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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

कड़ी_39 विशाल ने दुबारा प्लान किया

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विशाल वापस ओम के गुमटी में गया। उसने रजिस्टर लेकर फिर से देखना शुरू किया। वो यह देख रहा था की कब से उसके डैड और बड़ा भाई आते है यहाँ। वो इस फ्लैट में एक साल से ज्यादा से थे यहाँ और विशाल यह ढूँढ रहा था रजिस्टर में की किस तारिख को वह पहली बार अदिति से मिलने आए थे।

जब विशाल बेचैन होकर रजिस्टर के पन्ने उलट-पलट रहा था तो ओम को शक हुआ की जरूर अदिति को लेकर कोई गड़बड़ है, किसी मर्द के साथ। उसने विशाल से पूछा- “क्या प्राब्लम है सर?"

विशाल ओम से छुपाना चाहता था। मगर फिर सोचा की ओम उसके काम आ सकता है। विशाल ने सोचा अगर

ओम को अदिति के बारे में कुछ भी पता होगा तो उससे विशाल को और जानकारी मिल सकती है, और तभी विशाल ने देखा की आनंद की कार का नंबर है और दिन के 3:00 बजे बीच हफ्ते में उसकी कार का नम्बर रजिस्टर में लिखा हुआ है।

विशाल को बड़ा झटका लगा और ओम से पूछा- “ओम यह कार वीक में दिन के 3:00 बजे यहाँ आई था? ये कोई गलती तो नहीं है? वो तो मेरे साथ आया था अपनी कार में, पर वो तो शाम के 6:00 बजे था दिन के 3:00 बजे नहीं, याद है तुम्हें उसने कार अंडरग्राउंड पार्किंग में रखा था और दूसरे दिन सुबह को कार लेने आया था? तो तुमने क्यों शाम के 3:00 बजे लिखा है?"

ओम समझ गया की विशाल उस आदमी के बारे में कह रहा है, जिसको वो अदिति के कमरे में सुनने को गया था, और उसने तो अदिति को चादा भी था। अब ओम की समझ में नहीं आ रहा था की क्यिा जवाब दे विशाल को। क्योंकी वो अदिति को बचाकर उसका फायदा उठना चाहता था। ताकी उसको भी अदिति को चोदने का मौका मिले।

ओम ने बस जवाब में यह सवाल किया विशाल से- “सर जी, कौन है यह आदमी? आपके रिश्तेदार या अदिति मेडम की परिवार मेंबर?"

विशाल- “क्यों? उसने तुमको क्या कहा?”

ओम सिर्फ यह जानना चाहता था की क्या आनंद अदिति का परिवार मेंबर होकर उसको चोदने आता था या विशाल का दोस्त था और उसकी वाइफ को चोदता था। ओम के पैंट में हलचल होने लगी अदिति को सोचते हए। मगर वो विशाल को सच्चाई नहीं बताना चाहता था, तो उसने विशाल से कहा- “नहीं साहब उसने नहीं बताया की वो कौन है और शायद उस दिन आपके घर नहीं आया था...”

विशाल ओम को देखते हुए समझ गया की वो अदिति को बचाना चाहता था। तो तुरंत विशाल का शैतानी दिमाग काम पर लग गया। उसने कुछ ऐसा सोचकर प्लान बनाया के वाह। मगर पहले वो रजिस्टर के पन्नों को चेक करता गया पीछे के पेजेस में। विशाल उस दिन से पेजेस को चेक करना शुरू किया जब वो पहले दिन इस अपार्टमेंट में रहने आया था। पहले दो महीने में उसके डैड और राकेश की कार की एंट्री नहीं थी, और दो महीने और दो हफ्ते के बाद रजिस्टर में राकेश की कार का नंबर ओम ने नोट किया था दिन के एक बजे। तब एक हफ्ते बाद अपने डैड की कार का नंबर देखा।

विशाल ने एक कागज पर उन डेट्स और टाइम को नोट किया। तब से तकरीबन हर हफ्ते में एक या कभी दो दिन लगातार उन लोगों के कार का नम्बर रेग्युली नोट हए थे रजिस्टर में। सब दिन के बारह से एक बजे के बीच और वापसी तकरीबन 3:00 बजे की थी हर बार। अब विशाल देखना चाहता था की किसी दिन राकेश और उसके डैड की कार एक ही दिन और एक ही समय पर नोट किया हुआ है? मगर वैसे नहीं मिला किसी भी दिन को रजिस्टर किया हआ। उसने देखा की दोनों आए थे एक ही दिन मगर टाइम अलग-अलगट थे। कई बार डैड की कार एक बजे आई और दो बजे वापस गई, और उसी दिन को राकेश की कार 3:00 बजे आई और 4:30 बजे वापस गई। अदिति ने टाइम को जरूर फोन पर दोनों से मनेज किया होगा।

विशाल ने खुद से कहा- “तो कई दिन ऐसा हुआ की डैड उसको चोद के चले गये तो राकेश उसको चोदने को

आया। और उसी रात को मैंने भी उससे चोदा। वाउ... एक दिन में उसने 3 लण्ड को रिसीव किया, बाप रे..” और साला मैं पागल उसको आनंद से चुदवाने की कोशिश में लगा हुआ हूँ... वो तो खुद आकर उसको चोद रहा है लगता है मुझे। कमाल है यार..."

विशाल ने सब नोट करके ओम से बात किया- “देखो एक बात बताओ, तुम मेरी बीवी में इंट्रेस्टेड हो की नहीं?"

ओम की तो हवा टाइट हो गई, उसको समझ में नहीं आ रहा था की क्या जवाब दे? उसने बस सिर झुकते हुए ना में सिर हिलाया। फिर विशाल ने ओम के कंधे पर अपना हाथ रखते हुए एक-दोस्त की तरह बात किया।

विशाल- “देखो ओम, मैं जानता हूँ की तुम एक नौजवान हो, तुम्हारी शादी नहीं हुई है और मैं समझता हूँ की अदिति बहुत हाट और सेक्सी है और तुम उससे बहुत प्रभावित हो। अब बोलो तुम उसको पाना चाहते हो की नहीं? मैं तमको बताऊँगा के कैसे तुम अदिति को पा सकते हो, और उसके बिस्तर तक आसानी से जा सकते हो और कामयाब भी हो जाओगे..."

ओम ने कांपती आवाज में कहा- “मगर सर जी, वो आपकी ब्यूटिफुल वाइफ है तो मैं ऐसा कैसे कर सकता हूँ?"

विशाल- “अरे यार हम माडर्न लोग हैं, और यह एक आम बात है। इस हाई सोसाइटी में यह सब तुमको अच्छी

तरह से पता है, है ना? तो बताओ मुझे तुम अदिति को चोदना चाहते हो की नहीं?"

ओम ने ऊपर अदिति की छत के तरफ देखा तो विशाल ने भी तुरंत अपनी छत के तरफ देखते हुए कहा- “तुम उसको निहारते हो जब वो वहाँ ऊपर आती है। है ना? मुझे पता है, और वो तुमको रिझाते हुए तुमसे मोबाइल पर बात करती है, यह भी मुझे पता है, यह सब आम बाट है हमारे लिए यार..."

ओम- “आपको तो सब कुछ पता है साहब?"

विशाल- “तो बताओ, तुम वो करोगे जो मैं करने को कहूँगा? अगर उसको पाना चाहते हो तो बोलो?"

ओम- "जैसा आप बोलोगे सर...”

विशाल- “ओके तो पहले मुझे बताओ की तुमको सब पता है की कौन-कौन अदिति से मिलने आते हैं? है की

नहीं?"
 
