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Adultery Chudasi (चुदासी )

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मैं- “वो जमाना चला गया, आजकल के मर्द नाचते हैं औरतों के लिए, अब तो मर्द पैसे लेकर भी नाचने लगे हैं।

औरतों के सामने..” मैंने कहा।

अब्दुल- “तुम मुझसे डान्स कराके बदला तो नहीं ले रही हो ना?” अब्दुल ने सवाल किया।

मैं- “मैंने डान्स किया था, तब तुम्हें मजा आया था ना...” मैंने सामने सवाल किया।

अब्दुल- “हाँ..."

मैं- “मैं बदला नहीं मजा चाहती हूँ, मैं देखना चाहती हूँ की तुम मर्द हमें नचाकर क्या पाते हो? मैं वो पाना चाहती हूँ...”

अब्दुल- “रानी, मुझे नाचना नहीं आता...” अब्दुल ने वक़्त की नजाकत समझकर थोड़ा ठंडा होते हुये कहा।

मैं- “हमें कहां उसकी मूवी बनानी है, जैसा आता है वैसा नाचो...” मैंने कहा। मैंने उससे वो बात कही थी जो थोड़ी देर पहले उसने मुझसे कही थी।

मेरी बात सुनकर वो मंद-मंद हँसा और फिर मेरे बाजू में बैठ गया।

मैं- “औरतों को लुभाकर चोदो, ज्यादा सुख मिलेगा...”

मेरी बात सुनकर अब्दुल खड़ा हुवा और मैं डान्स करने के लिए जहां जाकर खड़ी हुई थी वहां जाकर वो खड़ा हो गया। वो वहां जाकर उसकी शर्ट के बटन खोलने लगा।

मैं- “ऐसे नहीं, नाचते हुये निकालो...”

अब्दुल को सच में डान्स करना नहीं आता था, उसकी स्टाइल देखकर ऐसा लग रहा था, उसने उसका हाथ ऊपर किया, यंत्रवत रोबोट की तरह।

मैंने अभी तक जो धैर्य बना रखा था वो अब छूट गया और मैं जोरों से खिलखिलाकर हँसने लगी। मुझे हँसता । देखकर अब्दुल आश्चर्य से मेरी तरफ देखने लगा। मैं खड़ी होकर उसके पास गई और उसके गले में हाथ डालकर उसके पाँव पर मेरे पैर रखकर थोड़ी सी ऊपर होकर मैं उसके होंठों पर मेरे होंठ रखकर उसे चुंबन करने लगी।

मैं- “मुझे नाचते हुये मर्द नहीं पसंद..” मैंने कहा और फिर मेरा हाथ नीचे करके मैंने अंडरवेर के साथ उसका लण्ड सहलाया। मैंने अब्दुल से अलग होकर उसके पैंट का बक्कल खोला और अंडरवेर के साथ निकाल दिया।
 
तब तक अब्दुल ने उसकी शर्ट निकाल दी थी। अब अब्दुल बिल्कुल दिगम्बर अवस्था में मेरे सामने था। अब्दुल का लण्ड भी रामू के लण्ड की तरह बड़ा ही था, लेकिन उसके सिवा और कोई समानता नहीं थी। अब्दुल का। लण्ड गोरा था, और उसने वहां से बाल भी निकाले हुये थे। मैंने अब्दुल का लण्ड मुट्ठी में लेकर दबाया।

अब्दुल- “सारा रस दबाकर निकाल देना चाहती हो क्या?” अब्दुल ने प्यार से मेरे गालों पर आई हुई बाल की लट को मेरे कान के पीछे करके पूछा।

मैं- “तुम्हारा रस इतनी आसानी से नहीं निकलेगा, मैं जानती हूँ...” कहकर मैं झुक के, घुटनों पे अब्दुल के सामने बैठ गई। अब्दुल ने शायद उसके बदन पर बाडी स्प्रे लगाया हुवा था। उसके लण्ड से नापसंद आने वाली बदबू की जगह खुशबूदार महक आ रही थी, जो मुझे लण्ड चूसने के लिए उत्तेजित कर रही थी। मैंने मेरे दोनों हाथों की हथेली से अब्दुल का लण्ड पकड़ा और फिर हाथ को ऊपर-नीचे करके हथेली से लण्ड को सहलाया, उसका लण्ड पूर्ण रूप में ही था फिर भी मेरे सहलाने से वो और बड़ा हो गया।

अब्दुल- “आहह... मार डालेगी तू मुझे?” अब्दुल की आवाज के साथ सिसकारी भी निकली।

मैंने अब उसके लण्ड को एक हाथ में ले लिया और उसे चूमा। फिर मुझे ज्यादा देरी करना ठीक नहीं लगा तो मैंने लण्ड को मुँह में लेकर चूसा तो अब्दुल के मुँह से फिर से सिसकारियां निकल गई। मैंने अब्दुल का लण्ड मेरे मुँह में से निकाला और फिर एकदम पीछे से कुल्फी की तरह पकड़ा, और फिर मैं उसे चूसने लगी। जितना हो सके उतना ज्यादा अंदर लेकर बाहर निकालने लगी, तो मेरे मुँह की लार लण्ड पे लग रही थी। जब मैं लण्ड । को मुँह से निकालती थी तब लार का एक लौंदा लण्ड पे लगा हुवा होता था, और दूसरा मेरे मुँह में होता था। मैं बार-बार अब्दुल का लण्ड मुँह में लेकर बाहर निकालने लगी।

इस उत्तेजित अवस्था में अब्दुल सिसकारियां निकालने के सिवा कुछ नहीं कर रहा था। कभी-कभार बीच-बीच में, मैं झुकी हुई थी इसलिए शायद मेरे बाल आगे आ जाते थे, तब वो मेरे बाल पकड़कर पीछे कर देता था। थोड़ी देर चूसने के बाद मेरा मुँह दुखने लगा, तब मैंने अब्दुल का लण्ड ज्यादा अंदर लेना बंद कर दिया और उसके सुपाई को चाटने लगी तो अब्दुल और उत्तेजित हो गया।

कुछ देर बाद अब्दुल ने कहा- “नीचे की गोलियां भी चूसो..."

