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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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पुरानी मोहब्बतें, फुलवा और छाया


सुबह उठे तो मेरी चाय फुलवा ले कर आई और मैं फुलवा को देख कर हैरान रह गया.चाय उसके हाथों से लेने से पहले मैंने उठ कर उसको एक बड़ी ही सेक्सी जफ्फी मारी और एक गरमागरम चुम्मी उसके होटों पर दे दी.

अब मैं चाय पीते हुए उससे सारा हाल पूछने लगा तो उसने बताया- छोटे मालिक, आपकी किरपा से मेरा घर अब बिल्कुल ठीक चल रहा है, मेरा पति अब मेरा पूरा ख्याल रखता है और मेरे बच्चे से भी बहुत प्यार करता है. सब आपकी वजह से हुआ यह… वो अब अपना काम करता है और अच्छी कमाई कर लेता है.

मैं बड़ा खुश हुआ और उसको फिर गले लगाया और पूछा कि अब कभी अपनी दोगी मुझको?वो हँसते हुए बोली- वही तो बताने के लिए मैं यहाँ आई हूँ, मेरा पति और उधर छाया का पति कुछ दिनों के लिए बाहर गए हैं काम से तो हम दोनों आप से मिलना चाहती हैं कॉटेज में!

मैं बड़ा ही खुश हुआ और फुलवा को फिर बाहों में भर कर एक चुम्मी दे दी उसके होटों पर और कहा- हाथ तो लगा ज़रा, मेरा लौड़ा तो तुझ को देखकर पगला गया है देख क्या फन फैलाये लहलहा रहा है तेरी चूत के लिए… बोल शुरू हो जायें अभी क्या?

फुलवा हँसते हुए बोली- नहीं छोटे मालिक, अभी कोई आ सकता है! आज खाने के बाद आ जाना कॉटेज में, वहीं छाया को भी बुला लूंगी और नैना बहन को भी ले आना, हम मिल कर ढेर सारी बातें करेंगे और जो तुम कहोगे वो भी करेंगे.मैं खुश होकर बोला- ठीक है फुलवा हम ज़रूर आएंगे वहाँ.

इससे पहले वो जाती, मैंने अच्छी तरह से उसके मुम्मे और चूतड़ों को टीपा और कई चुम्मियाँ दे डाली उसके होटों पर!वो भी खाली कप लेकर चली गई, उसके जाने के बाद नैना आई कमरे में, बोली- मिल गई आपकी चहेती आपको? तो दोपहर को चलने का विचार है क्या?मैं बोला- हाँ हाँ यार, पूरा इरादा है और तुमने भी चलना है गुरु जी!नैना खुश होते हुए बोली- हाँ चलेंगे, आपकी पुरानी रानियों से मिलना जो है!

लंच करने के बाद मैंने नैना को अपनी बाइक पर बिठाया और उसको लेकर कॉटेज पहुँच गया.हमारे जाने के थोड़ी देर बाद ही फुलवा और छाया भी आ गई.हम सब बड़ी गर्म जोशी से एक दूसरे से मिले और खूब चूमाचाटी हुई, फिर हम सब एकदम नंगे हो गए और ध्यान से एक दूसरे को देखने लगे.

फुलवा और छाया में काफी फर्क आ गया था जब से वो दोनों माँ बनी थी. उन दोनों का जिस्म अब पूरी तरह से मातृत्व से खिल उठा था और उन दोनों की सुंदरता में निखार भी आ गया था. उनके मुम्मे अब दूध से भरे होने के कारण बड़े भारी और मोटे हो गए थे और उनके चूतड़ भी गोल और मोटे हो गए थे.

दोनों मुझको बड़े ध्यान से देख रही थी और मेरे शरीर की तुलना मेरे पहले वाले शरीर से कर रही थी. फिर दोनों मेरे लंड को पकड़ कर उसका नरीक्षण परीक्षण करने लगी.दोनों एक ही नतीजे पर पहुँची कि यह उनके टाइम से ज़्यादा लम्बा और मोटा हो गया है और अब बिल्कुल एक क्रोधी नाग की तरह लहलहाता है.

फिर नैना ने कहा- अब छोटे मालिक को अपने अपने बच्चों का भी तो बताओ ना कुछ?दोनों एक साथ बोल पड़ी- छोटे मालिक, आपका कोटि कोटि धन्यवाद, आप ने हमको गर्भ दान दिया.मैं बोला- नहीं नहीं, मेरा इस में कुछ भी योगदान नहीं, यह सब तुम्हें तुम्हारे पतियों ने तुम को दिया है और हमेशा उनका ही शुक्रिया अदा किया करो.

दोनों बोली- छोटे मालिक, आप महान हैं.तब नैना बोली- चलिए महान जी, अब इन भूखी गायों को हरा कर दीजिये एक सरकारी सांड की तरह!.

पहले मैंने फुलवा को ही लिया चुदाई के लिए और उसको बिस्तर की तरफ ले जाने लगा, तब मैंने उससे पूछा- तेरा पति कैसे चोदता है तुझको?वो फिर उदास हो कर बोली- कहाँ छोटे मालिक, वो तो कभी कभी जब शराब के नशे में होता है तो एक आध बार चोद देता है वर्ना कई कई दिन मेरी तरफ देखता भी नहीं.नैना बोली- तुम कल मेरे पास आना हवेली में, मैं तुमको एक नुस्खा दूंगी, जिससे हो सकता है तेरा काम ठीक होने लगे!

और फिर फुलवा मुझ से बेतहाशा लिपट गई, मैं उसको लेकर बिस्तर में लेट गया और उसके मुम्मों को छोड़ कर सारे शरीर को चूमने लगा.तभी नैना ने छाया को भी बिस्तर में हमारे साथ लिटा दिया और एक तरफ से छाया मेरे साथ जुड़ गई और दूसरी तरफ फुलवा… और मैं उन दोनों की पुरानी यादों के साथ अपना दूसरा हनीमून मनाने लगा.

बारी बारी से पहले फुलवा के ऊपर चढ़ा और उसको बड़े आलखन से चोदने के बाद मैं छाया के ऊपर चढ़ गया और उन दोनों का 2-3 बार छुटाने के लिए मैंने उन दोनों को कभी घोड़ी बना कर चोदा और कभी खड़ा करके चोदा और कभी अपने ऊपर बिठा कर चोदा और उन को तभी छोड़ा जब दोनों ने कहा- बस करो छोटे मालिक, हमारा महीनों का काम आपने कर दिया.

उसके बाद मैंने उन दोनों को 100-100 रूपए का इनाम भी दिया जो उनको बहुत ही पसंद आया और दोनों ने बार बार मेरा शुक्रिया अदा किया.पुरानी यादों को ताज़ा करके मैं और नैना हवेली में वापस आये.
 


फिल्म कम्पनी की डांस डायरेक्टर की चूत चुदाई


अगले दिन पापा ने मुझको नाश्ते के टेबल पर बताया- बॉम्बे से फिल्म वाले आने वाले हैं और वो यहाँ गाँव में फिल्म की शूटिंग करने आ रहे हैं, उस फ़िल्म का फ़ाइनेंस भी हम कर रहे हैं.मैं एकदम से खुश हो गया और बड़े ही जोश में पूछने लगा- पापा कौन सी फिल्म की शूटिंग करेंगे वो यहाँ?पापा बोले- वो आज लंच से पहले आ रहे हैं सो यह सारी बात उन से ही पूछ लेना.

लंच से पहले ही दो बड़ी बड़ी कारें हमारी हवेली के अंदर आकर रुकी और मैंने और पापा ने फिल्म यूनिट का स्वागत किया और उनको बैठक में ले आए.आने वालों में एक तो अधेड़ उम्र वाले सज्जन थे और दो चालीस की उम्र वाले आदमी थे और साथ ही उन में दो बड़ी खूबसूरत औरतें भी थी.उनको देख कर मेरे मन में कोई ख़ास उत्सुकता तो नहीं उत्पन्न हुई और ना ही उन फ़िल्मी सुंदरियों को देख कर मेरे मन में कोई हलचल उत्पन्न हुई.

बातों बातों में पता चला कि ये दोनों औरतें फिल्म में होने वाले डांस का सीन नदी किनारे करेंगी.

