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अब परवेज़, वसीम और शाज़िया तीनो के दिमाग में वही वीडियो चल रहा था जिसके चलते राज
शाज़िया को ब्लैकमेल कर रहा था।
सब लोग इस बात की भी चिंता कर रहे थे कि कैसे अपने मम्मी पापा को शर्मा के चँगुल से
मुक्त कराया जाए जिसने अगले 20 सालों के लिए उन्हें अपना गुलाम बना रखा था।
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शाम को सब लोग डिनर के बाद एक बार फिर से परवेज़ के कमरे में इकट्ठे हुए और इस बारे
में फिर से चर्चा करने लगे
वसीम : भाई मेरे दिमाग मे एक आईडिया आया है
परवेज़ : क्या आईडिया है बता तो जरा
वसीम : राज वर्मा की बहन सोनाली वर्मा है वह ट्यूशन में मेरे साथ पढ़ती है
परवेज़ और शाज़िया ( हैरानी से) : अच्छा, सच कह रहा है तू। हमे तो यह पता ही नही था
वसीम : मुझे पता नही यह हो पायेगा या नही लेकिन अगर हम किसी तरह से सोनाली को
अपने जाल में फंसा लें तो हमारी काफी प्रॉब्लम खत्म हो जाएगी
शाज़िया : आईडिया तो बहुत बढ़िया है लेकिन यह सब होगा कैसे ? तुम्हारी तो उससे दोस्ती हो
ही गयी होगी
वसीम : नही, अभी तो नही है लेकिन मैं कल से इस कोशिश में लग जाता हूँ कि किसी तरह
से वह मेरे जाल में फंस जाए
वसीम : ठीक है, अगर जरूरत पड़े तो उससे शादी के लिए भी हाँ कह देना
परवेज़ : लेकिन शादी तो तेरी पहले होनी चाहिए भाई। तुम मुझसे बड़े हो
वसीम : अरे मैं भी कर लूंगा। तू एक बार उसे फंसा कर इस घर मे तो लेकर आ।
परवेज़ : मैं कुछ समझा नही तेरी बात
वसीम : देख वह तेरी वाइफ बनकर आएगी। उसके बाद तू उसे तलाक दे देना। फिर मैं
उसका हलाला करने के कुछ दिन बाद तलाक दे दूंगा और वह फिर से तेरी वाइफ बन
जाएगी । यह सब तो हमारे यहाँ चलता ही है। मैं जिस लड़की से शादी करूँगा, उसका
हलाला तुझसे भी करवाऊंगा। लड़कियां हमारे यहाँ मौज़ मस्ती का सामान होती हैं और बीच
बीच मे उन्हें तलाक देते रहो तो वे वैसे भी अपने पति के कंट्रो ल में रहती हैं कि पता नही कब
पति गुस्सा होकर उन्हें तलाक दे दे और उन्हें फिर हलाला करवाना पड़े
शाज़िया : आप लोगों ने इतनी प्लानिंग तो कर ली लेकिन वह हिन्दू लड़की है । क्या वह और
उसके घर वाले इस तरह की शादी के लिए तैयार हो जाएंगे।
परवेज़ : वह सब तुम लोग मेरे ऊपर छोड़ दो। मैं कुछ न कुछ चक्कर चलाता हूँ।
शेष अगले भाग में..
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शाज़िया को ब्लैकमेल कर रहा था।
सब लोग इस बात की भी चिंता कर रहे थे कि कैसे अपने मम्मी पापा को शर्मा के चँगुल से
मुक्त कराया जाए जिसने अगले 20 सालों के लिए उन्हें अपना गुलाम बना रखा था।
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शाम को सब लोग डिनर के बाद एक बार फिर से परवेज़ के कमरे में इकट्ठे हुए और इस बारे
में फिर से चर्चा करने लगे
वसीम : भाई मेरे दिमाग मे एक आईडिया आया है
परवेज़ : क्या आईडिया है बता तो जरा
वसीम : राज वर्मा की बहन सोनाली वर्मा है वह ट्यूशन में मेरे साथ पढ़ती है
परवेज़ और शाज़िया ( हैरानी से) : अच्छा, सच कह रहा है तू। हमे तो यह पता ही नही था
वसीम : मुझे पता नही यह हो पायेगा या नही लेकिन अगर हम किसी तरह से सोनाली को
अपने जाल में फंसा लें तो हमारी काफी प्रॉब्लम खत्म हो जाएगी
शाज़िया : आईडिया तो बहुत बढ़िया है लेकिन यह सब होगा कैसे ? तुम्हारी तो उससे दोस्ती हो
ही गयी होगी
वसीम : नही, अभी तो नही है लेकिन मैं कल से इस कोशिश में लग जाता हूँ कि किसी तरह
से वह मेरे जाल में फंस जाए
वसीम : ठीक है, अगर जरूरत पड़े तो उससे शादी के लिए भी हाँ कह देना
परवेज़ : लेकिन शादी तो तेरी पहले होनी चाहिए भाई। तुम मुझसे बड़े हो
वसीम : अरे मैं भी कर लूंगा। तू एक बार उसे फंसा कर इस घर मे तो लेकर आ।
परवेज़ : मैं कुछ समझा नही तेरी बात
वसीम : देख वह तेरी वाइफ बनकर आएगी। उसके बाद तू उसे तलाक दे देना। फिर मैं
उसका हलाला करने के कुछ दिन बाद तलाक दे दूंगा और वह फिर से तेरी वाइफ बन
जाएगी । यह सब तो हमारे यहाँ चलता ही है। मैं जिस लड़की से शादी करूँगा, उसका
हलाला तुझसे भी करवाऊंगा। लड़कियां हमारे यहाँ मौज़ मस्ती का सामान होती हैं और बीच
बीच मे उन्हें तलाक देते रहो तो वे वैसे भी अपने पति के कंट्रो ल में रहती हैं कि पता नही कब
पति गुस्सा होकर उन्हें तलाक दे दे और उन्हें फिर हलाला करवाना पड़े
शाज़िया : आप लोगों ने इतनी प्लानिंग तो कर ली लेकिन वह हिन्दू लड़की है । क्या वह और
उसके घर वाले इस तरह की शादी के लिए तैयार हो जाएंगे।
परवेज़ : वह सब तुम लोग मेरे ऊपर छोड़ दो। मैं कुछ न कुछ चक्कर चलाता हूँ।
शेष अगले भाग में..
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