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Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

मैं आकर चेयर पर बैठ गया और टेबल पर अपने पैर पसार दिए। ठंडी हवा ने अपना असर दिखाना शुरू किया और मेरी आंखें बंद होने लगी। परन्तु आंखें बंद होते ही फिर से वही, मुझे लगा कि कोई मेरी चेयर को उलट रहा है। मैंने फिर से आंखें खोल दी।
मैं (बड़बडाते हुए): अच्छी मुसीबत है ये तो, सो भी नहीं सकते पीकर तो।
मैं गाना गा रहा था और बउ़बड़ा रहा था।
काफी देर तक मैं ऐसे ही परेशान होता रहा। तभी सीढ़ीयों से किसी के आने की आवाज सुनाई दी तो मैंने सीढीयों की तरफ देखा।
सोनल और तान्या दोनों ही उपर आ रही थी।
सोनल (उपर आकर मेरी तरफ आश्चर्य से देखते हुए): मैं तुम्हें अंदर सुला कर गई थी, तुम फिर बाहर आ गये।
मुझे गाना गाते सुनकर सोनल ने कहा 'तो अब रात को गाकर दूसरों की नींद खराब करने का इरादा है'।
मैं: अरे यार, ये क्या मुसीबत है अब, आंख बंद करते ही सब कुछ घूमता हुआ लग रहा है और ऐसा लगता है कि कोई मेरा बेड उलट रहा है।
मेरी बात सुनकर तान्या और सोनल खिलखिलाकर हंसने लगी।
सोनल ने मेरा हाथ पकड़ा और उठाकर अंदर ले आई। तान्या भी हमारे साथ अंदर आ गई थी। सोनल रसोई में से एक गिलास पानी लेकर आई और मुझे पिलाया।
पानी पिलाने के बाद सोनल ने गिलास नीचे रख दिया और बेड पर मेरे पास सटकर बैठ गई। तान्या खड़ी हुई थी।
मैंने तान्या की तरफ देखते हुए उसे बेड पर अपनी बगल में हाथ से इशारा करते हुए बैठने को कहा।
तान्या थोड़ा शरमा रही थी, उसने सोनल की तरफ देखा, सोनल ने आंखों से इशारा करते हुए उसे बैठने को कहा। तान्या आकर मेरे दूसरे साइड में बैठ गई।
सोनल ने मेरे गालों पर अपने हाथ रख दिए और मेरे चेहरे को अपनी तरफ घुमा कर अपने तपते रसीले होंठ मेरे होठों पर रख दिए। हमारे होठों तुरंत ही एक दूसरे से बुरी तरफ उलझ गये। सोनल की आंखें बंद थी। मैंने भी अपनी आंखें बंद की पर आंखें बंद करते ही मुझे फिर से बेड पलटता हुआ महसूस हुआ और मैंने आंखें खोल दी।
हमें किस करते हुए देखकर तान्या ने अपना हाथ आगे करके मेरी जांघों पर रख दिया और धीरे धीरे सहलाने लगी। सोनल ने अपनी दोनों बांहें मेरे गले में डाल दी और मजे लेकर मेरे होठों को चूसने लगी। उसकी गरम सांसें मुझे मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थी, जो मेरी आंखों में भी लग रही थी, जिससे मुझे आंखें बंद करनी पड़ रही थी, पर आंखें बंद करते ही बेड पलटने लगता था, जिससे मैं आंखें नहीं बंद कर पा रहा था।
मैंने सोनल से अपने लबों को छुड़ाया और अपने लब उसके गले पर रख दिए। सोनल के मुंह से एक सिसकारी निकली। मैंने अपने हाथों को सोनल की चूचियों पर कस दिया और उन्हें मसलने लगा। सोनल मेरी कमर में अपने हाथों का कमाल दिखाने लगी।
तान्या ने अपना हाथ जींस के उपर से ही मेरे लिंग के उपर रख दिया और अपनी मुठ्ठी में भींचने लगी। मेरे मुंह से आह निकल गई और मेरी आंखें बंद हो गई। आंखें बंद होते ही फिर से बेड पलटता हुआ लगा तो मैंने संमभलते हुए शरीर को झटका दिया और आंखें खोली। सोनल एकदम पीछे को हट गई और मेरी बाजुओं को अपने हाथों से पकड़कर मेरी आंखों में देखने लगी। सोनल में आंखों के इशारे से पूछा कि क्या हुआ, मैंने अपनी उंगली को सिर के पास लाकर घुमाते हुए इशारे से बताया कि सब कुछ घूम रहा है।
सोनल मुस्करा दी और मेरे माथे पर अपने लब रख दिये और मेरे माथे को जगह जगह से चूमने लगी।
अब तान्या की हिम्मत भी कुछ बढ़ती जा रही थी। वो मेरी जींस की चैन खोलने की कोशिश कर रही थी, पर बेचारी सफल नहीं हो पा रही थी। मैं अपना हाथ नीचे ले गया और अपना हुक खोल दिया। तान्या ने मेरा हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचकर अपनी जांघों पर रख दिया। उसकी नरम और मांसल जांघों पर मेरा हाथ पड़ते ही तान्या और मेरे दोनों के मुंह से एक साथ आह निकल गई। सोनल ने शायद सोचा कि उसके चूमने के कारण मेरी आह निकली है। अब वो मेरे गालों को किस कर रही थी और अपनी जीभ निकालकर चाट भी रही थी। तान्या ने अपना एक हाथ मेरे हाथ पर रखकर अपनी जांघों पर दबाने लगी और दूसरा हाथ मेरी जींस के अंदर डालकर मेरे लिंग को अंडरवियर के अंदर से निकालने की कोशिश करने लगी। मैंने अपना हाथ सरकाते हुए जींस के उपर से तान्या की योनि के उपर रख दिया और उसकी योनि को जींस के उपर से ही मसलने लगा।
तान्या ने अपना हाथ मेरे हाथ पर से हटा लिया था और उस हाथ को अपनी चूचियों पर रख कर अपनी चूचियों को मसलने लगी।
सोनल मेरे गालों को चाट रही थी और साथ ही अपने दांतों से धीरे धीरे काट भी रही थी। मेरे गालों को चूमते हुए ही सोनल ने मेरे कान के नीचे के हिस्से को अपने होंठों में जकड़ लिया और चुभलाने लगी। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था, उपर सोनल के होंठ और नीचे तान्या का हाथ। ऐसा लग रहा था कि स्वर्ग में पहुंच गया हूं।
अचानक सोनल ने मुझे धक्का देकर बेड पर लिटा दिया। तान्या ने अपना हाथ एकदम से मेरी जांघों पर से हटा लिया और हमारी तरफ देखने लगी। सोनल ने मेरे उपर लेटते हुए अपने लब मेरे लबों पर रख दिये और वाइल्ड तरीके से किस करने लगी। मैंने भी जवाब देते हुए उसके होठों को अपने दांतों में दबा के हल्का सा काट लिया। सोनल ने अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ा हुआ था और अपनी चूचियों को मेरी छाती में रगड़ रही थी। अचानक तान्या खड़ी हुई और सोनल के पास आकर उसने उसके कुल्हों पर हाथ फिराने शुरू कर दिये। सोनल ने एकदम से पिछा देखा और तान्या को कुल्हे सहलाते देखकर मुस्करा दी और वापिस से मेरे होठों में खो गई। तान्या खड़ी खड़ी मेरी आंखों में देख रही थी और सोनल के कुल्हों ओर कमर पर हाथ फेर रही थी। तान्या ने सोनल के कमीज को कुल्हों पर से उपर उठा दिया और उसकी आधी कमर को नंगी कर दिया और उसकी नंगी कमर को सहलाने लगी। तान्या के नरम नरम हाथ अपनी नंगी कमर पर महसूस करते ही सोनल के शरीर ने एक झटका खाया और उसके मुंह से आह की आवाज निकली जो हमारे होठों की लड़ाई में गुम हो गई। मैं अपना हाथ पीछे की तरफ ले जाकर तान्या की जांघों को साइड में से पकड़ लिया, क्योंकि मेरा हाथ वहीं तक पहुंच रहा था। मैंने तान्या की टीशर्ट को पकड़कर उसके थोड़ा अपनी तरफ खींचा और अपने एक हाथ से ही उसकी जींस का हुक खोलने की कोशिश करने लगा, पर सफल न हो सका। तान्या मेरी तरफ देखकर मुस्करा रही थी, और मुझे असफल होता देखकर मेरी तरफ जीभ निकाल रही थी।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--19
गतांक से आगे ...........
मैंने आंखों के इशारे से उसे हुक खोलने के लिए कहा, पर उसने अपने कंधे उचका दिये और मेरी तरफ जीभ निकाल दी। वो लगातार मेरी आंखों में ही देखे जा रही थी। कुछ बीयर का नशा और कुछ वासना की आग, उसकी आंखें एकदम लाल हो गई थी। अचानक सोनल ने अपना हाथ नीचे की तरफ करके मेरी जांघों पर ले आई और मेरी जींस का हुक ढूंढने लगी। परन्तु जब उसका हाथ मेरे नंगे लिंग से टकराया तो वो हैरान होकर थोड़ा उपर उठी और मेरी जांघों की तरफ देखने लगी। मेरे लिंग को तो तान्या ने पहले ही जींस और अंडरवियर में से आजाद कर दिया था।
सोनल मेरी तरफ देखकर मुस्कराई और अपना हाथ में मेरे लिंग को जकड़ते हुए वापिस से मेरे होठों पर टूट पड़ी। वो अपने हाथ से मेरे लिंग को दबा रही थी। लगातार किस की वजह से मेरे होंठ दर्द करने लगे थे।
तान्या ने अपना हाथ हमारी जांघों के बीच में डाल दिया और उसका हाथ मेरे लिंग को पकड़े हुए सोनल के हाथ से जा टकराया जो मेरे लिंग की जड़ों को छूने लगा। दो दो लड़कियों के हाथों को अपने लिंग पर महसूस करते ही मेरे लिंग ने स्वागत में दो बूंदे रस टपका दिया जो सोनल के हाथ पर लगकर गुम हो गया।
तान्या ने मेरी गोलियों को पकड़ा और हलका सा दबा दिया। मेरे पैर एकदम अकड़ गये और कमर उपर को उठ गई। थोड़ी देर मेरी गोलियों को दबाने के बाद तान्या ने अपना हाथ हटा लिया और सोनल की जींस का हुक खोलने लगी। तान्या का हाथ बार बार मेरे लिंग और सोनल के हाथ से टकरा रहा था। सोनल का हुक खोलने के बाद उसने अपना हाथ हमारे बीच में से निकाल लिया और अपने दोनों हाथों से पकउ़कर सोनल की जींस को उतारने लगी। सोनल ने अपने कुल्हों को थोड़ा सा उपर उठा दिया जिससे जींस आसानी से कुल्हों से नीचे पहुंच गई।
तान्या ने अपने हाथ सोनल के नंगे कुल्हों पर टिका दिए और मसलने लगी। सोनल और भी ज्यादा वहशीपने से मेरे होठों को काटने और चूसने लगी। अब मेरा लिंग सोनल की नंगी जांघों से टकरा रहा था। सोनल ने अपने हाथ को एडजस्ट करते हुए मेरे लिंग को उसकी योनि पर सैट कर दिया और उपर नीचे होकर मेरे लिंग को अपनी योनि पर सहलाने लगी। उसकी योनि से निकलते रस से मेरा लिंग एकदम गीला हो गया। मैंने भी अपने हाथ सोनल के नंगे कुल्हों पर रख दिये जो सीधे तान्या के हाथों पर जाकर टिके। तान्या ने मेरी तरफ देखा और मैंने उसकी तरफ आंख मार दी।
तान्या थोड़ा नीचे झुकी और सोनल के कुल्हों पर एक पप्पी दे दी। अपने नंगे कुल्हों पर किसी लड़की के होठों को महसूस होते ही सोनल के शरीर ने झटका खाया और उसकी योनि ज्यादा पानी बहाना शुरू कर दिया। उसकी योनि से निकलता पानी मेरी जांघों पर गिर रहा था और नीचे की तरफ जाकर मेरी जींस और अंडरवियर को भिगो रहा था। मैंने तान्या के हाथ को पकउ़कर अपनी जींस पर रखकर उसे नीचे करने का इशारा किया। वो मेरा इशारा समझ गई और मेरी जींस को पकड़कर नीचे खिसकाने लगी। मैंने अपनी कमर को उपर उठाया और उसने एक झटके में मेरी जींस घुटनों तक पहुंचा दी। वो पीछे की तरफ गई और सोनल की जींस को पकड़कर पेंटी के साथ ही उसके पैरो से अलग कर दिया और फिर मेरी जींस को भी अंडरवियर के साथ मेरे पैरों से निकाल कर साइड में रख दिया और फिर आगे आकर हमारे साइड में बेड पर बैड गई और कभी सोनल के कुल्हों को तो कभी साइड से मेरी जांघों पर हाथ फिराने लगी।
 
