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Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

मैम ने पर्स से अपना सैल निकाला और फोन मिलाया, घंटी गई, मैम ने स्पीकर ओन करके फोन डेस्कबोर्ड पर रख दिया। पांच-छः घंटी जाने के बाद दूसरी तरफ से फोन उठाया और एक प्यारी सी, स्वीट सी हैल्लो की आवाज कानों में घुल गई।
मैम: हैल्लो! हां कोमल, मैं बस पहुंचने वाली हूं, तुम तैयार हो ना।
कोमल: क्या, आप आ रही हो, अरे मेरी मां, मैं तो सोच रही थी कि आप शाम को आओगी, तो मैं तो आ गई जयपुर घूमने, यहां से जयपुर घुमाने के लिए टूर जा रहा था तो मैं भी आ गई।
मैम: ओह हो, तू भी ना किम्मी, अब मैं यहां तेरे इंतजार में बैठी रहूंगी।
कोमल: तो क्या हुआ दी, होटल में रोज-रोज थोड़े ही ठहरने को मिलता है, अच्छा सुनो अब आप आ गई हो तो मैं थोड़ी देर में यहां से निकलती हूं, तब तक आप मेरे रूम में वेट कर लेना।
मैम: हां, तेरे रूम में वेट कर लेना, जैसे मेरे को चाबी देकर गई है।
कोमल: तो काउन्टर पे ही तो है चाबी, वहीं से ले लेना।
मैम: हां, मैं जाकर चाबी मांगूगी और वो चुपचाप जी मैम जी मैम करके चाबी दे देंगे, आई बड़ी काउंटर की बच्ची। तू जल्दी आ जा, तब तक मैं दूसरा रूम लेती हूं।
कोमल: ओके मैं आधे-एक घंटे में निकल लूंगी यहां, से अब आप रूम ले ही रहीं हैं तो फिर कुछ देर तो रूकना ही चाहिए ना उसमें। मैं जल्दी आ जाउंगी तो ऐसे ही पैसे खराब जायेंगे।
मैम: ठीक है, पर तू ज्यादा देर मत करियो।
कोमल: ओके दी, (और उसने फोन काट दिया)।
मैम (मेरी तरफ देखते हुए): मेरे मामा की लड़की है, बहुत शैतान है, इलाहाबाद से है। अभी ग्रेजुएशन पूरी की है।
मैं: मतलब आपसे काफी छोटी है।
मैम: मुझसे तो पंद्रह साल छोटी है, अभी 19 की ही हुई है।
मैं: तो इसका मतलब आप अभी 34 की हुई हैं। पर बॉस तो चालीस से उपर के हैं।
मैम: हां वो तो 43 के हो जायेंगे इस साल। 9 साल बड़े हैं मुझसे। वो टाइम ही ऐसा था कि ये सब नहीं देखा जाता था शादी करते वक्त। और फिर यें तो सैटल थे, अच्छा कमाते थे तो पिताली ने शादी कर दी।
हम होटल पहुंच गये। मैम ने एक रूम बुक करवाया और हम रूम में आ गये। दरवाजे से अंदर होते ही मैम ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अंदर खींच लिया और मेरे बावलों की तरह मेरे गालों को चूमने लगी।
मैंने उन्हें खुद से दूर किया।
मैं: मैम! ये आप क्या कर ही हैं।
मैम ने फिर से मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे बालों में हाथ फेरते हुए मेरे होंठों को चूसने लगी। मैं उन्हें तड़पाने के लिए उन्हें खुद से दूर हटाने की झूठी-मूठी कोशिश कर रहा था। मैम ने मेरे हाथों को पकड़ा और अपने कुल्हों पर सैट कर दिया और फिर से मेरे होंठों को चूसने लगी। मैम मुझे खींचते हुए बेड की तरफ ले जाने लगी। मैंने चलते चलते दरवाजे को हाथ मारा, पर वो पूरा बंद नहीं हुआ, हल्का सा खुला रह गया।
मैम मेरे होंठों को चूसते हुए मुझे बेड तक ले गई और मुझे धक्का देकर बेड पर गिरा दिया। वो खड़ी खडी मुझे खा जाने वाली नजरों से देख रही थी। मेरा पप्पू तो पहले ही मैदान में आ चुका था और अपीन जंजीरे खुलने की बाट जोह रहा था।
मैम ने अपना पल्लू नीचे गिरा दिया और पिछे हाथ करके अपने ब्लाउज का हुक खोलकर निकाल दिया। अब वो केवल ब्रा में खड़ी थी। मैम ने ब्लाउज को एक तरफ फेंक दिया। पुशअप ब्रा में कैद मैम के उभार कहर ढा रहे थे। मैं घूरकर मैम के उभारों को देख रहा था। मैम नीचे झुकी और मेरी बेल्ट को खोल दिया और जींस का हुक खोलकर घुटनों तक सरका दी। मेरा लिंग झटका खाकर बाहर आ गया और मैम को सलामी देने लगा।
मैम एकटक मेरे लिंग को देखती रही।
हाय,,,, कितना सोहना लंड है तेरा, और ये कहते हुए मैम ने अपने होंठों को मेरे लिंग के सुपाड़े पर टिका दिया। उन्होंने अपनी जीभ निकाली और मेरे लिंग से निकली प्रिकम की बूंदों को चाट गई। मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। मैं आराम से बेड पर लेटा था। फिर मैम ने अपनी ब्रा भी उतार दी और उनकी चूचियां झूलने लगी। उनकी तेज सांसों के साथ उनकी चूचियां भी उपर नीचे हो रही थी। शायद वासना के कारण उनकी चूचियां तन कर कड़ी हो गई थी, वो थोडी सी भी नहीं लटकी हुई थी।
फिर मैम ने मेरी शर्ट के बटन खोल दिये और साइड में गिरा दी। मैम मेरे उपर लेट गई और मेरे गालों और होंठों को चूमने लगी। मेरा लिंग उनके पेट पर हरकत कर रहा था, उनके उभार मेरी छाती पर दब गये थे, बिल्कुल नरम, परन्तु तने हुए। मैंने अपना हाथ उनकी कमर पर रख दिया और सहलाने लगा।
हाय, आज तो बस तू मुझे जन्नत की सैर करा दे, बहुत दिनों से तेरे ही सपने देख रही थी मैं, मैम ने मेरे गालों पर अपने दांत गड़ाते हुए कहा।
मैंने अपने हाथ साड़ी के अंदर डाल कर उसके कुल्हों को मसलने लगा। मैम मेरे होंठों को काटने लगी और अपनी चूचियों को मेरी छाती पर रगड़ने लगी। मैम अपना एक हाथ नीचे ले गई और हमारे बीच में डालकर मेरा लिंग पकड़ लिया।
क्या शानदार लंड है तेरा, और ये कहते हुए वो नीचे को सरक गई और मेरा पूरा लिंग एकदम से अपने मुंह में भर लिया। मेरा लिंग उनके गले में जाकर अटक गया। फिर मैम ने मेरे लिंग को बाहर निकाला और फिर से पूरा मुंह में गटक लिया। लिंग जैसे ही अंदर जाता मैम की जीभ उसके चारों तरफ घूमने लगती। वो इतने अच्छे तरीके से चूस रही थी और कुछ उनके मुंह की गर्मी, मुझे लग रहा था कि आज तो मैं दो मिनट भी मैदान में नहीं टिक पाउंगा।
फिर उन्होंने मेरे लिंग को पूरा मुंह के अंदर लिया और अंदर ही रखे हुए जीभ फिराने लगी। मैं तो मजे से पागल ही हुआ जा रहा था। मुझे खुद पर कंट्रोल करना बहुत ही मुश्किल हो गया था। मेरी कमर बार बार हवा में उठ रही थी और मेरे मुंह से आहह ओहहह की आवाजें निकल रही थी।
