S
StoryPublisher
Guest
"पीयूष, कोई भी लड़की अपना पहला किस कभी भूल नहीं सकती.. मुझे सब कुछ याद है.. तू बहोत पसंद था मुझे.. पर तू उस पिंकी के साथ ज्यादा खेलता था तब बड़ा गुस्सा आता था मुझे.. "
"कौन सी पिंकी यार??"
"एक नंबर का भुलक्कड़ है तू.. पीछे वाली गली में रहती थी.. रमणकाका की बेटी"
"अरे हाँ.. वो.. वो तो मुझे जरा भी पसंद नहीं थी.. पता नहीं यार तुझे उस समय क्यों ऐसा लगा की पिंकी मुझे पसंद थी.. मैं उस समय भी तुझसे बहोत प्यार करता था.. " दोनों बातें करते हुए एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे.. थोड़ी थोड़ी देर पर वैशाली घड़ी पर नजर डाल लेती थी..
वैशाली किसी परपुरुष के साथ ऐसा कभी न करती.. पर जब से उसे संजय के अवैध संबंधों के बारे में पता चला.. उसका दिमाग फट रहा था.. वो मादरचोद वहाँ मस्ती करे और मैं यहाँ गांड मराऊ ?? मैं भी बेशरम बन सकती हूँ.. और संजय के ऊपर आए गुस्से के कारण ही आज वो पीयूष का लंड पकड़कर रेत में लेटी थी..
"पीयूष.. ऐसे धीरे धीरे नहीं.. जरा जोर से दबा.. " वैशाली ने बड़ी ही धीमी कामुक आवाज में कहा। पीयूष वैशाली के गाल, गर्दन और कान को चूमते हुए उसके विशाल स्तनों को दबा रहा था.. वैशाली के टाइट टीशर्ट के ऊपर के बटन निकालकर उसने खजाना खोल दिया.. ब्रा के अंदर कैद दो खरबूजों के बीच की गोरी चीट्टी खाई.. आहहाहहाहहा.. ब्रा के ऊपर से उभर कर आए स्तनों के ऊपरी हिस्सों को वो चूमते हुए वैशाली के पेंट की चैन को खोलने लगा.. वैशाली की पेन्टी.. चुत का रस रिसने से पूरी तरह भीग चुकी थी
"ओह पीयूष.. बहुत खुजली हो रही है यार अंदर.. अपने हाथ से थोड़ा सहला उसे.. " लंड के ऊपर अपनी पकड़ को मजबूत करते हुए वैशाली ने कहा.. इतनी मजबूती से कभी कविता ने भी नहीं पकड़ा था पीयूष का.. कविता से हजार गुना ज्यादा हवस थी वैशाली में ..
"ओह्ह वैशाली.. मुझे एक बार तेरे ये दोनों बबले खोल कर देखने है यार.. " वैशाली ने टीशर्ट के बाकी बटन खोल दिए.. और ब्रा की कटोरियों में से दोनों मांस के पिंड को बाहर निकाला.. दूध जैसे गोरे भारी भरकम स्तनों को देखकर पीयूष कि आँखें फटी की फटी ही रह गई..
"कितने मस्त है यार तेरे बबले.. " दोनों लचकते स्तनों को हाथ में पकड़कर पीयूष दबाने मसलने लगा..
"तेरा स्पर्श मुझे पागल बना रहा है पीयूष.. मज़ा आ रहा है.. जोर से दबा.. क्रश इट.. ओ येह.. ओ गॉड.. आह्ह" अपने पति की बेवफाई का बदला लेने के लिए वैशाली पीयूष के शरीर फिर हाथ फेर रही थी.. वैशाली के खिले हुए गुलाब जैसे जिस्म को पीयूष रौंदने लगा..
