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Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

मेरी बात सुनते ही सोनल एकदम से उठी और मेरे उपर चढकर बैठ गयी। उसके कुल्हे मेरी जांधों पर जा टिके और उसके हाथ मेरी छाती पर।
उसने अपने कुल्हों के मेरी जांघों पर धीरे धीरे घिसना चालू कर दिया, जिससे मैं पूरी तरह से गर्म हो गया और मेरे मुंह से हल्की आह निकल गई।
सोनल ने मेरी आंखों में देखते हुए अपने नीचले हाेंठ को दांतों के नीचे दबा दिया और अपने कुल्हों को तेजी से मेरी जांघों पर घिसने लगी।
मुझे मेरा लिंग उसके कुल्हों के बीच में महसूस हो रहा था। मैं मदहोश होने लगा। ये मेरे साथ पहली बार था कि कोई लड़की मेरे इतने करीब आ चुकी थी कि वो मेरी जांघों पर बैठी हुई थी। मैं अब तक पूरी तरह वर्जिन था, कभी हैस्तमैथुन भी नहीं किया था। मेरे सभी दोस्तों मुझे उकसाते रहते थे गांव में, पर मैंने हमेशा खुद पर कंट्रोल रखा था।
सोनल ने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिये। मैंने उसके हाथों को पकड़ा तो उसने मेरे हाथों को एक तरफ झटक दिया। क्योंकि मुझपर भी मदहोशी छा चुकी थी, इसलिए मैं ज्यादा विरोध नहीं कर पा रहा था। धीरे धीरे करके सोनल ने मेरी शर्ट के सभी बटन खोल दिये और शर्ट को साइड में कर दिया। फिर वो हल्का सा उपर को उठी और मेरी बनियान को खींचकर अपने नीचे से निकाला, परन्तु मेरी बनियान थोड़ी सी उपर आकर अठक गई, क्योंकि वो मेरी पीठ के नीचे दबी हुई थी।
सोनल: थोड़ा उपर उठो।
मैं: नहीं, सोनल ये ठीक नहीं है।
मेरी बात सुनक सोनल जोर जोर से हंसने लगी।
उसको इस तरह हंसते देखकर मैं असमंझस में पड गया कि ये इसे क्या हो गया है, अब तक तो मेरी इज्जत उतारने लगी हुई थी और अब पागलों की तरह हंस रही है।
थोडी देर में जब उसकी हंसी कम हुई तो उसने हंसते हुए ही कहा।
सोनल: त--- तुम तो एकदम लड़कियों की तरह बातें कर रहे हो। और ऐसे बिहेव कर रहो है जैसे तुम्हारा बॉयफ्रेंड तुम्हारे साथ जबरदस्ती कर रहा हो।
उसकी बात सुनकर मैं थोड़ा सा झेंप गया।
मैं: तो ---- तो --- तुम तो मेरी गर्लफ्रेंड भी नहीं हो, फिर भी मेरे साथ जबरदस्ती कर रही हो।
सोनल: लगता है, अभी तक कुंवारे हों। आजतक किसी लड़की को नहीं छुआ है आपने। बहुत मजा आने वाला है मुझे तो।
मैं उसकी बात सुनकर थोड़ा घबरा गया, कि ये क्या करने वाली है आज।
सोनल ने थोड़ा उपर होते हुए अपने हाथ मेरी कमर के नीचे डालकर मुझे थोड़ा सा उपर उठाया और मेरी बनियान को उपर की तरफ खींच लिया।
वैसे तो वो कोई पहलवान नहीं थी, जो मेरे साथ जबरदस्ती करती, पर मेरे साथ पहली बार कोई लड़की इतनी आगे तक पहुंची थी तो मुझ पर मदहोशी छाई हुई थी, जिस वजह से मैं ज्यादा विरोध नहीं कर पा रहा था।
मेरी बनियान को उपर करने के बाद सोनल मेरे उपर लेट गई और मेरी आंखों में देखते हुए (जो मदहोशी के कारण थोड़ी सी बंद थी) अपने होंठ मेरे होंठो पर टिका। मैंने हल्का सा विरोध किया, पर उसने मेरे हाथों को अपने हाथों में फंसा कर जकड़ सा लिया और मेरे होठों को चूसने लगी। मैंने आजतक किसी लड़की को किस नहीं की थी, तो मुझे किस के बोर में ज्यादा मालूम नहीं था। बस इतना ही पता था कि होंठो पे किस की जाती थी।
सोनल बुरी तरह से मेरे होंठो को चूस रही थी, मानो उन्हें खा जायेगी। अचानक उसने अपनी जीभ मेरे होंठो पर फिरानी शुरू कर दी। उसकी इन सभी हरकतों से मेरे शरीर में करंट दौड़ने लगा था और मेरा लिंग फटने को हो गया था। मुझे लिंग में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था।

