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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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फिर मैडम को बिस्तर पर लिटा दिया और सुधा को इशारा किया कि वो मैडम के मुम्मों को चूसे और मैंने मैडम की सफाचट चूत पर अपना ध्यान केंद्रित किया और नीचे झुक कर अपने मुंह को उनकी चूत के अंदर डाल दिया और जीभ से चूत के अंदर गोल गोल घुमाने लगा और फिर जीभ से उनकी भग को छेड़ने लगा.ऐसा करते ही मैडम की चूत अपने आप ऊपर उठ कर मेरे मुंह से चिपक गई और सुधा भी मैडम के मुम्मों को चूसने में पूरी मुस्तैदी से लगी रही और जब मैडम का एक बार मुंह से छूट गया तो वो मेरे सर के बालों को पकड़ कर ऊपर आने के लिए प्रेरित करने लगी.

मैंने मैडम की चूत के रस से भीगे अपने मुंह को मैडम के मुंह पर रख दिया और जीभ को मैडम की जीभ से भिड़ाने लगा.सुधा अब मेरे चूतड़ों के साथ खेलने लगी लेकिन मैंने अपना लंड मैडम की चूत के मुंह पर रख दिया और सुधा ने मेरे चूतड़ों को एक धक्का ज़ोर का मारा और लंड लाल पूरा का पूरा अंदर चला गया.

अब मैं बहुत ही धीरे धीरे धक्के मारने लगा और बीच बीच में मैडम के लबों को भी चूसता रहा और सुधा भी जो मेरा अंग उसको खाली लगता वो उसको चूमने और चाटने में लग जाती और इस मदद से मैडम को अपनी चरम सीमा की ओर हम दोनों मिल कर ले जा रहे थे.

जब देखा कि मैडम को काफी आनन्द आ रहा है तो मैंने उसकी टांगों को उठा कर अपने कंधों के ऊपर रख दिया और उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख दिए और अब धक्कों की स्पीड एक दम तेज़ कर दी और इस स्पीड को जारी रखते हुए मैं अपनी पूरी ताकत से मैडम को चोदने लगा.सुधा की तरफ देखा तो वो हैरान हुई यह सारा तमाशा देख रही थी और यह भी देख रही थी कि कैसे मैडम तड़फते हुए इधर उधर अपना सर फैंक रही थी.

मैंने महसूस किया कि मैडम का शरीर अकड़ने की स्टेज पर आ गया है, मैंने अपने धक्कों को स्लो और फ़ास्ट में तब्दील कर दिया और ऐसा करते ही मैडम का शरीर ज़ोर से कांपा और उन्होंने अपनी टांगों को मेरे दोनों और फैला कर मुझको उनमें जकड़ लिया और बहुत ही अजीब आवाज़ करते हुए वो झड़ गई.

मैंने अपना लंड जो मैडम की चूत के रस से पूरी तरह गीला हो चुका था, उसको मैडम की चूत से फट की आवाज़ करते हुए निकाला और सुधा को अपने हाथों में उठा कर बेड की दूसरी तरफ ले जाकर उसको अपने खड़े लौड़े पर बिठा दिया और मेरा गीला लंड एकदम आलखन से सुधा की टाइट चूत में चला गया.

सुधा की चूत बेहद गीली और कामातुर हो रही थी, वो मेरे लंड पर बैठते ही पूरा का पूरा लंड अंदर ले गई और मेरे को एक टाइट जफ्फी मार कर मेरे लबों पर अपने जलते हुए होटों को रख दिया.मैं नीचे से उसको धक्के मार रहा था और उसको इशारा किया कि वो ऊपर से शुरू हो जाए.जल्दी ही हम दोनों एक व्यवस्थित ढंग से एक दूसरे को धक्के मार रहे थे.

मैंने उसके छोटे लेकिन सॉलिड मुम्मों को चूसना शुरू किया और अपने धक्कों की स्पीड बहुत ही धीरे रखी ताकि सुधा को भी पूरा मज़ा आने लगे और वो मेरे गले में बाँहों डाले मेरी आँखों में आँखें डाल कर रोमांटिक ढंग से अपनी चूत चुदवा रही थी.क्यूंकि शायद उसको अभी तक कोई ढंग का साथी नहीं मिला था तो वो काफी सेक्स की प्यासी लगी, और मैं भी उसकी अन्तर्वासना को समझते हुए उसको वैसे ही चोदने लगा.

जब वो पूरी तरह से कामातुर हो गई तो उसकी अपनी स्पीड ही तेज़ होने लगी और मैं रुक गया और उसको अपनी मर्ज़ी करने दी.वो अब जल्दी जल्दी मेरे सामने से आगे पीछे होने लगी और उसकी बाहें मेरे गले में फैली थी और वो उनके सहारे वो मेरे लंड पर झूला झूल रही थी और मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर टिके थे जिनकी मदद से वो झूला झूल रही थी.

थोड़ी देर में उसका शरीर थोड़ा अकड़ा और वो एकदम से मुझको अपनी बाँहों में जकड़ कर छूट गई.मैडम अब तक आँखें बंद किये लेटी थी और जब सुधा का छूट गया तो उसकी चूत से बहुत ही पानी निकला और सुधा जल्दी से उठ कर एक छोटा तौलिया ले आई जिससे उसने अपनी चूत का पानी पौंछा जो काफी मात्रा में मेरी जांघों पर लगा था.

मैं भी मैडम की दाईं तरफ लेट गया और सुधा भी साफ़ सफाई करके आकर मेरे दूसरी तरफ लेट गई.वो दोनों तो ऐसी थक कर लेटी थी जैसे वो मीलों चल कर आई हों.
 
मैंने कोशिश की उषा मैडम को जगाने की, लेकिन ऐसा लगता था कि वो गहरी नींद सो गई थी, लेकिन सुधा अभी भी जाग रही थी और मेरे लौड़े से खेल रही थी.मैंने उससे पूछा- क्या और चुदना है तुमको?उसने भी इंकार में सर हिला दिया लेकिन मैंने कहा- सुधा, एक बार से क्या होगा तुम्हारा, चलो उठो मैं तुमको असली चुदाई का मज़ा देना चाहता हूँ एक गिफ्ट के तौर पर!

और मैंने उसको उठ कर पलंग के किनारे पकड़ कर खड़े होने के लिए कहा. जब उसने वो पोजीशन ले ली तो मैं भी उसके पीछे खड़ा हो गया और उसकी चूत में पीछे से अपने खड़े लंड को अंदर डाल दिया.शुरू में धीरे और हल्के धक्के मारने से जब वो चुदाई का ढंग समझ गई तो मैंने आहिस्ता से धक्कों की स्पीड बढ़ाने लगा और मेरे दोनों हाथ सुधा के मम्मों और उसके गोल छोटे चूतड़ों से खेल रहे थे और कभी कभी उसकी गांड में भी ऊँगली डाल कर उस को और उत्तेजित कर रहे थे.

सुधा अब चुदाई का भरपूर आनन्द ले रही थी और उसका सर बार बार उधर घूम रहा था और वो अपने चूतड़ों को स्वयं आगे पीछे करने लगी थी.मैं उसकी चोटी अपने हाथ में लेकर उसके सर को हल्के झटके मारने लगा और वो और भी आनन्द से अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी और फिर उसकी चूत में एक अजीब सा उबाल आया और वो हाय हाय करती हुई झड़ गई और उसने अपना सारा शरीर पहले जरा अकड़ा और फिर वो एकदम ढीली पड़ कर पलंग पर लुढ़क गई.

