• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

अपूर्वा: वाह जी! आपकी आंटी तो बहुत अच्छी है। तुरंत दूध दे दिया।
मैं: और क्या! मैं तो जब कभी खाना बनाने का मूड नहीं होता तो खाना भी आंटी के यहीं पर खा लेता हूं।
अपूर्वा: इम्प्रैस होते हुए, वाह जी। आजकल ऐसे मकान मालिक मुश्किल से ही मिलते हैं।
मैंने चाय बनाई और दो प्यालियों में डालकर एक अपूर्वा को दी और दूसरी खुद ले ली। एक कटोरी में मां के बनाये हुए लड्डू डाल कर अपूर्वा को खाने के लिए।
अपूर्वा: ये क्या है?
मैं: लड्डू।
अपूर्वा: मैं नहीं खाती, बहुत ज्यादा घी होता है इनमें।
मैं: अरे खा ले खा ले शरमा मत। मम्मी ने बनाये हुए हैं, बहुत स्वादिष्ट हैं।
और एक लड्डू मैंने उठा लिया और अपूर्वा ने भी एक लड्उू ले लिया।
चाय पीकर अपूर्वा कहने लगी, अब मैं चलती हूं नहीं तो देर हो जायेगी, और मम्मी की डांट खानी पड़ेगी।
मैं: ओके, चलो मैं तुम्हें छोड़ देता हूं।
अपूर्वा: हां! और फिर मैं तुम्हें छोड़ने आ जाउंगी, फिर तुम मुझे छोड़ने चलना। ऐसे ही सुबह हो जायेगी और फिर साथ में ही ऑफिस के लिए निकल पडेंगे।
उसकी बात सुनकर मैं मुस्कराने लगा।
अपूर्वा: ठीक है, अब चलती हूं। ओह माई गोड साढे छः हो गए। आज तो जरूरी मम्मी की डांट खानी पड़ेगी।
मैं अपूर्वा को नीचे तक छोड़ने के लिए आया। अपूर्वा ने अपनी स्कूटी निकाली और बायें बोलकर चली गई। आंटी अभी भी बाहर ही खड़ी हुई थी। पड़ोस वाली आंटी चली गई थी।
आंटी: कौन थी ये बेटा?
मैं: आंटी वो अपूर्वा है, मेरे साथ ही काम करती है, कम्पनी में, वो आज जब ऑफिस से निकले तो मेरी बाईक में पंक्चर हो गया, तो मुझे छोड़ने के लिए आई थी।
आंटीः बेटा! अच्छी लड़की है, नहीं तो आजकल कौन किसकी परवाह करता है, और वो भी लड़की। लगता है वो तुझे पसंद करती है।
मैं: अरे नहीं आंटी ऐसी कोई बात नहीं है, बस हम अच्छे दोस्त हैं तो, इसीलिए।
आंटी: अच्छे दोस्त। हां वो तो पता चल रहा था जिस तरह से वो बैठी थी तेरे पीछे।
आंटी की बात सुनकर मैं शरमा गया और अपना चेहरा नीचे कर लिया।
तभी सोनल अपनी स्कूटी को फरफराती हुई आ गई और गेट के पास आकर हॉर्न देने लगी।
आंटी: कितनी बार कहा है तुझसे, आराम से चला लिया कर। कभी कुछ हो गया ना।
सोनल: मॉम, दरवाजा तो खोलो। आते ही शुरू हो गये।
आंटी: हां खोलती हूं। कुछ कहो भी नहीं इनको तो। एक तो इतनी तेज स्कूटी चलाती है।
सोनल: हाय, समीर कैसे हो?
मैं: झक्कास, आज इतनी जल्दी कैसे आना हो गया?
सोनल: बस, ऐसे ही सोचा आज समीर जी से थोड़े गप्पे लड़ा लूंगी तो जल्दी आ गई।
मैं: अच्छा जी! ते चलो जल्दी से उपर आ जाओ।
आंटी: अब इस फटफटी को अंदर भी करेगी या बाहर ही फर फर करती रहेगी।
सोनल: करती हूं ना! बिगड़ती क्यो हों।
और सोनल ने अपनी स्कूटी अंदर खड़ी कर दी।
बाहर गली में सब्जी वाला आया था, तो मैं जाकर उससे सब्जी लेने लग गया।
सब्जी लेकर मैं उपर आ गया, सोनल पहले से ही उपर पहुंची हुई थी और मुंडेर के पास खड़ी होकर पड़ोस वाले घर में छत पर खड़ी अपनी सहेली से बात कर रही थी।
मैं भी सब्जी अंदर रसोई में रखकर बाहर आ गया।
मैं: क्या बात हो रही, लड़कियों में।
सोनल: आपके लिए नहीं है, हमारी आपस की बात है।
मैं: ओह! गर्ल्स टू गर्ल्स। लगता है बॉयफ्रेंड के बारे में बातें हो रही हैं।
सोनल: बकवास नहीं। मैं बॉयफ्रेंड वगैरह के चक्कर में नहीं पड़ती।

मैं: ओके बाबा! तभी मेरा फोन बज उठा, जो अंदर रूम में रखा था।
मैंने अंदर आकर फोन उठाकर देखा तो नया लेंडलाइन का नम्बर था।
मैंने उठाकर हैल्लो कहा तो दूसरी तरफ से किसी लड़की की आवाज आई - हैल्लो।
मैं: हैल्लो जी! कौन बोल रहे हैं आप।
फोन वाली लड़की: वाह जी! क्या बात है, आप तो लगता है भूल गये हमें।
मैं: जी नहीं ऐसी बात नहीं है, आवाज जानी पहचानी तो लग रही है, पर ये नम्बर सेव नहीं है तो इसलिए पता नहीं चल रहा कि कौन हो आप।
फोन वाली लड़की (मेरे मजे लेते हुए): लगता है कोई और मिल गई जो मुझे भूल गये।
मैं (भी मजे लेते हुए): अब वो तो जी ये पता चले कि कौन बोल रहे हैं आप तभी कुछ डिसीजन हो कि कोई और मिल गई या वो कोई और आप ही हो।
फोन वाली लड़की: मैं तो बता नहीं रही कि कौन हो, पहचान सकते हो तो पहचान लो।
मैं: जी वो मैं अनजान लड़कियों से ज्यादा बातचीत नहीं करता तो इसलिए फोन रख रहा हूं।
तभी मुझे फोन में से पीछे से किसी लेडीज की आवाज सुनाई दी - अपूर्वा बेटी, तेरे पापा बुला रहे हैं।
मैं: आप बड़ी जल्दी पहुंच गये घर पर।
अपूर्वा: हां, मम्मी बोल पड़ी नही ंतो खूब मजे लेती आपके।
मैं: मेरे मजे लेना इतना आसान नहीं है।
अपूर्वा: हां, वो तो पता चल जाता, अगर मम्मी ना बोलती तो।
मैं: अच्छा ये नम्बर किसका है।
अपूर्वा: घर का नम्बर है।
मैं ठीक ही सेव कर लेता हूं, नही ंतो अबकी बार तो कोई और मिल गई का ताना मारा है, अगली बार पता नही क्या ताना मारा जायेगा। वैसे आपको बता दूं कि मुझे अभी कोई और नहीं मिली है। आपका चांस है, मार लो बाजी।
अपूर्वा: बकवास मत करो। वो तो मैं मजे लेने के लिए कह रही थी।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--4
गतांक से आगे ...........
