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Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

रोशन :- सच बात छे...कुछ अलग होगा..तो सभी जेंट्स को भी अच्छा लगेगा..

मोहन लाल :- हाँ...वही तो...

पायल :- ओके एक्सलेंट..तो सर आप भी पार्ट लेंगे ना.

मोहन लाल :- ऑफ कोर्स....

पायल :- ओके..तो में सभी मेडम्स को ले जाती हूँ...तब तक आप यहाँ आरेंजमेंट

कर वा दीजिए..

मोहन लाल :- हाँ ओके...

और मोहन लाल जेंट्स के पास आ जाता है...और पायल लॅडीस के साथ खड़ी रहती है...

अब आप क्या चाहते हैं...अब अरेंज्मेंट के बारे में भी लिखूं...हाँ यही कम रह गया

है ना मेरा....अब बताऊ कि एक एक चीज़ कहाँ शिफ्ट हुई है..कहाँ क्या रखा है..

कामवाला समझ रखा है...चलो हटो जी..में नही बता रहा......

अब सब सोच में डूब गये कि में टाइम को थोड़ा आगे कर के लिख दूँगा.. है..ना

यही सोच रहे हो...और अगर नही भी सोच रहे तो मेरा क्या..मत सोचो...

में तो चला अपनी दूरबीन लेकर....देखूं तो सही कुछ शायद दिख जाए.....

ज़ूम इन......

ह्म वॉशरूम में कोई नही है.....अब्दुल कहाँ गया..साला....चलो कमरे में

ज़ूम इन करके देखता हूँ......हैरान मत हो 21स्ट सेंचुरी है..टेक्नालजी बहुत आ गई

है...मेरे पास है ऐसा दूरबीन जो यहीं से बैठे बैठे कमरे में देख सकते हैं....

फुल ऑन ज़ूम इन कर डून....ह्म चलो कमरे के गेट के पास तो पहुच गये...

ज़रा अंदर भी झाँक लें....

ओहो तो भाई साहब यहाँ लगे पड़े हैं....

आआआ ओह सोडा की कसम आज तेरी चूत का भोसड़ा बना दूँगा.

अब्दुल का लंड प्रीति की चूत के अंदर बाहर हो रहा था.....

प्रीति पलंग पर लेटी पड़ी थी..उपर से अब्दुल उसके दोनो पैर उपर कर के उसकी चूत

में लंड अंदर बाहर कर रहा था....

प्रीति :- आआहह ऊहोोह...उूुुुउउ..सस्स्सीसीसीई फक मी हार्ड

आ फकक्क्क्क्क्क्क्क्क......

प्रीति भी अपनी गान्ड नीचे से उछाल उछाल के अब्दुल का लंड ले रही थी....

अब्दुल ने अपने दोनो हाथ प्रीति के गोल गोल बड़ी ही सॉफ्ट बूब्स पे रखे हुए थे.

और उन्हे दबा रहा था.....और नीचे से अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था...

पच्चह पच्चह की आवाज़ पूरे कमरे में फैली हुई थी...
 
प्रीत की चूत बहुत गीली हो गई थी..और उसका रस अब्दुल के लंड पर तो लग ही रहा था

साथ ही साथ उसका रस उसकी गान्ड के छेद से होता हुआ नीचे बेड पे गिर रहा था....

ओह मययी गॉड्डड्ड...........प्रेस देम हार्डर........फकक्क्क्क्क्क...

फक्क्क्क मीई....हर्दर्ररर...हर्दर्र्ररर......आआहह....

प्रीतू की सिसकियाँ बहुत तेज़ होती जा रही थी.....उसको इस खेल में बड़ा मज़ा आ रहा था.

आज पहली बार वो किसी गेस्ट के साथ सेक्स कर रही थी.उसके लिए ये बिल्कुल नया एक्सपीरियेन्स

था..जिससे वो और ज़्यादा उतेज़ित हो रही थी....

अब्दुल आगे की तरफ झुक गया...और प्रीति के होंठो को अपने होंठो में क़ैद कर लिया

और उन्हे चूसने लगा......नीचे से अबटूल की गान्ड उपर नीचे हो रही थी..जिससे ये दिख

रहा था..कि उसका लंड प्रीति की चूत में तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा है.....

प्रीति भी अपनी कमर उठा के अब्दुल के लंड को अंदर ले रही थी...दोनो बहुत ही

ज़्यादा उत्साह में थे...

