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Adultery शहनाज की बेलगाम ख्वाहिशें

शहनाज अपनी दोनों चूचियों को मसलती हुई बोली- राज जी , आपके धर्म मे औरत की माँग भरकर अपना बनाते है आप भी वीर्य को मेरी माँग में भर दीजिए। आपका वीर्य माँग में भरने में लगता है की मैं आपकी ही हूँ, तब मुझे लगता है की मेरे जिश्म पे आपका भी हक है। तब मैं खुद को पूरी तरह आपको समर्पित कर पाती हूँ। अपने वीर्य को मेरी माँग में भर दीजिए राज जी ,

| और मेरे मुँह में गिराइए। कल जब आप मुझे चोदेंगे तो वीर्य को मेरी चूत में भर दीजिएगा..."

राज का लण्ड वीर्य छोड़ने लगा। शहनाज आँख बंद करके सिर को आगे कर दी और राज वीर्य को शहनाज के माथे पे माँग में गिराने लगा। वीर्य माँग में भरता हुआ माथे पे बहने लगा। शहनाज जो अभी बोली थी वो महसूस करने लगी। वो अपने चेहरे को ऊपर उठाई और मुँह खोल दी। राज वीर्य को उसके मुँह में भरने लगा।

आअह्ह... इसी टेस्ट की तो दीवानी थी शहनाज राज ने वीर्य की आखिरी बूँद भी उसके मुँह में गिरा दिया। शहनाज की आँखें बंद थी राज क्या हल्का महसूस करेगा, जितना हल्का वो महसूस कर रही थी। राज उसकी पिक ले रहा था।

शहनाज की माँग में सफेद कलर का लिक्विड भरा हुआ था, जिसे देखकर कोई भी कह देता की ये वीर्य ही है। वीर्य माँग से बहता हुआ सीधी रेखा में बिंदी को भिगो दिया था, और नीचे आता हुआ आँखों के बगल से होकर गाल पे बह रहा था। राज ने शुरू का वीर्य माथे पे गिराया था, जो बहुत ज्यादा था तो वो बहकर शहनाज के पूरे चेहरा पे फैल गया था। शहनाज की ये पिक सबसे ज्यादा सेक्सी थी राज ने अपने लण्ड के साथ शहनाज के वीर्य से भरे चेहरा का पिंक भी लिया था। 50 साल के वीर्य से भरी हुई नंगी शहनाज ।

राज बाहर आ गया और अपनी लुंगी को पहनकर ऊपर अपने रूम चला गया। शहनाज उसी तरह बैठी बहकर आ रहे वीर्य को चाटती हुई जन्नत का सुख भोगती रही।

राज ऊपर जाकर अपनी दुकान भी जा चुका था।

शहनाज उसी तरह बैठी हुई थी और अपनी उंगली से चेहरे पे लगे वीर्य को चाटती हुई साफ करने लगी थी। उसने आँख के पास साफ कर लिया था और अब वो आँखें खोल चुकी थी। वो उठकर आईने के सामने चली गई की वो अभी कितनी हसीन लग रही है। फुल साइज आईने के सामने खड़ी नंगी शहनाज खुद को देख रही थी।

अपनी माँग में और बिंदी पे लगे वीर्य को देखकर उसे बहुत मजा आया। वो समझने लगी की राज भी उसका पति है और उसके जिश्म पे राज का भी पूरा हक है। वो अपने चेहरे पे लगे वीर्य को उंगली से फैलाकर पूरे चेहरा पे लगा ली, जैसे कोई फेसपैक लगाते हैं।

"आहह.... राज जी आप कितने अच्छे हैं। इतना कुछ होने के बाद भी मुझे चोदे नहीं। लेकिन बिना चोदे भी क्या सुख देते हैं आप। उफफ्फ चूत में जब जीभ सटाए तो लगा की जैसे करेंट मार रहा हो। चूची को और निपल को ऐसे मसले की अभी ही दूध निकाल देंगे। थोड़ा और जोर से चूसते तो शायद आज ही दूध निकाल भी देते।

क्या खुश्बू है आपके वीर्य की। आज ये इसी तरह मेरे चेहरे पे रहेगा। वसीम के आने के बाद भी उसे ये दिखाकर बताऊँगी की आज क्या-क्या हुआ और आप मुझे कैसे चोदेंगे? राज जी आप मुझे चोदिए। जैसे चाहे चोदिए । रोकिए मत खुद को मैं आपको किसी चीज में मना नहीं करूँगी। मैं आपकी रंडी हूँ। पूरी तरह समर्पित रंडी। आप अगर निपल काटकर खून भी निकाल देंगे तब भी मैं आपको नहीं रोकूंगी।

मैं आपका वीर्य अपनी माँग में सिंदूर के साथ भरी हूँ राज जी । आपकी पूरी पत्नी ना सही रंडी या रखैल तो हूँ ही अब मैं क्या हुआ जो आपने मुझे आज नहीं चोदा। कल तो आप चोदिएगा। ओह्ह... जो आदमी जीभ से ऐसे चोद सकता है पता नहीं लण्ड से कैसे चोदेगा ? मुझे तो अब चैन ही नहीं पड़ेगा जब तक आपसे चुदवा ना लूँ...'
 
राज को लग रहा था की कितनी सारी पिक्स थी रंडी की अगर वसीम उसे सीधे चोदने नहीं दिया तो ये पिक्स काम देगी और नहीं तो पिक्स मजेदार तो थी ही। मोबाइल ओन होते ही वालपेपर पे उसे शहनाज का वीर्य से भरा हुआ चेहरा वाला पिक दिखा। राज खुश हो गया और उसका लण्ड टाइट हो गया। वो गैलरी में जाकर देखने लगा। सारी पिक्स थी। उसे एक अलग फोल्डर भी दिखा आपकी रंडी के नाम से उसने उसे खोला तो शहनाज की खुद की ली हुई पिक्स थी। राज खुश हो गया। अब उसे पूरी तरह यकीन हो गया की अगर उसने अब तक शहनाज को नहीं चोदा है तो अफसोस की कोई बात नहीं है। उसका प्लान बिल्कुल सही है और अब कुछ ही देर की बात है जब शहनाज को आराम से बिना किसी डर के चोद सकेगा।

शहनाज के गेस्ट चले गये। शहनाज घर की साफ सफाई में लग गई। वो सोची की बेड पे जाकर वसीम से बात करूँगी। लेकिन जब तक वो बेड पे पहुँची वसीम सो चुका था। सुबह उसे जल्दी जाना था। कल उसकी मीटिंग थी दूसरे शहर में पति शहर से बाहर होगा ये सोचकर ही उसे लगा की कल सुबह में ही चुदवा लूँगी राज जी से। लेकिन इसके लिए वसीम को राज जी को बोलना तो होगा ही, नहीं तो वो तो मुझे चोदने से रहा।

सुबह शहनाज ने जाग कर नहाकर इबादत कर ली और वसीम के लिए नाश्ता बनाने लगी। आज वो और पहले जागी थी। वसीम उठा और हड़बड़ी में तैयार होने लगा। शहनाज को मौका ही नहीं मिल पा रहा था बात करने का। वैसे भी ये कोई सिंपल बात नहीं थी। ठीक है वसीम ने उस दिन हाँ कहा था फिर भी अपने पति से किसी और से चुदवाने की पर्मिशन लेना और उसे दूसरे आदमी को बोलना की आप मेरी बीवी को चोद लो, कोई मामूली बात नहीं थी।

जब वसीम ब्रेकफास्ट करने बैठा तो शहनाज बोली - "कल राज जी से बात हुई थी..."

वसीम नाश्ता करने में बिजी रहा। उसने सुना ही नहीं, क्योंकी उसे लेट हो रहा था तो वो अपने ही ख्यालों में खोया था। शहनाज फिर से बोली तो भी वसीम का कोई रिएक्सन नहीं हुआ। शहनाज को गुस्सा आ गया की वो इतनी इंपॉर्टेंट बात कर रही है और ये सुन भी नहीं रहा है।

शहनाज इस बार जोर से बोली- "तुम सुन नहीं रहे हो वसीम...”

वसीम ने हड़बड़ा कर उसकी तरफ देखा और पूछने के अंदाज में- हूँ...' क्या।

शहनाज बोली- “मैं राज जी से चुदवाना चाहती हूँ.." शहनाज एक ही सांस में फाइनल बात बोल गई।

वसीम का हाथ रुक गया। वो प्रश्न और आश्चर्य भरी नजरों से शहनाज को देखने लगा। वो बोल नहीं पाया क्योंकी उसका मुँह भरा हुआ था रोटी से।

शहनाज फिर बोली- “राज जी से बात हुई। अगर तुम उन्हें बोल दो की वो मुझे चोद सकते हैं तो फिर उन्हें कोई प्रोबलम नहीं है..."

वसीम ने खाना निगल लिया और बोला- “अचानक.. कभी कुछ बोलती हो कभी कुछ... अब क्या हुआ?"

अब शहनाज क्या बताती की वो खुद को रोक नहीं पाती ? राज के बारे में सोचते ही उसकी चूत गीली हो जाती है। वो चाहती है की खूब चुदे राज से, लेकिन राज है की बिना वसीम के बोले उसे चोद ही नहीं रहा। वो तो रोज कोशिश करती है लेकिन वही नहीं चोदते तो अब तुम उन्हें बोल दो फिर मैं उनसे छिनाल रंडी बनकर चुदूंगी।

शहनाज बोलना स्टार्ट की की तब तक वसीम का नाश्ता खतम हो चुका था। वो हड़बड़ी में उठा और बोला की रात में आता हूँ तो बात करता हूँ। शहनाज बेचारी बहुत उदास हो गई। एक मिनट की बात थी की वसीम राज जी को बोल देता फिर मैं आराम से अभी ही चुद लेती। वो जाने की तैयारी कर रहा था।

शहनाज से रहा नहीं गया, वो बोली- “वसीम वो बहुत परेशान हैं..

