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बातों बातों में मेरी बीबी ने मुझे इशारा किया की मैं चाहूँ तो डॉली जी को फाँसने की की कोशिश कर सकता हूँ। उसका रास्ता भी उसने बता दिया की मैं इस समय दरम्यान डॉली को ड्राइविंग सिखाने के बहाने अपना मकसद साध सकता था। मुझे मेरी बीबी पर गर्व हुआ। जो उस दिन तक मुझे किसी और औरत को ताड़ने के लिए टोकती रहती थी, वह मुझे गैर औरत को फाँसने का रास्ता दिखा रही थी। ज्योति की बात सुन कर मुझे भी जोश आया।
मैंने कहा, “मेरी बात छोडो, सुनो मैं एक बड़ी ही जरुरी बात कह रहा हूँ। सेठी साहब तुम्हारे घर आ रहे हैं। यह देखना की उनका सही तरीके से स्वागत हो और जयपुर से तुम्हारे गाँव का रास्ता बड़ी मुश्किल से आधे से पौने घंटे का है तो उनको जयपुर में जा कर होटल में रुकने के बजाये अगर अपने घर में रखोगे तो वह सुबह निकल कर जयपुर जा कर शाम को काम निपटा कर आपके गाँव वापस आराम से आ सकते हैं। तुम्हारा घर काफी बड़ा है और कई कमरे वैसे ही खाली पड़े हैं..
एक बात और, सेठी साहब की आवभगत का जिम्मा तुम खुद उठाना ताकि सेठी साहब को कोई दिक्कत ना हो। और हाँ अगर सेठी साहब रुक जाते हैं तो उनको ऊपर वाली मंजिल के जो दो अलग कमरे हैं उनमें से एक कमरा देना जिसमें मैं ठहरा था। तुम और मुन्नू उसके साथवाले दूसरे कमरे में रुकना जिससे तुम रातमें भी अगर सेठी साहब को किसी चीज़ की जरुरत पड़े तो बिना किसी की नजर में आये सेठी साहब के कमरे में जा सकती हो। ड्राइवर को घर के आँगन में जो सर्वेंट का कमरा है उसमें रखना।”
मेरी बीबी ने मेरी और टेढ़ी नजर से देखा। वह शायद समझ गयी थी की मैं चाहता था की इस ट्रिप में वह सेठी साहब से चुदे। मुझे डर लगा की कहीं ज्योति मेरी बात सुन कर भड़क ना जाए। पर ज्योति चुप रही। शायद मेरा सुझाव ज्योति को अच्छा लगा। ज्योति ने अपने भाई का फ़ोन मिलाया और सेठी साहब के साथ आने के बारे में बताया और जो भी बात मैंने कही थी सब भाई को कही। ज्योति ने भाई को ऊपर के दोनों कमरे भी तैयार करवाने को कहा..
भाई यह सुन कर बड़े खुश हुए। सेठी साहब ने मुश्किल वक्त में जो बड़ी मदद की थी उसके बारे में ज्योति ने भाई को सब कुछ बता दिया था। भाई ने ज्योति और मुझे भरोसा दिलाया की वह सेठी साहब की आवभगत में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और उनको रोकने की पूरी कोशिश करेंगे और ऊपर वाले कमरे को अच्छी तरह सजा कर रखेंगे।
उस रात को ज्योति ने मुझे मुझसे ऐसी चुदाई करवाई की मैं क्या कहूं? वह बार बार मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे चोद रही थी। सबसे पहले तो ज्योति ने मेरा लण्ड इतनी शिद्द्त से चूसा की मैं अगर सही समय पर ज्योति के मुंह से मेरा लण्ड निकाल नहीं लेता तो मैं उसके मुंह में ही झड़ जाता।
फिर वह बार बार झुक कर मेरा लण्ड चूमती और बार बार यह कहना नहीं चुकती की वह मुझसे बहुत ज्यादा प्यार करती है और वह मुझे पूरी जिंदगी साथ देगी। जब मं उसको चोद रहा था तो वह बार बार अपने करारे स्तनोँ को मुझसे मसल ने के लिए कहती और उस रात करीब पूरी चुदाई के दरम्यान वह मेरे होंठों को चूमती ही रही।
मैं उसका आवेग और उसकी उत्तेजना समझ सकता था। मैंने उसे सेठी साहब का स्वागत करने का जो रास्ता दिखाया था उसके द्वारा मैंने उसे अपरोक्ष रूप से रात को बिना किसी की नजर में आये सेठी साहब के कमरे में जाने के लिए कह दिया था, क्यूंकि उनके घर के ऊपर के दोनों कमरे आपस में बाथरूम के द्वारा जुड़े हुए थे।
दोनों कमरों के बीच में एक बाथरूम था। मैंने अपनी तरफ से बीबी को इशारा कर दिया की अगर सेठी साहब उनके वहाँ रुक गए तो रात को बिना किसी को पता लगे वह दोनों एक दूसरे के कमरे में बाथरूम के रास्ते जा सकते थे।
दूसरे दिन जल्दी सुबह ही ज्योति सेठी साहब के साथ कार में निकलने के लिए तैयार हो गयी थी पर सेठी साहब ने आकर माफ़ी मांगते हुए कहा की उन्हें कुछ अर्जेंट काम से ऑफिस जाना पडेगा और उसके बाद दोपहर को ही वह निकल पाएंगे।
करीब दो बजे सेठी साहब ऑफिस से आये और ढाई बजे कार में ज्योति के मायके जाने के लिए निकल सके। मुन्ना ने जिद पकड़ी की वह आगे की सीट पर ही बैठेगा। इसके कारण आगे की सीट पर मुन्ना और ड्राइवर और पीछे ज्योति और सेठी साहब बैठे। दिल्ली से ज्योति के मायके का रास्ता करीब ६ घंटे का था।
पढ़ते रखिये.. कहानी आगे जारी रहेगी!
