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मैंने मोहिनी को टटोलने के ख़्याल से कहा।
“क्या विचार है ?”
“मैं तुम्हारी आँखों में देख रही थी। अपनी आँखों में मुझे कुछ नज़र नहीं आता।” मोहिनी ने उकताए हुए ऊँचे स्वर में उत्तर दिया।
तालियों का शोर थमता ही न था। जिम और जीन भी दाद देने वालों में सम्मिलित थे। इसके बाद सुलेमान ने दो-तीन करतब और दिखाए। उन्होंने अब तक मुझे कोई चैलेंज नहीं किया था, इसलिए मैं अब तक अपनी सीट पर ख़ामोश बैठा पहलू बदल रहा था।
अचानक स्पार्टा ने मुझसे पूछे बिना एक ऐलान कर दिया। वह कह रहा था-
“प्रिय दर्शकों, यहाँ हिन्दुस्तान के एक जादूगर गैबी इल्म के माहिर मिस्टर अमित ठाकुर मौजूद हैं। उन्होंने पहले भी एक बार इस तमाशे में हिस्सा लिया था और अपनी असाधारण शक्तियों से हमें चौंका दिया था।
“मैंने अपने उस्ताद से उनका ज़िक्र किया है। मेरे उस्ताद और मैं, दोनों इस बात के इच्छुक हैं कि वे स्टेज पर तशरीफ लाए और अपने बहुत से करतबों से हमारा मनोरंजन करें।
“मेरे उस्ताद सुलेमान उन्हें चैलेंज का इरादा भी रखते हैं। अगर मिस्टर अमित ठाकुर भी चैलेंज सुनकर ख़ुशी से स्वीकार करें।”
स्पार्टा के इस भाषण के बाद हॉल में चारों तरफ़ निगाहें दौड़ने लगी। जिम और जीन मुझे उकसाने लगे।
“अमित ठाकुर! जाओ, हमें यक़ीन है कि तुम कुछ बातें जो हमारी समझ में नहीं आ रही है, उसे ज़रूर समझाने की कोशिश करोगे।”
मैं हिचकता रहा। जीन विनय करने लगी। अलबत्ता सारा अब संतुष्ट नज़र आ रही थी। स्पार्टा बार-बार मुझे दावत दे रहा था। आख़िर बहुत देर कशमकश के बाद मैं उठा और स्टेज पर जाकर खड़ा हो गया।
मैंने स्पार्टा के हाथ से माइक ले लिया और दर्शकों से संबोधित हुआ-
“मैं जादूगर या गैबी शक्तियों का स्वामी नहीं हूँ। न ही मेरा इरादा इन दो फनकारों से मुक़ाबला करने का है। स्पार्टा की इच्छा थी अख़बारों में किसी मुक़ाबले का ऐलान किया जाए। मैंने इनकार कर दिया था कि मैं कोई पेशेवर जादूगर नहीं हूँ।”
धीरे-धीरे मैंने अपने स्वर में ज़ोर पैदा कर लिया और स्वयं कोई प्रदर्शन दिखाने की बजाय सुलेमान और स्पार्टा से अनुरोध किया कि वे खुद कोई कारनामा दिखाए। अगर उनका कोई तोड़ संभव हुआ तो जवाब देने की कोशिश की जाएगी। साथ ही मैंने मोहिनी को मुस्तैद रहने का संकेत किया।
मेरी बातों का दर्शकों पर अच्छा प्रभाव पड़ा और सब लोगों की आँखें स्टेज पर केंद्रित हो गयी।
सुलेमान ने मेरे भाषण के बाद सिर झुकाते हुए इजाज़त ली फिर एकटक गंभीर होकर मुझे घूरने लगा। उसने अपना पंजा मेरी तरफ़ करके कुछ पढ़ना शुरू कर दिया।
मैं इत्मीनान से खड़ा मुस्कराता रहा। स्टेज से मैंने जीन और सारा पर एक नज़र डाली। जीन की आँखों में हैरत थी और सारा की आँखों में भय झलक रहा था। सारा से नज़र बचाते हुए मैंने जीन को आँख का इशारा किया।
“राज ? संभालो!” मोहिनी ने मुझे चौंका दिया।