फ़िल्म यूनिट को एक तो अपने स्टाफ़ के रहने की समस्या थी, दूसरे उनको फ़िल्मी डांस के लिए उपयुक्त स्थान को ढूंढना था.जो थोड़े बज़ुर्ग से दिखने वाले सज्जन थे, वो ही पापा से बात कर रहे थे.

नाश्ता पानी के बाद पापा उनको अपनी कार में गाँव घुमाने के लिए ले गए.अगले दिन यह तय हुआ कि फिल्म यूनिट कॉटेज में रहेगी और फिल्म कम्पनी कॉटेज और गाँव की भूमि का इस्तेमाल करेगी और उस का तयशुदा पैसा भी देगी ज़मींदार साहब को!उनको बावर्ची और बर्तन इत्यादि दिलवा दिए जाएंगे ताकि वो अपनी पसन्द का खाना खुद बनवा सकें.

पापा ने मुझसे कहा कि मैं उनको समस्त सुविधाएँ देने का जिम्मा अपने ऊपर ले लूँ.उनमें से जो एक हीरोइन जैसी सुंदर स्त्री थी मुझ को उसे रहने की जगाह दिखानी थी तो मैं उनकी बड़ी गाड़ी में उनको लेकर कॉटेज में गया और वहाँ की सारी सुविधाएँ उनको दिखा दी.कमरे तो केवल 5 ही थे लेकिन उनके साथ टॉयलेट बहुत काम के थे उनके लिये.उस मेनका ने अपना नाम मधु बताया था और देखने में वो खासी खूबसूरत लग रही थी और उसने बड़े ही फैशनेबुल कपड़े पहन रखे थ.

जब वो हमारी कॉटेज के मुख्य बैडरूम में पहुँचे तो वो कहने लगी कि वो थोड़ा आलखन करना चाहती है और उसको प्यास भी लगी है.मैं झट से उनके लिए कोकाकोला की बोतल खोल कर ले आया और उसको देख कर वो बेहद खुश हुई.

फिर उन्होंने मुझ से पूछा- तुम्हारा नाम क्या है?मैंने मुस्कराते हुए कहा- मेरा नाम सोमेश्वर है लेकिन सब मुझ को प्यार से सतीश बुलाते हैं और आप भी मुझको इसी नाम से बुला सकती हैं.

मधु बोली- क्या कॉलेज में पढ़ते हो तुम?मैं बोला- जी हाँ मैं लखनऊ में कॉलेज में फर्स्ट ईयर इंटर में पढ़ता हूँ और वहीं ही रहता हूँ.मधु बोली- अच्छा है! तुम जानते हो तुम काफी हैंडसम दिखते हो बिलकुल फिल्म के हीरो के माफिक.मैं बोला- थैंक्यू मधु आंटी लेकिन मेरी सूरत कोई ख़ास नहीं है ना!मधु बोली- मुझ को आंटी मत कहो ना प्लीज. तुम मुझको मधु के नाम से बुला सकते हो!

मैं बोला- आप इस फिल्म की हिरोइन हैं क्या?मधु बोली- नहीं रे, मैं तो सिर्फ फिल्म की डांस डायरेक्टर हूँ. कल जो लड़कियाँ डांस करने के लिए आ रही हैं मैं उनको डांस के स्टेप्स सिखाऊँगी और कैसे डांस करना है यह बताऊँगी. तुमको डांस करना आता है क्या?मैं बोला- नहीं मैडम जी, मैंने कभी डांस नहीं किया.मधु बोली- अरे सतीश, कुछ भी मुश्किल नहीं है, मैं सिखा दूंगी तुमको, इधर आओ मैं तुमको बताती हूँ कुछ स्टेप्स.

मधु मैडम ने मेरा हाथ अपने हाथ में पकड़ा और दूसरा हाथ मेरी कमर में डाला और मुझको कमरे में गोल गोल घुमाने लगी और इसी चक्कर में मेरा हाथ दो तीन बार उसके गोल उभरे हुए स्तनों पर जा लगा और दो तीन बार उसका भी हाथ मेरे लंड पर लग था.

मैडम की हाइट होगी 5.6 फ़ीट थी और मेरी हाइट जो 5 .11 फ़ीट से बड़ी मैच कर रही थी.हम दोनों थोड़ी देर हाथों में हाथ डाले कमरे के चारों तरफ चक्कर काटते रहे और मैंने मौका देख कर उसके गोल चूतड़ों पर भी दो बार हाथ लगा दिया.फिर चक्कर लगाते हुए मैडम का पैर मेरे पैरों से उलझा और वो गिरने लगी तो मैंने उसको अपनी बाहों में संभाल लिया और उस को अपनी छाती से लगा लिया.

कुछ समय वो मेरी छाती से ही चिपकी रही और मैं भी उसके सुडोल मुम्मों का आनन्द लूटता रहा, फिर वो मुझसे अलग हुई और उसने अपने होटों को मेरे होटों पर रख कर एक हलकी सी चुम्मी कर दी.मैं भी नैना का सिखाया हुआ शिष्य था, झट से मैंने उसको अपनी बाँहों में भींच लिया और उसके गर्म लबों पर कई चुम्मियाँ कर दीं.
 
इस जफ्फी के दौरान मेरा खड़ा लौड़ा उसकी साड़ी के बाहर से उसकी चूत पर लग रहा था और तभी मैंने महसूस किया कि उसका एक हाथ मेरे लंड के साथ पैंट के ऊपर से खेल रहा था.उसने मेरी तरफ देखा एक भेद भरी नज़र से और मैंने भी उसको एक हल्की सी आँख मार दी.

अब मैंने उसको अपनी बाहों में लेकर बहुत ज़ोर से जफ्फी डाल दी और फिर उसकी साड़ी को उतारने के लिए हाथ आगे बढ़ाया तब वो बोली- अरे कमरे के दरवाजे को तो बंद कर लो ना प्लीज.

मैंने कहा- मैडम जी, फ़िक्र ना करें, बाहर चौकीदार है ना… वो किसी को अंदर नहीं आने देगा.फिर भी मैडम की तसल्ली के लिए मैंने कमरे को बंद करके कुण्डी लगा दी और अब मैंने मैडम की साड़ी की तरफ हाथ बढ़ाया.मैडम स्वयं ही अपनी साड़ी उतारने लगी और मैं एक फैशनेबुल लेडी को कपड़े उतारने का जलवा देखने लगा.

मैडम सच में फ़िल्मी स्टाइल में अपनी साड़ी उतारने लगी, थोड़ी सी साड़ी खोली और फिर एक चक्कर कमरे का और मेरे इर्दगिर्द लगाया और फिर उसने सारी साड़ी उतार दी और उसी कलर का सिल्क का पेटीकोट सामने आ गया जो बेहद सेक्सी लग रहा था.फिर उसका एक हाथ अपने ब्लाउज की तरफ बढ़ा और उसने मुझको आँख से इशारा किया मैं भी अपने कपड़े उतारने शुरू करूँ.

मैडम का ब्लाउज़ और मेरी कमीज एक साथ उतरे और फिर उसने अपनी रेशमी ब्रा के हुक्स को खोलने के लिए हाथ बढ़ाया तो मैंने अपनी बनियान उतार दी और जैसे ही मेरी छाती नंगी हुई वैसे ही मैडम की ब्रा खुल कर नीचे गिरी और उसके मुम्मे उछल कर बाहर आ गए.

अब मैडम ने अपने सिल्क के चमकते हुए पेटीकोट में हाथ डाला और मैंने अपनी पैंट के बटन खोलना शुरू कर दिया.उसने पेटीकोट को धीरे धीरे अपनी कमर से खिसकाना शुरू किया और मैंने उसके साथ साथ ही अपनी पैंट नीचे खिसकानी शुरू कर दिया..

जैसे ही उसका पेटीकोट नीचे गिरा वैसे ही मेरी पैंट नीचे गिरी और उसने मेरे अंडरवियर के नीचे बने टैंट को देखा और कहने लगी- उफ़्फ़ सतीश, क्या चीज़ है यह!और मैंने देखा कि उसने भी सिल्क की पैंटी पहन रखी थी.अब मैंने कहा- आप मेरा अंडरवियर उतारो और मैं आपकी पैंटी उतारता हूँ, क्यों ठीक है ना?मैडम बोली- ठीक है, आओ मेरे पास!

