S
StoryPublisher
Guest
समीर ने हवेली के दो मुलाजिमों को अपने साथ लिया और गाड़ी में कब्रिस्तान पहुंच गया और कब्रिस्तान में उसने जो कुछ देखा, वह उसके लिए बड़ा कष्टदायक था।
पोखर का कच्चा घर पूरी तरह से शोलों की लपेट में था। इसके अलावा नमीरा और बच्ची की 'जाली कब्रों से भी शोलके उठ रहे थे। यह बड़ा ही हौलनाक मंजर था। समीर ने अपनी जिन्दगी में कभी किसी कब्रिस्तान में 'आगजनी के बारे में नहीं सुना था। यहां कबें जल रही थीं। कोई खुदा बन गया था...उसने कब्रिस्तान को जहन्नुम की आब बना दिया था।
कब्रिस्तान में रोशन राय का एक ‘फरिष्ता मौजूद था। वो आग बुझाने की कोशिश में लगा था। कितने ही मुलाजिम इधर-उधर भाग रहे थे। कब्रिस्तान में एक -सा ट्यूब-बेल लगा हुआ था...उसे चालू कर दिया गया था। कब्रिस्तान के पेड़-पौधों को जिस पाईप से पानी दिया जाता था.... उसी से आग बुझाने की नाकाम कोशिश की जा रही थी।
रौली ने जब समीर की गाड़ी देखी तो वह भागकर उसके पास पहुंचा और बड़े ही उदास भाव से गर्दन झुकाकर खड़ा हो गया।
"यह आग किसने लगाई है..?" समीर दहाड़ा।
" कुछ पता नहीं, मालिक." रौली ने सिर झुकाये-झुकाये जवाब दिया।
समीर गाड़ी से उतरकर कब्रों की तरफ बढ़ने लगा। कळे फासले पर थीं। यहां से धुएं और शोलों के सिवा कुछ नजर नहीं आ रहा था। वह आगे बढ़कर देखना चाहता था कि कब्रों के साथ कैसा खेल, खेला गया है।
___ "छोटे मालिक...!" रौली तेजी से चलता हुआ उसके आगे आया-"छोटे मालिका....! आप उस तरफ न जाएं। वहां आग के सिवाय कुछ नहीं है। लोग आग बुझा रहे हैं। छोटे मालिक, आप हावेली चलें। मैं वहां आकर रिपोर्ट देता हूं। आप बेफिक्र रहें। यह जिस किसी ने भी किया है... मैं उसे जिन्दा नहीं छोडूंगा.....।"
"रौली....तुम कुछ देर जरा मेरी गाड़ी के पास रुको.... | मैं जरा कब्रों को देखकर आता हूं। देखना, कहीं कोई मेरी गाड़ी को आग न लगा दे।" समीर ने उसे तेज निगाहों से घूरा और फिर तेजी से आगे बढ़ गया।
दोनों करें पूर्णतया शोलों की लपेट में थीं। शोले कब्रों से निकल रहे थे। यूं लगता था जैसे पक्की कब्रों को तोड़कर फिर आग लगाई गई हो। समीर ने खुदा का शुक्रिया अदा किया कि वह आज सुबह ही कब्र की हकीकत देख गया था, वरना यह आग इस वक्त उसका दिल चीर रही होती।
गुस्सा उसे अब भी था। वह समझ गया था कि कब्रों को उखाड़कर यह आग क्यों लगाई गई है। आग लगाने वाला चाहता था कि कब्रों की लाशों के वजूद को ही खत्म कर दिया जाये। न रहेगा बांस....न बजेगी बांसुरी। न रहेंगी कळे... ना पढ़ेगा कोई फातह।
फिर समीर को अचानक पोखर का ख्याल आया। वह उसे अभी तक कहीं नजर नहीं आया था। उसका घर जलाकर किस बात का गुस्सा उतारा था? तब फौरन ही उसका माथा ठनका । ओह! कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी ने पोखर को सुरंग खोदते हुए देखा लिया हो। ओह! जरूरी यही बात हैं इसीलिए उसे उसका घर जलाकर सजा दी गई है।
लेकिन बात केवल इतनी ही नहीं थी।
रोशन राय के आदेश पर समीर राय की निगरानी की जा रही थी। सुबह, सवेरे जब समीर नमीरा की लाश का निरीक्षण करके वापिस हवेली पहुंचा था, तो रौली को फौरन सूचना मिल गई थी। वह फौरन कब्रिस्तान पहुंचा था और उसने पोखर को रंगे हाथों पकड़ लिया था। वह बड़ी तेजी से सुरंग बन्द करने के काम में जुटा हआ था।
रौली ने गर्दन पकड़कर उसे गाड़ी में डाला और हवेली ले आया। रौली जानता था कि रोशन राय रात भर जागने का आदी है। रात बीते ही नींद आती थी। जब इन्सानों के जागने का वक्त होता था, वह शैतानों की तरह सोने लगता था।