"वैशाली.. तुझे कैसा लगा मेरा.. ??" अपने लंड की ओर इशारा करते हुए पीयूष ने वैशाली की जीन्स केप्रि को खींच कर उसके घुटनों तक ला दिया
"मस्त है तेरा पीयूष.. मज़ा आएगा"
"तेरे पति से बड़ा है ना !!!" संजय का जिक्र होते ही वैशाली के दिमाग के कुकर की सीटी बज गई..
"तू नाम मत ले उस भड़वे का.. मेरा मूड खराब हो जाएगा" वैशाली ने नीचे झुक कर पीयूष का पूरा लंड मुंह में लिया और चूसने लगी.. और बड़ी ही तीव्र गति से चूसने लगी..
"आह्ह वैशाली.. जरा धीरे धीरे.. निकल जाएगा मेरा" पीयूष के आँड़ों से खेलते हुए वैशाली बड़ी मस्ती से चूस रही थी
वैशाली की टाइट केप्रि को बार बार खींचने पर भी जब नहीं निकाल पाया पीयूष तब उसने परेशान होकर वैशाली से कहा
"अरे यार.. ये तेरी चुत के चारों तरफ जो किलेबंदी है उसे हटा.. मुझसे तो निकल ही नहीं रहा है.. कितना टाइट पहनती है तू?"
"मेरे पीयूष राजा.. ऐसे टाइट पेंट में ही हिप्स उभर कर बाहर दिखते है.. और में हॉट लगती हूँ.. समझा.. !!" वैशाली ने आँख मारते हुए कहा
"वो तो ठीक है मेरी रानी.. पर इसे खोलने में कितना वक्त बर्बाद होता है!! इससे तो देसी घाघरा ही अच्छा.. जो पहनने के भी काम आए और वक्त आने पर बिछाने के भी.. अब नखरे छोड़ और उतार ये तेरी केप्रि" अपने ठुमकते लोड़े को काबू में करने के लिए पीयूष ने उसे हाथ से पकड़ कर रखा था..
वैशाली रेत के ढेर से खड़ी हुई.. उसकी पीठ पर रेत लग गई थी.. वैशाली ने केप्रि और साथ में अपनी पेन्टी भी उतार दी.. और कमर से नीचे पूरी नंगी हो गई..
वैशाली की मोटी मोटी जांघें देख पीयूष उत्तेजित होकर उन्हे चूमने लगा.. हल्के झांटों वाली चुत पर हाथ फेरते हुए उसने चुत का प्रवेश द्वार ढूंढ निकाला.. और अपनी उंगलियों से उसकी क्लिटोरिस से जैसे ही उसने खेलना शुरू किया.. वैशाली सिहर उठी.. उसने पीयूष के सिर को पकड़ कर अपनी दो जांघों के बीच में दबा दिया.. सिसकियाँ लेते हुए वो अपने पैरों से पीयूष के लंड को रगड़ने लगी..
"ओह पीयूष.. चाट मेरी यार.. " तड़प रही थी वैशाली.. उसके स्तन फूल कर सख्त हो गए थे.. निप्पल उभर आई थी.. अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था उससे.. वो अपनी झांटों वाली चुत को पीयूष के चेहरे पर रगड़ने लगी.. लेकिन पीयूष अब भी सिर्फ चूम ही रहा था.. अपनी जीभ उसने वैशाली की चुत में नहीं डाली थी
चुत की खुजली से परेशान वैशाली ने पीयूष को धक्का देकर रेत के ढेर पर गिरा दिया.. और उसके चेहरे पर सवार हो गई.. दोनों तरफ अपने पैर जमाकर मदमस्त होकर अपनी चूचियाँ मसलते हुए वो आगे पीछे होने लगी.. वैशाली के जिस्म का वज़न आ जाने से पीयूष का चेहरा रेत में धंस गया.. उसने वैशाली की चुत की परतों के बीच अपनी जीभ फेरनी शुरू कर दी.. दोनों उत्तेजनावश वासना के महासागर में गोते खाने लगे.. हवस की आग में झुलस रही वैशाली पीयूष के सर के बाल पकड़कर अपनी चुत का दबाव बनाने लगी.. पीयूष ने अपने नाखून वैशाली के कोमल चूतड़ों में गाड़ दिए.. चुत का रस पीयूष के पूरे चेहरे पर सना हुआ था..
