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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

और दूसरे दिन राजन भी देखना चाहता था कि क्या अदिति उसको नजर आएगी जब लिफ्ट से निकलकर अंजली के यहाँ जाएगा? अदिति के दरवाजे के पास से जब राजन गुजरता था तो अपने गले को साफ करते हुए गुजरता, अदिति को सुनाने के लिए की वो बाहर से गुजर रहा है।

अदिति अपनी छत पर से नीचे उन दोनों को देखती थी, जिस वक्त अंजली कालेज से वापस आती है। और तकरीबन हर रोज अदिति ने उस आदमी को अंजली से साथ आते हुए देखा। राजन ने भी अदिति को कई बार देखा छत पर। अंजली ने भी खयाल किया की हर रोज अदिति उन दोनों को देखती है तो अंजली और राजन ने इस बारे में बात किए जैसे बिस्तर पर गये।

अंजली ने कहा- “पता नहीं के अदिति मेडम ने आपको हर रोज आते हुए देखा तो डैड से कह देगी अगर? मुझे डर लग रहा है...”

राजन- “मेरे खयाल से मुझे उससे बात करना चाहिए क्या कहती हो?"

अंजली- “पता नहीं, आपके खयाल से तब और भी शक नहीं पैदा करोगे आप?"

राजन- “मेरे खयाल से वो सब समझती है और उसको सब पता है आलरेडी की मैं तुम्हारा प्रेमी हूँ, और वो शादीशुदा औरत होते हुए सब समझेगी और हम उसको सब बात सीक्रेट रखने को बोल सकते हैं, चलो दोनों साथ चलकर उनसे बात करते हैं..."

अंजली- “ना बाबा ना... मैं नहीं जाने वाली, आप जाओ और उनसे कहना मुझे बदनाम नहीं करने को और मुझे परेशानी में नहीं डालने को..."

राजन- “तुम फिकर मत करो डार्लिंग मैं सब ठीक कर दूंगा। चलता हूँ उनसे बात करने, वापस आकर बताऊँगा के उसने क्या कहा। मुझे पूरा यकीन है की वो हमारे बारे में किसी को नहीं बताएगी..."

राजन ने अदिति का दरवाजा खटखटाया और अदिति स इज़्ड हो गई उसको देखकर जब दरवाजा खोला तो। अदिति एक स्कर्ट और ब्लाउज़ में थी। स्कर्ट उसकी घुटनों तक आती थी और उसकी दिल की धड़कन तेज हो गई, राजन को अपने सामने देखकर उस वक्त। असल बात यह थी की ठीक उसी वक्त अदिति उन दोनों के बारे में ही सोच रही थी और वो अचानक हाजिर हो गया। इसलिए घबरा सी गई अदिति। अब वो उस आदमी को यह तो नहीं कह सकती थी की मैं आपके ही बारे में सोच रही थी अभी।

अदिति ने पूछा- “जी क्या मदद कर सकती हूँ आपकी?"

राजन ने कहा- "मुझको एक बहुत ही जरूरी और अहम बात करनी है। इसलिए मुझको अंदर आना चाहिए। और अंजली ने मुझको बात करने के लिए भेजा है...”

अंजली का नाम सुनकर अदिति ने उसको अंदर आने को कहा और बाहर देख रही थी की अंजली भी आ रही है की नहीं?”

राजन ने कहा- "अंजली नहीं आ रही है क्योंकी उसको शर्म आ रही है। इसीलिए मैं अकेले आया है बात करने के लियो"

लाउंज में बैठे दोनों, अदिति उनके सामने बैठी, और उसकी स्कर्ट जो घुटनों तक थी बैठने से और ऊपर हो गई जिससे उसकी खूबसूरत गदराई जांघे दिखने लगीं। और राजन की आँखों को खुशी होने लगी। राजन को अपने लण्ड को पैंट में सीधा करना पड़ा, उसने किया, अदिति ने देखा और होंठों को दाँतों में दबाया।

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कड़ी_45 अदिति के घर पर राजन

कुछ देर के लिए बिल्कुल चुप्पी छा गई। कोई कुछ नहीं बोला रहा था। बिल्कुल खामोशी छाई हुई थी। अदिति उसके बोलने का इंतेजार कर रही थी क्योंकी वो कुछ कहने के लिए आया था। राजन अदिति को सिर से पैर तक देखे जा रहा था, खासकर उसके घुटनों के थोड़ा ऊपर। अदिति को पता था मगर कुछ नहीं कर पा रही थी जांघों को ढकने के लिए।

जब अदिति ने देखा की वो कुछ भी नहीं कह रहा है तो खड़े होकर कहा- “आपको अंजली के बारे में कुछ बोलना था?"

अपना गला साफ करते हुए एक तरफ देखकर राजन ने कहा- “कैसे शुरू करूँ?"

अदिति- “जी?"

राजन- “नहीं मैं सोच रहा था की कैसे शुरू करूँ...”

अदिति मुश्कुराई और सीधे उसके चेहरे में देखते हुए कहा- “लगता है की आपको अंजली की नहीं बल्की खुद अपने बारे में बात करनी है। है ना?"

राजन ने देखा की अदिति ने खुद सब आसान कर दिया यह कहते हुए और बात को बदल भी दिया, तो राजन ने कुछ और ही बात करने को सोचा और यूँ शुरू किया- “आप एक बहुत ही खूबसूरत औरत हो माई डियर."

अदिति का चेहरा लाल हो गया और मुश्कुराते हुए कहा- “थैक्स मगर आप यह तो नहीं कहने आए थे?"

राजन- “असल बात यह है की जब पहली बार मैंने आपको लिफ्ट में देखा, तो मुझे तुम इतनी अच्छी लगी की तुरंत तुमसे बात करने का मन किया था, अगर उस दिन अंजली साथ नहीं होती तो मैं जरूर तुमसे बात करता, काश अंजली उस रोज मेरे साथ नहीं होती..”

अदिति मुश्कुराई, फिर खिलखिलाकर हँसी और उसी चुलबुली आवाज में राजन से सामने वाले सोफे पर वापस बैठकर कहा- “सच? आप मजाक कर रहे हो, है ना?"

अदिति कुछ ऐसी बिहेव कर रही थी की उस अजनबी के फ्लर्टस से इंट्रेस्टेड हो रही थी और उसकी बातों को एहमियत देते हुए जिस तरह से वापस बैठ गई उसको सुनने के लिए, लगता था की हर औरत की तरह किसी मर्द से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनने में बड़ी आनंद मिल रही थी। और बेशक राजन को खुशी हुई की अदिति बिना नाराज हुए उसकी बातों को दिलचस्पी से सुन रही थी, ऊपर से हँस रही थी। तो राजन को आगे बढ़ने का हौसला मिला। तो वो सच में अदिति से फ्लर्ट करने लगा उसको आजमाने के लिए।

अदिति भी उसको फ्लर्ट करने के लिए इंतेजार कर रही थी। क्योंकी शुरू से ही अदिति को दिख गया की यह आदमी एक फ्लर्ट ही है।

राजन ने एक अजीब सी मुश्कुराहट में कहा- “हाँ तो... हुउंम्म... अम्म... तुम इतनी खूबसूरत हो की तुमको इग्नोर करना तो नामुमकिन था। जिस दिन तुमको लिफ्ट में देखा तो मैं बस समझो तुम्हारी खूबसूरती और फिगर का दीवाना ही हो गया। और तुमको सच में बाहों में जकड़ने का मन किया था। बोलो क्या अभी इस वक्त वो कर सकता हूँ? तुमको हग करने का मन कर रहा है। ना मत कहना प्लीज...”

