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Adultery Nakhara chadhti jawani da (नखरा चढती जवानी दा )

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कड़ी 36

अगले दिन सुबह हो जाती है, और आज शगुन का दिन होता है। लड़की वाले शगुन लेकर लड़के वालों के घर आते हैं। शगुन का टेंट गाँव के पास वाली बलविंदर की जमीन पर लगा होता है। वहां ही टेंट लगाकर उस जगह को बहुत अच्छा बना दिया था। सब तैयार होने में लगे हुए थे। शगुन 11:00 बजे होना था, इसलिए सब उससे पहले तैयार होने में लगे हुए थे।

9:00 बजे गये होते हैं, और चांदनी का काम पूरा हो जाता है। चांदनी किचेन से बाहर निकालकर फोन पर बात करते हुए बोलती है।

चरणजीत- “हाए ओये फूल अभी तक पहुँचे नहीं। शगुन का टाइम होने वाला है, जल्दी से जल्दी फूल वहां पहुँचा..” ये कहकर वो फोन कट कर देती है। और बाहर को जाती हुई वो बलविंदर को आवाज मारती हुई बोली "जरा सुनो जी...”

बलविंदर- हाँ बोल मेरी भागवान।

चरणजीत- ओहह... हलवाई को भेज देना था वहां।

बलविंदर- अभी भेज देता हूँ।

इतने में सुखजीत बाहर आती और कहती है- “बहनजी आप इतनी टेन्शन क्यों ले रहे हो? सारे काम अपने आप हो जाने हैं..”

चरणजीत- बहनजी क्या करें पहली शादी है, टेन्शन तो अपने आप हो जाती है।

सुखजीत- चलो अब तैयार हो जाओ, सारे प्रबंध अपने आप हो जाने हैं।

चरणजीत- बहनजी, वो मैंने एक पार्लर वाली को बुलाया था, वो आई है या नहीं?

सुखजीत- हाँ बहनजी वो कब की आई हुई है। वो कब से आपका ही इंतेजार कर रही है।

फिर सुखजीत और चरणजीत दोनों चरणजीत के रूम में चली जाती हैं। सुखजीत चरणजीत से पूछती है- “बहनजी आज आपने डालना क्या है?"

चरणजीत- “बहनजी, मैं दो-तीन सूट लेकर आई हूँ। पर मुझे ये समझ में नहीं आता की मैं कौन सा सूट डालूं?

सुखजीत- आप मुझे दिखाओ बहनजी।

चरणजीत अपने तीन सूट निकालकर सुखजीत को दिखाती है।

सुखजीत को उन सूट्स में से एक गुलाबी रंग का सूट काफी पसंद आता है, और वो सूट चरणजीत को देती हुई बोली- “लो बहनजी आप इसे ट्राई करो।

फिर चरणजीत वो सूट लेकर बाथरूम में चली जाती है। चरणजीत 5 मिनट बाद बाथरूम से वो सूट डालकर बाहर आई।

सुखजीत उसको देखकर बोली- “बहनजी बात बनी नहीं। सब कुछ देखा-देखा सा लग रहा है..."

चरणजीत- “ओहहो... बहनजी लड़के की माँ पर तो देखे हुए सूट ही अच्छे लगते हैं..”

सुखजीत- “ओहो... बहनजी आजकल सब कुछ चलता है। वैसे इस सूट में जब आपको मीता देखेगा, तो उसका कुछ भी नहीं हिलना...”

चरणजीत सुखजीत की ये बात सुनते ही शर्माकर बोली- “बहनजी आप भी ना.."

सुखजीत- "बहनजी इसमें शर्माने वाली क्या बात है। ऐसी बातें तो अब हम दोनों आपस में कर ही सकती है। पर अब आप खुद ही देखो इस सूट का कमीज कितना बड़ा है। आपके चूतर भी नहीं दिख रहे हैं...”

सुखजीत के मुँह से ये बात सुनकर चरणजीत हैरान हो जाती है, और वो जवाब देते हुए बोली- "बहनजी इस उमर में चूतर कौन दिखाता है...”

सुखजीत आँख मारकर बोली- “बहनजी इस उमर में तो असली मजा आता है, चूतर दिखाने का..”

चरणजीत- बहनजी मुझे अच्छे से पता है, मजा तो आपको आता है अपने चूतर दिखाने का बिटू को।

सुखजीत शर्माकर बोली- “बहनजी उसने तो देखे भी हुए हैं, और खाए भी हुए हैं."

चरणजीत- हाए बहनजी आप तो सच में बहुत चालू हो।

सुखजीत उसके पास जाकर चूतरों पर थप्पड़ मारकर बोली- “अच्छा बहनजी कल कौन बस में अपने चूतर मीते से रगड़ रही थी?"

