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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

पार्टी में अदिति सब लोग आ गए थे, यह तीनों लेट थे। गार्डेन की मद्धिम रोशनी में सिर्फ 4 औरतें दिख रही थी इतने सारे मर्दो के बीच। वहाँ से होते तीनों एक बड़े से लाउंज में दाखिल हुए, जहाँ तकरीबन सभी मर्दो ने हाथ में एक शैम्पेन का ग्लास थामे हुए थे, और कुछ सिगार लिए हुए थे उंगलियों के बीच और कोई-कोई सिगरेट पी रहे थे।

जैसे ही अदिति और विशाल अंदर आए उनके पीछे आनंद, तो सभी मर्दो की नजरें अदिति पर पड़ी। एकाध

औरतें जो थी, वह लोग एक कोने में अपने आप में गप्पें करने में बिजी थी। तो किसी को बीच लाउंज में देखने का मौका ही नहीं था। जब होस्ट इन तीनों को स्वागत कर रहा था तो सभी मर्द लोग सिर्फ अदिति को ऊपर से नीचे तक देख रहे थे। उनमें से कुछ लोग चलकर अदिति के पीछे गये उसकी नंगी पीठ देखने को और सबके सब अपने लण्ड को पैंट में ठीक करने लगे।

विशाल की बारी आया अदिति को अपने कालीग्स से इंट्रोड्यूस करवाने की। अदिति का हाथ थामे उसने एक-एक कंपनी में काम करने वालों से अदिति को इंट्रोड्यूस किया। इंट्रोडक्सन के दौरान आनंद उन मर्दो की नजरों को देखे जा रहा था। उसको पता था सब अदिति को निहार रहे हैं और वासना भरी नजरों से उसको देख रहे हैं।

उनमें से कुछ मर्द अदिति से हाथ मिला रहे थे और कुछ “नमस्ते” जिस वक्त अदिति हाथ मिला कर रही थी। अदिति की तो नंगी बाहें और कांख दिख रही थी और सभी नजरें उसकी कांख पर होती थीं उस वक्त, क्योंकी ब्लाउज़ में स्लीव थी ही नहीं। बिल्कुल ब्रा के जैसी थी लेटेस्ट स्टाइल जो रैंप पर माडेल्स पहनते हैं बिल्कुल वैसी ब्लाउज़ स्टाइल थी उसकी। और कुछ नजरें उसकी क्लीवेज पर होती थीं और बार-बार उसकी पल्लू सरक जाया करती थी। बार-बार अदिति अपनी पल्लू को ऊपर सजा रही थी, और कभी अपने चेहरे से बालों को हटाती जा रही थी। उसकी अदायें तो थी ही कमाल की जैसे सभी मर्दो को खुद रिझा रही थी।

आनंद को लगता था जलन हो रही थी जब बाकी के मर्द अदिति को देख रहे थे तो वो बार-बार अदिति के बीच आ जाता था उससे बात करने, जब दूसरे मर्द लोग उससे बात कर रहे थे।

कंपनी की मैनेजर और डाइरेक्टर आखिरी दो आदमी थे जिससे अदिति का परिचय करवाना रह गया था। और

जब विशाल उन दोनों के करीब गया तो आनंद को पीछे रहना पड़ा, क्योंकी वो बास लोगों के बीच नहीं जा सकता मिसबिहेव करने को। कोई एक मीटर की दूरी से सब देख रहा था।

अपनी खूबसूरत और इन्वाइटिंग मुश्कराहट के साथ अदिति ने हाथ ऊपर किया डाइरेक्टर से मिलाने को तब विशाल ने अदिति से कहा- “और दिस इस दि बास डाइरेक्टर आफ आवर कंपनी...”

डाइरेक्टर तकरीबन 50 साल का आदमी था, मगर बिल्कुल उस उमर की नहीं लग रहा था, बल्की बहुत फ्रेश

और ज्यादा जवान दिख रहे थे डाइरेक्टर साहब। एक फ्रेंच-कट था डाइरेक्टर जी का और अपनी आदत वाली मुश्कुराहट से उसने अदिति से हाथ मिलाते हुए उसकी आँखों में देखा और कहा- “हेलो लव्ली मेम, वेरी प्लीज़्ड तो मीट यू." और उसने अदिति की कलाई को अपने मुँह तक किया और उसके हाथ को चूमा।

उस वक़्त मैनेजर जो पास खड़ा था उसने अदिति की बाहें ऊपर उठाते देखा और उसकी नजर अदिति की कांख पर गई, और बेकरारी से अपनी बारी इंतेजार कर रहा था। क्योंकी तब अदिति को उससे मिलवाने का बारी था।

मैनेजर भी 50 साल का था मगर डाइरेक्टर की तरह नहीं था वो। उसके बाल कुछ भूरे थे और वो 50 साल की उमर का दिखता भी था। उसने अदिति के हाथ को जोर से अपने हाथों में दबाया और कहा- “हेलो मेडम आपसे मिलकर बड़ी खुशी हुई.."

विशाल ने खुशी से मुश्कुराते हुए अपने कंपनी की आइमिनिस्ट्रेटर्स को देखा जो मिस्टर पांडे थे। डाइरेक्टर ने कहा- “विशाल, आपकी पत्नी कहाँ काम करती है? ऐसी खूबसूरत औरत को तो हमारी कंपनी में होना चाहिए था, ठीक है न मैनेजर डियर?”

चेहरे पर लाली के साथ विशाल ने कहा- “नो सर, मेरी पत्नी काम नहीं करती, वो बस एक हाउसपत्नी है...”

तब मैनेजर मिस्टर देशमुख ने कहा- “बिल्कुल एक माडेल जैसी दिखती है तुम्हारी पत्नी, इसको ट्राई करना चाहिए उस फील्ड में...”

तब अदिति को कुछ ठरकीपन नजरों से देखते हुए डाइरेक्टर ने मुश्कुराते हुए कहा- “सही है, मैनेजर ठीक कह रहा था, तुम सच में आजकल के हमारे उन माडेल्स की तरह ही दिखती हो...”

अदिति का चेहरा बिल्कुल लाल हो गया था और विशाल के चेहरे में देखा। फिर मुड़कर आनंद को शर्माते हए सवालिया नजरों से देखा। तब तक वेटर ट्रे में शैम्पेन लिए आकर आनंद और विशाल को सर्व किया और पूछा अदिति क्या लेगी।

दोनों मैनेजर और डाइरेक्टर ने एक साथ कहा- "इनको भी सबकी तरह एक शैम्पेन की ग्लास दो बेशक..."

अदिति ने फिर से विशाल के तरफ सवालिया नजरों से देखा तो विशाल ने हाँ में सिर हिलाया। अदिति ने एक ग्लास ले लिया और सबने एक साथ ग्लास टकराए जोर से “चियर्स” कहते हुए।

आनंद भरपूर कोशिश कर रहा था अदिति के साथ रहने के लिए, मगर जल्द ही अदिति उन दूसरी औरतों के साथ मिल गई, और कभी कोई और अदिति से बात करने लगता। तो आनंद को दूरी रखनी पड़ रही थी मगर उसने अदिति को एक पल के लिए भी नजरों से दूर नहीं होने दिया। आनंद अदिति का पति ज्यादा लग रहा था विशाल से उस वक्त। विशाल बिल्कुल अदिति की फिकर नहीं कर रहा था बल्की वो तो आनंद पर नजर रख रहा था।

एक बार मैनेजर अदिति के पास आया और कुछ बातें करने लगा। आनंद को गुस्सा आया क्योंकी वो सुन नहीं पा रहा था की वो क्या बात कर रहा था अदिति के साथ। क्योंकी वो दूर था और कंपनी के मैनेजर के पास तो नहीं जा सकता था। उसने अदिति हो हँसते और चहकते हुए देखा मैनेजर के साथ और गुस्से से आनंद लाल पीला होता जा रहा था, क्योंकी उसको ऐसा लग रहा था अदिति की अदाओं से की जैसे मैनेजर उसको सिड्यूस कर रहा था उस वक्त।

तब मैनेजर डाइरेक्टर से बात करने गया अदिति की तरफ इशारा करते हुए और डाइरेक्टर ने मुड़कर अदिति की तरफ देखा तो अदिति उनके साथ मुश्कुरा रही थी।

आनंद ने विशाल की तरफ देखा तो वो एक बड़े से सोफा पर बैठा दोस्तों से बातें कर रहा था पीते हुए। दाँत पीसते हुए आनंद भुनभुनाया- “पता नहीं कैसा पति है यह? लगता है अपनी बीवी को दूसरों को निहारने के लिए यहाँ लाया है इसने."

