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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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मैंने उनको धीरज रखने को कहा और फिर जल्दी से अपने केबिन में आ गया और थोड़ी देर बाद ही निर्मला मैडम मेरे केबिन में आ गई और बैठ कर बातें करने लगी.वो कह रही थी कि मैं नैना को याद दिला दूँ कि उनका काम अभी बाकी है और उस कार्यक्रम के बारे में वो उनसे फ़ोन पर बात कर ले.

यह कह कर वो उठी जाने के लिए और फिर मुड़ कर अपनी नर्म बाहों में मैडम ने मुझको जकड़ लिया और एक ज़ोर की जफ़्फ़ी और हॉट किस उसने मेरे होटों पर जड़ दी और फिर वो वहाँ से चली गई.

अब मैदान साफ़ था तो मैं चुपके से साथ वाले केबिन में दरवाज़ा खटका कर अंदर घुस गया. दोनों शमाएँ जलने जलाने के लिए तैयार बैठी थी, मैंने अंदर घुस कर केबिन का दरवाज़ा लॉक कर दिया.फिर वही सिलसिला किसिंग और गर्म गर्म जफ़्फ़ियों का शुरू हो गया लेकिन मैंने अब ज़्यादा समय ना गंवाते हुए थोड़ी जल्दी शुरू कर दी और शमा की सलवार खोलने लगा तो रूबी मेरी पैंट को उतारने में लग गई.

मैंने उनको कहा- कभी भी किसी के आ जाने का काफी खतरा है यहाँ, तो कम से कम कपड़े उतारे जाएँगे ताकि कोई आ जाये तो वापस पहनने में कोई दिक्क्त न हो.दोनों ने सर हिला कर हामी भर दी और रूबी जो मेरी पैंट खोल रही थी और जैसे ही वो मेरे अंडरवियर तक पहुँची तो वहाँ कच्छे में टेंट बना देख कर हंस पड़ी और शमा को बुला कर उसको भी हैरत से दिखाने लगी.शमा ने नीचे झक कर मेरे कच्छे को नीचे किया तो लंडम लाल एकदम उन्मुक्त होकर हवा में लहलहाने लगे.

शमा ने झट से लंड को मुंह में ले लिया और रूबी मेरे अंडकोष को चूमने लगी और मेरा भी हाथ खाली न रह कर शमा की बालों भरी चूत को टटोलने लगा.फिर मेरा दूसरा हाथ शमा के गोल गोल मुम्मों के ऊपर चला गया वो अभी भी कमीज से ढके हुए थे.रूबी ने शमा की कमीज और ब्रा को ऊपर कर दिया जिससे उसके गोल और सॉलिड मुम्मे मेरे सामने आ गए, मैंने अपना मुंह उसके मुम्मों को चूसने को लगा दिया और दूसरे हाथ से रूबी की चूत को सहलाने के लिए लगा दिया और वो एकुदम लबालब पानी से भरी हुई थी.दोनों ही शायद चुदाई के बारे में सोच सोच कर बहुत ही ज़्यादा गर्म हो चुकी थी और उन दोनों की चूत लपालप लंड लेने की इंतज़ार में थी..

मैं ने शमा को ऊपर किया और उसके कान में कहा- शमा जी आपकी शमा जलाएँ क्या?शमा बोली- हज़ूर, वो तो आपके लंड को देख कर ही जल रही है सो जल्दी से अपनी जलती हुई मशाल को शमा के हवाले कीजिये सरकार मेरी.मैं बोला- पेश है मशाल जो जलती रहे रात दिन!यह कह कर मैंने उसको उल्टा खड़ा किया और उसके दोनों हाथ सीट पर रख कर पीछे से लंड का निशाना साधा और एक धक्के में अपने लम्बे और मोटे लंड को शमा की चूत में डाल कर उसके अंदर की शमा को रोशन करने लगा.

रूबी भी अब अपनी कमीज और ब्रा ऊपर कर के अपने मस्त गुब्बारों को उड़ने ले लिए आज़ाद करने लगी. उसके उरोज भी अलमस्त और मदमस्त थे, देखते ही शराब का नशा सा आ गया आँखों में और चूचियों को सहला कर दोनों को मरहबा कहा मन ही मन!उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए मन ही मन कहा- माशाल्ल्लाह क्या लुत्फ़ अन्दोज़ चीज़ें हैं यह दोनों उभरे हुए गोल गुंबद!और शमा शायद मन ही मन कह रही थी- वाह क्या मीनारे कुतब शाही है इसका लौड़ा. लम्बा और मोटा तो है ही और क्या तपते लोहे की सलाख है यह जौनपुरी केला जो खाए वो भी पछताए और जो ना खाए वो कभी ना समझ पाये.
 
शमा की चूत में अब काफी हलचल थी वो खुद आगे पीछे हो कर चुदाई की स्पीड को कंट्रोल कर रही थी और जब उसने इस काम में तेज़ी दिखाई तो मैं समझ गया कि यह किला फ़तेह होने में ज़्यादा वक्त नहीं लगेगा और मैंने अपना दायाँ हाथ उसकी चूत के अंदर उसकी भग मसलने की ड्यूटी पर लगा दिया.ऐसा करते ही शमा की उछल कूद और तेज़ हो गई और वो आँखें बंद करके फुसफ़ुसा रही थी- मार डालोगे क्या… उफ़ मैं गई रे…

फिर उसके धक्के एकदम तेज़ दर तेज़ हो गये और कुछ मिन्ट में वो थोड़ी से कांपी और सीट के ऊपर लुढ़क गई और मैंने अपनी तरफ से इनामी धक्के मारे उसको सीट पर लिटा कर और फिर मैं उसकी चूत से अपने गीले लौड़े को निकाल कर रूबी की चूत को ढूंढने लगा.

रूबी यह तमाशा देख कर अपनी चूत में से निकलती आग को अपनी ऊँगली से बुझाने की कोशिश कर रही थी और अब मेरे लौड़े को आज़ाद देख कर वो लपक पड़ी और वैसे ही सीट पर झुक कर खड़ी हो गई और मेरे अग्नि बाण का इंतज़ार करने लगी.मैंने अपने शमा की चूत के पानी से लबरेज़ हुए लौड़े को रूबी की चूत के मुंह पर रख कर अंदर धकेल दिया और एक ही झटके में पूरा जब अंदर चला गया तो रूबी उछल पड़ी और ज़ोर से चिला पड़ी- उईईइ माआ मर गई रे!लेकिन साथ ही बड़ी मोहब्बत से उसने पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखा और हल्के से मुस्करा दी और मेरे दिल ने कहा- मर जावां गुड़ खा के, साली क्या मुस्कराई है, यार वारी जाऊं!

और फिर मैं ने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये, पूरा अंदर फिर पूरा बाहर, सिर्फ लंड की टिप अंदर, और फिर ज़ोरदार धक्का अंदर, बारमबार ऐसा करने से गिर जाती हैं बड़ी बड़ी शहसवार बेगमें और गुलामी कबूल कर लेती हैं खूबसूरत हूरें.

मैंने महसूस किया कि रूबी ज़्यादा आनन्द ले रही थी चुदाई का और बार बार मुड़ कर आँखों ही आँखों से शुक्रिया अदा कर रही थी.मैं भी रूबी की हलीमी का कायल हो गया और इस कोशिश में लग गया कि इसको ज़्यादा से ज़्यादा लुत्फ़ अन्दोज़ करवाऊँगा.मैं भी अब पूरी तरह से मस्त होकर चुदाई में लग गया और उसके गोल और सख्त चूतड़ों को सहलाने लगा और उसकी गांड में भी हल्की सी ऊँगली डाल दी और उसने फिर मुड़ कर एक प्यार भरी नज़र से देखा जैसे कह रही हो करते रहो गांड में भी ऐसा ही!

