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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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मैंने देवकी से पूछा- कब गया था बाहर तेरा पति?देवकी शर्माती हुई बोली- यही कोई 2 साल पहले और तबसे लौट कर ही नहीं आया है.मैं बोला- तो तू दो साल से अछूती है क्या?वो और भी शरमाते हुए बोली- हाँ छोटे मालिक, क्या करें किस्मत ही खराब है ससुर!

नैना बोली- क्यों देवकी, छोटे मालिक तुझ को अगर अभी हरा कर दें तो तैयार है क्या?देवकी शर्म से और सांवली हो गई और कुछ बोले बगैर सर को हाँ में हिला दिया.नैना बोली- छोटे मालिक, आप देवकी को लेकर छत पर चले जाओ, मैं आती हूँ आपके पीछे.

मैंने देवकी को आगे आगे चलने को कहा और खुद उसके पीछे सीढ़ियाँ चढ़ने लगा.ऊपर पहुँच कर देखा, वहाँ एक छोटा सा कमरा बना हुआ है जिसमें एक दीवान नुमा बेड बिछा हुआ था.जैसे ही हम कमरे में पहुंचे मैंने देवकी का मुंह अपनी तरफ करके पूछा- क्यों देवकी, तुम तैयार हो ना?देवकी शरमाई, लेकिन बोली कुछ नहीं.मैंने फिर पूछा- बोलो देवकी, तैयार हो अपनी चूत चुदवाने के लिए?देवकी ने फिर हामी में सर हिला दिया.तब मैंने कहा- ऐसे नहीं देवकी, बोलो हाँ या ना?देवकी ने अपनी साड़ी के पल्लू में छुपा कर धीरे से बोला- हाँ छोटे मालिक.

जैसे ही उसने हाँ बोला, मैंने उसको पकड़ लिया और उसकी साड़ी का पल्लू उसके मुम्मों के ऊपर से हटा दिया, उसके ढीले ब्लाउज को ऊपर करके सांवले लेकिन सॉलिड और मोटे मुम्मे बाहर आ गए, मैं उनको चूसने लगा.साथ ही मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और उसकी धोती ऊँची करके उसकी चूत पर काले बालों में से साफ झलकते चूत के होटों को मसलने लगा.

.उसकी चूत काफी गीली हो चुकी थी, मैंने अपनी पैंट ढीली करके अपने खड़े लौड़े को निकाला और उसको देवकी के हाथ में दे दिया.देवकी खुश हो गई लंड को हाथ में लेकर और फिर मैंने बिना कुछ भी देर किये उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और उसकी टांगों को चौड़ा कर के धीरे धीरे धक्के मारने लगा.

उसकी चूत एकदम से टाइट थी क्यों कि वो दो सालों से इस्तेमाल नहीं हुई थी और मेरे लौड़े को पाकर चूत और भी निहाल हो गई थी.मैंने उसके सांवले लेकिन मोटे चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर ज़ोरदार चुदाई शुरू कर दी और जैसा कि मुझको उम्मीद थी, देवकी जल्दी ही झड़ गई और ज़ोर ज़ोर से हाय हाय करने लगी.

तब मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और उसकी चूत के पानी के पूरी तरह से झड़ जाने तक अपने लंड को अंदर डाल कर बैठा रहा.जब मैं उठने लगा तो देवकी ने मुझ को कसके जफ्फी मारी और मेरे होटों पर एक चुम्मी भी दे दी.

पहले मैंने देवकी को नीचे भेज दिया और फिर 5 मिन्ट बाद मैं भी नीचे आ गया.जैसे ही मैं हाल में पहुँचा वहाँ मुझ जूली मिल गई और पूछने लगी- कहाँ थे आप?मैंने कहा- मैनेजर हूँ ना, सब इंतज़ाम देखने पड़ते हैं. बोलो, कोई काम था मुझसे?जूली बोली- तुम ज़रा आना मेरे कमरे में, कुछ काम है.

मैं उसके पीछे चल दिया और जब हम उसके रूम में पहुँचे तो उसने झट से कमरे का दरवाज़ा बंद कर लिया और मुझको एकदम अपनी बाहों में ले कर बहुत ही टाइट जफ्फी मारी.फिर उसने अपने गरम होंट मेरे होंटों पर रख दिए और एक बहुत ही कामातुर जफ्फी मारी.मैं थोड़ा घबरा कर बोला- यह क्या कर रही हो जूली?जूली बोली- मैं तुमको फक करना चाहती हूँ.

कहानी जारी रहेगी.
 


डांसर की चूत चुदाई और छेड़छाड़


फिर उसने अपने गरम होंट मेरे होंटों पर रख दिए और एक बहुत ही कामातुर जफ्फी मारी.मैं थोड़ा घबरा के बोला- यह क्या कर रही हो जूली?जूली बोली- मैं तुमको फक करना चाहती हूँ!मैं बोला- अच्छा! फक करना चाहती हो तो आओ फिर, देख क्या रही हो?जूली बोली- क्या तुम नहीं चाहते मुझको फक करना?

मैं बोला- चाहता तो बहुत हूँ लेकिन क्या यह उचित समय होगा? बाहर तुम्हारी मैडम है, वो कहीं पकड़ ना लें, इसका डर नहीं है क्या?जूली बोली- डर तो है पर क्या करें फिर?मैं बोला- इन दोनों को जाने दो. फिर मैं तुमको जितना तुम चाहोगी उतना फक कर दूंगा.जूली बोली- ठीक है अभी हम सिर्फ छेड़छाड़ कर लेते हैं.मैं बोला- ठीक है लेकिन तुम्हारी रूम पार्टनर भी तो आ सकती है ना?जूली बोली- आने दो साली को, उसको भी लंड चाहिए और वो भी गाँव का मज़बूत लंड!

फिर उसने पैंट से मेरा लौड़ा निकाल कर देखना शुरु किया, जूली हैरानी से बोली- अरे यह तो खड़ा है… कितना बड़ा होगा यह?मैं बोला- यही कोई 7 इंच से कुछ ज़्यादा है.

अब मैं भी जूली के चूचे मसलने लगा, उसके मुम्मे काफी गोल और सॉलिड लग रहे थे. उसने फ्रॉक ड्रेस पहनी हुई थी और उसका फ्रॉक

केवल उसके घुटनों तक ही था.मैंने भी झट से उसके ड्रेस के नीचे अपना एक हाथ डाल दिया और उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा.

अब जूली बैठ कर मेरे लंड को लपालप चूसने लगी और मैं भी उसके मुम्मों को उसकी फ्रॉक से बाहर निकाल कर सहलाने लगा.थोड़ी देर में मुझको लगा कि किसी ने कमरे का दरवाज़ा खोला और चुपचाप हम को देख रही है.मैंने झट मुड़ कर देखा तो वो एक गोरी सी लम्बी लड़की वहाँ खड़ी थी और हमको बड़े ध्यान से देख रही थी.