सोनल उसी तरह से अपनी योनि को मेरे लिंग पर रगड़ रही थी और मेरे लबों को काट और चूस रही थी। शायद आज मेरे लबों से सारा रस निकालने का प्लान बनाकर आई थी जो उन्हें छोड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी। मैंने अपनी जीभ सोनल के मुंह में डाल दी और वो उसे चुसने लगी और अपनी जीभ मेरी जीभ से लड़ाने लगी। बहुत मजा आ रहा था।
अचानक तान्या ने अपनी उंगली सोनल के गुदा द्वार पर रखकर थोड़ी सी अंदर की तरफ दबा दी। सोनल आह करते हुए एकदम से अकड़ गई और कुछ मेरे लिंग की मसाज और कुछ तान्या का उसकी गुदा से छेउ़छाड़ वो सहन नहीं कर पाई और उसकी योनि ने ढेर सारा जूस मेरी जांघों पर निकालना शुरू कर दिया। उसने मेरे सिर को जोरों से पकउ़ लिया और मेरे लिंग पर अपनी योनि को जोर जोर से रगड़ने लगी। जोश में वो कुछ ज्यादा ही आगे हो गई और जब वापिस पिछे केा हुई तो मेरा लिंग सीधा उसकी योनि के अंदर फचाक से पहुंच गया। मेरा लिंग सीधा उसके गर्भाश्य से जाकर टकराया और के शरीर ने एक और झटका खाया और वो बहुत ही तेजी से मेरी लिंग को अंदर बाहर करने लगी। थोड़ी देर में उसका शरीर एकदम शांत हो गया और वो निढाल होकर मेरे उपर लेट गई। उसने अपने चेहरे को मेरे कंधे पर टिका दिया और जोर जोर की सांसे लेने लगी। उसके तेज धक्कों से मैं भी झड़ने के करीब पहुंच गया था, पर वो मेरे झडने से पहले ही निढाल होकर गिर पड़ी तो मैं अभी झडने से रह गया। मैं भी अभी झडना नहीं चाहता था क्योंकि सामने एक नई कली जो थी, उसको भी तो चखना था अभी।
मैंने करवट ली और सोनल को बेड पर लिटा दिया, उसने अपनी आंखें खोलकर मेरी तरफ देखा और फिर से अपनी आंखें बंद करके आराम से लेट गई।
मैंने तान्या की तरफ देखा वो बैड पर बैठी हुई हमें देख रही थी। मैंने एकबार सोनल की तरफ देखा वो आंखें बंद किए लेटी हुई हल्के हल्के मुस्करा रही थी।
फिर मैं वापिस तान्या की तरफ मुडा.