मैं मैडम के पास गया और पहले उसकी पैंटी उतार दी और फिर मैं मैडम के सामने खड़ा हो गया और वो मेर अंडरवियर उतारने लगी और जैसे ही उसने अंडरवियर को नीचे खींचा, मेरा नाग नुमा लंड उछल कर मैडम की तरफ लपका लेकिन मैडम भी चतुर थी सो उस ने झट अपना चेहरा पीछे कर लिया.

यह देख कर मैडम बहुत ज़ोर से हंस पड़ी और कहने लगी- सतीश लाल मैं तुम्हारी चाल समझ गई थी जब मैंने तुम्हारे टेंट का साइज देखा तो यह बात साफ़ हो गई थी कि तुम एक नागपाल हो और यह मैंने गेस कर लिया था.मैं थोड़ा शर्मिंदा हुआ और थोड़ा हिचकते हुए बोला- यह बात नहीं है मैडम जी, लेकिन क्या करूँ जब कोई बेध्यानी से नाग का ढक्कन खोलता है तो उसको उसका परिणाम तो भुगतना पड़ता है न!

अब मैडम खड़ी हुई तो यह देख कर मैं हैरान रह गया कि उसकी चूत पर काले बालों की लटें छाई हुई थी जबकि मुझको उम्मीद थी कि वो भी सफाचट चूत वाली होगी क्योंकि वो इतनी फैशनेबुल औरत है.मैंने उससे पूछ ही लिया तो उसने जवाब में कहा- मेरे पति को सफाचट पुसी नहीं अच्छी लगती क्यूंकि वो मानते हैं सफाचट पुसी रखने वाली औरतें और लड़कियाँ सिर्फ रंडियों के समान होती हैं.

मैं वहीं बैठ गया और उसकी चूत में मुंह डाल कर उसकी चूत को चूसने लगा, धीरे धीरे जीभ को उसकी भग पर रख कर हल्के हल्के चूसने लगा और यह मैडम को इतना पसंद आया कि वो मुझको उठा कर बेड पर ले गई और मैं वहाँ लेट कर उसके मुम्मों को बड़ी ही बेसब्री से चूसने लगा.फिर उसने मेरे लौड़े को खींचना शुरू कर दिया और तब मैंने उसकी टांगें चौड़ी कर उसके ऊपर से लंड लाल को लटों से भरी चूत के मुंह पर रख दिया और उसकी एकदम गीली चूत के अंदर धकेल दिया.उसकी चूत और उसके पेट पर झुरियाँ ना होने से मैं समझ गया कि वो अभी तक माँ नहीं बनी थी और लंड उसकी बहुत ही टाइट चूत में एकदम से दूर तक चला गया.

अब मैं मैडम के अंदर से पूरा लंड निकाल कर फिर पूरा का पूरा अंदर डाल कर चोदने लगा और हर बार मैडम अपनी कमर उठा कर लंड का स्वागत करती थी और फिर हम दोनों एक दूसरे को खूब एन्जॉय करते हुए चोदने लगे.जीवन में पहली बार एक बहुत ही फैशनेबुल औरत को चोदने का मौका मिला था तो मैं पूरी कोशिश में था कि मैडम को किसी नए ढंग से चोदूं लेकिन मुझको समझ नहीं आ रहा था कि वो नया ढंग क्या हो सकता है.

मैं अब मैडम को निहायत ही कामातुर हुआ चोद रहा था, कभी उसके गोल मुम्मों को चूसता था और कभी उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर धक्के मार रहा था.थोड़ी देर में मधु मैडम झड़ने के करीब पहुँच गई थी, उसकी आँखें मुंदी हुई थी, होंट खुले हुए थे, सांसें तेज़ चल रही थी और मैं पूरे जोश और खरोश से लंड के धक्के मार रहा था.

और फिर मेरे लंड ने महसूस किया कि उसकी चूत में सिकुड़न आरम्भ हो गई और उसकी चूत में से हल्की सी जलधारा बहनी शुरू हो गयी थी.अब मैंने मैडम की टांगों को हवा में कर दिया, सरपट धक्कों की स्पीड चला दी और कुछ ही क्षणों में मैडम ने मुझको अपनी टांगों में बाँध लिया, उसकी कमर ज़ोर ज़ोर से कांपने लगी और मैडम ने मुझको कस कर अपनी छाती से बाँध लिया.थोड़ी देर हम दोनों एकदम से शांत हुए एक दूसरे से जुड़े हुए पड़े रहे और फिर मैडम अपनी टांगें सीधी करने लगी और मैं एक गहन चुम्बन मैडम के लबों पर देकर बेड पर लेट गया.

कहानी जारी रहेगी.
 


फिल्म डांस डायरेक्टर ने मुझे चोदा


थोड़ी देर में मधु मैडम झड़ने के करीब पहुँच गई थी, उसकी आँखें मुंदी हुई थी, होंट खुले हुए थे, सांसें तेज़ चल रही थी और मैं पूरे जोश और खरोश से लंड के धक्के मार रहा था.

और फिर मेरे लंड ने महसूस किया कि उसकी चूत में सिकुड़न आरम्भ हो गई और उसकी चूत में से हल्की सी जलधारा बहनी शुरू हो गयी थी.अब मैंने मैडम की टांगों को हवा में कर दिया, सरपट धक्कों की स्पीड चला दी और कुछ ही क्षणों में मैडम ने मुझको अपनी टांगों में बाँध लिया, उसकी कमर ज़ोर ज़ोर से कांपने लगी और मैडम ने मुझको कस कर अपनी छाती से बाँध लिया.थोड़ी देर हम दोनों एकदम से शांत हुए एक दूसरे से जुड़े हुए पड़े रहे और फिर मैडम अपनी टांगें सीधी करने लगी और मैं एक गहन चुम्बन मैडम के लबों पर देकर बेड पर लेट गया.

काफी देर हम ऐसे ही पड़े रहे, फिर मैडम ने आँखें खोली और मुझको देख कर कहा- सतीश यार, तुम तो गज़ब के फकर हो. तुमने मुझ को आज बड़ी ही अच्छी तरह से फ़क किया है और ऐसे फक किया जैसे कि बहुत ही ज़्यादा तुम को इस काम का अनुभव हो. कहाँ से सीखा यह सब?मैं काफी शरमाया और चुप रहा.

मैं नंगा ही उठा और किचन से कोका कोला की बोतलें उठ लाया और मैडम को एक खोल कर दी और दूसरी स्वयं पीने लग गया.खाने के लिए कुछ बिस्कुट पड़े थे, वो मैंने मैडम को खाने के लिए दिए लेकिन मैंने देखा कि मैडम की नज़र मेरे लंड पर टिकी हुई थी.

मैंने पूछा- क्या देख रही हो मेरे लंड में?मैडम बोली- तेरा यह अभी भी खड़ा है क्या?मैं बोला- मैडम जी, यह तब तक खड़ा रहता है जब तक मेरे सामने वाली औरत या फिर लड़की मेरे सामने से चली नहीं जाती और जहाँ यह नंगी औरत को देखता है यह अपना सर उठा लेता है और नीचे नहीं झुकाता जब तक वो कपड़े नहीं पहन लेती या फिर चली नहीं जाती.

मधु मैडम बोली- वाह सतीश राजा, तुम्हारा यह लंड दर्जनों औरतों को चोदने की क्षमता रखता है क्या?मैं बोला- दर्जनों को तो कभी नहीं एक साथ चोदा लेकिन मैंने अभी तक 5-6 औरतों को एक के बाद एक को चोदा है और मेरा लौड़ा उस के बाद भी खड़ा था.मधु मैडम बोली- यह कैसे पॉसिबल है सतीश? तुम गप्प मार रहे हो या फिर लम्बी हाँक रहे हो या फिर बम्बईया भाषा में बहुत फ़ेंक रहे हो?मैं बोला- अपने मुंह अपनी तारीफ़ क्या करूँ, आप कभी आज़मा कर देख लेना.मैडम बोली- चलो आ जाओ, अभी फिर आज़मा लेते हैं.मैं मुस्कराया और बोला- जितना चाहे आज़मा लो मैडम जी!

