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Adultery Nakhara chadhti jawani da (नखरा चढती जवानी दा )

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दूसरी तरफ रीत को मलिक का फोन आता है।

रीत- हेलो।

मलिक- ऐसा कर घर की बैक साइड आ जा, जहाँ पर भैंसें बँधी हुई हैं।

रीत- क्यों?

मलिक- मैंने एक जरूरी बात करनी है।

रीत- गंदे मुझे पता है, क्या बात करनी है तूने?

मलिक- ओहह... मेरे बाबू, सच में बात करनी है।

रीत- ओके, मैं आती हूँ।

मलिक वहां खड़ा होता है, जहा भैंसें होती हैं। उस जगह पर दोपहर को कोई भी नहीं आता था। शादी के काम में सारे बंदे बहुत बिजी थे। थोड़ी देर को रीत उधर आ जाती है। रीत ने लोवर और एक टी-शर्ट डाली हुई थी।

रीत मलिक के पास जाकर बोली- “हाँ जी बोलो क्या बात करनी है.."

मलिक सेक्सी सी स्माइल करके रीत को खींचकर अपने सीने से लगा देता है। मलिक अपना हाथ रीत के चूतरों पर ले जाता है। जैसे ही रीत के चूतरों पर मलिक का हाथ जाता है, वो कसकर मलिक को अपनी बाहों में भर लेती है, और बोली।

रीत- हाए प्लीज़्ज़... मलिक यहाँ कुछ ना करो, घर का मामला है। कोई भी कहीं से भी आ सकता है।

पर मलिक रीत की एक बात नहीं मानता और वो रीत के होंठों पर अपने होंठ रखा देता है। रीत ना ना ही करती रह जाती है। मलिक अपना हाथ रीत की टी-शर्ट में लेकर जाता है। आज रीत ने ब्रा नहीं डाली हुई थी, इसलिए मलिक के हाथों में रीत के नंगी चूचियां आ जाती हैं। जैसे ही मलिक हल्का सा उसकी चूचियां मसलता है, तभी रीत कसकर मलिक को अपनी बाहों में भर लेती है। फिर रीत जोर-जोर से उसके होंठों के सने लगी।

इतने में उन्हें बाल्टी की आवाज सुनाई देती है, वो दोनों एकदम घबरा कर एक दूसरे से अलग हो जाते हैं। पर जब वो दोनों देखते है, की बाल्टी तो भैंस ने हिलाई है। तो रीत ये देखकर जल्दी से वहां से भाग जाती है। जाते जाते वो मलिक को जीभ निकालकर चिढ़ाती देती है।

मलिक भी देखकर हँसते हुए कहता है- “साली आज फिर निकल गई हाथ से...”

इतने में रात होने लगती है, सभी खाना खाकर सोने की तैयारी कर रहे होते है। 11:00 बजे चुके थे, चरणजीत किचेन में बर्तन साफ कर रही थी।

सुखजीत उसके पास आती है और बोलती है- “क्या बात है बहनजी अभी तक सोए नहीं आप?"

चरणजीत- नहीं ये थोड़ा काम है, ये बर्तन साफ करने के बाद देखती हूँ।

सुखजीत- बहनजी आज जो घर में हुआ, उस बात का किसी को पता तो नहीं चला?

चरणजीत- नहीं बहनजी घर में कोई नहीं था।

सुखजीत मोढ़ा मारकर बोली- “चलिए बहनजी?"

चरणजीत हेरनी से बोली- कहां बहनजी?

सुखजीत- मोटर पर बहनजी।

चरणजीत- हाए नहीं बहनजी मैंने नहीं जाना।

***** *****
 
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सुखजीत- “क्यों बहनजी मजा नहीं आया क्या दोपहर को हाथ फिरवा कर, जब उसने अपना हाथ आपके चूतरों पर रखा था...” और सुखजीत अपना हाथ चरणजीत के चूतरों पर रख देती है।

चरणजीत झट से गरम हो जाती है और फिर वो बोलती है- “आहह... नहीं बहनजी अगर किसी को पता चल गया की सरदार बलविंदर की वाइफ मोटर पर जाकर अपनी चूत मरवाती है। हर किसी के आगे अपनी टाँगें उठाये फिरती है। अगर ये सब किसी को पता चल गया तो मेरी और मेरे परिवार की क्या इज्जत रह जाएगी?"

सुखजीत चरणजीत के पीछे आकर उसके पल्ले के अंदर डालकर उसके चूतरों को मसलते हुए बोली- “ओहो... बहनजी आप भी ना फालतू की इतनी टेन्शन लेती रहती हो। वो सरदार चाहे जो मर्जी करे, पर उसकी वाइफ थोड़ा सा मजा भी नहीं ले सकती भला बताओ?"

चरणजीत- आहह... स्स्सीई नहीं बहनजी सारी मुझसे नहीं होगा ये सब।

सुखजीत- अच्छा बहनजी, आप कुछ ना करवाओ। पर मेरे साथ तो चल ही सकती हो ना?

चरणजीत थोड़ा सोचकर बोली- “ठीक है बहनजी, मैं सिर्फ आपके साथ जाऊँगी, पर कुछ करूँगी नहीं मैं..."

सुखजीत चूतर मसलकर खुश होकर बोली- “ठीक है बहनजी.."

पर सुखजीत अपने मन में बोली- “चल साली गश्ती... मीते को देखकर तू अपने अप अपनी सलवार खोलकर उसे अपनी चूत देगी वहां...”

चरणजीत- “हाए बहन प्लीज़्ज़... मेरे चूतरों को ना मसला करो, मुझे दर्द होता है..."

सुखजीत- “क्या करूँ बहनजी इतने सुंदर चूतरों को देखकर रहा नहीं जाता। और बहनजी, अगर मैं मसलू तो आपको दर्द होता है। और अगर मीता आपके चूतर मसले तो आपके मुँह से मजे वाली आहह... निकलती है।

चरणजीत ये सुनकर शर्मा जाती है- “पर जाना कैसे है बहनजी?"

सुखजीत- “बहनजी पैदल ही जाना है, अब सारे सो चुके हैं। चलो अब चलते हैं.."