वसीम अपने बैग में डाक्यूमेंट्स रखता हुआ बोला- "रात में बोलता हूँ ना जान "

शहनाज - “इसमें बात क्या करना है। कहीं तुमने अपना इरादा तो नहीं बदल लिया? मैं उन्हें बोल चुकी हूँ की तुम्हें कोई परेशानी नहीं है और तुमने मुझे पर्मिशन दे दिया है। मैं नहीं चाह रही थी। उन्हें कोई दिक्कत नहीं है...”

वसीम- “कोई इरादा नहीं बदला है। अभी देर हो रही है इसलिए बोला की रात में आता हूँ तो बोलता हूँ.”

अब भला शहनाज पूरा दिन कैसे गुजारती ? उसकी चूत बगावत कर रही थी। शहनाज बोली - "तुम्हें उनकी हालत का अंदाजा नहीं है इसलिए तुम ऐसे बोल रहे हो। एक मिनट लगेगा और इसके लिए तुम्हारे पास टाइम नहीं है। उनकी भी जिद है की बिना तुम्हारी पर्मिशन के वो मुझे नहीं चोदेंगे और तुम्हारे पास टाइम ही नहीं है..."

वसीम कुछ नहीं बोला और अपने बैग को लेता हुआ बाहर चलने लगा- "बाइ जान, लव यू...” बोलता हुआ वो बाहर जाने लगा ।

शहनाज अपना मोबाइल लेकर दरवाजा पे आकर बोली- 'इसमें रेकार्ड करके बोल दो, इसमें तो टाइम नहीं लगेगा...."

वसीम रुक गया और शहनाज के हाथ से मोबाइल ले लिया। उसने रेकार्डर ओन किया और बोला- “राज जी , आप शहनाज के साथ सेक्स कर सकते हैं, मुझे इसमें कोई परेशानी नहीं है...” कहकर वसीम ने शहनाज के हाथ में मोबाइल पकड़ा दिया और बाहर निकल गया। वो गुस्से में था।

शहनाज भी अंदर आ गई। वो भी वसीम पे गुस्सा थी। पहले तो वो गुस्से में ही सोचती रही की खुद बोले की मदद करने के लिए जिश्म दे रही हो तो अच्छी बात है, मैं तुम्हारे साथ हूँ, और अभी जब बोली तो भाव खा रहा है। एक मिनट लगता सिर्फ तुम्हें क्या है, तुम परेशान नहीं हो ना। दिन भर की अहमियत तुम्हारे लिए कुछ नहीं है। अगर दिन भर में ही राज जी ने कुछ कर लिया तो?

धीरे-धीरे शहनाज का गुस्सा शांत होने लगा और फिर वो सोचने लगी। छिः मैं कितनी गंदी हूँ, पागल हूँ मैं । क्या- क्या बोल दी उन्हें। सुबह - सुबह हड़बड़ी में मीटिंग में जा रहे हैं और मैं उन्हें राज जी को बोलने के लिये कह रही हूँ । एकदम चुदवाने के लिए पागल हो गई हूँ मैं सच की रंडी बन गई हूँ मैं। मैं राज जी की मदद क्या करूँगी? मैं खुद चुदवाने के लिए मरी जा रही हूँ

शहनाज को अब बुरा लगने लगा था। वो वसीम को काल की और उसके काल रिसीव करते ही- "सारी जानू, वेरी वेरी सारी आई लव यू। पता नहीं कैसे बोल रही थी मैं और क्या-क्या बोल गई? आई आम रियली वेरी सारी..."

वसीम मुश्कुरा उठा। वो भी अपनी बीवी से बहुत चाहता था, बोला- "इट्स ओके बाबू । नो नीड फार सारी... मैं समझ सकता हूँ की तुम्हें राज जी की हालत पे तरस आ रहा होगा, और इसलिए तुम खुद को रोक नहीं पा रही थी। तुम जा सकती हो उनके पास अगर वो रेकार्डिंग से ना माने तो मुझे काल कर लेना। मैं उन्हें फोन पे बोल दूँगा। खुश?*

शहनाज- थैंक्स जानू, मुझे पता था तुम मुझे समझते हो। तुम सच्ची गुस्सा नहीं हो ना?"

वसीम- “नहीं जान, मैं तुमसे गुस्सा हो ही नहीं सकता। आई लव यू। जाओ और उन्हें जो चाहिए वो दो । शर्माना मत, उन्हें ये ना लगे की वो किसी और की कोई चीज इश्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें ये एहसास हो की वो अपनी चीज को इश्तेमाल कर रहे हैं। तभी उन्हें राहत मिलेगी..."

शहनाज- “आहह... वसीम यू आर सच आ डार्लिंग आई लव यू...”

वसीम- “आई लव यू टू। अभी ही चली जाओ उनके पास तो ठीक रहेगा, क्योंकी कुछ देर बाद मैं काल रिसीव नहीं कर पाऊँगा. "

शहनाज अब खुद को रिलैक्स महसूस कर रही थी। काल डिसकनेक्ट करते ही ये सोचकर की अभी ही राज जी के पास जाना है और उनसे चुदवाना है, शहनाज के पेट में गुदगुदी होने लगी। उसकी धड़कन तेज हो गई। वो सोच रही थी कैसे जाए उनके पास? वो चाय बनाने लगी राज के लिए वो सिर में आँचल रखकर नई नवेली दुल्हन की तरह शर्माते हुए राज के दरवाजा के पास पहुँची। वो उस नई दुल्हन की तरह ही शर्मा रही थी जो दूध का ग्लास लेकर सुहागरात वाले कमरे में अपने पति के पास जाती है।
 
शहनाज राज के दरवाजा तक तो पहुँच गई थी। लेकिन तब तक उसकी धड़कन और सांसें बहुत तेज हो गई थीं। वो अभी चुदने वाली है राज से, ये सोचकर डर शर्म उत्तेजना की वजह से वो बहुत घबरा गई। वो दरवाजा पे नाक नहीं की और वापस नीचे आ गई।

शहनाज सोचती है- “आहह... अभी में चुदवाने वाली हूँ... कैसे चोदेंगे वो? मैं उनका लण्ड सह तो पाऊँगी ना?

कितना बड़ा है उनका ? मुँह में तो आता नहीं, कितना फैलाना पड़ता है। पता नहीं चूत में कैसे जाएगा? बहुत दर्द होगा.... वसीम का लण्ड अंदर जाता है तो अभी तक दर्द होता है। इनका तो पता नहीं क्या करेगा? कहीं अगर मैं दर्द नहीं सह पाई तो ? नहीं फिर तो उन्हें बुरा लगेगा की मैं जानबूझ कर ऐसा कर रही हूँ। नहीं नहीं, मुझे दर्द तो सहना ही होगा। पैर पूरी तरह से फैला लूँगी..."

नीचे आते हुए शहनाज बहुत कुछ सोच चुकी थी। वो किचेन में जाकर पानी पी और सोफे पे थोड़ी देर बैठ रही । उसका ध्यान बस राज के लण्ड और अपनी चुदाई पे ही अटका था। वो खुद को मेंटली तैयार कर रही थी। वो अपने रूम में गई और अपने कपड़े चेंज कर ली।

शहनाज सिंपल ब्रा पहनी थी जिसे उतारकर डिजाइनर ब्रा पैंटी पहन ली। राज जी इसमें वीर्य गिरा चुके हैं, आज फाइनली वो इसे पहनने वाली की चूत में वीर्य गिराएंगे। आह्ह... कितना मजा आएगा। वसीम का वीर्य अंदर गिरता है तो मैं झड़ जाती हूँ। राज जी का वीर्य तो बहुत सारा होता है और ये तो एकदम अंदर गिरेगा। आहह...

शहनाज खुद को आईने में देखी। लाल साड़ी में वो जँच रही थी। साड़ी वो हमेशा नाभि से नीचे ही पहनती थी, आज थोड़ा ज्यादा नीचे पहनी थी। लेकिन आईने में देखकर उसे लगा की साड़ी और नीचे होनी चाहिए, तो वो साड़ी को और नीचे कर ली। वो अपने हाथ से चूचियों को ब्लाउज़ से थोड़ा बाहर करते हुए क्लीवेज को फैलाई। वो एक साइड आँचल ली जिससे उसकी एक चूची दिख रही थी। वो फिर से मेकप को रीटच की। बिंदी हटाकर बड़ा सा टीका लगा ली कुमकुम से होंठों पे डार्क रेड लिपस्टिक । कांखों पे पर्फ्यूम |

आखीरकार, बड़े इंतजार के बाद राज जी अपनी रंडी को चोदने वाले हैं। सजना तो पड़ेगा ही। सुबह के बारे में तो उन्होंने सोचा भी नहीं होगा। चल शहनाज अब देर मत कर, चल चुदवाने ।

वसीम का काल आया, और पूछा- “कहाँ हो?"



शहनाज बोली “घर में, क्यों?"

वसीम बोला- “राज जी के पास चली गई या जाओगी?"

शहनाज बोली - "अभी नहीं गई हूँ, थोड़ी देर में जाऊँगी..”

वसीम ने उसे फिर से समझने लगा- "इस पल को सोसल बनाना उनके लिए तुम अपना सब कुछ दे रही हो तो ख्याल रहे की उन्हें भी लगना चाहिए की उन्हें बहुत कुछ मिल गया। वो पूरी तरह संतष्ट होंगे तभी रिलैक्स हो पाएंगे, नहीं तो फिर ये प्यास खतम नहीं होगी..."

शहनाज चुपचाप सुनती रही और हाँ हूँ करती रही। फिर बाय और लव यू बोलते हुये उसने काल काट दिया। शहनाज ने फिर से चाय बनाई और चल दी। उसने अपनी साँसों को सम्हाला और दरवाजे पे नाक करती हुई आवाज लगाई - " राज जी ... राज जी ...'