ओम- “अरे नहीं साहब आप मुझे उल्लू बनकर मुझसे बात निकलवाना चाहते हैं। ऐसा मत करो सर जी, मुझे माफ करो। आज से मैं अदिति मेम को देखूगा भी नहीं। सर प्लीज... माफ कर दो मुझे...”

विशाल- “अरे नहीं यार... मैं सच में तुमको अदिति को चोदने का मौका दूंगा सच... गोड प्रामिस। सिर्फ मुझे इतना बताओ के कौन-कौन अदिति से मिलने आते हैं, क्या इस अपार्टमेंट के लोग भी उससे मिलने जाते हैं

क्या? सब बताओ मुझे यार..”

ओम- “देखो सर जी, सिर्फ एक बार मैं आपके फ्लैट के दरवाजे के पास सुनने को गया था जब यह कार वाला आदमी उसको मिलने को आया था 3:00 बजे...” और उसने आनंद की कार का नंबर बताया।

विशाल- “वेरी गुड, तो तुमने क्या सुना वहाँ जाकर?"

ओम- “दोनों बेड पर थे सर, सब कुछ किया दोनों ने, आई आम श्योर.."

विशाल- “देखा, तो क्या आसान नहीं है तुमको उसे पाना?”

ओम- “मुझको बहुत हिचकिचाहट होती है सर, मैंने आज तक नहीं किया यह सब। और अदिति मेम तो एक परी की जैसी हैं, और मैं उसके मुकाबले एक नौकर, गुलाम जैसा हूँ तो...

विशाल- “मैं तुम्हारी मदद करूँगा नौजवान और तुम कामयाब होगे जरूर अदिति को चोदने में। यह मेरा वादा है तुमसे..."

ओम- “मगर कैसे सर जी?"

विशाल- मैं तुमको सब डीटेल्स में समझाऊँगा, तुमको बिल्कुल वैसा ही करना होगा जैसे मैं कहूँगा, तब कामयाब होगे तुम। हो सकता है की वो मना करे या इनकार करे, मगर तुम रुकना नहीं बढ़ते जाना, आखीर में वो मान

जाएगी और एंजाय करेगी। समझे तुम?"

ओम- “ठीक है सर जी, मगर कब?"

विशाल- मैं तुमको दिन आने पर बताऊँगा, शायद कल या परसों, तुम दिन में काम करते हो। क्या रात के 10:00 बजे यहाँ आ सकते हो जिस दिन बुलाऊँ?"

ओम- "ट्राई कर सकता हूँ सर, मगर रात के 10:00 बजे तो आप घर पर होंगे ना?"

विशाल- “नहीं जिस रात को तुमको बुलाऊँगा उस रात को मैं यहाँ पर नहीं होऊँगा, तुमको बताऊंगा किस रात

को। ओके सो डील?"

ओम- “हाँ साब जैसा आप कहो डील.."

विशाल- “मगर खबरदार अगर तुमने उसको कुछ भी कहा इस बारे में। मैं जानता हूँ की तुम उससे सेल पर बात करते हो। मगर जो बात मेरे और तुम्हारे बीच हुई, यह सिर्फ हमारे बीच रहना चाहिए, अदिति को कुछ भी नहीं पता होना चाहिए इस बारे में। समझ गये तुम? मैं तुमको उसे चुदवाऊँगागा, तो बस चुप रहना, कुछ भी मत बकना। मुझे अपने सेल नंबर दो और मेरा नंबर भी सेव कर लो। जब वक्त आएगा तो तुमको काल करूँगा। और अभी के लिए किसी को मत बताना की मैं वापस आ गया हूँ। मैं अंडरग्राउंड पार्किंग में अपनी कार में बैठने जा रहा हूँ, और जब वो कार यहाँ से वापस जाए तब तुम मुझको काल करके बताना ओके?”

अपने कार में बैठे हुए विशाल वो सब दृश्य देख रहा था जो उसने अपने डैड और अदिति के बीच देखा था। अपने लण्ड को हाथ में लेकर सहलाने लगा और बिल्कुल जमकर खड़ा हो गया था। सोचने लगा किस तरह से अदिति उसके डैड के लण्ड को सहला रही थी, दुलार रही थी। सोचने लगा किस तरह से अदिति ने बिना झिझक के उसका लण्ड झड़ने के बाद अपने मुँह में लेकर उसको चूसा। विशाल ने अदिति की खूबसूरत मुश्कान को दृश्य में देखा जब वो अपने ससुर के चेहरे में देख रही थी। वो कितनी प्यार से देख रही थी ससुर को जैसे वही उसका प्यार है। जैसे उसे गहरी मुहब्बत है उससे। विशाल के कान में अब भी अदिति का यह जुमला गूंज रहा था- “हम्म्म्म आई लोव दिस बिग थिंग, यह मुझको बेहद खुश करता है और बहुत मजा देता है... तुम एक हे न हो जो मेरी गहराई में घुसकर मुझको इतना खुश करते हो...”

विशाल ने जो कुछ देखा था, सब उसकी आँखों के सामने घूम रहा था। उसने सोचा किस तरह से अदिति ने

अपनी दोनों टाँगों को उसके डैड की कमर पर बाँधकर चुदाई को एंजाय किया था। अदिति सच में बहुत एंजाय कर रही थी और खुद अपनी खुशी से, प्यार से सब कर रही थी, वो सब अपने आप कर रही थी। विशाल को सब

आँखों के सामने दिख रहा था और खुद अपनी बीवी को उस हालत में सोचते हुए विशाल ने मूठ मारना शुरू किया कार में बैठे हुए।

विशाल ने अदिति को खुद अपने बाप के साथ सोचते हए मूठ मारा। बहुत जल्द झड़ गया, और सोचने लगा कैसे ओम से अदिति को चुदवाएगा? और रात के 10:00 बजे कहाँ से सब देखेगा? सोचा की अदिति को कहेगा की ओवरटाइम करना है आफिस में उस रात को। वापस घर आएगा 6:00 बजे और रात के 8:00 बजे आफिस वापस जाएगा बहाना करके, और छत का दरवाजा अंदर से अनलाक छोड़ देगा। और जब ओम अंदर चला जाएगा तो छत से घर के अंदर जाएगा। एक रास्ता था छत पर जाने की, वो थी लिफ्ट से दूसरे फ्लोर पर जाने से, वहाँ से सीढ़ियों से अपने छत तक आराम से जा सकता है। और लाउंज की एक खिड़की भी खुला छोड़ देगा। कहीं अदिति ने छत का दरवाजा लाक कर दिया तो लाउंज की उस खिड़की से अंदर जा सकेगा। या अगर कुछ भी नहीं हुआ तो दरवाजे से ही अंदर जाएगा जैसे आज गया था।

यह सब सोचता रहा विशाल और उससे यकीन था की कामयाब होगा। विशाल ने यह भी सोचा की कब और कैसे आनंद आया था अदिति को लगाने आफिस से, जबकी विशाल को कुछ भी पता नहीं चला। और विशाल ने यह भी सोचा की अदिति ने उसको कितना उल्लू बनाया आनंद को लेकर, एक भनक भी नहीं होने दिया उसको की

आनंद आया था कभी। मतलब साफ था की आनंद उसको चोदने आया था और चोद के गया। और आनंद ने भी कुछ नहीं बताया विशाल का दोस्त होते हुए भी। तो विशाल ने सोचा की उसके पीठ पीछे उसकी बीवी और दोस्त दोनों खूब एंजाय कर रहे थे।