सोनल मुझे किस करते हुए थोडी नीचे को सरक गई जिससे उसके बूब्स मेरी छाती में धंस गये। उसके निप्पल मुझे छाती में चुभ रहे थे। सोनल की जांघे मेरी जांघों पर सैट हो गई और वो अपनी जांघों को मेरी जांघों पर रगड़ने लगी। अब दर्द मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उसने अपने हाथ वापिस से मेरे सिर पर रख दिये थे और मेरे बालों को सहला रही थी। मेरे हाथ फ्री होते ही मैंने उसके गालों पर रख दिये और उन्हें सहलाने लगा।
सोनल मेरे उपर वाले होंठ को चूंस रही थी तो उसका नीचे वाला होंठ मेरे हाेंठो के बीच होने के कारण मैंने उसका रसपान करना शुरू कर दिया।
मेरी इस हरकत से शायद वो ज्यादा उतेजित हो गई जिस कारण और भी ज्यादा वाइल्ड तरीके से मेरे होंठों को चूसने लगी। उसने मेरे होंठों को हलका सा काट भी लिया था, जिससे मेरे होंठों में दर्द होने लगा था। अब मुझे सांस लेनी भी मुश्किल होती जा रही थी। मेरी सांस बुरी तरह से उखड़ चुकी थी।
मैंने अपने हाथों से उसके कंधों को पकड़ा और उसे नीचे बैड पर पटक दिया और जोर जोर से सांसे लेने लगा। वो भी हांफ रही थी। उसने अपना एक पैर मेरे पेट पर रखते हुए अपने एक हाथ को मेरे सीने पर फिराने लगी। मेरी सांसे अभी भी बहुत तेज चल रही थी। जब उसकी सांसे थोड़ी नॉर्मल हुई तो वो फिर से उठ बैठी और मेरी तरफ खा जाने वाली नजरों से देखने लगी। उसके आंखों में लाल डोरे तैर रहे थे और गाल एकदम लाल हो चुके थे। उसके बूब्स उसकी सांसों के साथ तेजी से उपर नीचे हो रहे थे।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--10
गतांक से आगे ...........
मेरी नजर उसके बूब्स पर जाकर अटक गई। जब सोनल ने देखा कि मैं उसके बूब्स को घूर रहा हूं तो उसने एक कातिल मुस्कान मेरी तरफ पास की और अपने निचले होंठ को अपने दांतो तले दबा लिया। अब मेरी सांसे कुछ कुछ नॉर्मल होनी शुरू हो गई थी।
सोनल उठकर मेरी जांघों के बीच आकर बैठ गई और फिर से अपनी उंगली को मेरे पेट पर फिराने लग गई। मेरे पेट में गुदगुदी हो रही थी। तभी उसने जींस के उपर से ही मेरे लिंग को पकड लिया। वो सही तरह से तो उसकी पकड में नहीं आया, परन्तु मेरे शरीर में एकदम करंट दौड़ गया। कुछ देर वैसे ही पकड़े रहने के बाद वो उसे धीरे धीरे सहलाने लगी। मुझे जहां पहले दर्द हो रहा था अब दर्द के साथ साथ मजा भी आने लगा। अचानक उसने मेरी बेल्ट को पकड़ लिया और खोल दिया और उसे खींचकर निकालने लगी पर मेरे नीचे दबी होने के कारण निकाल न सकी।
उसने बेल्ट वो वैसे ही छोड़कर मेरे जींस के किनारों से अपनी उंगली अंदर की तरफ डालकर फिराने लगी। मेरे पेट ने उछलना शुरू कर दिया। वो मंद मंद मुस्करा रही थी। और अपनी उंगली को मेरे पेडू पर फिरा रही थी। तभी अचानक ही उसने अपना मुंह मेरे पेट पर रख दिया। जैसे ही सोनल के होंठ मेरे पेट पर लगे मैं उछल पड़ा, सोनल खिलखिलाकर हंस पड़ी। मेरा शरीर ऐंठने लगा और मेरी कमर उपर उठ गई।
सोनल ने मौके का फायदा उठाकर मेरी बेल्ट निकाल दी। अब वो मेरे पेट को किस कर रही थी और अपना हाथ मेरी जांघो पर फिरा रही थी।
उसने कब मेरी जींस का हुक खोला मुझे पता ही नहीं चला। उसने अपनी जीभ मेरी नाभि में डाल दी, फिर से मेरी कमर उपर उठ गई। और उसने फिर से मौके का फायदा उठाया और मेरी जींस को नीचे सरका दिया। मेरी जींस जांघों से नीचे तक सरक चुकी थी। सिर्फ अंडरवियर ही मेरी इज्जत को ढके हुए था। जींस के नीचे सरकते ही मेरे लिंग ने थोडी चेंन की सांस ली और अंडरवियर के अंदर बंबू बनाकर झटके खाने लगा। अब दर्द कुछ कम हो रहा था।

मेरे पेट पर किस करते हुए सोनल धीरे धीरे नीचे की तरफ आने लगी और मेरे पेडू पर किस करने लगी। मेरे मुंह में से आहे निकलनी शुरू हो गई थी। मेरे हाथ उसके सिर में बालों को सहला रहे थे। तभी उसने अंडरवियर के उपर से ही मेरी लिंग पर किस की जिससे मेरे शरीर में एकदम करंट दौड़ गया। फिर उसने मेरे अंडरवियर के किनारों को पकड़ा और उसे धीरे धीरे नीचे सरकाना शुरू कर दिया। अंडरवियर मेरे लिंग पर आकर अटक गया। सोनल ने धीरे से मेरे लिंग को नीचे दबाकर अंडरवियर को भी नीचे सरका दिया। मेरा लिंग एकदम से उछलकर बाहर आ गया और उसके चेहरे के सामने झटकेखाने लगा। मेरे लिंग को देखकर वो सम्मोहित सी हो गई उसने अपना एक हाथ मेरे लिंग की जड़ में रखा और एकटक उसे निहारने लगी। तभी मेरे लिंग ने एक झटका खाया और उसके चेहरे पर टक्कर मार दी मानों उसे नींद से जगा रहा हो। सोनल जैसे नींद से जागी हो, उसने अपना दूसरा हाथ भी मेरे लिंग पर रख दिया। आनंद के मारे मेरी आंखें बंद हो गई। अचानक उसने मेरी लिंग की चमड़ी को पिछे करना चाहा तो मुझे मेरे लिंग में दर्द की एक लहर दौड़ गई और मैंने तुरंत उसके हाथ को पकड़ लिया।
मैं: दर्द होता है, ऐसे मत करो।
 