अब्दुल को भी इसी पहले इतनी जवान चूत नही मिली थी...वो इस पल को पूरी तरह जीना चाहता

था..इसलिए वो भी लगा हुआ था...

उपर से दोनो एक दूसरे के मुँह के अंदर अपनी जीभ घुमा रहे थे........

कुछ 5 मिनट तक जबरदस्त किस्सिंग के बाद...अब्दुल उठा...और प्रीति के उपर से उठ गया.

अब्दुल :- चल घोड़ी बन...पीछे से चोदना है तुझे....

प्रीति भी फ़ौरन कुतिया बन जाती है.......

अब्दुल पीछे से प्रीति की चूत पे अपना लंड घिसता है....

आआआआहह प्रीति के मुँह से सिसकी निकल जाती है...

अब्दुल वैसे ही बाहर से चूत पे लंड को रगड़ने लगता है....वो प्रीति को तड़पाना

चाहता था...और वो इस काम में सफल भी हुआ......

प्लीज़...अंदर डालो...और नही सहा जा रहा....आहह

फक मी प्लीज़....प्रीति उससे चुदने के लिए भीख माँग रही थी..

अब्दुल को भी तरस आ गया..और उसने एक धकका मारा..और उसका लंड थोड़ा सा अंदर

चला गया....और फिर रुक गया...

अब्दुल अभी भी उसे तड़पाना चाहता था...लेकिन इस बार....

इस बार प्रीति चालाक निकली..और उसने अपनी गान्ड को पीछे की तरह धकका मारा..जिससे

अब्दुल का पूरा लंड प्रीति की चूत में समा गया...

आआआआआहह प्रीति के मुँह से निकला....

हुउऊुुुुुुुुुुुुुआहह अब्दुल बोला..

अब्दुल :- साली तुझे बड़ी जल्दी है ना चुदने की अब देख कैसे तेरी चूत फाड़ता हूँ...

और अब्दुल अपनी गान्ड को पीछे कर के लंड बाहर निकालता है....और एक साथ पूरा अंदर डाल

देता है...प्रीति को तो मज़ा ही आ जाता है....

अब अब्दुल प्रीति की गान्ड को पकड़ के लंड को तेज़ी से अंदर बाहर करने लगता है...

आआआआहह उूुुुुुुुुुुुुुुुुुउउ ओह एसस्स्सस्स...
 
लीके त्त्त..तह.त..त.त....फ्फ्फुउ.क्क्क.क...मी...ओह्ह्ह्ह आआआहह

प्रीति पागल हो चुकी थी..उसकी चूत से पानी किसी नल की तरह बह रहा था...और बेड

पे गिर रहा था.......उसकी चुचियाँ तेज़ी धक्कों से आगे पीछे हो रही थी......

आआआआहह ओह साली मज़ा आ रहा है ना..

ओह बास्स्स मेरा निकलने वाला है आहह..

आइ एम्म कमिंग टूऊ फक मी.ए..ओह्ह्ह्ह डोंट स्टॉप्प्प....फक्क्क मी हार्डर...

अहह आइ म कुमिंगगग....आहह

करते हुए प्रीति झड्ने लगती है..उसका शरीर 2 झटके ख़ाता है..और अपना रस निकालना चालू

कर देता है...उधर अब्दुल भी.आहह ले मेराअ रस्सस्स....

और 3 झटके मारता है..और उसकी चूत में छोड़ देता है अपना सारा रस....

प्रीति थक के वैसे ही पेट के बल लेट जाती है.....अब्दुल भी उसके उपर ही लेट जाता है..

दोनो काफ़ी ज़्यादा थक गयी थी...और हाँफ रही थी...ऐसे वाइल्ड फक्किंग के बाद तो

बुरा हाल होना ही है......

उफ़फ्फ़ बड़ा ही हॉट सीन थी..मेरी तो बॅंड ही बज गयी.....अरे अब क्या कमरे में ही

रहना है.....सीन ख़तम बात ख़तम अब क्या कर रहे हो वहाँ पे.....जहाँ ले जाउ वहीं

अटक जाते हो..बाहर निकल जाओ भाई..नही तो अब फीस चार्ज कर लूँगा....

देखो देखो..फीस का नाम लेते ही कैसी बाहर निकल गयी..वाहह..कंजूस कहीं की..

कभी तरस नही आता हम पर.....इतनी मेहनत कर रहे हैं हम तो....सबको आज कल

मुफ़्त का चाहिए..ज़माना ही खराब हो गया है....

