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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

राकेश ने उसको अपने जिश्म से और चिपकाते हुए जवाब दिया- “वो बात नहीं है अदिति, मेरे खयाल से तुम अच्छी तरह समझ रही हो की मैं क्या कहना चाहता हूँ?"

अदिति ने एक ऐसा जवाब दिया उसे की सब सोचेंगे की क्या हो रहा है इस घर में? अब क्या कुछ और राज छुपा हुआ है, जो खुलेगा या वक्त आने पर सामने आएगा?

उसने कहा- “छोड़िये मुझे, वरना लीना ने देख लिया तो आपको पता है ना क्या होगा?” कहकर अदिति राकेश की गिरफ्त से निकली और टेंट की तरफ जाने लगी चटकते हुए, जैसे बच्चे खेलते हैं पहले दायी टांग पर फिर बायीं टांग पर और फिर दायी टांग पर अपने हाथ में अपने दुपट्टे को घुमाते हुए।

जब अदिति जा रही थी तो राकेश ने आवाज थोड़ा ऊँची करके पूछा- “मगर लीना है किधर? मैंने उसको कब से नहीं देखा?”

अदिति चटकते हुए ही जोर से बोली- “वो फूल तोड़ने गई है, अपनी सहेलियों के साथ जंगल में..”

इससे पहले की अदिति टेंट तक पहुँचती उसके ससुर ने उस कोने से “प्ससस्त प्ससस्त...” करके अदिति को बुलाया। क्योंकी तब तक चटकते हुए अदिति वहीं पहुँची थी, तो अदिति ने पीछे मुड़कर राकेश की तरफ देखा पहले, और राकेश तब तक वहीं था।

अदिति ने ससुर को देखते हुए धीरे आवाज में कहा- “राकेश यहीं है, मैं नहीं आ सकती वहाँ, वो इधर ही देख रहा है..."

ससुर ने फिर भी कहा- “उसको पता नहीं की मैं यहाँ हूँ। तुम आओ तो सही। वो समझेगा तुम किसी चीज को लेने जा रही हो, आओ ना..”

अदिति ने फिर मुड़कर राकेश की तरफ देखा कि वो अब मुड़ चुका था उस तरफ जाते हुए, तो जल्दी से अदिति उस कोने में गई जहाँ ससुर खड़ा था। जिस जगह ससुर था वहाँ सिर्फ दो लोगों को खड़े होने की जगह थी सिर्फ। एक छोटा सा कोना था, तो अदिति को अपने ससुर से बिल्कुल चिपक के खड़ा रहना था, ताकी कोई और ना देख पाए उनको। ससुर ने फिर से अदिति को बाहों में भर लिया और पूरा जिश्म बिल्कुल चिपक गई थी उसके जिश्म से।

ससुर ने फिर कहा- “तुम इस लिबास में एक गुड़िया लग रही हो..."

अदिति- “सच? राकेश ने भी यही कहा...”

ससुर- “बताओ आज भी भंग पियोगी जैसे पिछले साल पिया था? हाँ बोलना प्लीज...” और ससुर ने अपनी हथेली को हल्के से अदिति के कंधे पर फेरा। अदिति ने ससुर के हाथ को अपने हाथ में थामा उसको और ज्यादा फेरने से रोकते हुए और जवाब दिया।

अदिति- “अभी मैंने नहीं सोचा की पियूंगी या नहीं? मगर शायद एक-दो घुट चढूंगी। पिछले साल आपने मुझे जबरदस्ती पिलाई थी और मैं अकेली थी। विशाल बहुत लेट आया था उस रात को। मुझे याद है मैं किचेन में सो रही थी और विशाल मुझे कमरे में ले गया था रात को...”

ससुर उसको रिझाने की कोशिश में लगा हुआ था। मगर अदिति उसकी बाहों से निकल गई और अपनी जीभ से उसको छेड़ते हए यूँ कहा- “मैं आज नहीं पियूंगी। मुझे पता है आप क्यों पूछ रहे हो की पियूं?" और ससुर को अपनी ठेंगा दिखाते हुए दौड़ती चली गई टेंट में।

कुछ देर के बाद भंग तैयार थी और ग्लास भरे जा रहे थे और टेंट में मेहमानों को सर्व किया गया। औरतें, लड़कियां, लड़के सबने पिए। घर के मर्द भी ट्ोडिशनल कपड़े पहने थे उस वक़्त।
 
फिर शो शुरू हुई। ड्रम बजने लगे और “ढोल बाजे” शुरू हुई, लड़कियां और औरतों के नाच के साथ। शुरू में अदिति देख रही थी, और अचानक लीना आई अदिति की तरह कपड़े पहने हए और अदिति का हाथ पकड़कर खींचा डान्स करने के लिए। वो गई तो अदिति डोलते हए, कमर लचकातेए हए नाचने लगी उन लड़कियों और औरतों के बीच कुछ इस तरह की बाकी के मर्दो के नजरें सिर्फ अदिति पर टिकी रह गई उस भीड़ में। वही मुख्य आकर्षण थी सबके बीच। डान्स के दौरान कई बार अदिति को झुकना था, फिर खड़ा होना था दोबारा झुकना था, और हर बार उसकी चूचियां ब्लाउज़ से बाहर निकलती नजर आ रही थीं। अब जवान और बूढ़े किस तरह देख रहे थे, सोचने की बात है।

अब जो लड़के उस भीड़ में नाच रहे थे, सब अदिति के साथ ही नाचना चाहते थे। वह पार्टनर बदल रहे थे हर वक्त, मगर लीना अपनी भाभी के साथ टिकी रही। पर जब थोड़ा पीने के बाद राकेश उस झंड में शामिल हुआ तो लीना राकेश के साथ चली गई नाचने को। तब वह लड़के जो अदिति के बारे में बातें कर रहे, वह लोग बारी बारी करके अदिति के साथ डान्स किए। बहत एंजाय कर रहे थे लौंडे नाचते, डोलते, मचलते, लचकते, सब उस गाने के बोल दोहरा रहे थे जो गाना गया जा रहा था गायकों द्वारा।