तब तक मैडम भी जाग गई थी, वो भी मेरे पीछे खड़े होकर मुझको जफ्फी डाल रही थी.मैंने उनको सीधा किया और उनके मुंह पर ताबड़तोड़ चुम्मियाँ दे डाली और फिर उनको लेकर मैं बेड पर आ गया और घोड़ी बनने के लिए कहा, उनके गोल और उभरे हुए चूतड़ों को सहलाते हुए उसकी उभरी चूत के पीछे बैठ कर मैंने अपने अभी भी गीले लंड को उषा मैडम की चूत में घुसेड़ दिया.

मैडम ‘उई…’ कह कर अपनी गांड को इधर उधर करने लगी और जब उनको यकीन हो गया कि मैंने चूत में लौड़े को डाला है तो वो रुक कर उसका आनन्द लेने लगी.घोड़ी की पोजीशन में मर्द का लंड पूरा चूत की आखिरी हिस्से तक जाता है और इस पोजीशन में वीर्य के छूटने से गर्भ की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है.मैडम की चूत पुनः गीली हो चुकी थी, मैं भी जल्दी जल्दी धक्के मारने लगा और पूरा अंदर बाहर करते हुए मैडम की भग को भी मसलने लगा.

मैडम भी हाय हाय करती रही और बार बार यही कह रही थी- मार डालो मुझको, फाड़ दो मेरी चूत को… साली हलखनज़ादी है.मैंने सुधा की तरफ देखा, वो भी हंस रही थी और हाथ से अपनी चूत में अपने दाने को मसल रही थी.मैंने अब बड़े तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिए ताकि मैडम जल्दी ही किनारे लग जाए और फिर मैंने उसकी गांड में अपनी मध्य ऊँगली भी डाल दी.ऐसा करते ही वो एकदम से चिल्लाई और उनका सारा जिस्म अकड़ा और वो फिर ढीली पड़ गई.मैडम की चूत काफी ज़ोर से मेरे लौड़े को पकड़ और छोड़ रही थी जो दूध दोहने की क्रिया के समान होता है जिससे मुझको बड़ा आनन्द आया.अब मैं मैडम के ऊपर से उतरा और सुधा ने मेरे लौड़े को तौलिये से साफ़ किया और मैं उठ कर कपडे पहनने लगा और सुधा ने भी कपड़े पहन लिए और वो मुझको मैडम के कहने पर बाहर तक छोड़ने आई.मैंने नंगी लेटी मैडम को बाय बाय कहा.

मैंने जाने से पहले उसके मुम्मों को हल्के से दबा दिया और चूतड़ों पर चिकोटी भी काट ली. और बाहर निकल गया.सुधा ख़ुशी से हंस पड़ी और बोली- कल मिलना कॉलेज में ज़रूर सतीश यार, मैं तुम्हारा ढंग से शुक्रिया भी नहीं कर सकी.मैं बोला- ज़रूर मिलेंगे.यह कह कर मैं उन के घर से बाहर आ गया और रिक्शा पकड़ कर अपने घर वापस आ गया.

कहानी जारी रहेगी.
 
पड़ोस वाली भाभी की चूत चुदाई

शाम को मैं बैठक में बैठा था कि नैना आई और कहने लगी- पड़ोस वाले मिश्रा जी और भाभी आये हैं, आपसे बात करना चाहते हैं.मैं नैना के साथ बाहर आया तो साथ वाले मकान के भैया भाभी बाहर खड़े थे.मैंने कहा- आईये भैया जी, बाहर क्यों खड़े हैं.

मैं भैया भाभी को लेकर बैठक में आ गया और उनको आलखन से बिठाया और पूछा- कैसे आना हुआ भैया जी? कोई काम था तो मुझ को ही बुला लेते, मैं आ जाता.

भैया बोले- नहीं सतीश, ऐसी कोई बात नहीं है, वो दरअसल मैं 2-3 दिन के लिए लखनऊ से बाहर जा रहा था तो तुम्हारी भाभी घर में अकेली पड़ जाएगी. मैंने सोचा कि अगर सतीश मान जाए तो वो 2-3 रात हमारे घर भाभी के पास रह जाए तो मुझको बड़ी तसल्ली रहेगी. पहले भी जब मैं बाहर जाता था तो मेरा भतीजा रह जाता था, कोई फ़िक्र नहीं होती थी लेकिन अब की बार वो भी अपनी नौकरी के सिलसिले में बाहर गया है, तो मजबूरी में मुझको तुमसे कहना पड़ा है.

मैं बोला- कोई बात नहीं भैया, मैं रह जाऊंगा कोई प्रॉब्लम नहीं है, लेकिन अगर आप और भाभी चाहें तो हमारी नैना रात में आपके घर रह सकती है?

भैया बोले- वो तो बहुत ठीक होता लेकिन क्या है सतीश, मैं चाहता हूँ कि कोई मर्द घर में होता तो ही ठीक रहेगा, क्यों भागवान?भाभी बोली- हाँ जी, आदमी का घर में रहना ही ठीक रहता है, और फिर सतीश अभी तो छोकरा ही है न, सो उसके रहने से घर में एक मर्द की कमी दूर हो जाती है.

मैंने कहा- ठीक है भैया जी, जैसा आप कहें, मैं कर लूंगा. फिर भाभी, मैं रात में कब आऊँ आपके घर सोने के लिए?भाभी बोली- जब चाहो आ जाओ लेकिन अच्छा होगा कि अगर तुम खाना भी वहीं खा लिया करना.मैं बोला- नहीं भाभी, मैं खाना खाकर ही आया करूँगा.

भैया बोले- तो फिर तय रहा सतीश, तुम आ जाया करना रात को 9 बजे से पहले… ठीक है?मैं बोला- ठीक है भैया, आप बेफिक्र हो कर जाएँ अपने टूर पर, मैं घर संभाल लूंगा. आज रात से या फिर कल रात से?भैया बोले- आज रात से आ जाओ तो ठीक रहेगा क्यूंकि मैं रात को 9 बजे के करीब घर से निकलूंगा.

मैंने नैना को आवाज़ दी और वो जल्दी से आ गई तब मैंने उसको सारी बात बताई तो वो बोली- ठीक है छोटे मालिक, आप जाइए इन के घर रात को, इधर मैं संभाल लूंगी.फिर भैया भाभी विदा ले कर अपने घर चले गए.

रात को खाना खाकर मैं अपना कुरता पायजामा पहन कर भाभी के घर चला गया.भैया थोड़ी देर पहले ही निकले थे तो हम उनकी बैठक में बैठ कर गपशप मारने लगे.मैंने भाभी को ध्यान से देखा तो वो काफी खूबसूरत लगी, उनकी उम्र होगी कोई 27-28 के आस पास लेकिन शरीर बहुत सुगठित रखा था भाभी ने!बातों से यह भी पता चला कि 8 साल शादी के बाद भी उनके कोई बच्चा नहीं हुआ था.

भैया काफी हैंडसम लगते थे लेकिन भाभी भी कम सुन्दर नहीं थी और दोनों की जोड़ी काफी सुंदर थी फिर किस कारण से उनके बच्चा नहीं हुआ था, यह मैंने भाभी से हिम्मत करके पूछ ही लिया.

भाभी बोली- क्या बताएँ सतीश भैया, सब भाग्य की बात है, हमने बड़ी कोशिश की लेकिन कुछ काम बना नहीं. शायद हमारी किस्मत में बच्चा नहीं है.मैं बोला- आप उदास ना हों, शायद कोई उपाय निकल आये!