ज़ूम आउट्ट......चलो जी पार्टी की हालत देखें..ओफफो यहाँ तो अभी तक वही अरेंजमेंट

चल रहा है....पता नही कितनी देर और चलेगा.....

जब तक क्या करें....क्या करें..बताओ.....अरे जो उपर खोपड़ी दी है उसका यूज़ कर लिया

करो..मुझे परेशान कर देते हो..हर बार में ही दिमाग़ लगाऊ...हुहन...मुफ़्त

में मज़े लो तुम...और मेहनत करें हम...चलो कोई नही कर लेते हैं...

चलिए..फिर गोकुलधाम देखें वहाँ क्या हो रहा है.........

अरे दूरबीन से कहाँ जा रहे हो......मतलब टेक्नालजी आ गई है..तो उसका ऐसा फ़ायदा

उठाओगे शरम नही आती.... हद है...में ले जा रहा हूँ ना..तो दूरबीन की

क्या ज़रूरत है.......

गोकुलधाम की. हाउसिंग सोसायटी......

आज सुबह की बात को याद करते करते...पोपटलाल अपने एक हाथ में छाते को लिए एक हाथ

को अपने लंड पे रख कर धीरे धीरे मसल रहा था...

सुबह मूठ मारते हुए...उसे कोमल ने देख लिया था......और उसके बाद जो उसने कहा उसे

याद करके पोपटलाल थोड़ा उतेज़ीत हो गया था...

तभी अपनी याद से निकलता हुआ..

नही नही....ये क्या कर रहा हूँ में...कोमल भाभी..को याद करके मूठ मार रहा हूँ..

और अपने लंड पे से हाथ हटा लेता है...

कोमल भाभी...नही....उनके साथ.....बिल्कुल नही.....कहाँ वो कहाँ में.....

और अपने शरीर को देखता है....

और फिर अपने लंड को हाथ में पकड़ के.. बिल्कुल नही भाई..कोमल भाभी के नाम पे

खरबदार खड़ा हुआ तो..नही तो तेरी दुनिया हिला दूँगा...

बॅक ग्राउंड. म्यूज़िक..... पोपटलालल्ल्ल्ल...पोपातललल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल......
 
तभी तिंगगगग तोंगगगग...डोर बेल बजती है...

पोपातलाल टाइम देखता है....11 बजे...इस वक़्त कौन हो सकता है....

और गेट खोलने के लिए चला जाता है...और गेट खोलता है...तो सामने जो देखता है..

उससे उसकी आँखें फट जाती है..

आप....इतनी रात में......कोमल भाभी..कुछ काम था क्या.....पोपातलाल बोलता है..

कोमल :- हाँ क्या में अंदर आ सकती हूँ....

पोपातलाल थोड़ा झीजकते हुई...हाँ हाँ आई ना....

फिर कोमल अंदर आ जाती है..पोपातलाल डोर बंद करता है..और दोनो सोफ्फे पे आकर

बैठ जाते हैं.....

पोपातलाल :- बोलिए कोमल भाभी....

कोमल :- वो..वो पोपट भाई.....वो...

पोपातलाल समझ गया था कि कोमल क्या बोलना चाहती है..लेकिन वो खुद कुछ नही बोलना

चाहता था...

पोपातलाल :- वो क्या कोमल भाभी..

कोमल :- वो पोपट भाई...सुबह जो हुआ.....उसके बारे में बात करनी है..

पोपातलाल ने जब कोमल के मुँह से सुबह वाली बात सुनी...तो वो फिर से एक बार सुबह की याद

में खो गया...

हुआ यूँ था कि जब कोमल ने पोपातलाल को मुठ मरते देखा तो उसके बाद हुआ यूँ था

की..

कोमल :- पोपट भाई आप ये सब क्यूँ कर रहे हैं..

पोपट :- कोमल भाभी..आप तो जानती है..ना कि में अकेला हूँ अभी तक..और शरीर की

भी कुछ ज़रूरत होती है....अब कोई लड़की तो मिलती नही..इस शरीर की प्यास भुजाने के

लिए...तो इससे काम चला लेता हूँ..
 
इस वक़्त पोपातलाल का बिल्कुल खड़ा हुआ लंड बाहर था वो उसे अंदर करना भूल गया

था....और कोमल की नज़र भी वहीं अटकी पड़ी थी....

कोमल :- हाँ में समझ सकती हूँ...पोपट भाई..शरीर की प्यास बहुत ज़्यादा ज़रूरी है..

