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Guest
मैंने उनको धीरज रखने को कहा और फिर जल्दी से अपने केबिन में आ गया और थोड़ी देर बाद ही निर्मला मैडम मेरे केबिन में आ गई और बैठ कर बातें करने लगी.वो कह रही थी कि मैं नैना को याद दिला दूँ कि उनका काम अभी बाकी है और उस कार्यक्रम के बारे में वो उनसे फ़ोन पर बात कर ले.
यह कह कर वो उठी जाने के लिए और फिर मुड़ कर अपनी नर्म बाहों में मैडम ने मुझको जकड़ लिया और एक ज़ोर की जफ़्फ़ी और हॉट किस उसने मेरे होटों पर जड़ दी और फिर वो वहाँ से चली गई.
अब मैदान साफ़ था तो मैं चुपके से साथ वाले केबिन में दरवाज़ा खटका कर अंदर घुस गया. दोनों शमाएँ जलने जलाने के लिए तैयार बैठी थी, मैंने अंदर घुस कर केबिन का दरवाज़ा लॉक कर दिया.फिर वही सिलसिला किसिंग और गर्म गर्म जफ़्फ़ियों का शुरू हो गया लेकिन मैंने अब ज़्यादा समय ना गंवाते हुए थोड़ी जल्दी शुरू कर दी और शमा की सलवार खोलने लगा तो रूबी मेरी पैंट को उतारने में लग गई.
मैंने उनको कहा- कभी भी किसी के आ जाने का काफी खतरा है यहाँ, तो कम से कम कपड़े उतारे जाएँगे ताकि कोई आ जाये तो वापस पहनने में कोई दिक्क्त न हो.दोनों ने सर हिला कर हामी भर दी और रूबी जो मेरी पैंट खोल रही थी और जैसे ही वो मेरे अंडरवियर तक पहुँची तो वहाँ कच्छे में टेंट बना देख कर हंस पड़ी और शमा को बुला कर उसको भी हैरत से दिखाने लगी.शमा ने नीचे झक कर मेरे कच्छे को नीचे किया तो लंडम लाल एकदम उन्मुक्त होकर हवा में लहलहाने लगे.
शमा ने झट से लंड को मुंह में ले लिया और रूबी मेरे अंडकोष को चूमने लगी और मेरा भी हाथ खाली न रह कर शमा की बालों भरी चूत को टटोलने लगा.फिर मेरा दूसरा हाथ शमा के गोल गोल मुम्मों के ऊपर चला गया वो अभी भी कमीज से ढके हुए थे.रूबी ने शमा की कमीज और ब्रा को ऊपर कर दिया जिससे उसके गोल और सॉलिड मुम्मे मेरे सामने आ गए, मैंने अपना मुंह उसके मुम्मों को चूसने को लगा दिया और दूसरे हाथ से रूबी की चूत को सहलाने के लिए लगा दिया और वो एकुदम लबालब पानी से भरी हुई थी.दोनों ही शायद चुदाई के बारे में सोच सोच कर बहुत ही ज़्यादा गर्म हो चुकी थी और उन दोनों की चूत लपालप लंड लेने की इंतज़ार में थी..
मैं ने शमा को ऊपर किया और उसके कान में कहा- शमा जी आपकी शमा जलाएँ क्या?शमा बोली- हज़ूर, वो तो आपके लंड को देख कर ही जल रही है सो जल्दी से अपनी जलती हुई मशाल को शमा के हवाले कीजिये सरकार मेरी.मैं बोला- पेश है मशाल जो जलती रहे रात दिन!यह कह कर मैंने उसको उल्टा खड़ा किया और उसके दोनों हाथ सीट पर रख कर पीछे से लंड का निशाना साधा और एक धक्के में अपने लम्बे और मोटे लंड को शमा की चूत में डाल कर उसके अंदर की शमा को रोशन करने लगा.
रूबी भी अब अपनी कमीज और ब्रा ऊपर कर के अपने मस्त गुब्बारों को उड़ने ले लिए आज़ाद करने लगी. उसके उरोज भी अलमस्त और मदमस्त थे, देखते ही शराब का नशा सा आ गया आँखों में और चूचियों को सहला कर दोनों को मरहबा कहा मन ही मन!उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए मन ही मन कहा- माशाल्ल्लाह क्या लुत्फ़ अन्दोज़ चीज़ें हैं यह दोनों उभरे हुए गोल गुंबद!और शमा शायद मन ही मन कह रही थी- वाह क्या मीनारे कुतब शाही है इसका लौड़ा. लम्बा और मोटा तो है ही और क्या तपते लोहे की सलाख है यह जौनपुरी केला जो खाए वो भी पछताए और जो ना खाए वो कभी ना समझ पाये.
