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निर्मला मैडम से उनके नंबर कुछ ज़्यादा ही थे और वो उम्र के हिसाब से 27-28 साल के आस पास रही थी, उनके नयन नक्श काफी तीखे थे हालांकि चेहरे का रंग कुछ गंदमी सा था.
मैं बोला- मैडम, अब क्या हुक्म है मेरे लिए?निर्मला मैडम बोली- उषा मैडम के साथ पहले करो क्यूंकि इसके पति ने इसको छोड़ रखा है और कई सालों से इनको कोई अच्छा साथी नहीं मिला. मैं चाहती हूँ कि इतने सालों से जो कमी यह महसूस कर रही थी, उसे कुछ हद तक तुम पूरी करने की कोशिश करो.
मैं बोला- जैसे आप कहें, उषा मैडम को प्रसन्न करके मुझको बड़ी प्रसन्नता होगी लेकिन यह स्थान क्या इस काम के लिए उचित है?निर्मला मैडम बोली- हाँ यह तो है, लेकिन आज तुम न उषा मैडम को अपनी चुदाई का नमूना पेश कर दो और वापस पहुँच कर हम फिर प्रोग्राम बनायेंगे.यह कह कर मैडम मुझको लेकर उषा मैडम के पास पहुँची और मेरे को और उषा को खुद एक टाइट जफ़्फ़ी में बाँध लिया.अब मैंने पहले उषा को और फिर निर्मला के लबों पर गर्म चुम्मी कर दी.
निर्मला मैडम ने उषा को मेरे पास धक्केल दिया और खुद अपने पलंग की तरफ जाने लगी लेकिन मैंने उनका हाथ पकड़ कर रोक दिया और इशारा किया कि वो भी उषा के साथ उनके चूतड़ों आदि को हाथ फेर कर तैयार करे!
निर्मला ने वैसा ही करना शुरू किया, वो उनके चूतड़ों को सहलाने लगी और मैं उषा के मुम्मों को चूमने लगा. एक ऊँगली उनकी चूत के अंदर डाल कर उनकी भग को छेड़ने लगा और महसूस किया कि वो बेहद पनिया रही थी.
उषा ने भी अपन हाथ मेरे तने हुए लौड़े पर रख कर उसके साथ खेलना शुरू कर दिया था.मैं नीचे घुटनों के बल बैठ गया और अपने दोनों हाथों से उषा के चूतड़ों को पकड़ कर उसकी चूत को अपने मुंह के साथ जोड़ दिया और अपनी जीभ से उसकी चूत के लबों को और भग को चूसने लगा.
उषा के साथ शायद कभी किसी ने ऐसा नहीं किया था तो भड़के हुए घोड़े के समान उछल पड़ी और मेरे मुंह को हटाने लगी लेकिन मैं भी उनके चूतड़ों को मज़बूती से पकड़ कर बैठा था, उनकी चूत में भग को चूसता रहा.
अब मैं उठा और उषा को अपने हाथों में उठा कर उनके मुम्मों को चूसता हुआ सारे कमरे में घूमता रहा.उषा बार बार अपना सर इधर से उधर कर रही थी लेकिन मैं भी उनको छोड़ने वाला नहीं था.
अब मैंने उनको बेड में लिटा दिया और जल्दी से उनकी खुली हुई टांगों में बैठ कर अपना लौड़ा उनकी गीली चूत के मुँह पर रख कर थोड़ा ऊपर नीचे किया और फिर एक धक्के में लंड उस की चूत में घुसेड़ दिया.उफ्फ… क्या टाइट चूत थी! लगता था कि उनकी चुदाई काफी समय से नहीं हुई थी.
टाइट चूत का आनन्द लेते हुए मैंने धक्काशाही बहुत ही धीरे धीरे शुरू की. लंड को पूरा निकाल कर सिर्फ शिश्न का मुंह ज़रा सा अंदर रहने दिया और फिर एक हल्का धक्का मार के लंड को फिर से पूरा अंदर डाल दिया.यह सिलसिला कुछ देर चलते रहने दिया और फिर जब उषा मैडम की आँखें आनन्द से बंद हो गई तो मैंने अपनी चुदाई की स्पीड धीरे धीरे से बढ़ानी शुरू कर दी.
उधर निर्मला मैडम भी उषा के उरोजों को चूस रही थी और वो हाथों से निर्मला मैडम के सर को अपने चूचों के साथ कस कर जोड़ रही थी.अब उषा भी नीचे से हर धक्के का जवाब कमर उठा कर दे रही थी.