दीपक ने भी जाय्न किया डान्स को। ससुर पी रहा था और खूब देख रहा था। उसकी नजरें अदिति पर टिकी हुई थी और हर बार अदिति भी ससुर को देख रही थी नाचते हुए। एक-दो बार अदिति ने ससुर को बुलाया जाय्न करने को डान्स में, मगर वो अपना वक्त ले रहा था अदिति को निहारते हुए और उन लौंडों को देख रहा था की कैसे सब बारी-बारी अदिति के जिश्म को छू रहे थे, जानबूझ कर उसके जिश्म से हर वक्त टकरा रहे थे।

आखीरकार, ससुर ने भी कमर डोलाते हुए भीड़ के बीच गया, और ठीक उसी वक़्त दीपक ने अपनी भाभी को थमा हुआ था नाचते हुए। अदिति ने देखा ससुर को जाय्न करते हुए तो दीपक को देखा और जब दीपक ने अपने पिता को अदिति की तरफ बढ़ते देखा तो खुद छोड़ दिया अदिति को अपने पापा के लिए। तो अब अदिति को सब अपने ससुर के साथ नाचते हुए देखने लगे। और बीच में राकेश और लीना भी बार-बार उन दोनों को देख रहे थे। कुछ औरतें जो नाच रही थीं, उनमें से कई औरतें विशाल के बाप के साथ नाचना चाहती थीं उस वक्त, और उनमें से एक औरत ने हिम्मत करके कमर लचकाते हुए उनके पास आई और अदिति से साफ-साफ कहा की मैं उसके ससर के साथ नाचना चाहती हूँ अगर उसको ऐतराज नहीं हो तो। अदिति कैसे मना करती भला, तो वो हट गई और उस औरत को अपने ससुर के साथ नाचने दिया।

तब तक लीना दीपक के साथ नाच रही थी तो राकेश फ्री था, तो वो आया और अदिति को लेकर डान्स करने लगा। सब गड़बड़ दिख रहे थे क्योंकी कई 40 साल से 50 साल के लोग नाच रहे थे और जगह छोटी पड़ रही थी, बहुत भीड़ था।

राकेश ने मौके का फायदा उठाते हुए अदिति को खुद से कसके चिपकाया और तुरंत अदिति मुड़कर देखने लगी की ससुर उन दोनों को देख तो नहीं रहा। और तभी लीना आई और उससे राकेश को ले गई। फिर दीपक आया अदिति के साथ डान्स को जारी रखने को।

पीने के लिए भंग सर्व करना जारी था और अदिति के ससुर ने अपने ग्लास से अदिति को पीने को कहा, चखने के लिए। डान्स करते ही अदिति ने भंग पिया चखते हुए। वो मस्त थी और बहुत एंजाय कर रही थी नाच को। बहुत मजा आ रहा था उसे। थोड़ा-थोड़ा चखते-चखते अदिति ने एक पूरा ग्लास भंग ले लिए पीने को। ससुर ने ही दिया धीरे-धीरे चखने के बहाने देते हुए। तो एक के बाद दो, दो के बाद तीन और फिर 4 और 5 ग्लास भंग पी लिया अदिति ने। फिर भी नाचती जा रही थी डगमगाते हुए। वक़्त गुजर गया बिल्कुल शाम हो चुकी थी बत्तियां जल गई थीं, चारों तरफ बाहर बिल्कुल अंधेरा हो चुका था।

हाँफते हुए अदिति ने दीपक से पूछा- “क्या विशाल अभी तक वापस नहीं आया? कितना बजा है अभी?”

दीपक ने कहा- “भाभी अभी-अभी सूरज डूबा है अब उत्सव खतम होने को आया है...”

अदिति खुद को संभाल नहीं पा रही थी, उसके कदम डगमगा रहे थे। दाएं से बायें तरफ, फिर बायें से दाएं चलते हुए अदिति घर में गई और अपना मोबाइल लेकर विशाल को फोन किया। ससुर ने उसका पीछे करते हुए उसके बेडरूम में गया तो देखा अदिति बेड पर बैठी विशाल को काल करने जा रही है।

ससुर बेड पर चढ़ा और अदिति से कहा- “उसको मत फोन करो अदिति, अच्छा ही है की वो अभी तक वापस नहीं आया है, हम्म... सही है ना?"

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कड़ी_36 विशाल काम से जल्दी लौटा और

अदिति ने पी रखी थी फिर भी उसको होश था की क्या हो रहा है? अपनी केहनी पर अपने आपको संभालते हुए मोबाइल फोन को कान से लगाए अपने ससुर की आँखों में देख रही थी जब उसने विशाल को फोन नहीं करने के लिए कहा। वैसा करने से उसकी भरी चूचियां लटकी थीं उस छोटी सी ब्लाउज़ में और ससुर की नजर उनपर टिकी हुई थी।

राकेश ने पीछा किया जब अदिति अपने कमरे के तरफ जा रही थी, पर जब आया और अपने पिता को अदिति के बेड पर देखा तो कदम पीछे किया और बाहर देखा की विशाल की गाड़ी द्वार पर आ चुकी थी। अब कार गेट के अंदर नहीं आ सकती थी, क्योंकी टेंट बनी हुई थी। राकेश ने जल्दी से लीना से कहा- “विशाल का नाम जोर से चिल्लाकर बुलाए उसे ताकी अंदर अदिति और उसके पिता को पता चले के विशाल आ गया है...”

लीना समझ गई और दौड़ते हुए विशाल के तरफ गई यूँ पुकारते हुए- “विशाल भाई, विशाल भाई, तुम कितने देर से वापस आए हो... पूरा उत्सव समाप्त हो गया। हम सबको बड़ा मजा आया, भाभी ने भी डान्स किया हमारे साथ। आप यहीं ठहरो मैं आपको भंग पीने को देती हूँ यहीं रुको भाई."

