• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery Chudasi (चुदासी )

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
दीदी ने आज मेरे साथ जो सलूक किया है वैसा आज तक मेरे साथ किसी ने नहीं किया था। दुश्मन भी न करे, वैसा दीदी ने काम किया था। दीदी का फोन रखा तब से मैं रो रही थी। पर अब मेरी आँखों में से आँसू निकलने बंद हो गये थे, शायद खतम हो गये थे या सूख गये थे।

कल मेरे ससुर ने हमें अपने ही घर आने को ना बोल दिया, वो घर हमारा भी तो था। और आज दीदी ने न जाने क्या-क्या बोल दिया? रंडी बना दिया मुझे। वो मुझसे 4 साल ही बड़ी हैं, पर मैंने उन्हें आज तक नाम से नहीं बुलाया, हमेशा दीदी कहकर ही पुकारती थी। बचपन से लेकर जवानी तक हम दोनों शायद कभी ही जुदा हुई होंगी। मैंने जो किया था उनके लिए तो किया था और उन्होंने मुझ पर इतना बड़ा इल्ज़ाम लगा दिया। तभी मुझे टिफिन का खयाल आया। अगर मुझे नीरव को टिफिन नहीं भेजना होता तो मैं आज रसोई नहीं बनाती।

मैं खड़ी होकर किचन में गई। धीरे-धीरे रसोई बनाने लगी। कब 12:00 बज गये मालूम ही नहीं पड़ा। शंकर टिफिन लेने आ गया, तब तक रसोई तैयार नहीं थी। मैंने उसे सीढ़ियों पर बैठने को कहा और जल्दी-जल्दी रसोई करके टिफिन भर के उसे देने गई। उस दिन शंकर के साथ जो हुवा था तब से मैं टिफिन बाहर ही लटका देती। थी। शंकर वहां से लेकर निकल जाता था। उस दिन के बाद आज पहली बार मैं शंकर को हाथों में हाथ टिफिन दे रही थी।

जैसे ही मैंने शंकर के हाथों में टिफिन दिया और उसने आजू-बाजू में देखा तो सामने गुप्ता अंकल का घर बंद देखा और फिर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। मैं उसकी हिम्मत देखकर सन्न हो गई और जल्दी ही कोई । प्रतिक्रिया ना दे सकी। 10 सेकेंड बाद मैंने मेरा हाथ उसके हाथ से छुड़ाया और दरवाजा बंद करने लगी।

तब उसने दरवाजा पकड़ लिया और बोला- “मेडमजी कभी हमें भी मोका दे दो...”

मैंने जोर से दरवाजा खींचा तो हाथ कटने के इर से उसने दरवाजा छोड़ दिया, और मैंने दरवाजा बंद कर दिया। इतनी मेहनत के बाद मैं हाँफ गई थी तो मैं सोफे पर बैठकर जोरों से हाँफने लगी।

रामू के आने के बाद मैं बेडरूम में चली गई, साड़ी निकालकर गाउन पहनकर बेड पर लेट गई। मैंने सोने के लिए आँखें बंद की तो एक तरफ मुझे मेरे ससुर खड़े दिखे- “तेरी वजह से मेरा बेटा चोर बन गया। तुमने उसे उकसाया था। तुम्हारे मम्मी-पापा हमारे पैसे पर जी रहे हैं.”

उनकी बाजू में नीरव खड़ा था और उनकी बात सुनकर वो भी मुझसे कहने लगा- “हाँ, हाँ तुम्हारी वजह से ही मुझे मेरा घर छोड़ना पड़ा तुम्हारी वजह से ही...” मैं नीरव की बात सुनकर रोने लगी।

तभी दूसरी तरफ दीदी दिखाई दी- “इतनी ही आग है तेरे जिम में तो किसी दूसरे को हँसा ले, मेरे घर में ही क्यों आग लगा रही हो?” दीदी गुस्से में मुझे बोले जा रही थी, और उसके पीछे जीजू खड़े मेरे सामने देखकर मुकुरा रहे थे।

मैं और जोरों से रोने लगी। तभी बेडरूम के दरवाजे को थपथापने की आवाज आई। मैंने अपने आपको संभाला।

बाहर से रामू की आवाज आई- “जा रहा हूँ मेमसाब, दरवाजा बंद कर लीजिएगा..."

