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Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा



लेकिन अपना सोढी तो आज पूरे मूड में था....उसने तो धक्को की बरसात ही कर दी...

अब दया से खड़ा होना मुश्किल हो रहा था...क्यूँ कि धक्के इतनी तेज़ थे..कि उसके पैर कांप रहे थे....

लेकिन सोढी ने दया को पकड़ रखा था कमर से इसलिए वो नीचे भी नही बैठ पा रही थी...

सोढी के धक्को की रफ़्तार बढ़ गई..वो अपनी चरम सीमा में पहुँचने ही वाला था.....

सोढी :- दया भाभिजी.....अह्ह्ह्ह.....

और अपना सारा रस दया की चूत के अंदर उडेल देता है....

और दया को छोड़ देता है..दया ज़मीन पे गिर जाती है..

उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे...लेकिन वो एक दम पत्थर की तरह पड़ी थी ज़मीन पर........

बॅक टू लाइव इन क्लब हाउस...

ये सब सुन सबके होश उड़ जाते हैं..

जेठालाल का तो मुँह खुला का खुला रह जाता है...

अंजलि रोशन माधवी..रीता....ये सब सुन के चौंक जाते हैं......

सबका एक ही रिक्षन था...सबके मुँह खुले हुए थे....

अगला एपिसोड बहुत गरम होने वाला है.....

जेठालाल का तो मुँह खुला हुआ था....

अगर थोड़ी देर और बंद नही करता तो कुछ मच्छर घुस जाते अंदर..

वो तो शूकर है...बंद कर लिया...

जेठालाल :- दया....बड़े प्यारे स्वर में...

तेरे साथ ये सब हो गया...और और...

दया :- अब क्या फ़ायदा टप्पू के पापा...जब आपकी ज़रूरत थी तब तो आप थे ही नही....

जेठालाल :- मुझे माफ़ कर दे दया...

मुझे ये उम्मीद नही थी...

दया :- अब रहने दीजिए.....इसका कोई फ़ायदा नही है....

जेठालाल को गुस्सा आ रहा था....वो ज़ोर से चिल्लाता है.....

सोढीईई.....

पूरा क्लब हाउस हिल जाता है....सब जेठालाल की आवाज़ सुन के बहुत डर जाते हैं...

तारक :- जेठालाल शांति रखो.....तुम अब ये कड़वा सच सहना पड़ेगा...

जेठालाल :- क्या शांति मेहता साहब....क्या शांति...सुना नही क्या हुआ मेरी दया के साथ...

तारक :- देखो जेठालाल सोढी की ग़लती तो है ही..लेकिन तुम्हारी भी उतनी ही ग़लती है...इसलिए तुम अकेले उस को दोष नही दे सकती....

समझो बात को..

जेठालाल :- क्या समझू मेहता साहब....

और जेठालाल टेबल पे बैठ जाता है...अपने सर पे हाथ रख के...

बहुत दुखी मन से...

उसे पता था जो हुआ बहुत ग़लत लेकिन अब कुछ नही हो सकता था...

तारक :- हिम्मत रखो जेठालाल....अब क्या कर सकते हैं...हमने जो पाप किया है..उसकी सज़ा तो हमे भुगतनी तो पड़ेगी ही....

बहुत ही सॅड महॉल था.....सभी उदास थे...कोई कुछ नही बोल पा रहा था....

तभी बबीता ने खामोशी को तोड़ा..

 


बबीता :- अब क्या फ़ायदा आप लोगों के ऐसे उदास होने का..

जो करना था वो तो कर चुके आप लोग..

हमारी इज़्ज़त के साथ तो खेल चुके ....

आप लोग अभी इतना दुखी हो रहे हैं...तो सोचिए हम लोगों को कितना दुख सहना पड़ा होगा..उस वक़्त.....

जेठालाल बबीता की बाते सुनता है...उसे पता था..कि अब उसकी बारी है....उसका क्या होगा......

रात के 2 बजे के आस पास....डोर बेल बजती है....

बबीता :- शायद अईयर ही होंगे..