राज जाग चुका था। रात में कई बार वो शहनाज की पिक्स देखा था। जो उसने लिया था, वो भी और जो शहनाज अपने मोबाइल से लेकर दी थी वो भी रात में उसने मूठ भी मारा था। राज को लगा की शहनाज या तो उसे बुलाने आई होगी, या फिर वसीम को लेकर आई होगी। राज ने अपने कपड़े ठीक किए। वो अपनी लुंगी गंजी में ही था। दरवाजा खोलते ही जैसे उसका दिन बन गया। शहनाज सिर पे आँचल लिए मुश्कुराती खड़ी थी।

शहनाज "गुड मार्निंग" बोली और चाय का प्याला राज की तरफ बढ़ा दी। अनायास ही राज के मुँह मॉर्निंग निकल पड़ा। राज नै चाय का कप ले लिया और शहनाज रास्ता बनाती हुई अंदर आ गई। शहनाज के अंदर आने के बाद राज को एहसास हुआ की वो दरवाजे पे ही खड़ा है। राज ने पीछे मुड़कर देखा तो उसके सामने शहनाज की पीठ थी। उफफ्फ राज का लण्ड थोड़ा सा मूड में आ रहा था, और शहनाज की पीठ देखते ही एक झटके में टाइट हो गया।

शहनाज की पीठ पूरी नंगी थी। साड़ी गाण्ड की लाइन के पास बँधी हुई थी। उसके चूतड़ और उभरे हुए लग रहे थे। गर्दन से लेकर गाण्ड तक के बीच में बस ब्लाउज़ की 2 इंच की पट्टी थी और बाकी का पूरा हिस्सा चमक रहा था।

शहनाज राज की तरफ पलटी और बोली- "मेरा गिफ्ट कैसा लगा कल?"

शहनाज सामने से तो किसी को भी अपनी तरफ देखने के लिए मजबूर कर सकती थी। अभी शहनाज को देखकर शरीफ से शरीफ आदमी का लण्ड टाइट हो जाता। ब्लाउज़ पूरी गोलाई में सम्हाले था चूचियों को लेकिन चूचियां फिर भी बाहर आने को बेताब थी। चिकना सपाट पेट चूत की लाइन तक चमक रहा था।

शहनाज दुबारा बोली- “बोलिए ना कैसा लगा मेरा गिफ्ट आपको?” ‘

राज तब अपनी दुनियां में लौट पाया। उसे शहनाज की पिक्स याद आ गई और वो वालपेपर भी। राज बोला-

"लाजवाब...

शहनाज - "थैंक्स | जल्दी चाय पीजिए, ठंडी हो जाएगी..."

राज चाय के घूँट मारने लगा। तुरंत ही चाय खत्म हो गई। शहनाज तब तक राज के मोबाइल की वालपेपर देख रही थी। शहनाज राज का मोबाइल रख दी और चलती हुई राज के सामने आई और उसके गले लग गई और उसके होठों को चूमने लग गई। वो अपने हाथ के मोबाइल में वसीम का रेकार्डेड मेसेज़ प्ले कर दी। राज समझ गया की अब उसके और शहनाज के बीच में कुछ भी नहीं है। फाइनली रंडी उसकी हुई। उसका जी चाहा की अपने स्टाइल में शुरू हो जाए लेकिन वो शहनाज के आक्सन का इंतजार करने लगा।

शहनाज राज के होठ को चूमना छोड़ दी और उसके सीने पे अपने सिर को रखकर बड़े अपनेपन से बोली- "बस राज जी , आपका तड़पना खत्म, आपके मन में मुझे लेकर जितने भी अरमान हैं सबको पूरे करने का वक़्त आ गया है। अब कहीं कोई रोक-टोक नहीं है। अब सब कुछ सही है। मैं पूरी तरह से आपको समर्पित हूँ अब । अपनी इच्छा से और अपने पति के पर्मिशन से। अब आप निश्चिंत होकर खुले मन से मुझे चोद सकते हैं। अब मत रोकिए राज जी खुद को और जो जी में आए को करिए, जैसे चाहे वैसे करिए। मैं पूरी तरह आपका साथ दूँगी..."

राज ने भी शहनाज की पीठ पे हाथ रखकर उसे गले लगा लिया। उसने शहनाज के माथे पे किस किया तो शहनाज ऊपर राज के चेहरा की तरफ देखने लगी। शहनाज के रसीले होंठ देखकर राज खुद को रोक नहीं पाया लेकिन फिर भी बस छोटा सा किस किया और बोला ।

राज - “तुम लोगों का बहुत बहुत धन्यवाद शहनाज । ये बहुत बड़ी बात है की मुझे समझकर और मेरी मदद करने के लिए तुम इतना बड़ा फैसला ली और वसीम ने इसमें तुम्हारा साथ दिया। ऊपर वाले की बहुत मेहरबानी है मेरे ऊपर। मैं बहुत खुशनशीब हूँ की तुम मेरी जिंदगी में आई। लेकिन फिर भी मैं तुमसे कहना चाहूँगा की एक बार फिर से सोच लो शहनाज । किसी गैर-मर्द को अपना जिश्म देना आसान बात नहीं है। तुम एक बार फिर से अपने फैसले पे सोच सकती हो..."

शहनाज- “जितना सोचना था सब सोच चुकी हूँ राज जी । अब ये जिश्म आपका है। आज मेरा तन और मन दोनों आपका है। मैं पूरी तरह से अपने आपको आपके हवाले करती हूँ। आप जो कुछ भी करेंगे मैं आपका साथ दूँगी..."

राज “फिर भी एक बार सोच लो शहनाज। कहीं ऐसा ना हो की बीच में या बाद में तुम्हें लगे की तुम गलत की या तुम्हें अफसोस हो? क्योंकी फिर मैं खुद को माफ नहीं कर पाऊँगा। मेरे लिए जीना मुश्किल हो जाएगा...'

शहनाज- “बहुत बार सोच ली राज जी । हर तरह से सोच ली। मैं अब पूरी तरह से आपको समर्पित हूँ। मैं अपने आपको आपके हवाले करती हूँ और मैं वसीम की कसम खाकर कहती हूँ की आप मेरे साथ जो भी करेंगे उसमें मेरी और मेरे पति की मंजूरी है, और मैं हर तरह से आपका साथ दूँगी..” शहनाज राज से अलग होकर दो कदम पीछे हुई और अपने पल्लू को जमीन पे गिरा दी, और बोली “अब आप मेरे साथ जो चाहे कर सकते हैं, मैं शहनाज आपका पूरा साथ दूँगी "

राज ने आगे बढ़कर शहनाज को गले लगा लिया और बोला- “धन्यवाद शहनाज, बहुत बहुत धन्यवाद...” कहकर राज बेड पे बैठ गया और शहनाज उसकी गोद में बैठ गई।
 
शहनाज राज के गले पे छाती पे चूमने लगी सहलाने लगी थी।

राज बोला- "हाँ... शहनाज, अब तुम मेरी हो, पूरी तरह से मेरी, मैं तुम्हें अब पूरी तरह से पा सकता हूँ बिना किसी डर के बिना किसी हिचकिचाहट के। लेकिन शहनाज, मैं इस लम्हे को जीना चाहता हूँ। महसूस करना चाहता हूँ। मैं नहीं चाहता की इतना कीमती लम्हा मेरी जिंदगी में आए और एक-दो घंटे में खतम हो जाए। मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ लेकिन ऐसे नहीं। ऐसे की जैसे तुम मेरी दुल्हन हो और आज हमारी सुहागरात हो। मैं तुम्हें दुल्हन के लिबास में देखना चाहता हूँ और पूरी रात तुम्हारे आगोश में बिताना चाहता हूँ.."

शहनाज एक पल के लिए सोची, क्योंकी रात में वसीम आ जाएगा लेकिन अभी तुरंत वो बोली की पूरी तरह राज का साथ देगी तो वो उसे मना नहीं कर सकती है। वो मुश्कुराते हुए बोली- 'जैसा आप कहें। रात में आपकी दुल्हन आपका इंतजार करेगी। आज आपकी हमारी सुहागरात होगी..."

राज खुश होता हुआ शहनाज के होठों को कस के चूम लिया और ब्लाउज़ के अंदर हाथ डालकर एक चूची को कस के मसल दिया।

शहनाज अचानक हुए इस हमले से हड़बड़ा गई और दर्द से उसके मुँह से “आहह" निकल गई।

राज बोला- “आहह.... शहनाज मैं खुद को रोक नहीं पा रहा। मैं बहुत खुश हूँ। आज मेरी जिंदगी का सबसे हसीन दिन है..." और वो फिर से शहनाज के होठ चूमने लगा और चूची को मसल दिया।

शहनाज दर्द बर्दाश्त की और मुश्कुरा दी। राज बोला- “उफफ्फ शहनाज अब तुम जाओ यहाँ से, नहीं तो मैं पागल हो जाऊँगा। मैंने इतने साल इतने दिन खुद को रोका है तो एक दिन और मुझे खुद को रोकना ही होगा, ताकी मैं अपनी सुहागरात को पूरी तरह से मना पाऊँ...

सही बात है। अब रोक पाना वाकई मुश्किल था। शहनाज भी गोद से उठ खड़ी हुई और आँचल ठीक कर ली। उसकी चूचियों पे राज की उंगलियों के निशान छप चुके थे। आज शहनाज के पूरे जिश्म पे राज का निशान लग जाना था। शहनाज की रूह पे भी राज का कब्ज़ा हो जाना था। शहनाज चाय का कप उठाई और जाने लगी, और बोली - "शाम में शादी के जोड़े में आपकी दुल्हन आपका इंतजार करेगी राज जी ...

राज बोला- “अब राज जी मत कहो। सिर्फ राज कहो, मेरे राज...