मैंने स्टेज की तरफ़ नजर दौड़ाई तो वहाँ धुआँ ही धुआँ नज़र आ रहा था। ऐसा धुआँ जिसमें स्टेज की हर चीज़ साफ़ नज़र आ सके। उस धुएँ से स्टेज पर बिजली की कौंध लपकी और फिर उसी क्षण स्पार्टा दर्शकों की तरफ़ देखकर ऊँचे स्वर में बोला-
“उपस्थित सज्जनों! आपको मालूम है यह कौन है ? यह हब्शी फराओन, तूता खामन का वफ़ादार ग़ुलाम सहवान है। कुछ देर पहले इसकी ममी मिश्र के एक अज्ञात पिरामिड में बेहरकत पड़ी थी। अब मेरे उस्ताद सुलेमान के हुक्म पर ज़िंदा सूरत में मौजूद है। मिस्टर अमित ठाकुर से प्रार्थना करता हूँ कि साहवान को दोबारा उसी तरह मिश्र के अज्ञात पिरामिड के सफ़र में रवाना कर दें।”
“राज! आज्ञा हो तो मैं इस जादूगर को ही ममी बना दूँ।” मोहिनी होंठ चबाते हुए ग़ुस्से से बोली।
“नहीं!” मैंने मोहिनी को मना किया। फिर दर्शकों से संबोधित होकर बोला- “मैं स्पार्टा और सुलेमान के इस फन में महारथ का कायल हूँ। लेकिन किसी ममी से उलझना और उसे यंत्रणा देना उचित नहीं है। ये सदियों से शांति की नींद सो रहे हैं उन्हें यंत्रणा देना मेरे सिद्धांत के विरुद्ध है। मैं क्षमा चाहता हूँ।”
स्पार्टा ने मेरा उत्तर सुनकर बड़े गर्व विजेता की तरह अपना हाथ उठाया तो हॉल तालियों से गूँज उठी।
फिर बूढ़े सुलेमान ने एक कलाबाजी दिखायी और अपना सिर ज़मीन पर पटका। उसकी इस हरकत के साथ ही स्टेज पर पुनः धुआँ फैलने लगा और हब्सी धुएँ में ग़ायब हो गया।
हाल में लोबान की महक दौड़ गयी। दो-तीन रौशनियाँ पहले ही बुझा दी गयीं।
उसके बाद स्पार्टा ने दूसरा करतब दिखाया। इस बार बहुत ही खूबसूरत औरत स्टेज पर प्रकट हुई।
वह सुलेमान के एक अमल से निश्चल हो गयी। सुलेमान ने उस पर तलवार से हमला किया। तलवार ने उस पर कई गंभीर प्रहार किये। एक कोड़ा लेकर उसे बुरी तरह मारा। मगर वह टस से मस न हुई। सुलेमान के संकेत पर दूसरे ही क्षण वह हरकत में आ गयी।
स्पार्टा ने दर्शकों को संबोधित करते हुए मुझे इस बात की दावत दी कि मैं दोबारा उस औरत को पुतले की शक्ल में तब्दील कर दूँ।
मोहिनी ने स्पार्टा का चैलेंज स्वीकार करना चाहा लेकिन मैंने उसे फिर मना कर दिया। मैंने दोबारा क्षमा माँग ली। स्पार्टा के चेहरे पर विजेताओं की चमक-दमक उठी।
हाल में से किसी ने मुझ पर फब्ती कसी।
“अमित ठाकुर, वापस आ जाओ! तुम्हारे बस का रोग नहीं है।”
मैंने देखा सारा तिलमिलाई हुई थी। जिम बुत बना बैठा था और जीन के होंठों पर भय युक्त सी मुस्कराहट थी।
हाल में स्पार्टा को जबरदस्त जादूगर घोषित किया जा रहा था। मोहिनी तैश की हालत में थी। मैंने कल्पना के झरोखे में देखा कि उसकी आँखें खौफनाक हो गयी थीं।
“राज, तुम्हारे दिल में क्या है ? क्या तुम पागल हो गए हो ? तुमने आख़िर सोचा क्या है ? क्या मेरी बात का बुरा मान गए ?”
“फ़िक्र न करो मेरी गुलबदन!” मैंने मुस्कुराते हुए कहा। “मैं तुम्हें मायूस नहीं करूँगा।”
“क्या विचार है ?”
