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Adultery दिव्या का सफ़र

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दिव्या: निकल जाइये यहाँ से.

कर्नल: आई नो दिव्या की तुमको क्या चाहिए और तुमको वही दिया भी. अब तुम ये नाटक बंद करो और मेरे साथ मजे करो.

दिव्या: मैं कहती हूँ की निकल जाइये यहाँ से.

कर्नल: ठीक है. जाता हूँ. दिल करे तो मेरे फ्लैट में आ जाना. चलो रेणुका दिव्या को थोडा सोचने का टाइम दो.

कर्नल के बुलाने पर रेणुका हँसते हुए अन्दर से निकल आती है.

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दोनों मुस्कुराते हुए वहां से चले जाते है. दिव्या को रेणुका से ये उम्मीद नहीं थी. दिव्या की आँखों में आंसू आ जाते है.

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दिव्या तय कर लेती है की राजेश के वापस आते ही वो उससे ये घर छोड़ कर कहीं और शिफ्ट होने के लिए कहेगी.
 
कर्नल और रेणुका के जाने के बाद रोते रोते दिव्या सोफे पर ही सो जाती है. सुबह उसको उठने में काफी देर हो जाती है तो वो जल्दी जल्दी तैयार होकर स्कूल पहुँचती है. स्कूल पहुँचते ही उसको मदन अपने ऑफिस में बुला लेता है.

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दिव्या: सॉरी सर, आज थोडा लेट हो गयी.

दिव्या को देखकर मदन का लंड खड़ा हो जाता है लेकिन फिर उसको वो थप्पड़ याद आ जाता है और वो अपने पर कण्ट्रोल करके कहता है.

मदन: मैंने तो आपको इसलिए बुलाया था की रश्मि मैडम ने भी पेपर दे दिया है लेकिन मैंने आपसे कहा था की आपके सब्जेक्ट के फाइनल पेपर आपको ही देने होंगे वो अभी तक नहीं आये है. आज तो पेपर्स प्रिंटिंग के लिए भेजने है वरना समय पर नहीं मिलेंगे.

दिव्या: सर वो लगभग रेडी हैं. मैं एक बार और देख कर आधे घंटे में आपको दे देती हूँ.

मदन: गुड. लेकिन मुझे कहीं जाना है तो आप ये स्पेयर चाभी ले लीजिये और पेपर्स मेरे कबर्ट में रख दीजियेगा. मैं शाम को आकर अपनी चाभी से पेपर्स निकाल लूँगा और प्रिंट के लिए भेज दूंगा. आप चाभी संभाल कर रखियेगा और मुझे कल वापस कर दीजियेगा.

दिव्या: ओके सर.

मदन चाभी देकर निकल जाता है और एक घंटे बाद दिव्या अपना फाइनल पेपर लाकर उसकी कबर्ट में रख देती है. अपना पेपर रखते वक़्त वो देखती है की बाकी सब्जेक्ट के फाइनल पेपर्स भी मदन ने वही रखे हैं. दिव्या फ़ौरन ऑफिस अन्दर से बंद करती है और जल्दी जल्दी सारे पेपर्स को अपने फोन से स्कैन कर लेती है.

वो सारे पेपर्स करीने से लगा कर वापस रख देती है और ताला लगा कर वहां से निकल जाती है. वो आज मन ही मन बहुत खुश थी कई दिनों बाद आज उसके साथ कुछ ठीक हुआ था और अब वो ये पेपर्स सलमान को देकर उससे अपना पीछा छुड़ा सकती थी.

दिव्या फ्री होकर लाइब्रेरी में चली जाती है और इंतज़ार करने लगती है की जब सारे लोग निकल जाएँ तो वो ये पेपर्स सलमान को देकर मुक्त हो जाए तभी वहां मनीष पहुँच जाता है. दिव्या उसे अपने पास आता देख कर रोक देती है.

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मनीष: क्या हुआ मैम.

दिव्या: तुमको घर नहीं जाना क्या?

मनीष: मैम कल अचानक चली गयीं आप.

दिव्या: वो नेट डाउन हो गया था.

मनीष: फिर तो पनिशमेंट लेनी होगी.

दिव्या: देखो मनीष हमारे बीच जो है वो सिर्फ वर्चुअल दुनिया में है. रियल में कुछ नहीं है तो जो बात करनी है वहीँ करना.

मनीष: वो सब मैं नहीं जानता मैम. आप बस अपनी ब्रा मुझे दे दीजिये.