चरणजीत थोड़ी गरम हो जाती है और बोली- “हाए क्या करूँ बहनजी उस टाइम मजा ही बहुत आ रहा था...”

सुखजीत- “बहनजी अगर वो वाला मजा आज भी लेना है, तो ये सूट चेंज करो अभी..." और सुखजीत एक और सूट चेक करके चरणजीत को देती है।

चरणजीत सूट पकड़कर चेंज करने के लिए अंदर जा रही थी। पर सुखजीत चरणजीत का हाथ पकड़कर बोली- “बहनजी कहां जा रहे हो? आप यहीं पर चेंज कर लो ना। यहाँ कौन देख रहा है?"

चरणजीत- बहनजी आज तक मैंने कभी खुले में कपड़े चेंज नहीं करे हैं।

सुखजीत- अच्छा अच्छा खुले में अपने चूतर मसलवा सकती हो आप, पर खुले में कपड़े चेंज नहीं कर सकती।
 
चरणजीत- बस करो बहनजी अब। आपने तो मेरी मार ही ली है आज।

सुखजीत चरणजीत के पास जाती है, और चरणजीत का पल्ला पकड़कर उसका सूट उतार देती है। चरणजीत ने सफेद कलर की ब्रा डाली हुई थी। जो चरणजीत की मोटी-मोटी चूचियों की वजह से फटने वाली हो रखी थी।

चरणजीत- “हाए बहनजी, इतनी जोर से सूट उतारने की क्या जरूरत थी, आराम से उतार लेते.."

सुखजीत- बहनजी वो बात ये है, की मैंने आपकी चूचियां देखनी थी।

चरणजीत- क्यों बहनजी?

सुखजीत- अभी भी कमाल की है आपकी चूचियां।

चरणजीत- कमाल की तो होनी ही है, क्योंकी सरदार इसे हाथ तक नहीं लगाता।

सुखजीत- “हाए फिर किसी बाहर वाले से हाथ लगवा लो ना बहनजी..” और कहते ही सुखजीत चरणजीत का नाड़ा खोल देती है।

नाड़ा खुलते ही सलवार चरणजीत के पैरों में आ जाती है, और वो सिर्फ ब्रा पैंटी में रह जाती है। चरणजीत की मोटी-मोटी चूचियां और गोरे चूतड़ सुखजीत के दिल को खींच रहे थे।

सुखजीत- “बहनजी अगर मीता ने आपको इस हालत में देख लिया, तो उसने उसी टाइम आपका काम कर देना

चरणजीत- “आहह... बहनजी वो तो कभी से मेरी लेने के चक्कर में है। पर मैं ही उसे नहीं देती, क्योंकी मुझे डर लगता है की कहीं कोई पंगा ना पड़ जाए, कहीं किसी को पता ना लग जाए...”

सुखजीत- नहीं पड़ता कोई पंगा, मैं भी तो अपनी चूत बिटू को उसके घर ही देकर आई हूँ। किसी को कुछ पता नहीं चला।

चरणजीत- बहनजी आप तो पूरी एक्सपर्ट हो ना इसलिए।

सुखजीत- बहनजी क्या करें? जब घर में मजा नहीं आता एक औरत को तो उसे मजा बाहर लेना ही पड़ता है। और बहन इस सूट के नीचे आपको ब्लैक कलर की ब्रा और पैंटी डालनी पड़ेगी।

चरणजीत आल्मिरा से अपनी एक ब्लैक कलर की ब्रा पैंटी निकलती है, और सुखजीत के सामने ही अपनी पहनी हुई ब्रा पैंटी उतार देती है। चरणजीत की मोटी-मोटी गोरी चूचियां एकदम आजाद हो जाती हैं। और चरणजीत की चूचियों के काले निपल एकदम खड़े होते हैं।

सुखजीत चरणजीत की चूचियों को देखकर बोली- “हाए बहनजी आप तो अपनी जवानी संभाल कर बैठे हो अभी तक..."

चरणजीत मुश्कुराकर काले रंग की ब्रा पैंटी डालने लगती है। नई ब्रा होने की वजह से ब्रा थोड़ी टाइट होती है। जिस वजह से चरणजीत से अपने आप ब्रा के हुक नहीं लग रहे थे। वो सुखजीत को ब्रा के हक लगाने के लिए कहती है। सुखजीत ब्रा के हुक लगाने की कोशिश करती है। पर उससे भी हक नहीं लगते।

सुखजीत- “लगता है बहनजी आपकी चूचियां और मोटी हो गई हैं।

चरणजीत- बहनजी जरा खींचकर बंद करो ना।

सुखजीत खींचकर हक लगा देती है, और चरणजीत की चूचियां टाइट होकर खड़ी हो जाती है। फिर चरणजीत अपनी पैंटी उतार देती है, सुखजीत चरणजीत के गोरे मोटे चूतर देखकर उसे हाथ में भरकर मसल देती है। चूतर मसलते ही चरणजीत की आँखें बंद हो जाती हैं।

चरणजीत- आह्ह... स्स्सीई हाए बहनजी आप ये क्या कर रहे हो?