बातें करते हुए रात के 11 बज चुके थे, भाभी मुझको अपने गेस्ट रूम में ले गई जहाँ एक काफी बड़ा पलंग बिछा था और साथ ही मुझ को टॉयलेट भी दिखा दिया जो कमरे से बाहर कॉरिडोर में बना था.साथ में उन्होंने अपना बैडरूम भी दिखा दिया जो टॉयलेट के रास्ते में ही पड़ता था, हर बार टॉयलेट जाते हुए मुझको उनके बैडरूम के सामने से गुज़रना पड़ेगा.मैं थका हुआ था, जल्दी ही मुझको नींद आ गई.

रात को एक बार मैं टॉयलेट गया और जब वापस आया तो देखा कि भाभी सिर्फ पेटीकोट ब्लाउज में सोई थी और उनका पेटीकोट ऊपर खिसक कर उनकी जांघों के पास चढ़ा हुआ था. यह नजारा देख कर मैं रुक गया और बड़ी हसरत से भाभी की एकदम गोरी टांगों को देख रहा था.भाभी थोड़ी सी हिली, उनका पेटीकोट और भी जांघों के ऊपर चढ़ गया और उनकी चूत के काले बाल नाईट बल्ब की मद्धम रोशनी में दिख रहे थे.यह देख कर मैं थोड़ा ठिठका और एक मिनट के लिए रुका भी लेकिन फिर मैं अपने कमरे में आ गया..
 
आकर लेटा ही था कि मेरा लौड़ा एकदम तन गया और मैंने उसको पजामे के बाहर किया, उसपर धीरे धीरे हाथ फेरने लगा.अभी कुछ मिन्ट ही ऐसा किया था कि एकाएक भाभी पेटीकोट में ही मेरे कमरे में चुपचाप आ गई और मैंने भी झट आँखें बंद कर ली.

फिर मैंने थोड़ी सी आँख खोल कर देखा तो वो मेरे खड़े लंड को बड़े ध्यान से देख रही थी.मैंने भी आँख बंद करके सोने का नाटक किया और तब महसूस किया कि भाभी भी मेरे साथ दूसरी तरफ लेट गई थी और मेरे लंड को बड़े गौर से देख रही थी.

अब मैंने लंड से अपना हाथ हटा लिया था और भाभी ने तभी उसको हाथ में ले लिया था और उसको ऊपर नीचे करने लगी थी, यह देख कर मैं भी सोये हुए होने का बहाना करते हुए ही अपना एक हाथ उनकी चूत के ऊपर रख दिया और तब भाभी ने अपना पेटीकोट ऊपर खींच लिया था और मेरा हाथ पकड़ कर उन्होंने अपनी चूत के ऊपर बालों में रख दिया.

मैं समझ गया कि तवा गर्म है और अगर मैं हिम्मत करूँ तो दो चार रोटियाँ सेक सकता हूँ.मैंने अभी भी सोये हुए होने का नाटक करते हुए अपनी बाहें भाभी के गोल गदाज़ मुम्मों के ऊपर रख दी.

भाभी समझ गई कि मैं सोने का नाटक कर रहा हूँ और वो जल्दी ही अपने ब्लाउज और पेटीकोट को उतारने लगी और जब वो नंगी हो गई तो उन्होंने मेरा पायजामा भी उतारने की कोशिश की और मैं भी आँखें बंद किये हुए ही उनकी मदद करने लगा.अब हम दोनों ही नंगे हो चुके थे लेकिन मैं अभी भी सोने का नाटक कर रहा था.

भाभी अब मुझको होटों पर चुम्बन कर रही थी और मेरा भी हाथ उनकी चूत के घने बालों में सैर कर रहा था. भाभी की चूत एकदम से गीली गोत हो चुकी थी और चुदने के लिए हिलोरें मार रही थी.मैंने भी भाभी के होटों को ज़ोरदार चूमा और अपनी जीभ को उनके मुंह में डाल कर उनके मुंह का रस चूसने लगा और भाभी लगातार मेरे लौड़े को ऊपर नीचे कर रही थी.

अब भाभी एकदम पलंग पर अपनी टांगें पूरी खोल कर लेट गई और मेरे को लंड से खींचने लगी.मैं भी आँखें बंद किये ही भाभी के ऊपर चढ़ गया और भाभी ने खुद ही मेरा लौड़ा अपनी चूत में डाला और जैसे ही मुझको महसूस हुआ कि मेरा लौड़ा पूरा अंदर चला गया है मैंने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू कर दिए और भाभी की टाइट चूत का लुत्फ़ उठाने लगा.

मैं मुंह को झुका कर भाभी के गोल और मोटे मुम्मों को चूस रहा था और उनके काके चुचूकों को भी चूस रहा था और साथ ही मैं धीरे धीरे धक्कों की स्पीड भी तेज़ करने लगा.पूरा निकाल कर फिर पूरा डालना मेरा नियम बन गया था, और भाभी भी अपनी कमर को उठा उठा कर चुदाई का आनन्द ले रही थी और चूत की पूरी गहराइयों को मेरा लौड़ा भी नाप रहा था.

जब भाभी की चूत एकदम खुलने और बंद होना शुरू हो गई तो मुझको भी मजबूरन धक्कों की स्पीड तेज़ करनी पड़ी और फिर मैं अति तीव्रता से लौड़े को अंदर बाहर करने में लग गया. भाभी स्पीड को सहन ना कर सकने के कारण हांफ़ने लगी और मुझको अपने छाती से चिपकाने लगी.मैंने भी अपने हाथों को भाभी की पीठ के पीछे डाल कर उनको कस कर अपने से चिपका लिया और तभी ही भाभी की चूत का पहला सोता उमड़ पड़ा और फव्वारे की तरह वो मेरे पेट को भिगोता हुआ चादर पर गिर गया.

भाभी की जो टांगें मेरे दोनों तरफ से मुझ को अपने से बाँध कर रखे हुई थी, वो अपने आप ही ढीली होती चली गई और फिर मैं भाभी के ऊपर से उतर गया.तब भाभी ने मेरे गालों को चूमते हुए कहा- थैंक यू सतीश, तुमने मेरी वर्षों की अन्तर्वासना शांत कर दी.अब मैं और सोने का नाटक नहीं कर सका और वापस भाभी को अपने से चिपकाता हुआ बोला- वाह भाभी, आप तो काफी गर्म औरत हैं.

भाभी एकदम चौंक कर बोली- उफ़ सतीश, तुम जाग रहे हो क्या?मैं बोला- हाँ भाभी जी, मैं तो शुरू से ही जाग रहा था लेकिन मुझको डर था कहीं मैं पहल करूँगा तो आप बुरा ना मान जाएँ इसलिए मैं सोने का नाटक करता रहा.अब भाभी मुस्करा कर बोली- वाह सतीश, तुम तो गज़ब के एक्टर हो और साथ में ही एक बहुत हसीं चोदू भी हो यार! इतने महीनों से हमारे पड़ोस में रहते हो और मुझको खबर भी ना लगी कि क्या क़यामत का हीरा हमारा पड़ोसी है, वर्ना मैं तो कभी की तुमको चोद चुकी होती.मैं भोली सूरत बना कर बोला- तो आज कैसे आपको ख्याल आया कि मैं आपके काम आ सकता हूँ?
 