सोनल ने फिर से मेरे लिंग की चमड़ी को थोडा सा पीछे करने की कोशिश की पर वो नहीं हुई।
सोनल बहुत ही प्यार से मेरे लिंग को देखने लगी और एक पप्पी मेरे लिंग के सुपाड़े पर दे दी। जैसे ही उसने मेरे लिंग को चुमा मेरा शरीर अकड़ गया और सुपाडे पर कुछ बूंदे चमकने लगी। मैंने जब अपने लिंग की तरफ थोड़ा धयान से देखा तो मैं हैरान रह गया, कयोंकि आज से पहले कभी भी मेरा लिंग इतना ज्यादा मोटा नहीं हुआ था और लम्बा भी कुछ ज्यादा ही लग रहा था।
सोनल: हाउ स्वीट, अभी तक सील भी नहीं टूटी है। कितना प्यारा है, मन करता है कि खा जाउं।
मेरा लिंग ज्यादा गोरा तो नहीं है पर गोरा ही है। उसका सुपाडा एकदम गुलाबी होकर चमक रहा था।
सोनल: मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि तुम एकदम वर्जिन हो, तुमने कभी हस्तमैथुन भी नहीं किया है। मैं तो सोच रही थी कि अब तक एक दो को तो लुढका ही चुके होगे।
मन कर रहा है कि तुम्हें अपनी बाहों में भर लूं। और यह कहकर सोनल आगे को हुई और मेरे गले में अपने हाथ डालकर मुझपर लेट गई। मेरा लिंग उसके जांघो के नीचे दब गया।
सोनल मुझे मेरे चेहरे पर बेतहाशा चुमने लगी। वो मुझे ऐसे चूम रही थी मानों मैं फिर कभी उसे नहीं मिलने वाला और आज भी कितने इंतजार के बाद मिला हों।
उसे इस तरह मुझसे प्यार करते देख, मेरे दिल में भी प्यार उमड़ आया और मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों में पकड़ा और अपनी आंखों के सामने करके थाम लिया। वो मुझे देखने लगी और मैं उसको। फिर उसने हरकत की और हमारे होंठ एक दूसरे में समा गए। वो बहुत ही प्यार से मेरे होंठों को चूस रही थी। तभी अचानक उसने अपनी जीभ बाहर निकाली और मेरे होंठो पर फेरने लगी और फिर मेरे होंठो पर अपनी जीभ का दबाव बनाने लगी मानों मेरे मुंह में डालने की कोशिश कर रही हो। मैंने मेरे होंठो को कस के भीच लिया।
सोनल (प्यार भरी नाराजगी दिखाते हुए): खोलो ना होंठो को।
मैंने बगैर होंठों को खोले हूं उूं हूं (नहीं) कहा। सोनल फिर से मेरे होंठो को चूसने लगी। अब मेरे होंठ दर्द करने लगे थे शायद सोनल के भी करने लगे थे। वो मुझपर से उठी और अपनी टी-शर्ट उतार दी।
उसके बूब्ब इतने प्यारे थे कि मैं उन्हें देखता ही रह गया। उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई थी।
उसने मेरे हाथ पकड़कर अपने बूब्स पर रख दिये। मैं धीरे धीरे उन्हें दबाने लगा। मैंने पहली बाहर किसी लड़की के बूब्स को छुआ था। वो एकदम रूई की तरह नर्म थे और पूरी तरह से तने हुए थे। मैंने उसके निप्पल को पकड़ कर हलका सा मसल दिया, वो एकदम तड़प उठी और उसके मुंह से आह निकल गई।
मेरा लिंग उसके कुल्हों पर दस्तक दे रहा था। धीरे धीरे वो आहे निकालने लगी। मैंने अपने हाथ उसकी कमर में डाल दिये और उसे बैड पर लिटा दिया।
अब सोनल नीचे और मैं उपर था। मैंने अपनी शर्ट और बनियान निकाल दी और फिर अपनी जींस और अंडरवियर को भी पैरों से अलग कर दिया।
सोनल मुझे देखकर लेटी हुई मुस्करा रही थी। मैं अपने कपड़े उतारकर सोनल के उपर आ गया और उसे अपनी बांहों में भर लिया। मेरा लिंग उसकी जांघों पर गड़ गया और उसकी योनी पर धक्के देने लगा। मेरे लिंग को कुछ गीला गीला महसूस हुआ। मैंने वापिस उठकर देखा तो सोनल की पजामी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और उसकी पेंटी साफ नजर आ रही थी।
सोनल को इतना गीला देखते ही मैं पागल सा हो गया और उसके बूब्स पर टूट पड़ा। मैंने अपना एक हाथ उसके दायें बूब्स पर रखा और बायें बूब्स को अपनी जीभ से सहलाने लगा। मैं उसके दायें बूब्स को अपने हाथ से मसल रहा था और बायें को जीभ से सहला रहा था। मेरी इन हरकतों से सोनल मचलने लगी और मेरे सिर को पकड़कर अपने बूब्स पर दबाने लगी। थोड़ी देर बाद उसने मेरे सिर को उठाया और अपने दूसरे बूब पर रख दिया। उसके हाथ लगातार मेरी कमर और सिर पर फिर रहे थे। मैने उसके निप्पल को मुंह में लेकर चुभला दिया। मेरी इस हरकत से सोनल के मुंह से एक तेज सिसकारी निकल गई और वो अपने पैरों को मेरे पैरों पर रगडने लगी। उसने अपना हाथ नीचे की तरफ किया और मेरी लिंग को पकड़कर अपनी योनी के उपर सैट कर दिया और नीचे से अपने कुल्हे उठा कर हल्के हल्के धक्के लगाने लगी। मैंने उसके निप्पल को अपने तालों में दबाकर हल्का सा काट लिया। सोनल के मुंह से एकदम दर्द भरी कराह निकली, पर उसने मुझे हटाया नहीं, बल्कि मेरी सिर को और तेजी से अपने बूब्स पर दबाने लगी। मैं धीरे धीरे नीचे की तरफ चलने लगा और उसके पेट को चूमने लगा। जैसे ही मेरी जीभ उसकी नाभि वाले स्थान पर लगी तो उसकी कमर हवा में उठ गई और वो मेरे सिर को नीचे धकेलने लगी। मैंने अपने चेहरे को उपर उठाया और उसकी तरफ देखा तो सोनल ने अपनी आंखें जोरों से बंद की हुई थी और उसके चेहरे पर सिकन सी दिखाई दे रही थी। जब मैंने थोडी देर तक कुछ नहीं किया तो सोनल ने अपनी आंखें खोली और मेरी तरफ देखने लगी मानों पूछ रही हो रूक क्यों गये।
 
