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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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नैना और पारो की गांड मारी

नैना काफ़ी देर चोदती रही मुझको… और जब उस का मन भर गया तो उसने मुझको कुछ इस तरीके से चोदा कि मेरा फव्वारा छूट गया.फिर हम एक दूसरे के बाहों में ही सो गए.

अगले दिन सोनू, छवि और उनकी सहेलियाँ अपने घर चली गई. कॉलेज से वापस आने पर नैना ने बताया कि गाँव से फ़ोन पर निर्मल से बात हुई थी, वो कह रही है कि फुलवा के घर में भी लड़का हुआ है. बधाई हो आपको बहुत सी, फिर पिता बन गए आप!यह कहते हुए वो मुझको चिड़ा रही थी.मैं बोला- चलो अच्छा हुआ, उसको भी बच्चे की आवश्यकता थी.

अगले दिन जब मैं कॉलेज पहुंचा तो मेरे एक खास मित्र ने सूचना दी कि कालेज की ड्रामा क्लब अपने मेंबर्स को 3 दिन के ट्रिप पर ले जा रही है, यह ट्रिप नैनीताल इत्यादि सुन्दर स्थलों की सैर करवाएगा, प्रत्येक छात्र और छात्रा को 100 रूपए देने होंगे.सारे छात्र कालेज द्वारा एक बस में ले जाए जाएंगे, खाने-पीने और रहने का बंदोबस्त भी कालेज ही करेगा, जो जाना चाहेंगे उनको नाम जल्दी लिखवाना पड़ेगा और पैसे भी शीघ्र ही देने होंगे.

शाम को घर आकर मैंने गाँव फ़ोन किया और पूछा तो मम्मी बोली- ज़रूर जाओ और पैसे की ज़रूरत हो तो फ़ोन कर देना, मैं बैंक में डलवा दूँगी.मैंने कहा- ठीक है.

अगले दिन मैंने अपना नाम लिखवा दिया और पैसे भी दे दिए, नैना ने मेरे जाने की तैयारी भी शुरू कर दी.उस रात मैंने नैना और पारो को खूब चोदा. पारो बेचारी कुछ कम चुदी थी तो उसकी चुदाई पर ख़ास ध्यान दिया.

नैना बोली- छोटे मालिक, क्या आपका दिल कभी गांड चोदने का नहीं करता?मैं बोला- गांड चोदने के बारे में कभी सोचा नहीं. क्यों तुम्हारा दिल है गांड मरवाने का?नैना बोली- मैंने भी कभी गांड मरवाई नहीं न, तो कभी कभी इच्छा करती है कि गांड चुदाई का भी मज़ा लेना चाहये न! क्यों पारो, तुम्हारा दिल नहीं करता क्या?पारो बोली- करता तो है लेकिन फिर मन में भय आ जाता है कि कहीं दर्द न हो बहुत?नैना बोली- देखो पारो, जब तक करके नहीं देखते, तब तक कुछ भी डर नहीं, चलो छोटे मालिक.

मैं भी तयार हो गया.नैना उठी और नंगी ही रसोई में चली गई और देसी घी थोड़ा सा कटोरी में ले आई. फिर उसने अपनी और पारो की गांड के ऊपर और अंदर देसी घी काफी सारा लगा दिया और कुछ देसी घी उसने मेरे लौड़े पर भी लगा दिया.अब हम तीनों का बदन देसी घी से महक रहा था.

पहले बिस्तर पर नैना घोड़ी बनी और पारो मेरे और नैना के बीच में मदद करने के लिए बैठ गई.

मैं जैसे ही अपने खड़े लंड का निशाना साधने लगा, पारो ने घी से चुपड़ी नैना की गांड पर मेरा लौड़ा रख दिया, फिर वो बोली- धीरे से लंड का मुंह अंदर जाने दो.मैंने भी हल्का सा धक्का मारा और लंड का थोड़ा सा हिस्सा गांड के अंदर चल गया.नैना थोड़ी से बिदकी लेकिन फिर संयत होकर शांत होकर घोड़ी बनी रही..

पारो ने मुझको और धक्का मारने का सिगनल दिया और मैंने ज़रा और लंड अंदर धकेल दिया. मुझको ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड एक बड़ी टाइट पाइप के अंदर जा रहा था.

इस तरह धीरे धीरे नैना की गांड में मेरा सारा लौड़ा समा गया. लंड की जो हालत थी वो ब्यान नहीं की जा सकती क्योंकि गांड की बहुत ज्यादा पकड़ होती है और लंड बेचारा यह महसूस कर रहा था जैसे उसको एक बहुत ही तंग जेल की सलाखों में बंद कर दिया गया.

फिर भी मैंने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये.पारो लगातार नैना को देख रही थी और जब उसने देखा कि नैना को मज़ा आने लगा है तो उसने मुझको इशारा किया और मैंने धक्कों की स्पीड तेज़ कर दी.

अब मैंने महसूस किया कि मेरे लंड को नैना की गांड, जैसे गाय का दूध दोहते है, वैसे खुल और बंद हो रही थी, इस कारण मुझको बहुत ही आनन्द आ रहा था और मैं थोड़े समय में ही एक ज़ोरदार धक्के के बाद छूट गया.लेकिन मैंने लंड को निकाला नहीं और उसको वैसे ही सख्त हालत में गांड के अंदर ही पड़ा रहने दिया.

इधर पारो नैना की चूत को और उसके भग को मसल रहे थी जिससे नैना का मज़ा बहुत अधिक बढ़ गया था, वो अब गांड को खुद ही आगे पीछे करने लगी और मैंने अपने धक्के रोक दिए और नैना की गांड चुदाई का आनन्द लेने लगा.

थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि नैना की गांड एक बार फिर खुल बंद हो रही है.मैंने उससे पूछा- क्यों नैना, एक बार और छूटा तेरा?उसने हाँ में सर हिला दिया.तब मैंने कहा- और चोदूँ या फिर बस?नैना बोली- बस छोटे मालिक, बहुत हो गया.

मैं फ़ौरन घोड़ी से नीचे उतर गया.

तब पारो नैना की तौलिये से सफाई करने लगी. थोड़ी देर आलखन करने के बाद मैंने पारो को इशारा किया कि आ जाओ मैदान में!

वो कुछ हिचकचा रही थी. यह देख कर मैंने कहा- पारो, अगर नहीं इच्छा, तो रहने दो, फिर कभी सही!पारो बोली- नहीं छोटे मालिक, ऐसी बात नहीं है. मैं सोच रही थी कि आप थोड़ा आलखन कर लेते तो ठीक होता न!मैं बोला- नहीं नहीं, मैं बिल्कुल नहीं थका हूँ. अगर गांड मरवाने की इच्छा है तो आ जाओ. नहीं तो मैं तुम्हारी चूत ही ले लेता हूँ. बोलो जल्दी?पारो बोली- आ जाओ छोटे मालिक, आज गांड मरवाई का भी मज़ा ले लेती हूँ.

नैना उठी और उसने फिर से देसी घी मेरे लंड पर लगा दिया और कॅाफ़ी सारा पारो की गांड में डाल दिया.पारो बिस्तर में घोड़ी बन गई तो मैं उसके पीछे खड़ा हुआ और नैना ने मेरा लंड पारो की गांड पर रख दिया और बोली- मारो धक्का हल्का सा!

मैंने भी हल्का सा धक्का मारा और लंड बहुत सा अंदर चला गया, पारो ज़रा भी नहीं हिली और जल्दी ही पूरा लंड अंदर ले गई.

पारो की गांड मुझको कुछ कम टाइट लगी.फिर मैंने लंड की स्पीड धीरे धीरे तेज़ कर दी.थोड़ी देर बाद मुझको लगा कि पारो को गांड में बड़ा मज़ा आ रहा है, वो बाकायदा लंड का जवाब हर बार गांड को को मेरे लंड की जड़ तक लाकर देती थी.अब मैंने तेज़ी से उसकी गांड में अपना लंड पेलना शुरू कर दिया और मुझको लगा कि उसकी चूत से भी पानी टपकना शुरू हो रहा है.हाथ लगाया तो वाकयी उसकी चूत से बड़ा ही गाढ़ा रस निकल रहा था.

मैंने उसकी भग को रगड़ना शुरू कर दिया और ऊपर से गांड में धक्के भी तेज़ कर दिए थे.कोई 10-12 धक्के इसी तरह ज़ोर से मारे तो पारो का शरीर काम्पने लगा और उसकी गांड अंदर से बंद और खुलना शुरू हो गई.

पारो हल्के से बोली- बस करो छोटे मालिक, मेरा पानी दो बार छूट चुका है गांड मरवाते हुए… उफ़्फ़, बड़ी ही मज़ेदार चुदाई है गांड की भी, मज़ा आ गया नैना.

मैं फिर दोनों के बीच में लेटा था.और इस तरह हम तीनों नंगे ही एक दूसरे के साथ चिपक कर सो गए.

कहानी जारी रहेगी.
 
नैनीताल के सफर में निम्मी और मैरी

मैं फिर दोनों के बीच में लेटा था और इस तरह हम तीनो नंगे ही एक दूसरे के साथ चिपक कर सो गए.अगले दिन मुझको कालेज में जल्दी पहुंचना था, मैं जल्दी से नाश्ता करके चला गया, दोनों बहनों को उनके कमरे के बाहर से बाय कर गया.कालेज में पता चला कि अगले दिन सुबह 6 बजे पहुंचना है क्यूंकि बस 7 बजे रवाना हो जायेगी.जाने वाले सब छात्रों को 1 बजे दोपहर छुट्टी दे दी गई ताकि वो घर में जाने की तैयारी कर सकें.