उधर शमा सीट पर पूरी पसर गई थी और उसकी खुली सलवार के अंदर से उसकी फूली हुई चूत के दर्शन हो रहे थे और उसमें से अभी भी थोड़ा थोड़ा रस निकल रहा था जो उसकी चूत का था और वो टप टप उसकी सलवार में गिर रहा था.अब रूबी ने अपने चूतड़ों से इशारा किया कि तेज़ चुदाई करूँ, मैंने कमर कस के धक्कों की स्पीड धीरे धीरे तेज़ कर दी और उसकी चूत में ऊँगली डाल कर महसूस किया कि वो छूटने से ज़्यादा दूर नहीं है.

मेरी तेज़ स्पीड के आगे रूबी अब अधिक देर टिक ना सकी और हाय हाय करती हुई बहुत ज़्यादा पानी छोड़ती हुई एक सिहरन होने लगी उसके शरीर में!

मैं अब ट्रेन के फर्श पर बैठ गया और उसके नितम्बों को चूमने और चाटने लगा जिससे उसको बड़ा मज़ा आ रहा था.अब मैं लेटी हुई शमा के गोल मुम्मों को जीभ से चाटने लगा और उसकी चूचियों का रसपान करने लगा.शमा ने मुझको एक बहुत ही गहरी जफ़्फ़ी डाल दी और मेरे लबों को चूमने लगी, मैं भी उसके अधरों को जीभ से चूसने लगा.

अब दोनों थोड़ी संयत हो गई थी और अपने कपड़े ठीक कर रही थी, मैं भी अपनी पैंट वगैरह ठीक कर रहा था.

फिर मैंने उन दोनों को गुड नाईट कहा और जाने लगा तो शमा बोली- अब फिर कब होगी मुलाकात हम दोनों के सरताज?मैंने भी उसी लहजे में जवाब दिया- जब आप चाहो बेगमाते-ऐ-अवध मैं आपका खाविंद आपकी खिदमत में हाज़िर रहूंगा. आप सिर्फ़ हुक्म नादिरशाही जारी कीजिये, बंदा आप की खिदमत में हाज़िर हो जाएगा.

यह कह कर मैंने उन दोनों को एक बार चूमा और केबिन का दरवाज़ा खोल कर बाहर आ गया.

कहानी जारी रहेगी.
 
निर्मला मैडम का गर्भाधान

गाड़ी अपने ठीक समय पर लखनऊ पहुँच गई और हम सब एक दूसरे से विदा लेकर घर पहुँच गए.नैना और पारो ने हमारा भाव भीना स्वागत किया और हम दोनों को गर्म गर्म चाय पिलाई.

पूनम अपने कमरे में फ्रेश होने चली गई और नैना मेरे साथ मेरे कमरे तक आई.नैना ने बताया कि कोठी में सब ठीक ठाक रहा और मम्मी जी का फ़ोन आता रहता था और वहाँ भी सब कुशल मंगल है.तब मैंने उसको याद दिलाया- निर्मला मैडम तुमको याद कर रही थी, आज उनको फ़ोन ज़रूर कर लेना.नैना ने बताया कि दो और सेठानियों से उसकी बात हुई है और वो मुझसे मिलना चाहती हैं.तब मैंने कहा निर्मला मैडम के साथ उनका भी प्रोग्राम बना लो.लेकिन प्रश्न यह था कि पूनम के होते हुए यह संभव नहीं था तो मैंने कहा कि अभी समय है कुछ न कुछ सोचते हैं.

इतनी देर से नैना से बात हो रही थी लेकिन मैंने उसको ध्यान से नहीं देखा था और जब देखा तो वो बेहद सेक्सी लगी.मैंने लपक कर उसको बाँहों में भर लिया और उसके लबों पर कई चुम्मियाँ दे डाली और उसके धोती में लिपटे हुए गुदाज़ जिस्म को टटोलने लगा.उसके मुम्मे वैसे ही सॉलिड थे और चूतड़ों की वही बाहर थी फिर भी मैंने उसको जी भर के हाथों से महसूस किया.

तब नैना बोली- रहने दो छोटे मालिक, मैं गर्म हो जाऊँगी और आपके कॉलेज जाने का टाइम भी तो हो रहा है. दिन को मैं आपको दिल खोल कर चोदूंगी.मैं कहाँ मानने वाला था, उसकी धोती को ऊपर उठा कर और अपनी पैंट और अन्डरवीयर को नीचे कर के अपने खड़े लौड़े के दर्शन उसको करवाये और फिर उसकी एक टांग को अपनी बगल में लेकर उसकी चूत में लंड घुसेड़ दिया, अपने दोनों हाथों को उसके चूतड़ों के नीचे रख कर मैं खुद ही आगे पीछे होकर उसको चोदने लगा.

जल्दी ही वो भी गर्म हो गई और वो भी मेरा साथ पूरी तरह देने लगी. मैंने अपने होंट उसके होटों पर रख दिए और अपनी जीभ को उसके मुंह में डाल कर आहिस्ता से चूसने लगा.

नैना इतने दिनों से चुदी नहीं थी, वो भी बड़ी कामुक हो रही थी और मेरी थोड़ी देर की चुदाई से ही वो झड़ गई.हम दोनों ने कपड़े ठीक किये और तभी ही पूनम भी आ गई कमरे में और बड़ी उदास होकर बोली- अभी घर से फ़ोन आया है कि मेरी मम्मी बहुत बीमार है, मुझको तो अभी ही गाँव जाना होगा.यह कहते हुए वो रोने लगी.

मैंने और नैना ने उसको चुप करवाया और उसको तसल्ली दी कि सब ठीक हो जाएगा.वो जल्दी से अपना जाने का छोटा सा बैग तैयार करके ले आई और मैं उसको बस स्टैंड पहुँचा आया और उसके गाँव की बस में भी बिठा आया और उसको कुछ रूपए भी दे दिए ताकि रास्ते में कष्ट ना हो, यह भी कहा कि वो मुझको घर पहुँच कर फ़ोन ज़रूर करे और मम्मी का हाल भी बता दे.

कोठी आकर मैं आलखन से नहाया और नाश्ता करने लगा, फिर आलखन करने लगा क्यूंकि आज कॉलेज में ट्रिप वाले छात्रों की छुट्टी थी.नैना ने थोड़ी देर बाद निर्मला मैडम से बात की और सब पूछताछ करने के बाद उसने कहा- अगर आप आज आ सकती हैं तो आ जाइए मैं फिर आप का चेकअप कर लेती हूँ, जैसा हुआ वैसा प्रोग्राम बना लेंगे.

तब नैना ने बताया दो सेठानियों ने भी अपना चेकअप करवाया है और वो दोनों भी गर्भाधान के लिए तैयार हैं लेकिन पहले वो आप से मिलना चाहती हैं.मैंने कहा- आने दो, लेकिन पहले मैडम का काम कर लेते हैं फिर दूसरे के बारे में सोचेंगे.

एक घंटे के बाद ही निर्मला मैडम आ गई और नैना उनको लेकर दूसरे बैडरूम में चली गई.कोई 15 मिन्ट बाद ही वो दोनों बाहर आ गई.फिर हम सब मिल कर बैठक मैं चाय पीने लगे और तब नैना बोली- मैंने कल का टाइम मैडम के साथ फिक्स किया है, वो आज से स्पेशल डाइट खा कर कल आएँगी.मैडम ने हामी में सर हिला दिया.