और फिर जिसका मुझे डर था वहीं हुआ, मैंने अपना रस मैम के मुंह में उडेलना शुरू कर दिया। जैसे ही मैम ने मेरे रस की बौछार अपने मुंह में महसूस की उन्होंने अपने होंठों को और भी जोर से मेरे लिंग पर कस दिया और सारा रस पीने लगी। आठ-दस पिचकारियां छोड़ने के बाद मैं शांत हो गया और बेड पर कमर रखकर तेज तेज सांसे लेने लगा। आज तक मुझे इतना मजा नहीं आया था जितना आज मैम ने मेरे लिंग को चूस कर दिया था। मेरा लिंग छोटा होना शुरू हो गया। पर मैम ने उसे मुंह से नहीं निकाला और चूसती रही, और इसका परिणाम यह हुआ कि मेरा लिंग फिर से अंगडाई लेने लगा। मेरे लिंग को फिर से मैदान में आते देखकर मैम की आंखों में चमक आ गई। वो खड़ी हुई और अपनी साड़ी उतार कर एक साइड में रख दी।
मैं देखकर हैरान रह गया कि उन्होंने नीचे पेटीकोट नहीं पहना हुआ था, बस पेंटी ही थी। उनका पेट एकदम सपाट था और जांघें भरी हुई थी। उन्होंने फिर अपनी पेंटी में अपने अंगूठे फसाये और उसे निकाल दिया। उनकी योनि उनकी जाघों के बीच में छुपी हुई थी। फिर मैम ने मेरी जींस को भी खींचकर निकाल दिया और मेरे उपर लेट गई। उन्होंने अपनी योनि को मेरे लिंग पर सैट किया और एक ही झटके में पूरे लिंग को गलप कर गई। मुझे लगा कि मेरा लिंग बाहर ही रह गया है तो मैंने अपना हाथ नीचे करके अपने लिंग केा सैट करने की कोशिश की। पर मेरा लिंग तो पहले से ही उनकी योनि के अंदर था।
 
मैं हैरान रह गया, मुझे लग ही नहीं रहा था कि मेरा लिंग किसी योनि में है। मैंने सवालियां नजरों से मैम की तरफ देखा, पर उनकी आंखें बंद थी और वो हलके हलके धक्के लगा रही थी। अचानक ही उनके धक्के बढ़ गये और उनका शरीर अकड़ने लगा। उन्होंने मेरे मुंह को अपने उभारों पर दबा दिया और तेज तेज धक्के मारने लगी। मुझे कुछ भी मजा नहीं आ रहा था। मैम के मुंह से लम्बी लम्बी सिसकारियां निकलने लगी और मुझे लगा कि कुछ चीज मेरे लिंग को जकड़ रही है। मैम के धक्के अब ज्यादा ही तेज हो गये थे और उन्होंने चार पांच और तेज धक्के मारे और मुझे मेरे लिंग पर गर्म गर्म पानी महसूस हुआ और उनकी योनि ने मेरे लिंग को बुरी तरह से जकड़ लिया। वो कभी मेरे लिंग को जकड़ लेती और कभी छोड़ देती। कुछ मैम का गर्म पानी और कुछ उनकी योनि की इस तरह की जकड़न के साथ तेज धक्के, मैं भी दूसरी बार झड गया और अपने पानी से मैम की योनि भर दी।
मैं मेरे उपर लेटकर तेज तेज सांसे लेने लगी और मेरे बालों को सहलाने लगी। वो मेरे चेहरे को चूम रही थी, चाट रही थी। उनकी योनि अभी भी मेरे लिंग को कभी जकड़ रही थी और कभी छोड़ रही थी। उनकी योनि की ये छोउ़ पकड़ मेरे लिंग को ढीला नहीं पड़ने दे रही थी। मैंने उन्हें पकड़ा और बेड पर पलट दिया और उनके उपर आ गया। मैम अपनी आंखें बंद करके शांत होकर लेट गई। मैंने नीचे होकर उनकी योनि को देखा, वो एकदम से फैली हुई थी, ऐसा लग रहा था कि कोई गुफा है। मैंने मैम की तरफ देखा, मेरे चेहरे पर सवाल देखकर मैम मुस्कराई।
मैम: तुम्हारे सर बिस्तर में ज्यादा देर टिकते नहीं हैं, कभी कभी तो दो तीन धक्कों में ही झड जाते हैं और एक बार झडने के बाद उनका फिर खड़ा ही नहीं होता, तो मैं प्यासी ही रह जाती हूं, इसलिए फिर मैं डिल्डो से काम चलाती हूं, और डिल्डो बहुत मोटा है तो इस कारण मेरी चूत इतनी चौड़ी हो गई है। अब तो हर रोज डिल्डो मेरी चूत की प्यार बुझाता है तो इसलिए ये हमेशा ऐसे ही खुली रहती है।
इतना कहकर मैम ने मेरा हाथ पकड़कर अपने उपर खींच लिया और मुझे अपनी बाहों में कस लिया।
पर आज तेरे साथ मैं जल्दी ही झड गई, सच में तेरे साथ बहुत मजा आया, और मैम ने नीचे हाथ करके मेरे लिंग को फिर से अपनी योनि पर सैट कर दिया। मेरा लिंग सिकुडा हुआ था तो मैम अपनी योनि को मेरे लिंग पर रगड़ने लगी और उनकी योनि की गर्मी से वो जल्दी ही फिर से तन कर खड़ा हो गया। चूंकि मैडम ने लिंग को अपनी योनि पर सैट कर रखा था, इसलिए जैसे जैसे मेरा लिंग खड़ा होता गया, वैसे वैसे ही उनकी योनि में घुसता गया और पूरा तन कर उनकी योनि में गर्भ पर ठोकरे मारने लगा। मुझे बस मेरा लिंग अंदर उनके गर्भ से टकराता हुआ ही महसूस हो रहा था, बाकी लग नहीं रहा था कि मेरा लिंग किसी योनि में घुसा हुआ है। मैंने अपने लिंग को बाहर खींचा और एक जोर का धक्का मारा, मैम के मुंह से आह निकल गई और वो अपने कुल्हों को नीचे से उछालने लगी। मैंने आठ दस धक्के लगाये पर कोई मजा ही नहीं आ रहा था। मैंने अपना लिंग बाहर निकाल लिया और मैम के पैरों को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया और अपने लिंग को उनके पिछे के छेद पर सैट कर दिया। मेरे लिंग को पिछे के छेद पर लगते ही मैम सिहर गई और अपने पैर मेरी कमर में डाल कर कसकर जकड़ लिये। मैंने थोड़ा सा धक्का लगाया तो मेरा लिंग का सुपाड़ा उनके छेद में घुस गया। मैम थोड़ा सा कसमसाई और फिर अपने कुल्हों को नीचे की तरफ धक्का दे दिया। मेरा पूरा लिंग उनके अंदर घुस गया। उनकी पिछे का छेद कुछ टाइट था तो अब मुझे भी मजा आ रहा था और मैंने तेज तेज धक्के लगाने शुरू कर दिये। मैम बार बार अपनी गांड को सिकोड रही थी जिससे मुझसे सहन नहीं हुआ और थोड़ी देर में ही मैं फिर से झड गया, मेरा वीर्य अपने अंदर महसूस करते ही मैम का शरीर भी अकड़ गया और उनकी योनि ने भी पानी निकालना शुरू कर दिया। मैं उनके उपर लेट गया और अपना चेहरा उनकी चूचियों पर रख दिया।
हम ऐसे ही लेटे रहे। मुझे हलकी हलकी नींद आने लगी थी कि तभी मैम का मोबाइल बजने लगा।
मैम ने देखा, कोमल का फोन था। मैम ने फोन रिसीव किया, कोमल वापिस आ चुकी थी, उसने अपना रूम नंबर बताया और हम फ्रेश होकर अपने कपड़े पहनकर कोमल के रूम की तरफ चल दिये।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--26
गतांक से आगे ...........
