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Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

उधर भिड़े रोशन के बगल में खड़ा डॅन्स कर रहा था....और वो यहाँ सोढी की

तरह नही कर रहा था....बल्कि जान बुझ के टच करने के चक्कर में था....

जान बुझ के माधवी की तरफ घूम गया...जिससे भिड़े की गान्ड..रोशन की गान्ड से

टकरा रही थी......रोशन को एक पल के लिए कुछ अजीब लगा...लेकिन फिर उसने इग्नोर

करते हुए डॅन्स शुरू कर दिया...लेकिन भिड़े तो आज फुल मूड में मौके का

फ़ायदा उठाना चाहते था...इसलिए वो पीछे होते हुए..रोशन से चिपके जा रही थी...

रोशन कुछ बोल नही पा रही थी.....

इधर जेठालाल की नज़र तो बबीता जी पर ही थी..बेचारा उससे टच तो नही कर पा

रहा था..क्यूँ कि बीच में कबाब की हड्डी की तरह खड़ा अईयर जो था...

जेठालाल की नज़र बबीता के उन बड़े ह्यूज्ली साइज़ वाले बूब्स पे थी..जो उसके

स्टार्पलेस्स गाउन में से बाहर की तरफ जंप मार मार के उछल रहे थे...

जैसे अभी अंदर से निकलके बाहर आ जाएँगी...जेठालाल के लंड की तो

बुरी हालत थी......

लेकन सभी फुल मस्ती में डॅन्स कर रहे थे...आज किसी को भी दुनिया दारी कुछ

याद नही था...सब अपनी धुन में थी......

कुछ देर डॅन्स करने के बाद...

सारे लोग थक गये थे....और जाके वहाँ सोफे पे बैठ गये थे....

सबकी साँसें उपर नीचे हो रही थी.....

सभी लॅडीस के बूब्स बहुत ही तेज़ी के साथ उपर नीचे हो रहे थे....

लेकिन देखने में सबसे मस्त तो माधवी और बबीता के लग रही थी..उनकी ड्रेस

ही ऐसी थी..कि सबसे ज़्यादा एक्सपोज़ उनके बूब्स का ही था.....

लेकिन यहाँ कुछ मिस्सिंग लग रहा है...अरे हाँ यार...यहाँ तो फिर तीन जने

मिस्सिंग है...मोहन लाल अब्दुल और रीता...यार ये तीनों कहाँ गायब हो जाते हैं

हर थोड़ी देर में...

खैर इन तीनो में थोड़ी देर बाद अपनी दूरबीन से खोज लूँगा..आख़िर बच के

जाएँगे कहाँ.....

सोढी :- एक्सक्यूस मी..

तभी वहाँ से एक फीमेल सुंदर सी छोटी सी थी...आती है..

 
मे आइ हेल्प यू सर..

सोढी :- यस...प्लीज़ एक एक आप गोआ की सोएसियाल ड्रिंक पिला दो..

रोशन :- रोशन...मना किया है ना ज़्यादा नही पीनी है...

सोढी :- रोशन मेरी जान..अभी तो हमे सिर्फ़ एक ही पॅक पिया है..

जेठालाल :- और रोशन भाभी...अब गोआ आए हैं..और यहाँ की कोई पेशल चीज़ ना पिए

तो फिर मज़ा किस बात का... (जेठालाल का मतलब है स्पेशल )

तारक :- हाँ और अंजलि अब रोज़ रोज़ थोड़ी ना पिएँगे प्लीज़ यार...

भिड़े :- प्लीज़ माधवी..

लॅडीस कुछ देर सोचती है..

अंजलि :- ओके..लेकिन सिर्फ़ 1 ग्लास...

सभी जेंट्स का थोड़ा मूड खराब होता है लेकिन सब सोचते हैं ना से तो 1

ग्लास ही सही...

तभी उधर..बबीता कुछ फुसफुसाती है..अंजलि के कान में...पहले तो अंजलि मना

करती है..लेकिन बबीता के ज़ोर देने पर...फिर वो मान जाती है..और सबको बोलती है..

दया सबसे पहले..

दया :- हे माँ माताजी....ये आप क्या बोल रही है अंजलि भाभी..

रोशन :- हाँ रे हाँ अंजलि भाभी..ये नही हो सकता बावा...