अदिति और ससुर ने सब सुन लिया अंदर और अदिति ने वहाँ से कैसे भी करके निकलने का रास्ता ढूँढ़ा और ससुर से उसको वहीं रुकने को कहा। वो टेंट में जाकर विशाल को रोकेगी तब तक वो उसके कमरे से निकल जाएं।

जब लीना विशाल को सर्व कर रही थी तो अदिति ने उनको जायन किया, और हकलाते हुए विशाल से बात किया। विशाल ने हँसते हुए अदिति से कहा- “हाँ हाँ देखो खुद को। तुमको चढ़ गई है हेहेहेहे.."

और सब दोस्त, परिवार के सदस्य, और मेहमान सब एकठे हुए टेंट में और डिनर सर्व किया गया। साथ में भंग भी पिए जा रहे थे सबके सब, और घर के पीछे भंग बनाने वाले लगातार बनाते जा रहे थे और ज्यादा। विशाल ने बहुत सारे ग्लास भंग के पी लिए, एंजाय करने लगा था और पुराने बिछड़े दोस्तों से बक-बक किए जा रहा था। अदिति आती जाती थी खाना सर्व करती सबको लड़खड़ते हुए विशाल को परोस रही थी और उनके दोस्तों को। जबकी राकेश और उसके ससुर उसको खूब देख रहे थे।

आखीरकार, विशाल को पूरा नशा चढ़ गया और एकाध बार उसने कुछ ऐसी बातें भी कर दी जो सिर्फ उनके और अदिति के बीच की प्राइवेथ बातें थीं। एक बार विशाल ने आनंद का नाम ले लिया और फ्लैट में उसका आना अदिति के साथ नाचने के बारे में भी बोल दिया विशाल ने। उस वक्त राकेश ने अदिति को एक अजीब नजर से देखा और अदिति ने तुरंत अपने ससुर और राकेश के चेहरे में देखा, जब विशाल ने आनंद का नाम लिया तो।

एक बार अदिति की मोबाइल बजी। वो एक कोने में गई काल रिसीव करने को। उस वक्त विशाल बिल्कुल नशे में हो गया था। उसको कुछ होश ही नहीं था। काल आनंद का था। अदिति उससे बात करने लगी। आनंद फ्लर्ट करने लगा अदिति से फोन पर, और अदिति उसको बढ़ावा देने लगी और भी फ्लर्ट करने को। ससर ने कछ देर अदिति को बात करते हुए देखा और अंदाजा लगा लिया की अदिति किसी आशिक के साथ बात कर रही है। उसकी चंचलता और चेहरे की मुश्कान और शरारत भरे नैनों से, उसकी अदायें बात करते वक्त, उसके होंठों को दाँतों से दबाना, अपने बालों से खेलना, मुश्कुराना, खिलखिलाकर हँसना, इन सबसे ससुर को सही बात का पता चल गया की किसी मर्द से बात कर रही है और उसको रिझा रही है।

ससुर थोड़ा नजदीक गया और उनकी बातों को सुनने लगा। मगर उसको नहीं पता चला की किससे बातें कर रही थी। क्योंकी ससुर को आते हुए देखकर अदिति ने बाइ कहा और काल खतम कर दिया। जब ससुर ने पूछा कौन था तो अदिति ने कहा फ्लैट वाला गेटकीपर था जिसको अदिति ने घर पर नजर रखने को कहा था।

सुबह दूसरे दिन सनडे था और सब लोग सरदर्द के साथ जागे थे, भंग ज्यादा पीने की वजह से। कुछ लोग तो टेंट में ही रात भर सोए मस्त नशे में। विशाल की गाड़ी रात भर रास्ते पर ही रही। अदिति अपने ससुर की बेड पर थी, विशाल लाउंज में सोया था, और जब अदिति जागी तो देखा की राकेश भी उसी कमरे में था अधनंगा, मगर बेड पर नहीं, एक सोफे पर था राकेश, मगर ससुर के ही कमरे में। लीना और दीपक एक दूसरे कमरे में थे। ससुर कमरे से निकल चुका था, वो नहा रहा था जब अदिति उठी तो। अदिति धीरे से अपने कमरे में जाने लगी ससुर के कमरे से निकलकर तो देखा की विशाल लाउंज में सोया हुआ है। अदिति की ब्लाउज़ सही नहीं थी उसके छाती पर, उसकी लंबी स्कर्ट जो पहनी थी डान्स करते वक्त वो नहीं पहनी हुई थी बल्की एक छोटी सी सिल्क की ड्रेस उसकी कमर को ढक रही थी।

कल रात वाले बीते वक्त को याद करते हए वो तेजी से अपने कमरे में गई ड्रेस बदलने के लिए। औऔर खुद से कहते गई- “शुकर है विशाल गहरी नींद में है.” अदिति ने कपड़े बदलते वक्त अपनी जांघों और कांखों पर लाल निशान देखे। तब वो नहाने गई जब ससुर बाहर निकल आया।

देर शाम को विशाल और अदिति ने गाँव छोड़ा वापस शहर जाने के लिए। लीना अदिति से गले मिलकर रोने लगी, और उसके कान में कुछ कहा, तो अदिति ने उसके हाथ पर हल्के से मारते हुए दीपक और घर के बाकी मर्दो को देखा।

आखीरकार, दोनों वापस फ्लैट आ चुके थे। विशाल बहुत ही थका हुआ था। और दोनों बेड पर आ गए और बिना एक दूसरे को छुए दोनों गहरी नींद में खो गये। उस वक्त नींद सेक्स से बहुत ज्यादा अहम थी दोनों के लिए। कुछ और करना नामुमकिन था।

दूसरे दिन फिर से वही नार्मल रूटीन शुरू हो गई। विशाल आफिस चला गया। ओम ने अदिति से फ्लर्ट किया।
 
आनंद ने फोन सेक्स चैट किया अदिति के साथ, और रात को फिर से विशाल ने अपने डैड और भाइयों को मुख्य कैरेक्टर बनाकर रोल-प्ले शुरू किया अदिति के साथ।