मैंने कहा, “मेरी बात छोडो, सुनो मैं एक बड़ी ही जरुरी बात कह रहा हूँ। सेठी साहब तुम्हारे घर आ रहे हैं। यह देखना की उनका सही तरीके से स्वागत हो और जयपुर से तुम्हारे गाँव का रास्ता बड़ी मुश्किल से आधे से पौने घंटे का है तो उनको जयपुर में जा कर होटल में रुकने के बजाये अगर अपने घर में रखोगे तो वह सुबह निकल कर जयपुर जा कर शाम को काम निपटा कर आपके गाँव वापस आराम से आ सकते हैं। तुम्हारा घर काफी बड़ा है और कई कमरे वैसे ही खाली पड़े हैं..
एक बात और, सेठी साहब की आवभगत का जिम्मा तुम खुद उठाना ताकि सेठी साहब को कोई दिक्कत ना हो। और हाँ अगर सेठी साहब रुक जाते हैं तो उनको ऊपर वाली मंजिल के जो दो अलग कमरे हैं उनमें से एक कमरा देना जिसमें मैं ठहरा था। तुम और मुन्नू उसके साथवाले दूसरे कमरे में रुकना जिससे तुम रातमें भी अगर सेठी साहब को किसी चीज़ की जरुरत पड़े तो बिना किसी की नजर में आये सेठी साहब के कमरे में जा सकती हो। ड्राइवर को घर के आँगन में जो सर्वेंट का कमरा है उसमें रखना।”
मेरी बीबी ने मेरी और टेढ़ी नजर से देखा। वह शायद समझ गयी थी की मैं चाहता था की इस ट्रिप में वह सेठी साहब से चुदे। मुझे डर लगा की कहीं ज्योति मेरी बात सुन कर भड़क ना जाए। पर ज्योति चुप रही। शायद मेरा सुझाव ज्योति को अच्छा लगा। ज्योति ने अपने भाई का फ़ोन मिलाया और सेठी साहब के साथ आने के बारे में बताया और जो भी बात मैंने कही थी सब भाई को कही। ज्योति ने भाई को ऊपर के दोनों कमरे भी तैयार करवाने को कहा..
भाई यह सुन कर बड़े खुश हुए। सेठी साहब ने मुश्किल वक्त में जो बड़ी मदद की थी उसके बारे में ज्योति ने भाई को सब कुछ बता दिया था। भाई ने ज्योति और मुझे भरोसा दिलाया की वह सेठी साहब की आवभगत में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और उनको रोकने की पूरी कोशिश करेंगे और ऊपर वाले कमरे को अच्छी तरह सजा कर रखेंगे।
उस रात को ज्योति ने मुझे मुझसे ऐसी चुदाई करवाई की मैं क्या कहूं? वह बार बार मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे चोद रही थी। सबसे पहले तो ज्योति ने मेरा लण्ड इतनी शिद्द्त से चूसा की मैं अगर सही समय पर ज्योति के मुंह से मेरा लण्ड निकाल नहीं लेता तो मैं उसके मुंह में ही झड़ जाता।
फिर वह बार बार झुक कर मेरा लण्ड चूमती और बार बार यह कहना नहीं चुकती की वह मुझसे बहुत ज्यादा प्यार करती है और वह मुझे पूरी जिंदगी साथ देगी। जब मं उसको चोद रहा था तो वह बार बार अपने करारे स्तनोँ को मुझसे मसल ने के लिए कहती और उस रात करीब पूरी चुदाई के दरम्यान वह मेरे होंठों को चूमती ही रही।
मैं उसका आवेग और उसकी उत्तेजना समझ सकता था। मैंने उसे सेठी साहब का स्वागत करने का जो रास्ता दिखाया था उसके द्वारा मैंने उसे अपरोक्ष रूप से रात को बिना किसी की नजर में आये सेठी साहब के कमरे में जाने के लिए कह दिया था, क्यूंकि उनके घर के ऊपर के दोनों कमरे आपस में बाथरूम के द्वारा जुड़े हुए थे।
दोनों कमरों के बीच में एक बाथरूम था। मैंने अपनी तरफ से बीबी को इशारा कर दिया की अगर सेठी साहब उनके वहाँ रुक गए तो रात को बिना किसी को पता लगे वह दोनों एक दूसरे के कमरे में बाथरूम के रास्ते जा सकते थे।
दूसरे दिन जल्दी सुबह ही ज्योति सेठी साहब के साथ कार में निकलने के लिए तैयार हो गयी थी पर सेठी साहब ने आकर माफ़ी मांगते हुए कहा की उन्हें कुछ अर्जेंट काम से ऑफिस जाना पडेगा और उसके बाद दोपहर को ही वह निकल पाएंगे।
करीब दो बजे सेठी साहब ऑफिस से आये और ढाई बजे कार में ज्योति के मायके जाने के लिए निकल सके। मुन्ना ने जिद पकड़ी की वह आगे की सीट पर ही बैठेगा। इसके कारण आगे की सीट पर मुन्ना और ड्राइवर और पीछे ज्योति और सेठी साहब बैठे। दिल्ली से ज्योति के मायके का रास्ता करीब ६ घंटे का था।
पढ़ते रखिये.. कहानी आगे जारी रहेगी!