तो क्या विशाल यही नहीं चाहता था इतने दिनों से? असल में अंदर ही अंदर विशाल बेहद खुश हो रहा था की उसका सपना अब पूरा हो रहा है और अब अपने सभी अरमानों को पूरा करके रहेगा।

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कड़ी_40 विशाल को ओम ने काल किया की कोई अदिति से मिलने आया है

विशाल ने ओम को हक्म दिया की जब भी कोई अदिति से मिलने आए तो उसके सेल पर फोन करके तुरंत बताए। और उसने ओम को ₹1000 भी दिया सब राज को राज रखने को, और कहा की और बहत पैसा मिलेगा उसे अगर उसने सही ढंग से विशाल का काम किया तो। ओम को बहत खुशी हई के उसको पार्ट टाइम जाब । मिल रहा है, अदिति पर नजर रखने के लिए। ऊपर से अदिति को चोदने को भी मिलेगा। अपनी किश्मत का

शुक्रिया अदा किया ओम ने।

उस शाम को विशाल वापस घर आया जिस वक्त हर रोज आता है। तब तक वो अपनी कार में अंडरग्राउंड पार्किंग में सो गया था और ओम ने उसको फोन करके जगाया जब उसके डैड चले गये कार लेकर।

अदिति बिल्कुल नार्मल बिहेव कर रही थी हर रोज की तरह जैसे कुछ हुआ ही नहीं। विशाल से बहुत प्यार से पेश आ रही थी हर रोज की तरह और उसका बराबर खयाल रख रही थी। विशाल सोचता रह गया की कितनी होशियार है अदिति और कैसे इतना कूल है की उसको इतने महीनों तक धोखा देने के बाद भी। अब विशाल खुद

को धोखा खाया हुआ महसूस करने लगा।

विशाल सोच रहा था की हालांकी खुश था वो सब कुछ देखने के बाद जिसका उसे अदिति से इंतेजार था देखने

को, फिर भी उसने कभी भी बिल्कुल नहीं सोचा था की अदिति उसको उल्लू बनाएगी या धोखा देगी। विशाल ने तो हमेशा सोचा था की वो अदिति को वैसा करने को कहेगा, सोचा था की वो अदिति को उस राह पर चलना सिखाएगा, विशाल ने चाहा था की वो अदिति को सब बताएगा और विशाल की इजाजत के बिना वो किसी के साथ नहीं जाएगी, ऐसा सोचा था विशाल ने हमेशा। तो थोड़ा बहुत नाखुश था की अदिति ने अपने आप ही वो सब कुछ पता नहीं कब से कर रखा था, जिसका विशाल को इंतेजार था।

मगर जो उदासी थी वो बहुत कम थी, उस खुशी के बदले जो विशाल को हुई सब जानकर और देखकर। मतलब अब तो उसको कोई जोर नहीं लगाना है। क्योंकी अदिति खुद उसी राह पर चल रही है पहले से ही। कभी-कभी विशाल का मन करता था की चिल्लाकर अदिति से पूछे की कब से अपने ससुर और जेठ से चुदवा रही है? उसका मन करता था की अदिति को मजबूर करे की वो सब कुछ बताए की कब से शुरू हुआ यह सब? किसने पहल किया? कैसे उसके करने दिया एट्सेटरा? मगर दूसरे पल विशाल ने सोचा की नहीं कोई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। सब कुछ वक्त पर सामने आएगा। वक्त का इंतेजार करना चाहिए और सब आराम से फालो करना चाहिए अब।

उस रात को विशाल ने कुछ नहीं किया अदिति के साथ, और ना ही अदिति ने माँग किया कुछ करने को। दोनों को जल्दी नींद आ गई।

कुछ दिन बीत गये। ओम विशाल का इंतेजार कर रहा था अदिति से हमबिस्तर होने के लिए। मगर विशाल ने प्लान तैयार नहीं किया था। और एक दिन, दिन के एक बजे ओम ने विशाल को फोन किया।

ओम- “सरजी, कोई आया है अदिति जी से मिलने को.."

विशाल- “गाड़ी का नंबर बताओ जल्दी..”

ओम- “नो कार सर, पैदल आया है और पहले भी कई बार आ चुका है."

विशाल- “क्या? यह कौन है अब? कैसा दिखता है ओम?”

ओम- “एक लड़का जैसा दिखता है सरजी, छोटे कद का.."

विशाल ने चिल्लाते हुए कहा- “दीपक? वो भी आता है? ओह माई गोड... मैं विश्वास नहीं कर सकता."

ओम- “दीपक कौन है सर जी?"

विशाल- “नहीं कोई नहीं, एरर क्या वो अंदर चला गया है ओम?"

ओम- “हाँ साहब 5 मिनट पहले वो अंदर गया..."

विशाल- “अपने रजिस्टर में उन लोगों के नाम नहीं लिखते हो जो किसी से मिलने को आते हैं?"

किससे मिलना है, यहाँ का रूल सिर्फ गाड़ी के नंबर्स नोट करना है

ओम- “नहीं सर, हम सि नाम नहीं..”

विशाल- “ओके ओम, बहुत शुक्रिया आई विल बी देयर सून, ऐसे हमेशा मुझे सब सही टाइम पर बताते रहना

ओम। थैक्स..."
 
विशाल अब उस दृश्य को याद करने लगा की किस तरह से अदिति ने दीपक को गले से लगाया था, जब उत्सव

के लिए वह गाँव गये थे। छोटे कद के होने से उसका सिर अदिति के चूचियों पर आया था गले लगाते वक्त, दीपक के गाल अदिति की चूचियों पर दबे हुए थे गले लगाते वक़्त। यह सोचकर विशाल को बड़ा मजा आया की उसके घर के सभी मर्दो ने अदिति को चख लिया है अब तो। बीमार होने का नाटक करते हुए उसने छुट्टी लिया

और आफिस से निकला।

तेज रफ्तार से ड्राइव करते हुए जल्दी पहुँच गया अपार्टमेंट तक। जल्दी से कार अंडरग्राउंड पार्किंग में रखा और लिफ्ट से ऊपर गया जल्दी से, और देखा की ओम ने उसके फ्लैट के दरवाजे से कान लगाया हुआ है। विशाल

और ओम ने फुसफुसाते हुए बात किया।

ओम बोला- “अब वह दोनों बेडरूम में चले गये शायद अभी कुछ देर पहले दोनों यहीं लाउंज में बातें कर रहे थे...”

विशाल ने वैसे ही फुसफुसाते हुए पूछा- “तुमने क्या बात करते हुए सुना उन दोनों को?"

ओम ने जवाब दिया- “लड़का अदितिजी को “भाभी” बुला रहा था और अदिति मेम उसको “बेटा” बुला रही थी..”

विशाल ने बेचैन होते हुए कहा- “बताओ मुझे क्या बात किया? दोनों ने एक दूसरे को क्या कहा?"

ओम ने कहा- “कुछ ज्यादा नहीं सुना मैंने साब...”

बस अदिति मेम ने कहा- “क्यों तुमने कालेज को बंक किया बेटा? हम्म... तुमको अच्छी तरह से पढ़ना चाहिए, मुझको थोड़े दिन के लिए भूल जाओ तुम और मन लगाकर पढ़ाई करो.”

और लड़के ने जवाब दिया- “नहीं कर सकता भाभी, आपकी बहुत याद आती है। दिन रात आपको सोचता रहना हूँ, लीना मेरा मजाक उड़ाती है...”