हम कोमल के रूम पर पहुंचे, दरवाजा हलका खुला हुआ था। मैम ने दरवाजा खोला और अंदर आ गई। अंदर बेड पर एक बला की खुबसूरत, बड़ी बड़ी आंखें जिनमें चंचलता साफ झलक रही थी, गोल गोरे गोरे गाल, गुलाबी होंठ और चेहरे की शोभा बढ़ाता सीधा नाक। दरवाजा खुलते ही उसने दरवाजे की तरफ देखा और मैम को देखते ही वो बेड से उठी और भागकर दीदी दीदी करते हुए मैम के गले जा लगी।
वो जैसे ही बेड पर से उठी, ओढी हुई चददर एक तरफ लुढक गई और उसका गदराया जोबर कपड़ों में से झलकने लगा। उसने लहंगा और कुर्ती पहनी हुई थी, लहंगा घुटनों से थोड़ा उपर तक था। टाइट कुर्ती में से उसके उभार चमक रहे थे। शायद उसने ब्रा नहीं पहनी थी, या पहनी भी हो, उसके निप्पल कुर्ती में से झांक रहे थे, मधयम आकार के उसके उभार, जिन्हें देखकर लगता नहीं था कि अभी ये जवानी के असली सुख का आनंद ले चुकी होगी, एकदम सपाट पेट, जल्दी में उठने के कारण कुर्ती थोड़ी उपर हो गई थी और उसके सपाट पेट पर गहरी लम्बी नाभि। थोड़ा और नीचे आने पर उसके योनि पर कसा उसका लहंगा, और योनि से नीचे आकर खुला हुआ, घुटनों से उपर थोड़ी सी गदराई सातलों की झलक दिखाई दे रही थी। एकदम संगमरमरी, केले के तने जैसी मांसल और चिकनी जांघे।
मैं मैम के पिछे ही थोड़ा सा साइड में खड़ा था। उसने अपनी बांहें मैम की कमर में कस दी और जब गले लगी तो पिछे मुझसे उसकी नजरे मिलीं। उसने एक पल के लिए मुझे देखा और फिर अपनी नजरें झुका ली।
जिस अदा से उसने नजरें झुकाई मैं तो बस घायल ही हो गया।
उसने फिर से अपनी पलकें उठाकर मुझे देखा और वापिस अपनी पलकें झुका ली।
मैम: किम्मी, अब गले ही लगे रहेगी क्या, चल हट, और तैयार हो जा, चलते हैं।
वो मेरी तरफ घूरते हुए मैम से अलग हो गई और आंखों के इशारे से मैम से मेरे बारे में पूछने लगी।
मैम: ये, ये समीर है, कम्पनी में काम करता है, तुम्हारे जीजा जी को किसी काम से जाना था तो, मैं साथ ले आई।
कोमल ने नाक-भौंक सिकोड़ते हुए मेरी तरफ देखा और जैसे मुझे चिढ़ा रही हो, छोटा दिखा रही हो, अदा के साथ मुड़कर वापिस बेड की तरफ चल दी। उसकी इन अदाओं से मेरे चेहरे पर शैतानी मुस्कान तैर गई।
पिछे से उसके छोटे छोटे कुल्हों पर कसा लहंगा उसके एक एक कटाव को उजागर कर रहा था। एकदम गोल और कसे हुए नितम्ब, साइज में न ज्यादा बड़े और न ज्यादा छोटे।
मेरा पप्पू तो भगवान से दुवाएं मांगने लगा कि शायद इसके साथ बात बन जाये।
वो बेड के पास गई और अपना पहले से पैक किया हुआ बेग उठाया और खड़ी हो गई।
कोमल: ओके, चलो चलते हैं, सबकुछ पैक है।
मैं बाहर आ गया और पिछे पिछे मैम और कोमल भी बाहर आ गई। मैंने पिछे मुड कर कोमल की तरफ देखा तो उसने अपनी नाक उपर को चढा ली और चेहरे को एक झटका सा दिया।
बड़ी नखरैल है, जल्दी हाथ नहीं आयेगी, थोड़ी मेहनत लगेगी इसपे, मैंने मन ही मन सोचा।
मैं धीरे धीरे चलते हुए उनके पिछे हो गया और पिछे पिछे चलने लगा।
कोमल की कातिल मस्त चाल, पैरों के साथ रिद्म मिलाकर मटकते कुल्हे, ऐसा लग रहा था कि निमंत्रण दे रहो हों कि आओ और हमें मसल डालो।
काउंटर पर आकर मैम और उसने चैक आउट किया और हम बाहर आ गये। हमारे बाहर आने से पहले ही गाड़ी गेट के सामने पहुंच चुकी थी। मैं बहुत इम्प्रैस हुआ उनकी पार्किंग सर्विस से। गाड़ी पर कपड़ा लगाया गया था और गाड़ी एकदम चमक रही थी।
मैंने गाड़ी की चाबी ली और ड्राइवर सीट पर आकर बैठ गया। मैम और कोमल पिछे बैठ गई। मैंने गाड़ी स्टार्ट की और घर की तरफ चल पड़ा। आते समय शहर में ट्रेफिक कुछ ज्यादा ही हो गया था इसलिए वापिस आने में 40 मिनट से ज्यादा लग गये। हम 2 बजे वापिस घर पहुंचे। बॉस बैंक से वापिस आ चुके थे।
 
अंदर आने पर मैम और कोमल गाड़ी में से उतर गये और मैंने गाड़ी वापिस गैराज में खड़ी कर दी। कोमल और मैम अंदर चली गई थी, मैं ऑफिस में आ गया।
अपूर्वा: इतना टाइम कैसे लग गया?
मैं: अरे वो लाटसाहबनी जयपुर दर्शन पे गई हुई थी।
अपूर्वा: क्या, उसे पता नहीं था कि आज लेने आयेंगे।
मैं: अब मुझे क्या पता यार, और है भी बड़ी नखरैल सी, मुझे देखकर नाक-भौंह सिकोड़ रही थी।
अपूर्वा मुस्कराने लगी।
थोड़ी देर में काम वाली चाय लेकर आ गई। उसे देखते ही मुझे शनिवार वाली बात याद आ गई। वो मेरी तरफ देखकर मुस्करा रही थी।
उसने हम दोनों को चाय दी और चली गई।
अपूर्वा: मैम नहीं आई आज चाय लेकर!
मैंने मन ही मन सोचा, अब क्यों आयेगी, साली की गरज निकल गई, अब तो कामवाली के हाथ से ही चाय पिनी पडेगी।
जाते वक्त कामवाली अपने कुल्हें मटकाती हुई मुझे मुड मुड कर देख रही थी जब तक वो बाहर नहीं निकल गई।
मैंने अपनी चेयर को अपूर्वा के पास कर लिया और हम चाय पीने लगे।
अपूर्वा लगातार मुझे घूरे जा रही थी।
ऐसे क्यों घूर रही हो, मैंने उससे पूछा।
क्यों, आपको कोई प्रॉब्लम है, मेरी मर्जी मैं जिसे चाहे घूरू, आंखें नचाते हुए अपूर्वा ने उतर दिया।
मैं चुप हो गया और चाय पीने लगा।
अचानक अपूर्वा बोली, शाम को मूवी देखने चले।
मैं उसके चेहरे की तरफ देखने लगा।
अपूर्वा: ऐसे क्या देख रहे हो, मूवी के लिए ही तो पूछा है, कोई परपोज थोडे ही किया है।
मैं मुस्करा दिया और कहा, 'क्या पता अभी मूवी के लिए परपोज किया है, और मूवी देखने के बाद फिर शादी के लिए परपोज कर दो।'

जी नहीं, शादी के लिए अभी परपोज नहीं करूंगी।
मैं उसे छेड़ते हुए कहा, 'इसका मतलब परपोज तो करोगी, पर बाद में'।
अपूर्वा का चेहरा शर्म से लाल हो गया और उसने अपनी पलकें झुका ली।
अच्छा कौन-सी देखोगी, मैंने कहा।
कौन-कौन सी लगी हुई हैं, अपूर्वा ने फिर से आंखें नचाते हुए कहा।
ये लो, कल्लो बात, ये भी नहीं पता कौन-कौन सी लगी हुई हैं, और मूवी देखने चले हैं, मैंने उसे छेड़ते हुए कहा।
तो क्या हुआ, जो भी बढ़िया सी लगी होगी, वो देख लेंगे, वो वैसे ही मचलते हुए बोली।
मैं: रास्कल----
और मेरी बात पूरी होने से पहले ही वो बोल पड़ी, नहीं वो फ्रेंडशिप वाली है ना जो इस शुक्रवार को लगी थी, वो देखते हैं, अच्छी मूवी बता रहे हैं, मेरी फ्रेंड देख के आई थी।
अच्छा, वो मुझसे फ्रेंडशिप करोगे, मैंने चटकारा लेते हुए कहा। वो तो बेकार सी मूवी है, मेरा फ्रेंड भी देखके आया था, मैंने उसे छेड़ते हुए कहा।
चलो फिर रास्कल ही देख आते हैं, वो तो बढिया ही होगी, उसने कहा।
वैसे ये मूवी देखने का भूत कहां से चढ़ गया तुम्हारे उपर, मैंने फिर से चटकारा लेते हुए कहा।
कहीं से नहीं, रहने दो, मुझे नहीं देखनी मूवी-वूवी, अपूर्वा ने नाराज होते हुए कहा और मुंह फेरकर काम करने लग गई।
ओह,,, बाबू तो नाराज हो गई, मैंने उसकी ठोड़ी को पकड़कर उसके चेहरे को अपनी तरफ करते हुए कहा।
उसने मेरा हाथ झटक दिया और मेरे से दूसरी तरफ मुंह कर लिया।
चलो ठीक है, शाम को रास्कल देखने चलते हैं, और चेयर पर से उठकर उसके चेहरे को अपनी तरफ किया।
परन्तु उसके चेहरे की तरफ देखते ही मुझे खुद पर बहुत ही गुस्सा आया, उसकी आंखों में आंसू छलक आये थे।
क्या हुआ, तुम रो क्यों रही हों, मैंने उसके आंसू पौंछते हुए कहा।
कुछ नहीं, उसने अपना एक हाथ मेरे हाथ के उपर रख दिया और दूसरे गाल पर आये आंसूओं को पौंछने लगी।
नहीं बताओं, क्या हुआ यार, मुझे टेंशन हो गई है मुझे इतनी और तुम कह रही हो कुछ नहीं।