मुझे पता है..

पोपातलाल :- कोमल भाभी..आप कह रही है..जबकि आपके लिए तो हाथी भाई हैं....

पोपातलाल जब बोल रहा था...तो उसने कोमल की आँखों में देखा..और उसका पीछा

करते हुई पोपातलाल ने पाया कि उसकी आँख लंड पे है तो..पोपातलाल ने फट से अपना

पाजामा खोल के उसे अंदर कर दिया....

कोमल :- हंस किसी काम के नही है पोपट भाई..आपको क्या लगता है..वो मुझे सॅटिस्फाइ कर

पाते होंगे...

कोमल पोपातलाल का लंड देख के पगल हो गई थी..इसलिए वो अपने मन की भडास निकाल रही

थी....

पोपातलाल :- ओह्ह..लेकिन क्यूँ...वो तो घर पे ही रहते हैं..

कोमल :- घर पे रहने से कुछ नही होता पोपट भाई...वो मेरे साथ सेक्स करते ही नही है.

में तड़पति रह जाती हूँ..लेकिन उनके इतना मोटे होने की वजह से वो कुछ नही कर पाते..

कभी हुआ तो वो भी महीनो में एक बार ही होता है...

पोपातलाल कोमल की इतनी ओपन बात को सुन के चौंक जाता है....

पोपातलाल :- कोमल भाभी..मतलब आपकी सिचुयेशन भी मेरी जैसी ही है..

कोमल :- आपसे भी बुरी....आप तो अभी किसी के साथ भी कर सकते हूँ..लेकिन में कैसी किसी

के साथ भी कर लूँ...मेरे तो बहुत मुश्किल है...मुझे कौन मिलेगा जो मेरी प्यास

मिटाएगा...

बोलते हुए कोमल की नज़र पोपातलाल के पाजामे पे तने लंड पे उपर अटकी थी...

पोपातलाल तो बहुत ज़्यादा हैरान था कोमल की इतनी ओपन बात पर.....

पोपातलाल :- अब इसमे कोई क्या कर सकता है..

कोमल :- कर सकता है.....और किसी को पता भी नही चलेगा..बात अंदर की अंदर ही

रहेगी...

कोमल बोल तो देती है..लेकिन उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था बोलने के बाद...

पोपातलाल :- क्या मतलब आपका.....

पोपातलाल कुछ कुछ समझा था..लेकिन नाम ही पोपट है तो कैसे कुछ समझेगा

ढंग से....

कोमल :- हमारे बीच हो सकता है..और किसी को कुछ पता भी नही चलेगा.....

कोमल तेज़ी से ये बोल देती है.....उसके सर पे तो बॅस सेक्स सवार था..इसलिए उसे खुद

नही पता कि वो क्या बोल रही है...

पोपातलाल का ये सुन के तो दुनिया हिल गयी..........

पोपट भाई....पोपट भाई.....आप ठीक है.....

कोमल की आवाज़ सुन के पोपातलाल ख्वाबों की दुनिया से बाहर आता है.....

और अपने लंड की तरफ देखता है..जो कि इस वक़्त उफान पे था...वो अपना छाता..अपने

लंड के सामने रख देता है..जिससे कोई देख ना पाए....
 
पोपट :- हाँ हाँ..ठीक हूँ ... कोमल भाभी..

कोमल :- पोपट भाई..वो सुबह जो भी कहा...वो प्लीज़ आप किसी को मत बताना...

पोपटलाल :- जी बिल्कुल नही बताउन्गा..में समझता हूँ..आपकी बात...आपकी समस्या को अच्छी

तरह समझता हूँ...

कोमल के चेहरे पे थोड़ी मुस्कान आ जाती है....अच्छा तो में चलती हूँ....

पोपटलाल भी उससे और बैठने को नही बोलता..क्यूँ कि उसके लंड की हालत बहुत बुरी थी..

एक तो सुबह की बात सोच के...और इस वक़्त कोमल ने ग्रे से कलर की नाइटी

पहन रखी थी..जिसमे से उसके वो मोटी मोटे...तरबूज़ जितने बड़े बूब्स की शेप

दिख रही थी......

कोमल ने पोपटलाल की नज़र देख ली...लेकिन उस वक़्त वो कुछ नही बोली.....

और उठ के जाने लगी....पोपटलाल उसकी डबल साइज़ वाली गान्ड को देख रहा था..