शहनाज खिलखिला कर हँस दी, और बोली- "ठीक है राज, शाम को आपकी दुल्हन आपका इंतजार करेगी...."

शहनाज नीचे आ गई। वो बहुत उत्तेजित थी। अच्छी बात तो है। मैं कोई रंडी थोड़े ही ना हूँ की गई और चुदकर आ गई। इतनी मेहनत के बाद पहली बार राज जी ... नहीं नहीं राज। मेरे राज मुझे चोदने वाले हैं। इस लम्हे को तो यादगार बनाना ही चाहिए। मैं तो बहुत खुशनशिब हूँ की दुबारा सुहागरात मनाने वाली हूँ। मुझे राज जी उफफ्फ राज को खुश करना है। सौंप देना है उन्हें खुद को उन्हें लगना चाहिए की यही उनकी सुहागरात है। लेकिन रात में तो वसीम भी आ जाएंगे। अफफ्फ ... उनके सामने ऐसे सुहागरात मना पाऊँगी मैं? मेरे लाख चाहने पे भी मैं राज को खुद को पूरी तरह नहीं सौंप पाऊँगी।

शहनाज राज को काल लगाई और बताई - "जैसा तुमने कहा था उसी तरह राज जी उस लम्हे को मेमोरेबल बनाना चाहते हैं। वो मेरे साथ सुहागरात मनाना चाहते हैं। मैं क्या करूँ? उन्हें ना भी नहीं बोल पाई..."

वसीम बोला “ये तो अच्छी बात है। तब उन्हें हर बात याद रहेगी और वो संतुष्ट हो पाएंगे। तुम बस ये ख्याल रखना की कोई कमी ना रह जाए। ऐसा ना हो की तुम्हारी इतनी बड़ी कुर्बानी भी किसी छोटी बात की वजह से बेकार हो जाए और देखो ना, यहाँ आकर पता चला की कल भी कुछ काम है तो मैं कल ही आ पाऊँगा..."

शहनाज को भी लगा की वसीम के रहने के बाद वो खुलकर राज का साथ नहीं दे पाती। थोड़ी और बातें करने के बाद वसीम से गुड लक लेते हुए उसने काल काट दिया। वो अपने वार्डरोब से शादी की ड्रेस निकाली जिसे पहनकर वो शादी की थी। डिज़ाईनर लहँगा चोली था वो। लहँगा तो ठीक था, वो चोली को देखने लगी की सही फिटिंग आएगी या नहीं। शहनाज अपने पल्लू को नीचे गिराई और ब्लाउज़ को उतारकर चोली पहनकर देखने लगी। उसकी चूची अब बड़ी हो गई थी। साइज 32" इंच से बढ़कर 32डी हो गया था। चोली पूरी तरह से सीने में दब गई थी। वो वापस ब्लाउज़ पहन ली।

शहनाज कुछ लिस्ट बनाई और मार्केट आ गई। सबसे पहले वो कुछ-कुछ समान ली और फिर एक टेलर वाले के पास गई। टेलर को वो चोली का नाप सही करने बोली, और थोड़ी कांट छांट करने बोली जिससे बैंक और नेक थोड़ा और डीप हो जाए। टेलर ने उससे कहा की इसमें तो वक़्त लग जाएगा और चोली खराब भी हो सकती है, आप नई चोली ही ले लीजिए। उसने शहनाज को इसी चोली से मिलते जुलते कलर की कई चोली दिखाई। एक चोली बिल्कुल मैच कर रही थी और उसका डिज़ाईन भी बहुत अच्छा था। उसके साथ शहनाज ने मैचिंग ट्रांसपेरेंट चुन्नी भी ले लिया। एक बहुत बड़ा कम खतम हो गया था उसका।

शहनाज फिर अपने ब्यूटी पार्लर में गई। वहाँ वो हाथ में बाजू तक और पैर में जाँघ तक मेहन्दी लगवाई। मेहन्दी लगाने वाली लड़की ने उसकी कमर पे सामने की तरफ भी टैटू जैसा और पीठ पे भी एक डिजाइन बना दिया । कमर पे बना डिजाइन सामने में पैंटी लाइन में बना था और पीठ पे बना डिजाइन उसकी गर्दन के नीचे और ब्रा के हुक के ऊपर बना था। शहनाज का गोरा जिश्म उस मेंहन्दी में दमक रहा था। पार्लर वाली को ही बोलकर उसने एक फल वाले से बात कर लिया जो शाम में उसके बेड को सजा देने वाला था।
 
शहनाज को यहाँ से फ्री होते-होते ही 4:00 बज गये थे। वो घर पहुँची और फूल वाले को काल कर दी। जितनी देर में शहनाज खाना खाई की बेड सजाने वाले आ गये। शहनाज उन्हें बेडरूम में ले आई और वो लोग सुहागरात की सेज सजाने लगे। एक तो शहनाज वैसे ही बहुत खूबसूरत थी, आज मेकप और मेहन्दी लगने के बाद तो वो चमक कर रही थी। दोनों बेड सजाते हुए आपस में बातें कर रहे थे। शहनाज रूम में देखने जा रही थी की बेड कैसा सज रहा है की उनकी बातों को सुनकर वो बाहर ही रुक गई और उनकी बातें सुनने लगी।

सेज सजाने वाला - "कितनी मस्त माल है यार, क्या फिगर है, क्या चिकना बदन है। छुओ तो हाथ फिसल जाए । आज तो इसका बदन इन फूलों के ऊपर मसला जाएगा। इसकी तो चूत में पूरी खुजली मची हुई होगी अभी। पूरी तैयारी करवा रही हैं अपनी चुदाई की। माल तो ये इतनी मस्त है की इसको नंगी करते ही कहीं झड़ ना जाए इसे चोदने वाला । बेचारी की इतनी मेहनत बेकार हो जाएगी। लेकिन सोच की उसे मजा कितना आएगा जब इसके नंगे बदन को फूलों की सेज पे लिटाकर चोदेगा। मुझे तो एक मौका मिले तो सारी जिंदगी की प्यास मिट जाए...

शहनाज वहाँ से हट गई और किचेन में खाना बनाने में लग गई। राज के आने से पहले उसे पूरी तरह फ्री हो जाना था। वो सोचने लगी- “सही तो कह रहे हैं दोनों मेरी तो चूत में सच की आग लगी हुई है। अपनी ही चुदाई करवाने के लिए मैं कितनी बिजी हूँ। किसी गैर-मर्द के साथ सुहागरात.... ओफफ्फ ... नहीं नहीं अब मुझे ये सब नहीं सोचना चाहिए। राज का पूरा हक है मेरे जिश्म में आज मैं उनकी हूँ, पूरी तरह राज की। आज वसीम मेरे लिए गैर-मर्द हैं। ऊपर वाला भी तो यही चाहता है, तभी तो वसीम आज जी टाउन से बाहर । आज मुझे वसीम के बारे में नहीं सोचना है। सिर्फ राज ही मेरे हैं आज...'

………………………….

दोनों लड़के शहनाज और राज की सुहागरात की सेज सजाकर चले गये। शहनाज रात के लिए खाना बना चुकी थी। उसने घड़ी में नजर डाली तो 6:00 बज चुके थे। अब बस शहनाज को तैयार होना था। लेकिन वो सोची की "सुबह के बाद राज से कोई बात भी नहीं हो पाई है तो एक बार उनसे बात कितने बजे आएंगे अपनी दुल्हन के पास? पता चला की मैं तैयार ही होकर बैठी हूँ और उन्हें लेट हो रही है। शहनाज राज को काल लगाई - "हेलो ..."

राज "हाँ... हेलो..."

शहनाज- राज "

राज। - "हाँ.. मेरी जान, तुम्हारा राज ही बोल रहा हूँ.

शहनाज मुश्कुरा दी- कैसे हैं राज, कब आएंगे अपनी दुल्हन के पास.." बोलती हुई शहनाज गई और उसकी चूत में एक लहर सी दौड़ पड़ी।

राज - “मैं तो कब से बैठा हूँ अपनी दुल्हन को पाने के इंतजार में, तुम जब बोलोगी तब हाजिर हो जाऊँगा "

शहनाज खिलखिला कर हँस दी- "तो आ जाइए ना जल्दी से...

राज - “बस आ रहा हूँ थोड़ी देर में, 8:00 बजे तक आ जाऊँगा। वसीम आ गया है क्या?"

शहनाज- "नहीं, कल भी उन्हें काम है तो आज वो नहीं आ पाएंगे आप आइए, 8:00 बजे आपकी दुल्हन आपका इंतजार कर रही होगी..." कहकर शहनाज फोन काट दी।

राज झूम उठा की वसीम नहीं रहेगा।

वसीम के रहने के बाद भी उसे शहनाज के साथ सुहागरात तो मनाना था ही लेकिन तब उसे थोड़ी आक्टिंग करनी पड़ती। लेकिन अब वो बिंदास होकर अपने अंदाज में शहनाज के गोरे मखमली जिश्म को लूटेगा । आहह... मेरी जान शहनाज, बहुत तरसा हूँ तेरे लिए और मैंने बहुत तड़पाया है तुझे। बहुत बार तेरे जिश्म को प्यासा छोड़ा है मैंने। लेकिन आज वो सारी प्यास मिटाकर रख दूंगा। आज बताऊँगा की मैं क्या चीज हूँ? आज बताऊँगा की चुदाई क्या होती है ? बस मेरी रांड़, दो घंटे और फिर तेरा सुनहला बदन मेरी गिरफ़्त में होगा आहह...."