 
मैं और जोरों से रोने लगी। तभी बेडरूम के दरवाजे को थपथापने की आवाज आई। मैंने अपने आपको संभाला।

बाहर से रामू की आवाज आई- “जा रहा हूँ मेमसाब, दरवाजा बंद कर लीजिएगा..."

मैंने खड़े होकर दरवाजा खोला और मैं दरवाजा बंद करने गई तो रामू बाहर कहीं नहीं था, शायद वो सीढ़ियों से उतर गया होगा। मैं दरवाजा बंद करके फिर से बेडरूम की तरफ गई तो उसके दरवाजे के आगे ही मेरे पैर ठिठक गये। अंदर रामू खड़ा था।

रामू- “इतना इतराती क्यों हो?” रामू ने मेरे नजदीक आते हुये कहा।

मैं- “क्या बक रहे हो? मैंने कुछ नहीं देखा...” मैंने कहा।

रामू- “क्यों झूठ बोल रही हो मेमसाब? मैंने स्टूल को खिड़की के नीचे देखा तभी मैं समझ गया था कि कोई हमारा और कान्ता का खेल देख गया है, पर मालूम नहीं था कौन देख गया है? परसों जब आपने मुझे कान्ता से 100 लेने को बोला तो मैं समझ गया की देखने वाला और कोई नहीं हमारी मेडम हैं, नहीं तो आप मुझे क्यों कान्ता से पैसे लेने को कहती? हम और कान्ता मिलते हैं वो आपको कैसे मालूम?”

मैंने अपना सिर झुका दिया। मेरी गलती का अहसास तो मुझे उस दिन बोलने के बाद तुरंत हो ही गया था।

रामू ने मुझे खींचकर दीवाल के सटाकर खड़ा कर दिया और वो मेरे करीब आकर मेरे दोनों तरफ हाथ रखकर खड़ा हो गया। उसके पसीने की तीव्र बदबू रूम में फैली हुई थी। रामू झुक के मेरी गर्दन चाटने लगा।

मैंने मेरी आँखें बंद ली- “इतनी ही आग है तेरे जिम में तो दूसरों को पकड़, मेरे पति के पीछे क्यों पड़ी है साली रंडी..” आँखें बंद करते ही दीदी दिखाई दी, मुझे गालियां देती हई। मैंने अपनी आँखें खोल दी।

रामू ने मेरे गुलाबी होंठों पर उसके होंठ रख दिया। उसके मुँह से शराब, बीड़ी और तंबाकू की मिली ली बदबू आ रही थी।

मैं- “किस मत करो रामू.” मैंने उसके मुँह को दूर करते हुये कहा।

मेरी बात सुनकर वो जमीन पर बैठ गया और गाउन को थोड़ा ऊपर करके मेरी पिंडलियां पकड़ ली और धीरे-धीरे वो अपने हाथों को ऊपर लाने लगा, उसके साथ-साथ मेरा गाउन भी ऊपर होने लगा। उसके हाथ के पंजे बहुत ही बड़े-बड़े थे और पूरा दिन मेहनत करने की वजह से छाले पड़ गये थे, जो मेरे नाजुक पैरों को चुभ रहे थे। धीरेधीरे वो अपने हाथ मेरी कमर तक ले आया, उसके दो पंजों से पकड़ी हुई मेरी कमर को उसने कसकर दबाया तो उसके अलग-अलग हाथ की उंगलियां जुड़ गईं।

|

रामू की इस हरकत से मेरे मुँह से आऽs निकल गई और मैंने गाउन को पकड़ लिया।

उसका चेहरा मेरी योनि (योनि कहो या चूत, रंडिया तो कुछ भी बोलती हैं) के बिल्कुल सामने था। मैं सिसक उठी। आज तक कोई भी मर्द ने अपना चेहरा मेरी योनि के इतने नजदीक नहीं लाया था। मेरी बालों से ढकी चूत के करीब उसने अपना मुँह करके जोरों से नाक से सांस खींचा। उसकी ये हरकत मुझे अजीब लगी। वहां से कोई महक नहीं आने वाली थी, वहां से तो मेरे पेशाब की बदबू आ रही होगी क्योंकि इतने बालों के बीच से पेशाब की धार निकलती है तो पेशाब की कुछ बूंदें तो लग ही जाती है बालों में। शायद उसे मेरे पेशाब की बदबू अच्छी लग रही है, ऐसा लग रहा था। क्योंकी वो बार-बार अपनी नाक से खींचकर जोरों से सांस ले रहा था।