दिन गुजरते गये। अदिति की माँगें और भी ज्यादा बढ़ने लगी, जहाँ सेक्स का सवाल था। रोल-प्ले के दौरान अदिति वाइल्ड होने लगी थी, और पागलों की तरह सेक्स करने लगी थी। विशाल को बहुत ही मजा आता था अदिति के साथ। आनंद उसको चोदना चाहता था और कितनी बार अदिति से माँग किया एक मीटिंग के लिए। मगर तब भी अदिति ने उसको होल्ड किया हुआ था। ओम ने अदिति के ज्यादा करीब बढ़ने की कोशिश किया। दो बार ओम अदिति के अपार्टमेंट में गया था प्लम्बिंग चेक करने के लिए, क्योंकी पड़ोसियों को प्राब्लम हो रही थी किसी वजह से। ओम ने बस बहाना ढूँढ़ा था उसके फ्लैट में दाखिल होने का।

ओम ने अदिति का हाथ पकड़ा और उसको जकड़ने की कोशिश भी की, मगर अदिति ने उसको धक्का देकर निकाल दिया।

ओम ने अदिति से कहा- “मुझको पता है की उस दिन आनंद किसलिए आया था उससे मिलने को...”

अदिति को मजबूरन ओम से चुप रहने को कहना पड़ा और बदले में एक दिन उसको भी खुश करेगी यह कहते हुए। ओम बहुत खुश हुआ और उस दिन का इंतेजार करने लगा की कब अदिति के बिस्तर को शेयर करेगा।

और एक यह दिन आया जब विशाल आफिस में अच्छा नहीं महसूस कर रहा था और दिन के बीच में घर वापस आया। दिन के 1:30 बजे थे जब विशाल की कार अपार्टमेंट की पार्किंग में आई। ओम ने गेट खोलकर विशाल को “हाय” कहा और ओम अंडरग्राउंड पार्किंग की तरफ जाने लगा तो यार्ड की पार्किंग में विशाल ने अपने डैड की कार को देखा। उसने ब्रेक लगाया और नंबर प्लेट चेक किया। तब उसने ओम को बुलाया। ओम आया तो विशाल ने पूछा- “क्या तुम इस कार के मालिक को पहचानते हो?"

ओम ने कहा- “हाँ सर जी, जानता हूँ.”

विशाल का दिल सीने में जोरों से धड़का और पूछा- “इस वक्त कहाँ है इसका मालिक?”

ओम- “जी वो ऊपर हैं सर जी, किसी रिश्तेदार से मिलने को आए हैं.."

विशाल- “तुम एक रजिस्टर में हर गाड़ी का आना जाना नोट करते हो, है ना?"

ओम- “सर जी बिल्कुल करता हूँ.”

विशाल- “मैं कार पार्क करके आता हूँ, तुम्हारे रजिस्टर में मुझे कुछ चेक करना है, आता हूँ..”

विशाल कार पार्क करके ओम वाले गुमटी में गया और वो रजिस्टर लिया जिसमें ओम और बाकी के गाई हर गाड़ी का आना जाना रेकार्ड करते हैं। किस टाइम को किस नंबर की कार आई और कितने बजे निकली पार्किंग से सब नोट होता था उस रजिस्टर में। विशाल रजिस्टर के पीछे वाले पन्नों को चेक करने लगा यह देखने के लिए की क्या वो कार पहले भी कभी आई है यहाँ?

पन्नों को उलटते हुए विशाल ने ओम से पूछा- “क्या तुमको पता है वो कार वाला किससे मिलने गया है ऊपर, मतलब किसका रिश्तेदार है वो? यह पता है तुम्हें क्या?"

ओम- “नहीं साहब, लेकिन वो आअदमी अक्सर दिन में आता है। मुझे लगता है उसकी बेटी रहती है ऊपर.”

विशाल ने चिहुँकते हुए ओम को देखा और कहा- “क्या? अक्सर आता है तुमने कहा?”

ओम- “हाँ साहब, क्यों कोई प्राब्लम है क्या? आप उस आदमी को जानते हो क्या सर जी?"

विशाल को चक्कर सा आया और ओम से पानी माँगा। जिसने उसको अपनी बोतल दिया। एक चूंट पीकर विशाल ने ऊपर अपने फ्लैट की तरफ देखा और उसको घुटन सी महसूस हुई। फिर विशाल रजिस्टर के पन्नों को पीछे देखता गया और बीच में उसको राकेश की कार की नंबर दिखाई दी। फिर कई बार अपने डैड की कार की नंबर दिखाई दी फिर राकेश का भी कई बार नजर आया।

भारी कदमों के साथ विशाल लिफ्ट की तरफ बढ़ने लगा। उसको लगा की उसके टाँगें उसके जिश्म का साथ नहीं दे रही थीं। सांस लेने में तकलीफ हो रही थी उसे उस वक्त। फिर भी चलते गया और उसको गेट से लिफ्ट तक की दूरी मीलों दूर लगी चलने में। लिफ्ट के अंदर आते ही विशाल ने अपने सिर को लिफ्ट से चिपकाते हुए एक लंबी साँस लेते हुए अपने सिर को झटका जोर से। कुछ ऐसे हॉफ रहा था जैसे बहुत दूर से भागता हुआ आ रहा है। लिफ्ट से निकलकर बहुत धीरे-धीरे अपने फ्लैट के तरफ बढ़ा और दरवाजे के हैंडल को ट्राई किया तो देखा की लाक है, तो अपनी चाभी निकालकर बहुत धीरे से की-होल में डाला, कुछ इस तरह के बिल्कुल अंदर किसी को सुनाई नहीं दे। दरवाजा खुला, वो अंदर गया तो देखा की लाउंज में कोई भी नहीं है। विशाल धीरे-धीरे अपने बेडरूम के तरफ बढ़ने लगा और उसने महसूस किया के उसकी टाँगें थरथरा रही हैं, कांप रही हैं। बेडरूम का दरवाजा आधा खुला था, और उसका दिल बड़े जोर से धड़का जब उसने अदिति को “इसस्स्स” करते सुना और एक मर्द की तड़प सुनाई दी उसे।

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कड़ी_37 विशाल ने अदिति को रंगे हाथ पकड़ा