मैं भी घर आ गया और नैना के साथ मिल कर एक चमड़े के सूटकेस में जो ज़रूरी कपडे थे, पैक कर दिए. नैना ने काफी सारा खाने-पीने का सामान एक और बैग में डाल दिया था.

रात को मैंने दोनों बहनों को बैठक में बुलाया और उनको अपना प्रोग्राम भी बताया और यह भी कहा- मेरी गैर हाज़री में नैना आंटी घर की इंचार्ज होगी, जैसा वो कहेगी तुम सबको मानना पड़ेगा. पारो आंटी तुम सबके लिए जो खाना तुम पसंद करो, वो बना दिया करेगी. और कालेज से वक्त पर आ जाया करना, दोपहर मैं थोड़ा आलखन भी कर लिया करना.

तब विनी ने पूछा- आपकी टीम जा कहाँ रही है?मैं बोला- नैनीताल, क्यों कोई ख़ास बात है?विनी बोली- नहीं नहीं, मेरी एक सहेली भी कल आपकी बस में जा रही है. उसका नाम है निम्मी. मैं अभी उसको फ़ोन कर देती हूँ आप के बारे में?मैं बोला- ठीक है फ़ोन कर दो और उसको कह देना कि किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझसे मांग ले बिना झिझक के.

उस रात मैंने सिर्फ एक एक बार नैना और पारो को चोदा और फिर हम सो गए.सवेरे नैना ने मुझको टाइम पर जगा दिया और मैं तैयार हो कर सामान लेकर कालेज चला गया.

बस खड़ी थी, सामान रख कर बैठ गया, थोड़ी देर बाद एक बड़ी ही स्मार्ट लड़की मेरे पास आई और साथ वाली सीट पर बैठ गई.बस चलने से पहले एक और लड़की जो सलवार सूट पहने थी, मेरी सीट के पास आई और बोली- हेलो सतीश, मैं निम्मी हूँ. विनी ने मेरे बारे में बताया होगा.मैं बोला- हां हां, बताया था.

निम्मी बोली- मैं तुम्हारे साथ वाली सीट पर बैठ सकती हूँ क्या?मैं बोला- हाँ हाँ, क्यों नहीं.तब मेरे बायें हाथ वाली सीट पर बैठी हुई लड़की उठी और मैं भी उठ कर बाहर आ गया और तब वो निम्मी खिड़की वाली सीट पर बैठ गई.अब मैंने स्मार्ट लड़की को कहा कि वो चाहे तो बीच वाली सीट पर बैठ सकती है.वो बोली- नहीं मुझे किनारे वाली सीट ही पसंद है.इस तरह मैं दो सुन्दर लड़कियों के बीच में बैठा था.

जल्दी ही बस चल दी.कालेज के एक पुरुष प्रोफेसर ने ज़रूरी अनाऊंसमेंट्स की और फिर एक महिला प्रोफेसर के साथ बैठ गया. वो दोनों बस के एकदम आगे वाले भाग में बैठे थे.

फिर मैंने साथ बैठी स्मार्ट लड़की को अपना परिचय दिया, उसका नाम मैरी था. अब मैंने उस लड़की को ध्यान से देखा, वो एक लम्बी स्कर्ट पहने हुए थी और लगता था कि वो क्रिस्चियन है. उसका शरीर काफी सुडौल था लेकिन रंग थोड़ा सांवला था, खूब पाउडर लिपस्टिक लगाये हुए थी.

निम्मी एक सुंदर लड़की थी लेकिन साधारण सलवार सूट में थी, उसका शरीर भी भरा हुआ था और रंग काफी साफ़ था. शक्ल सूरत से वो पंजाबी लग रही थी.निम्मी से मैं बातें करता रहा क्यूंकि वो विनी के बारे में काफी कुछ जानती थी.

बस एक छोटे से शहर में नाश्ते के लिए रुकी और हम सब नीचे उतर कर एक साफ़ सुथरे रेस्टोरेंट में नाश्ता करने लगे.वो दोनों लड़कियाँ भी मेरे साथ ही रहीं और हमने मिल कर अण्डों का आमलेट और टोस्ट खाया और चाय पी!

जब बस दोबारा चली तो निम्मी ने अपने थैले में से एक हलकी सी चुन्नी निकाल ली और अपने ऊपर और थोड़ी से मेरे ऊपर डाल दी.निम्मी को नींद आने लगी और वो ऊँघने लगी और उसका सर मेरे कंधे पर आ गया. मैंने कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया लेकिन थोड़ी देर बाद मुझको लगा कि निम्मी का हाथ मेरी जांघ पर आ गया था.अब मैं काफी सतर्क हो गया.

धीरे धीरे निम्मी का हाथ सरकता हुआ मेरे लंड के ऊपर आ गया और मेरी पैंट के आगे के बटन खोलने शुरू किये. मैंने अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया और धीरे धीरे उसकी जांघ पर दोनों हाथ रख दिये- उसका और अपना भी!.

फिर हल्के हल्के मैंने हाथ उसकी सलवार में छुपी उसकी चूत पर रख दिया. उसने अपना हाथ मेरे हाथ के ऊपर रख दिया और उस पर ज़ोर डालने लगी. मेरा हाथ उसकी कमीज से ढकी सलवार के ऊपर था.

उधर मैरी शायद छुपी नज़रों से हम दोनों का कार्य कलाप भांप रही थी, अब उसने भी अपने थैले से एक सुंदर सी पतली शाल निकाली और उसको अपने शरीर के ऊपर डाल लिया लेकिन काफी सारी शाल मेरे ऊपर आ गई थी.

अब थोड़ी देर बाद मैरी का भी हाथ मेरी जांघों के ऊपर दौरा कर रहा था. पैंट के ऊपर चलते हुए वो दो हाथ आपस में मिले और चौंक कर अलग हट गए.
 
पहले मैंने निम्मी को देखा और थोड़ा मुस्करा दिया और फिर मैरी की तरफ देखा और ज़रा मुस्करा दिया.दोनों मेरी मुस्कराहट देख कर संयत हो गई.मैंने दोनों से कहा- लगी रहो गर्ल्स और पकड़न पकड़ाई खेलते रहो दोनों. मुझको भी कुछ पकड़ने के लिए दे दो ना!वो दोनों भी मुस्करा दी.

फिर मैंने हाथ चुन्नी के नीचे करके अपने लंड को पैंट के बाहर निकाल लिया और निम्मी और मैरी का हाथ शाल और चुन्नी के अंदर से सीधा अपने खड़े लंड पर रख दिया.

दोनों को खड़े लंड पर हाथ रखने से एक हल्का सा करंट लगा और उनकी आँखें अचरज में फ़ैल गई और दोनों ने झट से अपना हाथ हटा लिया.लेकिन मैंने फिर दुबारा उनका हाथ पकड़ कर लंड पर रख दिया.मैं बोला- अब तुम दोनों घबराओ नहीं, मैं ज़रा भी बुरा नहीं मान रहा, अगर इजाज़त दो तो मेरे भी हाथ आप दोनों के ख़ज़ाने की सैर कर लें.दोनों ने हँसते हुए हाँ में सर हिला दिया.

अब शाल हम तीनों के ऊपर आ गया था, सबसे पहले मैंने निम्मी की सलवार के ऊपर चूत वाली जगह पर हाथ रख दिया और मैरी की भी स्कर्ट के ऊपर हाथ रख दिया.वो दोनों एक एक हाथ से मेरे लंड के साथ खेल रही थी और मैं भी सलवार के अंदर हाथ डालने की कोशिश कर रहा था पर उसकी सलवार का नाड़ा सख्त बंद था.

उधर मैरी की स्कर्ट को एक कोने से पकड़ कर ऊपर उठाने की कोशिश कर रहा था. दोनों ने मेरी मुश्कल को समझा और खुद ही निम्मी ने नाड़ा ढीला कर दिया और मैरी ने अपनी स्कर्ट एक साइड से थोड़ी ऊपर कर दी.

अब मेरा हाथ भी निम्मी की पैंटी के अंदर चूत पर था और उसकी घनी झांटों से खेल रहा था, मेरा बायां हाथ जो मैरी की तरफ था, वो भी मैरी की पैंटी के ऊपर चक्कर लगा रहा था.

मैरी की तरफ वाले हाथ ने पैंटी के ऊपर से ही उसकी भग को ढूंढ लिया था और उसको मसलना शुरू कर दिया और निम्मी की चूत पर हाथ फेरते हुए उसकी भी भग को तलाश लिया था.

दोनों की ही चूत हल्की गीली लगी और दोनों ही बहुत गरमा रही थी, मैं सर उठा कर बस मैं बैठे अन्य छात्र छात्रों की तरफ देखा. सब थोड़ा ऊंघ रहे थे और किसी का भी ध्यान हमारी तरफ नहीं था.

एक बात जो अजीब लगी, वो थी कि बस में ज्यादा लड़कियाँ थी और लड़के बहुत ही कम थे. इसी लिए तकरीबन ज़्यादा सीटों पर लड़कियाँ एक साथ बैठी थी और लड़के अलग बैठे थे.

निम्मी और मैरी एक एक हाथ से मेरे लंड की मुठी मारने की कोशिश कर रही थी लेकिन मेरे लंड पर ठण्ड थी क्यूंकि निम्मी की चूत पर मेरा हाथ पहुँच चुका था, उसको मेरे हाथ से ज्यादा आनंद आ रहा था और उधर मैरी की चूत को मैं पैंटी के ऊपर से छेड़ रहा था.

फ़िर मैरी ने ज़रा चूतड़ ऊपर उठा कर अपनी पैंटी को नीचे कर दिया जिससे उसकी चूत भी आधी नंगी हो गई.अब दोनों चूतें मेरे हाथ में थी.