आनंद ने नोटिस किया की मैनेजर और डाइरेक्टर अदिति को नजरों से दूर नहीं होने दे रहे हैं। दोनों अदिति की हर हरकत पर नजर रख रहे थे, की वो किधर जा रही है, किससे बात कर रही है, किस को देख रही है? और साफ नजर आ रहा था की दोनों अदिति के बारे में हर वक़्त बातें किए जा रहे थे।

आनंद को और अजीब लगा क्योंकी उसने देखा की बार-बार अदिति भी उन दोनों की तरफ ही देख रही थी जैसे वह सब नजरों से बातें कर रहे थे, कम्यूनिकेट कर रहे थे किसी तरह से।

आनंद को गुस्सा आया और अदिति के पास जाकर बैठा और मैनेजर और डाइरेक्टर पर नजर किए हुए, सिर को नीचे झुका कर अदिति से कहा- “लगता है आज हम दोनों को एक बहुत अच्छा मौका मिलेगा, देखो विशाल को वहां नशा हो चुका है, जब तक हम वापस घर पहुंचेंगे वो बिल्कुल नशे में टुन्न हो जाएगा और हमें अच्छा मौका मिलेगा, क्यों जानेमन सही टाइमिंग है ना?"

अदिति मुश्कुराई, अपने पल्लू को कंधे पर सीधा किया, बालों को पीछे किया और, मैनेजर और डाइरेक्टर की तरफ देखकर मुश्कुराई जैसे उसने आनंद की कोई बात ही नहीं सुना।

उससे आनंद को बहुत गुस्सा आया और वो खड़ा हुआ और कहा- “गार्डेन में चलो प्लीज... सुना तुमने मैंने क्या कहा?"

अदिति ने चारों तरफ देखते हुए कहा- “बाहर ठंड बहुत है, यहीं ठीक है डियर..."

आनंद अपना जबड़ा कसके दबाते हुए चलकर वेटर की तरफ गया एक ग्लास ड्रिंक के लिए।

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कड़ी_63 आनंद ड्राइविंग देम बैक होम

आखीरकार, पार्टी खतम हुई और आनंद बेचैन था अदिति को घर वापस छोड़ने के लिए, और वो बहुत ही परेशान था अदिति को मैनेजर और डाइरेक्टर को ध्यान देते हुए देखकर। आनंद ने उन तीनों की सभी हरकतों को अच्छी तरह से देखा था, और उसको यकीन हो गया था की मैनेजर और डाइरेक्टर अदिति को लेकर कुछ कुछ पका रहे हैं।

विशाल नशे में होने का ढोंग कर रहा था और आनंद को लड़खड़ाती जुबान में कहा- “तुम हम लोगों को घर छोड़ दो अब, मैं नहीं चल सकता मुझे कार तक ले चलो आनंद मेरे दोस्त। मुझे पीछे वाली सीट पर लेटा दो शायद मैं सोऊँगा अब.."

जब आनंद विशाल को कार तक ले जा रहा था तब अदिति मैनेजर और डाइरेक्टर को बाइ कह रही थी, और उन दोनों ने अदिति को घेरा हुआ था उसकी कलाई को पकड़े और उसके हाथ को चूमते और उसके साथ फ्लर्ट

करते हुये।

आखीर में जब अदिति कार के पास आई तो उसको आगे की सीट लेनी पड़ी। क्योंकी आनंद ने पीछे की सीट को पूरा घेर लिया था लेटकर, जैसे वो सो रहा है। विशाल ने सोचा आज रात को वो ज्यादा करीब से उन दोनों को देख सकेगा और उन दोनों की सभी बातों को साफ सुन पाएगा।

ड्राइव करते हुए कुछ दूर जाने के बाद आनंद ने अदिति की पल्लू को अपने तरफ खींचा, तो अदिति ने फुफुसाकर कान में कहा- “क्या है? ओह्ह... वो यहीं है खबरदार...”

आनंद ने जवाब दिया- “वो बिल्कुल नशे में है और सोया हआ है। और फिर अगर उसने अभी हमारी बातों को सुना भी तो कल कुछ भी नहीं याद रहेगा उसको, फिकर मत करो.."

अदिति- “नहीं अभी नहीं, मेरा पल्लू छोड़ो..”

तब तक आनंद का एक हाथ स्टियरिंग पर था और एक हाथ से अदिति की चूचियों को दबाने लगा। अदिति पीछे मुड़कर विशाल को देख रही थी, वो उस वक़्त झूठ-मूठ के खर्राटे की आवाज निकाल रहा था। अंधेरा था तो अदिति को सब साफ तो नहीं दिख रहा था। इसलिए विशाल ने अपनी आँखों को थोड़ा सा खोल रखा था और उसी की तरफ देख रहा था और आनंद के हाथ उसकी पत्नी की चूचियों को मसल रहे थे यह भी विशाल अच्छी

तरह से देख सकता था।

तब तक आनंद का हाथ अदिति के ब्लाउज़ के अंदर घुस चुका था और एक चूची को पूरा अपने हाथ में ले लिया था आनंद ने ड्राइव करते हुए। आनंद का बिल्कुल जमकर खड़ा हो चुका था और उसका मन कर रहा था वहीं के वहीं अदिति को चोद दे। अब क्योंकी ड्राइव कर रहा था तो अदिति का पूरा मजा नहीं ले पा रहा था इसलिये उसने एक सूनसान जगह देखकर कार को पार्क किया और सोचा कार में ही अदिति से एंजाय करे अब।

अदिति समझ गई आनंद क्या करना चाहता है जब उसने एंजिन स्विच आफ किया।

आदिदि ने कहा- “नहीं, यहाँ बिल्कुल नहीं आनंदजी। अगर पेट्रोल पोलिस वाले गुजरें तो क्या होगा, और विशाल साथ में हैं। ऐसे उसके मौजूदगी में तो नहीं। आपका दिमाग तो ठीक है आनंदजी क्या कर रहे हो आप?"

खिसकते हुए आनंद उसकी सीट तक आया और कहा- “ऐसी जगह पोलिस नहीं आती, हम मेन रोड से बहुत दूर हैं, चारों तरफ देखो सिर्फ पेड़ और जंगल जैसा नजारा है, पोलिस पेट्रोल तो उस तरफ मेन रोड से गुजरेंगे, तुम फिकर मत करो जानेमन..."

सिर्फ उनकी बातों को सुनकर ही विशाल का लण्ड हरकत करने लगा उसके पैंट के अंदर और उसने दिल ही दिल में कहा- “हाँ आनंद लगे रहो, करो यार, और अदिति मेरी जान उसको करने दो जान... मैं तुमको उसके साथ तड़पते हुए देखना और सुनना चाहता हूँ। अंधेरा है फिर भी कुछ-कुछ दिख तो रहा है मुझे खासकर सब सुनाई तो दे रहा है। बहुत मजा आएगा मुझे..”

तब तक आनंद ने अदिति वाली सीट को फ्लैट कर दिया एक बेड की तरह और आनंद अदिति के ऊपर चढ़ गया उसके गाल और गले को चूमते और चाटते हुए। अदिति अनाय्ड महसूस हो रही थी और बार-बार पीछे

विशाल की तरफ देख रही थी। उसके बाल पीछे विशाल की टाँगों पर गिरे जब आनंद ने अदिति को उस सीट से चिपकाया तो, फिर आनंद का हाथ उसकी पेटीकोट तक गया और उसने अपने हाथ को उसकी पैंटी के अंदर डालने की कोशिश किया।

आनंद ने अदिति की क्लीवेज पर होंठ फेरते हुए बोला- “हम्म... मैनेजर और डाइरेक्टर दोनों तुम्हारी तरफ कुछ ज्यादा ही इंटेरेस्ट दिखा रहे थे। बल्की तुमसे फ्लर्ट कर रहे थे दोनों, और तुम भी उनको अपने करीब आने दे रही थी हाँ? तुम गरम हो चुकी थी, है ना जानम बोलो? मन बहुत कर रहा था ना?"