वो गेट खोलने चली जाती है...

जेठा जी आप...इस वक़्त..

जेठालाल नशे में धुत ....

क्यूँ बबीता जी में नही हो सकता...आपसे मिलने का मन किया तो आ गया..

बबीता :- जेठा जी आप ने पी रखी है...

जेठालाल :- हाँ आपकी याद में थोड़ी सी पी ली....

बबीता :- ये आप क्या बोल रहे हो...

जेठालाल :- आप मुझे अंदर नही बुलाएँगी....

बबीता कुछ सोचती है...उसे लग रहा था कि अंदर नही बुलाती हूँ..फिर भी वो जेठालाल को अंदर आने देती है..

या यूँ मानिए...की वो ज़बरदस्ती घुस गया...

बबीता :- जेठा जी आइ थिंक आपको अपने घर जाना चाहिए...

जेठालाल :- अपने घर ही तो आया हूँ...ये भी तो मेरा ही घर है...

और बबीता को घूर्ने लगता है...

बबीता ने ब्लू नाइट सूट पहना हुआ था...जिसके टॉप के कुछ उपर के बटन्स खुले थे.....सॉफ सॉफ कोई भी..बबीता के सुंदर गोल गोल बड़े बड़े...चुचे दिख रहे थे......

जेठालाल का मुँह खुल गया..जैसे उसे दूध की बॉटल चाहिए हो मुँह में..

बबीता नोटीस कर लेती है की जेठालाल कहाँ देख रहा है....वो फटाफट अपने बटन बंद करने लगती है...

जेठालाल :- रहने दीजिए ना...अच्छे लग रहे हैं...

बबीता :- वॉट???

जेठालाल अब बबीता के करीब बढ़ने लगता है..

बबीता घबरा रही थी..कि आज क्या होने वाला है उसके साथ..

बबीता :- जेठा जी.....आ..प्प....आ..ज्ज ठे..एक नही लग रहे हैं..आपको घर जाना चाहिए...

लेकिन जेठालाल तो जैसे बेहरा हो गया था...वो तो बस बबीता की तरफ आगे बढ़ रहा था...

बबीता के माथे से पसीना निकल रहा था..

जेठालाल बबीता के बिल्कुल करीब पहुँच गया...

बबीता :- जेठा जी...अहह....

पूरे कमरे में ये आवाज़ गूँज उठती है...

जेठालाल ने अपने दोनो हाथो से बबीता के बड़े बड़े चुचों को दबा दिया था..

और वो भी इतनी ज़ोर से..कि बबीता से सहन नही हुआ.....

जेठालाल अपने दाँत फाडे बुरी तरह से चुचों के साथ खेल रहा था...

बबीता :- जेठा जी छोड़िए......छोड़ दीजिए...अहह...ओह्ह्ह...

बबीता जेठालाल को धक्का मारती है...जिससे जेठालाल पीछे सोफे की तरफ गिरता है..

लेकिन गिरते वक़्त वो बबीता का हाथ पकड़ लेता है...जिससे बबीता भी उसके उपर ही गिर जाती है....

गिरने के कारण बबीता जेठालाल के उपर आ जाती है...जिससे उसके चुचे..जेठालाल की छाती में धँस जाते हैं...उसके मुँह से फिर एक...अहह...निकल जाती है...

जेठालाल :- अहह...बबीता जी...कितना मज़ा आ गया..

बबीता :- छी..जेठा जी...मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नही थी..

जेठालाल :- हाँ तो अभी तो ये शुरुआत है..आगे देखिए..आपको खुश कर दूँगा.....

बबीता :- जेठा जी छोड़िए मुझे...

और उठने लगती है..

लेकिन जेठालाल ने तो मानो कसम खा रखी थी..कि आज तो वो बबिता जी का हाथ छोड़ेंगे ही नही....

उसने बबीता का हाथ कस के पकड़ा हुआ था...

और अभी भी उसी पोज़ीशन में बबिता जेठालाल के उपर लेटी हुई थी...