निम्मी की चूत का पानी पहले छूटा और ढेर सारा छूटा. उसने झट से अपना पर्स निकाला और उसमें से एक रूमाल निकाल कर अपनी सलवार के अंदर डाल दिया.लेकिन मैरी की चूत पर बाल नहीं थे और वो सफाचट थी, उसकी चूत की चमड़ी काफी मुलायम थी और उस पर हाथ फेरते हुए काफी मज़ा आ रहा था.उसकी भग काफी उभरी हुई थी और मोटी थी.हाथ लगाते ही वो एकदम सख्त हो गई जैसे कि छोटा लंड हो.

धीरे धीरे मैरी की भग को रगड़ा तो वो अपने हाथ को मेरे हाथ के ऊपर रख रख देती थी और ज़ोर डालती थी कि यहीं करूँ.फिर मैंने हाथ की ऊँगली को उसकी चूत के अंदर डाला और गोल गोल घुमाया.मैरी ने झट अपनी जांघें बंद करके मेरे हाथ को कैद कर दिया.

वो थोड़ी सा कांपी और उसकी चूत में से भी थोड़ा सा पानी निकला और फिर उसने अपनी जांघें खोल दी लेकिन मेरे हाथ को भग के ऊपर ही रखा और साथ ही उसने मेरे लंड को भी सहलाना जारी रखा.

निम्मी भी अब अपना हाथ मेरे लंड पर रख कर उसके साथ या फिर अंडकोष के साथ खेल रही थी. मैं दोबारा से निम्मी की चूत के साथ खेल रहा था और वो अब पूरी तरह सी सूखी थी.इतने में प्रोफेसर साहब उठे और घोषणा की- अगला शहर आने वाला है, यहाँ हम लंच करेंगे.

हम तीनों एकदम संयत हो गए और अपने कपड़े भी ठीक कर लिए.

मैं बोला- निम्मी और मैरी, आप दोनों मेरे साथ लंच करना प्लीज, तीनों एक साथ खाना खायेंगे. क्यों ठीक है?दोनों बोली- हाँ सतीश, ठीक है.

लंच एक बहुत शानदार रेस्टोरेंट में था, खाना बहुत ही स्वादिष्ट बना था, हम तीनों ने चिकन करी और परांठे खाए.खाना खाते समय मैंने मैरी और निम्मी को कहा- आप दोनों रात को कैसे सोना पसंद करेंगी? अलग अलग कमरे में दूसरी फ्रेंड्स के साथ या फिर दोनों एक ही कमरे को शेयर करेंगी?निम्मी बोली- एक ही कमरे में सोयेंगी हम दोनों अगर तुम वायदा करो कि रात को तुम हमारे कमरे में आओगे. क्यों मैरी, तुमको मंज़ूर है क्या?मैरी बोली- हाँ हाँ, बिल्कुल मंज़ूर है.मैं बोला- तुम दोनों ऐसा करना कि सर को बोल देना कि तुम दोनों एक ही कमरे में ही सोयेंगी. तो वो तुम दोनों को एक कमरा दे देगा. मैं देखूंगा मेरा साथ कैसे बनता है.

खाना खाने के बाद हम अपनी सीटों पर बैठ गए और जल्दी ही बस फिर चल पड़ी.पेट भरे होने के कारण हम सब ही जल्दी झपकी लेने लगे और शाम होते ही हम नैनीताल की सुन्दर पहाड़ियों में पहुँच गए.

जैसा हम चाहते थे, निम्मी और मैरी को एक कमरा मिल गया और मुझको भी उनसे दो कमरे के बाद अलग कमरा मिल गया. प्रोफेसर सर बोले- मुझको थोड़े पैसे ज़्यादा देने पड़ेगे.मैंने कहा- कोई बात नहीं सर में दे दूंगा.

फिर हम सब नैनीताल के माल रोड पर घूमने के लिए निकल गए, मैरी और निम्मी मेरे साथ ही थी.नैनीताल की लेक अति सुन्दर लग रही थी रात को… वहाँ मैंने दोनों लड़कियों को गोलगप्पे और चाट खिलाई, कोकाकोला पीकर सब वापस आ गए.

रात का डिनर बहुत ही सुन्दर था. कई प्रकार के व्यंजन बने थे और हम सबने बड़े ही आनन्द से रात को भोजन किया और उसके बाद होटल के हाल में खूब गाना बजाना हुआ, कई लड़कों और लड़कियों ने बड़ा ही सुन्दर डांस और संगीत का प्रोग्राम दिया.

उसके बाद जल्दी ही हम सब सो गए.जैसा कि मेरा अनुमान था, सर और मैडम ने ठीक रात के 11 बजे सब कमरों को चेक किया कि सब विद्यार्थी अपने अपने कमरों में मौजूद हैं या नहीं.उसके बाद वो भी सो गए.

जैसा हमने तय किया था, मैं 12 बजे रात को निम्मी और मैरी के कमरे को 3 बार हल्के से खटखटाऊंगा और तभी मैरी या निम्मी कमरे का दरवाज़ा खोल देंगी.

कहानी जारी रहेगी.

 
नैनीताल में मैरी और निम्मी के साथ

जैसा हमने तय किया था, मैं 12 बजे रात को निम्मी और मैरी के कमरे को 3 बार हल्के से खटखटाऊंगा और तभी मैरी या निम्मी कमरे का दरवाज़ा खोल देंगी.

मैंने निर्धारित समय पर उनके कमरे पर पहुँच कर 3 बार हल्के से खटखटाया और तभी मैरी ने दरवाज़ा खोल दिया.मैंने इधर उधर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा और जल्दी से अंदर कमरे में चला गया.

कमरे में हल्की लाइट में देखा कि निम्मी तो गहरी नींद में सोई है और मैरी एक रेशमी चोगे में लिपटी मेरे सामने खड़ी है. उसने दरवाज़ा बंद करके झट से मुझको अपनी बाँहों में ले लिया और ज़ोरदार किस मेरे होटों पर दे दी.मैंने भी एक हॉट किस उसके होटों पर दी और उसको कस कर अपने आगोश में ले लिया.इस तरह हम काफी देर तक एक दूसरे को चूमते रहे.

जब चुम्बन से फारिग हुए तो मैरी जल्दी से मेरे कपड़ों को उतारने के लिए उकसाने लगी. मैंने भी जल्दी से अपना कुरता और पजामा उतार दिया और तब तक मैरी भी सिल्की चोगा उतार चुकी थी.

हम दोनों ने एकटक एक दूसरे को देखा. मैरी वाकयी में एक सुंदर लड़की थी, उसके नयन नक्श के अलावा उसका शरीर भी बहुत ही सेक्सी था.खूब मोटे और उन्नत उरोज और गोल और काफी उभरे हुए चूतड़… कुल मिला कर बहुत ही सेक्सी बना रहा था यह सारा दृश्य.

मैंने भी आगे बढ़ कर उसके उन्नत उरोजों को दोनों हाथो में ले लिया और उनके कड़ेपन को परखने लगा. एक हाथ उसके चूतड़ों पर रख दिया और उनकी गोलाई और मोटेपन को जांचने लगा.

फिर मैंने उसका दायाँ मुम्मा अपने मुँह में ले लिया और उसके मोटे काले निप्पल जो एकदम खड़े थे, अपने मुंह में डाल कर चूसने लगा.मैरी ने जल्दी दूसरे मम्मे को भी मेरे मुंह में डाल दिया.मैरी भी मेरे लोहे के समान खड़े लंड को ध्यान से देख रही थी, शायद उसने पहले इतना बड़ा और मोटा लंड कभी नहीं देखा था.

उसने मुझको मम्मे चूसने से रोकते हुए नीचे बैठ कर मेरे लंड को अपने मुंह में रख लिया और उसको लॉली पॉप की तरह चूसने लगी और साथ ही मेरे अंडकोष के साथ हाथ से खेलने लगी.मेरे अंडकोष एकदम टाइट हुए थे.

अब मैंने उसको खड़ा किया और उसकी चूत में ऊँगली डाली तो वो बहुत ही पनिया रही थी, उसके भग को हल्के से रगड़ा तो वो और भी उन्मुक्त हो गई.अब मैं उसको किस करते हुए एक सिंगल बेड की तरफ ले जा रहा था जिसमें वो पहले लेटी थी, दूसरे में तो निम्मी सोई हुई थी.

मैरी को बेड पर लिटा कर मैंने उसकी टांगों को चौड़ा किया और उसकी सफाचट चूत को चाटने लगा. जैसे ही जीभ उसकी भग पर लगी, वो एकदम चौंक गई.फिर जब मैं हल्के से जीभ उसकी भग के ऊपर रख कर गोल गोल घुमाने लगा तो उसने अपनी कमर ऊपर उठा कर मेरे मुंह के साथ जोड़ दी.

मैं भी अपने हाथ उसकी कमर के नीचे रख कर उसकी चूत की सेवा करने लगा, चुसाई और चटाई दोनों काम साथ साथ चल रहे थे.उसके हाथ मेरे सर को और भी अपनी चूत में घुसेड़ने की कोशिश करने लगे और उसके चूतड़ थोड़ी देर बाद हल्के हल्के कांपने लगे और मैं समझ गया कि लोहा पूरी तरह से गर्म है.

मैंने उसकी जाँघों के बीच बैठ कर अपना लौड़ा उसकी चूत पर रखा और एक हल्का झटका मारा कि वो हल्के से चिल्ला पड़ी- मर गई उफ्फ्फ!मेरा लंड बिना किसी रुकावट के पूरा अंदर चला गया. मैंने धीरे से उसको निकाला और फिर धीरे से अंदर धकेल दिया.3-4 बार ऐसा करने के बाद मैरी ने अपनी टांगें पूरी खोल दी और उसको मेरी कमर की चारों ओर लपेट दिया.अब मैं एक लय से उसको मज़े मज़े से चोदने लगा, कभी तेज़ और कभी आहिस्ता!

थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि किसी का हाथ मेरे चूतड़ों पर थपकी दे रहा है.मुड़ कर देखा तो निम्मी अपनी सिल्क के पयज़ामे कुर्ते में मेरे चूतड़ों को थपकी दे रही थी.मैं बोला- आ जाओ मैदान में निम्मी, खेल अभी शुरू हुआ है.

निम्मी ने झट से अपने कपड़े उतार दिए और चारपाई की साइड से वो मैरी के मम्मों के साथ खेलने लगी और फिर मेरे लौड़े को हाथ से अंदर बाहर जाते फील करने लगी.

मैंने बिना निम्मी को देखे ही अपना काम जारी रखा और फुल स्पीड से मैरी को चोदता रहा. निम्मी हाथों से मैरी को उकसा रही थी और मैरी भी समझ कर नीचे से चूतड़ उठा उठा कर मेरे लंड का जवाब दे रही थी.

थोड़ी देर में ही मैरी एक बार फिर झड़ गई और मैंने उसको उठा कर घोड़ी बना दिया और अपना तना हुआ लौड़ा उसकी चूत में पीछे से पेल दिया.अब लंड पूरा का पूरा उसकी चूत में जड़ तक जा रहा था.

निम्मी कभी मेरे लौड़े को छूती थी और कभी मैरी की झाग वाली चूत पर हाथ रख रही थी. निम्मी ने वहीं खड़े हुए अपना मुंह मेरे मुंह के साथ जोड़ दिया और मुझको किस करने लगी.

मैं भी मैरी को धक्के मार रहा था लेकिन किस निम्मी को कर रहा था.इस तरह चोदते हुए मुझ को 7-8 मिन्ट हुए होंगे कि मैरी अबकी बारी बुरी तरह से झड़ गई, उसके झड़ते हुए चूतड़ों की कंपकम्पाहट को निम्मी भी फील कर रही थी.

मैंने आखिरी बार थोड़े से धक्के और मारे और अपना मैरी की चूत से लंड निकाल लिया.मैरी आँखें बंद किये लेटी हुई थी और निम्मी होटल के तौलिये से मैरी की चूत और मेरे लंड को साफ़ कर रही थी. मैरी की सांसें अभी भी धौंकनी की तरह चल रही थी.

निम्मी मुझको उठा कर अपने बेड पर ले गई, मुझको लिटा कर उसने कोका कोला की 3 बोतलें खोली, एक मुझको दी और बाकी दो उसने मैरी और अपने लिए रख ली.

मैरी ने कोका कोला पीते हुए मुझको ‘थैंक यू सतीश डार्लिंग…’ कहा और मैंने भी जवाब में कहा- वेलकम मैरी डार्लिंग. आई लव यू एंड निम्मी.

मैं बैठ कर कोकाकोला पी रहा था, मेरा एक हाथ निम्मी के गोल मोल छोटे मम्मों के साथ खेल रहा था और निम्मी का एक हाथ मेरे लौड़े पर था.मैंने यह नोट किया है अब तक अपनी सेक्स लाइफ में कि औरतों और लड़कियों की नज़र सीधे आदमी के लौड़े पर जाती है जबकि आदमी की नज़र पहले औरतों के मम्मों पर फिर उसके चूतड़ों पर और आखिर में उसकी चूत पर जाती है.

मैंने भी जब निम्मी की चूत देखी तो उसको बालों से ढका हुआ पाया जबकि मैरी की चूत बालों रहित थी यानि सफाचट थी. वो नियमित शेव करती थी चूत के बालों का और निम्मी बालों को नहीं शेव या नहीं काटती थी.

कोक पीते हुए निम्मी मुझको चूमने लगी, पहले मेरे लिप्स पर फिर वो मेरे सारे मुंह पर, मैं भी उसके मम्मों के साथ खेल रहा था और उंगली कभी उसकी चूत में भी डाल रहा था और कभी उसकी झांटों के साथ खेल रहा था.निम्मी की चूत भी एकदम गीली हो चुकी थी, मैंने उसको कहा- निम्मी, अब तुम्हारी बारी है मुझको चोदने की, बोलो कैसे चोदना चाहती हो?

निम्मी बोली- मैं आदमी बन कर तुमको चोदना चाहती हूँ डार्लिंग सतीश. क्या चुदवाओगे मुझसे?मैं बोला- जैसा हुक्म मालकिन या फिर मल्लिका-ए-आली. मैं क्या करूँ अभी आपके लिए?निम्मी भी उसी लहजे में बोली- ऐ गुलाम, अब तुम लेट जाओ और अपने लंड को खड़ा रखो जब तक मलिका-ऐ- आलिया हुक्म न दें!

मैरी जो यह सब देख रही थी, वो भी इस ड्रामे का हिस्सा बनने को तैयार थी, वो बोली- ऐ मलिका-ए-आलिया यह कनीज़ भी आपकी खिदमत में हाज़िर है, हुक्म कीजिए.निम्मी बोली- सबसे पहले इस ग़ुलाम के लंड को साफ़ करो और फिर इस पर सेंट लगा कर इसको खशबूदार करो!मैरी बोली- जो हुक्म मलिका-ए-आली.

तौलिये से उसने मेरे लौड़े को साफ़ किया और फिर उस पर लेडीज परफ्यूम लगाया और फिर वो बोली- आपका वफ़ादार लंड तैयार है मलिका-ए-आली!निम्मी बोली- हमको सहारा दो और इस ग़ुलाम के लौड़े पर बिठा दो, आज हम इस लंड की सवारी करना चाहती हैं.मैरी ने उसको उठाया और मेरे लंड के ऊपर बिठा दिया और उसका निशाना भी निम्मी की चूत की तरफ कर दिया.

मैरी बोली- मलिका-ए-आली, आपके ग़ुलाम की तोप का निशाना ठीक आपके खज़ाने पर लगा दिया है, आप हुक्म दें तो आपके ख़ज़ाने पर तोप चढ़ा दें.निम्मी बोली- ऐ कनीज़, हमारे को उठा कर तोप पर चढ़ा दो.मैरी ने निम्मी को हल्का सा उठाया और घुप से लंड के ऊपर बिठा दिया और ऊपर से उसको ज़ोर से धक्का दिया तो मेरा पूरा का पूरा लौड़ा उसकी चूत में चला गया.

अब मैं भी नीचे से धक्के मारने लगा और मलिका भी ऊपर से धक्के पर धक्के मार रही थी.मैरी उसके मम्मों को चूस रही थी और मैं उसके चूतड़ों को मसल रहा था, उसकी झांटें उसकी चूत में से निकल रहे गाढ़े रस से सरोबार हो रहीं थी, कुछ रस टपक कर मेरे पेट पर भी गिर रहा था.

निम्मी के चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से नीचे से पकड़ रखा था और उनको मैं ही ऊपर नीचे कर रहा था.फिर मैं बैठ गया और निम्मी को गोद में लेकर चोदने लगा, उसके दोनों गोल मम्मे मेरी छाती से चिपके हुए थे.मैंने अपने मुंह को निम्मी के मुंह के साथ जोड़ कर उसके अंदर जीभ घुमा रहा था और उसका रस पी रहा था.

निम्मी के चूतड़ों को मैंने अपने हाथों में लिया हुआ था, उनको अपनी स्पीड से आगे पीछे करने लगा.तभी वो एक गहरी हाय के बाद झड़ गई और मुझको कस कर अपने से चिपका लिया.

थोड़ी देर बाद वो संयत हुई और उठ कर बिस्तर पर लेट गई. मैं भी उठा और जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगा और एक हॉट किस करके दोनों को थैंक्स बोला और चुपके से लड़कियों के कमरे से निकला और अपने कमरे की तरफ जाने लगा.

तभी एक कमरे का दरवाज़ा खुला और एक हाथ निकला और मुझ को खींच कर उस कमरे में घसीट लिया.इससे पहले मैं समझ पाता कि क्या हो रहा है, मुझको अंदर लेकर दरवाज़ा बंद हो गया.अंदर एकदम अँधेरा था.

कहानी जारी रहेगी.
 
होटल में दोहरी चुदाई

इससे पहले मैं समझ पाता कि क्या हो रहा है मुझको अंदर लेकर दरवाज़ा बंद हो गया.अंदर एकदम अँधेरा था.

थोड़ी देर में कमरे में एक हल्की लाइट जल उठी, उस लाइट में देखा कि दो लड़कियाँ मेरी दोनों तरफ खड़ी थी, रोशनी होते ही बोली- हेलो सतीश बाबा, कैसे हो तुम?मैं हक्का बक्का हुआ आँखें फाड़ कर देख रहा था कि ये दोनों कौन हैं? इनको पहले कभी देखा तो नहीं?

फिर मैंने हिम्मत जुटा कर उनसे पूछा- आप कौन हैं और इस तरह मुझको क्यों इस कमरे में ले आई हैं?उन दोनों लड़कियों में जो लम्बी थी, वो बोली- सॉरी सतीश बेबी, हमको यह करना पड़ा. क्यूंकि तुमने सारे रास्ते हमारी तरफ देखा तक नहीं. हम तुम्हारे पीछे वाली सीट पर बैठी थी और तुम्हारी सारी हरकतें देख रहीं थी.