मुझे कुछ न करता देखकर उसने मुझे पकड़ा और बैड पर पटक दिया और खुद मेरे उपर आ गई और मेरी जांघों के बीच में जाकर बैठ गई। उसने मेरे लिंग को अपने हाथों में पकड़ा जो लोहे की रोड की तरह सख्त था और अपने जीभ निकालकर मेरे सुपाड़े पर चमक रही बूंदों को चाट कर साफ कर दिया और फिर मेरे सुपाडे पर एक किस की और थोड़ा सा सुपाडा अपने होठों में ले लिया। सोनल ने मेरा आधा सुपाड़ा ही अपने होठों के बीच लिया था। मुझे लग रहा था कि जैसे मैं इस दुनिया में नहीं हूं। मेरी कमर हवा में उठ गई थी, सोनल ने वैसे ही सुपाड़े को होठों के बीच दबाये हुए मेरे चेहरे की तरफ देखा। मेरी आंखें मजे के मारे आधी बंद थी। फिर सोनल ने मेरे पूरे सुपाडे को अपने मुंह में ले लिया और मुंह में लिये लिये ही अपनी जीभ उस पर फिराने लगी। मुझे लगा कि मैं बस आनंद के मारे मर ही जाउंगा।
(अगर मुझे पहले पता होता कि सैक्स में इतना मजा आता है तो मैं अब तक पता नहीं कितनी ही लड़कियों को लुढका चुका होता)
मैंने अपने हाथों को सोनल के सिर पर रख दिया और उसे नीचे की तरफ दबाने लगा। सोनल ने मेरे हाथों को दूर झटक दिया और धीरे धीरे मेरे सुपाड़ों को अपने मुंह में अंदर बाहर करने लगी। अब मुझसे सहन नहीं हो पा रहा था इतना ज्यादा आनंद, आज जिंदगी में पहली बार मैंने जाना था कि सैक्स में इतना ज्यादा मजा आता है। अचानक सोनल ने मेरे आधे लिंग को अपने मुंह में ले लिया। मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मेरा लिंग उसके गले में टक्कर मार रहा है। सोनल ने कुछ देर ऐसे ही मेरे िंलंग को अपने मुंह में रखा और फिर मेरे सुपाड़े तक वापिस बाहर निकाल दिया, थोउ़ी देर ऐसे ही रूककर उसने मेरे चेहरे की तरफ देखा, मेरी आंखें मजे के मारे लगभग पूरी तरह बंद हो चुकी थी, बस थोड़ी सी ही खुली हुई थी।
मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था। मेरे हाथ फिर से उसके सिर पर पहुंच गये। मेरी कमर लगातार हवा में ही उठी हुई थी।
सोनल ने फिर से मेरे लिंग को आधा मुंह में ले लिया और वो उसके गले में जाकर टक्कर मारने लगा।
अचानक मुझे लगा कि मैं हवा में उड रहा हूं और मेरे लिंग ने उसके मुंह में पिचकारियां मारनी शुरू कर दी। जैसे ही मेरे लिंग से पहली पिचकारी निकली, सोनल ने मेरे लिंग को थोडा सा बाहर निकाल लिया लगभग सुपाड़े तक और मेरे जूस को पीने लगी। मेरे लिंग में से इतना जूस निकल रहा था कि वो उसके मुंह से बाहर निकल कर मेरी जांघों पर बहने लगा। लगभग 3-4 मिनट तक रूक-रूक कर मेरे लिंग से पिचकारियां छूटती रही और सोनल मेरे लिंग को वैसे ही अपने मुंह में रखकर मेरे जूस को पीती रही।
जब मेरे लिंग ने पिचकारियां मारनी बंद कर दी तो सोनल ने अपना चेहरा उपर उठाया। मेरा जूस उसके होंठो से बहता हुआ उसकी ठोडी से नीचे टपक रहा था। वह अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसे चाट गई और चटकारा लेते हुए कहने लगी।
सोनल: वाह, मजा आ गया तुम्हारा कुंवारा जूस पीकर। ऐसा टेस्ट पहली बार पीने को मिला है।
मुझे अपने शरीर में थकावट महसूस होने लगी। मेरी कमर जो अब तक लगातार हवा में उठी हुई थी एकदम से नीचे बैड पर आकर टिक गई और मैं जोर जोर से सांसे लेते हुए हांफने लगा।
सोनल: मेहनत तो सारी मैंने की है और हांफ तुम रहे हो। और यह कहकर खिलखिला पड़ी।
मुझे अपना सिर एकदम से हल्का हल्का महसूस हो रहा था और मेरी आंखें भारी भारी। लग रहा था कि मुझे किसी ने नींद की गोलियां दी हैं।
मेरी आंखें बंद होती देखकर सोनल ने मेरे सिर को अपने हाथों में पकड़कर उठाया।
सोनल: हैल्लो! कहां, अभी बहुत कुछ बाकी है, चलो उठ जाओ, और यह कहकर मेरे माथे पर एक किस कर दी।
मेरा लिंग अभी भी वैसे ही तना हुआ था, बस इतना फर्क था कि अब मुझे उसमें दर्द नहीं हो रहा था।
जब सोनल ने मेरे लिंग की तरफ देखा तो -
सोनल: ये क्या! ये तो अभी भी वैसे ही सिर उठाकर खड़ा हुआ है। इसे कुछ आराम नहीं करना क्या।
मैं: जब सामने तुम्हारे जैसी साइट हो तो फिर आराम कौन करना चाहेगा, सारा काम लग कर निपटाना चाहेगा।
मेरी बात सुनकर सोनल हंसने लगी।
सोनल: अच्छा जी! थोड़ी सी देर में ही बातें बनानी आ गई। अब तक तो बड़े शरमा रहे थे।
सोनल: एक बात पूछूं, सच सच बताना।
मैं: हां पूछो।
सोनल: अभी तक वर्जिन हो, कभी कोई लडकी नहीं मिली क्या।
मैं: मिली तो बहुत और सभी तैयार भी थी सैक्स के लिए, पर मुझे ये थोड़े ही पता था कि सैक्स में इतना मजा आता है, नही ंतो अब तक तो पता नहीं कितनियों को मजा दे चुका होता।
सोनल: चलो, मेरी किस्मत अच्छी थी, जो तुम अभी तक वर्जिन हो। अब तो तुम्हारी वर्जिनिटी तोड़ने का मजा लेना है मुझे बस।
और ये कहते हुमेरे साइड में लेट गई और अपना चेहरा मेरे कंधे पर रख दिया तथा अपना हाथ मेरी छाती में फिराने लगी।
मेरा लिंग अभी भी वैसे ही तनकर झटके खा रहा था।
मैंने सोनल की तरफ करवट ली और उसके गालों को चुमने लगा। फिर अपने होंठ उसके फडकते होंठों पर रख दिए।
मेरे हाथ उसकी कमर में घुमने लगे और उसके हाथ मेरी कमर में। मैं अपने हाथों की उसकी कमर में घुमाते हुए नीचे की तरफ करने शुरू कर दिए और उसके कुल्हों पर लेजाकर उसके कुल्हों को सहलाने लगा। उसके कुल्हे एकदम नर्म थे। मैं अपनी एक उंगली उसकी कुल्हों के बीच की खाई में घुमाने लगा। मेरी इस हरकत से सोनल का शरीर झटके खाने लगा। उसको किस करते हुए ही मैंने उसको सीधा किया और उसके उपर आ गया।
उसके बूब्स मेरी छाती में दब गये। मुझे उसके निप्पल मेरी छाती में चुभ रहे थे, इसलिए मैं अपनी कोहनियों के बल होकर थोड़ा उपर उठ गया और उसके किस करने लगा। मेरा लिंग उपर की तरफ होकर उसकी योनि पर दबा हुआ था।
थोड़ी देर में मैंने किस तोड़ी और उसके बूब्स पर अपने होंठ टिका दिए। सोनल ने अपने हाथ मेरे सिर पर रख दिए और मेरे बालों को सहलाने लगी।
अभी मैं उसके बूब्स को चूस ही रहा था कि सोनल का मोबाइल बजने लगा।
उसने मोबाइल उठाकर नम्बर देखा और फिर उसके स्पीकर फोन पर डालकर बैड पर रख दिया और बात करने लगी।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--11
गतांक से आगे ...........
सोनल: हाय पिंकु।
पिंकु: हाय सोनी, कहां है तू। (ये आवाज किसी लडकी की थी।)
सोनल: घर पर ही हूं।
पिंकु: घर पर तो मैं हूं, तू तो यहां पर कहीं नहीं है।
सोनल: अरे वो उपर आ गई थी थोड़ा टहलने के लिए।
पिंकु: ठीक है, मैं भी उपर आ रही हूं।
सोनल: अरे नहीं, मैं नीचे ही आ रही हूं।
पिंकु: ठीक है, जल्दी आ जा।
और सोनल ने फोन कट कर दिया।
फोन पर हुई बात सुनकर मेैं बैड पर लेट गया था। सोनल ने जल्दी से अपनी टी-शर्ट उठाई और पहन ली और बैड पर से नीचे उतर गई।
उसने मेरे माथे पर एक किस की।
सोनल: रात को आउंगी, तैयार रहना सील तुडवाने के लिए।
मैंने कोई जवाब नहीं दिया और सोनल नीचे चली गई।
मैं रिलीव होने के कारण थक गया था और मेरी आंखें भााी हो गई थी।
मुझे नींद आ रही थी। मैं ऐसे ही बैड पर लेटा रहा और पता ही नहीं चला कब मुझे नींद आ गई।
जब मेरी आंख खुली तो सोनल मेरे सामने खड़ी हुई मुझे झकझोर रही थी।