जूली बोली- आओ सैंडी, देखो गाँव का छोकरा है कितने मोटे कॉक के साथ!मैंने सैंडी की तरफ देखा, वो काफी गोरी और सुडौल बदन वाली लड़की थी, उसने भी फ्रॉक पहन रखा था.

सैंडी बोली- यह तो सतीश है, यहाँ का मैनेजर… इस के साथ क्या कर रही है जूली? ज़मींदार साहिब का लड़का है यह, पकड़ी गई न, तो

वो लोग तुझको छोड़ेंगे नहीं.मैं बोला- रिलैक्स गर्ल्स, यहाँ कोई नहीं पकड़ता किसी को और मुझ को तो पकड़ने की किस में हिम्मत है! अच्छा अब बताओ क्या सैंडी

भी फक करेगी मुझको?

जूली ने सैंडी से पूछा- क्यों सैंडी, क्या मरजी है? फक करना है इसको?सैंडी बोली- अरे इस छोटे से छोकरे को क्या फक करना है जूली. तू भी ना हर किसी से फक करवाने के लिए तैयार हो जाती है?जूली ज़ोर से हंस पड़ी और सैंडी को कहा- इधर तो आ सैंडी, तेरे को कुछ दिखाना है!

सैंडी बड़ी बेदिली से जूली के पास गई और बोली- क्या री? क्या दिखाना चाहती है?जूली मेरा खड़ा लौड़ा निकाल कर सैंडी को दिखाने लगी. सैंडी मेरा खड़ा लंड देख कर अचरज में पड़ गई और उसको अपने हाथ में लेती

हुई बोली- यह असली है या नकली है?मैं बोला- जूली सैंडी, तुम दोनों फैसला करो, नहीं तो मैं तो जा रहा हूँ.और यह कह कर मैं अपने लौड़े को पैंट के अंदर डाल कर पैंट के बटन बंद करने लगा.

यह देख कर जूली मेरे लंड को फिर से निकाल कर उसको चूसने लगी.सैंडी भी उसके पास आई और बोली- जूली, प्लीज थोड़ा मुझको भी चूसने दे न प्लीज!

मैंने कहा- सैंडी मैडम, यू आर नोट परमिटेड टू टच इट! जब तुमको मेरे लंड पर विश्वास नहीं तो प्लीज इसको हाथ मत लगाना. आओ

जूली हम फक करें!मैं अब जूली को डीप किस करने लगा और साथ में उसके चूतड़ों को सहलाने लगा और फिर उसकी पैन्टी को नीचे खिसका कर उसको

बेड पर झुका कर मैं उसको पीछे से चोदने लगा.

सैंडी भी नज़दीक आकर सारा तमाशा देखने लगी. मेरा लौड़ा कैसे जूली की चूत में अंदर बाहर हो रहा था, यह सैंडी देख रही थी और

अपनी ऊँगली पैंटी के ऊपर से अपनी चूत पर चला रही थी.

मैंने जूली के दोनों नंगे चूतड़ों को कस कर अपने हाथों में पकड़ा हुआ था और पूरे जोश-औ-खरोश के साथ उसकी चूत चुदाई में मग्न

था.सैंडी ना जाने कब मेरे पीछे आकर मेरे अंडकोष से खेलने लगी लेकिन मैं बेखबर हुआ धक्के मारने में लगा हुआ था. जब मैंने महसूस

किया कि जूली अब झड़ने के करीब है तो मैंने धक्कों की स्पीड बेइंतहा बढ़ा दी, चंद ही मिनटों में जूली के शरीर की सिहरन एकदम से

तेज़ हो गई और वो बहुत ही जल्दी ‘ओह माय गॉड…’ कहती हुई झड़ गई.वो बेड में पूरी तरह से झुक गई और मैं भी उसके ऊपर पसर गया.

फिर मैं उठा और अपने लंड को पैंट के अंदर कर के कमरे के बाहर जाने लगा तो सैंडी मेरे सामने आ गई और बोली- मेरा भी कर दो न

प्लीज सतीश?मैं बोला- नहीं सैंडी, आज नहीं, फिर कभी सही… टेक केयर, बाई जूली!

मैं वहाँ से निकल कर बैठक में आ गया और देखा कि डांस का रिहर्सल चल रहा था और किसी का तो ध्यान नहीं था लेकिन अपनी

नैना ने मुझको सवालिया निग़ाहों से पूछा कि कहाँ थे अब तक?मैंने भी हाथ के इशारे से बता दिया कि सब ठीक है.जूली और सैंडी भी आ गई थी कमरे में.
 
ज़्यादातर लड़कियों ने कमीज और चूड़ीदार पजामी या फिर सलवार पहन रखी थी रिहर्सल के टाइम और उन सबके मुम्मे खुले हुए थे

उनकी कमीज़ों में, उनका हिलना और उछलना डांस के स्टेप्स के साथ मुझ को बड़ा ही आनन्द दे रहा था.काला हीरा यानि देवकी भी डांस देख रही थी और एक बार जब हमारी नज़र मिली तो मैंने उसको हल्के से आँख मार दी और यह देख

कर देवकी की बांछें खिल उठी थी.

जब डांस चल रहा था तो उनमें से कुछ लड़कियाँ अपनी बारी की इंतज़ार कर रही थी और उन में से तीन लड़कियाँ, मुझको लगा, धीरे

धीरे मेरे सामने आकर खड़ी हो गई थी.मैंने कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया लेकिन जब वो आहिस्ता से मेरे नज़दीक आने लगी तो मुझको शक हुआ कि कहीं ये मेरे पास तो नहीं

आना चाहती हैं?

अब मैंने महसूस किया कि उन दोनों ने अपने चूतड़ मेरे आगे जोड़ दिए थे और वो बहुत ही धीरे से मेरे लंड को टच करने की कोशिश

कर रही थी.अब मैं भी अपनी कमर को उनके चूतड़ों के साथ घिसने लगा और मेरा लंड जो फिर खड़ा हो गया था वो उनको टच कर रहा था.मैंने दोनों को ध्यान से देखा, दोनों ही काफी लम्बी और सुडौल शरीर वाली थी. उन्होंने भी वो डांस वाली ड्रेस पहन रखी यानि सलवार

कमीज, वो भी बहुत ही टाइट.