दिव्या: व्हाट?

मनीष: हाँ यही आपका पनिशमेंट है.

दिव्या: तुम फौरन चले जाओ वरना आज के बाद मैं कभी तुमसे बात नहीं करूंगी.

मनीष: ठीक है लेकिन प्रॉमिस कीजिये की रात को ऑनलाइन आएँगी वरना कल अपनी पहनी हुई ब्रा मुझे देंगी.

दिव्या: वो देखंगे फ़िलहाल तुम जाओ.
 
सलमान: बस इसीलिए गुस्सा है. अच्छा बताइए की क्या आपको हमसे शादी करनी है क्या? अगर करनी है तो बोलिए हम आज ही अपनी बीवी को छोड़ देंगे.

दिव्या: छी...

सलमान: इसमें छी वाली क्या बात है. अरे जब आपको शादी नहीं करनी हमसे तो हमारी बीवी जिन्दा हो न हो आपको क्या फर्क पड़ता है. आप तो बस मजे लो.

इतना कह कर सलमान दिव्या के पास चला जाता है. दिव्या उसे अपने करीब आता देख दूसरी तरफ़ घूम जाती है पर सलमान अपने कदम नहीं रोकता और दिव्या को पीछे से जकड लेता है.

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सलमान: प्लीज मैडम थोड़ी देर तो रुको न. फिर तो आप मेरी तरफ से फ्री ही हो.

दिव्या: नहीं सलमान अब ये सब नहीं.

सलमान: क्या नहीं मैडम?

इतना बोल कर सलमान अपना खड़ा लंड दिव्या की गांड में धंसा देता है. दिव्या आगे होना चाहती है लेकिन सलमान उसके मम्मो को पकड़ कर उसे अपने से सटा लेता है.

दिव्या: मैंने तुम्हारी शर्त पूरी कर दी है सलमान. अब तुम ये सब नहीं कर सकते.

सलमान: मैं फिर आपको कभी परेशान नहीं करूंगा मैडम लेकिन आज आखिरी बार तो आपको कोरा नहीं जाने दूंगा.

दिव्या: उफ्फ्फ क्या चाहते हो आखिर?

सलमान: बस थोड़ी देर चैन से आपके साथ सोना चाहता हूँ. इसमें तो कुछ बुरा भी नहीं है.

दिव्या: लेकिन मुझे घर जाना है.

सलमान: अरे मैडम घर में कौन सा आपका पति आपका इंतज़ार कर रहा है. कुछ देर मेरे साथ लेट लीजिये फिर चली जाना.

दिव्या को अपनी जगह से हिलता न देख कर सलमान उसकी साड़ी का पल्लू खींच देता है.

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दिव्या: अरे अरे ये क्या कर रहे हो. छोड़ो.

सलमान: अब आप मान ही नहीं रही मेरे साथ थोड़ी देर लेटने के लिए तो मैं फिर अपने दिल की करता हूँ.
 
दुसरे ही पल दिव्या की साड़ी उसके बदन से अलग होने लगती है. दिव्या चुपचाप जाकर बेड पर बैठ जाती है और सलमान से अपनी साड़ी मांगती है. सलमान उसके पास आता है और उसके ब्लाउज से झांकते क्लीवेज को देखने लगता है. दिव्या अपने हाथ से अपने मम्मे ढक लेती है और फिर से साड़ी वापस मांगती है. सलमान उसकी साड़ी को नीचे फेंक देता है और उसके हाथों को उसके मम्मो से हटा देता है.

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सलमान: ऐसे क्या शर्मा रही हो मैडम जैसे मैंने आपको कभी नंगा नहीं देखा है. न जाने कितनी बार इसी कमरे में मुझसे चुदी हो और फिर भी नखरे कर रही हो.

दिव्या: मैं तुम्हारी बात मान तो रही हूँ. लेट तो रही हूँ तुम्हारे साथ फिर भी तुम...

सलमान दिव्या को पकड़ कर बेड पर लेट जाता है और उसे अपने से चिपका लेता है. सलमान का खड़ा लंड दिव्या को चुभने लगता है और सलमान उसे दिव्या की जांघो से रगड़ने लगता है. दिव्या की चूत गीली हुए बिना नहीं रह पाती.

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सलमान धीरे धीरे अपने लंड की मूवमेंट और बढ़ा देता है तो दिव्या की सांसे तेज़ होने लगती हैं. फिर वो अपना हाथ दिव्या के पेट पर रख कर उसे अपनी तरफ पलट लेता है.