और बबीता के चुचे जेठालाल में धन्से पड़े थे...

 
लेकिन जेठालाल ने तो मानो कसम खा रखी थी..कि आज तो वो बबिता जी का हाथ छोड़ेंगे ही नही....

उसने बबीता का हाथ कस के पकड़ा हुआ था...

और अभी भी उसी पोज़ीशन में बबिता जेठालाल के उपर लेटी हुई थी...

और बबीता के चुचे जेठालाल में धन्से पड़े थे...

जेठालाल चुचों को महसूस कर के अपने आप को इस धरती का सबसे लकी आदमी समझ रहा था..और वो कितना खुश था...इसका अंदाज़ा उसके पैंट के अंदर से पता चल रहा था....

जो आगे से फूला हुआ था...

जी हाँ जेठालाल....का लंड पूरा अकड़ चुका था...

और वो बबीता को नीचे से चुभ रहा था..

बबीता इसके कारण वहाँ से उठना चाहती थी..लेकिन वो छुड़ा नही पा रही थी..अपने आप को..

बबीता :- छोड़ दीजिए...जेठा जी...मुझे..प्लीज़....

जेठालाल इस बार बबीता को छोड़ देता है..

बबीता खुश हो जाती है...और वो उठने लगती है...पर जैसे ही उठती है...वो नीचे ज़मीन पर गिर जाती है...

क्यूँ कि इस बार जेठालाल ने बबीता के पैर पकड़ लिए थे...

बबीता दर्द में....अहह..जेठा जी....ये क्या किया अपनी...उफफफफफ्फ़...आ.

जेठालाल :- ओहो लग गई आपको..

बबीता ज़मीन पे पड़े पड़े ...हाँ..

जेठालाल :- कहाँ लग गई...

बबीता :- यहाँ पर...

और वो अपनी जाँघो की तरफ इशारा करती है...

जेठालाल फ़ौरन खड़ा होता है..और बबीता के पैर के साइड में आके बैठ जाता है....

जेठालाल :- रुकिये में ठीक कर देता हूँ...

और बबीता का.....

नीचे से पाजामा को खिच कर उतारने की कॉसिश करता है....लेकिन ज़्यादा नही उतार पाता ...क्यूँ कि बबीता बैठी हुई थी..

 
बबीता :- चिल्लाते हुए....ईए क्य्ाआआ..

कर रहे हैं आप...छोड़िए...

और उठने लगती है..

ये मौका सही था जेठालाल के पास.....वो फ़ौरन पाजामा पकड़ लेता है...और खीच देता है इस बार....

इस बार पाजामा घुटनो तक पहुँच जाता है.....

उफफफफफ्फ़....पाजामा उतरने के बाद का नज़ारा..खुद जेठालाल नही सहन कर पाता...

अंदर कोई और कपड़ा नही था..यानी पैंटी नही पहनी थी बबीता ने..

कोरी चूत...बिल्कुल सॉफ..एक भी बाल नही...और इतनी चिकनी लग रही थी..कि पूछो मत...दूध सी जैसी सफेद थी..

जेठालाल की तो जीभ फड़फड़ाने लगी....

बबीता पाजामे के खिचने की वजह से फिर से नीचे गिर चुकी थी...

उसकी टाँगे खुली थी..और बीच में चूत सॉफ दिखाई दे रही थी..

बबीता :- प्लस्सस ऐसा मत कीजिए..आप तो मुझसे अपना बेस्ट फ़्रेंड मानते हो ना...

और पीछे खिसक ने लगती है...

लेकिन जेठालाल इस बात के परवाह किए बिना..अपनी पैंट और अंडरवेर एक झटके मे उतार देता है...

और अपने विकराल रूप में आए लंड को बाहर निकाल लेता है....

बबीता एक बार को जेठालाल का लंड देख कर चौंक जाती है....उसे लगता है..कितना बड़ा है जेठालाल का....लेकिन अगले ही पल उसे याद आता है..कि वो शादी शुदा है...और ऐसे अईयर को धोका नही दे सकती...

