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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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मैरी और निम्मी चुदाई का खूब मज़ा ले रही थी, मुझको पता लगे बगैर वो दोनों दो दो बार झड़ चुकी थी, यह उन्होंने मुझको बाद में बताया और दोनों ने हम सबको खूब उल्लू बनाया और मन ही मन मुस्करा रही थी दोनों.आखिर कॅाफ़ी समय हो गया चुदाई में, मैंने मैरी की चूत में ऊँगली डाल कर उसकी भग थोड़ी देर मसला और फिर वैसा ही किया निम्मी के साथ.

थोड़ी देर में जब मैं निम्मी की चूत में ऊँगली से कर रहा था तो मैंने कुछ इस तरह से उसको चोदा कि मेरा लंड कभी रेल की स्पीड से अंदर बाहर हो रहा था और जैसे मैं चाहता था, निम्मी की कोशिश के बावजूद वो छूटने की कगार पर पहुँच गई और मेरे एक गहरा धक्का लगते ही वो छूट गई और सिसकारी भरने लगी.

यह मसहूस करते ही निम्मी की चूत ने बंद और खुलना शुरू कर दिया और ज़ोर से काम्पने भी लगी. उसी के साथ ही जब मैंने मैरी की चूत में लौड़ा डाला तो वो भी दो तीन धक्कों में छूट गई.

मैंने अपना गीला लौड़ा मैरी की चूत से निकाल कर नंगे ही डांस करना शुरू कर दिया और चिल्लाना शुरू कर दिया- मैं जीत गया, मैं जीत गया!

सब लड़कियाँ बहुत हंस रही थी और शानू तो मेरे पीछे पीछे भाग रही थी और बोल रही थी- मेरा क्या होगा सतीश? मेरा क्या होगा सतीश?मैं रुक गया और बोला- तुम्हारा क्या होना है यार?वो रुआंसी हो कर बोली- मेरे को कौन चोदेगा यारो? मैं तो रह गयी कुंवारी?सब लड़कियाँ खूब हंस रही थी, मैं भी खूब हंसा और सबको बोला- धीरे प्लीज, बाहर कोई सुन न ले अंदर कि क्या हो रहा है.

अब मैंने शानू को पकड़ लिया और उसको बाँहों में लेकर बॉल डांस शुरू कर दिया. मेरा खड़ा लौड़ा शानू की चूत के ऊपर रगड़ा मार रहा था डांस करते हुए.फिर मैंने शानू के चूतड़ों के नीचे दोनों हाथ रख कर उसको थोड़ा ऊपर उठा लिया और शानू ने अपनी जांघें खोल कर मेरी कमर के इर्दगिर्द फैला दी, ऐसा करने से उसकी चूत का मुंह मेरे लौड़े के समानांतर आ गया और फिर मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत के मुंह पर रख दिया और हॉट एंड सेक्सी डांस करने लगा.

शानू तो चुदाई के लिए बेताब हो रही थी, उसने झट से अपनी चूत का धक्का मारा और मेरा लंड आधे से ज्यादा शानू की प्यासी चूत में चला गया.उसने फिर एक ज़ोर का धक्का मारा और पूरा लंड चूत के अंदर था.शानू अब मेरे हाथ में अपने चूतड़ों को हिला हिला कर लंड का मज़ा ले रही थी, वो बेसब्री से आगे पीछे हो रही थी, उसकी चूत असल में पनिया रही थी और उसकी चूत से गिर रहे पानी से मेरे हाथ भर गए थे.

खड़े खड़े शानू को चोदना मेरे लिए एक नया तजुर्बा था क्यूंकि मैंने यह आजतक कभी नहीं किया था.शानू को लबों पर गहरी चुम्मी देते हुए मैंने ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए और वो भी जल्दी से अपने चूतड़ों को आगे पीछे मेरे हाथों पर करने लगी.फिर मैंने महसूस किया कि शानू की चूत सकुड़ और खुल रही है जिसका मतलब साफ़ था कि वो भी झड़ने के नज़दीक है.

अब मैंने उसके चूतड़ कस के अपने हाथों में जकड़ लिए और वैसे ही मैंने चूत की गहराई तक जाने वाले धक्के मारने लगा और तीन चार धक्कों में ही शानू मेरे हाथों में तड़फड़ाने लगी और उसकी मेरे चारों तरफ लिपटी जांघें सिकुड़नी और खुलनी शुरू हो गई.

मैं उसको हाथों में उठाये हुए कमरे के दो चक्कर लगा आया और फिर उसको बेड में लिटा दिया.उसकी ख़ास सहेली बानो उसको सँभालने लगी, उसका मुंह और शरीर साफ़ किया और उसको और हम सबको कोकाकोला पिलाया..

हम सब अपने कपड़े पहनने लगे, तब शानू ने कहा- सतीश, अब कब मिलोगे?मैं बोला- जब कहोगी मिल लेंगे यार! तुम जैसे प्यारे दोस्तों से मिलने में क्या कष्ट हो सकता है.शानू बोली- लखनऊ में कहाँ रहते हो?मैंने कहा- निम्मी, तुम एक कागज़ में हम सबके फ़ोन नंबर नोट करो और फिर सुबह उसकी एक कॉपी सबको दे देना.सबने अपने फ़ोन नंबर नोट करवाये.

सब जाने के लिए तैयार हो गई थी, तब मैंने उन सब को सम्बोधित किया- यारो, तुम सब अति सुंदर और प्यारी कन्याएँ हो. जाने से पहले मुझ को एक बात बता दो, आप सब फ्रैंकली बताना कोई शर्म वर्म नहीं, ठीक है?सब बोली- ठीक है, पूछो क्या पूछना चाहते हो?

मैं बोला- जैसे कि आपने देखा कि कल के और आज के कार्यक्रम में हम सब एक दूसरे के काफ़ी नज़दीक आ गए हैं. मैं यह पूछना चाहता हूँ कि आप सबने मुझमें ऐसी क्या बात देखी कि मेरे साथ एकदम खुला व्यव्हार शुरू कर दिया बगैर किसी तरह की शर्म वर्म के. यहाँ तक पूरी तरह से नंगे होकर हम एक दूसरे से मिलते रहे? ऐसी क्या बात थी जिसने आपको आकर्षित किया यह करने के लिए? मुझमें ऐसा क्या आकर्षण था कि आपको मेरी तरफ पूरा खींच लाया?

चारों लड़कियाँ चुप रही और एक दूसरी को देखने लगी, फिर सबसे पहले शानू ही बोली- सतीश यार, कुछ तुम्हारे चेहरे में है जो हर लड़की को अपनी तरफ खींचता है, शायद तुम्हारे चेहरे की मासूमियत और तुम्हारी आँखों में झलकता सबके लिए प्रेम भाव है जो किसी भी लड़की को अपनी तरफ खींचता है और सबसे बड़ी अट्रैक्शन जो मैंने महसूस की, वो है हर वक्त सतीश के खड़े लंड का कमाल.

निम्मी बोली- जो ख़ास बात मुझको लगी, वो यह है कि सतीश को अपने पास बिठा कर भी हमारे साथ कुछ भी छेड़खानी ना करने की कोशिश से मन में प्यार उमड़ा था और सतीश के प्रति विश्वास की भावना पैदा हो गई थी.

मैरी और बानो ने कहा- यह बात तो है लेकिन हमारे ख्याल में सतीश की आँखों में एक तरह की शरारत झलकती है जिससे कोई भी लड़की या औरत इसकी तरफ झुकी जाती है, इसका चेहरा बहुत ही मासूम लगता है और ख़ास तौर से लड़की या औरत इसको अपने गले लगाने की कोशिश करती है.

