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Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

सभी जेंट्स के कॉस्ट्यूम के अंदर उनका साँप फनफना रहा था....

अपनी अपनी बीवियों को देख कर..

चाहे वो स्वीमिंग पूल में नंगे हों...या फिर बाहर खड़े लोग...

सिवाय जेठालाल के..उसका लंड तो अपनी बीवी की वजह से नही...बल्कि

बबीता को देख के फनफना रहा था ...

फनफना क्या रहा था बल्कि...उसमे तो आग लग चुकी थी...उसे तो इस

वक़्त उस आग को भुजाने के लिए कुछ करना चाहिए नही तो..

वो आग ज्वाला मुखी बन के फट जाती...

लेकिन जिस तरह बबीता खड़ी थी...उसे देख कर तो किसी का भी लंड सही नही

रह सकता....

उस वक़्त को शिकारी लग रही थी..जो आदमियों के लंड का शिकार करती हो.....

इस वक़्त बबीता वैसे ही आँखे बंद करे..मॉडेल वाले स्टाइल में..हल्के से होटो

पे स्माइल रखते हुए खड़ी थी..

जेठालाल का मुँह अभी भी खुला था....लंड उचाई छू रहा था....शायद कुछ

पाना चाहता हो...

अचनाक बबीता ने आँखें खोली...और नॉर्मल पोज़िशन में खड़ी होके...सभी जेंट्स की

तरफ देखने लगी..जो इस वक़्त उस पर लार टपका रहे थे...

सभी जेंट्स सकपका गये...और उन होने ने नज़र इधर उधर घुमानी शुरू कर

दी..

लेकिन हमारे प्यारे सभी के दुलारे...खास कर के बबीता जी....जी..हाँ जेठालाल जी....

वो तो अभी भी वैसे ही अपनी नज़रे गड़ाए बैठे थे.....

बबीता की नज़र पड़ी..तो वो हल्की सा मुस्कुरा दी....

और फिरररर......

फिर वो एक ही झटके में मूडी......

बबीता ने क्या झटका लिया...इधर तो जेठालाल के कॉस्ट्यूम के अंदर झटके पड़ने लगे..

तहलका मचा दिया जेठालाल के लंड ने अंदर....

उसे संभालना मुश्किल हो गया था....

हो भी क्यूँ ना...बबीता जितनी आगे से कयामत लग रही थी..उतनी ही पीछे से भी तो

क़यमत ढा रही थी वो...

 
देखते रहने का मन हो...ऐसा दृश्य हो गया था....

जी अल्लमोस्ट न्यूड बॅक...

अब हल्की सी डोरी बँधी थी...जो कि ना के बराबर ही लग रही थी..इतनी मस्त पीठ पे...

गोरी चिटी पीठ...इतनी सॉफ्ट के पानी भी ना ठहरे....हाई...क्या लाजवाब पीठ है..

जेठालाल की नज़र जब बबीता के पिछवाड़े पे पड़ी...तो उसके कानों से तो

धुआँ ही निकल गया....

अब क्या करें मालिक....लग भी तो तौबा रही थी.....अब इतनी मोटी बड़ी बड़ी गान्ड

पे जब एक छोटे से रुमाल जैसे कोई कपड़े से बँधी होगी तो कैसी दिखेगी...

खुद ही सोच लीजिए...

चलिए दिमाग़ पे ज़्यादा ज़ोर मत मारिए...में खुद ही बता देता हूँ...

अब पहनी थी उसने अंजलि की पैंटी...अब अंजलि की गान्ड है तो इतनी बड़ी नही...

लेकिन बबीता के डबल साइज़ की है उससे....तो अब जब वो छोटी सी पैंटी पहन

के सामने आई तो...उसकी वो बड़ी बड़ी गान्ड..जो तरबूज जितनी है...वो उसमे

छुपी नही....तो बस बबीता की गान्ड की दरार को ही छुपा पा रही थी....

सबकी हालत पतली थी..वो गान्ड देख कर..चाहे कोई भी आदमी क्यूँ ना खड़ा वो

वाह्न स्वीमिंग पूल के आस पास....

जेठालाल अपने मन में...

बबीता जी...आज तो आप कहर ढा रहे हो....मेरा तो खुद पर से काबू छूट जाएगा

अगर थोड़ी देर आप ऐसी ही खड़ी रही तो...क्या मस्त गान्ड है आपकी...वाहह...