एक घंटा हो गया.. इन दोनों का फोरपले अब भी चल रहा था.. वैशाली पीयूष के स्पर्श की एक एक पल बड़े मजे से महसूस कर रही थी.. पीयूष की जीभ.. चुत के अंदर तक घुस चुकी थी और वैशाली को स्वर्ग की सैर करवा रही थी.. पीयूष ने अपने लंड को मुठ्ठी में पकड़कर हिलाना शुरू कर दिया.. उसे लंड हिलाता देख वैशाली ने उसका हाथ छुड़ाकर खुद हिलाना शुरू कर दिया
"हाये पीयूष.. ये तेरा खुरदरा लंड जब मेरी चुत की दीवारों पर घिसेगा तब कितना मज़ा आएगा यार.. !!" अब वैशाली को लंड लेने की इच्छा होने लगी.. वैशाली ने अपनी कमर को थोड़ा सा उठाया.. पीयूष अब रिसती हुई चुत को साफ देख पाया.. उसने अपनी जीभ को वैशाली के गांड के छेद से लेकर क्लिटोरिस तक चाटा.. और अंगूठे से क्लिटोरिस को कुरेदने लगा..
दो दो संवेदनशील जगहों पर जीभ का स्पर्श होते ही वैशाली बेहद उत्तेजित हुई.. और वो खुद झड़ जाए उससे पहले पीयूष के लंड के ऊपर बैठ गई.. जिस प्रकार से लंड घिसकर अंदर गया उससे वैशाली को यकीन हो गया की हिम्मत के लंड के मुकाबले पीयूष के लंड में ज्यादा मज़ा आएगा..
"आह्ह पीयूष.. ओह माँ.. फक मी.. येस.. ओह गॉड.. फक मी हार्ड.. " कराह रही थी वैशाली.. पीयूष भी नीचे से दमदार धक्के लगाए जा रहा था..
"ओह्ह वैशाली.. मेरा निकलने की तैयारी में है.. !! कितनी टाइट है तेरी चुत.. आह्ह.. !! लगता है काफी दिनों से बिना चुदे कोरी पड़ी है तेरी चुत.. "
"ओह्ह.. जोर से धक्के मार पीयूष.. स्पीड बढ़ा.. फाड़ दे मेरी चुत को.. बहुत भूखी हूँ.. ओह ओह्ह.. " पागलों की तरह कूद रही थी वैशाली.. खंडहर की दीवारों के बीच "फ़च फ़च" की आवाज़ें गूंज रही थी.. "पीयूष.. पानी अंदर मत निकालना.. नहीं तो भसड़ हो जाएगी.. पिछले एक साल से उस कमीने के साथ मैंने कुछ नहीं किया है"
"ओह्ह पीयूष.. आह्ह.. उईई माँ.. बहोत मस्त चोद रहा है यार.. आह्ह मैं गईईईई" कहते हुए वैशाली थरथराने लगी और झड़ गई.. झड़ते ही वो उसी अवस्था में पीयूष की छाती के ऊपर लेट गई.. पीयूष ने अपना लंड बाहर निकाल और वैशाली की गांड के इर्दगिर्द अपनी पिचकारी दे मारी.. गांड के छेद पर गरम गरम वीर्य का स्पर्श होती है वैशाली ने कहा "कितना गरम है यार.. पीछे जलने लगा मुझे.. "
वैशाली पीयूष के शरीर से उतर गई.. और बेफिक्र होकर उसके बगल में रेत पर लेट गई.. दोनों पसीने से सन चुके थे.. और पूरे शरीर पर रेत लग गई थी.. वासना का तूफान शांत हो गया था.. और दोनों धीरे धीरे वास्तविकता की दुनिया में कदम रख रहे थे.. पीयूष अब भी लेटे लेटे वैशाली के स्तनों को दबा रहा था
"कौन सी पिंकी यार??"
