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“पर ऐसा कैसे हो सकता है ……इट इज इम्पोसिबल …” निहारिका को करण की बातों पर यकीन नहीं हो रहा था.
“पर यह सब बताने के लिए मैंने तुम्हे उस दिन फ़ोन नहीं किया था …….” करण फिर गंभीर हो गया.
“तो फिर किसलिए फ़ोन किया था तुमने …….” निहारिका को एक के बाद एक शोक मिल रहे थे.
“उस लड़की के मरने से पहले मुझे उस लड़की की शक्ल एक पल के लिए देखने को मिल गयी ……”
“कौन थी वो ……” निहारिका ने पुछा
“वो तुम थी ……उसकी शक्ल हूँ-ब-हूँ तुमसे मिलती थी.”
“क्या ….!!!” निहारिका पे जैसे एटम बम्ब गिर गया हो . वो अपनी कुर्सी से उठ खड़ी हुई. उसके कुछ समझ में नहीं आ रहा था की उसे करण की बातों पर विश्वास करना चाहिए या नहीं.
“मुझे पता है तुम्हे मेरी बातों पर यकीन नहीं होगा …..” करण भी उठ खड़ा हुआ और निहारिका के पास जाकर उसका हाथ थाम लिया.
निहारिका ने करण का हाथ झटक दिया और उसके गालो पर तमाचा मार दिया, “तुम मेरे साथ मजाक क्यूँ कर रहे हो, मुझे लगता है तुम्हे डॉक्टर के पास चलना चाहिए, तुम्हे गहरा सदमा लगा है …..”
निहारिका के हाथ झटकने से और तमाचे से करण को बहुत बुरा लगा. फिर भी उसने अपने आप को संभाला.
“मजाक और मैं तुम्हारे साथ…….ओह गिव मी ए ब्रेक …….मजाक तो ज़िन्दगी ने मेरे साथ किया है, तुम्हें क्या लगता है यह जो घाव है मेरे जिस्म पर वो किसने दिए हैं, किसने मुझपे जानलेवा हमला किया, किसने उस निर्दोष मनोहर को मार डाला, किसने उन सारे लोगों की जान ली जो कभी उस बंगले में रुके थे …..मैं जब से उस बंगले में आया हूँ तब से मेरे साथ डरावनी घटनाये हो रही है ….” करण दांत पीसता हुआ बोला.
“पर यह सब बताने के लिए मैंने तुम्हे उस दिन फ़ोन नहीं किया था …….” करण फिर गंभीर हो गया.
“तो फिर किसलिए फ़ोन किया था तुमने …….” निहारिका को एक के बाद एक शोक मिल रहे थे.
“उस लड़की के मरने से पहले मुझे उस लड़की की शक्ल एक पल के लिए देखने को मिल गयी ……”
“कौन थी वो ……” निहारिका ने पुछा
“वो तुम थी ……उसकी शक्ल हूँ-ब-हूँ तुमसे मिलती थी.”
“क्या ….!!!” निहारिका पे जैसे एटम बम्ब गिर गया हो . वो अपनी कुर्सी से उठ खड़ी हुई. उसके कुछ समझ में नहीं आ रहा था की उसे करण की बातों पर विश्वास करना चाहिए या नहीं.
“मुझे पता है तुम्हे मेरी बातों पर यकीन नहीं होगा …..” करण भी उठ खड़ा हुआ और निहारिका के पास जाकर उसका हाथ थाम लिया.
निहारिका ने करण का हाथ झटक दिया और उसके गालो पर तमाचा मार दिया, “तुम मेरे साथ मजाक क्यूँ कर रहे हो, मुझे लगता है तुम्हे डॉक्टर के पास चलना चाहिए, तुम्हे गहरा सदमा लगा है …..”
निहारिका के हाथ झटकने से और तमाचे से करण को बहुत बुरा लगा. फिर भी उसने अपने आप को संभाला.
“मजाक और मैं तुम्हारे साथ…….ओह गिव मी ए ब्रेक …….मजाक तो ज़िन्दगी ने मेरे साथ किया है, तुम्हें क्या लगता है यह जो घाव है मेरे जिस्म पर वो किसने दिए हैं, किसने मुझपे जानलेवा हमला किया, किसने उस निर्दोष मनोहर को मार डाला, किसने उन सारे लोगों की जान ली जो कभी उस बंगले में रुके थे …..मैं जब से उस बंगले में आया हूँ तब से मेरे साथ डरावनी घटनाये हो रही है ….” करण दांत पीसता हुआ बोला.