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Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

सूजने के कारण मेरा लिंग बहुत ही खूंखार मालूम पड रहा था।
मुझे जोरों की बाथरूम लगी थी। मैं जल्दी से उठकर बाथरूम में घुस गया और टॉयलेट में धार लगा दी। मुझे बाथरूम करने में थोड़ी परेशानी हो रही थी, इसलिए रूक रूककर धार मार रहा था।
बाथरूम करने के बाद मैंने मुंह धोया और कुल्ला किया और फिर रूम में आ गया। सोनल अभी भी बैड पर ही लेटी हुई थी। मैंने टाइम देखा तो 5 बजने वाले थे।
मैं जाकर बैड पर सोनल के पास सीधा होकर लेट गया और रात का सीन मेरी आंखों में फिल्म की तरह चलने लगा।
सोनल मेरे गालों को चूमते हुए उठी और बाथरूम में जाने लगी। चलते हुए उसके कुल्हे मटकते हुए बहुत ही प्यारे लग रहे थे। मन कर रहा था कि अभी पकड़कर मसल दूं। सोनल बाथरूम में घुस गई। मुझे टॉयलेट में पानी गिरने की आवाज के साथ साथ पीस की आवाज भी साफ सुनाई दे रही थी।
थोड़ी देर बाद सोनल तौलिये से अपना मुंह पौछते हुए बाहर आई।
उसके आधे बाल पीछे उसकी कमर पर लटक रहे थे और आधे कंधे पर से आगे की तरफ आकर उसकी एक चूची को ढके हुए थे।
सोनल की दूसरी चूची एकदम तनी हुई थी (एक मुझे दिखाई नहीं दे रही थी कि तनी हुई है या लटकी हुई)।
मैं कल से उसके जिस्म के साथ खेल रहा था पर अभी तक उसे सही तरह से देखा ही नहीं था।
तभी सोनल ने तौलिया चेयर पर डाल दिया और सिर को एक झटका देकर अपने बालों को पीछे की तरफ कर दिया।
अब मुझे उसके दोनों उन्नत स्तन अपने सामने दिखाई दे रहे थे। उसके दोनों स्तन एकदम तने हुए थे, मानों वो पूरी तरह से गरम हो चुकी हो। उसका एक निप्पल थोड़ा कम बाहर को निकला हुआ था जबकि दूसरा निप्पल भाले की नोंक की तरह अपना सिर उठाये खड़ा था। उसके निप्पलों के चारों तरफ थोड़ा गहरा कलर था, गुलाबी गुलाबी सा। उसकी चुचियों एकदम दूध की तरह सफेद थी। उसके बूब्स का साइज एक भारतीय नारी की तरह सौंदर्य की प्रतिमा सा महसूस हो रहा था। उसके बूब्स न तो ज्यादा बड़े थे और न हीं ज्यादा छोटे। एकदम सही आकार में थे। उसके बूब्स के उपर मुझे एक दो लाल निशान दिखाई पड़ रहे थे, शायद रात को मैंने अपने दांत गड़ा दिये होंगे।
फिर मेरी नजर थोडी नीचे को हुई। उसका पेट एकदम चिकना और सपाट था। पेट पर थोड़ी सी भी चर्बी नहीं थी।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--13
गतांक से आगे ...........
मैंने थोड़ा और नीचे देखा तो उसकी एकदम गोरी और बिना बालों वाली योनि दिखाई दी। उसकी योनि की फांके आपस में चिपकी हुई थी, मानों उसे मेरी नजरों से बचाने की कोशिश कर रही हों। उसकी मांसल और दूध जैसी गोरी सातलें उसकी योनि को मुझसे छिपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी।
अब जब मैंने सही तरह से सोनल को देखा तो वो एक सौंदर्य की प्रतिमूर्ति प्रतीत हो रही थी।
मुझे खुद को यूं घूरते देखकर सोनल ने अपने हाथों को अपनी चूचियों पर रखा और निप्पलों को पकड़कर उमेठ दिया। उसके मुंह से सिसकारी निकल गई।
आहहहहहह------- सीइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ-
उसकी इस हरकत से मेरे पप्पू ने एक झटका खाया, मानों उसे उसके इस कारनामे के लिए सलामी दे रहा हो।
सोनल धीरे धीरे चलते हुए मेरी तरफ आ रही थी। बैड के पास आकर सोनल ने अपना एक पैर उठाकर बैड पर रख दिया और ऐसे ही खडी हो गई और मेरी आंखों में देखने लगी।
मेरी नजर सीधी उसकी योनि पर जाकर टिक गई। उसके इस तरह खड़े होने से उसकी योनि की फांके थोडी सी खुल गई और उसकी योनि के अंदर का गुलाबी भाग दिखाई देने लगा।
मैंने लडकियों के दाने के बारे में सुना पर, पर अब जब मैं देखना चाह रहा था तो मुझे कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।
मैं: सोनल, एक बात पूछू।
सोनल: हां, पूछो।
मैं: तुम पहले कितनी बार सैक्स कर चुकी हो।
सोनल (हैरान होते हुए): तुम्हें कैसे पता कि मैं पहले सैक्स कर चुकी हूं।
मैं: अरे यार, जब एक लड़के को ही पहली बार में इतना दर्द हुआ है, तो लड़की को तो और भी ज्यादा होना चाहिए। उसकी तो सील भी टूटती है और इतना मोटा अंदर घुसता है तो उसकी योनि भी खुलती है।
सोनल: वाह जी, बस सील ही नहीं टूटी थी, बाकी तो सारी जानकारी है आपको। कोई सैक्स टीचर लगा रखी थी क्या।
सोनल: मैंने बस एक बार ही किया है। वो तुम्हारे यहां आने से पहले मेरे मामा जी का लड़का रहता था यहां पर। उसके साथ। उसी ने मेरी सील तोड़ी थी।
सोनल की बात सुनकर मेरा मुंह खुला का खुला रह गया।
मैंः अपने भाई के साथ तुमने सैक्स किया है।
सोनल: तो इसमें चौंकने की क्या बात है।
मैं: नहीं, नहीं, चौकने की बात थोड़े ही है, इसमें तो खुश होने की बात है, मुझे तो तुम्हें बधाई देनी चाहिए। वाह सोनल तुमने तो बहुत बड़ा काम किया है, अपने भाई से चुदवा के।
मेरी बात सुनकर सोनल थोडा झेंप गई और अपना चेहरा नीचे कर लिया।
 
मैं: तो फिर एक बार ही क्यों किया, वो तो इधर ही रहता था।
सोनल: वो उसने एकदम से अंदर डाल दिया था तो मेरी सील टूट गई और बहुत ज्यादा दर्द हुआ जिससे मेरी चीख निकल गई और दीदी और मम्मी उपर आ गई और हमें ऐसे देख लिया।
मैं: फिर?