मैं उनके चूतड़ों पर हाथ रख कर धीरे से उनको सहलाने लगा और वो दोनों यह देख कर और भी करीब आ गई.अब मैंने अच्छा मौका देख कर बोला- मैं हूँ सतीश, आप लोगों का मैनेजर, इस कॉटेज में अगर कोई भी प्रॉब्लम हो तो बताना ज़रूर.दोनों ने पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखा और अपना हाथ बढ़ा दिया मुझसे मिलाने के लिए!मैंने भी उनसे हाथ मिलाया और तभी उनमें से एक लड़की ने मेरे हाथ में हल्की सी खुजली कर दी और मैं समझ गया कि ये दोनों तो

तैयार हैं.उनमें से ज़्यादा सुन्दर लड़की ने कहा- मेरा नाम सुनंदा है और इसका नाम रागिनी है और हम दोनों ही डांसर हैं.मैंने भी उनके कान के पास मुंह ले जाकर कह दिया- आप दोनों बहुत सुन्दर और काफी स्मार्ट लग रही हो.

दोनों बहुत ही खुश हो गई मेरी इस तारीफ से और दोनों ने एक दिलरुबा मुस्कान मेरी तरफ बखेर दी.तभी रूबी मैडम ने उन दोनों को आवाज़ दी और दोनों जल्दी से डांस फ्लोर पर चली गई.

उनके जाने के बाद मैं थोड़ी देर के लिए किचन भी गया और वहाँ काम कर रही औरतों और लड़कियों से बातचीत की और देखा कि

कौन सी लड़की या फिर औरत नई आई है.दो तीन औरतें मुझको नई लगी और फिर मेरी नज़र दुल्हनिया पर पड़ी जिसकी चूत का द्वार मैंने खोला था, वो मुझको देख कर

मुस्करा दी और जवाब में मैं भी मुस्करा दिया.

वहाँ से घूम कर मैं फिर डांस रिहर्सल को देखने खड़ा हो गया. मैं जहाँ खड़ा था, वहाँ कुछ डांसर लड़कियाँ भी खड़ी थी और मैं उनके

पीछे थोड़ा हट कर खड़ा हो गया.कुछ देर बाद वो लड़कियाँ भी पीछे होते हुए मेरे एकदम आगे आकर खड़ी हो गई और मुझको समझते देर नहीं लगी कि इनको भी मेरे

बारे में खबर लग चुकी है.

मैं चुपचाप खड़ा था और अपनी तरफ से कुछ भी नहीं कर रहा था लेकिन थोड़ी देर बाद मैंने नीचे देखा तो उन लड़कियों में से एक का

बायां हाथ मेरी पैंट के ऊपर से मेरे लंड को ढूंढ रहा था.जब उसको मेरे लंड का आभास मिल गया तो वो हाथ पहले धीरे धीरे से उसको बाहर से फील कर रहा था, लेकिन जैसे ही मेरा लौड़ा

अकड़ गया तो उसने अपना हाथ खींच लिया.जल्दी ही उस लड़की के हाथ को एक दूसरी लड़की के हाथ ने रिप्लेस कर दिया और पहले वाली लड़की वहां से ज़रा हट गयी और वो

दुसरे हाथ वाली ने उस की जगह ले ली.अब मैं ने देखा आगे खड़ी तीनो लड़कियां ने मिल कर एक दिवार सी बना दी मेरे आगे ताकि कोई उन के हाथ की हरकत को ना देखा

सके.क्यूंकि मैं तो इस सारे कार्यक्रम में आनंद ले रहा था सो उन को मेरी तो फ़िक्र थी नहीं बाकी कोशिश यह थी कि कोई आगे वाला न

देख रहा हो.अब हाथ वाली लड़की ने मेरी पैंट के बटन खोलने शुरू कर दिए और उस को कुछ मुश्कल होते देख कर मैं ने ही पैंट के बटन खोलने

में उन को थोड़ी सहायता देनी शुरू कर दी.उस लड़की के गोरे हाथ ने मेरा लंड को मेरे अंडरवियर के अंदर से निकाल कर उस को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया था.यह देख कर मैं भी कुछ मज़ा लेने के खातिर उस के चूतड़ों को छूने लगा और फिर आहिस्ता से अपनी ऊँगली उस की गांड से होते

हुए उस की उभरी हुई चूत में डालने की कोशिश करने लगा.उस ने पैंटी पहन रखी थी सो ऊँगली ज़्यादा दूर तक चूत के अंदर नहीं जा सकी लेकिन मैं पैंटी के बाहर से ही मसलने लगा.दूसरा हाथ दूसरी लड़की के नितम्बों पर फेरने लगा.तीनो ने मुझ को इस तरह घेरा हुआ था कि मैं कुछ भी करूँ वह सामने वालों को नहीं दिख रहा था.बारी बारी से तीनो ने मेरे लौड़े को फील किया और कुछ समय उस के साथ खेल कर वो तीनो एक दुसरे के सुपर्द कर रही थी, बड़े ही

संयम और यत्न से वो यह सेक्सी खेल मेरे लौड़े के साथ खेल रही थी.मेरे मुंह अपने आप उस समय निकल गया-माशाल्लाह क्या आपसी जोड़ और जुगाड़ है यारो वाहा वाहा.हमारा यह खेल कुछ देर तो ठीक चला लेकिन फिर रूबी मैडम की पैनी नज़र से हमारी यह खेल की छुपी हरकत और ज़्यादा ना छुप

सकी और उस ने उन तीनो लड़कियों को अपने पास बुला लिया.लेकिन मैं वाकये में उन तीनो से एक दम बहुत ही ज़्यादा प्रभावित हुआ जब वो तीनो ने मिल कर मेरी पैंट के अंदर मेरा लौड़ा डाल

कर पैंट के खुले बटन भी बंद कर दिए और फिर वो तीनो वहां से हटी!

कहानी जारी रहेगी.
 
लेकिन मैं वाकयी में उन तीनों से बहुत ही ज़्यादा प्रभावित हुआ जब वो तीनों ने मिल कर मेरी पैंट के अंदर मेरा लौड़ा डाल कर पैंट के खुले बटन भी बंद कर दिए और फिर वो तीनों वहाँ से हटी.

डांस रिहर्सल के बाद वो तीनों डांसर मेरे पास आई, मुझको चारो तरफ से घेर लिया और खूब प्यार से मेरा थैंक्स करने लगी.मैं कुछ हैरान था कि यह थैंक्स किस बात का कर रही हैं.फिर उनमें से एक तेज़ तरार लड़की ने कहा- सतीश यार, तुम्हारा कॉक तो बहुत ही रॉकी है यार! कहाँ से खरीदा है इसको?

मैं उनके मज़ाक के लहजे को समझ गया और उसी टोन में बोला- गाँव में हर शनिवार बाजार लगता है, वहीं से खरीदा है. तुमको यह पसंद है तो तुम ले लो, मैं दूसरा ले लूँगा!यह सुन कर बाकी खड़ी लड़कियाँ बड़े ज़ोर से हंस दी और सवाल पूछने वाली लड़की एकदम से झेंप गई.