तभी बाहर से सोनल अंदर आते हुए, किससे बात हो रही है छुप छुपके।
अपूर्वा: ये कौन है? तुम्हारी गर्लफ्रेंड है क्या?
मैं: नहीं यार! अपनी ऐसी किस्तम कहां, वो तो मकान मालिक की बेटी है सोनल।
अपूर्वा: फिर तेरे रूम में कया कर रही है?
मैं: बस ऐसे ही आ गई, देखने के लिए कि मैं क्या कर रहा हूं, कोई उलटा सीधा काम तो नहीं कर रहा हूं।
सोनल: कौन है फोन पर जो इतनी पूछताछ हो रही है।
मैं: लो खुद ही बात कर लो। और ये कहकर मैंने फोन सोनल को दे दिया।
सोनल: हैल्लो!
अपूर्वा: हैल्लो! जी मैं अपूर्वा बोल रही हूं।
सोनल: मैं सोनल बोल रही हूं। तुम क्या समीर की गर्लफ्रेंड हो। (चटकारा लेते हुए)
अपूर्वा (शरमाते हुए): नहीं, नहीं, वो हम साथ में काम करते हैं।
सोनल: तो गर्लफ्रेंड साथ में काम नहीं कर सकती क्या?
अपूर्वा: आप भी ना। और सुनाओं आप क्या करती हो।
सोनल: मैं तो एमटेक कर रही हूं, आप क्या काम करती हों।
अपूर्वा: मैं सॉफटवेयर इंजीनियर हूं।
सोनल: वाह! तब तो एक सॉफटवेयर मेरे लिये भी बनाना।
तभी अपूर्वा की मॉम की दोबारा आवाज आई,
अपूर्वा की मॉम: बेटा, तेरे पापा बुला रहे हैं, जल्दी आजा। कितनी देर से इंतजार कर रहे हैं।
अपूर्वाः ओके! मैं बाद में बात करती हूं, पापा बुला रहे हैं।
सोनल: ओके! बाय।
अपूर्वा: बाये।
सोनल (मेरी तरफ देखते हुए): अरे आपके दर पर आई हूं, चाय वगैरह कुछ पूछेंगे या नहीं।
मैं: चाय! मैं तो सोच रहा था कि आप ही बना कर पिलाओगी, मेरे पास तो दूध है नहीं।
सोनल: तो मैंने कौनसा दूध की फेक्ट्री लगा रखी है।
मैं: लगा तो रखी है, अब प्रॉडक्शन नहीं होता तो वो अलग बात है।
सोनल: क्या मतलब है आपका! मैंने कहा फैक्टरी लगा रखी है?
मैं: लो जी, दो दो फैक्टरियां है, मेमसाब की और इन्हें पता ही नहीं।
सोनल (मेरी कमर में मुक्का मारते हुए): बकवास ना करो! नहीं तो मैं आगे से नहीं आउंगी। ऐसी गंदी गंदी बातें करोगे तो।
 
मैं: अरे यार, मैंने अब कौनसी गंदी बातें कर दी। अच्छा ठीक है तुम बैठो मैं दूध लेकर आ रहा हूं।
यह कहकर मैं डेयरी पर दूध लेने के लिए आ गया। डेयरी पर जाकर मैंने एक किलो दूध लिया और पैसे देकर आ गया। जब मैं रूम पर पहुंचा तो सोनल बैड पर बैठी थी और उसकी सांसे बहुत तेज चल रही थी और चेहरा एकदम लाल हो रखा था।
मैं: क्या हुआ, परेशान लग रही हो।
सोनल (गहरी सांस लेते हुए): क--- क--- कुछ नहीं, बस थोड़ी गर्मी लग रही है।
मैं: अरे याार मौसम इतना अच्छा हो रखा है, पंखा चल रहा है, तो भी गर्मी लग रही है। मुझे तो नहीं लग रही है।
सोनल (थोड़ा गुस्सा होते हुए)ः तो इसमें भी मेरी गलती है, अब मुझे लग रही है तो लग रही है।
मैं: अब गलती तो तुम्हारी ही है। (मेरी बात सुनकर वो कुछ चौंक सी गई)
सोनल: म---- मेरी क्-- क्या गलती है।
मैं: अब अंदर की गर्मी नहीं निकलेगी तो गर्मी तो लगेगी ही। (मैंने चाय बनने के लिए गैस पर रख दी।)
सोनल: क-- कैसी गर्मी? क्या कहना चाहते हो?