नैना ने कहा- ऐसा है मैडम जी, मेरा यह सिस्टम 100% सही नहीं होता. हाँ 50-60 % यह सही बैठ रहा है और वो भी अगर सतीश वीर्य दान करे तो! मैंने इसका वीर्य लैब में चेक करवाया था और जो रिपोर्ट आई थी उसमें साफ़ लिखा था कि सतीश के स्पर्म्स बड़े ही शक्तिशाली हैं और पूरी तरह से गर्भ के लिए सक्षम हैं. इसीलिए अब तक जितनी भी सतीश के वीर्य से गर्भाधान की कोशिश की हैं वो सब 100% कामयाब हुई हैं. आशा है मैडम जी, आपके केस में भी पूरी सफलता मिलेगी हमको!

निर्मला मैडम बोली- नहीं नहीं, मुझको तुम्हारे चेकअप और ट्रीटमेंट पर कोई शक नहीं है लेकिन यह जान कर मुझ को तसल्ली मिल रही है कि सतीश की वजह से मैं माँ बन सकती हूँ अगर प्रभु चाहें तो.कल आने का वायदा कर के मैडम चली गई और हम सब अपने कामों में लग गए.

मैं खासतौर पर लखन लाल चौकीदार से मिला और उसको थोड़ा बहुत इनाम भी दिया और कहा कि तुम्हारी होशियारी के कारण मेरा मन बड़ा शांत रहता है कि आप कोठी का पूरा ध्यान रख रहे हो.

अगले दिन मैं कॉलेज से मैडम के साथ ही निकला और घर आकर हम दोनों को नैना ने स्पेशल डाइट का लंच करवाया.और फिर हम दोनों मेरे ही बैडरूम में सो गए, तकरीबन एक घंटे बाद ही हम जागे, फिर नैना ने हम दोनों को निर्वस्त्र कर दिया.

मैंने मैडम को बाँहों में भर लिया और उनके होटों को लगातार चुम्मियों से तर कर दिया और उनके गोल और सॉलिड मुम्मों को काफी देर सहलाया और चूसा.मम्मों की दोनों चूचियाँ एकदम से लंड की माफिक अकड़ गई थी और उनको चूसने के बाद में नीचे बैठ गया और मैडम की चूत में मुंह डाल कर चूत के लबों को चूसा और फिर उसकी भग को काफी देर अपने दोनों लबों में लेकर चूसता रहा और मैडम बार बार मेरा सर पकड़ कर मेरे मुंह को हटाती थी लेकिन मैं फिर भी अलमस्त होकर चूसता ही रहा.

अब मैंने मैडम को अपने हाथों में उठा लिया और बिस्तर पर ले गया, धीरे से उनको वहाँ लिटा दिया और अपने लौड़े को सीधा तान कर उनकी जांघों के बीच बैठ कर लंड को चूत के अंदर डाल दिया.तपते हुए लोहे को चूत में जाते ही मैडम हाय हाय करने लगी और मुझको अपने मुम्मों के बीच लिटा कर मेरे मुंह को बेतहाशा चूमने लगी.

नैना के सिखाये मुताबिक़ मैं पहले धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा और मैडम की गर्म और एकदम गीली चूत का आनंद लेने लगा.फिर उनके मुम्मों को चूसते हुए अपनी स्पीड धीरे धीरे तेज़ करने लगा और जब मैडम नीचे से मेरा साथ देने लगी तो मैंने अपनी स्पीड और भी तेज़ कर दी. मेरी कोशिश थी कि मैडम पूरे कामुकता के जोश में आ जाएँ तो मैं अपना असली हथियार फेंकू.

थोड़ी देर में मैडम अपने पूरे जोश-ओ-खरोश में आ गई तो धक्कों की स्पीड बहुत ही तेज़ कर दी और जल्दी ही मैडम का पानी छूट गया और उन्होंने अपनी जांघों कस कर मेरे इर्द गिर्द लॉक कर दीं.

लेकिन मेरा मिशन तो अभी अधूरा था, मैं पूरी अपनी यौन शक्ति के साथ फुल स्पीड चुदाई में लग गया और मेरे धक्कों की स्पीड इतनी तीव्र हो गई कि मैडम तड़फड़ाती हुई दूसरी बार भी स्खलित हो गई और अब नैना ने इशारा किया और मैं अपने लंड की पोजीशन ठीक करके उसके गर्भाशय के मुंह को ढूंढ रहा था.और जब मुझ को आभास हुआ कि गर्भाशय का मुख कहाँ है, मैंने अपना लंड का रुख उस तरफ किया और वीर्य की जोरदार पिचकारी वहाँ छोड़ दी.

गर्म वीर्य वहाँ पड़ते ही मैडम ने अपनी दोनों टांगें उठा ली और नैना ने झट से उनकी कमर के नीचे दो तकिये रख दिए.मैं भी मैडम की जांघों में थोड़ी देर अपने सख्त लंड को डाल कर बैठा रहा जब तक मेरा वीर्य पूरी तरह से स्खलित नहीं हो गया.और फिर नैना के इशारे पर ही मैं वहाँ से उठा और अपने गीले लंड को निकाल कर मैडम के सामने ही खड़ा रहा.

मैडम ने एक हाथ बढ़ा कर मेरे गीले लंड को पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया और उसको हल्के हल्के चूसने लगी.इधर नैना अभी भी मैडम की टांगों को ऊंचा करके रखा हुआ था ताकि वीर्य अधिक से अधिक मात्रा में मैडम की चूत में ही रहे!मैडम को मेरे लंड को चूसने में अति आनन्द आ रहा था, वो लगी रही चुसाई में!अब नैना ने मैडम की टांगों को नीचे कर दिया था और उनकी चूत पर एक छोटा तौलिया रख दिया ताकि वीर्य ज़्यादा बाहर ना निकले.

मैडम बोली- सतीश यार, तुम तो गज़ब के चोदू हो!

कहानी जारी रहेगी.
 
मैडम की घोड़ी बना कर चूत चुदाई

गर्म वीर्य वहाँ पड़ते ही मैडम ने अपनी दोनों टांगें उठा ली और नैना ने झट से उनकी कमर के नीचे दो तकिये रख दिए.मैं भी मैडम की जांघों में थोड़ी देर अपने सख्त लंड को डाल कर बैठा रहा जब तक मेरा वीर्य पूरी तरह से स्खलित नहीं हो गया.और फिर नैना के इशारे पर ही मैं वहाँ से उठा और अपने गीले लंड को निकाल कर मैडम के सामने ही खड़ा रहा.

मैडम ने एक हाथ बढ़ा कर मेरे गीले लंड को पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया और उसको हल्के हल्के चूसने लगी.इधर नैना अभी भी मैडम की टांगों को ऊंचा करके रखा हुआ था ताकि वीर्य अधिक से अधिक मात्रा में मैडम की चूत में ही रहे!मैडम को मेरे लंड को चूसने में अति आनन्द आ रहा था, वो लगी रही चुसाई में!अब नैना ने मैडम की टांगों को नीचे कर दिया था और उनकी चूत पर एक छोटा तौलिया रख दिया ताकि वीर्य ज़्यादा बाहर ना निकले.