फिर वही लड़की बोली- मेरा नाम आबिदा है, इन दोनों का नाम श्वेता और शिल्पी है. हम सब मुंबई में एक ही मोहल्ले में रहती हैं और फिल्मों में डांस का काम करती हैं.मैं बोला- मेरा नाम सतीश है, मैं लखनऊ में कॉलेज में पढ़ता हूँ और दशहरे की छुट्टियों में गाँव में आया हूँ और आपके बॉस ने मुझको यहाँ का सारा इंतज़ाम करने, देखने के लिए कहा है, यह कॉटेज मेरे पिता जी की है जो यहाँ के ज़मींदार भी हैं, आपको कोई प्रॉब्लम हो तो बताना ज़रूर.

आबिदा बोली- अच्छा हुआ आपने बता दिया, मेरे कमरे में एक बहुत ही अजीब सी प्रॉब्लम है, आप प्लीज उसको ठीक करवा दीजिये.मैं बोला- ठीक है, मैं अपने मिस्त्री को बुला लाऊँगा तो वो देख लेगा और ठीक कर देगा.आबिदा बोली- नहीं ना, आप अभी चल कर प्रॉब्लम तो देख लीजिये, फिर मिस्त्री को बुला कर ठीक करवा देना.मैं बोला- अभी तो आपका डांस रिहर्सल चल रहा है, बाद में दिखा देना जब आप को काम से फुर्सत हो तो.आबिदा बोली- नहीं, अभी काम नहीं चल रहा, यह टाइम चाय ब्रेक का है, आप चलिए प्लीज!

मैं बड़ी विवशता से उन तीनों के पीछे चल पड़ा और जब हम उनके काफी पीछे वाले कमरे में पहुँचे तो कमरे में घुसते ही उन्होंने दरवाज़ा बंद कर दिया.आबिदा ने सबसे पहले आगे बढ़ कर मुझसे आलिंगन कर लिया और फिर एक ज़ोरदार चुंबन मेरे होटों पर जड़ दिया और उसके हाथ मेरे लौड़े पर जाकर टिक से गए.

मैंने भी उसको चुम्बन दिया और बोला- देखो लड़कियो, इस तरह से मेरे साथ आप को कुछ भी मज़ा नहीं आएगा और आप में किसी को भी कोई सेक्स का पूरा आनन्द नहीं आएगा. मैं तुमसे वायदा करता हूँ कि मैं तुम सब को एक एक कर के पूरी तसल्ली दूंगा लेकिन आलखन से! इस लिए मैं तुम को सलाह दूंगा कि सब नैना दीदी से मिलो और वो प्लान करेगी कि कैसे किस को कब कहाँ फक करना है.आबिदा ने बाकी लड़कियों की तरफ देखा और उन दोनों ने मेरे साथ सहमति जताई.

अब मैं बोला- लेकिन थोड़ी सी किसिंग और छेड़ा छाड़ी तो अभी भी आप कर सकती हैं!फिर मैंने उन तीनों को बारी बारी से किस किया और उनके चूतड़ों, उनके मुम्मों को थोड़ा मसला और उन्होंने मेरे खड़े लौड़े को पैंट से निकाल कर थोड़ा सा चूमा और मेरे अंडकोष को सहला दिया..

फ़िर हम सब बैठक में आ गए जहाँ अभी भी रिहर्सल चल रहा था.मौका देख कर मैंने नैना को इशारा किया, वो मेरे पीछे लॉन में आ गई. लॉन में घूमते हुए मैंने उसको सब प्रॉब्लम बताई कि कैसे लड़कियाँ मुझको बार बार चुदाई के लिए घेर रही हैं.नैना बोली- मुझको यह मालूम था कि ऐसा होने वाला है, लेकिन मैं नहीं जानती थी कि ये सब इतनी बेशर्म और निडर हैं. छोटे मालिक, आप बेफिक्र रहो, मैं इन लड़कियों का कुछ हल सोचती हूँ.फिर हम दोनों अंदर बैठक मैं आ गए.

मुझको देख कर रूबी मैडम मेरे पास आई और बोली- सतीश क्या तुम डांस में दिलचस्पी लेते हो?मैं बोला- नहीं मैडम, मैंने आज तक कभी डांस नहीं किया अपने जीवन में!रूबी मैडम बोली- अच्छा, अगर तुमको हम डांस करने का मौका दें तो क्या तुम डांस करना चाहोगे?मैं बोला- अगर आप डांस करना सिखा दें तो अवश्य ही मैं डांस करने की कोशिश करूंगा.रूबी मैडम बोली- तो आओ किसी खाली कमरे में चलते हैं, मैं तुमको डांस करना सिखाने की कोशिश करती हूँ.

मैं रूबी मैडम को अपने छत वाले कमरे में ले गया, वहाँ एकान्त देख कर रूबी मैडम का चुदवाने का मूड बन गया लेकिन मैंने उनको याद दिलाया कि हम यहाँ डांस सीखने के लिए आये हैं.रूबी एकदम से संभल गई और मेरा हाथ पकड़ के उसने मुझको डांस स्टेप्स सिखाने शुरू कर दिए.और कुदरत का खेल देखिये कि मैं बहुत जल्द ही सारे बेसिक स्टेप्स सीख गया.

अब मैडम नीचे गई और एक डांसर को बुला लाई और मुझको उसके साथ डांस करने के लिए कहा.डांस फिर शुरू हुआ और मैडम ने ताली बजा कर मुझको उस लड़की डांसर के स्टेप्स का अनुसरण करने के लिए कहा जो मैंने बिना किसी गलती के पूरा कर लिया.
 
रूबी मैडम इतनी खुश हुई कि उसने जोश में मुझे गले लगा लिया और मेरे लबों पर एक गर्म चुम्मी जड़ दी.मैंने उस डांसर लड़की की तरफ देखा और उसकी आँखें रूबी मैडम के इस व्यवाहर से विस्फारित हो रही थी लेकिन रूबी मैडम ने उस लड़की को भी घेर कर फिर हम दोनों को एक टाइट जफ्फी मारी.

मैंने मौका देख कर उस डांसर लड़की के नितम्बों पर हाथ फेर दिया और उसको अपने आगोश में ले लिया और साथ में रूबी मैडम के लबों पर एक कामुक चुम्मी कर दी.

रूबी मैडम हम दोनों को लेकर नीचे बैठक में आई और मधु मैडम से फ़ख्र से बोली- लो मैडम, आपके लिए एक लड़का डांसर भी पेश है. ज़रा इसके स्टेप्स तो देखिये?रूबी के इशारे पर और ताली की थाप पर हम दोनों डांस करने लगे जिसको देख कर मधु मैडम हैरान हो गई और ज़ोर से बोली- म्यूजिक चलाओ जल्दी से.