मैंने सब लड़कियों के लबों पर चुम्बन किया और कहा- आप जब चाहो मेरी कोठी आ सकती हो और जो चाहो मांग सकती हो, लंड से ले कर फंड तक! मैं कोठी में अकेला रहता हूँ 2-3 नौकरों के साथ. जो सेवा आप कहोगी, वो करने की पूरी कोशिश की जायेगी.थैंक यू गर्ल्स… आप सब बहुत ही सुंदर और सेक्सी हो और मेरी यह दुआ है कि आप सबको ऐसा ही लंड नसीब हो जिससे आप सभी पूरी तरह से खुश रहें.फिर वो एक एक करके मुझको चूमती हुई अपने कमरों में चली गई.

अगले दिन नैनीताल से चल कर हम शाम को लखनऊ पहुँच गए.

कहानी जारी रहेगी.
 
नैना और पारो द्वारा मेरा स्वागत

अगले दिन नैनीताल से चल कर हम शाम को लखनऊ पहुँच गए.जब मैं कोठी पहुंचा तो शाम हो चली थी, कोठी के गेट पर लखन लाल चौकीदार ने सलाम किया और पूछा- कैसा रहा नैनीताल?लखन लाल ने बताया कि सब ठीक चल रहा है.अंदर से नैना ने मुझको पहले ही देख लिया था, वो मेरा बैग उठा कर मेरे कमरे में आ गई.

जैसे ही उसने बैग रखा, मैंने उसको बाहों में भर लिया और ज़ोरदार चुम्मी उसके होटों पर दी.नैना ने भी मुझको ज़ोरदार किस की और ज़ोर की जफ़्फ़ी डाली, बोली- हम सब आपको बहुत याद कर रहे थे, आपका टूर कैसा रहा?मैं बोला- बहुत अच्छा और सेक्सी था लेकिन नैना, तुम्हारी बहुत याद आती रही! और पारो कैसी है?नैना बोली- ठीक है छोटे मालिक, मैं अभी चाय लाती हूँ.चाय लाई तो साथ में पारो भी थी.हम दोनों ने भी एक हॉट जफ़्फ़ी डाली और एक दूसरे को चूमा.

मैं बहुत थक गया था तो बिस्तर पर लेट गया और फिर नींद लग गई.उठा तो रात हो चुकी थी, नैना ने आकर पूछा- अब कैसी है थकान?मैं बोला- बहुत ठीक है.तब नैना ने कहा- खाना तैयार है छोटे मालिक!मैं बोला- अभी खाते हैं, वो दोनों बहनें कैसी हैं?नैना बोली- मज़े में हैं, वो दोनों कल चेक अप करा के आईं हैं और डॉक्टर ने कहा है कि वो दोनों अब बिल्कुल ठीक हैं.

मैं बोला- अच्छा तो कुछ कहा नहीं दोनों ने?नैना बोली- नहीं छोटे मालिक, अभी आई थी आपसे मिलने! आप कहो तो खाना लगा दें खाने के टेबल पर!मैं बोला- हाँ, लगा दो खाना.

फिर मैं हाथ मुंह धोकर बैठ गया और गीति और विनी भी आ गई, दोनों ने मुझसे हाथ मिलाया. नैना न आज ख़ास हांडी मुर्ग़ बनवाया था, वो बहुत ही लज़ीज़ था, मज़ा आ गया और पारो को बुला कर हम तीनों ने उसके खाने की बहुत तारीफ की.

खाने के बाद हम सब कोकाकोला पी रहे थे तब विनी ने कहा- हम दोनों अब ठीक हैं, हमारी बारी कब आयेगी?मैं ज़ोर से हंस दिया और बोला- विनी, हम तो हर वक्त यहीं हैं, जब चाहो अपनी बारी ले लो लेकिन नैना आंटी से पूछ कर और उस के साथ!

तब तक नैना भी आ गई थी, वो बोली- छोटे मालिक अभी सफर से आये हैं, कुछ दिन रुक कर वो तुम्हारी मुराद ज़रूर पूरी कर देंगे. क्यों छोटे मालिक?मैं बोला- हाँ हाँ, अच्छा गीति और विनी यह बताओ कि क्या तुमने कभी किसी जोड़े को सेक्स करते हुए देखा है?दोनों ने ना में सर हिला दिया.

नैना ने पूछा- गाँव में कभी कुत्ते कुतिया को या सांड और गाय को करते हुए देखा है?फिर दोनों ने ना में सर हिला दिया.

नैना बोली- ठीक है, पहले तुम दोनों को सिखाया जाएगा कि कैसे करते हैं यौनाचार!मैं बोला- यह कैसे दिखा पाओगी इनको?नैना बोली- कल रात को अपने कमरे में बुला लेते हैं इन दोनों को और फिर इनको करके दिखा देंगे. क्यों मंज़ूर है?दोनों ने हाँ में सर हिला दिया.

मैं बोला- ठीक है, जैसे नैना आंटी कहेगी वैसे ही करती जाना, ओ के?दोनों बहनें अपने कमरे में चली गई और मैं अपने बेड पर लेट गया.

तकरीबन एक घंटे बाद नैना और पारो दोनों आई, दोनों ने सुन्दर साड़ी पहन रखी थी, साथ ही मैचिंग ब्लाउज भी और सबसे नई चीज़ यह थी कि दोनों ने ब्रा भी पहन रखी थी.

मैंने पारो को आलिंगन बद्ध किया और उसके होटों को खूब चूसा और उसके मोटे मम्मों को ब्रा के ऊपर से छेड़ा. फिर मैंने खुद ही उस की साड़ी उतारनी शुरू की.साड़ी के नीचे उसने उसी रंग का पेटीकोट पहन रखा था.

फिर मैंने उसके बटन खोले और पारो ने अपना ब्लाउज खुद ही उतार दिया. उसने बड़ी ही कसी हुई अंगिया पहन रखी थी जो एकदम नई थी और उसके मम्मों पर पूरी तरह से फिट थी.मुझको ब्रा उतारने का कोई अनुभव नहीं था. नैना ने आगे बढ़ कर उसकी पीठ पर दो हुक्स को खोला और ब्रा एकदम मम्मों से अलग हो गई, पारो के मम्मे एकदम उछल कर बाहर आ गए जिनको मैंने सीधे अपने मुंह में ले लिया.

थोड़ा उनको चूसने के बाद मैंने नैना की साड़ी उतारी और फिर ब्लाउज और वैसे ही उसकी ब्रा भी उतारी. पेटीकोट को उतारने के बाद जब दोनों नंगी हो गई तो मैंने उन दोनों को ध्यान से देखना शुरू किया.

वैसे तो उनको नंगी मैंने कई बार देखा था लेकिन आज कुछ ख़ास बात थी और वो थी कुंवारी लड़कियों के शरीर और इन चुदी हसीनाओं के शरीर में ख़ास अंतर को ढूंढना.

हम तीनो नंगे खड़े थे और वो दोनों मेरे लौड़े को देख रही थी.नैना बोली- छोटे मालिक, आपने इन दो दिनों कितनी लड़कियाँ चोदी थी नैनीताल में?

मैं बोला- चार लड़कियाँ थी जो मुझ से चुदाने को तैयार थी और मैंने उन चारों को एक साथ खूब चोदा.नैना बोली- पहली रात कितनी थी और दूसरी रात कितनी?मैंने नैना को सारी कहानी सुनाई और बताया कि वो शायद यहाँ भी आएँगी. और यह भी बताया कि चारों पहले से खुली बोतलें थी तो बहुत ही आनन्द आया उन कुंवारी चूतों को बारी बारी से चोद कर और वो सब मेरी पक्की मुरीद बन गई हैं.
 
मैं बोला- नैना डार्लिंग, मैंने एक बार भी अपना नहीं छूटने दिया ताकि उनको कोई खतरा न हो बच्चे का! आज तुम दोनों मेरा रुका पानी छूटा दो यारो!नैना और पारो बोली- आप लेट जाओ छोटे मालिक, बाकी हम सब कर लेंगी.