माधवी :- हाँ...सही बात है..

अंजलि :- देखा बबीता जी..मेने आपको कहा था ना..

इधर जेंट्स...जो उनके सामने बैठे थे...

जेठालाल :- मेहता साब..ये लोग क्या बात कर रहे हैं..

तारक :- क्या पता जेठालाल...

उधर..लॅडीस की तरफ...

बबीता :- प्लीज़ ना क्या आप भी....

और फिर समझाने लगती है..10 या 15 मिनट तक कुछ बोलती रहती है..

बबीता :- प्लीज़ ना इससे कोई फ़र्क नही पड़ता आइ नो...

सब बबीता के इतना कहने पर हाँ कर देते हैं.....

अंजलि :- तारक...मुझे कुछ कहना है..वो बोलते हुए डर रही थी...

तारक :- हाँ बोलो..

अंजलि :- वो हम सब लॅडीस ने फ़ैसला किया है..कि हम सब भी वो गोआ स्पेशल

ट्राइ करना चाहती हैं..

तारक :- क्या...

\

तारक के साथ सभी यही बोलते हैं..

 
अईयर :- लेकिन बबीता तुम ये कैसे ट्राइ कर सकती हो..नो आइ डोंट अग्री..

भिड़े:- माधवी....तुम और यी..छी छी..

सोढी :- रोशन मेरी जान... तू मुझे ही मना करती है..और खुद ही कमाल है..

नही तू नही पी सकती .....

अंजलि :- लेकिन तारक आप लोग भी तो कर रहे हैं एंजाय...तो हम भी एक बार तो कर

ही सकते हैं..

बबीता :- और नही तो क्या....वी ऑल कम हियर फॉर फन...व्हाट अईयर तुम क्यूँ मना कर

रहे हो..खुद मत पियो फिर...

अईयर :- बबीता आइ डोंट अग्री वित दिस पॉइंट..

जेठालाल :- क्या अग्री अग्री लगा रखी है अईयर भाई..बबीता जी ठीक बोल रही है...

सभी जेठालाल की तरफ घूरते हैं.....

तारक :- तुम्हे पता भी है...तुम क्या बोल रहे हो जेठालाल..

जेठालाल सबको पास में कर के..अरे मेहता साब..ये अच्छा मौका है..इससे हम

सब 2 या 3 ग्लास गटक जाएँगे..पता भी नही चलेगा...ये अईयर भाई तो समझते नही है..

कब से अग्री की पीपूड़ी बजा रहे हैं..

तारक :- राइट जेठालाल ..

भिड़े :- मस्त आइडिया है..

सोढी :- अरे वाडा मज़ाज़ा आएगा..हहेहेः...

तारक :- अच्छा अंजलि तुम सब भी ट्राइ कर सकते हो..यू आर राइट..तुम सब भी यहाँ एंजाय करने

आए हो..तो यू कॅन..

ईएहह......सभी लॅडीस खुश हो जाती है...

और फिर सोढी ऑर्डर दे देता है..

यार चलो इन तीनो को भी ढूँढ लेते हैं.....

अरे कहाँ है....कसीनो में भी नही दिख रही...बार में भी नही है.....

डॅन्स फ्लोर पे तो है ही नही...

लगता है..कहीं स्पेशल जगह गये हैं..आराम से बाद में ढूंढूंगा...

अभी फिलहाल थक गया हूँ...

 
यार चलो इन तीनो को भी ढूँढ लेते हैं.....

अरे कहाँ है....कसीनो में भी नही दिख रही...बार में भी नही है.....

डॅन्स फ्लोर पे तो है ही नही...

लगता है..कहीं स्पेशल जगह गये हैं..आराम से बाद में ढूंढूंगा...

अभी फिलहाल थक गया हूँ...

ड्रिंक्स आ चुकी थी......सबके हाथ में एक एक ग्लास पकड़ा दिया गया था..

जेंट्स तो बहुत खुश नज़र आ रहे थे...उधर लॅडीस में एक्षसितमेंट थी....

और थोड़ा डर भी था..दया और माधवी में ज़्यादा....

सबने चियर्स करी.......और जेंट्स तो हैं ही इन सब काम में आगे...

