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Adultery Nakhara chadhti jawani da (नखरा चढती जवानी दा )

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कड़ी_68

सतबीर के फ्री होने के बाद वो सुखजीत के नंगे जिश्म से अलग हो जाता है। और सतबीर अपने कपड़े डालकर बाहर आ जाता है। बाहर आता देखकर रंधावा सतबीर की तरफ देखते हुए बोला।

रंधावा- “हाँ भाई, फिर कैसी लगी जट्टी?"

सतबीर- भाई आग है पूरी आग, सच में बहुत ही ज्यादा मस्त है।

रंधावा अपनी मूछों को ताव देते हुए बोला- “चल अब मैं भी हाथ सेंक कर आता हूँ, इस आग में..."

रंधावा अंदर चला जाता है, अंदर सुखजीत पूरी नंगी लंबी लेटी होती है। सुखजीत का नंगा जिश्म देखकर रंधावा मस्त हो जाता है। सुखजीत रंधावा को देखकर हँसती है। इस टाइम सुखजीत की हालत एक बाजार की गश्ती जैसी थी, जिसके साथ दो बंदे पूरी रात चोदने में लगे हुए थे। सुखजीत भी अब पूरी खुली होती है, वो रंधावा के सामने नंगी लेटी हुई, जरा सी भी शर्म नहीं करती।

रंधावा अपनी शर्ट के बटन खोलता है, और अपनी पैंट को ढीली करके वो सुखजीत के ऊपर आ जाता है। फिर वो उसके होंठों को चूसने लगता है। सुखजीत भी गरमी की वजह से उसका पूरा साथ दे रही होती है। सुखजीत की चूत अब फिर से अपना पानी निकालने लगती है।

रंधावा सुखजीत की चूचियों पर दाँत मारकर बोला- "आज अच्छे से एहसान उतार अपने पति की तरक्की का..."

सुखजीत- “आहह... आss एहसान उतारने के लिए तो आई हूँ मैं भाईजी। जो भी आपने करना है कर लो, ये जट्टी आपके नीचे लेटी हुई है...” कहकर सुखजीत रंधावा से लिपट जाती है।

रंधावा का लण्ड भी अब पूरा खड़ा हो जाता है। रंधावा अब बेड के किनारे पर जाकर खड़ा हो जाता है, और सुखजीत की दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख लेता है। रंधावा ने हाथ से सुखजीत के चूतड़ों को पकड़ा हुआ था,

और दूसरे हाथ से अपनी पैंट को उतार देता है। पैंट उतारकर वो अपना खड़ा हुआ लण्ड बाहर निकाल लेता है।

सुखजीत रंधावा के लंबे लण्ड को देखकर हैरान हो जाती है। क्योंकी उसने आज से पहले इतना बड़ा लण्ड कभी भी नहीं लिया था। फिर रंधावा सुखजीत की चूत में अपना लण्ड रगड़ने लगता है, और अचानक ही वो अपना पूरा 9” इंच का लण्ड सुखजीत की चूत में उतार देता है। सुखजीत के मुँह से हल्की सी चीख निकलती है, और वो अपने दोनों हाथों से बेड की चादर को कस लेती है।

रंधावा अभी भी धीरे-धीरे सुखजीत को चोद रहा होता है। पर तभी रंधावा सुखजीत को कसकर पकड़ता है, और अपनी पूरी ताकत लगाकर वो एक जोरदार धक्का मारता है। जिससे रंधावा का लण्ड अबकी बार सीधा सुखजीत की बच्चेदानी पर जाकर लगता है, जिससे सुखजीत चिल्लाते हुए बोली।

सुखजीत- “आहह... आहह... हाई मर गई मैं..."

पर रंधावा सुखजीत पर जरा भी दया नहीं करता, वो पूरे जोश से सुखजीत की चूत को चोदने में लगा हुआ था। सुखजीत को भी अब रंधावा के लण्ड से चुदने का मजा आ रहा था। इसलिए वो रंधावा के हर धक्के का जवाब अपनी गाण्ड को हिलाकर दे रही थी। इसी तरह करीब 20 मिनट लगातार चुदाई के बाद अपना लण्ड बाहर निकाल लेता है।

फिर वो सुखजीत का हाथ पकड़कर उसे खींचकर खड़ा कर देता है। सुखजीत इससे पहले कुछ समझ पाती, वो सुखजीत को दीवार से लगा देता है। सुखजीत का मुँह दीवार की साइड होता है, और उसके दोनों हाथ भी दीवार से लगे हुए होते हैं।

सुखजीत- भाईजी ये आप क्या कर रहे हो?