मैंने एक बार अपनी आंखें खोलकर वापिस से बंद कर ली, क्योंकि मुझे नींद आ रही थी। मुझे उठता न देखकर सोनल मेरे पास ही बैड पर बैठ गई और मेरे गालों पर अपने हाथ रखकर सहलाने लगी। मेरी नींद तो खुल ही गई थी, पर मैं थोड़ी देर और लेटा रहना चाहता था, क्योंकि बहुत थकावट महसूस हो रही थी।
सोनल: उठो ना! अभी से सो गये। ऐसे ही नंगे पड़े हो। अगर मम्मी उपर आ जाती तो। खाना भी नहीं खाया। चलो अब उठो मैं खाना लेकर आई हूं, खाना खा लो।
खाना का नाम सुनते ही मेरी नींद गायब हो गई क्योंकि मुझे बहुत जोरो से भूख लगी हुई थी।
मैं अपनी आंखों को मलते हुए उठकर बैठ गया। मेरे उठते ही सोनल ने अपना एक हाथ मेरे उपर से दूसरी तरफ बैड पर रख दिया और मेरे सामने अपना चेहरा लाकर मेरी आंखों में देखने लगी। उसे बाल खुले हुए थे जो मेरी जांघों पर गुदगुदी कर रहे थे।
जब मेरी नींद थोड़ी खुल गई तो कुछ देर पहले वहां घटित हुए घटनाएं मेरे जेहन में पिक्चर की तरह चलने लगी और मैं सोनल की तरफ देखकर मुस्करा दिया।
मैंने टाइम देखा तो 10 बजने वाले थे। मैंने सोनल का चेहरा अपने हाथों मे पकड़ा और उसके होठों पर प्यारी सी पप्पी दे दी।
सोनल मुस्कराई और बोली।
सोनल: उठो पहले खाना खा लो, और कुछ बाद में करना। मैं खाना लगाती हूं, तब तक फ्रेश हो जाओ। ऐसे ही पढे सो रहे हो।
मैं उठा और तौलिया लपेट कर बाथरूम में घुस गया। थोड़ी देर में मैं फ्रेश होकर बाहर निकला तो देखा कि सोनल ने खाना टेबल पर खाना लगा दिया था और मेरा ही इंतजार कर रही थी।
मैंने रूम में आकर टी-शर्ट और शॉर्ट पहन ली।
सोनल: अब जल्दी से आ जाओ, नही ंतो ठंडा हो जायेगा।
मैं आकर चेयर पर बैठ गया और सोनल से पूछा।
मैं: तुमने खा लिया।
सोनल: हां, आपने लगाकर दिया था जो खा लिया होगा।
मैं: तो अभी तक क्यों नहीं खाया। मैं तो सो गया था, कम से कम तुम तो खा लेती।
सोनल: चलो अब शुरू करो, मुझे बहुत भूख लगी है।
मैं: तो तुमने अपना तो लगाया ही नहीं, खाओगी क्या मुझे।
सोनल: ये लगा तो रखा है, आपके साथ ही खाउंगी, एक ही थाली में।
मैं (थाली को उससे थोड़ा दूर करते हुए): मैं नहीं खाउं तेरे साथ, अभी कुछ देर पहले तो मेरा सारा जूस पीया था।
सोनल (गुस्सा होते हुए): तो, पिया था तो। ज्यादा स्याना बनने की जरूरत नहीं है, चुपचाप थोड़ी को इधर करो।
सोनल: ज्यादा बन रहे हो। अभी मेरा जूस पीना है, ज्यादा नखरे दिखा रहे हो
 
मैं: मैं तो कभी नहीं पीउं। मैं तो अपना मुंह ही वहां पर ना लगाउं।
सोनल: ज्यादा बकबक मत करो। थाली इधर करो। वो तो मैं अपने आप पीला दूंगी।
मुझे थाली को अपनी तरफ न करता देख सोनल चेयर पर से उठी और अपनी चेयर को मेरे साथ ही कर लिया और थाली में से खाना लेकर खाने लगी।
मैं आराम से बैठ गया। मुझे खाना न खाते देखकर उसने एक रोटी का टुकड़ा तोड़ा और सब्जी लगाकर मेरे मुंह के सामने कर दिया।
सोनल: मुंह खोलो। ज्यादा नखरे मत दिखाओ। नही ंतो मुझे गुस्सा आ जायेगा, बताए देती हूं हां।
और रोटी के कोर को मेरे होंठों से लगा दिया।
मुझे भी जोरो की भूख लगी हुई थी, इसलिए ज्यादा नखरा न करते हुए मैंने अपना मुंह खोला और जैसे ही सोनल ने रोटी मेरे मुंह में दी मैंने उसकी उंगली पर काट लिया।
सोनल (नाराज होते हुए): आउच! बच्चे हो क्या। उंगली काट ली। अब अपने आप खाओ।
मैं (हंसते हुए): सॉरी बाबा! (और मैंने एक रोटी का कोर तोड़ा और सब्जी लगाकर सोनल के मुंह के सामने कर दिया)।
सोनल ने तुरंत अपना मुंह खोला और मैंने जैसे ही रोटी का कोर उसके मुंह में दिया उसने मेरी उंगलियों को अपने होठों में दबा लिया।
मैंने अपनी उंगली उसके मुंह से बाहर निकाली।
फिर से सोनल ने एक रोटी का कोर लेकर सब्जी लगाकर मेरे मुंह के सामने कर दिया। मैंने अबकी बार फिर से उसकी उंगली पर दांत गड़ा दिये।
सोनल ने मेरी कमर में एक मुक्का मारा और -
सोनल: एकदम कमीने हो, बगैर काटे नहीं खा सकते। (और अपनी उंगली मुझे दिखाते हुए) देखो एकदम लाल हो गई।
मैंने उसकी उंगली को पकड़ा और अपने मुंह में ले लिया और अपनी जीभ उस पर फिराने लगा।
इसी तरह मैंने सोनल को और सोनल ने मुझे खाना खिलाया।
खाना खाकर हमने बर्तनों को रसोई में रखा और बाहर आकर थोड़ा टहलने लगे।
बाहर ठंडी ठंडी हवा चल रही थी और मौसम भी कुछ बारिश का हो गया था।
बहर आकर मैंने देखा कि पूनम अपनी छत पर ही टहल रही थी। मैंने उसे हाय बोला।
पूनम: हाय! हाय सोनल!
सोनल: ओहो तो पूनी तू भी मौसम का मजा ले रही है।
पूनम: क्यों मैं क्या इंसान नहीं हूं, जो इतने शानदार मौसम का मजा नहीं ले सकती।
सोनल: मैंने तो सोचा था कि बस तू पढ़ने का ही मजा लेती है और किसी चीज का नहीं।
और सोनल ने पूनम की तरफ आंख मार दी।
तभी बारिश होने लगी और तीनों भागकर अंदर घुस गये। (मैं और सोनल मेरे रूम में और पूनम अपने में। )
हमारे कपड़े थोड़े गीले हो गये थे। मैंने अपनी टी-शर्ट निकाल कर टेबल पर डाल दी।
सोनल मेरे पास आई और मेरे सीने पर अपने हाथ रख दिये और धीरे धीरे सहलाने लगी।
मैंने सोनल को अपनी बांहों में भर लिया और उसके माथे पर चुम्मी लेने लगा। फिर मैंने थोडा झुककर उसके गले पर किस करनी शुरू कर दी।
सोनल भी अपने हाथ मेरी पीठ पर टिका कर मुझसे लिपट गई। मैंने अपने हाथ उसकी पीठ पर कसते हुए उसकी पीठ को सहलाना शुरू कर दिया। मेरे जिस्म पर उसकी गीली टी-शर्ट के टच होने से शरीर में सिहरन सी दौड रही थी।
मैंने अपने हाथ नीचे करके उसके कुल्हों पर फिराने शुरू कर दिये। सोनल ने जो पजामी पहनी थी वो इतनी सॉफट और पतली थी कि मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैंने उसके कुल्हों को नंगा ही पकड़ रखा है। मैंने उसके कुल्हों को अपने हाथों में भरकर भींच लिया। सोनल के मुंह से एक लम्बी आह निकली। और उसने मेरे होठों पर अपने होंठ टिका दिये।
तभी सोनल का फोन बजने लगा, उसने देखा तो आंटी का फोन था।
सोनल: मम्मी का फोन है। और उसने कॉल रिसीव की।
सोनल: हॉ मॉम।
सोनल: आ रही हूं मॉम, वो बाहर बारिश शुरू हो गई थी, इसलिए थोड़ी देर रूक गई।
(बारिश बंद हो चुकी थी, बस थोड़ी सी ही आई थी।)
सोनल: हां बस अभी आ रही हूं।
सोनल ने फोन कट किया और रसोई से बर्तन उठाते हुए -
सोनल: वो गिलास में दूध रखा है, पी लेना। और मैं मॉम के सो जाने के बाद आउंगी, दरवाजा खुला रखना।
मैं: ओके जी! इंतजार करूंगा।
और सोनल ने एक पप्पी मेरे गाल पे दी और बर्तन लेकर नीचे चली गई।
मैं फिर से बाहर आकर छत की मुंडेर के पास खड़ा हो गया।
मैंने साथ वाली छत पर देखा पर कोई नहीं था। शायद पूनम नीचे चली गई होगी। मैं थोड़ी देर और बाहर ही खड़ा रहा, तभी फिर से बारिश शुरू हो गई और मैं वापिस अंदर आ गया।
अब मैं सोनल का ही इंतजार कर रहा था। तभी मुझे धयान आया कि दूध रखा है तो मैंने दूध पीया और बैड पर आकर लेट गया। लेटने के बाद मुझे पता ही नहीं चला कब नींद आ गई। अचानक बाहर कुछ गिरने की आवाज सुनकर मेरी आंख खुल गई। थोड़ी देर तो मेरी समझ में नहीं आया कि मेरी नींद क्यों टूटी है, तभी फिर से बाहर से कुछ कदमों की आवाज आई।
मैं उठ कर बाहर आया तो मैंने किसी को अपनी छत पर से साथ वाली छत पर भागकर जाते हुए देखा तो मैं भागकर उस तरफ गया। पर कोई दिखाई नहीं दिया।
मैं हैरान रह गया कि इस वक्त कौन आया था? कहीं कोई चोर तो नहीं था। तभी मुझे फिर से तीसरी वाले छत पर कोई भागता हुआ दिखाई दिया।
 