अदिति- “शटप... और तुमको जो करना है करो। मुझको बिल्कुल नहीं अच्छा लग रहा है इस वक्त इस तरह से। मेरा पति यहीं है कार में। नहीं नहीं रुको, रुको, मुझे ठीक नहीं लग रहा ऐसे। रुको...” मगर आनंद अदिति को बिल्कुल नहीं सुन रहा था एक भूखे शेर की तरह उसके गोश्त को नोच रहा था।

वो अदिति के मुंह अपने मुँह में लेने की कोशिश कर रहा था मगर अदिति नहीं लेने दे रही थी, हर बार जब आनंद उसके होंठों तक अपना मुँह करता, अदिति अपने चेहरे को दूसरी तरफ कर लेती। अदिति हर बार पीछे मुड़कर विशाल को देख रही थी और वो अपने खर्राटों को और जोर से मारता था ताकी उन लोगों को लगे के वो गहरी नींद में है।

आनंद को जगह की कमी महसूस हो रही थी एक कार में अदिति को चोदने के लिए, फीर भी भरपूर कोशिश कर रहा था मगर मुश्किल लग रहा था उसे। फिर भी उसने अपनी जिप खोला और अपने तने हुए लण्ड को बाहर निकाला और अदिति की साड़ी और पेटीकोट को ऊपर उठाकर उसकी जांघों पर रगड़ना शुरू कर दिया।

अदिति तब भी इनकार किए जा रही थी, उसको बिल्कुल नहीं पसंद आ रहा था की विशाल के सामने वो सब करे। मगर आनंद धित बनकर किए जा रहा था।

पीछे से विशाल देखने की कोशिश कर रहा था की उसको अदिति की जांघे दिखें, क्योंकी वो समझ गया था की

आनंद क्या कर रहा है उस वक्त। क्योंकी उसने आनंद को अपनी जिप को खोलते हुए सुना और आनंद की भारी साँसें और गुर्राने से विशाल को सब समझ में आ रहा था की इस वक़्त उसकी पत्नी की जांघे आनंद का खुराक बनी हुई हैं।

आनंद ने कार की लाइट को ओन किया, और डरे हुये चेहरे से अदिति ने शिकायत किया आनंद से लाइट आफ करने को और झट से पीछे मुड़कर विशाल को देखा की उसको सब दिखेगा लाइट में। लाइट ओन देखकर विशाल ने तुरंत आँखें बंद कर ली। अदिति ने अपना हाथ ऊपर उठाकर लाइट को आफ करना चाहा, मगर आनंद ने नहीं करने दिया। उसके हाथ को थामकर अपने लण्ड तक ले गया यह कहते।

आनंद- “रहने दो लाइट को, मुझे तुम्हारे होंठ, जांघों, और पैंटी को देखना है अदिति जानी, मैं इतनी खूबसूरत शरीर को कैसे बिना देखे, निहारे रह सकता हूँ भला? जब चाटूंगा और चूसूंगा तो साथ-साथ देखना पसंद करूँगा इनको। जरा अपनी टाँगों को फैलाओ तो डार्लिंग। तुमको अब बहुत मजा आएगा..."
 
अदिति कभी पीछे विशाल को देखती तो फिर आगे आनंद के चेहरे में देखती फिकरमंद होकर, और एक रोनी आवाज में कहा- “मगर हमको कोई भी बाहर से देख सकता है, और विशाल जाग गया तब क्या होगा, प्लीज लाइट को आफ कर दो आनंदजी प्लीज..”

आनंद ने अदिति की जांघों को चाटते हुए और ऊपर उसकी चूत के तरफ बढ़ते हुए कहा- “सिर्फ बंदर और जंगली जानवर हमको इस जगह बाहर से देख सकते हैं, इस वक्त रात के बारह बजने के बाद कोई इंसान ऐसी जगह पर नहीं होता हमें देखने के लिए जानेमन। ठहरो थोड़ी देर, मुझे तुमको जल्दी से खुश करने तो दो। झट से हो जाएगा देखना..."

तब आनंद ने अदिति को थोड़ा ऊपर उठाया उसकी कांख के नीचे अपने हाथ से उसको उठाते हुए और वहाँ भीगा हुआ महसूस किया, ऊपर उठने से अदिति का सिर विशाल के पैरों पर आ गया था। विशाल ने अपनी

आँखों को बस थोड़ा सा खोला तो उसको सब साफ दिख रहा था। अपनी बीवी को अपने दोस्त के साथ एंजाय करते हुए देखने में तो उसको बहुत ही मजा आ रहा था। जब आनंद ने अदिति की पैंटी को चूमा और चाटना शुरू किया तो अदिति की तड़पती हुई सिसकारियां सुनाई देने लगी और वो खुद को मदहोशी में खोने लगी और वो सब सुनकर विशाल को बहुत ही अच्छा लग रहा था।

और कुछ ही देर बाद आनंद ने अदिति की पैंटी को नीचे किया और उसकी चूत को मुँह लेकर चाटने लगा जैसे उसको खा रहा था। अदिति बिल्कुल गीली हो गई थी और उसका पानी बहने लगा था। आनंद उसके रस को चूस रहा था। विशाल आनंद की जीभ से की हुए आवाजें सुन रहा था और उसको मालूम था की वो अदिति की चूत

चूस रहा है।

अदिति बेहाल होती जा रही थी और उसकी तड़प की आवाज ऊँची होती जा रही थी, उसने अपनी आँखों को बंद कर लिया आनंद की जीभ को अपनी चूत के इर्द-गिर्द महसूस करते हुए। जब विशाल ने देखा की अदिति ने

आँखें मूंद ली है तो उसने आँखें खोलकर गौर से जरा सा अपना सिर उठाकर अदिति की फैलाई हुई नंगी जांघों को देखा और आनंद का सिर अदिति की जांघों के बीच देखा। अदिति की उंगलियां आनंद के बालों में फिर रही थिं और अदिति तड़पती जा रही थी सिसकारियों के साथ।

फिर अदिति ने अपने एक हाथ को विशाल के पैंट पर धीरे से फेरा, क्योंकी उसका सिर उस वक्त तो विशाल की टाँगों पर ही था। और अदिति ने अपनी हथेली को विशाल के लण्ड पर किया पैंट के ऊपर से ही और उसको महसूस हुआ की विशाल का लण्ड बिल्कुल खड़ा हुआ है तो अदिति ने सिर को थोड़ा सा ऊपर उठाते हुए फुसफुसाकर आनंद से कहा।

अदिति- “वो उसका खड़ा हुआ है तो इसका मतलब वो नहीं सोया है..”

तब आनंद अदिति के ऊपर चढ़ा उसकी टाँगों को और ज्यादा फैलाते हुए कहा- “उसका खड़ा होना नेचुरल है, जब कोई नशे में होता है तो ऐसा होता है अक्सर। तुम देख नहीं रही हो की वो नशे के मारे अधमरा पड़ा हुआ है। उसकी फिकर छोड़ो और अब मेरे लण्ड को अपनी गहराई में महसूस करो स्वीटहार्ट."

आनंद ने अपने मोटे लण्ड को अदिति की गीली चूत के अंदर ठूँसा। जिससे अदिति की सिसकारी और भी ज्यादा जोर से निकली और उसकी तड़प भी बढ़ती गई, और आनंद के लण्ड को अपने अंदर अंदर-बाहर आते जाते हुए महसूस करते हुए अदिति ने फिर से मुड़कर विशाल को देखा। फिर महसूस करती गई आनंद के लण्ड को अपने अंदर आते-जाते हुए और अपनी बाहों को आनंद के गले में डाल दिया अदिति ने। फिर अपने होंठों से आनंद के गले को चूमने चाटने लगी और एकाध बार वहीं से मुड़कर विशाल के चेहरे में देखती गई की कहीं विशाल कुछ देख तो नहीं रहा। अदिति अपने कमर को आनंद के नीचे जोरों से हिलाने लगी, ताकी जल्दी से

आनंद झड़ जाए और सब खतम किया जाए जल्दी से।

फिर खुद अदिति को मजा आने लगा और आनंद के मुँह को अपने मुँह में ले लिया अदिति ने और जबरदस्त तरीके से आनंद की जीभ को चूसने लगी। और उस पल को वो सब भूल गई की उसका पति इस वक्त वहाँ मौजूद है। उसको बहुत मजा आने लगा और चुदाई का मजा लेने लगी सब कुछ भूलकर।

आनंद यही चाहता था के अदिति खुशी से जवाब करे। उसको भी ज्यादा मजा आने लगा जब अदिति खुद आराम से चुदवाने लगी और चुदाई का मजा लेने लगी। अदिति की उंगलियां आनंद की पीठ पर फिर रही थीं, उसकी जिश्म बिल्कुल आनंद के जिश्म से चिपकी हुई थी और वो आनंद का मुँह छोड़ ही नहीं रही थी।

विशाल आँखें थोड़ा खोलकर अपनी बीवी को अपने दोस्त से चुदवाते देखने लगा, तो उसको बहुत आनंद मिला।

आनंद जल्द ही गुर्राने लगा और दाँतों को दबाए उसकी कराहने की आवाज सुनाई दे गई। आनंद ने धक्के की रफ़्तार बढ़ाई और इतने जोर से धक्के देने लगा की पूरी कार हिलने लगी। अदिति की तड़प भी बढ़ती गई, उसकी सिसकारियां बंद कार के अंदर जैसे बाहर निकलने को शीशे को फोड़ देंगे, और अनंद ने तेजी के साथ

अदिति की चूत में धक्के मारते हुए अदिति की गहराईयों में झड़ने लगा- “आघघ्गघ ओहह..” करते हुए।
 
आनंद ने अपने जिश्म के वजन को अदिति के जिश्म पर कर दिया। जिससे कार की सीट और भी नीचे क्लिक हो गई। उस वक्त अदिति ने आनंद को जोर से अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था और उसके होंठ, गाल और गला चूमटी जा रही थी बहुत प्यार और खुशी से। बिल्कुल नहीं लग रहा था की कुछ देर पहले यही अदिति इनकार कर रही थी, ये सब करने को। इस वक्त एक सेक्सी औरत जो सेक्स करना बहुत पसंद करती है लग रही थी अदिति। उसको इस वक्त बिल्कुल परवाह नहीं था की विशाल यहाँ है या नहीं? अदिति को बहुत मजा आया और सकन मिला करने के बाद, और वो खश हई इसलिए अब कोई शिकायत नहीं थी उसको आनंद से। वो । मुश्करा रही थी। अदिति ने उसकी उंगलियां आनंद के कंधों पर फिराया और आनंद के कंधे पर दाँत काटा और मुट्ठी बंद करके उसकी छाती पर मुक्के मारते हुए अदिति ने एक नटखटी आवाज में कहा।

अदिति- “आप बहुत नाटी हो आनंदजी, आपने मेरे पति के सामने मुझको चोदा..."
 