राजन अपने सोफे से उठकर अदिति वाले सोफे जा रहा था उसके पास बैठने। और उसको अपनी तरफ आते देखकर अदिति खड़ी हो गई, और उसका चेहरा लाल हो गया, और वो दूर जाकर खड़ी हो गई राजन से उसके चेहरे में देखते हुए। डर रही थी मगर कुछ अजीब सा लगा अदिति को उसके अचानक झट से पहली मुलाकात में ही उसके करीब बढ़ने से।

राजन ने जब देखा की अदिति को घबराहट हुई तो वो वापस अपने सोफे पर बैठ गया। अदिति जहाँ खड़ी थी वहीं दीवार से चिपक गई अपने हाथ में अपने बाल को मुट्ठी में लेकर घुमाते हुए, अपने गाल पर फेरते उसकी तरफ देखती जा रही थी। फिर अदिति एक टांग को उठाकर तलवे को दीवार पर रखते हुए राजन से कुछ कहने जा रही थी। जब अदिति ने देखा की राजन की नजरें उसके जांघों पर आ गई थी, क्योंकी जब अदिति ने वैसा किया तो उसकी स्कर्ट थोड़ा ऊपर उठ गई थी और राजन को उसके दोनों जांघों के बीच वाले हिस्से दिखने लगे।

अंदर वाला ज्यादा सफेद रंग वाला मुलायम, नाजुक हिस्सा दोनों जांघों के बीचो-बीच। सब राजन को दिख गया और उसका दिल किया की तुरंत अदिति के सामने घुटनों के बल जाकर उसको कमर के बाल जकड़कर उसकी जांघों के बीच चूसना शुरू कर दे।

अदिति ने फिर टांग को सीधा करते हुए पूछा- “आप अंजली के क्या लगते हो? चाचा, मामा, या कुछ और?”

राजन ने कहा- “हम्म... हाँ हाँ..."

अदिति- “उस दिन लिफ्ट में मिलने से पहले मैंने आपको कभी भी नहीं देखा था, तो यह कैसे की आप हर रोज अंजली के कालेज से वापस आने के बाद चले आते हो?"

औरतों की उत्सुकता ऐसी ही होती है हर बात को जानने की चाहत, कुछ भी पूछने की हिम्मत। राजन को उस सवाल का जवाब देने में तकलीफ हुई, फिर उसने सोचा क्योंकी अदिति ने बात छेड़ ही दिया है तो बात कर लेनी चाहिए अब।

राजन ने कहा- “बात यह है की मैं सिर्फ अंजली के बाप का दोस्त हूँ बस। मेरी उससे कोई रिश्तेदारी नहीं है। कैसे बताऊँ तुम्हें? अंजली एक बहुत अच्छी लड़की है, मगर उसको अफेक्सन की जरूरत थी, वो अपने पेरेंट्स से नेग्लेक्टेड महसूस करती थी, कोई उसकी देख-भाल करने वाला नहीं था, अकेली थी तन्हाइयों में घिरी। तो मैं उसके डैड से बिजनेस के सिलसिले में अक्सर मिलने आता था तो अंजली से जान पहचान हुई। और... ..."
 
इससे पहले की राजन कुछ और कहता अदिति जो उसके चेहरे में शुरू से अच्छी तरह से ध्यान से देखे जा रही

थी। अचानक कहा- “वो आपके लिए बहुत ज्यादा छोटी नहीं है?"

राजन को जबरदस्त झटका लगा अदिति की इस बात से और वो बुत की तरह अदिति को देखता गया।

अदिति फिर वैसे खड़ी हो गई एक टांग ऊपर उठाकर दीवार से चिपके हुए। राजन ने फिर उसकी जांघों के बीच देखा और ऐसा दिखाया किया की कहीं और देख रहा है। और उसने सोचा की अदिति खुद बात को करने लगी जिस बात को वो करने को आया था, मगर उसको झटका जरूर लगा जिस तरह से अदिति ने पूछा की अंजली उसके लिए ज्यादा छोटी तो नहीं?

बहरहाल राजन ने कहा- “अच्छा चलो आपने बात छेड़ ही दिया है तो बता देता हूँ की मैं आपसे क्या कहने को आया था अंजली की तरफ से भी। मैं और अंजली, हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब हैं और उसको डर है की आप उसके पिता को कहीं कुछ बता ना दो। मगर मुझे पता है के आप जैसी समझदार औरत ऐसी वैसी बातों में दूसरों के मामले में अपनी टांग नहीं अड़ाएगी। फिर भी अंजली के लिए मैं आपसे यही कहने आया हूँ की आप इस बारे में किसी कुछ नहीं बताएं, हमारे राज को राज रहने दें। वो बहुत छोटी उम्र की है और अगर उसका नाम मेरे साथ जुड़ गया तो उसकी बहुत बदनामी हो जाएगी। इसलिए मैं भी आपसे दरख्वास्त करता हूँ की इस बारे में किसी से कुछ ना कहें.."

अदिति ने राजन को बहुत ध्यान से सुना, फिर कहा- “और आप समझते हो की मुझे वो करना चाहिए जो आपने कहा, मुझे आपकी बातों को सुनना चाहिए?"

राजन- “मैं नहीं सोचता की तुम एक कालेज गर्ल का नाम बदनाम करोगी। क्या तुम ऐसा कर सकती हो?"

फिर कुछ देर के लिए कोई कुछ नहीं बोला।

राजन ही ने अदिति से कहा- “सुनो, तुम इतनी दूर क्यों खड़ी हो। यहाँ आओ इधर मेरे पास बैठो। हम आपस में मिलकर इस बात को सही से करते हैं। आओ ना इधर प्लीज...”

अदिति चलकर अपने सीट पर आई जहाँ पहले बैठी थी और राजन के चेहरे में देखते हुए कहा- “ये लो मैं पास आ गई, अब आप बताओ क्या अंजली आपकी उम्र के हिसाब से आपके लिए एक बच्ची नहीं है? आप शादीशुदा होंगे, शायद आपकी बेटी होगी उसकी उमर की या उससे भी बड़ी। मुझे हैरानी इस बात की है की अंजली ने कैसे आपको अपने करीब आने दिया? आप उसके पिता से भी ज्यादा बड़े दिख रहे हो मुझे तो। अंजली बहुत अच्छी, मगर बहुत ही भोली है, मासूम है, आपने जरूर उसके भोलेपन का फायदा उठाया होगा, आपकी उम्र क्या है साहब?”

राजन ने जवाब दिया- “राजन, मेरा नाम राजन है। तुम मुझे राजन ही बुला सकती हो..” और वो उठकर अदिति के पास उसी सोफे पर बैठने गया।

अदिति इस बार नहीं गई, वहीं बैठी रही और राजन को अपने पास बैठने दिया। क्योंकी जरूरी बात चल रही थी। अदिति उसके जवाब का इंतेजार कर रही थी और क्योंकी अदिति ने गंभीरता से सवाल किया था, तो उसको यह उम्मीद थी की राजन भी गंभीरता से जवाब देगा। मगर अदिति की घुटनों से लेकर उसकी जांघे और क्लीवेज के नजारे ने राजन को उसकी बातों पर कम और उसके जिश्म पर ज्यादा एहमियत देने दिया।

राजन अदिति के पास बैठकर बोला- “मेरी उम्र कितनी हो सकता है, आप गेस करके बताओ?"

राजन जी जवान दिखते थे, कोई उसको उसकी उम्र नहीं देता था, वो अपनी उमर से 10-12 साल कम लगते थे। वो हमेशा से अपने लुक का खयाल रखता था, बहुत अच्छी तरह से ड्रेस होता था और बिल्कुल अपने उम्र का नहीं दिखता था।

अदिति ने कहा- “पता नहीं शायद 39-40 या 42 साल, यही होगी आपकी उम्र मेरे खयाल से..."

राजन ने हल्के से अपने एक हाथ को अदिति के घुटने पर रखते हुए धीरे से कहा- “आई आम ओवर फिफ्टी माई डियर, बुत आई आम ओवर दैट आई डू नोट लुक माई ज...”

अदिति ने खुले मुँह से कहा- “ओह्ह... नो। तो अंजली भी धोखा खा गई होगी, आप एक फ्लर्ट हो और आपने जानबूझ कर अंजली को फाँसा है..."

राजन ने कहा- “नहीं बिल्कुल नहीं, ऐसी कोई बात नहीं थी। ऐसा होता है जब दो लोग अकेले होते हैं, तन्हा होते हैं, और इसको कंट्रोल नहीं किया जा सकता है...” और राजन धीरे-धीरे अपने हाथ को अदिति के घुटने के ऊपर बढ़ाता गया। अदिति को मालूम था की वो क्या करना चाहता है?

अदिति ने अपने हाथ को उसके हाथ पर रखते हुए कहा- “आप बिहेव कीजिए राजन जी, आप पहली बार मेरे घर आए हो और मेरे इतने करीब नहीं आ सकते। मैं अंजली नहीं हूँ..."

