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Guest
लेकिन पुलिस मुझे गिरफ्तार करने नहीं आई। शाम होते ही अचानक वह सुंदर लड़की जरूर मेरे सिर पर आ बैठी। अब मुझे उससे डर नहीं लग रहा था।
“राज!” वह फुसफुसाई।
“त...तुम कौन हो?” मैंने धड़कते दिल से पूछा।
“मोहिनी।” वह मुस्कुरा कर बोली।
“मोहिनी....त....तो क्या तुम छिपकली हो ?”
“हाँ, वह भी मेरा रूप है असली रूप और यह भी मेरा ही रूप है, दोनों असली रूप हैं।”
“तुमने मेरे हाथो बॉस का कत्ल क्यों करवा दिया।”
“उसने तुम्हे थप्पड़ क्यों मारा... वैसे भी मैं नहीं चाहती थी कि तुम ऐसी छोटी-मोटी नौकरी करो...नौकरी की तुम्हे जरूरत ही क्या है।”
“आखिर वो नाराज़ क्यों था ? मैं तो ऑफिस ठीक वक्त पर पहुंचा था।”
“नहीं, तुम आधा घंटा लेट थे।”
“पर मैंने तो अपनी घड़ी में टाइम देखा था।”
“जो तुमने देखा वह सच नहीं था। तुम वही देख रहे थे जो मैं तुम्हें दिखाना चाह रही थी। फिर जब तुम्हारे बॉस ने ज्यादा ही बदतमीजी की तो मुझे बहुत बुरा लगा। ऐसे लोगों को सबक सिखाना जरुरी होता है।” वह बोली।
“इसका मतलब यह तो नहीं कि उसे मार ही डालो। अब पुलिस मुझे गिरफ्तार कर लेगी।”
“ऐसा नहीं होगा। मैंने सब ठीक कर दिया है।”
“क्या ठीक कर दिया है ?”
“ऑफिस के चपरासी ने उसके कत्ल का इल्जाम अपने सिर ले लिया है। तुम्हारा बॉस मर चुका है और पुलिस ने चपरासी को गिरफ्तार कर लिया है।” फिर वह खिलखिलाकर हंस पड़ी। उसके दांत मोतियों की तरह चमक रहे थे।
मोहिनी सुर्ख रंग के जोड़े में थी और आलथी पालथी मारे मेरे सिर पर बैठी थी।
“क्या तुम यह सब कर सकती हो ?” मैंने पूछा।
“यह सब क्या ?”
“मतलब चपरासी ने कत्ल का इल्जाम अपने सिर कैसे ले लिया ?”
“थोड़ी देर के लिये मैं उसके सिर पर चली गई थी। मुझे वही देख सकता है जिसे मैं देखने की अनुमति देती हूँ या जिसकी मैं गुलाम बन जाती हूँ। मैं जिसके सिर पर बैठ जाती हूँ उसका दिमाग पूरी तरह मेरे नियंत्रण में आ जाता है।” मोहिनी ने एक भरपूर अंगड़ाई ली। “ज्यादा मत सोचो अभी तुम्हें मोहिनी की शक्तियों की जानकारी नहीं है। दुनिया के बड़े से बड़े तांत्रिक मुझे गुलाम बनाने की तमन्ना रखते हैं। उनमें से बहुत से मर भी जाते हैं, जैसे रामा की माँ मर गई, वह मुझे गुलाम बनाना चाहती थी। तुम्हे देखकर उसे अंदाजा हो गया था कि तुम मुझे प्राप्त कर सकते हो फिर वह तुम्हारे जरिये अपने काम करवाती। वह सब मुझे मंजूर नहीं था। मैं तो तुम्हे खुद पसंद करती हूँ और सिर्फ तुम्हारी ही होकर रहना चाहती हूँ।”
“लेकिन मैं ही क्यों, मुझमे ऐसी क्या बात है?”
“पिछले जन्म में तुम एक तांत्रिक थे और तुमने मुझे हासिल कर लिया था। मैं तुम्हारी गुलाम थी। फिर हम एक-दूसरे को बेहद चाहने लगे। मैं भी तुम्हे बेहद चाहती थी। मुझे पाने के लिये कुछ तांत्रिकों ने तुम्हें मौत के घाट उतार दिया पर मरते वक्त भी तुम मुझे याद करते हुए मरे। फिर तुम्हारा जन्म एक विलक्षण घड़ी में हुआ। उसी घड़ी में जन्म लेने वाला मुझे आसानी से पा सकता है।”
कुछ रुक कर उसने आगे कहा–
“शायद तुम्हे अपने बचपन की बातें याद न हो, तुम्हारे माँ-बाप ने तुम्हे बेच दिया था और जिसने ख़रीदा था वह तुम्हारी बलि चढ़ाकर मुझे ही हासिल करना चाहता था। तुम उस वक्त सात-आठ बरस के थे। वे लोग तुम्हारी बलि नहीं चढ़ा पाये बल्कि मैंने शम्भु के हाथो जयधर की ही बलि चढ़ा दी जो तुम्हे खरीद कर ले गया था। लेकिन बाद में हुआ यह कि डमरू ने घोर तप करके मुझे घेर लिया और मैं उसकी गुलाम बन गई। डमरू की मौत के बाद ही मैं मुक्त हो पाई। तब तक बहुत बरस बीत चुके थे और तुम जवान हो चुके थे।
“राज!” वह फुसफुसाई।
“त...तुम कौन हो?” मैंने धड़कते दिल से पूछा।
“मोहिनी।” वह मुस्कुरा कर बोली।
“मोहिनी....त....तो क्या तुम छिपकली हो ?”