विशाल ने सिर को झटका दिया और धीरे से अपनी चाभी को दरवाजे से लगाया, और जैसे ही दरवाजा अनलाक हुआ विशाल ने ओम को वापस जाने को कहा। विशाल अंदर दाखिल हो गया तो उसका दिल जोरों से धड़कने

लागा और उसने एक गहरी साँस लिया। खुद अपने घर में एक चोर जैसा था उस वक्त। कुछ देर रुका सुनने को की कोई आवाज सुन सके। तब उसको पता चला की दोनों किचेन में बातें कर रहे थे। अब विशाल की समझ में नहीं आया के किधर जाए, कहाँ छुपे? जब वह लोग किचेन से वापस आते वक्त बेडरूम में भी गये तो विशाल दिख जाएगा उन लोगों को, क्या करे विशाल परेशान हुआ।

फिर भागकर अपने बेडरूम में घुस गया, मगर यहाँ किधर छुपे? जगह नहीं थी छुपने को बेडरूम में। तो बाहर निकला बेडरूम से, वापस लाउंज में गया और सोफे के पीछे फर्श पर बैठ गया अपने आपको छुपाते हुए। दिल की धड़कनों को संभालते हुए विशाल ने प्रार्थना किया की वह दोनों वापस आकर सोफे पर नहीं बैठें। उस वक्त वो खुद अपने ही दिल की धड़कानों को सुन सकता था, इतना जोर से दिल धड़क रहा था। अब उसको इस बात का भी डर था की उसको छींक या खाँसी आ गई तो क्या होगा। हाँफ रहा था और एक हाथ को अपने सीने पर रखकर थोड़ा सा सिर उठाकर अपने बेडरूम के दरवाजे की तरफ देख रहा था। दिल ऐसा धड़क रहा था की उन लोगों की बात-चीत उसको नहीं सुनाई दे रही थी बल्की सिर्फ खुद की धड़कन सुनाई दे रही थी।

कोई 5-10 मिनट के बाद कारिडोर में आवाजें सुनाई दि उसे। और वो आवाजें उसकी तरफ बढ़ रही थीं। विशाल प्रार्थना करने लगा की दोनों बेडरूम में जाए, लाउंज में नहीं आएं। दिन के 1:45 बजे थे और दिन का उजाला फैला हुआ था लाउंज में और सब कुछ साफ दिख रहा था, तो वो आसनी से दिख जाते अगर वह लोग लाउंज में

आते तो।

अदिति और दीपक एक दूसरे की कमर में हाथ डाले चले आ रहे थे और ठीक बेडरूम के दरवाजे के पास खड़े होकर बातें करने लगे। विशाल प्रार्थना करता गया के दोनों बेडरूम का दरवाजा खोलकर अंदर चले जाएं। मगर

वह दोनों नहीं जा रहे थे, बल्की खड़े होकर बातें किए जा रहे थे। अदिति एक बहुत सेक्सी और खूबसूरत ब्लाउज़

और स्कर्ट में थी उस वक़्त। बस कमाल की दिख रही थी। वो कुछ ऐसी दिख रही थी और विशाल के आने से पहले उसने दीपक के लिए कुछ ऐसे पोज दिए थे लाउंज में।

अब दोस्तों कौन ऐसी जिश्म वाली के सामने होते हुए खुद को रोक सकता है? ऐसी जांघे और चूचियां जो इन तस्वीरों में दिख रहे हैं इसके सामने होते हुए कोई नामार्द का भी खड़ा हो जाए।

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कड़ी_41 विशाल ने देखा अदिति को दीपक के साथ

आखीरकार, विशाल ने चैन की साँस लिया जब देखा की अदिति बेडरूम का दरवाजा एक हाथ से खोल रही है जबकी उसका दूसरा हाथ दीपक की कमर पर था। दोनों अंदर गये दरवाजे को थोड़ा सा खुला छोड़कर। अदिति इसलिए दरवाजा खुला छोड़ती है हमेशा क्योंकी एक तो आदत है, रात को भी बेडरूम का दरवाजा खुला रहता है क्योंकी सिर्फ वो और विशाल रहते हैं। इसलिए की मेनडोर बिल्कल बंद लाक रहता है था की उस वक्त उसके और दीपक के अलावा कोई और है भी तो नहीं।

अपने माथे से पशीना पोछते हुए विशाल को अब आराम मिला, जब दोनों बेडरूम के अंदर चले गये। अब विशाल उठकर बहुत सावधानी से चलता हुआ गया, गौर से खयाल करते हुए की किसी भी चीज से नहीं टकराए। चुम्मी की आवाज सुनाई देने लगी बेडरूम से तो विशाल ने कदम तेज बढ़ाया देखने के लिए। मगर जब देखने आया तो चुम्मी नहीं थी, दीपक अदिति की चूचियों को चूस रहा था। और दोनों उस वक्त खड़े थे आलमारी के पास। क्योंकी दीपक छोटे कद का था, तो उसका मुँह ठीक अदिति की चूचियों तक पहुँचता था। इसलिय वो अदिति की टाप को ऊपर करके चूचियां चूस रहा था और अदिति अपनी उंगलियों को दीपक के बालों में फेर रही थी। हर बार जब चूसते हुए चूची को मिस करता था तो चुम्मी की जोर से आवाज आती थी। अदिति कुछ भुनभुना रही थी दीपक के बालों में उंगलियां फेरते हुए। विशाल ने सुनने की कोशिश किया के अदिति क्या कह रही थी या गा रही थी। नहीं सुन पाया तो उसके होंठों को फालो करते हुए समझा की अदिति भुनभुनाते हुए यह कह रही थी- “मेरा मुन्ना, मेरा बच्चा, मेला बेटा मम्मा की दुधू पी रहा है हम्म्म्म..."

विशाल को करेंट जैसा लगा और सोचा- “क्या बकवास है? यह क्या है अदिति दीपक के साथ माँ-बेटे का रोल प्ले खेल रही है। यह तो मुझसे भी एक कदम आगे है। कमाल हो गया यह तो। यह तो वही हुआ मेरी बिल्ली मुझसे म्याऊँ..”

विशाल को मन किया अपने सिर को दीवार से पीत्ने को। मगर शैतानी आँखों से देखता गया दोनों को, देखना चाहता था की क्या सच में अदिति माँ बेटे का रोल-प्ले खेलेगी दीपक के साथ या नहीं?

उसकी चूचियों को चूसते हुए ही अदिति दीपक को संभाले हुए चलती गई बेड तक। बेड तक आने के बाद

अदिति बैठ गई बेड पर। मगर दीपक ने चूचियों को नहीं छोड़ा, चूसते चला जा रहा था। झुक कर चूस रहा था अदिति के बैठने के बाद। फिर अदिति अपनी पीठ पर लेट गई बेड पर, और दीपक उसके ऊपर चढ़ गया तब भी चूची को चूसते हुए ही। दीपक का पूरा जिश्म अदिति के बदन के ऊपर था उस वक्त।

विशाल ने अपने लण्ड को सहलाते हुए थोड़ा और करीब से देखा अदिति की नजरों से बचते हुए।

अदिति ने धीरे-धीरे दीपक की कमीज उतारी जबकी वो उसकी चूचियों से लगा हुआ था, और अदिति की कांखें चाट रहा था और उसके जिश्म के दूसरे नाजुक हिस्सों पर लगा हुआ था। दीपक का एक हाथ अदिति की जांघों के बीच से होते हुए उसकी पैंटी की तरफ बढ़ रहा था और उधर अदिति उसका पैंट उतार रही थी। दीपक जब अपने अंडरवेर में रह गया खड़े लण्ड के साथ, उसका लण्ड खड़ा था ऊपर की तरफ अंडरवेर को उठाकर।

अदिति जिसको देखकर खिलखिला कर हँसी और उसको अपनी एक उंगली से छते हए कहा- “कितना फन्नी है यह तेरा, सीधा उधर देख रहा है जहाँ इसको अंदर जाना है, अपनी जगह खूब जानता है यह हीहीहीही..."