आज तो ये सच्चाई यहाँ खड़ा हर शक्स देख रहा है...

ये अईयर कितना लूसी है.....कि आप जैसी बाइफ उसे मिली है... (जी जेठालाल के कहने का मतलब है वाइफ)

 
बबीता अब चलते हुए...सभी लॅडीस के पास जा रही थी.....

जब वो चल रही थी..तो उसकी वो बड़ी बड़ी हेवी गान्ड..उपर नीचे हो रही ही..उस

छोटी सी पैंटी में......

जेठालाल की गर्दन भी कभी लेफ्ट तो कभी राइट...घूम इधर उधर ही रही थी..

बबीता की मटकती गान्ड को देखते हुए...

पूरे स्वीमिंग पूल पे खड़े आदमियों की नज़र बबीता पर थी...

पर सिवाय एक आदमी के....

जी हाँ सब ही जान गये होंगे....अईयर........

जी हाँ ... ऐसा नही है कि वो नही चाहता था बबीता को देखना...लेकिन उसकी नज़र तो

जेठालाल पर अटकी थी...

अब वो बाहर निकल के कुछ कर तो सकता नही था...इसलिए अंदर ही अंदर जेठालाल को

गालियाँ दे रहा था......

उधर बबीता सभी लॅडीस के पास पहुच गई थी....

उन सब में कुछ घुसर पुसर हुई..पता नही क्या बात हो रही थी..

इधर जेंट्स के तो तोते उड़े पड़े थे...........

उन में से कोई भी बात नही कर रहा था...बस अपनी गर्दन इधर उधर घुमा रहे थे..

तभी तारक की नज़र पड़ी.....

कि सभी लॅडीस उनकी ही तरफ आ रही है..

तारक :- अरे भाईयो देखो हमारी बीवियाँ इधर ही आ रही है..

ज़रा संभाल के रहना....मुझे तो कुछ गड़बड़ लग रही है..

 
अब जब सबकी नज़र पड़ी कि सभी लैडेस इधर ही आ रही है...तो सब घबरा गये..

क्यूँ कि उनके नीचे कॉस्ट्यूम में तंबू जो बना हुआ था...

सब उसे छुपाने की कॉसिश में लग गये....

लेकिन ओपन्ली सबके सामने तो हाथ से छुपा नही सकते थे....

सभी जानते थे..कि सबके नीचे तंबू बना है...

अब्दुल :- मेहता साब..कोई आइडिया निकालो..सब पास ही आते जा रहे हैं.....

उन्हने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी..

तारक :- अब्दुल बीवियाँ हमारी है..लेकिन खड़ा तेरा भी है..

तू तो बहुत चालू निकला..

अब्दुल :- मेहता साब...वो तो ठीक है..लेकिन में भी तो इंसान हूँ...

और उसे यानी मेरे लंड को थोड़ी पता है..कि ये मेरी बीवियाँ है..

जेठालाल :- मेहता साब..अभी अब्दुल को छोड़ो..कोई आइडिया निकालो..

सोढी :- हाँ मेहता साब...देखो रोशन और सब करीब आ रहे हैं..

तारक सोचने लगता है...

तारक :- एक आइडिया है........

अब्दुल :- क्या...

तारक :- पानी.....

मोहन लाल :- पानी से कैसे बिठाएँगे मेहता साब....

तारक :- अरे मोहन भाई..पानी से मतलब है...सब कूद जाते हैं स्वीमिंग पूल में..

तो किसी को कुछ नही दिखेगा...

जेठालाल :- हाँ ये सही रहेगा...

और ये बोलते ही...अब्दुल और सोढी तो छलाँग लगा लेते हैं....

उनकी देखा देखी मोहन लाल भी...

अब बचते हैं तारक और जेठालाल.

जेठालाल :- पहले आप जाइए...

तारक :- नही..दोनो एक साथ चलेंगे...

और तारक जेठालाल का हाथ पकड़ के कूद जाता है....

इसी तरह बाकी के भी जेंट्स पानी में होते हैं.....

अपने आप को सेट्ल करते हुए..पानी के उपर आ जाते हैं...

जिससे उनके उपर का हिस्सा ही दिखाई दे रहा था अब...

