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Adultery वासना की मारी औरत की दबी हुई वासना

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धीरे धीरे वो सोफे पर पूरी तरह लेट गयी | दोनों जांघे ऊपर की तरह उठा दी और दो उंगलियों को कसी चूत के छेद में घुसेड के अन्दर बाहर करने लगी |

रीमा को ठीक से याद भी नहीं आखिरी बार कब लंड उसकी चूत के अन्दर गया था | इसलिए चूत की कसावट बिलकुल कुवारी चूत की तरह थी | दोनों उंगलिया को अन्दर डालने के लिए जोर लगाना पड़ रहा था | चूत की कसी हुई मखमली दीवारे उंगलियों को कस के जकड ले रही थी | उंगलियों की चुदाई उत्तेजना में चार चाँद लगा रही थी, इससे मिलने वाले चरम सुख की कोई सीमा नहीं थी | मुहँ से सिसकारियो का सिलसिला लगातार चल रहा था, उगलियाँ के चूत में अन्दर बाहर होने से शरीर भी उसी अनुसार लय में आगे पीछे हो रहा था | रीमा अपनी उंगलियों से खुद को चोद के अपनी वासना की आग बुझा रही थी | और सोच वो नूतन और प्रियम की चुदाई के बारे में रही थी | अब न कोई शर्म थी, न कोई हिचक थी, बस एक आग थी और उसे बुझाना था किसी भी तरह, उंगलिया अपनी चरम गति से चूत में आ जा रही थी और उसी के साथ दाने को भी अधिक ताकत और गति से रगड़ने का सिलसिला शुरू हो गया था |

अब लग रहा था जैसे चरम अब निकट ही है, एक तूफ़ान जो अन्दर धमाल मचाये हुआ था अब बस गुजर जाने को है | अब न कोई इमेजिनेशन था, न किसी की सोच | बस वासना थी वासना थी और सिर्फ वासना थी | रीमा अब सोफे पर तेजी से उछालने लगी | उसकी कमर जोर जोर के झटके खाने लगी | उंगलिया जिस गहराई तक जा सकती थी, वहां तक जाकर अन्दर बाहर होने लगी | पहले चूत में दो उंगलिया भी बड़ी मुश्किल से जा रही थी अब तीन भी आराम से जा रही थी | रीमा का हाथ पूरी ताकत से अन्दर बाहर के झटके दे रहा था | अचानक उसका पूरा शरीर अकड़ गया, सिसकारियो का न रुकने वाला सिलसिला शुरू हो गया, जांघे अपने आप खुलने बंद होने लगी, जबकि उसकी अंगुलियां अभी भी चूत की गहराई में गोते लगाकर आ जा रही थी, दाना फूलकर दोगुने साइज़ का हो गया था लेकिन रीमा ने उसे रगड़ना अभी भी बंद नहीं किया था | दाने के रगड़ने से चूत के कोने कोने तक में उत्तेजना की सिहरन थी | चूत की दीवारों में एक नया प्रकार का सेंसेशन होने लगा, कमर और जांघे अपने आप कापने लगी, रीमा को पता चल गया अब अंत निकट है, ये वासना के तूफ़ान की अंतिम लहर है | उसने चूत से उंगलियाँ निकाल ली, चूत रस तेजी से बाहर की तरफ बहने लगा | सारा शरीर कापने लगा, उत्तेजना के चरम का अहसास ने उसके शरीर पर से बचा खुचा नियंत्रण भी ख़त्म कर दिया |

कमर अपने आप ही हिल रही थी, पैर काँप रहे थे, मुहँ से चरम की आहे निकल रही थी | और फिर अंतिम झटके के साथ पुरे शरीर में कंपकपी दौड़ गयी और पूरा शरीर सोफे पर धडाम से ढेर हो दया |

रीमा आनंद के सागर में गोते लगाते लगाते लगभग मुर्क्षा की हालत में पंहुच गयी | धीरे धीरे सांसे काबू में आने लगी, चूत के दाना की सुजन कम होने लगी, स्तनों की कठोरता कम होने लगी | अपनी उखड़ती सांसे संभाले रीमा अपने आप के स्त्रीत्व को महसूस करने लगी, उसे अपने औरत होने का अहसास होने लगा | उसने शरीर को ढीला छोड़ दिया | उसने अपने ही चुचे और चूत का अहसाह पहली बार किया |उसके शरीर में होते हुए भी आज तक इनसे अनजान थी | उसके दिमाग सेक्स को लेकर जो भी दुविधा थी दूर हो गयी | अब वो खुद की सेक्स की चाह को दबाएगी नहीं | वो खुद को एन्जॉय करेगी | अपनी औरतपन को एन्जॉय करेगी | उसने इतने साल दकियानुकुसी में काट दिए, जबकि खुद में एन्जॉय करना तो कोई अपराध नहीं है | यही सोचते सोचते कब उसकी आंख लग गयी पता ही नहीं चला |

 
रोहित ने बड़े प्यार से प्रियम से बात करी, और बड़ी सावधानी से उसने हर वो सवाल पूछ लिया जो उसे पूछना चाहिए था | उसे पता था प्रियम झूठ नहीं बोलेगा, प्रियम ने ईमानदारी से जो कुछ भी वो नूतन के साथ कर रहा था सब बता दिया लेकिन उसने एक बात जोर देकर और कसम खाकर कही कि जब चाची कमरे में आई तब नूतन का स्वेटर का स्वेटर बिलकुल ठीक था | रोहित ने अंदाजा लगाया की इसका मतलब ये है की रीमा पहले से ही दरवाजे की ओट से झांक रही थी और बच्चे जो भी कर रहे थे वो सब उसने कुछ देर रूककर देखा होगा |प्रियम जब तीन साल का था तभी उसकी माँ उसे छोड़कर चली गयी थी, तब से लेकर अब तक रोहित ने माँ और बाप बनकर उसको इतना बड़ा किया था | रोहित कई बार रिलेशनशिप में भी रहा लेकिन किसी भी लड़की से इतना लगाव नहीं हुआ की उसको प्रियम की माँ बना ले | बच्चे की खातिर उसने एक दो बार प्रियम की माँ से समझौता करने के कोशिश भी की लेकिन सफलता नहीं मिली | बीबी के छोड़ के जाने के बाद रोहित की बहुत गर्लफ्रेंड रही लेकिन जितना वो आकर्षित वो रीमा की तरफ होता था उतना किसी लड़की की तरफ नहीं होता था | अपने भाई और रीमा के पति की मौत के बाद उसने कई बार अपने दिल की बात रीमा को बताने की सोची लेकिन हर बार पीछे हट गया | अपने स्वर्गीय भाई की विधवा जवान पत्नी से इस तरह की बात करना उसे गलत लगा |