शहनाज के पास दो घंटे थे सजने के लिए। वो अपनी सजावट में लग गई। चुदवाने की सजावट में। शहनाज पूरी तरह नंगी हो गई और आईने में खुद को देखने लगी- चलो शहनाज रानी, सुहागरात मानने के लिए तैयार हो जाओ। उसका पूरा जिश्म चिकना तो था ही फिर भी वो चूत, गाण्ड और कांखों के बालों पे हेयर रिमूवर क्रीम अप्लाइ कर ली। फिर शहनाज अपनी कमर के नीचे चूत, गाण्ड और जांघ एरिया और चूची में फेशियल मसाज की। नहाते वक़्त शहनाज अपनी चूत में उंगली कर रही थी। वो अपनी चूत से पानी निकालना चाह रही थी। वो चाहती थी की जब राज उसके जिश्म से खेले तो वो राज का भरपूर साथ दे चूत से पानी निकला हुआ रहेगा तो वो देर तक राज का साथ दे पाएगी और राज से मिलता सूख महसूस कर पाएगी।

शहनाज सोचने लगी की कैसे राज उसे चोद रहा है। वैसे तो राज के बारे में सोचते ही उसकी चूत गीली हो जाती थी, लेकिन अभी कुछ हो ही नहीं रहा था। तभी सोचते-सोचते उसका ख्याल बनने लगे की राज बेरहमी से उसके साथ पेश आ रहा है। वो बेरहमी से शहनाज के जिश्म को नोचता खसोटटा जा रहा है और उसे गालियां देता जा रहा है- रंडी, मादरचोद, कुतिया, हरामजादी, छिनाल और भी बहुत सारी गालियां। ये सब सोचते ही । शहनाज की चूत गीली हो गई और उंगली करती हुई वो चूत से पानी निकाल ली। पानी निकलने के बाद उसे खुद पे बुरा भी लगा की मैं राज से किस तरह चुदवाना चाहती हूँ और क्या-क्या सुनना चाहती हूँ।
 
शहनाज सोचने लगी की कैसे राज उसे चोद रहा है। वैसे तो राज के बारे में सोचते ही उसकी चूत गीली हो जाती थी, लेकिन अभी कुछ हो ही नहीं रहा था। तभी सोचते-सोचते उसका ख्याल बनने लगे की राज बेरहमी से उसके साथ पेश आ रहा है। वो बेरहमी से शहनाज के जिश्म को नोचता खसोटटा जा रहा है और उसे गालियां देता जा रहा है- रंडी, मादरचोद, कुतिया, हरामजादी, छिनाल और भी बहुत सारी गालियां। ये सब सोचते ही । शहनाज की चूत गीली हो गई और उंगली करती हुई वो चूत से पानी निकाल ली। पानी निकलने के बाद उसे खुद पे बुरा भी लगा की मैं राज से किस तरह चुदवाना चाहती हूँ और क्या-क्या सुनना चाहती हूँ।

शहनाज नहाकर वो अपने रूम में आ गई। नहाने के बाद उसका जिश्म और चमक रहा था। उसे फूल वाले लड़कों की बात याद आने लगी- "जो इस माल को चोदेगा उसे कितना मजा आएगा.." शहनाज अपने पूरे जिस्म में चाकलेट फ्लेवर की बाडी लोशन लगाई। फिर नई पैंटी ब्रा निकली, लाल रंग की पैंटी ब्रा डिजाइनर थी और ट्रांसपेरेंट थी। पैंटी ब्रा को पहनने के बाद वो घूम-घूमकर आईने में खुद को देख रही थी। कितनी सेक्सी लग रही हूँ मैं। आह्ह... राज इस चमकते जिश्म पे आज आपका अधिकार है। इतनी मेहनत तो मैं अपनी ओरिजिनल सुहागरात के लिए भी नहीं की थी, जितनी आपके लिये कर रही हूँ। मसल देना मुझे, रौंद डालना मेरे जिश्म को, अपने मन में कोई कसर मत छोड़ना मेरे दूल्हे राजा । शहनाज चेहरे का मेकप पूरा की और उसके बाद शहनाज अपने बालों को सवारने लगी। आधे घंट लग गये उसे बाल बनाने में।

7:30 बज चुके थे। शहनाज लहँगा पहन ली। पहले तो वो नाभि से कुछ नीचे पहनी लहँगा को, जहाँ से नार्मली पहनती थी। लेकिन फिर कुछ सोचकर वो लहँगा को और बहुत नीचे कर ली। उसकी कमर पे बने मेहन्दी का डिजाइन अब साफ-साफ दिख रहा था। फिर वो चोली पहन ली। चोली कंधे के किनारे पे थी और सामने थोड़ा डीप था जिससे क्लीवेज थोड़ा सा दिखाते हुए शहनाज को सेक्सी बना रहा था। पीठ पे सिर्फ 2 इंच की पट्टी थी। शहनाज अपनी ब्रा को चोली के अंदर करके हुक लगा ली। वो अपने माथे पे चुन्नी रखकर माँग में सिंदूर भरने लगी। फिर उसे लगा की अगर मैं लगाऊँगी तो वो वसीम के नाम का होगा। आज ऐसा नहीं होना चाहिए। सोचकर वो सिंदूर नहीं लगाती शहनाज पूरे हाथों में चूड़ी पहन ली। अब वो पूरी तैयार थी अपनी सुहागरात के लिए 8:00 बज चुके थे।
 
शहनाज की दूसरी सुहागरात गैरमर्द राज के साथ

शहनाज अपनी चुदाई के लिए पूरी तैयार थी। पूरा मेकप और पूरी ज्वेल्लारी में वो बहुत ही हसीन लग रही थी। उसकी धड़कन तेज हो गई थी। वो किचेन में जाकर एक ग्लास जूस पी ली थी। अब उसे ठीक लग रहा था। शहनाज 8:00 बजने का इंतजार कर रही थी।

ठीक 8:00 बजे राज ने दरवाजा नाक किया। वो भी नये कुर्ता पायजामा और स्कल कैंप में था। आँखों में सूरमा और बदन पे इत्र लगाया हुआ था राज । शहनाज काँपते हाथों से दरवाजा खोली। वो अपने घर का नहीं चूत का दरवाजा खोल रही थी राज के लिए। राज शहनाज को देखता ही रह गया। शहनाज बहुत हसीन थी, लेकिन आज तो वो कयामत ढा रही थी। उफफ्फ ... राज की आँखें चुंधिया गई थी इस बेपनाह हुश्न को देखकर |

शहनाज राज को यूँ देखती हुई देखी तो शर्मा गई और उसकी नजरें झुक गई। राज के लिए तो शहनाज का ये अंदाज जानलेवा था। राज यूँ ही खड़ा रहा तो शहनाज एक कदम आगे बढ़कर उसके गले से लिपट गई, और कहा- “ऐसे क्यों देख रहे हैं, मुझे शर्म आ रही है..."

राज अपने होश में लौटा, और बोला- "मैंने सुना था हूरों के बारे में, आज यकीन हो गया की वो होती होंगी, सुभान अल्लाह, तुम्हारा हुश्न तो बेमिशाल है..."

शहनाज अपनी तारीफ सुनकर और शर्मा गई और राज को कसकर पकड़ ली। राज ने भी प्यार से उसकी पीठ पे हाथ फेरा।

शहनाज राज से अलग हुई और थोड़ा पीछे हुई दरवाजे से और राज अंदर आया । राज के हाथ में दो प्लास्टिक का पैकेट था। राज सोफे के पास प्लास्टिक को रखा और उससे एक कामकोडर और उसका स्टैंड निकालने लगा। शहनाज उसे देख रही थी।

राज स्टैंड पे कमरा फिक्स करने लगा और बोला- "मैं आज के हर लम्हे को कैद करना चाहता हूँ." फिर वो शहनाज को देखा और बोला- "तुम्हें इस कैमरे से कोई ऐतराज तो नहीं?"

शहनाज ना में सिर हिलाई ।

राज ने कैमरा सेट किया और शहनाज के हुश्न को उसमें कैद करने लगा। फिर वो खुद शहनाज के सामने आया और उसके माथे पे चूमा।

शहनाज उसके सीने से लग गई और महसूस करने की कोशिश करने लगी की राज ही उसका सब कुछ है। फिर वो राज को सीधा खड़ा की और टेबल से आरती की थाली उठा लाई । उसने दिया जला लिया था। वो राज की आरती उतारने लगी और फिर उसके माथे पे तिलक लगाई और उसपे फूल और चावल फेंकी। फिर वो एक दूसरी थाली ले आई, इसमें दो माला था। शहनाज एक माला राज को दी और दूसरी अपने हाथ में ले ली।

राज समझ गया की शहनाज क्या चाहती है? ये तो अच्छी बात थी उसके लिए कैमरा ओन था और कैमरे में दोनों की तथाकथित शादी रेकार्ड हो रही थी। उसे सच में खुशी हुई शहनाज का समर्पण देखकर |

शहनाज- आप ये माला मेरे गले में डालिए...'

राज ने उस फूलों के हार को शहनाज के गले में डाल दिया। फिर शहनाज अपने हार को राज के गले में डाल दी। फिर शहनाज एक और थाली ले आई। वो जब चल रही थी तो छन-छन की आवाज पूरे घर में गूँज रही थी।

शहनाज वो थाली राज के सामने कर दी और शर्माती हुई सिर झुका कर खड़ी हो गई । थाली में सिंदूर और मंगलसूत्र था।

राज को पहले तो समझ में नहीं आया की क्या करना है? लेकिन फिर उसकी नजर शहनाज के माथे पे गई जहाँ सिंदूर नदारद था। राज समझ गया की क्या करना है लेकिन वो खड़ा रहा।

शहनाज- मैं चाहती हूँ की आप ये सिंदूर मेरी माँग में भरें। अगर मैं खुद से लगाती तो वो वसीम के नाम का होता। मैं चाहती हूँ की मेरी माँग में आज आपके नाम का सिंदूर हो मुझे अपने रंग में रंग दीजिए राज और अपनी दुल्हन बना लीजिए..."