रंधावा कुछ नहीं बोलता, और अपनी दो उंगलियां सुखजीत की चूत में डालकर अपनी उंगलियों को गीली कर देता है। और फिर सुखजीत के चूतरों पर एक जोरदार थप्पड़ मारकर, रंधावा अपनी गीली उंगलियां सुखजीत की गाण्ड की छेद पर रगड़ने लगता है। रंधावा सुखजीत की गाण्ड के छेद को गीला कर रहा होता है। सुखजीत को समझते देर नहीं लगती, की अब आगे उसके साथ क्या होने वाला है।

कुछ पलो में सुखजीत की गाण्ड के छेद गीला हो जाता है। फिर रंधावा सुखजीत के चूतरों को खोलकर अपने लण्ड को उसकी गाण्ड के छेद पर लगाता है। इससे सुखजीत एकदम से चौंक जाती है, और वो पीछे होने लगती है। पर रंधावा उसे कसकर पकड़े हुए थे, जिस वजह से वो चाहकर भी हिल नहीं पा रही थी। अब सुखजीत की गाण्ड में रंधावा के लण्ड का टोपा फँस चुका था।

सुखजीत दर्द से तड़पते हुए बोली- “हाई मर गई मैं प्लीज़्ज़... भाईजी ऐसा ना करो..”

रंधावा थोड़ा सा लण्ड अंदर डालकर सुखजीत के चूतरों पर थप्पड़ मारते हुए बोला- “चुप कर बहनचोद कुट्टी साली गश्ती कहीं की। बहन की लौड़ी तू बड़ा अपनी गाण्ड हिला-हिलाकर चलती थी ना। अब देख आज तेरी गाण्ड मैं कैसे फाड़ता हूँ... और रंधावा किसी को इतनी आसानी से छोड़ता नहीं समझी...”

इतने कहते ही रंधावा अपने लण्ड पर पूरा जोर डालता है, और फिर उसका लण्ड सुखजीत की टाइट गाण्ड को चीरता हुआ पूरा अंदर चला जाता है।

सुखजीत के साँस रुक जाती है और वो गुस्से में बोली- “हाए भाईजी... मैं मर गई आह्ह... आss निकालो प्लीज़्ज़... प्लीज़्ज़... वर्ना मैं इस दर्द से ही मर जाऊँगी.."

सुखजीत घोड़ी बनने की पूरी कोशिश करती है, पर रंधावा उसे जरा सा भी हिलने नहीं देता। और ऊपर से वो अपना पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में से निकालकर एक बार फिर से बहुत जोर से धक्का मारता है। और उसके जोरदार धक्के से फिर से उसका

सका लण्ड सुखजीत की गाण्ड को फड़ता हुआ अंदर चला जाता है।

सुखजीत की हालत ऐसी हो जाती है, जैसे किसी मछली को पानी से निकाल दिया हो। सुखजीत के मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी, और उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। पर रंधावा पर इस बात का कोई असर नहीं पड़ रहा था। वो बिना रुके हुए पूरी ताकत से अपना लण्ड सुखजीत की गाण्ड में अंदर-बाहर कर रहा था।

सुखजीत बस बेहोश होने वाली थी। रंधावा लगातार सुखजीत की गाण्ड को खड़ी करके चोदे जा रहा था। करीब 30 मिनट की चुदाई के बाद रंधावा अपने लण्ड का सारा पानी सुखजीत की गाण्ड के अंदर ही निकाल देता है। रंधावा अब सुखजीत को छोड़ देता है।

सुखजीत एक बार तो नीचे जमीन पर गिरने वाली होती है। पर वो अपने आपको संभालते हुए बेड पर गिर जाती है। सुखजीत की गाण्ड में से रंधावा के लण्ड का पानी निकल रहा था। फिर रंधावा बाहर निकल जाता है।

सतबीर ने रंधावा को बाहर आते देखके बोला- “भाई पूरा एक घंटा तू अंदर रहा क्या बात है?"

