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Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

तारक :- बॅंड तो तुम्हारी अभी भी बजी ही हुई है....हहे..

सॉरी हाँ...

जेठालाल :- आपको मज़ाक सूझ रहा है...

तारक :- अरे भाई..तुम एक बार पूछ के तो देखो ज़रा..आराम से...ऐसे ही बातों बातों

में पुछोगे तो ध्यान भी नही ज़्यादा देंगी दया भाभी..

जेठालाल :- ठीक है मेहता साब..अगर आप बोल रहे हो तो एक बार पूछ लेता हूँ..

लेकिन मेहता साब...दया की जगह जो कोई और भी है...तो उसने क्यूँ कुछ नही

बोला....

तारक :- ह्म ये बात तो बिल्कुल सही है...एक बार सब फेस पे देखते हैं...किसी के

फेस से कुछ तो पता चेलगा..

जेठालाल :- मेने ट्रेन में वो सब करा..लेकिन तब भी मुझे कुछ नही पता चला..

एक बार आप ट्राइ कीजिए...

तारक :- ह्म ओके..

और फिर तारक बारी बारी से...सबके फेस चेक करता है..

लेकिन किसी के चेहरे पर..कोई भी ऐसे एक्सप्रेशन नही थी...जिससे कुछ पता चल सके..

तारक :- नही जेठालाल....कुछ नही पता चल रहा...

तुम कुछ सोचो...कुछ ऐसा हिंट..जिससे हम पता लगा सकें..कि वो कौन है...

जेठालाल :- मेहता साब..कुछ भी याद नही है ....

तारक :- चलो कोई नही..टेंशन मत लो..ठीक हो जाएगा...

तुम दया भाभी से बात करो...

जेठालाल :- ठीक है मेहता साब......

और जेठालाल दया से मिलने चल देता है.....जो बबीता के साथ थी....

लेकिन जैसे ही वो वहाँ पौच्ाहता है...और बबीता के सामने आता है...

वो सब कुछ भूल जाता है..कि दया से कोई बात करनी है....

जेठालाल :- बबीता जी......

बबीता :- ओह्ह हेलो जेठा जी..

जेठालाल :- बबीता जी...आप आज बहुत अच्छे लग रहे हैं..

बबीता :- ओह्ह थॅंक यू सो मच..

जेठालाल :- तो स्विमंग सिखाई जा रही है...

मुझे नही सिखाएँगी...

बबीता :- ओह्ह क्यूँ नही..आइए..आप भी आइए...

 
उधर अईयर जेठालाल को बबीता के साथ जल फुक गया...

वो फटफट बबीता के पास पहुचता है..

अईयर :- बबीता .. जेठालाल को स्वीमिंग सिखाने की क्या जरूरत है...

बबीता :- व्हाट अईयर?

अईयर :- आइ मीन..जेठालाल तुम क्या करोगे सीख के...तुम्हारी कोई उमर थोड़ी है

स्वीमिंग सीखने की...

जेठालाल :- अईयर भाई सीखने की कोई उमर नही होती...क्यूँ है ना बबीता जी..

बबीता :- यस..अईयर .. जेठा जी ईज़ करेक्ट...

(बॅक ग्राउंड म्यूज़िक ..... आई छोरि.......)

अईयर मन में....ये जेठालाल भी ना..

जेठालाल अपने मन में..अईयर भाई..लगता है अभी भी आपको सबक नही मिला है..

अभी चढ्ढी तो मेने आपकी गायब कर दी है....अब अप क्या अपनी इज़्ज़त का भी

फालूदा करना चाहते हो क्या....

ये क्या जेठालाल के कहने का क्या मतलब...ये चढ्ढी वाला...हाहहः...

क्या इसमे भी कोई जेठालाल की चाल थी...

वी विल सी इन नेक्स्ट अपडेट......

 
जेठालाल बबीता से स्वीमिंग सीखने के लिया आ गया था...और बबिता

उसे सिखाने के लिए तैयार थी...

लेकिन अईयर भाई ना खुश थे....

वो उसे रोकने में लगा हुआ था....

जेठालाल :- बबीता जी... आपको में अभी देख रहा था..आप दया...और माधवी

भाभी..को स्विमंग सिखा रहे थे...

बहुत अच्छा स्विमंग सिखाते हैं आप...

बबीता :- ओह्ह थॅंक यू सो मच जेठा जी..

अईयर :- तुम सीखने में दिमाग़ लगाओ जेठालाल...फालतू बात मत करो..

जेठालाल :- अईयर भाई..आपको ज़्यादा जल्दी है .. तो आप पहले सीख लो...