मैंने जोर से आवाज देकर कहा 'कौन है वहां', ठहर जा मैं आ रहा हूं, देखता हूं तुझे कौन है तू।
मेरी आवाज सुनकर उसने मेरी तरफ देखा और जल्दी से भागकर अगली छत पर गया और वहां से अगली छत नीचे थी उस पर कूद गया और फिर उस छत पर से गली में कूद कर भाग गया।
मैं थोड़ी देर ओर बाहर ही खड़ा रहा और फिर अंदर आ गया। मैंने टाइम देखा तो साढ़े बारह बजे हुए थे। तभी मुझे धयान आया कि सोनल आने वाली थी पर आई नहीं।
मैंने उसे फोन मिलाया तो पूरी रिंग जाने के बाद भी उठाया नहीं, शायद सो रही थी। मैंने फिर से फोन मिलाया तो नहीं उठाया।
मैंने यही सोचकर कि सो रही होगी दोबारा नहीं मिलाया। और बैड पर लेट गया। मुझे प्यास लगी हुई थी तो उठकर किचन में गया और पानी पीया और वापिस आकर फिर से एकबार फोन मिलाया।
अबकि बार दो रिंग जाते ही सोनल ने फोन उठाया।
सोनल: आ रही हूं और फोन काट दिया।
मैं आकर बैड पर लेट गया और आने वाले पल को सोचकर ही मुस्कराने लगा।
पांच मिनट बाद हल्के से दरवाजा खुला और सोनल अंदर आ गई। मैंने उसे हाय कहा तो उसने भी हाय कहा। उसने नाइटी पहनी हुई थी जो बहुत ही पतली थी और उसका शरीर दिखाई दे रहा था। उसने ब्रा नहीं पहनी थी फिर भी उसके पर्वत एकदम सिर तान कर खड़े थे। उसके निप्पल बाहर निकलने को हो रहे थे। उसकी नाइटी जांघों से थोड़ी सी ही नीचे तक थी। उसने सफेद पेंटी पहनी थी जो नाइटी में से साफ दिखाई दे रही थी। उसे देखते ही मेरा पप्पू खड़ा हो गया। मैं केवल अंडरवियर और बनियान पहने हुए था। मेरे अंडरवयिर में बंबू बन गया।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--12
गतांक से आगे ...........
सोनल: थैंक्स यार! तुमने फोन कर दिया। मैं तो सो ही गई थी। तुम्हें अभी तक नींद नहीं आई।
सोनल: हां, आती भी कैसे! तुम्हारा मन तो बल्लियों उछल रहा होगा, कि आज तो लड़की मिलेगी मजे करने के लिए। तुम तो बस मेरे आने का इंतजार कर रहे होगे।
मैं: अरे मैं भी सो गया था, वो तो बाहर पता नहीं कौन आया था, कुछ गिरने की आवाज आई तो मेरी आंख खुल गई, शायद कोई चोर था। मैं बाहर निकला तो कोई मुझे दूसरी छत पर भागता हुआ दिखाई दिया। फिर गली में उतर कर भाग गया।
मेरी बात सुनकर शायद सोनल थोड़ी सी घबरा गई थी क्योंकि उसके चेहरे पर थोड़ी शिकन आ गई थी।
मैंने सोनल का हाथ पकड़कर उसे बैड पर बैठा दिया और उसके चेहरे को पकड़कर उसके गालों पर एक पप्पी रसीद कर दी।
सोनल ने अपने हाथ मेरे गले में डाल दिये और मेरे उपर लेटते हुई मुझे भी बैड पर लिटा दिया और अपने होंठ मेरे होठों पर रख दिये। मैंने उसके नीचले होंठ को अपने होंठों में जकड़ लिया और उसने मेरे उपर वाले होंठ को। हमारे होंठ आपस में लड़ाई लड़ रहे थे कि कौन किसका ज्यादा रस चूसेगा। धीरे धीरे हमारी किस वाइल्ड होती जा रही थी। मैंने अपना एक हाथ उसके सिर के पीछे रख दिया और दूसरा हाथ उसके बूब्स पर। तभी मुझे सोनल की शाम वाली हरकत याद आई जब उसने मुझे किस करते हुए अपनी जीभ मेरे मुंह में डालने की कोशिश की थी। मैंने तुरंत अपनी जीभ बाहर को की और उसके होठों पर फिरानी शुरू कर दी। थोडी देर उसके होठों को चाटने के बाद मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डालने की कोशिश की तो सोनल ने अपने होंठ खोल दिये और मेरी जीभ को अपने मुंह में ले लिया और उसे चुसने लगी। मुझे जीभ चुसवाने में बहुत मजा आ रहा था। थोडी देर में ही मेरी जीभ दर्द करने लगी और मैंने अपनी जीभ को वापिस अंदर कर लिया और सोनल को होठों को चूसने लगा।
सोनल ने अपनी जीभ बाहर निकाली और मेरी होठों पर फिराने लगी। धीरे धीरे वो अपनी जीभ को साइड में ले जाते हुए मेरे गालों को चाटने लगी। मुझे अपने गालों पर उसकी गीली जीभ से अपने शरीर में सरसरी सी महसूस हो रही थी।
तभी सोनल ने मेरा सिर पकड़कर नीचे की तरफ दबा दिया और अपने बूब्स मेरे चेहरे पर रगड़ने लगी।
मैंने उसके निप्पल को नाइटी के उपर से ही अपने होठों के बीच दबा लिया और चुभलाने लगा।
सोनल: आह---- ओह--- समीर चूसों इन्हें, आज इनकी सारी हरकत पूरी कर दो।
 