मैंने अब्दुल के लण्ड का सुपाड़ा चाटते हुये ही उसकी गोलियां पकड़ी और फिर झुक के उसे मुँह में पकड़ लिया, लण्ड को मैंने उधर करके पकड़ा हुवा था इसलिए गोलियां चूसने में कोई दिक्कत नहीं हो रही थी।

लेकिन मेरी इस हरकत ने अब्दुल को खूब गरम कर दिया। वो मेरे बालों को उसके हाथों में जकड़ के खींचने लगा। मैंने उसकी गोटियां छोड़ दीं और फिर से उसके लण्ड को चूसने लगी। अब्दुल मेरे मुँह को उसके दोनों हाथों से पकड़कर धीरे-धीरे धक्का लगाते हुये जोरों से सांस लेते हुये हाँफते हुये सिसकारियां लेने लगा। धीरे-धीरे वो उसके हाथों का दबाव ज्यादा ही मेरे चेहरे पर देने लगा।

इतनी देर से खुला रहने की वजह से मेरा मुँह अब दुखने लगा था तो मैंने अब्दुल के लण्ड को फिर से मुट्ठी में जोर से दबाया और उसके छेद पर जीभ से सहलाया तो अब्दुल के लण्ड से वीर्य की एक जोर की पिचकारी छूटी, जो सीधी मेरे मुँह में गई, क्योंकि मैं उसके लण्ड के छेद को चाट रही थी।

पाँच बजकर पैतालिस मिनट हुई थी। अब्दुल बाथरूम में गया हुवा था। मैं नंगी ही बेड पर लेटी हुई खुशबू के बारे में सोच रही थी। मालूम नहीं क्या हुवा होगा? खुशबू और पप्पू कहां होंगे? खुशबू उसके घर से निकल पाई होगी की नहीं? अब्दुल उसकी बात माना होगा तो खुशबू निकल सकी होगी ये भी फाइनल था, लेकिन एक बात और भी थी कि अगर खुशबू उसके घर से निकल गई होगी तो अभी तक इमरान नीचे खड़ा रहकर, जो उसका ध्यान रख रहा होगा वो अभी तक देखने नहीं गया होगा की खुशबू उसके घर में है की नहीं?

अगर देखने गया होता तो उसका फोन अब्दुल के पास आ गया होता की “खुशबू भाग गई है लेकिन अभी तक कोई फोन नहीं आया था। शायद खुशबू घर पे ही होगी और ये भी हो सकता है कि वो इस वक़्त इमरान के नीचे सो रही होगी? मुझे रह-रहकर डर लगने लगा था की कहीं मेरी मेहनत से पानी फिर ना जाय, कुछ समझ में नहीं आ रहा था मुझे।
 
अब्दुल- “कुछ खाएगी?” अब्दुल ने बाथरूम में से निकलते हुये कहा।

मैं- “नहीं...” अब्दुल खाने में अपने लिए नानवेज़ मंगा ले तो? ये सोचकर मैंने ना कह दिया।

अब्दुल- “कुछ पीना है?”

मैं- “नहीं” फिर से वोही टेन्शन हुवा मुझे, कहीं वो उसके लिए शराब मंगा ले तो?

अब्दुल आकर मेरे बाजू में लेट गया और मेरी गाण्ड को सहलाने लगा। मैंने उसके सिकुड़े हुये लण्ड, जो इस स्थिति में भी 3-4 इंच का था, को पकड़ा। ये देखकर वो मुश्कुराया- “इतनी जल्दी ये खड़ा नहीं हो सकता, चलो निकलते हैं..."

मैं- “कहीं बाहर जाना है, क्या?” मैंने खड़े होकर उसकी जांघ पर बैठते हुये पूछा।

अब्दुल- “तेरी जैसी हसीना साथ हो तो जल्दी किस बात की...” अब्दुल ने मेरे बायें उरोज को छेड़ते हुये कहा।

मैं- “तो फिर ठहरो ना...”

अब्दुल- “निकलते हैं, घर पे खास महेमान आने वाले हैं..." अब्दुल ने अब उसके हाथ की एक उंगली मेरे कपोल पर रखते हुये कहा।

मैं- “उसको कल आने को कह दो, ऐसा हसीन मोका फिर कब मिलेगा?” मैंने मादक आवाज में कहा।

अब्दुल ने कुछ बोले बगैर उसकी उंगली जो गाल पर थी वो नीचे सरकाई मेरी आँखों पर, वहां से मेरी नाक पर ली। वो जैसे मेरे चेहरे का माप ले रहा हो ऐसे उसने उंगली दो-तीन बार मेरी नाक पर ऊपर-नीचे की। फिर उंगली मेरे होंठ पर रख दी, वो मेरे होंठों को उसकी उंगली से सहलाने लगा।

मैंने मेरा मुँह खोला और अब्दुल की आधी उंगली मुँह में ले ली। मैं मेरे होंठों के बीच उसे दबाकर चूसने लगी। थोड़ी देर पहले जिस तरह अब्दुल मेरे होंठों को चूस रहा था उसी तरह मैं अब उसकी उंगली चूस रही थी। और अब्दुल मेरे मम्मों को सहला रहा था। मैंने मेरे दूसरे हाथ से उसका लण्ड पकड़ लिया और उसे खड़ा करने की कोशिश करने लगी। थोड़ी देर बाद अब्दुल के लण्ड में कुछ जान आई तो मैं उसके पैरों पर लेट गई। फिर मैंने झुक के उसके लण्ड को मुँह में ले लिया।