सोनल: फिर मम्मी ने मुझसे पूछा कि इसने तेरे साथ जबरदस्ती की है या तू अपनी मर्जी से आई थी। मैंने तो कह दिया कि इसने जबरदस्ती मुझे पकड़ लिया और मेरे साथ ये सब कर दिया।
मैं: तेरे से तो बचके रहना पड़ेगा, तू तो बहुत बड़ी मतलब खोर है।
मेरी बात सुनकर सोनल थोड़ी उदास हो गई।
मैं: ज्यादा सेंटी होने की जरूरत नहीं है, बस मैं तो ये कह रहा था कि थोड़ा धयान रखकर तेरे साथ मस्ती करनी पडेगी।
सोनल: मैं आपके साथ ऐसा कुछ नहीं करूंगी। अगर पकड़ी जाती हूं तो कह दूंगी कि मैं अपनी मर्जी से आई थी।
मैं: हां, वो तो तेरे चेहरे से झलक रहा है ना, बड़ी आई कहने वाली। तो उसके साथ ऐसा क्याें किया था।
सोनल: वो तो मैं उसके साथ ऐसा कुछ करना नहीं चाहती थी, उसने ही मुझे गर्म कर करके अपने जाल में फंसा लिया था और मैंने अपने जिस्म के हाथों मजबूर होकर उसके साथ सैक्स किया था।
सोनल का जो पैर बैड पर रखा हुआ था मैंने अपना हाथ उसपर रख दिया और उसकी जांघों को सहलाने लगा।
मैं: अच्छा, तो मैंने तो तुझे मजबूर नहीं किया, फिर मेरे साथ क्यों किया।
सोनल: आप तो मुझे अच्छे लगते हो।
मैं: अच्छा मैं तो अच्छा लगता हूं, और तुम्हें अपना भाई अच्छा नहीं लगता था।
सोनल: वो तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था, हमेशा लड़कियों से फोन पर बात करता रहता था गंदी गंदी। इसलिए मैं तो उसके बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी। एक नम्बर का कमीना था वो।
मैं: हां, ये सब तो तुम अब कह रही हो, तब तो तुम्हें वो बड़ा अच्छा लग रहा होगा।
सोनल (थोड़ा गुस्सा होते हुए): आप भी ना! अब छोउ़ो ना उस बात को।
मैं: ओके जी! और उसका हाथ पकड़कर कर खींचते हुए अपने उपर गिरा दिया।
मेरे खींचने से सोनल का एक पैर का घुटना (जो पैर नीचे था) बैड से टकरा गया और उसके मुंह से आउच निकला।
सोनल: आह, दर्द हो रहा है, बहुत जोर से लगा है।
मैंने सोनल को बैड पर लेटा दिया और उठकर उसके घुटने को देखने लगा। मैंने उसके घुटने को हाथ लगाया तो उसने मेरा हाथ हटाते हुए, दर्द हो रहा है।
मैंने अपने होंठ उसके घुटने पर रख दिये। मेरे होंठ उसके जिस्म से टकराते ही सोनल के मुंह से आह निकल गई।
मैंने उसके घुटने को अपनी जीभ से सहलाना शुरू कर दिया। सोनल ने सिसकारी निकालनी शुरू कर दी। उसके योनि ने भी पानी टपकाना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर उसके घुटने को प्यार करने के बाद मैं थोड़ा उपर हो गया और उसकी जांघों पर किस करने लगा। मेरे होंठ अपनी जांघों पर महसूस करते ही सोनल के मुंह से फिर से लम्बी सिसकारी निकली।
ओहहहहह------ समीर-------- आअअअअअअहहहहहहहह--- मजा आ रह------ा हे-----------
मैंने धीरे धीरे उपर की तरफ होते हुए अपने होंठ से उसकी जांघों को सहलाने लगा और फिर उसकी योनि पर एक किस रसीद कर दी।
आहहहहहहहह--------- सीीइदइइइइइइ-इइ---------,
सोनल के मुंह से सिसकारी निकली और उसने मेरे बालों में अपने हाथ फिराने शुरू कर दिये।
फिर मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसकी योनि की फांकों के साइड में फिराने लगा। सोनल बैड पर लेटी हुई मचलने लगी और मेरे सिर को अपनी योनि पर दबाने लगी। मैंने अपने हाथों से उसकी योनि की फांकों को थोड़ा सा खोला।
ओह माई गोड, तो ये होता है चुत का दाना, (उसके योनि के उपर वाले हिस्से पर मुझे एक लम्बा सा दाना दिखाई दिया)।
सोनल मेरी बात सुनकर हंसने लगी और मेरे गालों पर प्यार से एक हलका सा चांटा लगा दिया।
बहुत बदमाश हो तुम तो, बस दिखते शरीफ हो।
मैंने अपनी उंगली से उसके दाने को छुआ। मेरी उंगली उसके दाने पर लगते ही सोनल के शरीर ने एक झटका खाया और उसकी योनि से थोड़ा सा जूस बाहर फेंक दिया, जो सीधे मेरे मुंह पर आकर गिरा। मैंने अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसके दाने को चाटने लगा।
 
आह---हहहहहहहहहह-------- ओहहहहहहहह----- सीीदइइइइइइइ-इ------ इसे------ अपने---- होंठों- --- - से ---- चुचुचुचुससससससससससससससससो।
सोनल तडपने लगी। मैं समझ गया कि यही दाना इसकी कमजोरी है।
मैंने उसके दाने को अपने होठों के बीच में लिया और हल्के से होठों से दबाने लगा।
उउउउउउउउउउउउउउउउउउउउ---- मररररररररररररररररररररर गइइइइइइइइइइइइ-------- और सोनल अपने हाथों को मेरे बालों में फिराते हुए मेरे सिर को अपनी योनि पर दबाने लगी।