कड़ी_64

मैनेजर और डाइरेक्टर की पेशकस दूसरे दिन काम में विशाल को डाइरेक्टर ने अपने आफिस में बुलवाया। मैनेजर भी साथ थे डाइरेक्टर के आफिस में। विशाल को बैठने के लिए कहा गया। उसको फिकर होने लगी थी क्योंकी उसने सोचा की आफिस के काम के बारे में कुछ गड़बड़ किया होगा उसने, इसीलिए उनको कोई प्राब्लम हुई है। डाइरेक्टर और मैनेजर ने एक दूसरे को देखा फिर विशाल को।

मैनेजर ने बात शुरू किया- “मिस्टर विशाल हमें लगता है की आप एक प्रमोशन के हकदार हो और अभी प्रमोट होने के लिए जगह खाली है..”

इंतेहा न थी उस वक़्त और उसने दोनों बास के चेहरे में एक के बाद एक को सवालिया

विशाल नजरों से देखा।

डाइरेक्टर बोला- “और इस कंपनी में हर एक कदम आगे बढ़ने पर एक कीमत चुकानी पड़ती है यह तो आपको मालूम होगा ही ना?"

विशाल नहीं समझा और डाइरेक्टर के चेहरे में देखता रहा। यह उम्मीद करते की वो कुछ और कहेगा।

तब दोनों मैनेजर और डाइरेक्टर ने एक आवाज में कहा- “आपकी बीवी बेहद खूबसूरत है विशाल साहब, और हम उनकी कंपनी चाहते हैं। क्या आप यह अरेंज कर सकोगे हमारे लिए?"

विशाल को एक झटका जैसा लगा और अब उसकी समझ में नहीं आ रहा था की वो खुशी से झूमे या हैरान होने

का नाटक करे। उसका सपना बिना मेहनत किए साकार होते हुए नजर आने लगा था उसे तो। वो अदिति को इतनी दिल की गहराई से शेयर करना चाह रहा है कितने महीनों से, और यहाँ उसी के लिये अदिति की फरमाइश किया जा रहा है गैर मर्दो से। अपनी खुशी को इजहार ना करते हुए विशाल ने एक तरफ देखा और बात नहीं समझने का ढोंग क्या।

मैनेजर के कहा- “देखो अपने फ्यूचर के बारे में सोचो और कितनी सुविधाएं प्राप्त होंगी आपको इस प्रमोशन से इसके बारे में सोचो, हमने आपको अपनी दूसरी ब्रांच में, पड़ोसी शहर में जनरल मैनेजर बनाने के लिए सोच रखा है। और बड़ी बात यह है की एक बंगलो और कार फ्री में मिलेगी आपको कंपनी की तरफ से और पेटोल भी कंपनी की मिलेगी...”

विशाल अपनी तकदीर पर यकीन नहीं पा कर रहा था उस वक़्त। सब अदिति के तरफ से और उसी के लिए। अब अदिति जैसे विशाल की लकी चार्म बन गई थी। अब विशाल ने पूछा- “आप लोग मुझे प्लीज... बताएं की प्रमोशन पाने के लिए मुझको क्या करना होगा?”

डाइरेक्टर ने सीधे-सीधे बात किया- “हम यह चाहते हैं की तुम अदिति को कुछ समय के लिए हमारे काम में

शामिल होने दो, उसको खासकर रातों को हमारे साथ रहने दो और तमको प्रमोशन मिल गया समझो..."

विशाल ने फिर से पूछा- “मैं समझा नहीं सर, अदिति को कुछ समय तक आप लोगों के साथ रहने दूँ मतलब?"

तब मैनेजर बोला- “देखो हम लोगों को बड़ी-बड़ी हाई सोसाइटी वाली पार्टीस में तकरीबन हर रात को इन्विटेशन मिलते हैं। और वैसी पार्टीस में हमको ब्यूटिफल, गार्जियस हाट लेडीज की जरूरत पड़ती है हमारी कंपनी के लिए, तब हमारे स्टेटस में चार चाँद लग जाएंगे। क्योंकी वैसी हाई क्लास पार्टीस में तकरीबन सभी लोगों के साथ वैसी खूबसूरत गार्जियस हाट औरतें अकंपनी करती हैं दूसरे हाई अफीशियल्स लोगों को। मतलब बिल्कुल जैसी अदिति

है उस टाइप की लुक वाली औरतें हाट, सेक्सी और गार्जियस कहलाती हैं वैसी पार्टीस में। और फिर वो हमारी कंपनी के लिए लक लाएगी अगर हमारे साथ जाएगी, खासकर जब हम कंपनी के लिए किसी किश्म की डील फाइनलाइज करने को जाते हैं तब...”

विशाल- “मगर मुझे पता नहीं की अदिति मानेगी या नहीं?”

डाइरेक्टर- “मुझे पूरा यकीन है की वो मानेगी। क्योंकी कल रात को हमने उनसे बात की हैं। वो बहुत इंटेलिजेंट

और समझदार औरत लगी हमको। मुझे यकीन है की अगर आप कहोगे की हम चाहते हैं की वो हमारा साथ दे, तो वो राजी हो जाएगी। हम कल रात को ही तुमसे यह सब कहने वाले थे, मगर तुम एकदम नशे में थे...”

विशाल असल में सब कुछ समझ रहा था। मगर भोला बनने की कोशिश करते हुए उसने कहा- “क्या मैं भी

अपनी बीवी के साथ आप लोगों के साथ रह सकँगा?"

डाइरेक्टर ने कहा- “बिल्कुल नहीं... मगर जब कभी आपकी भी जरूरत पड़ेगी तो हम आपको भी बुलाएंगे..."

मैनेजर ने डाइरेक्टर के कान में कहा- “यह तो बिल्कुल नशे में धुत्त रहेगा आने दो अगर साथ आना चाहे तो?"

मैनेजर ने कहा- “अच्छा ठीक है तुम भी साथ आ सकते हो, अगर अपनी प्यारी पत्नी के साथ रहना पसंद करते हो तो। मगर फिर भी हम उनको अकेली अपने साथ ज्यादा पसंद करेगे...”

विशाल कुछ देर खामोश सोचता रहा की अगर दोनों अदिति को चोदना चाहते हैं तो उसको देखने का मौका नहीं मिलेगा, अगर साथ नहीं रहेगा तो। विशाल की खुशी तो इसमें है की वो अदिति को गैरों से चुदवाते हुए देखे

और उसकी तड़प और सिसकारियों को सुनें, और अदिति की एक्सप्रेशन को देखे जब किसी के साथ सेक्स कर रही हो तो। विशाल को बेहद पसंद था अदिति को किसी और का लण्ड अपने हाथ में पकड़े उसको चूसते हुए देखना- वो यह भी मिस कर देगा अगर साथ नहीं होगा तो।

मैनेजर ने कहा- “अच्छा सुनो, आज रात के लिए अदिति को हमारे बंगलो पर लेकर आओ, उससे कहना की सिर्फ हम दोनों के लिए एक छोटी सी पार्टी दिया गया है। अदिति से कहना की डाइरेक्टर जी की बर्थ-डे है और उसने किसी को भी इन्वाइट नहीं किया तुम दोनों के अलावा। इटस आ प्रिविलेज मैन। कहना की क्योंकी तुमको प्रमोट किया जा रहा है, इसीलिए तुमको इन्वाइट किया है, और जब वो वहाँ आ जाये तो तुम उसको हमारे साथ छोड़कर वापस चले जाना। हम रात को उसको वापस घर छोड़ने आ जाएंगे। क्या खयाल है? यह शुरुवात होगी और वो समझ जाएगी की हम उससे क्या चाहते हैं? कौन सा काम निकालना चाहते हैं हम कंपनी के लिए यह सब वो समझ जाएगी। अगर वो समझ गई और कंपनी की लाभ के लिए हमारे साथ रही तो इससे आपको मुनाफा होगा। तुम्हारे कैरियर में आगे बढ़ने के लिए बेहतरीन और उम्दा मौका आया है यह। समझा देना

अदिति को वो जरूर समझ जाएगी और आजकल कोई भी ऐसी बीवी नहीं है जो एक बंगलो और नई कार मिलने पर खुश नहीं होंगी। और हाँ, हम उसको वैसी ही साड़ी में देखना पसंद करेगे जैसी उसने कल रात को पार्टी में पहनी थी, हो सके तो उनको वैसी ही लिबास में लाना प्लीज.."
 