अब्दुल के लण्ड के सुपाड़े पर वीर्य लगा हुवा था, जिसकी महक मेरी नाक में घुस गई थी। लण्ड को मुँह में लेते ही वीर्य भी मेरे थूक के साथ मिल गया। मैंने मेरे दोनों हाथों को ऊपर किया और अब्दुल का लण्ड चूसते हुये मैं उसके सीने को सहलाने लगी। मैं अब्दुल की जांघ पर लेटी हुई थी, इसलिए मेरी चूत उसके पैर के पंजों पर आ रही थी।

अब्दुल अपने पंजों की उंगली से मेरी चूत को कुरेदने लगा, जिससे मैं मस्त होने लगी और मेरी चूत में पानी रिसने लगा। अब्दुल का लण्ड पूरा मुँह में लेकर, अंदर ही रखकर मैं उसके छेद को जीभ से चाटने लगी। गुब्बारे में हवा भरते ही वो जिस तरह फूलता है, उसी तरह अब्दुल का लण्ड मेरे मुँह में फूलने लगा, और बहुत जल्द वो इतना बड़ा हो गया की मेरा मुँह भर गया। मैंने ऊपर अब्दुल की तरफ देखा।

अब्दुल- “ये मेरा नहीं तेरा कमाल है। दस साल से मैंने चौबीस घंटे से पहले दूसरी बार चुदाई नहीं की, जो आज करूंगा...” अब्दुल ने ये कहकर मुझे धीरे से ऊपर खींचकर उसकी बाहों में लेना चाहा तो मैं भी बिना रुके ऊपर । की तरफ जाकर उसके होंठों से लग गई। अब्दुल मेरे होंठों को चूसते हुये मुझे उसकी बाहों से अलग करके उसके बाजू में लेटकर ऊपर आ गया। अब वो ऊपर था और मैं उसके नीचे थी। उसने मेरे होंठों को छोड़कर मेरे उरोजों को मुँह में भर लिया।
 
मेरे मुँह से मादक आवाजें निकलने लगीं, मेरे हाथ खुद-ब-खुद उसके बालों पर जाकर उसे सहलाने लगे, और मेरे पैर थोड़े ऊपर होकर पंजों से अब्दुल के लण्ड को छूने लगे। कुछ देर बाद अब्दुल ने मेरे मम्मों को छोड़कर नाभि पर किस किया, बाद में फिर से ऊपर आ गया। मैंने मेरी टांगों को चौड़ा करके उसे बीच में किया, मेरी चूत के अंदर पानी की नदियां बहने लगी थीं। वो सागर बनकर छलकने लगे, उसके पहले में चुदवा लेना चाहती थी। अब्दुल ने मेरी चूत को अपनी उंगली से कुरेदकर अपना लण्ड मेरी चूत के द्वार पर रख दिया।

मैंने मेरे होंठ सख्ती से भींच दिया क्योंकि उसके लण्ड की साइज से मैं जानती थी की दर्द तो होने वाला ही है। अब्दुल ने धीरे से एक धक्का दिया और उसका आधा लण्ड अंदर चला गया। थोड़ा सा दर्द हुवा, मैं थोड़ी निश्चिंत हो गई, तभी अब्दुल ने दूसरी बार धक्का दे दिया और उसका पूरा लण्ड मेरी चूत में समा गया।

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अब्दुल निशा की चुदाई पूरी करता है तभी खुशबू का फोन आता है निशा को- “मैं भाग चुकी हूँ..”

निशा अब्दुल को सब बता देती है की खुशबू और पप्पू भाग चुके हैं और बाद में वो इमरान की चुदाई वीडियो भी अब्दुल को बता देती है। अब्दुल निशा के फोन से खुशबू से बात करता है और वापस आने को कहता है। अब्दुल खुशबू और पप्पू का रिश्ता कबूल करता है।

दूसरे दिन निशा न्यूज पेपर में पढ़ती है की अब्दुल ने इमरान का खून कर दिया है।

बाद में निशा राजकोट चली जाती है। पंद्रह दिन बाद करण उसके सपनों में आता है। वो निशा को कम-नसीब कहता है। वो कहता है की तुम जिसकी जिंदगी में जाती हो वो बर्बाद हो जाता है। नीरव को घर छोड़ना पड़ा।

और जीजू को नुकसान हुवा, अंकल मर गये और रामू और अब्दुल के हाथों खून हो गया। निशा बहुत लड़ती है। करण से, फिर तो करण बार-बार उसके पास सपनों में आने लगा।

उसके बाद विजय रीता का बलात्कार करता है। निशा सुनकर अहमदाबाद जाती है। रीता सदमे से पागल हो गई थी और अमित भाई डर रहे होते हैं। निशा अब्दुल के साथ मिलकर विजय से बदला लेती है। निशा राजकोट वापस जाती है, तब उसके ससुर को हार्ट अटैक आया हुवा होता है। वो हास्पिटल जाती है तब उसे मालूम पड़ता है की उसके ससुर के और उसकी जेठानी के अवैध संबंध थे। उसके ससुर ने उनकी दौलत दोनों भाइयों के नाम आधी-आधी की हुई थी। निशा उसके जेठ जेठानी की बात सुनती है वो लोग उसके ससुर से सही (साइन) करवाके सारी दौलत हथिया लेने का प्लान बना रहे थे।

