेजने वाले की जगह राजेश का नाम लिखा है. वो सोचती है की शायद राजेश ने सॉरी बोलने के लिए कोई गिफ्ट भेजा होगा.

वो जल्दी से बॉक्स खोलती है तो उसका गुस्सा सातवे आसमान पर पहुँच जाता है क्योंकि इस बार बॉक्स में एक बड़ा सा डिलडो और कुछ और सेक्स टॉयज थे.

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फिर वो सोचती है की शायद राजेश ने इनका आर्डर साथ साथ किया होगा लेकिन डिलीवरी अलग अलग हुई है. उसे क्या पता की ये सब कर्नल की शरारत है. वो राजेश को फोन लगाने की सोचती है लेकिन फिर सोचती है की राजेश ने तो बोला ही था की वो वापस कर देगा तो वो बॉक्स को अलमारी में रख कर घर के कामों में लग जाती है. रात को जब वो लेटती है तो बार बार उसके मन में मनीष का ख्याल आ रहा था. आखिरकार उसका दिल उसके ऊपर हावी हो जाता है और वो ऑनलाइन आ जाती है लेकिन मनीष ऑनलाइन नहीं था.

वो थोड़ी देर इंतज़ार करती है की तभी मनीष का मेसेज आता है.

मनीष: हेल्लो मैम. यकीन नहीं होता की आप मेरा इंतज़ार कर रही थीं.

दिव्या: मैं तुम्हारा इंतज़ार नहीं कर रही थी.

मनीष: ओह तो दुसरे लोगों से भी चैटिंग शुरू कर दी क्या?

दिव्या कोई जवाब नहीं देती.

मनीष: मैम आपने उस दिन प्रॉमिस किया था लेकिन ऑनलाइन नहीं आई. मैं सुबह तक आपका वेट करता रहा.

दिव्या: मैंने तुमसे कब प्रॉमिस किया था. झूठ मत बोलो.

मनीष: मैम मैं आपसे तो कभी झूठ नहीं बोलता.

दिव्या: मेरा मुंह मत खुलवाओ.

मनीष: नहीं नहीं बताइए मैम मैंने क्या झूठ बोला आपसे.

दिव्या: तुम तो कहते थे की मेरे अलावा तुम किसी और टीचर के बारे में सोचते भी नहीं तो आज बाथरूम में रश्मि के साथ क्या ट्यूशन ले रहे थे.

मनीष: मैम जब मैंने ये बात बोली थी तब एकदम सही बात थी. लेकिन आपने तो मुझे एकदम इग्नोर कर दिया और रश्मि मैम को पता चल गया की उनके बारे में आपको मैंने बताया है तो वो मेरे पीछे पड़ गयी थी तो उनको खुश करने के लिए मैंने उनको प्रोपोस कर दिया जो उन्होंने एक्सेप्ट भी कर लिया.
 
दिव्या: तो तुम अब रश्मि के साथ सेक्स करने लगे.

मनीष: मैम मैं भी आपकी ही तरह हूँ. ज्यादा दिन सेक्स के बिना नहीं रह सकता.

दिव्या: व्हाट रबिश. मुझसे अपने को कॉम्पेयर मत करो.

मनीष: अरे मैम उस दिन जब मैं आपको स्कूल के बाहर मिला था तो मैंने आपको सलमान के साथ क्लासरूम में देख लिया था. मैंने सोचा की आपको बोलूँगा तो आपके लिए औकवार्ड हो जायेगा इसीलिए चुप था. लेकिन आपने मजबूर कर दिया. आप एक चौकीदार के साथ लगी हुई थीं और मेरे को बोलती हैं की स्टूडेंट होकर टीचर के बारे में मत सोचो. उसके साथ आपको देख कर मेरा खून खौल गया था लेकिन फिर मैंने सोचा की जब आपने उससे रिश्ता बनाने का तय कर लिया है तो मैं कर ही क्या सकता हूँ.

ये मेसेज पढ़ कर दिव्या के पांव तले जमीन खिसक जाती है. उसको जिसका डर था वही हो गया. वो रोज प्रार्थना करती थी की रश्मि के बाद उसके और सलमान के बारे में किसी को पता न चले लेकिन आज मनीष को पता चल चूका था. उसको बहुत देर तो समझ ही नहीं आया की क्या बोले फिर उसने अपने को संभाल कर मनीष को मेसेज किया.