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दिव्या थोडा विरोध करती है पर सलमान अपने हाथ दिव्या के मम्मों पर लेजाकर उन्हें अपने हाथ में भर लेता है और उसके कानों में फुसफुसाता है.

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सलमान: अफ़सोस की इस गदराये बदन को आज के बाद मैं भोग नहीं पाउँगा लेकिन आप भी मेरे लंड के लिए तरसोगी मैडम.

ये बोल कर सलमान दिव्या के निप्पल मसलने लगता है. दिव्या अपने ताने हुए निप्पलों को सलमान से बचाने के लिए पेट के बल लेट जाती है तो सलमान उसकी पीठ और कमर पर चुम्बनों की बौछार कर देता है और फिर उसके ऊपर लेट कर अपना लंड उसकी गांड में रगड़ने लगता है.

सलमान: क्यों तरस रही हो मेरी जान. अब मान भी जाओ. फिर कभी तो मिलोगी नहीं मुझे लेकिन आज तो प्यास बुझा लेने दो न.

सलमान फिर दिव्या को अपनी तरफ घुमाने की कोशिश करता है और इस बार दिव्या बिना किसी विरोध के घूम जाती है. दिव्या के घूमते ही सलमान उसके होठो पर झपट पड़ता है.

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सलमान दिव्या के मुंह के कोने कोने में अपनी जीभ ले जाकर उसके मुंह को चूसता है और अपने लंड को उसकी चूत के ऊपर रगड़ता रहता है. दिव्या भी रह पाती और उअप्नी चूत उठा कर सलमान के लंड से रगड़ने लगती है. सलमान धीरे धीरे दिव्या के बदन को चूमते हुए नीचे की तरफ बढ़ता है.

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और अपना हाथ दिव्या के पेटीकोट में डाल कर उसकी पेंटी नीचे खींच देता है. फिर वो दिव्या के मम्मों को ब्लाउज से आजाद कर ऊपर की तरफ निकाल देता है और उसकी टांगो के बीच जगह बना लेता है.
 
दिव्या समझ जाती है की अब सलमान उसकी चूत चाटेगा और सलमान भी जानता है की चूत चाटते ही दिव्या एकदम मदहोश हो जाती है. सलमान दिव्या के पेटीकोट में मुंह जाता है और उसकी गर्म साँसे दिव्या की चूत पर पड़ने लगती हैं. दिव्या ने मन बना लिया था की आज वो आखिरी बार ही तो कर रही है और वैसे भी सलमान उसको बिना चोदे तो छोड़ेगा नहीं तो वो भी एन्जॉय करे.

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आखिरकार सलमान अपना मुंह दिव्या की चूत पर लगा ही देता है. दिव्या भी आह भर कर अपनी कमर उठा देती है. दिव्या अपने हाथो को सलमान के कंधो पर रख कर रख देती है. कुछ ही देर में दिव्या मस्त हो जाती है और जोर से सिसकिया लेने लगती है.

अब सलमान उसकी चूत चाटना छोड़ कर बेड पर खड़ा हो जाता है और दिव्या के बाकी कपडे खोलने लगता है. कुछ ही पलों में दिव्या पूरी नंगी हो जाती है. सलमान अब दिव्या के टांगो के बीच में अपनी जगह बना कर उसके मम्मों को चाटना शुरू करता है.

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सलमान का लंड अब दिव्या की जांघो से रगड़ रहा था जो दिव्या की लंड लेने की तड़प को और बढ़ा रहा था. दिव्या भी चाहती थी की अब सलमान उसकी चूत में लंड पेल दे लेकिन वो खुद तो ये बात सलमान से कह नहीं सकती थी. सलमान भी दिव्या को तरसाने में लगा था. दिव्या की मादक आवाजों से कमरा गूँज रहा था की तभी दरवाजा खुलने की आवाज आती है.

दिव्या: सलमान किसी ने दरवाजा खोला है अभी. कोई अन्दर आ रहा है.

सलमान: अरे वो मेरे काका होंगे. २-३ दिन पहले गाँव से आये है. किसी से मिलने गए थे अब लौटें होंगे.

दिव्या: हटो मेरे ऊपर से वरना वो मुझे ऐसे देख लेंगे.

तभी काका अन्दर आ जाते हैं. दिव्या अपने हाथ से अपना मुंह छुपा लेती है.