तब दीपक ने अपने जिश्म को सीधा करते हुए अदिति को अपनी तरफ खींचा और अपनी कमर को उसके मुंह की तरफ किया, और लण्ड अंडरवेर समेत अदिति के मुंह पर रगड़ा। अदिति ने अपने गाल को उसके उभरे हुए अंडरवेर पर मला और लण्ड को चमा जो तब भी अंडरवेर में ही था। उसकी उस हरकत से दीपक के जिश्म में एक थरथराहट सी हुई और उसकी आss निकल गई।

अदिति ने कहा- “देखो तुम्हारा अंडरवेर गीला हो गया है तुम्हारे प्री-कम से बेबी। चलो इसको चखती हूँ मेरे लाल...” और अदिति ने अपनी जीभ को उसके अंडरवेर के उस हिस्से पर फेरा, जहाँ भीगा हुआ था और अपनी जीभ से उस हिस्से को और भी भीगो दिया अदिति ने चाटते हुए।

दीपक ने पूछा- “कैसी लज्जत है मोम? तुम अपने इस बेटे की वीर्य को हमेशा टेस्ट करती हो, कैसा टेस्ट है मोम? तुमको पसंद है ना मम्मी?"

यह सुनकर विशाल अपने सिर को झटके देते हुए खुद से कहा- “ओह माई गोड... यह दोनों भी रोल-प्ले खेलते हैं? अदिति मेरी ट्रिक्स को इसके साथ इश्तेमाल करती है, शायद दूसरों से भी। मैं सिखाता हूँ और यह अपने लिए इश्तेमाल करती है मजा लेने के लिए...” तब विशाल ने फिर याद किया की जब उसने पूछा था अदिति से

की उस दिन किस तरह से दीपक ने तुमको हग किया था गाँव में।

तब अदिति ने यही जवाब दिया था की जैसे एक माँ अपने बेटे को हग कर रही थी। मतलब यही रोल-प्ले वाली माँ है दीपक की। यह दोनों माँ बेटे का रोल-प्ले करते हैं, हालांकी अदिति बहुत छोटी है उम्र में दीपक की माँ होने के लिये। फिर भी मजा लेती है माँ कहलाने का और दीपक से माँ बोलते हुए सुनने की करते वक्त। वाह

अदिति वाह। विशाल सोच रहा था किसने यह रोल-प्ले स्टार्ट किया होगा, अदिति या दीपक ने? हो सकता है विशाल के भाई होने के नाते दीपक के मन में भी विशाल की तरह फँटसीस हों और उसी ने यह रोल-प्ले शुरू क्या हो। क्योंकी भाभी तो माँ समान होती है और वो अदिति में भाभी माँ देखता है तो उसी ने ऐसा सोचकर रोल-प्ले शुरू किया होगा।

एक दिन सब पता चल जाएगा विशाल को। उसने सोचा एक दिन अदिति से सब उगलवाएगा वो। कुछ भी हो फिलहाल विशाल का लण्ड कड़क खड़ा हुआ था और उन दोनों को देखते हुए बड़ा मस्त एंजाय कर रहा था, इसलिए बाकी खयालों को एक तरफ करते हुए उन दोनों को देखना बेहतर समझा।

फिर जल्द ही अदिति ने दीपक का अंडरवेर निकाल फेंका और खुद अपने कपड़े उतार दिए। दोनों बिल्कुल नंगे एक दूसरे की बाहों में थे पलंग पर, 69 पोज किए थे उस वक्त। अदिति के हाथ में उसका लण्ड था जिसे वो चाट और चूस रही थी आराम से। जबकी उस तरफ दीपक की उंगलियां अदिति के चूत के अंदर थी और जीभ चूत के कोने में रस चाट रही थी। अदिति ने दीपक के लण्ड को गले तक ले लिया था चूसते हए और दीपक कमर हिलाते हुए और उसके मुँह में ठूसने की कोशिश में लगा हुआ था, और छोटी-छोटी तड़पती आवाज भी दे रही थी अदिति दीपक की छुवन से।

विशाल से रहा नहीं गया और अपने लण्ड को निकालकर मूठ मारते हुए दोनों को देखता गया। खासकर विशाल

अदिति के चेहरे में देख रहा था की किस तरह से प्यार और आराम से सब कर रही थी, जैसे उसके लिए मामूली बात थी। उसके चेहरे में बिल्कुल वैसा ही प्यार और चाहत झलक रही थी जैसे विशाल से करते वक्त होती थी। बल्की कुछ ज्यादा ही। कुछ ही देर बाद दीपक ने पोजीशन चेंज कर लिया और अब अदिति की जीभ उसके मुँह में थी और अदिति ने दोनों टाँगें फैलाये हुए थे, दीपक को उनके बीच लेने के लिए।
 
कड़ी_42 अंजली उस रात को विशाल ने अदिति को खूब चोदा

अपने दिमाग में दीपक को सोचते हुए और याद करते हुए की कैसे दोनों माँ बेटे का रोल-प्ले करते हुए किए थे, वो उसको बहुत उत्तेजित कर रहा था। विशाल चोदकर झड़ भी गया लेकिन अदिति नहीं झड़ी थी।

अदिति ने करने के बाद उसको छेड़ते हुए कहा- “क्या बात है आज ना कोई रोल-प्ले और ना ही तुमने मेरा खयाल किया की मैं खुश हुई या नहीं? बस अपने लिए कर लिए। तुमने बिल्कुल वैसे किया जैसे एक साल पहले किया था। याद है तुम्हें मैं एक बुत जैसी बनी थी और तुम बस अपने आपको खुश करने के लिए किया करते

थे, हेहेहेहे.."

विशाल ने अदिति के चेहरे में देखते हुए कहा- “और अब तुम बहुत तजुर्बे वाली हो गई हो ना?”

विशाल का मन किया की उससे एक बातचीत शुरू करे उस बारे में, मगर फिर सोचा की अदिति समझ जाएगी की उसको कुछ जरूर पता चल गया है। फिर विशाल और कुछ नहीं देख पाएगा इसलिए चुप रहा।

अदिति सोचती रही की क्यों विशाल ने कोई रोल-प्ले नहीं किया और क्यों इतनी जल्दी करके झड़ भी गया?

