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56
सन्नी
पिछले दो महीने कुछ अलग थे। विरह की आने वाली चोट और साथ में खामोशी की चुभती जलन हम सब को तकलीफ दे रही थी। लक्ष्मी आंटी को अपने लिए वक़्त मिलना मुश्किल हो गया था।
लक्ष्मी आंटी को अब दोपहर को ही पूरी पढ़ाई करनी पड़ती थी क्यूंकि कॉलेज से वापस आते ही हम दोनों उस पर टूट पड़ते। कोई एक पढ़ाई करता तो दूसरा लक्ष्मी आंटी को चोदने में लगा रहता। लक्ष्मी आंटी ने तो चुदाते हुए ही खाना पकाना और बरतन मांजना शुरू कर दिया था। रात को सोते समय हम दोनों बड़े प्यार से उसे फिर से चोदते और उसे अपने बाहों में लेकर सोते।
लक्ष्मी आंटी समझ गई थी कि हम दोनों कोई राझ रख कर हैं पर उसने पूछा नहीं। कॉलेज में जाते हुए प्रतीक का कॉल आया और हम समझ गए कि अब वह दिन आ गया है। शाम को हमने लक्ष्मी आंटी को कहा कि वह कल फिर से दुल्हन का श्रृंगार कर अपने प्रेमी का इंतजार करे जैसे उसने पहले दिन किया था। लक्ष्मी आंटी हमारे सुझाव से चौंक गई और खुश भी हुई। उस रात मैं और विक्की लक्ष्मी आंटी को चोद नहीं पाए। हम दोनों बस लक्ष्मी आंटी के साथ बातें करते रहे और रात को उसे अपनी बाहों में भर कर सो गए।
अगली शाम को हम ने घर का दरवाजा खोला तो हॉल खाली था और लक्ष्मी आंटी ने आवाज दी की हम नहा कर अंदर आएं। मैं और विक्की अंदर गए और लक्ष्मी आंटी को बेड पर दुल्हन की तरह बैठे पाया।
"लक्ष्मी आंटी, तुम तो बहुत सुंदर लग रही हो! पर आज बन्द आंखों से तुम्हे अपने पती को पहचानना होगा।"
विक्की ने लक्ष्मी आंटी की आंखों पर पट्टी बांध दी और हम दोनों बाहर आ गए। कुछ ही देर में लक्ष्मी आंटी के पति ने नहा कर तयारी कर ली और लक्ष्मी आंटी को प्यार करने अंदर पहुंचा।
लक्ष्मी आंटी के बगल में बैठ कर उसने लक्ष्मी आंटी के माथे पर लगे सिंदूर को चूमा।
लक्ष्मी आंटी, "बाबू संभाल कर! सिंदूर को मत चेडना!!"
जैसे ही लक्ष्मी आंटी के होंठों से होंठ टकराए, लक्ष्मी आंटी के होंठ खुल गए और तुरंत बन्द हो गए। लक्ष्मी आंटी ने अपने पति को धक्का दे कर दूर करते हुए कहा, "क… कौन…? कौन ? कौन है? सन्नी बाबू! विक्की बाबू! ये मजाक ठीक नहीं!! छोड़ो ! छोड़ो मुझे!! सन्नी बाबू!! विक्की बाबू!! बचाओ!!.…"
छटपटाहट में लक्ष्मी आंटी की आंखों से पट्टी उतर आई और वह अचानक रुक गई।
लक्ष्मी आंटी, "जी? आप?"
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सन्नी
पिछले दो महीने कुछ अलग थे। विरह की आने वाली चोट और साथ में खामोशी की चुभती जलन हम सब को तकलीफ दे रही थी। लक्ष्मी आंटी को अपने लिए वक़्त मिलना मुश्किल हो गया था।
लक्ष्मी आंटी को अब दोपहर को ही पूरी पढ़ाई करनी पड़ती थी क्यूंकि कॉलेज से वापस आते ही हम दोनों उस पर टूट पड़ते। कोई एक पढ़ाई करता तो दूसरा लक्ष्मी आंटी को चोदने में लगा रहता। लक्ष्मी आंटी ने तो चुदाते हुए ही खाना पकाना और बरतन मांजना शुरू कर दिया था। रात को सोते समय हम दोनों बड़े प्यार से उसे फिर से चोदते और उसे अपने बाहों में लेकर सोते।
लक्ष्मी आंटी समझ गई थी कि हम दोनों कोई राझ रख कर हैं पर उसने पूछा नहीं। कॉलेज में जाते हुए प्रतीक का कॉल आया और हम समझ गए कि अब वह दिन आ गया है। शाम को हमने लक्ष्मी आंटी को कहा कि वह कल फिर से दुल्हन का श्रृंगार कर अपने प्रेमी का इंतजार करे जैसे उसने पहले दिन किया था। लक्ष्मी आंटी हमारे सुझाव से चौंक गई और खुश भी हुई। उस रात मैं और विक्की लक्ष्मी आंटी को चोद नहीं पाए। हम दोनों बस लक्ष्मी आंटी के साथ बातें करते रहे और रात को उसे अपनी बाहों में भर कर सो गए।
अगली शाम को हम ने घर का दरवाजा खोला तो हॉल खाली था और लक्ष्मी आंटी ने आवाज दी की हम नहा कर अंदर आएं। मैं और विक्की अंदर गए और लक्ष्मी आंटी को बेड पर दुल्हन की तरह बैठे पाया।
"लक्ष्मी आंटी, तुम तो बहुत सुंदर लग रही हो! पर आज बन्द आंखों से तुम्हे अपने पती को पहचानना होगा।"
विक्की ने लक्ष्मी आंटी की आंखों पर पट्टी बांध दी और हम दोनों बाहर आ गए। कुछ ही देर में लक्ष्मी आंटी के पति ने नहा कर तयारी कर ली और लक्ष्मी आंटी को प्यार करने अंदर पहुंचा।
लक्ष्मी आंटी के बगल में बैठ कर उसने लक्ष्मी आंटी के माथे पर लगे सिंदूर को चूमा।
लक्ष्मी आंटी, "बाबू संभाल कर! सिंदूर को मत चेडना!!"
जैसे ही लक्ष्मी आंटी के होंठों से होंठ टकराए, लक्ष्मी आंटी के होंठ खुल गए और तुरंत बन्द हो गए। लक्ष्मी आंटी ने अपने पति को धक्का दे कर दूर करते हुए कहा, "क… कौन…? कौन ? कौन है? सन्नी बाबू! विक्की बाबू! ये मजाक ठीक नहीं!! छोड़ो ! छोड़ो मुझे!! सन्नी बाबू!! विक्की बाबू!! बचाओ!!.…"
छटपटाहट में लक्ष्मी आंटी की आंखों से पट्टी उतर आई और वह अचानक रुक गई।
लक्ष्मी आंटी, "जी? आप?"
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