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Adultery दिव्या का सफ़र

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दिव्या के हाथ अब कर्नल के लंड पर बिना रुके ऊपर नीचे चलने लगते हैं. कर्नल भी दिव्या के हाथों से मुठ मरवाने के आनंद में अपनी ऑंखें बंद करके लेट जाता है. दिव्या के हाथ इस तरह से चल रहे थे जैसे वो ये कर्नल के लिए नहीं बल्कि अपनी संतुष्टि के लिए कर रही हो. कर्नल के सख्त लंड को हाथ में लेकर वो भी अचम्भे में थी की इस उम्र में कैसे किसी का लंड इतना तगड़ा हो सकता है.

जल्द ही कर्नल का शरीर अकड़ने लगता है जिससे दिव्या भी भांप जाती है और अपना हाथ और तेज़ चलने लगती है. कर्नल अचानक कराह उठता है और दिव्या के हाथ में ही झड जाता है.

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कर्नल के झड़ते ही दिव्या को अचानक होश आता है की वो क्या कर रही थी. वो तुरंत वहां से भाग खड़ी होती है लेकिन अब तो जो होना था वो हो ही चुका था. दिव्या अंपने फ्लैट में जाकर डोर बंद करके रोने लगती है. दिव्या के गोरे गालों से आंसू मोतियों की तरह गिरने लगते हैं. उसको समझ नहीं आ रहा की अचानक उसके जीवन में इतने सारे जिस्म के भूखे एक साथ कैसे आ गए. एक तरफ सलमान है जिसकी उसने मदद करनी चाही लेकिन उसके दिव्या के साथ जबरदस्ती की और फिर झूठ बोल कर धोखा दिया. फिर मदन और मनीष जो उसके जिस्म से खेलना चाहते हैं और अब ये कर्नल भी.

वो तो उसकी मदद करने गयी थी लेकिन उसने आज दिव्या से क्या करवा दिया. उसने तय कर लिया की आज के बाद वो कर्नल से कोई वास्ता नहीं रखेगी. वो रोते रोते कब सो गयी उसको पता ही नहीं चला लेकिन रात में उसके ऐसा सपना देखा की उसकी हालत ख़राब हो गयी. वो बेड पर तड़पने लगी.

दिव्या सपने में देखती है की कर्नल उसे पूरा नंगा करके घोड़ी बना कर बेरहमी से चोद रहा है. वो बेड पर पड़े पड़े आंहे भरती रहती है और पूरा पसीने में भीग जाती है.

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दिव्या का जिस्म आग की भट्टी की तरह तप रहा था इसीलिए न जाने कब वो अपने सपने की इस चुदाई के भी मजे लेने लगी. दिव्या सपने में देखती है की कर्नल के झटकों से वो फर्श पर लेट गयी है और अपने हाथ पीछे ले जाकर वो दिखावे के लिए कर्नल को रोकने की कोशिश करती है.

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वो जिन हाथो से कर्नल को रोकने की कोशिश कर रही थी अब उन्ही से कर्नल की जांघों को नोचने लगती है. कर्नल भी अपने झटको की स्पीड बढ़ा देता है और दिव्या के कान में कहता है “जानेमन तुम्हारी कोख में मैं अपना बीज डालने जा रहा हूँ. तुम जो पहला बच्चा पैदा करोगी वो मेरा होगा.”

ये सुन कर दिव्या का सपना टूट जाता है और उसकी नींद खुल जाती है. वो अपना पसीना पोछ कर वापस लेट जाती है और सोचने लगती है की उसको कर्नल का सपना क्यों आया. उसे फिर से पछतावा होता है की वो कर्नल के घर क्यों गयी. उसे काफी देर तक नींद नहीं आती और उसका मन मनीष से बात करने का होता है लेकिन वो किसी तरह खुद पर काबू पा लेती है. रात इसी सब में कट जाती है और अगले दिन जब वो स्कूल के लिए घर से निकलती है तो सामने कर्नल उसका इंतज़ार कर रहा होता है.

दिव्या कर्नल को देख कर अपना मुंह फेर लेती है और फ्लैट लॉक करने लगती है लेकिन कर्नल उसे रोकता है और जबरदस्ती उसे लेकर फ्लैट के अन्दर आ जाता है.
 
दिव्या: अरे अरे ये क्या बदतमीजी है. बाहर निकलिए.

