सूजने के कारण मेरा लिंग बहुत ही खूंखार मालूम पड रहा था।
मुझे जोरों की बाथरूम लगी थी। मैं जल्दी से उठकर बाथरूम में घुस गया और टॉयलेट में धार लगा दी। मुझे बाथरूम करने में थोड़ी परेशानी हो रही थी, इसलिए रूक रूककर धार मार रहा था।
बाथरूम करने के बाद मैंने मुंह धोया और कुल्ला किया और फिर रूम में आ गया। सोनल अभी भी बैड पर ही लेटी हुई थी। मैंने टाइम देखा तो 5 बजने वाले थे।
मैं जाकर बैड पर सोनल के पास सीधा होकर लेट गया और रात का सीन मेरी आंखों में फिल्म की तरह चलने लगा।
सोनल मेरे गालों को चूमते हुए उठी और बाथरूम में जाने लगी। चलते हुए उसके कुल्हे मटकते हुए बहुत ही प्यारे लग रहे थे। मन कर रहा था कि अभी पकड़कर मसल दूं। सोनल बाथरूम में घुस गई। मुझे टॉयलेट में पानी गिरने की आवाज के साथ साथ पीस की आवाज भी साफ सुनाई दे रही थी।
थोड़ी देर बाद सोनल तौलिये से अपना मुंह पौछते हुए बाहर आई।
उसके आधे बाल पीछे उसकी कमर पर लटक रहे थे और आधे कंधे पर से आगे की तरफ आकर उसकी एक चूची को ढके हुए थे।
सोनल की दूसरी चूची एकदम तनी हुई थी (एक मुझे दिखाई नहीं दे रही थी कि तनी हुई है या लटकी हुई)।
मैं कल से उसके जिस्म के साथ खेल रहा था पर अभी तक उसे सही तरह से देखा ही नहीं था।
तभी सोनल ने तौलिया चेयर पर डाल दिया और सिर को एक झटका देकर अपने बालों को पीछे की तरफ कर दिया।
अब मुझे उसके दोनों उन्नत स्तन अपने सामने दिखाई दे रहे थे। उसके दोनों स्तन एकदम तने हुए थे, मानों वो पूरी तरह से गरम हो चुकी हो। उसका एक निप्पल थोड़ा कम बाहर को निकला हुआ था जबकि दूसरा निप्पल भाले की नोंक की तरह अपना सिर उठाये खड़ा था। उसके निप्पलों के चारों तरफ थोड़ा गहरा कलर था, गुलाबी गुलाबी सा। उसकी चुचियों एकदम दूध की तरह सफेद थी। उसके बूब्स का साइज एक भारतीय नारी की तरह सौंदर्य की प्रतिमा सा महसूस हो रहा था। उसके बूब्स न तो ज्यादा बड़े थे और न हीं ज्यादा छोटे। एकदम सही आकार में थे। उसके बूब्स के उपर मुझे एक दो लाल निशान दिखाई पड़ रहे थे, शायद रात को मैंने अपने दांत गड़ा दिये होंगे।
फिर मेरी नजर थोडी नीचे को हुई। उसका पेट एकदम चिकना और सपाट था। पेट पर थोड़ी सी भी चर्बी नहीं थी।
क्रमशः.....................
मुझे जोरों की बाथरूम लगी थी। मैं जल्दी से उठकर बाथरूम में घुस गया और टॉयलेट में धार लगा दी। मुझे बाथरूम करने में थोड़ी परेशानी हो रही थी, इसलिए रूक रूककर धार मार रहा था।
बाथरूम करने के बाद मैंने मुंह धोया और कुल्ला किया और फिर रूम में आ गया। सोनल अभी भी बैड पर ही लेटी हुई थी। मैंने टाइम देखा तो 5 बजने वाले थे।
मैं जाकर बैड पर सोनल के पास सीधा होकर लेट गया और रात का सीन मेरी आंखों में फिल्म की तरह चलने लगा।
सोनल मेरे गालों को चूमते हुए उठी और बाथरूम में जाने लगी। चलते हुए उसके कुल्हे मटकते हुए बहुत ही प्यारे लग रहे थे। मन कर रहा था कि अभी पकड़कर मसल दूं। सोनल बाथरूम में घुस गई। मुझे टॉयलेट में पानी गिरने की आवाज के साथ साथ पीस की आवाज भी साफ सुनाई दे रही थी।
थोड़ी देर बाद सोनल तौलिये से अपना मुंह पौछते हुए बाहर आई।
उसके आधे बाल पीछे उसकी कमर पर लटक रहे थे और आधे कंधे पर से आगे की तरफ आकर उसकी एक चूची को ढके हुए थे।
सोनल की दूसरी चूची एकदम तनी हुई थी (एक मुझे दिखाई नहीं दे रही थी कि तनी हुई है या लटकी हुई)।
मैं कल से उसके जिस्म के साथ खेल रहा था पर अभी तक उसे सही तरह से देखा ही नहीं था।
तभी सोनल ने तौलिया चेयर पर डाल दिया और सिर को एक झटका देकर अपने बालों को पीछे की तरफ कर दिया।
अब मुझे उसके दोनों उन्नत स्तन अपने सामने दिखाई दे रहे थे। उसके दोनों स्तन एकदम तने हुए थे, मानों वो पूरी तरह से गरम हो चुकी हो। उसका एक निप्पल थोड़ा कम बाहर को निकला हुआ था जबकि दूसरा निप्पल भाले की नोंक की तरह अपना सिर उठाये खड़ा था। उसके निप्पलों के चारों तरफ थोड़ा गहरा कलर था, गुलाबी गुलाबी सा। उसकी चुचियों एकदम दूध की तरह सफेद थी। उसके बूब्स का साइज एक भारतीय नारी की तरह सौंदर्य की प्रतिमा सा महसूस हो रहा था। उसके बूब्स न तो ज्यादा बड़े थे और न हीं ज्यादा छोटे। एकदम सही आकार में थे। उसके बूब्स के उपर मुझे एक दो लाल निशान दिखाई पड़ रहे थे, शायद रात को मैंने अपने दांत गड़ा दिये होंगे।
फिर मेरी नजर थोडी नीचे को हुई। उसका पेट एकदम चिकना और सपाट था। पेट पर थोड़ी सी भी चर्बी नहीं थी।
क्रमशः.....................