बेडरूम का दरवाजा आधा खुला था, और उसका दिल बड़े जोर से धड़का जब उसने अदिति को “इसस्स्स्श करते सुना और एक मर्द की तड़प सुनाई दिया उसे।

विशाल का पशीना छूट पड़ा, दम घुटने लगा और फिर एक लंबी गहरी साँस लिया और सोचा क्या इतने दिनों से

यही तो नहीं चाहता था वो के अदिति को किसी और से चदते हए देखे? मगर क्या इस तरह से वो चाहता था की उसको पता चले? नहीं ऐसा तो नहीं चाहा था उसने। वो तो चाहता था की वो मास्टर हो और अदिति गुलाम और जो वो कहे अदिति वैसा ही करे। मतलब वो जिसके साथ उसको देखना चाहे अदिति उसी के साथ करे, ऐसा चाहा था विशाल ने तो।

मगर यहाँ मामला उल्टा लग रहा था। उसने सोचा कहीं वो सपना तो नहीं देख रहा है? क्या यह सब सपना था? क्या एक रोल-प्ले खेला जा रहा था उस वक्त? उसको क्या करना चाहिए था उस वक्त? अंदर घुस जाना चाहिए था और देखना चाहिए था की कौन अंदर है अदिति के साथ? या फिर छपकर देखना और मजे लेना चाहिए था? क्या वो एंजाय कर सकता था यह सब देखते हुए? और क्या उसके डैड ही कमरे के अंदर थे? या फिर राकेश और उसके डैड किसी और से मिलने आये था अपार्टमेंट में? और विशाल का दिमाग यह सब सोच रहा था? क्या यही सब हआ था? तो जो आवाजें अदिति के बेडरूम से आई वो क्या था? दरवाजा आधा खुला था तो क्या उसको जाकर झाँकना चाहिये?

अपनी हथेली से माथे का पशीना पोंछते हुए विशाल यह सब कुछ सोच रहा था। एक बिल्ली के जैसे चलते हुए हालांकी उसके पैर काँप रहे थे, विशाल धीरे से दरवाजे तक गया। कमरे से अंदर की आवाजें और साफ सुनाई देने लगी, और तड़प और सिसकियों के आवाजें भी और साफ सुनने लगा विशाल। बिस्तर की हिलने की आवाज और अदिति की सिसकियां भी सुनाई देने लगीं।

और हाँ, विशाल ने अपने डैड की आवाज सुनी, अंदर झाँकने से पहले ही। उसने अपने डैड को यह कहते हुए सुना- “ओके ओके बेबी, अब ले लो इसस्स्स्स और अदिति की “हम्म्म्म..” को सुना विशाल ने बिना देखे।

उसे यकीन नहीं आया, मगर पैंट में उसका लण्ड मचलने लगा था, खड़ा हो रहा था यह सब सुनकर। खड़ा हो रहा था, उसने सोचा उस वक्त उसको सदमा लगना चाहिए था तो खड़ा कैसे हो रहा है? फिर भी हाँ। उसका बिल्कुल खड़ा हो गया था। हालांकी उसको पता चल चुका था की उसका बाप उसकी बीवी के साथ उसके कमरे में उसके बिस्तर पर था। हिम्मत करके वो दरवाजे के और करीब गया, यह खयाल करते हुए की अंदर से वह लोग उसको नहीं देख पाएं।

फिर होना क्या था। विशाल को सदमा और खुशी दोनों एक साथ हुई, अदिति के मुँह में अपने डैड का लण्ड देखकर। अदिति नीचे फर्श पर अपने घुटनों पर थी और विशाल के डैड बेड पर बैठा हुये थे, दोनों टाँगों को दोनों तरफ किए हुए, उसकी दोनों हथेली बेड पर अपने बदन को सपोर्ट करते हुए, डैड सिर ऊपर छत की तरफ आँखें बंद करके किए हुए था और अदिति के मुँह की गर्मी को अपने लण्ड पर महसूस करते हुए मजा ले रहे थे।

जबकी उसकी बहू अदिति उसके लण्ड को चूसते हुए उसको वो खुशी और मजा दे रही थी, जो विशाल की माँ ने कभी नहीं दिया था। अदिति ने लण्ड को अपने नर्म हाथ से पकड़े हुए लण्ड को मुँह में लिए हुए चूसे जा रही थी

और एक हाथ से ससुर के बाल्स को सहलाती जा रही थी।

विशाल के डैड का शर्ट अब भी उसी पर था मगर सभी बटन खुले हए थे, मगर पैंट और अंडरवेर नहीं था उसके जिश्म पर। अदिति का सिर उसकी दोनों जांघों के बीच में था। कभी उसकी एक हथेली ससुर की छाती के बालों

पर फेर रही थी तो कभी उनकी जांघों पर लण्ड को चूसते हुए और एकाध बार आँखें को ऊपर करके ससुर के चेहरे में देखते हुए।

अदिति ने दरवाजे से पीठ किया हुआ था, और ससुर ऊपर सिर उठाकर आँखें बंद करके एंजाय कर रहा था। अब दोनों को कोई भी फिकर नहीं थी दरवाजे की तरफ देखने की, क्योंकी मेनडोर तो लाक था और उनको पता था उन दोनों के अलावा घर में और कोई भी नहीं है तो कमरे का दरवाजा बंद करने की सवाल ही पैदा नहीं होता था। अदिति ने एक छोटी सी स्कर्ट पहनी हुई थी जो उस वक्त मोड़कर उसकी कमर तक उठाया गया था और उसकी गाण्ड विशाल को दिख रही थी। जिस पोजीशन में अदिति घुटनों पर थी और पैंटी नहीं पहनी हुई थी, मतलब ससुर ने निकाल दिया होगा। विशाल ने बेड पर नजर फेरा तो अदिति की पैंटी तकिये के पास नजर आई। अदिति सिर्फ ब्रा में थी, कोई टाप या ब्लाउज़ नहीं था उसकी जिश्म पर। ब्रा का भी हुक निकाला हुआ था। और तभी उसके डैड ने अदिति की एक चूची को हाथों में दबाया।
 