 
रामू बालों के पीछे मेरी चूत के होंठों को उंगलियों से पकड़ते हुये बोला- “बहुत ही मस्त खुशबू आ रही है मेडम आपकी बुर से...” कहकर रामू ने मेरी चूत के होंठों को अलग-अलग तरफ खींचा।

उसकी हर हरकत मुझे नई, अनोखी और आलादक लग रही थी।

रामू मेरी चूत के होठों को दोनों तरफ खींचकर आँखें फाड़-फाड़कर देख रहा था- “मेडम आप तो वो नंगी पिक में गोरी लड़कियां दिखती है ना उससे भी गोरी हैं.” रामू ने उंगली ज्यादा ही अंदर तक डालते हुये कहा।

रामू के उंगली अंदर डालते ही मेरे मुँह से चीख के साथ सिसकारी निकल गई- “आहह..”

रामू ने अपनी जीभ निकाली जो देखकर मेरी धड़कनें तेज हो गईं। अब वो जो करने वाला था वो सोचकर मेरे बदन में झंझनाहट होने लगी। रामू ने मेरी चूत से उंगली को बाहर निकाला और फिर वो उंगली को नाक के । नीचे रखकर सँघने लगा। उसकी जीभ लंबी थी, वो उंगली के ऊपर के हिस्से को नाक के पास सँघ रहा था और नीचे के हिस्से को चाट रहा था। थोड़ी देर बाद नाक के पास रखी उंगली उसने जीभ के साथ मुँह के अंदर ले ली

और उंगली को अंदर-बाहर दो-तीन बार किया और उंगली पे लगे चूत-रस को चाट लिया। फिर उंगली को बाहर निकाला।

उसकी हर हरकत में ध्यान से देख रही थी, ऐसा नहीं था की उसकी सारी हरकतें मुझे अच्छी लग रही थीं।

लेकिन उसकी हर हरकत में मुझे मेरे बदन के प्रति उसका आकर्षण छलक के दिख रहा था, जिससे मेरी चूत ज्यादा से ज्यादा गीली होती जा रही थी।

रामू ने उसकी जीभ फिर से निकाली और फिर मेरी चूत की झांटों से भरे बाहरी भाग को चाटने लगा। बाल ज्यादा ही होने की वजह से मुझे कोई खास अहसास नहीं हो रहा था और थोड़ी-थोड़ी देर में वहां से बाल टूटकर उसके मुँह में जाते थे, तब वो चाटना बंद करके मुँह में से बाल निकाल देता था और फिर से चाटने लगता था। मेरी चूत के अंदर इतना ज्यादा पानी हो गया था की वो कभी भी छलक के बाहर आ सकता था। अचानक ही उसने अपनी उंगलियों से चूत को फैलाया और अंदर जीभ डाल दी।

 
रामू ने उसकी जीभ फिर से निकाली और फिर मेरी चूत की झांटों से भरे बाहरी भाग को चाटने लगा। बाल ज्यादा ही होने की वजह से मुझे कोई खास अहसास नहीं हो रहा था और थोड़ी-थोड़ी देर में वहां से बाल टूटकर उसके मुँह में जाते थे, तब वो चाटना बंद करके मुँह में से बाल निकाल देता था और फिर से चाटने लगता था। मेरी चूत के अंदर इतना ज्यादा पानी हो गया था की वो कभी भी छलक के बाहर आ सकता था। अचानक ही उसने अपनी उंगलियों से चूत को फैलाया और अंदर जीभ डाल दी।

रामू जब से नीचे बैठा था तब से मैं इस पल का इंतेजार कर रही थी। मैंने जितना सोचा था उससे कहीं ज्यादा उत्तेजना मेरी नशों में दौड़ने लगी।

2-3 बार धीरे-धीरे चूत को चाटने के बाद रामू जल्दी-जल्दी मेरी चूत को चाटने लगा। मुझे सनसनी होने लगी, मेरी नशों में खून के दौड़ने की गति बढ़ने लगी। मुझे ऐसा लगने लगा की मैं जीते जी स्वर्ग में पहुँच गई हूँ। चूत चाटते हुये रामू ने अपना हाथ मेरे पेट को सहलाते हुये ऊपर किया। उसका हाथ मेरी नाभि के ऊपर आया तो उसने अपनी उंगली मेरी नाभि के अंदर घुमाई और फिर हाथ को और ऊपर किया।