भाभी बोली- नहीं सतीश, मैंने तो यूँ ही तुमको अपने पास रहने के लिए बुला लिया यह समझ कर कि बड़ा नादान छोकरा है और मेरे पति देव को भी तुम पर पूरा भरोसा था तो उन्होंने ही यह फैसला किया कि सतीश को रात अपने यहाँ सुला लेते हैं क्यूंकि तुम बड़े भोले लगे उनको!मैं बोला- मैं बड़ा भोला ही था ना भाभी, नहीं तो मैं भैया के जाते ही शुरू न हो जाता? आपकी कामुकता, आँखों की प्यास तो मैंने पढ़ ली थी जब आप मेरे घर में आई थी.

फिर मैंने उठ कर कमरे की लाइट ओन कर दी और उस लाइट में भाभी का शरीर देखा जो निहायत ही खूबसूरत था, उनके मुखड़े से लेकर शुरू करने पर यही लगा कि साँचे में ढला हुआ है शरीर का हर अंग!चेहरे और शरीर का खिलता हुआ गोरा रंग और गोल सॉलिड मुम्मों जो अभी भी अपनी पूरी सख्ती में थे और उनका एकदम स्पॉट पेट और नीचे काले बालों से ढका हुआ योनि द्वार और उस के पीछे गोल और उभरे हुए सॉलिड नितम्ब! बहुत खूब!

मैंने कहा- भाभी जी, आपको तो कई चोदू मिल जाते अगर आप कोशिश करती तो… लेकिन आपके पति भी काफी हैंडसम हैं फिर किस चीज़ की कमी है आपको जो आप अभी भी प्यासी घूम रहीं हैं?

भाभी एक ठंडी आह भरते हुए बोली- मेरा भाग्य मेरे साथ धोखा कर गया, मेरे पति जो सबको हैंडसम लगते हैं, वो अंदर से खोखले हैं और पूरे लौंडेबाज हैं, और किसी औरत के काम के नहीं है.मैं हैरान होकर बोला- सच कह रही हैं भाभी? वाह री किस्मत… आपका यह सुन्दर शरीर और पति लड़कों के चक्कर में!

अब मैंने भाभी को गले लगा लिया और उनके लबों पर एक गर्म चुम्मी जड़ दी.मैं फिर से भाभी को गर्म करने लगा, उनकी चूत में ऊँगली से उनकी भग को मसला और मुम्मों को चूसने लगा और जब मुझको लगा कि वो पुनः जोश में आ रही है तो मैंने पूछा- क्यों भाभी, कैसे चुदना पसंद करोगी? मेरे ऊपर से या फिर घोड़ी बन कर या फिर बैठ कर या फिर लेट कर?भाभी बोली- यह सब तरीके आते हैं तुमको सतीश यार? तुम तो लगता है, चुदाई के मास्टर हो! क्यूँ? मैं तो बहुत ही कम तरीके जानती हूँ क्योंकि मुझको सिवाए मेरे पति के और किसी ने अभी तक नहीं चोदा. पति जब शराब पी लेते है तो वो मुझको थोड़ा बहुत चोद लेते हैं, वैसे कभी नहीं. और तब भी पता ही नहीं चलता कि कब शुरू किया और कब ख़त्म हो गए वो! बहुत जल्दी झड़ जाते हैं.

मैं बोला- बहुत ही दुःख हुआ कि इतना सुंदर सोने की तरह का आपका शरीर और अभी तक पति ने ठीक से नहीं भोगा है इस बेचारे को! फिर भी बताइये ना भाभी, कौन सा आसन पसंद है ज़्यादा आपको?भाभी थोड़ी शर्माते हुए बोली- मुझको तो इनका कोई ख़ास ज्ञान नहीं, जो तुम ठीक समझो वही कर दो!

मैं बोला- वैसे भाभी, आपका नाम क्या है?भाभी बोली- मेरा नाम इन्दू है सतीश, और तुम्हारा पूरा नाम क्या है?मैंने कहा- मेरा नाम सोमेश्वर है. तो शुरू करें?इन्दू भाभी बोली- कर सकोगे दुबारा इतनी जल्दी?

मैं खड़ा हो गया और अपने खड़े लंड के दर्शन इन्दू भाभी को करवाये और कहा- आप जब हुक्म करेंगी यह ससुर खड़ा हो जाएगा और आपके हुस्न को सलामी देगा.इन्दू भाभी बोली- सही कह रहे हो या फिर मेरी टांग खींच रहे हो?मैं बोला- हाथ कंगन को आरसी क्या उर्दू पढ़े को फ़ारसी क्या… तो फिर आ जाओ मैदान में इन्दू जी!

इन्दू भाभी बोली- मैं तो मैदान में ही हूँ मेरी तो खुली है जब चाहो डाल दो!मैं बोला- क्या खुली है? और क्या डाल दूँ?इन्दू बोली- वही जो मेरी है और वो ही जो तुम्हारा है?मैं हंस पड़ा- नहीं इन्दू भाभी, नाम लेकर कहो कि किस में क्या डाल दूँ?इन्दू बोली- मुझको भाभी ना कहो सतीश!

मैं बोला- अच्छा जी चलो नहीं कहते, फिर भी बोलिए ना क्या नाम है इनका?इन्दू थोड़ा शरमाती हुई बोली- चूत बोलते हैं मेरी वाली को और लंड तुम्हारे वाले को… क्यों ठीक है ना?मैं बोला- बिलकुल ठीक, और याद रखना इन्दू भाभी इन दोनों के नाम क्यूंकि यही दोनों आपका उद्धार करेंगे.

और यह कह कर मैं इन्दू को फिर से तैयार करने में लग गया, उनको लिटा कर मैंने पहले उनके मुम्मों को चूसा और फिर स्पाट पेट से होता हुआ इन्दू की चूत पर आ गया और उसमें मुंह डाल कर उसको भरपूर चूसा और बार बार उसके भग को मुंह में लेकर उसको गोल गोल घुमा दिया.

मैंने इन्दू की तरफ देखा, उनकी कमर एकदम उठ कर मेरे मुंह से जुड़ी हुई थी और वो आनन्द के मारे भाव विभोर हो कर अपनी टाँगों में मेरे मुंह को जकड़ रही थी.इन्दू का कम से कम दो बार मेरे मुंह में ही छूट चुका था, अब मैंने उनको घोड़ी बना कर चोदना शुरू किया और मैंने इतने ज़ोर से धक्के मारे कि वो फिर एक बार झड़ गई और उसके बाद बोली- सतीश यार, अब और नहीं, तुमने मेरी महीनों की गर्मी निकाल दी.यह कह कर हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में ही सो गए.

सवेरे जब हम उठे तो मैं इन्दू की ख़ूबसूरती देख कर फिर से उनको चोदने के लिए उन पर चढ़ गया और आलखन से हल्के हल्के धक्कों में ही मैंने इन्दू को एक बार फिर छूटने पर मजबूर कर दिया.

अपने घर जाने से पहले मैंने इन्दू से पूछा कि क्या उनको बच्चे की बहुत तीव्र इच्छा है?इन्दू बोली- ईश्वर की सौगंध, मैं अपने बच्चे के लिए तड़प रही हूँ और मैं उसके लिए कुछ भी कर सकती हूँ!मैं बोला- तो फिर ठीक है, तुम आज हमारी मेड नैना से मिल लेना, वह एक ट्रेंड दाई और नर्स भी है. शायद वो तुम्हारी कोई मदद कर सके. मैं उसको बोल दूंगा कि तुम उससे मिलने आओगी लेकिन तुमको उस पर पूरा भरोसा रखना होगा! मंज़ूर है क्या?इन्दू बोली- ठीक है, मैं वैसा ही करूंगी जैसा वो कहेगी!