तुरंत राजन ने अपने दूसरे हाथ को अदिति के कंधों पर किया और अपने मुँह को अदिति के मुंह पर करके उसको किस करने लागा। जबकी अदिति प्रतिरोध कर रही थी किस को ब्रेक करने की, मगर नहीं कर पाई। वो राजन की मजबूत बाहों में कैद हो गई थी। उसकी चूचियां राजन की छाती पर जोर से दबी हुई थीं और राजन की जीभ अदिति के मुँह को एक्सप्लोर कर रह थी, और उसका हाथ अदिति के स्कर्ट के नीचे और ऊपर बढ़ता जा रहा था उसकी पैंटी के तरफ।

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कड़ी_46 राजन ने अदिति को बहकाया

राजन अदिति को अभी नहीं चोदने वाला था। क्योंकी यहाँ आने से पहले उसने अभी-अभी अंजली को चोदा था। वो अदिति को आजमा रहा था, बस ट्राई मार रहा था की वो हाथ आएगी की नहीं? राजन बेहद आकर्षित हुआ था अदिति की चुदासी जिश्म और उसकी मदमस्त अदाओं से। उसकी मुश्कान, उसकी आवाज बात करने का तरीका और उसकी अदायें, ऊपर से उसकी लिबास, सब राजन को घायल कर रहा था, जिस दिन से उसको देखा था। अब क्योंकी अदिति के साथ अकेला था तो ट्राई करने का फायदा उठा रहा था। राजन ने सोचा की अगर अभी अदिति को चूमने और लिपटने में कामयाब हो गया तो मतलब आगे के लिए दरवाजा खुल गया समझो।

अब क्योंकी अदिति उसकी बाहों में कैद थी तो राजन देखना चाहता था कि, क्या अदिति जबरदस्ती से निकलने की कोशिश करेगी या यूँ ही थोड़ी बहुत नखरे करती है। राजन ने सोचा अगर अदिति बहुत नाराज होगी और चिल्लाते हुए उसको एक थप्पड़ मारेगी तो वो चुपचाप यहाँ से निकल लेगा। मगर राजन खुश था की अदिति ज्यादा नखरे नहीं कर रही थी और प्रतिरोध भी उतना ज्यादा नहीं कर रही थी। बस थोड़ी बहुत नखरे दिखा रही थी, बल्की ऐसा लगा राजन को की अदिति हग को पसंद कर रही थी और झूठ-मूठ का थोड़ा बहुत नखरे कर रही थी।

राजन का हाथ अदिति की स्कर्ट के नीचे से ऊपर की तरफ बढ़ रहा था, उसका हथेली अदिति की नर्म, मुलायम जांघों को महसूस कर रहा था, हाए अदिति की नर्म जांघे, गोरी-गोरी, सफेद और गुलाबी के रंगों की मिलावट वाले रंग। राजन का मुँह अदिति की जीभ को अपने मुँह में ले रहा था चूसने के लिए। अब अगर मना करना था तो अदिति मुँह ही नहीं खोलती ना? मगर मुँह खुला हुवा मिला राजन को और अदिति की जीभ उसके मुँह में आ गई थी चूसने को। मगर यह सिर्फ एक लम्हे के लिए हुआ। फिर तुरंत अदिति ने मुँह बंद कर लिया और फिर खोलने से इनकार किया, और अपने हाथ को अदिति ने राजन के हाथ पर रखते हुए उसको जांघों से ऊपर बढ़ने से भी रोक दिया।

राजन ने फिर सोचा की यह मामूली बात है की एक औरत किसी पराए मर्द को पहली बार ही यह सब कुछ इतनी आसानी से नहीं करने देगी, तो राजन खुद से खुश हुआ की पहली मुलाकात के लिए इतना काफी था उसने सोचा।

अदिति उसका हाथ अपने हाथ में पकड़े हुए जो की तब भी उसकी स्कर्ट के नीचे था। अदिति ने नीचे फर्श पर देखते हुए नर्म आवाज में कहा- “आप मुझे अंजली के बारे में नहीं बोल रहे हो, उसी के लिए आप यहाँ आए थे ना? या फिर अंजली एक बहाना था और आप सिर्फ मुझसे मिलने के लिए आए हो यहाँ?"

राजन ने यह सुनने के बाद अब सोचा की उसको बताए की वो सिर्फ उसी के लिए आया था यहाँ। मगर फिर उसको अंजली को भी एक जवाब देना था। राजन ने देखा की अदिति बहुत ज्यादा मस्त है चुदाई के लिए उस अंजली बच्ची से। अंजली को कोई तजुर्बा नहीं था तो राजन ने सोचा की एक शादीशुदा जवान औरत को चोदने में हजार गुना ज्यादा मजा आएगा उसे। एक वाइफ जिसका पति घर पर नहीं सै, उसको चोदने में जो मजा आएगा, अंजली के साथ बिल्कुल नहीं मिलेगा ऐसा मजा। राजन अब सेक्सन और फ्लैट बदलने को सोचने लगा, सोचा की अब अंजली के फ्लैट से शिफ्ट होकर अदिति के फ्लैट में हर रोज शायद आना पड़ेगा उसे।

अदिति उसके जवाब का इंतेजार कर रही थी।

राजन ने कहा- “मेरी समझ में नहीं आता की कैसे शुरू करूँ?” और फिर से, इससे पहले की वो कुछ कहता अदिति ने ही बात की।

अदिति- “अगर पहली मुलाकात में मेरे साथ आपने यह सब किया तो ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं मुझे की आपने उस बच्ची के साथ क्या-क्या किया होगा, जबकी वो बिल्कुल अकेली होती है घर में, और उसके माता पिता कोई नहीं होते। आप उसके साथ अकेले पता नहीं क्या-क्या करते होंगे। बेचारी अंजली... आपने उसके साथ सेक्स किया है ना? वो अब कुँवारी नहीं रही, सही कह रही हूँ ना? हे भगवान्... मगर वो तो एक छोटी सी लड़की है क्या मिलता है आपको एक छोटी सी बच्ची के साथ? आपने उसको बिल्कुल बिगाड़ दिया, है ना? जवाब दो मुझे..”

अदिति को अचानक ऐसा लगा की वो किसी अजनबी से नहीं, बल्की जाने पहचाने आदमी से बात कर रही है, जैसे किसी करीबी दोस्त के साथ, या आनंदजी के साथ। राजन था ही ऐसा जो बहुत आसानी से दोस्ती कर लेता था किसी से भी। हँसमुख था और बहुत बड़बड़ करता है तो किसी से भी बात करता है तो दोस्ती कर लेता है झट से। बिल्कुल आम इंसान था। शायद इसीलिए अदिति को भी उससे ऐसे बात करने में आसानी हुई।

राजन का हाथ अब भी अदिति की स्कर्ट के नीचे उसकी जाँघ पर था, जिसको अदिति ने अपने हाथ में थामा हुआ था उसको आगे बढ़ने से रोकते हुए। राजन बात करते दौरान धीरे-धीरे अपनी उंगलियों को आगे बढ़ाने की कोशिश जरूर करता जा रहा था। राजन उसकी पैंटी को छूना चाहता था, और उसका खड़ा होने लगा था। हालांकी कुछ देर पहले उसने अंजली के साथ किया था। फिर राजन ने अदिति का गला चाटने की कोशिश किया जब वो बात कर रही थी। मगर उसकी जीभ बाहर देखते हुए अदिति ने अपनी गर्दन पीछे कर लिया, जिस वजह से राजन मिस कर गया चाटने को उसका गला।
 
अदिति ने फिर डाँटते हुए कहा- “आप मुझको जवाब दो और एक बच्चे की तरह बिहेव करना बंद करो और अपने हाथ निकालो उधर से अभी के अभी.."

राजन ने अदिति को ऐसे देखा जैसे वो नासमझ है, और उसको पता ही नहीं की उसका हाथ कहाँ पर है और पूछा- “कहाँ से अपना हाथ निकालूं बोलो तो जरा? हेहेहेहे... अरे हाथ को थोड़ा और ऊपर जाने दो ना। तुमको और गहराई से महसूस करना चाहता हूँ, चलो मुझको तुम्हें और किस करने दो, बहुत मजेदार हो तुम, हम्म्म्म म...” कहकर वो और भी आशिकाना मिसाज से फ्लर्ट करते जा रहा था।

अदिति ने सोचा की विशाल इस सीन को किस तरह से रोल-प्ले में लगता? और जब राल-प्ले अदिति के दिमाग में आते हैं तो उसकी जिश्म काँप उठती है और वो उत्तेजित होने लगती है। वो कुछ ऐसा लम्हा होता था अदिति के लिए, जब उसको प्यार और छवन की जरूरत पड़ती थी और इश्क करने का उसका मन करता था।

पर अदिति ने फिर से कहा- “नहीं पहले आप बताओ मुझको, अपने और अंजली के बारे में? मैं जानना चाहती हूँ। तब सोचेंगे जो आप चाह रहे हो उस बारे में?"