मैंने उसके दाने को अपने दांतों के बीच पकड़ा और धीरे से अपने दांतों से मसलने लगा।
उहउहउहउउउउहहहहहहहहहहहहहकृओहह-------------सीीीदइददइदइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ--- मैं------------गगगगगगगगगगगगइइइइइइइइइइइई-------------------
और सोनल की योनि ने अपना जूस की बाहर की तरफ छोउ़ना शुरू कर दिया। मैंने अपनी एक उंगली उसकी योनि पर रखी और उपर से नीचे तक धीरे धीरे सहलाने लगा। सोनल ने अपने हाथ मेरे सिर पर से उठाये और अपनी चूचियों को पकड़कर मसलने लगी। बैड पर उसका सिर कभी इधर तो कभी उधर डोल रहा था और उसकी कमर बार बार हवा में उठ रही थी।
मैंने उसके निकलते जूस को अपनी जीभ से थोडा सा चाटा तो मुझे ज्यादा अच्छा नहीं लगा। मैंने वापिस से अपनी जीभ को उसके दाने पर फिराना शुरू कर दिया।
सोनल: अब और सहन नहीं हो रहा, डाल दो अंदर।
मैंने उसकी बात पर धयान नहीं दिया और अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसकी योनि पर नीचे से उपर फिराने लगा।
आहहहहह ओहहहह गोडडडडडडडडडडडडडडडडड------- ऐऐऐएऐऐएसााााााााा--- ललगगगगगगगगगगगगगगग--- रहहहहहहहहहहहहहा --- हहहहहहहहहहहै---- ममममममममैं-------------- मरररररररररररररर जाउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउंगी
सोनल अपनी चूचियों को बुरी तरह से मसल रही थी।
मैंने अपनी जीभ को उसकी योनि के द्वार पर रखा और अंदर घुसाने की कोशिश करने लगा। मेरी जीभ थोड़ी सी अंदर चली गई और मैंने जीभ ऐसे ही अंदर डाले हुए उसकी योनि को अपने होठों में भर लिया और अंदर की तरफ सुक करने लगा।
मेरी इस हरकत से सोनल ने अपने कुल्हों की उपर की तरफ उठाया और मेरे सिर पर हाथ रखकर नीचे की तरफ दबा दिया। मानों मेरे सिर को अपनी योनि में घुसाना चाह रही हो। मेरी नाक उसके पेडू पर दब गई और मुझे सांस लेने में दिक्कत होने लगी।
मैंने उसके हाथों को सिर पर से हटाया और मुंह को उसकी योनि पर से हटा दिया। मैं जोर जोर से सांसे लेने लगा।
सोनल ने अपनी आंखें खोली और मेरी तरफ देखते ही हंसने लगी।
मैं: क्यों हंस रही हो।
सोनल: तुम्हारा मुंह मेेरे जूस से पूरा गीला हो गया है ओर चमक रहा है। और फिर हंसने लगी। बहुत प्यारे लग रहे हो ऐसे।
मैं उपर को उठा और उसकी जांघों के बीच में बैठ गया। मैंने अपने लिंग को उसकी योनि पर रखा और उपर नीचे फिराने लगा।

सोनल नीचे से अपने कुल्हे उठाकर लिंग को अंदर डालने का प्रयास करने लगी। पर मैं उसे तड़पाना चाहता था इसलिए जब वो नीचे से अपने कुल्हे उठाती तो मैं भी लिंग को थोड़ा सा वापिस कर लेता।
जब मैंने ऐसे ही छः सात बार किया तो सोनल ने नाराज होते हुए कहा -
सोनलः प्लीज! टब सहन नहीं हो रहा, डाल दो ना अंदर।
मैं: क्या, कहां डाल दूं।
सोनल: अपना लंड मेरी चूत में डाल दो और मेरी चूत की सारी प्यास बुझा दो।
सोनल के मुंह से चूत और लंड शब्द सुनते ही मैंने अपना लिंग उसकी योनि द्वार पर लगाया और एक जोरदार धक्के के साथ पूरा का पूरा लिंग उसकी योनि में डाल दिया। मेरा लिंग सीधा जाकर उसके गर्भाश्य से टकरा गया।
आहहहहह----- ओहकृहहहहहह------ हां-------- ऐेेससससससेसेे ही----- फाड------ दो-े-े---------- मममममममममममम्म्म्ममममम--- बहुत--- मजा आ रहा ह-हहहहहहहहहहहहहहै
मैंने फिर से अपने लिंग को बाहर निकाला और एक और जोरदार धक्का मार दिया।
ओहहहहहहह, ऐसे ही--- हां------ और जोर से------- सीइइइइइइइइइ
उउउउउउउ------ मर----गइइइइइ----
मैंने अपने लिंग को फिर से बाहर निकाला और जोरदार धक्कों से उसकी योनि की धज्जियां उडानी शुरू कर दी।
आअअअअहहहहहहहहह === ओहहहह------ आाआा------- ससीसीससीइइइइइइइइइ---- हआाआाााहहहहहह---- ओहहहहहह---
सोनल जोर जोर से सिसकारियां निकालने लगी।
थोड़ी ही देर में सोनल का शरीर फिर से अकड़ने लगा और उसने अपनी टांगे मेरी कमर में लपेट दी और नीचे से अपने कुल्हें उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी। मैं भी जोरदार धक्को के साथ उसकी गहराई तक जाकर लिंग को वापिस बाहर निकालता और फिर से एकदम जोरदार धक्के के साथ वापिस अंदर डाल देता।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--14
गतांक से आगे ...........