सोनल ने अपने हाथ मेरे सिर में फिराने शुरू कर दिये। मैंने अपने हाथ पिछे ले जाकर उसके कुल्हों पर रख दिये। मैंने उसके निप्पल पर अपने दांत गड़ा दिए।
सोनल: आउउउ--- आराम से।
मैंने उसकी नाइटी को उपर उठाकर उसकी पेंटी में अपने हाथ डाल दिये और उसके कुल्हों को मसलने लगा। मैंने अपनी एक उंगली उसकी गहरी खाई में फिरानी शुरू कर दी और उसके गुदा द्वार को अपने नाखून से कुरेदने लगा।
सोनल: आह---- ये- --- क्या ---- कर --- रहे हो। --- बहुत-- - -- -म---ज्ज्ज्जााज आा रहा---- है।
मेरी इस हरकत से सोनल एकदम पगला गई और मेरे सिर को जोर से अपने बूब्स पर दबाने लगी। मुझे सांस लेने में प्रोब्लम होने लगी तो मैंने अपने चेहरे को बड़ी मुश्किल से पिछे किया। मैं घुटनों के बल खडा हो गया और उसे भी घुटनों के बल खड़ी होने को कहा।

उसके खडी होते ही मैंने उसकी नाइटी को पकडा और उसके शरीर से अलग कर दिया। अब उसके उन्नत स्तन मेरी आंखों के सामने अपना सिर उठाये खडे थे मानों मुझे ललकार रहे हो। मैंने अपने हाथ उसके स्तनों पर रख दिये और अपने लबों को उसके लबों को रसपान करने लगा।
सोनल आहहह=ह=ह= ओ====--------- स-----मी----र मजा आ रहा है और पागलों की तरह मेरे लबों को चूसने और काटने लगी। उसकी गरम सांसे मेरे चेहरे पर पड़ रही थी जो मुझे मदहोश कर रही थी। मैंने अपने लबों को उसके लबों से छुडाया क्योंकि उसके काटने के कारण उनमें दर्द होने लगा था और मैं उसके गले पर किस करने लगा। मेरे हाथ लगातार उसके स्तनों का मर्दन कर रहे थे। उसके निप्पल एकदम कठोर हो गये थे। अपने उसके निप्पलों को अपनी उंगली के बीच पकडा और मसल दिया।
आह--- ओह---- दर्द हो रहा है-----, धीरे करों--- और मेरा सिर पकड़कर अपने स्तनों पर दबा दिया। मैं अपनी जीभ को उसके स्तनों के बीच की खाई में घुमाने लगा और अपने हाथ फिर से उसकी पेंटी में डालकर उसके कुल्हों को मसलने लगा। मैंने अपनी जीभ उसकी खाई में घुमाते हुए नीचे की तरफ आने लगा और उसके पेट पर अपनी जीभ फिराने लगा। अब मुझे घुटनों के बल होकर उसके पेट को चुसने में प्रोब्लम हो रही थी, इसलिए मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और खुद उसके उपर आ गया और उसके पेट पर अपनी गीली जीभ फिरानी शुरू कर दी। मैंने अपनी जीभ उसकी नाभि के आसपास फिराते हुए उसकी नाभि में डाल दी और चाटने लगा। सोनल ने तड़प कर अपनी कमर उपर को उठा दी और मेरे हाथों को पकडकर अपने स्तनों पर रख दिया। अब मैं हाथों से उसके स्तनों का मर्दन कर रहा था और होठों से उसके पेट का।
मैंने थोडा नीचे आते हुए उसके पेडू स्थान पर किस करना शुरू कर दिया।
सोनल: आह, गुदगुदी हो रही है।
अब सोनल का पेट वैसे ही उछलने लगा जेसे शाम को मेरा उछल रहा था। मैं अपने एक हाथ को नीचे लाया और उसकी पेंटी के किनारों को पकड़ कर थोडा नीचे कर दिया। उसकी पेंटी काफी गीली लग रही थी, मानो उसने सुसु कर दिया हो। सोनल ने अपने कुल्हों को थोड़ा उपर कर दिया ताकि मैं उसकी पेंटी निकाल सकूं। मैंने अपना दूसरा हाथ से भी उसकी पेंटी के दूसरे किनारे को पकड़ा और पेंटी को उसके पैरो से अलग कर दिया। अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी लेटी हुई थी। उसकी योनि पर एक भी बाल नहीं था शायद आज ही साफ किये थे।
उसकी चिकनी योनि को देखते ही मेरे लिंग ने एक झटका खाया।
मैंने अपने हाथों से उसकी जांघों को सहलाना शुरू कर दिया और फिर अपने होंठ उसकी योनि के उपर वाले भाग पर टिका दिये।
मेरे होंठ लगते ही सोनल ने एक लम्बी सिसकारी ली
आहहहहह-ह-ह-ह-ह-ह-ह----- आोहाहा------- मममममममम---------उउउउउउउउ----सीइइइइइइ----- मैं--------गगइइइइइइइइइइइइई---------------- ओेेेेओाअेोाहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहह-----
और उसका शरीर अकड़ गया। उसने अपनी कमर को हवा में उठा लिया और मेरे सिर को अपनी योनि पर दबा दिया। उसकी योनि से ढेर सारा जूस निकल रहा था जो कि मेरे ठोडी और होठों पर लग रहा था। जब उसका जूस मेरे होठों पर लगा तो मुझे उसका स्वाद कुछ बकबका सा लगा।
 