मेरी बात सुनते ही अपूर्वा ने मुझे बाहों में भर लिया और जोर से भींच लिया। वो चेयर पर ही बैठी थी जबकि मैं खडा था तो बस हमारे गाल ही एक दूसरे से मिले हुए थे।
थोड़ी देर वो ऐसे ही मुझे हग किये रही, फिर मैंने उसे पिछे हटाना चाहा, पर वो उं हूं करके वैसे ही मुझसे चिपकी रही।
थोड़ी देर बाद उसने मुझे छोड़ा और नीचे देखने लगी।
चलो, अब बताओ क्या हुआ, तुम रो क्यों रही थी, मैंने उसके गालों को सहलाते हुए कहा।
'आई-----' उसके होंठ खुले, पर इतना कहने पर ही उसका गला रूंध गया और आगे के शब्द निकले ही नहीं और उसकी आंखों से फिर से आंसू बहने लगे।
मैं परेशान हो गया, पता नहीं क्या हुआ, जो ये रोये जा रही है।
अपूर्वा, मुझे बताओ ना क्या हुआ, ऐसे क्यों रो रही हो।
उसने अपने आंसू साफ किये और बोली, 'वो सुबह मम्मी ने डांट दिया था, इसलिए, बस और कोई बात नहीं है।'
मैंने चेन की सांस ली, पागल, मम्मी तो डांटती ही रहती है, इसमें रोने की क्या बात है, मैंने उसके गालों पर बचे आंसूं को पोंछते हुए कहा।
 
उसने बस अपनी गर्दन हिलाकर हूं कहा और अपनी लम्बी लम्बी उंगलियां की-बोर्ड पर टिका दी।
मैंने उसके सिर पर हाथ रखा और हलके से मसल दिया, और 'पागल, मम्मी के डांटने पर भी कोई रोता है' कहते हुए अपनी चेयर पर आ गया।
उसने अपने बाल ठीक किये और फिर से काम में लग गई। मैंने छः बजे वाले शो के दो टिकट आइनोक्स, क्रिस्टल पाम के बुक करवा लिये और प्रिंट करके अपने पर्स में रख लिए।
कुछ देर बाद बॉस आ गये और हमसे दो चार बातें करके वहीं तीसरे सिस्टम पर बैठ गये और ऑन करके कुछ प्रोजेक्ट देखने लग गये।
साढ़े चार बजे मैम चाय लेकर आई, और तीनों को दे दी, उनके पिछे पिछे कोमल आ रही थी, उसके हाथ में नमकीन वाली ट्रे थी।
साइड से टेबल सेन्टर में रखके मैम ने नमकीन उसपर रख दी और एक चेयर पर बैठ गई। कोमल मैम की चेयर के साथ पिछे से हाथ रखके खड़ी हो गई। सभी ने चाय पी और थोड़ी थोड़ी नमकीन ली।
कोमल कभी मुझे घूर रही थी तो कभी अपूर्वा की तरफ देख रही थी।
चाय पीने के बाद मैम कप और ट्रे लेकर चली गई। मैं कुछ देर में आती हूं, कहकर कोमल वहीं रूक गई।
वो चेयर को अपूर्वा की चेयर के पास करके उसके पास जाकर बैठ गई। कोमल ने अपूर्वा की तरफ हाथ बढ़ाया और अपना परिचय भी दिया। अपूर्वा ने भी उससे हाथ मिलाया और अपना परिचय दिया।
फिर तो उनके बीच फुसफुस शुरू हो गई, मुझे बस फुसफुस ही सुनाई पड़ रही थी, वो क्या बातें कर रही हैं, कुछ नहीं सुन रहा था।
पांच बजे मैंने अपना सिस्टम ऑफ किया और बॉस से जाने की अनुमति मांगी।
मेरी आवाज सुनकर अपूर्वा ने टाइम देखा और उसने भी अपना सिस्टम ऑफ कर दिया। और खड़ी हो गई। कोमल भी खड़ी हो गई। हम बाहर आ गये। कोमल अंदर मैम के पास चली गई और मैं और अपूर्वा बाहर आंगन में गेट के पास आ गये।
तुम्हारी बाईक कहां है, अपूर्वा ने पूछा।
आज नहीं लाया, उसका पैट्रोल खत्म हो गया था, मैंने जवाब दिया।
क्या, इतना बुरा टाइम आ गया, कि पैट्रोल के भी पैसे नहीं है, अपूर्वा ने छेड़ते हुए कहा।

ओए, वो तो मैं डलवाना भूल गया, नहीं तो पैसों की कमी नहीं है मेरे पास, बात करती है, मैंने भी उसको उसी के लहजे में जवाब दिया।
चाबी, कहते हुए मैंने उसकी तरफ हाथ बढ़ा दिया।
उसने अपने पर्स में से चाबी निकाली और मुझे देते हुए कहा, 'रोज-रोज की आदत पड़ गई लगता है, फ्री में गाड़ी चलाने की'।
अब हम तो ऐसे ही हैं, पानी नहीं मिले तो कोक पीकर काम चला लेते हैं, मैंने कहा।
अपूर्वा हंसने लगी।
कोमल दरवाजे में खड़ी खड़ी हमें ही घूर रही थी। मैंने स्कूटी को स्टार्ट किया और अपूर्वा पिछे बैठ गई।
हम बाहर सड़क पर आ गये और मैंने स्कूटी को दूसरी साइड में घुमा दिया।
उधर किधर जा रहे हो, रस्ता भूल गये क्या, अपूर्वा में मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
आज मन कर रहा है कि जयपुर का एक चक्कर लगा लेता हूं, मेरा कौन सा पैट्रोल जलेगा, मैंने उसे छेड़ते हुए कहा।
ये इसको संभालों, कहीं गिर गई तो फिर से रोना शुरू कर दोगी, मैंने फिर से उसे छेड़ते हुए कहा।
उसने टिकट ली और देखकर मेरी कमर में एक घूसा जमा दिया।
'हाउ स्वीट, मुझे पहले क्यों नही बताया' कहते हुए उसने मुझे पिछे से बाहों में भर लिया और उसके उभार मेरी कमर में दब गये।
मैंने जानबूझ कर 'आउच' की आवाज निकाली।
क्या हुआ, अपूर्वा ने हैरान होते हुए पूछा।
'वो चुभ रहे हैं, कमर में', मैंने पिछे इशारा करते हुए कहा। मैं बैक मिरर से उसे देख रहा था।
मेरी बात सुनकर उसका चेहरा लाल हो गया और थोड़ा पिछे होकर बैठ गई।
पर मैं कहा उसको पिछे होकर बैठने देने वाला था, मैंने स्कूटी में रेस दी और फिर एकदम से ब्रेक लगा दिये। उसके उभार वापिस मेरी कमर में दब गये और अबकी बार उसके मुंह से 'आहह' निकली।
क्या हुआ, चोट तो नहीं लगी, मैंने कहा।
बदमाश, कहते हुए उसने मेरे कंधे पर मुक्का मारा और अपना चेहरा मेरे कंधे से सटाकर पीछे पर टिका दिया और हाथों से मेरे पेट को कस लिया।
अभी शो में टाइम था तो मैं स्कूटी को धीरे धीरे चलाने लगा। उसकी गर्म गर्म सांस मुझे मेरे कंधे के पास महसूस हो रही थी।
आधे घंटे में हम बाईस गोदाम पहुंच गये, पर देखा तो सर्किल पर सीधे जाने का रास्ता बंद कर रखा था तो हम पिछे से घूमकर मॉल में आ गये। स्कूटी को पार्क करके हम मॉल में अंदर आ गये। अभी मूवी स्टार्ट होेने में 20 मिनट थे। मैंने प्रिंट आउट देकर टिकट ली और हम अंदर आ गये। अपूर्वा ने मेरे एक हाथ को पकड़ रखा था और अपना सिर मेरे कंधे पर रखा हुआ था।
हमारा रिस्ता फ्रेंडशिप से आगे बढ़ चुका था, पर अभी इसका पता हम दोनों (खासकर मुझे) नहीं लगा था।
चैंकिंग वगैरह क्लियर करके हमने खाने के लिए पॉपकॉर्नर लिये। तभी पिछला शो खत्म हो गया और थोड़ी देर में ही एंट्री शुरू हो गई। हम थोड़ी देर बाहर ही रूके रहे, क्योंकि भीड़ बहुत ज्यादा थी और मैं नहीं चाहता था कि भीड़ में कोई अपूर्वा से छेड़छाड़ करे। सबके बाद में हम अंदर आ गये और पिछे की सीट जो मैंने बुक की थी, पर जाकर बैठ गये। हॉल लगभग फुल था। शो स्टार्ट हो गया। पूरी मूवी के दौरान मेरा हाथ अपूर्वा के हाथ में रहा जो उसकी जांघों पर रखा था। इंटरवल में अपूर्वा ने कोक और समोसे के लिए ऑर्डर कर दिया था।
मूवी ठीक ठाक थी, पर अपूर्वा के साथ देखने में और ज्यादा मजा आया था। मूवी के बीच में कई बार अपूर्वा का फोन बजा पर उसने साइलेंस पर कर दिया।
हम बाहर आ गये, 9 बजने वाले थे। अपूर्वा ने मुझे घर छोड़ा और फिर अपने घर के लिए निकल गई।
मैं उपर आ गया, सोनल छत पर ही खड़ी थी और उसके साथ पूनम भी खड़ी थी।
तुम्हारी तो मौज है जी, रात को 9 बजे लड़कियां घर छोउ़कर जाती हैं, सोनल ने मुस्कराते हुए कहा।
और क्या, दो दो तो घर पे हैं, और एक ये बाहर, और क्या पता एक ही है या और भी हैं, पूनम ने उसका साथ देते हुए कहा।
मैंने उनकी बातों पर ज्यादा धयान नहीं दिया और रूम खोलकर अंदर आ गया। सोनल और पूनम बाहर ही खड़ी-खड़ी बतियां रही थी।
कुछ खाने को मिलेगा क्या, मैंने अंदर से ही सोनल को आवाज लगाई।
अच्छा जी, उस स्कूटी वाली ने नहीं खिलाया-पिलाया क्या, ऐसे ही रात के 9 बजे तक परेशान करती रही, सोनल की आवाज आई।
और वो दोनों अंदर आ गई।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--27
गतांक से आगे ...........
