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अब परी ने मुझको कस कर अपने से चिपका लिया, उसकी सांसें बड़ी तेज़ी से चल रही थी और उसका शरीर पत्ते की तरह कांप रहा था. मैंने भी उसको पूरी ताकत से भींच रखा था.जब वो थोड़ी सी संयत हुई तो मैंने उसको छोड़ दिया, उसकी आँखें बंद थी और उसके चेहरे पर एक बहुत प्यारी से मुस्कान थी जो यह जता रही थी कि वो पूरी तरह से आन्नदित हो गई थी.
नैना बहुत व्यस्त थी, वो परी के मुंह और शरीर को गीले तौलिये से ठंडा करने की कोशिश कर रही थी.जब मैं परी के ऊपर से उठा और पलंग पर लेटा तो वो आ गई और मेरे शरीर को और लंड को तौलिये से साफ़ कर रही थी, मेरे लौड़े पर अभी भी परी की चूत के खून के दाग लगे थे..
फिर मैं और परी कुछ देर के लिए सो गए.जब आधे घंटे बाद उठे तो नैना हमारे लिए स्पेशल दूध के गिलास लेकर खड़ी थी. दूध का पहला घूँट ही पिया तो एकदम आनन्द आ गया.
मैंने पूछा- क्या डाला है इसमें? बहुत ही स्वादिष्ट है और एकदम ठंडा है.
नैना बोली- तुम दोनों ने बहुत ही मेहनत की थी तो थकान कम करने के लिए है.
परी बोली- वाह नैना आंटी, आप तो कमाल की चीज़ हो. आपने मेरी बड़ी मदद की वरना बड़ा मुश्किल होता मेरे लिए!
नैना ने पूछा- तुमको आनन्द आया या नहीं?
परी बोली- बहुत मज़ा आया नैना आंटी.यह कह कर परी ने मेरे खड़े लंड को पकड़ लिया और उसके साथ खेलने लगी, नैना ने परी से पूछा- क्या एक बार और चुदवाने की इच्छा है तुम्हारी?
परी ने फ़ौरन हाँ में सर हिला दिया और वो मेरी तरफ देखने लगी. मैंने भी उसकी चूत पर हाथ रखा और उंगली डाल कर चेक किया कि वो गीली हुई या नहीं.उस वक्त वो फिर से काफी गीली हो चुकी थी, नैना ने क्रीम की शीशी से क्रीम लेकर उसकी चूत पर लगानी शुरू कर दी और थोड़ी सी मेरे लंड पर भी लगा दी.
फिर उसने परी को मेरे लंड पर बैठने के लिए कहा और अपने हाथ से मेरा लंड उसकी चूत के मुंह पर रख कर कहा कि वो ऊपर से ज़ोर लगाये.परी ने ऐसा ही किया और लंड एक ही झटके में चूत के अंदर हो गया, तब वो धीरे धीरे लंड के ऊपर नीचे होने लगी.
मैं उसके गोल और सॉलिड मम्मों के साथ खेलता रहा और उसकी चूचियों को गोल गोल घुमाता रहा. परी ऊपर से मुझको चोद रही थी और मैं नीचे लेटे हुए आनन्द ले रहा था.उसकी गोल गोल जांघों जो एकदम सफ़ेद संगमरमर की तरह थी, बहुत ही आकर्षक लग रही थी.परी को चुदाई का बहुत आनन्द आ रहा था और वो कभी धीरे से या फिर तेज़ी पकड़ कर चुदाई का आनन्द ले रही थी.
एक बार फिर परी का चुदाई के दौरान पानी छूटा और वो कांपते शरीर के साथ मेरे ऊपर ही पसर गई. मेरा लंड अभी भी परी की चूत में ही था.यह चुदाई का कार्यक्रम काफी देर चलता रहा. नैना ने मुझको इशारा किया कि बस अब और नहीं.तब मैंने परी को हिलाया और वो उठी और अपने कपड़े पहनने लगी.