मैडम बोली- सतीश यार, तुम तो गज़ब के चोदू हो! चूत चुदाई के तुम्हारे हुनर का तो उषा मैडम भी लोहा मान रही थी, वो कह रही थी कि यह लड़का इतनी छोटी उम्र में ही एक काफी बढ़िया चुदाई करता है. उषा मैडम के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है?मैं बोला- बहुत ही सुन्दर लेडी हैं वो लेकिन किस्मत की मारी हैं. बेचारी को इस भरी जवानी में पति छोड़ गया और उनको यौन सुख से वंचित कर गया! बहुत बुरा हुआ उनके साथ.

मैडम बोली- तुम उनकी कुछ मदद कर सकते हो क्या?मैं बोला- कैसी मदद मैडम जी?मैडम बोली- वही चुदाई वाली मदद! क्या तुम उनके घर जाकर चोद सकते हो जब वो चाहें या फिर या जब तुम फ्री हो?मैं भी खुश होकर बोला- क्यों नहीं मैडम, वो खुद इतनी सुन्दर हैं कि कोई भी मर्द उनके लिए तैयार हो जाएगा.मैडम बोली- तो ठीक है, वो कल कॉलेज में तुमसे मिल कर बात कर लेगी और प्लीज तुम हम दोनों के साथ सम्बन्ध का ज़िक्र किसी से न करना, हमारी इज़्ज़त का सवाल है.

नैना बोली- मैडम, छोटे मालिक ने जब यह चोदम चुदाई का कार्यक्रम मेरे साथ मिल कर शुरू किया था, तो मैंने इनके दिमाग में यह बात कूट कूट कर डाल दी थी कि इस काम के बारे में किसी से भी कभी कोई ज़िक्र ना करना वरना हम सब मुश्किल में आ जाएंगे और मुझको यह फखर है कि इन्होंने आज तक कभी किसी दूसरे को कुछ भी नहीं बताया! आप निश्चिंत रहें.मैडम बोली- थैंक्स सतीश और नैना. अब बस या अभी और है?

नैना बोली- मैं चाहती हूँ एक बार और इनसे चुदवा लीजिए ताकि किसी तरह की भी शंका या शक की गुंजाईश ना रहे!मैडम खुश होकर बोली- ठीक कह रही हो पर क्या सतीश कर लेगा दुबारा इतनी जल्दी?मैं और नैना हंस पड़े और तब नैना बोली- मैडम जी आप इनके लंड को देखिये तो सही? छुइये तो सही?चखिए तो सही!

मैडम ने मेरे लंड को देखा और हैरान रह गई कि वो तो वैसे ही खड़ा था और हवा में लहलहा रहा था!नैना बोली- अब आप घोड़ी बन जाएँ तो छोटे मालिक आपको इस पोज़ में भी चोद देते हैं क्यूंकि इस पोज़ में गर्भ ठहरने की अधिक संभावना रहती है!नैना ने मैडम को घोड़ी बना दिया और मुझको कहा कि घोड़ी चढ़ जाऊँ.

घोड़ी चढ़ने से पहले मैंने घोड़ी की तैयारी भी देखनी ज़रूरी समझी और उनकी चूत में हाथ लगा कर देखा, वो फिर काफी गीली हो चुकी थी, मैं जान गया कि घोड़ी भागने के लिए पूरी तरह से तैयार है.फिर मैंने मैडम के पीछे खड़ा होकर अपना सख्त लंड उनकी चूत के मुंह पर रख कर एक ज़ोरदार धक्का मारा और लंड पूरा का पूरा अंदर चला गया.

अब मैंने धीरे धीरे लंड को अंदर और बाहर जाने का सिलसिला बना लिया, धीरे से अंदर और फिर धीरे से बाहर और जो अंदर जाता है वो बाहर तो आता ही है, लेकिन कोशिश यह होनी चाहिए की लौड़े का सिर्फ आगे का किनारा ही अंदर रहना चाहिए और बाकी लंड ठंडी हवा खाकर फिर वापस अंदर जाना चाहिए.इस क्रम को पूरी तरह से पालन करने से औरत का मज़ा दुगना हो जाता है क्यूंकि वो इस इंतज़ार में रहती है कि जो पूरा बाहर गया क्या वो अंदर आएगा और कितना आएगा.
 
मैं हाथ से मैडम की भग को भी सहला रहा था और मेरे हाथ कभी मैडम के मोटे मुम्मों को और उनकी चूचियों को भी सहला रहे थे.लंड की हल्की स्पीड को जारी रखते हुए मैं अब पूरा लंड अंदर डाल कर उसको अंदर ही अंदर ही घुमा रहा था जिससे मुझको गर्भाशय के मुंह को ढूंढने में आसानी रहे.

अब नैना ने मुझको इशारा किया कि चुदाई की स्पीड तेज़ करूँ तो मैंने हाथों से मैडम के चूतड़ों को थपकी देनी शुरू कर दी और साथ ही धक्कों की स्पीड भी तेज़ कर दी और इसका मैडम की चूत ने सहर्ष स्वागत किया और वो भी वापसी धक्कों का जवाब देने लगी.

मेरे लंड को अब मैडम की चूत में एक ख़ास हलचल महसूस हुई जिसके कारण मैं समझ गया कि मैडम छूटने के कगार पर हैं और मैंने अब फुल स्पीड पर धक्के मारने शुरू कर दिए.

लंड की तेज़ स्पीड मैडम की चूत बर्दाश्त नहीं कर सकी और जल्दी ही उसने हथियार डाल दिए और एक ज़ोर की कंपकंपी मैडम के सारे शरीर में हुई और वो नीचे लेटने के लिए जैसे ही झुकी मैंने उसके चूतड़ों को अपने हाथों में ले लिया और उसको वैसे ही घोड़ी बने रहने का इशारा किया.

अब मैंने अंधाधुंध स्पीड से मैडम को चोदना शुरू किया ताकि उनकी चूत में मेरा भी छूट जाए और मेरा वीर्य उनके गर्भाशय के अंदर या फिर उसके मुंह पर छूटे.इंजन स्पीड से मेरी चुदाई के कारण मैं जल्दी ही मैडम को दुबारा छुटाने के लिए प्रेरित करने लगा और फिर थोड़ी देर में हम दोनों का एक साथ स्खलन हुआ और नैना ने झट से मैडम की चूत के नीचे मोटे तकिये लगा दिए और उनके चूतड़ों को भी मैंने कस कर पकड़ लिया ताकि वो नीचे लेट ना सकें.

यह सारा खेल नैना का ही बनाया हुआ था और वो ही जानती थी कि इसका कितना लाभ था गर्भ धारण करने में!नैना के इशारे से मैंने अपना लंड मैडम की चूत से निकाला और नीचे फर्श पर आ गया.

मेरा लंड अभी भी हवा में लहलहा रहा था मैं चुपके से नैना के पीछे खड़ा होकर उसकी गांड में अपना लंड डालने की कोशिश करने लगा लेकिन वो तो साड़ी पहने थी तो वो उसकी साड़ी के बाहर से गांड को रगड़ा मारने लगा.थोड़ी देर बाद नैना ने मैडम को उठने दिया और उनकी चूत पर तौलिया रख दिया ताकि वीर्य बाहर ना निकले और अब उनको पलंग पर सीधा लिटा दिया.

कुछ समय बाद हम सब कपड़े पहन कर बैठक में आकर बैठ गए और नैना ने पहले मैडम को बादाम वाला खास दूध पिलाया और मुझ को कोकाकोला दिया और स्वयं भी वह पीने लगी.