मैंने तान्या की तरफ देखा वो बैड पर बैठी हुई हमें देख रही थी। मैंने एकबार सोनल की तरफ देखा वो आंखें बंद किए लेटी हुई हल्के हल्के मुस्करा रही थी।
फिर मैं वापिस तान्या की तरफ मुडा और उसका हाथ पकउ़कर अपने पास खींच लिया। वो तो तैयार बैठी थी, बस हल्के से झटके में ही मेरे उपर आकर लुढक गई। मैंने उसके चेहरे को पकड़कर उपर उठाया और उसकी आंखों में देखते हुए उसके होठों पर अपने होंठ रख दिये। उसके होंठ लरज रहे थे। उसने अपनी आंखें बंद कर ली और अपने हाथ मेरे सिर के पिछे ले जाकर मेरे चेहरे को कस कर अपनी तरफ दबा लिया और मेरे होठों को काटने और चूसने लगी। उसने अपनी जीभ मेरे होठों पर फिराई और मेरे होठों के बीच में घुसा दी। मैंने अपने होठों को हलका सा खोला और उसकी जीभ सीधे मेरे मुंह में प्रवेश कर गई। मैंने उसकी जीभ को चूसना शुरू कर दिया। मेरे हाथ तो कब के उसकी चूचियों पर पहुंच चुके थे। उसकी चूचियों एकदम तनकर कड़क हो गई थी। कुर्ती के उपर से मजा न आने के कारण मैंने अपने हाथों से उसकी कुर्ती की किनारियों को पकड़ा और उसकी कुर्ती को उपर की तरफ खींच दिया। उसने अपने होंठ मुझसे अलग किए और अपने हाथ उपर कर दिये। मैंने उसकी कुर्ती उसके शरीर से अलग करके साइड में रख दी। कुर्ती के नीचे उसने बस गुलाबी ब्रा पहनी हुई थी। मैंने ब्रा के उपर से ही उसके स्तनों को पकड़ा और दबाने लगा। उसने वापिस मेरे होठों को जकड़ लिया और उन्हें अपने दांतों के बीच में लेकर चुभलाने और काटने लगी। मैं अपने हाथों को पीछे ले गया और उसके ब्रा के हुक को खोल दिया। हुक खुलते ही मैंने उसकी ब्रा को उतारकर एक तरफ रख दिया और अपने होंठ उसके पर्वत की तरह तने ही उभारों पर रख दिया। उसके मुंह से सिसकारी निकली और उसने अपने हाथ मेरे सिर पर रखकर अपनी छाती में दबाने लगी। मैंने अपनी जीभ उसकी घाटी में फिराई तो वो मचल गई और अपनी जांघों को आपस में रगड़ने लगी। उसके मुंह से लगातार आहहहहह ओहहहह सीइइइइ की आवाजें निकल रही थी। मैंने उसके दूसरे स्तन को हाथ में पकड़ लिया और उसके निप्पल को चुभलाने लगा। वो मछली की तरह तड़पने लगी और मेरे बालों में अपना हाथ घुमाने लगी। मैं अपना दूसरा हाथ उसकी कमर में ले गया और उसकी नंगी कमर को सहलाने लगा।
 