विशाल एक कदम पीछेहो गया। विशाल ने जोर से अपने सिर को झटका देते हुए खुद से सवाल किया- “यह सब कब से शुरू हुआ? क्या जिन दिनों हम वहाँ रह रहे थे या बाद में जब हम यहाँ चले आए? वहाँ 10-11 महीनों तक रहे थे हम। तो क्या मैं सही सोच रहा था अदिति ने उन लोगों के साथ पहले से ही? या यह सब उस उत्सव के दौरान शुरू हुआ? नहीं यह लोग बहुत पहले से यहाँ आते रहे हैं रजिस्टर में मैंने देखा, उत्सव से बहुत पहले भी आए थे। मैं कितना चाहता था अदिति को किसी और मर्द के साथ देखने को और यह रहा आज। मगर मुझको बिल्कुल पसंद नहीं की अदिति ने यह सब छुपाया है मुझसे। क्यों इतने दिनों तक अदिति इतना हिचकिचाने की नाटक करती रही फिर?

जब मैंने ससुर वाला रोल-प्ले करने को कहा था तब कितने नखरे किए थे इसने, कहा था की “मैं उसकी बेटी की तरह हूँ.” और लो बेटी बाप से चुदवा रही है बिना रोल-प्ले के ही अब तो."

विशाल ने फिर अदिति को यह कहते हुए सुना कमरे के अंदर- “हम्म... पापा मेरा मुँह दुख गया अब बस, यह बहुत मोटा है...”

तब विशाल ने अपने सिर को दरवाजे के पीछे करते हए अंदर देखने की कोशिश किया, और देखा का उसके डैड अपनी पीठ पर अब लेटे हये था और अदिति उसके ऊपर चढ़ रही थी, दोनों टाँगों को उसके डैड की कमर के दोनों तरफ करते हुए। फिर अदिति ने अपनी ब्रा को नीचे फर्श पर फेंक दिया और अपनी गाण्ड को ससुर के लण्ड पर दबाकर झुक गई ससुर की छाती पर, अपनी गीली चूत को लण्ड के ऊपर रगड़ते हुए कमर को हिलाते हुए और अपने ससुर की गहरी आवाज को घूरते हुए सुनने लगी।

विशाल अपनी वाइफ की गाण्ड को निहारने लगा और सोचा की पहली बार उसकी गाण्ड को उस तरह से देख रहा था, जैसे किसी और औरत को देख रहा हो। आज पहली बार इस आंगल से अदिति की गाण्ड को वो देख रहा था। अदिति ने फिर अपने मुँह को अपने ससुर के मुँह की तरफ किया और उसने अपने बहू की जीभ को झट से अपने मुँह में लेकर चूसते हुए उसका रस पीने लगा, और अदिति ने वही किया अपने ससुर के जीभ के साथ, और उसी टाइम अपनी चूत को भी रगड़ती जा रही थी और उसकी लटकी हुई चूचियां ससुर की छाती के बालों पर रगड़ खा रही थीं उस दौरान, जिससे अदिति को बहुत मजा आ रहा था।

ससुर ने अदिति की नंगी पीठ पर अपने हाथ को फेरना शुरू किया, और धीरे-धीरे अपने पैरों पर जोर देते हुए अपनी कमर को ऊपर उठाते हुए विशाल के डैड ने अपने हाथ में अपने लण्ड को लेते हुए अदिति की चूत में डालने का प्रयास किया। अब क्योंकी अदिति उसके ऊपर बैठी हुई थी, तो जब ससुर ने अपनी कमर को ऊपर उठाया तो अदिति भी साथ में ऊपर उठ गई।

अदिति ने कहा- “आप मुझको झुला रहे हो अच्छा लग रहा है मुऊआआ..” और तब तक उसका लण्ड अदिति की चूत की छेद को छू रहा था।

ससुर ने कहा- “ओके अब इसको अपने अंदर लो...”

अदिति ने तुरंत अपने हाथ से उसके लण्ड को अपने अंदर डाइरेक्ट किया और अदिति ने मजा लूटते हुए खुद बैठ गई उसपर और अपनी कमर और गाण्ड को हिलाते हुए आँखों को बंद कर लिया। अदिति ने अपने ससुर के गले को चूमा, उसके कान को चाटा और अपनी गाण्ड को जोरों से हिलाती गई, जिससे लण्ड चूत में आसानी से अंदर-बाहर होने लगा। नजारा कुछ ऐसा था की अदिति ससुर को चोद रही थी, क्योंकी वो ससुर के ऊपर थी

और सब मूटमेंट्स वही किए जा रही थी।

विशाल आराम से सब देख रहा था। क्योंकी वो दोनों बिल्कुल मस्त खोए हुए थे मजा लूटते हुए। उन दोनों को कोई फिकर नहीं थी, क्योंकी दोनों ने बिल्कुल नहीं सोचा था की कोई घर के अंदर उस वक्त हो सकता है।

विशाल ने अपने पैंट के ऊपर से लण्ड को सहलाते हुए कहा- “अदिति तुम मुझको बेहद मजा दे रही हो इस वक़्त, यही मैं चाहता था। मैंने हमेशा चाहा था की तुमको तब करते हुए देखू जब तुमको पता भी नहीं हो की मैं देख रहा हूँ और वही मौका मिला आज मुझे। अब मुझको यह सीक्रेट ही रखना पड़ेगा, ताकी तुमको और कभी ऐसे ही देख पाऊँ। मैं हमेशा से देखना चाहता था की तुम किसी गैर मर्द के लण्ड के साथ कैसे रिएक्ट करोगी, तुम्हारे चेहरे का रंग देखना चाहता था किसी और से चुदवाते हुए देखकर। और आज तो बस शुरुवात है मेरे लिए मेरी जान, तुम तो सच में कमाल की हो अदिति। मेरे इरादे, रोल-प्ले सब फीका पड़ गया तुम्हारे सामने।

अदिति वाह... मैं हमेशा से सोचता था की तुम ऐसी हो शायद, मुझे लगता था की तुमको मेरे लण्ड के अलावा और भी लण्ड चाहिए। अब मेरी जान आनंद को तुम्हें चोदने देना ही होगा और जिसको भी तुम्हें चोदने को लाऊँ तुम्हें उसके साथ चुदवाना ही होगा। हाँ अब मेरा सपना साकार हुआ। मगर यह सब शुरू कब हुआ? और कैसे? सब पता करना पड़ेगा अब...”