जब मैंने महसूस किया कि मैडम अब छूटने की कगार पर हैं तो मैं अपने दोनों हाथ उषा के चूतड़ों के नीचे रख कर फुल स्पीड से धक्के मारने लगा और उषा फुसफ़ुसाहट में बोल रही थी- मार दो साली को… बहुत तंग करती है यह हलखनखोर… फाड़ दो इसको… चीर दो इसको!मैंने धक्के मारते हुए निर्मला मैडम की तरफ देखा और उन्होंने अपना अंगूठा उठा कर यह इशारा किया कि बहुत ही अच्छा कर रहा हूँ और लगा रहूँ इसी तरह!
मैंने अब पूरी ताकत से तेज़ धक्के चलाने जारी रखे और जब उषा मैडम का शरीर ज़ोर से अकड़ा और फिर एकदम मुझको कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उनकी चूत खुलना बंद होना शुरू हो गई तो मैंने अपने धक्के रोक दिए.
जब कुछ मिनटों में वो ढीली पड़ कर लेट गई तो मैंने अपना लौड़ा उनकी चूत में से निकाला जो उषा मैडम के रस में पूरा भीगा हुआ था और जो उनके साथ में लेटी हुए निर्मला मैडम की चूत में डालने के लिए तैयार था लेकिन वो तो खुद ही घोड़ी बनी हुई थी तो मैं उठ कर उनके पीछे घुटनों के बल बैठ कर लंड राज को उनकी चूत के मुंह पर रख कर इंतज़ार करने लगा कि निर्मला मैडम सिग्नल करे तो मैं अपनी गाड़ी स्टार्ट करूँ.
कुछ क्षण जब मैं ऐसे ही बैठा रहा तो निर्मला मैडम ने पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखा और अपने चूतड़ों को हिला कर सिग्नल दिया कि शुरू कर दूँ!सिग्नल मिलते ही मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा और अपना गीला लंड निर्मला मैडम की चूत में घुसेड़ दिया.मैडम की गीली चूत में गीला लंड क्या गया, वो तो भड़क उठी और गर्म हुई घोड़ी की तरह हिनहिनाने लगी. मैंने भी आलखन से चोदना शुरू किया पहले धीरे और फिर तेज़ कभी पूरा बाहर और कभी पूरा अंदर.
मैं बोला- मैडम, अब क्या हुक्म है मेरे लिए?निर्मला मैडम बोली- उषा मैडम के साथ पहले करो क्यूंकि इसके पति ने इसको छोड़ रखा है और कई सालों से इनको कोई अच्छा साथी नहीं मिला. मैं चाहती हूँ कि इतने सालों से जो कमी यह महसूस कर रही थी, उसे कुछ हद तक तुम पूरी करने की कोशिश करो.
मैं बोला- जैसे आप कहें, उषा मैडम को प्रसन्न करके मुझको बड़ी प्रसन्नता होगी लेकिन यह स्थान क्या इस काम के लिए उचित है?निर्मला मैडम बोली- हाँ यह तो है, लेकिन आज तुम न उषा मैडम को अपनी चुदाई का नमूना पेश कर दो और वापस पहुँच कर हम फिर प्रोग्राम बनायेंगे.यह कह कर मैडम मुझको लेकर उषा मैडम के पास पहुँची और मेरे को और उषा को खुद एक टाइट जफ़्फ़ी में बाँध लिया.अब मैंने पहले उषा को और फिर निर्मला के लबों पर गर्म चुम्मी कर दी.
निर्मला मैडम ने उषा को मेरे पास धक्केल दिया और खुद अपने पलंग की तरफ जाने लगी लेकिन मैंने उनका हाथ पकड़ कर रोक दिया और इशारा किया कि वो भी उषा के साथ उनके चूतड़ों आदि को हाथ फेर कर तैयार करे!
निर्मला ने वैसा ही करना शुरू किया, वो उनके चूतड़ों को सहलाने लगी और मैं उषा के मुम्मों को चूमने लगा. एक ऊँगली उनकी चूत के अंदर डाल कर उनकी भग को छेड़ने लगा और महसूस किया कि वो बेहद पनिया रही थी.
उषा ने भी अपन हाथ मेरे तने हुए लौड़े पर रख कर उसके साथ खेलना शुरू कर दिया था.मैं नीचे घुटनों के बल बैठ गया और अपने दोनों हाथों से उषा के चूतड़ों को पकड़ कर उसकी चूत को अपने मुंह के साथ जोड़ दिया और अपनी जीभ से उसकी चूत के लबों को और भग को चूसने लगा.