तान्या ने अपना एक हाथ मेरी जांघों में घुसा दिया और मेरे लिंग को सहलाने लगी। मैंने उसकी दूसरी चूची को अपने मुंह में ले लिया और उसके निप्पल पर हलके हलके काटने लगा। वो भी मेरे लिंग को जोर से दबाने लगी जैसे बदला ले रही हो। मैंने तान्या को घुटनों पर खड़ा किया और खुद भी खड़ा हो गया। मैंने जल्दी से तान्या की जींस को खोलकर उसके कुल्हों से निकाल दिया और फिर उसको सोनल के पास ही लिटा दिया और उसके पैरो को उपर करके उसकी जींस को पेंटी के साथ ही उसके शरीर से अलग कर दिया। अब मेरे सामने दो दो मदमस्त नंगी जवानी बेड पर लेटी थी। मैं तान्या की जांघों के बीच में आया और उसकी टांगों को दोनों तरफ फैला कर अपना मुंह उसकी योनि पर रख दिया। अपनी योनि पर मेरे महसूस करते ही उसकी गीली योनि ने जोरों से पानी बहाना शुरू कर दिया। उसका एक हाथ मेरे बालों में और दूसरा उसके स्तनों पर कहर ढा रहा था। मैंने अपने दोनों हाथों से उसके कुल्हों को पकड़ा और उसको उपर की तरफ उठा कर अपनी जीभ उसकी योनि की फांकों में घुसा दी। वो एकदम सिसक उठी और उसने अपनी कमर को और भी उपर उठा दिया जिससे मेरा मुंह उसकी योनि पर दब गया। उसका शरीर एकदम अकड़ा और उसकी योनि में से अमृत रस जोरों से बहने लगा। मैंने अपनी जीभ उसके रस में भिगोई, उसका स्वाद सोनल के जूस से कुछ ज्यादा अच्छा था। सारा रस निकलने के बाद वो भी सोनल की तरह निढाल होकर बेड पर धडाम से गिर पड़ी। मैंने फिर से अपनी जीभ उसकी योनि में घुसा दी और अपने हाथ उसके स्तनों पर कस दिये। थोड़ी ही देर में वो फिर से गरम हो गई। अब मैंने देर करना उचित नहीं समझा और मैं उठकर उसकी जांघों के बीच में आ गया और अपना लिंग उसकी योनि पर रगड़ने लगा। वो बार बार नीचे से अपने कुल्हें उठा कर मेरे लिंग को अंदर डालने का प्रयास कर रही थी पर मैं अंदर नहीं डाल रहा था। तान्या ने अपना हाथ आगे बढ़ाकर मेरे लिंग को पकड़ लिया और अपनी योनि के द्वारा पर सैट करके नीचे से अपने कुल्हे उचका दिये, पर मैं भी उसके उपर उठने के साथ ही थोड़ा उपर हो गया, जिससे लिंग फिसल कर उसके दाने को कुचलता हुआ उसके पेट पर रगड़ गया। वो सित्कार उठी और अपने सिर को बेड पर इधर उधर पटकने लगी। फिर तान्या ने मेरी तरफ देखा और फुर्ती से मेरे हाथों को पकड़ कर मुझे अपने उपर खींच लिया और घुम कर मुझे अपने नीचे लेटा लिया। मैं उसकी फुर्ती देखकर हैरान रह गया। मेरे उपर आकर वो मेरी आंखों में देखकर मुस्कराई और मेरे लिंग को पकडकर अपनी योनि पर सैट कर दिया। उसने एक आह निकाली और धम से मेरे लिंग पर बैठ गई। मेरा आधा लिंग उसकी कुंवारी योनि को चीरता हुआ अंदर घुस गया और उसके मुंह से एक जोर की चीख निकल गई। वो एकदम कुंवारी थी। उसकी झीली फट गई थी और उसका गर्म खून मेरे लिंग से बहता हुआ नीचे को जा रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि उसकी योनि ने मेरे लिंग को बुरी तरह जकड़ लिया है। मैं तो स्वर्ग में पहुंच चुका था। वो उसी स्थिति में बैठी रह गई, उसकी आंखों से झर झर आंसू निकल रहे थे। थोड़ी देर वो ऐसे ही बैठी रही और फिर उपर उठने लगी। मैं समझ गया कि अब ये बाहर निकाल देगी और सारा मामला गड़बड़ हो जायेगा। मैंने उसके हाथों को पकउ़ कर उसे अपने उपर खींच लिया। वो चिखती हुई मेरे उपर धड़ाम से गिर गई। मेरा लिंग थोउ़ा सा और उसकी योनि में घुस गया था। मैंने अपने दोनों हाथों को उसके कुल्हों पर कस दिया और अपने पैरों को बेड पर मोडकर रख दिया। वो मेरे लिंग को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी, पर मैंने उसके कुल्हों को नीचे दबा रखा था, जिससे वो सफल नहीं हो पा रही थी, दर्द की वजह से वो ज्यादा हिल ढुल नहीं रही थी।
उसकी चीख सुनकर सोनल उठ गई थी और अपना मुंह फाड़कर हमें देख रही थी।
मैंने अपने हाथों को उसके कुल्हों पर कसकर नीचे से एक जोरदार धक्का मारा और मेरा लिंग पूरा का पूरा उसकी योनि में घुस कर उसके गर्भाश्य से जा टकराया। तान्या के मुंह से एक और चीख निकली और उसकी आंखूं से निकलते आंसूं मेरे गालों पर टपकने लगे। मैं कुछ देर के लिए रूक गया और उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसके आंसुओं को पीने लगा। मैं उसके उभारों को साइड में से पकड़कर सहलाने लगा। जल्दी ही उसका दर्द कम हो गया और वो अपने कुल्हों को हिलाने लगी। मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये और उसके कुल्हों को पकड़कर थोड़ा उपर उठाया और लिंग को थोड़ा सा बाहर निकालकर एक और धक्का लगाया। वो फिर दर्द से तिलमिलायी।
 