मैं: अरे अब कोई बॉयफ्रेंड वगैरह होता तो तुम्हारी गर्मी भी निकल जाती, और बेचारे उसकी भी।
सोनल (एकदम से चिल्लाते हुए): ज्यादा बकवास करने की जरूरत नहीं है। समझ गए ना। समझते क्या हो अपने आप को। तुम्हारे रूम में बैठी हूं तो इसका मतलब ये नहीं है कि कुछ भी बकते रहोगे। और उठकर जाने लगी। (उसके ऐसे चिल्लाने से मैं थोड़ा घबरा-सा गया कि कुछ ज्यादा ही कह दिया मैंने)
मैं: अरे सॉरी यार, तुम तो ऐसे गुस्सा हो रही हो, जैसे मैं तुम्हारा रेप करने की कोशिश कर रहा हों।
सोनल (वैसे ही चिल्लाते हुए): अपनी हद में रहो। नहीं तो अभी के अभी रूम खाली करवा दूंगी। ये इतनी गंदी गंदी फिल्में रखते हो लैप्पी में, इन्हें देखकर ही इतना दिमाग खराब हो रखा है तेरा।
उसकी ये बात सुनकर मैंने अपने लेपटॉप की तरफ देखा, वा बेड पर ही रखा था और लगता रहा था जैसे वैसे ही उसको फोल्ड किया हुआ था, शटडाउन नहीं था, क्योंकि लाइटें जल रही थी। (मैं समझ गया कि इसने मेरे लैप्पी में पोर्न देखी हैं, वैसे तो मैं ज्यादा पोर्न नहीं देखता, पर ये एक दोस्त ने ई-मेल की थी दिल्ली से, कि बिल्कुल नई आईटम है, कॉलेज की, देखके मजा आ जायेगा। तो वो मैंने डाउनलोड करके डेस्कटॉप पर ही डाल रखी थी, क्योंकि नॉर्मली मेरे लैप्पी को मैं ही यूज करता हूं और कोई नहीं। मेरे लैप्पी में बस वही एक ही पोर्न पड़ी थी, और लगता है, वहीं इसने देखी है)
मैं: ओह! तो इसलिए मैडम को इतनी गर्मी लग रही थी।
सोनल: मैं बता देती हूं, मुझसे पंगा नहीं लेना, नहीं तो अंजाम बहुत बुरा होगा।
मैं: ओके मैडम जी! सॉरी, कान पकड़ता हूं। गलती हो गई, आगे से कुछ नहीं कहूंगा (और अपने मुंह पर उंगली रख ली)।
उसकी इतनी तेज आवाज सुनकर आंटी भी उपर आ गई और पूछने लगी कि क्या हुआ। मैंने अपनी आंखों के इशारे से कहा कि इसी से पूछ लो। सोनल को चुपचाप खड़े देखकर मैंने कहा।
मैं (सोनल से): अब बताओ आंटी को चुप क्यों खड़ी हो। (मुझे बाकी किसी चीज की टेंशन नहीं थी) बस इसी बात का डर था कि कहीं ये पोर्न वाली बात ना बता दे, क्योंकि वो पोर्न एक कॉलेज की लड़की की थी, जो चुपके से लड़की की नॉलेज के बिना क्लास में बनाई गई थी। नॉर्मल पॉर्न होती तो कोई दिक्कत वाली बात नहीं थी, क्योंकि आजकल तो पार्लियामेंट में भी पोर्न देखी जाती है, फिर मैं तो अपने घर पर ही देखता हूं।)
 
मैं: अरे यार, मैंने अब कौनसी गंदी बातें कर दी। अच्छा ठीक है तुम बैठो मैं दूध लेकर आ रहा हूं।
यह कहकर मैं डेयरी पर दूध लेने के लिए आ गया। डेयरी पर जाकर मैंने एक किलो दूध लिया और पैसे देकर आ गया। जब मैं रूम पर पहुंचा तो सोनल बैड पर बैठी थी और उसकी सांसे बहुत तेज चल रही थी और चेहरा एकदम लाल हो रखा था।
मैं: क्या हुआ, परेशान लग रही हो।
सोनल (गहरी सांस लेते हुए): क--- क--- कुछ नहीं, बस थोड़ी गर्मी लग रही है।
मैं: अरे याार मौसम इतना अच्छा हो रखा है, पंखा चल रहा है, तो भी गर्मी लग रही है। मुझे तो नहीं लग रही है।
सोनल (थोड़ा गुस्सा होते हुए)ः तो इसमें भी मेरी गलती है, अब मुझे लग रही है तो लग रही है।
मैं: अब गलती तो तुम्हारी ही है। (मेरी बात सुनकर वो कुछ चौंक सी गई)
सोनल: म---- मेरी क्-- क्या गलती है।
मैं: अब अंदर की गर्मी नहीं निकलेगी तो गर्मी तो लगेगी ही। (मैंने चाय बनने के लिए गैस पर रख दी।)
सोनल: क-- कैसी गर्मी? क्या कहना चाहते हो?
मैं: अरे अब कोई बॉयफ्रेंड वगैरह होता तो तुम्हारी गर्मी भी निकल जाती, और बेचारे उसकी भी।
सोनल (एकदम से चिल्लाते हुए): ज्यादा बकवास करने की जरूरत नहीं है। समझ गए ना। समझते क्या हो अपने आप को। तुम्हारे रूम में बैठी हूं तो इसका मतलब ये नहीं है कि कुछ भी बकते रहोगे। और उठकर जाने लगी। (उसके ऐसे चिल्लाने से मैं थोड़ा घबरा-सा गया कि कुछ ज्यादा ही कह दिया मैंने)
मैं: अरे सॉरी यार, तुम तो ऐसे गुस्सा हो रही हो, जैसे मैं तुम्हारा रेप करने की कोशिश कर रहा हों।
सोनल (वैसे ही चिल्लाते हुए): अपनी हद में रहो। नहीं तो अभी के अभी रूम खाली करवा दूंगी। ये इतनी गंदी गंदी फिल्में रखते हो लैप्पी में, इन्हें देखकर ही इतना दिमाग खराब हो रखा है तेरा।
उसकी ये बात सुनकर मैंने अपने लेपटॉप की तरफ देखा, वा बेड पर ही रखा था और लगता रहा था जैसे वैसे ही उसको फोल्ड किया हुआ था, शटडाउन नहीं था, क्योंकि लाइटें जल रही थी। (मैं समझ गया कि इसने मेरे लैप्पी में पोर्न देखी हैं, वैसे तो मैं ज्यादा पोर्न नहीं देखता, पर ये एक दोस्त ने ई-मेल की थी दिल्ली से, कि बिल्कुल नई आईटम है, कॉलेज की, देखके मजा आ जायेगा। तो वो मैंने डाउनलोड करके डेस्कटॉप पर ही डाल रखी थी, क्योंकि नॉर्मली मेरे लैप्पी को मैं ही यूज करता हूं और कोई नहीं। मेरे लैप्पी में बस वही एक ही पोर्न पड़ी थी, और लगता है, वहीं इसने देखी है)
मैं: ओह! तो इसलिए मैडम को इतनी गर्मी लग रही थी।
सोनल: मैं बता देती हूं, मुझसे पंगा नहीं लेना, नहीं तो अंजाम बहुत बुरा होगा।
मैं: ओके मैडम जी! सॉरी, कान पकड़ता हूं। गलती हो गई, आगे से कुछ नहीं कहूंगा (और अपने मुंह पर उंगली रख ली)।
उसकी इतनी तेज आवाज सुनकर आंटी भी उपर आ गई और पूछने लगी कि क्या हुआ। मैंने अपनी आंखों के इशारे से कहा कि इसी से पूछ लो। सोनल को चुपचाप खड़े देखकर मैंने कहा।
मैं (सोनल से): अब बताओ आंटी को चुप क्यों खड़ी हो। (मुझे बाकी किसी चीज की टेंशन नहीं थी) बस इसी बात का डर था कि कहीं ये पोर्न वाली बात ना बता दे, क्योंकि वो पोर्न एक कॉलेज की लड़की की थी, जो चुपके से लड़की की नॉलेज के बिना क्लास में बनाई गई थी। नॉर्मल पॉर्न होती तो कोई दिक्कत वाली बात नहीं थी, क्योंकि आजकल तो पार्लियामेंट में भी पोर्न देखी जाती है, फिर मैं तो अपने घर पर ही देखता हूं।)
 
आंटी (सोनल से): क्या हुआ बेटा! ऐसे क्यों चिल्ला चिल्ला कर बातें कर रही थी।
सोनल: कुछ नहीं मॉम! वो बस मजाक कर रहे थे।
आंटी: अरे तो मजाक में ऐसे चिल्लाते हैं क्या।
सोनल: मॉम!