और मैं अब फिर मैडम के पास चला गया और उनके साथ पलंग पर लेट गया. मेरा लंड तब भी हवा में लहलहा रहा था और मैडम उस को हाथ में पकड़ कर उस के साथ खेल रही थी.मैं बोला- अब बोलिए कैसे चुदवाना पसंद करेंगी आप?मैडम बोली- मैं अब तुमको ऊपर से फ़क करती हूँ… क्यों ठीक है ना?मैं बोला- मैडम आप जैसे चाहे फक कर लीजिये, बंदा तो तैयार है आपके लिए!

अब मैडम मेरे ऊपर बैठ गई अपनी दोनों टांगों को मेरी दोनों साइड में रख कर, फिर उसने अपने हाथ से मेरे खड़े लौड़े को अपनी चूत में डाला और पूरा डाल कर वो बड़े मज़े से धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगी.मैं नीचे से मैडम के उरोजों के साथ खेल रहा था और उसके मोटे चूतड़ों को लगातार एक हाथ से मसल रहा था, वो काफी मोटे उभरे हुए और गोल शेप में थे.

थोड़ी देर में मैडम की चूत में से सफ़ेद क्रीम की तरह रस निकलने लगा और वो मेरे लौड़े के ऊपर से बहता हुआ मेरे पेट पर जमा होने लगा.मैडम अब पूरे जोश के साथ मुझको चोदने में लगी हुई थी और उसके धक्कों की गति भी तेज़ होती जा रही थी.मैडम की आँखें बंद थी और मुंह खुला हुआ था और उसके दोनों हाथ मेरी सफाचट चौड़ी छाती पर पड़े हुए थे और वो ऊपर से धक्के पर धक्के मारने में पूरी तरह से संलग्न थी..

थोड़ी देर में ही मैडम की उछल कूद और तेज़ हो गई और अब मैं भी नीचे से उसकी चूत में अपने लंड को पेल रहा था. मैंने एक ऊँगली से उसकी भग को भी मसलना शुरू कर दिया और इस दोहरे हमले के सामने मैडम की चूत बिलबिलाती हुई परास्त हो गई और मैडम मेरी छाती पर पूरी तरह से पसर गई.मैडम की चूत में सुकड़न हो रही थी और उसकी चूत से बहते हुए क्रीमी रस से मेरा पेट भर गया था.
 
मैडम मेरे ऊपर से उठी, बिस्तर पर लेट कर अपनी साँसों को नियंत्रित करने लगी.थोड़ी देर हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे, फिर मैं उठा, तौलिये से अपना लौड़ा और अपना पेट साफ़ किया और वहीं बिछी एक कुर्सी पर जा बैठा.

थोड़ी देर में मैडम संयत हो गई, उठ कर मेरे पास आई और झुक कर मेरे होटों पर एक बड़ी हॉट किस जड़ दी.फिर वो मेरे साथ वाली कुर्सी पर बैठ गई और मेरे अभी भी खड़े लंड के साथ खेलने लगी.

मैडम ने बड़े ध्यान से मेरे लंड को देखा और बोली- क्या तुम्हारे लंड से तुम्हारा वीर्य नहीं निकलता? क्योंकि दोनों बार मेरी चूत सूखी रही और उसमें एक भी कतरा वीर्य का नहीं था, यह कैसे मुमकिन है सतीश?मैं बोला- मैडम, मुझको अपने वीर्य को कंट्रोल करने की विधि आती है और मैं अपने वीर्य को तब तक नहीं छूटने देता जब तक मेरी इच्छा ना हो!

मैडम बोली- ओह माय गॉड !! तुम क्या चीज हो सतीश? क्या तुम भगवान हो या फिर कोई देवता जिस का लिंग हर वक्त खड़ा भी रहता है और उसमें से वीर्य भी नहीं निकलता हर बार!मैं अपना सर नीचे कर के बोला- मैडम, मैं एक लाइलाज बिमारी में फंसा हुआ हूँ जिसको अंग्रेजी में PRIAPISM कहते है और इसका कोई इलाज भी नहीं है.मैडम बोली- हाँ नाम तो सुन रखा है लेकिन क्या बिमारी है यह तुम बताओ ज़रा डिटेल में?

मैं बोला- इसके बारे में शायद मैं भी इतना नहीं जानता जितना मेरी हाउसमेड जानती है.फिर भी मुझको जो मालूम है वो मैं आपको बताता हूँ. वो क्या होता है जब मेरा लंड खड़ा होता है तो मेरा खून लंड की नसों में आ जाता है जैसा कि नार्मल इरेक्शन में पुरुषों के साथ होता है लेकिन मेरे लंड की नसों में जो खून आ जाता है वो कई घंटे वापस नहीं जाता जिसके कारण मेरा लंड खड़ा रहता है, यह है असली बिमारी. लेकिन मेरे साथ एक काम बहुत ही अच्छा होता है वो यह है कि जब भी मेरे मन से सेक्स का विचार दूर हो जाता है तो मेरे लंड में आया खून वापस चला जाता है.यह नार्मल PRIAPISM के बीमारों के साथ नहीं होता उनकी लंड की नसों में खून हर वक्त जमा रहता है जिके कारण उन का लंड हर वक्त खड़ा रहता है और कुछ ही वर्षों में वो नपुंसक हो जाते है यानी उनका लंड खड़ा होने की शक्ति खो देता है.इसके अलावा जो कुदरत की मुझ पर मेहरबानी रही है वो यह है कि मेरे लंड से वीर्य भी निकलता है जैसे की नार्मल पुरुषों के साथ होता है लेकिन यह क्रिया PRIAPISM के असली बीमार मर्दों में नहीं होती. वो बेचारे फुल इरेक्शन होते हुए ही भी किसी स्त्री को गर्भवती नहीं कर सकते.

मैडम हैरान होते हुए बोली- वाह सतीश, यह तुम बहुत ही लकी रहे हो इस मामले में, तुम्हारा केस अजीब और अनोखा है लेकिन हम औरतों के लिए बहुत ही फायेदमंद है.मैं धीमी आवाज़ में बोला- वो तो ठीक है लेकिन कई बार मैं अपने आपको काफी बदकिस्मत महसूस करता हूँ.मैडम ने इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और वो बेहद ख़ुशी से इधर से उधर नाच रही थी.

मैडम अपने आप से बोल रही थी- कल वो 10 लड़कियाँ जो डांस करने आ रही हैं, उन सबको मैं तुमसे चुदवाऊँगी और सिर्फ उनको चुदवाऊँगी जो अच्छा डांस करेंगी. वाह वाह… क्या हथियार मिल गया है मुझको!

मैं थोड़ा नाराज़ होते हुए बोला- नहीं मैडम, मैं ऐसा नहीं होने दूंगा मैं सिर्फ अपनी मर्ज़ी से चुदाई का काम करूंगा. ना कि आपके कहने पर, ना किसी और के कहने पर! जो मुझको पसंद होगा वही करूँगा!मैडम एकदम बात पलट गई- नहीं सतीश, बिना तुम्हारी मर्ज़ी के यह कैसे हो सकता है, वो 10 डांसर तुम्हारे कॉटेज में ही रहेंगी न तो उनके रहने खाने पीने का इंतज़ाम भी तो करना पड़ेगा. कैसे होगा वो सब?मैं बोला- आप बेफिक्र रहिये, यह सब हो जाएगा. अब आप कपड़े पहन लीजिये, वापिस चलते हैं.मैडम बोली- सतीश यार, तुमने यह कहानी सुना कर मुझ को फिर गर्म कर दिया है तो एक बार और मेरी चूत चोदो न प्लीज?

कहानी जारी रहेगी.
 


फिल्म वाली मधु और रूबी मैडम


मैं बोला- आप बेफिक्र रहिये यह सब हो जाएगा. अब आप कपड़े पहन लीजिये वापस चलते हैं!मैडम बोली- सतीश यार, तुमने यह कहानी सुना कर मुझको फिर गर्म कर दिया है… एक बार और चोद दो मुझे प्लीज?मैडम ने मेरे लंड को पकड़ रखा था और वो उसके संग खेल भी रही थी.