रंधावा- भाई तुझे पता ही है रंधावा गाण्ड मारने का शौकीन है। आज तक मैं बिना गाण्ड मारे रह सका हूँ।

सतबीर- हाए जरा मैं भी देखकर आऊँ, कैसी फटी पड़ी हुई है गाण्ड साली की।

सतबीर ये कहकर अंदर चला जाता है। सुखजीत बेड पर बिना कोई सुध बुध के उल्टी लेटी हुई थी। सुखजीत के खड़े चूतर देखकर सतबीर का लण्ड एक बार फिर से खड़ा हो जाता है। सतबीर देर ना करते हुए अपने सारे कपड़े निकालकर अपना लण्ड बाहर निकालता है।

सतबीर सुखजीत के ऊपर लेट जाता है, और अपना लण्ड उसकी गाण्ड पर सेट करके वो भी उसकी गाण्ड को मारने लगता है। सुखजीत को कुछ भी पता नहीं होता, की उसके साथ अब क्या हो रहा है? वो वैसे ही बेसुध होकर अपनी गाण्ड की चुदाई करवा रही थी। थोड़ी देर बाद सतबीर अपने लण्ड का सारा पानी सुखजीत की कमर ऊपर निकल देता है।

ऐसे ही सुबह के 4:00 बजे तक रंधावा और सतबीर बेहोश हुई सुखजीत को खूब अच्छे से चोदते हैं। वो कभी उसका मुँह तो कभी उसकी चूत, तो कभी गाण्ड में लण्ड डालकर सुखजीत को काफी जमकर चोदते हैं।

4:00 बजे सुखजीत को होश आता है, और उसकी नींद खुलती है। वो देखती है की वो बेड पर पूरी नंगी लेटी हुई थी। उसके दोनों ओर रंधावा और सतबीर नंगे लेटे हुए थे। उसके पूरे जिश्म पर लण्ड का पानी-पानी हो रखा था। तभी सुखजीत की नजर घड़ी पर पड़ती है। वो टाइम देखकर एकदम उठने वाली होती है, पर उसकी फटी हुई गाण्ड का दर्द उसे उठने नहीं देता।

फिर सुखजीत काफी हिम्मत करके उठती है, और वो अपने कपड़े ढूँढकर बहुत मुश्किल से डालती है। फिर

सुखजीत सीधा बाहर जाकर कार के पास जाती है, कार में वो भईया सोया हुआ होता है।

सुखजीत उसे उठाते हुए बोली- “ओये उठ अब..."

भईया- क्या है सोने दो मुझे।

सुखजीत- “ओ कंजर उठ.. मुझे घर छोड़कर आ अभी..."

फिर वो एकदम से उठता है और सुखजीत को देखकर हँसते हुए बोला- “बीबी जी काम हो गया आपका पूरा?"

सुखजीत- तू चुप कर, और मुझे घर छोड़कर आ।

फिर वो भईया कार स्टार्ट करता है, और सुखजीत कार में बैठ जाती है। करीब 30 मिनट में भईया सुखजीत को घर के बाहर उतार देता है। सुखजीत कार का दरवाजा खोलने ही लगती है। तभी वो भईया सुखजीत की चूचियों को मसल देता है, और अपने दूसरे हाथ से चूत और चूतड़ों को भी मसल देता है। सुखजीत पर एकदम हुए अचानक हमले से वो विचल जाती है। और वो एकदम भईया को धक्का मारकर बोली।
 
सुखजीत- “ये... दूर हो कंजर..” और सुखजीत कार से बाहर निकल जाती है।

सुखजीत अपने चूतर आज कुछ ज्यादा ही बाहर निकालकर चल रही थी। क्योंकी उसकी गाण्ड अभी तक बहुत दर्द कर रही थी।

भईया ये देखकर कार का शीशा खोलकर बोला- “वाह क्या बात है बीबी जी, गाण्ड मरवा-मरवा कर बाहर निकल लिए आपने तो?"