सुखजीत- बहनजी एक बात बताऊँ।

चरणजीत- हाँ पूछो।

सुखजीत- शादी के बाद कितने बंदों से हाथ फेरवाया है आपने?

चरणजीत- ये क्या बात कर रहे हो आप बहनजी?

सुखजीत तभी एक हाथ से चूतर और जोर से दबा देती है, और एक हाथ से अपनी उंगली उसकी गाण्ड में डाल देती है। इससे चरणजीत पूरी गरम हो जाती है, और गरम होकर अपनी सारी सचई सुखजीत को बता देती है।

चरणजीत- बहनजी, शादी के बाद मैंने अभी तक दो बंदों से हाथ फिरवाया हुआ है।

सुखजीत ये सुनते ही समझ जाती है, की चरणजीत भी चालू है, कहा- “हाए बहनजी कौन-कौन है वो?"

चरणजीत- एक मीता और एक शमशेर।

सुखजीत- हाए शमशेर कौन है बहनजी?

चरणजीत- अपने गाँव का पोस्ट मास्टर है।

सुखजीत- हाए पोस्ट मास्टर से भी हाथ फिरवा लिया बहनजी आपने, आप तो सच में कमाल हो।

***** *****
 
कड़ी_37

सुखजीत और चरणजीत फिर दोनों रूम से बाहर निकल जाती हैं।

सुखजीत भी तैयार हो जाती है, और अपने हुश्न का जवाला सबको दिखा रही थी। सुखजीत ने आज ब्लैक कलर का सूट डाला हुआ था। जो कट-स्लीव होता है, पीछे वाला गला पूरा नंगा था, जिश्म पर डोरियां लगी हुई थी। पर डोरियों में से सुखजीत का नंगा जिश्म साफ-साफ दिख रहा था। सुखजीत ने अपने बाल खुले छोड़े हुए थे, जो उसने अपने बाल आगे को कर रखे थे। सुखजीत की मोटी-मोटी चूचियां बाहर की ओर निकली हुई थीं, जो उसकी कमीज को फाड़ने वाली थीं।

सुखजीत की कमीज का पल्ला काफी छोटा था, इसलिए उसके दोनों चूतर साफ-साफ दिख रहे थे। सुखजीत एकदम पूरी-पूरी पंजाबन लग रही थी। जिसको देखकर हर किसी का लण्ड हरकत में आ गया था। पिंकी और रीत भी किसी से कम नहीं लग रही थीं।

रीत ने नारंगी रंग की छोटी सी कमीज डाली हुई थी, और नीचे ग्रीन कलर की पटियाला शाही फलवी सलवार। रीत की कमीज सिर्फ उसके चूतड़ों तक ही आ रही थी। पीछे से उसके दोनों चूतर अपनी पूरी शेप में दिख रहे थे। पीछे वाले गला काफी बड़ा था, इसलिए उसका नंगा जिश्म साफ-साफ दिख रहा था। उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां कहर मचा रही थीं। रीत की पतली सी कमीज में से उसकी ब्लैक कलर की ब्रा साफ-साफ दिख रही थी।

पिंकी भी मस्त लग रही थी। पिंकी ने पिंक कलर का सूट डाला हुआ था। उसकी चूचियां वैसे ही इतनी बड़ीबड़ी थीं, ऊपर से उसने सफेद कलर की टाइट ब्रा डालकर अपनी चूचियां और टाइट कर लिए थे। और उसकी गाण्ड तो रणबीर ने मार-मारकर बाहर निकाली हुई थी। शगुन लग रहा होता है। पर जब शगुन में रीत और पिंकी जाती हैं, तो वहां चार चाँद लग जाते हैं।

चरणजीत काम में बिजी होती है और सुखजीत बैठकर सब कुछ देख रही होती है।

शगुन लग चुका था, और सब खाने की तरफ चले जाते हैं। उधर ही बिटू और मीता बैठकर दारू पीकर फ्री हो जाते हैं। अब वो लंच करने लगते हैं। रीत और पिंकी भी सुखजीत के साथ होती है। उन तीनों को एक साथ देखकर ऐसा लग रहा था, मानो वो तीनों सगी बहनें हो।

लड़की वालों की तरफ से काफी जवान सुंदर लड़के आए हुए थे। जिन सबकी नजर सुखजीत पर होती हैं। दर्शल बात ये थी, की आज सुखजीत पहले से ज्यादा और जरूरत से भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी। उसने आज अपनी बेटी रीत और पिंकी को भी पीछे छोड़ दिया था।

बिटू की नजर भी आज सुखजीत से लड़ जाती है और वो कहता है- “भाभी मस्त लग रही हो.."