चरणजीत- बहनजी ध्यान रहे किसी को पता ना चले बस।

सुखजीत- अरे किसी को कुछ पता नहीं चलता, बस आप चुपचाप निकलो।

-

-

फिर सुखजीत और चरणजीत दोनों घर का गेट खोलकर बाहर निकल जाती हैं। थोड़ी ही देर में वो दोनों मोटर पर पहुँच जाती है। मोटर पर एक छोटा सा बल्ब जल रहा था। जिसकी बहुत हल्की सी रोशनी होती है। मोटर के पास पीपल के पेड़ के नीचे मीता और बिटू बैठे दारू पी रहे थे। इतने में मीते को सुखजीत और चरणजीत नजर आती है, तभी वो बोला।

मीता- “भाई बिटू, देख अपना माल आ रहा है।

बिटू पेग खींचकर बोला- “यार अपना माल अपने पास ही आएगा, और कहीं नहीं जाएगा। वैसे इनके बंदों के बस की है नहीं ये दोनों..."

मीता- हाए ओये आज तो चरणजीत भी आई है, आज तो मैं इसकी जमकर मारूँगा।

बिटू- हाँ आज जमकर चोदियो साली चरणजीत को।
 
इतने में सुखजीत उनके पास आकर खड़ी हो जाती है, सुखजीत बिटू को स्माइल करती है। तभी बिटू सुखजीत का हाथ पकड़कर उसे अपनी ओर खींचकर उसे अपनी गोद में बिठा लेता है। सुखजीत भी आपने मोटे और मुलायम चूतर सुखजीत के लण्ड पर रखकर बैठ जाती है। बिटू अपना एक हाथ सुखजीत के पेट पर रखता है

और एक हाथ से अपनी मूछों को ताव देते हुए बोला।

बिटू- भाभी आज अपने जैसा नशीला पेग बना दे।

सुखजीत ये सुनकर शर्मा जाती है, और पेग बनने लगती है। सुखजीत दो पेग बनाती है।

ये देखकर बिटू बोला- “भाभीजी एक अपना और चरणजीत का भी बना लो.."

चरणजीत- नहीं बहनजी मेरा ना बनाओ, मैंने कभी पी नहीं।

सुखजीत- ओहो... बहनजी मैंने भी कभी नहीं पी, चलो आज दोनों ट्राई करते हैं।

मीता चरणजीत की तरफ देखकर बोला- “पी लो ना भाभीजी...”

चरणजीत देखकर हँस पड़ती है और बोलती है- "ठीक है, थोड़ी सी डालना..”

सुखजीत चार पेग बना देती है और सबको एक-एक पकड़ा भी देती है। मीता और बिटू एकदम पेग पी लेते हैं। सुखजीत भी एकदम पी जाती है, पर चरणजीत सोच रही थी की पेग को पियूं या ना पियूं?

सुखजीत- बहनजी पी लो कुछ नहीं होता।

फिर चरणजीत हौसला करके पी जाती है। बिटू को पहले से ही दारू का नशा हो रखा था। वो सुखजीत के होंठों को देखकर बोला- “भाभी देख तेरे होंठों पर अभी भी दारू लगी हुई है..."

सुखजीत बिटू के गले में बाहें डालकर बोली- “कहाँ लगी है?"

बिटू अपने होंठ सुखजीत के होंठों पर रखा देता है, और सुखजीत भी उसका पूरा साथ देती हुई अपने होंठ उससे चूसवाने लगती है।

मीते उन दोनों को सब करते देखकर चरणजीत की तरफ देखता है। चरणजीत अपनी नजरें घुमा लेती है।

बिटू सुखजीत के होंठों में से अपने होंठ बाहर निकाल लेता है। सुखजीत ठरकी आवाज में बोली- “भाईजी अभी कहाँ साफ हए मेरे होंठ, देखो अभी भी कितनी शराब लगी हुई है अभी..."

बिटू ये सुनते ही उसकी चूचियां मसल देता है और उठकर सुखजीत को अपनी गोद में उठाकर उसे अंदर ले जाता है, और सुखजीत को मंजे पर गिरा देता है। फिर उसपर लंबा लेटकर उसके होंठों को चूसने लगता है। सुखजीत पूरी मस्ती में उसको कसकर अपनी बाहों में भर लेती है, और बिटू का वो पूरा साथ देती है।

बिटू सुखजीत की चुन्नी को उतारकर साइड में फेंक देता है, और उसके गले पर किस करते हुए बोला- “भाभी आज क्या कहकर आई है घर पर?"

सुखजीत- “आहह... आहह... मैं कहकर आई हूँ, मैं बिटू ने नीचे लेटने जा रही हूँ..."

बिटू ये सुनकर कस-कस के चूचियां मसलने लगता है। और कहता है- “क्या बात है? हरपाल ने पूछा नहीं की क्यों बिटू ने नीचे लंबी लेटने जा रही है?"

सुखजीत- आss मैंने कहा की मुझे बिटू का लण्ड पूरा मजा देता है।

ये सुनकर दोनों गरम हो जाते हैं।

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कड़ी_41

सुखजीत बिटू को एक धक्का देखकर अपने ऊपर से हटा देती है, और फिर उठकर अपनी कमीज उतारकर साइड में फेंक देती है। फिर सुखजीत अपनी चूचियां अपने आप बिटू के सीने से लगाकर बोली- “आह्ह... स्स्सी... अब इस जटी का तेरे बिना सरता नहीं, आज जमकर चोद दे मझे..."

बिटू ये सुनते ही अपना हाथ सुखजीत की कमर पर ले जाता है। उसकी ब्रा का पीछे से हुक खोलकर, उसकी ब्रा उतारकर साइड में फेंक देता है। बिट्ट मंजे पर लंबा लेता हआ था। वो खड़ा हो जाता है, और सुखजीत उसका सिर पकड़कर अपनी चूचियों में दबा लेती है। बिटू फिर मजे में सुखजीत की चूचियां चूसने लगता है। बिटू सुखजीत की चूचियां चूसते-चूसते उसकी सलवार का नाड़ा खोल देता है।

दूसरी तरफ चरणजीत खड़ी होती है, वो घबरा रही थी। मीता शराब से पूरी तरह से मस्त हो गया था और वो बोला- "किसका इंतजार कर रही है भाभी? उन दोनों ने सुबह से पहले नहीं आना। तू यहाँ आकर मेरे पास बैठ मैंने तुझसे चार बातें करनी हैं..."