जब भी वो रीमा को देखता एक बार ये ख्याल जरुर आता की वो अपने दिल की बात उसको कह दे | आखिर वो भी अकेला है और रीमा भी अकेली है | जवानी में सेक्स उफान मारता ही है लेकिन रीमा जिस तरह से खुद की पतिव्रता इमेज में खुद को बांधे थी उस वजह से रोहित की कभी हिम्मत ही नहीं हुई ऐसी बात करने की | रीमा सिर्फ रोहित के मरे भाई की बीबी नहीं थी बल्कि उसकी सबसे बड़ी फंतासी थी जिसके लिए रोहित अलग अलग लडकियों को पटाकर अपनी फंतासी न पूरा कर पाने की खीझ मिटाता था | रीमा खूबसूरत थी, भरा पूरा शरीर था हालाँकि मेकअप नहीं लगाती थी फिर भी बच्चे से बूढ़ा जो भी एक बार देख लेता था फिर नजरो से ओझल होने तक उसको ही देखता रहता था | रोहित भी पार्टी में जब ड्रिंक पीकर धुत होता था तब अकसर रीमा की बांहों में सिमट के घर आता था और ऐसा वो जानबूझकर करता था | जब भी वो इसको कार में बैठाती, वो नीद के बहाने अपना सर रीमा के सीने पर रख देता और छोटे बच्चे की तरह सोने का नाटक करने लगता,हालाँकि इतना करीब होने के बावजूद उसकी कभी हिम्मत नहीं हुई की सीने से सर उठाकर उसके चेहरे तक ले जाये और उसके रसीले ओठ चूम ले | साल दर साल इसी तरह गुजरते रहे, दिल की तमन्ना दिल के कोने में ही दबी रह गयी | रीमा भी रोहित का साथ चाहती थी लेकिन रिश्तो की मर्यादा लोकलाज और खुद की बनायीं इमेज में उसकी सारी खवाइश दब गयी | रीमा भी रोहित को उसके घर छोड़कर अपने घर चली जाती थी | कभी खुद की बनायीं लक्ष्मण रेखा लांघी ही नहीं |

रोहित को आज की घटना के बाद लगा, रीमा ने नूतन प्रियम के बारे में उसे बढ़ा चढ़ा कर बताया है, इतने साल अकेले रहने के कारण क्या वो सेक्सुअली अवसाद में तो नहीं चली गयी | उसने कई सालो से सेक्स नहीं किया है और उसका कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं है | इसलिए सेक्सुअल चीजो को लेकर कुंठित हो गयी है | बच्चो के कमरे में घुसने से पहले काफी देर तक झांक कर उनकी फन एक्टिविटी को सेक्स बता रही है | लगता है रीमा को सेक्स की तलब है, उसको चुदाई चाहिए | लेकिन अगले पल ही उसके दिमाग में सवाल आया ये मै कैसे कर सकता हूँ?

अगले दिन राजू और प्रियम जब स्कूल जा रहे थे तो रास्ते में राजू ने पूछ लिया - प्रियम तेरे पापा ने क्या कहा, पिटाई तो नहीं की |

प्रियम-किस बात को लेकर?

राजू ने इशारे से समझाने की कोशिश की | प्रियम-नहीं यार मेरे डैड बहुत अच्छे है, उन्होंने ने बस इतना कहा की मै अभी इन सब चीजो के लिए बहुत छोटा हूँ और अभी कुछ साल उसे ये सब नहीं करना चाहिए |

राजू चहकते हुए-अबे बस इतना ही, साले मुझे तो लगा था की तेरी हड्डी पसली तोड़ देंगे|

प्रियम-नहीं यार ऐसा कुछ नहीं हुआ, मेरे डैड बहुत कूल है| लेकिन मेरी एक बात समझ नहीं आई वो ये क्यों पूछ रहे थे की चाची सीधे कमरे में आ गयी या छुप छुप के दरवाजे की ओट से हमें देख रही थी |

राजू-मतलब?

प्रियम-अरे यार मतलब क्या वो हमें पहले से देख रही थी? कही हमें देखकर वो.....इतना कहकर उसने दाई आंख मार दी|

राजू-साले तेरी चाची है कुछ तो लिहाज रख |

 
प्रियम- फिर हमें छुप छुप कर क्यों देख रही थी इसका मतलब है वो हमें देखकर उत्तेजित हो रही थी, काफी दिनों से अकेले रहने के कारन वो कुंठित हो गयी है | खुद अकेली है इसलिए दूसरो का सेक्स देखती है और एन्जॉय करती है | राजू की आंखे फ़ैल गयी - अबे साले तेरे को इतना सब कैसे पता है |

प्रियम-बस पता है, चाची चुदासी है और कोई बात नहीं |

राजू-तो तू क्या सोच रहा है बे, साले.........ये गलत है |

प्रियम-सही गलत तू मुझे मत समझा, तूने तो अपनी मामा की लड़की की कुवारी चूत चोद कर अपना कुवांरापन मिटा लिया है, इसके अलावा तूने शर्मा जी बेटी की भी कुंवारी चूत का शुभारम्भ किया था तू अब कुवारा तो है नहीं और चाहता है मै कुंवारे लंड को लेकर अगले १० साल और घूमता रहु|

राजू-मेरा वो मतलब नहीं था, लेकिन अपनी उम्र देख और चाची की |

प्रियम- तू तो अपना कुंवारापन खो चूका है, दो कुंवारी चूत चोद चूका है, साले ममेरी बहन को चोद डाला और मुझे ज्ञान पेल रहा है |

राजू-नहीं दोस्त ऐसा नहीं है, जिन लडकियों को मैंने चोदा है वो मेरी ही उम्र की थी, लेकिन चाची तेरी तेरे बाप की उम्र की है, हो सकता है तेरे डैड ने भी उन्हें चोदाना चाहा हो, लेकिन रीमा चाची को देखकर लगता नहीं कि वो मानी होगी |

प्रियम-तू भोसड़ी के चुतिया ही रहेगा, चूत चूत होती है लंड लड़ होता है | चूत चुदने के लिए होती है और लंड चोदने के लिए होता है | चुदाई में किसकी चूत किसका लंड नहीं देखा जाता | चूत में लंड पेला जाता है बस | मुझे अपना कुंवारापन खोना है, और मै चाची को चोद के अपने लंड का सुभारम्भ करूगां | यह कहकर वो चुदाई की कल्पना करने लगा |

राजू-तू चुतिया है भोसड़ी के, साले कभी चोदा हो किसी लड़की को तो जाने न | साले जो लड़की चुदने को तैयार बैठी हो उसके भी हजार नखरे होते है, माथे से लेकर गांड तक पसीना आ जाता है मनाने में | और वो तेरी चाची है, रंडी नहीं की तू जायेगा और जांघे खोलकर लंड पेल देगा | तेरे बाप को पता चला न तो तुझे इतना पेलेगे तुझे की फिर अगले १० साल के लिए चूत पेलने का ख्याल ही दिमाग से निकल जायेगा |

प्रियम-तूने चुदाई सीख ली है तो ज्यादा डायलॉग मत मार |

 
राजू- मै डायलॉग नहीं मार रहा हूँ, मै बस इतना कह रहा हूँ मेहनत वहां कर जहाँ कुछ मिले | नूतन दो तीन महीने में मान जाएगी लेकिन तेरी चाची जिसको तेरा बाप १० साल में नहीं मना पाया उसके सपने देखना बंद कर | जिंदगी गुजर जाएगी चाची की चूत न मिलेगी |

प्रियम-देख कल पूरी रात मैंने इस बारे में सोचा है, और मै रीमा चाची को बहुत अच्छी तरह जानता हूँ, मै वही करूगां जो मैंने तय कर लिया है |

राजू- तू मरेगा और मुझे भी मरवाएगा |

प्रियम-मै अपनी वेर्जिनिटी रीमा चाची को चोदकर ही लूज करूगां, ये मैंने तय कर लिया है |

राजू-अच्छा ठीक है तूने तय कर लिया है तो ठीक है, अब ये बता ये करेगा कैसे ?