सुखजीत सबसे आँख बचाकर शर्मा जाती है।

पिंकी भी अपनी चाची सुखजीत को छेड़ते हुए बोली- “चाची एक बात कहूँ?"

सुखजीत- हाँ जी बेटा बोलो।

पिंकी- आज आप रीत की छोटी बहन लग रहे हो।

सुखजीत शर्माकर बोली- बेटा आप मजाक बहुत अच्छा कर लेते हो।

पिंकी- “हाहाहाहा... नहीं चाची सच्ची। देख लेना आज कोई आपको पसंद ना कर ले कुँवारी समझकर..."

रीत भी मजाक करते हुए बोली- “हाए... अगर मम्मी को कोई पसंद करके शादी करके ले गया, तो मेरा और पापा का क्या बनेगा?"

सुखजीत- “चल हट पागल..” और तीनो हँसने लगती हैं।

दूसरी तरफ मीता चरणजीत के चक्कर में था, आज भी उसका लण्ड चरणजीत को देखकर मचल रहा था। मीता चरणजीत के आगे-पीछे ही घूम रहा था, और जब उन दोनों की आँखें मिलती तो वो दोनों मुश्कुरा देते।

इतने में बलविंदर चरणजीत के पास आता है और बोलता है- “भागवान... जौन से बाक्स में गोल्ड का सेट डाला था, वो बाक्स तू लेकर आई या नहीं?"

चरणजीत- हाए रब्बा... वो मैं भूल ही गई जी।

बलविंदर- मैं तो बिजी हूँ, तू किसी को साथ लेकर चली जा और जल्दी से लेकर आ।

चरणजीत कार की चाभी दो।

चरणजीत सुखजीत के पास आती है और उसको साथ लेकर जाती है। सुखजीत जाने के लिए मान जाती है पर वो बोली- “एक मिनट बहनजी, मैं रीत के पापा को कह दूँ एक बार..."

सुखजीत हरपाल के पास जाती है और हरपाल मीता और बिटू के साथ बैठकर पेग खींच रहा था। सुखजीत हरपाल के पास कर धीरे से बोली- “सुनो जी मैं घर जा रही हूँ, चरणजीत बहनजी के साथ कुछ सामान लेने के लिए..."

ये सुनते ही मीते और बिटू के कान खड़े हो जाते हैं, और हरपाल से नजर बचाकर सुखजीत बिटू को सेक्सी सी स्माइल देती है और अपनी गाण्ड मटकाकर वहाँ से चली जाती है। बिटू मीता को देखकर इशारा करता है।

चरणजीत और सुखजीत दोनों कार में जा रही थी, बीच में ही सुखजीत चरणजीत को छेड़ते हुए बोली- “बहनजी फिर आपने किस-किस का खड़ा किया शगुन में?"

चरणजीत हँसते हुए बोली- “बहन पता नहीं, मैंने कौन सा चेक किया है सबका?"

सुखजीत- हाँ जी आपने तो मीता का ही चेक करना होगा।

चरणजीत शर्माते हुए बोली- “मीता तो मोके का फायदा उठाने वाला है, जैसे बिटू है.."

सुखजीत बिटू का नाम सुनते ही शर्माकर धीरे से बोली- “मोका तो मैं अभी देकर आई हूँ..”

चरणजीत- वो कैसे बहनजी?

सुखजीत- अभी पता चल जाएगा बहनजी।
 
इतने में वो दोनों घर पहुँच जाती हैं, घर में कामवाली बाईं के सिवा और कोई नहीं था। वो दोनों अंदर जाती हैं, और देखती की मीता और बिटू दोनों सामने खड़े हैं। ये देखकर चरणजीत हैरान जो जाती है, लेकिन सुखजीत को पता होता है, की उन दोनों ने आना ही है। क्योंकी वो आपने आप ही जानबूझ कर हरपाल को कहने के बहाने उन दोनों को इन्वाइट करके आई थी।

चरणजीत मीता को देखकर बोली- “भाईजी आप यहाँ क्या कर रहे हो?"

मीता मूंछच को ताव देकर बोला- “बहनजी बस आपको मिलने के लिए आया हूँ, क्या बात है आजकल आप बात नहीं करते...” कहकर मीता चरणजीत के पास हो जाता है।

उधर बिटू भी सुखजीत के पास हो जाता है और सुखजीत धीरे से कहती है- “भाईजी आप मेरे घर वाले को क्या कहकर आए हो?"