मैं घबरा कर बोला- ओह तो तुम दोनों हमारी बातें भी सुन रही थी? तुम को कैसे पता चला कि हम यहाँ आज रात को मिलने वाले हैं?लम्बी वाली फिर बोली- बताया तो, हमने तुम्हारी कई बातें अच्छी तरह से सुनी थी और हमारा अंदाजा था कि तुम आज रात मैरी और निम्मी को मिलने ज़रूर आओगे. जब तुम उन दोनों के कमरे की तरफ गए तो हमने थोड़े खुले दरवाज़े से देखा था.

मैं थोड़ा गुस्से में आया लेकिन फिर सोचा कि गुस्से से मेरा ही नुक्सान ज़यादा होगा, मैंने सुलह सफाई के लहजे में पूछा- अच्छा ठीक है, अब तुम बताओ कि तुम दोनों मुझसे क्या चाहती हो?लम्बी फिर बोली- वही जो तुमने मैरी और निम्मी को दिया, वही मज़ा हम भी चाहती हैं.मैं बोला- मैं तो सारा माल दे आया हूँ उन दोनों को, तो बोलो अब मैं क्या दूं तुम दोनों को?लम्बी बोली- जो कुछ भी बचा है वो हमको दे दो.

मैं बोला- अभी तो कल की रात भी है, कल तुम अपनी बारी लगा लेना.लम्बी बोली- नहीं नहीं, हमको भी थोड़ा मज़ा दे जाओ यार! सारी उम्र तुम्हारी अहसान मंद रहेगी हम दोनों.मैं बोला- अच्छा ठीक है लेकिन पहले अपनी शक्ल तो दिखाओ दोनों.

तब दोनों ने कमरे में बड़ी लाइट ओन कर दी और मैंने देखा की लम्बी पतली और इकहरे बदन वाली है और छोटी थोड़ी मोटी और गोल बदन वाली है.दोनों ही अपने रात वाले कॉटन के चोगे पहने हुए थी.

मैंने कहा- सच बोलूँ तो दिन भर के सफर ने थका मारा है और मेरी मानो कल का प्रोग्राम रख लो तो सबके लिए अच्छा रहेगा.लम्बी बोली- चलो ठीक है लेकिन आज कुछ नमूना तो दिखा जाओ जिसके सहारे हम कल की इंतज़ार कर लेंगी दोनों, क्यों छोटी?छोटी बोली- कुछ तो अपना जलवा दिखा जाओ न मेरे यार?

मैं बोला- रात बहुत हो चुकी है, तुम जल्दी करो जो कुछ भी करना है. अच्छा तुम दोनों अपने नाम तो बताओ या फिर मैं तुम को लम्बी और छोटी के नाम से ही बुलाऊँ?लम्बी बोली- मेरा नाम शानू है, और इसुका नाम बानो है और हम दोनों इंटर फाइनल में हैं, और तुम सतीश, फर्स्ट ईयर में हो! है न?मैं बोला- हाँ, तो शुरू हो जाओ, कपड़े उतारो अपने जल्दी से और मैं भी उतारता हूँ.

यह सुन कर दोनों खिल उठी और फिर जल्दी से दोनों ने अपने कपड़े उतार दिए और मैंने भी अपन पजामा कुरता उतार कर साइड में रख दिया.अब दोनों की नज़र मेरे खड़े लौड़े पर पड़ी और दोनों की नज़रें एकदम फट गई क्यूंकि उनको उम्मीद थी कि मेरा लंड थका हुआ होगा, उनको मेहनत करनी पड़ेगी उसको खड़ा करने के लिए.

लेकिन जब लहलाते लंड को देखा तो उनके मुंह से लार टपकने लगी और दोनों भाग कर लंड को अपने मुंह में लेने के लिए बड़ी बेकरारी से मेरे पास आई.मैं बोला- इतनी जल्दी नहीं, पहले अपनी इंस्पेक्शन करवाओ?

दोनों के मुंह पर सवालिया निशान बना हुआ था.मैंने उनको इशारे से अपने पास बुलाया और उनकी चूतों को ध्यान से देखने लगा.शानू की चूत सफाचट थी और बानो की चूत पर घने बाल थे. मैं उन दोनों की चूत का निरीक्षण परीक्षण करने के लिए ऊँगली डालकर और फिर उसको सूंघ कर पूरा किया. दोनों ही खुली चूतें थी तो पहले से चुदी हुई थी.

यह काम ख़त्म करने के बाद मैंने कहा- देखो, मैं बहुत ही थका हुआ हूँ, मैं लेट जाता हूँ तुम दोनों बारी बारी से मुझको जितना चाहो चोद लो. जब तसल्ली हो जाए तो कह देना मैं अपने कमरे में चल जाऊँगा. मंज़ूर है?दोनों ने कहा- जो हुक्म मेरे आका, हम बांदियां तो आपकी है, जैसा चाहो जब चाहो, कर लो!

फिर दोनों मेरी अगल बगल में लेट गई. मैं उन दोनों की चूतों को गर्म करने की कोशश करने लगा, भग को खूब मसला और जब उन दोनों की चूत गीली हो गई तो पहले पतली पर लम्बी शानू को चोदने के लिए बुलाया.

वो मेरे ऊपर पैरों के बल बैठ गई और मेरे लंड को अपनी सफाचट चूत में डाल लिया, बानो मेरी गोलियों के साथ खेलने लगी.मैंने अपना एक हाथ उसके छोटे और गोल मम्मों के साथ खेलने के लिए छोड़ दिया और दूसरा हाथ बानो की चूत के बालों में डाल दिया.
 
शानू ऊपर से ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रही थी.मैंने अब बानो को अपने मुंह के ऊपर खींच लिया और उसके मुंह और होटों पर ताबड़तोड़ चूमियों की बारिश कर दी और कभी उसका दायाँ मम्मा या फिर बायें मम्मे को चूसने लगा.

उधर मैं देख रहा था कि शानो को चुदाई में इतना आनन्द नहीं आ रहा था इसलिए मैंने उसको अपने ऊपर से हटा दिया और दोनों को एक साथ घोड़ी बना लिया और फिर मैंने पहले शानो को पीछे से चोदना शुरू कर दिया और 10 धक्के मारने के बाद मैंने चूत बदल दी यानी शानू की बजाये बानो की चूत में अपना लौड़ा डाला.

अब बारी बारी मैं दोनों लड़कियों को चोद रहा था, एक की चूत से निकाल कर दूसरी में डाल कर दोनों को मज़ा दे रहा था.थोड़ी देर की मेहनत में पहले शानू छूटी और कुछ देर बाद ही बानो भी छूट गई.

अब दोनों लड़कियों के बीच में मैं लेटा था और दोनों ही मेरे खड़े लौड़े को देख कर अचरज कर रहीं थी और बार बार उसको चूम रही थी.अब मैं उठा और अपने कपड़े पहनने लगा, वो दोनों मुझ को अभी भी हैरानी से देख रही थी, दोनों नंगी ही लेटी रहीं.

मैं उन दोनों को बाय करके बाहर आया और अपने कमरे में घुस गया और जाते ही थक कर गहरी नींद सो गया.

सुबह जब मेरी नींद खुली तो सूरज काफी सर पर आ गया था, कालेज के छात्र ब्रेकफास्ट करने होटल के रेस्टोरेंट में गए हुए थे.

जब मैं वहां पहुंचा तो तकरीबन सभी नाश्ता कर के जा चुके थे. सिर्फ निम्मी और मैरी बैठी थी एक टेबल पर और दुसरे टेबल पर शानो और बानो विराजमान थी. दोनों आपस में बड़ी तन्मयता से बातें कर रही थी.मुझ को देख कर दोनों ग्रुप चुप हो गए. निम्मी और मैरी मुझ को अपने टेबल पर बुला रही थी और शानो और बानो अपने टेबल पर बुला रहीं थी.मैं समझ गया की दोनों ग्रुप आपस में मिले हुए थे.

मैं सीधे ही निम्मी और मैरी के टेबल पर बैठ गया और उन को आहिस्ता से कहा- मुझ को यह उम्मीद नहीं थी की तुम और शानो मिले हुए हो एक दुसरे से. रात को मुझ को उन दोनों ने भी पकड़ लिया और मुझ को चोदा.मैं बहुत रुआंसा मुंह बना कर बैठा था.मैरी बोली- सो सॉरी सतीश, हम से गलती हो गयी थी. हम को तुम को बता देना चाहीऐ था लेकिन इस शानो ने हम को मना किया था. इस लिए हम कुछ नहीं बोली. रियली वेरी सॉरी.शानो और बानो भी माफ़ी मांगने लगी. वैसे मै दिल ही दिल मैं बहुत खुश था कि कल रात दो की जगह चार लड़कियों की चुदाई कर दी थी मैंने. लेकिन मैंने अपना रुख कठोर बनाये रखा.मैं बोला- मेरा चोदन कर के आप सॉरी बोल रहीं हैं … उफ्फ्फ्फ़ यह क्या देख रहा हूँ मैं.खैर जाने दो.

और मैं चुपचाप 4 अण्डों का ऑमलेट और माखन मार के टोस्ट खा रहा था. रात बड़ी एनर्जी खर्च हो गयी थी इस लिए.निम्मी बोली- और क्या लाऊँ सतीश, बोलो तो सही.मैं बोला- लाना ही चाहती हो तो एक गिलास ऑरेंज जूस ले आओ.बानो बोली मैं- क्या लाऊँ?मैं बोला- तुम मेरे लिए एक कप काफी ले आओ.चारों लड़कियाँ मेरी खातिर में लग गयी थी.