औरत होने के नाते अब अदिति को बहुत अच्छी तरह मालूम था की कब विशाल को सेक्स की सख़्त जरूरत होती है, और कब किसी रोल-प्ले का सहारा लेकर करना पड़ता है उसे। यही सब सोचते हुए अदिति सो गई।

दूसरे दिन विशाल ने अदिति को आदित्य बनकर फोन करने को सोचा। वो देखना चाहता था कि क्या अदिति आदित्य को रिसीव करना पसंद करेगी अब भी? और जब फोन किया तो अदिति ने बात करने से मना किया आदित्य के साथ। विशाल को हैरानी हई की क्यों अब अपने नये प्रेमी से बात नहीं करना चाहती है? क्या इसलिए की अब बहुत सारे मर्द मिल रहे हैं उसे, या किसी नये चेहरे की तलाश करना चाहती है। खैर, विशाल ने

आइडिया ड्रॉप कर दिया आदित्य वाला।

अब अपार्टमेंट में कुछ चल रहा था जिसके बारे में अदिति को पता था, पर उसने विशाल को नहीं बताया था अपने मतलब के लिए।

एक छोटी उमर की कालेज गर्ल थी अपार्टमेंट में, अंजली नाम की जो अदिति के फ्लैट से 3 घर की दूरी पर रहती थी। उस लड़की का अपने डैड के दोस्त के साथ एक अफेयर चल रहा था और एक दिन अदिति के सामने दोनों आ गए थे लिफ्ट से निकलते हुए और उस दिन से अदिति ने उन दोनों पर नजर रखा।

अदिति एक बहुत हाट कालेज गर्ल थी, माडर्न, नये जमाने की, सेक्सी और जो जी भर के भरपूर जिंदगी के मजे लूट रही थी। अंजली का डैड एक बहुत बिजी बिजनेसमैन था, और उसकी माँ सरकारी काम करती थी जो रात को हमेशा लेट वापस आया करती थी। अंजली उनकी एकलौती औलाद थी। अक्सर रातों को अंजली के डैड के दोस्त लोग आते थे बिजनेस के बारे में डिस्कशन वगैरा करने। उन सब में से एक था मिस्टर राजन 50 साल का जो कई रातों को लगातार आता गया, सीरियस बिजनेस के डिस्कशन के लिए अंजली के डैड के साथ।
 
उस दौरान एक रात को जब अदिति अपना होमवर्क कर रही थी और एक छोटी सी फ्राक में थी, तो राजनजी

की नजरें कई बार अंजली पर गई, और अंजली ने सिर्फ एक नार्मल स्माइल किया उनसे। और उस वक्त अंजली की माँ थकी हारी दिन भर के काम से सो गई थी। अंजली के डैड और मिस्टर राजन एक विस्की का ग्लास हाथ में लिए अपने बिजनेस के बारे में बहस कर रहे थे।

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उस वक़्त अंजली लिविंग रूम के दूसरे साइड में बैठी होमवर्क कर रही थी जहाँ उसकी स्टडी थी। एक पतला सा परदा लगा हुआ था उस लिविंग रूम और अंजली के स्टडी के बीच, इसलिए दोनों तरफ से सब दिख रहा था। एक दूसरे को कोई भी देख सकता था। हवा से जब वो परदा हट जाता था तो राजन को अंजली की जांघे दिखाई दे रही थीं टेबल के नीचे। फिर राजन की नजरें अंजली के बदन पर ऊपर से नीचे तक देखती गईं, उसके खुले बाल, हवा से पर्दे को उसके चेहरे को छूना और अंजली का हाथ से पर्दे को बार-बार हटाना।

अंजली को पता नहीं था की राजन उसको वैसे देख रहा है उस वक्त। विस्की का नशा थोड़ा सा राजन के दिमाग में चढ़ गया तो उस वक्त उसको यह नहीं दिखा की अंजली कम उमर की एक कालेज गर्ल है, उसके लिए उस वक्त सामने एक औरत, एक मादा थी, जो सेक्सी और आकर्षक दिख रही थी। राजन ने पूरी कोशिश किया अंजली के ध्यान को आकर्षित करने की। और जब अंजली ने देखा की वो उसको देख रहा है तो उसने बस एक और स्माइल किया और पर्दे को थोड़ा सा हटा दिया एक दूसरे को देखने के लिए।

राजन एक बार विस्की का ग्लास हाथ में लिए छोटे-छोटे घुट पीते हए चलकर अंजली के टेबल के पास गया और उसके डैड के सामने ही फार्मल तरीके से बात किया यह कहते हुए- “डूयिंग होमवर्क जवान गर्ल? हाँ? सो हाउ इस इट गोइंग ओन? स्टडीयिंग हार्ड आई सी...”

अंजली ने अपने होंठ को दाँतों में दबाते हुए एक छोटी सी मुश्कुराहट के साथ और थोड़ी शर्माते हुए सिर्फ “हामम..” कहा और अपने डैड के चेहरे को देखा की कहीं उसका कोई नेगेटिव जवाब तो नहीं है। तो जब अंजली ने देखा की उसके पापा को कोई ऐतराज नहीं, क्योंकी राजनजी नार्मल बात-चीत कर रहा था तो अंजली ने भी राजन से नार्मल बात किया। अंजली के डैड उस वक्त बहुत सारी फाइलों के बीच कुछ तलाश रहा था व्हिस्की के घुट लेते हुए और राजन से एकाध बात करता जा रहा था जो उस वक़्त अंजली के पास खड़ा था उसकी कापी, बुक को हाथ में लेकर देखते हए की अंजली किस टाइप का होमवर्क कर रही है?

राजन ने अंजली के डैड को देखते हुए की वो उसको को देख रहा है की नहीं? और जब नहीं देख रहा था उसके तरफ तब कई बार राजन ने अपनी हथेली के दूसरे साइड को अंजली के बाहों पर फेरा। अंजली के रोंगटे खड़े हो गये उस मर्द की छवन से। अंजली बस स्माइल कर रही थी अपने डैड की तरफ देखते हए की क्या उसने कुछ नोटिस तो नहीं किया? अंजली को पता नहीं था की राजनजी ने जानबूझ कर उसके बाजू पर हाथ फेरा था, या अपने आप वैसा हो गया था।

राजन ने झुक कर अंजली की नर्म, मुलायम क्लीवेज को देखने लगा क्योंकी उस वक़्त अंजली डेस्क पर झुकी हुई थी लिखने के लिए। उसकी पतली ब्रा की स्ट्रैप थोड़ी बहुत नजर आ रही थी, उसके कंधे पर और राजन का खड़ा हो गया अंजली की छोटी चूचियों को देखकर, उसकी छोटी नंबर की ब्रा में।

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कड़ी_43 अंजली जारी

अंजली के डैड ने कहा- “राजन, उसको अपने काम करने दो यार। आओ फाइलों को देखते हैं ना.."

राजन ने कहा- “यार मुझको मेरे कालेज के दिन याद आ गए, किस तरह मैं होमवर्क किया करता था, देखो कैसे इसने अपनी कलम पकड़ा है, इट्स फन्नी हेहेहेहे...” असल बात यह थी की राजन इन बातों से अपने मकसद को छिपा रहा था की वो अपने दोस्त की बेटी पर नजर रखा हुआ है।

अंजली ने पूछा- “मेरे कलम पकड़ने में क्या फन्नी है?"

तब राजन को अंजली को छूने का मौका मिल गया। उसने अंजली की कलम अपने हाथ में लिया, मुड़कर उसके डैड को देखा की इधर देख रहा की नहीं? और जब देखा की वो तो फाइलों में बिजी हैं तो राजन ने अपनी छाती को अंजली की पीठ पर दबाते हुए पीछे से उसके दोनों हाथों को अपने हाथ में लिया विस्की का ग्लास मेज पर रखकर, और दिखाया अंजली को- “देखो मैं ऐसे पेन पकड़ता था और करता हूँ.”