थोड़ी देर वैसे ही हवा में उठी रहने के बाद उसका शरीर ढीला पडता गया और वो निढाल होकर बैड पर लेट गई। उसकी सांसे पूरी तरह से उखडी हुई थी और आंखे बंद थी। मैं सोनल के उपर आ गया और उसके स्तनों को चूसने लगा।
थोड़ी ही देर में सोनल फिर से गरम होने लगी और आआआआआआअहहहहहहहह---------- ओओोाहहहहहह--- कि आवाजे निकालने लगी।
मैंने अपनी बनियान और अंडरवियर को निकाल कर एक तरफ रख दिया। मेरा लिंग एक झटके के साथ बाहर आ गया। मैं सोनल की जांघों के बीच में आया और उसकी टांगों को फैला दिया। नीचे से चददर पूरी तरह गीली हो गई थी।
मैंने अपने लिंग को उसकी योनि पर सैट किया और हलका सा धक्का लगाया। मेरा सुपाडा उसकी योनि में घुस गया। मेरे लिंग में दर्द की एक लहर दौड़ गई और मेरे मुंह से दर्द भरी कराह निकली।
सोनल के मुंह से दर्द और मजे की मिली जुली सिसकारी निकली

ओहहहहहहहह----- आहहहह----
उसके चेहरे पर दर्द साफ दिखाई दे रहा था।

मैंने अपने लिंग को वापिस थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर से एक हल्का सा धक्का लगाया।
लिंग के 1 इंच अंदर जाते मेरी दर्द भरी कराह निकली और बहुत ज्यादा दर्द लिंग में होने लगा। मैंने लिंग को वहीं पर रोक लिया और कुछ देर ऐसे ही रखा। सोनल ने आंखें खोलकर मेरी तरफ देखा। मैंने फिर से लिंग को बाहर निकाला और एक जोरदार धक्का मार दिया। मुझे लगा कि मेरा लिंग कट गया है। बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। अभी भी मेरा लिंग आधा बाहर ही था। दर्द के कारण मैं ज्यादा अंदर नहीं कर पाया।
दर्द इतना ज्यादा हो रहा था कि मैं वैसे ही बैठा रहा। फिर दर्द जब कुछ कम हुआ तो मैंने धीरे से लिंग को बाहर निकाला और फिर से एक धक्का मार दिया। जैसे ही मैंने धक्का मारा, सोनल ने भी नीचे से अपने कुल्हे उठाकर मेरा साथ दिया, जिस कारण मेरा पूरा लिंग उसकी योनि में समा गया। मेरा लिंग अंदर जाकर उसके गर्भाश्य से टकराया और इसके साथ ही सोनल के मुंह से जोर की सिसकारी निकली।
ओहहहहहहहहहहहह--- मैं ------ तो ----गईईर्ठईईईईईईईइ------ ससीइठइइइइइइइइईईर्ठईई
और दोबारा से उसका शरीर अकड गया।
मैंने लिंग को फिर से बाहर निकाला और उसके साथ ही सोनल का जूस भी बाहर की तरफ बहने लगा।
अब मुझे दर्द का अहसास कम हो गया था क्योंकि मजा ज्यादा आ रहा था। तो मैंने एक और जोर का धक्का मारा। इस बार मेरा पूरा लिंग सोनल की योनि में समा गया था और मुझे ज्यादा दर्द भी नहीं हुआ था।
अब मैंने अपने लिंग को फिर से बाहर निकाला और अंदर घुसा दिया। मैंने तेज धक्के लगाने शुरू कर दिये।
सोनल: आहहहहह=------- ऐसे ही ------ बहुत ---- मजा आ ----रहा है----- जोर ---- से------- और ----अंदर----
हों----- ऐसे---- ही और अपनी टांगों को मेरी कमर पर लपेट लिया।
मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी। मेरे हर धक्के के साथ सोनल अपने कुल्हों को उपर की तरफ उछाल देती।
जल्दी ही मैं चरम पर पहुंचने को हो गया और मेरी आंखें मजे के मारे बंद होने लगी और मेरे लिंग ने पिचकारियां मारनी शुरू कर दी। मेरा गरम जूस अपने अंदर महसूस करके सोनल का शरीर फिर से अकड़ गया और उसने फिर मेरे जूस के साथ अपना जूस मिला दिया।
मैं सोनल के उपर लेट गया और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा। हम दोनों ही की सांसे काफी तेज चल रही थी। सोनल ने मेरे माथे को चूम लिया और मेरी कमर में हाथ फेरने लगी। मेरा लिंग सिकुड कर उसकी योनि से बाहर आ गया। और उसके साथ ही हम दोनों का मिला हुआ जूस भी उसकी योनि से बाहर बहने लगा। अब मुझे मेरे लिंग में बहुत ज्यादा दर्द महसूस होने लगा। मैं उठ गया और अपने लिंग को देखा तो वो एकदम लाल हो गया था और अब उसकी चमडी भी पहले से ज्यादा पीछे की तरफ हो गई थी। मुझे लिंग में बहुत ही जलन हो रही थी। मैं उठकर बाथरूम में गया और खुद को साफ किया। मेरे पीछे सोनल भी बाथरूम में आ गई और मुझे पीछे से बाहों में भर लिया।
मैं: देखों सूज कर कितना मोटा हो गया है। बहुत जलन हो रही है।
सोनल (मेरे लिंग को पकडते हुए): हम्म्ममम--- सील खुल गई बच्चू की। और मेरी लिंग की खाल को पीछे कर दिया।
मेरा लिंग के अंदर की चमड़ी कई जगह से फटी हुई लग रही थी और वहां से हल्का सा खून निकल रहा था। हमने खुद को साफ किया और वापिस बैड पर आकर बैठ गये। मैंने पेन किलर ली और बैड पर लेट गया। सोनल भी मेरे साथ ही लेट गई और हमें कब नींद आई पता ही नहीं चला।

सुबह मुझे अपने शरीर से कुछ छेड़छाड सी महसूस हुई तो मेरी आंख खुली। सोनल उठ चुकी थी और मेरे साइड में मुझसे चिपक कर लेटी थी और मेरे लिंग को अपने हाथ में लेकर सहला रही थी। हम दोनों नंगे ही सो गये थे।
मैंने आंखे खोली और सोनल की तरफ देखा तो वो मुस्करा दी।
सोनल: गुड मॉर्निंग, तो आपकी आंखें खुल ही गई। देखो आपका पप्पू आपसे पहले ही उठ गया।
मैं: गुड मॉर्निंग (और मैनें अपने लिंग की तरफ देखा)।
मेरा लिंग सूजकर बहुत ही ज्यादा मोटा हो गया था। शायद पेन किलर का असर अभी भी था, जिस कारण दर्द नहीं हो रहा था।
 
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