मैंने फिर से मैडम के गोरे शरीर को चूमना और चाटना शुरू कर दिया, उसके उरोजों के चूचुक एकदम सख्त हो रहे थे, उनको चूसना शुरू कर दिया और एक ऊँगली से मैडम की चूत में भग को सहलाना शुरू कर दिया.मैडम भग की छेड़ा छाड़ी से बड़ी जल्दी उत्तेजित हो जाती थी, मैंने झुक कर उसकी चूत में स्थित भग को अपने मुंह में ले लिया और उसको हल्के हल्के चूसने लगा.

मैडम की उत्तेजना धीरे धीरे बढ़ने लगी और वो अपने चूतड़ो को उठा कर मेरी ऊँगली का स्वागत कर रही थी, उसने मेरे लंड को खींचना आरम्भ कर दिया तो मैंने मैडम को घोड़ी बना कर उसकी उबलती हुई चूत में अपना लंड डाल दिया और बड़ी तेज़ी से चोदने लगा.मैडम तो मेरी बिमारी का सुन कर इतनी खुश हुई थी कि वो कोई भी मौका मुझसे चुदवाये बगैर नहीं छोड़ना चाहती थी.

मेरी चुदाई की स्पीड इतनी तेज़ हो गई थी कि मैडम को अपने चूतड़ों की आगे पीछे करने की हरकत बंद करनी पड़ी और वो सांस रोक कर मेरी तेज़ चुदाई का आनन्द लेने लगी और जैसा कि मुझको यकीन था, मैडम भी जल्दी ही स्पीडी चुदाई के सामने अपने घुटने टेकने में ज़्यादा समय नहीं लगा पाई, थोड़ी देर में मैडम ने अपनी चूत से निकलने वाले क्रीम भरे रस से मेरे लौड़े को एकदम नहला दिया और स्वयं कुछ कांपती हुई बिस्तर में लेट गई लेकिन मैंने भी अपना लौड़ा नहीं निकाला जब तक मैडम ने नहीं कहा- बस कर यार सतीश!

मैं भी मैडम के साथ लेट गया और उसकी गीली चूत में ऊँगली डाल कर उसके काली गीली लटों के साथ खेलता रहा.अबकी बार मैडम को नींद की झपकी सी लग गई और मैं वहाँ से उठ कर सारी कॉटेज में घूमने लगा..

जैसे कि मधु मैडम कह रही थी कि डांस करने वाली दस लड़कियाँ आ रही हैं लेकिन हमारे पास तो सिर्फ 5 कमरे थे जिन में पलंग बिछे हुए थे तो इन लड़कियों को कमरे शेयर करने पड़ेंगे और बाकी मधु मैडम और अन्य कर्मी जो शूटिंग के लिए आ रहे थे, उनके सोने का इंतज़ाम तो करना पड़ेगा ना!

जब मैं वापस कमरे में पहुँचा तो मैडम अपने कपड़े पहन कर तैयार हो चुकी थी लेकिन जैसे ही उसने मेरे नंगे शरीर को देखा, वो जल्दी से आई, झुक कर मेरे लंड को मुंह में ले लिया और मेरे गोल सॉलिड चूतड़ों के साथ खेलने लगी.बड़ी मुश्किल से मैंने अपने को मैडम के पंजों से छुड़ाया.

अब मैंने मधु मैडम से पूछा- आपकी डांस वाली लड़कियाँ कहाँ सोयेंगी?मैडम बोली- कॉटेज में 5 बैडरूम हैं ना, दो दो एक कमरे में आ जाएंगी और आलखन से रह सकती है न सब.. अब रह गई उनके खाने और नाश्ते इत्यादि की व्यस्था, वो तुमको करनी है ना?मैं बोला- वो आपके साथ आई जो दूसरी लेडी, वो क्या करेगी?मधु मैडम बोली- वो मेरी असिस्टेंट है और वो लड़कियों से डांस करवाएगी.मैं बोला- चलिए फिर हवेली चलते है बाकी लोग वहीं हैं ना.मधु मैडम बोली- चलते है सतीश यार, इतनी भी क्या जल्दी है लेकिन आज तुम ने मेरी अन्तर्वासना काफी शांत कर दी.और उसने आगे बढ़ कर फिर मुझको बाहों में ले कर चुम्मी कर दी होटों पर!मैं बोला- मैडम चलिए ना, वो सब आपका इंतज़ार कर रहे होंगे.

हम दोनों कार में बैठ कर हवेली वापस आ गए, वहाँ बाकी सब लोग भी बैठे थे.मैडम बोली- मैं जगह देख आई हूँ, लड़कियों के लिए तो अच्छी जगह है, वो दस तो वहाँ टिक जाएँगी लेकिन हम कहाँ रहेंगी? यानि मैं और मेरी असिस्टेंट रूबी?वो जो बुजुर्ग सज्जन थे वो बोले- क्यों वहाँ आप दोनों के लिए कमरे नहीं हैं क्या?मैडम बोली- नहीं, वहाँ और जगह नहीं है.

मम्मी जो वहीं बैठी थी, बोली- क्यों ठाकुर साहब, इन दो को हम अपनी हवेली में ठहरा लेते हैं जब तक यह यहाँ हैं? वो सतीश के साथ वाला बैडरूम तो खाली पड़ा है, ये दोनों उस कमरे में रह सकती हैं.पापा बोले- हाँ, यही ठीक रहेगा अगर आप लोगों को कोई ऐतराज़ ना हो तो?बु्जुर्ग सज्जन बोले- आप लोगों के रहने की समस्या तो हल हो गई, बाकी जो शूटिंग स्टाफ है वो तो गाँव में एडजस्ट हो ही गया है. बाकी रहा इन सबका खाने पीने का प्रबंध, वो ठाकुर साहिब कुछ आप मदद कर दें तो वो भी निपट जाएगा.
 
पापा बोले- पंचोली साहिब, हम क्या मदद कर सकते हैं?सज्जन बोले- जैसे बर्तनों का इंतज़ाम, खाद्य सामग्री और भोजन बनाने का उचित स्थान जिस के लिए हम पूरा खर्चा देने के लिए तैयार हैं.पापा बोले- क्यों सतीश, कुछ कर सकते हो इस बारे में?

मैं कुछ देर सोचने के बाद बोला- मेरे विचार में खाना बनाने का उचित स्थान तो कॉटेज है. वहाँ हम बावर्ची, बर्तन धोने वालों का इंतज़ाम कर देंगे और खाद्य सामग्री यहाँ दुकान से खरीद ली जायेगी इनके आदमियों के साथ जाकर!पापा बोले- यह ठीक रहेगा क्यूंकि आपका यूनिट तो सारा काम नदी के किनारे करने वाला है और कॉटेज नदी के एकदम निकट है.मैं बोला- मम्मी जी, अब रहा काम करने वालों का इंतज़ाम, तो मेरा यह सुझाव है कि इस काम की हैड अपनी मेड नैना को बना देते हैं, वो सारा इंतज़ाम देख लेगी.मम्मी बोली- वेरी गुड सतीश, तुमने तो बिल्कुल सही आदमी का चुनाव किया इस काम के लिए… मैं अभी बुलाती हूँ उसको!

नैना के आने पर सारा काम उसको मधु मैडम ने समझा दिया और यह भी कहा कि आपको और आपके साथ काम करने वालों को सही मेहनताना भी दिया जाएगा.इसके बाद सबने लंच किया साथ साथ और वो सज्जन जो फिल्म के निर्माता और जिनका नाम पंचोली था अपनी कार में वापस शहर चले गए और दूसरी कार स्टाफ के लिए वहीं छोड़ गए.

नैना दोनों मैडमों को लेकर उनका कमरा दिखा आई और कहा कि जो चीज़ आपको चाहिए तो यह बेल बजा दें तो नौकर आ जाएंगे.अब मैं और नैना मेरे कमरे में इकट्ठे हुए और सबसे पहले मैंने नैना को एक ज़ोरदार जफ्फी मारी और एक जोरदार चुम्मी की उसके लबों पर, फिर उसको कॉटेज का किस्सा सुनाया और फिर हम दोनों डांस डायरेक्टर्स के कमरे में गए.

वो दोनों अपना सामान लगाने में व्यस्त थी, मधु मैडम ने अपनी सहायक रूबी से मुझको और नैना को मिलवाया.रूबी होगी कोई 25-26 वर्ष की आयु लेकिन वो देखने में काफी सुडौल और सुंदर लग रही थी लेकिन मधु मैडम का मुकाबला नहीं कर सकती थी.

