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Adultery बुरी फसी नौकरानी लक्ष्मी

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सन्नी

पिछले दो महीने कुछ अलग थे। विरह की आने वाली चोट और साथ में खामोशी की चुभती जलन हम सब को तकलीफ दे रही थी। लक्ष्मी आंटी को अपने लिए वक़्त मिलना मुश्किल हो गया था।

लक्ष्मी आंटी को अब दोपहर को ही पूरी पढ़ाई करनी पड़ती थी क्यूंकि कॉलेज से वापस आते ही हम दोनों उस पर टूट पड़ते। कोई एक पढ़ाई करता तो दूसरा लक्ष्मी आंटी को चोदने में लगा रहता। लक्ष्मी आंटी ने तो चुदाते हुए ही खाना पकाना और बरतन मांजना शुरू कर दिया था। रात को सोते समय हम दोनों बड़े प्यार से उसे फिर से चोदते और उसे अपने बाहों में लेकर सोते।

लक्ष्मी आंटी समझ गई थी कि हम दोनों कोई राझ रख कर हैं पर उसने पूछा नहीं। कॉलेज में जाते हुए प्रतीक का कॉल आया और हम समझ गए कि अब वह दिन आ गया है। शाम को हमने लक्ष्मी आंटी को कहा कि वह कल फिर से दुल्हन का श्रृंगार कर अपने प्रेमी का इंतजार करे जैसे उसने पहले दिन किया था। लक्ष्मी आंटी हमारे सुझाव से चौंक गई और खुश भी हुई। उस रात मैं और विक्की लक्ष्मी आंटी को चोद नहीं पाए। हम दोनों बस लक्ष्मी आंटी के साथ बातें करते रहे और रात को उसे अपनी बाहों में भर कर सो गए।

अगली शाम को हम ने घर का दरवाजा खोला तो हॉल खाली था और लक्ष्मी आंटी ने आवाज दी की हम नहा कर अंदर आएं। मैं और विक्की अंदर गए और लक्ष्मी आंटी को बेड पर दुल्हन की तरह बैठे पाया।

"लक्ष्मी आंटी, तुम तो बहुत सुंदर लग रही हो! पर आज बन्द आंखों से तुम्हे अपने पती को पहचानना होगा।"

विक्की ने लक्ष्मी आंटी की आंखों पर पट्टी बांध दी और हम दोनों बाहर आ गए। कुछ ही देर में लक्ष्मी आंटी के पति ने नहा कर तयारी कर ली और लक्ष्मी आंटी को प्यार करने अंदर पहुंचा।

लक्ष्मी आंटी के बगल में बैठ कर उसने लक्ष्मी आंटी के माथे पर लगे सिंदूर को चूमा।

लक्ष्मी आंटी, "बाबू संभाल कर! सिंदूर को मत चेडना!!"

जैसे ही लक्ष्मी आंटी के होंठों से होंठ टकराए, लक्ष्मी आंटी के होंठ खुल गए और तुरंत बन्द हो गए। लक्ष्मी आंटी ने अपने पति को धक्का दे कर दूर करते हुए कहा, "क… कौन…? कौन ? कौन है? सन्नी बाबू! विक्की बाबू! ये मजाक ठीक नहीं!! छोड़ो ! छोड़ो मुझे!! सन्नी बाबू!! विक्की बाबू!! बचाओ!!.…"

छटपटाहट में लक्ष्मी आंटी की आंखों से पट्टी उतर आई और वह अचानक रुक गई।

लक्ष्मी आंटी, "जी? आप?"

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विक्की

लक्ष्मी आंटी की आहों से bedroom पूरी शाम गूंजती रही और हम दोनों बाहर बैठ कर खामोशी से लक्ष्मी आंटी की खुशी में अपनी खुशी मानते रहे। तीन घंटों के घमासान द्वंद्व के बाद लक्ष्मी आंटी बेड पर निढाल होकर पड़ी रही और प्रतीक लड़खड़ाते कदमों से बाहर आ गया।

प्रतीक की हालत देख मुझे फार्महाउस पर बिताई पहली रात याद आई। शर्माती हुई जीत की मुस्कान प्रतीक के चेहरे पर लाली बन कर फैली हुई थी। प्रतीक को चिढाना वैसे तो आम बात होती पर लक्ष्मी आंटी के साथ हम दोनों ने बनाए संबंध को याद कर हम चुप रहे।

"एक भुख मिट गई हो तो दूसरी का हल ढूंढे?"

प्रतीक ने कहा कि उन्हें भी भुख लगी है तो मैंने फोन कर पिज़्ज़ा मंगवाया। हम सब हॉल में बैठ कर इधर उधर की बातें करते हुए पिज़्ज़ा का इंतजार कर रहे थे कि लक्ष्मी आंटी ने दीवार को पकड़ते हुए हॉल में कदम रखा। हम सब को बाहर देख लक्ष्मी आंटी शर्म से पानी हो गई तो प्रतीक ने उसे अपनी बाहों में लेते हुए हम सब के साथ बिठाया।

लक्ष्मी आंटी के चेहरे पर लाली छाई हुई थी और वह आंखों के किनारे से हम सब को देख रही थी। लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाने से हम बाज नहीं आए।

"अरे लक्ष्मी आंटी, क्या हुआ? अभी इतना थक गई? प्रतीक जी तो आप के लिए ही छुट्टी पर आए हैं!"