विशाल का तो खड़ा हो गया था अदिति को इन दोनों बूढ़ों के साथ सोचकर, और सोच रहा था की अदिति जरूर मान जाएगी। विशाल को उस रोज काम से जल्दी घर वापस जाने दिया गया अदिति को तैयार करने के लिए।

उसको जल्दी घर वापस देखकर अदिति खुश हो गई और पूछा- “इतनी जल्दी कैसे आ गए?"

विशाल बहुत ही खुश दिख रहा था और चिल्लाकर कहा- “मेरी प्रमोशन हो गई है, मैं न्यू साइट का मैनेजर बन

गया और हमको एक बंगलो और नई कार भी मिल रही है...”

अदिति भी खुशी से झूम उठी और खुद को विशाल की बाहों में भर दिया और दोनों नाचने लगे। मगर कुछ देर बाद विशाल ने अदिति को तैयार होने को कहा, क्योंकी डाइरेक्टर की बर्थ-डे पार्टी में जाना है और सिर्फ अदिति

और वो इन्वाइटेड हैं उस पार्टी में। विशाल ने अदिति को यह भी समझाया की डाइरेक्टर और मैनेजर से ठीक से पेश आए, क्योंकी वह दोनों विशाल पर बहुत बड़ी मेहरबानी कर रहे हैं उसको यह प्रोमोशन देकर।

अदिति ने कल रात वाली मुलाकात को याद किया और मैनेजर और डाइरेक्टर की वासना भरे नजरों को याद किया और विशाल से कहा- “मैं क्या पागल हूँ की इतनी बड़ी प्रमोशन जो तुमको मिल रही है, मैं उसको बर्बाद

करूँगी? फिकर मत करो जान सब सही होगा। अच्छा बताओ मैं पार्टी में जाने के लिये क्या पहनूं? कल रात की तरह एक साड़ी या कुछ और?”

क्योंकी विशाल से कहा गया था की साड़ी में अदिति को लाए तो उसने एक वैसी ही साड़ी सेलेक्ट किया जिसकी ब्लाउड़ वैसी थी एक ब्रा के जैसी। एक डीप-कट छाती पर और पीठ आलमोस्ट बैकलेश लेश के साथ।

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***** **** *
 
*कड़ी_65 अदिति इन कंपनी आफ दि डाइरेक्टर

जल्द ही वह लोग डाइरेक्टर के बंगलो पहुँच गये। अदिति उस साड़ी में कयामत दिख रही थी, उसकी नंगी बाहें, कांख, साड़ी नाभि के नीचे बंधी हुई थी, लगता था उसकी चूतड़ नंगी है, उसकी सिलोवेट इतनी आकर्षित करती थी के बस पूछो मत। उसकी गाण्ड के गोल-गोल हिस्से, उसके जिश्म का हर एक हिस्सा इतना सजा हुआ था उस साड़ी में की ऊपर से उसके नंगे दिखने वाले हिस्से मान लो और मसालेदार दिखा रही थी अदिति को। अब उसपर से अदिति की जानलेवा मुश्कुराहट, उसकी खूबसूरत आवाज और अदायें किसी भी मर्द को दीवाना बना सकती थी। उसकी क्लीवेज की तो बात अलग ही थी, लगता था की अगर जरा सा अदिति झुकी तो ब्रा की जैसी ब्लाउज़ को फाड़कर चूचियां बाहर निकल आएंगी।

डाइरेक्टर और मैनेजर दोनों चौखट पर खड़े उन दोनों पति पत्नी का इंतेजार कर रहे थे और स्वागत किए। उन लोगों तक पहुँचने से पहले, दूर से ही अदिति उनसे मुश्कुराई। चलते-चलते उन तक पहुँकने तक कई बार

अदिति ने दोनों के चेहरे में देखते हुए मीठी स्माइल किया दोनों से। एक पल के लिए अदिति ने विशाल के हाथ को अपने हाथ में जोर से पकड़ा, जैसे उसको एक किश्म का डर या खौफ सा महसूस हुआ दो अंजान लोगों

के बीच जाने से। उस वक्त विशाल ने अदिति के चेहरे में सवाली नजरों से देखा।

अदिति ने धीरे से कहा- “अब मुझको इन दोनों के सामने इस साड़ी में अजीब सी फीलिंग होने लगी है, साड़ी बहुत दिखाउ है और यह दोनों आखिर तो मर्द हैं...” पर इससे पहले की विशाल कुछ जवाब देता वह दोनों होस्ट्स के पास आ गए थे।

डाइरेक्टर जी थोड़ा सा झुक कर अदिति को अपना गाल दिया किस करने को और अपनी बाहों को खोला

अदिति को गले लगाने के लिए। और मैनेजर की बरी आई डाइरेक्टर के बाद वही सब करने को जबकी विशाल

| सबको देख रहा था।

अदिति ने मुश्कराते हुए, खुशी से उनको अपनी बाहों में लेकर गले से लगाते हुए- “हैपी बर्थ-डे सर.” कहा और अपने हाथों को उनके कंधे पर रखे हुए अदिति ने डाइरेक्टर के होंठों को अपने गालों पर रगड़ने दिया और खुद उनके गाल को अपने होंठों से किस किया विश करते हुए।

उसके बाद मैनेजर ने भी बिल्कुल वैसे ही किस किया अदिति को।

आखीरकार, सब लाउंज के अंदर आ चुके थे। खाने पीने के समान टेबल पर रखे हए थे जो खुद को सर्व करने को थे। एक साफ्ट म्यूजिक चल रही थी और विशाल और मैनेजर एक साथ चल रहे थे ड्रिंक टेबल की तरफ बढ़ते हए। जबकी डाइरेक्टर और अदिति उनके सामने चल रहे थे, डाइरेक्टर की हथेली अदिति की नंगी कमर पर थी, मगर धीरे-धीरे नीचे उसके चूतड़ों के तरफ जा रहा था चलते हुए।

पीछे से विशाल वो सब देखते हुए फालो कर रहा था और अदिति हल्की सी मुश्कान के साथ विशाल को मुड़कर देख रही थी।

मैनेजर ने 4 ग्लास में शैम्पेन भरा। अदिति ने एक नजर विशाल को देखा फिर उससे कहा कि वो शैम्पेन नहीं पिएगी। तो विशाल ने मैनेजर से कहा- “सर, वो कह रही है के साफ्ट ड्रिंक्स उसके लिए प्लीज..”

पर मैनेजर अदिति के तरफ मुड़ते हुए उससे कहा- “अदिति मेडम, यह एक ऐसा मौका है की इनकार करना सही नहीं लगता। ऐसे मौके पे एक ग्लास शैम्पेन से कुछ बुरा तो नहीं होगा। अच्छा ठीक है सिर्फ ये एक ग्लास ले लो फिर मत पीना। हमको बस खुश और डाइरेक्टर को एक ग्लास से चियर्स करते हुए एक ग्लास तो पी सकती हो क्यों?”

फिर तुरंत डाइरेक्टर जी ने मैनेजर के हाथ से ग्लास को लेते हुए अदिति को दिया यह कहते हुए- “देखो अदिति मेरा बर्थ-डे है, इसलिए मेरे लिए ये एक ग्लास ले लो, वरना मुझे दुख होगा की मेरे बर्थ-डे के दिन तुमने मुझको इनकार किया...”

तब अदिति ने ग्लास को अपने हाथ में लिया। जबकी डाइरेक्टर की हथेली अब तक अदिति की कमर पर थी, जैसे अदिति उसकी पत्नी या उसकी बेटी हो, कह सकते हैं। दो बार विशाल ने अदिति की कमर पर देखा जहाँ डाइरेक्टर का हाथ था। उसके बाद अदिति को देखा, मगर अदिति जैसे बिल्कुल डिस्टर्ब नहीं महसूस कर रही थी डाइरेक्टर के हाथ को अपने जिश्म पर महसूस करते हुए। विशाल ने यह भी नोट किया की डाइरेक्टर अपनी उंगलियों को अदिति की कमर पर मूव कर रहा था। फिर भी अदिति कोई ऐतराज नहीं कर रही थी। ऐसे बिहेव कर रही थी जैसे वो मामूली बात हो।

तकरीबन एक घंटा बीत गया तब तक वह लोग डिनर किए, पिए और विशाल की प्रमोशन की बातें किए। मगर अब तक सब सिर्फ बातें थीं कुछ अफीशियल नहीं हुवा था। डिनर के वक्त अदिति डाइरेक्टर के बगल में बैठी थी और मैनेजर और विशाल उनके सामने थे।

विशाल जानने की कोशिश कर रहा था की डाइरेक्टर का एक हाथ टेबल के नीचे अदिति की गोद में क्या कर रहा था? क्योंकी हर बार डाइरेक्टर का एक हाथ टेबल के नीचे चला जाता था। साफ जाहिर था की अदिति को

छू रहा होगा डाइरेक्टर उसकी जांघों पर या कहीं भी क्योंकी विशाल अपनी पत्नी की फेशियल एक्सप्रेशन से अंदाजा लगा सकता था की कुछ पक रहा था टेबल के नीचे।

अदिति कभी विशाल के चेहरे में अजीब नजरों से देख रही थी और कभी डाइरेक्टर के चेहरे में देखती थी, जब जब उसका हाथ टेबल के नीचे जाता था। और फिर अदिति मैनेजर के चेहरे में भी इस तरह देखती थी की कहीं वो समझ तो नहीं रहा की डाइरेक्टर का हाथ उसके जिश्म पर है टेबल के नीचे?