त को कमर से पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचकर बोला- "मैंने उसको कहा की आज भाभी बड़ी सेक्सी लग रही है, मैं जरा उसपर अपना हाथ साफ करके आया..”

सुखजीत के मुँह से ये सुनते ही- “आह्ह... आह्ह...” निकलती है, और वो बिटू को अपनी बाहों में भर लेती है।

इधर मीते ने भी चरणजीत को खींचकर अपनी बाहों में भर लिया था और वो बोला- "भाभी आज कमाल की लग रही है..” कहकर वो चरणजीत के चूतरों पर हाथ रखा देता है।

दोनों जट्टियां और उन दोनों के यार एक रूम में मुलाकात कर रहे होते हैं। सुखजीत बिटू को अपनी बाहों में भरकर उसके सीने पर हाथ फेरते हुए बोली- "आप और क्या-क्या कहकर आए हो मेरे पति को?"

बिटू अपना हाथ सुखजीत के चूतरों पर लेकर आता और जोर से मसलकर बोला- “और कहकर आया हूँ, की तेरी घरवाली बहुत मस्त होकर मुझे अपनी चूत देती है.."

सुखजीत आँख बंद करके बोली- “अच्छा और क्या कहा?"

बिटू सुखजीत की कमीज का पल्ला उठाकर पीछे से उसकी गाण्ड में उंगली डालकर बोला- “और मैं ये कहकर आया हूँ, की तेरी घर वाली के चूतरों के बीच उंगलियां डालने में बहुत मजा आता है...”

सुखजीत ये सुनते ही बहुत खुश और गरम हो जाती है। और फिर सुखजीत अपने लाल होंठ बिटू के होंठों में डालकर उसके होंठों को चूसने लगती है। बिटू भी एक हाथ सुखजीत की गाण्ड पर रखता है और दूसरा हाथ उसकी चचियों पर रखकर दोनों को एक साथ मसल देता है।

दूसरी तरफ मीता चरणजीत को चूस रहा था और चरणजीत बोलती है- "ना भाईजी ऐसा ना करो... मुझे जाना भी है, बलविंदर ने मुझे जल्दी आने को कहा था..."

मीता- “ओह्ह... तू छोड़ उस बलविंदर को, जब मैं तेरे साथ हूँ। वैसे बस में तो तू बहुत अपनी चूतर हिला रही थी। अब हिला ना अब मैं तेरे साथ हूँ..” मीता चरणजीत के दोनों चूतर पकड़कर कसकर मसल देता है।

इससे चरणजीत बहुत गरम हो जाती है, और मीते के होंठों को अपने आप चूसने लगती है।

होंठों को चुसवाते हुए सुखजीत चरणजीत को देखकर आँख मारती है।

इतने में चरणजीत के फोन पर बलविंदर का फोन आ जाता है। ये देखकर चरणजीत एकदम घबरा जाती है, और मीता से अलग होकर फोन उठाकर बोली- “हेलो..."

बलविंदर- ओ यार तू कहाँ रह गई, सब यहाँ तेरा इंतेजार कर रहे हैं।

चरणजीत- हाँ बस अभी आई 5 मिनट में।

सुखजीत और बिटू अभी भी लिपटे हुए थे।

चरणजीत उन्हें देखकर बोली- “बहनजी चलो अब फोन आ गया है."

सुखजीत उदास सा मुँह बनाकर बिटू को देखती है और उसके होंठों को चूसकर बोली- "मुझे अब जाना पड़ेगा भाईजी...”

बिटू सुखजीत के चूतर मसलकर फिर से होंठ चूसकर बोला- "आज रात तुझे मैंने मोटर पर ठोंकना है..."

सुखजीत शर्मा जाती है, और आँखें नीचे करके लण्ड को पकड़कर आँख मारकर वहां से चली जाती है। दोनों घर से निकल जाती हैं, और शगुन वाली वहां जगह पहुँच जाती हैं। कार से निकलने से पहले चरणजीत सुखजीत की तरफ देखकर बोली।

चरणजीत- “बहनजी आपकी लिपस्टिक खराब हो रखी है.."

सुखजीत ये सुनकर मिरर में अपनी लिपस्टिक को ठीक करती है, और दोनों अपनी-अपनी चूचियां सेट करके पहली जैसी बनकर अंदर चली जाती हैं।

* * * * * * * * * *
 
कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
कड़ी_38

चरणजीत और सुखजीत दोनों जाकर फिर शगुन के प्रोग्राम में घुल-मिल जाती हैं। सुखजीत, पिंकी और रीत के पास जाती है। इतने में रीत और पिंकी अपने पीछे बहुत सारे लड़के ला चुकी थीं। सुखजीत भी उनके पास आकर खड़ी हो जाती है, और वो भी शगुन में पिंकी और रीत की तरह प्रोग्राम में चार चाँद लगा रही थी।

इतने में डी.जे. पर गाना चलने लगता है, और पिंकी अपने हाथ पैर गाने की ताल के साथ हिलाने लगती है। क्योंकी उसका मन डान्स करने का हो रहा था।

रीत ये देखकर उससे बोली- “यहाँ खड़ी क्या हाथ पैर हिला रही है, डी.जे. के सामने क्यों नहीं नाचती तू?"