जैस ही सबकी गर्दन पानी में से निकलती है..

उन की नज़र सारी लॅडीस पर पड़ती है..जो कि स्वीमिंग पूल के किनारे में ही खड़ी थी..

अपनी अपनी कमर पे हाथ रख के....

 
अंजलि :- तारक अभी तो आप सब यहाँ खड़े थे...ये अचानक स्वीमिंग पूल में क्यूँ

कूद गये....

तारक :- वो वो..

बबीता :- और हाँ अईयर....तुम क्यूँ इतनी देर से अंदर हो..

अईयर :- वो बाब..

माधवी :- और आप...आप क्यूँ अंदर है...

ओहू..अच्छा..तो अब इन फिरंगियो...के पीछे पीछे आप स्वीमिंग पूल के अंदर उतर

गये....अब देखो आप...क्या करती हूँ आपका..

भिड़े :- आई माधवी आए..

रोशन :- क्यूँ रोशन...तू भी क्यूँ कूद गया..

तारक :- अरे आप लोग शांत हो जाए...

वो धूप इतनी तेज़..थी..कि..गर्मी ल .. ग र..ई थी..इसी ल..लिई...

अंजलि :- अच्छा गर्मी..

दया :- और टप्पू के पापा..आप...आप क्यूँ गये पानी में..

(जेठालाल का बॅक ग्राउंड म्यूज़िक.. बच्चे के रोने की आवाज़...)

जेठालाल :- अरे अब दया...वो..ओ ज..ब. सब अन्द.र.. आए.. तो मुझे भी आना पड़ा ना..

दया :- ओह्ह हन्न..सॉरी....

तारक :- अरे अंजलि..तुम तो कमाल की लग रही हो....

अंजलि :- अच्छा..जी..थॅंक यू..

जेठालाल :- और आप भी बबीता जी .......बहुत ही ज़्यादा...मस्त लग रहे हो..

(बबीता का बॅक ग्राउंड. म्यूज़िक....अहन्ंनननननननननणणन्)

अईयर :- क्या मतलब जेठालाल..

(बॅक ग्राउंड म्यूज़िक.......आयूऊऊऊ)

जेठालाल :- वो वो....(बॅक ग्राउंड म्यूज़िक... फ्लश चलने की आवाज़..)

जेठालाल :- वो बबीता जी से लेकर..इधर दया तक...सब मस्त लग रहे हैं..

ऐसा कहा मेने...

तारक बात को बदलते हुए..

तारक :- अरे आप सब अंदर आइए ना....क्यूँ बाहर खड़े हैं...

बबीता :- ओह्ह एस आइ आम वेटिंग.....

लेकिन अईयर तुम जब से अंदर ही क्यूँ हो.....ऐसे..एक ही जगह पे ...

जेठालाल :- वो ऐसे ही खड़े रहेंगे..

सब जेंट्स हल्की आवाज़ में हँसने लगते हैं...जेठालाल की बात सुन के..

 
बबीता :- जेठा जी...क्या मतलब..

जेठालाल :- वो हुआ यूँ..बब..

अईयर :- कुछ नही बबिता.....वो तो बस ऐसे ही..तुम आओ ना...आओ...

बबीता :- ओके...सो कमोन .. लेट्स गो..

और सभी लॅडीस....अंदर आने के लिए स्वीमिंग पूल की सीडियों के पास चल

देती है..

अईयर :- जेठालाल प्लीज़..बबीता को कुछ मत कहना..

जेठालाल :- चिंता मत करो अईयर भाई..नही बताउन्गा..

अईयर :- थॅंक यू..

जेठालाल अपने मन में...अईयर भाई...में तो नही बताउन्गा..बबीता जी को अपने

आप ही पता चलने वाला है...हहेहेहेः....

एक एक करके सभी लॅडीस पानी में एंटर होती है.....

सभी एक साथ जेंट्स से दूर पानी के अंदर खड़ी होती है.....और एक डुबकी टाइप

लगाती है....और अपना सर पानी के अंदर चली जाती है.....

कुछ सेकेंड तक ऐसे ही रहती है...और फिर बाहर की तरफ आती है...

उफफफफफफफ्फ़....क्या ग़ज़ब की लग रही थी..सब के सब एक से बढ़ कर एक...