सन्नी, "लक्ष्मी आंटी तुम्हारे पास मेकअप का सामान है ना? लगता है कल सुबह गरदन, गाल और कान पर नहीं लगाया तो पूरा कॉलेज जान जाएगा कि जी छुट्टी पर आए हैं।"

लक्ष्मी आंटी शर्माती हुई प्रतीक के बाहों में मुंह छुपा कर हंसने लगी और प्रतीक किसी मोर की तरह खिल उठा।

पिज्जा आया तो हम सब खाने लगे और मुख्य बात बाहर लक्ष्मी आंटी ने लाई।

लक्ष्मी आंटी, "बाबू आप दोनों ने जी के आने की बात छुपाई सो ठीक। पर क्या बाकी हिस्सों में जो हुआ है वह आप दोनों को पता नहीं था?"

"लक्ष्मी आंटी अंदर से आती आहें हम दोनों को कब से उलझाए हुए हैं। तुम ही बताओ कि ये माजरा क्या है?"

प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी की उंगलियों को अपने होठों से छू कर अपनी कहानी बताने लगा।

प्रतीक, "जब मैं खाड़ी के पार पहुंचा तो मैं कई मजदूरों की भीड़ में से एक हो गया। लेकिन मेरे मन में ये आग जलती रही की इतने सालों तक लक्ष्मी को परेशान करने के बाद अब मुझे अपने आप को लक्ष्मी की नजरों में साबित करना है।

बदन की मेहनत करने वालों की वहां कोई कमी नहीं, इसलिए मैंने अकल से काम करना शुरू किया। पहले कुछ समय तक तकलीफ हुई पर अकेले काम करना मेरे लिए नया नहीं था और मैं अपना हुनर आजमाता रहा। इसी तरह एक दिन मुझे एक बड़े होटल का काम करते हुए Amber ने देखा। मेरी कारीगरी से खुश होकर उसने मुझे अपनी खास team में ले लिया। मुझे बाद में पता चला कि Amber कोई interior designer या architect नहीं बल्कि MBS की तीसरी बीवी है। उसके साथ काम करते हुए मैंने कई नामी हस्तियों से मुलाकात की और उन्हीं में से एक है Dr. Balakrishna जो पुरुष रोग के बड़े जानकार हैं।

दर असल बात ये है कि वहां के अमीरों में दिखावे की होड़ लगी रहती है। बड़ी गाडियां, बड़े जहाज, हवाई जहाज, ज्यादा और खूबसूरत बीवियां और ऐसे ही। लेकिन अब जब सब के पास यह सब है तो और किस बात का दिखावा हो? मर्दानगी का! Dr. Balakrishna ने मुझे check up के बाद बताया कि मेरी खड़ा करने की नस कट गई है पर संवेदना बाकी है। Dr Balkrishna ने मेरे लौड़े में कुछ ऐसा कर दिया है कि अब मेरा लौड़ा कभी नरम नहीं हो सकता।"

लक्ष्मी आंटी के मुंह से "हे भगवान!!" निकल आया और हम सब हंस पड़े।

सन्नी, "ये तो बहुत अच्छा हुआ। अब आप दोनों को अपनी जिंदगी जीने में कोई रुकावट नहीं रही। मुबारक हो।"

मुझे लगा था कि हम दोनों का आशीर्वाद मिलने से प्रतीक खुश हो जाएगा पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। प्रतीक ने अपना सर झुकाकर लक्ष्मी आंटी की ओर देखते हुए कहा,

"लक्ष्मी मुझे माफ करना पर दुनिया में मुफ्त कुछ नहीं होता। Dr Balkrishna ने जो operation किया है उसके लिए मुझे कॉन्ट्रैक्ट करने पड़े। एक शर्त यह है कि मैं अगले 3 साल तक वापस नहीं आ सकता। Dr Balkrishna न केवल वहां मेरी हालत पर नजर रखेंगे पर मुझे उनके कहने पर अलग अलग शेख के सामने उनके काम को साबित करना होगा।"

लक्ष्मी आंटी ने चौंक कर, "मतलब?"

प्रतीक ने एक गहरी सांस लेकर कहा, "सच्चाई तो यह है कि कुछ शेख को नवाबी शौक होता है। लोगों को दिखाने के लिए 4 बीवियां कर लें फिर भी प्यार अपने ड्राइवर या assistant से ही कर सकते हैं। मैं नाम नहीं ले सकता पर ऐसे ही एक बड़े आदमी ने मेरी मदद करने के बदले अगले 3 सालों तक अपनी बीवियों को संभालने की बात की है। अगर उसका या उसकी किसी भी बीवी का नाम आया या मैंने वादा तोड़ा तो शेख मुझे मार कर ही दम लेगा। मगर मैंने अपना वादा पूरा किया तो 3 साल बाद शेख न केवल मुझे लौटने देगा पर हमारे लिए कई दरवाजे खोल देगा।"

लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक को गले लगाया और रोने लगी।

लक्ष्मी आंटी, "क्यों किया ऐसा? मैं आप के साथ खुशी खुशी अपनी जिंदगी हमारे झोंपड़े में बीता लूंगी। आप मेरे दोस्त हो पर मैं फिर भी आप से प्यार करती हूं। मुझे बोल दिया होता तो मैं आप को रोक देती। क्यों अपनी जान जोखिम में डाल दी?"