मैं नैना को लेकर अपने कमरे में आ गया और दरवाज़ा बंद कर दिया और फिर नैना को ज़ोरदार जफ़्फ़ी मार कर उसके चूचों और चूतड़ों को भी सहला दिया थोड़ी देर!मैं बोला- अच्छा नैना, अब बताओ कैसे करोगी तुम यह सब इंतज़ाम? पहले करो खाना बनाने वालों का चुनाव! पर्बती तो कहीं जा नहीं सकती और तुमको अच्छी खाना बनानी वाली सब गाँव से चुननी होंगी? तुम फुलवा, छाया, बिंदु, चंदा इत्यादि को अभी जा कर मिलो और फिर वो जूही दुल्हनिया और वो काली मेनका को भी पूछो… ठीक है ना? इन में से जो खाना इत्यादि शहर वालों की माफिक बनाना जानता हो उसको लेकर कॉटेज में आ जाओ. फिर इनके साथ जो लड़की या औरत बर्तन धोने या खाना वगैरह बांटने के काम करना चाहे उसको ले आओ और कुछ आदमी भी ले आओ जो भारी सामान इत्यादि उठाने में मदद करेंगे. नैना तुम निम्मो को साथ लेकर फ़ौरन जाओ और रास्ते में बनिये की दुकान पर उसको बोल देना कि फिल्म वालों को काफी खाने पीने का सामान चाहिए होगा, तो वो मंगवा के रखे.

वो दोनों जाने लगी तो मैंने कहा- नीचे कार खड़ी है, उसको लेकर जाओ और सारा इंतज़ाम करके आओ .मैंने खुद जाकर उनको कार में बिठा दिया और सारा इंतज़ाम पूरा करके आने के लिए कहा.

थोड़ी देर आलखन करने के बाद मैं कॉटेज अपनी बाइक पर पहुँच गया.अंदर गया तो देखा कि नैना एंड पार्टी और उसके गाँव वाली लड़कियाँ और औरतें आई हुई थी. नैना ने सब कुछ बताया कि कौन क्या करेगा, फुलवा और छाया खाना बनाने का काम करेंगी, जूही दुल्हन और उसकी दो सहेलियाँ चाय वगैरह बनाएंगी और समय समय पर परोसने का काम करेंगी. 3 औरतें जो बर्तन साफ़ करेंगी वो भी आ गई थी.

बर्तन लाने के लिए दो आदमी भेज दिए गए थे, नैना और उसकी काम करने वालियाँ, सब के नाम एक रजिस्टर में लिख दिए गए और कौन क्या काम करेगा यह भी तय कर दिया गया था.आखिर में मेरी नज़र उस काले हीरे पर पड़ी जो लाइन के आखिर में बैठी हुई थी.नैना ने मुझ को बताया कि उस औरत का नाम सांवली है और वो खाना मेहमानो में उनके निर्धारित टेबलों पर रखने का काम और खाली प्लेटों को किचन तक पहुंचाने का काम करेगी.
 
जल्दी ही सब कुछ सेट हो गया और थोड़ी देर में पंचोली साहिब शहर से वापिस आ गए और सबसे पैसों के बारे में बात कर ली और पैसों का काम उन्होंने रूबी मैडम को दे दिया और कहा कि वही पैसों का हिसाब और लेन देन वही करेगी.

अब मैंने गौर से सबको देखा तो गाँव वाली लड़कियाँ और औरतों में मेरे मतलब की सिर्फ 3-4 थीं बाकी तो ख़ास नहीं थी.मैंने देखा कि रूबी मैडम मुझ को बार बार देख रही थी छुपी नज़रों से तो अब मैं भी उसको आँखों ही आँखों से देखने लगा.

कुछ देर इस तरह चला और फिर जब मधु मैडम घर चली गई तो मैं और रूबी ही रह गई बाकी सब जन तो बाहर बैठे इंतज़ाम की बातें कर रहे थे.

फिर जब इस गहमागहमी में मेरी और नैना की नज़रें चार हुई थी तो मैंने आँखों से उसको इशारा कर दिया रूबी की तरफ और नैना ने भी हामी में हल्के से सर हिला दिया.

मैं बैठा था मौके के इंतज़ार में और तभी रूबी उठ कर आई और मुझ को कहने लगी- सतीश जी, मुझ को ज़रा इस कॉटेज की सैर तो करवा दीजिये प्लीज.मैं बोला- ज़रूर करवा देता हूँ.

मैंने रूबी को कॉटेज के सारे कमरे दिखाए और आखिरी कमरा भी दिखाया जहाँ आज मैंने और मधु मैडम ने चुदाई की थी. कमरे को दुबारा साफ़ नहीं किया गया था तो मधु मैडम के छूटे हुए पानी के निशान दिखाई दे रहे थे बेड पर और उनको देख कर रूबी रुक गई और मुझसे पूछने लगी- यह क्या है?मैंने भी शरारत के मूड में पूछा- आप बताओ कि ये काहे के निशान हैं?रूबी थोड़ी देर उसको देखती रही फिर उसने ऊँगली लगा कर उन को सूंघा और फिर थोड़ा शर्माते हुए कहा- उसी के हैं.

मैंने भी खुल कर पूछा- उसी के? खुल कर बताइए ना प्लीज.अब रूबी शर्म से एकदम लाल हो गई और मुंह एकदम नीच करते हुए बोली- फक करने के निशान हैं शायद ये!मैं हैरान होते हुए बोला- अरे, एकदम सही जवाब है आपका लेकिन आपने कैसे समझ लिया यह सब?अब रूबी ने सर उठा कर मेरी और देखा और कहा- मधु मैडम ने मुझ को सब कुछ बता दिया है.

मैं बोला- चलो अच्छा हुआ तो क्या आप भी वही चाहती हो एक डीप फक?रूबी बोली- चाहती तो हूँ अगर तुम बुरा ना मानो तो?मैं बोला- मैं क्यों बुरा मानूंगा रूबी जी? वैसे आप कहाँ की रहने वाली हैं?रूबी बोली- मैं मराठी हूँ और अभी शादी नहीं हुई है.

मैं बोला- ग्रेट. आप क्या अभी चुदना चाहती हैं या फिर रात को?रूबी बोली- रात को कैसे होगा? हवेली में?मैं बोला- मेरा कमरा आप के कमरे के साथ ही है, रात को आप मेरे कमरे में आ जाएँ, कोई प्रॉब्लम नहीं हैं लेकिन मैं आपको फक एक शर्त पर ही कर सकता हूँ?रूबी बोली- क्या शर्त है तुम्हारी सतीश?मैं बोला- कल जो डांस करने आने वाली लड़कियाँ हैं उनकी भी मुझको दिलानी होगी बारी बारी. बोलो मंज़ूर है क्या?

रूबी हंस पड़ी और बोली- सतीश यार तुम बिलकुल निश्चिंत रहो, अगर उनको पता लग गया कि तुम बड़े चोदू हो तो वो सब तुमको कभी नहीं छोड़ेंगी?मैं बोला- अच्छा ऐसी हैं क्या वो सब? एकदम चुदक्कड़ क्या?रूबी बोली- फिल्म लाइन में यह सब चलता है, वो कोई भी मौका नहीं छोड़ेंगी अपना मज़ा लेने में, तो तुम बेफिक्र रहो. वो सब तुमको अपने आप बुलाएंगी.

अब मैंने आगे बढ़ कर रूबी मैडम को एक टाइट जफ्फी मार दी और उसके होटों पर एक गर्म चुम्मी जड़ दी.उसने मेरे पैंट के बटन खोलने शुरू कर दिए और मेरे लौड़े को बाहर निकाल लिया और उसको बड़ी हैरत से देखने लगी क्यूंकि वो एकदम से सख्त खड़ा था और वो उसको हाथों में लेकर सहलाने लगी.

रूबी ने सलवार सूट पहन रखा था, मैंने सिर्फ उसकी सलवार नीचे को की और उसको बेड पर थोड़ा झुका कर पीछे से उसकी गीली चूत में अपना खड़ा लंड डाल दिया, उसकी कमीज के ऊपर से ही उसके मोटे स्तनों को मसलने लगा और धीरे धीरे से नीचे से धक्के भी मारने लगा, पूरा निकाल कर पूरा अंदर डालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी.