तभी सोनल के मुंह से तेज सिसकारी निकली
आहहहहहहहह-हहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहह हहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहह मैं गईइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ
और मुझे मेरे लिंग पर उसका गर्म जूस महसूस हुआ। उसका गर्म जूस को अपने लिंग पर महसूस होते ही मेरे लिंग ने भी उसकी योनि में पिचकारियां मारनी शुरू कर दी। मेरी पिचकारियों को महसूस करके सोनल ने दोबारा से जोरदार चीख मारी
ओआओहहहहहहहहहोाहहाहहहहहहहहहहहहह माइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ गोडडडडडडडडडडडडडडड, मुझझझझझझझझझझझझझझझझण्े लगगगगगग रहहहहहहहहहहा हैह किकककककककक तुम्हाराााााााााााााााा जूसससससस सीधा मेरे गर्भ में जा रहा है
और सोनल की योनि ने और भी ज्यादा पानी छोड़ना शुरू कर दिया।
मैं उसके अंदर खाली होकर निढाल सा होकर उसके उपर लेट गया और हांफने लगा। चरम आनंद के कारण मेरी आंखें बंद थी। मैंने अपना चेहरा सोनल के बूब्स पर रख दिया और आराम से लेट गया।
सोनल ने अपना एक हाथ मेरी कमर में रखा और सहलाने लगी तथा दूसरे हाथ से मेरे बालों से खेलने ली।
तभी हल्के से दरवाजा खुला हम दोनों चौंक कर उठ गये।
दरवाजे पर पूनम खड़ी खड़ी मुस्करा रही थी।
पूनम: ओ तो ये बात है, लगता है पूरी रात बहुत मजे हुये हैं, यहां पर।
सोनल: तततत तुमममम यहहहाां कैससससे?
पूनम: अब इतनी तेज तेज सिसकारियां निकालोगी तो मैं तो क्या पूरा मोहल्ला आ जायेगा।
पूनम की बात सुनकर सोनल शरमा गई और अपना चेहरा मेरी छाती में छुपा लिया।
पूनम ने मेरी तरफ आंख मारी और वापिस चली गई। मैंने सोनल को अपने से अलग किया और उसके होंठो पर एक प्यारी सी पप्पी दी और उठने लगा।
सोनल ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
सोनल: अब क्या होगा! क्हीं पूनम ने किसी को बता दिया तो।
मैं: अरे तुम्हारी सहेली है, ऐसे थोड़े ही किसी को बतायेगी।
सोनल: वो तो बस थोड़ी बहुत दोस्ती है, ज्यादा कुछ नहीं है।
मैं: अरे नहीं बतायेगी। (और ये कहकर मैं बाथरूम में घुस गया)
सोनल भी उठी और मेरे साथ ही बाथरूम में आ गई। उसके योनि से हमारा मिला जुला रस निकल कर जांघों पर बह रहा था।
मैंने शॉवर चालू किया और सोनल को अपनी बाहाें में भरकर शॉवर के नीचे आ गया।
यहां मैंने सोनल को और सोनल मुझे नहलाया। और नहाकर बाहर आ गये।
बाहर आकर मैंने टाइम देखा तो 7 बजने वाले थे।
सोनल: मम्मी उठ गई होंगी, अगर मेरे रूम में जाकर देख लिया तो आज तो बैंड बज जायेगी।
और जल्दी से अपनी नाइटी और पेंटी उठाई और पहन ली।
मैं: इस तरह नीचे जाओगी। आंटी ने देख लिया कि तू इस ड्रेस में उपर गई थी तो तेरी बढ़िया खिंचाई होगी।
सोनल: अब क्या करूं, और कुछ है भी तो नहीं।
मैं: रूको, मैं देखता हूं।
और मैं बाहर आ गया। पूनम अपनी छत पर ही टहल रही थी।
मैं पूनम के पास गया और उसे सारी बात समझाई और एक पजामी लाने को कहा।
 
पूनम ने मेरे गालों पर चिकोटी काटी और मुस्करा कर नीचे चली गई, पजामी लाने के लिए।
कुछ ही देर में पूनम पजामी ले आई और मुझे दे दी। पजामी देते हुए पूनम ने मेरे हाथ के दबा दिया पर मैंने ज्यादा धयान नहीं दिया और अंदर आ गया।
मैंने पजामी सोनल को दी और बाहर आते हुए कहा, जल्दी से बाहर आ जाओ।
मैं जैसे ही बाहर निकला मुझे सीढ़ीयों में से किसी के उपर आने की आवाज सुनाई दी।
सोनल पजामी पहनकर बाहर आ गई और मेरे पास आकर खड़ी हो गई। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसके बूब्स नाइटी में से साफ साफ दिखाई दे रहे थे।
मैंने उसे कहा जल्दी से बाथरूम में घुस जाओ, शायद आंटी आ रही है उपर।
सोनल: तो क्या हुआ, कपडे तो पहने हुए हैं।
मैं (उसके बूब्स को पकड़ते हुए): तुम्हारे पर्वत साफ दिखाई दे रहे हैं बाहर से।
सोनल भाग कर बाथरूम में घुस गई और तभी आंटी उपर आई।
आंटी: गुड मॉर्निंग बेटा!