प्रियम-ज्यादा कुछ अभी सोचा नहीं लेकिन एक प्लान है दिमाग में मेरे

राजू-क्या?

प्रियम-मैं चाची के पास आँखों में आंसू लेकर जाउगां, उनसे कमरे में हुई घटना के लिए माफ़ी मांगूगा, उनसे रिक्वेस्ट करूगां की मुझे जीवन के रहस्य बताये, मै उन्हें इमोशंस से ब्लैकमेल करूगां, मै बोलुगा की बचपन में ही मेरी माँ मुझे छोड़कर चली गयी, इसलिए मुझे लडकियों के बारे में कुछ नहीं पता है, और डैड से पूछना बड़ा शर्मिन्द्दगी भरा होगा | अगर मेरी माँ होती तो वो सब बाते जो मै लड़कियों के बारे में नहीं जानता हूँ वो मुझे बताती | उन्हें अहसास करवा के रहूगां की माँ के न होने से मै किन किन बातो से अनजान रह गया हूँ, और वो मेरी माँ की कमी पूरी कर सकती है मुझे लड़का लड़की के रिश्ते, उनकी शरीर की बनावट और उनके बीच होने वाली हर गुप्त बात के बारे में बता सकती है |

राजू संदेह करते हुए-क्या इतने से तेरी चाची मान जाएगी ?

प्रियम-मैंने उनको मनाने के लिए कुछ और भी इंतजाम किया है, हशीश ?

राजू-लेकिन वो तो स्मोक करती ही नहीं, और अभी तो वो गुस्से में भी होगी |

प्रियम-हाँ मुझे पता है, इसीलिए मैंने प्रिया से बात करी है, उसकी माँ उसके स्कूल कुकिंग प्रोजेक्ट के लिए पेस्ट्री बना रही है, मैंने भी उससे चार पांच पेस्ट्री मेरे लिए बनाने को बोला है, बदले में मुझे उसे कुछ ज्यादा हशीश देनी पड़ेगी| प्रिया चुपके से थोड़ी हशीश मेरी पेस्ट्री के मटेरियल में मिला देगी | रीमा चाची को मै बोल दूगा की स्कूल में कुकिंग फेस्ट में मेरी क्लास की टीम फर्स्ट आई है और मॉनिटर होने नाते मुझे ५ पेस्ट्री गिफ्ट में दी है |

राजू-तुझे क्या लगता है वो खा लेगी? मान लो खा भी लिया तो क्या सेक्स के लिए उत्तेजित हो जाएगी|

प्रियम-उन्हें क्या पता की पेस्ट्री खाकर ही वो उत्तेजित जाएगी, ये तो मै जानता हूँ की पेस्ट्री में क्या है | पेस्ट्री खिलाने के बाद मै उनसे चुदाई की सेक्सी बाते पूछने लागूगा, मुझे पता वो चुदाई न हो पाने के कारन गरम रहती है, और हो सकता चुदाई और आदमी औरत के बारे में बात करते करते उत्तेजित हो जाये, हो सकता है चुदाई के लिए भी राजी हो जाये | (आंख मारते हुए)

 
अगले दिन शनिवार था, शाम को प्रियम खुद रीमा चाची के कमरे में चला गया | वो बेड पर दीवाल के सिरहाने तकिया लगाये बैठी थी, कोई टीवी सीरियल देख रही थी | प्रियम को देखकर थोड़ी सतर्क हो गयी, संभल कर बैठ गयी, लेकिन अभी तक पालथी मार के बैठी थी पता नहीं क्यों अब आगे की तरफ पैर फैलाकर बैठ गयी |

प्रियम को बेड पर बैठने का इशारा करते हुए- तुम्हे यहाँ देखकर अच्छा लगा, कैसे हो बेटा |

इससे ज्यादा उसके मुहँ से शब्द नहीं निकले, प्रियम का सेक्सुअल हरकत को देखने के कारन वो काफी शर्मिंदगी अभी भी महसूस कर रही थी |उसे समझ नहीं आ रहा था की प्रियम से अब क्या बात करे, कैसे बात करे | पहले वो एक बच्चे की तरह ही उससे व्यवहार करती थी, लेकिन जब से उसने प्रियम को नूतन की चूची चूसते देखा है, उसका प्रियम को लेकर नजरिया ही बदल गया | अपनी सालो से दबी वासना और हवस की कामनाओं के कारन वो और ज्यादा सतर्क थी| वो किसी भी तरह से अपनी हवस को खुद के नियंत्रण से बाहर नहीं जाने देना चाहती थी|

चाची मै आपके लिए एक गिफ्ट लाया हूँ|-प्रियम मुस्कुराते हुए, चाची को चोदने के ख्याल से ही वो बहुत रोमांचित था | उसे चुदाई के बारे में सब पता था, लेकिन कभी किसी लड़की को चोदा नहीं था, इसलिए थोडा नर्वस भी था |

रीमा-क्या लाये हो प्रियम ?

प्रियम -चाची स्कूल में कुक फेस्ट था जिसमे मेरी क्लास फर्स्ट आई है, और मै मॉनिटर हूँ इसलिए सबने मुझे पेस्ट्री गिफ्ट की थी | मै आपके लिए लाया हूँ|

रीमा की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा - सो स्वीट बेटा |

उसने प्रियम के हाथ से पेस्ट्री लेकर उसको खोला और खाने लगी, प्रियम को भी खाने को दी | दोनों इधर उधर की बाते करते करते पेस्ट्री खाने लगे | आधे घंटे के अन्दर तीन पेस्ट्री खाने और दो कोल्ड काफी पीने के बाद रीमा बोली-प्रियम तुम यहाँ आये, बहुत अच्छा लगा, बिलकुल पुराने दिनों की तरह, जब हम साथ बैठकर एक ही प्लेट में ब्रेकफास्ट करते थे |

प्रियम-हाँ चाची बिलकुल पुराने दिनो की तरह, जब आप पास होती है मुझे भी अच्छा लगता है | लेकिन मै आपसे काफी दिनों से कुछ बात करना चाह रहा था लेकिन समझ में नहीं आ रहा, करू कैसे, डर लगता है |

रीमा-अच्छा सच में, ऐसा क्या है जो तुम्हे मुझे बताने में डर लग रहा है |

प्रियम-पता नहीं कैसे आपको एक्सप्लेन करू, लेकिन माँ के न होने की वजह से बहुत सी बाते मेरे लिए एक पहेली की तरह है, जिसकी वजह से मुझे अक्सर प्रॉब्लम होती रहती है |

रीमा संवेदना व्यक्त करते हुए मातृत्व भाव से अपना हाथ प्रियम की जांघ पर रखती हुई-हाँ बेटा, मै समझ सकती |

रीमा निश्चित नहीं थी की उसके साथ वास्तव में क्या हो रहा है, लेकिन उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसने कुछ पैग मारे हुए है और हलके से मादकता वाले नशे में है, लेकिन ये हल्का नशा वैसा नहीं था, ये कुछ अलग था और रीमा इसे पहचान नहीं पा रही थी कौन सी चीज है जिसका उसे हल्का हल्का शुरुर हो गया है |