पिंकी- वहां भी नाच लूँगी, पर कोई शुरू तो करे डान्स करना।

रीत- तू अकेली जाकर डान्स करके दिखा दे अपने जलवे जौन से जलवे तूने दिखाने हैं।

पिंकी ये सुनकर उसे अपना मोड़ा मारती है, वो रीत को सुखजीत की तरफ इशारा करती है की तेरे सामने तेरी मम्मी खड़ी है, और तू उनके सामने कैसी बातें कर रही है। इतने में कुछ लड़कियां डी.जे. के सामने डान्स करने लगती हैं, और पिंकी रीत का हाथ पकड़कर डी.जे. के सामने उसे ले जाती है।

दोनों अपनी कमर हिला-हिलाकर डान्स करना शुरू कर देती हैं। लड़के सारे पास-पास होकर उन दोनों को घूर-चूर कर देख रहे थे। लड़के लड़की वालों की तरफ से थे, जिनकी नजर रीत और पिंकी पर होती है। पिंकी ये सब अच्छे से जानती थी, इसलिए पिंकी जान बूझकर उनके सामने अपनी गाण्ड जोर-जोर से मटका-मटकाकर नाच रही थी। ताकी लड़के उसके पीछे पड़े और फिर वो बाद में उन्हें अच्छे से तड़पाए। क्योंकी ऐसी खूबसूरत बला को लड़कों को तडपने में बहत मजा आता है।

इतने में लड़कों की टोली के पीछे से एक जवान सुंदर लड़का सबसे नजरें बचाकर सुखजीत को देखता है, और वो साइड में चला जाता है। ये चीज सुखजीत भी अच्छे से नोट कर लेती है। पर उसको इसमें कुछ अजीब नहीं लगता, क्योंकी अभी-अभी तो बिटू से अपने जिश्म पर हाथ फिरवा कर आई थी। सुखजीत इसलिए पहले से ही गरम हो रखी थी। सुखजीत को दर्शल उस लड़के का चोरी चुपके उसको देखना बहुत अच्छा लग रहा था।

उस जवान लड़के का नाम गगन होता है, और गगन आई.सी.आई.सी.आई. बैंक का मैनेजर होता है साथ के शहर में। दिखने में गगन ऊंचा लंबा 6 फूट का हट्टा-कट्टा लड़का होता है। उसकी पाचवी पेग खुल्ली डैडी और रोबदार कुंदिया मुचा उसकी पूरी शान बना रही थी।

दो-तीन बार सुखजीत और गगन की आँखें आपस में लड़ चुकी होती हैं। इतने में पिंकी सुखजीत के पास आती है और उसे खींचकर उसे डान्स फ्लोर पर ले जाती है। अचानक पिंकी के खींचे जाने की वजह से सुखजीत को कुछ समझ में नहीं आता, इसलिए वो धीरे-धीरे अपनी कमर हिलानी शुरू कर देती है।

दूसरी तरफ लड़कों की टोली खूबसूरत पंजाबी जट्टियों को नाचते हुये देख रही थी। उनके सबके लौड़ों में खूबसूरत जवान जटियों के डान्स देखकर आग लग रही थी। कोई बैठकर नंबर दे रहा था, पर जब सुखजीत आई तो वो नंबर देने वाला बोला- “हाए ओये भाई इसको तो मेरी ओर से पूरे 10 नंबर। देख इसके मस्त चूतर कैसे हिल रहे हैं..."
 
गगन भी पूरी मस्ती से सुखजीत का डान्स देख रहा था। पर सुखजीत को ऐसे धीरे-धीरे डान्स करना नहीं आता है। इसलिए वो पूरे जोश में जोर-जोर से नाच रही थी। सुखजीत ने अपनी शर्म थोड़ी हटाई और खुलकर नाचने लगी। इतने में डी.जे. पर ये वाला गाना शुरू हो गया

“लक्क 28 कूदी दा 47 इंतेजार कूदी दा"

सुखजीत ने ये गाना सुनते ही अपनी कमर पर हाथ रखा और जोर-शोर से अपने चूतर हिलाने शुरू कर दिए। फ्लोर पर अकेली सुखजीत ने आग ही लगा दी थी, क्योंकी सुखजीत को ये करते देखकर रीत और पिंकी ने भी अपनी कमर पर हाथ रखा और जोर-जोर से अपनी गाण्ड को हिलाने लगी।