रूबी अब खुद भी अपने चूतड़ को आगे पीछे करने लगी और आँखें बंद करके मस्ती करने लगी.मैं रूबी के मुलायम चूतड़ों पर हाथ फेर रहा था और मज़े से उसको चोद रहा था कि कमरे का दरवाज़ा एकदम से खुल गया और नैना कमरे के अंदर आ गई और दरवाज़ा फिर बंद कर दिया.नैना को देख कर रूबी एकदम से सकपका गई और मुझको हटाने की कोशिश करने लगी.

लेकिन मैंने रूबी के चूतड़ों को कड़े हाथों से पकड़ रखा था तो मैं बिना रुके पीछे से रूबी की सफाचट चूत में धक्के मारता रहा.नैना भी मुस्करा कर बोली- कोई बात नहीं रूबी मैडम, आप दोनों लगे रहो, मैं आपको डिस्टर्ब नहीं करूंगी.और वो हम दोनों के और पास आकर मेरे मुंह से अपना मुंह जोड़ कर चुम्बन करने लगी.नैना ने एक हाथ रूबी की चूत में डाल दिया और उसके भग को ढून्ढ कर मसलने लगी.

जैसे ही नैना ने ऐसा किया रूबी एकदम से दहकने लगी और जल्दी ही छूटने वाली हो गई और अब मैंने अपने लंड लाल की तेज़ी दिखानी शुरू की, सरपट घोड़े को भगाते हुए उसको चोदने लगा और चंद मिनटों में रूबी ‘हाय हाय मी जातोस मी जातोस रे…’ कहते हुए ढेर हो गई.

मैंने अपना लंड रूबी की फड़कती चूत से निकाला और नैना ने उसको तौलिये से साफ़ कर दिया और रूबी की चूत को भी साफ़ कर दिया.

कहानी जारी रहेगी.
 


फिल्म वाली मैडमों की खुले में चूत चुदाई


सरपट घोड़े को भगाते हुए उसको चोदने लगा और चंद मिनटों में रूबी ‘हाय हाय मी जातोस मी जातोस रे…’ कहते हुए ढेर हो गई.मैंने अपना लंड रूबी की फड़कती चूत से निकाला और नैना ने उसको तौलिये से साफ़ कर दिया और रूबी की चूत को भी साफ़ कर दिया.

शाम की चाय हम सबने बैठक में पी और वहीं बैठ कर सारे इंतज़ामों के बारे में चर्चा भी की मधु और रूबी मैडम से.रात के खाने के बाद मैं दोनों मैडमों को हवेली के बगीचे में घुमाने ले गया, दोनों मेरी साइड में चल रही थी और दोनों ने मेरा हाथ पकड़ा हुआ था, दोनों ही कोशिश कर रही थी कि उनके सॉलिड चूचे मेरे बाजुओं से टकरा जाएँ और मेरे हाथ अक्सर उनके गोल और मोटे चूतड़ों के ऊपर से बार बार फिसल जाते थे.

एक अँधेरे स्थान पर मैंने पहले मधु मैडम और फिर रूबी दोनों का मुंह अपनी तरफ करके उनके लबों पर एक गर्म चुम्बन दे दिया.मधु मैडम बोली- सतीश यार, मैंने कभी खुले में नहीं किया सेक्स. क्या यहाँ लॉन में पॉसिबल है यह सब?रूबी मैडम भी बोली- हाँ हाँ, मैंने भी कभी नहीं फक करवाया खुले में यानि पब्लिक प्लेस में!मैं बोला- पॉसिबल तो है लेकिन उसके लिए थोड़ा मन पक्का रखना होगा. वैसे यह लॉन तो बहुत सेफ है क्योंकि हवेली के गेट पर तो चौकीदार होता है, वो किसी को अंदर नहीं आने देगा लेकिन आपका नाज़ुक जिस्म में घास वगैरह चुभ सकता है, इसका ध्यान रखना पड़ेगा आप दोनों को!मधु और रूबी एकदम बोल पड़ी- हमें तो कोई फर्क नहीं पड़ता.मैं बोला- तो चलिए फिर मेरे साथ, बिल्कुल सेफ जगह है जहाँ किसी की नज़र नहीं पड़ सकती.

और मैं उनकी कमर में अपने दोनों हाथ डाले चल पड़ा और रास्ते में उनके गोल चूतड़ों को भी सहलाता जाता था. उन दोनों ने भी मेरे लंड को पैंट के ऊपर से अपने हाथों से सहलाना शुरु कर दिया था.

चलते चलते हम एक ऐसी जगह पहुँच गए जहाँ घर में जल रही लाइट का कोई असर नहीं पड़ रहा था और जो घने पेड़ों के झुरमुट में छुपी हुई थी.मैंने दोनों मैडम से कहा- कैसी है यह जगह?दोनों ने घूम घूम कर देखा और मुलायम घास को परखा और फिर बोली- हाँ, यह ठीक जगह है और नीचे घास भी काफी सॉफ्ट है.

मुझको घेर लिया उन दोनों ने और मुझको लबों पर एक के बाद बड़ी कामातुर चुम्मियाँ करने लगी दोनों मुंबई की हसीनाएँ! मैं भी उनके सॉफ्ट मुम्मों को अपने हाथों में लेकर मसलने लगा और उनकी ब्रा और ब्लाउज़ में छुपे चूचुकों को मसलने लगा.

और उनकी साड़ी या फिर सलवार सूट के बाहर से चूत में हाथ डालने लगा और दोनों जल्दी ही चुदाई लिए तैयार हो गई लेकिन वो जगह ऐसी थी कि कपड़े उतारने का तो सवाल ही नहीं था तो मैंने मधु को एक पेड़ को पकड़ कर रखने को कहा और उसको थोड़ा झुका कर और पैंट से अपने एकदम से अकड़े लंड को निकाला और मधु मैडम के पीछे से चूत के मुंह पर रख कर एक ज़ोर का धक्का मारा तो लंड सीधा उसकी गीली चूत के अंदर पूरा चला गया.

रूबी मैडम अपने हाथ से मेरे लंड को मधु मैडम की चूत में जाते हुए महसूस कर रही थी और हर बार जब वो गीला होकर निकलता था उसको बड़ा आनन्द आ रहा था. रूबी कभी मेरे अंडकोष को छेड़ रही थी और कभी लौड़े को फील कर रही थी और कभी फिर मेरे चूतड़ों के साथ खेल रही थी.

अब मैंने महसूस किया कि मधु मैडम अब छुटने के लिए तैयार है तो मैंने धक्कों की स्पीड एकदम तेज़ कर दी और उसके चूतड़ों को दोनों हाथों में पकड़ कर ज़ोरदार लंड का अटैक जारी रखा.इस धुआँदार अटैक के कारण मधु एकदम से अकड़ी और फिर ढीली पड़ गई और मैं समझ गया कि मैडम का काम हो गया है.थोड़ी देर लंड को मधु मैडम की कांपती चूत से नहीं निकाला और उसको जब निकाला तो वो एकदम से गीलेपन से तरबतर हो चुका था.

रूबी तैयार बैठी थी, उसने झट से मेरे गीले लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसको लपालप चूसने लगी और उसने यह समझ के चूसना शुरू किया था कि शायद मेरा लंड मैडम को चोद कर बैठ जाएगा और वो रह जायेगी.थोड़ी देर चूसने के बाद भी जब उसने देखा कि मेरा लंड अभी भी अकड़ा हुआ था तो उसने चूसना छोड़ दिया और घास पर बैठ गई, वो यह देख कर हैरान रह गई कि मेरा लंड लाल अभी भी लहलहा रहा था.

अब मैं भी बैठ गया और उसके गोल लेकिन छोटे मुम्मों के साथ उसकी कमीज के बाहर से खेलने लगा और फिर उसको घोड़ी बनने के लिए कहा.घोड़ी बनते ही मैंने उसकी सलवार को एकदम से नीचे किया और फिर अपने लौड़े के साथ उसकी चूत पर टूट पड़ा और लंड को अंदर डालने के बाद कभी धीरे कभी तेज़ रूबी मैडम को चोदने लगा.क्योंकि उसने सिर्फ अपनी सलवार ही नीचे की थी तो उसके गोल और सख्त चूतड़ों को मैं देख सकता था और उनको फील कर सकता था.