मैं नाश्ता खत्म कर के बोला- सच बताना यह मेरी बात और किस लड़की को मालूम है?चारों ने एक साथ कहा- और किसी से कोई बात नहीं हुई है. कसम से.मैं बोला- क्यों निम्मी और मैरी तुम को पहले से पता था मेरे बारे में?निम्मी बोली- हाँ पता था.मैं बोला-कैसे पता था तुम को? किस ने बताया?निम्मी बोली- वो तुम्हारे घर में विनी और उस की बहन रहती हैं न वो हमारी भी सहेली. उसी ने हिंट दिया था कि तुम्हारे हथियार में कमाल की शक्ति है.मैं बोला- लेकिन मैं ने कभी उस के साथ कुछ नहीं किया था. खैर छोड़ो. अब क्या इरादा है?शानो जो उनमें सबसे बड़ी थी बोली- जो तुम कहो वही हमको मंज़ूर है.

मैं बहुत धीमे स्वर में बोला- देखो जो हुआ वो बहुत डेंजरस था. हम सब पकडे जा सकते थे और हमारे घरवाले हमें कहीं का नहीं छोड़ते. अब के बाद हम एक दुसरे के नज़दीक नहीं आएंगे इस सारे ट्रिप में.शानो बोली- नहीं सतीश, प्लीज ऐसा ना कहो हमारा क्या होगा? हमतो कल पूरी तरह से आनंद नहीं ले सकी थी.मैं बोला- अच्छा ऐसा करो, सारा दिन हम चारों एक दूसरे के निकट नहीं आएंगे. ताकि किसी को शक न हो और रात के डिनर के बाद फैसला करेंगे कि रात कैसे और किस के साथ गुज़ारनी है. ओके?सब बोली- ओके … ठीक है.मैं बोला- अब आप निकलो हाल से मैं बाद में आता हूँ.मैं भी थोड़ी देर बाद नाश्ता ख़त्म कर के निकला और होटल के गार्डन में टहलने लगा.

कहानी जारी रहेगी.

 
चार लड़कियों के साथ नैनीताल में

जब मैं वहाँ पहुंचा तो तकरीबन सभी नाश्ता करके जा चुके थे, सिर्फ निम्मी और मैरी बैठी थी एक टेबल पर और दूसरे टेबल पर शानू और बानो विराजमान थी, दोनों आपस में बड़ी तन्मयता से बातें कर रही थी.मुझको देख कर दोनों ग्रुप चुप हो गए. निम्मी और मैरी मुझको अपने टेबल पर बुला रही थी और शानू और बानो अपने टेबल पर बुला रहीं थी.

मैं समझ गया कि दोनों ग्रुप आपस में मिले हुए थे.मैं सीधे ही निम्मी और मैरी के टेबल पर बैठ गया और उनको आहिस्ता से कहा- मुझको यह उम्मीद नहीं थी कि तुम और शानू मिले हुए हो एक दूसरे से! रात को मुझको उन दोनों ने भी पकड़ लिया और मुझको चोदा.मैं बहुत रुआंसा मुंह बना कर बैठा था..

मैरी बोली- सो सॉरी सतीश, हमसे गलती हो गई थी. हमको तुमको बता देना चाहिए था लेकिन इस शानू की बच्ची ने हमको मना किया था इसलिए हम कुछ नहीं बोली. रियली वेरी सॉरी.शानू और बानो भी माफ़ी मांगने लगी.

वैसे मैं दिल ही दिल मैं बहुत खुश था कि कल रात दो की जगह चार लड़कियों की चुदाई कर दी थी मैंने.लेकिन मैंने अपना रुख कठोर बनाए रखा, मैं बोला- मेरे साथ जबरदस्ती करके आप सॉरी बोल रही हैं, उफ्फ यह क्या देख रहा हूँ मैं! खैर जाने दो.

और मैं चुपचाप 4 अण्डों का ऑमलेट और माखन मार के टोस्ट खा रहा था. रात बड़ी एनर्जी खर्च हो गई थी इसलिए.निम्मी बोली- और क्या लाऊँ सतीश, बोलो तो सही?

मैं बोला- लाना ही चाहती हो तो एक गिलास ऑरेंज जूस ले आओ.चारों लड़कियाँ मेरी खातिर में लग गई थी.मैं नाश्ता खत्म करके बोला- सच बताना यह मेरी बात और किस लड़की को मालूम है?चारों ने एक साथ कहा- और किसी से कोई बात नहीं हुई है! कसम से!

मैं बोला- क्यों निम्मी और मैरी, तुमको पहले से पता था मेरे बारे में?निम्मी बोली- हाँ पता था.मैं बोला- कैसे पता था तुमको? किस ने बताया?निम्मी बोली- वो तुम्हारे घर में विनी और उसकी बहन रहती हैं, न वो हमारी भी सहेली. उसी ने हिंट दिया था कि तुम्हारे हथियार में कमाल की शक्ति है.मैं बोला- लेकिन मैंने कभी उसके साथ कुछ नहीं किया था, खैर छोड़ो, अब क्या इरादा है?

शानू जो उनमें सबसे बड़ी थी, बोली- जो तुम कहो वही हमको मंज़ूर है.मैं बहुत धीमे स्वर में बोला- देखो जो हुआ वो बहुत डेंजरस था. हम सब पकड़े जा सकते थे और हमारे घर वाले हमें कहीं का नहीं छोड़ते. अब के बाद हम एक दूसरे के नज़दीक नहीं आएंगे इस सारे ट्रिप में!शानू बोली- नहीं सतीश, प्लीज ऐसा ना कहो, हमारा क्या होगा? हम तो कल पूरी तरह से आनन्द नहीं ले सकी थी.

मैं बोला- अच्छा ऐसा करो, सारा दिन हम चारों एक दूसरे के निकट नहीं आएंगे ताकि किसी को शक न हो और रात के डिनर के बाद फैसला करेंगे कि रात कैसे और किस के साथ गुज़ारनी है, ओके?सब बोली- ओके, ठीक है!मैं बोला- अब आप निकलो हाल से, मैं बाद में आता हूँ.

मैं भी थोड़ी देर बाद नाश्ता ख़त्म करके निकला और होटल के गार्डन में टहलने लगा. टहलते हुए मैंने सोचा अब क्या करें. यहाँ मुझ को नैना की कमी बहुत खल रही थी.तो मैंने फैसला किया कि मैं नैना की सलाह लेता हूँ फ़ोन पर!होटल की लॉबी में पूछा तो उन्होंने फ़ोन बूथ की तरफ इशारा किया.मैंने वहाँ से कोठी में फ़ोन लगाया और किस्मत से नैना ने ही उठाया. मैंने पहले अपना हाल बताया कि हम ठीक पहुँच गए हैं और अच्छी जगह रहने के लिए मिल गई है.उसने भी बताया कि वहाँ सब कुशल से हैं.

फिर मैंने उसको नैनीताल की समस्या बताई, वो बोली- वाह छोटे मालिक, आपको वहाँ भी मनचाही चीज़ें मिल गई, मामला मुश्किल तो है कैसे इन 4 से निपटा जाए? मेरे ख्याल में आपको चारों को कसम दिलानी पड़ेगी कि वो और किसी से नहीं कहेंगे. दूसरे मैं सोचती हूँ आज रात को चारों को एक ही कमरे में बुला लीजिए हो सके तो अपने ही कमरे में, इससे आप बचे रहेंगे.मैं बोला- हाँ यह ठीक है.

नैना बोली- चारों को एक एक बार चोद डालो रात में… फिर उन चारों को आपस में भिड़ा दो यानि लड़की लड़की संग संग करवा दो, इस तरह उनकी कामवासना ठंडी हो जायेगी.मैं एकदम खुश होकर बोला- वाह नैना, क्या बात है! और अगर वो एक दूसरी के संग नहीं करना चाहें तो?नैना बोली- तो उनको अपनी पहली चुदाई की स्टोरी सुनाने के लिए उकसाना. वो ज़रूर अपने पहली चुदाई की कहानी सुनाने लगेंगी और आप काफी बच जाएंगे.मैं बोला- यह भी प्लान अच्छा है नैना, शुक्रिया आई लव यू.

थोड़ी देर बाद हम सब अपनी बस मैं बैठ कर नैनी लेक घूमने चले गए. नैनी लेक बड़ी सुंदर जगह है, दूर दूर तक साफ़ पानी और उस पर चलती हुई किश्तियाँ एक अजब सा नज़ारा पेश करते हैं.

सब छात्र अपने खर्चे पर किश्ती किराये पर लेने लगे. निम्मी, मैरी, शानू और बानो ने एक ही किश्ती को किराये पर ले लिया.तभी सर बोले- इनके साथ एक लड़का भी जाना चाहिए.उन्होंने मुझको उस किश्ती में बैठा दिया. क्यूंकि दो किश्ती चलने वाले होते थे तो उस किश्ती में जगह फुल हो गई थी, मैंने कहा- चल भाई!अभी मैं बानो और निम्मी के बीच बैठा था और शानू और मैरी दूसरी तरफ बैठी थी.बानो अपने गोल उरोजों को मेरे बाँहों के साथ छूने की कोशशि करने लगी और निम्मी अपने घुटने मेरे घुटनों के साथ जोड़ रही थी, बड़ा ही आनन्द आ रहा था, वही बस वाला सीन चालू हो रहा था.

उधर मैरी और शानू आँखें तरेर रहीं थी लेकिन निम्मी और बानो बिना परवाह किये अपने काम में मस्त रहीं. किश्ती जब दूसरी तरफ पहुँच गई तो किश्ती वाले बोले अगर आप चाहें तो उतर कर उस तरफ के किनारे का आनन्द ले सकते हैं.

हम सब उतर गए और उस किनारे की दुकानों की सैर करने लगे, मुझको प्यास लग रही थी, मैं बोला – चलो एक एक कोका कोला पीते हैं.मैंने 5 कोकाकोला खरीदी और हम सब पीने लगे.