राज बहुत खुश हुआ। उसने थाली से चुटकी में सिंदूर उठाया और शहनाज की मांगटीका को किनारे करके उसकी माँग में सिंदूर लगा दिया।

शहनाज का रोम-रोम सिहर उठा। अब वो राज की दुल्हन है, राज की बीवी है। अब अगर मैं राज के साथ कुछ भी करती हूँ तो कुछ गलत नहीं कर रही हूँ मैं अब राज का पूरा हक है मेरे पे अब मुझे कुछ भी सोचने की जरूरत नहीं है। राज अब गैर-मर्द नहीं मेरे पति हैं।

शहनाज मंगलसूत्र उठा ली और थाली को रख दी। वो मंगलसूत्र शहनाज के हाथ से ले लिया और उसके गले महसूस कर रही थी की राज ही उसका सब कुछ है। पीठ और माथे पे हाथ फेरने लगा।

मंगलसूत्र को फैलाकर राज के सामने कर दी। राज ने मंगलसूत्र शहनाज के गले में पहना दिया। शहनाज राज के सीने से लग गई।

राज ने शहनाज के माथे पे चूमा और प्यार से उसकी दिल की भावनाएं सच्ची थी।

शहनाज थोड़ी देर बाद राज से अलग हुई और उसे सोफा पे बिठाकर खुद किचेन में चली गई। वो छन-छन करती हुई वापस लौटी तो उसके हाथ में एक और थाली थी जिसमें दो ग्लास थे। शहनाज उसमें से एक ग्लास उठाकर राज को दी जिसमें दूध भरा हुआ था। राज की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। उसने खुद इतना उम्मीद नहीं किया था। वो दूध पी लिया तो शहनाज दूसरे ग्लास से उसे पानी दी। राज ने पानी पी लिया और ग्लास नीचे रख दिया। उसने एक हाथ से शहनाज का एक हाथ पकड़ लिया था।

राज ने पाकेट में हाथ डाला और एक पेपर निकाला। उसने एक हाथ से ही पेपर को नीचे गिरा दिया और अब उसके हाथ में सोने का कंगन था। उसने दोनों कलाईयों में कंगन पहना दिया। अब शहनाज बहुत खुश थी। उसे भी इसकी उम्मीद नहीं थी। एक औरत को जेवर से बहुत प्यार होता है। एक बार वो सोची की मना कर दे, लेकिन फिर सोची की क्यों मना करे? राज उसके पति हैं और उनका पूरा हक है और मेरा भी हक है उनसे तोहफा लेने का |

राज आगे बढ़ा और शहनाज के कंधे को पकड़कर अपने सीने से लगा लिया और शहनाजकर उसके सीने से लिपट गई। राज ने शहनाज का चेहरा ऊपर किया और उसके फूल से नाजुक होठों पे एक हल्का सा चुंबन लिया। शहनाज शर्माकर छुई-मुई की तरह सिमट गई और राज का लण्ड टाइट हो गया। राज ने कैमरे को बेडरूम की तरफ मोड़ दिया और फिर शहनाज की चुनरी को नीचे गिरा दिया और उसे गोद में उठा लिया और चलता हुआ रूम में आ गया।

राज रूम देखकर झूम उठा। इसी बेड पे वो शहनाज के बेपनाह हुश्न के मजे लेगा । उसने शहनाज को दरवाजे पे ही नीचे उतार दिया और फिर कमरा स्टैंड को लाकर रूम में बेड के एक कोने पे लगाकर ओन कर दिया।

शहनाज तब तक छुई-मुई सी बनी हुई ही नजरें झुकाए खड़ी रही। सच में शर्म से उसकी हालत खराब हो रही थी। सोचने और करने में वाकई फर्क होता है। वो सुहागरात मानने जा रही थी। ठीक है उसने राज से शादी कर ली थी, या पहले भी उसके साथ बहुत कुछ कर चुकी थी। लेकिन थी तो ये उसकी नकली सुहागरात ही थी तो उसकी दूसरी सुहागरात। उसकी नजरों में ये सही था लेकिन दुनियां की नजरों में तो ये गलत था।

राज ने फिर से शहनाज को गोद में उठा लिया और आहिस्ते से उसे बेड पे रखा जैसे वो कितनी नाजुक हो और कहीं टूट ना जाए। राज ने अपना फूलों का हार उतारकर रख दिया और शहनाज के बगल में बैठ गया। शहनाजती हुई बेड में खुद को सिकोड़ने लगी। राज ने एक हाथ शहनाज के कंधे पे रखा और उसके माथे पे चूमा। शहनाज और सिमटने लगी और इस चुंबन ने उसके जिश्म को झकझोर दिया। राज ने शहनाज को थोड़ा सा झुकाया और उसकी दोनों आँखों पे बारी-बारी से किस किया।

शहनाज की आँखें बंद हो गई थी अब । राज ने शहनाज का भी फूलों का हार उतारकर रख दिया। राज की नजरों के सामने शहनाज के रसीले होंठ थे। राज पहले भी इन हसीन लबों का रस पी चुका था, लेकिन आज की तो बात ही कुछ और थी। उसने शहनाज को थोड़ा और झुका दिया, तो शहनाज के होंठ अपने आप खुल गये । राज ने भी देरी नहीं की और अपने होंठ शहनाज के होठों पे रख दिया और उनके रस को चूसता हुआ शहनाज को बेड पे गिराता चला गया। शहनाज अब सीधी लेटी हुई थी और राज उसके बगल में लेटा हुआ शहनाज के होठों को चूमने लगा और साथ ही साथ शहनाज के पेट को भी सहलाने लगा था।
 
अब राज के लिए खुद को रोकना मुश्किल हो रहा था। राज शहनाज के पेट को चूचियों से नीचे तक और लहँगे तक सहला रहा था। लाल लहँगा और चोली के बीच में गोरा चिकना पेट चमक रहा था। राज शहनाज के होठों को चूसता हुआ उसके पेट को सामने से और बगल से सहला रहा था। शहनाज गरमा रही थी। वो अपने पेट को अंदर करने लगी, ताकी राज का हाथ उसके लहँगे के नीचे उसकी चूत पे चला जाए। राज समझ तो गया था लेकिन उसे कौन सी हड़बड़ी थी। पूरी रात उसकी थी और आज उसे रुकना भी नहीं था। शहनाज को पूरी तरह पा लेना था।

राज अपनी जीभ को शहनाज के मुँह में करने लगा। शहनाज को समझ में नहीं आया की क्या करना है, तो वो भी अपनी जीभ बाहर करके राज के जीभ से टकराने लगी। राज ने शहनाज की जीभ को अपने होठों के बीच में पकड़ लिया और चूसने लगा। शहनाज अब पूरी तरह गरमा गई थी। अब राज ने अपना हाथ आगे किया और शहनाज की चूचियों को चोली के ऊपर से दबाने लगा।

चोली डीप कट की थी तो उसे कोई तकलीफ नहीं थी। वो अपने हाथ को थोड़ा सा तिरछा किया और राज का हाथ शहनाज की चोली और ब्रा के अंदर उसकी मुलयन चूची पे था। राज ने शहनाज के निपल के करारेपन को महसूस किया। उसने चूची को हल्का सा दबाया और शहनाज आहह.. करती हुई कमर को उठाकर बदन ऐंठने लगी। राज चोली के हुक को खोलने लगा। सारे बटन खोलने के बाद उसने चोली के दोनों कपों को किनारे कर दिया।

शहनाज की लाल ब्रा चमक उठी। ब्राउन निपल और गोरा जिश्म लाल ब्रा के अंदर से चमक रहा था। राज ने ब्रा के ऊपर से ही एक चूची को कस के मसल डाला। उफफ्फ ... शहनाज की हालत खराब होती जा रही थी। राज शहनाज की ब्रा को किनारे करता हुआ निपल को मसलने लगा और बीच-बीच में चूचियों को भी मसल देता था। ब्रा बहुत साफ्ट और ट्रांसपेरेंट थी तो वो बस दिखावे के लिए ही थी।

शहनाज अब जल्दी से जल्दी नंगी होना चाहती थी। उसे अपने कपड़े और ज्वेलरी बोझ लग रहे थे। राज शहनाज की हालत समझ रहा था। वो शहनाज की ज्वेलरी उतारने लगा। पहले उसने माँगटिका उतारा और फिर नाथ फिर उसने शहनाज के कंधे को पकड़कर उठाया और उसके पीछे बैठते हुए उसके गर्दन में किस किया और जो 4-5 तरह के हार उसने पहने थे उन्हें उतार दिया। राज शहनाज की चिकनी पीठ को चूम रहा था और पीठ को बगल को सहला रहा था। फिर राज ने शहनाज की चोली को उसके बदन से अलग कर दिया। राज चिकनी पीठ को अपने होठों से चूमता जा रहा था।

शहनाज अपने पैर को मोड़ ली और सिर को घुटने पे टिकाकर बैठ गई थी।

राज ने मेहन्दी से बने डिजाइन को देखा जो उसकी पीठ पे बना था। डिजाइन के बीच में उसे "आर" लिखा हुआ दिखा और उस जगह को चूम लिया। राज ने शहनाज की ब्रा का भी हुक खोल दिया और नंगी पीठ को चूमने सहलाने लगा। अब राज के लिए खुद को रोकना मुश्किल हो रहा था। उसका वहशिपना कंट्रोल के बाहर हो रहा था। उसने शहनाज को फिर से झुकाया और उसके साथ उसके बगल में लेट गया। वो शहनाज को करवट कर लिया और उसके सामने उसके जिश्म से चिपकता हुआ लेट गया। वो फिर से शहनाज के होंठ चूमने लगा और उसकी पीठ, पेट को सहला रहा था।