दिव्या: तुमको क्या पता की सलमान ने मेरे साथ जबरदस्ती की थी.

मनीष: वाह मैम वाह. अभी भी नाटक कर रही हो. मैंने सब देखा था की आप उसके ऊपर बैठ कर उसके लंड पर ऐसे कूद रही थीं.

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मनीष की भेजी तस्वीर देख कर दिव्या शर्मसार हो जाती है लेकिन फिर अपने को संभाल कर मेसेज लिखती है

दिव्या: मैं सच कह रही हूँ मनीष की ये सब उसने जबरदस्ती शुरू किया था लेकिन फिर...

मनीष: लेकिन क्या मैम...

दिव्या: लेकिन फिर मैं बहक गयी थी.

मनीष: फिर एक नया झूठ. अगर वो आपसे जबरदस्ती करता तो आप उसको अपनी पेंटी और ब्रा क्यों देती हैं.

दिव्या को हैरानी होती है की मनीष को ये कैसे पता.

दिव्या: मानती हूँ की ये मेरी गलती है की मैंने उसको तरस खा कर वो दे दी थी जिसका उसने फायदा उठाया.

मनीष: तरस खा कर मतलब...

दिव्या: उसकी वाइफ को मरे कई साल हो गए हैं इसीलिए...

मनीष: फिर झूठ. अरे उसकी बीवी तो गाँव में हैं और उसके चौथे बच्चे की माँ बनने वाली है.

दिव्या ये सुनकर शॉक रह जाती है की सलमान ने किस हद तक उसको बेवकूफ बनाया है. वो मनीष को बिना कुछ बोले लॉगआउट हो जाती है.
 
वो पूरी रात रोती रहती है की उसकी क्या इमेज हो गयी है हालाँकि उसको उम्मीद है की मनीष ने फ़िलहाल ये किसी को नहीं बताया होगा लेकिन वो ये भी समझती है की मनीष को मुंह बंद करने के एवज में उसे क्या चाहिए. पर वो सोचती है की मनीष को वो फ़िलहाल एक्साम्स तक टाल देगी और फिर स्कूल छोड़ देगी लेकिन पहले सलमान से पीछा छुड़ाना जरूरी है वरना वो अपनी हरकतों से उसकी बदनामी जरूर करवाएगा. वो तय कर लेती है को वो सलमान को किसी भी तरह एग्जाम के पेपर दे देगी.

दिव्या ये सब सोच रही थी और उधर मनीष खुश हो रहा था की अब दिव्या की चूत ज्यादा दूर नहीं है. अगर वो चाहती है की वो उसके और सलमान के रिश्तो पर अपना मुंह बंद रखे तो दिव्या को मनीष को वही देना होगा जो वो सलमान को देती है. वो सोचता है की अब पीछे हटने से काम नहीं चलेगा.

अगले दिन हिम्मत करके दिव्या रोज की तरह स्कूल जाती है. लंच टाइम तक वो काफी नार्मल हो जाती है. लंच करने वो स्टाफ रूम में जाती है और बाकी टीचर्स को उनके सब्जेक्ट के सैंपल पेपर्स तैयार करने को कह देती है और फिर अपना पेपर भी बनाने लगती है. काफी टीचर्स छुट्टी के बाद रुक कर पेपर्स बना रहे होते हैं तो दिव्या भी स्टाफ रूम में रुक जाती है ताकि उसे आज मनीष का सामना न करना पड़े.

मनीष भी स्कूल के बहर काफी देर दिव्या का इंतज़ार करता है लेकिन जब वो नहीं आती तो वो मन मार कर घर चला जाता है. दिव्या शाम को देर से घर पहुँचती है और कपडे बदलने जाती है की तभी डोर बेल बजती है. दरवाजे पर रेणुका को देख कर उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. वो रेणुका को अन्दर बुलाती है.

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दिव्या: अरे ये फूल वूल किसलिए?

रेणुका: पहली बार तुम्हारे यहाँ आई थी तो सोचा...

दिव्या: अगर ऐसी फॉर्मेलिटी करोगी तो मेरे यहाँ मत आना.

रेणुका: अच्छा बाबा आगे से खयाल रखूंगी.

दिव्या: और कल कर्नल अंकल से कैसी रही मीटिंग.

रेणुका: अरे वहां तो मैं काम करने जाती हूँ.