सुखजीत ये सुनकर उसकी तरफ देखकर गुस्से बोली- “ओ कुते चल निकल यहाँ से...” फिर सुखजीत धीरे से गेट खोलकर घर के अंदर जाती है।

उससे चला भी नहीं जा रहा था, वो सबको देखती है की सब वैसे ही सोए हुए थे। फिर वो अपने रूम में आकर अपने कपड़े चेंज करती है। और फिर वो बेड पर उल्टी लेटकर अपनी रात की चुदाई के बारे में सोचते हुए सो जाती है।

सुबह के 8:00 बजे जाते है, आज रीत का एग्जाम होता है। इसलिए वो टाइम से तैयार होकर एग्जाम देने के लिए घर से निकल जाती है। हरपाल भी तैयार हो जाता है। जब वो सुखजीत को नाश्ता के लिए उठाता है। तो सुखजीत अपनी तबीयत खराब होने का बहाना लगा देती है। और वो शीला को कहकर हरपाल का नाश्ता तैयार करवा देती है।

सोनू के दिमाग में दीप की भाभी कंवल अभी तक असर कर रही होती है। सोनू कालेज के बहाने से दीप के घर की ओर निकल जाता है। थोड़ी ही देर में सोनू दी के घर पहुँच जाता है। वहां उसके घर में पूरी तैयारियां चल रही होती हैं। आज दीप के घर अखंडपाठ रखा हुआ था। सोनू जाकर दीप के मम्मी पापा को मिलता है, वो उनसे दीप के बारे में पूछता है।

पर दीप कुछ सामान लेने के लिए बाहर गया हुआ था। सोनू बाहर जाकर बैठ जाता है, और दीप के आने का इंतेजार करने लगता है। सोनू की नजर बार-बार ऊपर वाले रूम पर जा रही थी। जहाँ पर कंवल का रूम होता है। सोनू की आँखें कंवल को ढूँढ़ रही थी। इतने में दीप की मम्मी सोनू को बोलती है।

मम्मी - “बेटा ये लाउड स्पीकर की तार जरा ऊपर लगाकर आ जा..."

सोनू ये सुनकर खुश हो जाता है, क्योंकी ऐसे उसका काम आसान हो गया था कंवल के दर्शन करने का। सोन् ऊपर जाता है, पर कंवल के रूम का दरवाजा बंद हो जाता है। पर साइड वाली खिड़की खुली होती है। जब सोनू अंदर देखता है, तो कंवल शीशे के सामने खड़ी होकर तैयार हो रही थी।

सोनू की आँखें कंवल की मोटी-मोटी चूचियों पर जाती हैं। उसकी चूचियां बाहर निकलने वाली हो रही थीं। कंवल ने चुन्नी नहीं ली हुई थी। इसलिए उसकी ब्रा का डिजाइन भी कमीज के ऊपर से ही नजर आ रहा था। सोनू का लण्ड अब झटके मारने लगता है। अचानक से कंवल सोनू को देख लेती है। आँखों से आँखें टकराती है, सोनू मुश्कुराते हुए आँख मार देता है। कंवल भी अपने गुलाबी होंठ जो आज लिपस्टिक से और भी सेक्सी लग रहे थे, पर जीभ फेर कर शर्मा जाती है। और अपनी चुन्नी लेकर अपना दरवाजा खोलकर वहां से निकल जाती है।

जाती-जाती कंवल जब सीढ़ियों से नीचे उतर रही होती है, तो सोनू उसके हिलते चूतरों को देखकर अपना लण्ड मसलने लगता है। कंवल के जाने के बाद सोन छत पर लाउड स्पीकर फिट कर देता है। और तभी दीप घर वापिस आ जाता है। दीप सोनू को देखकर खुश हो जाता है।

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दीप- क्या बात सोनू, रिंकू कहां है?

सोनू- पता नहीं यार, मैं आज कालेज नहीं गया, मैं सीधा यहीं पर आ गया।

दीप- चल अच्छी बात है अगर आ गया है तो। अब आज तू यहीं पर रहियी आज अखंडपाठ है। मैं तेरे घर पर बात कर लूँगा।

सोनू किचेन की खिड़की में से दिखती कंवल को देखकर बोला- "ठीक है भाई...”