राज ने हाथ को सामने किया और नीचे से ब्रा के अंदर हाथ डालता हुआ चूचियों को मसलने लगा। वो जोर- जोर से चूचियों और निपलों को मसलने लगा। राज ने ब्रा को हाथ से निकल दिया। अब शहनाज ऊपर से टापलैश थी। अब राज ने शहनाज को फिर से सीधा लिटा दिया और चूचियों को चूस रहा था। राज एक निपल को मुँह में लेकर बच्चों की तरह चूस रहा था। अगर शहनाज दूध दे रही होती तो राज तुरंत ही उसका टैंकर खाली कर देता। वो दूसरे निपल को मसलता उंगली में लेकर जा रहा था। गोरी चूचियां लाल हो रही थी।

शहनाज आह्ह... उहह.... करने लगी थी। उसे लग रहा था की राज जल्दी से उसे नंगी करते और तुरंत ही चोद डालते।

फिर राज दूसरे निपल को चूसने लगा और शहनाज के पेट, बगल को सहलाने लगा और पेट सहलाते हुए लहँगा के ऊपर से जांघों को सहला रहा था। शहनाज का एक पैर सीधा था और दूसरा पैर उसने मोड़ लिया था। राज लहँगा ऊपर करना शुरू कर दिया और फिर लहँगे के अंदर हाथ डालकर वो शहनाज की नंगी जांघों को सहलाने लगा था। शहनाज का जिश्म हिलने लगा था अब । राज का हाथ पैंटी के ऊपर से चूत पे था और वो चूत के आसपास के एरिया को सहला रहा था। राज ने लहँगा को पूरा ऊपर कर दिया।

शहनाज अंदर में लाल रंग की डिजाइनर पैंटी पहनी थी जो आधी ट्रांसपेरेंट थी चूत के ऊपर। राज ने कैमरा को बेड के दूसरे कोने में रख दिया, और शहनाज के पैरों के बीच में आ गया और अच्छे से पैंटी को देखता हुआ जाँघों और पैंटी को सहलाने लगा। शहनाज की चूत तो कब से गीली थी और वो गीलापन पैंटी पे भी आ चुका था। अब शहनाज के लिये बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था। राज को अपनी गीली पैंटी को देखते पाकर वो शर्मा गई।

राज ने शहनाज के लहंगे को उतार दिया और अपने कुर्ते को उतारते हुए शहनाज के बगल में लेट गया। शहनाज चाह रही थी की जल्दी से राज उसकी पैंटी भी उतार दे और चोदना शुरू कर दे। लेकिन राज को बिना पैंटी उतारे बगल में लेटता हुआ देखकर उसे मायूसी हुई। शहनाज सिर्फ एक लाल पैंटी में राज के साथ लेटी हुई थी और कैमरा इसकी अच्छे से रेकार्डिंग कर रहा था। शहनाज के हिलने से चूड़ी और पायल की आवाज आ रही थी, और कमरे में बेड पे हर तरफ फूल बिखरे हुए थे। राज शहनाज के बगल में लेटकर उसे अपने सीने से चिपका लिया और उसके हठों को चूसने लगा और पीठ को सहलाते हुए पैंटी के अंदर हाथ डालकर गाण्ड को सहलाने लगा।

पीछे से शहनाज की आधी गाण्ड दिख रही थी तो राज अपना हाथ सामने लाया और शहनाज की चिकनी चूत को सहलाने लगा। राज का हाथ शहनाज की लाल पैंटी के अंदर उसकी चिकनी गीली चूत में था। राज चूत को सहला रहा था और उसने अपनी एक उंगली गरमाई शहनाज की गीली चूत के अंदर डाल दिया । उफफ्फ ... चूत के अंदर का तापमान पूरा बढ़ा हुआ था। उंगली चूत में जाते ही शहनाज का बदन हिलने लगा और वो राज को कस के पकड़ ली और उसके होठों को चूमने लगी। पैंटी सामने से भी चूत से नीचे हो चुकी थी।

राज चूत में उंगली अंदर बाहर करने लगा और पैंटी को नीचे करता गया। पैंटी घुटने तक पहुँच चुकी थी । राज उठकर बैठ गया और शहनाज को सीधा किया। राज शहनाज के पैरों के बीच बैठ गया और उसकी पैंटी को उतार दिया।

शहनाज अब पूरी नंगी लेटी हुई थी राज के आगे। अब उसके जिश्म पे बस चूड़ी, कंगन, पायल, मंगलसूत्र ही थे। राज शहनाज के चमकते जिश्म को निहारने लगा। शहनाज उस तरह राज को देखता देखकर शर्मा गई और अपनी मेहन्दी लगे हाथों से अपना चेहरा छुपा ली।

राज मुश्कुरा दिया। उसने शहनाज के पैर फैलाए तो गीली चूत के होंठ आपस में खुल गये। राज बेड से उठा और कैमरा स्टैंड से उतारकर अपने हाथ में ले लिया और अच्छे से शहनाज के नंगे कटीले जिश्म की रेकार्डिंग करने लगा। वो अपने एक हाथ से चूत को फैलाया और चूत का क्लोज़प लेने लगा। शहनाज आँख से थोड़ा सा उंगली साइड में करके देखी और राज को इस तरह रेकार्डिंग करता देखकर और शर्मा गई चूत का अच्छे से क्लोजप लेता हुआ राज अपनी उंगली चूत में अंदर-बाहर करने लगा।

राज की उंगली चूत से बाहर आई तो पूरी तरह गीली थी। राज कैमरा में अपनी गीली उंगली दिखाने लगा और उसी हाथ से शहनाज की एक चूची और निपल को मसलने लगा। शहनाज अभी भी चेहरा ढकी हुई थी तो राज निपल को कस के मसलकर ऊपर खींचने लगा। शहनाज आss करती हुई दर्द कम करने के लिए अपने बदन को ऊपर उठाई और चेहरे से हाथ हटाकर राज का हाथ पकड़ ली। राज मुश्कुरा दिया और शहनाज के चेहरा के साथ पूरे जिश्म का वीडियो रेकार्ड करता रहा।

राज ने कैमरे को वापस स्टैंड में लगा दिया और फिर से शहनाज के पैरों के बीच बैठ गया। राज ने शहनाज के पैरों को अच्छे से फैला दिया, और अपने हाथों से चूत को फैलाता हुआ चूत पे किस किया और फिर चूसने लगा। वो अपनी उंगली भी चूत के अंदर-बाहर कर रहा था और चूत को चूस भी रहा था। हाथ से चूत के छेद को फैलाकर अपनी जीभ को चूत के अंदरुनी हिस्से में सटा रहा था राज राज अपनी जीभ से ही शहनाज की चुदाई कर रहा था। राज जीभ को चूत के अंदर सटाकर चूस रहा था और फिर चूत के दाने को मुँह में भरकर खींचने लगा था।

शहनाज अब खुद को नहीं रोक पाई और उसके मुँह से आss उहह... की आवाज निकलने लगी। राज शहनाज की चूत को चूसता जा रहा था और बीच-बीच में उंगली भी करता जा रहा था। शहनाज अपने बदन को ऐंठने लगी और उसकी चूत ने कामरस छोड़ दिया और राज को पता चला गया। शहनाज हाँफ रही थी।
 
राज अब लेटी हुई शहनाज के मुँह के पास आया और अपने पायजामे को नीचे कर दिया और उसका विशाल सा लण्ड उसके अंडरवेर को फाड़ने के लिए तैयार था। उसने शहनाज का हाथ पकड़कर अपने अंडरवेर पे रखा और शहनाज उसे सहलाने लगी। राज शहनाज के बगल में सीधा लेट गया ।

शहनाज करवट होकर राज से चिपक गई, उसकी चूचियां राज के जिश्म से दब रही थीं। अब वो राज के लण्ड को अंडरवेर के ऊपर से सहला रही थी। फिर शहनाज थोड़ा सा उठी और अंडरवेर को नीचे कर दी। अंडरवेर नीचे करते ही फुफकारते हुए साँप की तरह लण्ड बाहर निकला और तनकर खड़ा हो गया। शहनाज मुश्कुरा दी। आज उसे लण्ड और बड़ा और मोटा नजर आया। आज फाइनली इस मोटे और बड़े से लण्ड को शहनाज की छोटी सी चूत के अंदर की सैर करनी थी।

शहनाज उस लण्ड को सहलाने लगी जिसने कई बार उसके नाम का मूठ मारा था। शहनाज का ये सब पहला अनुभव था। वो वसीम के साथ ये सब कुछ नहीं की थी, फिर भी राज को बुरा ना लगे और उसे खुशी मिले, उसने राज का पायजामा और अंडरवेर को नीचे करके उतार दिया और राज के पैरों के बीच बैठ गई। शहनाज लण्ड को पूरे हाथ में लेकर पकड़ ली और झुकती हुई उसे किस की।

लण्ड की खुश्बू उसे दीवाना कर गई। वो लण्ड पे झुकती गई और मुँह को फैलाती गई और फिर उसे मुँह में लेकर चूसने लगी।

उसकी चुचियाँ राज के जांघों को सहला रही थी। शहनाज अपने मुँह को और फैलाई और अच्छे से लण्ड को मुँह में भरकर चूसने लगी। वो पहले से भी अच्छे तरीके से लण्ड चूस रही थी। अब तो उसके पास लण्ड चूसने का अनुभव भी था।

राज ने शहनाज को रोक दिया और उसका मुँह हटा दिया। शहनाज चौंक गई की अब क्या हो गया? कहीं ये मुझे आज भी नहीं चोदेंगे क्या? लेकिन आज बहुत कुछ होना था। राज उठकर बेड के किनारे पैर लटका कर बैठ गया और शहनाज अब नीचे बैठकर राज का लण्ड चूस रही थी राज ने कैमरा हाथ में ले लिया और खुद रेकार्डिंग करने लगा।