आंटीः मॉम की बच्ची! तू नहीं सुधरेगी, मैं तो पता नहीं कि क्या हो गया जो इतनी चिल्ला कर बातें कर रही हैं।
कहकर आंटी अंदर आई। चाय बन गई थी, बनाई तो दो कप ही थी, पर तीन कप में डालकर मैंने एक कप आंटी को दिया और दूसरा सोनल को और खुद लेकर पीने लगा।
आंटी अंदर आकर बैड पर बैठ गई। सोनल पास में रखी चेयर पर बैठ गई और आंटी के साथ बैड पर ही बैठ गया।
आंटी (चाय पीते हुए): बेटा तू ज्यादा परेशान न किया कर समीर को।
सोनल: मॉम! कभी कभी तो हम मिलते हैं।, तब भी परेशान ना करूं तो फिर मिलने का क्या फायदा।
आंटी: तो क्या परेशान करने के लिए ही मिला जाता है किसी से।
सोनल: कहीं नहीं इनको काट लिया मैंने कहीं से, बस मजाक ही तो कर रही थी।
आंटी (चाय खत्म करते हुए): ओके बेटा! मैं चलती हूं, सब्जी बननी रख रखी है, कहीं जल ना जाये। और ये कहकर आंटी चली गई।
मैंने भी चाय खत्म की और मेरे और आंटी के कप को रसोई में रख दिया। सोनल अभी भी चाय को हाथ में पकड़े बैठी थी और मेरी तरफ घूर रही थी।
मैं: अब क्या कच्चा खाने का मन है, कैसे घूर रही है। जंगली बिलाई।
सोनल: नहीं सोच रही हूं पका कर खा लूं। और हंसने लगी।
सोनल ने भी चाय खत्म की और कप को रसोई में रख कर मेरे पास खड़ी होकर मुझे घूरने लगी। मैं बैड पर बैठा था।
मैं: क्या हुआ! मैंने सॉरी बोला ना यार। अब बच्चे की जान लोगी क्या।
सोनल: चेहरे से तो बड़े सीधे-साधे, भोले-भाले दिखते हो, पर हो नहीं।
मैं: चेहरे से तो तू भी एकदम गुंडी टाइप की दिखती है। पर सच्चाई क्या है पता नहीं।
सोनल: अच्छा मैं तेरे को गुंडी दिखती हूं।
मैं: अरे मैंने कब कहा कि गुंडी दिखती हो, मैंने कहा कि चेहरे से दिखती हो।
सोनल: हां मतलब तो वही हुआ ना, अब मैं दिखाती हूं तेरे को मैं कितनी बड़ी गुंडी हूं।
मैं: जरूरत ही नहीं है। चेहरे से दिख रहा है।
सोनल (थोड़ी गुस्से वाली और रोनी सूरत बनाते हुए): मैं है ना आपकी बढ़िया वाली धुलाई कर दूंगी, नहीं तो बाज आ जाओ अपनी हरकतो से।
मैं: ओके सॉरी बाबा! अब कुछ नहीं।
सोनल: अच्छे बच्चे की तरह कान पकड़ो।
मैं: ओके लो पकड़ लिए। अब खुश।
सोनल: हां खुश।
मैं: चलो, मैंने तो सोचा था कि मैं तो गया आज। पता नहीं ऐसा क्या कह दिया मैंने जो इतनी भड़क गई।
सोनल: बकवास ना करो। वो तो बस मैं आपको अच्छा आदमी मानती हूं, इसलिए मॉम से कुछ नहीं कहा, नहीं तो और कोई होता तो अब तक तो सामान के साथ घर से फाहर फेंक देती।
मैं: हां जी, अब घर तुम्हारा है तो कुछ भी कर सकती हो।
सोनल: सॉरी!