तब ग्रामोफ़ोन पर गाना बजने लगा और मैं और वो डांसर लड़की रूबी मैडम के सिखाये स्टेप्स पर डांस करने लगे.हम दोनों डांस में इतने लीन हो गए थे कि अपनी सुध बुध भूल कर डांस करते ही रहे जबकि बाजा बंद हो चुका था.मधु मैडम ने ज़ोर से तालियाँ बजाई और उनके साथ बाकी सब लड़कियों ने भी वाह वाह की.

सन 1954 में फ़िल्मी डांस के स्टेप्स बड़े ही आसान और सीधे और लयदार हुआ करते थे आजकल के बहुत तेज़ और उछल कूद वाले स्टेप्स के बिल्कुल विपरीत.मधु मैडम भाग कर मेरे पास आई, मुझको गले लगा लिया और कहा- सतीश यार, तुमने हमारी एक बड़ी भूल को सुधार दिया वरना वो पंचोली साहिब तो हम सब को खा जाते. क्यों रूबी, थोड़ी और प्रैक्टिस करवाएँ इसको आज रात तो कल यह डांस के लिए तैयार हो जाएगा ना?रूबी और बाकी सब लड़कियों ने भी शोर मचा कर अपनी ख़ुशी जताई.

यह सब तमाशा नैना भी देख रही थी, उसने और गाँव की सब काम वालियों ने भी बड़ी ज़ोरदार तालियाँ बजाई.आबिदा और उसके साथी डांसर्स ने भी मुझको घेर लिया और कहा- सतीश जी, कमाल का डांस करते हैं आप तो.मैं सर झुकाये सबकी तारीफ कबूल करता रहा.

मधु मैडम ने कहा- सतीश, तुम आज रात को यहीं रुको और थोड़ी रिहर्सल करो ताकि कल हम शूटिंग शुरू कर सकें.मैं बोला- यस मैडम, जैसा आप कहें.यह सुन कर डांस वाली लड़कियों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई.

तभी नैना उन लड़कियों में से आबिदा और जूली वगैरह को साथ लेकर लॉन में चली गई और थोड़ी देर बाद वो वापस आई और मुझ को इशारे से अपने पास बुलाया.मैं और नैना भी लॉन में आ गए और वहाँ उसने मुझ को बताया कि सब लड़कियों को बता दिया है कि किस क्रम से उनकी चुदाई का नंबर लगाया जाएगा.

नैना बोली- यहाँ 12 लड़कियाँ हैं, उनमें से कितनी चुदवाने वाली हैं इसका पता आबिदा बेगम लगाएगी और फिर हर रात आप एक कमरे में रहने वाली दो लड़कियों को चोदा करोगे, यह काम तकरीबन एक घंटे में खत्म करके हम अपने हवेली चले जाया करेंगे. हर चुदाई के मौके पर मैं खुद रहा करूँगी आपके साथ.

मैं बोला- शाबाश नैना डार्लिंग, फिर आज किसकी बारी है? लेकिन नैना डियर वो जो हवेली में बैठी हुई हैं मधु और रूबी भी तो चुदना मांगेंगी. उनका क्या करेंगे?नैना बोली- हर रात आप दोनों में से एक को चोद दिया करना, बस हो गया काम! आज रात आप डांस के लिए तो रुक ही रहे हैं तो खाना खाकर आपको मैं खुद आबिदा और उसकी रूम पार्टनर के पास ले जाऊँगी.मैं बोला- ठीक है, रात का खाना बन गया क्या?

नैना बोली- हाँ छोटे मालिक, ये सब तो मीट खोर हैं, सब काम वालियाँ इनको शाम 7 बजे खाना परोस कर और बर्तन इत्यादि मांज कर अपने घरों में चली जाएंगी. मैंने इन के लिए कार का बन्दोबस्त कर रखा है तो इनको कोई कष्ट नहीं होने देंगे.

खाना खाने के बाद तो डांस रिहर्सल होगी जिसमें मुझ को भी आना था तो चुदाई का कार्यक्रम तो उसके बाद ही हो पायेगा.

कहानी जारी रहेगी.
 
साथ बने रहने के लिये आप सब का बहुत धन्यवाद
 
खाना खाने के बाद तो डांस रिहर्सल होगी जिसमें मुझको भी आना था तो चूत चुदाई का कार्यक्रम तो उसके बाद ही हो पायेगा.डांस रिहर्सल रात काफी देर तक चलता रहा और जब तक रूबी मैडम ने अपनी संतुष्टि नहीं जताई तब तक यह डांस रिहर्सल चलता रहा और इस दौरान मुझको तकरीबन सब लड़कियों के साथ डांस करना पड़ा और डांस करते हुए कई मौके मिले जब उन लड़कियों ने मेरे लंड को पैंट के बाहर से छुआ और मैं भी हर लड़की के चूतड़ों और मुम्मों को छूने से बाज़ नहीं आया.कई ने आँखों आँखों में ही चुदाई के लिए निमंत्रण दिया और मैंने भी उनकी सलवार के बाहर से चूत पर तेजी से हाथ लगा कर अपनी रज़ामंदी ज़ाहिर की.

थोड़ी देर बाद रूबी मैडम चली गई हवेली और पीछे रह गए हम सब!हम सब खाने से फारिग हो गए थे तो बैठक में आकर बैठ गए और हलवा खाते हुए नैना ने बताया- अभी तो मैंने आबिदा के कमरे में जाना है जहाँ उसकी सहेली रोज़ी भी मिलेगी और उन दोनों का काम करना है.

थोड़ी देर बाद नैना ने इशारा किया तो मैं नैना के साथ उन दोनों के कमरे की तरफ चल पड़ा जहाँ पहुँच कर देखा तो दोनों ने अपनी बहुत ही पतली झीनी सी नाइटी पहन रखी थी जो मुश्किल से उनके घुटनों तक ही आ रही थी और दोनों ने नाइटी के अलावा कुछ भी नहीं पहन रखा था.दोनों की नाइटी काफी पारदर्शी थी, उन दोनों के जिस्म की साफ़ झलक मेरे लौड़े को मिल रही थी और उसके मुंह से लार निकलना शुरू हो गया था.कमरे में घुसते ही आबिदा और रोज़ी ने मुझको घेर लिया और दोनों ने खूब आलिंगन और चुम्बनों की वर्षा कर दी.नैना ने उन दोनों को कहा- आप अपनी नाइटी उतार दें!