शहनाज बहुत जतन और ध्यान से राज का लण्ड चूस रही थी। वो पूरी तरह कोशिश कर रही थी की पूरा लण्ड वो मुँह में ले पाए लेकिन ये हो नहीं पा रहा था। शहनाज बहुत सेक्सी लग रही थी इस तरह लण्ड को चूसते हुए । राज ने शहनाज को बेड पे लेटने के लिए कहा। शहनाज बेड पे आकर लेट तो गई, लेकिन उसकी टाँगें आपस में सटी हुई थी और एक तरह से वो अपने नंगे बदन को समेट रही थी। वो समझ रही थी की राज ने उसे चोदने के लिए बेड पे लिटाया है और अब उसकी चुदाई होने वाली है। चुदाई के इस एहसास ने उसे रोमांचित कर दिया और वो फिर से शर्मा रही थी।

राज ने कैमरा को स्टैंड पे लगा दिया और शहनाज के पैर को फैलाता हुआ बीच में बैठ गया। उसने शहनाज के पैर को अच्छे से फैला दिया और चूत पे किस करता हुआ उंगली करने लगा। अब वो शहनाज के पैरों के बीच में ही थोड़ा आगे आ गया और अपने लण्ड को शहनाज की चूत में सटा दिया और फिर चूत को लण्ड से सहलाने लगा। लण्ड चूत में सटते ही शहनाज के जिश्म में करेंट दौड़ गया वो पूरी तरह गरमा गई और चूत गीली हो गई। राज अपने लण्ड से शहनाज की चूत को सहलाते जा रहा था और जगह बनाते जा रहा था।

शहनाज चूत में राज का लण्ड लेने के लिए आतुर हो रही थी। लण्ड के अंदर जाने पर होने वाले दर्द को सहने के लिए भी वो मेंटली तैयार हो चुकी थी। शहनाज सोच रही थी- “आहह... राज डालिए ना अब अंदर मेरी चूत आपके सामने है। डाल दीजिए अपने लण्ड को अंदर और चोदिए मुझे जितने सपने आपने देखे हैं मुझे सोचते हुए, सब पूरे कर लीजिए आह्ह... रौंद डालिए मेरे जिश्म को आहह.. राज प्लीज़्ज़... डालिए ना अंदर " लेकिन उसके मुँह से बस आह्ह... उम्म्मह... की आवाज ही आ रही थी।

राज लण्ड के लिए रास्ता बनाता हुआ चूत सहला रहा था और शहनाज अपनी कमर उठाकर लण्ड अंदर ले लेना चाहती थी। राज लण्ड को चूत से सटाकर शहनाज के ऊपर लेट गया और उसके होठों को चूमने लगा और चूचियों मसलने लगा।

शहनाज अब बर्दाश्त नहीं कर पाई, कहा- डालिए ना राज अंदर क्या कर रहे हैं आप?

राज शहनाज के गालों को चूमता बोला- "क्या डालूं मेरी जान?"

शहनाज एक झटके में बोली- "लण्ड..." लेकिन तुरंत ही उसे एहसास हो गया की वो क्या बोली और शर्मा गई।

राज उसकी चूचियों पे दाँत काटता हुआ पूछा- "कहाँ मेरी जान?"

शहनाज दो सेकेंड के लिए रुकी लेकिन फिर अपने शर्म को त्यागती हुई बोली- "मेरी चूत में। ओह्ह.. राज क्यों तड़पा रहे हैं?"

अचानक शहनाज को अपना जिश्म फटता हुआ महसूस हुआ। वो दर्द से बिलख गई। राज ने शहनाज को कस के अपनी बाहों में पकड़ लिया था। राज का लण्ड शहनाज की चूत के रास्ते को खोल चुका था। राज ने अपनी कमर का भार शहनाज की चूत पे बढ़ाया और अपने दर्द को सहती हुई शहनाज आहह.... आह माँ... करती हुई दोनों पैर को पूरी तरह फैला ली और फाइनली राज का लण्ड शहनाज की चूत के अंदर आ चुका था। राज ने अब एक धक्का मारा और उसका लण्ड शहनाज की चूत की गहराइयों में उतरता चला गया।
 
शहनाज का दर्द कम हो चुका था। वो कोई कुँवारी लड़की तो नहीं थी फिर भी 3" इंच के बाद आज ही उसका कुँवारापन दूर हुआ था। अभी भी पूरा लण्ड अंदर नहीं गया था। राज शहनाज के होठों को चूमने लगा, चूसने लगा। राज ने एक धक्का और मारा और बचा कूचा लण्ड भी शहनाज की चूत में समा गया। राज अब कस कस के धक्के लगाने लगा।

शहनाज आहह.. उऊहह करने लगी। राज के धक्के से शहनाज का पूरा जिश्म हिल रहा था। शहनाज की मुलायम चूचियां पूरी तरह से उछल रही थीं, और राज अपने अरमान पूरे कर रहा था। तुरंत ही शहनाज की चूत ने अपना पानी छोड़ दिया। लेकिन तुरंत ही वो फिर से गरमा गई थी।

राज ने लण्ड डाले हुए ही उसे ऊपर कर दिया और अब शहनाज राज के लण्ड पे उछल रही थी। शहनाज की चूचियां ऊपर-नीचे हो रही थी और साथ में वो मंगलसूत्र भी । शहनाज पूरा ऊपर आ रही थी और फिर पूरा नीचे जा रही थी। थोड़ी देर बाद राज ने शहनाज को कुतिया की तरह चार पैरों पे कर दिया और उसकी गाण्ड पे कस के एक हाथ मारा। शहनाज इस तरह हो गई की उसकी गाण्ड बाहर की तरफ निकल गई और कमर नीचे हो गई ।

राज शहनाज के पीछे आया और उसकी चूत में अपना लण्ड घुसेड़ दिया।

शहनाज की चूत से फिर पानी बह निकला और राज के हर धक्के से शहनाज की चूत से वो पानी बाहर आ रहा था। फिर से राज ने शहनाज को सीधा लिटाया और और उसके ऊपर आकर चोदने लगा। शहनाज पस्त हो चुकी थी। बहुत देर हो चुका था। शहनाज आधे घंटे से इतने विशाल लण्ड को अपनी नाजुक सी चूत में झेल रही थी। ‘’

राज शहनाज से पूरी तरह चिपक गया और लण्ड चूत के आखिरी छोर में जा सटा और राज के लण्ड ने पानी गिरा दिया। अंदर वीर्य की गर्मी पाते ही शहनाज की चूत तीसरी बार पानी छोड़ दी। जब वीर्य की आखिरी बूंद भी शहनाज की चूत में गिर गई तो राज ने अपने लण्ड को बाहर निकाल लिया और शहनाज के बगल में ढेर हो गया।

लण्ड के बाहर आते ही शहनाज की चूत से वीर्य का और चूत के पानी का मिक्स्चर बाहर बेड पे बहने लगा। दोनों पसीने से लथपथ हो चुके थे। इस महयुद्ध में एक बार फिर से चूत की ही जीत हुई और इतना विशाल लण्ड भी अब थक हार कर मुर्दे की तरह पड़ा हुआ था। बॅड के सारे फूल रौंदे मसले जा चुके थे।

आखिरकार, शहनाज आज राज से चुद ही गई। इतनी मजेदार चुदाई उसकी आज तक नहीं हुई थी। वो पसीने से लथफथ थी। राज भी इस 23 साल की अप्सरा को अपने मन मुताबिक चोदकर निढाल पड़ा था।

शहनाज ऐसे ही नंगी लेटी रही। उसकी चूत से अभी भी राज का वीर्य और खुद उसकी चूत का पानी मिलकर बाहर बह रहा था और बेड को गीला कर रहा था। शहनाज के जिश्म में तो जैसे जान ही नहीं थी। 6:00 बजे से अभी 10:00 बजे तक में 4 बार उसकी चूत से पानी निकला था। एक बार तो वो खुद नहाते वक़्त निकाली थी और तीन बार राज ने चोदते हुए निकाल दिया।

शहनाज मन में- "उफफ्फ ... ऐसे भी कहीं चुदाई होती है। 8:00 बजे से लेकर 10:00 बजे तक। एक तो इतना बड़ा घोड़े का लण्ड है और उसपे इतनी देर तक चोदते रहे। मेरी तो चूत छिल गई है। पूरा बदन दर्द कर रहा है। लेकिन एक बात की खुशी है की मैं इनका साथ दे पाई। उन्हें मजा तो आया होगा ना ? संतुष्ट तो हुए होंगे ना वो? पता नहीं, लेकिन इतने पे भी अगर कोई संतुष्ट ना हो तो अब क्या जान निकल के मानेगा ?

थोड़ी देर में राज बेड से उठा। उसका लण्ड इतनी पुरजोर चुदाई के बाद ढीला था। लेकिन उसकी जांघों के बीच ऐसे लटक रहा था जैसे कोई काला नाग झूल रहा हो। उस झूलते लण्ड को देखकर शहनाज की चूत में फिर से आग भर गई। राज ने कैमरे को बंद कर दिया। राज ने लेटी हुई शहनाज को देखा।

शहनाज भी बेड से उठ गई । उसका पूरा मेकप बिगड़ा हुआ था। आँखों का काजल और लिपस्टिक फैल गया था और बाल बिखरे हुए थे। वो बहुत ही सेडक्टिव लग रही थी। वो सीधे बाथरूम में जाकर पेशाब करने लगी। उसकी चूत में तेज जलन होने लगी और चूत से गाढ़ा सफेद पानी पेशाब के साथ निकलने लगा। वो बाथरूम में ही चूत को ठंडे पानी से अच्छे से धो ली और पोंछकर बाहर आई। शहनाज तौलिया लपेटकर बाथरूम से बाहर आई, तब तक राज प्लास्टिक बैग से लुंगी निकालकर पहन चुका था और सोफे पे बैठा था।

शहनाज अदा से चलती हुई राज के सामने आई और बोली- "मैं खाना लगाती हूँ, चलिए कुछ खा लीजिए "
 
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