मैं: गुड मॉर्निंग आंटी! आज सुबह सुबह उपर।
आंटी: वो बेटा सोनल आई क्या उपर।
मैं: हां आंटी वो बाथरूम में है।
आंटी: ठीक है बेटा, नीचे अपने रूम में नहीं थी तो सोचा कहीं उपर ना गई हो इसलिए देखने आ गई थी।
इतना कहकर आंटी सोनल को आवाज लगाती हुई कि सोनल बेटा जल्दी नीचे आजा खाने की तैयारी करनी है, और आंटी नीचे चली गई।
आंटी के नीचे जाते ही मैंने सोनल को बाहर बुलाया और सोनल जल्दी से नीचे चली गई।
साथ वाली छत पर पूनम सारा नजारा देखकर हंसे जा रही थी।
मैं अंदर आकर बाथरूम में घुस गया और फ्रेश होके नाश्ता बनाने की तैयारी करने लगा।
मैं नाश्ता बनाते समय बहुत ही महीन पजामी और बनियान पहनता हूं, जिससे ज्यादा गर्मी न लगे।
मैंने थाली में आटा डाला और गूंदने लगा। तभी पूनम मेरे रूम में आई और ओह, नाश्ते की तैयारी चल रही है कहती हुई रसोई में आकर मेरे पास खड़ी हो गई।
मैं: हाय! क्या हाल हैं।
पूनम: हाय! बस ठीक ही हैं।
मैं: क्यों क्या हुआ।
पूनम: अब इतना गर्म सीन देखकर हाल कहां ठीक रहते हैं। (और थोड़ा सा मेरे पास होकर मेरे कंधें पर हाथ रखकर खड़ी हो गई।
मैं: लगता है गरम सीन देखकर आप भी गरम हो गई हैं।
मैंने आटा लगा दिया था और गैस पर तवा रखकर जार से घी निकालने लगा।
पूनम: चलो आज मैं अपने हाथ के परोंठे खिलाती हूं।
मैं: अरे नहीं मैं बना लूंगा, आप क्यों परेशान होती हो।
मुझे थोड़ा ये भी डर था कि कहीं सोनल उपर ना आ जाये, खामखां इसे मेरे साथ देखकर उल्टा सीधा सोचेगी।
पूनम (गैस के पास आकर खड़े होते हुए): इसमें परेशान होने की क्या बात है।
मैं: ओके, ठीक है, जैसी आपकी मर्जी। (और वहीं पर पूनम के पास खड़ा होकर उसे नाश्ता बनाते हुए देखने लगा।
पूनम रोटी बेलते वक्त कुछ ज्यादा ही हिल रही थी, जिससे वो बार बार मुझसे टच हो रही थी। उसने ब्लैक पाजामी और व्हाईट टीशर्ट पहनी हुई थी।
अब मुझे भी उससे टच होने में मजा आने लगा था, इसलिए मैं कोई चीज उठाने के बहाने उससे टच होने लगा।
मैं पूनम के लैफ्रट साइड खड़ा था। मैं उसके पीछे से उसके कुल्हों पर अपनी जांघे रगड़ते हुए दूसरी साइड गया। मेरे इस तरह उसके कुल्हों से सटकर जाने के कारण मेरे शरीर में एक तरंग दौड़ गई और मेरा लिंग सख्त होने लगा। दूसरी तरफ से एक कटोरी उठाकर वापिस से उसी प्रकार उसके कुल्हों पर अपनी जांघों को रगड़ते हुए फिर से लैफ्रट साइड में आ गया। मुझे उसके कुल्हें अपनी जांघों पर अच्छी तरह से महसूस हुए और वापिस आते समय तो ऐसा लगा जैसे मेरा लिंग उसके कुल्हों पर नंगा ही टच हो रहा है।
पूनम के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली जिसे उसने अपने होठों को भींचकर अंदर ही दबा लिया।
 
मैं लैफ्रट साइड में आकर खड़ा हो गया। मेरी इस हरकत से मेरा लिंग एकदम तन गया था और अंडरवियर के अंदर एक बंबू बनाकर उछलने लगा। मैंने अपना मुंह पूनम की तरफ किया और अपना हाथ उसके कंधे पर रखकर अपना चेहरा अपने हाथ पर रख लिया और थोड़ा सा सरककर आगे को हो गया, जिससे मेरा लिंग उसके जांघों पर साइड में से टच होने लगा।
पूनम मंद मंद मुस्करा रही थी और नाश्ता बना रही थी। पूनम ने नाश्ता बना दिया और थाली को वासबेसिन में रख दिया। मैं रूम में आ गया और बैड पर बैठ गया। पूनम रूम में आई।
पूनम: नाश्ता तैयार हो गया है, खाकर बताना कैसा बना (और यह कहकर चली गई)।
मैं उठा और नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया। नहाकर मैंने नाश्ता किया।
साढे आठ बजने वाले थे। मैंने कपड़े पहने और बाइक की चाबी लेकर रूम को लॉक करके नीचे आ गया। सोनल की स्कूटी वहां पर नहीं थी, इसका मतलब वो कॉलेज के लिए निकल गई थी।
मैंने भी अपनी बाइक स्टार्ट की और ऑफिस के लिए चल पड़ा।

ऑफिस पहुंचकर मैंने गेट खोला और अंदर आकर बाइक खड़ी कर दी। मैं सीधा ऑफिस में आ गया। अपूर्वा अभी नहीं आई थी। कामवाली अभी सफाई कर रही थी। मैं बाहर ही खड़ा हो गया और सफाई वाली के निकलने का इंतजार करने लगा। थोड़ी देर में सफाई वाली सफाई करके बाहर आई।
मैं: आज इतनी देर कैसे हो गई।
कामवाली: जी वो मेमसाहब बाहर गई हैं तो उनके लिए खाना तैयार किया था पहले, तो इसलिए देर हो गई।
मैं: घर पर कोई है भी नहीं।
कामवाली: कोई नहीं है, साहब भी उनके साथ ही गये हैं।
तभी मेरा सैल की रिंग बजी। मैंने जेब से सेल निकाल कर देखा तो बॉस की कॉल थी। मैंने कॉल रिसीव की।
मैं: गुड मॉर्निंग बॉस।
बॉस: गुड मॉर्निंग। वो हमें किसी काम से बाहर जाना पड़ा है, तुम अगर चाहों तो छूट्टी कर लेना, अकेले बोर होओगे, अपूर्वा भी नहीं आयेगी आज।
मैं: अरे हों, बॉस मैं तो भूल ही गया था कि अपूर्वा आज नहीं आयेगी। ठीक है बॉस मैं कुछ देर काम करता लेता हूं, फिर अगर मन नहीं लगा तो चला जाउंगा।
बॉस: ठीक है।
और फोन कट गया।
कामवाली अभी भी मेरे पास ही खड़ी थी।
मैं (काम वाली से): आपका नाम क्या है?