विशाल बेताब हो रहा था और उसको देखने की ख्वाहिश हो रही थी टेबल के नीचे, मगर सबके सामने कैसे वो टेबल के नीचे देख सकता था भला? विशाल ने सोचा कुछ जमीन पर गिराकर नीचे देख सकेगा, मगर तब तो डाइरेक्टर तुरंत हाथ टेबल के ऊपर कर लेगा और विशाल को कुछ नहीं दिखेगा यह भी सोचा विशाल ने। विशाल मन में सोचने लगा की क्या कर रहा होगा डाइरेक्टर? अदिति की नाभि पर हाथ फेर रहा होगा, गोल-गोल अपनी उंगलियों को घुमा रहा होगा नाभि के इर्द-गिर्द, या अदिति की साड़ी उठाने की कोशिश कर रहा होगा, या फिर उसकी जांघों पर हाथ फेर रहा होगा। देखने की चाह बढ़ रही थी और सिर्फ यह सब सोचते हुए विशाल का जमकर खड़ा हो गया था पैंट के अंदर।

अदिति एकाध बार अपनी सीट पर हिल डुल रही थी जैसे डाइरेक्टर उसको नीचे डिस्टर्ब कर रहा हो। ऐसा लगता था अदिति खड़ी होना चाहती थी या सीट बदलना चाहती थी। उसकी नजरों और चेहरे के रंग से ऐसा अनुमान लगाया जा सकता था। फिर भी अदिति खराब इंप्रेशन नहीं देने के लिए बैठी रही।
 
एक बार विशाल ने देखा की अदिति ने अपने नीचे वाले होंठ को दाँतों के बीच दबाया और अपनी जीभ को होंठों पर फेरा। जितना विशाल अदिति को जानता था उसको इतना पता था की अदिति वैसा सिर्फ तब करती है, जब सेक्स कर रही होती है गरम होती है सेक्स करने के लिए तब। विशाल समझ गया की टेबल के नीचे डाइरेक्टर साहब काफी निकल गये थे अपने हाथों से अदिति के जिश्म पर खेलते हए। और यह तो कहने की जरूरत नहीं की उसकी क्लीवेज इतनी दिख रही थी की सौ बार से ज्यादा डाइरेक्टर की नजरें उनपर गई जो मैनेजर और विशाल ने खूब देखा और खुद अदिति ने भी।

अपने क्लीवेज को छुपाने या ढंकने का कोई भी तरीका नहीं था अदिति के पास, उस छोटी सी तंग ब्रा के जैसी ब्लाउज़ में। उसको वैसे ड्रेस पहनने से पहले पता होना चाहिए था की कितनी उसकी जिश्म दिखती है, और वो मर्दो के बीच रहने वाली थी। मगर अब बहुत देर हो चुकी थी और कुछ करना नामुमकिन था उस वक्त।

अगले घंटे चारों लाउंज में सोफे पर पाए गये। और फिर से अदिति डाइरेक्टर के पास बैठी थी, टीवी ओन था, और डाइरेक्टर का हाथ ऊपर सोफे पर से होते हुए अदिति के कंधे पर था। विशाल भी यहाँ उसी सोफे पर था मगर डाइरेक्टर के उस तरफ बैठा हुआ था। अदिति सोफे के एक किनारे पर थी तो विशाल दूसरे किनारे पर,

बीच में डाइरेक्टर और मैनेजर थे। हाँ सोफा 5 सीट वाला था। सबके हाथ में एक शैम्पेन का ग्लास था,

और अदिति के हाथ में जूस का। शुरू में अदिति ने एक ग्लास शैम्पेन लिया था।

***** *****
 
कड़ी_66 अदिति उनके साथ अकेली छोड़ गई

डाइरेक्टर जी ने विशाल को एक तरफ बुलाया कुछ बातें करने के लिए, अदिति को मैनेजर के साथ सोफे पर छोड़कर।

डाइरेक्टर ने विशाल से अकेले में कहा- “अच्छा अब तुमको उसे हमारे साथ छोड़कर वापस चले जाना चाहिए कहीं

भी या वापस अपने घर। अगर चाहो तो कोई एक बजे उसको लेने आ सकते हो वापस, या फिर आराम से घर पर सो जाओ, हम खुद उसको सुबह घर ड्राप कर देंगे। क्या पसंद करोगे?"

विशाल बोला- “मगर सर, अदिति को मालूम नहीं की मैं उसको यहाँ छोड़कर अकेले वापस जाऊँगा, अगर मैं

गया तो वो मेरे साथ वापस जाना चाहेगी..."

डाइरेक्टर- “ओके, तो अभी जाओ और अपनी बीवी से कहो की मैं तुमको अभी इसी वक्त आफिस भेज रहा हूँ नाइट ड्यूटी करने वालों को चेक करने के लिए, और उसको यहीं इंतेजार करने को कहो। यह तो ठीक है ना?"

विशाल ने कहा- "ट्राई करता हूँ..” कहकर अदिति को बताने गया, जहाँ मैनेजर अदिति को बहकाने की कोशिश में लगा हुआ था, उसका हाथ अपने हाथों में लिए हुये। अदिति विशाल के साथ छत पर गई जहाँ विशाल ने उसको बताया की उसको नाइट शिफ्ट वाले आफिस में एक अर्जेंट चक्कर लगाने का आर्डर दिया है डाइरेक्टर ने

और कुछ देर बाद वापस आएगा।

मगर तब अदिति को ऐतराज थी उन लोगों के साथ अकेले वहाँ रहने को। तो विशाल ने अदिति को अपना प्रमोशन, नई कार और बंगलो की याद दिलाई और कहा के अदिति ने कहा था की उन लोगों के बीच फ्लेक्सिबल रहेगी।

फिर अदिति ने कहा- “देखो विशाल, मैंने कहा था की उन लोगों की अच्छी तरह खातिरदारी करूँगी। मगर ये नहीं कहा की तुम्हारे बगैर या तुम्हारे गैर मौजूदगी में। मैं ऐसे लोगों के बीच अकेली कैसे रह सकती हूँ? जिनको जानती भी नहीं हूँ। ऊपर से देखो किस तरह ड्रेस्ड हूँ, और दोनों ठरकी दिख रहे हैं। तुमको नहीं दिखता क्या?"

दोनों में बहस हुई और अदिति ने अकेली रहने से इनकार किया। क्योंकी दोनों ने काफी देर लगाई तो मैनेजर छत पर आए पूछने के लिये की क्या बात है।

विशाल ने साफ बताया- “अदिति वापस घर जाना चाहती है..."

मैनेजर ने जाकर डाइरेक्टर को बात बताया। फिर खुद डाइरेक्टर आया अदिति से बात करने को। उसने कहा की तुम्हारा पति बस कुछ ही देर में वापस आएगा और तुमको फिकर करने की कोई बात नहीं है। क्योंकी तुम अच्छी कंपनी में रहोगी तब तक। डाइरेक्टर अपने बातों से अदिति को मना रहा था और अदिति उनसे तो बहस

या डिसकस नहीं कर पाई। अदिति खामोश रही और डाइरेक्टर ने अदिति के पीठ पीछे हाथों से विशाल को जाने का इशारा किया।

विशाल चला गया, और वह तीनों वापस लाउंज में गये और डाइरेक्टर ने अदिति की ग्लास में और शैम्पेन भरी

और अदिति को पीने को कहा। मगर अदिति ने मना किया पीने से। तो मैनेजर ने रेड वाइन सजेस्ट किया अदिति को और तब अदिति ने हाँ में सिर हिलाया। मगर अदिति ने थोड़ा सा ही ग्लास में डालने को कहा।

मामूली बातों के बीच अदिति के ग्लास में तीन बार सर्व किया गया, और वो पीती गई और घुल-मिल गई उन दोनों से, बातें और मसखरी करते हए। अदिति उन दोनों के बीच सोफे पर बैठी हुई थी, और दोनों मर्दो के हाथ अदिति की कमर, जांघ और पेट सहला रहे थे, तो कभी दबा रहे थे बातें करते हुए। और एकाध बार तो उसकी चूचियों को भी छुवा दोनों ने जैसे की कैजुयली हाथ लग गया हो।