तो उन्होने तो गटक लिया आधा ग्लास एक ही बार में..

जेठालाल :- चलो दया पियो.....पियो पियो..

दया :- हान्ंनननननननणणन्....

और फिर ग्लास को होंठो पे रख के थोड़ी सी सीप लेती है...

छ्चीई हाए हाई.....कितनी कड़वी है....में नही पी सकती...दया बोलती है..

जेठालाल :- हाहहहः..हमने तभी तो कहा था कि तुम सब नही पी पाओगी...

भिड़े :- अरे ये सब औरतें नही पी सकती...हाहहहहा...

सभी जेंट्स हँसने लगते हैं.....

बबीता :- दया भाभी..माधवी भाभी...अब तो हम लॅडीस की इज़्ज़त का सवाल हो गया

है...अब तो पीनी ही पड़ेगी इन सबको बताने के लिए..कि हम सब कुछ भी कर सकती है..

दया :- हाँ बबीता जी...अब तो इन्हे दिखाना ही पड़ेगा...मेरी माँ भी यही कहती है.

कि कभी किसी के सामने अपने घुटने नही टेकने चाहिए..

जेठालाल :- क्यूँ क्या बात हो रही है....निकल गयी हवा सबकी..क्यूँ दया..रहने दे

भाई..तुमसे नही होगा....

बबीता :- अच्छा...जेठा जी..आप इतने श्योर हैं..

जेठालाल हड़बड़ाते हुए..नही नही..बबीता जी..में तो दया की बात कर रहा हूँ...आप तो

कर लोगे मुझे पता है...

दया :- टप्पू के पापा में भी कर सकती हूँ....

जेठालाल :- हुहह...देखते हैं..

दया :- तो चलो बहनो...आज इनको दिखाते हैं....

और फिर सभी लॅडीस चीरसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स...करती है....और मुँह से ग्लास लगाती है...

और गट गट गट...करके......आहह..सबके मुँह से यही निकलता है..

सामने जेंट्स के तो मुँह खुल जाते हैं...क्यूँ कि लॅडीस ने तो एक ही बार में पूरा

का पूरा ग्लास खाली कर दिया होता है......

इधर जेंट्स को भी जोश चढ़ गया और सबने अपना बाकी बचा हुआ ग्लास भी खाली

कर दिया....

 
इधर जेंट्स को भी जोश चढ़ गया और सबने अपना बाकी बचा हुआ ग्लास भी खाली

कर दिया....

कुछ देर शांति बनी रही...सभी वहाँ आराम से बैठ गयी...और एक दूसरे को देखने

लाग्गे...सच में सार जेंट्स का तो पोपट ही हो गया.....

तब तक चलीए में आप सबको ले चलता हूँ....खोए हुए सदस्यों के पास...मेने अपनी

दूरबीन से खोज लिया है उन्हे....और सही बोलों तो बहुत घप्ला है भाई....मेरी तो

आँखें फट गई थी..जब मेने दूरबीन से देखा तो....

इस क्लब या लौन जो भी बोल लूँ...उसके आगे चलिए तो कोने में 2 रूम्स बने थे

ज़्यादा सोचने की ज़रूरत नही है...ये कोई सेक्स रूम नही थी..हमेशा उल्टी सोच हद है

हर टाइम सेक्स...छी.......

अरे भाई 2 रूम्स थे मतलब .. 2 वॉशरूम ... एक लॅडीस और एक जेंट्स....

जेंट्स वासरूम में ना ना ना....वहाँ नही जाना....बाहर निकलो वहाँ से....

लॅडीस वॉशरूम.......!!

थोड़ा सा बता दूं..कैसा है वॉशरूम फिर आसानी होगी....एक लंबा सा कमरा था..

जिसमे एक वॉल पे मिरर लगा हुआ था..और उसके नीचे वॉशबेसिन...और ठीक सामने

कॅबिन बने हुए थे...समझ गये ना..कि अब उसके अंदर की भी डीटेल दूं...

तो अंदर केबिन में रीता अभी टाय्लेट कर के उठी थी..और अपनी ड्रेस ठीक कर की

उस कॅबिन का दरवाजा खोलती है..और बाहर निकलती है...

जैसी ही बाहर निलकती है..पीछे से किसी का हाथ आके उसकी कमर को पकड़ लेता है...