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कर्नल: मैं जानता हूँ की तुम मुझसे नाराज हो दिव्या लेकिन प्लीज मेरी बात तो सुनो.

दिव्या: मुझे कुछ नहीं सुनना. मैं तो हैरान हूँ की ऐसी हरकत करने के बाद भी आप मेरे सामने कैसे आये.

कर्नल: मैं अपनी गलती पर बहुत शर्मिंदा हूँ दिव्या पर मैं बहक गया था. जब से तुमने मुझसे रेणुका के बारे में बोला है तो मेरे मन में अजीब अजीब ख्याल आ रहे है. रेणुका को देखते ही मेरा मन बहकने लगता है.

दिव्या: लेकिन मैं रेणुका नहीं दिव्या हूँ, राजेश की बीवी.

कर्नल: जानता हूँ लेकिन कल दिन में रेणुका काम ख़तम करके मेरे बाथरूम में कपडे बदल रही थी तो उसको देख कर मैं अपना आपा खो बैठा और जब तुमने मेरी जांघों को छुआ तो मैं खुद पर काबू नहीं रख पाया.

दिव्या: रेणुका को आपने कैसे देखा जबकि वो बाथरूम में थी?

कर्नल: अब ये तो तुम भी जानती हो की मेरे बेडरूम के शीशे में बाथरूम का एक हिस्सा दिखता है. मेरा इरादा नहीं था ऐसा कुछ करने का लेकिन अब क्या बोलूं.

दिव्या अच्छे से जानती थी की कर्नल के बाथरूम के अन्दर का सब कुछ बेडरूम के शीशे में नज़र आता है क्योंकि दरवाजा ठीक से बंद नहीं होता. आज उसका शक यकीन में बदल गया की कर्नल ने जरूर उसे भी बाथरूम इस्तेमाल करते हुए देखा होगा. वो झेंप जाती है.

दिव्या: चाहे जो भी हो लेकिन कुछ भी आपकी हरकत को जस्टिफाई नहीं कर सकता.

कर्नल: मैं जस्टिफाई नहीं कर रहा हूँ बस तुमको ये बता रहा हूँ की ये कैसे हो गया और माफ़ी मांग रहा हूँ. तुम कहो तो तुम्हारे पैरों में पड़ जाऊ. तुम मेरी एकलौती दोस्त हो जिससे मैं अपनी सारी बातें कर लेता हूँ और मैं तुम्हे खोना नहीं चाहता. मुझे एक मौका तो और दो.
 
दिव्या इस बात का कोई जवाब दिए बिना वहां से निकल जाती है. आज भी एक्साम्स के पेपर सेट करने में दिव्या को स्कूल में काफी देर हो जाती है. जब दिव्या घर के लिए निकल रही होती है तो उसे एक क्लास में मनीष बैठ कर पढ़ते दिखाई देता है. उसे देख कर दिव्या हैरान होती है और वो क्लास में चली जाती है.

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मनीष: अरे मैम आप घर नहीं गयीं?

दिव्या: मैं तो कुछ काम कर रही थी लेकिन तुम क्यों नही गए?

मनीष: वो मैं तो फाइनल की तैयारी कर रहा था और इस वक़्त घर पर पढाई नहीं हो पाती. दोस्त वगेरह आ जाते है इसीलिए लेकिन कुछ समझ नहीं आ रहा.

दिव्या: फोकस ठीक जगह रखा करो तो सब समझ आयेगा. वैसे क्या नहीं समझ आ रहा?

मनीष: मैम वो रिप्रोडक्शन प्रोसेस नहीं समझ आ रहा.

दिव्या: हम्म ये तो रश्मि मैम तुमको ज्यादा ठीक से बता पाएंगी. उन्हें ही बुला लो.

मनीष: वो तो कब की घर चली गयी. आप तो साइंस टीचर है तो आप तो और भी अच्छे से समझा सकती हैं.

दिव्या: हाहाहा. चलो तुम पढ़ो. मैं चलती हूँ.

मनीष: अरे बैठो न मैम थोड़ी देर. अब तो आप ऑनलाइन भी नही आतीं. अच्छा ये तो समझा दीजिये.

दिव्या डेस्क पर बैठ कर किताब देखने लगती है की मनीष क्या पूछ रहा है और मनीष दिव्या का जिस्म निहारने लगता है.
 
दिव्या: अरे ये तो बहुत सिंपल है.

तभी दिव्या देखती है की मनीष उसकी चून्चियों को घूर रहा है.