प्रतीक, "लक्ष्मी मेरी तरफ देखो। क्या मेरी आंखों में डर है? मैंने ये तुम्हारे लिए नहीं किया। मैंने ये हमारे लिए किया है। मैं जानता था कि तुम मना कर देती इसीलिए तुम सब से ये बात छुपाई। लक्ष्मी मैं भी तुम से प्यार करता हूं। मैं तुम्हारे साथ एक फलता फूलता परिवार चाहता हूं। तुम्हें मां बनते हुए देखना चाहता हूं। इस के लिए ये बस छोटी सी कीमत है। तुम अपनी पढ़ाई पूरी करने पर ध्यान देना और हम जल्द ही अपना घर बसाएंगे।"

लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक के सीने में अपना मुंह छुपा कर कहा, "आप को उस शेख की बीवी पसंद आ गई तो?"

प्रतीक ने हंसकर, "तो उसे भी ले आऊंगा। दोनों मेरा खयाल रखना आ…!"

लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक को काट लिया देख हम दोनों हंसते हुए लोट पोट हो गए और लक्ष्मी आंटी ने अपनी मुंह को अपनी हाथों में छुपा लिया।

सन्नी, "प्रतीक, लक्ष्मी आंटी ने तुम्हे अपना मान लिया है। लक्ष्मी आंटी उन्हें ही तकलीफ देती है जिन्हे वो अपना मानती है।"

प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी का हाथ खोल कर उसके होंठों को चूमते हुए कहा, "जान तेरे लिए मैं मौत से खेल सकता हूं। अगर ऐसा है तो किसी और के लिए मैं तुम्हे कैसे छोड़ सकता हूं।"

लक्ष्मी आंटी को प्रतीक ने अपनी बाहों में भर लिया और हमारी ओर देखते हुए कहा,

"आप दोनों ने लक्ष्मी के लिए जो किया है मैं उसे कभी भूल नहीं सकता। अगले 3 साल लक्ष्मी का ऐसे ही खयाल रखना। हां… मैं सच में यही चाहता हूं।"

प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में लेते हुए बेडरूम की तरफ चलने लगा। Bedroom के दरवाजे में रुक कर प्रतीक ने कहा,

"आ जाओ! मुझे सीखोगे नहीं औरत को खुश करने के तरीके? पूरी रात है सीखने सिखाने के लिए।"

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सन्नी

प्रतीक के बुलाने पर हम दोनों भी बेडरूम में आ गए। लक्ष्मी आंटी बेड पर शर्माकर बैठी थी। प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में लेते हुए उसके माथे पर लगे सिंदूर को चूमा और लक्ष्मी आंटी को बेड पर लिटाकर चूमने लगा। लक्ष्मी आंटी ने शर्माते हुए प्रतीक को रोका और कहा,

"जी, मुझे शर्म आती है। बाबुओं के सामने कैसे? और आप? नहीं…?"

प्रतीक, "वहां जब मुझे दूसरी औरतों के साथ रहना होगा तब मुझे बुरा लगे कि मैं तुम्हारे साथ धोखा कर रहा हूं, यह सही होगा? नहीं? जान, मैंने हमारे लिए खुशी और परिवार चुना है। लेकिन अगर तुम अपनी खुशी से मुंह मोड़ लोगी तो मैं कैसे खुश हो सकता हूं?"

प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए लक्ष्मी आंटी के हाथ उठाए और बेड के सिरहाने बांध दिए। लक्ष्मी आंटी ने अपने आप को बेबस पाकर चैन की सांस ली। अब उसे अपने पति से धोका करने का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। प्रतीक ने कमरे के उजाला कर दिया और कहा,

"बाबू, जैसा कि आप दोनों जानते हैं। मैंने जवानी के खेल में आज ही पहल की है। पर वहां शेख के हिसाब से मैं कई साल का माहिर हूं। अगर शेख की बीवी ने खुशी नहीं मिलने का कहा तो मुश्किल होगी। आओ अब मुझे वो सब सिखाओ जो आप दोनों ने सीखा है।"

मैंने और विक्की ने इस बात पर सोच कर फैसला लिया की प्रतीक को पहले सीखना होगा और फिर अनुभव करना होगा। प्रतीक ने हमारी बात मान ली और एक कुर्सी ले कर बेड के नीचे बैठ गया।

मैंने और विक्की ने प्रतीक को सिक्का उछाल कर हम दोनों में बारी तय करने को कहा। पहली बारी जीत कर विक्की ने लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए प्रतीक को चूमने की कला सिखाई। लक्ष्मी आंटी ने उत्तेजना वश आहें भरते ही विक्की ने अपने होंठ नीचे लेते हुए दूधिया गोलों पर लाए। विक्की एक गोले को चूम रहा था तो दूसरे को अपने पंजे में दबोच कर उस पर बनी चूची को छेड़ रहा था। लक्ष्मी आंटी ने उत्तेनापूर्ण हरकतों से अपनी पीठ उठाते हुए अपनी चूची विक्की के मुंह में दबाने लगी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की चूची को चूसते हुए अपने घुटने से लक्ष्मी आंटी के पैरों को फैला दिया। लक्ष्मी आंटी की पनीयाई बुर से बहती धारा साफ नजर आ रही थी।