उसकी हालत देखकर सोनल ने अपने हाथ उसकी कमर और कुल्हों पर फिराने शुरू कर दिये।
सोनल उठकर पीछे गई और नीचे लेटकर उसकी योनि पर अपनी जीभ रखकर सहलाने लगी। मुझे उसकी गीली जीभ अपने लिंग पर महसूस करके बहुत मजा आ रहा था। सोनल के इस हरकत ने जादू का काम किया और जल्दी ही तान्या मेरे उपर से उठते हुए मेरे छाती पर अपने हाथ रखकर मेरे लिंग पर बैठ गई। उसने मेरी आंखों में देखते हुए धीरे से अपने कुल्हों को उठ उठाकर मेरे लिंग को आधा बाहर निकाला और थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद फिर से मेरे लिंग पर बैठ गई। सोनल अब मेरी गोलियों को चाट रही थी। तान्या नीचे बैठी तो उसके कुल्हे सोनल के सिर पर जाकर लगे जिससे सोनल को प्रॉब्लम हुई और वो वापिस से हमारे साइड में आ गई। और तान्या के स्तनों को पकड़कर मसलने लगी।
सोनल के हाथ लगते ही तान्या ने अपने कुल्हों को उपर उठाया और फिर धम से नीचे बैठ गई। मेरा लिंग सीधा उसके गर्भ द्वार से टकरा रहा था। उसकी योनि ने पूरी तरह से मेरे लिंग को जकड़ा हुआ था, जिससे मैं जल्दी ही झडने के करीब पहुंच गया। मैंने तान्या को पकड़कर बिना लिंग को उसकी योनि से निकाले उसको बेड पर लिया दिया और उसकी टांगे अपने कंघे पर टिकाकर तेज तेज धक्के लगाने शुरू कर दिये।
तान्या के मुंह से बस आहहहहहहहहहहहह ओहहहहहहहहहहह इइइइइइइइइइइइइइइ सीइइइइइइइइइइ की आवाजें निकल रही थी। उसकी आंखें बंद थी।
मैंने जोरदार धक्के लगाने शुरू कर दिये। जल्दी ही मेरे लिंग ने उसकी योनि में अपने रस की बौछार शुरू कर दी। अपनी योनि में मेरे गर्म गर्म रस की बौछार महसूस करके वो उसका शरीर भी अकड़ गया और उसकी योनि ने अपना जूस निकालना शुरू कर दिया। पूरा रस निकाल कर मैं उसके उपर लेट गया और गहरी सांसे लेने लगा। तान्या ने अपने हाथों से मेरी कमर सहलाने लगी। थोड़ी देर में मेरा लिंग छोटा होकर बाहर निकल आया।
सोनल भी हमारे साइड में लेट गई और मेरी कमर को सहलाने लगी। ऐसे ही लेटे लेटे कब हमें नींद आ गई पता ही नहीं चला।
सुबह पांच बजे जब अलार्म बजा तो मेरी आंख खुली। मैं अभी भी तान्या के उपर ही लेटा हुआ था। तान्या और सोनल आराम से सो रही थी। सोनल का हाथ मेरी कमर पर था और तान्या का एक हाथ सोनल के सिर के नीचे और दूसरा मेरे और उसके बीच में।
मैं हल्के से सोनल का हाथ हटाकर बेड पर रख दिया और तान्या के उपर से उठकर अलार्म को बंद किया और बाथरूम में आ गया। मैंने खुद को साफ किया और एक बढ़िया सा बाथ लेकर जब बाहर आया तो तान्या उठ चुकी थी, सोनल अब भी सो रही थी। मैंने तान्या से इशारे से सोनल को उठाने के लिए तो उसने सोनल को उठा दिया। सोनल अंगडाई लेते हुए उठी और तान्या की तरफ देखकर मुस्करा दी। तान्या शर्म से मुझसे और सोनल से नजरें नहीं मिला पा रही थी। सोनल ने उसका चेहरा उपर किया और उससे पूछा।
सोनल: रात को मजा आया मेरी जान।
तान्या ने अपना चेहरा नीचे करते हुए सिर हिलाकर हां कहा।
सोनल ने टाइम पूछा तो मैंने सवा पांच बताया।
सोनल (जल्दी से उठते हुए): अब जल्दी से अपने कपड़े पहन ले, नहीं तो मम्मी उठ गई होगी ना तो फिर तुम्हारे घरवाले अलग ही मजा देंगे।
सोनल की बात सुनकर तान्या जल्दी से उठी और अपने कपड़े ढूंढकर पहन लिए। कपडे पहनकर सोनल मेरे पास आई मेरे गालों पर पप्पी देकर बायें कहती हुई तान्या के साथ नीचे चली गई।
मैंने अपने कपड़े पहने और बाहर छत पर आ गया।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--20
गतांक से आगे ...........
गली के आखिरी कोने पर रहने वाली आंटी अपनी मस्त जवान बेटी के साथ पार्क की तरफ जा रही थी तो मैंने भी सोचा चलो पार्क में चलते हैं। पर मुझे सिर में हलका दर्द महसूस हो रहा था इसलिए पार्क में जाने का प्रोग्राम केंसिल कर दिया। मैं वापिस आकर अंदर बेड पर लेट गया। रात की नींद पूरी नहीं हुई थी तो थोड़ी ही देर में मेरी आंख लग गई और गहरी नींद में चला गया।
उठठठठठठठठो जब देखो सोते ही रहते हो।
मैं सोते सोते ही उउउउहूुुहूहूहू करके वापिस सो गया।
मुझे बहुत जोर की नींद आई हुई थी और आंखें भी नहीं खुल रही थी। तभी मेरे मुंह पर एक दम ठंडे पानी के छिंटे आकर गिरे।
पानी गिरते ही मुझे लगा कि शायद बारिश आ गई और मैं एकदम से उठ कर बैठ गया और आंखें मसलने लगा। उठकर देखा कि मैं तो अंदर सो रहा हूं। मेरे कानों में किसी के हंसने की आवाज पड़ी।
मैंने आंखों को खोलते हुए सामने देखा तो सोनल और तान्या खड़ी खड़ी हंस रही थी। सोनल ने अपने हाथ में गिलास पकउ़ रखा था। मैं फिर से आंखें बंद करके लेटने लगा तो सोनल ने मेरे चेहरे पर सीधा गिलास से पानी गिराना शुरू कर दिया। मैं वापिस बैठ गया और आधी खुली आंखों से उनकी तरफ देखने लगा।
तान्या मेरे पास आकर बैठ गई।
सोनल: अब उठ भी जाओ। 4 बज गये हैं, सुबह आई थी तब भी सो रहे थे।
सोनल की बात सुनकर मैंने वैसे ही अधखुली आंखों से घड़ी की तरफ देखा तो चार बजने वाले थे। फिर मैंने साइड से अपना मोबाइल उठाकर उसमें टाइम देखा तो उसमें भी चार बजने वाले थे।
मैंने वापिस सोनल की तरफ देखा, वो खड़ी खड़ी हंस रही थी।
मुझे जोरों की नींद आई हुई थी और बिल्कुल भी उठने का मन नहीं कर रहा था। मैं फिर से लेटने लग गया, पर सोनल ने मेरा हाथ पकड़ कर खींच लिया और ऐसा करने से मैं पलटी खाते हुए बैड पर लुढक गया। मेरा सिर सीधा बेड पर बैठी तान्या की गोद में चला गया। मैं वैसे ही लेट गया। तान्या ने अपने हाथ मेरे सिर रख दिये और मेरे बालों और गालों को सहलाने लगी। मैं भी उसके कोमल स्पर्श का आनंद लेते हुए सोने की कोशिश करने लगा।
अचानक तान्या ने अपने होंठे मेरे कानों के पास किए और ऐसी बात कही कि मेरी नींद एकदम पूरी तरह से गायब हो गई।
तान्या (बहुत ही धीमी आवाज में): मेरे घरवालों को रात के बारें में सब पता चल गया है, और वो बहुत गुस्सा हो रखे हैं।
उसकी बात सुनते ही मैं एक ही झटके में उठकर बैठ गया और आश्चर्य से कहा।
मैं: क्या? कैसे पता चल गया।
 