ये सीन देखने वालों का बुरा हाल हो गया, सुखजीत ने नाचते हुए एक-दो बार गगन की आँखों में देखा। गगन सुखजीत और उसके चूतरों की तरफ देख रहा था। सुखजीत पहले से ही थोड़ी गरम हो रही थी, इसलिए उसे ये सब करने में बहुत मजा आ रहा था।

इतने में गाना चेंज हो जाता है, और गगन और उसके कुछ दोस्त डी.जे. वाले फ्लोर पर आ जाते हैं। और वो भांगरा स्टेप करने लगते है।

वो गाना ये था- “आगे पग्गा पोछनिया वाले रही बचने के नि रंगले दुपट्टे वालिए."

गगन और उसके दोस्त बहुत ही अच्छा डान्स कर रहे थे। गगन बार-बार सुखजीत की बाहर निकली गाण्ड को देख रहा था। जब उसकी नजर सुखजीत से मिलती है, तो सुखजीत शर्माकर अपना मुँह दूसरी तरफ कर लेती है। माहौल धीरे-धीरे गरम हो रहा था।

थोड़ी ही देर गाना चेंज हो जाता है, और इस गाना पर सुखजीत अपनी टाँगें उठा-उठाकर डान्स करने लगती है। अब गगन से और नहीं रुका और वो सुखजीत के ऊपर 100-100 रूपए के नोट वारने लगा।

अपने पीछे इस तरह गगन को पागल हुए देखकर सुखजीत को बहुत मजा आ रहा था। अब सुखजीत को गगन पसंद आने लगता है। सखजीत बार-बार गगन को देखकर शर्मा रही थी।

आसली बात ये थी, की सुखजीत डान्स करते-करते इतनी मस्त हो जाती है की वो भूल जाती है की वो दो बच्चों की माँ और एक शादीशुदा औरत है। साथ में सुखजीत 34 साल की भाभी लग रही थी। जिसका जिश्म सच में बहुत ही मस्त था। गगन भी सारे आशिकों में से एक सुखजीत के मस्त जिश्म का आशिक बना हुआ था। गगन डान्स फ्लोर पर सुखजीत को छेड़ने का एक भी मोका नहीं छोड़ रहा था। बस फिर ऐसे ही काफी देर तक सुखजीत और गगन का नैन मटक्का चला और फिर धीरे से सुखजीत डान्स फ्लोर से चली जाती है। \

फिर वो तीनों बैठ जाती हैं, थोड़ी देर बाद प्रोग्राम खतम हो जाता है। सब बाहर जाने लगते हैं। सुखजीत, रीत और पिंकी भी बाहर आ जाते हैं। पर तभी सुखजीत को याद आता है, की उसका पर्स वहीं चेयर पर रह गया है।

सुखजीत- “ओहो... एक मिनट रुको मैं अपना पर्स चेयर पर भूल आई हूँ..." और सुखजीत भागकर अंदर जाती है, पर उसे उसका पर्स वहां नहीं मिलता। सुखजीत सोचती है- “हाए रब्बा... अब मेरा पर्स कहां चला गया?"

वो इधर-उधर देखती है की वहां आस-पास कोई खास बंदा नहीं था, बस साफ सफाई वाले थे। तभी वो पीछे मुड़ती है तो देखती है, की उसका पर्स गगन अपने हाथ में लिए खड़ा हुआ था। गगन सुखजीत का पर्स सुखजीत को देते हुए बोला- "ये लो जी अपना पर्स..."

सुखजीत अपना पर्स गगन के साथ से लेती है और वहां से चली जाती है।

गगन पीछे से बोला- "थॅंक यू भी नहीं बोलना क्या?"

सुखजीत आटिट्यूड के साथ शर्माकर कुछ नहीं बोली पर दूर होने लगती है।

तभी गगन बोला- “डान्स बहुत अच्छा करते हो आप...”

सुखजीत शर्मा जाती है और बोली- “आप भी अच्छा डान्स कर लेते हो.."

गगन ये सुनकर खुश हो जाता है, और सुखजीत वहां से चली जाती है।
 
सुखजीत अब गगन को पसंद करने लगती है। सुखजीत रीत और पिंकी घर चली जाती है। घर आते ही रीत के फोन पर मलिक का फोन आता है।

रीत- हाय।

मलिक- क्या हाल मेरी जान के?

रीत- आपके बिना कैसा हो सकता है मलिक जी?

मलिक- तो मेरी जान आ जा मेरे पास।

रीत- दिल बहुत करता है, पर आऊँ कैसे? अगर मैं बाहर निकली तो सब घर वाले 100 से ज्यादा सवाल पूछेगें।

मलिक- अच्छा अगर ऐसी बात है, तो मैं आ जाऊँ?