काका: अरे आज फिर किस रांड को ले आया. तू सुधरेगा नहीं.

सलमान: अरे काका यही तो उम्र है मेरी ये सब करने की वरना बुढ़ापे में आपकी तरह हो जाऊंगा.

काका: अबे अब भी मैं अगर अपनी पर आ जाऊ तो अच्छी खेली खाई औरतें भी पनाह मांगती है लेकिन मैं तेरी तरह रंडीबाज नहीं हूँ. बीवी को गाँव में छोड़ रखा है और यहाँ रोज रंडिया ला रहा है.

सलमान: अच्छा अब तुम जरा बाहर जाओ. ये तुमसे शर्मा रही है.

काका: हैं रंडिया कब से शर्माने लगी.

सलमान: अरे ये कोई रंडी नहीं है.

काका: अच्छा! तो फिर किसे लाया है. पूरे कमरे में इसके कपडे बिखेर रखे हैं.

सलमान: क्या करना आपको जान कर. बस आधे घंटे के लिए बाहर जाओ न.

काका: अगर कोई अच्छे घर की औरत हुई तो मैं भी कुछ कर लूँगा. बता न कौन है?

सलमान: ये मैं नहीं बोल सकता की ये कौन है बस रंडी नहीं है.

काका: इसकी पेंटी की खुशबु से तो मेरे लंड में हलचल मच गयी है. एक बार चेहरा दिखा न इसका.

इतना कह कर काका बेड के पास आने लगता है.
 
दिव्या (धीरे से): सलमान रोको न उसे.

सलमान: अरे वही रुको काका. मैडम नहीं चाहती की तुम उनका चेहरा देखो. तुम एक काम करो. लाइट बंद करके इनको छू कर देख सकते हो.

दिव्या ये सुन कर सलमान को जोर से नोचती है और उसे ऐसा न करने का इशारा करती है लेकिन तब तक काका लाइट बंद करके बेड के पास आ जाता है.

काका: अरे तू खुद इसके ऊपर लदा है तो मैंने कैसे छू कर देखूं इसे. जरा हट न.

सलमान को दिव्या को इस तरह फंसा कर मजा आने लगता है. वो फट से दिव्या के ऊपर से हट जाता है. दिव्या उठने लगती है लेकिन तब तक काका उसको पकड़ कर उसके ऊपर लेट जाता है. लाइट बंद होने के बाद भी कमरे में इतनी रौशनी थी की वो एक दुसरे को देख सकते थे और दिव्या का गोरा बदन तो जैसे अलग ही चमक रहा था. काका के अपने ऊपर आते ही दिव्या काँप उठती है लेकिन वो कुछ कर नहीं पाती और काका उसके एक मम्मे को अपने मुंह में भर लेता है.

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काका: शादीशुदा लगती है तू तो.

दिव्या कुछ नहीं कहती तो काका उसके निप्पल को जोर से काट लेता है जिससे वो चिल्ला उठती है.

काका: कुछ पूँछ रहा हूँ न. फ़ौरन जवाब दिया कर.

दिव्या: हाँ शादीशुदा हूँ.

काका: मम्मे छू कर ही पता चल गया था . तो तेरे खसम का लंड पूरा नहीं पड़ता तुझे जो मेरे भतीजे को फंसा रखा है तूने.

काका के सवाल से दिव्या शर्मसार हो जाती है. दिव्या को कुछ न कहता देख काका वापस उसका निप्पल भींचने लगता है तो दिव्या फ़ौरन बोल पड़ती है.

दिव्या: ऐसा कुछ नहीं है.

काका: फिर यहाँ क्यों चुदने आई है.

दिव्या: मैं किसी और काम से आई थी तो सलमान ने जबरदस्ती मुझे पकड़ लिया.

काका: साली अपनी जवानी में तेरी जैसी कई शरीफ लौंडियाँ चोदी हैं. मुझे पढ़ा रही है. चल जरा होठ चूसने दे.

काका दिव्या के होठो को चूमने की कोशिश करता है लेकिन उसके मुंह से बीड़ी की तेज़ बदबू आ रही थी. एक तो वो एकदम काला कलूटा था और ऊपर से वो पूरा पसीने में भीगा हुआ था. दिव्या अपना मुंह नहीं खोलती. उसको सलमान पर काफी गुस्सा आ रहा था लेकिन सलमान पास बैठ कर इस सबका मजा ले रहा था.