चरणजीत- “देख मीते मुझे पता है तू कौन सी चार बातें करना चाहता है। देख मैं उस तरह की औरत नहीं हूँ, प्लीज़्ज़... मुझसे तू दूर ही रह...

मीता चरणजीत का हाथ पकड़कर अपनी तरफ उसको खींचता है। ऐसे खींचने से चरणजीत एकदम मीते के पास आ जाती है, और उसकी चूचियां एकदम मीते की छाती पर ल गईं।

मीता- "हाए मेरी बिल्लो... तू ऐसी औरत नहीं है, तो कैसी औरत है। आज मुझे बता ही दे?"

चरणजीत मीते के ताकतवर जिश्म में फँसकर रह जाती है, वो उससे छूटने की नामुनकीन कोशिश कर रही थी। इतने में मीता चरणजीत के चूतरों पर हाथ फेरते हुए बोला।

मीता- “भाभी उस दिन तो तू बड़े मजे से मुझसे धक्के मरवा रही थी...”

चरणजीत ये सुनकर थोड़ी कमजोर हो जाती है और बोली- “उस दिन मुझसे गलती हो गई थी."

मीता उसके चूतरों को मसलता हुआ बोला- “अच्छा आज सुबह जब मैंने तेरे ही घर में तुझे पकड़ा था तब?"

चरणजीत अब कुछ नहीं कहती, वो बस सिसकारियां भरते हुए बोली- "आss आह्ह... स्स्सीईई..”

मीता समझ जाता है की अब चरणजीत उसके काबू में आ गई है। फिर मीता चरणजीत के दोनों चूतरों को मसलते हुए, मोटर के बाहर ही उसके होंठों को चूसने लगता है। चरणजीत मीता का साथ नहीं दे रही थी, पर उसे मजा बहुत आ रहा था।

मीता चरणजीत के होंठों को अच्छे से चूसकर बोला- “भाभी तुझे नहीं मालूम की मैं कितना बड़ा आशिक हूँ तेरी इस मस्त जवानी का। भाभी बस एक बार तू मुझे अपनी इस जवानी का मजा मुझे चखा दे, उसके बाद तू जो मुझे कहेगी वो ही मैं करने को तैयार हूँ भाभी..”
 
चरणजीत मीते की बातें सुनकर गरम होने लगती है। मीता भी चरणजीत के गालों पर अपने हाथ फेरने लगता है। उसके बाद चरणजीत मीता को अपनी बाहों में भरती है और मीता चरणजीत को अपनी बाहों में भर लेता है। वो दोनों एक दूसरे के होंठ चूसने लगते हैं।

दूसरी तरफ बिटू ने सुखजीत की सलवार का नाड़ा खोलकर उसकी सलवार को उतार दिया था। अब सुखजीत सिर्फ अपनी पैंटी में ही बिट्ट के नीचे मंजे पर लेटी हई थी। बिट्ट ने भी अपना कुर्ता पाजामा उतार दिया था। वो भी सिर्फ अंडरवेर में था, बिटू ने सुखजीत की दोनों टाँगें उठाकर अपनी टांगों में फँसाई हुई थी। वो दोनों एक दूसरे को पागलो की तरह चूस रहे थे।

बिटू नीचे से हाथ डालकर सुखजीत के चूतर उठाकर जोर से थप्पड़ मारकर बोला- “भाभी अगर तेरे पति ने तुझे मेरे नीचे नंगी पड़ी देख लिया, तो भाभी तू क्या करेगी?"

सुखजीत पूरी गरम होकर बोली- “अगर वो हम दोनों को इस हालत में देखेगा, तो मैं अपनी टाँगें उठा-उठाकर तेरा लण्ड लूँगी। और उसे कहूँगी की अब इस जट्टी का इस लण्ड के बिना नहीं सरता...'

सुखजीत के मुँह से ऐसी बातें सुनकर बिटू बहुत गरम हो जाता है, और वो जोर-जोर से सुखजीत के चूतरों पर थप्पड़ मारने लगता है।

सुखजीत- “हाए ओये आराम से मार, तूने क्या मेरी जान निकालनी है.."

बिटू- "भाभी जान, नहीं आज तेरी खुराक निकालनी है मैंने..."

सुखजीत नशीली आवाज में- “हाए फिर निकाल दे ना मेरी खुराक, मेरी चूत का दाना तो मेरी जान ले रहा है."

बिटू ये सुनकर अपने अंडरवेर में से अपना लण्ड बाहर निकालता है, और सुखजीत की पैंटी को साइड करके अपना लण्ड उसकी चूत पर रखकर, एक झटके में अपना पूरा लण्ड उसकी चूत में डाल देता है। लण्ड अंदर जाते ही सुखजीत जी जान निकल गई। वो जोर से चिल्लाते हुए बिटू के जिश्म को कसकर पकड़कर उसे अपनी बाहों में भर लेती है।

दूसरी तरफ बाहर मीते ने चरणजीत के गले से उसकी चुन्नी उतारकर साइड में फेंक दी, और फिर वो उसकी चूचियों को सूट के बाहर निकालकर मसलते हुए बोला- “भाभी अब बता तुझे मजा आ रहा है या नहीं?"

चरणजीत ये सुनकर पानी-पानी हो जाती है, वो शर्माते हुए बोली- “भाईजी जो करना है प्लीज़्ज़... ऊपर-ऊपर से कर लो, अंदर से मैंने कुछ नहीं करने देना..."

तभी मीता कसकर चरणजीत को अपनी बाहों में भर लेता है। फिर वो चरणजीत को उठाकर मोटर वाले रूम में लेकर जा रहा था।

तभी चरणजीत बोली- “भाईजी कहां लेकर जा रहे अब आप मुझे?"