मैं पलंग पर आलखन से लेट गया और वो दोनों लगी मुझको काम सुख देने.नैना मेरे लंड को चूसने लगी और पारो मेरे छाती की चूचकों को जीभ से चाटने लगी. पारो की चुसाई से मेरे अंदर लहर दौड़ गई और मेरा लंड एकदम नैना के मुंह में हिलौरें मारने लगा.

नैना लंड चुसाई के बाद मेरे अंडकोष को चूमने और चूसने लगी. मेरी एक उंगली नैना की चूत की सैर कर रही थी और उसमें से निकल रहे रस को निकाल कर उसके भग पर मसल रही थी.उधर पारो की चूत भी बहुत अधिक पनिया रही थी.

फिर नैना और पारो ने अपनी पोजीशन बदली, नैना मेरे ऊपर उलटी लेट गई और मेरे लंड को अपने मोटे और सॉलिड मम्मों के बीच रख कर ऊपर नीचे होने लगी, चूत से निकल रहे रस को वो मेरे लंड पर लगा कर मम्मों से मुझको चोद रही थी.

पारो ने अपनी चूत मेरे मुंह पर रख दी और मेरी जीभ उसके भग को चूस और चाट रही थी.इन सब हरकतों से मैं छूटने के कगार पर पहुँच गया, मैं झट से नैना को अपने ऊपर से हटा कर उसके ऊपर चढ़ गया और एक दहकते इंजन की तरह उसकी फूली हुई चूत में लंड को डाल कर बगैर गियर लगाए पिस्टन को अंदर बाहर करने लगा.थोड़ी देर में ही मेरा फव्वारा ऐसा छूटा जैसे कि रेगिस्तान में बादल फ़ूट पड़ा हो.

तब पारो मेरे लंड को अपने मुंह से साफ़ करने लगी और मेरा और नैना का मिक्स रस वो चाट गई. पारो ने मेरे लंड को जो अभी भी खड़ा था, फिर चूसने लगी और थोड़ी देर में वो भी उसको चूत में डाल कर ऊपर नीचे करने लगी.

उसने झुक कर अपने मम्मों को मेरे मुंह के पास कर दिया जिससे मुझको उनको चूसने में आसानी हो और मैं बिना रुके उनकी चूचियों को चूसने लगा. पारो ऊपर से लेट कर अपनी चूत को मेरे लंड के ऊपर रख कर खूब धक्के मारने लगी और थोड़ी देर में वो अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई और मेरे ऊपर बैठे ही उसकी चूत सुकड़न और खुलने लगी.

मैंने भी लंड को चूत से निकाल कर उसकी मोटी गांड के मुंह पर रख दिया और एक ज़ोर के धक्के में लंड पूरा गांड के अंदर चल गया. पारो को गांड चुदाई में भी काफी मज़ा आता था, वो फिर ऊपर नीचे होने लगी, मैं उसके नीचे लेटे हुए ही गांड चुदाई की मस्ती देने और लेने लगा.

पारो का मुंह एकदम खुला हुआ था और उस सारा ध्यान उसका गांड में आ रहे मज़े पर टिका हुआ था. अब वो ऊपर से बहुत ज़ोर ज़ोर से मेरे लंड के ऊपर उठ बैठ रहीं थी और मुझको लगा कि वो फिर झड़ने वाली है.

मैंने अपने नीचे से धक्के और तेज़ कर दिए और फिर मेरा फव्वारा लंड से एक बार फिर छूटा और पारो को अपने साथ लेकर स्खलित हो गया.मैं चुदाई के बाद काफी थक गया था तो उन दोनों के गले में बाहें डाल कर सो गया.

सुबह मैं काफी देर से उठा क्यूंकि कॉलेज की छुट्टी थी.जब उठा तो नैना मेरे लिए गरम चाय लेकर आई हुई थी और फिर मैं चाय पीते हुए नैना के मोटे और सॉलिड मम्मों के साथ खेलता रहा.नैना मुस्करा रही थी.

मैंने पूछा- क्यों मुस्करा रही हो मेरी जान?वो बोली- रात को तो आपने हद कर दी!मैं चौंक कर बोला- क्यों ऐसा क्या किया मैंने?वो हँसते हुए बोली- सोने से पहले आप मुझको और पारो को एक एक बार चोद चुके थे लेकिन कल रात में आप सोये सोये ही मेरे ऊपर चढ़ गए और मेरा 2 बार छूटा कर फिर सो गए और 2 घंटे बाद आप पारो पर सोये सोये ही चढ़ गए और बंद आँखों किये ही उसको भी एक बार छूटा कर फिर सो गए.

मैं एकदम हैरान था क्योंकि मुझको कुछ भी याद नहीं कि मैंने ऐसा किया था.नैना बोली- इसमें घबराने की कोई बात नहीं, कभी कभी जब आदमी बहुत थका होता है न, तो वो अंजाने में ऐसा कर सकता है.

मैं नंगा ही उठा और अपने बैडरूम में टहलने लगा.इतने में गीति कमरे का भिड़ा दरवाज़े को खोल कर कमरे में आ गई. उसका हाथ शर्म से अपने मुंह पर जा पहुँचा जब उसने देखा कि मेरा लंड एकदम लोहे की रॉड की तरह खड़ा हुआ है.मैं भी चौंक गया लेकिन फिर मैंने अपने को संभाल लिया.

मैं बोला- गीति शर्माओ नहीं, तुमने तो मुझ को पहले भी नंगा देखा है न?गीति के चेहरे पर शर्म की लाली चढ़ी हुई थी और वो कोशिश कर रही थी कि उसकी नज़र मेरे खड़े लौड़े पर न पड़े पर वो बार बार चोर नज़र से मेरे लंड को ही देख रही थी.उसने वापस जाने की भी कोई कोशिश नहीं की और वो ऐसे खड़ी थी जैसे किसी ने उसको सम्मोहित कर दिया हो.मैंने पूछा- कैसे आना हुआ अभी? क्या तुम कॉलेज नहीं गई आज?

गीति थोड़ी संयत हो गई थी, बोली- आज हमारे कालेज में भी छुट्टी है तो हम दोनों घर पर ही हैं.मैं बोला- चलो अच्छा है.गीति बोली- मैं तो यह पूछने आई थी कि हम 3- 4 सहेलियाँ पिकनिक के लिए जा रही हैं, सतीश, तुम चलोगे हमारे साथ?मैं बोला- ऐसा है गीति, मैं कल रात नैनीताल से वापस आया हूँ, काफी थका हुआ हूँ.
 
गीति बोली- ठीक है, आज रात का प्रोग्राम है न?मैं बोला- तुम फैसला करो, मेरी तरफ से तो हाँ है ही. जैसा कि तुम देख रही हो, मैं तो हर वक्त तैयार रहता हूँ.गीति हँसते हुए बोली- वही तो!मैं बोला- तो जाओ अपनी पिकनिक पर!गीति बोली- ठीक है..

वो मुड़ी जाने के लिए फिर न जाने क्या सोच कर मुड़ी और तेज़ी से आई और मेरे खड़े लंड को चूम कर भाग गई.नैना यह सारा नज़ारा देख रही थी दरवाज़े के पीछे से, वो हँसते हुए आई और बोली- वाह छोटे मालिक, मान गए ! आप वाकयी में प्रेमियों के बादशाह हो.मैं बोला- आओ ज़रा पकड़ो तो सही इस लंड को, बैठ ही नहीं रहा साला!

नैना मुस्कराती हुई आई और मेरे लंड के साथ खेलने लगी, फिर उसने उसको मुंह में डाल लिया और चूसने लगी.मैं बोला- अरे नैना, दरवाज़ा तो बंद कर ले ना यार, नहीं तो कोई और आ जायेगा.

नैना गई और दरवाज़ा बंद कर ही रही थी कि विनी आ गई, उसकी आवाज़ सुन कर मैं बाथरूम में भाग गया, मुझको कमरे में न देख कर वो वापस चली गई.