दिव्या: लेकिन काम के साथ साथ और बातें भी तो होती होंगी. कही कल भी तो अंकल मास्टरबेट नहीं कर रहे थे. हाहाहा...

रेणुका: तुम भी न दिव्या. तुमको बता कर तो मुसीबत ही मोल ले ली मैंने और वैसे भी अभी उनकी हालत ठीक नहीं है.

दिव्या: क्यों क्या हुआ?

रेणुका: पता नहीं शायद पैर में चोट है. ज्यादा चल फिर नहीं रहे हैं. मैंने पुछा तो कुछ बोले नहीं.

दिव्या: तो तुम मसाज कर देती न. छूने को भी मिल जाता इसी बहाने.

रेणुका: कुछ बोलते तो कर भी देती लेकिन जब बोले ही नहीं तो फिर. वो तो वो लंगड़ा कर चल रहे है तो मुझे पता है.

दिव्या समझ जाती है की जो उस दिन कर्नल की जांघ में खिचाव आया था उसी वजह से दिक्कत हो रही होगी. कहीं मसल न फट गयी हो. उसको थोड़ी चिंता होती है.

रेणुका: अच्छा अभी तो मैं चलती हूँ लेकिन अगली बार आउंगी तो तुमको मुझे पोर्न दिखाना होगा.

दिव्या: आज ही देख लो अगर इतना मन है तो. हाहाहा...

रेणुका: मन तो है लेकिन आज जरूरी काम है. चलो एक दो दिन में आउंगी तब दिखा देना.
 
रेणुका के जाने के बाद दिव्या कर्नल के घर जाती है. डोर बेल बजने पर कर्नल दरवाजा खोलने आ जाता है. जानबूझ कर वो अपनी टीशर्ट उतार कर आता है. दिव्या उसको अधनंगा देख कर असहज हो जाती है और इधर उधर देखने लगती है.

लाला: अरे दिव्या तुम?

दिव्या: अंकल रेणुका ने बताया की आपको चलने में तकलीफ हो रही है.

लाला: अरे मैं ठीक हूँ दिव्या.

कर्नल लंगड़ा कर अपने बेडरूम में चला जाता है. दिव्या भी पीछे पीछे जाती है.

दिव्या: दिख ही रहा है की आप कितने ठीक है. आपने बताया क्यों नहीं की आपका पैर ठीक नहीं हुआ है. अगर मसल फ्रैक्चर हुआ तो?

लाला: अरे अब किसी को क्या परेशान करता. फ्रैक्चर तो नहीं है बस मसल खिंच गयी है.

दिव्या: अरे बताना तो चाहिए. इसमें परेशानी की क्या बात है और वैसे भी न मैं आपसे एल्बम उतरवाती और न आप गिरते.

लाला: अरे जो होना होता है वो तो होता ही है. वैसे ऐसे ही मौको पर लगता है की जीवनसाथी न हो तो कितनी दिक्कत होती है. अगर आज मेरी वाइफ होती तो...

दिव्या: अरे कोई हेल्प चाहिए तो बताइए न अंकल.

लाला: अरे नहीं नहीं. तुम कैसे करोगी. हम बस पड़ोसी ही तो हैं.

दिव्या: अरे बताइए तो. अब पड़ोसी काम नहीं आएंगे तो कौन काम आयेगा. अब आपका खाना मैं अपने घर से ले आउंगी.

लाला: खाना तो रेणुका बना जाती है लेकिन अगर मेरी वाइफ होती तो वो मेरी मसाज कर देती. मैं खुद करने की कोशिश कर रहा था लेकिन दर्द की वजह से वहां हाथ भी नहीं रख पा रहा.

दिव्या: अरे अंकल मैं कर देती हूँ. आप भी न.

लाला: अच्छा तो एक काम करो. बाहर से तेल की शीशी ले आओ और मैं ये लाइट्स बंद कर देता हूँ ताकि तुमको ज्यादा प्रॉब्लम न हो.

दिव्या बाहर से तेल लाती है तब तक कर्नल लाइट बंद कर देता है लेकिन फिर भी रूम में काफी रौशनी है और दिव्या देखती है की कर्नल ने पेंट भी उतार कर अपनी कमर से नीचे के हिस्से हो टॉवल से ढक लिया है. दिव्या को समझ आता है उससे गलती हो गयी है लेकिन अब वो क्या करे. कर्नल उसकी झिझक समझ जाता है.