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कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
कड़ी_38 विशाल अभी भी अदिति को अपने पिता के साथ चुदवाते देख रहा है

विशाल सब कुछ सिर्फ अपने आप तक रखना चाहता था। वो नहीं चाहता था की अदिति को पता चले की उसने अदिति को अपने डैड के साथ देख लिया है। विशाल ने डिसाइड किया की वो घर से बाहर निकल जाएगा इससे पहले की वह लोग अपनी चुदाई खतम करें, और उसने देखना जारी रखा मजा लेते हुए। विशाल फिर से नार्मल हो गया था, उसको कोई फिकर नहीं थी अब जैसे हुआ था अचानक देखने के बाद। अब आराम से देख रहा था और एंजाय करने लगा था। अब उसको मजा आ रहा था। अब उसको लग रहा था की उसका सपना बिना कोई मेहनत किए पूरा हो रहा है। अदिति का जवान जिश्म ससुर के जिश्म पर पूरी तरह से रगड़ खाता जा रहा था, और अदिति ससुर के गले और कान के नीचे वाले हिस्से को चूमती चाटती जा रही थी, जब वो खुद भी मजे लेते हुए उसकी कमर लण्ड के ऊपर हिलाती जा रही थी।

अदिति बीच-बीच में सिसकियों के साथ लंबी साँसें ले रही थी और अपने ससुर के गले पर अपनी गरम साँसें छोड़ रही थी। अपनी तरफ से ससुर अदिति की हिम्मत बढ़ा रहा था, खुद अपने लण्ड को अंदर और बाहर करते हुए कमर उठाकर, साथ में अदिति को भी ऊपर उठाते हुए। ससुर का हाथ जल्द ही अदिति की चूचियों पर गया, चूचियां जो ना ज्यादा बड़ी थीं ना ही ज्यादा छोटी थीं। ऐसा लग रहा था जैसे गुब्बारे में पानी भरा हआ हो, जब ससुर का हाथ उससे दबा रहे थे। जिससे अदिति की सिसकी और भी बढ़ रही थी। ससुर अपनी गर्दन ऊपर उठाते हुए चूचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा।

जबकी अदिति के जिश्म में जैसे आग लग गई थी। ससुर के मुँह ने जब उसके निपल को चूसना शुरू किया जैसे की एक बच्चा उसके दूध पी रहा हो, तो अदिति की इसस्स्शह निकल गई और आँखों को शराबियों जैसे करके ऊपर छत की तरफ देखते हुए अदिति चिल्ला उठी- “उफफ्फ... उईई माँ...” करते हुए। अदिति ने अपने पेट को जोरों से ससुर के पेट पर दबाते हुए उसके सिर को अपने दोनों हाथों में लिया और उसको चूमने लगी, सातवें आसमान में पहुँचते हुए। ससुर ने दूसरे पल ही अदिति को अपने नीचे लिया, और अब ससुर अदिति के ऊपर था। उसका लण्ड अदिति के अंदर ही रहा जिस वक्त पोजीशन चेंज किए दोनों ने। अदिति ने अपनी दोनों टाँगों को खूब अच्छी तरह चियार कर खोल दिया था, ताकी ससुर के चूतड़ और कमर उसकी दोनों जांघों के बीच में बने रहें। ससुर ने धक्का देना शुरू किया। अदिति ने फिर अपनी दोनों टाँगों को ससुर की कमर पर बाँध लिया और अपने दोनों बाजुओं को ससुर के कंधे के ऊपर करके उसको जोर से जकड़ लिया और उसके मुँह ने ससुर के मुँह को तलाश किया। फिर अदिति ससुर की जीभ अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। जबकी ससुर बराबर धक्का देता गया उसकी गीली चूत में।

जब ससुर धक्का दिए जा रहा था तो एक बार अदिति ने अपनी हथेली को ससुर की पीठ से फीराते हुए नीचे उसके पेट पर फेरना शुरू किया और बस कुछ सेंटिमेटेर्स उसके लण्ड के पास। वो ऐसा इसलिए कर रही थी ताकी ससुर को चोदने में और भी मजा आए। अपनी जवान बहू की नाजुक हथेली को अपने जिश्म पर प्यार से फेरते हुए महसूस करके ससुर का जोश और भी बढ़ा और उसका धक्का और भी जबरदस्त होता गया। एक के बाद एक धक्का और तेज होता गया और वो घुर्राने लगा। फिर अचानक अदिति भी जोश में आते हुए इस तरह से अपने ससुर के गले को अपने बाहों में जकड़ा की ससुर को लगा फाँसी के फंदे में जकड़ गया, इतनी जोर से कसकर अदिति ने उसको जकड़ा था।

अदिति चिल्लाई और तड़पती आवाज में जोर से कसमसाती हुई उसकी आवाज निकली- “आअहह... इसस्स्स... ईसस्स्स... इट्स सोऽऽ गुड... हाँ हाँ आई आम कम्मिंग माई ओर्गेज्म पापा सस्स्स्स... यू आर सुपर्ब पापा वाव्वओ... आआआह्ह... लोव यू पापा.. लोव यू लोव यू लोव यू मुआहह..” और दर्जनों बार अदिति ने अपने ससुर के चेहरे, गले और छाती को चूमा अपने आर्गेज्म के खतम होने तक।

अब ससुर भी झड़ने वाला था और धक्का देते हुए अपने जीभ को जितना लंबा बाहर निकाल सके उतना निकालकर अदिति के चेहरे के हर हिस्से को चाटते जा रहा था, और उसके जिश्म में एक कंपकंपी महसूस किया अदिति ने। ससुर ने अपने लण्ड को बहुत जोर से सबसे ज्यादा गहराई तक लूंसा धक्का देते वक्त और उसका जिश्म जैसे काँपने लगा।

वो बिल्कुल एक शेर की तरह गुर्भते हुए- “आगज्गघ... हाँ अब मैं भी झड़ने लगा मेरी जान वाह... तुम बस एक परी हो, मेरी परी... आघघ्गह... आई मिस यू सो मच माई बेबी। कभी किसी को चोदने में इतना मजा नहीं आया मुझे मेरी जिंदगी में, जितना तुमको चोदने में आता है आघघ्गघह...”