दिव्या के मुंह न खोलने पर काका उसके कान में फुसफुसाता है.

काका: मुंह खोल दे रांड वरना लाइट खोल दूंगा. फिर देखना क्या क्या करूंगा तेरे साथ.
 
दिव्या घबरा कर अपना मुंह खोल देती है. उसका मुंह खुलते ही काका उसके मुंह में थूंक देता है.

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दिव्या को बहुत घिन आती है लेकिन काका अपने मुंह से उसका मुंह बंद कर देता है तो दिव्या को उसका थूंक निगलना पड़ता है.

फिर काका दिव्या के मुंह में अपनी जीभ डाल देता है और उसके होंठ चूसने लगता है.

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दिव्या को अपनी टांग के बीच काका का मुरझाया लंड तनता हुआ महसूस होता है. काका भी अपना आधा खड़ा लंड दिव्या की चूत पर रगड़ने लगता है. दिव्या को महसूस होता है की इस बुढ्ढे का लंड तो शायद सलमान से भी बड़ा और मोटा है.

काका: बहुत गरम माल है तू. तुझे तो चोदे बिना छोड़ना गुनाह है. पर पहले जरा तेरी चूत तो चख लूं की नमकीन है या खट्टी है.

काका की बातें सुन कर सलमान भी अपना लंड हिलाने लगता है. उसे दिव्या को इस सिचुएशन में देख कर काफी मजा आ रहा था. काका दिव्या की चूत पर टूट पड़ता है और चटखारे ले लेकर उसे चाटने लगता है.

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दिव्या के पास तो कोई आप्शन नहीं था तो वो चुपचाप पड़ी रहती है. उसको काका से इतनी घिन आ रही थी की उसको चूत चटवाने में भी कोई मजा नहीं आया.

काका: चल अब चुदने को तैयार हो जा.

दिव्या काका के मुंह से सुन कर बेड से हटने की सोचती है लेकिन काका उसकी कमर पकड़ कर उसे रोक लेता है.

काका: कहाँ चल दी रांड. अब तुझे ऐसे नहीं छोड़ सकता.

दिव्या: सलमान प्लीज.

काका: अरे पहले मेरा तो ले ले फिर उसका भी लेना या दोनों एक साथ लेगी साली.

काका पीछे से ही अपना लंड दिव्या की चूत में डाल देता है. दिव्या की गीली चूत होने के बाद भी लंड बहुत रगड़ता हुआ अन्दर जाता है.

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काका: अभी भोसड़ा नहीं बना है. लगता है बच्चा नहीं हुआ तेरा अभी.

दिव्या: नहीं.

काका: तभी इतना कसा जा रहा है.

काका लगातार दिव्या की चूत में धक्के लगाने लगता है. कुछ ही पलों में दिव्या के बड़े बड़े मम्मे बिस्तर से रगड़ने लगते है.

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काका के धक्के तेज़ होते जा रहे थे और दिव्या झड़ने लगती है. काका का लंड भी ज्यादा देर दिव्या की गर्म चूत के आगे टिक नहीं पाता और दिव्या के झड़ते ही वो भी झड जाता है. काका दिव्या की चूत से अपना लंड निकाल कर उसे बिस्तर पर धकेल देता है और अपने कपडे पहनने लगता है. कपडे पहनते हुए वो सलमान से कहता है.

काका: बहुत मस्त चीज है ये. अगर तू बोले तो इसको कम्मो बाई के कोठे पर बिठा दूं. एक रात के लाख रुपये तो आराम से कमा लेगी. ऐश हो जाएगी तुम दोनों की.

सलमान: नहीं नहीं काका. ये तो शरीफ औरत है और आज आखिरी बार यहाँ आई है.

काका: अच्छा तो तू भी ले ले इसकी जब तक मैं रात के लिए दारू लेकर आता हूँ. आज तो बिना पिए नींद नहीं आयेगी.

ये बोल कर काका वहां से निकल जाता है. काका के जाने के बाद दिव्या फूट फूट कर रोने लगती है और अपने कपडे पहनने लगती है.

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सलमान तब तक उसके पास अपना खड़ा लंड लेकर पहुँच जाता है पर दिव्या उसको धक्का दे देती है.

सलमान: अरे मैडम इतनी नाराज़ क्यों हो रही हो.

दिव्या: हरामजादे तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे साथ ऐसा करने की.
 