पहले तो वो घबरा जाती है...लेकिन तभी सामने मिरर में देख लेती है....

रीता :- मोहन भाई आप....और आपने मुझे क्यूँ पकड़ रखा है...

 
उस कॅबिन का दरवाजा खोलती है..और बाहर निकलती है...

जैसी ही बाहर निलकती है..पीछे से किसी का हाथ आके उसकी कमर को पकड़ लेता है...

पहले तो वो घबरा जाती है...लेकिन तभी सामने मिरर में देख लेती है....

रीता :- मोहन भाई आप....और आपने मुझे क्यूँ पकड़ रखा है...

मोहन लाल रीता को अपने से चिपका के...अरे मेरी जान..इतने अच्छे माल को कोई

कैसे छोड़ सकता है...

रीता :- मोहन भाई..नही प्लीज़ ये ग़लत है....छोड़िए...

मोहन लाल अपने होंठ रीता के पीछे से उसकी नंगी पीठ और नेक पे चलाने लगता है..

रीता :- मेने कहा छोड़िए मुझे.....नही तो अब में चिल्लाउन्गी...

मोहन लाल रीता को आगे की तरफ धकेल देता है..

मोहन लाल :- चिल्ला...में भी देखता हूँ....

रीता कुछ नही बोलती और मोहन लाल की तरफ देख के मूड जाती है...

मोहन लाल :- रीता देख नखरे क्यूँ कर रही है..मुझे पता है .. तेरी चूत कितनी

प्यासी है....

रीता मोहन लाल की बात को सुन के चौंक जाती है....

मोहन लाल :- ऐसे क्या चौंक रही है....मुझे तेरी वो स्वीमिंग पूल वाली हरकत के

बारे में भी पता है...

रीता सकपका जाती है..... कुउऊँ...स..सी....स्विवीमिंग...पूल..वा..ल.ई बा.त....

मोहन लाल :- हाहहाहा...अरे ज़्यादा नाटक ना कर...कैसे तूने जेठा भाई को उल्लू

बना के अपनी चूत का रस निकलवाया था....

रीता की तो आँखे फट जाती है..जब वो मोहन लाल के मुँह से ये सुनती है...क्यूँ कि

वो उस बात को किसी को बता के..अपनी इज़्ज़त खराब नही करना चाहती थी....

मोहन लाल :- अगर तू यहाँ चिल्लाएगी..तो मेरा तो कुछ नही बिगड़ेगा...में तेरी

सारी पॉल खोल दूँगा बाहर...और फिर सब यही समझेंगे कि यहाँ भी तेरी ही ग़लती है..

रीता बस चुप चाप सुन रही थी...

मोहन लाल :- और ऐसे नाटक क्या कर रही है..तू भी तो यही चाहती है...साली एक नंबर. की

तू भी तो चुदक्कड है...

रीता अब हल्का सा स्माइल करती है..और अपनी कमर को ठुमकाते हुई..मोहन लाल की तरफ

बढ़ती है...और अपने बाहें चौड़ी कर के..मोहन लाल के गले के डाल लेती है..

रीता :- अरे मोहन मेरी जान...तू तो बुरा मान गया ... अरे थोड़ा बहुत तो नाटक

करना पड़ता है ना...एक दम से तुझे में अपनी चूत कैसे दे दूं...बता..

एक औरत का आत्म सम्मान भी तो कुछ होता है...

 
मोहन लाल अपनी गंदे से दाँत दिखाता है..और सीधा रीता के होंठो पे अपने होंठ

रख देता है..और बुरी तरह से चूसने लगता है...

रीता उसे धक्का देके अलग होती है...अपने होठों पे हाथ फिराती है..और देखती है

उसके होंठ से हल्का सा खून निकल आता है...वो अपनी एक सेडक्टिव स्माइल के साथ बोलती

है..

रीता :- इतनी भी जल्दी क्या है मोहन लाल.... थोड़ा आराम से कर...बेकार में मेरा चेहरा क्यूँ

बिगाड़ रहा है...वैसे तो मुझे वाइल्ड सेक्स बहुत पसंद है..लेकिन मेरे चेहरा का बुरा

हाल तो मत कर.....दम दिखाना है तो मेरी चूत मारने में लगाइयो...