दिव्या: मुझे घूरने के लिए रोका है तुमने या पढने के लिए?

मनीष: आप तो ऐसे कह रही है जैसे मैंने कभी इन्हें देखा न हो. आप चली ही जाइये वरना मेरी नज़र तो आपके बदन पर जाएगी ही.

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दिव्या: समझा करो मनीष. मैं तुम्हारी टीचर हूँ. मैं तुमसे काफी ओपन हो गयी थी लेकिन वो गलत था.

मनीष: अच्छा और सलमान के साथ सेक्स करना गलत नहीं था? आप जानती है की मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ और कभी सलमान की तरह आपसे जबरदस्ती नहीं करूंगा इसीलिए आप मुझे जब तब डांट देती हैं.

दिव्या: डांट नहीं रही समझा रही हूँ की ये तुम्हारे लिए भी सही नहीं है. तुम्हारे लिए पूजा ही ठीक है. मेरा या रश्मि का ख्याल अपने दिल से निकाल दो.

मनीष ये सुन कर क्लास से जाने लगता है.

दिव्या: अरे कहाँ जा रहे हो. नाराज़ हो गए क्या?

मनीष: नाराज़ नहीं हूँ लेकिन अब अगर यहाँ रुका तो आपको छुए बिना नहीं रह पाउँगा जो आपको पसंद नहीं आयेगा.

दिव्या चुप हो जाती है. उसे कुछ न कहता देख मनीष उसकी तरफ बढ़ता है. जल्द ही दिव्या को अपने कंधे पर मनीष का हाथ महसूस होता है. मनीष दिव्या के साडी के पल्लू को सरका कर नीचे गिरा देता है.

दिव्या: नहीं मनीष ये सब नहीं करो.

मनीष: मैम आप तो मेरी प्यास समझती हैं न. मना मत करो प्लीज.

इतना कह कर मनीष कंधो को चूमते हुए नीचे हाथो की तरफ बढ़ने लगता है.

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ऐसा करते हुए मनीष दिव्या की गांड में अपना लंड का दबाव बढ़ा देता है. दिव्या इसके लिए तैयार नहीं थी और वो मनीष को पीछे धकेल देती है.

दिव्या: मैं मना कर रही हूँ न मनीष.तुम कभी मेरी कोई बात नहीं मानते.
 
मनीष: अच्छा ठीक है लेकिन आप मुझे एक बार गले तो लगाने दीजिये न.

दिव्या फिर कोई जवाब नहीं देती तो मनीष दिव्या की तरफ बढ़ जाता है. दिव्या मनीष को रोकने के लिए उसके सीने और अपनी छाती के बीच में अपना हाथ रख देती है.

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दिव्या की साँसे काफी तेज़ चल रही थी जिससे उसकी चून्चिया ऊपर नीचे हो रहे थे. मनीष अपना हाथ दिव्या की कमर पर रख देता है. दिव्या की गांड पेहले ही बेंच पर टिकी थी तो मनीष उसे बेंच पर धकेल देता है और खुद उसके ऊपर आ जाता है.

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मनीष की इस हरकत से दिव्या हडबडा जाती है और मनीष को हटाने की कोशिश करती है. उसे मनीष का लंड साफ़ अपनी चूत के ऊपर रगड़ खाता महसूस होता है.

दिव्या: हट जाओ मनीष. तुमने सिर्फ हग करने को कहा था.

मनीष: हां तो आप बीच से अपना हाथ हटाइए वरना हग कैसे होगा. फिर मैं हट जाऊंगा.

दिव्या अपना हाथ अब हटा लेती है तो मनीष उसे अपनी बाँहों में जकड लेता है और उसके बदन को महसूस करने लगता है.

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दिव्या के मम्मे मनीष के सीने में घंस जाते हैं. मनीष दिव्या की गर्दन चूमते हुए उसके कानों में कहता है.

मनीष: मैम कितने लकी है आपके पति और सलमान जिनके नसीब में इन्हें चूसना लिखा था. मैं जरा सा छु कर देख लूं की ये इतने बड़े कैसे हो गए हैं.

दिव्या: बस मनीष अब तुम कुछ ज्यादा ही बोल रहे हो. हग कर लिया न अब हट जाओ.
 
इस बार मनीष हट जाता है और दिव्या भी खड़ी हो जाती है. जैसे ही दिव्या खड़ी होती है मनीष उसको बिना मौका दिए उसके होठों को चूमना शुरू कर देता है.

