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मैंने देवकी से पूछा- कब गया था बाहर तेरा पति?देवकी शर्माती हुई बोली- यही कोई 2 साल पहले और तबसे लौट कर ही नहीं आया है.मैं बोला- तो तू दो साल से अछूती है क्या?वो और भी शरमाते हुए बोली- हाँ छोटे मालिक, क्या करें किस्मत ही खराब है ससुर!
नैना बोली- क्यों देवकी, छोटे मालिक तुझ को अगर अभी हरा कर दें तो तैयार है क्या?देवकी शर्म से और सांवली हो गई और कुछ बोले बगैर सर को हाँ में हिला दिया.नैना बोली- छोटे मालिक, आप देवकी को लेकर छत पर चले जाओ, मैं आती हूँ आपके पीछे.
मैंने देवकी को आगे आगे चलने को कहा और खुद उसके पीछे सीढ़ियाँ चढ़ने लगा.ऊपर पहुँच कर देखा, वहाँ एक छोटा सा कमरा बना हुआ है जिसमें एक दीवान नुमा बेड बिछा हुआ था.जैसे ही हम कमरे में पहुंचे मैंने देवकी का मुंह अपनी तरफ करके पूछा- क्यों देवकी, तुम तैयार हो ना?देवकी शरमाई, लेकिन बोली कुछ नहीं.मैंने फिर पूछा- बोलो देवकी, तैयार हो अपनी चूत चुदवाने के लिए?देवकी ने फिर हामी में सर हिला दिया.तब मैंने कहा- ऐसे नहीं देवकी, बोलो हाँ या ना?देवकी ने अपनी साड़ी के पल्लू में छुपा कर धीरे से बोला- हाँ छोटे मालिक.
जैसे ही उसने हाँ बोला, मैंने उसको पकड़ लिया और उसकी साड़ी का पल्लू उसके मुम्मों के ऊपर से हटा दिया, उसके ढीले ब्लाउज को ऊपर करके सांवले लेकिन सॉलिड और मोटे मुम्मे बाहर आ गए, मैं उनको चूसने लगा.साथ ही मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और उसकी धोती ऊँची करके उसकी चूत पर काले बालों में से साफ झलकते चूत के होटों को मसलने लगा.
.उसकी चूत काफी गीली हो चुकी थी, मैंने अपनी पैंट ढीली करके अपने खड़े लौड़े को निकाला और उसको देवकी के हाथ में दे दिया.देवकी खुश हो गई लंड को हाथ में लेकर और फिर मैंने बिना कुछ भी देर किये उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और उसकी टांगों को चौड़ा कर के धीरे धीरे धक्के मारने लगा.
उसकी चूत एकदम से टाइट थी क्यों कि वो दो सालों से इस्तेमाल नहीं हुई थी और मेरे लौड़े को पाकर चूत और भी निहाल हो गई थी.मैंने उसके सांवले लेकिन मोटे चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर ज़ोरदार चुदाई शुरू कर दी और जैसा कि मुझको उम्मीद थी, देवकी जल्दी ही झड़ गई और ज़ोर ज़ोर से हाय हाय करने लगी.
तब मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और उसकी चूत के पानी के पूरी तरह से झड़ जाने तक अपने लंड को अंदर डाल कर बैठा रहा.जब मैं उठने लगा तो देवकी ने मुझ को कसके जफ्फी मारी और मेरे होटों पर एक चुम्मी भी दे दी.
पहले मैंने देवकी को नीचे भेज दिया और फिर 5 मिन्ट बाद मैं भी नीचे आ गया.जैसे ही मैं हाल में पहुँचा वहाँ मुझ जूली मिल गई और पूछने लगी- कहाँ थे आप?मैंने कहा- मैनेजर हूँ ना, सब इंतज़ाम देखने पड़ते हैं. बोलो, कोई काम था मुझसे?जूली बोली- तुम ज़रा आना मेरे कमरे में, कुछ काम है.
मैं उसके पीछे चल दिया और जब हम उसके रूम में पहुँचे तो उसने झट से कमरे का दरवाज़ा बंद कर लिया और मुझको एकदम अपनी बाहों में ले कर बहुत ही टाइट जफ्फी मारी.फिर उसने अपने गरम होंट मेरे होंटों पर रख दिए और एक बहुत ही कामातुर जफ्फी मारी.मैं थोड़ा घबरा कर बोला- यह क्या कर रही हो जूली?जूली बोली- मैं तुमको फक करना चाहती हूँ.