इस बात के बाद मैं अपनी कोठी में आ गया और नैना मेरे लिए चाय ले आई और चाय पीते हुए मैंने उसको रात की सारी कहानी बता दी और यह भी कहा- इन्दू आज तुमसे मिलने आयेगी और हो सके तो उनकी हेल्प कर देना.नैना बोली- तो रात को आपको एक शाही दावत मिली चूत की! वो तो मैं कल ही समझ गई थी कि इन्दू भाभी लंड की प्यासी है लेकिन यह नहीं सोचा था कि इस सुन्दर स्त्री का पति लौण्डेबाज़ होगा. अच्छा आज आपके लिए मुझको स्पेशल नाश्ता बनाना पड़ेगा.नैना के हाथ का बनाया स्पेशल नाश्ता खाकर मैं कॉलेज चला गया.

कहानी जारी रहेगी.
 
चूत चुदाई कॉलेज की मैडम और छात्रा की

अगले दिन कॉलेज गया तो सबसे पहले मैंने ऑफिस में पूनम की छुट्टी की अर्ज़ी दे दी और फिर अपने क्लास में आकर बैठ गया.

लंच के टाइम नेहा मुझ को कॉरिडोर में मिल गई और कहने लगी- वो उषा मैडम तुम को याद कर रही थी, उनसे मिल लेना लंच में!मैंने कहा- ठीक है, मिल लूंगा.फिर उसने इधर उधर देख कर कहा- सतीश यार फिर कब मिल रहे हो?मैं बोला- जब तुम कहो मिल लेंगे. अकेली मिलना चाहती हो कि कोई साथ और भी है?नेहा बोली- मैं और वो जेनी तुम्हारी खासम ख़ास!मैं बोला- जेनी मेरी ख़ासम ख़ास कैसे हो गई? मेरे लिए तो तुम ही ख़ास हो और हमेशा रहोगी.

नेहा खुश होते हुए बोली- सतीश तुम ना सिर्फ ‘उस’ में ही माहिर नहीं हो, तुम तो माहिर हो हर चीज़ में, हर फील्ड में!मैं भी मज़ा लेते हुए बोला-अच्छा बताना कौन कौन सी फील्ड में माहिर हूँ?नेहा बोली- तुम हर चीज़ में माहिर हो और कई चीज़ों में तो शातिर हो, जैसे अभी तुमने मेरी तारीफ की पर तुम भी जानते हो यह पूरी तरह से सही नहीं है, तुम्हारी तो ख़ास है जेनी और पूनम हम तो बस यूँ ही हैं!मैं हँसते हुए बोला- हर एक्शन का एक रीज़न होता है हो सकता है पूनम और जेनी के बारे में भी मेरा कोई रीज़न होगा. जब मिलोगी आलखन से तो बताऊँगा. और सुनाओ सब ठीक है ना?नेहा बोली- हाँ सब ठीक है लेकिन तुम यह क्यों पूछ रहे हो?मैं बोला- मुझको बड़ा फ़िक्र रहती है कि तुम्हारी ऊपर और नीचे की चीज़ें ठीक हैं ना?

नेहा बड़े ज़ोर से हंस दी और कॉरिडोर में जा रहे कई छात्र मुड़ कर देखने लगे कि क्या माजरा है लेकिन मैं बड़ा ही गंभीर बना रहा और बोला- नेहा जी, इस मामले में कभी कभी ऊपर नीचे के शरीर के हिस्सों में प्रॉब्लम हो जाती है. वैसे आप रात को चेक कर लेना सब पार्ट्स ठीक तरह से फंक्शन कर रहे हैं न?नेहा अभी भी हंस रही थी और हँसते हुए ही बोली- ठीक है चेक कर लूंगी लेकिन आपको यह शक क्यों हो गया?मैं बहुत ही रोनी सूरत बना कर बोला- वो इस लिए कि यह मेरे साथ दुर्घटना हो चुकी है जब हम वापस लौट रहे थे.अब नेहा सीरियस हो गई और बोली- सच्ची कह रहे हो क्या? वैसे क्या हुआ था तुम्हारे साथ?

मैं बोला- जैसे ही मैं स्टेशन पर उतरा तो मुझको ख्याल आया कि शायद मैं कुछ गाड़ी में तो नहीं भूल आया? इसलिए मैंने जल्दी से अपनी जेब और सामान चेक किया लेकिन सब ठीक था फिर मैंने जेब में दुबारा हाथ डाल कर फील किया तो यह जान कर हैरान रह गया कि मेरा ‘वो’ तो गाड़ी में ही छूट गया है, मैं भाग कर गाड़ी में गया और ढूंढा तो ‘वो’ सीट के नीचे पड़ा था.मैंने जेब से रुमाल निकाला और अपनी आँखें, जिनमें कोई आँसू नहीं था, पौंछने लगा.

अब तो नेहा का हंसी के मारे बुरा हाल था वो कभी दीवार को पकड़ कर हंस रही थी और कभी मेरे कंधे को पकड़ कर हंस रही थी.मैंने रोनी सूरत बनाए रखी.मैंने कहा- खैर छोड़ो, उषा मैडम से कब मिलना है मुझको?नेहा अब संयत हो गई थी और शान्ति से बोली- उन्होंने तुमको लंच ब्रेक में बुलाया है स्टाफ रूम में!मैंने नेहा के कान में कहा- ‘वो’ खो जाने वाली बात किसी को बताना नहीं प्लीज!और चलते चलते मैं उसके चूतड़ों में चिकौटी काटते हुए आगे बढ़ गया.

वो चौंक कर भागती हुई आई और मुझको भी मेरे चूतड़ों पर चकौटी काट कर भाग गई.मैंने मुड़ कर देखा और हँसते हुए स्टाफ रूम की तरफ चल दिया.

उषा मैडम मुझको देख कर बाहर आ गई और मुझको लेकर कॉलेज के लॉन पर आ गई.उषा मैडम ने कहा- निर्मल मैडम ने बात की होगी तुमसे?मैं बोला- जी मैडम जी, उन्होंने बात की थी, अब आप जैसा कहें वैसा ही कर लेते हैं.उषा मैडम बोली- आज कॉलेज के बाद फ्री हो क्या?मैं बोला- जी मैडम, फ्री हूँ.उषा मैडम बोली- तो मेरे घर आज चल सकते हो क्या?मैं बोला- जैसा आप कहें. कितने बजे चलना होगा?उषा मैडम बोली- यही 2 बजे छुट्टी के बाद निकल पड़ते हैं. छुट्टी के बाद तुम मुझको मेन गेट पर मिल जाना, ठीक है?मैं बोला- ठीक है मैडम.

फिर मैं वहाँ से वापस आ गया क्लास में!

तभी जेनी, डॉली और जस्सी मेरे क्लासरूम में आ गई और सब बड़ी सीरियस बनी हुई थी और बोली- सुन कर बड़ा दुःख हुआ आप की बहुत ही प्यारी चीज़ खो गई थी.मैं सीरियस होते हुए बोला- हाँ, लेकिन मुझको तो आप सब का ख्याल आ रहा था कि मैं आप सबकी सेवा कैसे कर पाऊँगा? मैं यही सोच सोच कर परेशान था.तब तीनों ने मिल कर कहा- शुक्र है कि ‘वो’ मिल तो गया, ईश्वर की बहुत ही कृपा हुई सतीश जी.मैं मुस्कराते हुए बोला- किस पर कृपा हुई? आप पर या मुझ पर?तीनो चहकते हुए बोली- हम सब पर!
 