जब उनकी नाइटी उतर गई तो वो दोनों ही बहुत सुन्दर लगी मुझको खासतौर पर आबिदा, जिसका रंग एकदम गोरा था और शरीर की उठान एकदम बढ़िया थी. उसके मम्मे गोल और सॉलिड लग रहे थे और चूत भी एकदम सफाचट थी और उसके नितम्ब भी गोल और उभरे हुए थे वो बिल्कुल एक फ़िल्मी मूर्ति लग रही थी.

उसके साथ खड़ी हुई रोज़ी भी काफी हसीन थी और बहुत ही खूबसूरत शरीर की मालिक थी, उसके उन्नत उरोज और एकदम गोल और मोटे चूतड़ और सफाचट चूत एक कामुक नज़ारा पेश कर रहे थे.रोज़ी स्वयं ही आगे आकर मेरे भी कपड़े उतारने लगी और जब वो मेरे अंडरवियर तक पहुंची तो मैंने और नैना ने एक दूसरे की तरफ देखा और इंतज़ार करने लगे कि देखें ‘अब क्या होगा!’

लेकिन रोज़ी शायद कई बार इसी तरह यह काम कर चुकी थी तो वो होशियार थी और जैसे ही मेरा लौड़ा उछल कर बाहर आया तो रोज़ी ने झट से लपक कर उसको अपने मुंह में ले लिया.मैंने और नैना ने ‘वाह वाह’ की और कहा- कमाल की फुर्ती दिखाई है रोज़ी ने!

आबिदा ने जल्दी से मुझको पकड़ लिया और अपने रसीले होटों को मेरे होटों पर रख कर एक ज़ोरदार जफ्फी मारी.मैंने भी एक हाथ उसके गोल मुम्मों पर फेरने के लिए छोड़ दिया और दूसरे से उसकी चूत में ऊँगली चलाने लगा.

उधर नैना भी नंगी हो चुकी थी, उसने रोज़ी को पकड़ लिया और उसके होटों को चूसने लगी. रोज़ी ने नैना के मोटे मुम्मों को मसलना शुरू कर दिया और इस तरह नैना ने रोज़ी को भी साथ साथ मज़ा देना शुरू कर दिया जिससे मेरा काम बहुत ही आसान हो गया.

आबिदा बहुत अधिक कामुक हो चुकी थी और बार बार मेरे लौड़े को पकड़ कर उसको खींच रही थी.मैंने उसका इशारा समझ कर उससे पूछा- कैसे चुदवाना पसंद करोगी यानि कौन सी पोजीशन से तुमको चोदूँ?आबिदा बोली- मैं तुम्हारे ऊपर बैठ कर चोदूंगी.मैं बिस्तर पर लेट गया और मेरे लंड हवा में लहलहा रहा था.

आबिदा ने दोनों टांगें मेरी दोनों और रख कर बीच में बैठ कर मेरे खड़े लंड को अपनी लबलबाती चूत के मुंह पर रखा और धीरे से मेरे लंड को चूत के अंदर ले गई और फिर झुक कर उसने मेरे लबों को अपने होटों द्वारा चूसना शुरू कर दिया, ऊपर से अपनी कमर को ऊपर नीचे कर के उसने मुझको चोदना शुरू कर दिया.
 
उसकी टाइट लेकिन एकदम रसीली चूत ने मेरे लंड को प्यार से अंदर बाहर आने दिया और मैंने उसके गोल कमर को हाथों से पकड़ कर मैं भी नीचे से अपनी कमर उठा उठा कर उसकी चुदाई का जवाब देने लगा.उधर रोज़ी नैना की चूत को बड़े प्यार से चाट रही थी, नैना ने उसके सर को कस कर अपने हाथों से पकड़ रखा हुआ था और अपनी चूत को ऊपर उठा कर उसने रोज़ी के मुंह के साथ जोड़ दिया थावो दोनों भी चुदाई में पूरी मस्त थी और एक दूसरी को पूरी आग लगा रही थी.

अब आबिदा ने जल्दी जल्दी से ऊपर से धक्के मारने शुरू कर दिए और थोड़ी देर में ही उसकी चूत से दूधिया पानी बहने लगा लेकिन वो अभी भी धक्के मारने में मस्त थी.मैंने महसूस किया कि आबिदा जल्दी ही छूटने वाली है तो मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत में डाल कर उसकी भग को मसलना चालू कर दिया और ऐसा करते ही आबिदा की चूत में उबाल आ गया और उसने अपनी कमर मेरे लौड़े के साथ जोड़ कर एक ज़ोरदार हुंकार भरी और वो ज़ोर से कांपती हुई स्खलित हो गई.उसने छूटने के साथ मुझको कस कर अपनी छाती से चिपका लिया और मेरे होटों से अपने होटों को जोड़ कर मेरा रस पीने लगी.

तब तक नैना ने रोज़ी को एक बार छूटा दिया था और वो फिर भी मेरे लौड़े की प्यासी थी. जैसे ही आबिदा मेरे ऊपर से हटी, रोज़ी मेरे साथ आकर लेट गई और मेरे लौड़े को झुक कर चूसने लगी.थोड़ी देर मैंने उसको लंड को चूसने दिया और फिर उसको घोड़ी बनने के लिए कहा, वो झट से घोड़ी बन गई और मैंने उसके पीछे बैठ कर उसकी गीली चूत में अपने तना हुआ लौड़ा घुसेड़ दिया, पहले थोड़ा से और फिर धीरे धीरे पूरा का पूरा अंदर डाल दिया और फिर हल्के हल्के धक्के शुरू कर दिये.

मैंने उसके गोल और गोरे चूतड़ों को अपने दोनों हाथों में पकड़ रखा था और आहिस्ता आहिस्ता लंड वाला पिस्टन उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा.रोज़ी को अब बहुत आनन्द आना शुरू हो गया और वो बिदकी घोड़ी की तरह अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी.हम दोनों ने धक्के मारने की लय को एक समान कर लिया और फिर कभी तेज़ और कभी धीरे धक्के मारने का सिलसिला जारी हो गया.

मैंने पूरा लौड़ा अंदर डाल कर फिर उसको धीरे से बाहर निकाल कर फिर पूरा अंदर धकेलने का चक्कर चालू कर दिया और उसकी स्पीड भी एकदम से तेज़ करते हुए मैं उसके चूतड़ों पर एक हाथ से थापी भी मारने लगा.रोज़ी ने अपना सर नीचे की तरफ करके अपने गोल चूतड़ों को मेरे लंड से बार बार जोड़ते हुए यह इशारा दे दिया कि वो झड़ने के करीब है और मैंने अब अपनी अंधाधुन्ध स्पीड को चालू करते हुए शीघ्र ही रोज़ी को उसकी मंजिल पर पहुँचा दिया.

