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कड़ी 36
अगले दिन सुबह हो जाती है, और आज शगुन का दिन होता है। लड़की वाले शगुन लेकर लड़के वालों के घर आते हैं। शगुन का टेंट गाँव के पास वाली बलविंदर की जमीन पर लगा होता है। वहां ही टेंट लगाकर उस जगह को बहुत अच्छा बना दिया था। सब तैयार होने में लगे हुए थे। शगुन 11:00 बजे होना था, इसलिए सब उससे पहले तैयार होने में लगे हुए थे।
9:00 बजे गये होते हैं, और चांदनी का काम पूरा हो जाता है। चांदनी किचेन से बाहर निकालकर फोन पर बात करते हुए बोलती है।
चरणजीत- “हाए ओये फूल अभी तक पहुँचे नहीं। शगुन का टाइम होने वाला है, जल्दी से जल्दी फूल वहां पहुँचा..” ये कहकर वो फोन कट कर देती है। और बाहर को जाती हुई वो बलविंदर को आवाज मारती हुई बोली "जरा सुनो जी...”
बलविंदर- हाँ बोल मेरी भागवान।
चरणजीत- ओहह... हलवाई को भेज देना था वहां।
बलविंदर- अभी भेज देता हूँ।
इतने में सुखजीत बाहर आती और कहती है- “बहनजी आप इतनी टेन्शन क्यों ले रहे हो? सारे काम अपने आप हो जाने हैं..”
चरणजीत- बहनजी क्या करें पहली शादी है, टेन्शन तो अपने आप हो जाती है।
सुखजीत- चलो अब तैयार हो जाओ, सारे प्रबंध अपने आप हो जाने हैं।
चरणजीत- बहनजी, वो मैंने एक पार्लर वाली को बुलाया था, वो आई है या नहीं?
सुखजीत- हाँ बहनजी वो कब की आई हुई है। वो कब से आपका ही इंतेजार कर रही है।
फिर सुखजीत और चरणजीत दोनों चरणजीत के रूम में चली जाती हैं। सुखजीत चरणजीत से पूछती है- “बहनजी आज आपने डालना क्या है?"
चरणजीत- “बहनजी, मैं दो-तीन सूट लेकर आई हूँ। पर मुझे ये समझ में नहीं आता की मैं कौन सा सूट डालूं?
सुखजीत- आप मुझे दिखाओ बहनजी।
चरणजीत अपने तीन सूट निकालकर सुखजीत को दिखाती है।
सुखजीत को उन सूट्स में से एक गुलाबी रंग का सूट काफी पसंद आता है, और वो सूट चरणजीत को देती हुई बोली- “लो बहनजी आप इसे ट्राई करो।
फिर चरणजीत वो सूट लेकर बाथरूम में चली जाती है। चरणजीत 5 मिनट बाद बाथरूम से वो सूट डालकर बाहर आई।
सुखजीत उसको देखकर बोली- “बहनजी बात बनी नहीं। सब कुछ देखा-देखा सा लग रहा है..."
चरणजीत- “ओहहो... बहनजी लड़के की माँ पर तो देखे हुए सूट ही अच्छे लगते हैं..”
सुखजीत- “ओहो... बहनजी आजकल सब कुछ चलता है। वैसे इस सूट में जब आपको मीता देखेगा, तो उसका कुछ भी नहीं हिलना...”
चरणजीत सुखजीत की ये बात सुनते ही शर्माकर बोली- “बहनजी आप भी ना.."
सुखजीत- "बहनजी इसमें शर्माने वाली क्या बात है। ऐसी बातें तो अब हम दोनों आपस में कर ही सकती है। पर अब आप खुद ही देखो इस सूट का कमीज कितना बड़ा है। आपके चूतर भी नहीं दिख रहे हैं...”
सुखजीत के मुँह से ये बात सुनकर चरणजीत हैरान हो जाती है, और वो जवाब देते हुए बोली- "बहनजी इस उमर में चूतर कौन दिखाता है...”
सुखजीत आँख मारकर बोली- “बहनजी इस उमर में तो असली मजा आता है, चूतर दिखाने का..”
चरणजीत- बहनजी मुझे अच्छे से पता है, मजा तो आपको आता है अपने चूतर दिखाने का बिटू को।
सुखजीत शर्माकर बोली- “बहनजी उसने तो देखे भी हुए हैं, और खाए भी हुए हैं."
चरणजीत- हाए बहनजी आप तो सच में बहुत चालू हो।
सुखजीत उसके पास जाकर चूतरों पर थप्पड़ मारकर बोली- “अच्छा बहनजी कल कौन बस में अपने चूतर मीते से रगड़ रही थी?"
चरणजीत थोड़ी गरम हो जाती है और बोली- “हाए क्या करूँ बहनजी उस टाइम मजा ही बहुत आ रहा था...”
सुखजीत- “बहनजी अगर वो वाला मजा आज भी लेना है, तो ये सूट चेंज करो अभी..." और सुखजीत एक और सूट चेक करके चरणजीत को देती है।
चरणजीत सूट पकड़कर चेंज करने के लिए अंदर जा रही थी। पर सुखजीत चरणजीत का हाथ पकड़कर बोली- “बहनजी कहां जा रहे हो? आप यहीं पर चेंज कर लो ना। यहाँ कौन देख रहा है?"