नैना उसको बाथरूम में ले गई और वो मुंह हाथ धो कर जब लौटी तो आते ही उसने मेरे लबों पर किसिंग करना शुरू कर दिया और फिर एक ज़ोरदार प्यार की जप्फी मुझ को मारी और मेरा थैंक्स करके घर जाने के लिए चलने लगी.मैंने नैना को कहा कि वो उसको उसकी कोठी तक छोड़ आये.परी ने कहा कि वो दोबारा आना चाहती है तो मैंने कहा कि फ़ोन कर लेना और नैना से या मुझसे प्रोग्राम तय कर लेना.
उन दोनों के जाने के बाद मैं थोड़ी देर के लिए लेट गया. थोड़ी देर बाद नैना लौट आई और सीधे मेरे पास ही आ गई, आते ही पूछा उसने- कैसी लगी परी आपको?
मैंने कहा- बहुत अच्छी… लेकिन आप दोनों के साथ मज़ा ही कुछ और है, खासतौर पर तुम्हारे सामने कोई भी लड़की या औरत नहीं टिक सकती. तुम्हारा सेक्स का स्टाइल और चुदाई के दौरान और बाद में अपने पार्टनर का ख्याल रखना शायद दूसरे औरतों या लड़कियों के बस में नहीं.
नैना बोली- छोटे मालिक, कल कोई और भी लड़की थी आप लोगों के साथ?
मैं बोला- हाँ थी तो सही, शायद उसका नाम जस्सी है, क्यों पूछ रही हो?
नैना बोली- वो शायद परी की खास सहेली है क्यूंकि उसने दो बार कहा लो जस्सी का भी सतीश कल्याण कर दे तो उसको बड़ा मज़ा आएगा.
मैं बोला- उसने भी वही किया था जो परी ने किया था सिनेमा हाल में!
नैना बोली- दोनों ही काफी गरम स्वाभाव की हैं शायद. परी ने इशारा फेंका है कि अगर सतीश चाहे तो जस्सी को भी चोद सकता है, वो भी परी की तरह अभी कुंवारी है.
मैं बोला- तुम क्या कहती हो नैना?
नैना बोली- मेरा सोचना यह है कि अभी तो ये दोनों बहनें बीमार चल रहीं हैं तो कोई आये या जाये इनको फर्क नहीं पड़ता लेकिन जब ये ठीक हो गई तो काफी मुश्किल कर देंगी दूसरी लड़कियों का आपके पास आना!
मैं बोला- ठीक कह रही हो नैना, तो तुम जस्सी के लिए मेरी तरफ से हाँ कर देती न!नैना बोली- मैंने कह तो दिया है कि छोटे मालिक तैयार हो जाएंगे अगर आप कहें तो उससे पक्का कर लें.
मैं बोला- लेकिन हाँ करने से पहले यह भी तो सोचना पड़ेगा कि वो कब आ सकती है? मैं नहीं चाहता इन दो बहनों के सामने वो आये! ऐसा करो तुम परी को कहो कि कल वो कालेज के समय घर से निकले और जस्सी को लेकर सीधी हमारी कोठी में आ जाए. तब तक ये बहनें भी कालेज जा चुकी होंगी. क्यों यह प्लान कैसा रहेगा?
नैना बोली- तब तो आपको भी कालेज से छुट्टी लेनी पड़ेगी.
मैं बोला- नहीं, कल हमारे कालेज में इलेक्शन हैं, मैं बाद में चला जाऊंगा.
नैना बोली- ठीक है, मैं उस से अभी बात करती हूँ और कहूँगी कि दोनों साथ ही आयें.
मैं फिर अपने पलंग पर लेट गया और सोचने लगा कि एक और कुंवारी चूत के साथ मिलन होने जा रहा है.
थोड़ी देर बाद नैना आई और बोली- छोटे मालिक वो दोनों कल 10 बजे यहाँ पहुँच जाएंगी.मैंने नैना को इशारा किया कि वो मेरे पास आये और जैसे ही वो आई मैंने उसको कस कर अपने सीने से लगा लिया और एक ज़ोरदार चुम्मा किया उसके होटों पर, जल्दी से अपना हाथ उसकी साड़ी के अंदर डाला और उसकी गीली चूत पर हाथ फेरा और चूत के बाल हल्के से खींचे.उसने भी मुझको चूमा और फिर वो चली गई.