"एक नंबर का भुलक्कड़ है तू.. पीछे वाली गली में रहती थी.. रमणकाका की बेटी"
"अरे हाँ.. वो.. वो तो मुझे जरा भी पसंद नहीं थी.. पता नहीं यार तुझे उस समय क्यों ऐसा लगा की पिंकी मुझे पसंद थी.. मैं उस समय भी तुझसे बहोत प्यार करता था.. " दोनों बातें करते हुए एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे.. थोड़ी थोड़ी देर पर वैशाली घड़ी पर नजर डाल लेती थी..
वैशाली किसी परपुरुष के साथ ऐसा कभी न करती.. पर जब से उसे संजय के अवैध संबंधों के बारे में पता चला.. उसका दिमाग फट रहा था.. वो मादरचोद वहाँ मस्ती करे और मैं यहाँ गांड मराऊ ?? मैं भी बेशरम बन सकती हूँ.. और संजय के ऊपर आए गुस्से के कारण ही आज वो पीयूष का लंड पकड़कर रेत में लेटी थी..
"पीयूष.. ऐसे धीरे धीरे नहीं.. जरा जोर से दबा.. " वैशाली ने बड़ी ही धीमी कामुक आवाज में कहा। पीयूष वैशाली के गाल, गर्दन और कान को चूमते हुए उसके विशाल स्तनों को दबा रहा था.. वैशाली के टाइट टीशर्ट के ऊपर के बटन निकालकर उसने खजाना खोल दिया.. ब्रा के अंदर कैद दो खरबूजों के बीच की गोरी चीट्टी खाई.. आहहाहहाहहा.. ब्रा के ऊपर से उभर कर आए स्तनों के ऊपरी हिस्सों को वो चूमते हुए वैशाली के पेंट की चैन को खोलने लगा.. वैशाली की पेन्टी.. चुत का रस रिसने से पूरी तरह भीग चुकी थी
"ओह पीयूष.. बहुत खुजली हो रही है यार अंदर.. अपने हाथ से थोड़ा सहला उसे.. " लंड के ऊपर अपनी पकड़ को मजबूत करते हुए वैशाली ने कहा.. इतनी मजबूती से कभी कविता ने भी नहीं पकड़ा था पीयूष का.. कविता से हजार गुना ज्यादा हवस थी वैशाली में ..
"ओह्ह वैशाली.. मुझे एक बार तेरे ये दोनों बबले खोल कर देखने है यार.. " वैशाली ने टीशर्ट के बाकी बटन खोल दिए.. और ब्रा की कटोरियों में से दोनों मांस के पिंड को बाहर निकाला.. दूध जैसे गोरे भारी भरकम स्तनों को देखकर पीयूष कि आँखें फटी की फटी ही रह गई..
"कितने मस्त है यार तेरे बबले.. " दोनों लचकते स्तनों को हाथ में पकड़कर पीयूष दबाने मसलने लगा..
"तेरा स्पर्श मुझे पागल बना रहा है पीयूष.. मज़ा आ रहा है.. जोर से दबा.. क्रश इट.. ओ येह.. ओ गॉड.. आह्ह" अपने पति की बेवफाई का बदला लेने के लिए वैशाली पीयूष के शरीर फिर हाथ फेर रही थी.. वैशाली के खिले हुए गुलाब जैसे जिस्म को पीयूष रौंदने लगा..
"वैशाली.. तुझे कैसा लगा मेरा.. ??" अपने लंड की ओर इशारा करते हुए पीयूष ने वैशाली की जीन्स केप्रि को खींच कर उसके घुटनों तक ला दिया
"मस्त है तेरा पीयूष.. मज़ा आएगा"
"तेरे पति से बड़ा है ना !!!" संजय का जिक्र होते ही वैशाली के दिमाग के कुकर की सीटी बज गई..