सलमान: अरे मैडम आप ही बोलो की अगर मैं काका को मना करता तो वो क्या मान जाता. और अगर वो गाँव में मेरी बीवी को बोल देता तो. मैंने सोचा की आपको एक नया लंड लेकर मजा ही आयेगा और फिर मैंने काका को आपकी शकल नहीं देखने दी.

दिव्या: कमीने सबको अपनी तरह समझ रखा है क्या और जब मुझे उसकी शकल दिख रही थी तो उसको मेरी शकल नहीं दिखी होगी.

सलमान: अरे मैडम वो तो दो तीन दिन में गाँव चला जायेगा. जिंदगी में आपको दुबारा नहीं मिलेगा तो आपको उससे कोई खतरा नहीं है लेकिन प्लीज मुझे प्यासा छोड़ कर मत जाओ.

दिव्या: अब अगर कभी मुझे हाथ भी लगाया तो देखना मैं क्या करूंगी.

दिव्या सलमान की एक नहीं सुनती और कपडे पहन कर बाहर निकलने लगती है तो वो देखती है की बाहर काका खड़ा है.

दरअसल अँधेरे में काका को ये तो लगा की दिव्या बहुत खूबसूरत है लेकिन काका रौशनी में दिव्या का चेहरा देखना चाहता था ताकि उसे पहचान सके इसीलिए बाहर रुका हुआ था. वो जानता था की दिव्या थोड़ी देर में सलमान से चुद कर बाहर आएगी ही. वो दिव्या का घर तक पीछा भी करना चाहता था ताकि जब कभी दुबारा शहर आये तो उसे फिर से चोद सके. दिव्या काका को खड़ा देखकर वापस अंदर आ जाती है.

सलमान: मैं जानता था मैडम मुझसे चाहे जितना नाराज़ हों लेकिन चुदे बिना नहीं जाएँगी.

दिव्या: बकवास न करो. वो बुढ्ढा बाहर खड़ा है. उसे भगाओ.

सलमान: क्यों इसमें मेरा क्या फायदा? और फिर आप तो बोल रहीं थी की उसने आपको देख ही लिया है.

दिव्या: बहस मत करो बस मैं जो बोल रही हूँ वो करो.

सलमान: तो आप भी वो करो जो मैं कह रहा हूँ.

दिव्या: देखो मैं अब कपडे नहीं उतारने वाली और मैंने तुम्हारी शर्त भी पूरी कर दी है. तुम्हारी जबान की कोई कीमत है या नहीं.

सलमान: ठीक है मत उतारिये कपडे बस चूस कर इसे शांत कर दीजिये और विश्वास रखिये अब आज के बाद मैं खुद से आपको कभी परेशान नहीं करूंगा.

सलमान दिव्या के कंधे पर हाथ रख कर उसे नीचे बिठा देता है. दिव्या सलमान का लंड मुंह में ले लेती है और सलमान अपना पूरा लंड उसके मुंह में डाल देता है, दिव्या को तकलीफ तो होती है लेकिन वो पूरा लंड गले तक ले लेती है.

सलमान: क्या बात है मैडम. मेरा पूरा लंड मुंह में तो रंडिया भी नहीं ले पाती. कहाँ प्रैक्टिस कर रही हो आजकल?

दिव्या कोई जवाब नहीं देती. वो बस चुपचाप सलमान का लंड चूसती रहती है. वो जल्द से जल्द इस मुसीबत से निकलना चाहती थी. वो जोर जोर से सलमान का लंड चूसने लगती है और सलमान उसके मुंह में ही झड जाता है.

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झड़ने के बाद सलमान दिव्या की ओर देख कर मुस्कुराता है और दिव्या उसको शिकायत भरी नजरो से देखती है की माल मुंह में क्यों छोड़ा.

दिव्या अपने कपडे ठीक करती है और सलमान भी कपडे पहन लेता है और काका को अन्दर बुलाता है. दिव्या दरवाजे के पीछे छुप जाती है. जब काका अन्दर आ जाता है तो वो मुंह छुपा कर तेज़ी से बाहर निकल कर लगभग दौड़ते हुए स्कूल की पार्किंग में जाती है और अपनी स्कूटी लेकर स्कूल से निकल जाती है.