(बॅक ग्राउंड म्यूजिक...... शेर के दहाड़ने की आवाज़....)

अईयर :- जेठालाल आइ आम साइंटिस्ट.....

जेठालाल :- तो क्या आप अपनी दुकान में...तैरते हैं....हहहहहाः..

बबीता भी हँसने लगती है..

अईयर तो कलप जाता है बुरी तरह......

अईयर :- जेठालाल उसे दुकान नही...लॅब कहते हैं...

और मेरे कहने का मतलब है...कि में साइंटिस्ट हूँ..तो मुझे स्वीमिंग तो आएगी ही..

जेठालाल :- अच्छा ये ज़रूरी है...कि हर साइंटिस्ट को स्विमंग आती है..

अईयर :- हाँ...

जेठालाल :- पक्का आती है...

अईयर :- हाँ भाई..हाँ...तुम्हे कोई प्राब्लम है..

जेठालाल :- अच्छा तो फिर आप कर के आओ....

बबीता :- या ट्त्ट्स दा बेस्ट आइडिया...कमोन अईयर यू स्विम..

अब बज गई अईयर की बॅंड...कैसे करे स्वीमिंग....

स्वीमिंग में तो अपना नीचे वाला शरीर तो उपर करना ही पड़ता है...

अब अईयर कैसे करेगा..हाहहः..

जेठालाल अपने मन में...अईयर इडली..अब मज़ा आएगा...

कर अब स्वीमिंग...

अईयर अपने मन में..

ओफू ये कैसे फस गया में...अब क्या करूँ...

अईयर :- बबिता...में एक मिनट में आया...वो सोढी मुझे बुला रहा है...

जेठालाल :- किधर बुला रहा है....मुझे तो आवाज़ नही आई..

बबीता :- या एग्ज़ॅक्ट्ली मुझे भी नही आई...

जेठालाल तो पूरे मूड में था....आज अईयर की बॅंड बजाने को...

अईयर :- चलता हुआ..वो इशारे से बुलाया..अभी आता हूँ..

और अईयर वहाँ से चला जाता है....

 
जेठालाल अपने मन में.....अईयर एक कची मानुष से टकराया तो चूर चूर

हो जाएगा.....

बबीता :- जेठा जी क्या सोच रहे हैं आप....

जेठालाल अपने आप से बाहर आते हुए.....

जेठालाल :- कुछ नही बबीता जी...

तो अब शुरू करें..

बबीता :- या स्योर..

अच्छा आप पहले अपने दोनो हाथ..आगे की तरफ कीजिए....

और फिर बबीता जेठालाल को स्वीमिंग सिखाने लगती है.....

काफ़ी मेहनत के बाद.....

थोड़ा आगे बढ़ते हैं..देखते हैं जेठालाल कहाँ तक पहुँचे...

जेठालाल के बस हाथ आगे जा रहे थे...पैर उपर नही हो रहे थे...

बबीता :- वेट..में नीचे जाके..आपके पैर उपर करती हूँ...

जेठालाल :- ठीक है बबीता जी..

और फिर बबीता पानी के अंदर चली जाती है...

नीचे जाके जेठालाल का पैर उपर करने लगती है..और पैर उपर करते करते..

जेठालाल का पैर बबीता के चुचों के अंदर घुस जाता है...

एक बार तो बबीता का बुरा हाल हो जाता है..

लेकिन वो अपने आप को संभालते हुए...उपर कर लेती है जेठालाल का पैर....

लेकिन वो जैसे ही पैर उपर करी..जेठालाल आगे से डूब गया...

हाहहहहः...क्या मस्त सीन था....

बबीता :- ओह्ह जेठा जी....ओह..

फिर बबीता उसका पैर छोड़ के....नीचे जेठालाल के पास पानी के अंदर पहुच जाती

है...

अंदर जेठालाल छटपटा रहा था.....

बबीता उसके पास पहुचती है....

जेठालाल हाथ चला रहा था..जब बबीता उसके पास पहुचि..तो उसके हाथ..

बबीता के चुचो पे ज़ोर ज़ोर से लग रहे थे....

बबीता को ऐसा लग रहा था..जैसे कोई उसके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबा रहा हूँ..

जेठालाल आगे बाद के..बबीता को कस के पकड़ लेता है....

बबीता :- जेठा जी...शांत हो जाइए.....

जेठालाल शांत होता है..और देखता है...कि वो किस हालत में था...

जेठालाल का एक हाथ बबीता के एक बूब्स पर था...दूसरा नंगी कमर पे..