कुछ देर बाद डाइरेक्टर खड़ा हुआ और अपने बाजू को अदिति को आफर किया। जिसका मतलब था की वो

अदिति को खड़े होने को कह रहे थे। अदिति ने एक हाथ से डाइरेक्टर की बाहों को थामा और दूसरे हाथ में वाइन की ग्लास लिए हुए डाइरेक्टर से कदम मिलाकर चलने लगी। डाइरेक्टर अपने बेडरूम के तरफ बढ़ने लगा

और मैनेजर को पीछे आने का इशारा भी किया उसने।

बेडरूम में पहँचते ही अदिति ने डाइरेक्टर के चेहरे में देखा, फिर मुड़कर मैनेजर को देखा, मुश्कराई और कमरे के अंदर दाखिल हो गई। बिना किसी के बोले, अदिति सीधे बेड पर बैठी और दोनों मर्द खड़े उसको देखने लगे। जबकी अदिति ने वाइन के ग्लास को होठों से लगाया और पूरी ग्लास खाली कर डाली पीकर।

पीने के बाद अदिति ने अपनी जीभ को होंठों के बीच फेरा और नशीली नजरों से दोनों को देखा। फिर लेट गई बेड पर अपने दोनों बाजू को बेड के दोनों तरफ फेर कर। उसकी कांखें साफ दिखने लगी और लगता था उसकी चूचियां ब्लाउज़ के अंदर कचलकर चिपटी हो गई। अदिति बहुत थकी हुई लग रही थी और लगता था उसको आराम की जरूरत है उस वक़्त। असल में उसने 3 ग्लास वाइन पी लिया था, और उससे पहले एक पूरा ग्लास शैम्पेन पिया था और आल्कोहालिक ड्रिंक्स की मिक्स्चर का असर हो रहा था उसपर।

डाइरेक्टर ने अपने पैंट में अपने लण्ड को सीधा किया, ऐसी हाट और सेक्सी औरत को अपने बिस्तर पर दो मर्दो के सामने लेटे हुए देखकर। मैनेजर ने अदिति की जिश्म से नजर हटते हुए अपने डाइरेक्टर के चेहरे में देखा

और कहा- “वी अरे गोयिंग तो हव ग्रेट टाइम सर, आई बेट हेहेहेहे...”

डाइरेक्टर की नजरें अदिति पर से नहीं हट रही थीं और दोनों धीरे-धीरे अदिति के तरफ बढ़े। दोनों बेड पर

आकर बैठे अदिति के पास। उसको सिर से पैर तक निहारने लगे दोनों मर्द। अदिति की आँखें बंद थी।

दोनों ने एक दूसरे से पूछा- “तुम्हारे खयाल से वो सो रही है? नींद में है क्या?"

डाइरेक्टर और वक्त ना बर्बाद करते हए अदिति के बगल में लेट गया और अदिति की कांख पर अपना जीभ फेरा, और वहाँ से जीभ फेरते हुए उसकी पूरी बाजू पर जीभ फेरता गया उसकी उंगली तक। फिर अदिति की उंगलियों को अपने मुँह में लेकर डाइरेक्टर चूसने लगा।

अदिति जैसे नींद में कुछ बड़बड़ाई।

और बेड के उस तरफ मैनेजर ने अदिति के पेट पर इंटेरेस्ट लिया, उसने अपनी जीभ उसके पेट पर नाभि के पास फेरना शुरू किया। नाभि के चारों तरफ अपनी जीभ को गोल-गोल घुमाते हुए मैनेजर ने चाटा और चूसा, जिससे अदिति ने आँखें बंद किए हुए सिसकारी ली और अपने जिश्म को सीधा करते हुये अंगड़ाई ली। फिर

अपने दोनों पैरों को मोड़ लिया अदिति ने और लगता था गहरी नींद में है।

दोनों मर्दो ने अपने-अपने कपड़े उतारने शुरू किए, और कपड़े उतारते वक्त आपस में बातें किए।

डाइरेक्टर- “एक कर्मचारी की पत्नी को अपने बिस्तर पर लाने की और उसकी लेने में जो मजा है, शायद ही किसी और में होती होगी, खासकर जब वो इतनी खूबसूरत और जवान हो, है ना डियर?”

मैनेजर- "हाँ डियर, उसको हमारे लण्ड को तो चखना ही पड़ेगा और हमें उसको गहराई तक चोदना है, आगे और पीछे से भी। हेहेहेहे...”

डाइरेक्टर- “हाँ हाँ। हम उसके दोनों छेद को शेयर करेगे अब तो, मुझे पक्का यकीन है की ये रंडी एक साथ दो

लण्ड को बहत ही एंजाय करेगी, जगाओ उसको जल्दी अब..."

मैनेजर बेड पर चढ़ा अदिति को जगाने के लिए। अदिति नशे में धुत्त थी। तब तक डाइरेक्टर ने खुद को बिल्कुल नंगा किया और बेड पर वो भी चढ़ा और अपने लण्ड को अदिति के मुँह के पास किया। अदिति तो बेहाल थी, नशे और नींद के आलम में खोई हुई थी। डाइरेक्टर ने एक हाथ से अदिति के गालों को दबाते हुए उसका मुंह खोलने की कोशिश करते हुए अपने मोटे तने हुए लण्ड को अदिति के मुँह के अंदर घुसाने की कोशिश में लग गया। तब तक मैनेजर अदिति की ब्लाउज़ को पीठ पर खोल रहा था।

* * * * * * * * * *
 
कड़ी_67 डाइरेक्टर और मैनेजर के साथ

अदिति विशाल घर को ड्राइव करते जा तो रहा था मगर उसका दिमाग वहीं बंगलो में था अदिति के पास।

दूसरे मर्द के साथ अदिति को देखने की चाहत उसको तड़पा रही थी और वो किसी भी कीमत पर अदिति को चुदवाते हुए देखना चाहता था उस वक्त। उसके दिमाग में सिर्फ अदिति उन दोनों के साथ नजर आ रही थी

और उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। अब भी वो अदिति की एक्सप्रेशन्स को देखना चाहता था की वो कैसे सिसकारियां लेगी? कैसे किसी और के साथ एंजाय करेगी? कैसे उन लोगों के लण्ड चसेगी? क्या आराम से सब स्वीकार करेगी? क्या इनकार करेगी, नखरे करेगी या खुशी-खुशी सब करेगी? यह सब देखना चाहता था विशाल। जैसे उसने छपकर आनंद के साथ और अपने बाप के साथ करते हुए देखा था, वैसे इन लोगों के साथ भी देखना चाहता था। यही तो उसकी सबसे बडी फँटेसी है तो क्या करे।

विशाल ने यू-टर्न लिया और वापस बंगलो की तरफ ड्राइव करने लगा। बंगलो से कुछ दूर कार को पार्क किया

और पैदल चलकर बंगलो तक गया। कैसे भी करके यार्ड में दाखिल हुआ और अब अंदर देखने के लिए राह ढूँढ़ने लगा, बंगलो के इर्द-गिर्द घूमते हुए।

बंगलो के अंदर चारों तरफ लाइटें ओन थी। विशाल ने लाउंज के अंदर झाँका पर कोई भी नजर नहीं आया। दाएं

साइड की तरफ गया और सभी कमरे में लाइटों ओन देखा। मगर सबके खिड़कियां बंद थीं और पर्दे खींचे हुए थे, तो कुछ नजर आना नामुमकिन था।

तब तक बेडरूम के अंदर डाइरेक्टर अदिति के बंद मुँह में अपना लण्ड लूंसने की कोशिश में लगा हुआ था। और मैनेजर ने अदिति की ब्लाउज़ निकाल दिया था और उसकी चूचियां दबाकर उसकी पीठ को चाट रहा था उस वक्त। उधर विशाल झुक कर चलते हुए बंगलो के बाएं तरफ ढूँढ़ रहा था की कौन से कमरे में होंगे सब।

उधर डाइरेक्टर को गरम छाने लगी तो मैनेजर से एक खिड़की को खोलने को कहा, तो मैनेजर ने ऐसी ओन करने को कहा और डाइरेक्टर ने जवाब दिया के ऐसी बिगड़ा हुआ है लास्ट वीक से, और रिपेयर नहीं हुआ है अभी उस कमरे में। तभी ठीक उसी वक्त उस रूम की खिड़की खुल रही थी जब बाहर वहीं पर विशाल झुके हुए चल रहा था। अब क्योंकी बाहर अंधेरा था तो अंदर से किसी ने उसको नहीं देखा और खिड़की को खुलते हुए देखकर विशाल वहीं के वहीं बैठ गया चुपचाप। पर डाइरेक्टर ने मैनेजर से पर्दे को खींचे रहने देने को कहा।