कामवाली: जी, शुकन्तला।
मैं: सिर्फ नाम से ही शुकन्तला हो या वाकई में शुकलन्ता हो। (दोस्तों आपने दुष्यन्त और शुकन्तला के बारे में तो सुना ही होगा, शुकन्तला एक बेहद ही खुबसूरत राजकुमाीर थी और दुष्यन्त और शुकन्तला का आपस में प्यार हो गया था और शुकन्तला पूरी तरह पतिव्रता थी, ज्यादा जानकारी के लिए किताबें पढ़ लिजिए)
कामवाली: जी, मैं कुछ समझी नहीं।
मैं: शुकन्तला कौन थी, तुम्हें पता है।
कामवाली: जी नहीं, पर मेरा नाम शुकन्तला ही है।
मैं मुस्कराते हुए उसे देखता हुआ ऑफिस में आ गया। कामवाली हमारे बाथरूम की तरफ चली गई सफाई करने के लिए।
मैंने अंदर आकर अपना कम्प्यूटर चालू किया और चेयर पर बैठ गया। मैंने सोचा चलो मौका अच्छा है, कोई भी नहीं है तो rss ही खोल लेता हूं। मैंने मोजिला चलाया और Xforum डॉट कॉम टाइप करके एंटर दबाया। परन्तु तभी पेज नोट फाउंड लिखा आ गया। मैंने दोबारा एंटर दबाया पर कोई फायदा नहीं हुआ। मैंने इंटरनेट कनेक्शन चैक किया तो इंटरनेट नहीं चल रहा था।
मुझे बड़ा गुस्सा आया तिकोना वालों पर (ऑफिस में तिकोना का ब्रॉडबैण्ड लगा हुआ है), आज ही तो मौका मिला था और आज ही सालों का इंटरनेट नहीं चल रहा था। मैंने तिकोना के कस्टमरकेयर पर कॉल लगाई और कम्पलेंट की तो उन्होंने कहा कि सर मौसम की वजह से थोउ़ी खराबी आई हुई है, थोडी देर में चालू हो जायेगा।
मैंने अपने मोबाइल को डाटा केबल के साथ पीसी से कनेक्ट किया और इंटरनेट कनेक्ट कर दिया।
अब 2जी में तो एक्सबी पर एक दो पेज खुलने में ही दस बीस मिनट लग जाती इसलिए मैंने फेसबुक का मोबाइल वर्जन ओपन किया और न्यूज फीड पडने लगा। मैंने अपने मोबाइल में से एक एमएमएस जो अभी नया ही आया था, मैंने अभी सही तरह से देखा नहीं था, उसे कम्प्यूटर में ट्रांसफर किया और कामवाली को देखा कहीं इधर ही तो नहीं है परन्तु वो सफाई करके दूसरी तरफ चली गई थी।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--15
गतांक से आगे ...........
मैंने वीडियो चालू कर दी और चेयर पर आराम से पीठ लगाकर बैठ गया और वीडियो देखने लगा।
वीडियो में एक खूबसूरत लड़की का चेहरा दिखाई देता है जो गाड़ी में बैठी हुई थी।
लड़की: मैं मना कर रही हूं ना फोटो मत लो।
लड़का: कुछ नहीं होता, मैं देखने के बाद डिलीट कर दूंगा।
लड़की: अगर लीक हो गई ना तो फिर देख लेना, मैं तो बरबाद होउंगी, तुझे कहीं का नहीं छोड़ूंगी।
ये सुनते ही लड़का भड़क गया और लड़की बालों को पकड़कर खींच लिया और उसके मुंह को अपने पेट की जीप से बाहर निकाले लिंग पर टिका दिया।
लड़की ने अपना मुंह खोला और जीभ बाहर निकाल कर उसके लिंग को चाटने लगी।
मैं वीडियो देखने में मस्त हो गया।
तभी मुझे ऐसा लगा कि बाथरूम के साइड वाला दरवाजा खुला है, मैंने थोड़ा सा सिर घुमाकर देखा तो दरवाजा बंद ही था, शायद हवा से हिला हो।
मैंने वापिस वीडियो पर धयान दिया, लड़के ने लड़की के सिर को अपने लिंग पर दबा दिया था और उसका पूरा लिंग लड़की के मुंह में चला गया था। लड़की के मुंह से घूं घूंघूघूघू की आवाज आ रही थी और वो अपने हाथों को चला रही थी, खुद को छुड़ाने के लिए। पर लड़के की पकड़ मजबूत थी।
लड़के ने उसके सिर को थोड़ा सा ढीला छोउ़ा, लडकी ने अपना सिर उपर को उठाया पर जैसे ही लिंग सुपाड़े तक बाहर आया लड़के ने वापिस से उसके सिर को दबा दिया और उसका लिंग फिर से लड़की के मुंह में पूरा चला गया। लड़की घूंघूघू करके अपने पैर पटकने लगी। तभी लड़के के मुंह से आह निकली और उसका शरीर अकड़ गया। उसने अपने हाथ को पूरी ताकत से लड़की के सिर को दबा दिया। कुछ सैकण्ड बाद उसका शरीर ढीला पड़ गया और उसके हाथ की पकड़ ढीली हो गई। हाथ की पकड़ ढीली होते ही लड़की ने अपने सिर को छुड़ाकर तेजी के साथ उपर को उठी। वो बुरी तरह से हांफ रही थी और उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे। लड़की खांस रही थी और अपने हाथ से अपने गले को सहला रही थी। उसके मुंह से लड़के का जूस बाहर टपक रहा था। जब वो खांसती तो कुछ ज्यादा जूस बाहर की तरह आकर गिर जाता।

थोड़ी देर में लड़की की सांसे नॉर्मल हुई। उसने एक थप्पड लड़के के गाल पर रसीद कर दिया और कार का दरवाजा खोलने लगी। लड़के ने तुरन्त हरकत की और उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया।