स्कूल से घर जाते हुए दिव्या को अपने साथ हो रही घटनाओ पर यकीन नहीं होता है. शादी से पहले उसने कभी किसी का भी लंड तक नहीं देखा था और शादी के इतने साल तक भी उसने सिर्फ राजेश का ही लंड देखा था लेकिन पिछले कुछ दिनों में ही उसने सलमान, मनीष, कर्नल के साथ राजेश को धोखा दिया और आज तो एक बुढ्ढे के साथ भी और ये सब सलमान की वजह से शुरू हुआ है. वो उसी की वजह से तरह तरह की मुसीबत में फंस जाती है. आज उसे ख़ुशी है की उसने एग्जाम पेपर्स देकर सलमान से पीछा छुड़ा लिया है.
 
दिव्या: मैं तो कहती हूँ की हम ये घर छोड़ कर कहीं और ही शिफ्ट हो जाते है.

राजेश: क्या कह रही हो यार? ये कोई किराये का घर नहीं है. इतने घर देखे थे तब तुमने ये पसंद किया था और हमारे बजट में भी आ गया था.

दिव्या: तब क्या पता था की ऐसा पड़ोसी मिलेगा. बस अब मेरा यहाँ रहने का मन ही नहीं करता.

राजेश: यार ख़राब पड़ोसी तो दूसरी जगह भी हो सकते हैं फिर क्या करेंगे. अभी लोन भी है इस घर पर तो आसानी से बिकेगा भी नहीं. थोडा प्रैक्टिकल होकर सोचो. जब मैं यहाँ ज्यादा दिन रहा करूंगा तब तुमको कोई दिक्कत नहीं होगी मेरी जान.

दिव्या: न जाने वो दिन कब आयेगा जब तुम यहाँ रहोगे. तुमने तो इसको होटल समझ रखा है. बस कुछ भी करो और यहाँ से शिफ्ट करो.

राजेश: तुम्हारा तो दिमाग ख़राब हो गया है.

राजेश भी गुस्सा होकर बाहर निकलता है तो देखता है की कर्नल नहीं है. वो वापस दिव्या के पास आकर उसके ऊपर चिल्ला पड़ता है.

राजेश: मैंने कहा था न की धीरे बोलो. तुम्हारी बातें सुन कर वो चले गए है.

दिव्या: अच्छा हुआ की सुन लिया. मैं भी यही चाहती थी वो सुन लें और आइन्दा से तुमको पीने के लिए न कहें. हुह इनके यहाँ तो हराम होती है फिर भी रोज पीने बैठ जाते हैं.

राजेश दिव्या से और कुछ नहीं बोलता और कर्नल से माफ़ी मांगने उसके फ्लैट पर चला जाता है. दरवाजा रेणुका खोलती है. दोनों एक दुसरे को देख कर मुस्कुराते हैं.

राजेश: कर्नल साहब कहाँ है.

रेणुका: अभी अभी कहीं से आये है और अपने कमरे में चले गए है.

राजेश कर्नल के बेडरूम में ही चला जाता है. कर्नल अन्दर बैठ कर अभी भी पी रहा था.

लाला: अरे राजेश आओ आओ.

राजेश: आप अचानक क्यों चले आये.

लाला: मैं नहीं चाहता की मेरी वजह से मियां बीवी में अनबन हो. वैसे भी मैं अच्छा आदमी नहीं हूँ.

राजेश: क्या कर्नल साहब आप अब ऐसी बातें करेंगे क्या. दिव्या तो किसी और वजह से नाराज थी.

लाला: तो तुमको उसको मनाना चाहिए. वैसे वो तुम्हारे पीने के इतने खिलाफ क्यों है. कहीं ऐसा तो नहीं की पीने के बाद तुम उसको भूखा छोड़ देते हो.

राजेश: आप भी न अंकल. थोड़ी देर में वो खुद शांत हो जाएगी. वो किसी से ज्यादा देर नाराज नहीं रह पाती.

इतने में रेणुका ग्लास में सोडा और व्हिस्की डाल कर लाती है और टेबल पर रखने लगती है. ऐसा करते वक़्त वो राजेश को अपने मम्मों के अच्छे से दर्शन करवा देती है.

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लाला: रहने दो रेणुका. राजेश साहब नहीं पियेंगे. अगर अब इन्होने मेरे साथ पी तो दिव्या न जाने इनके साथ क्या करेगी.

कर्नल की बात सीधे राजेश के ईगो पर लगती है. आखिर रेणुका भी वहीँ थी. वो झट से गिलास उठा लेता है. रेणुका मुस्कुरा कर चली जाती है. राजेश पीते हुए रेणुका का पिछवाडा निहारता रहता है.
 
