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साक्षी एक पल को चुप रही फिर मेरी ठोड़ी पकड़ कर मेरे चेहरे को ऊपर उठाती हुई हल्का सा मुस्कुराते हुई बोली “मैं तुझे अच्छी लगती हूँ क्या….”
मैं एकदम से शर्मा गया मेरे गाल लाल हो गए और झेंप कर गर्दन फिर से नीचे झुका ली. मैं साक्षी के सामने बैठा हुआ था साक्षी ने हाफ पैंट के बाहर झांकती मेरी जांघो पर अपना हाथ रखा और उसे सहलाती हुई धीरे से अपने हाथ को आगे बढा कर मेरे पैंट के उभरे हुए भाग पर रख दिया. मैं शर्मा कर अपने आप में सिमटते हुए साक्षी के हाथ को हटाने की कोशिश करते हुए अपने दोनों जांघो को आपस में सटाने की कोशिश की ताकि साक्षी मेरे उभार को नहीं देख पाए. साक्षी ने मेरे जांघ पर दबाब डालते हुए उनका सीधा कर दिया और मेरे पैंट के उभार को पैंट के ऊपर से पकड़ लिया और बोली “रुक…आराम से बैठा रह…देखने दे….साले अभी शर्मा रहा है,… मैं सहम कर चुप चाप बैठ गया.
साक्षी मेरे लण्ड को छोर कर मेरे हाफ पैंट का बटन खोलने लगी. मेरे पैंट के बटन खोल कर कड़कती आवाज़ में बोली “चुत्तर…उठा तो…तेरा पैंट निकालू…”
मैंने हल्का विरोध किया “ओह साक्षी छोड़ दो…”
“ मार खायेगा क्या…जैसा कहती हु वैसा कर…” कहती हुई थोड़ा आगे खिसक कर मेरे पास आई और अपने पेटिकोट को खींच कर घुटनों से ऊपर करते हुए पहले के जैसे बैठ गई.
मैंने चुपचाप अपने चुत्तरों को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया. साक्षी ने सटाक से मेरे पैंट को खींच कर मेरी कमर और चुत्तरों के नीचे कर दिया, फिर मेरे पैरों से होकर मेरे पैंट को पूरा निकाल कर नीचे कारपेट पर फेंक दिया.
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मैंने नीचे से पूरा नंगा हो गया था और मेरा ढीला लण्ड साक्षी की आँखों के सामने था. मैंने हाल ही में अपने लण्ड के ऊपर उगे के बालो को ट्रिम किया था इसलिए झांट बहुत कम थे. मेरे ढीले लण्ड को अपनी मुठ्ठी में भरते हुए साक्षी ने सुपाड़े की चमड़ी को थोड़ा सा नीचे खींचते हुए मेरे मरे हुए लण्ड पर जब हाथ चलाया तो मैं सनसनी से भर आह किया.
साक्षी ने मेरी इस आह पर कोई ध्यान नहीं दिया और अपने अंगूठे को सुपाड़े पर चलाती हुई सक-सक मेरे लण्ड की चमड़ी को ऊपर नीचे किया.
साक्षी के कोमल हाथो का स्पर्श पा कर मेरे लण्ड में जान वापस आ गई. मैं डरा हुआ था पर साक्षी जैसी खूबसूरत औरत की हथेली ने लौड़े को अपनी मुठ्ठी में दबोच कर मसलते हुए, चमड़ी को ऊपर नीचे करते हुए सुपाड़े को गुदगुदाया तो अपने आप मेरे लण्ड की तरफ खून की रफ्तार तेज हो गई. लौड़ा फुफकार उठा और अपनी पूरी औकात पर आ गया.
मेरे खड़े होते लण्ड को देख साक्षी का जोश दुगुना हो गया और दो-चार बार हाथ चला कर मेरे लण्ड को अपने बित्ते से नापती हुई बोली “बाप रे बाप….कैसा हल्लबी लण्ड है…ओह… हाय… तेरा तो सच में बहुत बड़ा है….मेरी इतनी उम्र हो गई….आज तक ऐसा नहीं देखा था…ओह…ये पूरा नौ इंच का लग रहा है…इतना बड़ा तो तेरे मौसा का भी नहीं….हाय….ये तो उनसे बहुत बड़ा लग रहा है…..और काफी शानदार है….उफ़….मैं तो….मैं तो……हाय…..ये तो गधे के लण्ड जितना बड़ा है…..उफ्फ्फ्फ़…..” बोलते हुए मेरे लण्ड को जोर से मरोड़ दिया और सुपाड़े को अपनी ऊँगली और अंगूठे के बीच कस कर दबा दिया.