इतना सोच ही रही थी..की जेठालाल उसके बेहद करीब पहुँच चुका था..

जेठालाल :- क्यूँ ना इस गुलाबी होंठो का रस पीया जाए...

बबीता :- प्लीज़..ऐसा.....औहम्म्म्मम...

जेठालाल ने अपने होंठ रख दिए थे बबीता के होंठो पर...और उन्हे ऐसे चूस रहा था...जैसे कोई बच्चा लोली पोप चूस्ता है....

कुछ मिनट तक बबीता के होंठो का सेवन करने के बाद वो हटा....

बबीता :- प्लीज़ जेठा जी रुक जाए...उसका एक बूँद आसू टपक जाता है.....

लेकिन जेठालाल कहाँ मानने वाला था...

जेठालाल :- बबीता जी...आज में आपको दिखा दूँगा..कि आपने उस अईयर..के साथ शादी कर के कितना ग़लत काम किया है....

बस इतना हे बोलता है...और अपना लंड चूत से सटा देता है,....

ऐसा लग रहा था..कि जेठालाल अपने लंड को क़िस्सी दिला रहा था बबीता की चूत की....

बबीता आँखें बंद कर लेती है..उसे पता था...कि अब क्या होने वाला है......

और वो हल्का सा धक्का लगाता है.....

 


हल्का सा लंड अंदर चला जाता है...और बबीता के मुँह से हल्की सी आहह निकल जाती है...

जेठालाल एक और धक्का लगाता है....और इस बार पूरा अंदर...

बबीता :- अहह...ओह......

बबीता इस वक़्त बहुत घटिया फील कर रही थी.....उससे आख़िर कर रहा नही गया और वो बोल पड़ी...

बबीता :- जेठा जी..आज आपने वो कर दिया जो मेने सपने में नही सोचा था..,.

मुझे लगा था कि आप बहुत अच्छे इंसान हो..लेकिन आपने तो....

आज के बाद में आपकी शाक़ल देखना पसंद तक नही करूँगी....आपसे कभी बात नही करूँगी.......

क्य्ाआआआआआआआअ.......

पूरे क्लब हाउस में ये आवाज़ गूँज जाती है...

आप ऐसा नही कर सकते .... आपको मुझसे बात करनी ही पड़ेगी बबी.......

तारक :- बीच में रोकते हुए....क्या हुआ जेठालाल ... क्या सोच रहे हो...

किस को बात करनी पड़ेगी...

जेठालाल अपने चारो तरफ देखता है...अपने मन में...

उफफफ्फ़....में तो क्लब हाउस में हूँ...पता नही चला कब सोच में चला गया....हस्शह....वो सिर्फ़ एक सपना था...अगर ऐसा बबीता जी ने असलियत में बोल दिया तो क्या होगा मेरा...

तारक :- जेठालाल क्या सोच रहे हो क्या हो गया...तुम ठीक तो हो ना..

सभी वहाँ पूछते हैं..कि क्या हुआ जेठालाल...

जेठालाल :- नही कुछ नही...

अपने मन में.. बच गया....

(जेठालाल :- बच गया मन में सोचता है...)

लेकिन में कहता हूँ कितनी देर के लिए...अभी कुछ देर बाद तो बबीता जी खुद बताने ही वाली है.....

जेठालाल मन में...हस्शह बच गया ....अगर ये सपना मेरा सच होता तो...बबीता जी मुझसे काफ़ी बात नही करती.....कितना भयानक सपना था..

तारक :- जेठालाल अभी तक क्या सोच रहे हो..

जेठालाल :- वो बबीता जी को सॉरी बोलना है...

और जेठालाल खड़ा होके पीछे मुड़ता है...बबीता को सॉरी बोलने...

लेकिन वो जैसे ही पीछे मुड़ता है....उसको अपनी आँखों पे यकीन नही आता....वो हैरान रह जाता है....

तारक :- भाई क्यूँ बोलना है बबीता जी को सॉरी....

अभी आने तो दे उन्हे....