"तू नाम मत ले उस भड़वे का.. मेरा मूड खराब हो जाएगा" वैशाली ने नीचे झुक कर पीयूष का पूरा लंड मुंह में लिया और चूसने लगी.. और बड़ी ही तीव्र गति से चूसने लगी..
"आह्ह वैशाली.. जरा धीरे धीरे.. निकल जाएगा मेरा" पीयूष के आँड़ों से खेलते हुए वैशाली बड़ी मस्ती से चूस रही थी
वैशाली की टाइट केप्रि को बार बार खींचने पर भी जब नहीं निकाल पाया पीयूष तब उसने परेशान होकर वैशाली से कहा
"अरे यार.. ये तेरी चुत के चारों तरफ जो किलेबंदी है उसे हटा.. मुझसे तो निकल ही नहीं रहा है.. कितना टाइट पहनती है तू?"
"मेरे पीयूष राजा.. ऐसे टाइट पेंट में ही हिप्स उभर कर बाहर दिखते है.. और में हॉट लगती हूँ.. समझा.. !!" वैशाली ने आँख मारते हुए कहा
"वो तो ठीक है मेरी रानी.. पर इसे खोलने में कितना वक्त बर्बाद होता है!! इससे तो देसी घाघरा ही अच्छा.. जो पहनने के भी काम आए और वक्त आने पर बिछाने के भी.. अब नखरे छोड़ और उतार ये तेरी केप्रि" अपने ठुमकते लोड़े को काबू में करने के लिए पीयूष ने उसे हाथ से पकड़ कर रखा था..
वैशाली रेत के ढेर से खड़ी हुई.. उसकी पीठ पर रेत लग गई थी.. वैशाली ने केप्रि और साथ में अपनी पेन्टी भी उतार दी.. और कमर से नीचे पूरी नंगी हो गई..
वैशाली की मोटी मोटी जांघें देख पीयूष उत्तेजित होकर उन्हे चूमने लगा.. हल्के झांटों वाली चुत पर हाथ फेरते हुए उसने चुत का प्रवेश द्वार ढूंढ निकाला.. और अपनी उंगलियों से उसकी क्लिटोरिस से जैसे ही उसने खेलना शुरू किया.. वैशाली सिहर उठी.. उसने पीयूष के सिर को पकड़ कर अपनी दो जांघों के बीच में दबा दिया.. सिसकियाँ लेते हुए वो अपने पैरों से पीयूष के लंड को रगड़ने लगी..
"ओह पीयूष.. चाट मेरी यार.. " तड़प रही थी वैशाली.. उसके स्तन फूल कर सख्त हो गए थे.. निप्पल उभर आई थी.. अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था उससे.. वो अपनी झांटों वाली चुत को पीयूष के चेहरे पर रगड़ने लगी.. लेकिन पीयूष अब भी सिर्फ चूम ही रहा था.. अपनी जीभ उसने वैशाली की चुत में नहीं डाली थी
चुत की खुजली से परेशान वैशाली ने पीयूष को धक्का देकर रेत के ढेर पर गिरा दिया.. और उसके चेहरे पर सवार हो गई.. दोनों तरफ अपने पैर जमाकर मदमस्त होकर अपनी चूचियाँ मसलते हुए वो आगे पीछे होने लगी.. वैशाली के जिस्म का वज़न आ जाने से पीयूष का चेहरा रेत में धंस गया.. उसने वैशाली की चुत की परतों के बीच अपनी जीभ फेरनी शुरू कर दी.. दोनों उत्तेजनावश वासना के महासागर में गोते खाने लगे.. हवस की आग में झुलस रही वैशाली पीयूष के सर के बाल पकड़कर अपनी चुत का दबाव बनाने लगी.. पीयूष ने अपने नाखून वैशाली के कोमल चूतड़ों में गाड़ दिए.. चुत का रस पीयूष के पूरे चेहरे पर सना हुआ था..