कहानी जारी रहेगी.
नैना बोली- क्यों देवकी, छोटे मालिक तुझ को अगर अभी हरा कर दें तो तैयार है क्या?देवकी शर्म से और सांवली हो गई और कुछ बोले बगैर सर को हाँ में हिला दिया.नैना बोली- छोटे मालिक, आप देवकी को लेकर छत पर चले जाओ, मैं आती हूँ आपके पीछे.
मैंने देवकी को आगे आगे चलने को कहा और खुद उसके पीछे सीढ़ियाँ चढ़ने लगा.ऊपर पहुँच कर देखा, वहाँ एक छोटा सा कमरा बना हुआ है जिसमें एक दीवान नुमा बेड बिछा हुआ था.जैसे ही हम कमरे में पहुंचे मैंने देवकी का मुंह अपनी तरफ करके पूछा- क्यों देवकी, तुम तैयार हो ना?देवकी शरमाई, लेकिन बोली कुछ नहीं.मैंने फिर पूछा- बोलो देवकी, तैयार हो अपनी चूत चुदवाने के लिए?देवकी ने फिर हामी में सर हिला दिया.तब मैंने कहा- ऐसे नहीं देवकी, बोलो हाँ या ना?देवकी ने अपनी साड़ी के पल्लू में छुपा कर धीरे से बोला- हाँ छोटे मालिक.
जैसे ही उसने हाँ बोला, मैंने उसको पकड़ लिया और उसकी साड़ी का पल्लू उसके मुम्मों के ऊपर से हटा दिया, उसके ढीले ब्लाउज को ऊपर करके सांवले लेकिन सॉलिड और मोटे मुम्मे बाहर आ गए, मैं उनको चूसने लगा.साथ ही मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और उसकी धोती ऊँची करके उसकी चूत पर काले बालों में से साफ झलकते चूत के होटों को मसलने लगा.
.उसकी चूत काफी गीली हो चुकी थी, मैंने अपनी पैंट ढीली करके अपने खड़े लौड़े को निकाला और उसको देवकी के हाथ में दे दिया.देवकी खुश हो गई लंड को हाथ में लेकर और फिर मैंने बिना कुछ भी देर किये उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और उसकी टांगों को चौड़ा कर के धीरे धीरे धक्के मारने लगा.
उसकी चूत एकदम से टाइट थी क्यों कि वो दो सालों से इस्तेमाल नहीं हुई थी और मेरे लौड़े को पाकर चूत और भी निहाल हो गई थी.मैंने उसके सांवले लेकिन मोटे चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर ज़ोरदार चुदाई शुरू कर दी और जैसा कि मुझको उम्मीद थी, देवकी जल्दी ही झड़ गई और ज़ोर ज़ोर से हाय हाय करने लगी.
तब मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और उसकी चूत के पानी के पूरी तरह से झड़ जाने तक अपने लंड को अंदर डाल कर बैठा रहा.जब मैं उठने लगा तो देवकी ने मुझ को कसके जफ्फी मारी और मेरे होटों पर एक चुम्मी भी दे दी.
पहले मैंने देवकी को नीचे भेज दिया और फिर 5 मिन्ट बाद मैं भी नीचे आ गया.जैसे ही मैं हाल में पहुँचा वहाँ मुझ जूली मिल गई और पूछने लगी- कहाँ थे आप?मैंने कहा- मैनेजर हूँ ना, सब इंतज़ाम देखने पड़ते हैं. बोलो, कोई काम था मुझसे?जूली बोली- तुम ज़रा आना मेरे कमरे में, कुछ काम है.
मैं उसके पीछे चल दिया और जब हम उसके रूम में पहुँचे तो उसने झट से कमरे का दरवाज़ा बंद कर लिया और मुझको एकदम अपनी बाहों में ले कर बहुत ही टाइट जफ्फी मारी.फिर उसने अपने गरम होंट मेरे होंटों पर रख दिए और एक बहुत ही कामातुर जफ्फी मारी.मैं थोड़ा घबरा कर बोला- यह क्या कर रही हो जूली?जूली बोली- मैं तुमको फक करना चाहती हूँ.
कहानी जारी रहेगी.