लाला: इसके लिए. तुम पांच मिनट बाद वहां आ जाना.

ये बोला कर कर्नल दुसरे कमरे में चला जाता है. राजेश को कुछ समझ नहीं आता लेकिन वो पांच मिनट बाद दुसरे कमरे में चला जाता है. रूम का दरवाजा खुला हुआ है. अन्दर का नजारा देख कर राजेश चौंक जाता है. रेणुका बिस्तर में सिर्फ ब्रा में लेटी हुई थी और उसकी आँखों पर पट्टी बंधी हुई थी. कर्नल राजेश की तरफ देखते हुए रेणुका की टांग उठा कर उसकी चूत की तरफ बढ़ जाता है.

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रेणुका अपनी चूत उठा कर कर्नल के मुँह की और लाने की कोशिश करती है पर कर्नल पीछे हट जाता है और उसकी ब्रा भी खींच लेता है। रेणुका को इस तरह पूरा नंगा देख राजेश से रहा नहीं जाता और वह पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को बार-बार मसलने लगता है। उसे यकीन नहीं होता कि कैसे कर्नल इतना बेशर्म हो सकता है।

साथ ही रश्मि को अपनी चूत चाटने के लिए तड़पता देख उसके हार्मोन्स भी जोर मारने लगते हैं।

थोड़ी देर रेणुका को तरसाने के बाद कर्नल उसकी चूत को चाटना शुरू कर देता है। रेणुका भी अपनी टांग उठा कर कर्नल को जकड़ लेती है।

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अचानक कर्नल रेणुका को छोड़ के खड़ा हो जाता है और उसे इंतज़ार करने को कहता है। राजेश अब भी वही देखे जा रहा था। उसे भी समझ नहीं आया कि कर्नल अचानक रुक क्यों गया। कर्नल धीरे-धीरे राजेश की ओर बढ़ता है।

लाला: अपनी हालत तो देखो राजेश। लगता है मुझसे ज्यादा तुम्हें मजा आ रहा है।

राजेश भी नशे में चूर था। वो कर्नल से कुछ छुपाने के मूंड में नहीं था।

राजेश: मुझे यकीन नहीं होता सर कि आप इस तरह कैसे चाट सकते हो। आपको बुरा नहीं लगता।

लाला: किसी भी औरत के अन्दर छुपी रांड को बाहर निकालने का ये सबसे आसान तरीका है. मुझे लगता है की तुमको भी ये अपनी बीवी पर ट्राई करना चाहिए फिर देखना कैसे मस्त होकर तुम्हारा लंड चूसेगी दिव्या.

राजेश: मुझे नहीं लगता मैं ये सब कर पाऊंगा।

लाला: चाहो तो अभी ट्राई कर के देख लो।

राजेश: अभी कैसे?

कर्नल रेणुका की तरफ इशारा करता है।

राजेश को यकीन नहीं आता पर मन में उसके भी आ जाता है। वो बस ऊपरी मन से मना करता है।

लाला: सोच क्या रहे हो, ये बात सिर्फ तुम्हारे और मेरे बीच ही रहेगी और वैसे भी रेणुका की आँखें तो बंद हैं। कुछ बोलना मत बस।

कर्नल के कहने के बाद राजेश डरते हुए रेणुका की और बढ़ जाता है और उसकी चूत के पास अपना मुंह ले जाता है। राजेश रेणुका के इतना नजदीक था कि रेणुका भी अपनी चूत को थोड़ा उठा कर उसके मुंह से मिलाने की कोशिश करती है। राजेश को रेणुका की चूत की स्मेल आने से वो हिचकिचाता है और कर्नल को और देखता है जो अपना लंड अब पैंट से बाहर निकाल कर हिलाने लगा था। कर्नल उसे फिर से इशारा करता है चाटने के लिए। इस बार राजेश हिम्मत कर के रेणुका की चूत पर मुंह लगा ही देता है।

रेणुका भी सिसकियाँ लेने लगती है और अपने हाथों से अपनी जांघ को सहलाते हुए राजेश को अपनी चूत चाटने लगती है। कुछ ही देर में राजेश को चूत चाटना इतना भी बुरा नहीं लगता और वह अपनी जीभ को रेणुका की चूत के बीच में डाल कर चूसने लगता है।

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कुछ ही देर में रेणुका की आहें गूंजने लगती हैं।
 
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