मैं समझ गई कि वो मेरी चूचियों को पकड़ना चाहता है। मैंने गाउन को निकाल दिया और मादरजात नंगी हो गई। रामू ने अपने एक हाथ में मेरे बायें मम्मे को पकड़ लिया और उसे सहलाने लगा। उसकी इस हरकत ने मेरा मजा दूना कर दिया।

तभी रामू ने अपना मुँह ऊपर की तरफ किया और मुझसे पूछा- “मजा आ रहा है ना मेडम?”

मैंने हाँ में सिर हिलाया।

राम्- “मेडमजी आपका बदन तो मक्खन की तरह चिकना और गोरा है, आप हमारी बहू होती ना तो रात दिन आपकी सेवा करते रहते...” कहकर रामू फिर से चूत चाटने लगा।

और किसी वक़्त रामू ऐसी बात करता तो शायद मैं उसका मुँह तोड़ देती। लेकिन इस वक़्त मैं उसकी कोई भी बात सुनने को तैयार थी। वो फिर चूत चाटने में मसगूल हो गया, चूत के अंदर जीभ को वो कभी ऊपर करता था, तो कभी नीचे करता था। कभी दाईं तरफ, तो कभी बाईं तरफ घुमाता था, कभी अंदर तक डालकर बाहर निकालता था। उसकी जीभ लंबी होने की वजह से ज्यादा ही अंदर तक जाती थी और वो जब अंदर डालता था तब कड़क कर देता था, जिसकी वजह से मुझे तब वो गीले लण्ड जैसा अहसास दिलाता था। वो मेरी चूत को ऐसे चाट रहा था जैसे चोदने से पहले उसकी सफाई करना चाहता हो।

मैंने मेरे हाथ से उसका सिर पकड़ लिया था, और उसके बालों को सहलाने लगी थी।

 
रामू- “मजा आ रहा है ना मेडम?” रामू ने फिर से पूछा।

मैंने फिर से पहली बार की तरह सिर हिलाकर हाँ कहा।

रामू- “बोलकर कहो ना मेडम...” रामू ने कहा।

मैं- “हाँ..” मैंने इतना ही कहा।

फिर रामू भी झूम उठा, और पूछा- “और ज्यादा मजा चाहिए मेडम?”

मैं सोच में पड़ गई कि कैसे? फिर भी मैं धीरे से बोली- “हाँ..."

उसने अपनी जीभ से फिर से मेरी चूत चाटनी चालू कर दी, पर इस बार वो अंदर डालने की बजाय चूत को दो उंगली से चौड़ी करके आगे के भाग पर जो जी-स्पाट होता है उसे चाटने लगा। उसकी ये हरकत मुझ पर भारी पड़ने लगी। आज तक सेक्स करते वक़्त एकाध दो बार मैं छोटी-छोटी सिसकारियां ले लेती थी, पर आज तो मेरे मुँह से सिसकारियां बंदूक की गोली की तरह फूटने लगीं- “आहह... उहह... उह्ह... अयाया... ओहह... अयाया...” और मुझे मजा बहुत आया।

रामू जोरों से जी-स्पाट चाट रहा था। मैं पागलों की तरह कराह रही थी। मुझे लगने लगा था कि अब मैं कभी भी झड़ सकती हूँ। मैंने सख्ती से रामू की सिर पकड़ लिया।

रामू- “मेडमजी इसे चूत का दाना कहते हैं..." रामू ने इतना कहकर फिर से चूत चुसाई चालू कर दी।

मेरा खड़े रहना भी मुश्किल हो रहा था। मैं बेड पर सोकर चुसवाना चाहती थी, पर इतनी देर रामू चूसना बंद कर दे वो भी मेरे लिए असह्य था।

रामू ने उंगली चूत में डाल दी और उससे चूत की चुदाई करने लगा, साथ में उसका चूसना जारी था। मेरी सांसें तो कब की भारी हो चुकी थीं, मैं जोरों से सांसें ले रही थी। तभी रामू ने मेरे ‘जी-स्पाट' को मुँह में लेकर जीभ से दबाया, और मेरी सहनशीलता खतम हो गई। मैं झड़ गई पर ये ओगैस्म मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा और सबसे शानदार था।