"प्रतीक औरत और मर्द के बीच एक खास फर्क यह है कि मर्द बिजली के बल्ब की तरह तुरंत तयार हो जाता है पर औरत बिजली की इस्त्री की तरह धीरे धीरे तपती है और काफी देर तक गरम रहती है। तो एक बात हमेशा याद रखना। लक्ष्मी आंटी को तब तक गरम करना जब तक तुम से रहा जाए और उसके बाद 10 मिनिट तक अधिक करना।"

प्रतीक सच में लक्ष्मी को खुश रखने के लिए कुछ भी करने को तैयार था। वह लक्ष्मी आंटी को चुधते देखने के लिए भी तयार था ताकि वह उसे खुशी दे पाता। विक्की की हालत पस्त हो गई तो मैंने उसके साथ जगह बदल ली।

लक्ष्मी आंटी ने आह भरते हुए अपनी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया और मैंने उसके पैरों को फैला कर उसके गुपतांगों को अपनी उंगलियों से खोल कर उजागर किया।

"प्रतीक, औरत के निचले होटों की दो परतें होती हैं। बाहर की पाव रोटी जैसी मांसाल परत और अंदर की नाजुक पंखुरी सी पतली परत। बाहर की परत को चूमने से लक्ष्मी आंटी की रस की धारा बहना तेज हो जाता है।"

लक्ष्मी आंटी की खुली चूत के बाहरी होटों को बारी बारी चूमते हुए उसकी आहों से कमरा भर उठा। मैंने अपनी जीभ की नोक से निचले होटों के उपरी जोड़ को छू लिया और लक्ष्मी आंटी ने अपना बदन झटक दिया।

विक्की, "प्रतीक, नीचे के बाहरी और अंदरूनी होठों के जोड़ने से बने उपरी हिस्से में छिपा होता है औरत के यौन सुख का खजाना। इसे हम दोनों लक्ष्मी आंटी का मोती कहते हैं। इसे चाटने, चूमने और चूसने से लक्ष्मी आंटी को वही होता है जो हमें अपना लौड़ा चाटने, चूमने और चूसने से होता है। लक्ष्मी आंटी की कोई चुदाई हम तब तक नहीं करते जब तक लक्ष्मी आंटी इस मोती का पूरा मज़ा नहीं लेती। देखो सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पैरों को कस कर पकड़ लिया है कि वह सन्नी को हिला न पाए। लक्ष्मी आंटी अक्सर झडते हुए ऐसे तड़पती है कि हम हिल जाते हैं और लक्ष्मी आंटी अधूरी रह जाती हैं।"

मैंने लक्ष्मी आंटी की जांघों को पकड़ कर अपने होठों से लक्ष्मी आंटी के मोती को चूमा। लक्ष्मी आंटी तप कर तिलमिलाने लगी तो मैंने उसके मोती को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और मोती का अब उभरा हुआ हिस्सा अपनी जीभ से चाटने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी जांघो से मेरा सर पकड़ लिया और खुद सिसक सिसक कर आहें भरते हुए उत्तेजना वश तड़पने लगी।

बेड के पास बैठ कर हमारे दर्शक मेरी कला को निहार रहे थे और उस से सीख रहे थे। मैं और विक्की कई बार एक दूसरे के सामने लक्ष्मी आंटी का पानी निकाल चुके थे पर ऐसे जान कर किसी की बीवी को उसके सामने चोदना एक अलग ही अनुभव था। मैंने लक्ष्मी आंटी की आवाज और लक्ष्मी आंटी की बुर का रिसाव देख अपनी 1 उंगली को लक्ष्मी आंटी की तपती भट्टी में डाल दिया।

"आह… सन्नी बाबू… और मत तड़पाओ!!… चोदो मुझे!!… कोई तो चोदो मुझे!!!… कोई भी चोदो मुझे!!!…", लक्ष्मी आंटी गिड़गिड़ाई।

मैंने मुस्कुराकर जवाब में अपनी दो उंगलियां उसकी गर्मी में भर दी और लक्ष्मी आंटी के मोती को चूमते हुए अपनी उंगलियों को तेज रफ्तार से चलाने लगा। लक्ष्मी आंटी की आहें तेज होते हुए एक चोटी तक गई और एक ऊंची चीख के साथ लक्ष्मी आंटी ने झडते हुए मेरा मुंह अपने रस से भर दिया। लक्ष्मी आंटी का बदन ढीला पड़ गया था पर अब भी उसमें कुछ कांपना जारी था।

"इस तरह लक्ष्मी आंटी के झडने से हम ये मान सकते हैं कि जब हम लक्ष्मी आंटी को चोद कर झड जाएं तो वह असंतुष्ट न रहे।"

विक्की ने लक्ष्मी आंटी के उपर लेटते हुए मेरी जगह ले ली थी और अब उसके माथे को चूमते हुए उसका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

"प्रतीक, लक्ष्मी आंटी अपने प्रेमियों को बस छूने से ही पहचान लेटी है पर फिर भी बताकर करना अच्छा होता है। अगर घर में सिर्फ दोनों ही हो फिर भी अचानक अंदर जाना अच्छा नहीं लगता।"

लक्ष्मी आंटी ने विक्की को अपनी बाहों में भर लिया तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी के गाल चूमते हुए उसकी बुर पर अपना सुपाड़ा सटा दिया।