कोमल गेट तक पहुचि और दुबारा पलटी...और उसने एक बार फिर ये नोटीस किया

कि पोपटलाल क्या देख रहा है...

पोपटलाल सकपका जाता है..और वो इधर उधर देखने लगता है..और एक दम से पोपट

लाल सोफे से खड़ा होता है.......और कोमल की नज़र गढ़ जाती है.......पोपटलाल के लंड पे..जो पाजामे के उपर से सॉफ

दिखाई दे रहा था...जो एक तंबू बन के खड़ा था......

पोपटलाल के खड़े होने की वजह से उसका छाता हट जाता है..और उसके लंड के दर्शन

हो जाते हैं..पोपटलाल अपना हाथ आगे लगा के..उसको छुपाने की कॉसिश करता है..

लेकिन उसका अब कोई फ़ायदा नही होता......

कोमल :- पोपट भाई में कुछ कहूँ.....

पोपट बड़ी मुश्किल से जवाब देते हुए....ह..आ....न.....बो.ल्ल.इये...ना...

और फिर जो कोमल उससे बोलती है....उसे सुन के पोपटलाल की दुनिया हिल जाती है....

उसके चेहरे पे डर की लकीरें सॉफ झलक रही होती है....

उसके मुँह से कुछ नही निकल रहा था.....

और सबसे बड़ी बात.उसके हाथ से उसका छाता भी गिर जाता है....

वो आँखें फाडे कोमल को देखता रह जाता है.........

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रीकॅप :

पायल ने प्लान बाँया जिसे लॅडीस ने मंज़ूरी दे दे थी...अब उस प्लान की अरेंजमेंट चल

रही थी..उधर अब्दुल ने प्रीति की जमकर मारी....प्रीति भी बड़े मज़े में उछल उछल

के मरवा रही थी.....गॉगकुलधाम में कुछ बदल रहा है..कोमल और पोपटलाल की

ओपन बातों से और दोनो की सेक्स की तपन...दोनो को किसी और मोड़ पे ले जा रही है....

कोमल ने ऐसा कुछ बोला था जिससे पोपट की दुनिया हिलने वाली थी....

अब आगे.......!!!!!!

क्क..ओ..म.अल भा..भी...ये आप क्या बोल रहे हैं.....पोपटलाल अपनी बड़ी आँखो को पूरी

खुलते हुए बोलता है...

कोमल वहाँ दरवाजे पे खड़ी थी..वो आगे आती है...और ठीक पोपटलाल के सामने आके

खड़ी हो जाती है...

कोमल :- पोपट भाई मुझे पता है ये ग़लत है...लेकिन सिर्फ़ एक बार...

पोपट लाल अपने मन में ..... क्या करूँ....कोमल भाभी मुझे मेरा लंड दिखाने को बोल

रही है....दिखाऊ कि नही.....

बॅक ग्राउंड. म्यूज़िक....पोपटलाल.....पोपटलाल.......

कोमल :- क्या हुआ..कहाँ खो गये फिर से....

पोपटलाल होश में आते हुए..

पोपटलाल :- लेकिन अगर सोसायटी में किसी को पता चल गया तो क्या होगा..

कोमल :- ओह कमोन .... किसी को कुछ पता नही चलेगा हम दोनो के अलावा..

पोपटलाल :- लेकिन आप इतनी रात को आई है...डॉक्टर.हाथी क्या बोलेंगे..

कोमल :- ओफफो पोपट भाई..आप बहुत सवाल करते हैं..इसलिए अभी तक आपकी शादी नही हुई

है...

कोमल के इश्स डाइलॉग से पोपटलाल की दुनिया हिलने की जगह इश्स बार गिर सी गयी..

वो अपनी रोंदी सी शक्ल बनाते हुई..

पोपटलाल :- कोमल भाभी इसमे मेरी शादी कहाँ से बीच में आ गयी...पोपटलाल

का लंड जो अभी फुदकी मार रहा था..वो धीरे धीरे बैठने लगा था..जिसका असर

उसके उपर से पाजामे से दिखाई दे रहा था......कोमल ने ये देख लिया..था...

पोपटलाल अपनी रॉनी शक्ल से बड़बड़ाये जा रहा था...ब्लाह ब्लाह ब्लाह......

कोमल ने देरी ना करते हुए....पोपटलाल के लंड पे अपना हाथ रख दिया..

पोपटलाल की तो शक्ल ही बदल गयी ... उसकी शक्ल देखनी वाली थी.....