मैं बोला- अब कभी मिलना तो हाल ज़रूर पूछ लेना भैया लाल जी का? वैसे कब मिल रही हो तुम उनको?तीनों बोली- मिलना मिलाना तो तुम्हारे हाथ में है या फिर उनके हाथ में है.तीनो हंसती हुई क्लास से चली गई.

छुट्टी के बाद मैं मेन गेट पर इंतज़ार करने लगा.थोड़ी देर में उषा मैडम की कार गेट पर आकर रुकी और मैडम ने मुझको इशारा किया कि अंदर आ जाऊँ.आगे की सीट पर मैडम के साथ कॉलेज की एक लड़की बैठी हुई थी तो मैं पिछली सीट का दरवाज़ा खोल कर कार में बैठ गया.दस मिन्ट में हम मैडम के घर पहुँच गए और उसके साथ हम तीनों अंदर चले गए.

काफी अच्छा सा मकान था और एक नई बनी साफ सुथरी कॉलोनी में था.मैडम ने बैठक में हमें बिठा दिया और खुद ही रसोई से शर्बत ले आई.

फिर उषा मैडम ने कहा- इनसे मिलो, यह अपने ही कॉलेज में बी. ए. की छात्रा है, इनका नाम सुधा है और सुधा, ये सतीश हैं.इन्टर फर्स्ट ईयर के छात्र हैं.हम दोनों ने एक दूसरे को नमस्ते की.उषा मैडम बोली- सुधा भी शौक़ीन लड़की है और मेरे साथ ही रहती है इसी मकान में, जब तुम्हारे साथ प्रोग्राम बना तो सुधा ने इच्छा जताई कि यह भी सतीश से मिलना चाहती है और सारे कार्यक्रम में हिस्सा लेना चाहती है अगर सतीश को कोई ऐतराज़ ना हो तो!मैं बोला- मैडम, जब आपको कोई ऐतराज़ नहीं तो मुझको भला क्या ऐतराज़ हो सकता है. और फिर मैं तो इस कहावत में विश्वास करता हूँ… मोर एंड मेरिएर!उषा मैडम बोली- शाबाश सतीश, मुझे तुमसे यही उम्मीद थी, चलो पहले खाना खा लें.

तब हम सब खाने वाले टेबल पर बैठ गए और सुधा और मैडम ने मिल कर जल्दी ही खाना टेबल पर सजा दिया.खाना बहुत ही अच्छा बना था और जब मैंने खाने की तारीफ की तो मैडम बोली- यह सब सुधा ने बनाया है और मैंने इसकी थोड़ी बहुत हेल्प की है.मैं सच्चे मन से खाने की तारीफ करने लगा और मैंने देखा कि सुधा के चेहरे पर ख़ुशी की एक झलक आई थी और फिर वो नॉर्मल हो गई.

खाना समाप्त करके मैडम मुझको लेकर अपने बेडरूम में आ गई और फिर वो थोड़ी देर के लिए दूसरे कमरे में चली गई.कुछ समय बाद दोनों उसी कमरे में से अपनी नाइटी पहन कर आई और मेरे दोनों तरफ आकर खड़ी हो गई.मैडम बोली- सतीश, क्या हम दोनों तुम्हारे कपड़े उतारने में मदद करें?मैं बोला- कर दीजिये. वैसे मैं अपने कपड़े सिवाय बाथरूम में, अपने आप कभी नहीं उतारता. पर उससे पहले आप दोनों सुंदरियाँ भी अपने नाइटी उतारे दें तो मुझ को बहुत आनन्द आएगा.

मैं कुर्सी पर बैठ गया और यह सेक्सी नज़ारा देखने लगा.दोनों ने एक साथ ही अपनी नाइटी उतार दी और वो दोनों ही एक साथ हलफ नंगी हो गई.

दोनों ही शारीरिक रूप से काफी सुंदर थी, सुधा का शरीर छोटी उम्र के कारण ज़्यादा भरा हुआ नहीं था लेकिन उसकी चूत बालों से भरी थी, छोटे मुम्मे और छोटे ही गोल चूतड़ों से वो एकदम कमसिन लड़की लग रही थी..उधर उषा मैडम का जिस्म भरा हुआ और काफी गठा हुआ था जैसा कि मैं पहले भी देख चुका था और चूत एकदम सफाचट थी.

अब सुधा आगे बढ़ी और मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए, जब मेरे शरीर पर मेरा अंडरवियर ही रह गया तो मैंने तब उषा मैडम को घूर कर देखा और वो समझ गई और शर्माते हुए मुस्कराने लगी.जैसे ही सुधा ने नीचे बैठ कर मेरा अंडरवियर को उतारा तो मेरा खड़ा लंड एकदम आज़ाद होकर उछल कर उसके मुंह पर जाकर लगा और डर के मारे चिल्ला पड़ी और जमीन पर गिर गई.

उषा मैडम ज़ोर से हंस पड़ी लेकिन मैं संयत रहा और हाथ पकड़ कर मैंने सुधा को ऊपर उठाया और खींच कर उसको अपने सीने से लगा लिया और उसके लबों पर एक मधुर चुम्बन किया.फिर मैं बोला- सुधा जी, कहीं लगी तो नहीं आपको? मैंने इस साले को कई बार मना किया है कि ऐसे मत उछला कर लेकिन यह ससुर मानता ही नहीं. वैसे यह इसकी प्यार की थपकी है.

अब सुधा भी ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी- वाह सतीश राजा, मारा भी तो अपने लंड से, बहुत खूब!

मैंने भी एक भेद भरी नज़र उषा मैडम पर डाली और बोला- सुधा, तुम अकेली ही नहीं हो, इसके शिकार कई और भी बन चुके हैं इस के थप्पड़ों के और इकी प्यार की थपकी के.उषा मैडम ने अपनी नज़र नीचे झुका ली लेकिन उनके लबों पर भी एक हलकी सी मुस्कान थी.
 
मैंने उषा मैडम के सामने झुक कर कहा- ऐ बेगमाते ऐ हिन्द, इस नाचीज़ खादिम के लिए क्या हुक्म है?उषा मैडम भी उसी लहजे में बोली- ऐ ग़ुलाम, तुम आज मेरी और इस लौंडिया की हर तरह से मुराद पूरी करो!मैं भी झुक कर बोला- जो हुक्म मेरी आका!

तब मैडम ने मुझको अपने नज़दीक आने का इशारा किया और मैं सुधा को साथ लेकर मैडम के पास चला गया.मैंने जाते ही सबसे पहले मैडम के लाल होटों को अपने लबों में ले लिया और उनको चूसने लगा.

फिर मैडम को बिस्तर पर लिटा दिया और सुधा को इशारा किया कि वो मैडम के मुम्मों को चूसे और मैंने मैडम की सफाचट चूत पर अपना ध्यान केंद्रित किया और नीचे झुक कर अपने मुंह को उनकी चूत के अंदर डाल दिया और जीभ से चूत के अंदर गोल गोल घुमाने लगा और फिर जीभ से उनकी भग को छेड़ने लगा.ऐसा करते ही मैडम की चूत अपने आप ऊपर उठ कर मेरे मुंह से चिपक गई और सुधा भी मैडम के मुम्मों को चूसने में पूरी मुस्तैदी से लगी रही और जब मैडम का एक बार मुंह से छूट गया तो वो मेरे सर के बालों को पकड़ कर ऊपर आने के लिए प्रेरित करने लगी.