रूबी मैडम मेरे लंड से अब काफी वाकिफ हो चुकी थी, वो चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी और मधु मैडम अपनी साड़ी को अभी भी ऊपर करके धीरे धीरे ऊँगली कर रही थी.क्यूंकि हम खुले में चुदाई कर रहे थे तो ज़्यादा समय ना लेते हुए मैंने रूबी मैडम की चुदाई की स्पीड एकदम तेज़ कर दी और साथ में उसकी भग को भी रगड़ना शुरू कर दिया जिससे वो अब छूटने के करीब हो गई थी.

रूबी के चूतड़ों पर हल्की सी थपेड़ मारते हुए मैंने चुदाई जारी रखी और तेज़ धक्काशाही के कुछ मिन्ट बाद ही रूबी मैडम एकदम से कांपने लगी और उसकी चूत में सिकुड़न शुरू हो गई और वो बहुत ही धीरे से फुसफुसाती हुई बोली- मार दे सतीश यार, उफ्फ मी गयाला रे!

फिर वो वहीं घास पर लेट गई और मैंने अपना गीला लौड़ा निकाल कर उसको रुमाल से पौंछा और पैंट के बटन बंद करते हुए चलने के लिए तैयार हो गया.रूबी मैडम भी अपनी ड्रेस ठीक करके चल पड़ी और हम तीनो कुछ ही क्षणों में अपने कमरों में पहुँच गए.

थोड़ी देर बाद नैना आई, मेरे लिए स्पेशल दूध जिसमें छुवारे बादाम और पिस्ता इत्यादि पड़े हुए थे, कमरे में छोड़ कर जाने लगी तो मैंने उसको रोक कर एक ज़ोर की जफ्फी डाली और एक हॉट किस उसके होटों पर जमा कर उसकी साड़ी उठा कर उसकी बालों भरी चूत को सहला दिया.

अगले दिन सुबह कोई 10 बजे के करीब एक मिनी बस हवेली के बाहर आ कर रुकी और उसमें से 10-12 लड़कियाँ निकली.

कहानी जारी रहेगी.
 


डांस वाली लड़कियाँ और वो काला हीरा


अगले दिन सुबह कोई 10 बजे के करीब एक मिनी बस हवेली के बाहर आकर रुकी और उसमें से 10-12 लड़कियाँ निकली.रूबी मैडम ने उनका स्वागत किया.

फिर हम सब उनको लेकर कॉटेज की तरफ चल दिए उसी मिनी बस में!वहाँ नैना और उसकी काम वालियाँ पहुँच चुकी थी और किचन में नाश्ता इत्यादि की तैयारी चल रही थी.

नैना उन सबको लेकर उनके कमरो में पहुँचा आई, सिर्फ दो लड़कियाँ जिनको कमरा नहीं मिला, उनके बारे में इंतज़ाम करना बाकी था, तो उनको एक कमरे नुमा स्टोर रूम में टिका दिया और सबको लेकर नाश्ता के लिए डाइनिंग टेबल पर ले आई थी.

जैसे ही नाश्ता खत्म हुआ, रूबी उन सबको लेकर बैठक में आ गई और उनको काम समझाने लगी.वहीं पर उसने सबको मुझ से मिलवाया और बताया कि मैं वहाँ के ज़मींदार का लड़का हूँ और सारे काम का मैनेजर भी हूँ.

अब मैंने सब लड़कियों को ध्यान से देखा तो उनमें से सबकी सब लम्बे कद बुत की थी और काफी सुन्दर और सुडौल शरीर की मालिक थी. एक ख़ास बात जो मैंने नोट की, वो सब एक जैसी ही लम्बी थी, सबकी हाइट 5’5″ फ़ीट से ऊपर ही थी.एक दो मुझ से बार बार नज़र मिला रही थी और बात करने की कोशिश कर रही थी.आते जाते एक दो से तो हाथ से हाथ टकराए थे और मैंने उनको सॉरी भी बोल दिया था.

एक उनमें से बहुत चुलबुली थी, वो मेरे पास वाले सोफे पर आकर बैठ गई और बोली- हेलो मैनेजर साहब, मेरा नाम जूली है, आपका क्या नाम है?मैंने उसको और बाकी लड़कियों को अपना नाम बताया तब जूली बोली- क्यों मिस्टर सतीश, क्या तुम कॉलेज में हो क्या?मैं बोला- हाँ, मैं कॉलेज के फर्स्ट ईयर में हूँ, आप कहाँ तक पढ़ी हैं?जूली बोली- मैंने बी ए किया हुआ है, और ये सब लड़कियाँ भी कॉलेज कर चुकी हैं.

मैं बोला- मुंबई शहर तो, कहते हैं, बहुत बड़ा है, क्या यह सच है?जूली बोली- मुंबई बहुत बड़ा शहर है सारे इंडिया में, तुम्हारा लखनऊ तो कुछ भी नहीं उसके मुकाबले में!

इतने में रूबी मैडम भी आ गई और बोली- चलो नाश्ता हो गया है तो डांस की तैयारी करनी शुरू करें. अपने कपड़े भी चेंज कर लो जल्दी से!सब लड़कियाँ जल्दी से अपने कमरों में चली गई और मैं भी रूबी मैडम से कह कर अपने घर आ गया.

नहा धोकर मैं फिर कॉटेज में जाने लगा तो मधु मैडम आ गई और बोली- सतीश यार, वो कार तो बिजी है, तुम मुझ को कॉटेज छोड़ आओ.मैं बोला- आइए मैडम, मैं वहीं जा रहा हूँ अपनी बाइक पर, आप भी चल सकती हैं मेरे साथ!जब बाइक चलाई तो मैडम मेरे से चिपक कर बैठ गई और उसके सॉलिड मुम्मे मेरी पीठ से चिपक गए और मैं थोड़े तेज़ चला कर ब्रेक मार रहा था जिससे मैडम के मुम्मे और भी चिपके रहे मेरी पीठ से!

कॉटेज पहुँच कर मैंने मैडम को याद कराया- मैडम याद है न वो आपका वायदा?मैडम बोली- कौन सा वायदा सतीश?मैं भी मैडम की आँखों में आँखें डाल कर बोला- वही, जो लड़की अच्छा डांस नहीं करेगी, उसको मुझसे फ़क करवाओगे आप?मैडम ज़ोर से हंस दी- बड़ी तेज़ यादाश्त है यार तेरी. मैं ज़रूर फक करवाऊँगी लेकिन उससे पहले ही वो तुझ को घेर लेंगी और तुझको नहीं छोड़ेंगी, ख़ास तौर से तेरी फकिंग कैपेसिटी देख कर! देख लेना!

हम दोनों अंदर चले गए और मैडम उनको निर्देश देने में बिजी हो गई.थोड़ी देर तो मैं मैडम को देखता रहा कि वो रूबी को और डांसर्स को क्या आदेश दे रही हैं, फिर मैं घूमता हुआ किचन में चला गया जहाँ फुलवा और उसकी सहयोगी खाना बनाने में लगी हुई थी.नैना भी पहुँच चुकी थी, वो उनको जहाँ भी ज़रूरत होती थी, मदद कर रही थी.

सबको देखते हुए मेरी नज़र उस काले हीरे पर पड़ी जो अभी कुछ रसोई का काम कर रही थी.उसने मेरी तरफ देखा और हल्के से मुस्करा दी.नैना हमारी आँखों की इशारेबाजी देख रही थी, वो मेरे पास आई और बोली- आप पीछे स्टोर में चलिए, मैं आपके हीरे को लेकर आती हूँ.

मैं टहलते हुए स्टोर में गया और वहाँ पड़े हुए सामान को देख ही रहा था कि नैना काले हीरे को लेकर आ गई.आते ही नैना बोली- छोटे मालिक, इससे मिलो, यह है देवकी!मैं बोला- अच्छी सुन्दर है यह देवकी तो, इसकी शादी हो चुकी है क्या?नैना बोली- हाँ छोटे मालिक, हो तो चुकी है लेकिन इसका पति बाहर गया हुआ है नौकरी के सिलसिले में, तो यह अभी दो साल से अनछुई है.
 
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