 
रामू ने उंगली चूत में डाल दी और उससे चूत की चुदाई करने लगा, साथ में उसका चूसना जारी था। मेरी सांसें तो कब की भारी हो चुकी थीं, मैं जोरों से सांसें ले रही थी। तभी रामू ने मेरे ‘जी-स्पाट' को मुँह में लेकर जीभ से दबाया, और मेरी सहनशीलता खतम हो गई। मैं झड़ गई पर ये ओगैस्म मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा और सबसे शानदार था।

मेरे झड़ते ही राम जमीन पर बैठे-बैठे ही खिसक गया और बेड पे पीठ के सहारे बैठ गया।

मेरे छोटे-छोटे ओगैस्म अभी भी चालू थे। मैं धीरे-धीरे सांसें लेती हुई जमीन पर बैठ गई। झड़ने के बाद मुझे अपने आप पर गुस्सा आने लगा था। हर इंसान के साथ ऐसा ही होता है। शुरू-शुरू में गलत काम करते वक़्त कुछ नहीं सोचते, पर काम खतम होते ही पश्चाताप होता है, 2-4 बार गलत काम करने के बाद इंसान गुनहगार जैसा हो जाता है, फिर उसको अफसोस नहीं होता।

रामू- “अब तो मैडमजी आप हमसे हर रोज चुदवाएंगी ना?” रामू ने अपने गंदे दांत दिखाते हुये हँसते हुये मुझसे पूछा।

मैंने उसके सामने देखा, मेरी आँखों में आँसू थे। मैंने उससे कहा- “अब तुम जाओ रामू..."

रामू- “वाह री मेडम, आपने मजा ले लिया और हमारी बारी आई तब आप जाने को कह रही हैं...”

मैं- “प्लीज़... रामू, समझने की कोशिश करो, मैं अपनी मर्जी से नहीं करती, बहक जाती हैं...” मैंने उसे समझाने की कोशिश की।

रामू- “मैं तो मेडम आपको जितनी बार देखता हूँ उतनी बार बहक जाता हूँ। आप जानती नहीं कि आपके घर काम करते वक़्त आप रूम में हों या बाहर मेरा लण्ड हमेशा आपको सलामी देता रहता है..." रामू ने कहा।

मैं- “प्लीज़... रामू, कल कर लेना..” मैंने बिनती की।

रामू- “मेडमजी आज भी करेंगे और कल भी करेंगे, पर कल आप कहेंगी तब करेंगे। एक काम करो मेडम, आप अपनी टाँगें चौड़ी करके सो जाओ मैं चोद लूंगा..." रामू ने बड़ी निर्लज्जता से कहा।

मैं जान चुकी थी कि रामू ऐसे मानने वाला नहीं। मैं खड़ी हुई और बेड पर दोनों टांगों को चौड़ी करके लेट गई। बेड पर मेरे लेटने के बाद रामू रूम से बाहर निकल गया। मैं सोच में पड़ गई कि कहां गया होगा? तभी बाथरूम में से उसके पेशाब के गिरने की आवाज आई।

पेशाब करके वो अंदर आया तो मैंने उससे कहा- “पानी डालकर आना चाहिए था ना...”

रामू- “आप डाल देना मेडम...” कहते हुये उसने बीड़ी और माचिस निकाली।

मुझे उसकी बात पर बहुत गुस्सा आया की मैं तेरा पेशाब साफ करूं, पर मैं कुछ बोली नहीं। वो शांति से बीड़ी पी रहा था, तभी घड़ी में डंके बजे। मैंने इंके गिने और मन ही मन बोली- “ओह, 3:00 बज गये, 5:00 बजे तो नीरव आ जाएगा, और उसके पहले मुझे बहुत काम है...”

मैंने रामू की तरफ देखा वो तो बड़ी अदा से बीड़ी पी रहा था। मैंने कहा- “जल्दी कारो ना रामू...”