लड़की: छोड़ो मुझे।
लड़का: डार्लिंग, अभी चोदता हूं, टेंशन क्यों लेती है।
लड़की: बकवास मत करो, मेरा हाथ छोड़ो और मुझे जाने दो।
लड़का: अभी कैसे जाने दू, अभी तो बहुत कुछ बाकी है।
लड़की: मुझे कुछ नहीं करना, छोउ़ो मुझे।
तभी मुझे मेरे सिर के उपर गरम गरम सांस महसूस हुई।
मैंने तुरन्त पीछे घुमकर देखा तो शुकन्तला खड़ी हुई थी। उसका एक हाथ उसके बूब्स पर था और दूसरा हाथ उसकी योनि को सहला रहा था और उसकी नजरे मॉनीटर पर जमी हुई थी।
मेरे पीछे देखते ही वो एकदम हड़बड़ा कर पीछे को हो गई।
मैं उसे देखते ही एकबार तो घबरा गया, पर जब उसकी सिचुएशन देखी तो मुस्कराए बिना न रह सका।
 
मुझे मुस्कराता देखकर वो भी मुस्कराई और बाहर जाने लगी।
मैं: शुकन्तला, वो प्यास लगी है, पानी लाना।
शुकन्तला: जी, अभी लाती हूं और यह कहकर बाहर चली गई।
मेरे मन में शुकन्तला के साथ मजे करने का प्लान बनने लगा। मैं प्लान बनाने लगा कि कैसे शुकन्तला के साथ मजे करूं।
थोड़ी देर बाद शुकन्तला पानी लेकर आई और टेबल पर रखकर वापिस चली गई।
मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि उसे कैसे चुदाई के लिए तैयार करूं। मैंने पानी पीया और सोचने लगा। तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया।
मैं उठा और बाहर की तरफ चल दिया। मैंने पहले रूम के पास आकर देखा कि शुकन्तला बाहर नहीं है, शायद अंदर ही होगी। मैंने दरवाजा को हलका सा धकाया तो वो खुल गया। मैं अंदर आ गया।
दरवाजा खुलने की आवाज सुनकर शुकन्तला रसोई से निकल कर बाहर आई और मुझे वहां देखकर चौंक गई।
शुकन्तला: क्या हुआ साहब जी, आप यहां।
मैं: अरे वो चाय पीने का मन कर रहा था, तो सोचा कि तुम्हें बोल देता हूं।
शुकन्तला: अभी बनाती हूं, साहब जी। और वापिस रसोई में चली गई।
मैं भी उसके पीछे पीछे रसोई में आ गया। मैंने रसोई में अंदर आते हुए उसके जिस्म का नुमायना करना शुरू कर दिया। उसने अपने पूरे शरीर को साड़ी से ढंक रखा था इसलिए ज्यादा कुछ समझ तो नहीं आ रहा था। पर फिर भी वो एक भरपूर जवान जिस्म की मालकिन मालूम हो रही थी। शुकन्तला कोई 19 20 साल की जवानी से भरपूर लड़की थी।

शुकन्तला (मुझे रसोई में देखकर गले से थूक गटकते हुए): साहब जी आप यहां क्यों आ गये, मैं अभी बनाकर लेकर आती हूं, आप चलिये ना, मैं अभी ऑफिस में बनाकर लाती हूं।
मैं: कोई बात नहीं, मैं भी सीख लूूं कि चाय कैसे बनाते हैं, कभी बनानी पड़ गई तो।
शुकन्तला (खुश होते हुए): आपको चाय बनानी नहीं आती, बहुत आसान है।
मैं शुकन्तला के पास आकर खड़ा हो गया। शुकन्तला मुझसे थोड़ा हटकर खडी हो गई और चाय के लिए पतीला उठाकर गैस पर रख दिया और उसमें पानी डाल दिया। पानी के थोड़ा गर्म होने पर उसने चाय की पती का डिब्बा उपर से उतारा और एक चम्मच चाय की पती उसमें डाल दी।
मैं (बहाने से): कितनी चाय डालते हैं, इसमें। (और थोड़ा शुकन्तला की तरफ सरक कर पतीले की तरफ झुककर पतीले में देखने लगा। मेरा दायां हाथ शुकन्तला के शरीर से टच हो गया। शुकन्तला के शरीर ने एक झुरझुरी सी ली पर वो वहीं खड़ी रही। उसे हटते न देखकर मेरी थोड़ी सी हिम्मत बढ गई।
शुकन्तला ने अब चीनी का डिब्बा भी उतारा और बगैर मेरी तरफ देखे ही पूछा: कितनी चीनी लोगे साहब जी।
मैं (थेाड़ा और उससे सटते हुए): जितनी नॉर्मल डालते हैं और अपना हाथ पीछे की तरफ करके उसके कुल्हों से सटा दिया। और थोड़ा उसकी तरफ झुकते हुए उसे चीनी डालते हुए देखने लगा।
मेरे हाथ को अपने कुल्हों से टच होता महसूस करके शुकन्तला के माथे पर पसीने की कुछ बूंद झलक आई। उसने थूक को गटका और अदरक उठा कर उसको थोड़ा सा बेलन से पीटा और चाय में डाल दिया।
मैंने अपने हाथ को थोड़ी सी हरकत दी और उसके कुल्हों पर थोड़ा सा घिस दिया। मेरी इस हरकत से वो थोड़ा आगे को सरक गई जिससे वो स्लैब से एकदम सट गई। उसने अपने हाथ स्लैब पर रख दिए। और गहरी गहरी सांसे लेने लगी।
मैंने अपने हाथ को थोड़ा सा दबाव देकर उसके कुल्हों पर एक जगह स्थिर कर दिया।
अचानक उसके शरीर ने हरकत की और उसने अपने कुल्हें थोड़े से पिछे को कर दिये। मैंने अपने हाथ को उसी जगह पर मैनेज किए रखा जिससे मेरा हाथ उसके कुल्हें में गड सा गया। मैं सरककर और ज्यादा उसकी तरफ हो गया और अब मेरी जांघे उसकी जांघों पर साइड में से टच होने लगी। मेरा लिंग तनकर थोड़ा सा बाहर को उभार बनाए हुए था। मुझे लिंग में थोउा सा दर्द महसूस हो रहा था।
