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कामिनी की सु-सु और नितम्बों का विचार मन में आते ही दिल की धड़कन तेज होने लगती है और मन करता है आज रात को पढ़ाते समय ही उसे प्रेम का अगला सबक सिखा दूं। पर मधुर की मौजूदगी में यह सब कहाँ संभव हो पायेगा? तो क्या कल सुबह-सुबह मधुर के स्कूल जाते ही … अगला सबक … ??? यालाह … मेरा दिल तो अभी से धड़कने लगा है। लंड तो जैसे अड़ियल घोड़ा बनकर चुग्गे के लिए हिनहिनाने लगा है।
ओह … कल तो रविवार है? लग गए लौड़े!
एक बात तो हो सकती है आज रात को पढ़ाते समय भी लिंगपान तो करवाया ही जा सकता है। मधुर तो अन्दर कमरे में सोयी हुई रहेगी और कामिनी तो चुप-चाप यह लिंगपान वाला सवाल आसानी से हल कर लेगी। और फिर एक रात की ही तो बात है। अब देर करना ठीक नहीं है सोमवार को लिंग देव का दिन है। अब लिंग देव इतनी कृपा तो हम दोनों भक्तों पर कर ही देंगे।
भेनचोद यह किस्मत हमेशा हाथ में लौड़े लिए तैयार ही रहती है पर सोमवार लिंग देव इतनी कृपा तो हम दोनों भक्तों पर कर ही देंगे। सोमवार को सुबह-सुबह उसके साथ बाथरूम में नहाते हुए प्रेम का अगला सबक सिखाने का यह आईडिया बहुत ही कारगर और सुन्दरतम होगा।
शाम को घर जाते समय मैंने कामिनी के लिए बढ़िया क्वालिटी की इम्पोर्टेड चॉकलेट खरीदी और उसकी पसंद के आम और लीची फ्लेवर की फ्रूटी के 8-10 पाउच भी ले लिए थे।
आज कामिनी के बजाय मधुर ने दरवाजा खोला। मैंने इधर उधर नज़र दौड़ाई पर कामिनी कहीं नज़र नहीं आ रही थी।
अब कामिनी के बारे में सीधे मधुर से पूछना तो ठीक नहीं था तो मैंने बहाने से मधुर से कहा- मधुर आज तो कड़क चाय पीने का मन कर रहा है कामिनी को बोलो ना प्लीज … बना दे।
“मैं बना देती हूँ आप फ्रेश होकर आओ?”
“वो कामिनी नहीं है क्या?”
“कामिनी तो घर चली गई है।” मधुर ने बम विष्फोट कर दिया।
“क … क्यों?” मैंने हकला सा गया।
“अरे … ये निम्नवर्गीय लोगों की परेशानियां ख़त्म ही नहीं होती.”
“अब क्या हुआ?”
“होना क्या है वही रोज-रोज पैसे का रोना लगा रहता है.”
“म.. मैं समझा नहीं?” मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा था। क्या पता इनकी रोज-रोज पैसों की डिमांड से तंग आकर मधुर ने कामिनी को काम से ही ना हटा दिया हो। मैं तो देव चालीसा ही पढ़ने लगा। हे लिंग देव प्लीज अब लौड़े मत लगा देना।
“वो … अनार है ना?” मधुर ने कुछ सोचते हुए कहा।
मेरी झुंझलाहट बढ़ती जा रही थी। ये मधुर भी पूरी बात एक बार में कभी नहीं बताती।
“हाँ?”
“इन लोगों को सिवाय बच्चे पैदा करने के कोई काम ही नहीं है। उसके तीन बच्चे तो पहले से ही हैं अब वह फिर पेट से थी तो उसका गर्भपात हो गया।”
“ओह … बहुत बुरा हुआ.” मैंने कहा।
“अनार का पति कुछ कमाता-धमाता तो है नहीं, सारी आफत बेचारी गुलाबो की जान को पड़ी है। और उसे भी सब चीजों और परेशानियों के लिए बस यही घर दिखता है.”
“फिर?”
“वो गुलाबो का फ़ोन आया था कि कुछ पैसों की जरूरत है तो कामिनी के साथ थोड़े पैसे भेज दो।”
“हुम्म …” मैंने एक निश्वास छोड़ते हुए कहा।
“क्या करती पैसे देकर कामिनी को भी भेजना ही पड़ा। बड़ी मुश्किल से उसका पढ़ाई में मन लगा था अब 2-3 दिन वहाँ रहेगी तो सब भूल जायेगी।”
सारे मूड की ऐसी की तैसी हो गयी। लग गए लौड़े !!! मैं मुंह हाथ धोने बाथरूम में चला गया। पता नहीं कितने पापड़ अभी और बेलने पड़ेंगे।
ओह … कल तो रविवार है? लग गए लौड़े!
