S
StoryPublisher
Guest
रीमा ने अपना हाथ प्रियम के हाथ पर रखा और उसे रुकने को कहा | प्रियम फिर भी नहीं रुका और इसलिए रीमा ने झटके से से खुद को अलग किया, एक लम्बी साँस ली, जैसे किसी का कुछ देर तक गला दबाये रखो फिर छोड़ दो | रीमा की हालत भी कुछ ऐसी हो गयी थी | उसने दो तीन सांसे जोर जोर से ली फिर प्रियम पर चीखी-जब मै चूस रही हूँ तो मुझे अपने तरीके से चूसने दो समझे | तुम तो मेरा गला घोट कर मेरी जान लेने पर उतार आये हो |
प्रियम को कुछ समझ ही नहीं आया, कहाँ वो आनंद के सागर में गोते लगा रहा था और कहाँ रीमा का गुस्सा देख प्रियम ने रीमा के सर से तुरंत हाथ हटा लिया |
रीमा प्यार से -बेटा चुदाई चुसाई प्यार से करने की चीजे होती है इनमे जल्दबाजी ठीक नहीं | मुझे करने दो न | मै कर तो रही हूँ, क्या तुम्हे मजा नहीं आ रहा | अगर आ रहा है तो क्यों जल्दबाजी कर रहे हूँ | अगर तुम्हे मुहँ में चोदना है तो बता दो मै उसका तरीका बताती हूँ | पूरा का पूरा लंड मुहँ में पेलना चाहते हो तो मै तरीका बताती हूँ, मुझे कहो तो एक बार |
इतना कहकर रीमा ने लंड पकड़कर मुहँ में ले लिया और कसे ओठो के साथ पूरा अन्दर लेती चली गयी |
पहले जहाँ सिर्फ सुपाडे से खेल रही थी अब पूरा लंड मुहँ में लेकर चोद रही थी | रीमा ने प्रियम से इशारे में अपनी कमर हिलाने को कहा, प्रियम कमर को जोर जोर के झटके देने लगा| रीमा के कसे ओठो से गुजरता हुआ लंड पूरा का पूरा मुहँ में समा जाता और फिर एक झटके में बाहर आ जाता | लेकिन अब रीमा के मुहँ और प्रियम के लंड के बीच में उसका हाथ था जिससे वो ज्यादा तेज धक्के को नियंत्रित कर सकती थी | उसने अपने हाथ की उंगली और अंगूठे से एक छल्ला सा लंड की जड़ में बना लिया था | इससे वह लंड के इधर उधर भागने या तिरछा हो जाने को रोक सकती थी | जब प्रियम नितम्बो को जोर जोर से उछालने लगा तो रीमा ने अपने ओठो का कसाव थोडा कम कर दिया, और लंड की जड़ से अपने हाथ का घेराव हटा लिया ताकि प्रियम का लंड आसानी से पूरा का पूरा मुहँ में चला जाये और बच्चे को मुहँ चोदने का भरपूर आनंद मिले | दुनिया का कोई भी लंड हो वो औरत के किसी भी छेद में पूरा का पूरा समा जाने को आतुर होता है और ये बात रीमा अच्छी तरह से जानती थी | बार बार रीमा को अहसाह हो रहा था की खून के भरा, फड़कता गरम लंड उसके नरम नरम गुनगुने गीले मुहँ में ठेला जा रहा है | प्रियम के कमर को जोर जोर हिलाने से पूरी तरह से खून से लबालब भरा फड़कता सुपाडा जीभ की पूरी लम्बाई तय करके मुहँ के आखिरी छोर गले तक जा रहा है |
वासना की उत्तेजना कीप्रबलता के कारन रीमा ने अपनी आँखे बंद कर ली, वो भी प्रियम की कमर से लयमिलाकर अपना सर लंड पर ऊपर नीचे करने लगी | अब लंड जिस अधिकतम गहराई तक मुहँ में जा सकता था जा रहा था | लंड के अन्दर जाते ही रीमा अपने जीभ लंड पर फेरने लगती | इससे लंड गीला हो जाता था और आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था | कमरे में बस लंड चूसने और प्रियम के कराहने की आवाजे ही सुनाई पड़ रही थी |