अगर कुछ हो तो बताओ, नहीं तो फिर ढाबे पे खा आता हूं, मैंने अपने कपड़े उतारते हुए कहा।
हम किस मर्ज की दवा हैं, अभी बना देती हूं, पूनम ने चहकते हुए कहा।
मैंने रसोई में चैक किया, सब्जी रखी हुई थी।
ठीक है, पर जल्दी से बनाना, भूख लगी हुई है।
वो दोनों रसोई में घुस गई और मैं कपड़े चेंज करके दूध लेने के लिए चल दिया।
जब तक मैं वापिस आया उन दोनों ने खाना बना दिया था और बाहर छत पर टहल रही थी। मैं ये देखकर हैरान हुआ कि उनके साथ छत पर आंटी भी थी क्योंकि पिछले दो तीन दिन से आंटी घुटनों में दर्द की शिकायत कर रही थी।
हाय आंटी, मैंने उनको देखते ही कहा।
हाय बेटा, कैसे हो? आंटी ने पूछा।
'बस आपकी मेहरबानी है', मैंने सोनल की तरफ देखते हुए कहा।
सोनल मेरी बात का मतलब समझ गई और मुझे आंखें दिखाने लगी। शायद पूनम भी समझ गई थी, इसीलिए वो मंद मंद मुस्करा रही थी।
आंटी आपके घुटनों का दर्द सही हो गया, मैंने आंटी से मुखातिब होते हुए कहा।
कहा बेटा, उपर तो आ गई, अब लग रहा है, नीचे तो तुम्हें सहारा देकर उतारना पड़ेगा, बहुत दर्द हो रहा है, आंटी ने अपने घुटनों को मसलते हुए थोड़ा दर्द से कराहते हुए कहा।
दोस्तो आंटी कोई सैक्सी लेडिज नहीं है, वो तो एक 40-45 साल की औरत है, मोटी-मोटी चूचियां जो कि हमेशा ब्लाउज में से बाहर निकलने की कोशिश में रहती हैं, कमर (सॉरी कमरा ही कहना पड़ेगा) बहुत ही मोटी और पेट तो आप ये ही कह सकते हो पृथ्वी गोल है। कद भी 5 फुट से कुछ कम ही होगा, मेरे कंघों से भी नीचे आती हैं, परन्तु यारों क्या बताउं, चेहरा इतना खूबसूरत है कि अगर वो अपना वेट कम कर ले तो शायद सोनल उसके सामने पानी भरे। चेहरे पर बिल्कुल भी चर्बी नहीं है और मोटी मोटी हिरणी जैसी आंखें, एकदम सफेद आंखों के बीच में काली पुतली, लम्बा-लम्बा चेहरा, और सीधा नाक, शायद रसीले होंठ (अब कुछ अंकल ने छोड़ा होगा तो), चेहरे पर झुर्रियों का कोई भी नामों निशान नहीं, कुल मिलाकर ये कह सकते हैं कि अगर कोई उनको कोई केवल गर्दन से उपर देखें तो दिल दे बैठें। आंटी हमेशा साड़ी ही पहनती हैं, जिससे उनकी गोल पृथ्वी और कमर रूमी कमरा और साथ ही हमेशा ब्लाउज से बाहर निकलने को बेताब चूचियों बूढ़ों पर कयामत ढाती रहती होंगी।
मैं दूध अंदर रखकर आ बाहर आ गया।
आंटी: बेटा, अब नीचे छोड़ आ मुझे सहारा देकर।
मैं (आंटी की तरफ बढ़ते हुए): ओके, चलो आंटी।
मैंने आंटी की एक बांह पकड़ी और दूसरा हाथ उनकी गर्दन पर से दूसरी साइड में उनके कंधे पर रख दिया और उनको चेयर पर से उठाकर सीढ़ियों को तरफ चल दिया।
सोनल पहले ही सीढ़ियों में पहुंच गई और आंटी का एक हाथ पकड़कर अपने कंधे पर रख लिया।
जैसे ही आंटी एक सीढ़ी उतरी उनका बैलेंस बिगड़ा और उनका सारा बोझ सोनल के उपर, मैंने जल्दी से एक हाथ से सोनल को पकड़ा नहीं तो शायद वो तो लुढ़कती हुई नीचे वाली सीढ़ी पर ही रूकती।
मैं: आंटी ऐसे तो शायद प्रॉब्लम हो जायेगी, आप ऐसा करो मेरी पीठ पर बैठो, और मैं आंटी के आगे वाली सीढ़ी पर आकर खड़ा हो गया।
आंटी मेरी पीठ पर बैठ गई, काफी भारी थी, मैं संभलते हुए उतरने लगा और अपने एक हाथ से सोनल को पकड़ लिया जो अब मेरे से एक सीढ़ी आगे चल रही थी। आंटी में काफी वजन था इसलिए मैं बहुत ही धीरे धीरे नीचे उतर रहा था। बढ़ी मुश्किल से नीचे तक पहुंचा।
नीचे आकर मैंने आंटी को उतारा और राहत की सांस ली।
आंटी: काफी मजबूत जिस्म है बेटा, इतनी भारी आंटी को पीठ पर बैठाकर नीचे उतारना कोई बच्चों का खेल नहीं है।
 
मैं सिर्फ मुस्करा दिया और आंटी को अंदर लाकर उनके बेडरूम में बेड पर बैठा दिया। आंटी बैठकर अपनी साड़ी को घुटनों से उपर उठाकर अपने घुटनों को सहलाने लगी।
बेटा सोनल, वो रसोई में मालिश वाला तेल रखा है, उसको थोड़ा सा गर्म करके ला दे, आंटी ने सोनल की तरफ देखते हुए कहा।
सोनल बाहर निकलकर रसोई में चली गई और मैं आंटी के पास बेड पर बैठ गया।
ये दर्द तो मुझे किसी काम की नहीं छोड़ेगा, अभी से पहले जकड़ लिया, आंटी ने बड़बड़ाते हुए कहा।
कल किसी अच्छे डॉक्टर के पास चलेंगे, आजकल तो हर चीज का इलाज है आंटी, टेंशन मत लो, मैंने उनके घुटने को सहलाते हुए कहा।
'ये लो मम्मी, थोड़ा ज्यादा गर्म हो गया, ठंडा करके लगाना', एक कटोरी में गर्म तेल लेकर आते हुए सोनल ने कहा, और कटोरी को बेड पर रखकर मेरी तरफ आंखों से आने का इशारा करके बाहर निकल गई।
'अच्छा आंटी जी, थोउ़ा ठंडा करके लगाना तेल', मैंने उठते हुए कहा।
बेटा अब तुम आ ही गये हो तो, लगा दो, मेरा तो ये पेट परेशान करता है झुकने में, आंटी ने बेड पर लेटते हुए कहा।
ओके, मैंने कहा और तेल की कटोरी में उंगली डालकर तेल की गर्माहट चैक की और फिर थोड़ा सा उंगली पर लगाकर आंटी के घुटनों पर लगा दिया। तेल ज्यादा गर्म नहीं था तो मैंने कटोरी में से सीधा थोड़ा सा तेल आंटी के घुटनों पर डाला और मालिश करने लगा। मेरा हाथ बार बार आंटी की साड़ी से टकरा रहा था तो आंटी ने साड़ी को उपर कर लिया, परन्तु साड़ी कुछ ज्यादा ही उपर हो गई और उनकी गोरी मोटी मोटी जांघें मेरी आंखों के सामने नंगी चमकने लगी। मैंने जैसे ही उनकी जांघों की तरफ देखा तो मैं हैरान रह गया, आंटी ने अपनी साड़ी को और भी उपर कर लिया था, जिससे अब उनकी जांघें और साफ में पेंटी भी साफ झलक रही थी। जब मेरी नजर उनकी पेंटी पर गई तो मुझे एक 440 वोल्ट का झटका लगा, आंटी की पेंटी योनि के पास से गीली थी। मैंने आंटी के चेहरे की तरफ देखा, उनकी आंखें बंद थी।
जब मैं कुछ देर तक उपर नहीं पहुंचा तो सोनल वापिस नीचे आ गई, और मुझे आंटी की मालिश करते देखकर वहीं बैठ गई और दूसरे घुटने की मालिश करने लगी। आंटी को शायद सोनल के आने का पता नहीं चला था, इसलिए उन्होंने अभी भी अपनी साड़ी को वैसे ही जांघों तक सरका के अपने हाथों से पकड़ा हुआ था।
मैंने सोनल की तरफ देखा और फिर आंटी की गीली पेंटी की तरफ इशारा करते हुए कहा सोनल के कान में हलके से कहा, 'एकदम गीली हो चुकी है'।
सोनल ने मेरी तरफ घूरकर देखा और मेरी कमर में जोर का घुसा मार दिया। घुस्से की आवाज सुनकर आंटी ने अपनी आंखें खोली और सोनल को देखकर उनका चेहरा सफेद हो गया।
पर फिर उन्होंने संभलते हुए कहा, 'पहले तो भाग गई, अब क्यों आई हैं'?