उसके सामने से प्रियम का चेहरा धुंधला हो चला, उसके पति का चेहरा नजर आने लगा, फिर पिता का चेहरा, और फिर प्रियम का चेहरा दिखने लगा| ऐसा लगा जैसे अपने अतीत की एक पल में यात्रा करके वापस आ गयी हो |रीमा ने फिर से अपना फोकस प्रियम पर किया जो लगातार उसे घूरे जा रहा था, तभी रीमा को लगा बोलने की बारी उसकी है |

रीमा अपने चेहरे पर दोनों हाथ फिराते हुए-प्रियम बेटा सॉरी, पता नहीं मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है, वैसे उसको छोड़ो तुम बतावो मै तुमारी क्या मदद कर सकती हूँ, जो भी कहना हो कह दो डरने की जरुरत नहीं है, मै तुमारी शिकायत तुमारे डैड से नहीं करूंगी |

प्रियम-चाची मुझे नहीं पता की मुझे आपसे ये सब पूछना चाहिए की नहीं लेकिन मै और किसी से पूछ भी नहीं सकता ये सब | मुझे आदमी औरत के बारे में जानना है, मुझे सेक्स मतलब चुदाई के बारे सब कुछ जानना है, बच्चे कैसे पैदा होते, मुझे इन सबके बारे में कुछ नहीं पता है | थोडा निराशा का भाव जाहिर करते हुए |

रीमा ने गहरी लम्बी साँस ली, प्रियम के सवाल से उसे हल्का झटका लगा, लेकिन उसे शर्मिंदगी महसूस नहीं हुई जिसकी वो अपेक्षा कर रही थी | आखिरकार वो भी तो वही कर रही है जो उसकी माँ अगर यहाँ होती तो करती | उसे ये सब बताने में कोई शर्म या झिझक नहीं थी लेकिन वो किस तरीके से समझाए की प्रियम को सब कुछ समझ में आ जाये | रीमा इसी बारे में सोच रही थी की प्रियम ने अगला सवाल दाग दिया, जिसकी रीमा को बिलकुल उम्मीद नहीं थी |

 
प्रियम-चाची मै ठीक से डिटेल्स में जानना चाहता हूँ की आदमी और औरत आपस में चुदाई करते कैसे है |

रीमा को अपने कानो पर यकीन ही नहीं हुआ, आखिरकार अपने भतीजे को वो सेक्सुअल इंटरकोर्स (चुदाई) के बारे में डिटेल्स में कैसे समझाएगी|

प्रियम-सच में चाची मै जानना चाहता हूँ एक लड़की और लड़के में क्या अंतर होता है, बड़े होने के बाद क्या क्या चेंज हो जाते है, आपको तो सब पता होगा |

रीमा लम्बी साँस लेकर-देखो प्रियम, आदमी के पास लंड होता है और औरत के पास चूत होती है, जिसमे में एक छेद होता है, आदमी अपना लंड औरत की चूत में घुसेड़ता है फिर बार बार अन्दर बाहर करता है जिससे उसके लंड से एक सफ़ेद गाढ़ा वीर्य निकलता है, अगर औरत का उस समय अंडा गर्भाशय में होता है तो बच्चे पैदा होता है | इसी को सम्भोग कहते है |

प्रियम-फिर चुदाई क्या होती है,वो एक दूसरे के साथ खेलते क्यों है आदमी औरत की चूचियां क्यों चूसता है,स्कूल में लड़के कुछ ऐसी ही बाते करते रहते है|

रीमा उलझन भरे स्वर में-प्रियम मुझे नहीं पता की ये सब बाते मै मै तुम्हे कैसे समझाऊ|

प्रियम-चाची मै सिर्फ इतना जानना चाहता हूँ की आदमी औरत को चोदता कैसे है, बस?

रीमा एकदम चौक गयी, उसको अपने कानो पर यकीन ही नहीं हुआ, प्रियम उससे इस तरह का सवाल कैसे पूछ सकता है, नहीं पूछ सकता, इस तरह का सवाल नहीं पूछ सकता |

रीमा को बड़ा अजीब लग रहा था पता नहीं उसके साथ क्या गलत था, प्रियम का चेहरा बार बार उसके सामने से गायब हो जाता फिर आ जाता | उसके स्वेटर के अन्दर पसीना निकलने लगा था, उसके शरीर में हलकी सी उत्तेजना भी थी | आखिरकार वो दाहिने हाथ को स्वेटर को हिलाकर अन्दर लग रही गर्मी कम करने लगी | प्रियम समझ गया चाची पर हशीश का असर होने लगा है, वो उत्तेजित होने लगी है, आखिरकार रीमा ने आंखे बंद कर ली, स्वेटर को हिलाना जारी रखा, अब रीमा के ओठ कुछ बुदबुदा रहे थे लेकिन वो क्या बोल रही थी पता नहीं, शायद खुद से ही कुछ कह रही थी | प्रियम ने देखा की अब रीमा की जीभ भी बाहर आकर सूखे ओठो को गीला करके अन्दर चली जा रही है, कुछ देर बाद फिर बाहर आ रही है और सूखे ओठो को रसीला बना रही है | रीमा मदहोशी की गिरफ्त में धीरे धीरे जा रही थी | प्रियम को लगा यही सही समय है जब उसे कुछ करना चाहिए | उसने अपने अन्दर की सारी हिम्मत बटोरी और कापते हुए दाहिने हाथ को, गोरे से कठोर होते रीमा के स्तन की तरफ बढ़ा दिया |

रीमा को तब तक इस बात का अहसास नहीं हुआ जब तक प्रियम ने अपना हाथ रीमा के बड़े से गोल गोरे स्तन पर रख नहीं दिया | रीमा चौक गयी, उसने आंखे खोल दी और खुद को पीछे की तरफ धकेला | प्रियम ने भी डर के हाथ पीछे खीच लिया |

रीमा को समझ नहीं आ रहा था कैसे रियेक्ट करे, वो शॉक में लेकिन चुप थी | वो बोले भी तो क्या बोले, भतीजे की इस हरकत पर बस उसे घूरे जा रही थी, सब कुछ इतना अविश्वासनीय था की उसे अब तक समझ ही नहीं आया क्या बोले, कैसे रियेक्ट करे |

प्रियम डरते हुए-चाची गलती हो गयी प्लीज माफ़ कर दो | बस इतना ही कह पाया |

प्रियम की आवाज सुनकर रीमा की चेतना लौटी और उसने प्रियम को गौर से देखा, उसके अन्दर एक झुनझुनी झंकार जैसी लहर दौड़ गयी जब उसने अपने जवान होते भतीजे की तरफ देखा, दिल की धड़कने तेज हो गयी थी, सांसों की गति बढ़ गयी थी, पेट में लहरे सी उठने लगी थी, सीने पर विराजमान दोनों उन्नत चोटियाँ हर साँस के साथ उठने गिरने लगी थी | उसके अनुसार उसके भतीजे ने जो हरकत की थी इसलिए उसे प्रियम पर बहुत गुस्सा होना चाहिए, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से ऐसा कुछ नहीं था, उसे खुद ही यकींन नहीं हो रहा था की आखिर वो प्रियम से गुस्सा क्यों नहीं है | उसे पता था प्रियम ने जो कुछ किया है जानबूझकर किया लेकिन बजाय उस पर गुस्सा करने के रीमा ने प्यार से उसकी तरफ हाथ बढाया, उसके चेहरे को सहलाया, उसके बालो को कंघी करने लगी |

रीमा-प्रियम तुम्हे क्या हो गया है, तुमने इससे पहले तो ऐसा कभी नहीं किया, बेटा तुमारी प्रॉब्लम क्या है ?