तब हम चलते हुए किश्ती से थोड़ी दूर हो गए और तब मैंने शानू को एक साइड ले जाकर कहा- मैंने फैसला लिया है कि आज रात की पार्टी मेरे कमरे में होगी. आप चारों वहीं आ जाना. क्यों ठीक है न?शानू ने बाकी लड़कियों को भी बुला लिया और उनको मेरी बात बताई. वो तैयार हो गई और कहा कि खाना खाने के एक घंटे बाद वो मेरे कमरे में आने की कोशिश करेंगी.वो सब बहुत खुश थी.

मैं बोला- तुम चारों सब लड़के लड़कियों पर नज़र रखो, अगर किसी को भी शक हो गया तो हम सब मारे जाएंगे. कोई हमारे बारे में कोई बात करे तो तुम फ़ौरन हम सबको बता देना ताकि हम सब चौकस हो जाएंगे. वैसे लोगों की बातों से मुझ पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन आप लड़कियाँ हैं, सोचिये आपके जीवन पर क्या असर पड़ेगा?शानू बोली- सतीश ठीक कह रहा है, अगर हम किसी को बताएंगी तो पकड़े जाने पर हम पर ही ज्यादा असर होगा. प्लीज किसी से भी रात की बात का कोई ज़िक्र नहीं करना, ओके?सबने सर हिला दिया.
 
नवाब का हरम

तब हम चलते हुए किश्ती से थोड़ी दूर हो गए और तब मैंने शानू को एक साइड ले जाकर कहा- मैंने फैसला लिया है कि आज रात की पार्टी मेरे कमरे में होगी. आप चारों वहीं आ जाना. क्यों ठीक है न?शानू ने बाकी लड़कियों को भी बुला लिया और उनको मेरी बात बताई. वो तैयार हो गई और कहा कि खाना खाने के एक घंटे बाद वो मेरे कमरे में आने की कोशिश करेंगी.वो सब बहुत खुश थी.

मैं बोला- तुम चारों सब लड़के लड़कियों पर नज़र रखो, अगर किसी को भी शक हो गया तो हम सब मारे जाएंगे. कोई हमारे बारे में कोई बात करे तो तुम फ़ौरन हम सबको बता देना ताकि हम सब चौकस हो जाएंगे. वैसे लोगों की बातों से मुझ पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन आप लड़कियाँ हैं, सोचिये आपके जीवन पर क्या असर पड़ेगा?

शानू बोली- सतीश ठीक कह रहा है, अगर हम किसी को बताएंगी तो पकड़े जाने पर हम पर ही ज्यादा असर होगा. प्लीज किसी से भी रात की बात का कोई ज़िक्र नहीं करना, ओके?सबने सर हिला दिया.

फिर रात को खाने के बाद चारों लड़कियाँ मेरे कमरे में इकट्ठी हुईं. वो अपने नाईट गाउन में थी और सभी बड़ी मादक लग रही थी.चारों ने आने के बाद सबसे पहले मुझको हॉट किस की होटों पर और अपने गोल गुंदाज़ उरोज मेरी छाती से लगाये.

मैं बोला- तुम सबने सोचा है कि चुदाई को करने का क्रम किस प्रकार तय करेंगे?मैरी बोली- लाटरी डाल लेते हैं, उससे क्रम तय हो जायेगा.मैं बोला- बाकी जो इंतज़ार कर रही होगी, वो क्या करेंगी?शानू बोली- सतीश ठीक कह रहा है,. जो चुद रही है वो तो सतीश के साथ बिजी है लेकिन बाकी क्या करेंगी?

सब चुप रही. जब कुछ समय उन को कुछ नहीं सूझा तो मैं ही बोला- शानू बताओ, क्या आप लड़कियों ने कभी किसी दूसरी लड़की के साथ सम्बन्ध बनाया है?शानू बोली- मैंने तो कई बार लड़कियों के साथ सेक्स किया है, आप तीनों ने कभी किया है क्या?सबने शर्माते हुए हाँ में सर हिला.मैं बोला- तो ठीक है, जिन लड़कियों का नम्बर बाद में होगा, वो अपने लिए पार्टनर चुन लेंगी और उसके साथ सेक्स कर सकती हैं या फिर सेक्स करते हुए कपल की सहायता कर सकती हैं. चलो अब लाटरी डालो!

शानू ने पर्चियों पर मेरा और हर लड़की क नाम लिख दिया. और फिर मेरी आँख पर पट्टी बाँध दी और मैंने एक एक करके पर्चियाँ उठाई.सबसे पहले बानो और मेरा नाम वाली पर्ची निकली, दूसरी पर्ची निम्मी के साथ, तीसरी मैरी के साथ और चौथी शानू के साथ वाली थी. मुझ पर कोई खास असर नहीं था, हाँ, लेकिन शानू थोड़ी उदास हो गई थी क्यूंकि उसका नाम आखिर में निकला था.

शानू बोली- मैं सोचती हूँ कि मैं चुदाई रेस से बाहर हो जाऊँ तो ही ठीक है क्योंकि मेरे तक पहुँचने तक सतीश का माल तो खत्म हो जायेगा न?मैं बड़े ज़ोर से हंस दिया और बोला- शानू, तुम ऐसा करो, पहले तुम निम्मी और मैरी से कल रात का हाल तो पूछो.

तब मैरी और निम्मी ने पिछली रात का किस्सा सुनाया और कहा- सतीश ने हम दोनों को कल रात को 3-3 बार चोदा और फिर उसने तुम दोनों को भी दो दो बार चोदा. और जब वो गया था तुम्हारे कमरे से तो उसका लंड कैसा था?दोनों बोली- खड़ा था पूरी तरह! यानि वो इतनी देर तक बगैर डिस्चार्ज हुए खड़ा रहा? यार कमाल है!शानू बोली- सच कह रही हो तुम दोनों? अगर सच है तो सतीश हम सब को भी चोद सकता है?

और शानू का भी मुखड़ा खिल उठा, उसने आकर मुझको सबसे पहले नंगा किया और यह देख कर बड़ी खुश हुई कि मेरा लौड़ा पूरा तनावट में था.तब सबने अपनी गाउन उतार दिए और चारों दौड़ कर मुझसे चिपक गई.

मुझ को आज पहली बार लगा कि वाकयी में मुझमें अद्भुत शक्ति है और मैं किसी भी स्त्री को अपनी और आकर्षित कर सकता हूँ और उसको कामसुख दे सकता हूँ.मेरे मन में कोई गर्व या अभिमान नहीं आया क्यूंकि मेरे मन में यही विचार था कि इस अद्भुत शक्ति के साथ ईश्वर ने मुझ को बहुत अधिक उतरदायित्व भी दिया है, मेरे से किसी स्त्री या व्यक्ति विशेष का मन न दुखे, यही सदैव मेरा प्रयत्न रहा है जीवन में.

क्यूंकि सबसे पहले लाइन में बानो थी, वो मेरे इशारे पर मेरे पास आई.मैंने शानू को कहा- शानू, आप इस चार रानियों वाले हरम की मुखिया हैं तो आप बानो को मेरे पास ले कर आइए और यह तौहफा हम को पेश कीजिए.

शानू समझ गई कि मैं गेम खेल रहा हूँ. वो बानो को चेक करने लगी, पहले उसने उसके मम्मों को चेक किया और फिर उसकी चूत में ऊँगली डाली और फिर उसकी गांड में ऊँगली डाली, फिर वो बानो को लेकर मेरे पास आई और झुक कर बोली- हज़ूरे आला, आपकी खिदमत में कनीज़ यह नायाब तौहफा लेकर आई है, कबूल फरमाएँ.मैं भी उस लहजे में बोला- प्यारी बेगम, तुम कितनी हसीं और समझदार हो, यह बहुत ही खूबसूरत तौहफा आप लेकर आई हैं. बहुत शुक्रिया आपका!

और मैंने आगे बढ़ कर बानो को अपने गले से लगा लिया और फिर उसके होटों को चूमा. मैंने देखा कि बाकी तीनों हमारी तरफ ही देख ही रहीं थी.मैंने शानू को इशारा किया और वो समझ गई, झट से सब लड़कियों को कहा- चलो चलो, सब अपने पार्टनर के साथ शुरू हो जाओ.मैं बादशाह सलामत की खिदमत कर रही हूँ.जल्दी ही बाकी मैरी और निम्मी आपस में किसिंग और मम्मों को चूसने और चूत में ऊँगली डालने लगी.वो एक बेड पर शुरू हो गई और दूसरे पर मैं और बानो.

आज मैंने बानो को ध्यान से देखा, वो काफी कसे हुए जिस्म वाली लड़की थी, उसका रंग गंदमी था और शरीर काफी गोलाई में था, उसके जिस्म की सबसे खूबसूरत चीज़ उसके मम्मे और गोल मोटे चूतड़ थे.मैंने उसको बिस्तर पर बैठा दिया और उसकी टांगें चौड़ी कर उसकी गोद में अपना मुंह डाल दिया और उसकी चूत के घने बालों को सूंघने लगा, बड़ी ही मादक सुगंध आ रही थी.

फिर मैंने उसको पलंग पर पर लिटा दिया और उसकी टांगों को अपने गले के चारों और फैला दिया.फिर मेरा मुंह सीधा उसकी चूत में उसकी भग पर रख दिया और जीभ से लपालप उसको चूसने लगा.मैंने देखा कि शानू भी बानो के मम्मों को चूस रही थी और उसको होटों पर बारी बारी से किस भी कर रही थी.