जो लंड अभी बैठने लगा था..वो एक लेडी का हाथ स्पर्श कर के उठने लगा...

पोपटलाल :- को...मा..ल्ल.एल....भा...भी.....

सस्स्स्स्शह...........कूंल बस इतना ही बोलती है...और अपना हाथ हटा लेती है...

कोमल :- वो आपका..सोने की तैयारी में था....और मुझे आपका खड़ा हुआ ही देखना

है...

पोपटलाल गहरी साँस लेते हुए..और छोड़ते हुए......

ऐसी साँस ले रहा था मानो...कभी ज़िंदगी में साँस ली ही ना हो....

पोपटलाल :- अच्छा.....लेकिन किसी को पता तो नही चलेगा ना..

कोमल :- ओ कमऑन...आप एक बार बस दिखा दो....

पोपटलाल अपने काँपते हाथों को पाजामे के पास ले जाता है...और उसे धीरे से नीचे कर

देता है.....जैसे ही नीचे करता है...उसका खड़ा हुआ लंड फन्फनाते हुई बाहर निकल जाता

है......

कोमल की आँखों में चमक आ जाती है...पोपटलाल का लंड देख कर..

पोपटलाल :- बॅस....देख लिया.......

कोमल :- पूरा तो दिखाइए....

और पोपटलाल का हाथ पकड़ के पाजामे से हटा देती है....पोपटलाल के हाथ से पाजामा

छूट जाता है..और नीचे गिर जाता है......और उसका पूरा लंड कोमल की आँखों के

सामने आ जाता है...

कोमल अपनी बड़ी बड़ी और मोटी आँखों से बस पोपटलाल के लंड को ही देखे जा रही

थी....

पोपटलाल की तो बॅंड बजी हुई थी....उसके लिए बर्दाश्त करना मुश्किल था....उसका लंड

हिचकोले खाने लगा..और हिलने लगा....

कोमल पोपटलाल के हिलते हुए लंड को देख रही थी....और उसके चेहरे पे हल्की सी मुस्कान भी

आ गयी थी.....
 
पोपटलाल :- अब..तो ठीक है ना......

कोमल :- हां...थॅंक यू.....

पोपटलाल राहत की सांस लेता है...

कोमल :- पोपट भाई...एक बात पूछूँ ??

पोपटलाल मन में सोचते हुए...बेटा पोपटलाल आज तेरा बॅंड बजने ही वाला है..

तैयार हो जा....

हाँ हाँ पूछिए ना..

कोमल :- क्या एक बार में इसे टच कर सकती हूँ....

पोपटलाल कोमल की बात पे हड़बड़ाते हुई.....लेकिन कोमल भाभी..आपने तो सिर्फ़ देखने

के लिए कहा था...

कोमल :- प्लीज़..पोपट भाई....एक बार टच कर लूँगी..तो मुझे आराम मिल जाएगा....

एक बार प्लीज़.....

पोपटलाल नही चाहता था कि उसके लंड को कोमल टच करी.....

जानना चाहते हैं कि पोपटलाल ऐसा क्यूँ चाहता है.....

नही बताउन्गा में आज....

पोपटलाल :- कोमल भाभी.......

कोमल :- प्लीज़ एक बार....प्लीज़...

पोपटलाल तक हर की अपनी गर्दन हाँ में हिला देती है...

कोमल अपना हाथ धीरे धरे आयेज बदते है..उसके दिल की धड़कन तेज़्ज़ चल रही थी...

ये सब उसके लिए बिल्कुल नया था.....

और बिल्कुल करीब लाके...कोमल पोपटलाल के लंड के पास लाके कुछ सेक के लिए रोकती

है......

पोपटलाल का लंड हिचकोले कहा रहा था उसके दिल की भी धड़कन तेज़ चल रही थी...

पोपटलाल ने अपनी आँखें बंद कर ली......

और कोमल ने अपने हाथ में पोपटलाल का लंड पकड़ लिया....

ओह्ह्ह माइ गॉड..इट्स सो हॉट....कोमल के मुँह से यही निकला जब उसने पोपटलाल के लंबे और

पतले लंड को पकड़ा तो.....

पोपटलाल के पूरे शरीर में करेंट दौड़ गया....और खुद दुनिया हिलाने वाला आज

खुद ही किसी साँप की तरह हिल रहा था...

पोपटलाल :- कॉमालल्ल्ल भाभिईिइ.........