जेठ जेठानी लोग कुछ करें उसके पहले निशा विल पर साइन करवाकर उसके ससुर से सेक्स करती है। उसके ससुर को सेक्स करते हुये फिर से हार्ट अटैक आता है और वो मर जाते हैं।

उसके बाद निशा, नीरव और उसकी बहन और जीजू एक साथ घूमने जाते हैं। वहां वो जीजू को कहती है की नीरव सेक्स में कमजोर है। जीजू नीरव को कुछ ट्रिक देता है, जिससे नीरव अच्छे तरीके से सेक्स करता है। निशा खुश हो जाती है। उसकी जिंदगी उसे प्यारी लगने लगती है। वापस आते समय उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो जाता है, जिसमें नीरव और मीना की मौत हो जाती है।

निशा फिर से वही हाल में आ जाती है जो पहले थी। लेकिन इस बार वो गलत रास्ते पर नहीं जाती। उसके पापा और मम्मी उसे जीजू से शादी कर लो ऐसा कहते हैं तो वो ना कहती है।

दो महीने बाद होली के दिन धुलेटी के अगले दिन निशा उसके जीजू से उसकी जिंदगी की सारी बात बताती है, जिसे सुनने के बाद जीजू कुछ बोले बगैर चले जाते हैं।

दूसरे दिन जीजू आकर निशु को मेरे साथ शादी करोगी ऐसा पूछते हैं। निशा ना कहती है लेकिन उसके पापा और मम्मी उससे हाँ कहलवाते हैं।

शादी के बाद फिर से निशा के सपनों में करण आता है तो जीजू उसे डाक्टर के पास ले जाते हैं। डाक्टर उसे ये भ्रम था ऐसा कहते हैं। लगे रहो मुन्नाभाई में जिस तरह संजय दत्त को महात्मा गाँधी दिखते थे, उसी तरह निशा को करण दिखता था। उसके बाद निशा की जिंदगी खुशहाल हो जाती है, और उसे पवन के रूप में बेटा भी मिल जाता है।

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मेरे हाथों ने अब्दुल की पीठ को जकड़कर आगोश में ले लिया, पैर भी खुद-ब-खुद ऊपर हुये और अब्दुल की कमर पर लटक गये। उसने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। मेरी चूत ने अब्दुल के लण्ड पर पकड़ मजबूत कर ली थी। अब्दुल ने उसका एक हाथ मेरे सिर और तकिये के बीच रखा हुवा था और दूसरे हाथ से मेरी जांघ सहला रहा था। कुछ ही पलों में अब्दुल की सांसों और मेरी सिसकारियों से रूम गूंजने लगा। वो झुक कर मेरे होंठों को चूसने लगा। मैं भी उसके होंठों का रसास्वादन लेने लगी।

अब्दुल का लण्ड मेरी चूत में फूलने लगा जिससे मैं कामातुर होकर उसकी पीठ को नाखून मार बैठी, जिससे अब्दुल और उत्तेजित हो गया और उसने उसका हाथ मेरे सिर के नीचे रखा हुवा था, वो खींचा और उससे मेरी गर्दन को पकड़ लिया। वो अब मेरी गर्दन को पकड़कर हिलाने लगा था। थोड़ी देर धक्के मारने के बाद अब्दुल हाँफने लगा। मुझे पहले से ही ये होगा, ऐसा अनुमान था क्योंकि मेरा सारा बदन उस पर झूल रहा था और साथ में उसने हिलाने के लिए हाथों का सहारा नहीं रखा था।

मैं- “इस उमर में इससे ज्यादा नहीं होगा तुमसे, तुम नीचे आ जाओ मैं ऊपर आ जाती हूँ..”

मेरी बात सुनकर अब्दुल ने उसका लण्ड मेरी चूत में से निकाला और मेरे बाजू में लेटकर हाँफने लगा। मेरी चूत में से उसने लण्ड निकाला तब उसके साथ कुछ पानी की बूंदें भी निकल आई थीं। मैं खड़ी होकर अब्दुल की जांघ पर बैठी और उसके लण्ड को पकड़कर सहलाने लगी। फिर थोड़ी ऊपर उठकर लण्ड को मेरी चूत पर टिकाया। अब्दुल ने मेरी कमर को पकड़ रखा था, मैं धीरे-धीरे नीचे बैठती हुई उसका लण्ड खा गई। लण्ड को चूत के अंदर लेकर मैंने अब्दुल की तरफ देखा तो उसने मेरे मम्मों को पकड़ा और दबाने लगा।

मैंने मेरी कमर थोड़ी सी ऊपर उठाई और फिर मैं नीचे बैठ गई, तो अब्दुल के मुँह से सिसकारी निकल गई। मैंने मेरे दाहिने हाथ की उंगलियां उसके होंठों पे रगड़ी तो अब्दुल उंगलियों को मुँह में लेकर चूसने लगा। मैं अब ज्यादा ऊपर उठकर नीचे बैठने लगी। हम दोनों के मुँह से अस्पष्ट आवाजें सिसकारियों के रूप में निकलने लगीं। अब्दुल का लण्ड फिर से फूलने लगा। मैंने मस्ती में आकर अब्दुल के सीने पर मुक्के मारे, अब्दुल ने मेरे मम्मों को जोर से मसला और मैंने मेरे दोनों हाथ अब्दुल की गर्दन पर रख दिया और उसे पकड़कर उछलने लगी।

अब्दुल- “थोड़ी देर पहले मैंने तेरा गला ऐसे ही पकड़ा था, मेरी पकड़ मजबूत हो जाती तो तू मर जाती। तुम्हें डर नहीं लगा था तब?” बीच में कराहते हुये अब्दुल ने पूछा।

मैं- “उस वक़्त तुम तो क्या खुद यमदूत भी आते ना तो भी मुझे चुदवाती हुई देखने लगते और भूल जाते की क्यों आए हैं लेकिन......” मैंने उसके गले की पकड़ और मजबूत करते हुये मेरी अधूरी बात पूरी की- “मैं तुम्हें इस वक़्त मार दें तो?”