रीमा ने अपने सूखते ओंठो पर जीभ फिराते हुए प्रियम के और नजदीक आ गयी | प्रियम को यकीन ही नहीं हो रहा था, कि रीमा चाची उसकी तरफ बढ़कर और नजदीक आ गयी | ऐसा लग रहा था ये रीमा नहीं बल्कि कोई आत्मा उसके शरीर में घुसकर उसके शरीर को चला रही है | प्रियम हैरान था, रीमा चाची उसको इतने मादक तरीके से कैसे देख सकती है, क्या भरे पुरे बड़े स्तन को छुने से चाची उत्तेजित हो गयी है, क्या वो इतना नजदीक आकर अपने गीले ओठो से मुझे किस करने जा रही है |

 
हल्की मादक कराह के साथ रीमा ने प्रियम का चेहरा बिलकुल अपने सामने किया, प्रियम की आँखों में हल्का आश्चर्य था, इससे पहले वो प्रियम की आंखे और पढ़ पाती, रीमा ने अपने भीग चुके होठो को प्रियम के ओठो पर रख दिया, धीरे से साँस लेटे हुए रीमा ने अपने ओठ खोलकर अपनी जीभ को प्रियम के दांतों के बीच से होते हुए उसके मुहँ की तरफ ठेल दिया | प्रियम को एक झटका सा लगा, रीमा चाची उसको किस कर रही है वो भी अपनी जीभ उसके मुहँ में डालकर डीप किस कर रही है |

दोनों के मुहँ की लार एक में मिलने लगी | रीमा प्रियम को मातृत्व भाव से नहीं चूम रही थी, बल्कि अपनी जबान से प्रियम की जबान चूस रही थी चूम रही थी | उनकी बड़े बड़े स्तनों से भरी पूरी छाती, प्रियम के सीने से टकरा रही थी| वो चाची के दोनों स्तनों का भरपूर कसाव दबाव अपने सीने पर महसूस कर पा रहा है, रीमा की सांसे तेज चल रही और उसका पूरा शरीर उत्तेजना के कारन कांप रहा था | प्रियम ने भी अपने हाथ रीमा चाची की कमर पर रख दिए और हलके हलके सहलाते हुए पीठ पर ऊपर बांहों तक ले जाने लगा, थोड़ी देर के बाद सहलाने में कसाव बढ़ गया, पीठ पर ऊपर की तरफ हाथ जाते ही प्रियम रीमा को कसने की कोशिश कने लगा | जिससे पहले से ही सीने से रगड़ रहे कुचल रहे रीमा के बड़े स्तन और कसकर प्रियम से सीने से रगड़ने लगे | प्रियम के शरीर की कंपकपी बता रही थी की उसकी उत्तेजना बहुत बढ़ गयी है, रीमा को प्रियम की कंपकपी से उसकी उत्तेजना पता लग रही थी, उसे पता था वो जो कर रही है वो पाप है, घोर पाप, विक्षिप्त क्रिया है, कामरोगी की लालसा है फिर भी रीमा ही प्रियम को उत्तेजित कर रही थी और बदले में प्रियम की हरकतों से उसकी उत्तेजना और बढ़ रही थी | ये सब जानते हुए भी वो खुद को रोक नहीं पा रही थी |

उसकी छाती से अपने भतीजे के लिए वर्षो से जमा प्यार निकल रहा था और खुद उसका शरीर अपने अन्दर की छिपी हुई वासना और हवस का समुन्दर बाहर निकालने को आतुर था | रीमा को पता था ये खतरनाक है लेकिन फिर भी वो खुद को रोक पाने से असमर्थ थी |

रीमा के अन्दर वासना का समन्दर हिलोरे मार रहा था ऐसे में वह कहाँ से खुद को रोक पाती | उसने प्रियम के ओठो से ओठ हटा लिए, अपने चेहरे को उसके गालो पर रगड़ने लगी, उसके कानो में फूंक मारने लगी | इसी बीच प्रियम का एक हाथ रीमा के स्तन को मसलने दोनों के चिपके शरीरो के बीच से फिसलता हुआ रीमा की छाती तक पंहुच गया, जिसे रीमा ने बैगनी रंग की ब्रा में ढक रखा था | रीमा चाहकर भी विरोध नहीं कर पाई |

प्रियम अपनी सांसे काबू करता हुआ बोला- चाची प्लीज अपनी गोल गोल बड़े बड़े स्तनदिखावो न, चूमना चाटना रगड़ना मसलना चोदना ये सब कैसे करते है बतावोगी न|

रीमा को यकीन नहीं हुआ की वो क्या सुन रही है | नहीं ये तो कुछ ज्यादा ही हो रहा है सीधे सीधे ये खुला चुदाई के आमंत्रण का अनुरोध था | आमतौर पर ऐसी बात कहने वाले से रीमा को काफी नाराज और गुस्सा होना चाहिए था लेकिन यहाँ ऐसा कुछ हो नहीं रहा था इसलिए उसको आश्चर्य था | भतीजे को लेकर लगाव और भतीजे को लेकर वासना के बीच वो कंफ्यूज हो गयी थी, उसे समझ ही नहीं आ रहा था क्या कहे? ऊपर से अतृप्त काम भावनावो का ज्वार उसकी वजह उसका रिएक्शन बिलकुल अलग था | ये वो रीमा थी ही नहीं ये कोई और था जो रीमा के शरीर को वासना में बहाए ले जा रहा था |

प्रियम - चाची प्लीज क्या आप अपने प्यारे भतीजे के लिए इतना करोगी?

रीमा धीरे से प्रियम के कान में फुसफुसाई- नहीं प्रियम मै नहीं कर सकती, मै नहीं कर पाऊँगी, मै नहीं ...|

रीमा को इसका अहसास भी नहीं था की बातो बातो में प्रियम ने उसका दूसरा हाथ पकड़ कर धीरे धीरे खिसकाते हुए नीचे ले गया है और अपनी दोनों जांघो के बीच बिलकुल उस जगह पर जाकर रख दिया है जहाँ उसके खड़े लंड की वजह से पेंट के अन्दर तम्बू तन गया है | क्या रीमा को पता था की उसका एक हाथ,पेंट के ऊपर से प्रियम के तन चुके लंड को सहला रहा है

दूसरी तरफ रीमा की कमर के आस पास एक नयी झुनझुनी दौड़ गयी जब प्रियम का वो हाथ जो अब तक रीमा के बड़े बड़े स्तनों को मसल रहा था कुचल रहा था, नीचे घुटने के पास से स्कर्ट खिसकाते हुए मखमली नरम जांघ पर हाथ फेरते हुए आगे कमर की तरफ बढ़ने लगा | प्रियम ने स्कर्ट ऊपर की तरफ उड़ेल दी, रीमा की झीनी पारदर्शी पैंटी दिखने लगी | प्रियम को यकीन नहीं हुआ रीमा चाची, इस तरह की पैंटी पहनती होगी |