राजन ने मन में सोचा- “उसने कहा पहले आप बताओ तब सोचेंगे जो आप चाह रहे हो?” मतलब की अगर मैंने इसको अंजली के बारे में सब कुछ बता दिया तब मुझको वो करने देगी जो मैं चाहता हूँ वाह..” राजन खुश हो गया और अपने और अंजली के बारे में बताने को तैयार हो गया।

राजन ने कहा- “हाँ मैं और अंजली एक दूसरे से वो सब करते हैं जो तुमने कहा अभी...”

अदिति- “मुझे पता था, आई वाज श्योर अबाउट दैट.."

फिर अदिति ने राजन को मुक्के से मारा और फिर कहा- “मगर तुमको उस छोटी सी लड़की से क्या मिलता है? कैसे तुमने यह सब शुरू किया उसके साथ? उसने इनकार नहीं किया? क्यों उसने आपको सब करने दिया? बताओ मुझे सब शुरू कैसे हुआ उसके साथ? पहली बार कब हुआ? क्या एक किस से शुरू हुआ? आपने उसको रिझाया या उसने आपको? उसके डैड कहाँ थे उस वक्त? मुझे सब बताओ मैं जानना चाहती हूँ सब..."

राजन ने सोचा की अदिति सब जानकर और भी गरम हो जाएगी और तब उसको मौका मिलेगा उसके जिश्म को ज्यादा छूने को और आगे बढ़ने को।

उधर अदिति बहुत बेचैन थी जानने के लिए की कैसे एक 50 साल के ऊपर का आदमी एक जवान कालेज गर्ल से यह सब करना शुरू किया। वो सब सुनना चाहती थी और खुद अदिति को पता था की उसकी रोमांचक कहानी को सुनने के बाद उसको करने का मन शायद करेगा और उसके जिश्म में गर्मी छा जाएगी। इसलिए अदिति सुनने के लिए बेकरार हो गई थी। खुद अदिति सोच रही थी की वो सेक्स के लिए तय्यारियां कर रही थी, जैसे राल-प्ले के लिए करती है अक्सर।

मगर इस वक्त एक अजनबी के साथ अकेले घर में जब उसका पति घर में नहीं था। उसको उत्तेजित सा महसूस होने लगा और बेसब्री से इंतेजार कर रही थी की राजन उसको अंजली और उसके बीच की कहानी को सुनाए।

अदिति ने यह भी सोचा की उसको कैसा महसूस होगा की एक अजनबी उसको एक रोमांचक या सेक्सुअल एनकाउंटर सुनाएगा तो? असल में अदिति गरम होने लगी थी और थोड़ा सा गीलापन महसूस किया अपनी पैंटी में कहानी सुनने से पहले ही।

अदिति राल-प्ले की दुनियां में जाने लगी और खुद को अंजली समझने लगी और अब उसे इंतेजार था की राजन खुद उसको उसकी कहानी सुनाए की किस तरह से उसने उसको अपने कालेज दिनों में सिड्यूस करके लगाया था। यह इंतेजार कर रही थी अदिति अंजली बनकर। अदिति अंजली बन चुकी थी। शायद थोड़ी जलती थी अंजली से क्योंकी जब वो उसकी उम्र की थी तब किसी ने उसको उस उम्र में नहीं बहकाया किया था, क्योंकी उस वक़्त उसको यह राजन नहीं मिला था। क्योंकी डैड के किसी दोस्त ने उसके साथ यह सब नहीं किया था।

अदिति अंजली बनना चाहती थी। सोच रही थी क्यों वो अंजली नहीं थी? क्यों राजन ने उसके साथ वो सब नहीं किया था जो अंजली के साथ किया उसने? मगर अदिति ऐसा क्यों सोचने लगी थी, क्या अदिति का कोई ऐसा अतीत था? क्या अदिति को किसी ने अब्यूस किया था जब वो अंजली की उमर की थी तब? क्या उसकी जिंदगी में भी कोई राजन आया था कभी? क्या अदिति का भी किसी ने ऐसे इश्तेमाल किया था जैसे अंजली को किया जा रहा है? क्या ऐसा कुछ अदिति की जिंदगी से मेल खाती है जिसके लिए अदिति इतना रुचि दिखा रही है अंजली के बारे में?

अब तो राजन को भी शक होने लगा, उसने सोचा- “शायद इसकी जिंदगी में भी ऐसा कुछ हुआ होगा जब यह अंजली की उमर की थी तो। शायद इसीलिए यह इतना इंट्रेस्टेड है सब कुछ जानने के लिए, क्या पता इसके साथ भी अंजली जैसा हादसा हुवा हो, जब यह उसकी उमर की थी तब। तो अब मैं थोड़ा मसाला लगाकर इसको सब बताता हूँ। देखता हूँ की यह गरम होती है की नहीं? शायद आज ही चोदूंगा इसे भी...”

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कड़ी_47 राजन अभी भी अदिति के साथ

अदिति राजन का हाथ थामे जो उसकी जांघों पर स्कर्ट के नीचे थे, उसके बोलने का इंतेजार कर रही थी की वो अपने और अंजली के बारे में बताए। मगर साथ-साथ राजन अदिति को लुभाने की कोशिश में लगा हुआ था। छूकर और फ्लर्ट करते हुए। पर अदिति मना तो नहीं कर रही थी मगर उसका काम मुश्किल कर रही थी उसके हाथों को रोकते हुए।

अदिति ने फिर दोहराया- “मैं अब भी इंतेजार कर रही हूँ की आप मुझको अपने और उस लड़की के बारे में बताएं मिस्टर...”

राजन ने तब बिना अपना हाथ अंदर से निकाले बोलना शुरू किया- “अंजली का बाप और मैं बिजनेस पार्टनर हैं और कुछ दिन पहले मैंने यहाँ आना शुरू किया काम के सिससिले में डिसकस करने को, कुछ ग्लास विस्की सिप करते हुए। हमारी मुलाकात हमेशा डिनर के बाद होती थे। अंजली उस वक्त हमेशा अपने कालेज की होमवर्क किया करती थी और एक रात को मुझे उसकी जां दिखाई दी, क्योंकी मैं काउच पर बैठा हुआ था..” .

अदिति ने उसके हाथ को फिर से हटाया क्योंकी बात करते वक्त राजन का हाथ ज्यादा अंदर चला गया था। अंजली ने यह कहते हुए उसके हाथ को हटाया- “लगता है आप जांघों को बेहद पसंद करते हो, इसीलिए मेरी जांघों को छोड़ नहीं रहे...”

अदिति के गले को चाटने की कोशिश करते हुए राजन ने करीब-करीब अदिति को सोफे पर लेटा दिया क्योंकी जब वो उसके गले की तरफ अपना जीभ कर रहा था तो अदिति और पीछे हटती जा रही थी। इस आक्सन से वो तकरीबन लेट गई थी सोफे पर। तो अदिति को राजन के हाथ को छोड़ना पड़ा जो जाँघ पर थे और दोनों हाथों से राजन की छाती पर करके उसको धकेला। अब अदिति ने उसका हाथ छोड़कर छाती पर धकेल रही थी।

राजन ने उस मौके का फायदा उठाते हुए अपने हाथ को जो स्कर्ट के नीचे था उसको ज्यादा अंदर और ऊपर किया और उसकी उंगलियों ने अदिति की उभरी हुए चूत को छुवा, उसकी काटन पैंटी को महसूस करते हुए। झट से राजन ने एक उंगली को वहाँ दबाया और जैसे चूत के छेद में घुसा ही दिया समझो पैंटी समेत।

बस एक पल के लिए यह हआ। तब तक अदिति को मौका मिल गया वापस उसके हाथ को रोकने के लिए और अंदर की जाँघ तक लाकर रोकने के लिए। उस छीना झपटी में अदिति की केहनी राजन के लण्ड पर दबी एक बार, जो तना हुआ था। और अदिति ने उसको अच्छी तरह से महसूस किया की उसका खड़ा हुआ है। दोनों । हाँफने लगे उस छोटी सी तकरार के बाद। और अदिति ने उसको उंगली दिखाते हुए झूठ-मूठ के गुस्से से बिहेव करने को कहा, इन लवजों में।

अदिति- “देखिए या तो आप आराम से सब मुझे बताइए, या मैं जाकर अपने आपको अपने बेडरूम में लाक कर लेती हूँ...”