अब्दुल- “तुम मुझे क्यों मरोगी?” अब्दुल ने मेरे सवाल का जवाब सवाल से दिया।

मैं- “तुमने मेरी माँ को इस उमर में पैसे के लिए सेक्स करने पर मजबूर किया इसलिए..” मैंने मेरे हाथों की पकड़ को और मजबूत करते हुये कहा।

अब्दुल- “मैं इस वक़्त तुम्हें भी चोद रहा हूँ..” अब्दुल ने बेपरवाही से कहा।

मैं- “इसीलिए अब्दुल... इसीलिए मैं तुझे मार देना चाहती हूँ। मुझे भी तो तुमने जबरदस्ती यहां बुलाया है...” मैंने दांत पीसते हुये जोरों से कहा।
 
अब्दुल- “तुम मुझे मरोगी?” अब्दुल बात ऐसे कर रहा था जैसे वो मेरी बात को हवा में उड़ा रहा हो, लेकिन उसकी आवाज में थोड़ा डर साफ दिख रहा था।

मैं- “हाँ मैं तुम्हें मार देंगी...” कहते हुये मैंने अब्दुल की गर्दन को जोर से दबाया और मैंने मेरी कमर के ऊपर के भाग को पीछे किया, जिससे अब्दुल के हाथ से मेरा बदन छूट गया।

अब्दुल ने उसके हाथ से मेरे हाथ पकड़े और उसे खींचने लगा। वो मेरे हाथों से अपनी गर्दन छुड़ाने की कोशिश करने लगा। मैंने मेरी सारी ताकत लगा दी थी, लेकिन अब्दुल नीचे था इसलिए वो मुझसे अपनी गर्दन छुड़ा नहीं पाया।

अब्दुल अपनी कमर को ऊपर करके मुझे नीचे गिरा देने की चेष्टा करने लगा। लेकिन कुछ ही पल पहले वो थक के इतना हांफा था की वो ज्यादा ताकत नहीं लगा सका। उसने अब उसके हाथों से मेरी कमर को पकड़ा और। उसे पीछे धकेलने लगा। थोड़ी देर पहले जहां कामरस टपक रहा था, वहां अब वीर रस छा गया था। मुझे बड़ा । मजा आ रहा था अब्दुल को मेरी गाण्ड के नीचे दबाकर। शायद अब अब्दुल को मुझसे छूटने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था, उसकी आँखों में मौत का खौफ साफ दिखाई देने लगा था।

अब्दुल- “निशा, मुझे माफ कर दो, मैं अब तुम्हें और तुम्हारी माँ को कभी नहीं सताऊँगा...” अब्दुल ने थक हार के उसका पैंतरा बदला, वो माफी मांगने लगा, वो शायद डर रहा था की मैंने थोड़ा और जोर से उसका गला दबाया तो फिर वो बोल भी नहीं पाएगा।

छे फूट के ऊपर का हट्टा-कट्टा आदमी, पाँच फुट पाँच इंच की कमसिन औरत से माफी माँग रहा था। मैंने मेरी कमर हिलाई तो मेरी चूत में उसके लण्ड का अहसास खतम हो चुका था। शायद अब उसका खड़ा लण्ड भी मुझ चुका था।

अब्दुल- “मुझसे गलती हो गई निशा, आज के बाद मैं तुम लोगों को नहीं सताऊँगा..” अब्दुल अब थक चुका था, वो अब छूटने की कोशिश भी नहीं कर रहा था।

मैं उसकी बात पर कोई प्रतिक्रिया दर्शाए बगैर मुश्कुराने लगी।

अब्दुल- “क्या कर रही हो, छोड़ यार?” मुझे हँसता हुआ देखकर अब्दुल ने उसके हाथ से मेरा हाथ पकड़कर कहा।

मैं- “मैं तो सिर्फ तुम्हें मौत का आभास करा रही थी, लेकिन तुम तो डर गये..” मैंने खिलखिलाकर हँसते हुये उसकी गर्दन पर से हाथ हटाते हुये कहा।

मुझे उसकी गर्दन छोड़कर हँसते हुये देखकर अब्दुल थोड़ा खिला और थोड़ी देर पहले ही मैंने उसे नाचने पर मजबूर किया था और बाद में ना बोलकर हँसी थी, वो वाकया याद करते हुये वो बोला- “मैं जानता था तुम नाटक कर रही हो, थोड़ी देर पहले भी तो किया था। मैं भी नाटक कर रहा था। मैं तुमसे क्या किसी से नहीं डरता...” वो झूठ बोल रहा था। डर गया था लेकिन मर्द होकर एक औरत से डर गया ये बात स्वीकार करना मुश्किल था उसके लिए।

मेरे लिए भी तो अच्छा था, मुझे उसे ज्यादा सफाई नहीं देनी पड़ेगी। क्योंकि मेरे मन के चोर के बारे में मैं ही जानती थी कि कुछ पल के लिए मेरे मन में अब्दुल को खतम कर देने का खयाल आ गया था। मैं अब्दुल के ऊपर से उठकर उसके बाजू में सो गई और उसके लण्ड की तरफ इशारा करके बोली- “तुम नहीं डरे, लेकिन ये डर गया था..."

मेरी बात सुनकर अब्दुल झूठ-मूठ का हँसा और मेरी तरफ होकर मेरे होंठों पर उसके होंठ रगड़ते हुये बोला- “छे बजकर दस मिनट हुई है, देरी तो नहीं हो रही ना तुझे?”