एक घंटा हो गया.. इन दोनों का फोरपले अब भी चल रहा था.. वैशाली पीयूष के स्पर्श की एक एक पल बड़े मजे से महसूस कर रही थी.. पीयूष की जीभ.. चुत के अंदर तक घुस चुकी थी और वैशाली को स्वर्ग की सैर करवा रही थी.. पीयूष ने अपने लंड को मुठ्ठी में पकड़कर हिलाना शुरू कर दिया.. उसे लंड हिलाता देख वैशाली ने उसका हाथ छुड़ाकर खुद हिलाना शुरू कर दिया
"हाये पीयूष.. ये तेरा खुरदरा लंड जब मेरी चुत की दीवारों पर घिसेगा तब कितना मज़ा आएगा यार.. !!" अब वैशाली को लंड लेने की इच्छा होने लगी.. वैशाली ने अपनी कमर को थोड़ा सा उठाया.. पीयूष अब रिसती हुई चुत को साफ देख पाया.. उसने अपनी जीभ को वैशाली के गांड के छेद से लेकर क्लिटोरिस तक चाटा.. और अंगूठे से क्लिटोरिस को कुरेदने लगा..
दो दो संवेदनशील जगहों पर जीभ का स्पर्श होते ही वैशाली बेहद उत्तेजित हुई.. और वो खुद झड़ जाए उससे पहले पीयूष के लंड के ऊपर बैठ गई.. जिस प्रकार से लंड घिसकर अंदर गया उससे वैशाली को यकीन हो गया की हिम्मत के लंड के मुकाबले पीयूष के लंड में ज्यादा मज़ा आएगा..
"आह्ह पीयूष.. ओह माँ.. फक मी.. येस.. ओह गॉड.. फक मी हार्ड.. " कराह रही थी वैशाली.. पीयूष भी नीचे से दमदार धक्के लगाए जा रहा था..
"ओह्ह वैशाली.. मेरा निकलने की तैयारी में है.. !! कितनी टाइट है तेरी चुत.. आह्ह.. !! लगता है काफी दिनों से बिना चुदे कोरी पड़ी है तेरी चुत.. "
"ओह्ह.. जोर से धक्के मार पीयूष.. स्पीड बढ़ा.. फाड़ दे मेरी चुत को.. बहुत भूखी हूँ.. ओह ओह्ह.. " पागलों की तरह कूद रही थी वैशाली.. खंडहर की दीवारों के बीच "फ़च फ़च" की आवाज़ें गूंज रही थी.. "पीयूष.. पानी अंदर मत निकालना.. नहीं तो भसड़ हो जाएगी.. पिछले एक साल से उस कमीने के साथ मैंने कुछ नहीं किया है"
"ओह्ह पीयूष.. आह्ह.. उईई माँ.. बहोत मस्त चोद रहा है यार.. आह्ह मैं गईईईई" कहते हुए वैशाली थरथराने लगी और झड़ गई.. झड़ते ही वो उसी अवस्था में पीयूष की छाती के ऊपर लेट गई.. पीयूष ने अपना लंड बाहर निकाल और वैशाली की गांड के इर्दगिर्द अपनी पिचकारी दे मारी.. गांड के छेद पर गरम गरम वीर्य का स्पर्श होती है वैशाली ने कहा "कितना गरम है यार.. पीछे जलने लगा मुझे.. "
वैशाली पीयूष के शरीर से उतर गई.. और बेफिक्र होकर उसके बगल में रेत पर लेट गई.. दोनों पसीने से सन चुके थे.. और पूरे शरीर पर रेत लग गई थी.. वासना का तूफान शांत हो गया था.. और दोनों धीरे धीरे वास्तविकता की दुनिया में कदम रख रहे थे.. पीयूष अब भी लेटे लेटे वैशाली के स्तनों को दबा रहा था