नैना ने बाथरूम का दरवाज़ा खटखटाया और मैं वैसे ही बाहर निकल आया, बाहर आते ही मैंने नैना को पकड़ लिया और उसकी धोती को पीछे से ऊंचा कर दिया और उसको पलंग के ऊपर हाथ रख कर खड़ा कर और फिर मैंने ज़रा सी थूक लंड पर लगाई और हिनहिनाते लंड को नैना की चूत में घुसेड़ दिया.

पहले धीरे धीरे शुरू कर के तेज़ी से धक्के मारे तो नैना जल्दी ही झड़ गई और फिर मैंने लम्बे लम्बे धक्के लगाये यानि पूरा निकाल कर फिर पूरा अंदर डाल कर धक्के मारना शुरू किया.और तकरीबन 10 मिन्ट की चुदाई में ही नैना फिर कांपती हुई झड़ गई.अब नैना बोली- बस करो छोटे मालिक, बहुत हो गया.

मैंने अपना लंड निकाल लिया और नैना ने अपने पेटीकोट से मेरा लंड साफ़ किया और अपनी धोती नीचे करके बाहर जाने के लिए तैयार हुई फिर वो रुक कर मुझको एक ज़ोर से प्यार की जफ़्फ़ी मारी और लबों पर गीली चुम्मी की और बोली- एक बात कहूँ छोटे मालिक?मैं बोला- हाँ हाँ, बोलो?नैना बोली- छोटे मालिक, आपकी जो भी बीवी होगी, वो बहुत ही खुशकिस्मत होगी.मैं बोला- क्यों क्यों?नैना हँसते हुए बोली- आप उसकी इतनी चुदाई करोगे, वो आपकी ग़ुलाम बन कर रहेगी हमेशा.मैं भी हँसते हुए बोला- नैना, तुम ही चुनना, जो भी लड़की तुमको पसंद होगी, मैं उससे ही शादी करूंगा. ठीक है न?नैना बोली- ठीक है छोटे मालिक, मैं ही चुन लूंगी आपके लिए लड़की.यह कह कर वो चली गई.

रात को खाना खाने के बाद दोनों बहनें मेरे कमरे में एकत्रित हुईं, नैना भी आ गई. हम सबने कोकाकोला पिया और फिर बातें शुरू हुईं.नैना बोली- देखो गीति और विनी, तुम दोनों की योनि में काफी इन्फेक्शन थी जिस कारण से छोटे मालिक ने आपके साथ सेक्स करने से इंकार कर दिया था और मैं आपको लेडी डॉक्टर से इलाज के लिए ले गई थी. अब तुम दोनों ठीक हो और काम क्रीड़ा के लिए तैयार हो. इस बारे में छोटे मालिक आपसे कुछ पूछना चाहते हैं. ठीक है?दोनों ने हाँ में सर हिला दिया.

मैं बोला- देखो, तुम दोनों मेरे पापा के खास मित्र की लड़कियाँ हो और वो तुम को मेरे को सौंप कर गए हैं ताकि तुम कॉलेज की पढाई पूरी कर सको. अब यह मेरे लिए बहुत गलत होगा कि मैं उनके विश्वास को तोडूँ और तुम से सम्बन्ध बनाऊँ.दोनों लड़कियाँ चुप रहीं.

फिर कुछ सोचने के बाद गीति बोली- सतीश, तुम ठीक कह रहे हो लेकिन हम भी तो काफी आस लगाये बैठी थी इतने दिन कि ठीक होने पर हम तुमसे ज़रूर मिल लेंगे. तुम ही बताओ कि हम क्या करें जिससे तुमको यह फीलिंग न हो कि तुम पापा के दोस्त की लड़कियों के साथ कुछ गलत कर रहो हो?

मैंने नैना की तरफ देखा, वो समझ गई और बोली- गीति और विनी, तुमको सतीश की भावना का आदर करना चाहये लेकिन आप दोनों की बहुत ही इच्छा है तो तुम यह कागज पर लिख कर दे दो कि तुम जो यह सब करने जा रही हो वो तुम्हारी अपनी मर्ज़ी से है और इसमें सतीश का कोई दोष या दबाव नहीं है.

दोनों झट मान गई और नैना ने जो कागज़ तैयार कर रखा था उस पर दोनों ने दस्तखत कर दिए.अब नैना बोली- अच्छा यह बताओ तुम ‘सेक्स कैसे करते हैं’ देखना चाहोगी या फिर सीधे खुद ही करने के लिए तैयार हो?दोनों बोली- देखना क्या है, जो सुन रखा है सहेलियों से वही ही तो होगा ना?

नैना हंस पड़ी- बड़ी जल्दी है चुदवाने की तुम दोनों को?दोनों खी खी करके हंसने लगी.नैना बोली- अच्छा तो उतारो अपनी साड़ियाँ और ब्लाउज एक एक कर के!

गीति बड़े नाज़ो अंदाज़ से कपड़े उतार रही थी और विनी जल्दी जल्दी सब कपड़े उतार कर मैदान में आ गई. उसके मम्मे छोटे और सख्त थे और उसके चूतड़ गोल लेकिन बहुत छोटे थे.उधर गीति भी कपड़े उतार कर तैयार होकर आ गई. वो भी पूरी कॉपी थी छोटी बहन की, दोनों काफी पतली थी लेकिन फिर भी काफी सेक्सी लग रही थी.दोनों की चूत पर घने काले बाल छाए हुए थे.

विनी जल्दी से मेरे पास आई और मेरे होटों पर चूमने लगी, गीति शांत खड़ी थी.तब तक मैं और नैना भी कपड़ेउतार चुके थे. नैना के सामने दोनों लड़कियाँ बहुत किशोर युवतियाँ लग़ रही थी.

कहानी जारी रहेगी.
 
गीति और विनी की चुदाई

तब तक मैं और नैना भी कपड़े उतार चुके थे. नैना के सामने दोनों लड़कियाँ बहुत ही कमसिन लग़ रही थी.नैना ने पहले गीति के मम्मे छुए और फिर वो विनी के पास गई, दोनों को अपनी बाँहों में ले कर वो उनको गोल गोल घुमाने लगी और साथ ही कभी उनके मम्मे या फिर उनके चूतड़ को दबाने लगी.

ऐसा करते हुए वो उन दोनों को लेकर मेरे पास आ गई और गीति को मेरे को सौंपते हुए बोली- यह देसी माल तैयार है.मैंने झट से गीति को अपनी बाँहों में भर लिया और फिर उसके होटों पर एक बहुत ही गर्म चुम्मी दी, फिर मैंने उसके मम्मों को चूसना शुरू किया और गीति के हाथ मेरे लौड़े को लेकर खेलने लगे.

मैंने उसकी चूत में ऊँगली डाली तो वो एकदम गीली थी और उसकी भग भी एकदम उभरी हुई और सख्त हो गई थी.मैं बैठ गया और अपना मुंह खड़ी हुई गीति की बालों से भरी चूत में डाल दिया और उसकी मोटे भग को चूसने लगा.गीति एकदम तड़फड़ाने लगी.

उधर नैना विनी के साथ लगी हुई थी और उसके मम्मों को चूस रही थी और एक ऊँगली से उसकी भग को रगड़ रही थी.उन दोनों को बिजी देख कर मैंने हल्की फुल्की गीति को चूतड़ों से उठाया और अपने लौड़े के बराबर लाकर चूत के मुंह पर टिका दिया. थोड़ी देर में उसकी चूत को बाहर से लंड से रगड़ रहा था और फिर धीरे धीरे मैंने अपना लंड उसकी चूत में डालना शुरू किया.

जैसे ही लंड पूरा उसके अंदर चला गया, वो मुझ से एकदम चिपक गई, मैं उसको उसी दिशा में लेकर पलंग के पास घूम आया और फिर उसको बेड पर लिटा दिया और खुद उसकी टांगों में बैठ गया.