सबकी गीली ब्रा उनके चुचों से चिपक गई थी.....

बाल गीले होके चिपके हुए थे...

बबीता अंजलि..और रोशन तो कहर ढा रही थी..

माधवी और रीता....दोनो अपने चुचों के उपर हाथ रख के खड़ी थी...

गीली होने की वजह से उनकी बड़ी ब्रा में से उनके चुचे देखे जा सकते थे...

दया तो नॉर्मल थी..बट उसकी ब्रा कुछ थिन टाइप की थी..इसलिए उसके हल्के

ब्राउन कलर के निपल दिख रहे थे.....

 
माधवी और रीता....दोनो अपने चुचों के उपर हाथ रख के खड़ी थी...

गीली होने की वजह से उनकी बड़ी ब्रा में से उनके चुचे देखे जा सकते थे...

दया तो नॉर्मल थी..बट उसकी ब्रा कुछ थिन टाइप की थी..इसलिए उसके हल्के

ब्राउन कलर के निपल दिख रहे थे.....

अब स्वीमिंग पूल में काफ़ी ज़्यादा लोग हो गये थे...

मतलब पानी कम और लोग ज़्यादा नज़र आ रहे थे...गर्मी अपने पूरे उफान पे आ

चुकी थी....सूरज सर चढ़ के बोल रहा था.....

इसलिए गर्मी से बचने के लिए सभी स्वीमिंग पूल के अंदर थे.....

थोड़ा कार्यक्रम को आगे बदाते हुए.......

महॉल कुछ बदल सा गया......

ऐसा नही कि वहाँ पे हॉटनेस्स ख्तम हो गई थी...

अभी भी एक से एक आइटम वहाँ मौजूद थी...बल्कि और ज़्यादा बढ़ गयी थी..

कचा कच भरा हुआ था पूल...

बस फ़र्क इतना था...कि लोग अलग अलग बँट गये थे..गोकुलधाम के...

और वो कुछ इस प्रकार के थे...

एक तरफ कोने में तारक और सोढी खड़े थे..जो आपस में बात कर रहे थे..

तारक :- भाई सोढी...मज़े तो मोहन भाई के हैं...ऐश ही ऐश...

सोढी :- सही कहा मेहता साब...कोई टेन्षन ही नही है..

तारक :- हाँ...शादी करी है नही...मस्त रिज़ॉर्ट बना रखा है...और देखो

कैसे मज़े लिए जा रहे हैं..कोई रोकने टोकने वाला ही नही है.....

सोढी :- मेहता साब...वो तो है ही..लेकिन देखो साथ में अब्दुल प्रा...

भी लगे हुए हैं...

तारक :- हाँ भाई क्यूँ ना हो..उसकी भी तो शादी नही हुई है...

जो मज़े करे...देखो कैसे उछल रहा है.....

जी ये दोनो इसलिए जल रहे थे मोहन लाल और अब्दुल से..क्यूँ की...

उनके सामने वाली साइड पे...मोहन लाल...एक आजू बाजू...मस्त मस्त एक दम सेक्सी..

गोरी चिटी..पूरी देसी माल.. था...एक राइट साइड..एक लेफ्ट साइड...एक दो आगे...

एक दो अब्दुल के साथ...

सबके सब एक से बढ़ कर एक....छोटी छोटी ब्रा में..अपने चुचे दिखाते हुए..

और चिपक के ऐसे खड़ी थी..जैसे जान बुझ कर अपना दबावा रही हों..

और कुछ तो..कई बार...बार बार.. नीचे पानी के अंदर जाती..थोड़ी देर रहती ..

और फिर बाहर आ जाती...

मेरे ख्याल से पक्का लंड से मज़े ले रही होंगी...हहेहेः...

अक्सर होता है भीड़ भाड़ वाले पूल के अंदर...

 
दूसरी साइड....बबिता...माधवी और दया..को थोड़ी सी स्वीमिंग सीखने की कॉसिश कर रही

थी....

और एक आदमी की नज़र सिर्फ़ बबीता पर अटकी पड़ी थी...

सब ही जानते हैं.....

जेठालाल...ऐज यूषुयल....

जेठालाल ठीक बबीता के सामने...पूल की दीवार से टेक लगा के खड़ा था..

और अपने आप से..