मीता- अपनी भाभी के साथ प्यारे करने के लिए अंदर लेकर जा रहा हूँ भाभी।

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कड़ी_42

मीता चरणजीत को उठाकर अंदर ले जाता है। चरणजीत अंदर जा देखती है, की सुखजीत पूरी बिटू के नीचे लेटी हुई थी। ये देखकर चरणजीत हैरान हो जाती है। बिटू सुखजीत की चूचियों को मसलता हुआ, जोर-जोर से धक्के मार रहा था। सुखजीत भी नीचे से अपनी गाण्ड को उठा-उठाकर बिटू के हर धक्के का जवाब दे रही थी।

इतने में मीता चरणजीत को नीचे उतरता है, और उसे दीवार के साथ लगा देता है।

सुखजीत चरणजीत को देखकर बिटू के नीचे हिलते हुए बोली- “आह्ह... हाए हाए बहनजी भी आ गई हैं...”

बिटू- मीते भाई, आज तू अपने सारे शौक पूरे कर ले, आज साली ये तेरे हाथ में आ ही गई है।

मीता चरणजीत के दोनों हाथ दीवार से लगाकर पकड़ लेता है, और फिर वो उसके होंठों को अपने होंठों में भरकर चूसने लगता है। पर चरणजीत को बहुत शर्म आ रही थी। क्योंकी उसको ये लग रहा था, की वो कैसे अपनी चूत आज बिटू और सुखजीत के सामने मीते को देगी? चरणजीत दीवार से लगी मछली की तरह थप्पड़ रही थी, पर मीते के हाथों से छुट जाना उसके बस का नहीं था।

फिर मीता अपने दोनों हाथ चरणजीत की चूचियों पर रखाता और जोर-जोर से उसके दोनों चूचियों को मसलने लगता है, और बोला- “बस कर भाभी... मुझे अच्छे से पता है, तेरे अंदर भी पूरी आग मचल रही है। नहीं तो तू ऐसे ही ना अपनी गाण्ड जोर-जोर से मटकाकर चलती मेरे सामने...”

चरणजीत भी मीते से अपनी दोनों चूचियां अच्छे से मसलवाने के बाद गरम हो जाती है और वो सिसकारियां भरते हए बोली- "हाए मीते अगर किसी को इस बारे पता चला गया, तो कसम से मेरी

मीता चरणजीत को किस करके बोला- “भाभी तू सुखजीत को देख, कैसे वो पूरी नंगी होकर बिटू को दे रही है। जब उसे किसी बात का डर नहीं है, तो तू क्यों इतना डर रही है?"

चरणजीत- “उसने तो अपने घर शहर चले जाना है, पर मैंने तो यहीं पर रहना है ना इसलिए कह रही हूँ मैं..."

मीता- कुछ नहीं होता भाभी, तू फिकर ना कर। किसी को पता नहीं चलेगा की आज रात तूने यहाँ पर लगाई है।

चरणजीत ये सुनकर अब हिलना बंद कर देती है। मीता को भी अब पता चल जाता है, की अब चरणजीत गरम हो गई है। फिर मीता अपने दोनों हाथ उसकी चूचियों से हटाकर अपने दोनों हाथ उसके चूतरों पर रखकर जोर से उसके चूतर मसल देता है।

चरणजीत- “आहह... हाए ओये परा मर..."

मीता- “हाए भाभी तेरी मोटी गाण्ड देखकर लण्ड खड़ा हो जाता है। सच में आज तो तेरी मैं जमकर मारूँगा..."

चरणजीत अपने मन में सोच रही थी, की उसका सरदार तो उसको महीने-महीने हाथ तक नहीं लगाता। और ये मीता उसकी चूत मारने के लिए, इतना पागल हुआ जा रहा है। ये देखकर चरणजीत अंदर ही अंदर खुश हो जाती है। चरणजीत जानबूझ कर नाटक करते हुए बोली- “हाए मीते, मेरे सरदार को पता चल जाएगा...”

मीता अपना एक हाथ चरणजीत की चूतरों के बीच की लकीर में डालकर बोला- "भाभी उस बहनचोद सरदार को कुछ भी पता नहीं चलेगा। वो रंडियों को चोद चोदकर राज चुका है अब।

चरणजीत- “हाय सीयी... मीते प्लीज़्ज़... रहने दे आह्ह... प्लीज़्ज़.."

मीता- “चुप कर भाभी, आज तो मेरा लण्ड तेरी चूत में जाकर ही मानेगा.” फिर मीता चरणजीत के कुर्ते का पल्ला पकड़कर ऊपर करके उसका कुर्ता उतार देता है।

तभी चरणजीत अपनी दोनों चूचियां अपने हाथों से छुपा लेती है। मीता चरणजीत के दोनों हाथ अपने कंधे पर रखा लेता है। फिर वो थोड़ा नीचे होकर चरणजीत की चूचियों को अपने मुँह में डालकर चूसने लगता है। चरणजीत को इसमें बहुत मजा आने लगता है, और इस वजह से उसके मुँह से आह्ह... आss की आवाजें और जोर से निकालने लगती है।

मीता भी चरणजीत को और गरम करने के लिए उसके निपलों पर एक दाँत से जोर से काट लेता है। इससे चरणजीत के मुँह से जोर से छींक निकलती है।

चरणजीत- “आहह... आह्ह... हाए मर गई... मीते आराम से चूस ले ना...”

पर मीता कहां मानने वाला था, वो और जोर-जोर चरणजीत की चूचियों को दाँत से काटने लगा। जिससे चरणजीत पागल होने लगती है। चरणजीत की चूत बुरी तरह से पानी चोदने लगती है। फिर मीता चरणजीत की चूचियां चूसते-चूसते, उसको मंजे के पास लेकर जाता है। जहाँ सुखजीत बिटू से चुद रही थी। मीता चरणजीत की सलवार का नाड़ा खोल देता है।

चरणजीत- “हाए मीते प्लीज़्ज़... सलवार नहीं नहीं.."