रीमा ने अपना सारा संकोच शर्म हया सब किनारे रख दी थी , उसका सिर्फ एक ही मकसद था प्रियम का लंड चूस कर उसे चरम सुख देना | उसने अपना शरीर और आत्मा सब कुछ बस अपने भतीजे प्रियम के लंड चूसने में झोक दिया था, दिल आत्मा मन शरीर सब कुछ लगाकर वो बस अपने भतीजे का पूरा का पूरा लंड अपने मुहँ की गहराई तक ले रही थी | अब तो बस उसका एक ही मकसद था भतीजे के सख्त फूले लंड को मुहँ से चोद चोद के उसको अपने मुहँ में झड्वाना | वो उसकी मलाईको अपने मुहँ में लेना चाहती थी और उसकी एक एक बूँद से उसे इतना प्यार था कि वो उसकी मलाई की एक बूँद भी बेकार नहीं जाने देना चाहती थी | उसे प्रियम की पूरी मलाई अपने मुहँ के अन्दर ही चाहिए, आखिर बूंद तक | उसने अपना पूरा ध्यान इस पर लगाया की जब प्रियम झाड़ेगा तो उसे भरपूर आनंद मिलना चाहिए | उसने गलगलाकर अपना गला ठीक करने की कोशिश की लेकिन प्रियम की चुदाई के चलते ठीक से साफ नहीं कर पाई | प्रियम के लंड पर उसके ओठो का कसाव अभी भी उतना ही तगड़ा था, उसके ओठो के कसाव को चीरते हुए प्रियम का लंड बार बार रीमा के मुहँ में गले तक आ जा रहा था | इतने सलीके से इतनी गहराई तक अपने जीवन में प्रियम शायद ही किसी लड़की का मुहँ चोद पाए, ये सुख उसको सिर्फ उसकी चाची ही दे सटी थी | वैसे भी नौसखिये लडको का शादीशुदा या अनुभवी औरतो को चोदना ज्यादा मजेदार होता है, क्योंकि वो सब सिखाती बताती है और उनके नखरे भी नहीं होते, और नए लंड को भरपूर सुख भी देती है |
प्रियम को कुछ समझ ही नहीं आया, कहाँ वो आनंद के सागर में गोते लगा रहा था और कहाँ रीमा का गुस्सा देख प्रियम ने रीमा के सर से तुरंत हाथ हटा लिया |
रीमा प्यार से -बेटा चुदाई चुसाई प्यार से करने की चीजे होती है इनमे जल्दबाजी ठीक नहीं | मुझे करने दो न | मै कर तो रही हूँ, क्या तुम्हे मजा नहीं आ रहा | अगर आ रहा है तो क्यों जल्दबाजी कर रहे हूँ | अगर तुम्हे मुहँ में चोदना है तो बता दो मै उसका तरीका बताती हूँ | पूरा का पूरा लंड मुहँ में पेलना चाहते हो तो मै तरीका बताती हूँ, मुझे कहो तो एक बार |
इतना कहकर रीमा ने लंड पकड़कर मुहँ में ले लिया और कसे ओठो के साथ पूरा अन्दर लेती चली गयी |
पहले जहाँ सिर्फ सुपाडे से खेल रही थी अब पूरा लंड मुहँ में लेकर चोद रही थी | रीमा ने प्रियम से इशारे में अपनी कमर हिलाने को कहा, प्रियम कमर को जोर जोर के झटके देने लगा| रीमा के कसे ओठो से गुजरता हुआ लंड पूरा का पूरा मुहँ में समा जाता और फिर एक झटके में बाहर आ जाता | लेकिन अब रीमा के मुहँ और प्रियम के लंड के बीच में उसका हाथ था जिससे वो ज्यादा तेज धक्के को नियंत्रित कर सकती थी | उसने अपने हाथ की उंगली और