मैंने अपने हाथ वैसे ही उसके कुल्हें में दबाये हुए सीधा किया और उसके कुल्हे पर अपनी हथेली की ग्रिप बना दी।
शुकन्तला वैसे ही खड़ी थी और अपने कुल्हों को थोड़ा थोड़ा पीछे की तरफ धकेल रही थी। मैंने उसके एक कुल्हे को अपनी हथेली में भर लिया और भींचने लगा। शुकन्तला के मुंह से आह निकली और वो एकदम से साइड में हट गई।
शुकन्तला: ये ठीक नहीं है बाबू जी, आप बाहर जाओ, मैं चाय लेकर आती हूं।
मैं: क्यों, मजा नहीं आ रहा क्या।
शुकन्तला: आ रहा है, पर मैं शादी से पहले कुछ भी गलत नहीं करूंगी।
 
मैंने मन में सोचा इसको तैयार करने में थोड़ा टाइम लगेगा। खीर थोड़ी ठण्डी करके खानी पड़ेगी नहीं तो हो सकता है, खाने को ही ना मिले।
फिर भी मैं उसके पास गया और उसकी कमर को पकड़कर अपनी तरफ खींचा और खुद से सटा दिया।
शुकन्तला: छोड़ो ना बाबू जी, क्या कर रहे हो। मैं ये सब नहीं करूंगी।
मैं: ओके, कोई बात नहीं, ये सब कौन करने को कह रहा है, बस थोउ़े उपर से ही मजे कर लेते हैं।
शुकन्तला: नहीं, मैं कुछ नहीं करूंगी। हटो, चाय जल रही है। ( और मुझे पीछे की तरफ धक्का देकर चाय में दूध डालने लगी।
मैं उसके पीछे आकर उसके कुल्हों से सटकर खडा हो गया। शुकन्तला ने पीछे देखा।
शुकन्तला: हटो ना, अब मान भी जाओ। प्लीज, मैं आपके हाथ जोउ़ती हूं।
मैं: मजा तो तुझे भी आ रहा है, पर कोई बात नहीं, फिर कभी देखूंगा, आज मेरा भी ज्यादा मूड नहीं है। ये कहकर मैं रसोई से बाहर आ गया और ऑफिस में आकर बैठ गया।
थोड़ी ही देर में शुकन्तला चाय लेकर आई और मुझे देकर चली गई।
मैंने चाय पी और सिस्टम को शटडाउन करके घर चलने के लिए बाहर आ गया। मैंने शुकन्तला को आवाज लगाई कि मैं जा रहा हूं।
शुकन्तला: क्यों, क्या हुआ। नाराज हो गये क्या।
मैं: अरे नहीं, आज कुछ काम है, इसलिए जा रहा हूं।
शुकन्तला: ठीक है, साहब जी, मैंने तो सोचा कि कहीं मुझसे नाराज हो गये हो।
मैंने अपनी बाईक स्टार्ट की और घर के लिए चल पड़ा। 11 बजे मैं घर पहुंचा। मैंने देखा कि

मैंने देखा कि सोनल की स्कूटी वहीं पर खड़ी थी। मैं बाईक खड़ी करके अपने रूम में आ गया और बैड पर लेट गया। रात को नींद पूरी न होने के कारण मुझे थोडी ही देर में नींद आने लगी। मैं उठा और कपड़े चेंज करके शॉर्ट और टी-शर्ट पहन ली। और वापिस आकर बेड पर लेट गया सोने के लिए। थोड़ी ही देर में मैं सो गया।
उठो---- उठो---- भी---- क्या कुंभकर्ण की तरह सो रहे हो।
मैंने हल्के से आंखें खोल तो सोनल बैड के पास खड़ी मुझे उठा रही थी।
मैं (आंखे मलते हुए): क्या हुआ, क्यों उठा रही हो, इतनी अच्छी तो नींद आई हुई थी।
सोनल: अच्छा एक बार उठो, फिर वापिस सो जाना।
मैं (बैठते हुए): क्यों क्या हुआ यार।
सोनल मेरे साथ बैठ गई और अपने हाथ में पकड़े मिठाई के डिब्बे में से एक रसगुल्ला निकाल कर मेरे मुंह में ठूंस दिया।
ऊऊहहहहहहहहह क्यययययययययययया है ये, मैंने अपने हाथ से टपकते हुए रस को पौंछते हुए कहा।
सोनल: पहले एक और (और एक और रसगुल्ला मेरे मुंह में ठूंस दिया)।
अभी मैंने पहला तो खाया भी नहीं था, इसलिए मेरा मुंह एकदम भर गया। सोनल ने मेरी थोड़ी और होंठों पर लगे हुए रस को अपनी जीभ से चाट कर साफ कर दिया। मैंने मुश्किल से रसगुल्लों को खाया।
मैं: अब बताओ, ये रसगुल्ले किसलिये।
सोनल: मेरा माइक्रोसॉफ्रट में सलेक्शन हो गया।
मैं: वॉव, क्या बात है, तुम तो बड़ी छुपी रूस्तम निकली, बताया भी नहीं तुमने कि माइक्रोसॉफ्रट में एप्लाई किया हुआ है।
मैं: काँग्रेचुलेशन! और मैंने उसके होठों की एक पप्पी ले ली।
मैं (एक रसगुल्ला उठाते कर सोनल के मुंह के पास ले जाकर): तो अब इसी बात पे एक एक और हो जाये।
सोनल ने अपना मुंह खोला और मैंने पूरा उसके मुंह में ठूंस दिया।
सोनल: उंहूूहू, आराम से भी तो खिला सकते हो।
उसके होठों से टपकते हुए रस को मैंने अपने होठों से पी लिया और उसके नीचले होठ को अपने होठों के बीच में भरकर चूसने लगा। रसगुल्ले के रस में भीगे उसके होठों को चूसने में बहुत मजा आ रहा था।
क्रमशः.....................
 
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