रोज़ी का जब छूटा तो वो अपने सर को इधर उधर करने लगी और उसकी चूत का सिकुड़ना भी जारी हो गया, उसकी चूत की पकड़ मेरे लंड पर तीव्र हो गई.वो बिस्तर पर लेट चुकी थी और मैं भी उसके ऊपर ही पसरा हुआ था.

जैसे ही रोज़ी की चूत की पकड़ कुछ ढीली हुई और मेरा लंड चूत के बाहर आया तो मैं उठा और नैना जो साथ ही नंगी ही लेटी हुई थी उसकी की टांगों के बीच में बैठ कर अपने लंड को उसकी चूत में डाल दिया और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा.नैना ने मुझको कस कर अपने शरीर से चिपका लिया और मेरे धक्कों का जवाब देने लगी.

रोज़ी के साथ लेस्बो सेक्स करके वो इस वक्त काफी गर्म हो चुकी थी तो ज़्यादा देर टिक ना सकी और जल्दी ही धराशायी हो गई और मुझको गहरे चुम्बन के बाद उसने छोड़ दिया.मैं उठा और अपने गीले लौड़े को हाथ में लेकर उसको हवा में लहलहाते हुए सारे कमरे में घूमने लगा.

आबिदा यह सारा दृश्य देख रही थी और उसकी आँखें हैरानी से खुली की खुली रह गई.आबिदा ने नैना से पूछा- अरे सतीश का लंड तो अभी भी खड़ा है… यह कैसे हो सकता है? सतीश क्या तुम अफीम खाते हो?नैना बोली- छोटे मालिक कुछ भी नशे की चीज़ नहीं खाते या पीते हैं और यह जो तुम लंड का नज़ारा देख रही हो वो तो जारी रह सकता है जब तक छोटे मालिक चाहें. यह इनको कुदरती वरदान है लेकिन यह इसका दुरूपयोग कभी नहीं करते.

अब मैं उठा, नैना को एक जफ्फी मारी और अपने कपड़े पहनने लगा और तब तक नैना भी पानी साड़ी और ब्लाउज पहन चुकी थी.रोज़ी और आबिदा दोनों ही नंगी उठी और मुझको एक बड़ी भाव भीनी चुम्मी और जफ्फी दी दोनों ने और बोली- सतीश यार, तुम तो कमाल की चीज़ हो, अगर हमारा बस चले तो हम तुमको अपने साथ ही ले जाएँ.नैना बोली- ऐसा कभी न करना, क्यूंकि दुनिया में बहुत सी प्यासी औरतें हैं जिनको सतीश जैसे लंड की ज़रूरत अक्सर पड़ती रहती है.

फिर हम दोनों बाइक पर बैठ कर घर आ गए और वहाँ पर्बती ने हवेली का दरवाज़ा खोला और हम दोनों अंदर आकर अपने कमरे में चले गए.नैना रसोई में गई और मेरे लिए ख़ास मसालेदार दूध ले कर आई जिसको पीने के बाद मुझ में शक्ति की एक लहर सी दौड़ गई.नैना बोली- छोटे मालिक, अब कुछ दिन तो आपको यह दूध तो पीना पड़ेगा. खासतौर से जब तक यह फ़िल्मी पार्टी यहाँ है. अच्छा अब मैं चलती हूँ.

यह कह कर वो जाने लगी तो मैंने उसको पकड़ लिया और एक बड़ी कामुक जफ्फी और लबों पर एक चुम्बन दे दिया.

कहानी जारी रहेगी.
 


अनजान औरत द्वारा मेरा देह शोषण


नैना बोली- छोटे मालिक, अब कुछ दिन तो आपको यह दूध तो पीना पड़ेगा, खासतौर से जब तक यह फ़िल्मी पार्टी यहाँ है. अच्छा अब मैं चलती हूँ.यह कह कर वो जाने लगी तो मैंने उसको पकड़ लिया और एक बड़ी कामुक जफ्फी और लबों पर एक चुम्बन दे दिया.

मैं बिस्तर पर आज सिर्फ अपने अंडरवियर में ही लेट गया क्यूंकि मैं काफी थक गया था और मुझको काफी सख्त नींद आई हुई थी.ना जाने कब मेरी नींद खुली तो मैंने महसूस किया कि कोई हाथ मेरे शरीर पर रेंग रहा है लेकिन मैं दम साधे लेटा रहा यह देखने के लिए कि यह किसका हाथ है.

थोड़ी देर इसी तरह मेरे शरीर पर रेंगने के बाद उस हाथ ने मेरे लंड को छेड़ना शुरू किया और जल्दी ही मेरा लंड एकदम से अकड़ गया लेकिन मैं बिल्कुल कुछ भी हरकत किये बगैर दम साधे लेटा रहा.फिर एक मुंह मेरे लंड को लेकर उसको धीरे धीरे चूसने लगा और जैसे जैसे वो मुंह मेरे लंड को चूसता जा रहा था, लंड और भी अकड़ता जा रहा था.

अब जैसे ही लंड को छोड़ कर मुंह हटने लगा, मैंने झट से उसको अपने हाथों में पकड़ लिया और उसके अभी भी गीले होटों पर अपने होंट रख दिए.घने अँधेरे में मुंह का मालिक एकदम अकचका गया और अपने मुंह को छुड़ाने की कोशिश करने लगा.मैंने अब अपने हाथ उस एकदम नंगे शरीर के मालिक के चूतड़ों पर रख दिए और उनको हल्के हल्के सहलाने लगा.मैंने यह महसूस किया कि शरीर किसी हसीना का ही हो सकता है.

मुंह की मालकिन ने अब मुंह छुड़ाने की कोशिश छोड़ दी थी और वो अब मेरे द्वारा की गई छेड़छाड़ का आनंद ले रही थी.अब मैं अपने हाथ उसके नितम्बों से हटा कर उसके मुम्मों पर फेरने लगा और उसके चूचुकों को छेड़ने लगा जो अब एकदम से सख्त हो चुके थे.कमरे में उस रात्रि बहुत ही घना अन्धकार था, शायद वो अमावस्या की रात थी इसी कारण हम एक दूसरे के अंग भी नहीं देख पा रहे थे.

अब उस अनजान औरत ने मुझको आलिंगनबद्ध किया और मेरे शरीर को चूमते हुए उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुंचा दिया. अगले ही कुछ क्षणों में वो औरत मेरे दोनों तरफ पैर रख कर मेरे ऊपर बैठ गई और मेरे लौड़े को हाथ से पकड़ कर उसने अपनी गीली चूत के मुंह पर रख कर ऊपर से ज़ोर का धक्का दिया और फिर उसने बड़े ही प्रेम से मेरी चुदाई शुरू कर दी और मैं उसके गोल गोल मुम्मों को अपने हाथों में लेकर मसलने लगा.