मैं- “ना..” मैंने एक हाथ उसके सिर के पीछे रखते हुये कहा।

अब्दुल- “निकलते हैं, मेरा मूड अब नहीं बनेगा...” अब्दुल ने मेरे गाल पर चिकोटी काटते हुये कहा।

पर मुझे तो अभी रोकना था उसे, एक घंटा ऊपर हो गया था खुशबू और पप्पू ने जो समय नक्की किया था उसके ऊपर, लेकिन वो लोग निकल सके की नहीं ये कहां पता था मुझे।

मैं- “क्या जल्दी है?” मैंने कहा।

अब्दुल- “मुझे कुछ काम है, निकलते हैं अब..” अब्दुल ने बेड पर बैठेते हुये कहा।
 
मैं- “क्या जल्दी है?” मैंने कहा।

अब्दुल- “मुझे कुछ काम है, निकलते हैं अब..” अब्दुल ने बेड पर बैठेते हुये कहा।

अब मुझे अब्दुल को रोकना मुश्किल लग रहा था। लेकिन मैं उसे कैसे जाने दूं? मुझे हर हाल में उसे रोकना ही था तो मैंने उसे उकसाने के लिए कहा- “क्यों डर लग रहा है मुझसे?”

मेरी बात से वो एकदम से तिलमिला गया और बोला- “साली रंडी, मैं कब का तुमसे ठीक तरह से बात कर रहा हूँ और तुम मुझे डरपोक कह रही हो...”

मैं- “तो फिर घड़ी-घड़ी जाने की बात क्यों कर रहा है?”

अब्दुल ने मेरे बालों को पीछे से पकड़ा और उसकी तरफ खींचकर मेरे होंठों पर जोर से चूमकर बोला- “अब तो तू कहेगी ना तभी जाएंगे, अब तो तुझे रगड़-रगड़ के चोदूंगा, और तेरी नानी याद दिला दूंगा...”

मैं- “पहले इसका डर तो दूर करो...” मैंने अब्दुल के लण्ड की तरफ इशारा करके उपहास भरे लब्जों में कहा।

मेरी बात सुनकर अब्दुल और चिढ़ गया और बेड पर खड़ा हो गया। मैं बेड पर तकिये की तरफ पीठ टिकाकर बैठी थी। अब्दुल मेरे पास आकर खड़ा हो गया, मैं घुटनों पर बैठू तो उसका लण्ड आराम से मुँह में ले सकें इतना ऊपर था।

अब्दुल- “घुटनों पे हो जा...” अब्दुल ने कहा।

मैंने कहा- “मेरी मदद के बिना खड़ा करके दिखा...”

अब्दुल- “घुटनों पे होकर मुँह में ले कुतिया..” अब्दुल ने गुर्राते हुये कहा।

लेकिन मैं जैसे बैठी थी वैसे ही बैठी रही। अब्दुल झुक के दीवार के सहारे मेरे मुँह के नजदीक उसका लण्ड ले आया। किसी इंके का घंटा बजाते हैं, उस तरह मैंने अब्दुल के लण्ड पर हाथ के पंजे से चपत मारी तो उसका लण्ड आगे-पीछे होकर झूलने लगा। अब्दुल ने और झुक कर मेरे होंठों पर अपना लण्ड रगड़ा। मैंने कोई विरोध नहीं किया लेकिन साथ में मुँह भी नहीं खोला।।

अब्दुल- “निशा रानी चूसो ना...” अब्दुल ने कहा।

मैंने मेरा हाथ ऊपर किया और उसका लण्ड पकड़ा।

अब्दुल- “चूसो रानी..” अब्दुल ने दूसरी बार कहा।
 
मैंने मेरी जबान बाहर निकाली और अब्दुल के लण्ड के सुपाड़े पर फिराई और फिर छेद पर घुमाई। तुरंत असर हुवा अब्दुल के लण्ड पर, और वो झटके मारने लगा। फिर मैंने अब्दुल का पूरा लण्ड मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

एकाध मिनट में अब्दुल का लण्ड फिर से फूल गया तो मैं उसे हाथों में पकड़कर चूसने लगी। अब्दुल ने मेरा चेहरा पकड़ लिया और वो अपनी गाण्ड को आगे-पीछे करके मेरा मुँह चोदने लगा। वो जब तक धीरे-धीरे करता रहा, तब तक मुझे भी मजा आता रहा।

लेकिन थोड़ी ही देर में अब्दुल जोर से मेरा मुँह चोदने लगा। वो उसका लण्ड मेरे गले में उतारने की कोशिश करने लगा तो मेरा गला दुखने लगा और आँखों में पानी आ गया। मैंने मेरे हाथों से अब्दुल को इशारों से समझाने की कोशिश की कि धीरे करो, पर वो इतना उत्तेजित हो गया था की मेरी बात उसे सुनाई नहीं दे रही थी। और फिर मैंने उसके लण्ड पर दांत गड़ाया और फिर मुँह खोल दिया, ज्यादा नहीं गड़ाया था फिर भी उसे थोड़ा दर्द का अहसास हो उतना तो जरूर गड़ाया था।

अब्दुल ने एक ही झटके में मेरे मुँह से लण्ड बाहर निकाला और बोला- “तुम बहुत खतरनाक चीज हो यार...”

मैं- “मैं खतरनाक चीज नहीं, खतरनाक औरत हूँ..” मैंने अब्दुल के लण्ड का चुम्मा लेते हुये कहा।

अब्दुल अब ठंडा पड़ चुका था, इस बार उसे गुस्सा नहीं आया था, कहा- “तुम कमाल की हो रानी.."