 
पैंटी भी इतनी बड़ी थी की बमुश्किल ही रीमा चाची की चिकनी चूत को ढक पा रही थी | पैंटी देखते ही खून का दौरान लंड की तरफ और तेज हो गया | प्रियम की उत्तेजना और जोश का कोई ठिकाना नहीं था, उसका शरीर पर से काबू हटने लगा था | उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था की ये सब वो अपनी चाची के साथ कर रहा है और वो करने भी दे रही है | उसने रीमा चाची की पैंटी कभी धुप में तक सुखती नहीं देखती थी | आज उनकी गोरी चिकनी जांघो के बीच पहने देखा, उसका अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं रहा | इधर उधर दिमाग दौड़ाने की बजाय उसने अपनी चाची के स्तनों को मसलना शुरू किया, जबकि रीमा का एक हाथ उसके खड़े लंड से बने पेंट के तम्बू पर आराम कर रहा था | उसके लंड में खून का दौरान और तेज हो गया था | प्रियम का रीमा चाची के कपडे उतारकर उनकी गोल चिकनी नरम गुदाज गोरी जांघो और नितम्बो को देखने की कल्पना मात्र से रोमांच की उत्तेजना पर पंहुच गया | ये सब कुछ उसकी उम्मीदों से बहुत ज्यादा था, जिसकी उसने कल्पना तक नहीं की थी | पता नहीं इतना रोमांच और उत्तेजना वो सहन भी कर पायेगा या नहीं | उसका लंड इतना ज्यादा कड़ा हो चूका था की उसे लग रहा था कि अगर अन्दर का दहकता लावा बाहर नहीं निकाला, अगर उसने अपनी चाची को नहीं चोदा तो कही ये पेंट में ही ना फट जाये | प्रियम का दिमाग सातवे आसमान पर था |

रीमा ने अपने अन्दर की सारी ताकत इकट्ठी की और प्रियम को खुद से दूर धकेला | उसके बाद नीचे की तरफ अपने शरीर को देखने लगी | कमर के नीचे वो पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी बस वो छोटी सी झीनी पारदर्शी पैंटी ही थी जो बमुश्किल ही उसकी चूत और उसके चारो ओर के काले बालो को ढक पा रही थी | बाकि उसके पैरो से लेकर जांघो और कमर तक कुछ भी उसके तन पर नहीं था | स्कर्ट खिसक के नाभि तक पंहुच गयी थी | उसके बाद रीमा की नजर प्रियम की पेंट की तरफ गयी, पेंट के अन्दर के तने लंड के कारन बने तम्बू को देखकर उसकी साँस अटक गयी | नहीं ये सच नहीं हो सकता, ये सब रियल नहीं है, ये मै कोई सपना देख रही है, ये सब सच नहीं है |

रीमा के इस तरह अलग होने से प्रियम झुंझला गया- चाची प्लीज मुझे करने दो, मुझे इसकी सख्त जरूरत है, मेरे पैर देखो कैसे काँप रहे है| प्लीज चाची, नीचे लंड में दर्द होने लगा है प्लीज …..|

रीमा प्रियम का झुन्झुलाहट साफ साफ देख रही थी, गलती प्रियम की नहीं थी, वही तो उसको यहाँ तक लायी थी, अब बीच में कैसे छोड़ सकती है, उसको बीच में नहीं छोड़ा जा सकता, अगर बीच मझदार में प्रियम को छोड़ दिया तो आगे चलकर ये सब उसे नुकसान पंहुचा सकता है | पेंट के अन्दर खड़े लंड की तरफ देखकर उसको प्रियम पर दया आ गयी, आखिर वो इतनी कठोर कैसे हो सकती है, आखिर है तो वो उसका भतीजा ही| अभी अगर बच्चे के खड़े लंड को शांत नहीं किया तो आगे' चलकर हो सकता है इसका सेक्स से इंटरेस्ट ही खतम हो जाये, जो सकता है ये लडकियों के पास जाने से कतराने लगे, औरतो से नफरत करने लगे, कही लडको की तरफ न आकर्षित हो जाये ब्ला ब्ला........., पता नहीं कितने ख्याल उसके दिमाग में आये और निकल गए |

रीमा-एक शर्त है, तुम किसी को कुछ नहीं बतावोगे, मुझसे प्रोमिस करो |

प्रियम उत्साह से बोला- प्रोमिस |

रीमा-प्रियम मै तुम्हे प्यार नहीं कर सकती, नहीं कर सकती.........मेरी आत्मा मुझे ऐसा करने नहीं देगी |

प्रियम-लेकिन.........

रीमा- तुम्हे इस तरह की हालत में छोड़ने के लिए मै बहुत दुखी है, काश मै वो कर पाती जो तुम चाहते हो |

रीमा ने अपना हाथ नीचे की तरफ कमर पर ले गयी, और अपनी स्कर्ट ठीक की, उसे प्रियम को इस हालत में छोड़ना अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन वो अब तक के अपने अस्तित्व के खिलाफ जाकर कुछ ऐसा भी नहीं कर सकती थी की अपनी ही नजरो में गिर जाये |जो कुछ थोड़ी देर पहले हो रहा था वो काम विक्षिप्त पागलपन था फिर भी वो खुद को न रोक सकी | लेकिन प्रियम को इस हालत में छोड़ भी नहीं सकती थी |

रीमा-क्या तुमारे पास रूमाल है ?

प्रियम- हाँ

रीमा- मुझे दो

प्रियम ने रूमाल अपनी चाची को दे दिया लेकिन उसे समझ नहीं आया वो इसका करेगी क्या |

रीमा ने रूमाल को अपने पेट पर बिछा लिया और प्रियम की पेंट की जिप खोलने लगी, और अपने अन्दर के कामुक मादक आहों को दबाने की कोशिश करने लगी | रीमा के हाथ प्रियम के लंड तक पंहुच गया था उसने लंड को कसकर पकड़ लिया |

रीमा ने महसूस किया की प्रियम का लंड पकड़ते ही उसकी कमर ने उत्तेजना की कारन झटके लगने शुरू हो गए थे, रीमा ने एक हाथ से गरम, खून से भरे मांस की गरम राड, लोहे की तरह सख्त हो चके लड़ को कसकर पकड़ा, दुसरे हाथ से प्रियम का शॉर्ट्स को किनारे करने लगी, और लंड को बाहर निकाल लिया, प्रियम का लंड ज्यादा बड़ा तो नहीं था लेकिन पत्थर की तरह कठोर हो चूका था |प्रियम के दुविधा भरे चेहरे को देखकर उसने लंड को जड़ से पकड़कर जोर से ऊपर नीचे किया और एक हल्की चिकोटी भी काट ली | प्रियम के चहरे पर उत्तेजना और संसय दोनों नजर आ रहे थे | रीमा ने जीभ से अपने ओठो को गीला किया और तेज खून के बहाव के चलते कांपते लोहे की तरह सख्त हो चुके लंड को भूखी नजरो से देखते हुए रीमा कहने लगी - मै तुमारा मुठ मारने जा रही हूँ प्रियम |

 
प्रियम के चेहरे पर निराशा की लकीरे तैर गयी, रीमा ने प्रियम के लंड से खेलना शुरू कर दिया, उसकी लंड की खाल को धीरे धीरे ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया | रीमा की उंगलियों की मालिश से उसे बड़ा अच्छा फील हो रहा था , इतना अच्छा उसे आज तक किसी दूसरी चीज से नहीं हुआ, उसने भी कई मार मुठ मारे है इसकी उससे तुलना करना ही बेकार है, रीमा के कोमल हाथो से उसके लंड पर लग रहे झटके से इतना अच्छा प्रियम को कभी महसूस नहीं हुआ | लेकिन प्रियम सिर्फ मुठ मार के झड़ने से संतुष्ट नहीं था, वो अपनी प्यारी चाची की चिकनी चूत में अपना नया नवेला लंड डालना चाहता था | अपनी वेर्जिनिटी खोना चाहता था | लेकिन अपनी चाची को चोदने से उसे डर भी लग रहा था भले ही वो कितना भी चाहता हो लेकिन जब हकीकत में करना होता है तो अच्छे अच्छो की हवा ख़राब हो जाती है | उसने क्या क्या सपने देखे थे और यहाँ क्या हो रहा था |

प्रियम ने थोडा चिंतित होकर-लेकिन चाची !!!!