मैंने मैडम की चूत के रस से भीगे अपने मुंह को मैडम के मुंह पर रख दिया और जीभ को मैडम की जीभ से भिड़ाने लगा.सुधा अब मेरे चूतड़ों के साथ खेलने लगी लेकिन मैंने अपना लंड मैडम की चूत के मुंह पर रख दिया और सुधा ने मेरे चूतड़ों को एक धक्का ज़ोर का मारा और लंड लाल पूरा का पूरा अंदर चला गया.

अब मैं बहुत ही धीरे धीरे धक्के मारने लगा और बीच बीच में मैडम के लबों को भी चूसता रहा और सुधा भी जो मेरा अंग उसको खाली लगता वो उसको चूमने और चाटने में लग जाती और इस मदद से मैडम को अपनी चरम सीमा की ओर हम दोनों मिल कर ले जा रहे थे.

जब देखा कि मैडम को काफी आनन्द आ रहा है तो मैंने उसकी टांगों को उठा कर अपने कंधों के ऊपर रख दिया और उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख दिए और अब धक्कों की स्पीड एक दम तेज़ कर दी और इस स्पीड को जारी रखते हुए मैं अपनी पूरी ताकत से मैडम को चोदने लगा.सुधा की तरफ देखा तो वो हैरान हुई यह सारा तमाशा देख रही थी और यह भी देख रही थी कि कैसे मैडम तड़फते हुए इधर उधर अपना सर फैंक रही थी.

मैंने महसूस किया कि मैडम का शरीर अकड़ने की स्टेज पर आ गया है, मैंने अपने धक्कों को स्लो और फ़ास्ट में तब्दील कर दिया और ऐसा करते ही मैडम का शरीर ज़ोर से कांपा और उन्होंने अपनी टांगों को मेरे दोनों और फैला कर मुझको उनमें जकड़ लिया और बहुत ही अजीब आवाज़ करते हुए वो झड़ गई.

मैंने अपना लंड जो मैडम की चूत के रस से पूरी तरह गीला हो चुका था, उसको मैडम की चूत से फट की आवाज़ करते हुए निकाला और सुधा को अपने हाथों में उठा कर बेड की दूसरी तरफ ले जाकर उसको अपने खड़े लौड़े पर बिठा दिया और मेरा गीला लंड एकदम आलखन से सुधा की टाइट चूत में चला गया.

सुधा की चूत बेहद गीली और कामातुर हो रही थी, वो मेरे लंड पर बैठते ही पूरा का पूरा लंड अंदर ले गई और मेरे को एक टाइट जफ्फी मार कर मेरे लबों पर अपने जलते हुए होटों को रख दिया.मैं नीचे से उसको धक्के मार रहा था और उसको इशारा किया कि वो ऊपर से शुरू हो जाए.जल्दी ही हम दोनों एक व्यवस्थित ढंग से एक दूसरे को धक्के मार रहे थे.

मैंने उसके छोटे लेकिन सॉलिड मुम्मों को चूसना शुरू किया और अपने धक्कों की स्पीड बहुत ही धीरे रखी ताकि सुधा को भी पूरा मज़ा आने लगे और वो मेरे गले में बाँहों डाले मेरी आँखों में आँखें डाल कर रोमांटिक ढंग से अपनी चूत चुदवा रही थी.क्यूंकि शायद उसको अभी तक कोई ढंग का साथी नहीं मिला था तो वो काफी सेक्स की प्यासी लगी, और मैं भी उसकी अन्तर्वासना को समझते हुए उसको वैसे ही चोदने लगा.

जब वो पूरी तरह से कामातुर हो गई तो उसकी अपनी स्पीड ही तेज़ होने लगी और मैं रुक गया और उसको अपनी मर्ज़ी करने दी.वो अब जल्दी जल्दी मेरे सामने से आगे पीछे होने लगी और उसकी बाहें मेरे गले में फैली थी और वो उनके सहारे वो मेरे लंड पर झूला झूल रही थी और मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर टिके थे जिनकी मदद से वो झूला झूल रही थी.
 
थोड़ी देर में उसका शरीर थोड़ा अकड़ा और वो एकदम से मुझको अपनी बाँहों में जकड़ कर छूट गई.मैडम अब तक आँखें बंद किये लेटी थी और जब सुधा का छूट गया तो उसकी चूत से बहुत ही पानी निकला और सुधा जल्दी से उठ कर एक छोटा तौलिया ले आई जिससे उसने अपनी चूत का पानी पौंछा जो काफी मात्रा में मेरी जांघों पर लगा था.

मैं भी मैडम की दाईं तरफ लेट गया और सुधा भी साफ़ सफाई करके आकर मेरे दूसरी तरफ लेट गई.वो दोनों तो ऐसी थक कर लेटी थी जैसे वो मीलों चल कर आई हों.

मैंने कोशिश की उषा मैडम को जगाने की, लेकिन ऐसा लगता था कि वो गहरी नींद सो गई थी, लेकिन सुधा अभी भी जाग रही थी और मेरे लौड़े से खेल रही थी.मैंने उससे पूछा- क्या और चुदना है तुमको?उसने भी इंकार में सर हिला दिया लेकिन मैंने कहा- सुधा, एक बार से क्या होगा तुम्हारा, चलो उठो मैं तुमको असली चुदाई का मज़ा देना चाहता हूँ एक गिफ्ट के तौर पर!

और मैंने उसको उठ कर पलंग के किनारे पकड़ कर खड़े होने के लिए कहा. जब उसने वो पोजीशन ले ली तो मैं भी उसके पीछे खड़ा हो गया और उसकी चूत में पीछे से अपने खड़े लंड को अंदर डाल दिया.शुरू में धीरे और हल्के धक्के मारने से जब वो चुदाई का ढंग समझ गई तो मैंने आहिस्ता से धक्कों की स्पीड बढ़ाने लगा और मेरे दोनों हाथ सुधा के मम्मों और उसके गोल छोटे चूतड़ों से खेल रहे थे और कभी कभी उसकी गांड में भी ऊँगली डाल कर उस को और उत्तेजित कर रहे थे.

सुधा अब चुदाई का भरपूर आनन्द ले रही थी और उसका सर बार बार उधर घूम रहा था और वो अपने चूतड़ों को स्वयं आगे पीछे करने लगी थी.मैं उसकी चोटी अपने हाथ में लेकर उसके सर को हल्के झटके मारने लगा और वो और भी आनन्द से अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी और फिर उसकी चूत में एक अजीब सा उबाल आया और वो हाय हाय करती हुई झड़ गई और उसने अपना सारा शरीर पहले जरा अकड़ा और फिर वो एकदम ढीली पड़ कर पलंग पर लुढ़क गई.

तब तक मैडम भी जाग गई थी, वो भी मेरे पीछे खड़े होकर मुझको जफ्फी डाल रही थी.मैंने उनको सीधा किया और उनके मुंह पर ताबड़तोड़ चुम्मियाँ दे डाली और फिर उनको लेकर मैं बेड पर आ गया और घोड़ी बनने के लिए कहा, उनके गोल और उभरे हुए चूतड़ों को सहलाते हुए उसकी उभरी चूत के पीछे बैठ कर मैंने अपने अभी भी गीले लंड को उषा मैडम की चूत में घुसेड़ दिया.

मैडम ‘उई…’ कह कर अपनी गांड को इधर उधर करने लगी और जब उनको यकीन हो गया कि मैंने चूत में लौड़े को डाला है तो वो रुक कर उसका आनन्द लेने लगी.घोड़ी की पोजीशन में मर्द का लंड पूरा चूत की आखिरी हिस्से तक जाता है और इस पोजीशन में वीर्य के छूटने से गर्भ की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है.मैडम की चूत पुनः गीली हो चुकी थी, मैं भी जल्दी जल्दी धक्के मारने लगा और पूरा अंदर बाहर करते हुए मैडम की भग को भी मसलने लगा.