उसे क्या मालूम कि मैं नहीं हर औरत कमाल की होती है, प्यार से माँगो तो जान भी दे देती है लेकिन दुतकार के कहोगे तो मुँह पर थूकती भी नहीं। मैंने खड़े होकर अब्दुल के होंठों को चूमा- “मैं आती हैं बाथरूम में जाकर...”

मैं बाथरूम में से जैसे ही बाहर निकली अब्दुल ने मुझे पकड़कर दीवार पे सटा दिया और मेरी गर्दन को चाटने लगा। मैं मेरी आँखें बंद करके उस चुसाई का आनंद लेने लगी। फिर अब्दुल ने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए, मैं भी उसके होंठों को चूसने लगी, और अब्दुल ने अपनी जबान निकाली जिसे मैं मेरे होंठों से चूसने लगी।
 
मैं बाथरूम में से जैसे ही बाहर निकली अब्दुल ने मुझे पकड़कर दीवार पे सटा दिया और मेरी गर्दन को चाटने लगा। मैं मेरी आँखें बंद करके उस चुसाई का आनंद लेने लगी। फिर अब्दुल ने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए, मैं भी उसके होंठों को चूसने लगी, और अब्दुल ने अपनी जबान निकाली जिसे मैं मेरे होंठों से चूसने लगी।

फिर मैंने भी मेरी जीभ बाहर निकाली जिसे अब्दुल अपनी जबान से सहलाने लगा। ये सब करते हुये अब्दुल के हाथ मेरे बदन पर घूम रहे थे और मेरे हाथ उसकी पीठ सहला रहे थे। अब्दुल ने उसकी जबान मेरे मुँह में डाल दी और घूमकर पूरे मुँह का जायजा लिया।

फिर अब्दुल ने झुक के मेरे मम्मों को चूसा और फिर वो मेरे सामने घुटनों पर बैठ गया और फिर मेरी चूत पर चुम्मा लेकर मुझे पीछे घूमने को कहा। मैं पीछे घूमी तो उसने झुकने को कहा। मैं दीवार से हटकर बेड की तरफ गई और बेड पकड़कर झुक गई। अब्दुल मेरे पीछे आकर बैठ गया और मेरी गाण्ड के छेद के ऊपर के हिस्से को चूमा और फिर चाटने लगा।

कुछ ही पल में मेरे मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगीं, मेरे बदन में खून लावा बनकर दौड़ने लगा, मेरी चूत में से पानी निकलकर मेरी जांघों पर बहने लगा। थोड़ी ही देर में मुझे लगने लगा की मैं झड़ जाऊँगी तो मैंने अब्दुल को रुकने को कहा।

अब्दुल ने जैसे ही मेरी गाण्ड चाटना बंद किया तो मैं बेड पर उल्टी लेटकर हाँफने लगी।

अब्दुल मेरी पीठ पर लेट गया और पूछा- “तूने पीछे करवाया है, कभी...”

मैं- “ना..."

अब्दुल- “तो मैं आज करूँगा...”

मैं- “नहीं...”

अब्दुल- “क्यों?”

मैं- “ज्यादा दर्द होता है...”

अब्दुल- “वो तो होता ही है, तू पहली बार चुदी होगी तब भी हुवा होगा ना?”

मैं- “पर इसमें मुझे मजा नहीं आएगा...”

अब्दुल- “तुझे भी आएगा मेरी रानी...” कहकर अब्दुल ने मेरी पीठ पर सोए-सोए ही मेरे होंठ की तरफ उसकी जबान की। मैंने भी मेरी जबान बाहर निकाली, हम दोनों की आधी जबान एक दूसरे से टकराई जिससे हम दोनों एक दूसरे की जबान को सहलाने लगे।
 
अब्दुल ने मेरी पीठ पर खड़े होकर मुझे रूम के एक कोने पर पड़े टेबल को पकड़कर झुकने को कहा। मैं वहां । जाकर उसके कहे मुताबिक झुक कर खड़ी हो गई। अब्दुल ने मेरे पीछे आकर मेरी गाण्ड में पहले तो एक उंगली डाली, फिर दूसरी, और फिर तीसरी। मैं मेरे होंठों को दबाकर खड़ी थी क्योंकि मैं जानती थी कि अब्दुल मुझे। आगे दर्द कम हो उसके लिए ये सब कर रहा है। फिर अब्दुल ने उसकी उंगलियां अंदर ही अंदर थोड़ी देर तक गोल-गोल घुमाई तो मेरे मुँह से दर्द भरी सिसकी निकल गई।

फिर उसने अपनी उंगली बाहर निकाली और पीछे जाकर खड़ा हो गया और मेरी गाण्ड पे उसका लण्ड टिकाकर बोला- “थोड़ा दर्द होगा रानी, सह लेना.." और मैं कुछ बोलँ उसके पहले ही धक्का दे दिया।

अब्दुल का धक्का जोर का झटका था, मेरे मुँह से चीख निकल गई।

अब्दुल- “अभी तो आधा ही गया है...” कहकर अब्दुल ने और एक धक्का दे दिया।

मैं दूसरी बार चीख पड़ी।

अब्दुल मेरी पीठ पर झुक के मेरा मुँह पीछे की तरफ खींचकर जबान से जबान लड़ाने लगा, उसके हाथ मेरे मम्मों को सहला रहे थे। मैं थोड़ी नार्मल हुई तो अब्दुल मेरी पीठ पर से ऊपर होकर खड़ा हो गया और धीरे-धीरे करके उसने लण्ड पीछे लिया और फिर आगे किया। दो-तीन बार धीरे-धीरे आगे-पीछे करके वो जल्दी से करने लगा, उसका एक हाथ मेरी चूत पर था और वो उंगली से मेरी चूत को सहला रहा था। खड़े-खड़े इस तरह से पीछे से चुदवाना मुझे बहुत मुश्किल लग रहा था, पर अब क्या एक बार 'हाँ' बोलकर फिर से 'ना' कहना ठीक नहीं लग रहा था मुझे। वैसे भी मैंने आज अब्दुल को खूब सताया था।