मैं: किसलिए।
सोनल: सॉरी! आजतक किसी ने मुझसे ऐसी बाते नहीं की थी तो मैं एकदम गुस्सा हो गई और इतना भल्ला-बुरा कह दिया। वो आपके लैप्पी में वो विडियो देखकर पहले ही दिमाग खराब हो गया था और फिर आपने ऐसी बाते कहीं तो, एक दम बहुत गुस्सा आ गया।
मैं: ओके! सॉरी तो मैं बोलता हूं जो तुम्हें गुस्सा दिलाया।
सोनल: ओके! सेक हैंड।
मैं: ओके (और मैंने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया सोनल ने भी अपना हाथ आगे बढ़ाया और हमने हाथ मिलाया)।
सोनल को हाथ को टच करते ही मेरे शरीर में गुदगुदी सी हुई। उसका हाथ एकदम फूल की तरह कोमल था। हाथ मिलाते हुए सोनल थोड़ा आगे आ गई और फिर वैसे ही हाथ मिलाते हुए मेरे गले लग गई। गले लगने से मेरा हाथ जो उससे मिलाया हुआ था, उसके नाथि के नीचे स्पर्श होने लगा। सोनल ने अपना दूसरा हाथ मेरी पीथ पर रख दिया और मुझे पूरी तरह से सटकर गले लग गई। उसके एकदम गले लगने से मैं हैरान रह गया। कहां तो अभी छोटी सी बात पर इतना गुस्सा हो रही थी, और कहां अब गले लग गई है। परन्तु उससे गले लगकर मुझे मजा बहुत आ रहा था। उसका बायां बूब मेरे दायें हाथ से दबा हुआ था। मैंने उसका हाथ छोड़ दिया और उसने भी मेरा हाथ छोड़कर दूसरे हाथ को भी मेरी गर्दन में लपेट दिया। मेरे शरीर में हलकी हलकी चिंटिंया रेंग रही थी। सच में बहुत मजा आ रहा था। मैंने अपना दायां हाथ जो अभी भी उसके मेरे बीच में था को धीरे-धीरे उपर किया और उसके बूब्स को टच करते हुए बाहर निकालकर उसके कंधे को पकड़ा। सोनल अभी भी ऐसे ही मुझसे लिपटी हुई थी। उसकी सांसे काफी तेजी से चल रही थी। मैंने अपने दोनों हाथों को उसके कंधे पर रख दिया। मैं उसे अपनी बांहों में लेने में थोड़ा घबरा रहा था कि कहीं फिर से गुस्सा ना हो जाए।
 
जब काफी देर तक भी सोनल मेरे गले लगी रही तो मैंने अपने हाथों को उसकी कमर में डाल दिया और उसे थोड़ा टाइट पकड़ कर अपने साथ चिपका कर उसकी बॉडी को फिल करने लगा। सोनल ने मेरे कंधे पर अपने चेहरे को थोड़ा रगड़ा और वापिस कंधे पर सिर रख दिया। मैंने अपने हाथों से धीरे धीरे सोनल की कमर को सहलाना चालू कर दिया। मैं अपने हाथ उसकी कमर में बहुत ही धीरे से चला रहा था, ताकि अगर उसके मन में ऐसा कुछ ना हो तो वो ये ना समझे कि मैं उसके साथ मजे कर रहा हूं।
धीरे धीरे सोनल का शरीर गरम होने लगा। मुझे मेरे कंधे पर उसका गरम चेहरा महसूस हो रहा था। सोनल को गरम होते देख मेरे पप्पू ने भी शॉर्ट के अंदर हलचल मचानी शुरू कर दी। और कुछ ही सेकंड में एकदम तन कर खड़ा हो गया। सोनल की जांघें और मेरी जांधे एकदम एक दूसरे से सटी हुई थी, तो शायद मेरे पप्पू के हलचल करने से उसे वो अपनी जांघों पर महसूस हो रहा होगा। सोनल ने अपने हाथों को थोड़ा ढीला किया और अपना चेहरा मेरे सामने करते हुए मेरी आंखों में देखने लगी। मैंने भी अपने हाथों को वापिस उसके कंधे पर रख दिया।

क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--5
गतांक से आगे ...........
सोनल की आंखें एकदम लाल हो गई थी, वो पूरी तरह से हवस में डूब चुकी थी। उसके हाथ अब भी मेरी गर्दन पर हल्के हल्के सहला रहे थे। उसने अपने एक हाथ को मेरे बालों में लाते हुए मेरे बालों को सहलाने लगी और ऐसे ही मेरी आंखों में आंखें डालकर देखती रही। मैंने धीरे से अपना चेहरा उसके चेहरे के करीब किया और थोड़ा रूककर उसका एक्सप्रेशन देखने लगा। उसने अपनी आंखें नीचे कर ली और उसके गुलाबी होंठ फडकने लगे। उसकी सांसे बहुत ही तेज चल रही थी। मैंने अपनी नजरों को थोड़ा झुकाया, उसके बूब्त तेजी से उपर नीचे हो रहे थे और उसके पैर थोड़े थोड़े कांप रहे थे। मैंने वापिस उसके चेहरे की तरफ देखा तो वो अभी भी नीचे ही देख रही थी। सोनल का चेहरा एकदम गुलाबी हो गया था। मैंने अपने चेहरे को थोड़ा और आगे करके उसके गालों पर अपने होंठ रख दिए। सोनल के मुंह से एक सिसकारी निकली और वो वापिस मुझसे चिपक गई। उसके चिपकने से मेरा लंड फिर से उसकी जांघों पर टक्कर मारने लगा।
तभी सीढ़ियों में से किसी के आने की आवाज सुनाई दी। मैंने उसे जल्दी से खुद से अलग किया और बैड पर बैठा दिया। उसकी कुछ समझ में नहीं आया कि क्या हुआ और वो हैरान होकर मेरी तरफ देखने लगी। मैंने एक गिलास में पानी लेकर उसे पीने को दिया और खुद किचन में आकर पानी पीने लगा। तभी बाहर से आंटी की आवाज आई। तब उसकी समझ में आया कि मैंने उससे अलग क्यों किया।
आंटी (अंदर आते हुए): सोनल बेटा! रीत का फोन आया हुआ है, तेरे से बात करने की कह रही है।
सोनल (पानी पीते हुए): ओके मोम, अभी आ रही हूं, आप चलो।
आंटी वापिस नीचे जाने लगी। सोनल जल्दी से मेरे पास आई और पहले मेरे गाल पर किस की और फिर मेरे माथे को चूमकर जल्दी से बाहर निकल गई।
मैं आकर बैड पर बैठ गया और हमारे बीच अभी अभी जो कुछ हुआ उसके बारे में सोचने लगा। आज से पहले हमारी कोई ज्यादा बातचीत भी नहीं होती थी, और कोई ज्यादा मिलना भी नहीं होता था, पर आज जो कुछ हुआ वो मुझे बहुत हैरान कर रहा था। यही सब सोचते सोचते मैं बैड पर लेट गया और मुझे कब नींद आई पता ही नहीं चला।