रीमा- क्या मजा नहीं आ रहा डार्लिंग? प्रियम के मायुस हो चुके चेहरे की तरफ देखते हुए |

रीमा ने फुर्ती से पास की ड्रोर से एक आयल निकाला और प्रियम के लंड पर उड़ेल दिया और उसके लंड के चारो और तेजी से हाथ ऊपर नीचे करने लगी | रीमा के हाथ नीचे जाते ही तेल से सना सुपदा चमकने लगता और ऊपर आते ही अपनी ही खाल में घुस कर कही गुम सा हो जाता | तेल लगाने से अब हाथ आसानी से लंड पर फिसल रहे थे |

प्रियम सीत्कार भरते हुए-चाची मजा तो आ रहा है लेकिन मै आपको चोदना चाहता था |

चोदना शब्द सुनकर एक कामोत्तेजक कंपकपी रीमा के पुरे शरीर में दौड़ गयी | ये मै क्या सुन रही हूँ, क्या मेरे कानो ने जो सुना वही प्रियम ने बोला है या ये मेरी कल्पना है | भले ही प्रियम कुछ भी बोले लेकिन उसे अपने को काबू में रखना है| भले ही उसकी खुद का मन प्रियम की बात मानने को करे लेकिन उसे खुद को रोकना होगा, काबू में रखना होगा |

जैसे जैसे रीमा प्रियम के खून से लबालब भरे खड़े लंड पर झटको को स्मूथ और लयदार करती उसी तरह प्रियम की कमर झटके मारती रहती | धीरे धीरे रीमा ने स्ट्रोक्स की रफ़्तार बढ़ा दी, बीच बीच में हशीश के असर कारन सुख रहे ओठो पर अपनी जुबान फिराती रहती | अब उसने लंड पर हथेली की कसावट और तेज कर दी थी और अपनी पूरी स्पीड से लंड की खाल को ऊपर नीचे करने लगी | तभी लंड के सुपारे पर उसे वीर्य के निकलने से पहले निकलने वाली कुछ बूंदे नजर आई | रीमा ने हाथो के ऊपर नीचे करने की स्पीड कम कर दी | और फिर कलात्मक तरीके से उंगलियाँ लंड पर फिराने लगी | हवस की आग में जलती रीमा की अतृप्त कामवासना उससे कुछ नए खेल खिलवाना चाहती थी जो उसकी चेतना को खत्मकर सही गलत सबका भेद मिटा दे | बस रह जाये तो वासना वासना और वासना | उसे कभी भी इस तरह से जीवन में नहीं सोचा था |

वो जानती थी की वो जो करने जा रही है उसके परिणाम और ज्यादा भयानक हो सकते है, क्योंकि जो वो सोच रही है वो भतीजे को मुठ मारने से ज्यादा पतनशील है | लेकिन वो वासना के हाथो मजबूर थी जो विचार एक बार दिमाग में आ गया अब उससे पीछे हट पाना उसके लिए बहुत मुश्किल था |नया विचार बड़ा रोमांचकारी, कामुक वासनायुक्त और उत्तेजना लाने वाला था |

रीमा की कलात्मक जादुई झटके लगाने से प्रियम बार बार आनंद में गोते लगाकर कराह रहा था और उसकी कमर भी बार बार झटका दे रही थी | रीमा ने थोडा सा आयल उसके लंड के सुपाडे पर लगाया और धीरे धीरे सुपाडे पर उंगलियों से सहलाने लगी , सुपारे को तेल में नहलाकर उंगलियों से उसकी मालिश करने लगी | इतने प्यार और जादुई तरीके से लंड की मालिश होने से प्रियम आनंद की सागर में गोते लगाने लगा, लेकिन रीमा ने उसके चेहरे की शर्म और निराशा साफ़ पढ़ ली | भले ही प्रियम किस हद तक चाची को चोदने के बारे में सोचता हो लेकिन आज उनके सामने उन्ही के हाथो द्वारा, रूमाल पर खुद को झड़ते हुए देखना उसे बड़ा शर्मिंदगी भरा लगा |अपनी चाची को सामने लंड सहलाते देख उसे अब शर्म महसूस होने लगी | रीमा को भी लग रहा था की अपने भतीजे को सिर्फ मुठ मारकर झाड़ देना उसके साथ बहुत अन्याय होगा, अगर उसे मुठ ही मारनी होती तो वो मेरे पास क्यों आता | वो इससे ज्यादा का हकदार है |

 
रीमा ने अब धीरे धीरे हाथो को हरकते बिलकुल बंद कर दी थी | वो प्रियम के साथ ऐसा कैसे कर सकती है | वो इस तरह से अपने छोटे से भतीजे को कैसे अपमानित कर सकती है | आखिर वो बच्चा ही तो है और सेक्स के बारे में सीखना चाहता है | तो क्या मै उसे सिर्फ मुठ मार के भगा दू, मै इतनी सेल्फिश कैसे हो सकती हूँ | प्रियम के बहाने रीमा अपने अन्दर दबी काम वासनाओं को बाहर लाने लगी | रीमा सिर्फ प्रियम की संतुष्टि के बारे में सोचने लगी | प्रियम मेरे पास एक उम्मीद लेकर आया था और एक शानदार तरीके से उसको संतुष्टि मिलनी चाहिए | उसे सिर्फ मेरे हाथो झटके खाते हुए नहीं झड़ना चाहिए | इतना सोचकर रीमा ने प्रियम के खून से भरे फडकते लंड से हाथ दूर खीच लिया |

प्रियम को कुछ समझ नहीं आया - चाची क्या हुआ …

रीमा- बेटा मुझे लगता है जो मै तुमारे साथ कर रही हूँ ये बहुत नाइंसाफी होगी | इसलिए मै कुछ और करने जा रही हूँ, मुझे इससे अच्छा तरीका पता है तुमारे फडकते तडपते खून से लबालब भरे फूले लंड की मालिश करने का | और तुमारे अन्दर सुलग रहे ज्वालामुखी के अन्दर भरे गरम सफ़ेद गाढे लावे को बाहर निकालने का |

प्रियम उत्साह से सरोबार होकर- तो क्या आप मुझे अपनी चूत मारने देगी, क्या मै आपको चोद सकता हूँ ?