ये लास्ट लाइन वो इतनी अदाकारी से बोलती है..कि मोहन लाल की तो झान्टे जल फुक जाती है..

मोहन लाल बेताब हुक रीता के तरफ हाथ बढ़ाता हुआ आगे बढ़ता है रीता को

जकड़ने के लिए...लेकिन रीता भी चालू निकली है..और वो साइड हो जाती है...और खिल खिला

के हँसने लगती है.....

रीता :- इतनी जल्दी हाथ में नही आउन्गि आपके.....थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी...

मोहन लाल :- मुझे तुझ जैसी जंगली चूते मारने में बड़ा मज़ा आता है...

रीता ;- अच्छा...तो देख लेंगे कि क्या करते हो आप....कुछ मर्द सिर्फ़ बोलना जानते

हैं...लेकिन उनसे ज़्यादा कुछ हो नही पाता...

रीता तो मोहन लाल की आग को और भड़का रही थी....अब ये बात रीता के लिए फ़ायदेमंद

होगी..या नुकसान दयाक...वो तो बाद में ही पता चलेगा...

मोहन लाल :- अरे मेरी रीता रंडी..साली...एक बार मेरा लंड अंदर घुस गया ना तेरी

चूत में तो फिर देख तेरी क्या हालत होती है...

रीता :- हाहहाहा....अच्छा जी..इतना कॉन्फिडेंट....

मोहन लाल :- अरे तुझे पता ही कहाँ है जानेमन....

ये बोलते बोलते मोहन लाल आगे बढ़ता है....और रीता पीछे की तरफ हो जाती है..

तभी रीता पीछे दीवार से टकरा जाती है.आहह...उसके मुँह से निकल जाता है..

और मोहन लाल उसके करीब आके...अपने दोनो हाथ उसके साइड में रख देता है.

जिसकी वजह से रीता ब्लॉक हो जाती है....

मोहन लाल :- अब कहाँ जाएगी मेरी रानी....

और अपने लिप्स आगे कर के रीता के लिप्स पे रख के उसे चूसना चालू कर देता है

इस बार वो बड़े ही तरीके से चूमती है...राइट भी फुल सपोर्ट कर रही थी...

दोनो की जीभ बाहर निकल गई थी...और वो आपस में लड़ाई लड़ रही थी....

दोनो एक दूसरे के मुँह का टेस्ट ले रही थी....कुछ 2 मिनट ऐसे किस्सिंग करने के बाद

अलग हो जाते हैं...रीता की तो साँसें फूलने लगती है..लेकिन मोहन लाल तो

बिल्कुल वैसा ही था.....

फिर मोहन लाल अपना हाथ आगे बढ़ा के रीता के उन छोटे छोटे बूब्स पे रख के

उन्हे ज़ोर से मसल देता है...

आहह....आराम से.....दर्द..होता है......

हाहहहहहा...बस इतने में ही दर्द हो गया..तू क्या मेरा लंड लेगी......मोहन लाल

रीता को बोलता है....

रीता :- तो आराम से कर ना...में भागी थोड़ी जा रही हूँ..ये ड्रेस खराब हो जाएगी...

और फिर बड़ी ही जेंटल तरीके से मोहन लाल...अपने दोनो हाथो से उसके दोनो वो

अक्डे हुए बूब्स को दबाने लगता है...

आहह..ओह्ह एसस्स्स्सस्स...ऐसे हीए.ए.ई...........

रीता तो पूरी तरह से पागल हो चुकी थी..उसकी मस्ती में आँखें बंद हो रही थी..

रीता ने अपनी जीभ बाहर निकाली...मानो ये बोल रही हो कि मेरी जीभ को चूसो....

मोहन लाल भी उसका इशारा समझ जाता है...और अपनी जीभ बाहर निकाल के रीता के

आगे बढ़ता है..और अपनी जीभ उसके करीब लाता है..रीता थोड़ी आगे होकर उसकी

जीभ को अपने जीभ से टच करने लगती है..लेकिन मोहन लाल पीछे हो जाता है..

रीता को बहुत गुस्सा आता है....