अब्दुल मेरी दोनों तरफ से चुदाई कर रहा था, आगे की तरफ उंगली से और पीछे की तरफ लण्ड से। वो गाण्ड में लण्ड पेलता था तब मेरी कमर थोड़ी आगे सरकती थी और चूत में उंगली ज्यादा अंदर तक जाती थी। फिर वो लण्ड को पीछे लेता था तब वो आगे से उंगली भी थोड़ी पीछे सरकाता था। कुछ पलों में मुझे भी मजा आने लगा, मेरे मुँह से आनंद की सिसकारियां निकलने लगीं।

अब्दुल उसके हाथों से मेरे उरोजों को भी जोरों से मसल रहा था, जो मुझे और भी मस्त बना रहा था। लेकिन अब्दुल के धक्कों की रफ़्तार इतनी बढ़ गई थी की मैं दो बार ज्यादा झुक गई और गिरते-गिरते रह गई। बहुत दिन बाद मैं आज फिर से सेक्स करते वक़्त पसीने से तरबतर हो गई थी और शायद अब्दुल भी, जिससे हम दोनों के बदन चिपक रहे थे। अब्दुल के मुँह से निकलने वाली सिसकियों की आवाज धीरे-धीरे बढ़ने लगी, वो। अंजाने में बढ़ रही थी या वो जानबूझकर ऐसे निकाल रहा था ये समझ में नहीं आ रहा था।

मैं अब थक चुकी थी, मैं थोड़ी और झुक चुकी थी, चुदाई का नशा न होता तो मैं कब की बैठ गई होती। मेरे मुँह से भी लयबद्ध सिसकारियां निकल रही थीं, मेरे बदन से कोई खून का कतरा-कतरा खींचकर निकाल रहा हो ऐसा मुझे लग रहा था। मेरी सांसें भारी होने लगी थी। मैंने मेरा हाथ नीचे किया और अब्दुल का हाथ पकड़कर उसकी उंगली जोरों से अंदर-बाहर करवाने लगी तो मेरा बदन किसी धनुष की तरह खिंचने लगा और मैं झड़ने लगी। झड़ते ही मैं जोरों से हाँफने लगी और मैंने अब्दुल का हाथ खींचकर मेरी चूत में से उसकी उंगली के साथ निकाल दिया।

अब्दुल- “छूट गई क्या रानी?” अब्दुल ने पूछा।

मैंने सिर हिलाकर 'हाँ' कहा।

अब्दुल ने उसकी जो उंगली मेरी चूत में थी वो मेरे होंठों पर रगड़ी और उसे चूसने को कहा। मैं अब्दुल की उंगली होंठों से दबाते हुये जोरों से चूसने लगी और वो जोरों से मेरी गाण्ड मारने लगा। कुछ ही पल में वो भी झड़ने लगा। उसके लण्ड में से जब तक वीर्य निकलता रहा तब तक उसने उसका लण्ड मेरी गाण्ड में से नहीं। निकाला और जैसे ही निकाला तो मेरी दोनों टांगों पर से उसका वीर्य नीचे उतरने लगा। मैं झुक के टेबल की धार पकड़कर मेरे हाथ पर मेरा सिर टिकाकर घुटनों पे बैठी हुई थी। इस वक्त मुझमें मेरे पैर पर खड़े होने की भी हिम्मत नहीं थी

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अब्दुल मेरे पास आया और बाजू में बैठकर मेरे बालों को सहलाने लगा, पूछा- “मम्मी की याद आई ना रानी?”

मैंने कोई जवाब नहीं दिया।

तब उसने उसका सवाल बहुत ही प्यार से दोहराया- “नानी की याद आई ना?” वो जो मुझे प्यार जता रहा था ना उसमें प्यार नहीं उसकी मर्दानगी का अभिमान था।

लेकिन मेरे पास उसकी बात मानने के सिवा कोई चारा नहीं था। मैंने सिर हिलाया- “हाँ..."

अब्दुल बहुत खुश हो गया, इस उमर में उसमें इतना दम वो भी बिन वियाग्रा के। ये सब सोचकर शायद वो खुश हो रहा था। अब्दुल ने मुझे उठाकर बेड पर लेटाया और मेरे ऊपर आ गया। वो मेरे होंठों को चूसने लगा और मेरे मुँह में अपनी जबान डालकर मेरी जबान को सहलाने लगा।

कुछ पल बाद मैंने उसे रोका- “बहुत हो गया अब्दुल, अब छोड़ो...”

अब्दुल- “क्यों थक गई?”

मैं- “हाँ...”

अब्दुल- “थोड़ी देर पहले मैं भी ना बोल रहा था तो तू मानी थी?”

मैं- “तो ये बात है?”

अब्दुल- “हाँ..."

मैं- “चल एक काम कर, उस वक़्त मैंने जो किया था पहले वो कर..."

अब्दुल- “तूने... तूने क्या किया था?”

मैं- “मैंने तुम्हारा लण्ड खड़ा किया था, मैंने तुम्हें गरम किया था। तू मुझे गरम करके दिखा?” मैंने कहा।

मेरी बात सुनकर अब्दुल मेरे सामने देखता रहा और फिर बोला- “चलो ये भी करते हैं...



वैसे मैं अब यहां से निकलना चाहती थी, लेकिन जब तक खुशबू का फोन ना आए तब तक निकलना नहीं चाहती थी।
 
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