"अन्ह… आह… ऊंह…", लक्ष्मी आंटी ने अधीर होकर अपनी गांड़ उठाकर विक्की को अपने पैरों में पकड़ कर अपने अंदर खींच लिया।

"आह… हा… आ… हा… आनह… अम्म्म……", लक्ष्मी आंटी की यह पाष्वी उत्तेजना की भाषा हमें आगे का रास्ता दिखा रही थी और हम दोनों यही भाषा प्रतीक को सीखा रहे थे। विक्की को लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए चोदना पसंद था पर आज वह प्रतीक को सीखने के लिए लक्ष्मी आंटी के कान और गाल को चूमते हुए उसके सुख के स्वर सुना रहा था। लक्ष्मी आंटी ने विक्की को कस कर पकड़ कर उसे तेज धक्कों से चोदने पर मजबुर कर दिया था।

"प्रतीक, लक्ष्मी आंटी को कभी प्यार से धीरे और लंबे धक्के चाहिए होते हैं। कभी तो बस तेज रफ्तार झटके से मज़ा चाहिए होता है। ये हमारा फ़र्ज़ है कि हम उसकी मर्जी को समझे और उसे उसकी मन चाही खुशी दें।"

विक्की ने लक्ष्मी आंटी को तेज रफ्तार चोदते हुए अपनी पूरी ताकत लगा दी और लक्ष्मी आंटी ने झडते हुए उसका लौड़ा निचोड़ लिया। विक्की लक्ष्मी आंटी के उपर लेट गया और लक्ष्मी आंटी ने उसे पकड़ कर चूमते हुए उसका रस अपनी कोख में भर लिया।

कुछ देर बाद लक्ष्मी आंटी ने विक्की को छोड़ दिया और विक्की एक ओर लेट गया। लक्ष्मी आंटी ने दूसरी ओर मुड़ते हुए एक घुटना तकिए पर रख कर पेट के बल अधूरी लेट गई।

लक्ष्मी आंटी की योनि की पंखुड़ियां खुली हुई थी और उनमें जमा विक्की का माल एक गाढ़ी मलाई की बूंद की तरह धीरे धीरे बाहर आता दिख रहा था।

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सन्नी

विक्की के बगल में लेट ने से लक्ष्मी आंटी एक ओर मुड़ कर अपना घुटना तकिए पर रख पेट के बल अधूरी लेट गई जिस से लक्ष्मी आंटी की चूत में जमा वीर्य बाहर झांकने लगा। लक्ष्मी आंटी को ठंडा होने देना मेरे लिए बेवकूफी होती।

मैंने लक्ष्मी आंटी को पीछे से चूमते हुए उसकी गांड़ के उपर अपना लौड़ा घुमाया।

"सन्नी बाबू!!… उफ्फ…", लक्ष्मी आंटी जानती थी कि मुझे रोकना मेरे साथ नाइंसाफी होती। प्रतीक धान से मेरे पैंतरे और उन पर लक्ष्मी आंटी की प्रतिक्रिया देख रहा था। मैंने अपने लौड़े पर विक्की के वीर्य की गाढ़ी मलाई लक्ष्मी आंटी की चूत के मुंह से उठाई और लक्ष्मी आंटी की गरमी चूत में मेरा लौड़ा पेल दिया।

"मां… आह… आह…", लक्ष्मी आंटी ने मेरा स्वागत किया ही था कि मैंने अपने लौड़े को बाहर खींच लिया।

विक्की, "औरत चाहे जितनी तयार हो उसकी गांड़ मारने से पहले अपने लौड़े को रस में अच्छे से पोत लो। यौन रस से अच्छा अगर कुछ है तो वह है वीर्य से भरा यौन रस। वैसे vaseline gel भी काम करता है पर हमें तो यही पसंद है।"

मेरे लौड़े का सुपारा लक्ष्मी आंटी की कसी गांड़ के सुराख को खोलने लगा तो लक्ष्मी आंटी फिर से आहें भरने लगी।

"आह… आंह… उंह… मां!!… हां… हा… हा… हा… आ…आह… आहा…", लक्ष्मी आंटी ने मुझे अपनी गांड़ के अंदर लेते हुए आंहे भरी।

"सन्नी बाबू!! प्यार से करो!! मैं थक गई हूं।", लक्ष्मी आंटी ने मुझे समझाते हुए कहा।

मैंने लक्ष्मी आंटी के बाल उसके माथे से पीछे लेते हुए अपने हाथ में लेकर उन्हें थोड़ा खींचा।

"सन्नी बाबू!! आह… आ…", लक्ष्मी आंटी ने शिकायत करना शुरू किया ही था कि मैंने अपने लौड़े को सुपाड़े तक बाहर खींच लिया।

"मां… आंह… आ… आ…आआह…", लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ में मेरे लौड़े को दनदनाते हुए घुसता पाया।

"डरो मत। लक्ष्मी आंटी को गांड़ मराना पसंद है। यह एक हुनर है जो हर औरत नहीं कर पाती पर लक्ष्मी आंटी ने इस में महारथ हासिल कर ली है।", विक्की ने प्रतीक के व्याकुल भाव देख कर कहा।