 
मोहन लाल भी उसका इशारा समझ जाता है...और अपनी जीभ बाहर निकाल के रीता के

आगे बढ़ता है..और अपनी जीभ उसके करीब लाता है..रीता थोड़ी आगे होकर उसकी

जीभ को अपने जीभ से टच करने लगती है..लेकिन मोहन लाल पीछे हो जाता है..

रीता को बहुत गुस्सा आता है....

मोहन लाल दुबारा अपनी जीभ करीब लाता है...और फिर सेम टू सेम हरकत करता है..

इस बार रीता की सुलग जाती है....

वो खुद आगे बढ़ के...मोहन लाल से चिपक जाती है..और अपनी जीभ मोहन लाल के

मुँह के अंदर घुसा देती है...

और बुरी तरह से फिर किस्सिंग का दौर शुरू हो जाता है....नीचे से मोहन लाल के हाथ

रीता के बूब्स के उपर चल रहे थे...उउँह...करके आवाज़ें निकाल रहे थे

...

रीता और मोहन लाल ज़बरदस्त फ्रेंच किस्सिंग में मस्त हो रखे थे.....

मुँह के अंदर चारो तरफ जीभ घूम रही थी एक दूसरे की....बहुत ही मस्त सीन

था...नीचे से रीता के बूब्स मोहन लाल के कड़क हाथों का मज़ा ले रही थी...

करीब 10 मिनट तक..हाँ 10 मिनट तक इस सेनुयल किस का मज़ा लेने के बाद..रीता अलग

हो जाती है...उसकी तो साँसें उखड़ी होती है...वो बुरी तरह से हाँफ रही थी...

लेकिन हर बार की तरह इस बार भी..मोहन लाल को कोई असर नही था...वो तो बिल्कुल

वैसा ही खड़ा था...उस की साँस बिल्कुल नॉर्मल थी...

मोहन लाल :- क्यूँ जाने मन मज़ा आया...

रीता हान्फते हुए...जान निकाल दी तूने तो....हुहहूहह...

मोहन लाल :- हाहहाहा....और उसके उपर पहना हुआ कोट उतार उतार देता है..और अपनी

शर्ट उतारने लगता है...

रीता जो अभी भी हाँफ रही थी...हान्फते हुए बोलती है...क्क़.या..या.ही.न.न..कर..ओ.गे...

मोहन लाल :- तो और क्या...

रीता :- न..ई...कोई...आ....गया.. तो....

मोहन लाल :- तू उसकी टेन्षन मत ले..मेने उसका इंतेज़ाम कर दिया है..

रीता :- ओह्ह्ह..पूरी तैयारी...पक्का ना....

मोहन लाल...रीता के बूब्स को कस के दबाते हुए.....अरे मेरी रानी तू मज़े कर टेन्षन

मत ले..

आहह पागल आदमी...आराम से भी बता सकता है ना...रीता गुस्से में बोलती है...

मोहन लाल :- हाहहाहा....अभी तू देखती जा..तेरी चूत का आज में भोसड़ा बनाता

हूँ...

रीता :- हाँ हाँ देख लेंगे...

ऐसे किसको लगा दिया इसने बाहर....चलीए ज़रा रूम के बाहर नज़र मारते हैं कौन कर

रहा है चौकीदारी टाय्लेट की.....कौन आ गया चौकीदार.....

बस बस ... दिमाग़ लगाना बंद करो...मुझे पता है सोच रहे होंगे कि अब्दुल

होगा बाहर...इतने हॉट मूड में भी सोचना बंद नही हो रहा आपका...हाँ..

ऊ तेरी की...ये कोई चौकीदार नही है..ये चौकिदारनी है....ओहो और वो भी

हमारी..प्रीति...अच्छा तो इसे इस काम में लगा दिया..साली खुद भी ऐसी ही होगी..

चलीए अब प्रीति को ही देखते रहोगे क्या..अंदर चलते हैं.....

 
ओहू अंदर का नज़ारा थोड़ा बदल गया था.....बड़ी जल्दी में है मोहन लाल

मोहन लाल ने अपने कपड़े उतार दिए थे..बस अंडरवेर में था...

रीता उसके करीब चिपक के खड़ी थी.....

रीता अपना हाथ नीचे ले जाके मोहन लाल के लंड पे अंडरवेर के उपर से हाथ

रखते हुए....उसका साइज़ नापने लगती है..