पहले हल्के धक्के और फिर तेज़ धक्के मार कर मैं उसकी कुंवारी चूत का आनन्द लेने लगा.उसकी चूत गाजर मूली को डालने से थोड़ी खुली हुई थी लेकिन लौड़े को पहली बार अपने अंदर ले रही थी तो उसको लंड की गर्मी को पहली बार महसूस करने का मौका मिल रहा था..

उसकी आँखें बंद थी और वो मस्त होकर अपने चूतड़ उठा उठा कर चुदवा रही थी. मैं भी लौड़ा उसकी चूत के पूरे आखिरी छोर तक डाल रहा था.5 मिन्ट में वो बड़ी तीव्रता से स्खलित हो गई, उसके शरीर की कम्कम्पाहट काफी देर तक चलती रही.

मैं बिस्तर पर लेट गया और नैना को इशारा किया और वो विनी को उठा कर मेरे पास ले आई और मेरे साथ लिटा दिया.विनी ने लेटते ही मुझ पर चढ़ाई कर दी, वो मेरे ऊपर आकर बैठ गई और अपने हाथ से मेरे खड़े लंड को अपनी चूत के द्वार पर रख दिया और झट से उसके ऊपर बैठ गई, बड़ी जल्दी ही लंड पूरा उसके अंदर चला गया.

नैना ने गीति के मुंह और चूत को तौलिये से साफ़ किया और वो उसके साथ ही लेट गई और अपनी टांगें उसके पेट पर रख दी और उसकी चूत को ऊँगली से रगड़ने लगी.

इधर विनी आँखें बंद किये मेरे ऊपर नीचे हो रही थी. जब उसका मेरे लौड़े पर नाचना बहुत तेज़ हो गया तो मैं समझ गया कि यह कुंवारी चूत भी झड़ने वाली है.मैंने उसको पलट दिया और उसको अपने नीचे ले कर ज़ोरदार धक्के मारने लगा.और जैसे ही विनी छूटी, वो बहुत ज़ोर से चिल्लाई और उसकी चूत से एक ज़ोरदार पानी का फव्वारा छूटा जिसका रस सारा मेरे पेट पर गिरा.

दोनों बहनें बेजान सी पड़ी हुई थी और मेरा घोड़ा तो अभी भी हिनहिना रहा था.मैंने देखा कि नैना बेचारी ऊँगली चूत में मार रही थी, मैंने उसको अपने पास लिटा लिया और उसकी चौड़ी टांगों के बीच चूत में अपना मोटा और लम्बा लंड डाल दिया, फिर मैंने उसको साइड में लिटा कर उसकी पीछे से लंड डाल दिया.

साइड चुदाई में मज़ा यह है कि कोई किसी के ऊपर या नीचे नहीं होता चमचा बना कर चोदना कहलाता है और किसी को भी जल्दी करने की ज़रूरत नहीं होती.मैंने नैना की गांड अपनी तरफ कर रखी थी और मेरी दूसरी तरफ विनी लेटी थी और उसके साथ गीति थी. विनी ने अपनी मम्मे मुझ से पीछे से चिपका रखे थे और मैं नैना की मोटी और टाइट चूत में लंड डाल कर धीरे धीरे धक्के मार रहा था.धक्के मारते हुए मेरी आँख भी लग रही थी तो कुछ मिन्ट बाद नैना अपनी गांड का झटका मार कर मुझको जगा देती थी और मैं फिर धक्के मारना शुरू हो जाता था.

यह सिलसिला कोई मेरे ख्याल में आधा घंटा चला होगा, फिर मैंने मेहसूस किया कि नैना को भी शरीर में कंपकंपी हुई और फिर उसने हिलना बंद कर दिया.मैं समझ गया कि नैना की चूत को भी किनारा मिल गया और वो गहरी नींद में सो गई.मैं नैना की चूत में ही खड़े लंड को डाले सो गया.
 
करीब आधी रात को मुझ को ऐसा लगा कि मेरे ऊपर कोई बैठा हुआ है.मैंने आँखें खोली लेकिन मुझ को कोई दिखा नहीं और मैं फिर सो गया करवट बदल कर.

एक बार फिर मुझ को ऐसा महसूस हुआ कि कोई मेरे लंड के ऊपर बैठ हुआ है और ऊपर नीचे हो रहा है. मैंने उठ कर देखने की कोशिश की, मुझको कोई भी नहीं दिखा और फिर मैं जल्दी ही सो गया.

अब मैंने करवट बदल दी तो मेरा हाथ सीधा छोटे गोल मम्मों पर पड़ा, मैंने उनको आहिस्ता से दबाना शुरू किया और फिर सोये सोये ही मेरा हाथ न जाने कैसे किसी बालों भरी चूत पर जा पड़ा और मैं अनजाने में चूत के बालों को उँगलियों में लपेट रहा हूँ ऐसा मुझको लगा.यह शायद सब सपना है, ऐसा मैंने सोचा और फिर करवट ली तो हाथ मोटे और गोल, मम्मों पर पड़ा.अब मेरी नींद खुल गई.मैं उठ कर बैठ गया और नाईट बल्ब की रोशनी में देखा की मेरे बाएं तरफ नैना लेटी है और दायें तरफ गीति लेटी है, नैना के गोल मम्मे मैंने हाथ में पकड़े हुए हैं और गीति की बालों भरी चूत भी खुली पड़ी है और मेरा दूसरा हाथ उसकी चूत में है.मैं मंद मंद हंसा और फिर लेट गया और जल्दी ही मेरी फिर से नींद लग गई.

सुबह जब मैं उठा तो सामने नैना खड़ी थी हाथों में चाय का कप लेकर!

उसने इशारा किया, मेरे बेड में दोनों लड़कियों की तरफ जो अल्फ नंगी बेखबर सोई थी. मेरे वाली साइड में विनी थी और उसकी दूसरी तरफ गीति.मैंने आँखें मल कर फिर देखा तो यही देखा. मैं उठा और जल्दी से कपड़े पहन लिए और टेबल और कुर्सी पर बैठ गया.

चाय पीते हुए मैंने नैना से पूछा- कल रात तुम्हारा कितनी बार छूटा था.वो बोली- यही कोई 3-4 बार क्यों?मैं बोला- मुझ को ऐसा लगा कि रात भर मुझ को कोई चोदता रहा है.

नैना बोली- वाह छोटे मालिक, आपको पता ही नहीं चलता कि रात को कौन कौन आप के लंड का इस्तेमाल करता है.मैं हैरान होकर बोला- किस किस ने किया मेरे लंड का इस्तेमाल सोने के बाद?नैना बोली- दो बार तो मैं चढ़ी हूँ आपके ऊपर और हर बार मेरा छूटा है.मैं हैरानी से बोला- और कौन चढ़ा था?नैना बोली- दोनों बहनों ने दो दो बार आप को चोदा है.

मैं एकदम सकते में आ गया, उफ़ यह कैसी नींद थी जो मुझको पता ही नहीं चला कि कौन मुझको चोद गया.मैं नैना से बोला- कल से मैं लंगोट पहन कर सोया करूंगा.

मैंने यह बात कुछ ज़ोर से कह दी और दोनों बहनें भी उठ कर बैठ गई और ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी.उसी वक़्त पारो भी बहनों की चाय लेकर आ गई थी और जब उसने बात सुनी तो वो भी बहुत हंसी.मैं बुरी तरह से झेंप गया! मैं क्या करता, सारा कसूर तो साले मेरे लंड का था जो मानता ही नहीं.

मैंने हँसते हुए पारो को कहा- तुम क्यों बच गई, तुम भी आ जाती न?पारो हँसते हुए बोली- मैं कैसे आती? मैं तो बाहर अपनी कोठरी में थी ना!

और फिर हम जल्दी जल्दी कॉलेज जाने की तैयारी में लग गए.

कहानी जारी रहेगी.
 