पोखर का कच्चा घर पूरी तरह से शोलों की लपेट में था। इसके अलावा नमीरा और बच्ची की 'जाली कब्रों से भी शोलके उठ रहे थे। यह बड़ा ही हौलनाक मंजर था। समीर ने अपनी जिन्दगी में कभी किसी कब्रिस्तान में 'आगजनी के बारे में नहीं सुना था। यहां कबें जल रही थीं। कोई खुदा बन गया था...उसने कब्रिस्तान को जहन्नुम की आब बना दिया था।
कब्रिस्तान में रोशन राय का एक ‘फरिष्ता मौजूद था। वो आग बुझाने की कोशिश में लगा था। कितने ही मुलाजिम इधर-उधर भाग रहे थे। कब्रिस्तान में एक -सा ट्यूब-बेल लगा हुआ था...उसे चालू कर दिया गया था। कब्रिस्तान के पेड़-पौधों को जिस पाईप से पानी दिया जाता था.... उसी से आग बुझाने की नाकाम कोशिश की जा रही थी।
रौली ने जब समीर की गाड़ी देखी तो वह भागकर उसके पास पहुंचा और बड़े ही उदास भाव से गर्दन झुकाकर खड़ा हो गया।
"यह आग किसने लगाई है..?" समीर दहाड़ा।
" कुछ पता नहीं, मालिक." रौली ने सिर झुकाये-झुकाये जवाब दिया।
समीर गाड़ी से उतरकर कब्रों की तरफ बढ़ने लगा। कळे फासले पर थीं। यहां से धुएं और शोलों के सिवा कुछ नजर नहीं आ रहा था। वह आगे बढ़कर देखना चाहता था कि कब्रों के साथ कैसा खेल, खेला गया है।
___ "छोटे मालिक...!" रौली तेजी से चलता हुआ उसके आगे आया-"छोटे मालिका....! आप उस तरफ न जाएं। वहां आग के सिवाय कुछ नहीं है। लोग आग बुझा रहे हैं। छोटे मालिक, आप हावेली चलें। मैं वहां आकर रिपोर्ट देता हूं। आप बेफिक्र रहें। यह जिस किसी ने भी किया है... मैं उसे जिन्दा नहीं छोडूंगा.....।"
"रौली....तुम कुछ देर जरा मेरी गाड़ी के पास रुको.... | मैं जरा कब्रों को देखकर आता हूं। देखना, कहीं कोई मेरी गाड़ी को आग न लगा दे।" समीर ने उसे तेज निगाहों से घूरा और फिर तेजी से आगे बढ़ गया।
दोनों करें पूर्णतया शोलों की लपेट में थीं। शोले कब्रों से निकल रहे थे। यूं लगता था जैसे पक्की कब्रों को तोड़कर फिर आग लगाई गई हो। समीर ने खुदा का शुक्रिया अदा किया कि वह आज सुबह ही कब्र की हकीकत देख गया था, वरना यह आग इस वक्त उसका दिल चीर रही होती।
गुस्सा उसे अब भी था। वह समझ गया था कि कब्रों को उखाड़कर यह आग क्यों लगाई गई है। आग लगाने वाला चाहता था कि कब्रों की लाशों के वजूद को ही खत्म कर दिया जाये। न रहेगा बांस....न बजेगी बांसुरी। न रहेंगी कळे... ना पढ़ेगा कोई फातह।
फिर समीर को अचानक पोखर का ख्याल आया। वह उसे अभी तक कहीं नजर नहीं आया था। उसका घर जलाकर किस बात का गुस्सा उतारा था? तब फौरन ही उसका माथा ठनका । ओह! कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी ने पोखर को सुरंग खोदते हुए देखा लिया हो। ओह! जरूरी यही बात हैं इसीलिए उसे उसका घर जलाकर सजा दी गई है।
लेकिन बात केवल इतनी ही नहीं थी।
रोशन राय के आदेश पर समीर राय की निगरानी की जा रही थी। सुबह, सवेरे जब समीर नमीरा की लाश का निरीक्षण करके वापिस हवेली पहुंचा था, तो रौली को फौरन सूचना मिल गई थी। वह फौरन कब्रिस्तान पहुंचा था और उसने पोखर को रंगे हाथों पकड़ लिया था। वह बड़ी तेजी से सुरंग बन्द करने के काम में जुटा हआ था।
रौली ने गर्दन पकड़कर उसे गाड़ी में डाला और हवेली ले आया। रौली जानता था कि रोशन राय रात भर जागने का आदी है। रात बीते ही नींद आती थी। जब इन्सानों के जागने का वक्त होता था, वह शैतानों की तरह सोने लगता था।