तान्या: वो कंचन जब अपने घर पर गई तो उसके भैया को पता चल गया कि उसने पी रखी है, तो उसने अपने मम्मी पापा को बता दिया। फिर उसके मम्मी पापा मेरे घर पे आए और मेरे मम्मी पापा को ताने देने लगे कि तुम्हारी लड़की के साथ रहती है, उसने ही बिगाड़ दिया इसको। जिससे मेरे मम्मी पापा को भी पता चल गया कि मैंने भी पी थी। अब वो बहुत गुस्से में हैं। सुबह जब मैं घर गई तो बहुत भला-बुरा सुनाया।
मैं (राहत की सांस लेते हुए): ओह! गोड! तुने तो मुझे डरा ही दिया था।
सोनल: क्यों! तुम क्यों डर गए थे, कोई तुम्हारे घर वालों को थोड़े ही पता चला है।
मैं: अरे यार, मैंने सोचा कि रात के बारे में पता चल गया।
सोनल: तो रात के बारे में ही पता चला है, दिन के बारे में नहीं।
मैं: अरे मेरे कहने का मतलब है कि, जो रात को हम तीनों ने किया था, उसके बारे में।
मेरी बात सुनकर तान्या के गाल एकदम लाल हो गये और उसने अपना सिर नीचे झुका लिया।
सोनल: चलो चलो, अब जल्दी से उठ कर फ्रेश हो जाओ। फिर मेरे को फ्रेंड के घर छोउ़ के आना। मेरी स्कूटी स्टार्ट नहीं हो रही है।
मैं तान्या के गालों को भींचता हुआ उठ गया और सीधा बाथरूम में घुस गया। मैं नहा-धोकर बाहर आया। वो दोनों अभी भी वहीं पर बैठी थी। मैंने टॉवल लपेट रखा था, तान्या मुझे घूर घूर कर देखे जा रही थी। मैंने उसकी तरफ आंख मारी और अलमारी में से कपड़े निकाल के पहन लिए। मुझे जोरो की भूख लगी थी।
मैं: कुछ खाने को मिलेगा, या ऐसे ही चलूं।
सोनल: ठीक है, चलो रस्ते में खा लेंगे।
मैंने कहा ठीक है और रूम को लॉक लगाकर हम नीचे आ गये।
मैंने अपनी बाईक निकाली। सोनल मेरे पीछे बैठ गई और तान्या उसके पीछे।
सोनल मुझे रास्ता बताती गई और हम उसकी दोस्त के घर पहुंच गये। पास में ही था, मालवीया नगर में ही, मॉडल टाउन में। वहां पर काफी चहल पहल थी। शायद कोई फंक्शन था। मैंने घर के सामने ले जाकर रोक दी। सोनल और तान्या उतर गई। तभी अंदर से एक बहुत ही खूबसूरत लड़की लगभग भागती हुई बाहर आई और सोनल के गले लग गई। मैं तो उसको देखता ही रह गया। अभी जवानी की दहलीज पर कदम रखा ही होगा, यही कोई उन्नीस के आसपास होगी। उसके उभार सोनल के उभारों से टकरा गए, मानों खुले मैदान में आने की चुनौती दे रहे हों। मेरा तो एकदम तन गया उनको गले मिलते देखकर। सच कहूं तो, पहली बार दो लड़कियों को इस तरह गले मिलते देखा था, बहुत ही गर्म और शानदार नजारा था। सोनल के हाथ उसकी कमर में थे और उसके हाथ सोनल के गले में। साइड से उस लड़की के मस्त गदराये हुए कुल्हों का नजरा एकदम शानदार नजर आ रहा था। उसके कुल्हे कोई पहाड़ जैसे तो नहीं थे, पर बहुत ही शानदार शेप में थे, उसकी कुर्ती उसके कुल्हों से बस थोड़ा सा नीचे तक थी जो गले मिलते हुए उपर को होकर उसकी जींस में से उसके मस्त कुल्हों का ललचाने वाला दृश्य दिखा रही थी। सोनल से मिलते हुए उसकी नजर मेरे उपर पडी। उसने सोनल के कान के पास अपने रसीले होंठ लाकर कुछ फुसफुस की। सोनल ने मेरी तरफ देखा और मुस्करा दी। मैं अभी भी बाईक पर ही बैठा था। सोनल ने भी उसके कान में कुछ कहा और मेरी तरफ बढ़ गई। मेरे पास आकर उसने मेरी तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया।
लड़की: हाय! मैं नवरीत अहलुवालिया।

मैंने भी अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ा दिया।
मैं: समीर!
उसके हाथ का स्पर्श पाते ही मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया। बहुत ही मुलायम और कोमल हाथ था। मैं उसका हाथ पकडे पकड़े ही उसके चेहरे की तरफ देखता रहा। एकदम तीखे नयन नक्श, दूध जैसा गोरा रंग, चेहरे पर कोई भी दाग नहीं, बिल्कुल बेदाग। थोड़ी थोड़ी हल्की नीली नीली आंखें। मैं तो उसके चेहरे में गुम सा हो गया। जब मैंने कुछ देर तक उसका हाथ नहीं छोउ़ा तो उसने अपने दूसरे हाथ से मेरे चेहरे के सामने चुटकी बजाई।
नवरीत: हैल्लो! कहां खो गये जनाब।
मैं जैसे नींद से जागा हों, जैसे समां में मधुर संगीत बज रहा हो, ऐसी उसकी आवाज। बहुत ही मीठी और प्यारी।
मैंने अनमने मन से उसका हाथ छोउ़ दिया। वो मंद मंद मुस्करा रही थी। फिर तान्या ने उससे हाय कहा। वो तान्या की तरफ मुड गई और उसका भी गले लगकर जोरदार स्वागत किया।
फिर उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कराते हुए उन दोनों का हाथ पकड़कर अंदर खींच ले गई।
 
जाते जाते सोनल ने बायें कहा और उसके साथ अंदर चली गई।
मैं ठगा सा वहीं खड़ा उनको अंदर जाते देखता रहा, पर वो तो अंदर जाते ही गुम हो गई।
नवरीत मेरे दिमाग पर पूरी तरह छा गई थी। मैंने अपनी पूरी जिंदगी में आज तक इतनी खूबसूरत और प्यारी लड़की नहीं देखी थी।
उसके शरीर के कसाव से लग रहा था कि अभी कोरी, अनछुई ही है।
तभी वो सोनल के साथ जल्दी-जल्दी बाहर आई और मुझे वहीं खड़ा देखकर खुश होते हुए बोली।
नवरीत: अरे आप अभी तक यहीं हैं, गये नहीं (और ये कहकर हंसने लगी)।
उसकी बात सुनकर मैं बुरी तरह झेंप गया और हेलमेट पहनने लगा। पर बीच में ही सोनल बोल पड़ी।
सोनल: अरे रूको, तो। वो नवरीत कह रही है कि चाय पीकर जाना।
मैं (नवरीत की तरफ हाथ करते हुए): ये! इसे तो टेंशन हो रही है कि मैं अभी तक यहां क्यों खड़ा हूं, चाय के लिए क्या पूछेगी।
मेरी बात सुनकर नवरीत संजीदा हो गई और मेरे पास आकर बोली।
नवरीत: सॉरी, वो तो बस ऐसे ही मजाक कर रही थी, प्लीज आईये ना, चाय तो पीकर जाइये।
मैं तो बस उसके खुलते और बंद होते गुलाब के पंखुड़ियों जैसे लबों को ही देख रहा था। उसने इतने प्यार और अपनेपन से कहा, फिर मैं कैसे ना कर सकता था।
मैंने हेलमेट को बाइक पर रखा और बाईक को साइड में खड़ा कर दिया।
वो दोनों अंदर चल दी और उनके पीछे पीछे मैं।
नवरीत: सोनल ने पहले नहीं बताया कि आप इनके यहीं पर रहते हैं, नहीं तो मैं पहले ही कह देती, आप खामखां इतनी देर बाहर ही खड़े रहे।
पूरी कोठी को बहुत ही शानदार तरीके से सजाया हुआ था। अंदर लड़कियों और लेड़िजों की काफी चहल पहल थी।
वो मुझे उपर ले आई, उपर कोई नहीं था। हम कमरे में आ गये। तान्या अंदर ही बैठी थी।