अब क्योंकी खिड़की खुल गई तो विशाल को उनकी सभी बातें सुनाई देने लगी। मगर वो तो देखना चाहता था, तो थोड़ा सा खड़ा हुआ जिस हिसाब से खिड़की तक उसका सिर पहुँच सके और अपनी उंगलियों के बीच पर्दे को थोड़ा सा पकड़ा और हल्के से हटाया, ठीक अपनी एक आँख से अंदर देखने के लिए। अंदर से बाहर कुछ भी नहीं देख सकता था कोई, क्योंकी वो अंधेरे में था। मगर वह लोग तो रोशनी में थे तो विशाल को तो सब साफ दिखाई देने लगा तब।

अपनी अदिति को बिना ब्रा के देखा विशाल ने बेड पर, सिर्फ साड़ी में लिपटी कमर से पैर तक और ऊपर का हिस्सा बिल्कुल नंगी थी, और डाइरेक्टर अपने लण्ड को अदिति के होंठों पर रगड़ रहा था। जबकी अदिति की

आँखें बंद थीं और बस लेटी हुई थी बेड पर, और मैनेजर अदिति की एक निपल चूस रहा था जैसे एक बच्चा दूध पीता है अपनी माँ के साथ।

विशाल ने अपनी जिप खोला और अपने खड़े लण्ड को निकालकर सहलाते हुए देखने लागा, और प्रार्थना करने लगा की अदिति कुछ जवाब करे अब तो। वो समझ गया की अदिति नशे में है। फिर भी चाहता था की वो जागे और पार्टिसिपेट करे उन दोनों ठरकी बढ़ों के साथ।

अदिति ने कुछ भुनभुनाया जो किसी की समझ में नहीं आई की उसने क्या कहा, मुश्किल से उसने अपनी आँखें खोली और देखा की डाइरेक्टर का लण्ड उसके मुँह के पास है तो अपने हाथ से उसको हटाया। फिर डाइरेक्टर ने झट से अदिति के हाथ को अपने लण्ड पर किया और अदिति ने अपनी उंगलियों में आँखें बंद किए हुए लण्ड को थामा।

डाइरेक्टर को अदिति की मुलायम उंगलियों के स्पर्श से बड़ा सुकून मिला और “इसस्स्सह...” की आवाज निकली उसके गले से।

फिर अदिति ने आँख खोली अपनी हथेली में डाइरेक्टर का लण्ड लिए हुए पर अपनी चूची को मैनेजर के मुँह में पाया, तो मुश्कुराई और एक चुलबुली हँसी में कहा- “हीहीहीही... एक छोटे बच्चे की तरह दिख रहे हो आप इस वक़्त, क्या कर रहे हो? इसमें दूध नहीं है." और अदिति की हँसी नशे में अजीब लग रही थी।

विशाल बहुत उत्तेजित महसूस करने लगा और उसको उम्मीद थी की अदिति वैसे ही जागी रहे चुदाई के दौरान।

तब तक डाइरेक्टर ने अपने लण्ड के सुपाड़े को अदिति के मुँह में डालने में कामयाब हो गया। अदिति ने सिर उठाकर डाइरेक्टर को देखा और कुछ कहना चाहा। मगर डाइरेक्टर ने अपने लण्ड को धक्का देते हुए उसके मुंह के अंदर घुसा दिया और अंदर-बाहर करने लगा। वो अदिति के मुँह में चोद रहा था। अदिति को खाँसी आई जब लण्ड उसके गले की गहराई में पहुँचा। और उसको साँस लेने में तकलीफ हुई तो अपने सिर को ऊपर करते हुए उसने लण्ड को बाहर निकाला और जोर से खाँसने लगी सिर झुका कर।

मैनेजर उसके लिए एक ग्लास में पानी लाया पीने के लिए। पानी पीने के बाद अदिति को अब होश आया की वो टापलेश है, ऊपर बिल्कुल नंगी है, उसकी चूचियां बाहर हैं। फिर हकलाते हुए कहा- “मे-र-आ ब-ब्ल-ब्लाउज़ कहाँ है?” अब अदिति चारों तरफ देखने लगी और कहा- “मुझको चक्कर आ रहा है.."

डाइरेक्टर ने तब अदिति को बाहों में लेते हुए उसकी चूचियों को सहलाते हुए कहा- “अब हम तुम्हारे साथ कुछ

अच्छे वक्त गुजारने जा रहे हैं जानेमन... तुम्हारे पति ने तमको हमारे साथ एंजाय करने के लिए अकेला छोड़ा है, समझी तुम? तो चलो मजा करें। जबसे तुमको उस रात को पार्टी में देखा तब से तुम पर मर मिटा हूँ और तुमको चोदने की तमन्ना है। अब तो ऐश करने दो हमें। आज दोनों मिलकर तुमको चोदेंगे। तुम बहुत कमाल की चीज हो रानी। तेरा जिश्म इतना मस्त है की इससे तीन चार लोगों को एक साथ एंजाय करना चाहिए सस्स्स... आअघह..”

अदिति ने कमरे में चारों तरफ देखते हुए पूछा- “विशाल किधर है हम्म?” वो अब भी होश में नहीं थी, उसकी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है उसके साथ।

मैनेजर उसकी दूसरी चूची को सहलाते हुए कहा- “वो तुमको हमारे साथ अकेली छोड़कर चला गया हमको तुम्हारे साथ रंगरेलियां मानने के लिए छोड़ गया वो..” और उसने अदिति की निपलों को चूसना शुरू किया। और डाइरेक्टर ने अदिति को फिर से बिस्तर पर लेटाने की कोशिश कि।

विशाल ने बाहर से झाँकना जारी रखा, इस वक़्त वो “वायियूर पति” बना था।

आखीरकार, अदिति बेड पर लेटी हुई थी और डाइरेक्टर उसके होंठों को चूस रहा था। जबकी मैनेजर उसकी साड़ी उतारने में लग गया। धीरे-धीरे आराम से मैनेजर ने साड़ी निकाल दिया और पेटीकोट निकालने में लग गया, अदिति की नर्म मुलायम जिश्म को अप्रिशियेट करते हुए और यहाँ वहाँ चाटते हुए।

अदिति डाइरेक्टर को चूम रही थी, अपनी बाहों को उसके पीठ पर किए हुए और मैनेजर उसकी कमर के नीचे वाले हिस्से में लगा हुआ था। जब उसकी पेटीकोट निकल गई तो मैनेजर अदिति की मजेदार, मसालेदार जांघों

को हथेली से टटोलते हुए उसकी पैंटी की तरफ अपनी उंगलियों को बढ़ाने लगा, और साथ-साथ उसकी जांघों के बीच वाले हिस्से पर अपनी जीभ फेरता गया।

अदिति डाइरेक्टर को किस करते हुए ही सिर को जरा सा उठाकर मैनेजर के तरफ भी देखा, खुद की जांघों पर। तब तक मैनेजर अदिति की पैंटी उतारने की कोशिश में था। मगर अदिति की गाण्ड उसको उतारने में रुकावट बनी हई थी। तब अदिति ने खद मैनेजर की हेल्प की पैंटी निकालने के लिए अपनी गाण्ड को थोड़ा सा ऊपर उठाकर। मैनेजर ने तुरंत सिर ऊपर उठाकर अदिति के चेहरे में देखा, जब अदिति ने गाण्ड ऊपर किया।

मैनेजर ने खुद से कहा- “कितनी कोरपरेटिव है, खुद अपनी पैंटी उतरवा रही है गैर मर्दो से, दो-दो मर्दो को एक साथ लेने के लिए बिल्कुल तैयार है, यह खूबसूरत नौजवान लड़की। वाह रे हमारी किश्मत वाह."

डाइरेक्टर को भी पता चल गया जब उसकी पैंटी निकली तो, और उसने भी किस करते हुए नीचे अदिति की चूत की तरफ देखा जो मैनेजर चाटने जा रहा था। डाइरेक्टर भी भूखा था चूत के लिए, वो भी बढ़ा और उसने किस ब्रेक किया और चूत की तरफ वो भी गया। दोनों मर्द अब अदिति की गीली, रसभरी चूत पर टूट पड़े।

विशाल उस वक्त बाहर से अदिति के चेहरे में देख रहा था, जो उस वक्त सिर को हल्के से उठाकर दोनों मर्दो को अपनी चूत की रस चटवाने के लिए तैयार थी। डाइरेक्टर ने अपनी उंगलियों से चूत की पंखुड़ियों को अलग किया और अपनी जीभ को एक साँप की तरह वहाँ फेरा, और मैनेजर ने अपने बास को करने दिया, जबकी वो

खुद वही करना चाह रहा था। अपने बास को शेर का हिस्सा लेने दिया मैनेजर ने।

अदिति ने सिसकारियां लेते हुए बिस्तर की चादर को अपनी मुट्ठी में भरा और अपनी दोनों टाँगों को फैला दिया ऊपर की तरफ देखने हुए एक तड़पती आवाज में- “हम्म्म्म ... इसस्स्स ..” करते हुए।

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