पर मीता चरणजीत की तो एक भी नहीं सुनता। अपने दोनों हाथ डाकरल उसकी पैंटी के साथ उसकी सलवार को भी उतारकर उसकी टांगों के बीच से निकालकर साइड में फेंक देता है। चरणजीत के मुंह से आह निकली और वो मीते से एकदम लिपट जाती है। मीता का लण्ड भी अब पूरा खड़ा हो चुका था। फिर मीता चरणजीत की दोनों टाँगें ऊपर कंधों पर रखा लेता है। फिर मीता एक हाथ चरणजीत के मोटे गोरे चिकने चूतड़ों पर फेरता है। और दूसरे हाथ से अपना पाजामा उतार देता है। फिर उसका मोटा लंबा काला लण्ड बाहर आ जाता है, जिसे देख चरणजीत हैरान हो जाती है। मीता अपना लण्ड चरणजीत की चूत पर रखकर धीरे-धीरे उसकी चूत को रगड़ा कर धक्के मारने लगा। लण्ड को चूत से लगते ही एकदम काँप जाती है और उसके मुँह से सिसकारियां निकालने लगती है।

चरणजीत- आह्ह... “आहह... हाए मीते ऐसे ना कर प्लीज़्ज़... दर्द हो रहा है..."
 
पर मीते को चरणजीत को तड़पाने में बहुत मजा आ रहा था। मीता जोर से अपना लण्ड चरणजीत की चूत पर रगड़ने लगा और बोला- “भाभी तू चुप हो जा, जैसे तेरी मोटी गाण्ड ने लोगों का बुरा हाल किया हुआ है। आज वैसे ही मैं तेरा हाल करूँगा..” कहकर मीते ने अपना 9" इंच लंबा लण्ड एकदम से चरणजीत की चूत में उतार देता है।

लण्ड पूरा अंदर जाते ही चरणजीत के मुँह से चिल्लाने की आवाज निकलती है, और फिर वो मीते से चिपक जाती है। चरणजीत का लण्ड लेकर बुरा हाल हो जाता है, और वो मीते के होंठों को चूसने लगती है। चरणजीत अपनी चूत को कस लेती है, और फिर मीता अपना लण्ड एक बार पूरा बाहर निकल लेता है। और इस बार वो अपनी पूरी ताकत से अपना पूरा लण्ड उसकी चूत में एक जोरदार धक्के से मारता है। इस बार उसका लण्ड सीधा चरणजीत की बच्चेदानी पर जाकर लगता है, जिससे चरणजीत के मुँह से जोर से आवाज निकली।

चरणजीत- “आह्ह... आह्ह... हाए ओये मर गई, तुझे कहा था आराम से कर सच में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है.."

पर मीता अपने पूरे जोश में आ गया था, वो अपनी पूरी ताकत से चरणजीत की चूत को जोर-जोर से चोदने में लगा हुआ था। चरणजीत की हालत मरने वाली हो गई थी, क्योंकी उसके पति सरदार का लण्ड सिर्फ 6" इंच का था। और मीते के बड़े और मोटे लण्ड ने चरणजीत की चूत को फाड़ ही दिया था।

चरणजीत- “हाए मीते बहुत दर्द हो रहा है आह...”

मीता ने चरणजीत की एक टांग नीचे रख दी, और एक टांग पूरी ऊपर उठाकर जोर-जोर से अपना लण्ड उसकी चूत में ठोंकने लगा। इससे चरणजीत की चूत पूरी खुल जाती है, जिस वजह से उसे दर्द कम होता है।

दूसरी तरफ बिटू ने सुखजीत को घोड़ी बना लिया होता है, वो पीछे से सुखजीत की कमर को पकड़कर जोर-जोर से सुखजीत की चूत मार रहा होता है।

करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद चरणजीत मीते को अपनी गाण्ड उठा-उठाकर अपनी चूत दे रही होती है। और फिर वो चिल्लाते हुए बोली- “आहह... मीते मेरा होने वाले है, आहह... आहह... ये ले पी ले मेरे पानी को..."

चरणजीत के मुँह से ये बातें सुनकर मीता अपना लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाल लेता है। और अपनी दोनों टाँगें खोलकर अपना मुँह उसकी चूत पर रखा लेता है। चरणजीत भी मीते के सिर को पकड़कर अपनी टांगों से उसके सिर को दबा देती है। चरणजीत सिसकारियां लेते हए नीचे से अपनी गाण्ड को उठा रही होती है।

सुखजीत घोड़ी बनी हुई थी, इसलिए वो चरणजीत के चेहरा के सेक्सी एक्सप्रेशन देख रही होती है। उन दोनों का चेहरा एक दूसरे के एकदम करीब था, इसलिए सुखजीत चरणजीत के होंठों पर अपने होंठ रख लेती है और वो दोनों एक दूसरे को किसिंग करने लगते हैं।

बिटू पीछे से सुखजीत को चोद रहा होता है, और चरणजीत मीते को अपनी चूत जोर-जोर से चुसवा रही होती है। तभी अचानक चरणजीत की चूत अपना पानी निकल देती है, जिसे मीता चाट-चाट कर पी जाता है। अब तक चरणजीत की दारू उतर जाती है, इसलिए वो मीते को बोलती है।

चरणजीत- "मीते जा मेरे लिए एक पेग बनाकर लेकर आ...”

सुखजीत- भाईजी एक मेरे लिए भी।

मीता उठकर पेग बनाने लगता है।

इतने में सुखजीत चरणजीत को नंगी देखकर पागल हो जाती है। वो अब बिटू के लण्ड को छोड़कर चरणजीत के ऊपर लंबी लेट जाती है और बोलती है- “बहनजी फिर कैसा लगा, बेगाने लण्ड के नीचे लेटना?"

चरणजीत- बहनजी सच में मजा आ गया।

सुखजीत ये सुनकर चरणजीत के होंठों को चूसने लगती है। बिटू सुखजीत को उल्टी लेटे देखकर पीछे से उसकी चूत में लण्ड डाल देता है। सुखजीत चरणजीत के चेहरे पर किसिंग करनी शुरू कर देती है। बिटू भी अब सुखजीत के ऊपर लेटकर धीरे-धीरे धक्के मारने लगता है।

इतने में मीता पेग बनाकर अंदर आ जाता है, वो देखता है की सुखजीत और चरणजीत एक दूसरे को किस कर रही होती हैं। ये देखकर वो मस्त हो जाता है, वो अपना लण्ड उन दोनों के गालों पर रगड़ने लगता है। जैसे ही उन दोनों को लण्ड महसूस होता है, तभी सुखजीत बोली।

सुखजीत- “लो बहनजी आ गया आपका शिकारी..."