“मैं तुम्हारी आँखों में देख रही थी। अपनी आँखों में मुझे कुछ नज़र नहीं आता।” मोहिनी ने उकताए हुए ऊँचे स्वर में उत्तर दिया।
तालियों का शोर थमता ही न था। जिम और जीन भी दाद देने वालों में सम्मिलित थे। इसके बाद सुलेमान ने दो-तीन करतब और दिखाए। उन्होंने अब तक मुझे कोई चैलेंज नहीं किया था, इसलिए मैं अब तक अपनी सीट पर ख़ामोश बैठा पहलू बदल रहा था।
अचानक स्पार्टा ने मुझसे पूछे बिना एक ऐलान कर दिया। वह कह रहा था-
“प्रिय दर्शकों, यहाँ हिन्दुस्तान के एक जादूगर गैबी इल्म के माहिर मिस्टर अमित ठाकुर मौजूद हैं। उन्होंने पहले भी एक बार इस तमाशे में हिस्सा लिया था और अपनी असाधारण शक्तियों से हमें चौंका दिया था।
“मैंने अपने उस्ताद से उनका ज़िक्र किया है। मेरे उस्ताद और मैं, दोनों इस बात के इच्छुक हैं कि वे स्टेज पर तशरीफ लाए और अपने बहुत से करतबों से हमारा मनोरंजन करें।
“मेरे उस्ताद सुलेमान उन्हें चैलेंज का इरादा भी रखते हैं। अगर मिस्टर अमित ठाकुर भी चैलेंज सुनकर ख़ुशी से स्वीकार करें।”
स्पार्टा के इस भाषण के बाद हॉल में चारों तरफ़ निगाहें दौड़ने लगी। जिम और जीन मुझे उकसाने लगे।
“अमित ठाकुर! जाओ, हमें यक़ीन है कि तुम कुछ बातें जो हमारी समझ में नहीं आ रही है, उसे ज़रूर समझाने की कोशिश करोगे।”
मैं हिचकता रहा। जीन विनय करने लगी। अलबत्ता सारा अब संतुष्ट नज़र आ रही थी। स्पार्टा बार-बार मुझे दावत दे रहा था। आख़िर बहुत देर कशमकश के बाद मैं उठा और स्टेज पर जाकर खड़ा हो गया।
मैंने स्पार्टा के हाथ से माइक ले लिया और दर्शकों से संबोधित हुआ-
“मैं जादूगर या गैबी शक्तियों का स्वामी नहीं हूँ। न ही मेरा इरादा इन दो फनकारों से मुक़ाबला करने का है। स्पार्टा की इच्छा थी अख़बारों में किसी मुक़ाबले का ऐलान किया जाए। मैंने इनकार कर दिया था कि मैं कोई पेशेवर जादूगर नहीं हूँ।”
धीरे-धीरे मैंने अपने स्वर में ज़ोर पैदा कर लिया और स्वयं कोई प्रदर्शन दिखाने की बजाय सुलेमान और स्पार्टा से अनुरोध किया कि वे खुद कोई कारनामा दिखाए। अगर उनका कोई तोड़ संभव हुआ तो जवाब देने की कोशिश की जाएगी। साथ ही मैंने मोहिनी को मुस्तैद रहने का संकेत किया।
मेरी बातों का दर्शकों पर अच्छा प्रभाव पड़ा और सब लोगों की आँखें स्टेज पर केंद्रित हो गयी।
सुलेमान ने मेरे भाषण के बाद सिर झुकाते हुए इजाज़त ली फिर एकटक गंभीर होकर मुझे घूरने लगा। उसने अपना पंजा मेरी तरफ़ करके कुछ पढ़ना शुरू कर दिया।
मैं इत्मीनान से खड़ा मुस्कराता रहा। स्टेज से मैंने जीन और सारा पर एक नज़र डाली। जीन की आँखों में हैरत थी और सारा की आँखों में भय झलक रहा था। सारा से नज़र बचाते हुए मैंने जीन को आँख का इशारा किया।
“राज ? संभालो!” मोहिनी ने मुझे चौंका दिया।