लाला: दिव्या अगर तुमको ख़राब लग रहा है तो रहने दो. कुछ दिनों में खुद ही ठीक हो जायेगा.

दिव्या: नहीं अंकल मैं कर देती हूँ.

दिव्या तेल की शीशी ले कर कर्नल के पास आ जाती है और कर्नल के घुटने पर तेल गिरा कर मालिश करने लगती है. कर्नल उससे थोडा ऊपर मसाज करने को बोलता है. दिव्या हाथ थोडा ऊपर ले जाती है.

दिव्या: यहाँ करू अंकल?

लाला: नहीं दिव्या थोडा और ऊपर.

जैसे जैसे दिव्या अपने हाथ ऊपर ले जाती है उसका हाथ कापने लगता है. कर्नल की सख्त जांघ किसी पत्थर की तरह ठोस लग रही थी. एसी में भी दिव्या को पसीना आने लगता है.

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लाला: हाँ दिव्या बस जरा सा और ऊपर. तुम्हारे हाथ कितने सॉफ्ट हैं.

दिव्या का हाथ अचानक कर्नल के अंडरवियर से छू जाता है तो वो रुक जाती है.

दिव्या: और ऊपर किया तो आपका अंडरवियर तेल से भीग जायेगा.

दिव्या को तुरंत पता चलता है की उसने कितनी बड़ी गलती कर दी है क्योंकि कर्नल उसे सोचने का मौका भी नहीं देता और फौरन अंडरवियर उतार देता है. दिव्या खुद को कोसने लगती है की आखिर वो यहाँ आई ही क्यों.
 
दिव्या अब मना नहीं कर पा रही थी जिसका फायदा उठा कर कर्नल दिव्या का हाथ पकड़ एकदम अपनी जांघ के उपरी हिस्से में रख देता है. कर्नल दर्द से कराहने की एक्टिंग करता है और दिव्या से कहता है की यही मालिश करो. जैसे ही दिव्या तेल डाल कर मालिश करना शुरू करती है कर्नल दर्द का नाटक करके अपना हाथ दिव्या की कमर पर रख देता है.

लाला: आह्ह्ह दिव्या थोडा अन्दर की तरफ करो. चोट वही है.

कर्नल बार बार दर्द का बहाना करके दिव्या को कमर को मसल देता है. कर्नल के हिलने से दिव्या का हाथ कई बार उसके लंड और अंडो को छू जाता है. हलकी रौशनी में दिव्या देखती है की कर्नल के टॉवल में एक टेंट बनने लगता है. अब दिव्या भी गरम होने लगती है. उसकी सांस तेज हो जाती है और वो बिना रुके कर्नल की जांघ को ऊपर तक रगड़ने लगती है.

लाला: आह दिव्या मैं बहुत लकी हूँ जो तुम जैसी पड़ोसन मिली है. नहीं तो अपने भी इतना नहीं करते और उस पर जबसे तुमने रेणुका वाले मामले में मेरी मदद करने को बोला है जैसे एक नयी उम्मीद मेरी जिंदगी में आ गयी है.

दिव्या चुपचाप मसाज करती रहती है तो कर्नल हल्का सा हिल कर अपना लंड उसके हाथ से छुआ देता है. अचानक कर्नल अपना आपा खो देता है और दिव्या का हाथ पकड़ कर अपने खड़े लंड पर रख देता है. दिव्या को इसकी बिलकुल उम्मीद नहीं थी और वो अपना हाथ वापस खींचती है लेकिन कर्नल उसे अपना लंड पकड़ा कर उसका हाथ दबा देता है जिससे वो कर्नल का लंड छोड़ नहीं पाती.

लाला: प्लीज दिव्या एक बार इसकी भी मसाज कर दो. तुम जानती हो की मैं कितना तड़प रहा हूँ.

दिव्या: छी, छोडिये मुझे. ये आप क्या कर रहे हैं.

लाला: दिव्या प्लीज थोडा सा तो सहला दो.

कर्नल अब अपना टॉवल भी हटा देता और पूरा नंगा होकर दिव्या के हाथो से अपने लंड को हिलाने लगता है. धीरे धीरे दिव्या कर्नल का लंड हिलाने लगती है और उसे पता भी नहीं चलता की कर्नल ने कब अपना हाथ हटा लिया.

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