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दिव्या की आँखे फटी रह जाती हैं. वो छूटने की काफी कोशिश करती है लेकिन जब तक मनीष का मन नहीं भरता तब तक वो उसे नहीं छोड़ता है और जब वो छोड़ता है तो दिव्या उसे गुस्से में धक्का देकर क्लास से बाहर निकल जाती है लेकिन मनीष सोचता है की आज नहीं तो कल दिव्या उसके नीचे आयेगी ही क्योंकि वो सलमान और दिव्या का राज जानता है.

दिव्या घर पहुँचते ही अपना बैग सोफे पर फेंक देती है. उसे मनीष के ऊपर बहुत गुस्सा आ रहा था की वो अब हद पार करने लगा है. उसका मूड बहुत ख़राब था की तभी डोर बेल बजती है. दिव्या दरवाजा खोलती है तो सामने रेणुका खड़ी थी.

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रेणुका को देख कर दिव्या के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है.

रेणुका: उम्मीद है मैंने डिस्टर्ब नहीं किया होगा.

दिव्या: अरे तुम तो जब मन हो चली आया करो. तुमसे कैसे डिस्टर्ब हो सकती हूँ.

रेणुका सोफे पर बैठ जाती है और दिव्या से इधर उधर की बातें करने लगती है. थोड़ी देर में उसे लगता है की दिव्या का मन कहीं और है.

रेणुका: क्या हुआ दिव्या. आज मूड क्यों ऑफ है?

दिव्या: नहीं यार कुछ ख़ास नहीं है.

रेणुका: राजेश की याद सता रही है क्या?

दिव्या: उनकी याद तो हमेशा ही आती है.

रेणुका: फिर क्या बात हो गयी.

दिव्या: बस यार कभी कभी स्कूल में थक जाती हूँ और कभी बच्चे भी बहुत परेशान कर देते है.

रेणुका: चलो बच्चे ही परेशान कर रहे हैं. दिक्कत तो तब हो जब बड़े परेशान करने लगे. हाहाहा...
 
दोनों दिव्या के बेडरूम में चले जाते है और दिव्या रेणुका को अपने बेड पर बिठा कर लैपटॉप पर पोर्न चला कर उसको दे देती है

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दिव्या: तुम आराम से देखो जब तक मैं कुछ काम निपटा लेती हूँ.

रेणुका: अरे मैं अकेली यहाँ क्या करूंगी. साथ में बैठो न. काम बाद में कर लेना.

रेणुका दिव्या का हाथ पकड़ कर वहीँ बिठा लेती है. दिव्या भी बैठ जाती है. जैसे जैसे दोनों पोर्न देखती हैं दोनों गरम हो जाती हैं. उनके शरीर में उत्तेजना भड़कने लगती है. ऊपर से रेणुका बार बार दिव्या से पोर्न में हो रही चीजो के बारे में पूछती रहती है जिसका जवाब देने में दिव्या और भी गरम हो जाती है. दिव्या की आवाज में उसकी प्यास झलकने लगती है.

रेणुका: अरे ये इतनी देर तक कैसे कर रहे हैं?

दिव्या: पता नहीं. कुछ दवाई वगेरह ली होगी लेकिन दिखा रहे हैं तो कर ही रहे होंगे.

रेणुका: तुम्हारे पति ने कभी किया है ऐसे.

दिव्या चुप हो जाती है. रेणुका को तो पहले ही पता था की राजेश ज्यादा कुछ नहीं करता.

रेणुका: तुम्हारा मन तो करता होगा ऐसे करने का.

दिव्या: क्यों तुम्हारा नहीं करता क्या.

रेणुका (अपनी चून्चिया मसलते हुए): हाँ करता तो है और जब से तुमने कर्नल के बारे में बोला है तो मन करता है की अपना जिस्म उन्हें सौंप दूं लेकिन कैसे कहूं समझ नहीं आता.

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दिव्या रेणुका को अपने बदन से खेलता देख कर और भी गरमा जाती है लेकिन रेणुका के सामने अपने पर कण्ट्रोल रखती है.
 
दिव्या: अरे कहना क्या है. तुम चाहो तो वो घुटनों पर आ जायेंगे और वो खुद भी तुमको सिग्नल दे रहे हैं.

रेणुका: हां दे तो रहे हैं.