जेठालाल :- क्य्ाआआआ......

आने दे का क्या मतलब है आपका...

अभी यहीं तो थी..

उनके साथ बाकी की सारी लॅडीस भी तो थी....

 


तारक :- क्या बोल रहे हो जेठालाल .... हम तो इतनी देर से यहीं हैं...अभी तक कोई आया ही नही है...

जेठालाल :- लेकिन मेहता साहब...अभी तो हम लोगों को डाँट पड़ रही थी...यहाँ पर...सबकी पॉल खोली जा रही थी...

ये बात इतनी तेज़ बोलता है जेठालाल कि आजू बाजू खड़े सोढी भिड़े और अईयर ये सुन के उसके पास आ जाते हैं..

सोढी :- क्या हुआ जेठा प्रा..क्यूँ चिल्ला रहे हो..

तारक :- अरे सोढी जेठालाल बोल रहा है..कि अभी सारी लैडेस यहीं पर थी और सबकी पोल खुल रही है..
 
ये बात इतनी तेज़ बोलता है जेठालाल कि आजू बाजू खड़े सोढी भिड़े और अईयर ये सुन के उसके पास आ जाते हैं..

सोढी :- क्या हुआ जेठा प्रा..क्यूँ चिल्ला रहे हो..

तारक :- अरे सोढी जेठालाल बोल रहा है..कि अभी सारी लैडेस यहीं पर थी और सबकी पोल खुल रही है..

सोढी :- पोल ..कैसी पोल...

भिड़े :- क्या बोल रहे हो जेठालाल..

अईयर :- ये जेठालाल को कुछ ना कुछ सुजता रहता है.....जेठालाल तुम पागल तो नही हो गये हो..

जेठालाल :- आईए अईयर भाई..शांति रखो ना थोड़ी देर...

तारक :- अईयरर्र्ररर...

अच्छा जेठालाल तुम शांति से बैठो और बताओ..क्या हुआ है...

तुम क्या कहना चाहते हो..

जेठालाल :- पहले ये बताइए मेहता साहब..कि जबसे हम यहाँ आए हैं...उसके बाद सोसाइटी के सारी लेडीज़ आई थी कि नही....

तारक :- नही...जब से हम आए हैं..अभी तक नही आई..

सोढी :- हाँ यार...पता नही कहाँ रह गयी..हमे बुला के..

भिड़े :- लगता है....कोई बड़ी सज़ा देने के लिए समान इकट्ठा कर रही होंगी...

अईयर :- हाँ तो फिर हमने काम भी तो ऐसा ही किया है...

लेकिन मुझे एक बात समझ नही आ रही .. कि हम दूसरों के घर कैसे पहुँच गये...

कहीं जेठालाल......तुम्हारा आइडिया तो नही था ये..

जेठालाल गुस्से में खड़ा होता हुआ अईयर से...

ये अईयर इडली....तू पागल है पागल..यहाँ क्या बात चल रही है..और तू क्या बोल रहा है..

तारक :- जेठालाल जेठालाल...तुम शांत हो जाओ...

और अईयर क्या बेवकूफी वाली बात कर रहे हो....चुप्प रहो ना.

सोढी :- हाँ अईयर चुप रहो ना...क्यूँ परेशान कर रहा है जेठा प्रा को...

तारक :- हाँ जेठालाल तुम शांति से बताओ..क्या हुआ...क्यूँ परेशान हो तुम...

जेठालाल :- मेहता साहब वो..

और इधर उधर नज़र दौड़ाता है....

पोपटलाल नही आया अभी तक्क..मेहता साहब...

भिड़े :- क्यूँ उसे भी आना था...

लेकिन उसकी तो अभी शादी भी नही हुई है...

जेठालाल :- आए चपली....मेने तुझसे पूछा ...मेने मेहता साहब से पूछा है ना..

तारक:- जेठालाल तुम बताओगे...की क्या हुआ...तुमने कोई बुरा सपना देखा क्या...

 
जेठालाल सोचने लगता है....