रीत- हीहीहीही... आ जाओ अगर दम है तो?

मलिक- दम तो इतना है, की मैं सबके सामने तेरे होंठों को चूस लूँ।

रीत- शीए शीए गंदे... जब देखो गंदी बातें करते हो।

मलिक- क्या करूँ मेरी जान है ही इतनी सेक्सी। बार-बार उसके होंठों को चूसने का बहुत मन करता है।

रीत शर्मा जाती है और बोली- “अच्छा फिर आओ चूस लो..” रीत ने तो मजाक में कह दिया था, ये सोचकर की मलिक यहाँ नहीं आएगा।

मलिक- जान आज कौन सा सूट डाला हुआ है? प्लीज़्ज़... एक पिक भेजो ना।

रीत उठकर अपनी चूचियों को उठाकर ऊपर करती है, और अपना हल्का सा क्लीवेज दिखाते हुए मिरर में देखकर अपनी एक फोटो क्लिक करके मलिक को भेज देती है।

मलिक पिक देखकर बोला- “हाय्य आए ओये रब्बा... कितनी सुंदर लग रही है तू मैं अभी आ रहा हूँ जान...”

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कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
कड़ी_39

घर पहुँचने के बाद सुखजीत थोड़ा थक चुकी थी, इसलिए वो आते ही बेड पर लंबी लेट जाती है। फिर वो गगन के साथ हुए, नैन मटक्के के बारे में सोचने लगती है। उसकी नजर अचानक उसके पर्स पर पड़ती है। सुखजीत तभी अपने पर्स को खोलती है, उसे अपने पर्स में एक लेटर मिलता है। जिसमें ये लिखा था।

मेरी आँखों में बंद तेरे ही ख्वाब हैं, और दिल मेरे तेरे लिए प्यार बहुत।

यार तू बन गई है जान मेरी। तुझे मिलने को तरसे दिल मेरा।

बता कैसे समझाऊँ इस पागल दिल को? तुझे पाने के लिए ये है बेकरार बड़ा।

और नीचे गगन ने अपना नंबर लिखा हुआ था।

सुखजीत ये पढ़कर मुश्कुरा पड़ती है, और वो ही सीन याद करने लगती है। जब वो एक दूसरे को देखकर डान्स कर रहे थे, और गगन उसके हुश्न पर पैसे वार रहा था। सुखजीत अपने मन में सोचती है, की कोई ना कोई बात तो है इस लड़के में। तभी सुखजीत का फोन रिंग करने लगता है। वो नंबर देखते ही समझ जाती है, की ये नंबर बिटू का है।

"

सुखजीत फोन उठाकर बोली- “हेलो..."

बिटू- क्या कर रही है मस्त भाभी?

सुखजीत भी ठरकी आवाज में बोली- “मैं तो बस अपने देवर को याद कर रही थी..."

बिटू- अच्छा भाभी फिर क्या सोचकर याद कर रही थी मुझे?

सुखजीत उल्टी होकर लेट जाती है, और अपनी टाँगें हिलाकर बड़े मजे में बिटू से बात कर रही थी।

सुखजीत- ये ही सोच रही थी, की मेरा देवर मेरा कितना ध्यान रखता है।

बिटू- देवर तो इतना ध्यान रखेगा, की तेरी सलवार का नाड़ा हर टाइम ढीला ही रहेगा।

सुखजीत- सीयी पागल... अगर ढीला होगा तो मेरी सलवार नीचे गिर जाएगी।

बिटू- तो क्या हो गया भाभी, आज रात तेरी सलवार मोटर पर नीचे ही गिरेगी।

सुखजीत नखरे दिखाकर बोली- “नहीं नहीं, मैं नहीं आऊँगी, मेरा दिल डरता है..."

बिटू- यार के होते हुए डर कैसा?

सुखजीत- हाए यार से तो मेरा दिल डरता है।

बिटू- जब पहली बार हाथ फिरवाया था, तब डर नहीं लगा?

सुखजीत- हाए तेरे हाथ में तो जादू है, जब भी तू अपना हाथ फेरता है। तभी मेरी जान निकाल लेता है।

बिटू- आज मोटर पर तेरी जान ही निकालनी है, और साथ में चरणजीत को भी ले आईओ, मीता बहुत तरस रहा है, उसकी चूत मारने को। आज रात तुम दोनों देवरानी और जेठानी की टाँगें उठा-उठाकर मारेंगे।

सुखजीत- वो नहीं मानेगी, बहुत डरती है वो।

बिट्ट- तू तो किसी को भी मना सकती है भाभी।

सुखजीत- “अच्छा जी ठीक है फिर...” कहकर सुखजीत फोन कट कर देती है।
 
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