और अपनी टाँग..बबीता की टाँग से मिला रखा था...

जेठालाल ऐसी हालत देख के फ़ौरन पीछे हटता है...

बबीता का चेहरा बिल्कुल लाल पड़ा था.....

 
जेठालाल :- सॉरी बबीता जी..वो पता नही चला...

बबीता :- इट्स ओके जेठा जी...

चलिए दुबारा शुरू करते हैं..

जेठालाल :- रहने दीजिए बबीता जी....इस वक़्त हम ऐसे ही मज़े ले लेते हैं..फिर

कभी करेंगे....

जेठालाल का जवाब कुछ दूसरी टोन में था.....

डबल मीनिंग आन्सर दिया था जेठालाल ने...

बबीता :- क्या??

जेठालाल :- मेरा मतलब है..फिर कभी सीख लेंगे स्विमंग..में जब तक आपको देख

लूँ स्विमंग करते हुए..

बबीता ब्लश होते हुए....ओह आप भी ना जेठा जी..

माधवी :- बबीता जी....इधर आइए...

माधवी बबीता को आवाज़ लगाती है...और जेठालाल को बाइ बोल के उधर की तरफ चल

देती है..

जेठालाल अपने मन में....

बबीता जी...आप तो आज अफ़सर लग रही हैं...

वो इसलिए बोला..जब बबीता पीछे मूड के जाने लगी..तो उसकी न्यूड बॅक देख के

जेठालाल का लंड अकड़ गया नीचे से....

तभी जेठालाल को आवाज़ आती है...और जेठालाल पीछे मुड़ता है..

तारक :- जेठालाल बात हुई दया भाभी से..

जेठालाल :- ओफू..भूल ही गया..

तारक :- क्या...जेठालाल तुम भी कमाल हो..इतनी देर से यहाँ खड़े हो..और अभी

तक बात नही की...

जेठालाल :- वो मेहता साब...बबीता जी यहाँ थी..तो

तारक :- बॅस...बबीता जी को देख के...तुम्हारी सिटी पिट्टी गुल हो जाती है..

जेठालाल :- क्या करूँ मेहता साब....

वैसे भी आज गजब की लग रही है...

तारक :- तुम्हारा कुछ नही हो सकता....

 
उधर अंजलि और रोशन खड़े थे......

दूसरी तरफ से किसी की नज़र उन दोनो पर ही थी...

वो आदमी...अंडरग्राउंड....स्विंग करते हुए..उनकी तरफ बढ़ रहा था......

वो दोनो आपस में बातें कर रही थी....

अंजलि की बूब्स पानी के उपर थी...गीले होने की वजह से उसकी

स्किन चिपक रही थी...

रोशन भी कमाल की लग रही थी...उसकी ढीली ब्रा...एक तरफ से हट गई थी..

जिस बात का अंदाज़ा उसे नही था...

और उसके आधे बूबे के दर्शन हो रहे थे...

तभी एक अहह...निकली.......

क्या हुआ अंजलि भाभी.....

जी हाँ ये आहह अंजलि की निकली थी..

अंजलि :- अभी अभी..किसी ने...

रोशन :- किसी ने क्या.

अंजलि धीरे से रोशन के कान में...

अंजलि :- मेरी पुसी को कस के दबा दिया...

रोशन :- क्या....अंजलि भाभी..में अभी किसी को बताती हूँ..

अंजलि :- नही रोशन भाभी...बेकार में तमाशा बनेगा....

और यहाँ इतने सारे जने हैं..पता ही नही चलेगा किसने किया है....

रोशन :- हाँ ये भी ठीक है....अहह ओह.....

अंजलि :- क्या हुआ रोशन भाभी..

रोशन :- अंजलि भाभी..मेरे साथ भी..

अंजलि :- 1 मिनट में नीचे जाके देखती हूँ..

और फिर अंजलि पानी के अंदर देखने की कॉसिश करती है..लेकिन लोगों

के पैरों के अलावा कुछ नज़र नही आता है....

अंजलि बाहर आती हुई..

अंजलि :- कोई नही दिखा रोशन भाभी..

रोशन :- अंजलि भाभी...क्या आपकी भी उसने पुसी..टच की..

अंजलि :- हाँ..बट पैंटी के उपर से..

रोशन :- ऊ कूडीए..मेरी तो ..मेरी तो..

अंजलि :- मेरी तो क्या??

रोशन :- मेरी तो उसने पुसी को बहुत ज़ोर से दबा दिया..

अंजलि :- व्हाट..वो कैसे...

रोशन :- वो मेरी पैंटी थोड़ी लूज है..और पानी की वजह से फूल गई अंदर..