मैंने लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ कर उसे पीछे खींच कर लक्ष्मी आंटी को उठा लिया था और खुद उस पर लेट कर उसकी गांड़ के लंबे ठाप लगाते हुए चोद रहा था। लक्ष्मी आंटी ने एक हाथ से अपने आप को उपर उठाया और दूसरे हाथ से अपनी खाली चूत को सहलाने लगी।

"लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारते हुए यह ध्यान रखना चाहिए कि लक्ष्मी आंटी की चूत खाली न रहे। अगर अब की तरह लक्ष्मी आंटी ने अपना इंतजाम खुद नहीं किया तो दो उंगलियों को लक्ष्मी आंटी की चूत में डाल कर अंगूठे से लक्ष्मी आंटी का मोती चलते रहना चाहिए।", विक्की ने प्रतीक को गांड़ चुदाई की बारीकियां समझते हुए हम।

मैंने लक्ष्मी आंटी के गाल को पीछे से चूमते हुए उसकी गांड़ में धमाचौकड़ी मचाने लगा। लक्ष्मी आंटी की उंगलियां मुझे चूत के परदे से महसूस हो रही थी। लक्ष्मी आंटी की उत्तेजना में बहते हुए मैंने जैसे तैसे अपने आप को लक्ष्मी आंटी के झडने तक रोके रखा। लक्ष्मी आंटी ने झड़ते हुए अपनी गांड़ को भींच लिया और मेरा लौड़ा अपनी गांड़ में बन्द कर दिया। लक्ष्मी आंटी के छूट ते ही मेरा बांध टूटा और मेरे वीर्य की धार से लक्ष्मी आंटी की गांड़ रंग दी गई।

"आह… हा… हा… आ…ह। बड़े वो हो सन्नी बाबू!!," लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों को मेरे बालों में फेरते हुए मुझे डांटा।

प्रतीक ने आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी का माथा चूमा और मैंने पति पत्नी को उनकी जगह देते हुए अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गरमी में से बाहर खींच लिया।

"आप को बुरा लगा?" लक्ष्मी आंटी ने डरते हुए प्रतीक से पूछा।

"जान जिस बात से तुम्हें इतनी खुशी मिले उस से में बुरा क्यों मान लूं?" प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए कहा।

विक्की का लौड़ा फिर से खड़ा हो गया था और पत्नी को चुदा हुआ पा कर पति कि खुशी देख मेरे लौड़े में भी तकद भर गई। हम दोनों के खड़े लौड़े देख लक्ष्मी आंटी ने शर्माकर मुस्कुराते हुए प्रतीक से कहा,

"अगर मैं इन दोनों को पहले सुला दूं तो चलेगा?"

प्रतीक बस सर हिलाकर हां बोल पाया। लक्ष्मी आंटी ने मुझे बेड पर लिटाकर मेरा लौड़ा अपनी जीभ से चाट कर साफ़ करने लगी। जब मेरा लौड़ा फूल गया तब विक्की ने पीछे से लक्ष्मी आंटी की चूत में अपना मूसल ठूंस दिया।
 
"मां… आह…", लक्ष्मी आंटी ने अपनी आवाज को दबाने के लिए मेरा लौड़ा निगल लिया। थोड़ी देर में ही मैं पूरी तरह तयार हो गया और विक्की लक्ष्मी आंटी को पीछे से दनदनाते हुए चोद रहा था। लक्ष्मी आंटी ने अचानक आगे बढ़ ते हुए मेरे ऊपर लेट गई जिस से विक्की का लौड़ा सुना रह गया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से अपनी बहती योनि को खोल दिया और मेरे लौड़े का सुपारा उपर घुमाने लगी। जब मेरे सुपाड़े को रस में अच्छे से धोया गया तब लक्ष्मी आंटी मेरे लौड़े पर बैठ गई।

"आह… आ… हा… हा… अन्ह… अम्मम… आह!!", लक्ष्मी आंटी ने मुझे अपनी गरमी सही जगह रख कर नीचे झुक गई और अपनी चूची को मेरे मुंह पर रखा। इतना इशारा मेरे लिए काफी था। मैंने लक्ष्मी आंटी की चूची को चूसने में पूरा ध्यान लगा दिया।

लक्ष्मी आंटी ने उदास खड़े विक्की को पीछे मुड़ कर देखा और अपनी गांड़ पर हलके से थप्पड़ लगते हुए कहा,

"विक्की बाबू, अब और कितना इंतजार करोगे? आओ अपनी लक्ष्मी आंटी को प्यार करने।"

विक्की खुशी से ऐसे कूद पड़ा की सीधे लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ में भरकर ही रुका।

"मां!!… आह… उफ्फ… बाबू प्यार करने को कहा था पेल देने को नहीं!……", लक्ष्मी आंटी ने शिकायत की।

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी के दोनों छेद अपने लौड़े से पूरी तरह भर दिए पर रुक कर उसे अपनी लय पकड़ने दी। कुछ पल बाद लक्ष्मी आंटी ने आगे बढ़कर हमारे लौड़े अपने अंदर से सुपाड़े तक बाहर निकलने दिए और फिर धीरे से हमारे लौड़ों पर अपनी गांड़ दबाते हुए बैठ गई। प्रतीक फटी आंखों से देख रहा था कैसे लक्ष्मी आंटी अपनी कमर हिलाते हुए दो लौड़ों से अपनी चूत और गांड़ एक साथ मरवा रही है।