राजन ने “बेडरूम” नाम सुनकर थोड़ा मसखरी करते हुए कहा- “बेडरूम... अरे हाँ वो एक बेहतर जगह होगी जाने के लिए, वहीं हम दोनों को होना चाहिए था अभी। चलो जानेमन वहीं चलते हैं...”

अदिति ने उसको मोटी-मोटी आँखों से देखा मगर एक अजीब मुश्कुराहट के साथ, और कहा- “शटप... और बताइए के आपने अंजली के साथ शुरुवात कैसे किया था?”

अदिति की स्कर्ट काफी ऊपर उठ गई थे और ज्यादा मुलायम हिस्सा दिख रहा था तब तक। उस तकरार के बाद अदिति ने स्कर्ट को नीचे करके उसको कवर नहीं किया, वैसे ही रहने दिया, जैसे राजन को दिखा रही थी।

या शायद उस वक्त अदिति को पता था की कैसे भी वो अपने हाथ को वहीं रखेगा, या फिर अदिति अंजली का रूप धारण करना चाहती थी की उस वक़्त इसी तरह उसकी जांघों को राजन ने देखा होगा।

अदिति अपने आपको अंजली महसूस करना चाहती थी, ज्यादा कम उमर वाली बनते हुए। शायद यह महसूस कर रही थी की वो अंजली है और उसके पापा का दोस्त उसको लुभाने की कोशिश कर रहा है।
 
वो पूरा अंजली का रूप धारण कर रही थी, उस वक़्त को, उन लम्हों को जीवित कर रही थी जो राजन बयान करने जा रहा था। रोल-प्ले अलग अब अदिति उससे भी ज्यादा गहराई में जाने की कोशिश कर रही थी।

और हाँ यकीनन राजन ने उसकी जांघों पर हाथ रखा उनको करीब से देखते हुए। अदिति ने राजन की आँखों को अपनी जांघों की प्रशंसा करते हुए देखा। उसने अपने हाथों को राजन के हाथ पर रखा, ताकी वो और ऊपर अपने हाथ को नहीं ले जाए। फिर अदिति ने निगाहों से उसके चेहरे में देखते हुए अपने बयान को जारी रखने को कहा और राजन उसकी निगाहों की जुबान समझ गया। ।

राजन ने बयान जारी रखा उसकी जांघों को सहलाते हुए, कभी उसके गले और गाल को चूमते हुए, और एकाध बार अपनी जीभ को उसके गले पर फेरते हुए और एक बार तो झट से अदिति के कान के नीचे वाले हिस्से पर अपनी जीभ फेरा राजन ने। फिर भी बोलता गया और उसका लण्ड ऐसा खड़ा हुआ की साफ दिख रहा था उसकी पैंट में।

जिसको देखकर अदिति खिलखिलाकर हँस उठी। अब राजन का हाल कुछ ऐसा था की डबल एरेक्शन हो रहा था उसको उस वक़्त, एक अंजली के बारे में बयान करते हुए और उन सेक्सुअल एनकाउंटर को याद करने से और दूसरा इधर अदिति को महसूस करते हुए, उसको छूते हुए और उसकी नजदीकियों को अपने इतने करीब महसूस करते हुए। इन सबके बावजूद राजन आगे बढ़ा बयान को जारी रखते हुए।

राजन- “उस दिन के बाद मैंने अंजली को निहारना शुरू किया और उसको पता चल गया की मैं उसको हर रात को निहारता है। एक दिन अंजली ने अपने ड्रेस को नीचे करके जांघों को ढक लिया। उसके पापा से बात करते वक़्त मैं बार-बार अंजली की टाँगों को देख रहा था की कब अंजली ड्रेस को थोड़ा ऊपर करेगी और मैं उसकी खूबसूरत जांघों को देखकर अपनी नजरों को खुश करूँगा। और अंजली को पता था की मैं उसकी जांघों को देखना चाहता हूँ, और वो मुझे बार-बार देख रही थी और हँस रही थी। क्योंकी उसने मुझको हरा दिया था मेरी चोरी पकड़कर, वो विजेता हो गई थी और मैं हार गया था।

मैं उसके पापा से अनाप-शनाप बोले जा रहा था। क्योंकी मैं काम में ध्यान नहीं दे पा रहा था, मेरे और अंजली के बीच एक छोटा सी जंग चल रही थी और वो सिर्फ मैं और अंजली जानते थे। वो मुझको सता रही थी अपने जांघों को ढक कर और मैं तड़प रहा था। अंजली को पता था की मैं तड़प रहा हूँ। और उस रात को मैंने एक मौका पाते हुए उसको दूर से ड्रेस को ऊपर करने को इशारा किया। हालांकी मैं उसके पापा के पास था, डेढ़ मीटर की दूरी पर थी वो, जहाँ पर मैं और उसके पिता हुआ करते थे। जब मैंने उसको वैसे इशारा किया तो उसने मुझको बड़ी-बड़ी आँखों से गुस्सा दिखाते हुए मुक्का दिखाया।

उसके बाप से नजरें चुराते हुए मैंने अंजली से हाथ जोड़े और बिनती की कि वो ड्रेस को उठाए। कई बार रिक्वेस्ट करने के बाद अंजली ने अपनी ड्रेस को थोड़ा सा ऊपर किया। उसकी गोरी जांघे घुटनों के ऊपर थोड़ा सा नजर आई, जैसे मुझको एक बूंद पानी मिल गई पीने को ऐसा महसूस किया मैंने उस वक्त। फिर मैंने और थोड़ा ऊपर उठाने का इशारा किया, और मुश्कुराते हुए उसने और थोड़ा सा ऊपर उठाया। उसने थोड़ा-थोड़ा करके अपनी ड्रेस को ऊपर किया और मुझको सुकून मिली तब।

अंजली भी अपने पापा से नजरें चुराते हुए मुझसे मुश्कुरा रही थी तो कभी चिढ़ा रही थी जीभ से। मैं तो फिदा हो गया था उसपर उन रातों को। वो शरारती थी, मुझको जानबूझ कर तड़पा रही थी, मुझसे बिनती करवा रही थी,

और मैंने उसके डैड को टायलेट जाने का इंतेजार किया और जैसे ही वो गया, मैं अंजली पर टूट पड़ा, एक जंगली भूखे जानवर की तरह। उसको अपनी बाहों में दबोचकर उसके मुँह का रस निचोड़ने लगा, खूब चूसा उसके होंठ और जीभ को, उसको किस करना सिखाया।

मैं सबसे पहला आदमी था उसको किस करने वाला, और उसको किस करने सिखाने वाला, और वो अच्छी किस करने वाली है। मुझे बहुत चैन मिली उस रात को। और इससे पहले की उसका डैड टायलेट फ्लश करता मैंने अदिति को बैठा दिया और उसकी टांग के पास बैठकर उसकी ड्रेस को उठाकर उसको दिखाया की कितना ऊपर उठाना चाहिए मुझको दिखाने के लिए। फिर इससे पहले कि उसका डैड टायलेट का दरवाजा बंद करता, मैंने अंजली की जांघों को चाटा और चूसा वापस अपने जगह पर जाने से पहले...”

अदिति ने एक गहरी साँस लिया राजन की बातों को सुनकर, और एक ठंडी सी लहर महसूस किया अपने पूरे जिश्म में। अदिति ने फिर राजन को जारी रखने को कहा। और इस बार अदिति ने राजन की उंगली को अपनी पैंटी के ऊपर से अपनी चूत पर फेरने दिया, नहीं हटाया उसके हाथ को अदिति ने। राजन ने उसकी पैंटी को । गीला महसूस किया और समझ गया की जो कुछ भी वो कह रहा था उससे अदिति गरम हो रही थी और भीग गई थी नीचे उसके बयान से।

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कड़ी_48 अदिति मदहोशी में राजन के साथ

राजन ने आगे बोला- “और उस रात के बाद, हर रात को मेरे और अंजली के बीच वो खेल चालू रहा। मैं वहाँ फिर उसके बाप से मिलने के लिए नहीं बल्की उसके जवान बेटी के लिए जाता था। मैं हमेशा उसके पिता से कहता रहता की हमको इस या उस प्राजेक्ट पर काम करना चाहिए रात को, झूठ मूठ का बहाना बनाते हुए ताकी उसके घर जा सकूँ रातों को। फिर हम सिर्फ पीने के लिए मिलने लगे उसके घर पर डिनर के बाद तकरीबन हर रात को और मैं उसकी बेटी से बात करने लगा उसकी हाजिरी में, लड़की की दोस्त बनकर और उसको होमवर्क में हेल्प करके। और हर रात को मैं इंतेजार करता की कब वो मूतने जाए तो मैं अंजली को जकडूं."