कुछ देर बाद नैना ने मैडम को कहा- आज आप अपने हस्बैंड से भी सेक्स कर लेना ताकि उनको यह शक न रहे कि यह बच्चा किसी और का है. कर पाएँगी उनसे सेक्स?मैडम थोड़ा मुंह बना कर बोली- उनको सेक्स के लिए तैयार करना थोड़ा मुश्किल है क्यूंकि उनका सेक्स का मन ही नहीं करता यही तो प्रॉब्लम है!नैना बोली- मैं आपको एक तरीका बताती हूँ जिसके बाद वो स्वयं ही आपके पीछे सेक्स के लिए भागेंगे.

नैना के इशारे पर मैं वहाँ से उठ गया और नैना उनको कुछ खुसर फुसर में समझाती रही और उनको दो दिन के बाद आने का भी याद कराया.थोड़ी देर बाद मैडम मुझको और नैना को थैंक्स कर के अपनी कार में वापस चल पड़ी.

कहानी जारी रहेगी.
 
नैना पारो की चूत चुदाई गार्डन में

थोड़ी देर बाद मैडम मुझको और नैना को थैंक्स करके अपनी कार में वापस चल पड़ी.जब मैडम को छोड़ कर हम दोनों वापस आ रहे थे तो मुझको पारो मिल गई और कहने लगी- वाह छोटे मालिक, आप तो मुझको भूल ही गए?मैंने उसको खींच कर अपनी बाँहों में भर लिया और कहा- पारो, तुमने कैसे सोच लिया कि मैं तुमको भूल गया हूँ? शेर अपना शिकार कभी नहीं भूलता, आज मैं तुम दोनों का शिकार रात को करूँगा, तैयार रहना.

वो दोनों जाने लगी तो मुझ को याद आया कि इन दोनों के लिए पूनम कुछ उपहार खरीद कर लाई थी और वो मेरे ही सूटकेस में पड़े थे, मैं उन दोनों के चूतड़ों को हाथ से मसलता हुआ उनको अपने कमरे में ले आया और नैना से कहा- वेरी सॉरी, मैं भूल गया था कि पूनम तुम दोनों के लिए कुछ चीज़ें आगरा से खरीद कर लाई थी, तुम दोनों निकाल लो अपने अपने तोहफे जो पूनम ने पसंद किये थे तुम दोनों के लिए!

वो एकदम से मेरे सूटकेस पर टूट पड़ी और एक क्षण में ही उसको खाली करके अपने तोहफे निकाल लिए जिनमें कई तरह की चूड़ियाँ और भी कई चीज़ें देख कर दोनों ख़ुशी से पागल हो गई, दोनों ही उठ कर आई और मुझको एक टाइट जफ्फी मार दी.मैंने भी दोनों को चूमा और साथ ही उनकी चूत के ऊपर हाथ से सहला दिया.मैंने नैना और पारो को कहा- आज रात तुम दोनों मुझको चोदोगी और मुझको आज तुम दोनों की गांड भी लेनी है. क्यों दोगी ना?दोनों एक साथ बोली- छोटे मालिक, आपके लिए तो जान भी हाज़िर है यह ससुरी चूत या गांड क्या चीज़ है? आप हुक्म करो तो सही सब हाज़िर कर देंगी हम तो!

मैं थोड़ा थक गया था, थोड़ी देर के लिए सो गया.

रात को पारो ने बहुत ही उम्दा खाना बनाया और हम तीनों ने एक साथ बैठ कर खाना खाया.दिल्ली और आगरा में खाना तो होटलों का था, उसमें घर सा आनन्द कहाँ.

फिर मैं और नैना अपने गार्डन की सैर करने लगे और खिली चांदनी में हम दोनों बहुत ही रोमांटिक हो गए थे. लखन सिंह चौकीदार भी मेन गेट बंद कर के सोने चला गया था और हम अति सुंदर फूलों से भरे गार्डन में प्रकृति की खुशबू का आनन्द ले रहे थे.चलते चलते हम दोनों के हाथ और दूसरे अंग एक दूसरे से टकरा रहे थे.

मैंने अपना बांयाँ हाथ नैना की कमर में डाल रखा था और उसको धीरे से नैना के नितम्बों पर फेरने लगा और फिर वहाँ से खिसकते हुए उसकी चूत पर पीछे से सहलाने लगा.मैंने नैना को सीधा किया और अपने जलते हुए होंट नैना के मधुर और एकदम से नरम होटों पर रख दिए और हम दोनों एक मधुर चुम्बन करने लगे.

मेरी चौड़ी छाती अब नैना के गोल गदाज़ मुम्मों को पूरी तरह से दबा कर उसके साथ चिपकी हुई थी.मैं नैना को लेकर कोई अँधेरा कोना ढूंढने लगा जहाँ ना तो चाँद की रोशनी और ना ही बिजली की चमक पहुँच सकती हो. फिर एक जगह दिखाई दी जहाँ बिल्कुल अँधेरा था और वो पेड़ पौधों से ढकी हुई थी.

मैंने नैना से कहा- याद है वो जगह जहाँ हमने खुले आम चुदाई की थी?नैना बोली- वही ना जो नदी किनारे थी और जहाँ मैं आपको लेकर गई थी गाँव की औरतों को नंगी नहाते हुए देखने के लिए?मैं बोला- वही तो, लेकिन तुमको शायद याद नहीं, वहाँ हमने क्या किया था?नैना बोली- बिल्कुल याद है, वहाँ ही तो मैंने पहली बार खुले आम चुदाई की थी आपके संग!मैं बोला- तो फिर उस याद को ताज़ा करने के लिए उसको दोहराते हैं हम दोनों यहाँ.नैना घबरा के बोली- खुले आम सबके सामने? सारे लोग देख लेंगे छोटे मालिक.मैं बोला- अरे पगली, क्या तुझको मेरा चेहरा दिख रहा है साफ़ साफ़? नहीं न तो कोई कैसे देख सकता है हमको? चल शुरू हो जा मेरी रानी, उतार साड़ी शुरू करें कहानी पुरानी.

मैंने उसको अपनी छाती के साथ लगा कर उसकी धोती को उतारना शुरू किया और वो भी हँसते हुए मेरे इस खेल में शामिल हो गई.उसने खुद ही अपनी साड़ी उतार दी और ब्लाउज के बटन खोलने लगी, मैंने भी अपना कुरता और पायजामा उतार दिया.

जब हम दोनों नंगे हो गए तो आनन्द से हमने एक दूसरे को जफ्फी डाली और हॉट चुम्मी दी एक दूसरे को!नैना मेरे लंड से खेलने लगी और मैंने भी उसके मुम्मों को दबाना और चूसना शुरू किया.मैं उसकी चूत को चूसने के लिए नीचे बैठा ही था कि मुझको एक छाया सी वहाँ आती दिखी और मैं चौंक कर उठ बैठा.हम दोनों दम साधे चुपचाप वहाँ बैठ गए.
 
तब वो छाया चलते हुए हमारे और पास आई तो हम झाड़ियों के पीछे छुप गए और देखने लगे कि कौन है वो!छाया इधर उधर देखने लगी.तब नैना फुसफुसा कर बोली- अरे, यह तो पारो ही है.मैं बोला- चुप रहो, हम भी इसको ज़रा मज़ा चखाते हैं.

मैं और नैना चुपके से पारो के पीछे हो गए और जैसे ही वो मुड़ी, हम दोनों ने उसको धर दबोचा. नैना ने उसको पीछे से जकड़ लिया और मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और उसको खींचते हुए अँधेरे हिस्से की तरफ ले गए और फिर बगैर कुछ बोले मैंने उस की धोती उतार दी और फिर उसका पेटीकोट भी उतार कर परे फेंका.