प्रेमा आंटी की चूत चुदाई

कालेज से वापस आया तो बैठक में नैना के साथ एक औरत बैठी थी, मुझको देखकर नैना ने मेरा परिचय करवाया कि मैं सतीश ज़मींदार साहिब का बेटा और आजकल यहाँ कॉलेज में पढ़ रहा हूँ और आप हैं प्रेमा भाभी, हमारे पड़ोस वाले मोहल्ले में रहती हैं और मुझ को रोज़ सब्ज़ी मार्किट में मिलती हैं.

मैंने भी नमस्ते की उनको और वहाँ शिष्टाचार के नाते थोड़ी देर के लिए बैठ गया.मैंने उस महिला को ध्यान से देखा, वो काफी खूबसूरत लगी, रंग एकदम गोरा और शरीर भी गठा हुआ, काफी बड़े मम्मे और काफी मोटे चूतड़ भी, उम्र होगी कोई 24-25 साल की!

मैं उठा और जाते जाते नैना को बोल गया- आंटी को ठंडा गर्म पिलाओ न!नैना ने हाँ में सर हिला दिया.

मैं अपने कमरे में आ गया और बूट उतार कर बिस्तर पर लेट गया. आज कॉलेज में वो सारी लड़कियाँ मिली जो नैनीताल में मेरे साथ थी. उनके साथ कुछ और लड़कियों के साथ भी परिचय हुआ जो मुझको बड़ी ही गर्म नज़रों से देख रहीं थी, उनकी आँखों में मैंने साफ़ तौर से पूरा निमंत्रण पढ़ा, उनमें से कई ने हिंट दिया कि कभी उनको भी मौका दूँ अपने जौहर दिखाने का!

मैंने किसी को कोई लिफ्ट नहीं दी लेकिन नैनीताल वाले ग्रुप को कैंटीन में ले जा कर हम सबने मिल कर खूब खाया और पिया.इस मिनी पार्टी के पैसे मैंने ही दिए और चारों लड़कियों को खुश कर दिया.

नैनीताल ट्रिप के बाद मैं कॉलेज की सब लड़कियों में बहुत ही पॉपुलर हो गया था जिससे कई सीनियर लड़के जलने लगे.हालात को काबू में रखने के लिए मैंने शानू को अकेले में बुला कर समझाया कि वो सब सहेलियों को बता दे कोई भी डींग या शेखी न बघारने लगे जो इन लड़कों के कान में पड़ जाने से हम सब को बहुत खतरा हो सकता है, ख़ास तौर से लड़कियों को.

थोड़ी देर बाद नैना आई और बोली- कैसा रहा कॉलेज आज?मैंने कहा- बहुत अच्छा था! और कई और लड़कियों ने आँखों आँखों में अपने को समपर्ण करने के पेशकश की है. हम दोनों खूब हँसे.फिर नैना बोली- देखा प्रेमा आंटी को?मैंने कहा- हाँ देखा, अच्छी खूबसूरत औरत है यार नैना.नैना बोली- रोज़ मार्किट में मिलती थी तो आज मैंने उसको घर बुला लिया, गलत तो नहीं किया ना?मैं बोला- नहीं नैना बेगम, तुम तो घर की मालकिन हो. तुम्हारे सर तो घर चलता है. जब चाहो, जिसको चाहो तुम बुला सकती हो.

नैना बोली- यह रोज़ मुझ को अपनी मुसीबत के बारे में बताती रहती थी सो मैंने सोचा आज घर बुला कर इसकी सारी बात तो जानें. तो मैंने आज उससे कहा कि मुझको सब सच सच बता दो बिना किसी शर्म के.और मैं इसको घर ले आई.मैं बोला- अच्छा किया नैना तुमने जो कुछ मदद हो सकती है, वो करनी चाहिए न!

नैना बोली- यह बेचारी 6 साल से शादीशुदा है लेकिन इसके घर में बच्चा नहीं हो रहा, इसका पति थोड़ा मोटा है और चुदाई का शौक़ीन नहीं है, बस कभी कभी महीने में एक बार चोद देता है इसको, जिससे इसकी तसल्ली तो बिल्कुल नहीं होती और बच्चा भी नहीं हुआ अब तक. और ऊपर से इसकी सास रोज़ धमकी देती है कि अगर बच्चा नहीं हुआ एक साल के अंदर तो वो अपने बेटे की दूसरी शादी कर देगी.

मैं बोला – यह तो सरासर जुल्म है बेचारी पर!नैना बोली – वही तो, आज मैंने उसका सारा चेकअप भी किया और यह पाया कि वो पूरी तरह से ठीक है और जो भी खराबी है वो उसके पति में है.मैं बोला- अच्छा फिर क्या सोचा है उसके लिए?नैना बोली- आपकी मदद की ज़रूरत है, अगर आप उसको हेल्प करो तो वह सो फीसदी माँ बन सकती है.

मैं घबरा गया और बोला- मैं क्या मदद कर सकता हूँ नैना डार्लिंग?नैना बोली- वही मदद जो आपने फुलवा, छाया और बिंदु को दी.मैं हैरान होकर बोला- तुम्हारा मतलब है प्रेमा आंटी की चुदाई?नैना बोली- हाँ! अभी मैंने उससे खुल कर इस विषय में बात नहीं की लेकिन पहले यह ज़रूरी है कि आपकी मर्ज़ी जान ली जाए, तभी आगे बात की जाए.

मैं चुपचाप सोचने लगा कि काम तो भलाई का है लेकिन इस में खतरा भी बहुत है और फिर चुदाई का समय और स्थान भी तो देखना पड़ेगा ना!मैं बोला- पहले तो प्रेमा आंटी इस काम के लिए तैयार नहीं होगी और अगर हो गई तो भी जगह और समय का भी तो बंधन है ना?नैना बोली- छोटे मालिक, आप सिर्फ हाँ कर दो, आगे मैं देख लूंगी, सारे प्रबंध मैं कर लूंगी.मैं बोला- चलो मैं हाँ भी कर देता हूँ तो भी कब और कहाँ का फैसला मुश्किल है, वो कैसे करोगी मेरी जान?

नैना बोली- प्रेमा की सास सवेरे 10 से 4 बजे रोज़ अपनी बेटी के घर जाती है यहीं लखनऊ में! तभी प्रेमा सब्ज़ी वगैरह लेने मार्किट आती है और वो यहाँ दो घंटे सहेलियों के साथ गपशप करती है और फिर घर चली जाती है. वो हमारे पास कम से कम दो घंटे रह सकती है और यह समय चुदाई के काम के लिए काफी हैं.
 
मैं बोला- जगह कहाँ से आयेगी सरकार मेरी?नैना बोली- अपनी कोठी और कहाँ?मैं बोला- पारो और बहनों का क्या होगा?नैना बोली- पारो तो अपनी है, उसकी फ़िक्र नहीं, और रह गई बहनें तो वो कॉलेज होंगी न उस समय.मैं बोला- और सरकारी सांड कहाँ से आएगा? उसका भी तो कॉलेज होता है ना?नैना हँसते हुए बोली- रहने दो छोटे मालिक, सरकारी सांड के आगे गोरी चिट्टी चूत लटका दो वो महीना भर कॉलेज नहीं जाएगा.

मैं बड़े ज़ोर से हंस दिया- चलो ठीक है, जल्दी से बात पक्की करो क्योंकि मेरा लौड़ा तो अभी सोच सोच कर हिलोरें मार रहा है.नैना ने झट से मेरा लौड़ा पैंट से निकाला और उसको चूमते हुए कहा- यह सरकारी सांड बड़ा ही सीधा है, जब चाहो जहाँ चाहो किसी भी गाय के लिए तैयार रहता है. मैं अभी आई प्रेमा से फ़ोन पर बात करके!

नैना गई और मैं प्रेमा आंटी के ख्वाब देखने लगा, आंटी के संगमरमर जैसे मम्मे और मखमली जांघें उफ़्फ़… क्या चीज़ है यार प्रेमा आंटी.