अंजली को किस करना बहुत पसंद था और वैसे मुझको उसके साथ आगे बढ़ने में आसानी हुई। फिर धीरे-धीरे दिन-ब-दिन मैं अंजली के गुप्त अंगों को छूने लगा, कभी उसकी छाती पर हाथ फेरा, कभी पैंटी पर हाथ फेरा तो कभी चूचियों को चाटा। मैंने अंजली से अपने लण्ड पकड़वाया, मेरे लण्ड से पहले उसने कभी कोई लण्ड नहीं। देखा था। उसने खुद कहा मुझे की कभी किसी को किस भी नहीं किया था, कभी किसी लड़के या मर्द को छुवा ही नहीं था उसने, पूरा पवित्र थी, अनछुई थी।

अंजली लण्ड को देखकर बहुत जोश में आ गई थी, उत्तेजित हुई थी, उसके लिए बिल्कुल जैसे एक बच्चे को नया खिलोना दिया जाता है तो उसके चेहरे पर क्या खुशी और हैरानी होती थी। वही देखा था मैंने अंजली के चेहरे में जब पहली बार उसने मेरे लण्ड को देखा और छुआ था। उस दिन मैंने अंजली से अपने लण्ड को खूब चूमा और चुसवया था। जिस तरह से अंजली ने बहुत संभाल के, आराम से अपने हाथ में लण्ड को लिया था, जिस तरह से चूमा और चाटा था, अपनी जीभ को ऊपर से नीचे तक जिस तरह से फेरा था। अंजली ने मुझसे पूछा था की क्यों लण्ड कड़क और लंबा है? जिस भोलेपन से सब कुछ किया था उसने मुझको बस दीवाना बना दिया था उसने।

मैंने उससे कहा अपने मुँह में लेने को मेरे लण्ड को, उसने सिर्फ ऊपरी वाले हिस्से को थोड़ा सा मुँह में लेकर चखा पहले, फिर बिना चूसे उसको अपने मुँह में ले लिया। मैंने दरख्वास्त किए चूसने को। नहीं चूस रही थी सिर्फ मुँह में लिया हुआ था। मैंने उसकी उंगली को अपने मुँह में डाला, उसकी उंगली को चूसा, और उससे कहा वैसे ही लण्ड को चूसने को, जैसे मैंने उसकी उंगली को चूसा था। तब उसने मेरे ऊपरी लण्ड के छिलके को नीचे करके ऊपरी हिस्से को मुँह में लेकर चूसा, सिर्फ एक टुकड़े को उफफ्फ... इसस्स्स शह... क्या मजा आया था, अब

भी याद है मुझे। मैंने महसूस किया कि यह मेरी जिंदगी सबसे खूबसूरत पल था। मैं जन्नत में था, जमीन पर था ही नहीं मैं उस वक्त, समझ सकती हो ना?

अदिति भी यह सब सुनने के बाद उस वक़्त जन्नत में थी शायद। अदिति ने राजन को अपने पैंटी को हटाने दिया था और राजन की उंगली को अपने गीली चूत पर रगड़ने दिया था। वो होश में नहीं थी, उस वक्त किसी

और दुनियां में लग रही थी। सब सुनने के बाद उसकी जिश्म की गर्मी बढ़ गई थी। अदिति की आँखें नशीली हो गई थीं। लगता था वो सब बयान किए गये लम्हों को जी रही थी। सब सुनते हुए अदिति ऐसा कुछ समझ रही थी की जो कुछ राजन ने कहा वो सब अदिति पर बीत रही थी, और वो सोफे पर लेट गई और अपने आप में नहीं थी उस वक्त। वो अंजली बननी हुई थी। वो लेट गई और अपनी जांघों को फैला दिया अपने स्कर्ट के अंदर राजन को सब कुछ देखने दिया। हटी हुई पैंटी और उसकी गीली चूत अब राजन के सामने थी। राजन ने सोचा भी नहीं था की अभी-अभी अंजली को चोदने के बाद वो फिर से चोद पाएगा की नहीं। उसको अपने आप पर भरोसा नहीं था उस वक्त। मगर अदिति तो एक ऐसी फीमेल माल थी की किसी नामार्द का भी खड़ा हो जाता।

अदिति ने राजन का हाथ अपने हाथ में लिया, अपनी छाती पर रखा, और नशीली आँखों से उसकी तरफ देखते हुए तड़पती आवाज में दबाने को कहा। फिर धीरे से राजन के कान में फुसफुसाया- “प्लीज अंजली के बारे में बताते जाओ और यहाँ मसलते जाओ, दोनों एक साथ करो प्लीज... क्या ऐसा कर सकते हो?” अदिति किसी और दुनियां में पहुँच गई थी। वो वो नहीं थी उस वक्त, बिल्कुल होश-ओ-हवास में नहीं थी। अब वो राजन से भीख माँग रही थी की वो उसके साथ कुछ भी करे।

राजन ने झट से अदिति के एक हाथ को अपने लण्ड पर खींचा, वैसे ही जैसे उसने अंजली के साथ किया था जो उसने अभी-अभी बयान किया था। राजन ने अदिति के हाथ से अपने लण्ड को दबाया और जल्दी से अपनी जिप खोलकर लण्ड को बाहर निकाल दिया, जो एक स्प्रिंग की तरह उसके अंडरवेर से झटका देते हुए निकला।

अदिति बिल्कुल नहीं हिचकिचाई, लण्ड को अपने नर्म हाथ में लेने के लिए और अपनी मुट्ठी में लण्ड को चलाने लगी बिल्कुल जैसे मूठ मारते वक्त करते हैं।

राजन ने तब अपनी कमर को अदिति के कंधे के पास किया और खुद अदिति की टाँगों के तरफ लेट गया जहाँ उसका सिर अदिति के जाँघ के पास था। मतलब 69 पोज में था। जैसे ही उसका लण्ड अदिति के चेहरे से लगा बिना कुछ कहे सुने अदिति ने मुँह खोल दिया और लण्ड को मुँह में ले लिया। अदिति ने ऐसा चूसा राजन के लण्ड को की राजन काँप गया, पूरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया अदिति ने, गले तक घुस गया राजन का लण्ड, लगता था अदिति लण्ड को निगलने वाली है, इस कदर जोश में चूस रही थी।

ने तरफ से और ठंसता गया उसके गले के अंदर लण्ड को कमर हिलाते हए। बडा मजा आ रहा था उसे तो, उसकी किश्मत बस चमक गई थी उस वक़्त। तब तक राजन ने अदिति की पैंटी को निकाल फेंका फर्श पर और राजन उसकी दोनों टाँगों को फैलाते हुए अदिति की चूत को एक कुत्ते की तरह चाटने लगा, जीभ चलाते हुए पंखुड़ियों के बीच। अपनी चूत पर उसकी जीभ का चलना महसूस करते हुए अदिति ने ऐसे हिलना शुरू किया जैसे की उसके ऊपर कोई भूत का साया सवार हो गया है। उसकी आवाज बदल गई और लगा किसी और की आवाज थी। वो बिल्कुल मदहोशी में थी, रियल वर्ल्ड और नशीली हालत की दुनियां के बीच में थी उस वक्त।

कहते हैं ना की सेक्स का मजा किसी नशीली दवा से कम नहीं होता। उस दौरान जब जिश्म का अंग-अंग तड़पता होता है मदहोशी में तो बिल्कुल नाशीली हालत होती है। उस वक़्त अदिति उसी मुकाम पर थी और लण्ड को अपने अंदर लेने की बहत बड़ी जरूरत थी उसे उस वक्त। राजन ने उसकी चूत के छेद के अंदर अपनी जीभ को ठूसा, जितना हो सका उतना उसकी वहाँ की गर्मी का तापमान लेते हुए अपनी जीभ पर। अदिति की चूत किसी कपड़े से बंद किए हुए नाले के जैसे पानी बूँद-बूँद छोड़ रही थी और उस रस को राजन अपने गले के अंदर उतार रहा था मजे से।