चरणजीत- बहनजी अब क्या मेरा क्या आपका, अब तो दोनों का सांझा ही हो गया है।

चरणजीत की ये बात सुनते ही सुखजीत मीते के लण्ड पर जीभ फेर देती है। जिससे मीते की आँखें बंद हो जाती है और मीता बोला- “आहह... आहह... भाभी तू कम नहीं है, आग तो तेरे अंदर भी पूरी भरी हुई है...” ।

सुखजीत एक बार फिर से जीभ उसके लण्ड पर रगड़कर बोली- भाईजी आज तो आग चारों साइड मची हुई है।

फिर सुखजीत ने अपना पेग पकड़ा और पी जाती है, और चरणजीत भी अपना पेग खींच जाती है। वो दोनों पूरा नशे में हो जाती हैं। वो दोनों नशे में रंडियां बन चुकी थी, वो दोनों नशे में चुद रही थी। अब सुखजीत मीते से चुद रही थी, और बिटू चरणजीत को चोद रहा था।

संधू परिवार की बहुयें अब गश्तियां बन चुकी थीं। पूरी रात भर वो खूब जमकर चुदी और सुबह 4:00 बजे अपने अपने कपड़े डालकर सब लोगों से आँख बचाकर वो अपनी दुखती हुई गाण्ड और चूत लेकर अपने घर जा रही थीं।

* * * * * * * * * *
 
कड़ी_43

सारी रात चूत मरवाने के बाद सुखजीत और चरणजीत सुबह 4:00 बजे वहां से निकालकर अपने घर की ओर निकल पड़ी। दोनों जट्टियों ने सारी रात अपनी अच्छे से तसल्ली करवा ली थी। घर आते ही सुखजीत सीधे अपने रूम में चली जाती है, और बेड पर उल्टी लंबी लेट जाती है।

पूरी रात जमकर चूत मरवाने के बाद सुखजीत पूरी तरह से थक चुकी थी। अब उसे उल्टा लेटने के बाद आराम मिल रहा था। इसलिए उसे कब नींद आ गई उसे पता तक नहीं चला। ऐसा ही हाल चरणजीत का भी होता है,

वो भी बेड पर गिरते ही सो जाती है।

सुबह के 8:00 बजे बज जाते हैं, और सुखजीत को मदहोशी में आवाजें सुनाई देती है, जिससे वो उठ गई और पूरे होश में आ गई। अपनी कच्ची पक्की नींद में वो अपनी आँखने खोलती है, तो देखती है की रीत उसे उठाते हुए बोल रही थी।

रीत- “मम्मी प्लीज़्ज़... उठ जाओ, बारात के लिए तैयार भी होना है..."

सुखजीत रीत की बात सुनकर होश में आती है, इतने में ही चरणजीत दरवाजे पर आकर बोली।

चरणजीत- “बहनजी क्या बात है, आपको तो कुछ ज्यादा ही थकावट हो गई है लगता है.."

[ चरणजीत की बात का मतलब अच्छे से समझ जाती है, और उसे देखकर शरमाने लगती है। फिर सुखजीत उठकर तैयार होने लगती है।

इतने में रीत के फोन पर मलिक का फोन आता है, तो वो रूम से बाहर निकलकर छत पर जाकर फोन उठाया।

रीत- हेलो।

मलिक- उठ गई मेरी जान?

रीत- हाँ जानू उठ गई मैं।

मलिक- जान कल मुझे सपना आया, की मैं तेरे ऊपर हूँ और तू मेरे नीचे लेटी हुई है।

रीत- छीः आप तो बहुत ज्यादा गंदे हो सुबह होते ही शुरू हो जाते हो। जाओ अब मैंने नहीं बात करनी आपसे।

मलिक- ओहहो... मेरा बच्चा मुझसे गुस्सा हो गया सारी।

रीत- ठीक है ठीक है।

मलिक- और जान क्या कर रही थी?

रीत- कुछ नहीं बस तैयार होने लगी थी, बारात में जाने के लिए।

मलिक- हाए मेरी जान कब से मेरे लिए तैयार होने लगी?

रीत- “छीः छीः आप फिर से शुरू हो गये। जाओ अब तो मैंने बात ही नहीं करनी...” कहकर रीत नलकी गुस्सा दिखाकर फोन कट कर देती है और नीचे चली जाती है।

9:00 बजे चुके थे और सब बारात के लिए तैयार हो जाते हैं। सुखजीत भी अपने आपको काफी अच्छे से तैयार कर लेती है। सुखजीत ने बेबी पिंक कलर का कट-स्लीव कुर्ता और नीचे पटियाला शाही सलवार डाली हुई थी।

और पीछे बालों का जुड़ा बनाकर अपने चेहरा को मेकप करके अच्छे से चमकाया होता है।

सुखजीत की कमीज पहले से ही टाइट थी, और थोड़ी डीप-नेक वाली थी। इसलिए उसकी दोनों चूचियों की लकीर साफ-साफ दिख रही थी। रात की चुदाई के कारण सुखजीत की आँखों में अभी तक नशा चढ़ा हुआ था। और आज तो सुखजीत अपने दोनों चूतर पहले से ज्यादा बाहर निकालकर मटक-मटक कर चल रही थी।

सुखजीत चरणजीत के पास जाती है, उधर चरणजीत भी आज सिरे का पटोला लग रही थी। उसने आज ग्रीन कलर का सूट डाला हुआ था। चरणजीत के दोनों चूतर भी सुखजीत के चूतरों की तरह आज कुछ ज्यादा ही बड़े लग रहे थे। और बड़े लगें भी क्यों ना रात को दोनों ने एक साथ जो अपनी चूत अपने आशिकों को दी थी।

चरणजीत ने एक साइड से चुन्नी ली हुई थी, इसलिए उसका गला नंगा साफ-साफ नजर आ रहा था। सुखजीत अच्छी भली जा रही थी, पर जैसे ही उसकी आँख चरणजीत से मिलती है, तो दोनों को एक साथ रात वाला कांड याद आ जाता है, और दोनों एक दूसरे को देखकर मुश्कुराने लगती हैं।