सुबह 5 बजे का अलार्म बजा तो मेरी आंख खुली। उठते ही मुझे बहुत जोरो की भूख लगी हुई थी। मैं रसोई में गया और चाय बनाई, और उसके साथ कुछ बिस्किट और नमकीन लेकर वापिस बैड पर आकर बैठ गया। मुझे सिर में हल्का हल्का दर्द महसूस हो रहा था। जब मुझे शाम की बातें फिर से याद आई तो मेरे होठों पर प्यारी सी मुस्कान आ गई। चाय पीकर मैं कमरे से बाहर आ गया। अभी एक दो बंदा ही बाहर गली में दिख रहा था। आज मैं जल्दी उठा गया था। बाकि के दिनों तो तैं अलार्म को सनूज ही करता रहता था और कोई 7 बजे जाकर उठता था। आज जल्दी उठने के कारण टाइम पास नहीं हो रहा था तो मैं पार्क में टहलने के लिए चल पडा।
 
पार्क में ज्यादा लोग नहीं थे, बस कुछेक अंकल और आंटी जॉगिंग कर रहे थे। मैं जाकर एक बेंच पर बैठ गया। एक अंकल काफी तेजी से दौड़ रहे थे। मैं बैठा-बैठा उन्हें दौड़ते हुए देखने लगा। शायद अंकल ने मुझे उन्हें देखते हुए देख लिया था, जब वो तीसरी बार मेरे पास से गुजरे तो हाथ से मेरी तरफ हाथ से साथ में दौड़ने का इशारा किया, तो मैं भी उनके साथ दौड़ने लग गया।
अंकल: क्या बेटा! पार्क में आकर बैठ गये ऐसे ही। अभी तो जवानी आई ही है, सुबह सुबह थोड़े जॉगिंग वगैरह करनी चाहिए, शरीर भी फिट रहेगा।
तभी पिछे से किसी औरत की आवाज आयी: हां, तुमने तो बड़ी जॉगिंग की है ना अपनी जवानी में।
मैंने पीछे मुड़कर देखा तो एक आंटी पीछे जॉगिंग करते हुए आ रही थी, वो थोड़ा धीरे दौड़ रही थी, इसलिए थोउ़ी पीछे ही थी, पर ज्यादा पीछे भी नहीं थी।
अंकल: मेरी वाइफ है!
मैंने दोबारा पीछे देखते हुए आंटी को हाय कहा तो आंटी ने भी हाय बेटा कहा।
अंकल: कहा रहते हो बेटा!
मैंने अंकल को अपने घर का पता समझाया।
अंकल: क्या करते हो।
मैं: जॉब करता हूं अंकल।
अंकल: कौनसी कम्पनी में बेटा।
मैंने अंकल को कम्पनी का नाम बताया।
अंकल: हम्मम! कम्पनी तो अच्छी है।
अंकल: शादी हो गई बेटा तुम्हारी।
मैं: नहीं अंकल, अभी कुंवारा ही हूं।
अंकल: हम, इधर उस सामने वाले मकान में ही रहते हैं।
अंकल: रोज आते हो बेटा पार्क में टहलने।
अंकल ने इशारे से बताते हुए कहा, और मैंने उनके बताये हुए मकान की तरफ देखा तो बहुत ही शानदार मकान था।
मैं: नहीं अंकल, वो सुबह जल्दी उठा नहीं जाता तो, इसलिए रोज तो नहीं आ पाता। आज जल्दी आंख खुल गई थी तो आ गया था।
हम दौड़ते हुए पार्क के दूसरी साइड में पहुंच गये थे तभी पार्क के बाहर से आवाज से किसी लड़की की गधुर आवाज थोड़ी तेजी से आती हुई सुनाई पड़ी।
लड़की: पापा! शर्मा अंकल आये हुए हैं, आपको बुला रहे हैं।
मैंने जब आवाज की तरफ देखा तो वोही लड़की थी जो अक्सर शाम के वक्त अपने कॉर्टून टाइप डॉगी के साथ घूमने आती है, वो पार्क की दीवार के साथ बाहर की तरफ खड़ी थी और हमारी ही तरफ देख रही थी। उसकी आवाज सुनकर मैंने थोड़ा इधर उधर देखा कि किसे बुला रही है, तभी अंकल बोले।
अंकल: आ रहा हूं बेटा।
ये जानकर कि तो ये इनकी लड़की है, मुझे थोड़ी खुशी हुई, क्योंकि अब तो अंकल के साथ थोड़ी जान-पहचान हो गई है।
अंकल ने मुझसे कहा, ओके बेटा, चलता हूं, आया करो पार्क में डेली, शरीर स्वस्थ रहेगा। और अंकल बाहर की तरफ चल दिये।
अपने पापा को मुझसे बातें करते हुए देखकर वो लड़की मुझे देखने लगी, मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मुझे ही देख रही थी।
तभी पीछे से आंटी की आवाज आई, ओके बेटा बाये,
मैंने आंटी की तरफ देखते हुए, बाये आंटी। और मैं फिर से उसी लड़की की तरफ देखने लगा, वो अब अपने पापा के पीछे पीछे जा रही थी, और पिछे मुड मुडकर मेरी तरफ देख रही थी।
उसने व्हाइट पजामी और ब्लू टी-शर्ट पहन रखी थी।
उस पजामी में उसके कुल्हे एकदम जबरदस्त लग रहे थे। ज्यादा मोटे भी नहीं थे और छोटे भी नहीं थे, एकदम परफेक्ट साइज के थे। पजामी में से उसके दोनों कुल्हों की शेप एकदम शानदार तरीके से दिखाई दे रही थी। मेरे पप्पू ने धीरे से अंगडाई ली तो मैंने उसे समझाया कि सो जा बेटा, अभी टाइम नहीं आया है।
मेरे देखते देखते अंकल और वो लड़की अपने घर में घुस गये और उनके पीछे पीछे आंटी भी घर के अंदर चली गई।
मैं एक राउंड और लगाता हुआ अपने घर की तरफ आ गया।
उपर आकर मैंने टाइम देखा तो साढे छह होने वाले थे। मैं आकर अपने बैड पर बैठ गया और अपने लैपटॉप को ऑन करके गाने लगा दिये और खुद बाहर छत पर आकर मुंडेर के पास खड़ा हो गया।
तभी किसी लड़की की आवाज मेरे कानों में पड़ी - हाय! मैंने पीछे देखा, तो कोई नहीं था, तभी फिर से आवाज आई इधर साथ वाली छत पे।
मैंने घुमकर देखा तो शाम को जो लड़की सोनल से बात कर रही थी साथ वाली छत पर वो खड़ी थी और मेरी तरफ देखकर मुस्करा रही थी। मैंने भी उसे हाय कहा।
 
उसने कहा मेरा नाम पूनम है।
मैं: नाइस नेम। मेरा नाम समीर है।
पूनम: समीर, ठंडी हवा का झोंका।
और हम दोनों हंस दिये। वो अपनी छत की मुंडेर के पास आकर खड़ी हो गई और मैं उसकी तरफ मुंह करके वहीं पर खड़ा खडा हुआ मुंडेर के साथ लग गया।
पूनम: मैं रोज सुबह छत पर टहलती हूं, पहले तो कभी आप बाहर नहीं दिखे।
मैं: हंसते हुए! मैं दिनचर हूं, रात को बाहर नहीं घूमता।
पूनम: अरे तो अब कोई रात थोड़े ही है।
मैं: हां, पर मुझे उठते उठते 7 तो बज ही जाते हे।
पूनम: ओह माई गोड! 7 बजे उठते हो। कितने लेजी हो।
मैं: अब कुछ भी कहो। जल्दी उठकर करना क्या है?