एक बात तो हो सकती है आज रात को पढ़ाते समय भी लिंगपान तो करवाया ही जा सकता है। मधुर तो अन्दर कमरे में सोयी हुई रहेगी और कामिनी तो चुप-चाप यह लिंगपान वाला सवाल आसानी से हल कर लेगी। और फिर एक रात की ही तो बात है। अब देर करना ठीक नहीं है सोमवार को लिंग देव का दिन है। अब लिंग देव इतनी कृपा तो हम दोनों भक्तों पर कर ही देंगे।
भेनचोद यह किस्मत हमेशा हाथ में लौड़े लिए तैयार ही रहती है पर सोमवार लिंग देव इतनी कृपा तो हम दोनों भक्तों पर कर ही देंगे। सोमवार को सुबह-सुबह उसके साथ बाथरूम में नहाते हुए प्रेम का अगला सबक सिखाने का यह आईडिया बहुत ही कारगर और सुन्दरतम होगा।
शाम को घर जाते समय मैंने कामिनी के लिए बढ़िया क्वालिटी की इम्पोर्टेड चॉकलेट खरीदी और उसकी पसंद के आम और लीची फ्लेवर की फ्रूटी के 8-10 पाउच भी ले लिए थे।
आज कामिनी के बजाय मधुर ने दरवाजा खोला। मैंने इधर उधर नज़र दौड़ाई पर कामिनी कहीं नज़र नहीं आ रही थी।
अब कामिनी के बारे में सीधे मधुर से पूछना तो ठीक नहीं था तो मैंने बहाने से मधुर से कहा- मधुर आज तो कड़क चाय पीने का मन कर रहा है कामिनी को बोलो ना प्लीज … बना दे।
“मैं बना देती हूँ आप फ्रेश होकर आओ?”
“वो कामिनी नहीं है क्या?”
“कामिनी तो घर चली गई है।” मधुर ने बम विष्फोट कर दिया।
“क … क्यों?” मैंने हकला सा गया।
“अरे … ये निम्नवर्गीय लोगों की परेशानियां ख़त्म ही नहीं होती.”
“अब क्या हुआ?”
“होना क्या है वही रोज-रोज पैसे का रोना लगा रहता है.”
“म.. मैं समझा नहीं?” मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा था। क्या पता इनकी रोज-रोज पैसों की डिमांड से तंग आकर मधुर ने कामिनी को काम से ही ना हटा दिया हो। मैं तो देव चालीसा ही पढ़ने लगा। हे लिंग देव प्लीज अब लौड़े मत लगा देना।
“वो … अनार है ना?” मधुर ने कुछ सोचते हुए कहा।
मेरी झुंझलाहट बढ़ती जा रही थी। ये मधुर भी पूरी बात एक बार में कभी नहीं बताती।
“हाँ?”
“इन लोगों को सिवाय बच्चे पैदा करने के कोई काम ही नहीं है। उसके तीन बच्चे तो पहले से ही हैं अब वह फिर पेट से थी तो उसका गर्भपात हो गया।”
“ओह … बहुत बुरा हुआ.” मैंने कहा।
“अनार का पति कुछ कमाता-धमाता तो है नहीं, सारी आफत बेचारी गुलाबो की जान को पड़ी है। और उसे भी सब चीजों और परेशानियों के लिए बस यही घर दिखता है.”
“फिर?”
“वो गुलाबो का फ़ोन आया था कि कुछ पैसों की जरूरत है तो कामिनी के साथ थोड़े पैसे भेज दो।”
“हुम्म …” मैंने एक निश्वास छोड़ते हुए कहा।
“क्या करती पैसे देकर कामिनी को भी भेजना ही पड़ा। बड़ी मुश्किल से उसका पढ़ाई में मन लगा था अब 2-3 दिन वहाँ रहेगी तो सब भूल जायेगी।”
सारे मूड की ऐसी की तैसी हो गयी। लग गए लौड़े !!! मैं मुंह हाथ धोने बाथरूम में चला गया। पता नहीं कितने पापड़ अभी और बेलने पड़ेंगे।