दूसरी तरफ रीत और पिंकी भी तैयार होकर अब तक आ जाती हैं। रीत ने आज पूरा आंतक मचाया होता है। रीत ने आज अनारकली वाला सूट डाला होता है, और उसने भी एक साइड चुन्नी ली होती है। रीत को देखकर ऐसा लग रहा था, मानो शराब ग्लास में से गिर गई हो।

अनारकली सूट में रीत के दोनों चूतर एकदम अलग ही नजर आ रहे थे, और उसके दोनों चूचियां ऐसी लग रही थीं, मानो सूट में दो राकेट उड़ने को तैयार बैठे हों। रीत के साथ-साथ पिंकी भी किसी से कम नहीं लग रही थी, पिंकी ने अपनी माँ की तरह ग्रीन कलर का सूट डाला हुआ था, जिसमें उसकी चूचियां बाहर आ रही थी, जिसमें सेक्सी लग रही थी।
 
पिंकी ने नीचे टाइट पैंटी डाली हुई थी, जिसमें उसके दोनों चूतर पूरे बाहर निकले हुए थे। पंजाब की सब जटियां एक साथ हो जाती है, और फिर 10:00 बजे बारात घर से निकल जाती है।

बारात पैलेस के पास पहुँच जाती है। लड़के को घोड़ी पर बिठाया जाता है, और उसके साथ ही बैंड बाजा शुरू हो जाता है। ढोल की आवाज पर सारे लोगों के पैर हरकत करने लगते हैं, और काफी लोग नाचना शुरू भी कर देते

बारात में शराबियों की कमी नहीं होती। बलविंदर और हरपाल शराब के नशे में पूरी तरह से डूबे हुए होते हैं। वो दोनों शराब के नशे में जोर-जोर से ठुमका मार-मारकर नाच रहे थे, उन दोनों के साथ बिटू और मीता भी होते है। ढोल की आवाज के साथ-साथ नोट भी उड़ने शुरू हो जाते हैं।

इतने में हरपाल सुखजीत का हाथ पकड़कर उसे डान्स करने के लिए आगे कर लेता है। सुखजीत पहले से ही नशे में होती है, और फिर वो जोर-जोर से अपनी गाण्ड को हिला-हिलाकर नाचने लगती है। साथ ही सुखजीत चरणजीत को भी अपने साथ खींच लेती है। फिर वो दोनों जट्टियां नशे में जमकर डान्स करने लगती हैं। वो दोनों अपने मोटे-मोटे चतरों और चचियों को जोर-जोर से हिलाकर डान्स कर रही थी।

पिंकी और रीत अपनी-अपनी मम्मी को इस तरह नाचते देखकर पागल हो जाती हैं। फिर वो दोनों भी मैदान में उतर जाती हैं, और अपनी-अपनी मुम्मियों के साथ खूब जोर लगाकर अपनी-अपनी गाण्ड मटकाकर डान्स करने लगती हैं। सड़क पर ये हाल हो गया था, की लोग रास्ते में अपनी कार रोक-रोक कर उन चारों का डान्स देख रहे थे।

ऐसे ही जोरदार डान्स के साथ धीरे-धीरे बारात पैलेस तक आ जाती है। उसके बाद बड़े-बड़े लोगों की आपस में मिलनी होती है। फिर आगे सालियां लड़के को रोकने के लिए खड़ी हो रखी थी। लड़कों वालों की तरफ काफी ज्यादा भीड़ हो जाती है, क्योंकी सारे लोग एक साथ हो जाते हैं। फिर वहां सालियों और जीजू का मजाक शुरू हो जाता है।

इतने में सुखजीत अपने चूतरों पर किसी का हाथ महसूस करती है। वो तभी पीछे मुड़कर देखती है, तो उसके पीछे बिटू खड़ा था। जो उसे देखकर स्माइल कर रहा था।

सुखजीत सिर हिलाकर उसे इशारे में कहती है- “प्लीज़्ज़... ऐसा वैसा यहाँ ना करो प्लीज़्ज़..."

पर बिटू उसकी कहां सुनने वाला था, बिटू को अच्छे से पता था की इतनी भीड़ में किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। इसलिए वो सुखजीत के कुर्ते के पल्ले के अंदर हाथ डालकर उसके चूतर अच्छे से मसल देता है। वो सुखजीत के चूतरों की लाइन में उंगलियां डालने की सोचता है। पर सुखजीत ने आज टाइट पैंटी डाली हुई थी, इसलिए उसकी उंगलियां अंदर नहीं जा रही थीं।

सुखजीत बिटू की हरकत से पूरी गरम हो रही थी। वो अपने होंठों को अपने होंठों में दबाकर बहुत मुश्किल से अपने आप पर कंट्रोल कर रही थी। दर्शल बात तो ये थी की सुखजीत ने रात को बिटू से इतनी ज्यादा मरवा ली थी की अब उसके एक टच से ही वो रात वाली चुदाई के मजे में जा पहुंची थी। फिर बारात का स्वागत होता है और सब लोग आगे चलने लगते हैं। तभी सुखजीत अपनी दुनियां में वापिस आती है, और सुखजीत बिटू का हाथ पकड़कर जल्दी से पीछे से निकलती है, और वो और लोगों के साथ वो भी अंदर जाने लगती है। फिर वहां सब खाने पीने लगते हैं।

थोड़ी देर बाद सब लोग लावा फेरे के लिए चले जाते हैं। फिर जब वो बाद में वापिस आते हैं, तब तक पैलेस में रणबीर और मलिक भी आ जाते हैं। तभी सुखजीत की नजर गगन के ऊपर पड़ी, जो उसे ही कभी का देख रहा था। गगन उसको देखते हुए हल्की-हल्की स्माइल पास भी करता है।

पर सुखजीत गगन को कोई रेस्पान्स नहीं देती है। क्योंकी अब सुखजीत को गगन में कोई इंटेरेस्ट नहीं रहा था, क्योंकी अब बिटू सुखजीत को काफी अच्छे से चोद-चोदकर उसकी तसल्ली करवा रहा था। अब सुखजीत किसी और नये मर्द की तरफ जाने की सोच भी नहीं सकती थी। इसलिए सुखजीत ने गगन से अपना मुँह फेर लिया और वो आगे की ओर निकल पड़ी।