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दर्द के मारे छटपटा कर जांघ सिकोडते हुए साक्षी का हाथ हटाने की कोशिश करते हुए पीछे खिसका तो तो मेरे लण्ड को पकड़ कर अपनी तरफ खींचती हुई बोली “हरामी….साले….मैं जब सो रही होती हु तो मेरी चूची दबाता है मेरी चुत में ऊँगली करता है….आग लगाता है….इतना मोटा लौड़ा ले कर….घूमता है…और बाएं गाल पर तड़ाक से एक झापड़ जड़ दिया.
मैं हतप्रभ सा हो गया. मेरी समझ में नहीं आ रहा था मैं क्या करू. साक्षी मुझ से क्या चाहती है, ये भी समझ में नहीं आ रहा था. एक तरफ तो वो मेरे लण्ड को सहलाते हुए मुठ मार रही थी और दूसरी तरफ गाली देते हुए बात कर रही थी और मार रही थी. मैं उदास और डरी हुई नज़रों से साक्षी को देख रहा था. साक्षी मेरे लण्ड की मुठ मारने में मशगूल थी. एक हाथ में लण्ड को पकड़े हुए दुसरे हाथ से मेरे अन्डकोषो को अपनी हथेली में लेकर सहलाती हुई बोली “….हाथ से करता है…. राजू….अपना शरीर बर्बाद मत कर…..तेरा शरीर बर्बाद हो जायेगा तो मैं तेरी माँ को क्या मुंह दिखाउंगी….” कहते हुए जब अपनी नजरों को ऊपर उठाया तो मेरे उदास चेहरे पर साक्षी की नज़र पड़ी. मुझे उदास देख लण्ड पर हाथ चलाती हुई दुसरे हाथ से मेरे गाल को चुटकी में पकड़ मसलते हुए बोली “उदास क्यों है….क्या तुझे अच्छा नहीं लग रहा है…..हाय राजू तेरा लण्ड बहुत बड़ा और मजेदार है…. तेरा हाथ से करने लायक नहीं है….ये किसी छेद घुसा कर किया कर…..”
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मैं साक्षी की ऐसी खुल्लम खुल्ला बातों को सुन कर एक दम से भोच्चक रह गया और उनका मुंह ताकता रहा.
साक्षी मेरे लण्ड की चमड़ी को पूरा नीचे उतार कर सुपाड़े की गोलाई के चारो तरफ ऊँगली फेरती हुई बोली “ऐसे क्या देख रहा है….तू अपना शरीर बर्बाद कर लेगा तो मैं तेरी माँ को क्या मुंह दिखाउंगी……मैंने सोच लिया है मुझे तेरी मदद करनी पड़ेगी……..तू घबरा मत….”
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साक्षी की बाते सुन कर मुझे ख़ुशी हुई मैं हकलाते हुए बोला “हाय साक्षी मुझे डर लगता है….आपसे….” इस पर साक्षी बोली “राजू मेरे बेटे…डर मत….मैंने तुझे….गाली दी इसकी चिंता मत कर…. मैं तेरा मजा ख़राब नहीं करना चाहती…ले……मेरा मुंह मत देख तू भी मजे कर……..” और मेरा एक हाथ पकड़ कर अपनी ब्लाउज में कसी चुचियों पर रखती हुई बोली “….तू इनको दबाना चाहता था ना….ले…दबा…तू….भी मजा कर….मैं जरा तेरे लण्ड…. की……कितना पानी भरा है इसके अंदर….”
मैंने डरते हुए साक्षी की चुचियों को अपनी हथेली में थाम लिया और हलके हलके दबाने लगा. अभी दो तीन बार ही दबाया था की साक्षी मेरे लण्ड को मरोड़ती हुई बोली “साले…कब मर्द बनेगा….ऐसे औरतो की तरह चूची दबाएगा तो…इतना तगड़ा लण्ड हाथ से ही हिलाता रह जायेगा….अरे मर्द की तरह दबा ना…डर मत….ब्लाउज खोल के दबाना चाहता है तो खोल दे….हाय कितना मजेदार हथियार है तेरा….देख….इतनी देर से मुठ मार रही हूँ मगर पानी नहीं फेंक रहा…..” [/SIZE]