फिर वो दोनों घर के काम करने लगते हैं। सोन कंवल को देखने का कोई भी मोका नहीं छोड़ता। कंवल भी

सबकी आँखों से बचते हुए सोनू के साथ नैन मटक्का कर रही होती है।

* * * * * * * * * *
 
कड़ी_69 दूसरी तरफ रीत स्कूल पहुँच जाती है, और अपनी क्लास की लड़कियों से मिलती है। वहीं पास में ज्योति भी अपना मुँह लटका कर खड़ी हुई थी। रीत अपने मन में ज्योति की हालत देखकर अपनी जीत पर गर्व करती है। फिर रीत उसके पास जाकर उससे मिलती है।

रीत- “और ज्योति क्या हाल है, तैयारी है फिर एग्जाम की?"

ज्योति- ठीक है बस और तैयारी भी है।

इतने में हरी आ जाता है, ज्योति हरी की तरफ देखती है। पर हरी उसकी तरफ देखकर अपना मुंह दूसरी तरफ करके थूक देता है। ये देखकर ज्योति आँखें नीचे करती है, पर हरी रीत की तरफ देखकर उसे पानी वाली टंकी की तरफ इशारा करता है। रीत ज्योति के साथ होने के कारण उसे कुछ नहीं कहती।

रीत बस हल्की सी स्माइल करती और आँखों से उसे हाँ का इशारा कर देती है। फिर एग्जाम 10:00 बजे शुरू होना था, और अभी 9:30 ही हुए थे, एग्जाम शुरू होने में अभी टाइम था। सब लड़कियां बुक्स निकालकर पढ़ रही होती हैं। ज्योति भी बुक निकालकर पढ़ रही होती है।

रीत- मैं अभी आती हूँ बाथरूम करके।

ज्योति- ठीक है।

फिर रीत पानी वाली टंकी की तरफ निकल जाती है। सुबह होने के कारण वहाँ कोई भी नहीं होता। रीत जाकर देखती है की हरी वहां खड़ा उसका इंतेजार कर रहा था।

हरी रीत को आते देखते ही उसे अपनी बाहों में भर लेता है, और रीत की चूचियां अपने सीने के साथ दबा देता है। आज हरी रीत को काफी टाइम बाद मिला होता है। इसलिए वो रीत को दीवार से लगाकर उसके होंठ चूसकर बोला।

हरी- “क्या हाल है मेरी जान के?"

रीत की बाजू हरी के गले में होती है और वो फिर बोलती है- “देखो लो क्या हाल है मेरे, आपके सामने ही हूँ जैसी भी हूँ..”

हरी- “बस मेरे सामने ही रह मेरी जान, अब तेरे बिना मेरा सरता नहीं.” कहते हये हरी अपने दोनों हाथ रीत की कसी हुई चूचियों पर लेकर कमीज के ऊपर से ही उसकी चूचियां मसलने लगता है। और साथ ही उसके होंठों को चूसने लगता है।

रीत भी पूरी गरम होकर उसका साथ दे रही होती है। तभी वो धक्का देकर हरी को दीवार से लगाकर बोलती है “मेरा भी तेरे बिना नहीं सरता मेरी जान, तभी मैंने तुझे इस चुडैल से छूटकारा दिलाया है.."

हरी रीत के चूतरों को कसकर पकड़कर दबा देता है और रीत अपनी एंड़ियां उठा लेती है।

हरी बोला- “तूने किससे मुझे छूटकारा दिला दिया है मेरी जान?"

रीत हरी की बाहों में मचलती है और उसके लण्ड को मसलते हुए उसके होंठों को चूसकर बोली- मैंने तुझे जानबूझ कर उस दिन बुलाया था, ताकी तेरे सामने सारी सचाई आ सके उस कुतिया की..."

हरी ये सुनकर हैरान हो जाता है। वो सोचता है की रीत ने उसे बचाने के लिए ये सब किया था। पर उसे क्या पता था, की ये सब तो रीत ने ज्योति से अपना बदला लेने के लिए किया था।

फिर वो दोनों एक दूसरे को जमकर चूसते और चूमते हैं। इतने में बेल बज जाती है, और एग्जाम शुरू हो जाता है। दोनों भागकर एग्जाम देने के लिए जाते हैं। एग्जाम खतम होने वाला होता है, सारे एग्जाम देकर जा चुके