कहानी जारी रहेगी.
नैना बहुत व्यस्त थी, वो परी के मुंह और शरीर को गीले तौलिये से ठंडा करने की कोशिश कर रही थी.जब मैं परी के ऊपर से उठा और पलंग पर लेटा तो वो आ गई और मेरे शरीर को और लंड को तौलिये से साफ़ कर रही थी, मेरे लौड़े पर अभी भी परी की चूत के खून के दाग लगे थे..
फिर मैं और परी कुछ देर के लिए सो गए.जब आधे घंटे बाद उठे तो नैना हमारे लिए स्पेशल दूध के गिलास लेकर खड़ी थी. दूध का पहला घूँट ही पिया तो एकदम आनन्द आ गया.
मैंने पूछा- क्या डाला है इसमें? बहुत ही स्वादिष्ट है और एकदम ठंडा है.
नैना बोली- तुम दोनों ने बहुत ही मेहनत की थी तो थकान कम करने के लिए है.
परी बोली- वाह नैना आंटी, आप तो कमाल की चीज़ हो. आपने मेरी बड़ी मदद की वरना बड़ा मुश्किल होता मेरे लिए!
नैना ने पूछा- तुमको आनन्द आया या नहीं?
परी बोली- बहुत मज़ा आया नैना आंटी.यह कह कर परी ने मेरे खड़े लंड को पकड़ लिया और उसके साथ खेलने लगी, नैना ने परी से पूछा- क्या एक बार और चुदवाने की इच्छा है तुम्हारी?
परी ने फ़ौरन हाँ में सर हिला दिया और वो मेरी तरफ देखने लगी. मैंने भी उसकी चूत पर हाथ रखा और उंगली डाल कर चेक किया कि वो गीली हुई या नहीं.उस वक्त वो फिर से काफी गीली हो चुकी थी, नैना ने क्रीम की शीशी से क्रीम लेकर उसकी चूत पर लगानी शुरू कर दी और थोड़ी सी मेरे लंड पर भी लगा दी.
फिर उसने परी को मेरे लंड पर बैठने के लिए कहा और अपने हाथ से मेरा लंड उसकी चूत के मुंह पर रख कर कहा कि वो ऊपर से ज़ोर लगाये.परी ने ऐसा ही किया और लंड एक ही झटके में चूत के अंदर हो गया, तब वो धीरे धीरे लंड के ऊपर नीचे होने लगी.
मैं उसके गोल और सॉलिड मम्मों के साथ खेलता रहा और उसकी चूचियों को गोल गोल घुमाता रहा. परी ऊपर से मुझको चोद रही थी और मैं नीचे लेटे हुए आनन्द ले रहा था.उसकी गोल गोल जांघों जो एकदम सफ़ेद संगमरमर की तरह थी, बहुत ही आकर्षक लग रही थी.परी को चुदाई का बहुत आनन्द आ रहा था और वो कभी धीरे से या फिर तेज़ी पकड़ कर चुदाई का आनन्द ले रही थी.
एक बार फिर परी का चुदाई के दौरान पानी छूटा और वो कांपते शरीर के साथ मेरे ऊपर ही पसर गई. मेरा लंड अभी भी परी की चूत में ही था.यह चुदाई का कार्यक्रम काफी देर चलता रहा. नैना ने मुझको इशारा किया कि बस अब और नहीं.तब मैंने परी को हिलाया और वो उठी और अपने कपड़े पहनने लगी.
नैना उसको बाथरूम में ले गई और वो मुंह हाथ धो कर जब लौटी तो आते ही उसने मेरे लबों पर किसिंग करना शुरू कर दिया और फिर एक ज़ोरदार प्यार की जप्फी मुझ को मारी और मेरा थैंक्स करके घर जाने के लिए चलने लगी.मैंने नैना को कहा कि वो उसको उसकी कोठी तक छोड़ आये.परी ने कहा कि वो दोबारा आना चाहती है तो मैंने कहा कि फ़ोन कर लेना और नैना से या मुझसे प्रोग्राम तय कर लेना.
