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मैं- “वो जमाना चला गया, आजकल के मर्द नाचते हैं औरतों के लिए, अब तो मर्द पैसे लेकर भी नाचने लगे हैं।
औरतों के सामने..” मैंने कहा।
अब्दुल- “तुम मुझसे डान्स कराके बदला तो नहीं ले रही हो ना?” अब्दुल ने सवाल किया।
मैं- “मैंने डान्स किया था, तब तुम्हें मजा आया था ना...” मैंने सामने सवाल किया।
अब्दुल- “हाँ..."
मैं- “मैं बदला नहीं मजा चाहती हूँ, मैं देखना चाहती हूँ की तुम मर्द हमें नचाकर क्या पाते हो? मैं वो पाना चाहती हूँ...”
अब्दुल- “रानी, मुझे नाचना नहीं आता...” अब्दुल ने वक़्त की नजाकत समझकर थोड़ा ठंडा होते हुये कहा।
मैं- “हमें कहां उसकी मूवी बनानी है, जैसा आता है वैसा नाचो...” मैंने कहा। मैंने उससे वो बात कही थी जो थोड़ी देर पहले उसने मुझसे कही थी।
मेरी बात सुनकर वो मंद-मंद हँसा और फिर मेरे बाजू में बैठ गया।
मैं- “औरतों को लुभाकर चोदो, ज्यादा सुख मिलेगा...”
मेरी बात सुनकर अब्दुल खड़ा हुवा और मैं डान्स करने के लिए जहां जाकर खड़ी हुई थी वहां जाकर वो खड़ा हो गया। वो वहां जाकर उसकी शर्ट के बटन खोलने लगा।
मैं- “ऐसे नहीं, नाचते हुये निकालो...”
अब्दुल को सच में डान्स करना नहीं आता था, उसकी स्टाइल देखकर ऐसा लग रहा था, उसने उसका हाथ ऊपर किया, यंत्रवत रोबोट की तरह।
मैंने अभी तक जो धैर्य बना रखा था वो अब छूट गया और मैं जोरों से खिलखिलाकर हँसने लगी। मुझे हँसता । देखकर अब्दुल आश्चर्य से मेरी तरफ देखने लगा। मैं खड़ी होकर उसके पास गई और उसके गले में हाथ डालकर उसके पाँव पर मेरे पैर रखकर थोड़ी सी ऊपर होकर मैं उसके होंठों पर मेरे होंठ रखकर उसे चुंबन करने लगी।
मैं- “मुझे नाचते हुये मर्द नहीं पसंद..” मैंने कहा और फिर मेरा हाथ नीचे करके मैंने अंडरवेर के साथ उसका लण्ड सहलाया। मैंने अब्दुल से अलग होकर उसके पैंट का बक्कल खोला और अंडरवेर के साथ निकाल दिया।
औरतों के सामने..” मैंने कहा।
अब्दुल- “तुम मुझसे डान्स कराके बदला तो नहीं ले रही हो ना?” अब्दुल ने सवाल किया।
मैं- “मैंने डान्स किया था, तब तुम्हें मजा आया था ना...” मैंने सामने सवाल किया।
अब्दुल- “हाँ..."
मैं- “मैं बदला नहीं मजा चाहती हूँ, मैं देखना चाहती हूँ की तुम मर्द हमें नचाकर क्या पाते हो? मैं वो पाना चाहती हूँ...”
अब्दुल- “रानी, मुझे नाचना नहीं आता...” अब्दुल ने वक़्त की नजाकत समझकर थोड़ा ठंडा होते हुये कहा।
मैं- “हमें कहां उसकी मूवी बनानी है, जैसा आता है वैसा नाचो...” मैंने कहा। मैंने उससे वो बात कही थी जो थोड़ी देर पहले उसने मुझसे कही थी।
मेरी बात सुनकर वो मंद-मंद हँसा और फिर मेरे बाजू में बैठ गया।
मैं- “औरतों को लुभाकर चोदो, ज्यादा सुख मिलेगा...”
मेरी बात सुनकर अब्दुल खड़ा हुवा और मैं डान्स करने के लिए जहां जाकर खड़ी हुई थी वहां जाकर वो खड़ा हो गया। वो वहां जाकर उसकी शर्ट के बटन खोलने लगा।
मैं- “ऐसे नहीं, नाचते हुये निकालो...”
अब्दुल को सच में डान्स करना नहीं आता था, उसकी स्टाइल देखकर ऐसा लग रहा था, उसने उसका हाथ ऊपर किया, यंत्रवत रोबोट की तरह।
मैंने अभी तक जो धैर्य बना रखा था वो अब छूट गया और मैं जोरों से खिलखिलाकर हँसने लगी। मुझे हँसता । देखकर अब्दुल आश्चर्य से मेरी तरफ देखने लगा। मैं खड़ी होकर उसके पास गई और उसके गले में हाथ डालकर उसके पाँव पर मेरे पैर रखकर थोड़ी सी ऊपर होकर मैं उसके होंठों पर मेरे होंठ रखकर उसे चुंबन करने लगी।
मैं- “मुझे नाचते हुये मर्द नहीं पसंद..” मैंने कहा और फिर मेरा हाथ नीचे करके मैंने अंडरवेर के साथ उसका लण्ड सहलाया। मैंने अब्दुल से अलग होकर उसके पैंट का बक्कल खोला और अंडरवेर के साथ निकाल दिया।