राजन जब अदिति को इतना बढ़िया तरीके से चूस रहा था, तो उसको यह महसूस हआ की उसकी जिंदगी में आज पहली बार कोई उसके लण्ड को इस तरह से चूस रहा था। कभी भी किसी ने नहीं चूसा था उसको अपनी 50 साल की जिंदगी में उस तरह, कभी नहीं। उसका लण्ड अदिति के गले के अंदर की टान्सिल को छू रहा था और राजन पूरा महसूस कर रहा था की उसका लण्ड किस-किस हिस्से को छू रहा है। अदिति इतनी तजुर्बे से सब कर रही थी जैसे वो एक डिग्री होल्डर थी लण्ड चूसने में। राजन का लण्ड एक लोहे की तरह मजबूत खड़ा का खड़ा ही रह गया हालांकी एक बार वो चोद चुका था यहाँ आने से पहले, फिर भी अदिति के अंदर घुसने के लिए बिल्कुल तैयार था।
 
अदिति ने अपने जबड़े को दबाते हुए कहा- “अब मुझे यह अपने अंदर चाहिए, इसकी लंबाई समेत जितनी है इतना पूरा मेरे अंदर चाहिए मुझे रफ़्तार के साथ, चलो देर मत करो अब मुझे यह चाहिए ही चाहिए, मैं आपकी अंजली हूँ। साहब ले लो मुझे... अपनी अंजली की गहराई में घुस जाओ सर जी, ले लो मुझे उफफ्फ... इसस्सस्ह..."

राजन समझ गया की अदिति बिल्कुल गरम हो गई है और तड़प रही है, और वो खुद को अंजली के रूप में कर चुकी है। सब कुछ जो राजन ने बयान किया था अंजली के बारे में, ससे अदिति बिल्कुल चुदासी हो गई थी, और वो उस अंजली वाली रोल-प्ले को जीने लगी थी, उसमें ढाल चुकी थी जैसे हमेशा रोल-प्ले में डूब जाती है, वैसे ही इस वक्त वो अंजली बन चुकी थी, डूब गई थी अंजली के रूप में।

यह सब विशाल के खेले गये रोल-प्ले का नतीजा था। हर बार किसी मर्द को अपना आशिक बनाकर रोल-प्ले खेलती थी। मगर आज पहली बार अदिति खुद किसी और लड़की की रूप का रोल-प्ले कर रही थी। यह पहली बार थी शायद इसीलिए बहुत गहराई से उसमें डूब गई थी और खुद को अंजली समझने लगी थी। हर बार विशाल के साथ किसी रोल-प्ले को जब भी अदिति ने खेला है तो उसको भरपूर निभाया है। रोल-प्ले में बिल्कुल डूब जाती है मदहोशी में आने तक, और जब तक आर्गेज्म नहीं हो जाती उस रोल-प्ले से नहीं निकलती थी। तो बिल्कुल वैसे ही इस वक्त जब तक अंजली के रूप से बाहर नहीं निकलती उसका रुकना नामुमकिन था।

राजन ने पोजीशन चेंज किया, और खुद को नंगा किया अदिति के कपड़ों को उतारकर। अदिति बेहाल थी और सब करने दे रही थी। ऐसा लग रहा था की अदिति ने कोई नशीली दवाई पी लिया हो उस वक़्त। वो सिर्फ इस इंतेजार में थी की कब एक लण्ड उसके अंदर घुसे। जैसे एक बीमारी थी और उस बीमारी का हल सिर्फ एक लण्ड था। अदिति ने दोनों टाँगों को फैलाकर इंतेजार करना शुरू किया, उसकी आँखें आधा खुली आधा बंद थी। जैसे नशे की हालत में आँखें होती हैं वैसी दिख रहे थी अदिति की आँखें उस वक़्त। उसकी साँसें भारी थी। मुश्किल से साँसें ले रही थी।

राजन ने उसकी चूचियों को चाटना और चूसना शुरू किया, जो अब तक ढकी हुई थीं, राजन की खुशी की इंतेहा न थइ अदिति के जिश्म को अपने सामने नंगी पाकर। दीवाना हो रहा था, खुद यकीन नहीं कर रहा था की यह मुमकिन हो गया उसके लिए। सपना जैसा लगने लगा था सब उसको। राजन को फिलहाल अदिति की चूचियों से प्यार हो गया और सिर्फ उसी पर कन्सेंट्रेट कर रहा था दबाते, मसलते और चूसते हुए।

मगर अदिति तड़प रही थी उसके लण्ड को अपने अंदर लेने के लिए। अदिति कभी हाँफ रही थी, साँसें तकलीफ से ले रही थी, उसका जिश्म गरम था, जैसे बुखार में तड़प रही हो। उसने बिनती की- “प्लीज मेरे अंदर आओ, बाद में मेरी छाती को देख लेना, नीचे मेरे अंदर घुसाओ ना प्लीज... जल्दी करो मुझसे अब रहा नहीं जाता। अब डालो... डालो अंदर जल्दी..” अदिति ने चिल्लाकर कहा काँपते हुए तड़पती आवाज में।

राजन ने जब देखा की कितना बेहाल है अदिति तो अपने लण्ड को उसकी चूत के अंदर घुसाया जो आसानी से घुस गया, क्योंकी वो एकदम से गीली हो चुकी थी। लण्ड फिसलते हुए उसकी चूत के अंदर चला गया, और। राजन बिल्कुल नहीं रुका। एक से बढ़कर एक जबरदस्त धक्का देता गया जल्दी-जल्दी अदिति के चेहरे में देखते हुए और अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को कुचलते हुए। उसका लण्ड अंदर-बाहर होता गया रफ्तार से अदिति के अंदर। अदिति सिसकती गई, तड़पती गई जिश्म को साँप की तरह ऐंठते हुए, मुट्ठी में चादर को भरकर खींचते हुए, उसके जिश्म में जैसे आग भड़क रही हो, बिस्तर को ऊपर-नीचे कर दिया रगड़ते हुए। उसकी उंगलियां फिर राजन के पीठ पर गईं, और अदिति ने उसके नाखून गड़ा दिए राजन के जिश्म में।

राजन को दर्द हुआ मगर अदिति को नहीं पता था की राजन को चोट दे रही थी उस वक्त, वो बिल्कुल मदहोशी में थी और गहराई इतनी थी के वो किसी और ही दुनियां में थी। अदिति के लिए उस वक्त सबसे अहम बात थी उसका आर्गेज्म का आना, और वो भरपूर मजा ले रही थी उस चुदाई की। बिल्कुल एंजाय कर रही थी। उस वक्त अदिति के जिश्म का हर एक हिस्सा मदहोशी में डूबा हुआ था, और नीचे का हर अंग जोश में था, उसके सभी अंग मदहोशी में थे, उसकी चूत की पंखुड़िया, उसके पेट का नीचे वाला हिस्सा, उसकी नाभी, जांघे, गाण्ड सब मस्त चुदाई का भरपूर आनंद ले रहे थे।

राजन के जिश्म का हर वो हिस्सा जो अदिति के जिश्म के किसी भी हिस्से से टकरा रहा था, सब में जोश ही जोश पैदा हो रहा था। अदिति ने खुद को सातवाँ आसमान में उड़ते हुए महसूस किया। और अचानक उसको ऐसा लगा की किसी बाक्सिंग मैच के रिंग में से नाक-आउट हो गई हो। राजन को अदिति को उस हालत में देखते हुए बड़ा मजा आ रहा था। राजन ने खुद पर गर्व महसूस किया की अदिति जैसे सेक्स की देवी को वो अपने आर्गेज्म तक पहुँचाने में कामयाब हुआ, अपने चढ़ती उम्र के बावजूद। वो अदिति की प्यास को बुझा सका। धक्के के रफ़्तार को बढ़ाते हुए राजन ने सोचा की अभी कुछ दिन पहले अदिति को लिफ्ट में देखने के बाद वो कितना तड़प रहा था अदिति को बिस्तर पर लाने के लिए, और अभी उसी अदिति के घर के अंदर उसके सोफे पर अदिति खुद उससे चुदवा रही थी। राजन के लिए यह एक बड़ा कामयाबी का विषय था।

अदिति अपने जिश्म को मोड़ते हुए, तड़पती आवाज में साँसों को थामते हुए चिल्लाई- “हाँ हाँ आई आम गेटिंग इट... आई आम कम्मिंग... इट्स सो गु... वाओ... यू आर एक्सट्रा आर्डिनरी माई डियर आहह.. इसस्स्स्स सुपर्ब...”