इस आवाज़ में पोपटलाल की एक कशिश नज़र आई कोमल को.....वो समझ सकती थी..कि

पोपटलाल को ऐसा सुख बड़ी मुश्किल से मिलता है...

कोमल ने अपने हाथ को थोड़ा सा चलाया...जिससे पोपटलाल का लन्ड़ आगे पीछे हुआ...

जिससे पोपटलाल का हाल और बुरा हो गया....उसके लंड की नसें फूल गयी थी...

कुछ ज़्यादा जल्दी उतेज़ीत हो गया था....और उसका लंड कोमल के हाथ के अंदर हिचकोले

खाने लगा....

कोमल भी ऐसी स्थिति देख के पगल हुई जा रही थी..क्यूँ की लंड के मामले में वो लकी

नही थी..काफ़ी काफ़ी टाइम हो जाता है उसका डॉक्टर हाथी का तगड़ा लंड देखे हुए...

आज इतने दिनो के बाद ऐसे लंड को पकड़ के...उसकी नीचे बड़ी सी चूत गीली होनी लगी

थी..और उसका एक हाथ खुद ब खुद अपनी नाइटी के उपर से..चूत पे चला जाता है...

पोपटलाल तो आँखें बंद कर के अपनी काँपती टाँगों के साथ खड़ा था...कोमल

के हाथ पोपटलाल के लंड पे चल रहे थे..जिसकी स्पीड अब थोड़ी तेज़ हो गई थी...

कुछ 2 या 3 मिनट तक ऐसे ही खेल चलता रहा.....फिर कोमल ने अपना हाथ पोपटलाल के

लंड पे से हटा लिया....पोपटलाल की साँसें तेज़ चल रही थी....और कोमल की भी..

दोनो की आँखें एक दूसरे से मिली........

आँखों में सिर्फ़ नशा था...सिर्फ़ नशा.....

दारू का नशा नही था.....पहले ही बता रहा हूँ...कहीं सोच में डूब जाओ...

ये नशा था जिस्म की भूक का....दोनो की आँखों में एक दूसरे के जिस्म को लूटने का

नशा था.....

कोमल :- पो.

बस बोलने ही वाली होती है..कि पोपटलाल अपना हाथ लगा के चुप कर देता है..

पोपटलाल :- कोमल भाभी...आब आप बुरा माने तो माने..लेकिन जब तक आप मेरे लंड

को शांत नही कर देती..में आपको जाने नही दूँगा..चाहे कुछ भी हो जाए....

ये लू जी..इश्स ढिल्ले से पोपटलाल में कुछ ज़्यादा ही शकति आ गयी.....सला आग में खुद

कूदने को तैयार है...कूदने दो सेल कू..मेरा क्या है..जब जल फुख के रख हो जाएगा

ना और जब ये कोमल सार फाँक जला देगी इसकी...तब पता चलेगा ईससी.....

कोमल पोपटलाल की बात सुन के खुश हो जाती है....

कोमल :- आपने मेरे मुँह की बात छीन ली पोपट भाई....में भी यही चाहती हूँ...मेरा हाल

भी आपके जैसा ही है.....और बोलते हुए घुटनो के बल बैठ जाती है.....और अपना फेस पोपटलाल के लंड के बेहद

करीब ले जाती है...

पोपटलाल अपने लंड पे कोमल की गरम साँस को महसूस कर के....पागल हो जाता है..
 
पोपटलाल अपने लंड पे कोमल की गरम साँस को महसूस कर के....पागल हो जाता है..

आहह..उसके मुँह से हल्की सी आवाज़ निकलती है..और वो अपने दोनो हाथ ले जाके कोमल

के सर पे रख देता है...और उसको आगे की तरफ धकेल्ता है....

लेकिन मज़े की बात तो ये थी...कि कोमल का सिर एक इंच भी आगे नही खिसका....पोपटलाल

अपना मुँह बनाता हुआ...और सोचता हुआ....क्या में जो कर रहा हूँ वो सही है..

फिर कोमल पोपटलाल के चेहरे को देखती है....और अपना मुँह ले जाके...पोपटलाल के लंड

के टोप्पे पे एक किस कर देती है.......

पोपटलाल का हाल बार बार क्या बताऊ....आप सब समझ लो...उसकी दुनिया हिल चुकी है..

और कुछ देर बाद उजड़ भी जाएगी...

किस करने के बाद...कोमल अपना मुँह खोलती है...और अपना मुँह गोल शेप में बना के

उसका आधा लंड अंदर ले लेती है....