थे।

रीत थोड़ी लेट आई थी, इसलिए क्लास रूम में एक-दो लड़कियां और उसके साथ बैठी हुई थी। ज्योति भी एग्जाम देकर अपने घर की ओर निकल जाती है। स्कल सारा खाली हो जाता है। रीत जब क्लास में से निकलती है तभी एक क्लासरूम में से एक हाथ बाहर आता है, और रीत को पकड़कर वो क्लास रूम के अंदर खींच लेता है। रीत सीधी उसके सीने पर जाकर लगती है, रीत जब उसे देखती है तो वो हरी होता है।

रीत- हट पागल... तूने तो मुझे डरा ही दिया था।

हरी रीत के दोनों चूचियां मसलते हुए बोला- “क्या करूँ जान, सारे एग्जाम टाइम मुझे तो सिर्फ तेरा ही खयाल

आ रहा था..."

रीत हरी के हाथों में हाथ रखते हुए बोली- “आह्ह... स्स्सीई... हरी इतना खयाल करना भी ठीक नहीं है, काम खराब हो सकता है..."

हरी- हाई आज तो काम खराब हुआ ही पड़ा है यार।

हरी रीत के होंठों पर टूट पड़ता है, और बार-बार रीत के होंठों को चूसने लगता है। हरी अपने हाथों से रीत की चूचियों को पकड़कर निचोड़ देता है। रीत भी समझ जाती है, की आज हरी कुछ करके ही मानेगा। इतने दिनों से रीत के अंदर भी आग मचल रही होती है।

रीत अपने होंठ हरी के होंठों में से निकालकर बोली- “आहह... हाए कोई बस आ ना जाए..."

हरी जोर से चूचियां मसलकर बोला- “कोई नहीं आता मेरी जान, आज मैंने ज्योति से बचाने का एहसान उतारना

रीत समझ जाती है, पर आज उसके दिल में भी कुछ करने की आग मची हुई ही, मस्त होकर बोली- “अच्छा फिर आज चुका ही दे सारे एहसान..."

ये कहते ही रीत हरी की जिप खोलकर अपना हाथ अंदर डाल देती है, और अंडरवेर को साइड में करके उसका लण्ड बाहर निकल लेती है। हरी का लण्ड पूरा खड़ा हुआ होता है। गरम-गरम लण्ड को हाथ में पकड़कर रीत पूरी गरम हो जाती है, और वो लण्ड को हाथ से मसलते हुए हरी के होंठों को चूसने लगती है।

हरी भी रीत के चूतरों को जोर-जोर से मसलने लगता है। अब रीत इतनी गरम हो जाती है की अब उससे और बर्दाश्त नहीं होता, वो अपने चूतर हरी की तरफ करके अपने दोनों हाथ बेंच पर रखकर, हरी के आगे घोड़ी बन जाती है।

हरी उसका पल्ला उठाकर साइड में कर देता है, और हाथ आगे को डालकर हरी रीत की सलवार का नाड़ा खोल देता है। सलवार ढिली हो जाती है और सलवार सीधी रीत के पैरों में गिर जाती है। हरी रीत की पैंटी को नीचे करके उसके चूतर नंगे कर देता है। रीत जैसी सेक्सी लड़की के मोटे मुलायम गोरे नंगे चूतर को देखकर हरी के मुँह से आह्ह... की आवाज निकली, और हरी उसके चूतर जोर-जोर से मसलता हुआ बोला।

हरी- “हाए रीत... यार तू तो जनन्त है कसम से.."

रीत- आss आss आ जा फिर करले जन्नत की सैर आज।

रीत की तड़प देखकर हरी लण्ड का सुपाड़ा रीत की चूत पर सेट करता है, और धक्का मारकर अपना लण्ड उसकी चूत में सेट कर देता है।

रीत- “आहह... ओये जन्नत मेरी टाइट है थोड़ा आराम से कर प्लीज़्ज़..."