 
रामू- “क्या मेडम? कभी ना बोलती हो, कभी जल्दी करने को कहती हो। लगता है आपकी चूत इस इंडे की मार माँग रही है...” रामू ने बीड़ी के धुर्वे को मेरी तरफ छोड़ते हुये कहा।

मैं- “बाहर जाकर पियो ये बीड़ी, इसका धुंवां मुझे पसंद नहीं..” मैंने कहा।

रामू- “कहा जाऊँ मेडम? बालकनी में जाऊँगा तो सब देखेंगे तो क्या सोचेंगे?” रामू ने हँसते हुये कहा।

मैं- “तो फिर जल्दी करो प्लीज़..” मैंने फिर कहा।

रामू- “लगता है आपको उस दिन की याद आ रही है, जब मैंने आपको पहली बार चोदा था..” रामू गंदी तरह हँसते हुये बोला।

मैं- “ऐसी कोई बात नहीं है। मुझे देरी हो रही है, जो करना है वो जल्दी करो, नहीं तो चले जाओ..” मैंने गुस्से से कहा।

मेरी बात सुनकर रामू अपने कपड़े निकालने लगा।

मैंने मेरा मुँह दूसरी तरफ फेर लिया, क्योंकि मैंने जितना भी रामू को नंगा देखा था उससे इतना जरूर मालूम हो गया था की अब उसे ज्यादा देगी तो शायद मैं मेरी नजरों से ही गिर जाऊँगी।

रामू नंगा होकर बेड पर आ गया फिर उसने मेरे स्तनों को बारी-बारी चूसा और दबाया, और पूछा- “साहब नहीं दबाते क्या मेमसाब?”

मैंने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया, तो वो फिर चाटने लगा। थोड़ी देर वो यही करता रहा। फिर उसने । मेरी एक टांग उठाई और उसे जांघ तक चूमकर अपने कंधे पर रख ली, फिर दूसरी टांग उठाकर भी वही किया। उसके कंधों पर मेरी टांग होने की वजह से मेरी गाण्ड ऊपर हो गई। उसने तकिया लिया और मेरी गाण्ड के नीचे रख दिया। फिर वो दोनों हाथ मेरी गर्दन से थोड़ी दूर रखकर झुक गया, उसने अपनी टांग पीछे की तरफ मोड़ दी

थी।

मुझे उसकी और मेरी पोजीशन बहुत अच्छी लगी, क्योंकि इस पोजीशन में हमारे चेहरे बहुत दूर रहते थे, जिससे मुझे उसके मुँह की बदबू का टेन्शन नहीं था।

रामू ने अपना लण्ड मेरी चूत पर रखा और थोड़ी देर झांटों में रगड़ा। उसकी इस हरकत से मेरी चूत थोड़ी-थोड़ी गीली होने लगी। फिर उसने चूत पर लण्ड टिकाया और मैं कुछ भी सोचूं समझें उसके पहले एक जोर का झटका मारा, और पूरा लण्ड मेरी चूत के अंदर घुसेड़ दिया।

मैंने उस दिन उसके लण्ड पर एक नजर डाली थी, मैं जानती थी की उसका लण्ड दूसरे के मुकाबले में काफी बड़ा है। पर इस बार मैं पूरी तरह से तैयार थी, उसके बड़े लण्ड को लेने के लिए। फिर भी मुझसे एक छोटी सी चीख निकल गई- “ऊओ मरी...”

रामू- “लगता है साहब चूत भी नहीं मारते होंगे, जो इतनी टाइट है..." रामू ने कहा और फिर उसने लण्ड थोड़ा बाहर निकाला और फिर अंदर डाला। ऐसा उसने थोड़ी देर किया।

 
मैंने उस दिन उसके लण्ड पर एक नजर डाली थी, मैं जानती थी की उसका लण्ड दूसरे के मुकाबले में काफी बड़ा है। पर इस बार मैं पूरी तरह से तैयार थी, उसके बड़े लण्ड को लेने के लिए। फिर भी मुझसे एक छोटी सी चीख निकल गई- “ऊओ मरी...”