राजन का यह सब करते हुए खड़ा हो गया था और उसने अपने लण्ड को पैंट के अंदर से ही अंजली की जांघों पर दबाया, क्योंकी अंजली छोटी सी फ्रोक में थी और अपनी एक टांग को दूसरी टांग पर क्रास किया हुआ था तो जांचें साफ बाहर थी। राजन ने फिर देखा की अंजली का डैड उसकी तरफ नहीं देख रहा था तो पर्दे को कुछ इस तरह से मोड़ दिया की अगर वो इस तरफ देखे भी तो नहीं दिखेगा उसे, और उसने और जोर से अपने लण्ड को उसकी जांघों पर दबाया।

अंजली के चेहरे में लाली आ गई और उसने भी अपने डैड की तरफ देखा, क्योंकी वो समझ गई थी की राजन उसके साथ क्या कर रहा है। अंजली ने राजनजी के मोटा लण्ड को अच्छी तरह से महसूस किया अपनी जांघों पर। उसको पता था की राजनजी थोड़ा नशे में था और फिर से अंजली ने अपने डैड की तरफ देखा। तब तक राजन अदिति के पीछे था, उसकी पीठ पर अपनी छाती को दबाते हुए, अंजली के सिर को चूमा और उसके बालों को हटाते हुए अपने होंठों को अंजली की गर्दन पर फेरा। अंजली ने एक गहरी साँस लिया और अपने दिल की धड़कनों को तेज होते महसूस किया, और राजन को अपने हथेली से धकेला, पर उसको चूमने के बाद उसके कान में फुसफुसाते हुए राजन ने कहा- “तुम एक बहुत ही खूबसूरत लड़की हो, मुझे बेहद खुशी होती अगर मेरी भी तुम्हारी तरह एक बेटी होती- मगर मैं बदनशीब हूँ के मेरे दो बेटे हैं, तुम्हारा डैड खुशकिश्मत है की उसकी तुम्हारी जैसी एक बेटी है...”

जिस तरह से राजन ने अंजली की खूबसूरती की तारीफ किया उससे अंजली को खुशी हुई और उसे अच्छा लगा।

वो तो उसको धकेलने जा रही थी मगर उसकी बातों को सुनकर और पसंद करके रुक गई और लाल चेहरे के साथ सिर को झुका लिया।

तब राजन ने उसकी बाहों पर हाथ फेरते हुए उसकी ब्रा स्ट्रैप को छुआ, और एक उंगली को स्ट्रैप के अंदर डालकर उठाते हुए पूछा- “कौन सा नंबर की ब्रा इश्तेमाल करती हो?"

अंजली को बहुत शर्म आई उस सवाल का जवाब देने में और कहा- “पता नहीं... आप जाओ यहाँ से मेरे पापा देख लेंगे.."

राजन ने गर्व महसूस किया की उसने अंजली को पटा लिया और सीधा खड़े होकर अपना व्हीस्की का ग्लास लिया और ऊँची आवाज में कहा- “यार तुम खुशकिश्मत हो की इतनी प्यारी सी बेटी है तुम्हारी, मुझे बहुत खुशी होती अगर मेरी कोई ऐसी बेटी होती तो...”

अंजली के डैड ने उसकी बातों का ख्याल नहीं करते हुए कहा- “यार आओ काम निपटा लेते हैं यार.."

अंजली एक ऐसी लड़की थी जिसको प्यार, ममता और अपनापन नहीं मिला था अपने माँ बाप से। सब अपने काम और बिजनेस में बिजी रहते थे। अंजली के लिए इनके पेरेंट्स को कभी वक्त ही नहीं मिला था। और जब राजन ने वैसे किया उसके साथ तो उसको अच्छा लगा की किसी को उसका खयाल तो आया। बार-बार वो अपनी जगह से मुड़कर राजनजी को देखती रही और राजन तो यही चाहता था तो वो भी आँखों से खेल रहा था अंजली के साथ। फ्लाइंग किसेस भी भेजा राजन ने अंजली को, जब उसके डैड नहीं देख रहे थे।

अंजली बस मुश्कुराती जा रही थी, जीभ निकलकर किस किया दूर से। राजन ने अंजली से और बहुत सारी ऐसे हरकतें किए उसने उस लड़की के साथ और अंजली तो खुश हो रही थी। उस रात को अंजली ने मिस्टर राजन

को सपने में देखा। वो एक अकेली तन्हा लड़की थी, अफेक्सन की जरूरत थी उसे और राजनजी ठीक उसी वक़्त उसकी जिंदगी में आया।
 
उस दिन के बाद कई रातों को राजनजी आए, अंजली के करीब गया, उसको छुआ, सहलाया। उसकी चूचियों को छुआ, और धीरे-धीरे उसकी जांघों पर हाथ फेरने लगा और उसकी पैंटी तक हाथ गया राजन का। ऊपर ब्रा के अंदर हाथ डालकर उसकी छोटी चूचियों को मसला।

वैसे रातों में से एक रात को अंजली के डैड मूतने को गए टायलेट, तो जल्दी से राजन अंजली के पास गया और पूछा- “क्या तुमने कभी किसी को किस किया है?"

अंजली ने कहा- “नहीं..”

राजन ने कहा- “आज मैं तुमको पहले किकिसिंग का पाठ पढ़ाऊँगा। जल्दी करना होगा इससे पहले की तुम्हारे डैड वापस आएं?"

अंजली उत्तेजित हो गई। यह उसके लिए नया अनुभव था।

राजन ने उससे कहा- “तुमको मुझेसे अपनी बाहों में लेना चाहिए..."

अंजली ने जल्दी से राजन को अपनी बाहों में जकड़ा और अपने पंजे पर खड़ी हो गई और अपने होंठों को राजन के होंठ तक पहुँचाने के लिए सिर को ऊपर की तरफ उठाते हुए राजन के होंठ तक जाने को ट्राई किया, और राजन ने अंजली को जैसे एक छोटी बच्ची को अपनी बाहों में लेकर अपने सिर को झुका कर उसके मुँह को अपने मुँह में ले लिया। अंजली को अपना मुँह खोलने को कहा राजन ने। अंजली ने मुँह खोला मगर टायलेट की तरफ देखती गई की कहीं उसके डैड वापस ना आ जाएं।

राजन ने आराम से अंजली के चेहरे को अपने दोनों हाथों में लिया, गाल को थोड़ा सा दबाया ताकी उसका मुँह खुले और अपनी जीभ को अंजली के मुँह के अंदर डालते हुए उसको चूसने को कहा। अंजली ने वही किया, और दोनों की जीभ एक दूसरे के मुँह में घुलने लगे। उसी समय राजन ने अंजली के चूतड़ों पर अपने हाथ को दबाते हए अपने लण्ड पर जोर से दबाया और रगड़ा भी। उसका पतला सा जिश्म उसकी चौड़ी बाहों में लगता था अंजली एक मान्स्टर को किस कर रही थी।

राजन ने धीरे से अपने हाथ को उसकी ड्रेस के नीचे करके उसकी गाण्ड पर फिराते हए उसकी पैंटी को थोड़ा हटाकर अपनी उंगली को वहाँ चलाना चाहा और आगे तरफ अपने लण्ड को उसकी पैंटी पर दबाता गया, ये सब किस करते वक्त हुआ। अंजली को सब महसूस हो रहा था, उसको पता था की राजन का हाथ उसकी पैंटी को हटा रहा है, उसको मालूम था की उसका लण्ड उसकी चूत के ऊपर पैंटी के ऊपर ही रगड़ रहा है और वो सब करने दे रही थी। सब ट्राई कर रही थी वो भी। एक लगाव सा हो गया था उसको राजन के साथ।

फिर राजन किस को रोक कर अंजली की गर्दन को चूमते चाटते हुए उसकी चूचियां की तरफ जाने लगा, और जैसे ही उसकी चूचियों को राजन की जीभ ने छुआ, टायलेट का फ्लश सुनाई दिया और झट से अंजली निकली उसकी बाहों में से।

राजन ने फुसफुसाते हुए कहा- “यह तुम्हारी जिंदगी का पहला किस था हमेशा याद रखना..."