मैंने स्टेज की तरफ़ नजर दौड़ाई तो वहाँ धुआँ ही धुआँ नज़र आ रहा था। ऐसा धुआँ जिसमें स्टेज की हर चीज़ साफ़ नज़र आ सके। उस धुएँ से स्टेज पर बिजली की कौंध लपकी और फिर उसी क्षण स्पार्टा दर्शकों की तरफ़ देखकर ऊँचे स्वर में बोला-
“उपस्थित सज्जनों! आपको मालूम है यह कौन है ? यह हब्शी फराओन, तूता खामन का वफ़ादार ग़ुलाम सहवान है। कुछ देर पहले इसकी ममी मिश्र के एक अज्ञात पिरामिड में बेहरकत पड़ी थी। अब मेरे उस्ताद सुलेमान के हुक्म पर ज़िंदा सूरत में मौजूद है। मिस्टर अमित ठाकुर से प्रार्थना करता हूँ कि साहवान को दोबारा उसी तरह मिश्र के अज्ञात पिरामिड के सफ़र में रवाना कर दें।”
“राज! आज्ञा हो तो मैं इस जादूगर को ही ममी बना दूँ।” मोहिनी होंठ चबाते हुए ग़ुस्से से बोली।
“नहीं!” मैंने मोहिनी को मना किया। फिर दर्शकों से संबोधित होकर बोला- “मैं स्पार्टा और सुलेमान के इस फन में महारथ का कायल हूँ। लेकिन किसी ममी से उलझना और उसे यंत्रणा देना उचित नहीं है। ये सदियों से शांति की नींद सो रहे हैं उन्हें यंत्रणा देना मेरे सिद्धांत के विरुद्ध है। मैं क्षमा चाहता हूँ।”
स्पार्टा ने मेरा उत्तर सुनकर बड़े गर्व विजेता की तरह अपना हाथ उठाया तो हॉल तालियों से गूँज उठी।
फिर बूढ़े सुलेमान ने एक कलाबाजी दिखायी और अपना सिर ज़मीन पर पटका। उसकी इस हरकत के साथ ही स्टेज पर पुनः धुआँ फैलने लगा और हब्सी धुएँ में ग़ायब हो गया।
हाल में लोबान की महक दौड़ गयी। दो-तीन रौशनियाँ पहले ही बुझा दी गयीं।
उसके बाद स्पार्टा ने दूसरा करतब दिखाया। इस बार बहुत ही खूबसूरत औरत स्टेज पर प्रकट हुई।
वह सुलेमान के एक अमल से निश्चल हो गयी। सुलेमान ने उस पर तलवार से हमला किया। तलवार ने उस पर कई गंभीर प्रहार किये। एक कोड़ा लेकर उसे बुरी तरह मारा। मगर वह टस से मस न हुई। सुलेमान के संकेत पर दूसरे ही क्षण वह हरकत में आ गयी।
स्पार्टा ने दर्शकों को संबोधित करते हुए मुझे इस बात की दावत दी कि मैं दोबारा उस औरत को पुतले की शक्ल में तब्दील कर दूँ।
मोहिनी ने स्पार्टा का चैलेंज स्वीकार करना चाहा लेकिन मैंने उसे फिर मना कर दिया। मैंने दोबारा क्षमा माँग ली। स्पार्टा के चेहरे पर विजेताओं की चमक-दमक उठी।
हाल में से किसी ने मुझ पर फब्ती कसी।
“अमित ठाकुर, वापस आ जाओ! तुम्हारे बस का रोग नहीं है।”
मैंने देखा सारा तिलमिलाई हुई थी। जिम बुत बना बैठा था और जीन के होंठों पर भय युक्त सी मुस्कराहट थी।
हाल में स्पार्टा को जबरदस्त जादूगर घोषित किया जा रहा था। मोहिनी तैश की हालत में थी। मैंने कल्पना के झरोखे में देखा कि उसकी आँखें खौफनाक हो गयी थीं।
“राज, तुम्हारे दिल में क्या है ? क्या तुम पागल हो गए हो ? तुमने आख़िर सोचा क्या है ? क्या मेरी बात का बुरा मान गए ?”
“फ़िक्र न करो मेरी गुलबदन!” मैंने मुस्कुराते हुए कहा। “मैं तुम्हें मायूस नहीं करूँगा।”