वो कभी कभी झुक कर मेरे होटों को भी चूस रही थी और मैं भी उसके मम्मों को कभी कभी चूस लेता था.यह सिलसिला कितने समय चला, यह मुझको मालूम नहीं लेकिन ऊपर नीचे होते हुए वो एकदम रुक गई और फिर उसका शरीर ज़ोर से अकड़ा, फिर वो एकदम ढीली पड़ गई और जल्दी ही मेरे ऊपर ही पसर गई..

तब मैंने उसको अपने ऊपर से हटा कर बिस्तर पर लिटा दिया और फिर मैंने स्वयं उसकी टांगों को चौड़ा करके खुद उसको चोदने लगा और इतनी तेज़ और ज़ोरदार चुदाई की उस अनजान औरत की कि मुझको यकीन है कि वो ज़रूर एक दो बार ज़रूर झड़ गई होगी.फिर मैं उसके ऊपर से हट कर बिस्तर पर लेट गया और बड़ी शीघ्र ही मुझको नींद ने आन घेरा.

सवेरे जब मैं उठा तो वो औरत जा चुकी थी, मैं बहुत हैरान हुआ कि यह कौन हो सकती है? क्या यह रूबी थी या फिर मधु मैडम थी? इस राज़ को मैं आज तक नहीं जान सका.

सुबह जब नैना चाय देने आई तो मैंने रात वाले किस्से का ज़िक्र उससे भी किया लेकिन वो भी इस पहेली को नहीं सुलझा सकी.फिर हम दोनों ने मिल कर कमरे और बिस्तर को पूरी तरह से छान मारा लेकिन कोई सुराग नहीं मिला.

अगले दिन सारा दिन नदी किनारे डांस होता रहा और थोड़ी शूटिंग भी की कैमरा ऑपरेटर्स ने!उस दिन मुझको महसूस हुआ कि कितना कठिन होता है फिल्म का निर्माण करना.

एक एक शॉट को पूरा करने में कई घंटे लग जाते थे और कितनी बार एक ही तरह के डांस स्टेप्स को दोहराना पड़ता था. आज सब डांसर्स ने अपनी पूरी डांस वाली ड्रेस पहनी हुई थी और मुझको भी गाँव के जवान लड़के की पोशाक पहना रखी थी.

लंच ब्रेक में मैं नदी किनारे अपने गुप्त स्थान की तरफ चला गया जो वहाँ से थोड़ी दूर था. सोचा था कि वहाँ जाकर थोड़ी देर सो लूंगा लेकिन जैसे ही मैं उस जगह घुसा तो मेरे पीछे सैंडी नाम की डांसर भी घुस आई. मैं चौंक गया कि यह कैसे यहाँ पहुँच गई?

पूछने पर सैंडी ने बताया कि वो तो मेरे पीछे आते हुए यहाँ तक पहुँच गई थी.मैं बोला- कहो, कैसे आना हुआ यहाँ?सैंडी बोली- मैं तुमको फक करना चाहती हूँ अभी यहाँ पर!मैं बोला- यहाँ तो खतरा है सैंडी, कोई भी आ सकता है यहाँ.सैंडी बोली- कोई बात नहीं, प्लीज फक करो मुझको!और सैंडी मुझको पकड़ कर होटों पर चूमने लगी और गाँव वालों के स्टाइल की छोटी सी धोती में से मेरे लंड को ढूंढने लगी.

फिर उसने मेरी धोती ढीली कर दी और मेरे लंड को अंडरवियर से निकाल लिया और उसको अकड़ा हुआ देख कर खुश हो गई. उसने भी गाऊँ वाली औरतों की तरह छोटा सा लहंगा पहन रथा था जो उसके घुटनों तक आ रहा था और उसके नीचे भी एक छोटी सी टाइट पजामी पहन रखी थी.

उसने खुद ही अपनी पजामी को नीचे कर दिया और मेरे हाथ को अपनी चूत के ऊपर रख दिया.उसकी सफाचट मुलायम चूत पर हाथ फेरते हुए मैंने उसको एक बहुत ही कामुक चुम्बन दे दिया.उसके मम्मों पर हाथ लगाया तो वो काफी कठोर महसूस हुए और उसके चूतड़ भी गोल और उभरे हुए लगे.

अब मैं पूरे जोश में आ चुका था तो मैंने उसको घोड़ी बनाया और उसकी चूत के मुँह के ऊपर अपना लौड़ा टिका कर ज़ोरदार धक्का मारा और वो पूरा का पूरा अंदर चूत में समा गया.मैंने उसको धीरे धीरे चोदना शुरू किया क्यूंकि उसकी चूत अभी पूरी गीली नहीं हुई थी. थोड़ी देर हल्के धक्कों के बाद ज़ोरदार धक्कों को शुरू कर दिया क्यूंकि किसी वकत भी कोई आ सकता था.

मैंने धक्कों की स्पीड एकदम तेज़ कर दी और सैंडी जल्दी ही तिलमिलाती हुई झड़ गई लेकिन मैंने अपनी चुदाई जारी रखी और सैंडी को भी अब बेहद मज़ा आने लगा था, वो बार बार अपनी गांड को आगे पीछे कर रही थी और मेरे धक्कों का पूरा जवाब दे रही थी.

सैंडी को कभी हल्की स्पीड और कभी तेज़ स्पीड से चोदते हुए मैं उसको फिर छूटने की कगार पर ले आया और आखरी कुछ धक्के इतनी स्पीड से मारे कि सैंडी का मुख खुला का खुला रह गया.अब सैंडी अस्फुट आवाज़ में बोल रही थी- मार डालो… और मारो… ओह्ह्ह मी गई ली रे!यह कहते हुए सैंडी ज़मीन पर लेट गई.

जब वो उठी तो जल्दी से उसने अपने कपड़े ठीक किये और कहने लगी कि वो बम्बई के मछुआरे परिवार से है और वहाँ फक करने की खुली छूट है.मैंने कहा- कॉटेज में तुम्हारे कमरे का नंबर क्या है?सैंडी बोली- मेरा और जूली का कमरा नंबर 2 है और तुमसे चुदने की हमारी बारी है आज रात!मैं बोला- तुम और जूली तो मेरे से चुद चुकी हो न… फिर दुबारा क्यों नंबर लगा रही हो?सैंडी हंस कर बोली- आज रात हम तीनों नंगे होकर चोदेंगे ना, तो उस चूत चुदाई का मज़ा ही कुछ और है.

फिर मैं सैंडी को लेकर एक घुमावदार रास्ते से वापस लौटा जहाँ अभी सब आलखन फ़रमा रहे थे. मुझको यकीन था कि सैंडी अगर चाहे भी तो वो दोबारा वो नदी किनारे वाली छुपने की जगह नहीं ढूंढ पाएगी.

कहानी जारी रहेगी.
 
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