दूसरी तरफ मलिक ने जब दूर से रीत को देखा तो उसने स्माइल करते हुए, इशारे में उसे कह दिया की आज वो बहुत अच्छी लग रही है। रीत ने भी स्माइल में उसे बैंकयू कह दिया। पिंकी भी अपने यार से पूरी इशारे में बात कर रही थी। तभी शगुन का टाइम हो गया और सारे बारी-बारी से फोटो खिंचवा रहे थे। मोका देखकर मलिक रीत को फोन करता है।

रीत- हेलो।

मलिक- जान पैलेस के बाथरूम की साइड आ जा, मैं तेरा इंतेजार कर रहा हूँ।

रीत- “मलिक मम्मी मुझे कभी भी फोटो के लिए बुला सकती हैं, प्लीज़्ज़... अभी नहीं."

मलिक- "आ जा ना जान प्लीज़्ज़... मना मत कर प्लीज़्ज़..."

रीत मान जाती है और बोली- “ठीक है आती हूँ..”

रीत देखती है की पिंकी अपनी सहेलियों के साथ बिजी है। इसलिए वो उधर से अकेली बाथरूम की तरफ निकल जाती है। रीत देखती है, की बाथरूम की साइड काफी अंधेरा है। रीत को कुछ भी दिखाई नहीं देता, तभी रीत फोन निकालती है मलिक को बुलाने के लिए। पर तभी पीछे से मलिक उसे पकड़कर अपनी ओर खींच लेता है।

रीत- “आह्ह... ओहह गंदे डरा दिया मुझे...”

मलिक कसकर रीत को बाहों में भरकर बोला- “हाए मेरा बच्चा डर गया?"

रीत- और नहीं तो क्या, चलो अब छोड़ो मुझे और बताओ क्या बात करनी है?

मलिक- “जान आज तू बहुत सुंदर लग रही है..” कहकर मलिक रीत के होंठों में होंठ डाल देता है।

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रीत भी मलिक को अपनी बाहों में भरकर उसका पूरा साथ देने लगती है। किसिंग करते हुए मलिक रीत की कमर पर हाथ फेरते हुए, उसके चूतरों पर आ जाता है, और वो उसके चूतरों को मसलता हुआ उसे किस करता है। रीत भी गरम होकर मलिक के होंठों को अच्छे से चूसने लगती है।

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घर जाने का टाइम आ जाता है, और सारे गाँव वाले अपनी-अपनी कार में बैठ जाते हैं। अब डोली वाली कार में जगह नहीं होती। क्योंकी उस कार में लड़का और एक लड़की और बलविंदर, चरणजीत और पिंकी और रीत थे।

सुखजीत के लिए अब हरपाल की कार ही बची थी। जिसमें गाँव के सरपंच, मीता, हरपाल, और बिटू बैठे हुए थे। हरपाल आज दारू पीकर अच्छे से नशे में होता है। हरपाल के साथ उसकी अगली सीट पर सरपंच बेहोश बैठा हुआ था। मीता कार चला रहा होता है। जब वो सुखजीत को देखता है तो वो थोड़ा सा हँसने लगता है। सुखजीत भी उसको देखकर हँसने लगती है। कार में पीछे वाली सीट पर हरपाल बैठा होता है, सुखजीत भी उसके पास जाकर बैठ जाती है।

सुखजीत को कार में शराब की स्मेल आ रही होती है, इसलिए वो बोली।

सुखजीत- “थोड़ी कम पिया करो..."

हरपाल- “ओ हेलो मैं कम पी लूँ... मेरे भतीजे की शादी है और मैं कम पी लूँ, भला ऐसा कैसे हो सकता है?"

सुखजीत ये सुनकर चुप हो जाती है, क्योंकी हरपाल आज ओवर हो रखा था। इतने में बिटू आकर कार में बैठ जाता है, उसके हाथ में शराब की बोतल होती है। बिटू को देखकर सुखजीत की आँखें चमकने लगती हैं, और फिर वो अंदर आकर बैठ जाता है। बिटू के चूतड़ सुखजीत के चूतड़ से एकदम चिपके हुए थे, दोनों एक दूसरे को देखकर अपनी आँखें नीचे कर लेते हैं।

मीता बिटू की तरफ देखकर इशारा करता है। मीता कार स्टार्ट करके घर की तरफ चल पड़ता है। घर तक जाने में अभी पूरा एक घंटा लगने वाला था, इसलिए हरपाल बिटू को बोला- “बिटू यार चल एक पेग बना दे यार..."

बिटू- नहीं भाईजी, आज आप पहले ही ओवर हो चुके हो। अब और नहीं पीनी।

हरपाल- ओह्ह... तू ज्यादा ना बोल चुपचाप बना पेग, आज मेरे भतीजे की शादी है।

बिटू पेग बनाकर हरपाल को देता है, और हरपाल झट से पूरा पेग खींच लेता है। सुखजीत चुपचाप बैठ होती है।

हरपाल बार-बार मुँह बाहर निकालकर बाहर देख रहा होता है। इस मोके का फायदा उठाकर बिटू सुखजीत के चूतड़ों पर हाथ रखा देता है।

सुखजीत गुस्से में उसका हाथ पकड़कर साइड करती है, और वो इशारे में कहती है- “मेरा सरदार साथ बैठा है.."

बिटू के दिमाग में एक आइडिया आता है, और वो तभी एक मोटा सा पेग बनाकर हरपाल को दे देता है। और हरपाल वो भी पी जाता है। उस पेग को पीते ही हरपाल पूरा हिल जाता है, और वो तभी बेहोश हो जाता है। बिटू अब फिर से अपना हाथ सुखजीत के चूतड़ों पर रखता है, और सुखजीत उसका हाथ साइड में करके फिर से इशारा करती है।

बिट्ट- “भाभी अब तेरा पति सो गया है, अब ना मत कर अपने देवर को प्लीज़्ज़..” फिर बिट्ट अपना हाथ उसके पल्ले के अंदर डाल लेता है, और सीधा चूत के पास लेकर चला जाता है।
 
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