यह कह कर वो उठी जाने के लिए और फिर मुड़ कर अपनी नर्म बाहों में मैडम ने मुझको जकड़ लिया और एक ज़ोर की जफ़्फ़ी और हॉट किस उसने मेरे होटों पर जड़ दी और फिर वो वहाँ से चली गई.
अब मैदान साफ़ था तो मैं चुपके से साथ वाले केबिन में दरवाज़ा खटका कर अंदर घुस गया. दोनों शमाएँ जलने जलाने के लिए तैयार बैठी थी, मैंने अंदर घुस कर केबिन का दरवाज़ा लॉक कर दिया.फिर वही सिलसिला किसिंग और गर्म गर्म जफ़्फ़ियों का शुरू हो गया लेकिन मैंने अब ज़्यादा समय ना गंवाते हुए थोड़ी जल्दी शुरू कर दी और शमा की सलवार खोलने लगा तो रूबी मेरी पैंट को उतारने में लग गई.
मैंने उनको कहा- कभी भी किसी के आ जाने का काफी खतरा है यहाँ, तो कम से कम कपड़े उतारे जाएँगे ताकि कोई आ जाये तो वापस पहनने में कोई दिक्क्त न हो.दोनों ने सर हिला कर हामी भर दी और रूबी जो मेरी पैंट खोल रही थी और जैसे ही वो मेरे अंडरवियर तक पहुँची तो वहाँ कच्छे में टेंट बना देख कर हंस पड़ी और शमा को बुला कर उसको भी हैरत से दिखाने लगी.शमा ने नीचे झक कर मेरे कच्छे को नीचे किया तो लंडम लाल एकदम उन्मुक्त होकर हवा में लहलहाने लगे.
शमा ने झट से लंड को मुंह में ले लिया और रूबी मेरे अंडकोष को चूमने लगी और मेरा भी हाथ खाली न रह कर शमा की बालों भरी चूत को टटोलने लगा.फिर मेरा दूसरा हाथ शमा के गोल गोल मुम्मों के ऊपर चला गया वो अभी भी कमीज से ढके हुए थे.रूबी ने शमा की कमीज और ब्रा को ऊपर कर दिया जिससे उसके गोल और सॉलिड मुम्मे मेरे सामने आ गए, मैंने अपना मुंह उसके मुम्मों को चूसने को लगा दिया और दूसरे हाथ से रूबी की चूत को सहलाने के लिए लगा दिया और वो एकुदम लबालब पानी से भरी हुई थी.दोनों ही शायद चुदाई के बारे में सोच सोच कर बहुत ही ज़्यादा गर्म हो चुकी थी और उन दोनों की चूत लपालप लंड लेने की इंतज़ार में थी..
मैं ने शमा को ऊपर किया और उसके कान में कहा- शमा जी आपकी शमा जलाएँ क्या?शमा बोली- हज़ूर, वो तो आपके लंड को देख कर ही जल रही है सो जल्दी से अपनी जलती हुई मशाल को शमा के हवाले कीजिये सरकार मेरी.मैं बोला- पेश है मशाल जो जलती रहे रात दिन!यह कह कर मैंने उसको उल्टा खड़ा किया और उसके दोनों हाथ सीट पर रख कर पीछे से लंड का निशाना साधा और एक धक्के में अपने लम्बे और मोटे लंड को शमा की चूत में डाल कर उसके अंदर की शमा को रोशन करने लगा.
रूबी भी अब अपनी कमीज और ब्रा ऊपर कर के अपने मस्त गुब्बारों को उड़ने ले लिए आज़ाद करने लगी. उसके उरोज भी अलमस्त और मदमस्त थे, देखते ही शराब का नशा सा आ गया आँखों में और चूचियों को सहला कर दोनों को मरहबा कहा मन ही मन!उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए मन ही मन कहा- माशाल्ल्लाह क्या लुत्फ़ अन्दोज़ चीज़ें हैं यह दोनों उभरे हुए गोल गुंबद!और शमा शायद मन ही मन कह रही थी- वाह क्या मीनारे कुतब शाही है इसका लौड़ा. लम्बा और मोटा तो है ही और क्या तपते लोहे की सलाख है यह जौनपुरी केला जो खाए वो भी पछताए और जो ना खाए वो कभी ना समझ पाये.