अब वो हैरान हो गई थी और तब मेरा खड़ा लंड मैंने उसकी गांड पर रख कर एक धक्का मारा तो वो पूरा का पूरा अंदर चला गया.उधर नैना ने उसके मुंह पर हाथ रख कर उसको कुछ कहने से रोक दिया और मैं अब पूरी तरह से पारो को चोदने में जुट गया, ज़ोर ज़ोर से मैं पारो की गांड में धकापेली करने लगा.

वो कुछ देख ना सके, इसलिए नैना ने उसके मुंह पर अपना पेटीकोट डाला था और वो मुझको आँख से इशारा करने लगी ‘चोदो साली को!’मैं और भी जोश और खरोश से उसकी चुदाई में लग गया और उसकी चूत में हाथ डाल कर उसका गीलापन अपने लौड़े पर लगा कर और तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा.

मैं साथ ही साथ उसकी भग को भी मसल रहा था और वो बहुत जल्दी से एकदम गर्म हो गई और अपनी गांड को खुद ही आगे पीछे करने लगी.अब मैं उसकी भग के साथ उसके मुम्मों को भी दबा रहा था और नैना भी उसकी चूत को मुंह से चूसने की कोशिश कर रही थी.अब मैंने महसूस किया कि पारो की गांड अंदर से सिकुड़ने लगी है और उसका मुंह खुल रहा है और बंद हो रहा है तो मैंने धक्कों की स्पीड बहुत ही तेज़ कर दी और पारो विवश होकर जल्दी ही झड़ गई.

अब मैंने उसको सीधा किया और उसके चेहरे से नैना का पेटीकोट उतार दिया और तब उसने मुझको देखा और फिर नैना को देखा और हम दोनों तो हंसी के मारे लोट पोट हो गए थे.तब मैंने कहा- हेलो पारो, गांड मराई का मज़ा आया क्या?

पारो हैरान थी कि यह क्या हो रहा है फिर उसको समझ आ गई कि मैंने और नैना ने उसको मूर्ख बनाया है.पारो भी हंसने लगी थी और बोली- वाह, तुम दोनों ने तो मेरा पासा ही पलट दिया. मैं तो आप दोनों को चुदाई करते पकड़ना चाहती थी लेकिन तुम दोनों मेरे से भी तेज़ निकले.मैं बोला- तुम हमको पकड़ना चाहती थी? कैसे?पारो बोली- मैंने तुम दोनों को गार्डन में जाते देख लिया था और मैं समझ गई थी कि तुम दोनों के मन में चोर है इसलिए मैं भी तुम दोनों के साथ शामिल होना चाहती थी, मैं भी तुम्हारे पीछे चल पड़ी और साथ में ये दो चादरें भी लेकर आई थी.

मैं और नैना हैरान रह गए क्यूंकि हमने गार्डन में चुदाई का पहले कोई प्रोग्राम नहीं बनाया था लेकिन पारो की जबरन गांड मार कर मैं कुछ पछता रहा था, मैंने पारो से माफ़ी भी मांगी इस गलती के लिए लेकिन पारो बोली- रहने दो छोटे मालिक, मुझ को तो गांड मरवाई में बहुत ही मज़ा आया था और ऐसा आनन्द मैंने पहले कभी लिया ही नहीं.

अब नैना और मैं दोनों हंस पड़े तब पारो ने दोनों चादरें घास पर बिछा दी और खुद नंगी ही लेट गई और हम दोनों को भी इशारा किया कि ‘आ जाओ, लेट जाओ… यहाँ ठंडी ठंडी हवा चल रही है.’हम दोनों भी हंस पड़े और वहाँ बैठ गए और पारो को एक कस कर जफ्फी मार दी.

मैंने पारो से पूछा- हमको किसी और ने यहाँ आते तो नहीं देखा जैसे लखन लाल का परिवार या फिर और कोई?पारो बोली- नहीं छोटे मालिक, यह जगह तो बिल्कुल अँधेरे में है और बाहर का गेट तो लॉक है. और लखन लाल खुद तो पीकर सो गया होगा क्यूंकि उसके बीवी बच्चे तो अपनी नानी के घर गए हैं.
 
पारो अब मेरे खड़े लंड से खेल रही थी और साथ में अपनी गांड में भी हाथ लगा रही थी क्यूंकि उसकी गांड मारने में शायद उसकी सूखी गांड में थोड़ी बहुत चोट लग गई थी.मैं दोनों औरतों के बीच ही नंगा लेट गया और नैना की चूत में हाथ लगाया तो वो एकदम गीली थी. मैंने एक गर्म चुम्मी उसके लबों पर की और उसके मोटे और सॉलिड मुम्मों को चूसा और फिर मैं उसकी टांगों को चौड़ा करके उनके बीच बैठ गया और अपने लंड को नैना की चूत में डाल दिया.

लंड को अंदर डाल कर मैं यूं ही लेटा रहा नैना के ऊपर और तब नैना ने खुद ही धक्के मारने शुरू कर दिए और मुझको नीचे आने का इशारा किया.मैं भी नैना के साथ ही उसके नीचे आ गया बगैर कनेक्शन तोड़े.

अब नैना मुझको ऊपर से पूरी ताकत के साथ चोदने लगी और पारो मेरे अंडकोष के साथ खेलने लगी, साथ ही उसकी ऊँगली नैना की गांड में गई हुई थी.थोड़ी देर में ही नैना हाय हाय… करती हुई झड़ गई और वो मेरे ऊपर से हट गई और उसकी जगह पारो मेरे ऊपर आ गई और अपने ख़ास अंदाज़ से मुझको चोदने लगी.

वो अपने दोनों घुटनों को नीचे मेरी दोनों तरफ रख कर सिर्फ अपनी चूत को मेरे लंड से जोड़ कर चुदाई की शौक़ीन थी.उसकी चुदाई भी बहुत धीरे धीरे से शुरू हुई और वो मुझ को बड़े प्रेम से चोदने लगी.उसके मोटे मुम्मे मेरे मुंह पर लटक रहे थे, मैं उनको चूसने में लग गया और उसकी चूचियों को मुंह में लेकर गोल गोल घुमाने से पारो को बड़ा मज़ा आ रहा था और वो काफी जोश से मुझको चोद रही थी लेकिन जल्दी ही वो भी झड़ गई और मेरे ऊपर से उतर कर मेरी दूसरी तरफ लेट गई.

नैना भी मेरे लंड से खेलने लगी, मैंने थोड़ी देर बाद उससे पूछा- क्यों नैना डार्लिंग, अपनी गांड जबरदस्ती मरवानी है क्या? या फिर अपने आप दे रही हो मुझको?नैना मेरे लंड को हाथ से ऊपर नीचे कर रही थी सो वो थोड़ी देर बाद बोली- छोटे मालिक, जबरदस्ती क्यों करवाएँ, हम तो खुद ही तैयार हैं गांड मरवाने के लिए! लेकिन यहाँ तो क्रीम या वैसलीन तो है नहीं, कहीं मेरी गांड फट ना जाए?मैं बोला- पारो की गांड में से उसकी चूत में से निकल रहे रस को लगा कर मज़े से चोदा था. क्यों पारो?

पारो बोली- वो तो ठीक है लेकिन फिर भी मेरी गांड कहीं छिल गई है, मुझको मज़ा तो बहुत आया लेकिन थोड़ा दर्द भी हो रहा है.मैं बोला- ठीक है, कमरे में जाकर नैना की गांड मार लेते हैं क्यों नैना?नैना धीरे से बोली- जैसे आपकी मर्ज़ी.