चरणजीत- बहनजी आज तक मैंने कभी खुले में कपड़े चेंज नहीं करे हैं।
सुखजीत- अच्छा अच्छा खुले में अपने चूतर मसलवा सकती हो आप, पर खुले में कपड़े चेंज नहीं कर सकती।
अगले दिन सुबह हो जाती है, और आज शगुन का दिन होता है। लड़की वाले शगुन लेकर लड़के वालों के घर आते हैं। शगुन का टेंट गाँव के पास वाली बलविंदर की जमीन पर लगा होता है। वहां ही टेंट लगाकर उस जगह को बहुत अच्छा बना दिया था। सब तैयार होने में लगे हुए थे। शगुन 11:00 बजे होना था, इसलिए सब उससे पहले तैयार होने में लगे हुए थे।
9:00 बजे गये होते हैं, और चांदनी का काम पूरा हो जाता है। चांदनी किचेन से बाहर निकालकर फोन पर बात करते हुए बोलती है।
चरणजीत- “हाए ओये फूल अभी तक पहुँचे नहीं। शगुन का टाइम होने वाला है, जल्दी से जल्दी फूल वहां पहुँचा..” ये कहकर वो फोन कट कर देती है। और बाहर को जाती हुई वो बलविंदर को आवाज मारती हुई बोली "जरा सुनो जी...”
बलविंदर- हाँ बोल मेरी भागवान।
चरणजीत- ओहह... हलवाई को भेज देना था वहां।
बलविंदर- अभी भेज देता हूँ।
इतने में सुखजीत बाहर आती और कहती है- “बहनजी आप इतनी टेन्शन क्यों ले रहे हो? सारे काम अपने आप हो जाने हैं..”
चरणजीत- बहनजी क्या करें पहली शादी है, टेन्शन तो अपने आप हो जाती है।
सुखजीत- चलो अब तैयार हो जाओ, सारे प्रबंध अपने आप हो जाने हैं।
चरणजीत- बहनजी, वो मैंने एक पार्लर वाली को बुलाया था, वो आई है या नहीं?
सुखजीत- हाँ बहनजी वो कब की आई हुई है। वो कब से आपका ही इंतेजार कर रही है।
फिर सुखजीत और चरणजीत दोनों चरणजीत के रूम में चली जाती हैं। सुखजीत चरणजीत से पूछती है- “बहनजी आज आपने डालना क्या है?"
चरणजीत- “बहनजी, मैं दो-तीन सूट लेकर आई हूँ। पर मुझे ये समझ में नहीं आता की मैं कौन सा सूट डालूं?
सुखजीत- आप मुझे दिखाओ बहनजी।
चरणजीत अपने तीन सूट निकालकर सुखजीत को दिखाती है।
सुखजीत को उन सूट्स में से एक गुलाबी रंग का सूट काफी पसंद आता है, और वो सूट चरणजीत को देती हुई बोली- “लो बहनजी आप इसे ट्राई करो।
फिर चरणजीत वो सूट लेकर बाथरूम में चली जाती है। चरणजीत 5 मिनट बाद बाथरूम से वो सूट डालकर बाहर आई।
सुखजीत उसको देखकर बोली- “बहनजी बात बनी नहीं। सब कुछ देखा-देखा सा लग रहा है..."
चरणजीत- “ओहहो... बहनजी लड़के की माँ पर तो देखे हुए सूट ही अच्छे लगते हैं..”
सुखजीत- “ओहो... बहनजी आजकल सब कुछ चलता है। वैसे इस सूट में जब आपको मीता देखेगा, तो उसका कुछ भी नहीं हिलना...”
चरणजीत सुखजीत की ये बात सुनते ही शर्माकर बोली- “बहनजी आप भी ना.."
सुखजीत- "बहनजी इसमें शर्माने वाली क्या बात है। ऐसी बातें तो अब हम दोनों आपस में कर ही सकती है। पर अब आप खुद ही देखो इस सूट का कमीज कितना बड़ा है। आपके चूतर भी नहीं दिख रहे हैं...”
सुखजीत के मुँह से ये बात सुनकर चरणजीत हैरान हो जाती है, और वो जवाब देते हुए बोली- "बहनजी इस उमर में चूतर कौन दिखाता है...”
सुखजीत आँख मारकर बोली- “बहनजी इस उमर में तो असली मजा आता है, चूतर दिखाने का..”
चरणजीत- बहनजी मुझे अच्छे से पता है, मजा तो आपको आता है अपने चूतर दिखाने का बिटू को।
सुखजीत शर्माकर बोली- “बहनजी उसने तो देखे भी हुए हैं, और खाए भी हुए हैं."
चरणजीत- हाए बहनजी आप तो सच में बहुत चालू हो।
सुखजीत उसके पास जाकर चूतरों पर थप्पड़ मारकर बोली- “अच्छा बहनजी कल कौन बस में अपने चूतर मीते से रगड़ रही थी?"
चरणजीत थोड़ी गरम हो जाती है और बोली- “हाए क्या करूँ बहनजी उस टाइम मजा ही बहुत आ रहा था...”
सुखजीत- “बहनजी अगर वो वाला मजा आज भी लेना है, तो ये सूट चेंज करो अभी..." और सुखजीत एक और सूट चेक करके चरणजीत को देती है।
चरणजीत सूट पकड़कर चेंज करने के लिए अंदर जा रही थी। पर सुखजीत चरणजीत का हाथ पकड़कर बोली- “बहनजी कहां जा रहे हो? आप यहीं पर चेंज कर लो ना। यहाँ कौन देख रहा है?"
चरणजीत- बहनजी आज तक मैंने कभी खुले में कपड़े चेंज नहीं करे हैं।
सुखजीत- अच्छा अच्छा खुले में अपने चूतर मसलवा सकती हो आप, पर खुले में कपड़े चेंज नहीं कर सकती।