दिव्या: बस उनको थोडा बढ़ावा दे दो.

तभी फिल्म में एक्टर लड़की की टाँगे खोल कर उसकी चूत चूसने लगता है जिससे वो लड़की तड़पने लगती है. और ये नज़ारा देखते ही दिव्या और रेणुका भी तड़प उठते हैं

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रेणुका अपना हाथ अपनी चूत पर लेजाकर रगड़ने लगती है और आन्हे भरने लगती है. मन तो दिव्या का भी था लेकिन वो रेणुका के सामने ये नहीं करना चाहती थी.

दिव्या: तुम तो एकदम पागल हो रेणुका.

रेणुका: मुझसे अब रहा नहीं जाता. कम से कम राजेश कभी कभी तुम्हारी लेता तो है. मुझे तो न जाने कितने साल हो गए हैं अब. मेरी तो हालत ऐसी है की अगर अभी कर्नल होते तो अभी अपने आप को उन्हें सौंप देती.

ये बोल कर रेणुका दिव्या को बांहों में भरने की कोशिश करती है लेकिन दिव्या हँस कर पीछे हो जाती है.

दिव्या: तुम तो सच में पागल हो गयी हो. मुझसे तो दूर ही रहो वैसे मैं तुम्हारी हेल्प कर सकती हूँ अगर तुम मेरा मजाक न बनाओ तो.

रेणुका: कैसे?

दिव्या: है मेरे पास कुछ लेकिन तुम मेरे बारे में गलत सोचोगी.

रेणुका: ऐसा क्या है?

दिव्या अलमारी से वाइब्रेटर निकाल लाती है जो कर्नल ने उसे दिया था.

रेणुका: ये क्या है?

दिव्या बॉक्स से कैप्सूल निकाल कर रेणुका को दिखाती है लेकिन रेणुका अनजान बनने का नाटक करती है. आखिरकार दिव्या को उसे समझाना पड़ता है.

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दिव्या: बस ये समझो की ये तुम्हारे लिए है. इसे तुम अपने अन्दर डाल लो बस फिर ये तुम्हे वैसा ही मजा देगा जैसा तुम चाहती हो.
 
रेणुका: तुम ये क्या क्या हाईफाई चीजे इस्तेमाल करती हो दिव्या.

दिव्या: मैंने तो आजतक यूज़ नहीं किया. ये तो राजेश ने मंगवाया था तो रखा हुआ है. वापस ही करना था लेकिन तुम चाहो तो रख सकती हो.

रेणुका: तो फिर तुम राजेश से क्या कहोगी?

दिव्या: वो मैं संभाल लूंगी.

रेणुका: मुझे तो चलाना भी नहीं आता.

दिव्या: बोला तो इसे बस नीचे डाल कर ऑन कर लो.

ये सुनते ही रेणुका तुरंत अपनी लेगिंग उतार देती है.

रेणुका: करके दिखाओ न एक बार.

दिव्या: क्या क्या करवाओगी यार मुझसे.

दिव्या बेड पर बैठ कर रेणुका की चूत में कैप्सूल डाल देती है और रिमोट से उसे ऑन कर दी है. ऑन होते ही रेणुका तड़प उठती है. रेणुका आन्हे भरने लगती है और कभी अपने मम्मे मसलती है और कभी अपनी जांघे रगडती है.

दिव्या को रेणुका की ये हालत देख कर मजा आने लगता है और ओव कभी स्पीड कम कर देती है और कभी एकदम से बहुत तेज़. अचानक रेणुका दिव्या का हाथ पकड़ कर उसे अपने पास बेड पर गिरा लेती है और खुद उसके ऊपर आ जाती है.

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रेणुका: मुझे तडपा कर बहुत मजे ले रही हो. मैं बताती हूँ.

दिव्या को अंदाजा नहीं था की रेणुका क्या करेगी और रेणुका उसके एक मम्मे को ड्रेस हटा कर नंगा कर देती है. दिव्या अपना मुंह दूसरी तरफ करके अपनी प्यास छुपाने की कोशिश करती है.

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दिव्या को हिलता न देख वो जल्द ही उसके दुसरे मम्मे को भी ड्रेस नीचे करके नंगा कर देती है और अपना हाथ उसके पीछे ले जाकर उसकी ब्रा को एक पल में खोल देती है. ये सब इतनी जल्दी होता है की दिव्या को कुछ समझ नहीं आता.
 
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