और अदिति ने राजन के कंधे को अपनी बाहों में जोर से जकड़ा अपने साँसों को थामकर और उसको खतरनाक तरीके से दाँतों से काटा वहाँ पर।

राजन तभी चिल्ला उठा। और राजन भी झड़ने को आया, उसका जिश्म थरथराने लगा, उसके पैर काँपने लगे।

अदिति ने राजन की आँखों में देखते हुए घबराई और कहा- “बाहर निकालो, टेक इट आउट, मेरे अंदर मत झड़ना, निकालो जल्दी बाहर.."

राजन ने पिचकारी छोड़ा अपने लण्ड को हाथ में पकड़े हुए अदिति के पेट से लेकर उसकी छाती और गले तक गुर्राते हुए- “आघ्गघह... इसस्स्स... आआआ.. यू आर फेबुलस माई लोव सुपर्ब..”

कुछ देर तक राजन अदिति के ऊपर लेटा रहा, अदिति की चूचियों को कुचलते हुए, हाँफते हुए। अदिति ने अपनी बाहों को उसके गले में डालकर बड़े प्यार से उसके गाल और गले को चूम रही थी। क्योंकी उसने अदिति को बहुत खुश किया था। फिर जहाँ-जहाँ उसके होंठ गये राजन के जिश्म पर वहाँ-वहाँ अदिति चूमती गई। दोनों हाँफ रहे थे, और आखीर में अदिति ने राजन के कान में फुसफुसाते हुए कहा।

अदिति- “तो आप इस तरह से एक छोटी सी लड़की को खुश करते हो हर रात को हाँ.. अब बताओ मुझे कौन बेहतर है अंजली या मैं?"

* * * * * * * * * *
 
कड़ी_49 अदिति को मिली विशाल की काल

राजन की खुशी का इंतेहा नहीं था की वो अदिति को पाने में कामयाब हो गया था।

दोनों तब भी सोफे पर नंगे लेटे हुए थे जब अदिति का मोबाइल बजा। उसकी चूचियों का आधा हिस्सा राजन की छाती पर दबा हुवा थे और उस वक्त राजन पीठ पर लेटा हुआ था और अदिति उसके ऊपर थी। उसकी चूचियां राजन के छाती के बालों पर दबी हुई थीं, और राजन उंगलियां अदिति के पीठ पर फेर रहा था। मोबाइल के बजने पर अदिति झट से उठी मोबाइल लिया और एक हाथ से अपने ब्लाउज़ को अपनी छाती पर दबाया जैसे खुद को ढंक रही थी।

राजन ने कहा- “क्यों ढंक रही हो मैंने सब देखा, चूमा, चाटा अब ढंकने से क्या फायदा?"

...

अदिति ने राजन के चेहरे में देखते हुए अपनी उंगली को उसके होंठों से लगाया और धीरे से कहा- “इसस्स्स्ह मेरे पति का काल है एक शब्द भी मत बोलना बिल्कुल खामोश रहो...”

अदिति ने काल को रिसीव किया और राजन अदिति को ऊपर से नीचे तक देखता रहा, उसको निहारता गया। अदिति सामने वाले सोफे पर जाकर बैठ गई मोबाइल पर बात करने के लिए, और राजन नंगी अदिति को फोन पर बातें करते हुए देखने लगा। अदिति एक हाथ से अपनी स्कर्ट पहने की कोशिश करते हुए विशाल से बात करने लगी मोबाइल पर।

विशाल- “हाय बीवी जी किया हो रहा है?"

अदिति ने अपने कपड़े पहने की कोशिश करते हुए चेहरे पर लाली के साथ जवाब दिया- “मैं ठीक हूँ, क्यों तुमने ऐसे अचानक फोन किया आज?"

विशाल- “मैंने क्यों काल किया? अरे क्या मैं तुमको हर रोज काल नहीं करता हूँ? आज लेट वापस आऊँगा, कुछ

काम ज्यादा है, कोई रात को 9:00 बजे तक आऊँगा यही बताने के लिए फोन किया...”

अदिति जब विशाल से बात कर रही तो राजन उठकर अदिति के पास आया और जो स्कर्ट अदिति पहनने की कोशिश कर रही थी वो राजन ने उतार दिया, नहीं पहने दिया अदिति को। वो उसको नंगी देखना चाहता था अपने पति से बात करते हुए। उसकी चूचियां कड़क थी निपल तने हुए जैसे राजन को देख रहे थे।

अदिति कुछ रिएक्ट नहीं कर सकी, वरना उधर विशाल सुन लेता तो मजबूरन उसने राजन को स्कर्ट को उतारने दिया और उसकी आँखों में उसके ठीपन को देखती गई बात करते हुए। अब एक लम्हे के बाद अदिति बात किए जा रही थी जब राजन ने थोड़ा शैतानी किया। वो जानबूझ कर अदिति के सामने नीचे फर्श पर बैठ गया

और उसकी जांघों के बीच अपना सिर रखकर अपनी जीभ को हल्के से जांघों पर फेरा।

अदिति उसको रोकने की कोशिश कर रही थी मगर ज्यादा कुछ नहीं कर पाई, वरना विशाल उस तरफ आवाजें सुन लेता। बहुत मजेदार सीन था देखने को की एक जवान औरत बिल्कुल नंगी एक अजनबी के सामने अपने पति से बात कर रही थी और वो अजनबी उस मौके का फायदा उठाते हुए उस पत्नी के साथ मजा ले रहा था

और उसको मजबूरन खामोश रहना पड़ रहा था। राजन को बहुत मजा आ रहा था और ज्यादा शैतानी किए जा रहा था अदिति के जिश्म के साथ।

राजन को बहुत उत्तेजित महसूस हो रहा था अदिति के जिश्म को छूने को, चाटने को और उसकी गुप्त अंगो पर जो जी में आए करने को, जब वो अपने पति से बात कर रही थी। राजन जीत महसूस कर रहा था की विशाल की पत्नी नंगी उसके सामने थी। हालांकी उसी से बात कर रही थी मगर उसका जिश्म राजन के पास था उस वक़्त।

विशाल हमेशा की तरह अदिति से रोमांचक बातें करने लगा, जैसे उसकी आदत थी- “तो आज मेरी सेक्सी बीवी ने कौन सा ड्रेस पहना है और कितनी हाट दिख रही है इस वक़्त? जिस लिबास में मैंने तुमको आज सुबह को छोड़ा था वो चेंज कर चुकी हो ना? अब किस लिबास में हो बोलो?"

विशाल की बातों को सुनकर अदिति शरारत करने पर आ गई और कहा- “मैं इस वक्त बिल्कुल नंगी हूँ और

सोफे पर लेटी हुई हूँ..”

अदिति असल में बिल्कुल सच ही तो बता रही थी। मगर विशाल को लग रहा था की उसको लुभा रही है ऐसा कहते हुए।

राजन को अदिति का जवाब सुनकर जबरदस्त झटका लगा और उठ गया जहाँ बैठा था वहाँ से। मगर अदिति ने उसको रुकने को कहा और राजन का एक हाथ पकड़कर उसको वापस बैठा लिया अपनी जांघों के पास।

उस तरफ विशाल को लगा की अदिति नये रोल-प्ले के लिये तैयार कर रही है उसके लिए जो आज रात को

खेला जाएगा, तो अदिति को जारी करने को कहा।

अदिति कहने लगी- “मैं नंगी सोफे पर हूँ और अकेली नहीं हूँ जान। कोई है मेरे साथ इस वक्त, मुझको बहुत तंग कर रहा है, हम्म्म्म ...”

और अदिति ने फिर से अपनी उंगली को होंठों से लगाते हुए राजन को चुप रहने का इशारा किया और उसके सिर को अपने नंगी गोद में रख लिया। इस बार अदिति राजन को डामिनेट कर रही थी और वो गुलाम की तरह

अदिति की बातों पर अमल करता जा रहा था।
 
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