मैंने कहा- चलो फिर अंदर चलते हैं, बाहर का आनन्द तो ले ही लिया है.मैं उठ कर नंगा ही जाने के लिए तैयार हो गया लेकिन नैना कहने लगी- क्या करते हो छोटे मालिक? नंगे ही चल पड़े हो, कोई देख लेगा! पहले कपड़े पहन लेते हैं.मैं बोला- इस अँधेरी रात में कौन देखेगा और कोई देखता हुआ नज़र आया तो हम तीनों दो चादरों को अपने ऊपर करके ढक लेंगे ना!

नैना और पारो मुस्कराई और हम तीनों नंगे ही कमरे की तरफ चल पड़े.मेरे दोनों हाथ नैना और पारो के नंगे चूतड़ों के ऊपर रखे हुए उनको मसल रहे थे और मैं मुड़ मुड़ कर नैना और पारो के उछलते हुए मम्मों को भी बार बार देख रहा था.अँधेरी रात थी, हमको किसी ने नहीं देखा और हम आलखन से अपने कमरे में आ गए.

मैं बोला- दिल में बहुत इच्छा थी कि कभी गार्डन में नंगा ही घूमें, वो आज पूरी हो गई, दो खूबसूरत औरतों के साथ नंगे घूम कर!पारो के दिमाग़ की दाद देनी पड़ेगी जिसने चादरों के बारे में सोचा.पारो और नैना अपनी कोठरी में जाने लगी लेकिन मैंने कहा- आज रात हम तीनों एक साथ सोयेंगे.

और फिर मैंने वो रात नैना और पारो की नज़र कर दी और पहले नैना की गांड मारी देसी घी लगा कर और फिर दोनों की बारी बारी से चूत की चुदाई की, दोनों को कम से कम 3-3 बार चोदा और फिर हम तीनों थक हार कर एक दूसरे की गले में बाँहों को डाल कर एक साथ ही सो गए.

कहानी जारी रहेगी.
 
चूत चुदाई कॉलेज की मैडम और छात्रा की

अगले दिन कॉलेज गया तो सबसे पहले मैंने ऑफिस में पूनम की छुट्टी की अर्ज़ी दे दी और फिर अपने क्लास में आकर बैठ गया.

लंच के टाइम नेहा मुझ को कॉरिडोर में मिल गई और कहने लगी- वो उषा मैडम तुम को याद कर रही थी, उनसे मिल लेना लंच में!मैंने कहा- ठीक है, मिल लूंगा.फिर उसने इधर उधर देख कर कहा- सतीश यार फिर कब मिल रहे हो?मैं बोला- जब तुम कहो मिल लेंगे. अकेली मिलना चाहती हो कि कोई साथ और भी है?नेहा बोली- मैं और वो जेनी तुम्हारी खासम ख़ास!मैं बोला- जेनी मेरी ख़ासम ख़ास कैसे हो गई? मेरे लिए तो तुम ही ख़ास हो और हमेशा रहोगी.

नेहा खुश होते हुए बोली- सतीश तुम ना सिर्फ ‘उस’ में ही माहिर नहीं हो, तुम तो माहिर हो हर चीज़ में, हर फील्ड में!मैं भी मज़ा लेते हुए बोला-अच्छा बताना कौन कौन सी फील्ड में माहिर हूँ?नेहा बोली- तुम हर चीज़ में माहिर हो और कई चीज़ों में तो शातिर हो, जैसे अभी तुमने मेरी तारीफ की पर तुम भी जानते हो यह पूरी तरह से सही नहीं है, तुम्हारी तो ख़ास है जेनी और पूनम हम तो बस यूँ ही हैं!मैं हँसते हुए बोला- हर एक्शन का एक रीज़न होता है हो सकता है पूनम और जेनी के बारे में भी मेरा कोई रीज़न होगा. जब मिलोगी आलखन से तो बताऊँगा. और सुनाओ सब ठीक है ना?नेहा बोली- हाँ सब ठीक है लेकिन तुम यह क्यों पूछ रहे हो?मैं बोला- मुझको बड़ा फ़िक्र रहती है कि तुम्हारी ऊपर और नीचे की चीज़ें ठीक हैं ना?

नेहा बड़े ज़ोर से हंस दी और कॉरिडोर में जा रहे कई छात्र मुड़ कर देखने लगे कि क्या माजरा है लेकिन मैं बड़ा ही गंभीर बना रहा और बोला- नेहा जी, इस मामले में कभी कभी ऊपर नीचे के शरीर के हिस्सों में प्रॉब्लम हो जाती है. वैसे आप रात को चेक कर लेना सब पार्ट्स ठीक तरह से फंक्शन कर रहे हैं न?नेहा अभी भी हंस रही थी और हँसते हुए ही बोली- ठीक है चेक कर लूंगी लेकिन आपको यह शक क्यों हो गया?मैं बहुत ही रोनी सूरत बना कर बोला- वो इस लिए कि यह मेरे साथ दुर्घटना हो चुकी है जब हम वापस लौट रहे थे.अब नेहा सीरियस हो गई और बोली- सच्ची कह रहे हो क्या? वैसे क्या हुआ था तुम्हारे साथ?

मैं बोला- जैसे ही मैं स्टेशन पर उतरा तो मुझको ख्याल आया कि शायद मैं कुछ गाड़ी में तो नहीं भूल आया? इसलिए मैंने जल्दी से अपनी जेब और सामान चेक किया लेकिन सब ठीक था फिर मैंने जेब में दुबारा हाथ डाल कर फील किया तो यह जान कर हैरान रह गया कि मेरा ‘वो’ तो गाड़ी में ही छूट गया है, मैं भाग कर गाड़ी में गया और ढूंढा तो ‘वो’ सीट के नीचे पड़ा था.मैंने जेब से रुमाल निकाला और अपनी आँखें, जिनमें कोई आँसू नहीं था, पौंछने लगा.

अब तो नेहा का हंसी के मारे बुरा हाल था वो कभी दीवार को पकड़ कर हंस रही थी और कभी मेरे कंधे को पकड़ कर हंस रही थी.मैंने रोनी सूरत बनाए रखी.मैंने कहा- खैर छोड़ो, उषा मैडम से कब मिलना है मुझको?नेहा अब संयत हो गई थी और शान्ति से बोली- उन्होंने तुमको लंच ब्रेक में बुलाया है स्टाफ रूम में!मैंने नेहा के कान में कहा- ‘वो’ खो जाने वाली बात किसी को बताना नहीं प्लीज!और चलते चलते मैं उसके चूतड़ों में चिकौटी काटते हुए आगे बढ़ गया.

वो चौंक कर भागती हुई आई और मुझको भी मेरे चूतड़ों पर चकौटी काट कर भाग गई.मैंने मुड़ कर देखा और हँसते हुए स्टाफ रूम की तरफ चल दिया.

उषा मैडम मुझको देख कर बाहर आ गई और मुझको लेकर कॉलेज के लॉन पर आ गई.उषा मैडम ने कहा- निर्मल मैडम ने बात की होगी तुमसे?मैं बोला- जी मैडम जी, उन्होंने बात की थी, अब आप जैसा कहें वैसा ही कर लेते हैं.उषा मैडम बोली- आज कॉलेज के बाद फ्री हो क्या?मैं बोला- जी मैडम, फ्री हूँ.उषा मैडम बोली- तो मेरे घर आज चल सकते हो क्या?मैं बोला- जैसा आप कहें. कितने बजे चलना होगा?उषा मैडम बोली- यही 2 बजे छुट्टी के बाद निकल पड़ते हैं. छुट्टी के बाद तुम मुझको मेन गेट पर मिल जाना, ठीक है?मैं बोला- ठीक है मैडम.