हरी एक हल्का सा धक्का मारता है और तभी रीत बोली।

रीत- आह्ह... हाई बस फँस गया।

हरी- आह्ह... आज तेरी जन्नत की कस कसकर मैं सैर करूँगा।

हरी अगला धक्का मारता है और उसका लण्ड रीत की टाइट और गीली चूत को चीरता हुआ रगड़ खाता हुआ पूरा अंदर चला जाता है। रीत की गीली और गरम चूत की रगड़ से हरी मदहोश हो जाता है। उसके मुँह से एक शब्द तक नहीं निकलता। रीत भी लण्ड को महसूस करते हुए मस्त हो जाती है और अपनी चूत बहुत ही मजे से दे रही होती है।

करीब 15 मिनट उन दोनों को चुदाई के मजे लेते हुए हो जाते हैं। तभी अचानक हरी का लण्ड एकदम अकड़ जाता है, और वो अपना लण्ड बाहर निकालकर अपने लण्ड का सारा पानी उसकी कमर पर निकल देता है, और बोला- “आहह... मेरी जान रीत तू सच में यार जन्नत है..."

रीत भी दो आज दो बार चुद चुकी थी, उसको आज जन्नत का मजा आ गया था। वो थक कर बेंच पर लेट जाती है, इतने में उसका फोन रिंग करने लगता है। वो फोन देखती है, तो फोन उसके भाई सोनू का आ रहा होता है। रीत फोन उठाकर बोली।

रीत- हेलो।

आगे से सोनू की घबराई हुई आवाज आती है- “रीत जल्दी घर आ जा, यहाँ बड़ा पंगा हो गया है..."

ये सुनकर रीत भी हैरान हो जाती है और बोली- “क्या हुआ बता मुझे..."

सोनू रोते हुए बोला- "तू जल्दी घर आ बस..” कहकर वो फोन कट कर देता है।

रीत फटाफट खड़ी होती है और कमर पर गिरे लण्ड के पानी को रुमाल से साफ करके सलवार डालती है और घबराई हुई वहां से चली जाती है। जब रीत घर आती है, तो देखती है की घर के बाहर बहुत सारी भीड़ लगी होती है। और वहां पोलिस भी बहुत आई हुई होती है। रीत थोड़ी आगे जाती है और देखती है की हरपाल को पोलिस पकड़कर ले जा रही होती है। और साथ ही सोनू खड़ा हुआ रो रहा होता है।

चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ होता है, ये सीन देखकर रीत पागल हो जाती है। और भागी-भागी सोनू के पास जाती है और बोली।

रीत- सोनू क्या, हुआ क्या हुआ बता मुझे?

सोनू रोते हुए बोला- “बहन पापा ने मम्मी को......"

रीत रोती हुई बोली- “क्या? क्या कह रहा है तू?"

सोनू- बहन पापा ने मम्मी को मार दिया है।

रीत- क्या?

ये सुनते ही रीत जोर-जोर से चिल्ला-चिल्लाकर रोने लगती है। हरपाल पोलिस की जीभ में बैठा बातें कर रहा होता है सुखजीत की।

दर्शल बात ये होती है की उस दिन सुखजीत की चुदाई में जब सुखजीत बेहोश हो गई थी। तब सतबीर ने सुखजीत की नंगी फोटोस ले ली थी, और साथ ही वीडियो भी बना ली थी। जो उसने सुबह होते ही पूरे आफिस में फैला दी थी। हरपाल के चक्कर में उसकी ट्रांसफर हो रही थी। इसलिए उसने हरपाल से बदला लिया था। हरपाल की बदनामी पूरे आफिस में हो चुकी थी। कोई सुखजीत को गश्ती और कोई तो उसे रंडी कहने लगा था। ये बात हरपाल को बर्दाश्त नहीं हुई और उसने दारू पीकर सोई हुई सुखजीत को घर आते ही गोली मार दी।

एक मर्द को कभी भी ये बर्दाश्त नहीं होता, की कोई उसके घर की इज्जत का मजाक बनाए। पर सुखजीत ने रंधावा के ऊपर विश्वास करके ये सब किया था। पर सतबीर ने इसका गलत फायदा उठा लिया था। और जिसका नतीजा बहुत ही दर्दनाक निकाला।

हरपाल को अब जेल हो गई थी, रीत और सोनू दोनों गाँव चले गये थे। जब 10 साल बाद हरपाल वापिस आया तो वो सोनू और रीत को लेकर इंडिया से बाहर चला गया।

दोस्तों आपको मेरी ये सच्ची घटना कैसी लगी, प्लीज़्ज़... मुझे जरूर बताना।
 
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