मैडम भी हाय हाय करती रही और बार बार यही कह रही थी- मार डालो मुझको, फाड़ दो मेरी चूत को… साली हलखनज़ादी है.मैंने सुधा की तरफ देखा, वो भी हंस रही थी और हाथ से अपनी चूत में अपने दाने को मसल रही थी.मैंने अब बड़े तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिए ताकि मैडम जल्दी ही किनारे लग जाए और फिर मैंने उसकी गांड में अपनी मध्य ऊँगली भी डाल दी.ऐसा करते ही वो एकदम से चिल्लाई और उनका सारा जिस्म अकड़ा और वो फिर ढीली पड़ गई.मैडम की चूत काफी ज़ोर से मेरे लौड़े को पकड़ और छोड़ रही थी जो दूध दोहने की क्रिया के समान होता है जिससे मुझको बड़ा आनन्द आया.अब मैं मैडम के ऊपर से उतरा और सुधा ने मेरे लौड़े को तौलिये से साफ़ किया और मैं उठ कर कपडे पहनने लगा और सुधा ने भी कपड़े पहन लिए और वो मुझको मैडम के कहने पर बाहर तक छोड़ने आई.मैंने नंगी लेटी मैडम को बाय बाय कहा.

मैंने जाने से पहले उसके मुम्मों को हल्के से दबा दिया और चूतड़ों पर चिकोटी भी काट ली. और बाहर निकल गया.सुधा ख़ुशी से हंस पड़ी और बोली- कल मिलना कॉलेज में ज़रूर सतीश यार, मैं तुम्हारा ढंग से शुक्रिया भी नहीं कर सकी.मैं बोला- ज़रूर मिलेंगे.यह कह कर मैं उन के घर से बाहर आ गया और रिक्शा पकड़ कर अपने घर वापस आ गया.

कहानी जारी रहेगी.
 
इन्दू भाभी का गर्भाधान

मैं नहा धोकर कॉलेज चला गया.कॉलेज से वापस आने पर खाना खाते हुए नैना ने बताया- इन्दू भाभी आई थी, उसने अपनी सारी प्रोब्लम बताई हैं और मैंने फिर उसका सारा चेकअप किया, इन्दू भाभी तो बिल्कुल ठीक है और उसको गर्भवती होने में कोई मुश्किल नहीं आयेगी लेकिन जो उसने अपने पति के बारे में बताया है, उससे तो लगता है कि उसका गर्भ धारण करना मुश्किल है.

मैं बोला- फिर उसने क्या तय किया है?नैना बोली- वो तो तुमसे गर्भ धारण करना चाहती है और आजकल उसके लिए गर्भ धारण का उत्तम समय भी है. अब आप बताओ छोटे मालिक, क्या कहते हो?मैं बोला- तुम्हारी क्या सलाह है इस मामले में?नैना बोली- आप कर दो उसका गर्भाधान, अगर आपको कोई ऐतराज़ ना हो तो?मैं बोला- मुझको तो कोई ऐतराज़ नहीं है, कब करना होगा उसका गर्भाधान?नैना बोली- आज दोपहर को कर दो उसका काम छोटे मालिक और फिर वैसे भी आपने रात को उसके घर में रहना ही है.

मैंने पूछा- तुमने इन्दू भाभी से इस बारे में बात पक्की कर ली है क्या?नैना बोली- नहीं, आपसे पूछे बगैर मैं कैसे हाँ कर देती?

मैं बोला- यह काम कहाँ करने का इरादा है?नैना बोली- इन्दू भाभी कह रही थी कि उसके घर में ही कर दो तो अच्छा है!मैं बोला- ठीक है, तुम उससे वहाँ आने की बात पक्की कर लो और फिर थोड़ा रेस्ट करके चलते हैं भाभी के घर में!नैना ने हामी भर दी और थोड़ी देर बाद उसने बताया कि वो हमारा इंतज़ार कर रही है.

मैं थोड़ी देर के लिए लेट गया और आधे घंटे बाद हम दोनों भाभी के मकान में पहुँच गए जहाँ भाभी हमारा इंतज़ार बेसब्री से कर रही थी.जैसे ही उन्होंने मुझको देखा तो जल्दी से आगे आई और मुझको कस के जफ्फी मारी और मेरे लबों को भी चूमने लगी.

यह देख कर नैना मुस्करा पड़ी और फिर हम सब भाभी की बैठक में आ गए और भाभी वहाँ भी मेरी गोद में ही आकर बैठ गई.मैं भी थोड़ा मदमस्त हो गया था तो निडरता से बोला- क्यों इन्दू भाभी, रात की चुदाई से दिल नहीं भरा क्या?इन्दू भाभी बोली- बहुत भरा, लेकिन अब होने वाली के बारे में सोच कर मन में काफी उथल पुथल हो रही है. सतीश तुम पहले ही बता देते कि यह तुम्हारी नैना तो जादूगर है, इसने मेरी सारी फिकर और परेशानियों को दूर करने के उपाय बता दिए हैं.

नैना बोली- तो फिर शुरू हो जाओ तुम दोनों, कहाँ करना है यह सब?भाभी बोली- उसी कमरे में जिसमें रात सतीश सोया था. चलो, सब वहीं चलते हैं.

हम भाभी के पीछे चलते हुए रात वाले मेरे कमरे में आ गए और तब नैना ने भाभी को घेर लिया और उनके कपड़े एक एक करके उतारने लगी.पहले साड़ी, फिर ब्लाउज और ब्रा और आखिर में उसका पेटीकोट जब उतर गया तो नैना ने उसको धर दबोचा और उसके मम्मों को चूसने लगी और भाभी की बालों भरी चूत में ऊँगली डाल कर उसको तैयार करने में जुट गई और भाभी ने भी एक एक करके नैना के कपड़े उतार दिए.

उन दो नंगी हसीन औरतों को आपस में करते देख कर मेरा लौड़ा भी हिलौरें मारने लगा लेकिन अभी भी वो मेरे कपड़ों में ही कैद था. और जब भाभी की नज़र मेरे पैंट में बने टेंट पर गई तो वो भाग कर आई और उन दोनों ने मिल कर मेरे तन के सारे कपड़े भी उतार दिए और हम ‘एक हमाम में सब नंगे’ वाली कहावत को चरितार्थ करने लगे.

नैना ने भाभी को मेरा लौड़ा चूसने के लिए प्रेरित किया और खुद भी मुझ को लबों पर चुम्मियाँ देने लगी और मेरे भी हाथ नैना के जाने पहचाने चूतड़ों के ऊपर फिसलने लगे.दोनों को देख कर लग रहा था कि भाभी चाहे नैना से साल दो साल बड़ी रही होगी लेकिन शरीर उसका ही बहुत अधिक सुन्दर और सुगठित था और फिर उसका गोरा रंग सोने पर सुहागा का काम कर रहा था.

नैना अब भाभी की चूत को ऊपर कर के उसको चूस रही थी और उसके चूत के लब और भग को जीभ से गोल गोल घुमा रही थी. भाभी अब अपने कंट्रोल में नहीं थी तो उनको मैंने अपने हाथों में उठा कर पलंग पर लिटा दिया और खुद उसकी गोरी जांघों के बीच बैठ कर अपना लंड उसकी चूत के बाहर उसकी भग पर ही रगड़ रहा था, भाभी बार बार अपनी कमर को उठा कर लौड़े को अंदर डालने की कोशिश कर रही थी.
 
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