मुझे बैठाकर नवरीत और सोनल बाहर चली गई। मैंने तान्या की तरफ देखा, वो पैर के अंगूठे से अपनी सैंडिल को कुरेद रही थी।
मैं: इस बेचारे को किस बात की सजा दे रही हो, खता तो मैंने की है।
मेरी बात सुनकर तान्या का चेहरा एकदम लाल हो गया, उसने हल्के से पलके उठाकर मेरी तरफ देखा और फिर वापिस हया से अपनी पलकें झुका ली।
मैं: इतना सब पता चलने के बाद भी तुम्हारे घर वालों ने तुम्हें बाहर जाने से रोका नहीं।
तान्या ने मेरी तरफ सवालिया नजरों से देखा और मेरी बात को समझते हुए कहा।
तान्या: अरे पापा तो इतना गुस्सा हो गये थे कि मुझे लगा कि अब मेरा घर से निकलना बंद। पर मेरी प्यारी प्यारी मॉम भी तो है। मॉम ने पापा को झिडक दिया कि अभी मस्ती नहीं करेगी तो क्या मेरी तरह बूढी होकर करेगी। आप तो खामखां मेरी बच्ची के पिछे पड़े हो। कौन नहीं पीता आजकल। और फिर पीने में बुराई ही क्या है, आप भी तो पीते हो।
तान्या: पता है, जब मम्मी ने मेरी साइड ली ना तो मुझे बहुत अच्छा लगा। फिर तो पापा कुछ कह ही नहीं पाए।
मैं: वॉव। अगर मेरे घर वालों को पता चल गया ना कि मैंने पीनी शुरू कर दी है तो उसी दिन कह देंगे कि बेटे इब तू म्हारा कोन्या रह्या, तेर मैं दारू का रोग लाग्गया, इब तै तू आपना न्याराए ठिकाना टो ले। इब तै तू दारू का हो गया।
मेरी बात सुनकर तान्या हंसने लगी।
तान्या: सब सिर के उपर से गया, कुछ भी समझ में नहीं आया क्या कहा आपने।
मैं: मेरा मतलब घर वालें कहेंगे कि, बेटा, अब तू हमारा नहीं रहा, अपना अलग ठिकाना जमा ले।
मेरी बात सुनकर तान्या मुसकराने लगी।
तान्या: ऐसा कुछ नहीं है जी, मम्मी पापा हर गलती को माफ कर देते हैं।
तभी नवरीत और सोनल हाथों में थाली लेकर अंदर दाखिल हुई। थाली देखते ही मेरी भूख एकदम बढ़ गई। सोनल ने थाली बेड पर रखी और साइड में रखी टेबल को मेरे सोफे के सामने कर दिया। नवरीत ने अपने हाथों में पकड़ी थाली टेबल पर रख दी और सोनल भी अपनी थाली को बेड पर से उठा लाई और टेबल पर रख दी।
मैं अभी आई कहते हुए नवरीत वापिस बाहर चली गई।
पूड़ियों की महक ने भूख को और भी बढ़ा दिया। सोनल मेरे पास आकर सोफे पर बैठ गई।
मैं: थैंक्स! याद रखने के लिए।
सोनल: अब ज्यादा थैंक्स-वैंक्स करने की जरूरत नहीं है, नही ंतो आगे से भूखे ही रहना पडेगा।
मैं: ओके बाबा! सॉरी।
सोनल आंखें दिखाते हुए मुझे घूरने लगी।
मैंने अपने कान को पकड़ा और खाने की तरफ धयान लगा दिया। एक थाली में चार कटोरियों में सब्जी थी, देखने से तो दो प्रकार की ही लग रही थी, दो कटोरियों में हलवा था और दो कटोरियों में खीर। दूसरी थाली में काफी सारी पूडियां रखी हुई थी। शायद सभी साथ में ही खाने वाले थे।
तभी नवरीत हाथ में जग और गिलास पकडे हुए अंदर आ गई। उसने जग और गिलास को टेबल पर रखा।
नवरीत: अरे आपने अभी तक खाना शुरू नहीं किया।
मैं: बस आपका ही इंतजार कर रहा था।
नवरीत: मेरा क्यों, खाना तो आपको खाना है।
मैं: आप ही तो कहकर गई थी कि अभी आइ्र्र।
मेरी बात सुनकर सभी हंसने लगे।
मैं: अरे यार तान्या, तुम अभी तक वहंी बैठी हो, अब क्या नीचे से गाने वाली बुलानी पडेगी, आओ जल्दी से, मुझे बहुत भूख लगी है।
तान्या: मुझे भूख नहीं है तो मैं क्यों आउं। आप खा लो।
मैं: अरे ये इतना सारा खाना लेकर आई हैं, तो मैं अकेला थोड़े ही खाउंगा।
नवरीत ने दो चेयर टेबल के पास रख दी और तान्या का हाथ पकड़कर उठा कर चेयर पर बिठा दिया और खुद दूसरी चेयर पर बैठ गई।
सोनल ने पूडी उठाई और एक कौर तोड़कर सब्जी लगाकर मेरे होठों से लगा दी। मैंने नवरीत की तरफ देखा, वो हमें देखकर मुस्करा रही थी। मैंने मुंह खोला और खाने का कौर मेरे मुंह के अंदर। फिर मैंने भी पूड़ी से एक कोर तोड़ा और सोनल को खिला दिया। सोनल को खिलाने के बाद मैंने दूसरा कौर तोड़ा और नवरीत के सामने कर दिया। शायद नवरीत यह एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी, इसलिए थोड़ी हैरान हुई, पर फिर अपना मुंह खोल दिया और मेरे हाथ को पकड़कर अपना मुंह आगे करके कौर खा लिया। मैंने थोड़ी हिम्मत करते हुए अपनी उंगलियों को उसके होठों पर ज्यादा दबा दिया। उसने भी मेरी उंगलियों को अपने होठों में भींच लिया। पर तुरन्त ही अपने हाथ से मेरे हाथ को पिछे कर दिया। मैंने अपनी उंगलियां अपने होठों में दबा ली, जैसे उसके होठों का रस पी रहा हो। वो मेरी तरफ देखकर मुस्कराई और नीचे चेहरा कर लिया। फिर मैंने तान्या को भी एक कौर खिलाया। और फिर सभी खाने लगे। उन तीनों ने तो थोड़ा थोड़ा ही खाया। मेरा पेट भर गया था।
क्रमशः.....................
 