“हाँ, वह भी मेरा रूप है असली रूप और यह भी मेरा ही रूप है, दोनों असली रूप हैं।”
“तुमने मेरे हाथो बॉस का कत्ल क्यों करवा दिया।”
“उसने तुम्हे थप्पड़ क्यों मारा... वैसे भी मैं नहीं चाहती थी कि तुम ऐसी छोटी-मोटी नौकरी करो...नौकरी की तुम्हे जरूरत ही क्या है।”
“आखिर वो नाराज़ क्यों था ? मैं तो ऑफिस ठीक वक्त पर पहुंचा था।”
“नहीं, तुम आधा घंटा लेट थे।”
“पर मैंने तो अपनी घड़ी में टाइम देखा था।”
“जो तुमने देखा वह सच नहीं था। तुम वही देख रहे थे जो मैं तुम्हें दिखाना चाह रही थी। फिर जब तुम्हारे बॉस ने ज्यादा ही बदतमीजी की तो मुझे बहुत बुरा लगा। ऐसे लोगों को सबक सिखाना जरुरी होता है।” वह बोली।
“इसका मतलब यह तो नहीं कि उसे मार ही डालो। अब पुलिस मुझे गिरफ्तार कर लेगी।”
“ऐसा नहीं होगा। मैंने सब ठीक कर दिया है।”
“क्या ठीक कर दिया है ?”
“ऑफिस के चपरासी ने उसके कत्ल का इल्जाम अपने सिर ले लिया है। तुम्हारा बॉस मर चुका है और पुलिस ने चपरासी को गिरफ्तार कर लिया है।” फिर वह खिलखिलाकर हंस पड़ी। उसके दांत मोतियों की तरह चमक रहे थे।
मोहिनी सुर्ख रंग के जोड़े में थी और आलथी पालथी मारे मेरे सिर पर बैठी थी।
“क्या तुम यह सब कर सकती हो ?” मैंने पूछा।
“यह सब क्या ?”
“मतलब चपरासी ने कत्ल का इल्जाम अपने सिर कैसे ले लिया ?”
“थोड़ी देर के लिये मैं उसके सिर पर चली गई थी। मुझे वही देख सकता है जिसे मैं देखने की अनुमति देती हूँ या जिसकी मैं गुलाम बन जाती हूँ। मैं जिसके सिर पर बैठ जाती हूँ उसका दिमाग पूरी तरह मेरे नियंत्रण में आ जाता है।” मोहिनी ने एक भरपूर अंगड़ाई ली। “ज्यादा मत सोचो अभी तुम्हें मोहिनी की शक्तियों की जानकारी नहीं है। दुनिया के बड़े से बड़े तांत्रिक मुझे गुलाम बनाने की तमन्ना रखते हैं। उनमें से बहुत से मर भी जाते हैं, जैसे रामा की माँ मर गई, वह मुझे गुलाम बनाना चाहती थी। तुम्हे देखकर उसे अंदाजा हो गया था कि तुम मुझे प्राप्त कर सकते हो फिर वह तुम्हारे जरिये अपने काम करवाती। वह सब मुझे मंजूर नहीं था। मैं तो तुम्हे खुद पसंद करती हूँ और सिर्फ तुम्हारी ही होकर रहना चाहती हूँ।”
“लेकिन मैं ही क्यों, मुझमे ऐसी क्या बात है?”
“पिछले जन्म में तुम एक तांत्रिक थे और तुमने मुझे हासिल कर लिया था। मैं तुम्हारी गुलाम थी। फिर हम एक-दूसरे को बेहद चाहने लगे। मैं भी तुम्हे बेहद चाहती थी। मुझे पाने के लिये कुछ तांत्रिकों ने तुम्हें मौत के घाट उतार दिया पर मरते वक्त भी तुम मुझे याद करते हुए मरे। फिर तुम्हारा जन्म एक विलक्षण घड़ी में हुआ। उसी घड़ी में जन्म लेने वाला मुझे आसानी से पा सकता है।”
कुछ रुक कर उसने आगे कहा–
“शायद तुम्हे अपने बचपन की बातें याद न हो, तुम्हारे माँ-बाप ने तुम्हे बेच दिया था और जिसने ख़रीदा था वह तुम्हारी बलि चढ़ाकर मुझे ही हासिल करना चाहता था। तुम उस वक्त सात-आठ बरस के थे। वे लोग तुम्हारी बलि नहीं चढ़ा पाये बल्कि मैंने शम्भु के हाथो जयधर की ही बलि चढ़ा दी जो तुम्हे खरीद कर ले गया था। लेकिन बाद में हुआ यह कि डमरू ने घोर तप करके मुझे घेर लिया और मैं उसकी गुलाम बन गई। डमरू की मौत के बाद ही मैं मुक्त हो पाई। तब तक बहुत बरस बीत चुके थे और तुम जवान हो चुके थे।