पूनम: हम जैसो से बातचीत कर लिया करो। मैं 6 बजे ही उपर आ जाती हूं टहलने के लिए।
मैं: ओके जी अब आपने कहा है, आगे से आपको इधर ही मिलेंगे।
पूनम: अपना दायां हाथ मेरी तरफ बढ़ाते हुए, फ्रेंड्स!
पूनम के ऐसा कहते ही मेरे मन में लड्डू फूटने लगे। और मैं अपनी जगह से चलते हुए उसके पास गया और अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसके हाथ को थाम लिया कहा 'फ्रेंड्स'।
पूनम: हाव स्वीट!
पूनम: अकेले ही रहते हो।
मैं: हां जी, अब किस्मत ही ऐसी है कि अकेले ही रहना पड़ता है।
पूनम: बड़ी अच्छी किस्मत है। मैं कितना अकेला रहना चाहती हूं, पर घरवाले रहने ही नहीं देते।
मैं: अरे कुछ नहीं है अकेले रहने में। बोर होते रहो हमेशा।
पूनम: क्यों, बोर क्यों होना है, फ्रेंड्स है ना, बोरियत दूर करने के लिए।
मैं: मेरे पास तो कोई नहीं आता मेरी बोरियत भगाने के लिए।
पूनम: अब तक मैं आपकी फ्रेंड नहीं थी ना, अब देखना कैसे आपकी बोरियत दूर हो जायेगी।
मैं: अच्छा जी, देखते हैं।
तभी सोनल उपर आते हुए, गुड मॉर्निग समीर जी।
मैं: गुड मॉर्निग सोनल जी, क्या बात है, आज सुबह सुबह हमारे दर पे।
पूनम को वहां खडे देखकर सोनल ने उसे भी गुड मॉर्निग कहा और हमारे पास आ गई। सोनल बिल्कुल मुझसे सटकर खडी हो गई और पूनम से हैंड सेक किया।

सोनल: क्या बातें चल रही थी सुबह सुबह पड़ोसियों में।
पूनम: बस यार ऐसे ही नॉर्मल।
सोनल: ओके यार नहीं बतानी तो कोई बात नहीं।
तभी नीचे से आंटी की आवाज आई, सोनल बेटा!
सोनल: आई मम्मी जी। और बायें कहते हुए नीचे चली गई।
मेरे मोबाईल में 7 बजे का अलार्म बज गया।
मैं: आके बाये पूनम जी! ऑफिस के लिए तैयार हो जाता हूं,
पूनम: ओके बाये समीर जी। फिर मिलते हैं।
मैं: स्योर।
मैं अंदर आकर खाने की तैयारी करने लगा और खाने बनाने के बाद नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया। नहा धोकर टाइम देखा तो सवा आठ हो गये थे। ज्यादा भूख तो नहीं थी, फिर भी खाना तो खाना ही था, तो थोड़ा बहुत खाना खाया और बाकी के खाने को फ्रिज में रख दिया।
बाइक की चाबी उठाकर मैं रूम को लॉक लगाकर नीचे आ गया। नीचे सोनल अपनी स्कूटी निकाल रही थी। अपनी बाईक को वहां खड़ी ना पाकर एकबार तो मुझे आश्चर्य हुआ और मेरे मुंह से निकला मेरी बाइक कहां गई।
सोनल: मैंने तो शाम को भी नहीं देखी इधर।
तभी मुझे याद आया कि अरे हां, बाइक तो बॉस के घर पर ही क्षड़ी है।
मैं: अरे, यार! बइक तो बॉस के घर पर है। बस में ही जाना पड़ेगा।
सोनल: क्यों, उधर क्यों हैं।
मैं: वो कल आते वक्त पंक्चर हो गई थी, तो मैं वहीं खड़ी करके आ गया था।
सोनल: तो कल भी बस में आये थे।
मैं: नहीं, वो अपूर्वा छोड़कर गई थी।
सोनल: वाह जी, बहुत अच्छी दोस्त है आपकी।
मैं: अब वो तो है ही जी।
सोनल: सिर्फ दोस्त ही है या उसके आगे कुछ।
मैं (मजे लेते हुए): अब दोस्त से तो ज्यादा ही है।
सोनल: तो गर्ल फ्रेंड है। कल तो बडे कह रहे थे कि बस दोस्त ही है।
मैं: मैंने कब कहा कि गर्लगफ़्रेंड है। दोस्त से ज्यादा बेस्ड फ्रेंड होता है न कि गर्ल फ्रेंड।
सोनल: ओह! आई सी, तो बेस्ट फ्रेंड है।
सोनल: चलो मैं आपको छोउ़ देती हूं, आपके ऑफिस। सी-स्कीम में ही है ना।
मैं: अरे नहीं वो बॉस के घर जाना है।
सोनल: कहां पर है बॉस का घर, और घर पे क्या करोगे।
मैं (मैंने सारी बात बतानी सही नहीं समझी): वो ऑफिस में थोड़ा काम चल रहा है तो इसलिए कुछ दिन के लिए घर पे शिफ्रट कर लिया है ऑफिस।
सोनल: तो ये बात है।
मैं: बापू नगर में है घर।
सोनल: वॉव! मैं यूनिवर्सिटी ही जा रही हूं।
मैं: यूनिवर्सिटी क्या करोगी, तुम तो महारानी कॉलेज में पढती हो ना।
सोनल: वो बुक वर्ल्ड से कुछ किताबे लेनी हैं, तो इसलिए पहले यूनिवर्सिटी से किताबें लूंगी। फिर वहां से कॉलेज जाउंगी।
(राजस्थान यूनिवर्सिटी बापू नगर के सामने ही है और यूनिवर्सिटी वाला रोड सीधा महारानी कॉलेज ही जाता है)
मैं: ओके! चलो।
सोनल ने अपनी स्कूटी को बाहर निकाला और स्टार्ट करके कहा आ जाओ।
मैं जाकर स्कूटी पर पीछे बैठ गया। सोनल ने स्कूटी दौड़ा दी। मैं थोड़ा पीछे होकर बैठा था, तभी सोनल ने जोर से ब्रेक लगा दिये। उसके ब्रेक लगाने से मैं एकदम से सोनल की पीठ से जा टकराया।
मैं: क्या हुआ?