रीमा के ओंठो पर हल्की मुस्कान तैर गयी, फिर सर झटकते हुए बोली-नहीं प्रियम मैंने तुम्हे पहले ही बोला है मै तुमारी चाची हूँ, तुमारी माँ के उम्र की, तुम मुझे नहीं चोद सकते | मै तुमारे लंड को चूसने जा रही हूँ | मै तुमारे लोहे जैसे सख्त कठोर तड़पते फूले लंड को अपने मुहँ में लूंगी और जैसे आइसक्रीम चूसते है वैसे चूसूंगी, समझे | मुझे चोदने का ख्याल अपने दिमाग से निकाल दो |

रीमा प्रियम के चेहरे पर फिर से उभर आई निराशा देखकर थोडा झिझकी, उसके बाद उसकी खुद की काम वासना हिलोरे मारने लगी , बच्चे के सुख के लिए उसके खड़े फूले हुए लंड के लिए अपना मुहँ और गुलाबी गीले ओठ ऑफर करने का ख्याल ही उसके शरीर में एक सिरहन सी दौड़ा गया | उसकी मन की चेतना में धीरे धीरे हो रही गिरावट में यह एक और कदम नीचे की ओर था | फिर से उसने फूले हुए , खून से भरे फड़कते तने लंड को पकड़ कर नीचे की तरफ झुकी और पोजीशन बनाकर ऐसे झुकी की लंड उसके मुहँ के सामने आ जाये | जब लंड का सुपाडा मुहँ से बस एक इंच दूर रहा गया तो रीमा ने थोड़े से ओठ खोले और एक हल्की सी फूंक लंड के सुपाडे पर मारी | उसकी उंगलियों ने हलके हलके फिर से लंड को रगड़ना शुरू कर दिया था |

फिर पता नहीं क्या सोचकर रीमा के लंड को कसकर पकड़कर तीन बार जोर से ऊपर नीचे किया | प्रियम दर्द और आनंन्द से कराहने लगा | उसके बाद रीमा ने थोड़ा और ओठ खोले, ओठो पर जीभ फिरा कर उसको गीला किया | फिर थोड़ा सा और झुक कर पूरी जीभ बाहर निकाल ली | जीभ का अगला हिस्सा सुपाडे के छेद तक पंहुच गया था, रीमा ने जल्दी से प्रीकम की निकल आई बूंदों को जीभ से चाट लिया |

प्रीकम की बूंदों के स्वाद ने रीमा की भूख और बढ़ा दी | अब उसकी काम वासना और ज्यादा भड़क, शर्म हया नैतिकता के लिए अब कोई जगह नहीं थी, बस वासना का खेल था, शरीर की हवस मिटाने का हर जतन हो रहा था लेकिन जितनी हवस की भूख को शांत करने की कोशिश करती उतना ही काम वासना की आग भड़कती चली जाती |

रीमा के जीवन में ये पहला मौका था जब वो किसी का लंड चूसने जा रही थी | यहाँ तक की उसने अपने पति का भी लंड कभी मुहँ से नहीं लगाया था | एक दो बार सुपाडा चाटने के बाद रीमा ने थोड़े और ओठ चौड़े किये और मुहँ खोला | धीरे से प्रियम के लंड के सुपाडे के चारो ओर ओठो का घेरा बना लिया | लार से सनी लसलसी जीभ अब सुपाडे के चारो ओर घूम रही थी |

प्रियम की कामुक कराहे उसकी उत्तेजना के साथ बढ़ रही थी, उसके नितम्ब बढ़ती उत्तेजना के कारन ऐठ रहे थे | रीमा अपने हाथ को फिर से लंड की जड़ में ले गयी और लंड के सुपाडे के थोड़ा सा और मुहँ के अन्दर ठेल दिया, देखते ही देखते, खून से भरा लाल सुपाडा रीमा के गीले और गरम मुहँ में समा गया | जैसे ने रीमा ने लार से भरा मुहँ से प्रियम की कमर के झटके से हिलते लंड के सुपाडे को पहली बार चूसा, प्रियम के मुहँ से हल्की सी मादक आह निकल गयी | लेकिन अभी भी रीमा ने लंड को ओठो से दूर रखा हुआ था |

रीमा की लार से सनी गुनगुनी जीभ प्रियम के फूले हुए टमाटर की तरह लाल हो चुके सुपाडे के चारो तरफ नाच रही थी बीच बीच में मुहँ खोलकर रीमा अपनी लम्बी जीभ लंड पर फिराती हुई नीचे की तरह ले जाती और फिर शरारतपूर्ण तरीके से वापस मुहँ में ले आती |

रीमा प्रियम के लंड के सुपाडे पर जीभ फिर रही थी | सुपाडे को जीभ से चाट रही थी जैसे कोई लोलीपोप चूसता है |

उसके बाद रीमा ने उसके सुपाडे को कसकर ओठो से जकड लिया | ओठ बंद करके सुपाडा चूसने लगती, जैसे बच्चे टॉफी चूसते है , और धीरे धीरे अपना सर हिलाने लगी ,प्रियम कामुक लम्बी कराहे भर रहा था |

कुछ देर बाद अचानक प्रियम का हाथ रीमा के सर तक पंहुच गया, उसने रीमा के काले बालो को मजबूती से पकड़ लिया और उसके सर को नीचे की तरफ ठेलने लगा | रीमा इस तरह के हमले के लिए तैयार नहीं थी | उसे प्रियम का पूरा लंड गटकना पड़ा | प्रियम का लंड उसके ओठो को चीरता हुआ, खुरधुरी जीभ पर से गुजरता हुआ रीमा के गले तक पंहुच गया | रीमा को लगा किसी ने उसका गला घोट दिया, अन्दर की साँस अन्दर रह गयी बाहर की बाहर, उसका दम घुटते घुटते बचा था | उसको तेज खांसी सी आ गयी और मुहँ में पूरा लंड होने की वजह से घुट कर रह गयी |

रीमा के अन्दर विरोध और आनन्द दोनों के भाव थे, वो प्रियम को रोकना चाहती थी लेकिन इस काम पीड़ा में उसे मजा आ रहा था | प्रियम की ये आक्रामकता रीमा को अच्छी लग रही थी असल में उसे गर्व हो रहा था की बच्चा इतनी जल्दी मुहँ में चोदना सीख गया | रीमा ने मुहँ से ही लम्बी साँस ली और प्रियम के लंड की जड़ के चारो ओर सख्ती से अपने ओठ कसे दिए और रीमा चाची उसका पूरा लंड गयी, इस बात का अहसास होते ही प्रियम की मादक कराहे पूरे कमरे में गूजने लगी, उसकी हिलती कमर के साथ उसका पूरा शरीर कम्पन करने लगा |

रीमा जोर जोर से चीख कर कहना चाहती थी- हाँ बेटा इसी तरह से धक्के मार मार कर उसके मुहँ को चोद डालो, कसकर चोदो, और दम लगाकर चोदो, और चोदते रहो | लेकिन कह नहीं पाई, प्रियम की कमर जोर से धक्का मार के लंड को रीमा के मुहँ में ठेल रही था, लेकिन प्रियम का खुद पर नियंत्रण नहीं था, उसका शरीर उत्तेजना के आवेश में कांप रहा था इसलिए उसके झटको में स्थिरता की कमी थी और ये ज्यादा देर तक करना खतरनाक था | इससे रीमा के मुहँ में प्रियम का फूला हुआ कठोर लंड इधर उधर टकरा सकता था या रीमा के दांत प्रियम के लंड पर लग सकते थे ये रीमा भली भांति जानती थी | इसी बीच उसे प्रियम से कुछ मस्ती करने की सूझी |

 
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