फिर झट से अपने लण्ड को अदिति की छेद से बाहर निकालते हुए ऐसा पिचकारी मारा ससुर ने के वाह। लथफथ कर दिया अपनी जवान बहू की जांघों से लेकर ऊपर गले तक। अदिति की पेथ, कमर, नाभि, चूचियां और गले तक ससुर का पानी फैला हुआ था। और अदिति वीर्य को ससुर के लण्ड से शुरू से निकलते हुए देख रही थी। हर एक कतरा जो निकला अदिति ने सब देखा मजे से। फिर अपनी हथेली से लण्ड को थामा और खुद हिलाकर वीर्य को अपने ऊपर गिराती गई। मुश्कुराते हुए हर कतरे को लण्ड से निकलते देखा अदिति ने और ससुर को और भी ज्यादा मजा आया अपनी जवान बहू को उसका लण्ड पकड़कर उसके वीर्य को उसमें से निचोड़ते हुए देखकर और महसूस करके अजीब सा मजा आया।

अदिति ने अपने होंठ को दाँतों से दबाते हुए और मुश्कुराते हुए लण्ड को अपने दोनों हाथों में लिया फिर उसके और करीब होते हुए कहा- “हम्म्म्म आई लोव दिस बिग थिंग, यह मुझको बेहद खुश करता है और बहुत मजा देता है... तुम एक हैवान हो जो मेरी गहराई में घुसकर मुझको इतना खुश करते हो.” यह अदिति ने लण्ड से कहा और चूमा उसे- मुऊआआह...”
 
ससुर ने भी लण्ड को उसके मुँह में ठूसने की कोशिश किया, तो अदिति ने नजरों को ऊपर करके ससुर के चेहरे में देखा, और मुँह खोला लण्ड को लेने के लिए और अदिति ने पूरा लण्ड अपने मुँह के अंदर लेते हुए आँखों को ऊपर उठाकर ससुर के चेहरे में उसका लंबा सांस के साथ तड़पना देखा। ससुर को झड़ने के बाद वाला वो मजा आया जो कभी कभार किसी मर्द को मिलता है, अपनी जवान बहू के मुँह की गर्मी अपने झड़े हुए लण्ड पर महसूस करने को। ससुर का जिश्म काँप गया मजे से।

दोनों फिर पेट पर लेट गये बिस्तर पर और एक दूसरे को दुलारने लगे। फिर अदिति एक बार फिर ससुर की छाती पर गई और अपनी चूचियों को उसकी छाती पर कुचलते हुए पूछा- “आपने कभी सोचा भी है की क्या होगा अगर कभी विशाल को हमारे बारे में पता चला तो?"

ससुर ने जवाब दिया- “मुझे ऐसे चीजों के बारे में सोचना पसंद ही नहीं, यह नेगेटिव विचार हैं और मैं ऐसे ख्यालात को अपने दिमाग में घुसने ही नहीं देता हूँ। इससे बेहतर है की मैं तुम्हारी इन चूचियों को सोचूँ, तुम्हारी प्यारी आँखें और आवाज को सोचूँ."

अदिति खिलखिलाकर हँसी और कहा- “मगर मैं तो अक्सर सोचती हूँ...”

ससुर- “अच्छा... और क्या सोचती हो?"

अदिति- “मैं सोचती हूँ की वो बहुत खुश होगा यह जान करके की हम दोनों के बीच कुछ है..”

ससुर- “तुमको यकीन है? मैं नहीं सोचता, मेरे खयाल से वो मुझे या तुझे मार डालेगा..."

अदिति- “नहीं पापा, बिल्कुल नहीं, आप उसे नहीं जानते जैसे मैं जानती हूँ। वो बहुत ही खुश होगा.."

ससुर- “तुम पागल तो नहीं हो बेबी? कोई भी मर्द अपनी बीवी को किसी और के साथ देखना नहीं पसंद करेगा...”

अदिति- “ओह गोड... आप मेरा यकीन क्यों नहीं करते हो पापा, विशाल बहुत खुश होगा अगर उसको पता चला की हम दोनों यह करते हैं..."

ससुर- “तुम्हारा मतलब है की तुम उसको बताने की सोच रही हो हमारे बारे में? खबरदार... अगर तुमने कभी उसे गलती से भी बताया तो... यह कोई बताने वाली बात नहीं है, यह हमारी राज की बात है...”

अदिति- “नहीं, मुझे बताने का इरादा नहीं है। मगर मुझे पता है की ही विल लाइक इट, वो बहुत पसंद करेगा आपको मेरे साथ यह करते हुए देखकर."

ससुर- “तुम्हारा मतलब है की वो एक वायियर जैसा है, तुमको किसी से करते हुए देखना चाहता है?"

अदिति- “हम्म... हाँ बिल्कुल वही.."

विशाल सब सुन रहा था और खुद भुनभुनाया- “ओहह... नहीं अदिति डैड को यह सब मत बताओ प्लीज..."

ठीक उसी वक्त अदिति बेड से निकली यह कहते हुए- “मैं वाशरूम जा रही हूँ अभी आती हूँ..”

विशाल ने अपने कदमों को तेजी से बढ़ाते हुए छत वाले पर्दे के पीछे छुप गया। और जब अदिति वाशरूम चली

गई तो धीरे से दरवाजा खोलकर बाहर निकल गया और दरवाजे को बाहर से फिर से लाक कर दिया।

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