अंगूठे से एक छल्ला सा लंड की जड़ में बना लिया था | इससे वह लंड के इधर उधर भागने या तिरछा हो जाने को रोक सकती थी | जब प्रियम नितम्बो को जोर जोर से उछालने लगा तो रीमा ने अपने ओठो का कसाव थोडा कम कर दिया, और लंड की जड़ से अपने हाथ का घेराव हटा लिया ताकि प्रियम का लंड आसानी से पूरा का पूरा मुहँ में चला जाये और बच्चे को मुहँ चोदने का भरपूर आनंद मिले | दुनिया का कोई भी लंड हो वो औरत के किसी भी छेद में पूरा का पूरा समा जाने को आतुर होता है और ये बात रीमा अच्छी तरह से जानती थी | बार बार रीमा को अहसाह हो रहा था की खून के भरा, फड़कता गरम लंड उसके नरम नरम गुनगुने गीले मुहँ में ठेला जा रहा है | प्रियम के कमर को जोर जोर हिलाने से पूरी तरह से खून से लबालब भरा फड़कता सुपाडा जीभ की पूरी लम्बाई तय करके मुहँ के आखिरी छोर गले तक जा रहा है |
वासना की उत्तेजना कीप्रबलता के कारन रीमा ने अपनी आँखे बंद कर ली, वो भी प्रियम की कमर से लयमिलाकर अपना सर लंड पर ऊपर नीचे करने लगी | अब लंड जिस अधिकतम गहराई तक मुहँ में जा सकता था जा रहा था | लंड के अन्दर जाते ही रीमा अपने जीभ लंड पर फेरने लगती | इससे लंड गीला हो जाता था और आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था | कमरे में बस लंड चूसने और प्रियम के कराहने की आवाजे ही सुनाई पड़ रही थी |
रीमा ने अपना सारा संकोच शर्म हया सब किनारे रख दी थी , उसका सिर्फ एक ही मकसद था प्रियम का लंड चूस कर उसे चरम सुख देना | उसने अपना शरीर और आत्मा सब कुछ बस अपने भतीजे प्रियम के लंड चूसने में झोक दिया था, दिल आत्मा मन शरीर सब कुछ लगाकर वो बस अपने भतीजे का पूरा का पूरा लंड अपने मुहँ की गहराई तक ले रही थी | अब तो बस उसका एक ही मकसद था भतीजे के सख्त फूले लंड को मुहँ से चोद चोद के उसको अपने मुहँ में झड्वाना | वो उसकी मलाईको अपने मुहँ में लेना चाहती थी और उसकी एक एक बूँद से उसे इतना प्यार था कि वो उसकी मलाई की एक बूँद भी बेकार नहीं जाने देना चाहती थी | उसे प्रियम की पूरी मलाई अपने मुहँ के अन्दर ही चाहिए, आखिर बूंद तक | उसने अपना पूरा ध्यान इस पर लगाया की जब प्रियम झाड़ेगा तो उसे भरपूर आनंद मिलना चाहिए | उसने गलगलाकर अपना गला ठीक करने की कोशिश की लेकिन प्रियम की चुदाई के चलते ठीक से साफ नहीं कर पाई | प्रियम के लंड पर उसके ओठो का कसाव अभी भी उतना ही तगड़ा था, उसके ओठो के कसाव को चीरते हुए प्रियम का लंड बार बार रीमा के मुहँ में गले तक आ जा रहा था | इतने सलीके से इतनी गहराई तक अपने जीवन में प्रियम शायद ही किसी लड़की का मुहँ चोद पाए, ये सुख उसको सिर्फ उसकी चाची ही दे सटी थी | वैसे भी नौसखिये लडको का शादीशुदा या अनुभवी औरतो को चोदना ज्यादा मजेदार होता है, क्योंकि वो सब सिखाती बताती है और उनके नखरे भी नहीं होते, और नए लंड को भरपूर सुख भी देती है |