सोनल: आप चलाओ ना, मैं पीछे बैठती हूं।
सोनल के ऐसा कहने पर मुझे अपूर्वा के साथ की गई कल की ड्राइव याद आ गई।
मैं: ओके! उतरो।
सोनल स्कूटी से उतर गई और मैं आगे होकर बैठ गया और सोनल स्कूटी पर पीछे बैठ गई।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--6
गतांक से आगे ...........
सोनल ने अपने हाथ मेरे कंधो पर रख दिये और अपने बूब्स मेरी पीछ में दबा दिये। मैंने ड्राइविंग शुरू कर दी। जैसे ही हम मेन रोड पर आये तो सोनल चिल्लाई, रोको, रोको। मैंने स्कूटी साइड में रोक कर पूछा।
मैं: क्या हुआ!
सोनल: वो देखो सामने मामा जी खड़े हैं।
मैंने देखा सामने ट्रेफिक पुलिस वाले खड़े थे और जबरदस्त वाली चैकिंग चल रही थी।
मैं: यार! इनको भी सुबह सुबह भी चैन नही है।
सोनल स्कूटी से नीचे उतर गई और मैं भी स्कूटी को खडी करके नीचे उतर गया। सोनल ने स्कूटी की सीट को उठाया और उसमें से एक छोटा सा हेलमेट निकाला और मेरी तरफ बढ़ाते हुए।
सोनल: लो इसे पहन लो। मैं आपके पीछे दुबक जाउंगी तो पता ही नहीं चलेगा कि पीछे भी कोई बैठा है।
मैंने हेलमेट पहना और वापिस से ड्राइव शुरू कर दी। मैंने साइड मिरर से देखा तो सोनल पूरी तरह से मेरे पीछे दुबक गई थी। सामने से तो वो दिखाई ही नहीं दे रही थी। ऐसा लग रहा था कि पीछे कोई नहीं बैठा है।
सोनल ने अपना चेहरा मेरी कमर पर टिका रखा था और अपने हाथ मेरी कमर पर पीछे की तरफ टिका रखे थे। मुझे उसकी सांसे अपनी पीठ पर महसूस हो रही थी। जैसे ही हम पुलिस वालों के पास से गुजरने लगे तो एक पुलिस वाला भागकर हमारे सामने आ गया।
पुलिस वाला: चलो साइड में लगाओ।
मैं: क्या हुआ सर जी!
प्ुलिस वाला: चलो साइड में लगाओ और लाइसेंस दिखाओ।
मैंने स्कूटी साइड में खडी कर दी और सोनल उतरकर मुझसे दूर जाकर खड़ी हो गई।
एक दूसरा पुलिस वाला मेरे पास आया और लाइसेंस दिखाने को कहा, मैंने लाइसेंस दिखा दिया।
पुलिस वाला: कागज पूरे हैं।
मैं: जी सर जी, एकदम पूरे हैं। (वैसे मुझे पता नहीं था कि कागज है भी या नहीं।)
पुलिस वाला: हेलमेट कहां है?
मैंने हेलमेट दिखाते हुए (जो कि मेरे हाथ में था) ये रहा सर जी।
पुलिसवाला: ठीक है जाओ। (और वो पुलिसवाला दूसरे बाइक वाले के पास चला गया।
मैंने सोनल की तरफ देखा और आंख मार दी। सोनल समझ गई कि मामला सुलझ गया है। और हम दोनों मुस्करा दिये।
सोनल कुछ और आगे जाकर खडी हो गई और स्कूटी को स्टार्ट करके मैं उसके पास जाकर रोक दी। सोनल पीछे आकर बैठ गई।
सोनल: बच गये आज तो, नहीं तो पक्का चालान होना था।
मैं: अरे, वो तो दूर आकर खडी हो गई, नहीं तो हेलमेट का तो होना ही था।
तभी मेरा फोन बजने लगा, मैंने फोन जेब से निकाला तो अपूर्वा का फोन था। मैंने कॉल रिसीव करके हैल्लो किया।
अपूर्वा: हैल्लो! तैयार हो गये, मैं आ रही हूं लेने के लिए।
मैं: हाव स्वीट! तुम्हें याद था।
अपूर्वा: क्यों याद क्यों नहीं रहेगा।
मैं: अरे नहीं यार, वो सुबह मैं तो भूल ही गया था बाइक बॉस के घर पर ही। जब नीचे आया तो याद आया कि बाइक तो आज है ही नहीं।
अपूर्वा: मुझे तो याद है जी। ठीक है मैं आ रही हूं। तैयार रहना।
मैं: अरे नहीं, मैं वो सोनल के साथ आ रहा हूं। वो भी उधर ही तो जाती है महारानी कॉलेज।
अपूर्वा (अबकी बार अपूर्वा की आवाज कुछ धीमी थी): ठीक है! मैंने तो घर पर मम्मी को बोलकर जल्दी नाश्ता तैयार करवाया, जल्दी तैयार हुई, कि समीर को भी लेने जाना है। पर मुझे क्या पता था कि जनाब के लिए और भी लड़कियां तैयार बैठी है, ड्रॉप करने के लिए। ओके! आ जाओ, ऑफिस में मिलते हैं।
मैं कुछ कहता उससे पहले ही फोन कट हो गया था। अपूर्वा की बाद वाली बातों से कुछ उदासी झलक रही थी। जिससे मेरा मन भी थोड़ा उदास हो गया।
मैंने मोबाइल को जेब में रखा, और सोनल से कहा चलें।
 
Back
Top