उन दोनों के जाने के बाद मैं थोड़ी देर के लिए लेट गया. थोड़ी देर बाद नैना लौट आई और सीधे मेरे पास ही आ गई, आते ही पूछा उसने- कैसी लगी परी आपको?
मैंने कहा- बहुत अच्छी… लेकिन आप दोनों के साथ मज़ा ही कुछ और है, खासतौर पर तुम्हारे सामने कोई भी लड़की या औरत नहीं टिक सकती. तुम्हारा सेक्स का स्टाइल और चुदाई के दौरान और बाद में अपने पार्टनर का ख्याल रखना शायद दूसरे औरतों या लड़कियों के बस में नहीं.
नैना बोली- छोटे मालिक, कल कोई और भी लड़की थी आप लोगों के साथ?
मैं बोला- हाँ थी तो सही, शायद उसका नाम जस्सी है, क्यों पूछ रही हो?
नैना बोली- वो शायद परी की खास सहेली है क्यूंकि उसने दो बार कहा लो जस्सी का भी सतीश कल्याण कर दे तो उसको बड़ा मज़ा आएगा.
मैं बोला- उसने भी वही किया था जो परी ने किया था सिनेमा हाल में!
नैना बोली- दोनों ही काफी गरम स्वाभाव की हैं शायद. परी ने इशारा फेंका है कि अगर सतीश चाहे तो जस्सी को भी चोद सकता है, वो भी परी की तरह अभी कुंवारी है.
मैं बोला- तुम क्या कहती हो नैना?
नैना बोली- मेरा सोचना यह है कि अभी तो ये दोनों बहनें बीमार चल रहीं हैं तो कोई आये या जाये इनको फर्क नहीं पड़ता लेकिन जब ये ठीक हो गई तो काफी मुश्किल कर देंगी दूसरी लड़कियों का आपके पास आना!
मैं बोला- ठीक कह रही हो नैना, तो तुम जस्सी के लिए मेरी तरफ से हाँ कर देती न!नैना बोली- मैंने कह तो दिया है कि छोटे मालिक तैयार हो जाएंगे अगर आप कहें तो उससे पक्का कर लें.
मैं बोला- लेकिन हाँ करने से पहले यह भी तो सोचना पड़ेगा कि वो कब आ सकती है? मैं नहीं चाहता इन दो बहनों के सामने वो आये! ऐसा करो तुम परी को कहो कि कल वो कालेज के समय घर से निकले और जस्सी को लेकर सीधी हमारी कोठी में आ जाए. तब तक ये बहनें भी कालेज जा चुकी होंगी. क्यों यह प्लान कैसा रहेगा?
नैना बोली- तब तो आपको भी कालेज से छुट्टी लेनी पड़ेगी.
मैं बोला- नहीं, कल हमारे कालेज में इलेक्शन हैं, मैं बाद में चला जाऊंगा.
नैना बोली- ठीक है, मैं उस से अभी बात करती हूँ और कहूँगी कि दोनों साथ ही आयें.
मैं फिर अपने पलंग पर लेट गया और सोचने लगा कि एक और कुंवारी चूत के साथ मिलन होने जा रहा है.
थोड़ी देर बाद नैना आई और बोली- छोटे मालिक वो दोनों कल 10 बजे यहाँ पहुँच जाएंगी.मैंने नैना को इशारा किया कि वो मेरे पास आये और जैसे ही वो आई मैंने उसको कस कर अपने सीने से लगा लिया और एक ज़ोरदार चुम्मा किया उसके होटों पर, जल्दी से अपना हाथ उसकी साड़ी के अंदर डाला और उसकी गीली चूत पर हाथ फेरा और चूत के बाल हल्के से खींचे.उसने भी मुझको चूमा और फिर वो चली गई.
कहानी जारी रहेगी.