फिर मैं वहाँ से वापस आ गया क्लास में!

तभी जेनी, डॉली और जस्सी मेरे क्लासरूम में आ गई और सब बड़ी सीरियस बनी हुई थी और बोली- सुन कर बड़ा दुःख हुआ आप की बहुत ही प्यारी चीज़ खो गई थी.मैं सीरियस होते हुए बोला- हाँ, लेकिन मुझको तो आप सब का ख्याल आ रहा था कि मैं आप सबकी सेवा कैसे कर पाऊँगा? मैं यही सोच सोच कर परेशान था.तब तीनों ने मिल कर कहा- शुक्र है कि ‘वो’ मिल तो गया, ईश्वर की बहुत ही कृपा हुई सतीश जी.मैं मुस्कराते हुए बोला- किस पर कृपा हुई? आप पर या मुझ पर?तीनो चहकते हुए बोली- हम सब पर!
 
मैं बोला- अब कभी मिलना तो हाल ज़रूर पूछ लेना भैया लाल जी का? वैसे कब मिल रही हो तुम उनको?तीनों बोली- मिलना मिलाना तो तुम्हारे हाथ में है या फिर उनके हाथ में है.तीनो हंसती हुई क्लास से चली गई.

छुट्टी के बाद मैं मेन गेट पर इंतज़ार करने लगा.थोड़ी देर में उषा मैडम की कार गेट पर आकर रुकी और मैडम ने मुझको इशारा किया कि अंदर आ जाऊँ.आगे की सीट पर मैडम के साथ कॉलेज की एक लड़की बैठी हुई थी तो मैं पिछली सीट का दरवाज़ा खोल कर कार में बैठ गया.दस मिन्ट में हम मैडम के घर पहुँच गए और उसके साथ हम तीनों अंदर चले गए.

काफी अच्छा सा मकान था और एक नई बनी साफ सुथरी कॉलोनी में था.मैडम ने बैठक में हमें बिठा दिया और खुद ही रसोई से शर्बत ले आई.

फिर उषा मैडम ने कहा- इनसे मिलो, यह अपने ही कॉलेज में बी. ए. की छात्रा है, इनका नाम सुधा है और सुधा, ये सतीश हैं.इन्टर फर्स्ट ईयर के छात्र हैं.हम दोनों ने एक दूसरे को नमस्ते की.उषा मैडम बोली- सुधा भी शौक़ीन लड़की है और मेरे साथ ही रहती है इसी मकान में, जब तुम्हारे साथ प्रोग्राम बना तो सुधा ने इच्छा जताई कि यह भी सतीश से मिलना चाहती है और सारे कार्यक्रम में हिस्सा लेना चाहती है अगर सतीश को कोई ऐतराज़ ना हो तो!मैं बोला- मैडम, जब आपको कोई ऐतराज़ नहीं तो मुझको भला क्या ऐतराज़ हो सकता है. और फिर मैं तो इस कहावत में विश्वास करता हूँ… मोर एंड मेरिएर!उषा मैडम बोली- शाबाश सतीश, मुझे तुमसे यही उम्मीद थी, चलो पहले खाना खा लें.

तब हम सब खाने वाले टेबल पर बैठ गए और सुधा और मैडम ने मिल कर जल्दी ही खाना टेबल पर सजा दिया.खाना बहुत ही अच्छा बना था और जब मैंने खाने की तारीफ की तो मैडम बोली- यह सब सुधा ने बनाया है और मैंने इसकी थोड़ी बहुत हेल्प की है.मैं सच्चे मन से खाने की तारीफ करने लगा और मैंने देखा कि सुधा के चेहरे पर ख़ुशी की एक झलक आई थी और फिर वो नॉर्मल हो गई.

खाना समाप्त करके मैडम मुझको लेकर अपने बेडरूम में आ गई और फिर वो थोड़ी देर के लिए दूसरे कमरे में चली गई.कुछ समय बाद दोनों उसी कमरे में से अपनी नाइटी पहन कर आई और मेरे दोनों तरफ आकर खड़ी हो गई.मैडम बोली- सतीश, क्या हम दोनों तुम्हारे कपड़े उतारने में मदद करें?मैं बोला- कर दीजिये. वैसे मैं अपने कपड़े सिवाय बाथरूम में, अपने आप कभी नहीं उतारता. पर उससे पहले आप दोनों सुंदरियाँ भी अपने नाइटी उतारे दें तो मुझ को बहुत आनन्द आएगा.

मैं कुर्सी पर बैठ गया और यह सेक्सी नज़ारा देखने लगा.दोनों ने एक साथ ही अपनी नाइटी उतार दी और वो दोनों ही एक साथ हलफ नंगी हो गई.

दोनों ही शारीरिक रूप से काफी सुंदर थी, सुधा का शरीर छोटी उम्र के कारण ज़्यादा भरा हुआ नहीं था लेकिन उसकी चूत बालों से भरी थी, छोटे मुम्मे और छोटे ही गोल चूतड़ों से वो एकदम कमसिन लड़की लग रही थी..उधर उषा मैडम का जिस्म भरा हुआ और काफी गठा हुआ था जैसा कि मैं पहले भी देख चुका था और चूत एकदम सफाचट थी.

अब सुधा आगे बढ़ी और मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए, जब मेरे शरीर पर मेरा अंडरवियर ही रह गया तो मैंने तब उषा मैडम को घूर कर देखा और वो समझ गई और शर्माते हुए मुस्कराने लगी.जैसे ही सुधा ने नीचे बैठ कर मेरा अंडरवियर को उतारा तो मेरा खड़ा लंड एकदम आज़ाद होकर उछल कर उसके मुंह पर जाकर लगा और डर के मारे चिल्ला पड़ी और जमीन पर गिर गई.

उषा मैडम ज़ोर से हंस पड़ी लेकिन मैं संयत रहा और हाथ पकड़ कर मैंने सुधा को ऊपर उठाया और खींच कर उसको अपने सीने से लगा लिया और उसके लबों पर एक मधुर चुम्बन किया.फिर मैं बोला- सुधा जी, कहीं लगी तो नहीं आपको? मैंने इस साले को कई बार मना किया है कि ऐसे मत उछला कर लेकिन यह ससुर मानता ही नहीं. वैसे यह इसकी प्यार की थपकी है.

अब सुधा भी ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी- वाह सतीश राजा, मारा भी तो अपने लंड से, बहुत खूब!

मैंने भी एक भेद भरी नज़र उषा मैडम पर डाली और बोला- सुधा, तुम अकेली ही नहीं हो, इसके शिकार कई और भी बन चुके हैं इस के थप्पड़ों के और इकी प्यार की थपकी के.उषा मैडम ने अपनी नज़र नीचे झुका ली लेकिन उनके लबों पर भी एक हलकी सी मुस्कान थी.

मैंने उषा मैडम के सामने झुक कर कहा- ऐ बेगमाते ऐ हिन्द, इस नाचीज़ खादिम के लिए क्या हुक्म है?उषा मैडम भी उसी लहजे में बोली- ऐ ग़ुलाम, तुम आज मेरी और इस लौंडिया की हर तरह से मुराद पूरी करो!मैं भी झुक कर बोला- जो हुक्म मेरी आका!

तब मैडम ने मुझको अपने नज़दीक आने का इशारा किया और मैं सुधा को साथ लेकर मैडम के पास चला गया.मैंने जाते ही सबसे पहले मैडम के लाल होटों को अपने लबों में ले लिया और उनको चूसने लगा.
 
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