बानो को थोड़ी देर में ही आनन्द आने लगा और वो बार बार अपनी जांघें बंद और खोल रही थी और अपनी कमर को उठा कर मेरे मुंह से चूत के भग को लगा रही थी.और फिर उसने एक ज़ोर से सीत्कार के बाद अपनी टांगें मेरे मुंह के चारों और बाँध दी और मुझको हिलने का कोई स्थान नहीं दिया.

जब उसका कांपना कुछ कम हुआ तो मैंने उठ कर उसको बिस्तर पर पूरा लिटा दिया और खुद उसकी खुली टांगों के बीच बैठ कर अपने लौड़े को उसकी चूत के मुंह पर रख कर एक ज़ोरदार धक्का दिया और लंड लाल पूरा ही अंदर समा गया..

अब मैंने अपने शरीर को बानो के शरीर के ऊपर कर लिया और कमर से धक्के का सिलसिला शुरू कर दिया. बानो की टांगें कुछ देर हवा में थी और फिर वो मेरी कमर के चारों और कस गई थी.

दूसरे बेड पर निम्मी और मैरी लगी हुई थी ज़ोर शोर से, खूब एक दूसरे को किस और चाट रही थी, शानू अभी भी बानो को लिप्स पर किस कर रही थी.फिर वो उठ कर मेरी कमर को ऊपर नीचे करने लगी, उसका एक हाथ मेरे अंडकोष के साथ खेल रहा था और दूसरा मेरी गांड में हल्के से अंदर बाहर हो रहा था.

कुल मिला कर पूरा हरम वाला माहौल बना हुआ था और मैं बकौल खुद नवाबे- हज़रतगंज अपनी पूरी शानू और शौकत से अपने टेंपरेरी हरम के बीच में बैठा हुआ मौज और मस्ती का लुत्फ़ उठा रहा था.

शानू जो बानो को ध्यान से देख रही थी और उसके छूटने इंतज़ार बड़ी बेसब्री से कर रही थी, एकदम चौंक कर बानो से बोली- छूट रहा है री तेरा तो! सतीश जल्दी से धक्के मारो, बानो छूटने वाली है.

और मैंने अपने धक्कों की स्पीड एकदम तेज़ कर दी और तभी नीचे लेटी बानो ने मुझ को कस कर टांगों में पकड़ कर ज़ोर से काम्पने लगी. मैंने भी उसको कस कर अपने सीने से लगा लिया और उसके मम्मों को एकदम क्रश कर दिया.कुछ मिन्ट हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे.बाकी दोनों लड़कियाँ भी छूट चुकी थी और एक दूसरी की बाहों में लेटी हुईं थी

दोस्तो मैं आपका सतीश यह जानना चाहता हु कि क्या एक भी ऐसा रीडर है जो इस कहानी को पहले पार्ट से पढ़ रहा हो अगर हो तो मुझे जरूर बताये ताकि मैं उसके लिये यह कहानी कम्प्लीट करु वर्ना मैं यह कहानी जल्द ही बंद कर दूंगा और इसके जगह पर कोई नई कहानी स्टार्ट कर दूंगा...सतीश

कहानी जारी रहेगी.
 
दोस्तो माफी चाहता हु कुछ फॅमिली प्रॉब्लम की वजह से मैं बहुत दिनों से अपडेट नही दे पा रहा था पर अब सब ठीक है तो अब रेगूलर अपडेट मिलते रहेंगे साथ बने रहने के लिये धन्यवाद...सतीश

 
चारों लड़कियों की चूत चुदाई

शानू जो बानो को ध्यान से देख रही थी और उसके छूटने इंतज़ार बड़ी बेसब्री से कर रही थी, एकदम चौंक कर बानो से बोली- छूट रहा है री तेरा तो! सतीश जल्दी से धक्के मारो, बानो छूटने वाली है.

और मैंने अपने धक्कों की स्पीड एकदम तेज़ कर दी और तभी नीचे लेटी बानो ने मुझ को कस कर टांगों में पकड़ कर ज़ोर से काम्पने लगी. मैंने भी उसको कस कर अपने सीने से लगा लिया और उसके मम्मों को एकदम क्रश कर दिया.कुछ मिन्ट हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे.बाकी दोनों लड़कियाँ भी छूट चुकी थी और एक दूसरी की बाहों में लेटी हुईं थी.

अब निम्मी की बारी थी, मैंने उसको इशारा किया- आ जाओ और साथ में कोकाकोला की बोतलें भी लाओ और सब पियो और पिलाओ.मैं बैठ गया और कोकाकोला पीने लगा.

मेरा लंड अभी भी वैसे ही खड़ा था क्योंकि ना वो कल छूटा था न वो आज अभी तक छूटा था. मैं नहीं चाहता था कि किसी लड़की के अंदर छूटा कर उसका जीवन मुसीबत में डालूँ इसलिए मैं अपने को रोक रखने की शक्ति का इस्तेमाल कर रहा था.कोकाकोला पीने के बाद हम सब फ्रेश हो गए थे, निम्मी मुझसे चिपक कर बैठ रही थी और उसके गोल मम्मे मेरी बाजू से लग रहे थे. उधर मैरी भी मेरे नज़दीक आने की कोशिश कर रही थी.

बानो के चहरे पर एक बड़ी ही मीठी मुस्कान छाई हुई थी और वो बार बार अपनी चूत में हाथ डाल कर देख रही थी कि मेरा तो कुछ भी नहीं छूटा था.शानू मेरे वाले बेड को फिर से तैयार कर रही थी.

तभी निम्मी बोली- क्यों सतीश, तुम मुझको और मैरी को साथ साथ नहीं चोद सकते क्या? जैसे कल चोदा था.मैं बोला- चोद सकता हूँ लेकिन अब मेरा छूटने का टाइम है तो ध्यान से चोदना होगा दोनों को! क्यों मैरी तुम राज़ी हो ना?मैरी बोली- हाँ हाँ सतीश, कल भी तुमने हमको ऐसे ही चोदा था आखिरी बार.मैं बोला- चलो आ जाओ मैदान-ए-जंग में!

मैंने दोनों को एक बहुत ही सख्त आलिंगन किया और दोनों को अपने से पूरा चिपका कर उनके होटों पर गहरी चुम्मी की.उधर शानू एक हाथ अपनी चूत में डाल कर बैठी थी और दूसरे से अपने मम्मे दबा रही थी.मैंने बानो को इशारा किया कि वो अपनी पार्टनर को सम्भाले.

बानो उठी और जाकर शानू की गोद में बैठ गई और उसके लबों पर गर्म गर्म चुम्बन देने लगी.शानू ने भी अपनी बाहें बानो की चारों तरफ डाल कर उसको कस कर जफ़्फ़ी दे दी.

इधर मैंने निम्मी को छुआ चूत पर, वो बुरी तरह से गीली हो चुकी थी और उसका अपना रस उसकी जांघों के नीचे बह रहा था.और मैरी भी वैसे ही काफी गीली और चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी.

अब शानू ने उन दोनों को घोड़ी बना कर पलंग पर बैठा दिया और मुझको आकर बोली- हज़ूर, घोड़ी तैयार है, आप सवारी कर लीजिये.यह सुन कर हम सब बहुत ज़ोर से हंस पड़े.

मैंने बिस्तर पर चढ़ कर पहले मैरी की चूत में लौड़ा डाला और उसको पहले धीरे धीरे और फिर तेज़ और फिर धीरे इसी क्रम में चोदने लगा, ज़ोरदार धक्कों के बाद मैंने लौड़ा निकाल लिया और निम्मी की फूली हुई चूत में डाल दिया.दोनों चूतों का अंतर इसी तरह की चुदाई में सामने आता है. मैरी की चूत गहरी लेकिन खुली थी और निम्मी की चूत एकदम तंग और बड़ी ही फिसलन भरी थी, उसकी चूत में लंड डालते ही वो कहीं का कहीं पहुँच जाता है और मैरी की चूत में लंड का जाना एक गुफा में जाने के समान था.

अभी तक सबसे मज़ेदार चूत बानो की ही लगी लेकिन निम्मी की भी कुछ कम नहीं थी, गद्देदार और काफी रसीली थी उसकी चूत!उसको चोदते हुए मुझको बहुत आनन्द आ रहा था और जब मैरी में डालता था तो लम्बी गहरी गुफा का मज़ा आता था.उन दोनों को चोदते हुए मुझको दस मिन्ट हो गए थे लेकिन दोनों ही छूटने का नाम नहीं ले रही थी.

मैं बोल पड़ा- कौन पहले छूटेगी? लगायेगा कोई शर्त? मैं शर्त लगाता हूँ कि पहले निम्मी छूटेगी. दस रुपये की शर्त है, बोलो कोई और लगाने को तैयार है क्या?

शानू बोली- 20 रूपए की शर्त, पहले मैरी छूटेगी!बानो बोली- नहीं पहले निम्मी छूटेगी, 30 की शर्त लग गई.मैं बोला- 40 की शर्त, पहले निम्मी छूटेगी.

दोनों लड़कियाँ हमारी दोनों साइड में खड़ी हो गई और ‘बक अप मैरी…’ मत छूटना तुम लगी रहो और ‘निम्मी मत छूटना यार… सतीश को जोर लगाने दो!’ वगैरह बोलने लगी और एकदम से दोनों की चुदाई में खासा जोश आ गया.

तब मैंने भी धक्के कभी आहिस्ता और कभी तेज़ कर दिए, कभी मैरी की चूत में तेज़ धक्के मारता और कभी निम्मी की चूत में तेज़ी दिखाता.मेरा ध्यान केंद्रित था निम्मी को पहले छुटाने का और कभी यह ध्यान मैरी की तरफ चला जाता.
 
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