थोड़ी देर में नैना खुश खुश आई और बोली- तय है कल का प्रोग्राम, आप कॉलेज नहीं जाओगे कल. और मैंने उससे पूछ भी लिया है कि मैं चुदाई के दौरान वहीं रहूंगी क्योंकि छोटे मालिक को मेरी ज़रूरत होती है. उसको कोई ऐतराज़ नहीं.मैं बोला- तो फिर आज रात की चुदाई का प्रोग्राम भी कैंसिल कर देना क्योंकि मैं रात को भरपूर नींद सोना चाहता हूँ.

नैना बोली- वो तो ठीक है लेकिन सांड के एक बार चढ़ जाने से तो गाय हरी हो या न हो? उसका क्या करें?मैं बोला- तुमको उसकी माहवारी का हिसाब लेना था न!नैना बोली- छोटे मालिक आप महान हो. सारा ज्ञान अभी से अर्जित कर लिया है आपने. ठहरो, मैं यह भी पूछ लेती हूँ उससे फ़ोन पर!

थोड़ी देर बाद नैना ने कहा- कल ही उसका 10वाँ दिन होगा माहवारी के बाद… तो उत्तम समय है. और उसके दो दिन बाद भी अच्छा मुहूर्त है.

अगले दिन ठीक 10 बजे प्रेमा आंटी आ गई और नैना ने उसको बैठक में बिठाया. ठंडा पीने के बाद वो हम दोनों को मेरे बेडरूम में ले आई.प्रेमा आंटी को बैठाया और फिर मुझसे बोली- क्यों छोटे मालिक, तैयार हैं आप?मैं बोला- प्रेमा आंटी से पूछो?प्रेमा बोली- मुझको आंटी न कहो सतीश, तुम मुझको प्रेमा बुला सकते हो.मैं बोला- ठीक है प्रेमा जी, आपके मन में मेरे बारे में कोई संशय तो नहीं?प्रेमा बोली- नहीं सतीश, तुम बड़े हैंडसम हो और अच्छा कद बुत है तुम्हारा. दिखने में ज़रा छोटे ज़रूर लगते हूँ लेकिन मुझको उम्मीद है जो नैना कह रही है तुम उसमें पूरा उतरोगे.

नैना समझ रही थी कि प्रेमा झिझक रही है, उसने उसकी झिझक दूर करने के लिए मुझको होटों पर एक चुम्मी कर दी, फिर उसने मेरी शर्ट उतार दी और मेरी पैंट के बटन खोलने लगी और फिर उसने पैंट को भी उतार कर एक साइड में रख दिया और मेरे इलास्टिक वाले अंडरवियर को भी उतार दिया.मेरे खड़े लंड को प्रेमा हैरानी से देख रही थी..

फिर नैना ने मेरे लंड के साथ खेलना शुरू कर दिया और मैं भी उसके मम्मों को ब्लाउज के बाहर से चूमने लगा.नैना मेरे लंड के साथ खेल रही थी और वो मुझको धीरे से प्रेमा के पास ले गई और प्रेमा का हाथ उसने मेरे लौड़े पर रख दिया.

प्रेमा पहले तो शरमाई और फिर उसने मेरे लंड को हाथ में पकड़ लिया और उसकी सख्ती से काफी खुश लगी.तभी नैना ने प्रेमा का ब्लाउज उतारना शुरू कर दिया और उसकी ब्रा के हुक खोल दिए.प्रेम के उन्नत उरोज उछाल कर मेरे हाथ में आ गए और मैं उन सफ़ेद सफ़ेद संगेमरमर से बने मम्मों को चूसने लगा.

नैना प्रेमा की साड़ी उतारने में लगी हुई थी और फिर उसने उसका पेटीकोट भी उतार दिया. उसकी चूत पर बड़े घने काले बाल छाए हुए थे.मेरा एक हाथ अब प्रेमा के चूतड़ों को हल्के हल्के मसल रहा था और उन रेशमी गोल गोल गुब्बारों को बड़े ही प्रेम से सहला रहा था.प्रेमा भी अपनी शर्म के ऊपर उठ चुकी थी और मेरे सख्त लंड के साथ खेल रही थी.

मैंने भी अब उसके रस भरे होटों पर अपने होटों को रख दिया और उसके होटों को चूसने लगा और अपनी जीभ को भी उसके मुंह में डाल कर गोल गोल घुमाने लगा.

नैना ने भी अपनी साड़ी उतार दी और पूरी नंगी होकर हमको मदद कर रही थी.मैंने अब प्रेमा की चूत में हाथ डाला तो वो बेहद गीली हो चुकी थी.

नैना प्रेमा को धीरे से बेड पर ले गई और मुझको भी इशारा किया और मैं भी झट वहाँ पहुँच गया और उसकी संगमरमर जैसी जांघों के बीच में बैठ गया और अपने लौड़े को उसकी चूत के मुंह पर रख दिया.फिर मैंने झुक कर उसके लबों पर एक गरम चुम्मी की और फिर लंड को हल्का धक्का दिया और लंड काफी सारा अंदर चला गया.एक और धक्का और लंड पूरा का पूरा अंदर था.
 
नैना प्रेमा के मम्मों के साथ पूरा इन्साफ कर रही थी और उनको खूब चूस रही थी, प्रेमा की आँखें बंद थी और वो चुदाई का पूरा आनन्द ले रही थी.हल्के धक्कों के बाद मैंने अब तेज़ी दिखानी शुरू कर दी और थोड़े ही तेज़ धक्कों के बाद प्रेमा छूटने लगी और वो ज़ोर ज़ोर से हाय हाय करने लगी और उसने मुझको कस कर अपनी बाहों में बाँध लिया.ऐसा लगा कि वो बहुत दिनों से काम क्रीड़ा की इच्छुक थी और चूत की प्यास को मिटाने की पूरी कोशिश करने लगी.

जब वो कुछ संयत हुई तो मैंने अपने लंड के हमले जारी रखे, कभी तेज़ और कभी आहिस्ता, कभी लंड को पूरा निकाल कर फिर पूरा डालना यही मेरी ट्रम्प चाल होती थी.कुछ मिनटों में प्रेमा फिर झड़ने की कगार पर पहुँच चुकी थी और इस बार उसका बहुत ही ज़ोर का छूटा और चूत में से बहुत सा रस भी बहा.

नैना ने इशारा किया और मैं उसकी चूत के ऊपर से उतर गया, मेरा लंड से प्रेमा का रस टपक रहा था.

मैं प्रेमा के साथ लेट गया और उसके सिल्की मम्मों के साथ खेलने लगा, उसका भी एक हाथ मेरे खड़े लौड़े के साथ खेल रहा था.मेरे दूसरी तरफ तो नैना लेटी थी और वो मेरे अंडकोष के साथ खेल रही थी.तभी प्रेमा उठी और मेरे ऊपर आकर बैठ गई और मेरे लंड को अपनी चूत में खुद ही डाल दिया और ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे होने लगी.मैं उसके मम्मों के चूचुकों को अपने मुंह में डाल कर चूसने लगा.थोड़ी देर में ही प्रेमा फिर छूट गई.

अब नैना ने उसको घोड़ी बना दिया और मुझको इशारे से उस गोरी घोड़ी को चोदने के लिए उकसाने लगी.

मैं अब नैना के प्लान के मुताबिक़ अपना छुटाने वाली चुदाई की स्टेज में था और मैंने अब अपनी चुदाई का स्टाइल और स्पीड सिर्फ अपना छुटाने के लिए शुरू की, उस घोड़ी बनी हुई संगमरमर की मूर्त को ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.अब मुझको प्रेमा के छुटाने की फ़िक्र नहीं थी बस अपना वीर्य उस की चूत की आखिरी गहराई तक पहुँचाने की कोशिश थी.