और उसके सामने पूरा का पूरा नज़ारा आ जाता है...जो उसने आख़िर तक देखा था..यानी कि...

माधवी की कहानी से लेकर बबीता की कहानी तक.....

तारक :- जेठालाल....जेठालाल....कहाँ खो गये भाई...

जेठालाल :- हन्न्न.....हाँ...वो ... वो....

अईयर :- अब वो वो ही करते रहोगी...कि आगे भी बोलोगे...

जेठालाल :- आईईईई चपली...शांति रख......

इतनी ज़ोर से बोलता है..कि अईयर की तो साँसें उपर चढ़ जाती है....

तारक :- भाई अईयर तू शांत रहने के लिए क्या लेगा..

सोढी :- में इसका मुँह बंद कर देता हूँ...

जेठालाल :- हाँ सोढी...मुँह क्या..इसे पूरा का पूरा बंद कर दे....

कर टाइम पंचाट पंचाट..पंचाट...

तारक :- शांति रखो जेठालाल....

अईयर :- सॉरी...ईये एम सॉरी जेठालाल...अब नही बोलूँगा...

तारक :- हाँ बताओ..क्या हुआ है..

जेठालाल :- मेहता साहब..मेने अभी बहुत बुरा ...बुरा क्या...भयानक..सपना देखा है...जिससे मेरे रोंगटे खड़े हो गये हैं....

तारक :- ऐसा क्या देख लिया तुमनी..

भिड़े :- हाँ ऐसा क्या देखा.

सोढी :- दसो...जेठा प्रा...

जेठालाल :- आप तो जानते ही हैं..की हम लोग ग़लती से दूसरों की बीवियो के घर चले गये थे...

और फिर वही बातें दिमाग़ में चल रही थी...

यहाँ बैठे बैठे पता नही कब सोच में चला गया....और ऐसा ख़तरनाक सपना आ गया...

तारक :- जेठालाल अब बता भी दो क्या देख है तुमने...

और..अब जेठालाल वो सब बता देता है...जो उसने सपने में देखा था.....

सबकी होश ...उड़ जाते हैं..

मुँह खुला का खुला रह जाता है....

सोढी :- गुस्से में....ये क्या बोल रहे हो...जेठा प्रा....में छोड़ूँगा नही....अगर क्सिसी ने भी रोशन के साथ कुछ किया तो..

तारक :- सोढी तू शांत रह...ये गुस्से का टाइम नही है..और वैसे भी ये सपना ही हैं..

सोढी :- तुस्सी ठीक बोल रहे हो..मेहता साहब....

तारक :- जेठालाल शांत हो जाओ...सपना ही तो है.....

जेठालाल :- मेहता साहब....दिन के सपने कभी कभी सच हो जाते हैं....

ये बात सुन के सब के एक बार फिर होश उड़ जाते हैं....

भिड़े :- अगर ये सच हुआ तो....देव देवा....

वैसे भी ह्हम लोग कल नशे में थे...और ...

बस इतना ही बोलता है....

कि सामने से लॅडीस एक के बाद एक एंटर होने लगती है...

सबसे पहले अंजलि..उसके पीछे दया..उसके पीछे बबीता...उसके पीछे रोशन..और आख़िर में माधवी....

सब की सब ऐसे ही खड़ी हो जाती है...जैसे सपने में जेठालाल ने एक देखा था....

उसके सामने जिसके साथ हो रात में थी...

जेठालाल ये देख के हैरान हो जाता है...क्यूँ कि उसके सपने की शुरुआत हो चुकी थी.....

सभी लेडीज़ की आँखों में गुस्सा सॉफ झलक रहा था......

सभी जेंट्स की सिट्टी पिट्टी गुल थी...सबकी आँखों में डर था..

एक डर वो जो जेठालाल के सपने से हुआ था...और दूसरा ...सारी लॅडीस की आँखों में गुस्सा....

कुछ मिनट बाद....जेठालाल की नज़र दरवाजे पे पड़ती है....

और वहाँ देख कर उसकी गान्ड फट जाती है....

 
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