उनकी आवाज में थोड़ी हड़बड़ाहट और झुंझलापन था। आंटी ने अपने हाथों से साड़ी को छोड़ दिया जिससे साड़ी थोउ़ी नीचे हो गई और उनकी पेंटी छुप गई।
मैं और सोनल आंटी की मालिश करते रहे। मेरी बार बार हंसी छूट रही थी, तो सोनल ने मुझको आंखों से डराकर चुप होने को कहा। पर थोड़ी देर बाद मेरी फिर से हंसी छूट जाती।
आंटी की मालिश करने के बाद बाहर आ गये।
मैं (बाहर आकर सोनल को छेड़ते हुए): तू आंटी को थोड़ा ख्याल रखा कर, महीने में एक दो उनका पानी निकाल दिया कर, तू अपनी मम्मी के लिए इतना भी नहीं कर सकती, कैसे बेचारी आंटी की पेंटी गीली हो रखी थी।
सोनल ने एक तेज मुक्का मेरी कमर में जमा दिया, मुक्का काफी जानदार था, और उपर से उसकी अंगूठी मेरी कमर में चुभ गई, इसलिए मुझे तेज कमर में दर्द हुआ।
मैंने रोनी सुरत बनाते हुए सोनल की तरफ देखा और अपना हाथ पिछे ले जाकर कमर को सहलाने लगा।
मुझे काफी दर्द हुआ है, इस बात का अंदाज सोनल को भी हो गया था, इसलिए उसने भी अपना हाथ मेरी कमर में रख दिया और सहलाने लगी।
सॉरी, ज्यादा जोर से लग गया, मैं तो आराम से मारना चाहती थी, सोनल ने मेरी कमर सहलाते हुए कहा।
जोर की बच्ची, तेरे मुक्कों से मुझे कुछ नहीं होने वाला, पर तेरी इस अंगूठी ने ऐसी चोट मारी है, बहुत दर्द हो रहा है।
क्या, ओह माई गोड, आई एम सॉरी, प्लीज, आई एम रियली सॉरी, प्लीज, प्लीज, प्लीज, सोनल मेरी तरफ मरा सा मुंह बनाते हुए कहने लगी।
सॉरी से दर्द थोड़े ही कम हो जायेगा, मैंने वैसे ही दर्द भरा चेहरा बनाये हुए उसकी तरफ देखते हुए कहा।
मुझे सच में बहुत दर्द हो रहा था, और दर्द से मेरा गला रूंध गया था, जिससे बोलने में दिक्कत हुई थी।
सोनल मेरी टी-शर्ट को उपर करके जहां उसने मुक्का मारा था वहां देखने लगी और फिर अचानक ही वो वहां पर बेतहाशा चूमने लगी। वो कभी अपने मुलायम नरम होंठ चोट वाली जगह पे फिराती तो कभी अपनी जीभ से सहलाने लगती।
कमाल ही हुआ ना, उसके इस तरह चूमने से मेरा दर्द कम होने लगा और मुझे मजा आने लगा।
थोड़ी ही देर में मेरा दर्द गायब हो गया, पर मैं ऐसे ही दर्द की एक्टिंग करता रहा और वो मुझे कमर में चूमती रही। उसकी हाथ भी उपर की तरफ मेरी कमर को सहला रहे थे। अचानक मुझे अपनी कमर में कुछ चुभता हुआ सा महसूस हुआ, मैं तुरंत समझ गया कि वो अपनी चूचियों को मेरी कमर में रगड़ रही है, पर मुझे कोई भी कपड़ा महसूस नहीं हो रहा था, सीधे जिस्म से जिस्म का स्पर्श महसूस हो रहा था।
 
हम उनके घर के हॉल में थे और आंटी के बेडरूम में से वहां दिखाई नहंी देता था और बाहर से तो कुछ दिखाई ही नहीं दे सकता था।
मैं समझ गया कि उसने अपने बूब्स बाहर निकाल लिये हैं और मेरी कमर में चोट वाली जगह पर सहला रही है। अब तो मैं और भी ज्यादा दर्द की एक्टिंग करने लगा ताकि वो इसी तरह सहलाती रहे, पर कहते हैं ना कि ज्यादा एक्टिंग नुकसान दायक ही होती है, और वही मेरे साथ भी हुआ। मेरे इस तरह ज्यादा कराहने से वो समझ गई कि अब मुझे दर्द नहीं हो रहा और मैं मजे लेने के लिए दर्द होने की एक्टिंग कर रहा हूं। उसने अपने उभार मेरी छाती में से हटा लिए।
मैंने सोचा शायद अब कुछ और मजेदार होने वाला है, पर जब कुछ देर तक उसके शरीर का कोई हिस्सा मेरे शरीर से टच नहीं हुआ तो मैंने पिछे मुड़कर देखा तो वो अपनी कमर में हाथ रखे खड़ी थी और मुस्करा रही थी। मैंने उसकी तरफ देखते ही फिर से आहहहह, आहहह बहुत दर्द हो रहा है, एक्टिंग करनी शुरू कर दी।
उसने मेरी बाजू पर एक घुस्सा जमा दिया, पर अबकी बार उसने अंगूठी को निकाल लिया था। मैं हंसने लगा और वो भी हंसने लगी। वो अंगूठी को अंदर रख आई और हम उपर आ गये। पूनम छत पर ही बैठी थी।
खाना ठंडा हो जायेगा, खा लो, पूनम ने कुर्सी पर से खड़े होते हुए कहा।
वो तो मैं तुरंत ही गर्म कर दूंगा, ठंडा होने की टेंशन मत लो, मैंने उसकी तरफ आंख मारते हुए कहा।
मेरी बात का मतलब समझते ही वो शरमा गई और अपनी नजरें नीचे झुका ली।

हम अंदर आ गये और पूनम ने तीन थालियों में खाना लगा दिया। बेड पर बैठकर हम खाना खाने लगे। मैंने रोटी का कौर तोड़कर सब्जी लगाई तो मेरी उंगली सब्जी में चली गई, सब्जी काफी गर्म थी, जिससे उंगली जल गई, पर मैंने किसी को आभास नहीं होने दिया और फुंक मार मारकर खाने लगा। जैसे ही सोनल ने सब्जी लगाने के लिए रोटी का कौर कटोरी में डाला, तो अब उंगली तो सब्जी में जानी ही थी, वो जोर से चिल्लाई, आहहहहहहहहहहहहह!
उसकी आहहहहहहहहह सुनकर मेरी हंसी छूट गई। उसके हाथ से रोटी का कौर सब्जी में ही गिर गया था, और वो अपनी उंगली को मुंह में लिए चूस रही थी। मैंने उसका हाथ पकड़ा और देखा तो उसकी उगंली पर फफोला हो गया था, जलने से। मैं उठा और फर्स्ट ऐड बॉक्स ले आया और उसकी उंगली पर दवाई लगा दी और फिर से खाना खाने बैठ गया। सोनल ने अपनी थाली मेरी तरफ सरका दी। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने मुंह बनाते हुए कहा।
सोनल: आप खिलाओं ना, मेरा हाथ जल रहा है।
मैं: तो मेरे हाथ क्या लोहे के हैं, जो जलेंगे नहीं।
मेरी बात सुनकर सोनल ने मुंह फुला लिया और एक तरफ होकर बैठ गई। मैंने पूनम की तरफ देखा वो मुस्करा रही थी। फिर मैंने एक कौर लेकर सब्जी लगाई और सोनल के मुंह के सामने कर दिया। सोनल खुश हो गई और खाने के लिए मुंह खोलकर आगे बढ़ा दिया, पर उसके मुंह में जाने से पहले ही मैंने वो कौर खुद ही खा लिया। पूनम की हंसी छूट गई और सोनल फिर से मुंह फुलाकर बैठ गई।
मैंने फिर से एक कौर तोड़ा और उसके मुंह के सामने कर दिया, उसने मेरी तरफ देखा, पर ऐसे ही मुंह फुलाए बैठी रही।
मैं: अच्छा तो चल, अबकी बार नहीं करूंगा, चल खा ले, पक्का नहीं करूंगा अब।
और सोनल ने मुंह खोलकर आगे बढ़ाया तो मैंने फिर से वैसे ही किया और खुद ही खा गया। अबकी बार तो सोनल गुस्सा हो गई और बेड पर से उठकर जाने लगी।
मैंने उसे पकड़ कर बैठाया और माफी मांगते हुए कहा कि अब बिल्कुल नहीं, चलो अब खा लो और एक कौर को सब्जी लगाकर उसके मुंह के सामने कर दिया। जैसे ही उसने मुंह खोला तो मैंने अबकी बार भी खुद ही खा लिया। सोनल ने मेरे कंधे पर एक मुक्का मारा और एक साइड में होकर बैठ गई और रोने की एक्टिंग करने लगी।
मैं: लो यार, मुक्का तो मुझे लगा है, और रो तुम रही हो, ये क्या बात हुई?