आआआअहह पोपटलाल के मुँह से एक सिसकी निकलती है..उसके हाथ

कोमल के बालों में घूमने लगते हैं...

कोमल लंड से अपना मुँह बाहर निकालती है...और फिर से अंदर डाल के इस बार तो पूरा निगल जाती है.... आहह ओह पोपटलाल तो सकपका जाता है..और नीचे कोमल की तरफ देखता है तो हैरान हो जाता है...कि कोमल ने उसका पूरा लंड अंदर तक उतार लिया था...

यार ये कोमल औरत है..कि घुफ़ाओं का खजाना...हर चीज़ बड़ी है इसकी.....बूब्स ..

गान्ड...चूत...और अब मुँह भी.....कमाल की औरत है..

और एक बार में ही अपना मुँह बाहर खिच लेती है....पूप्प्प्प्प्प्प्प्प करके आवाज़ आती है..

पोपटलाल का लंड पूरा गीला हो गया था कोमल क थूक से...और उसके लंड पे चमकती

नसें सॉफ दिखाई दे रही थी...

कोमल फिर लंड के बॉल्स पे पहुच कर .. पूरी बॉल्स मुँह में बाहर कर चूसने लगती

है...

पोपटलाल की तो बॅंड ही बज जाती है....वो कोमल के बालों को ऑलमोस्ट खिचने लगता है..

उसका पिचका हुआ मुँह ..और पिचक जाता है.....

नीचे कोमल उसकी बॉल्स को भी चाट चाट कर गीली कर देती है..

आहह ओह्ह्ह्ह कोमाल भाभी......आहह...पोपटलाल के मुँह से आज बस यही निकल

रहा था....

कोमल ने उसके बॉल्स को मुँह से बाहर निकाला...पोपटलाल की बॉल्स और उसका लंड पूरा कोमल

के थूक से भीग गया था....
 
कोमल और पोपटलाल की नज़र आपस में मिलती है.....कोमल दुबारा से लंड को मुँह में

ले लेती है..और इस बार तेज़ी से उसे चूसने लगती है..

पोपटलाल की तो आँखें बाहर होने को हो जाती है....उसकी साँसें उखडने लगती है...

आआआहह उूउउ ओह्ह्ह्ह कोमल भाभी..आहह...और चिल्लाता हुआ

अपना सारा रस...कोमल के मुँह के अंदर छोड़ देता है......

कोमल भी गॅट गॅट कर की सारा सर पी जाती है....

कोमल उसका लंड मुँह से बाहर निकाल के..पूरा लंड सॉफ कर देती है...

और उपर खड़ी हो जाती है...

पोपटलाल :- कोमल भाभी....

कोमल :- पोपट भाई...आप तो बड़ी जल्दी निकल गयी.

पोपटलाल :- क्या करूँ.....मेरा हाल बहुत बुरा था....

कोमल एक स्माइल देती है...और उसकी आँखों में देखते हुए...

अपने गाउन की तरफ हाथ बढ़ाती है..और एक ही झटके में उससे खोल देती है..और पीछे

खिसका देती है..और पोपटलाल के सामने बिल्कुल नंगी खड़ी हो जाती है...

पोपटलाल की तो आँखें फट जाती है...कोमल को ऐसे देख कर....

उसका सोया हुआ लंड... एक बार फिर से अपनी औकात पे आना शुरू हो जाता है..

चलो जी अभी जब तक इसका लंड औकात पे आता है..ज़रा रिवर्स गियर लगाते हैं..और पार्टी

पे चलते हैं....

ऊओ तेर्रि किी...इधर क्या हो गया है....ओफूऊ......ऐसा क्या...

अरे बसस्स कार्रूऊओ साइकल की तरह चला लिया ना दिमाग़ ... तेज़ी से...

मुझे पता है...कि यही सोच रहे हैं..कि कोई किसी की मार रहा होगा..है ना

यही चल रहा है ना दिमाग़ में....मतलब अगर में लिख दूँ ओ तेर्रि की..तो

कोई किसी की मार रहा है...ये सही है....

पोपट कर दिया ना मेने आप सब का.....थक गया हूँ..पोपट करते करते आप सब का

में हाहहहहा......

अरे पार्टी में घुसे तो इतना अंधेरा क्यूँ है भाई.....

बड़ी ही डिम लाइट्स जल रही थी....काफ़ी अंधेरा था....
 
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