उषा के साथ शायद कभी किसी ने ऐसा नहीं किया था तो भड़के हुए घोड़े के समान उछल पड़ी और मेरे मुंह को हटाने लगी लेकिन मैं भी उनके चूतड़ों को मज़बूती से पकड़ कर बैठा था, उनकी चूत में भग को चूसता रहा.
अब मैं उठा और उषा को अपने हाथों में उठा कर उनके मुम्मों को चूसता हुआ सारे कमरे में घूमता रहा.उषा बार बार अपना सर इधर से उधर कर रही थी लेकिन मैं भी उनको छोड़ने वाला नहीं था.
अब मैंने उनको बेड में लिटा दिया और जल्दी से उनकी खुली हुई टांगों में बैठ कर अपना लौड़ा उनकी गीली चूत के मुँह पर रख कर थोड़ा ऊपर नीचे किया और फिर एक धक्के में लंड उस की चूत में घुसेड़ दिया.उफ्फ… क्या टाइट चूत थी! लगता था कि उनकी चुदाई काफी समय से नहीं हुई थी.
टाइट चूत का आनन्द लेते हुए मैंने धक्काशाही बहुत ही धीरे धीरे शुरू की. लंड को पूरा निकाल कर सिर्फ शिश्न का मुंह ज़रा सा अंदर रहने दिया और फिर एक हल्का धक्का मार के लंड को फिर से पूरा अंदर डाल दिया.यह सिलसिला कुछ देर चलते रहने दिया और फिर जब उषा मैडम की आँखें आनन्द से बंद हो गई तो मैंने अपनी चुदाई की स्पीड धीरे धीरे से बढ़ानी शुरू कर दी.
उधर निर्मला मैडम भी उषा के उरोजों को चूस रही थी और वो हाथों से निर्मला मैडम के सर को अपने चूचों के साथ कस कर जोड़ रही थी.अब उषा भी नीचे से हर धक्के का जवाब कमर उठा कर दे रही थी.
जब मैंने महसूस किया कि मैडम अब छूटने की कगार पर हैं तो मैं अपने दोनों हाथ उषा के चूतड़ों के नीचे रख कर फुल स्पीड से धक्के मारने लगा और उषा फुसफ़ुसाहट में बोल रही थी- मार दो साली को… बहुत तंग करती है यह हलखनखोर… फाड़ दो इसको… चीर दो इसको!मैंने धक्के मारते हुए निर्मला मैडम की तरफ देखा और उन्होंने अपना अंगूठा उठा कर यह इशारा किया कि बहुत ही अच्छा कर रहा हूँ और लगा रहूँ इसी तरह!
मैंने अब पूरी ताकत से तेज़ धक्के चलाने जारी रखे और जब उषा मैडम का शरीर ज़ोर से अकड़ा और फिर एकदम मुझको कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उनकी चूत खुलना बंद होना शुरू हो गई तो मैंने अपने धक्के रोक दिए.
जब कुछ मिनटों में वो ढीली पड़ कर लेट गई तो मैंने अपना लौड़ा उनकी चूत में से निकाला जो उषा मैडम के रस में पूरा भीगा हुआ था और जो उनके साथ में लेटी हुए निर्मला मैडम की चूत में डालने के लिए तैयार था लेकिन वो तो खुद ही घोड़ी बनी हुई थी तो मैं उठ कर उनके पीछे घुटनों के बल बैठ कर लंड राज को उनकी चूत के मुंह पर रख कर इंतज़ार करने लगा कि निर्मला मैडम सिग्नल करे तो मैं अपनी गाड़ी स्टार्ट करूँ.
कुछ क्षण जब मैं ऐसे ही बैठा रहा तो निर्मला मैडम ने पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखा और अपने चूतड़ों को हिला कर सिग्नल दिया कि शुरू कर दूँ!सिग्नल मिलते ही मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा और अपना गीला लंड निर्मला मैडम की चूत में घुसेड़ दिया.मैडम की गीली चूत में गीला लंड क्या गया, वो तो भड़क उठी और गर्म हुई घोड़ी की तरह हिनहिनाने लगी. मैंने भी आलखन से चोदना शुरू किया पहले धीरे और फिर तेज़ कभी पूरा बाहर और कभी पूरा अंदर.