कोई 10 मिन्ट तेज़ धक्के मारने के बाद मुझको लगा कि मेरा वीर्य के छूटने के कगार पर पहुँच रहा है तो मैंने प्रेमा के मोटे चूतड़ों को अपने हाथों में उठा लिया और फिर ज़ोर ज़ोर से 4-5 धक्के मारे और अपने फव्वारे को छोड़ दिया.ऐसा करते वक्त मेरा लौड़ा चूत की आखिरी गहराई में मैंने गाड़ दिया और प्रेमा की फुदकती गांड को कस कर अपने हाथ में पकड़ कर रखा जब तक मेरा पूरा वीर्य नहीं छूट गया.

नैना के इशारे से मैंने प्रेमा की गांड को ऊपर ही उठाये रखा जब तक नैना ने इशारा नहीं किया और मेरा लंड भी उसकी चूत में पड़ा रहने दिया.जब नैना ने इशारा किया तब मैंने प्रेमा को नीचे लिटा दिया, तब वो चूतड़ ऊपर उठा कर ही लेटी रही.

मैं उठा और अपने खड़े लंड को नैना के पीछे से चूत में डाल दिया और धीरे धीरे धक्के मारने लगा, वो प्रेमा की सेवा भी करती रही, चुदती भी रही, यही कमाल है नैना का!क्योंकि उसने गर्म चुदाई देखी थी, इसलिए उसको छुटाना भी ज़रूरी था और इसको मैं अपनी ड्यूटी समझता था.थोड़ी देर में जब वो छूट गई तो मैं उठा और प्रेमा की उसके लबों पर चूमा और फिर मैं कॉलेज जाने के लिए तैयार होने लगा.

कहानी जारी रहेगी.
 
प्रेमा आंटी का चोदन जारी

मैं उठा और अपने खड़े लंड को नैना के पीछे से चूत में डाल दिया और धीरे धीरे धक्के मारने लगा, वो प्रेमा की सेवा भी करती रही, चुदती भी रही, यही कमाल है नैना का!क्योंकि उसने गर्म चुदाई देखी थी, इसलिए उसको छुटाना भी ज़रूरी था और इसको मैं अपनी ड्यूटी समझता था.थोड़ी देर में जब वो छूट गई तो मैं उठा और प्रेमा की उसके लबों पर चूमा और फिर मैं कॉलेज जाने के लिए तैयार होने लगा.

उस दिन कॉलेज में दिल नहीं लगा किसी तरह क्लासें खत्म हुईं तो मैं घर के लिए चल ही रहा था कि शानू मिल गई और बोली- सतीश यार, फिर कोई प्रोग्राम रख लो न प्लीज, सिर्फ हम दोनों ही प्लीज.मैं हँसते हुए बोला- शानू डार्लिंग, प्रोग्राम तो रख लेते हैं पर आजकल मेरे मम्मी पापा मेरे पास आये हुए हैं, वो 3-4 दिन में चले जाएंगे तो रख लेंगे प्रोग्राम. क्यों ठीक है न?शानू बोली- ठीक है, जब कहोगे मैं तैयार हूँ! ओके, आई लव यू डार्लिंग.मैं बोला- थैंक्स डार्लिंग, आई लव यू टू!फिर हम दोनों ने हैंडशेक किया और मैं घर की ओर चल दिया.

घर पहुँचा तो नैना ने मेरा हंस कर स्वागत किया, वो मेरे लिए खाना मेरे कमरे में ही ले आई.फिर उसने अपने आप ही बताना शुरू किया कि प्रेमा बड़ी खुश गई है और उसने माना कि उसकी ऐसी चुदाई आज से पहले नहीं हुई कभी भी. और वो आपकी पूरी तरह से आशिक हो गई है. अब उसको मैंने परसों बुलाया है ताकि तब तक माहवारी के बाद के 13 दिन हो जाएंगे और उसको गर्भवती करने का चांस ज़्यादा बढ़ जाएगा.

मैं बोला- नैना डार्लिंग, अब तुम मेरी मालिक हो, जैसे चाहो करो!नैना बोली- जब से आप नैनीताल से आए हो न, डार्लिंग डार्लिंग बहुत करने लगे हो, क्या बात है?मैं बोला- तुम हो ही इतनी प्यारी मेरी गुरु और मेरी रानी और मेरी डार्लिंग.वो हँसते हुए बोली- क्या बात है, आज बड़ा प्यार आ रहा मुझ पर?

मैं बोला- नैना तुमने काम ही ऐसा किया है आज जब तुमने प्रेमा आंटी को मेरी झोली में डाल दिया तो मैं मान गया कि गुरु हो तो नैना जैसी. वैसे तुम को क्या लगता है प्रेमा चुदक्कड़ लंड की प्यासी है?

नैना हँसते हुए बोली- छोटे मालिक, वो तो अब तुम्हारे लंड की प्यासी है, जब इशारा करोगे वो अपनी चूत खोल कर हाज़िर हो जायेगी.मैं खुश होकर बोला- तब तो ठीक है, कल मैं उसके अंदर छुटाऊंगा ही नहीं तो वो फिर बार बार आएगी नैना के पास! क्यों?नैना बोली- नहीं छोटे मालिक, ऐसा नहीं करना, वरना छोटी मछली की खातिर बड़ी मछली भी नहीं हाथ आएगी.मैं बोला- वो कैसे?

नैना बोली- छोटे मालिक, एक बार प्रेमा प्रेग्नेंट हो जाती है न तो हमारे पास इन सेठानियों की लाइन लग जाएंगी क्योंकि सब सेठ पैसे के चक्कर में सेक्स को बिल्कुल भूल जाते हैं और उनकी सेठानियों को चुदाई के लिए तरसना पड़ता है और उनको बच्चा नहीं हो पाता है, तब यह लंड की प्यासी औरतें यह साधू संतों के चक्क्र में पड़ जाती है और वहाँ से बच्चा ले आती हैं.

मैं बोला- आज तो मैं अपनी पुरानी चुदाई शुरू कर सकता हूँ न?नैना बोली- मेरी मानो, जब तक प्रेमा की पूरी चुदाई नहीं हो जाती, तुम दूसरी चुदाई से दूर रहो.मैं बोला- ठीक है, जैसे गुरु जी कहेंगे, वही ही ठीक है.

नैना बोली- आज रात मैं आपके लिए ख़ास दूध बना रही हूँ वो आपको आज और कल पीना पड़ेगा.मैं बोला- आपका दूध या फिर ग्लासी वाला दूध?नैना हँसते हुए बोली- छोटे मालिक, आप भी ना बच्चों से कम नहीं. मेरा दूध तो आप कई सालों से पी रहे हो, ऊपर नीचे का दूध आप पी लेते हो.

मैं बोला- नैना डार्लिंग, अब तुम मुझको छोटे मालिक मत बुलाया करो, मेरे नाम से बुलाओ ना?नैना बोली- अगर मैं नाम से बुलाऊँगी तो बाकी नौकर भी वैसा करेंगे जो ठीक नहीं ना!

नैना के सबक को पूरी तरह से माना और जैसा वो कहती रही वैसा ही करता रहा मैं!दो रात मैं बिल्कुल ब्रह्मचारी बन कर रहा और अगले दिन करीब 10 बजे प्रेमा आ गई.मैं तैयार था तो ज्यादा टाइम खोये बगैर मैंने प्रेमा को गले लगा लिया और एक गर्म चुम्मी उसके रसीले होटों पर दे दी और फिर अपने हाथ उसके मोटे चूतड़ों पर रख कर धीरे धीरे से मसलने लगा. प्रेमा ने भी मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और उसको झुक कर चूमने लगी पैंट के बाहर से!

मैंने भी टाइम खोये बगैर अपने पैंट और कमीज़ उतार दी और प्रेमा के ब्लाउज को उतारने लगा, ब्रा के हुक्स भी खोल दिए और उसके संगमरमर जैसे मम्मों को हाथ में लेकर मैं अपने को बड़ा भाग्यशाली समझ रहा था.

जब प्रेमा बिल्कुल नग्न हो गई तो मैं थोड़ा पीछे हट कर उसकी सुन्दरता का अवलोकन करने लगा.
 
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