रामू- “लगता है साहब चूत भी नहीं मारते होंगे, जो इतनी टाइट है..." रामू ने कहा और फिर उसने लण्ड थोड़ा बाहर निकाला और फिर अंदर डाला। ऐसा उसने थोड़ी देर किया।

मेरा डर भी गायब हो गया था, साथ में मैं मजा भी लेने लगी थी। चोदने की इस स्टाइल में एक बहुत बड़ा फायदा ये भी था की इसमें पूरा लण्ड चूत में जाता था। लण्ड की गोटियां तक आसानी से अंदर जाकर बाहर आती थीं। धीरे-धीरे मैं और रामू दोनों सिसकियां लेने लगे थे। हमारा दोनों का शरीर पसीने से तरबतर हो रहा था। रामू पूरे जोश से मेरी चुदाई कर रहा था। मैं भी पूरी मस्ती से उसकी पीठ को सहलाकर उसे उकसा रही थी। हम दोनों धीरे-धीरे हमारी मंजिल के करीब जा रहे थे। रामू कभी कभार झुक के चूचियो को चूस रहा था।

मुझे अब मेरी मंजिल बहुत करीब दिखने लगी थी। मैंने मेरी गाण्ड को आगे-पीछे करना चालू कर दिया। रामू ने थोड़े और धक्के दिए और मैंने उसके कंधों को जोरों से पकड़ लिया और मैं एक घंटे में दूसरी बार झड़ गई। मेरे झड़ते ही रामू जोरों से करने लगा और थोड़ी देर बाद वो भी झड़ गया। झड़ते वक़्त उसका सारा वीर्य मेरी चूत में गया। मैं खड़े होकर बाथरूम में जाकर मेरी चूत धोना चाहती थी पर रामू ने मुझे खड़े ही नहीं होने दिया, वो 5 । मिनट तक मेरे ऊपर सोता रहा और फिर किस करने गया तो मैंने उसे मना किया- “प्लीज़... रामू नहीं...”

रामू कुछ बोले बगैर खड़ा हो गया और अपने कपड़े पहनने लगा। मैंने भी उठकर गाउन पहन लिया।

कपड़े पहनकर रामू निकलते हुये बोला- “जा रहा हूँ मेडम...”

रामू के जाने के बाद मैं बेड पर लेट गई। मैं बहुत ज्यादा ही थकान महसूस कर रही थी। मेरा सारा शरीर दुखने लगा था, खासकर मेरी चूत की हालत बहुत बुरी थी। उसके दोनों होंठ सूज गये थे। मैंने मेरा हाथ चूत पर रखा और फिर चूत के अंदर उंगली डालकर 'जी-स्पाट' को छू। उसे छूते ही मैं मुश्कुरा उठी। आज रामू ने मुझे सेक्स का एक नया आयाम सिखाया था।

तभी मोबाइल की रिंग बजी। मैंने मोबाइल हाथ में लेकर देखा तो नीरव का काल था।

मैं- “हाँ, बोलो...” मैंने कहा।

नीरव- “निशु, देर लगेगी। फिल्म देखने नहीं जा पाएंगे...” नीरव ने धीरे से कहा। वो डर रहा होगा की उसकी बात सुनकर मैं भड़क जाऊँगी।

मैं- “कोई बात नहीं नीरव, वैसे भी मैं आज आराम करना चाहती हूँ...” मैंने कहा।

नीरव- “बैंक्स डार्लिंग, खाना तो हम बाहर ही खाएंगे। 8:00 बजे तैयार रहना..” नीरव ने कहा।

मैं- “ओके...” कहा और फिर उसकी काल काट दी।

मैं सोना चाहती थी पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। मेरा दिमाग आज के दिन के बारे में सोच रहा था। आज जो भी हुवा वो सब मेरे ससुर की वजह से हुवा। वो कहते हैं की मैंने नीरव से पैसे माँगे, इसलिए नीरव ने चोरी की, नीरव मेरे खातिर चोर बना।

आज उन्होंने मुझे बड़े घर आने को ना बोला तो मैं यहां थी, इसलिए रामू ने मेरी चुदाई की। मैं वहां होती तो कहां ये सब होने वाला था। मैं आज मेरे ससुर की वजह से छिनाल बनी। मेरे सामने आज के दिन में जो-जो। हुवा था वो सब मुझे दिखने लगा। सुबह उठकर मंदिर जाना, वहां से आने के बाद दीदी का काल आना। दीदी की बातें याद आते ही आँखें छलक उठी। फिर शंकर का मेरा हाथ पकड़ना। और फिर रामू के साथ किया हुवा सेक्स। ऐसा नहीं था की रामू ने मेरी चूत चाटी थी, उसके बारे में मैं जानती नहीं थी। मैंने ब्लू-फिल्म में देखा था, पर

आज तक किसी ने मेरी चूत चाटी नहीं थी।

 
Back
Top