मुझसे बात मत करो, सोनल ने झल्लाते हुए कहा।
मैंने एक कौर पर सब्जी लगाई और अपनी जगह से उठकर सोनल के पास आया और उसके मुंह के सामने कौर कर दिया। सोनल ने एकबार मेरी तरफ देखा और फिर अपना मुंह खोला, पर आगे बढ़ाने से पहले अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़ा और फिर अपना मुंह आगे बढ़ाकर कौर सीधा मुंह में। मेरी उंगली भी थोड़ी सी उसके मुंह में चली गई और उसने उंगली को हलका सा काट लिया।
मैं नहीं खिलाता तुझे, एक तो खाना खिलाओ, और उपर से उंगली भी काटवाओ, मैंने कहा।
ओके, ओके, अब नहीं काटूंगी, प्लीज खिलाओ न, बहुत स्वादिष्ट लग रहा है तुम्हारे हाथों से, सोनल ने चहकते हुए कहा।
फिर मैंने एक कौर तोड़कर उसको खिलाया और फिर एक खुद खा लिया, इस तरह से हमने खाना शुरू किया। पूनम ने भी खाना शुरू कर दिया। खाने के आखिर में एक रोटी मैंने पूनम को भी खिलाई और सोनल ने मुझे और पूनम को व पूनम ने मुझे व सोनल को खिलाई। दोनों के हाथ से खाना खाकर बहुत ही मजा आया।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--28
गतांक से आगे ...........
खाना खाने के बाद मैंने बर्तनों को उठाकर रसोई में रख दिया। तभी पूनम का सैल बजने लगा।
मर गई, मम्मी का फोन है, मैं अभी आई, पूनम ने उठते हुए कहा और कॉल पिक करके बाहर चली गई।
पूनम के जाते ही सोनल ने मुझे बेड पर धक्का दिया और मेरे उपर लेट कर मेरी आंखों में आंखें उालकर प्यार से देखने लगी। उसके उभार मेरी छाती में पिचक गये थे। वो लेटे हुए अपने पैरों को मेरे पैरों पे रगड़ रही थी और अपने हाथों से मेरे गालों को सहला रही थी। मैंने अपने हाथ उसकी कमर में लपेट दिए और सहलाने लगा। धीरे धीरे मैं उसके कुल्हों की तरफ बढ़ गया और उसके कुल्हों को पकड़कर भींच दिया। सोनल के मुंह से एक आह निकली और वो पागलों की तरह कभी मेरे होठों को तो कभी मेरे गालों को चूमने लगी।

मैंने भी उसके कुल्हों को जोर जोर से मसलना शुरू कर दिया। मैनें उसकी कुर्ती को उपर सरका दिया और सलवार के उपर से उसके कुल्हों को मसलने लगा। सलवार कुछ ऐसी थी कि ऐसा लग रहा था कि मैंरे हाथ उसके नंगे कुल्हों पर हैं।
सोनल जोर जोर से मेरे होंठों को चूसने लगी जैसे कि आज इनका सारा रस निचोड के ही रहेगी। मैंने उसके सलवार के नाड़े के हाथ हाथ रखे और सीधे सलवार के अंदर घुसा दिये, उसके ठंडे ठंडे कुल्हों का स्पर्श बहुत ही आनंदकारी था, मैं उसके कुल्हों को मसलने लगा और अपनी उंगली से उसकी खाई को सहलाने लगा। मैंने अपनी एक उंगली उसके पिछे के छेद पर टिका दी और सहलाने लगा। सोनल का शरीर में एक आनंद की लहर दौड़ गई और उसका शरीर ऐंठने लगा। वो मेरे होंठों को चूसते हुए अपने उभारों को मेरी छाती पर रगड़ने लगी। मेरे गालों को उसने अपनी हथेलियों में पकडा हुआ था और सहला रही थी। धीरे धीरे उसकी जांघें मेरी जांघों पर मचलने लगी और वो मेरे उपर लेटी हुई सिसकारियां लेने लगी। उसने अपने चेहरे को उपर उठाया और मेरी आंखों में देखा और फिर से चेहरे को नीचे किया और मेरी कानों के नीचे वाले हिस्से को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगी। मुझे एकदम करंट सा लगा और मेरे हाथों की हरकत उसके कुल्हों पर बढ़ गई। उसके हाथ मेरे बालों से खेल रहे थे। शॉर्ट के अंदर मेरा लिंग तनकर उसकी योनि के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था। अचानक वो उठी और मेरी शॉर्ट को नीचे सरका दिया और फिर अपनी सलवार का नाड़ा खोलकर उसे भी पेंटी के साथ घुटनों से नीचे सरका दिया और अपनी कुर्ती को भी निकाल दिया। कुर्ती के निकालते हुए उसके दूधियां उभार मेरे सामने प्रकट हो गये, उसने ब्रा नहीं पहनी थी, एकदम तने हुए निप्पल और धीरे धीरे फड़कती हुई चूचियां, बहुत ही दिलकश लग रही थी। मैंने तुरंत अपने हाथों को हरकत दी और उसके जोबन का मर्दन करने लगा। सोनल ने मेरे हाथ एक तरफ झटक दिए और मेरी टी-शर्ट को उतारने लगी। मैंने अपनी कमर को उपर उठा दिया और फिर सिर को उपर उठाकर टी-शर्ट को निकालने में मदद की।
टी-शर्ट उतारते ही सोनल वापिस मेरे उपर लेट गई। मेरे लिंग उसके पेट में धंस गया। उसने अपने हाथ को नीचे लेजाकर मेरे लिंग को अपनी योनि की फांकों के बीच में इस तरह सैट किया कि मेरे लिंग का सुपाड़ा उसकी योनि के दाने को रगड़ने लगा और मेरी लिंग की जड़ में उसकी योनि का नीचे वाला भाग टच हो रहा था।
उसने अपने हाथ मेरे बालों को सहलाने में व्यस्त कर दिये और अपने होठों को मेरे होठों का रसपान करने में, और अपनी योनि को मेरे लिंग पर रगड़ने लगी। इस तरह रगड़ने से मुझे भी काफी मजा आ रहा था और मैंने भी नीचे से अपने कुल्हों को हरकत देनी शुरू कर दी। सोनल की योनि से निकलता रस मेरे लिंग पर गिरकर उसे भिगो रहा था। सोनल अपनी योनि को मेरे लिंग पर रगड़ रही थी और अपनी चूचियों को मेरी छाती पर। उसके कडे निप्पल मेरी छाती में चुभ रहे थे और गुदगुदी कर रहे थे।
मेरे हाथ सोनल की कमर और कुल्हों का मर्दन कर रहे थे। सोनल ने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल और मेरी जीभ पे फिराने लगी। मैंने भी अपनी जीभ को बाहर की तरफ धकेल दिया, सोनल तो जैसे यही चाहती हो, उसने अपने होंठ खोले और मेरी जीभ को दबोच लिया और चूसने लगी। जब वो चूसती तो मेरा रस उसके मुंह में चला जाता और जब वो चूसना बंद करती तो उसका और मेरा मिला जुला रस वापिस मेरे मुंह में आ जाता।
जीभ को मुंह से बाहर निकले निकले काफी देर हो गई थी, जिससे मेरी जीभ की जड़ में दर्द होने लगा था, इसलिए मैंने अपनी जीभ को वापिस अंदर कर दिया। सोनल ने मेरी तरफ खा जाने वाली नजरों से देखा और फिर मेरे होंठों को चूसने लगी।
 
अचानक मैंने अपने कुल्हों को कुछ ज्यादा उपर उठा दिया जिससे सोनल के कुल्हें भी उपर उठ गई और मेरा लिंग उसकी योनि की फांकों और फैलाता हुआ दब गया। फिर मैं एकदम से नीचे हो गया जिससे एक पल के लिए मेरा लिंग उसकी योनि से दूर हो गया और जैसे ही वो नीचे को आई तो मेरा लिंग सीधा उसकी योनि के द्वार पर टकराया और उसकी योनि द्वार को खोलता हुआ अंदर घुस गया। सोनल और मेरे मुंह से एक मादक आह निकली और मैंने अपने कुल्हों को थोड़ा सा उपर उठाकर अपने लिंग को पूरा उसकी योनि में घुसा दिया। सोनल अपने कुल्हों को उठाकर मेरे लिंग का मर्दन करने लगी।
अब उसके होंठ मेरे होंठों पर तो थे पर वो उन्हें चूस नहीं रही थी, उसका सारा धयान मेरे लिंग को ज्यादा से ज्यादा मर्दन करने पर था। उसके हाथ मेरे बालों में रूके हुए थे। मैंने भी नीचे से कुल्हें उठाकर उसका साथ देना शुरू कर दिया। नीचे से मेरे धक्कों के कारण लिंग उसकी योनि के आखिरी छोर तक जाकर उसके गर्भाश्य से टकरा रहा था। हरेक टक्कर में सोनल का शरीर ऐंठ जाता और उसके मुंह से मादक सिसकारी निकलकर मेरे होंठें के बीच गुम हो जाती।