कुछ देर तक ऐसे ही अपनी मरवाते हुए लक्ष्मी आंटी ने अपनी लय पकड़ ली और प्रतीक की ओर देखते हुए कहा,

"जी सुनिए! आप ने कहा कि आप को बुरा नहीं लगता इस लिए मैंने बाबुओं को लिया है। पर आप ऐसे दूर बैठ कर देखते हुए मुझे अच्छा नहीं लगता। इधर आइए।"

प्रतीक ने आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी को चूमा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी लय बदले बगैर प्रतीक से चुम्बन लिया और अब उसे खींच कर बेड के सिरहाने अपने मुंह के पास खड़ा कर दिया। प्रतीक अपने साथ क्या हो रहा है यह समझने से पहले ही हमारे खेल में शामिल हो गया था।
 
प्रतीक ने आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी को चूमा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी लय बदले बगैर प्रतीक से चुम्बन लिया और अब उसे खींच कर बेड के सिरहाने अपने मुंह के पास खड़ा कर दिया। प्रतीक अपने साथ क्या हो रहा है यह समझने से पहले ही हमारे खेल में शामिल हो गया था।

लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक के लौड़े को चूमते हुए उसका सुपाड़ा अपने मुंह में लिया। प्रतीक इस अनुभव के लिए नया था और जल्द ही लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ कर उसका मुंह चोदने लगा। लक्ष्मी आंटी प्रतीक का लौड़ा मुंह से निकालते हुए अपनी कमर हिलाते हुए हम दोनों के लौड़ों पर बैठ जाती। फिर उठाते हुए हमारे लौड़ों को सुपाड़े तक बाहर निकालते हुए अपने पति का पूरा लौड़ा निगल जाती।

लक्ष्मी आंटी ने इस तरह अपने प्रेमियों को संभालते हुए अपने पति को भी खुश किया। हम दोनों तो अभी झड़े थे पर प्रतीक ने भी शाम को काफी मजे लिए होंगे। लक्ष्मी आंटी ने झड़ते हुए भी अपनी चुदाई बन्द नहीं होने दी और तकरीबन दस मिनट की सामूहिक चुदाई के बाद विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना लावा रस भर दिया।

विक्की अब थक कर चूर हो गया था और बगल में लेट गया। मैंने लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर पलट दिया और लक्ष्मी आंटी का बदन ढकते हुए अपनी रफ्तार बढ़ा दी। प्रतीक ने मेरे साथ घूमते हुए अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी के मुंह से बाहर निकलने नहीं दिया। मैं लक्ष्मी आंटी की चूची को मुंह में लेकर उसे जोर जोर से लंबा और तेज पेल रहा था तो लक्ष्मी आंटी प्रतीक के लौड़े पर उं… उन्म… कर मेरे प्रशंसा के गीत गा रही थी। मुझसे और रहा नहीं गया और लक्ष्मी आंटी की कोख में मेरा वीर्य छूट गया। प्रतीक ने मानो मेरे इंतजार में खुद को रोक रखा था और उसने मुझे रस से लक्ष्मी आंटी की प्यास बुझा दी।

लक्ष्मी आंटी थक कर चूर हो गई थी और हम सब लेट गए। मेरी आंख लग रही थी कि लक्ष्मी की आह से मेरी नींद खुली। प्रतीक ने पिछले कुछ सालों का हिसाब करने की ठान ली थी और लक्ष्मी मदहोशी में प्रतीक का साथ दे रही थी। मैं मुस्कुराकर दूसरी ओर मुड़ कर सो गया।

मेरे मन में बस एक खयाल आया, "शुक्र है कि प्रतीक को लड़के पसंद नहीं वरना प्रतीक के ऑपरेशन के बाद ये रात खौफनाक हो जाती।

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विक्की

लक्ष्मी आंटी की आहों से मेरी आंख खुली और कानों ने लक्ष्मी आंटी की आवाज को टॉयलेट में से आते पाया। मैं और सन्नी आगे बढ़े और अंदर झांकने लगे। लक्ष्मी आंटी basin के नीचे घुटनों के बल खड़ी थी और प्रतीक पूरी जोर से उसे चोद रहा था।

सन्नी, "अरे लक्ष्मी आंटी चुदाना ही था तो बेड पर आ जाती यूं चुदाने से घुटने छिल जाएंगे।"

"कौन कमबख्त… चूधने के… लिए मुड़ी ई… थी। आह… मैं तो ओह… बस साबुन उठाने… आह…", लक्ष्मी आंटी का दुखड़ा सुन हम दोनों हंसी से लोट पोट हो गए। प्रतीक ने हमें आंख मारते हुए अपनी चुदाई चालू रखी।

लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक से कहा, "अजी सुनिए, बाबुओं को ओह… तयार कर… के कॉलेज आह… भेजना है। थोड़ी देर अन्ह… रुकिए तो ओ… सही।"

"अरे लक्ष्मी आंटी, चलने दो तुम्हारा काम। हम दोनों के लिए प्रतीक को मत रोको।"

"कीड़े पड़े… उस balakrishna को! आह… कल रात… भर चोद चोद… कर मुझे अंदर… से छिल… गया है… और इन्हें… कोई ई… फ़र्क ही नहीं पड़ा! आह… नजाने क्या… भर दिया… है अंदर!", लक्ष्मी आंटी चुदाते हुए ही बाहर आने लगी। प्रतीक भी लक्ष्मी आंटी को चोदते हुए उसके साथ बाहर आया। लक्ष्मी आंटी ने सन्नी को इशारा किया और हम दोनों बेड के किनारे पर बैठ गए।

लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से हमारे लौड़े सहलाते हुए उन्हें अपनी मुठ्ठी में भर लिया। लक्ष्मी आंटी ने हमारे लौड़ों को चाटकर साफ़ किया और उन्हें चूसने लगी। लक्ष्मी आंटी की इस प्रकार की सेवा पा कर हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को उसके काम करने से नहीं रोका और लक्ष्मी आंटी ने चूस चूस कर चुदाते हुए ही हमारा रस पी गई।

लक्ष्मी आंटी को हमारा वीर्य पीते देख प्रतीक ने (आखिरकार) झड कर लक्ष्मी आंटी का पिछ्वाड़ा छोड़ दिया। लक्ष्मी आंटी ने बेड पर लेट कर अपने पैरों को फैला कर उनके बीच देखा। लक्ष्मी आंटी की बुर और गांड़ फट कर सुज गई थी। लक्ष्मी आंटी के छेद अब बन्द नहीं हो रहे थे और खून की छटा लगा वीर्य कहीं से निकल रहा था तो कहीं सुख कर पपड़ी बन गया था।

"हाय रे मैं मर गई!! बाबू लोगों ने मेरा जो हाल पूरे साल में नहीं किया वह आप ने बस आधे दिन में कर दिया। सुनिए जी, मैं दोनों बाबुओं को संभाल सकती हूं पर आप को संभालने के लिए 4 को भी मुश्किल होगा। ना!!… ना!!.… अब मेरी ओर देखना भी नहीं।", लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक से कहा।

प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में लेते हुए कहा, "जान तुम्हारे प्यार के लिए ही मैं समुंदर पार कर आया हूं। अब अगर तुम मुझे रोकना चाहती हो तो उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।"

लक्ष्मी आंटी, "सब कुछ तो आप का है। बोलिए आप को और क्या चाहिए?"

प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी के होठों से होंठ लगाते हुए कहा, "आज से तुम मुझे प्रतीक कहोगी। ना आप ना जी ना कुछ और। बस प्रतीक।"
 
प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी के होठों से होंठ लगाते हुए कहा, "आज से तुम मुझे प्रतीक कहोगी। ना आप ना जी ना कुछ और। बस प्रतीक।"

लक्ष्मी आंटी अपने प्रेमियों से अपने पति के सामने और अपने प्रेमियों के सामने अपने पति से चुदा चुकी थी पर अपने पति का ऐसे नाम लेना उस से नहीं हो रहा था। प्रतीक ने लक्ष्मी को मनाते हुए कहा,

"लक्ष्मी सही मायनों में मैं तुम्हारा पति कल शाम से बना हूं पर हम पिछले एक साल से अच्छे दोस्त हैं। और दोस्त एक दूसरे को यूं जी कहके बुलाते नहीं। बोलो ' प्रतीक '।"

लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक के होठों पर होठ रख कर उसका नाम लिया और पति पत्नी एक दूसरे के प्यार में लिपट गए। हम दोनों ने bedroom से बाहर निकलते हुए उन्हें उनका वक़्त देना सही समझा।

उस दिन साल में पहली बार लक्ष्मी आंटी कॉलेज नहीं गई और हमारे कॉलेज से लौट आने तक लक्ष्मी आंटी और प्रतीक बातें और बाकी सब कुछ करते रहे। शनिवार रविवार के लिए मम्मियों ने लक्ष्मी आंटी और प्रतीक को

अलीबाग में second honeymoon trip पर भेज दिया और हम दोनों ने पहली बार bachelor life जीते हुए पिज़्ज़ा खाया और बरतन धोए।

रविवार को प्रतीक को खाड़ी के पार से टिकट आ गया और लक्ष्मी आंटी ने रोते हुए उसे एयरपोर्ट पर विदा किया। प्रतीक के लौटने के बाद हम सब अपनी दिन चर्या में वापस व्यस्त हो गए। हम दोनों को खयाल रखते हुए लक्ष्मी आंटी ने अपनी पढ़ाई और जोर से की।

लक्ष्मी आंटी ने अगले 3 साल में न केवल अपनी B. Com. की डिग्री हासिल की बल्कि finance में MBA भी कर लिया। 3 साल के अंत तक हम दोनों भी अपनी डिग्री पूरी कर घर वापस लौट रहे थे। पिछले साल हम दोनों ने एक छोटी कंपनी शुरू कर दी थी जिसका सारा हिसाब लक्ष्मी आंटी की देखरेख में था। उसे खुशी थी कि उसे एक पूरी कंपनी का हिसाब चलाने का मौका मिला पर वह नहीं जानती थी की हम ने उसे हमारी कंपनी में साझेदार बनाया था।

लक्ष्मी आंटी के ग्रॅजुयेशन के दिन प्रतीक लौट आया और लक्ष्मी आंटी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हमारे कहने पर लक्ष्मी आंटी ने कंपनी के मुंबई ऑफिस की जिम्मेदारी संभाली और हम दोनों वापस जा कर पापा के बिजनेस में हाथ बंटाते हुए अपना बिज़्नेस बढ़ाने लगे।

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