रीता :- ऊ तेरी की...तेरा तो बहुत बड़ा है रे...मेरी तो चूत बहुत छोटी सी है...

कहीं आज इसका कचूमर ना निकाल दे....

मोहन लाल :- अभी तू देखती जा...आज तुझे जन्नत की सैर कराउन्गा.....

और अपने हाथ को रीता की ड्रेस पे रख के उसे पागलो की तरह नीचे खिचने लगता

है...

रीता ;- ऊ पागल रुक...फाडे गा क्या..रुक्क्क...

और मोहन लाल के हाथ को झटके से पीछे करती है..

रीता :-तू तो साले पूरा जंगली है....फट जाएगी..तो बाहर कैसे जाउन्गी....

पगल ये ऐसे थोड़ी निकलेगी...

रीता अपना हाथ पीछे करके कुछ ढीला करती है...और हाथ आगे कर की..ड्रेस को थोड़ा

आगे करती है..और एक ही झटके में नीचे......

 
समर तो अपनी बहन की चूत पर फिर रहे उसके हाथ को ही देख रहा था। उसने बस हाँ में अपना सिर हिला दिया।

नेहा- “ओके... तो ले..." नेहा ने वीर्य से सने हए हाथ को उठाया, समर की आँखें भी उठी और नेहा बोली- “अपना वीर्य चख... अपना वीर्य चख समर...' नेहा ने समर की ओर हाथ बढ़ाते हुए कहा।

समर को टेन्शन हो गई। ये दीदी मुझे क्या करने को कह रही है? मैं अपना वीर्य चलूँ? नहीं... ये बहुत अजीब है। मैं ऐसा नहीं कर सकता। समर सोच रहा था।

नेहा- “क्या हुआ समर? आ ना, चूस मेरी उंगलियों पे लगा अपना वीर्य। बहुत स्वादिष्ट है ये..." नेहा ने कहा। उसको बहुत मजा आ रहा था।

समर- “दीदी... मगर... मैं ये कैसे?” समर को अंदाजा नहीं था की नेहा उससे कुछ ऐसा करने को बोलेगी।

नेहा- “दो दिन, तेरे सामने, मैं तेरा वीर्य खा चुकी हूँ, वो भी इतने मजे से। और तू मुझे ये बोल रहा है की तू ये नहीं कर सकता। क्यों, जो मैं कर सकती हूँ, वो तू नहीं कर सकता?" नेहा बोली।

समर- “नहीं दीदी। मैं वो... ..." वो बोलने लगा की नेहा ने उसकी बात काट दी।

नेहा- “क्या नहीं? पहली ही बात पे तूने मना कर दिया। मैं तेरा वीर्य खा सकती हैं। मगर तू अपना वीर्य नहीं खा सकता?" नेहा ने थोड़ा गुस्से वाले अंदाज में कहा। वो पूरे कंट्रोल में थी सिचुयेशन के।

समर ने भी सोचा की दीदी ठीक कह रही है। जब वो मेरा वीर्य खा सकती हैं तो मैं उनकी बात क्यों नहीं मान सकता? कहा- “मेरे कहने का वो मतलब नहीं था दीदी...” वो बोला।

नेहा- “जो भी हो। अगर तुझे आगे कुछ करना है तो तुझे ये वीर्य खाना पड़ेगा। मेरा नंगा शरीर देखना है, तो ये वीर्य खाना पड़ेगा। मेरे शरीर के साथ खेलना है, तो ये वीर्य खाना पड़ेगा। मेरी चत को... ..."

नेहा बोल ही रही थी की एकदम से समर ने उसकी उंगलियां अपने मुँह में घुसा दी। अपनी दीदी के मुँह से इतनी सेडक्टिव बातें सुनकर समर से कंट्रोल नहीं हुआ था।

नेहा ये देखकर खुश हो गई। उसका भाई अपना ही वीर्य चाट रहा था। नेहा समर की मालेकिन बन गई थी। उसको एक्सट्रीम पावर का एहसास हुआ। उसे एहसास हुआ की उसका शरीर एक ऐसा हथियार है, जिससे वो किसी पर भी काबू कर सकती है। उसका शैतान दिमाग जाग रहा था।
 
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