इसी वजह से..

अंजलि :- ओह्ह गॉड..ये क्या हो गया..

रोशन भाभी..हमे चुप रहना है..किसी को नही बातएंगी..कि क्या हुआ

हमारे साथ...

 
दूसरी तरफ.....

तारक अंजलि को देख रहा था....और उसके पास जा रहा था...

अईयर और सोढी आपस में बात कर रहे थे....और अब्दुल और मोहन लाल को देख

रहे थे....

अब्दुल और मोहन लाल की शक्ल देख कुछ अजीब लग रहा था दोनो को..

अईयर :- सोढी...ये अब्दुल और मोहन भाई..तुमको कुछ अजीब नही लग रहे..

सोढी :- हाँ ये बात तो सही है....लेकिन ऐसा क्यूँ..कुछ समझ नही आ रहा है यार..

अब इन्हे क्या पता क्या हो रहा है...

लेकिन मुझे तो पता है ना...

तो चलीए बता देता हूँ....

अब्दुल के बगल में जो दो लड़कियाँ खड़ी थी...वो उपर सो तो नॉर्मल ही थी...

लेकिन पानी के नीचे ..ह्म....उनके मिज़ाज़ कुछ अलग ही थे..

जी हाँ...नीचे उन दोनो लड़कियों के हाथ अब्दुल के लंड को ज़ोर ज़ोर से

हिला रहे थे....

अब्दुल बेशक हाइट में छोटा हो..लेकिन आप सब जानते ही हैं.कि कैसे...

उसने माधवी की गान्ड और चूत फाडी थी..जिसका पता आज तक नही पता....किसी को...

दोनो फिरंगी..अब्दुल के लंड को तेज़ तेज़ हिला रही थी...उसका मूठ मार रही थी....

उपर अब्दुल का बुरा हाल..था..उसके शक्ल पे इस वक़्त ये भाव थे...कि वो जन्नत

की सैर कर रहा हू.... और वो कर भी रहा था...

और करे भी क्यूँ ना.....जब दो गरम हाथ...गरम लंड पे..ठंडे पानी..के

अंदर उसे छुए..तो कोई भी जन्नत ही देखेगा....

उन दोनो फिरंगियो की स्पीड अब्दुल के तने लंड पे तेज़ी से चल रहे थे...

और वो उन्हे ज़ोर ज़ोर से हिला रही थी....

और कुछ हे पल बाद..

अब्दुल :- हाई..... आ******...अहह..मज़ा आ गया...

अब्दुल ने अपना सफेद पानी..इस डार्क कलर के पूल के पानी में मिक्स कर दिया..

और चैन की सांस ली...

 
दूसरी तरफ मोहन लाल के इर्द गिर्द 4 लड़कियाँ थी..

ये भाई साब तो बहुत हे ज़्यादा शौकीन लगते हैं...

4 फिरंगियाँ....

इधर भी हालात कुछ ऐसे ही थे..

बस फ़र्क इतना था..कि इस वक़्त 4 हाथ चल रहे थे मोहन लाल के लंड पे...

जिसके कारण मोहन लाल का बुरा हाल था...

उसकी शक्ल ऐसी हो रखी थी.....जैसी किसी कुत्ते के आगे...दर्जनो हड़ियाँ एक साथ

रख दी हो...और वो उन्हे खाने में टूटा पड़ा है....

एक फ़र्क और था..मोहन लाल के साथ....2 फिरगियन जो उसकी बगल में ही खड़ी थी..

उनके फेस पर भी मदहोशी थी...

अब समझदार समझ गये होंगे...

मोहन लाल ने अपने दोनो हाथों से...3 उंगलिया दोनो चुतो में घुसा

रही थी..और उन्हे बड़ी तेज़ी से अंदर बाहर कर रहा था....

स्वीमिंग के इस तरफ महॉल काफ़ी गरम था.....

उंगलियाँ फिरंगियो...की सफेद बिना बाल की चूत के अंदर बाहर इतनी तेज़..

हो रही थी...कि कुछ ही मिनट में वो दोनो फिरंगिनिया..

अहह..उूुुुुुुउउ...करते हुए झड गई....

अब मोहन लाल से बर्दास्त करना मुश्किल हो गया था....

इसलिए..वो भी..

मोहन लाल :- आईए.......अहह..ओह.....आइईए...

करते हुए अपना सारा रस पानी में भर दिया...

पानी छोड़ने के बाद..उसे ऐसा लगा जैसे कोई भारी बोझ उसके शरीर से उठा

लिया हो.....

 
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