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Guest
विवेक बस से उतरा और बस आगे चली गयी|विवेक को दूर दूर तक कोई इंसान तो क्या जानवर भी नजर नही आ रहा था|
हाँ यही शाहपुरा गाँव है|फिर यहाँ कोई इंसान क्यो नही दिखायी देता|
वह आगे बढा|
बहुत सारे मकानो के आगे से गुजरा|
सारे मकान सूने पडे थे|
वो गाँव नही शैतान का बसेरा लगता था|
विवेक डर गया था फिर भी साहस करके कदम आगे बढा रहा था|
उसके मन मे डर,हैरत और विस्मय के संयुक्त भाव उमड रहे थे|
एकाएक पूरा गांव सूना कैसे पड गया|
कही से कोई आवाज नही आ रही थी|
उस गांव की हर चीज विवेक को रहस्यमयी लग रही थी|
तभी उसे कुछ कदम की दूरी पर एक कार दिखाई दी|
जो खाली थी|
उस कार के पास जाने पर विवेक ने देखा कि पिछली सीट पर एक महिला अपनी ही गोद मे मुँह छिपाये बैठी है|
विवेक ने हिम्मत करके पूछा-हैल्लो,इस गांव मे कोई नही है?
उस औरत ने मुँह ऊपर किया-उसका विकराल रूप देखकर विवेक के पसीने छूट गये|मारे डर के चेहरा पीला पड गया|
उसकी आंखे खून जैसी लाल थी और दो बडे दाँत बाहर निकले हुए थे|
हाँ यही शाहपुरा गाँव है|फिर यहाँ कोई इंसान क्यो नही दिखायी देता|
वह आगे बढा|
बहुत सारे मकानो के आगे से गुजरा|
सारे मकान सूने पडे थे|
वो गाँव नही शैतान का बसेरा लगता था|
विवेक डर गया था फिर भी साहस करके कदम आगे बढा रहा था|
उसके मन मे डर,हैरत और विस्मय के संयुक्त भाव उमड रहे थे|
एकाएक पूरा गांव सूना कैसे पड गया|
कही से कोई आवाज नही आ रही थी|
उस गांव की हर चीज विवेक को रहस्यमयी लग रही थी|
तभी उसे कुछ कदम की दूरी पर एक कार दिखाई दी|
जो खाली थी|
उस कार के पास जाने पर विवेक ने देखा कि पिछली सीट पर एक महिला अपनी ही गोद मे मुँह छिपाये बैठी है|
विवेक ने हिम्मत करके पूछा-हैल्लो,इस गांव मे कोई नही है?
उस औरत ने मुँह ऊपर किया-उसका विकराल रूप देखकर विवेक के पसीने छूट गये|मारे डर के चेहरा पीला पड गया|
उसकी आंखे खून जैसी लाल थी और दो बडे दाँत बाहर निकले हुए थे|