अचानक सोनल ने जोर जोर से अपनी जांघों को उछालना शुरू कर दिया और उसका शरीर अकड़ गया। उसके होंठ मेरे होंठों पर भींच गये और उसके हाथ मेरे सिर पर खिंच गये। उसकी योनि ने मेरे लिंग को भिंच लिया जैसे उसका रस निचोउ़ने की कोशिश कर रही हो, सोनल का गर्म गर्म रस मेरे लिंग को भिगोता हुआ मेरी जांघों पर गिरने लगा। सोनल का शरीर कुछ ढीला होता जा रहा था, पर उसकी योनि उसी तरह से मेरे लिंग को कसे हुए थी। मेरा लिंग उस कसाव को सहन नहीं कर पाया और सोनल की योनि में अपने रस की पिचकारियां छोड़नी शुरू कर दी। मेरे रस को महसूस करते ही सोनल का शरीर फिर से अकड़ गया और उसकी योनि का कसाव बढ़ गया। मुझे लगा कि जैसे मेरा लिंग बहुत ही टाइट योनि के अंदर फंसा हुआ है। मेरे लिंग ने कुछ ज्यादा ही रस उगल दिया था।
धीरे धीरे सोनल शांत होती हुई मेरे उपर लेट गई और मैं भी झडने के बाद अपनी आंखें बंद करके लेट गया। आज मैंने कोई मेहनत नहीं की थी, परन्तु फिर भी ऐसा लग रहा था कि मैं बहुत जयादा थक गया हूं।
हमारे पैरों की लड़ाई में सलवार और शॉर्ट कब पैरों से अलग हुई पता ही नहीं चला। सोनल वैसे ही मेरे उपर लेटे हुए मेरे बालों को सहलाती रही और इसी तरह लेटे हुए हम नींद के आगोश में समा गए।

ठनननननन ठनननन टनननन टिनननननन टूननननननन ठननननन टननटनन टननठनननठननन की आवाज सुनकर मेरी आंख खुली, सोनल बेड पर नहीं थी।
मैं (लेटे लेटे ही आंख मलते हुए): क्या हुआ, ये क्या गिरा दिया।
सोनल (रसोई में से): उंहहह, गिलास गिर गया।
मैं: उंहहहूहहूहहहहहहहह, एक गिलास पानी मुझे भी देना।
फिर फ्रिज खुलने की आवाज आई और गिलास में पानी डलने की ओर फिर वापिस से फ्रिज बंद होने की।
लीजिए जी, सोनल ने पानी का गिलास मेरी तरफ बढ़ा दिया।
मेरी नजरें उसके नंगे योवन पर ही गढ़ी हुई थी, मैंने गिलास लिया और पानी पीते हुए उसके पहले से मोटे नजर आ रहे उभारों को देखने लगा। सोनल ने एक अंगड़ाई ली और उसके हाथों के साथ साथ उसके उभार भी उपर की तरफ चल दिये।
इतना सैक्सी सीन देखकर मेरे लिंग ने अंगड़ाई ली और उछल कर मेरे पेट से जा टकराया। सोनल ने जैसे ही अंगड़ाई लेकर नीचे को हाथ लाई, तो उसका चेहरा भी नीचे हुआ और उसकी नजर मेरे लिंग पर पड़ी।
वो बेड पर बैठ गई और लिंग को हाथ में पकड़ लिया।
सोनल: इस बदमाश को अब भी चैन नहीं है, कैसे घूर-घूर कर देख रहा है मुझे।
सोनल का ठंडा हाथ मेरे लिंग पर पड़ते ही मेरे शरीर में झुरझरी दौड़ गई और मेरा लिंग और भी ज्यादा अकड़ गया। सोनल ने सुपाड़े पर से चमड़ी को हटाना चाहा, परन्तु हमारे रस से वो चिपक सी गई थी, जिससे मुझे थोड़ा सा दर्द हुआ और मेरे मुंह से आह निकल गई। मैंने पानी पीकर गिलास साइड में रख दिया।
जैसे ही मैंने गिलास को रखा सोनल ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे उठाने लगी। मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा तो उसने मुझे आंखों से उठने का ऑर्डर थमा दिया।
जैसे ही मैंने उठने के लिए नीचे की तरफ अपना कदम बढ़ाया, मेरी जांघों पर जमी पपड़ी के कारण खाल में खिंचाव हुआ और दर्द का आभास हुआ।
मैंने मुंह से एक आहह निकाली और वैसे ही रूक गया। सोनल ने मेरा हाथ छोउ़ा और बेड पर झुककर मेरे पिछे वाले छेद में उंगली डालने लगी। मैं तुरत उठकर खड़ा हो गया।
सोनल: शाबाश, पहले उठ जाते तो, मेरे को परेशान तो नहीं होना पड़ता।
मैं मुस्करा दिया और सोनल मुझे खींचते हुए बाथरूम में ले गई। बाथरूम में जाते ही उसने शॉवर ऑन कर दिया और हम शॉवर के नीचे खडे होकर नहाने लगे। सोनल ने रगउ़ रगड़ कर मेरी जांघों और लिंग को साफ किया और फिर मेरे पूरे शरीर पर मल मल कर साबुन लगाने लगी। साबुन लगाकर उसने मुझे वापिस शॉवर के नीचे खड़ा कर दिया और शरीर पर से साबुन साफ करने लगी। मुझे नहलाने के बाद उसने मेरी तरफ साबुन कर दिया। मैंने साबुन लिया और उसके बूब्स पर मलने लगा। उसके बूब्स पर साबुन मलने में बहुत ही मजा आ रहा था, इसलिए मैं लगातार उसके बूब्स पर ही साबुन लगाये जा रहा था।
और भी जगह हैं मेरे बदन में साबुन लगाने के लिए, सोनल ने मेरे हाथ को नीचे धकाते हुए कहा।
मेरा हाथ फिसल कर उसके मुलायम पेट पर आ गया, मैं उसके पेट पर साबुन लगाने लगा। और धीरे धीरे उसकी योनि तक आ गया। मैंने उसकी योनि पर साबुन लगाया और फिर साबुन को दूसरे हाथ में पकड़ा और उसकी योनि को मसलने लगा। सोनल ने मेरे कंधे पर अपने हाथ रख दिये और मुझे नीचे दबाने लगी। मैं नीचे बैठ गया और सोनल को शॉवर के नीचे कर दिया। शॉवर के नीचे आने से उसकी योनि पर लगा साबुन साफ हो गया और मेरा हाथ वहां पर घर्षण के साथ फिरने लगा। सोनल की योनि ने पानी निकालना शुरू कर दिया था। सोनल मेरे सिर पर पिछे से दबाव बना रही थी, ताकि मैं अपना मुंह उसकी योनि पर लगा दूं, मैंने भी उसको निराश नहीं किया और उसकी नाभि पर अपने होंठ टिका दिये।
मेरे होंठ लगते ही उसके शरीर में तरंग सी उठी और उसके मुंह के द्वारा आहहहहहह की आवाज के रूप में बाहर निकली। मैं उसकी नाभि में जीभ फिराने लगा, सोनल का पेट फुदकने लगा। मैंने अपने होंठ उसके नाभि के चारों तरफ टिका दिये और अपनी जीभ उसकी नाभि में डालकर अंदर की तरफ हवा खींचने लगा, सोनल पागल हो गई और मेरे सिर को नीचे दबाने लगी। उसके दबाने के कारण मैं धीरे धीरे नीचे आता गया और अपने होंठ सोनल की योनि से टपकते रस के द्वार पर टिका दिया और एक जोर की सुकिंग की। मेरी सुकिंग के साथ ही सोनल का रस और जोर से बहने लगा और वो मेरे सिर को अपनी योनि पर दबाने लगी। मैंने अपनी जीभ निकाली और उसकी योनि में घुसा दी। सोनल तो एकदम से पागल हो गई और उसके हाथों का दबाव मेरे सिर पर बढ़ गया, उसका शरीर अकड़ गया और पैर कांपने लगे। वो इतना मजा बर्दाश्त न कर सकी और अपने पेट को मेरे सिर पर रखते हुए नीचे को झुक गई और जोर जोर की सांसे लेने लगी। उसके लब मेरी पीठ से जुड़ गये और वो बुरी तरह से अपने लबों को मेरी पीठ पर रगड़ने लगी।
उसने मेरी कमर को अपने हाथों से कस के पकड़ा हुआ था। उसकी योनि से निकलता रस सीधा मेरे मुंह में पहुंच रहा था। बहुत ही जायकेदार स्वाद था। मैं उसकी योनि से रस खींचता रहा और वो अपना रस बहाती रही। मेरे द्वारा खींचे जाने से बहुत सारा रस निकल रहा था, और जब सोनल की बर्दाश्त के बाहर हो गया तो वो उठी और मेरे सिर को पिछे धकेल कर खुद भी पिछे हो गई।
उसकी टांगे कांप रही थी, उसने नल को पकड़ लिया और दीवार के सहारे खडे होकर हांफने लगी। कुछ देर बाद उसकी सांसे नोर्मल हुई तो उसने अपनी आंखें खोली और मेरी तरफ देखा। मैं शॉवर के नीचे फर्श आराम से बैठा हुआ था और उसे ही देख रहा था।
सोनल ने मेरी तरफ बहुत ही प्यार से देखा, उसकी आंखे आंधी खुली थी और आधी बंद। उसका पेट अभी भी उछल रहा था और उसकी टांगे कांप रही थी। उसने अपने कांपते होंठों को जैसे ही खोला तो वो लरजकर वापिस बंद हो गए।
 
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