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रीमा - इसकी खड़ी होने की इक्षा है तो इसे खड़ा क्यों नहीं करता, चल इसको हाथ में ले और मुठिया, तब तक मुथियाता रह जब तक पूरी तरह खड़ा न हो जाये |
प्रियम ने ना नुकुर करने की कोशिश की तो कुछ रूककर धमकाते हुए बोली - अच्छी तरह से कान खोलकर सुन ले, अगली बार ऐसी हरकत करी ना तो मशीन में डाल कर चुसवा दूगी लंड को, गोलिया का सफ़ेद रस तो छोड़ो खून भी निकल लेगी वो, इसलिए आज के बाद किसी चूत को ब्लैकमेल करने की कोशिश मत करना | आज तो तेरे नसीब में चूत है नहीं इसलिए इसे हिला हिलाकर ही शांत करना पड़ेगा | चूत बड़े नसीब वाले और समार्ट लंडो को मिलाती है, चुतिया लोगो को नहीं | अगली बार ये चुतियापंती करी न तो तुमारी गांड चौड़ी करने के और भी हथियार और तरीके है मेरे पास | चल शुरू हो जा और जब तक मै न बोली हाथ लंड पर से न हटना चाहिए न रुकना चहिये |
रीमा ने ब्रा भी उतार दी, अब वो फिर से पूरी तरह नंगी हो चुकी थी, उसके लिए घर के अन्दर इस तरह से नंगा होना अब आम बात थी | उसने जिस्म पर लगा थोड़ा बहुत आटा झाड़ा और फ्रिज से एग लेने चली गयी | एक को बीचो बीच बेले हुए आटे पर फोड़ दिया | उसके भरे भरे सुडौल तने हुए स्तन उसके झुकने से उलटी पहाड़ी की आकृति बना रहे थे और उसके नाभि के नीचे चिकने सपाट चूत त्रिकोण मैदान को पार करते हुए, उसकी चूत का चीरा भी दिख रहा था | रीमा प्रियम को सजा देकर बहुत खुश थी, उसे प्रियम को सबक सिखाते हुए बड़ा मजा आ रहा था | सबसे बड़ी बात जिस कॉन्फिडेंस के साथ उसने प्रियम की बजाई थी वो काबिले तारीफ था | उसने चार बार प्रियम को झाड़ा लेकिन मजाल है जो प्रियम एक बार भी उसका मजा लूट पाया हो | गाड़ फाड़ कर रख दी उसकी |
प्रियम की हालत देखकर वो अन्दर से मन ही मन बहुत गदगद थी, शायद ये खुसी उसके औरतपन को और उसकी वासना को चुनौती देने वाले मर्दाना सोच की ये हालत देखकर ज्यादा थी | प्रियम ने एक तरह से उसके वासना और स्त्रीत्व को ही ललकार दिया था | रीमा बिना लंड, बिना मर्द के भी अपनी वासना और हवस में डूबकर खुद तो तृप्त कर सकती है, शायद यही यो प्रियम को दिखाना चाहती थी | मर्द को अपनी भूख मिटाने को औरत का जिस्म चाहिए लेकिन औरत खुद में खुद से खुद के लिए एन्जॉय कर सकती है | प्रियम अपने अर्द्ध मुरझाये लंड पर अपना हाथ ऊपर नीचे कर रह था और उसके लंड में भी जान वापस आने लगी थी | धीरे धीरे ही सही वो फिर से सख्त होने लगा | रीमा ये देखकर मस्तिया गयी, की उसके खूबसूरत जादुई जिस्म में इतनी जान है चार बार के झड़े मुरझाये लंडो में भी जान डाल दे | उसने बेली हुई रोटी धीरे से किनारे करी और उसी पत्थर पर लोट गयी | सारा आटा उसके जिस्म लग गया | उसके बड़े बड़े उभरे मांस से लदे भारी भरकम चूतड़, जांघे, सुडौल छातियाँ सब आटे से सन गए |
प्रियम ने ना नुकुर करने की कोशिश की तो कुछ रूककर धमकाते हुए बोली - अच्छी तरह से कान खोलकर सुन ले, अगली बार ऐसी हरकत करी ना तो मशीन में डाल कर चुसवा दूगी लंड को, गोलिया का सफ़ेद रस तो छोड़ो खून भी निकल लेगी वो, इसलिए आज के बाद किसी चूत को ब्लैकमेल करने की कोशिश मत करना | आज तो तेरे नसीब में चूत है नहीं इसलिए इसे हिला हिलाकर ही शांत करना पड़ेगा | चूत बड़े नसीब वाले और समार्ट लंडो को मिलाती है, चुतिया लोगो को नहीं | अगली बार ये चुतियापंती करी न तो तुमारी गांड चौड़ी करने के और भी हथियार और तरीके है मेरे पास | चल शुरू हो जा और जब तक मै न बोली हाथ लंड पर से न हटना चाहिए न रुकना चहिये |
रीमा ने ब्रा भी उतार दी, अब वो फिर से पूरी तरह नंगी हो चुकी थी, उसके लिए घर के अन्दर इस तरह से नंगा होना अब आम बात थी | उसने जिस्म पर लगा थोड़ा बहुत आटा झाड़ा और फ्रिज से एग लेने चली गयी | एक को बीचो बीच बेले हुए आटे पर फोड़ दिया | उसके भरे भरे सुडौल तने हुए स्तन उसके झुकने से उलटी पहाड़ी की आकृति बना रहे थे और उसके नाभि के नीचे चिकने सपाट चूत त्रिकोण मैदान को पार करते हुए, उसकी चूत का चीरा भी दिख रहा था | रीमा प्रियम को सजा देकर बहुत खुश थी, उसे प्रियम को सबक सिखाते हुए बड़ा मजा आ रहा था | सबसे बड़ी बात जिस कॉन्फिडेंस के साथ उसने प्रियम की बजाई थी वो काबिले तारीफ था | उसने चार बार प्रियम को झाड़ा लेकिन मजाल है जो प्रियम एक बार भी उसका मजा लूट पाया हो | गाड़ फाड़ कर रख दी उसकी |
प्रियम की हालत देखकर वो अन्दर से मन ही मन बहुत गदगद थी, शायद ये खुसी उसके औरतपन को और उसकी वासना को चुनौती देने वाले मर्दाना सोच की ये हालत देखकर ज्यादा थी | प्रियम ने एक तरह से उसके वासना और स्त्रीत्व को ही ललकार दिया था | रीमा बिना लंड, बिना मर्द के भी अपनी वासना और हवस में डूबकर खुद तो तृप्त कर सकती है, शायद यही यो प्रियम को दिखाना चाहती थी | मर्द को अपनी भूख मिटाने को औरत का जिस्म चाहिए लेकिन औरत खुद में खुद से खुद के लिए एन्जॉय कर सकती है | प्रियम अपने अर्द्ध मुरझाये लंड पर अपना हाथ ऊपर नीचे कर रह था और उसके लंड में भी जान वापस आने लगी थी | धीरे धीरे ही सही वो फिर से सख्त होने लगा | रीमा ये देखकर मस्तिया गयी, की उसके खूबसूरत जादुई जिस्म में इतनी जान है चार बार के झड़े मुरझाये लंडो में भी जान डाल दे | उसने बेली हुई रोटी धीरे से किनारे करी और उसी पत्थर पर लोट गयी | सारा आटा उसके जिस्म लग गया | उसके बड़े बड़े उभरे मांस से लदे भारी भरकम चूतड़, जांघे, सुडौल छातियाँ सब आटे से सन गए |