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दोपहर के 3:00 बजे थे, मैं बेड पे लेटी हुई कान्ता और रामू के बारे में सोच रही थी। तभी मोबाइल की रिंग बज उठी, मैंने मोबाइल उठाकर देखा तो नीरव का फोन था।
मैं- “हाँ बोलो...” मैंने कहा।
वीरंग- “आप जल्दी से आफिस आइए..” फोन पर नीरव नहीं था, मेरे जेठ (वीरंग) थे।
मैं- “क्यों क्या हुवा? नीरव तो ठीक है ना?” उनकी बात सुनकर मैंने घबराहट से पूछा।
वीरंग- “बिल्कुल ठीक है, टेन्शन की कोई बात नहीं है। आप जल्दी से निकलिए...” मेरे जेठजी ने फोन काटते हुये कहा।
मैंने जल्दी से कपबोर्ड से साड़ी निकाली और फटाफट तैयार होकर मैं आफिस पहुँची। घर से आफिस का रास्ता 15 मिनट का ही है, पर मुझे 15 घंटे जैसा लगा। पियून ने मुझे मेरे ससुर की केबिन में जाने को बोला। मैं । केबिन में दाखिल हुई तो देखा की मेरे ससुर उनकी चेयर पर बैठे थे, नीरव और मेरे जेठ सोफे पर बैठे थे। मेरे अंदर दाखिल होते ही मेरे जेठ सोफे पर से उठकर चेयर पर बैठ गये और मुझे सोफे पर बैठने का इशारा किया। मैं सोफे पर जाकर बैठी। 2-3 मिनट तक कोई कुछ नहीं बोला मुझे उनकी चुपकी से बहुत डर लग रहा था।
ससुर- “कैसे हैं आपके पापा...” मेरे ससुर ने पूछा।
मैं- “ठीक हैं...” मैंने कहा।
ससुर- “नीरव तो कह रहा है की बीमार हैं..” मेरे ससुर को आज मेरे पापा की याद क्यों आ गई मुझे समझ में नहीं आ रहा था।
मैं- “हाँ, आजकल ठीक नहीं रहता उन्हें..” मैंने धीरे से कहा।
ससुर- “तो फिर यहां ला दीजिए, आपके घर...” मेरे ससुर ने आपके घर बोलने पर इतना दबाव दिया की मैं समझ गई की वो मुझ पर व्यंग कर रहे हैं। मैं कोई जवाब दिए बगैर नीचे देखकर बैठी रही।
ससुर- “जवाब दीजिए हमें...” मेरे ससुर ने फिर पूछा।
मैं- “जी, वो नहीं आएंगे...” मैंने धीरे से कहा।
ससुर- “क्यों...”
मैं- “अच्छा नहीं लगेगा बेटी के घर पे रहना...” मैंने कहा।
ससुर- “बेटी से चोरी छुपे पैसे ले सकते हैं, पर रहने को नहीं आ सकते.."
उनकी बात सुनकर मैंने नीरव की तरफ देखा। मैंने कहा- “मेरे पापा ने माँगे नहीं थे...”
ससुर- “तो फिर क्यों दिया? आपके चाचा और जीजाजी भी तो हैं, उन लोगों ने नहीं दिए और आपको क्या जरूरत पड़ी उन्हें देने की?” मेरे ससुर की आवाज अब कड़क हो गई थी।
मेरी आँखों में पानी आ गया। मैं कुछ भी बोलने के होश में नहीं थी।
ससुर- “आपको मालूम है नीरव कहां से पैसे लाया?” मेरे ससुर ने पूछा।
मैं- “दोस्त से लाया है ऐसा कहते थे...” मैंने कहा।
ससुर- “झूठ बोला, नीरव ने आपसे। नीरव ने एक पार्टी के पेमेंट में से 20000 ले लिए और हमें कहा की वहां से पैसे कम आए हैं। हमारे बेटे ने चोरी की आपकी बदौलत...”
मेरे ससुर की बात सुनकर मैं रोने लगी।
मैं- “हाँ बोलो...” मैंने कहा।
वीरंग- “आप जल्दी से आफिस आइए..” फोन पर नीरव नहीं था, मेरे जेठ (वीरंग) थे।
मैं- “क्यों क्या हुवा? नीरव तो ठीक है ना?” उनकी बात सुनकर मैंने घबराहट से पूछा।
वीरंग- “बिल्कुल ठीक है, टेन्शन की कोई बात नहीं है। आप जल्दी से निकलिए...” मेरे जेठजी ने फोन काटते हुये कहा।
मैंने जल्दी से कपबोर्ड से साड़ी निकाली और फटाफट तैयार होकर मैं आफिस पहुँची। घर से आफिस का रास्ता 15 मिनट का ही है, पर मुझे 15 घंटे जैसा लगा। पियून ने मुझे मेरे ससुर की केबिन में जाने को बोला। मैं । केबिन में दाखिल हुई तो देखा की मेरे ससुर उनकी चेयर पर बैठे थे, नीरव और मेरे जेठ सोफे पर बैठे थे। मेरे अंदर दाखिल होते ही मेरे जेठ सोफे पर से उठकर चेयर पर बैठ गये और मुझे सोफे पर बैठने का इशारा किया। मैं सोफे पर जाकर बैठी। 2-3 मिनट तक कोई कुछ नहीं बोला मुझे उनकी चुपकी से बहुत डर लग रहा था।
ससुर- “कैसे हैं आपके पापा...” मेरे ससुर ने पूछा।
मैं- “ठीक हैं...” मैंने कहा।
ससुर- “नीरव तो कह रहा है की बीमार हैं..” मेरे ससुर को आज मेरे पापा की याद क्यों आ गई मुझे समझ में नहीं आ रहा था।
मैं- “हाँ, आजकल ठीक नहीं रहता उन्हें..” मैंने धीरे से कहा।
ससुर- “तो फिर यहां ला दीजिए, आपके घर...” मेरे ससुर ने आपके घर बोलने पर इतना दबाव दिया की मैं समझ गई की वो मुझ पर व्यंग कर रहे हैं। मैं कोई जवाब दिए बगैर नीचे देखकर बैठी रही।
ससुर- “जवाब दीजिए हमें...” मेरे ससुर ने फिर पूछा।
मैं- “जी, वो नहीं आएंगे...” मैंने धीरे से कहा।
ससुर- “क्यों...”
मैं- “अच्छा नहीं लगेगा बेटी के घर पे रहना...” मैंने कहा।
ससुर- “बेटी से चोरी छुपे पैसे ले सकते हैं, पर रहने को नहीं आ सकते.."
उनकी बात सुनकर मैंने नीरव की तरफ देखा। मैंने कहा- “मेरे पापा ने माँगे नहीं थे...”
ससुर- “तो फिर क्यों दिया? आपके चाचा और जीजाजी भी तो हैं, उन लोगों ने नहीं दिए और आपको क्या जरूरत पड़ी उन्हें देने की?” मेरे ससुर की आवाज अब कड़क हो गई थी।
मेरी आँखों में पानी आ गया। मैं कुछ भी बोलने के होश में नहीं थी।
ससुर- “आपको मालूम है नीरव कहां से पैसे लाया?” मेरे ससुर ने पूछा।
मैं- “दोस्त से लाया है ऐसा कहते थे...” मैंने कहा।
ससुर- “झूठ बोला, नीरव ने आपसे। नीरव ने एक पार्टी के पेमेंट में से 20000 ले लिए और हमें कहा की वहां से पैसे कम आए हैं। हमारे बेटे ने चोरी की आपकी बदौलत...”
मेरे ससुर की बात सुनकर मैं रोने लगी।