जेठालाल :- बबीता जी...आप तो इस वक़्त जलपरी लग रहे हो...

मुझे भी सीखनी है आपसे स्वीमिंग...

और वो आगे बढ़ने ही लगता है...

उसे एक दम से एक बात याद आती है..

जी हाँ ट्रेन वाली बात...

जेठालाल अपने आप से..

में तो भूल ही गया...मुझे मेहता साब से वो वाली बात करनी है..

कहाँ है मेहता साब...

और वो अपनी गर्दन इधर उधर घुमा के देख लेता है तारक को..

जेठालाल :- वो रहे...चलो चलते हैं...

(बॅक ग्राउंड म्यूजिक......... फ्लश चलने की आवाज़..)

उधर अंजलि और रोशन पानी में स्वीमिंग कर रही थी...

अंजलि तो कयामत ढा रही थी..तैरती हुई....गान्ड पानी के उपर नज़र आ रही थी..

और उसकी तैरने की वजह से वहाँ पूल में खड़े कई लड़कों के तो मज़े ही

आ गये ... बार बार अंजलि का शरीर उनसे टच हो रहा था...

लोग ही इतने सारे थे वहाँ पर.....

 
जेठालाल पहुच जाता है...मेहता साब के साथ...

लेकिन बात कैसे करता..सोढी जो खड़ा था उसके पास.

जेठालाल :- अपने आप से..... ओफू..ये सोढी को कैसे भगाऊ यहाँ से..

आइडिया..

जेठालाल :- ऊ सोढी...तू यहाँ खड़ा है..

सोढी :- क्यूँ जेठा प्रा..यहाँ खड़ा होना मना है..

जेठालाल :- नही भाई....वो उधर रोशन भाभी तुझे याद कर रही है..इसलिए बोला.

सोढी :- ऊ की गल कर रहे हूओ..अभी जाता हूँ..

जेठालाल :- हाँ भाई जा जा...

और सोढी वहाँ से निकल जाता है...रोशन के पास..जानने के लिए....

तारक :- हाँ भाई जेठालाल...कहाँ आग लग गई है इस बार..

जेठालाल :- हाथ जोड़ते हुई...मेहता साब..आप तो ग्यानि महात्मा है...

आपको कैसे पता कि आग लगी है..

तारक :- भाई शक्ल देखी है.. अपनी... 12 बजे हुए हैं..इतनी बड़ी जगह पर भी..

जहाँ आराम से बैठ कर घन्टो आँखें सेक सकते हैं अपनी..

जेठालाल :- मेहता साब...इस बार जो आग लगी है..उसके लिए इस स्वीमनग़ पूल का

पानी भी नही भुजा पाएगा....

तारक :- तो फिर भाई..में कैसे भुजाउंगा..

जेठालाल :- मेहता साब...आप तो मेरे फाइयर बिग्रेड हो..आपको तो भुजानी ही पड़ेगी..

तारक :- लेकिन भाई....हुआ क्या है..वो तो बताओ...

जेठालाल :- हुआ यूँ ट्रेन में...........................

और पूरा हाल बताता है...

(बॅक ग्राउंड म्यूज़िक... तबले जैसी आवाज़...)

तारक जेठालाल की कहानी सुनने के बाद......

तारक :- क्य्ाआआआआआआआअ....

ऑलमोस्ट चौंकते हुए.....

जेठालाल :- ष्ह..आराम से मेहता साब....

तारक :- लेकिन जेठालाल तुम्हे पता है ना..क्या हुआ है..

जेठालाल :- मेहता साब...आप अपना भाषण देना करो..

और कुछ करो..

तारक :- जेठालाल...इस बार तुम्हरी ज़िंदगी में आग नही लगी है...

पूरा का पूरा ज्वाला मुखी फटा है....

जेठालाल :- में सब जानता हूँ मेहता साब....अब आप कृपया कर के..कुछ

सोचिए..

तारक :- ठीक है..रिलॅक्स...तुमने दया भाभी से पूछा कि आप किस की जगह सोई..

जेठालाल :- नही...

तारक :- ले...तो पूछो ना..

जेठालाल :- मेहता साब..दया हज़ारो सवाल करती है..मेरे मुँह से अगर कुछ निकल

गया तो मेरी बॅंड बज जाएगी..

 
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