मैं ठगा सा वहीं खड़ा उनको अंदर जाते देखता रहा, पर वो तो अंदर जाते ही गुम हो गई।
नवरीत मेरे दिमाग पर पूरी तरह छा गई थी। मैंने अपनी पूरी जिंदगी में आज तक इतनी खूबसूरत और प्यारी लड़की नहीं देखी थी।
उसके शरीर के कसाव से लग रहा था कि अभी कोरी, अनछुई ही है

सोनल को खिलाने के बाद मैंने दूसरा कौर तोड़ा और नवरीत के सामने कर दिया। शायद नवरीत यह एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी, इसलिए थोड़ी हैरान हुई, पर फिर अपना मुंह खोल दिया और मेरे हाथ को पकड़कर अपना मुंह आगे करके कौर खा लिया। मैंने थोड़ी हिम्मत करते हुए अपनी उंगलियों को उसके होठों पर ज्यादा दबा दिया। उसने भी मेरी उंगलियों को अपने होठों में भींच लिया। पर तुरन्त ही अपने हाथ से मेरे हाथ को पिछे कर दिया। मैंने अपनी उंगलियां अपने होठों में दबा ली, जैसे उसके होठों का रस पी रहा हो। वो मेरी तरफ देखकर मुस्कराई और नीचे चेहरा कर लिया।

lagata hai sameer ko virgin ladaki ka chaska laga hai
aab NAVRIT bhi add hogi
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--21
गतांक से आगे ...........
मैं: ओह ! मजा आ गया, क्या स्वादिष्त खाना था।
नवरीत: अभी तो इतनी सारी पूरियों बची हुई हैं और एक कौर तोड़कर मेरे मुंह में दे दिया।
फिर तो कभी सोनल, कभी तान्या और कभी नवरीत अपने हाथों से मुझे खिलाती गई। मेरा पेट फठने को हो गया था, पर वो इतने प्यार से खिला रही थी तो मैं मना भी कैसे करता। मैंने भी उनको खिलाना शुरू कर दिया ताकि सारा मेरे को ही ना खाना पड़े।
खाना खत्म होते होते मेरा पेट एकदम फटने को हो गया था।
मैं: यार, इतना खिला दिया, लगता ह ैअब तो कई दिनों तक भूख ही नहीं लगेगी।
सोनल: तो किसने कहा था, इतना खाने को, खाना रीत का था तो क्या हुआ, पेट तो तुम्हारा ही था ना।
और वो तीनों खिलखिलाकर हंसने लगी। अब मुझसे बैठा भी नहीं जा रहा था। मैं उठा और बाहर वॉशबेसिन पर हाथ धोकर आकर बेड पर लेट गया।
सोनल (मेरे पास आकर अपनी कमर पर हाथ रखकर खड़ी होते हुए): अब क्या इधर ही डेरा जमाने का इरादा है।
मैंने सोनल की तरफ देखा, वो खड़ी खड़ी मुस्करा रही थी। नवरीत बर्तन लेकर नीचे चली गई।
सोनल मेरे पास बेड पर बैठ गई। तान्या भी उसके पास आकर बैठ गई।
तभी मेरे मोबाइल की मैसेज टोन बजी। मैंने जेब में से मोबाइल निकाल कर मैसेज देखा। अपूर्वा का था, वो अपने मौसी के वहां से वापिस आ गई थी। यही लिखा था।
मैंने भी उसे मैसेज कर दिया, वेलकम बैक! क्ल टाइम पे ऑफिस आ जाना।
मैं (उठते हुए): ओके, अब मैं चलता हूं।
और उठ गया। सोनल भी मेरे साथ नीचे आ गई। तान्या वहीं पर रह गई। हम बाहर गली में आ गये। नवरीत वहीं पर खड़ी हुई किसी लेिंडज से बातें कर रही थी।
मैंने उसे खाने के लिए थैंक्स कहा, और बायें कहकर बाइक उठाकर चल दिया। पेट इतना ज्यादा भर गया था कि सांस लेने में भी प्रॉब्लम हो रही थी। रस्ते में मैंने हाजमोला ली और मुंह में रख ली। घर पहुंचकर मैं सीधा आकर बेड पर लुढ़क गया। थोडी देर ऐसे ही पेरशान होकर करवटे बदलता रहा, फिर पता नहीं कब नींद आ गई और मैं सपनों की दुनिया में गुम हो गया।

टिक टिक टिक टिक, ट्रिगगगगगगगगगगगगगगगगगगग
प्लेटिनम रिकॉर्ड शहर टेक वन..........................
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शहर में हूं मैं तेरे, आके मुझे मिल तो ले,
देना ना तू कुछ मगर, आके मेरा दिल तो तू ले ले जाना,

'उं हूं, ये फोन भी ना, चैन से सोने भी नहीं देता।'
मोबाइल की रिंग सुनकर मेरी आंख खुली तो होठों से पहले शब्द यही निकले। इतनी अच्छी नींद आई हुई थी।
मैंने मोबाइल उठाकर देखा, सोनल की कॉल थी। मैंने कॉल रिसीव की।
मैं: उंहहहहहहहहहहहहह, क्या हुआ।
सोनल: तुम सो रहे हो! हे राम! ये लड़का भी ना कितना सोता है। चलो जल्दी से उठ जाओ, हमें वापिस लेके नहीं जाना क्या? जल्दी आ जाओ, मैं वेट कर रही हूं।
मैं: ओके, आ रहा हूं।
मैं उठा और नींद खोलने के लिए ठंडे पानी से मुंह धोया। मैंने टाइम देखा तो साढे ग्यारह हो रहे थे।
मैंने नीचे आकर बाईक स्टार्ट की और पांच मिनट में ही डेस्टिनेशन पर पहुंच गया। वहां जाकर मैंने सोनल को कॉल की। कॉल करते ही सोनल ने पूछा: क्या हुआ, अभी तक आए नहीं क्या।
मैं: अरे यार, मैं तो कब से नीचे खड़ा हूं, आप आओ तब ना।
सोनल: ओके अभी आ रही हूं और फोन काट दिया।
थोड़ी देर में नवरीत और सोनल बाहर आई। दोनों बहुत ही थकी हुई लग रही थी।
सोनल (मेरे पास आकर): यार, आज तो नाच नाच के हालत खराब हो गई। इस रीत की बच्ची ने ना, आराम भी नहीं करने दिया।
नवरीत: अच्छा जी, खुद तो बार बार मेरा हाथ पकड़ पकड़ कर डांस के लिए मैदान के कूद जाती थी, और मुझे दोष दे रही हो।
मैं: हाय री किस्मत! दो दो अप्सराओं नाच रही थी और मैं सो रहा था।
मेरी बात सुनकर सोनल हंसने लगी और नवरीत का चेहरा शरम से लाल हो गया (वैसे लाल तो पहले ही हो रखा था नाच नाच के) और उसने अपनी आंखें नीचे झुका ली और फिर वापिस से मेरी तरफ देखने लगी।
उसकी इस अदा ने तो मेरे जान ही निकाल ली। उसने इस अदा के साथ पलकें झुका कर उठाई की मैं तो बुरी तरह घायल हो गया।
सोनल मेरे पीछे बैठ गई।
मैं: तान्या नहीं आ रही।
 
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