अंजली ने अपना मुँह पोंछते हुए उसको एक शर्मीली मुश्कान के साथ देखा और अपनी जीभ को अपने होंठों पर फेरते हए बैठ गई अपनी टेबल के सामने, जिस तरफ से उसका डैड आ रहा था उस तरफ देखते हए।

फिर कुछ दिन बाद जबरदस्त कुछ होने लगा दोनों के बीच। राजन अंजली से मिलने आने लगा। जैसे ही अंजली कालेज से घर वापस आती थी कोई 3:30 बजे क्योंकी उस समय अंजली के माँ बाप काम पर होते थे। पहले ही दिन जब उस वक्त आया तो उसकी जैक-पाट लग गई। अंजली तभी वापस आई थी कालेज से और अपनी यूनिफार्म में थी जब राजन ने डोरबेल बजाया। और जैसे ही अंजली ने दरवाजा खोला वो राजन की बाहों में पाई गई किस करते हुए और दोनों जल्द ही बिस्तर पर पाए गए। एक जवान कालेज गर्ल को उसकी स्कूल यूनिफार्म में बेड पर लेटाना और उसकी यूनिफार्म उतारकर उसको चोदने में एक अलग ही मजा होता है यह राजन ने अनुभव किया उस वक्त। वो भी एक 50 साल के मर्द और एक कालेज गर्ल कालेज की यूनिफार्म में किया सीन था। राजन ने उसकी स्कर्ट के नीचे हाथ डालकर स्कर्ट को धीरे-धीरे उठाता गया।

राजन ने पूछा- “क्या तुम्हारे डैड ने तुमको कभी ऐसे प्यार किया है बेबी? उसने तुमको छुआ है कभी? अगर तुम मेरी बेटी होती तो मैं तुमको हर रोज ऐसे ही प्यार करता कपड़े उतार के तेरे...” वो अंजली को चूमता चाटता गया जबकी अंजली सांस लेने को तड़प रही थी।

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कड़ी_44 अंजली और राजन ने अदिति से बात करने का निर्णय लिया

राजन बेहद खुश था की उसको एक टीनेज लड़की मिल रही थी बेड पर लेने को। उसके लिए एक सपना सच होने वाली बात थी। फिर से उसने अपनी तकदीर का शुक्रिया किया की 50 साल से ऊपर होने पर भी उसको एक यूनिफार्म में लड़की मिल रही थी बिस्तर पर लेटाने को।

अंजली को चूमते हुए वो उसकी जांघों पर यूनिफार्म के नीचे हाथ फेरते जा रहा था, उसकी पैंटी की तरफ बढ़ते हुए। अंजली थोड़ा हिचकिचा रही थी शुरू में, पर आखीर में उसने खुद को समर्पण कर दिया। उस उमर में अंजली सेक्स में बहुत इंट्रेस्टेड थी, उसकी जिश्म की माँग थी, और कालेज में सेक्स और आर्गेज्म के बारे में ही बातें किया करती थी सहेलियों के साथ। वो सेक्स की पहचान करना चाहती थी, ट्राई करना चाहती थी, एक लण्ड को अपने अंदर महसूस करना चाहती थी। इसीलिए खुद को राजन के हवाले कर दिया उसने।

अंजली ने कभी एक पुरुष अंग को नहीं देखा था। इसलिए उसकी बहत चाह थी एक लण्ड को देखने की, छुने और थामने की। इसी तरह उसकी सेक्स लाइफ की शुरुवात हुई खुद के डैड के दोस्त के साथ। क्योंकी उसकी जिंदगी में और कोई पुरुष दोस्त नहीं था उन दिनों।

तो हआ यह था की अंजली हर शाम को कालेज से आने के बाद राजन को अपने घर में रिसीव करने लगी। हर शाम को 4:30 बजे राजन अंजली को चोदने आता था। और शाम 7:00 बजे उसके माता पिता के आने से पहले वापस चला जाता था।

एक दिन अदिति कहीं से वापस आ रही थी तो उन दोनों से मिली लिफ्ट में। अदिति एक बहुत खूबसूरत साड़ी में थी, जिसमें उसकी कमर, नाभि, बाजू, पीठ सब दिख रही थी और राजन ने अदिति को देखना शुरू किया अंजली को छोड़कर। अदिति को पता था की वो आदमी उसके जिश्म को देख रहा था उस वक्त। क्योंकी उसके लिए यह मामूली बात थी। सब मर्द तो उसको वैसे ही देखते थे।

जब वह सब लिफ्ट से निकले तो अदिति सामने चल रही थी और राजन ने जानबूझकर अपने कदम को थाम लिया अदिति को देखने के लिए की वो कौन सी फ्लैट में जाएगी। अपने दरवाजे तक पहुँचने से पहले अदिति ने तीन बार मुड़कर राजन को देखा। उसकी ब्लाउज़ बैकलेश थी और लेश थे कंधे और पीठ पर, और सामने एक डीप 'वी' कट था। उसकी गोरी बेदाग चमड़ी, उसकी मुलायम जिश्म ने राजन को वहीं रोके रखा पीछे की तरफ उसको निहारते हुए। \

अदिति को सब पता था उसी वक़्त। जब अदिति झकी की-होल में चाभी डालने के लिए तो उसकी क्लीवेज का नजारा कुछ ऐसा था की कोई भी मर्द दीवाना हो जाता, और अंजली के साथ वाले राजन का वही हाल था उस वक़्त। अब अंजली ने भी देखा की उसका ओल्ड पार्टनर किस तरह से अदिति को निहार रहा था और अंजली को भी अदिति जैसी दिखने की इच्छा हुई, वैसी ही खूबसूरत, कामुक, सेक्सी, और हाट। अंजली सोच रही थी कब उस उमर को आएगी की मर्द उसको वैसे देखें। मगर उस वक्त वो बहुत छोटी उमर की थी और अदिति को 5 प्रतिशत भी नहीं मैच करती थी।

अदिति की क्लीवेज निहारने के बाद राजन अदिति की पीठ देखने लगा, जो बेदाग और खूबसूरत थी। अदिति के जिश्म का एक-एक हिस्सा तराशा हुआ था। जब वो झुकी थी चाबी खोलने में तो उसकी गाण्ड साड़ी में लपेटी हुई एक ऐसा नजारा दे रही थी के क्या कहना, उसकी कर्व, शेप, फिगर सब कुछ बिल्कुल तुला नपा हुआ था जैसे। हर कदम जो अदिति लेती थी चलते वक्त उसकी कमर, चूतड़, वेस्ट लाइन सब इतना परफेक्ट होते थे की बयान करना मुश्किल है।

उस रोज जब राजन अंजली को चोद रहा था तो दिमाग में वो अदिति को सोचते हए चोद रहा था। बाद में राजन ने अंजली से अदिति के बारे में बात किया और उसकी इन्फर्मेशन ली अंजली से। अंजली से राजन को पता चला की अदिति एक हाउसवाइफ है और दिन भर घर पर ही रहती है और पति काम पर होता है शाम तक

उधर अदिति घर के अंदर जाने के बाद सोचने लगी की वो आदमी कौन था जो उसको वैसे घूर रहा था? उसको पहले कभी नहीं देखा था इधर, पर अंजली के डैड को अदिति जानती थी। तो अदिति ने यह सोचा की वो आदमी क्या करने आया है जब अंजली घर पर अकेली है, कालेज से वापस आने के बाद? फिर अदिति ने सोचा वो शायद अंजली का मामा, चाचा या कोई होगा। और उस दिन के बाद अदिति ने देखना शुरू किया की क्या वो आदमी दूसरे दिनों को भी अंजली के साथ आता है, जब अंजली कालेज से वापस आती है।
 
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