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अध्याय ९: मिश्रण - दिंची क्लब और दो परिवार
दिंची क्लब: पहला साक्षात्कार (Interview) :- पुरुष आवेदक.
एक सुन्दर मध्यम उम्र की सहायिका ने रोमियो के नए आवेदक को कमरे में ले जाकर कपड़े उतार कर गाउन पहनने को कहा. निखिल ने निसंकोच वहीँ अपने कपड़े उतारे और गाउन पहन लिया. सहायिका जिसका नाम सोनम था, ने निखिल के मुरझाये लंड को देखकर अपने सूखे होंठों पर जीभ चलाई. पर वो जानती थी कि आज उसका दिन नहीं है. वो अपनी भावनाएं मन में दबाकर कमरे से चली गई. कुछ ही समय पश्चात् शोनाली ने कमरे में प्रवेश किया. उसने भी वही गाउन पहना हुआ था.
"नमस्ते, मैडम! " निखिल ने उसका अभिवादन किया.
"नमस्ते रोमियो, ये अचरज का विषय है न कि हम यहाँ मिल रहे हैं. पर जो होता है, अच्छे के लिए ही होता है.”
तभी सोनम ने कमरे में फिर प्रवेश किया. उसके हाथ में एक फीता था.
"हमें पहले औपचारिकता पूरी करनी होगी. सोनम, प्लीज इनके लंड को चूसकर खड़ा करो और उसका नाप लो."
सोनम की आँखों में चमक आ गई. उसने हाथ पकड़कर आवेदक को सोफे पर बैठाया और उसके गाउन को साइड में करते हुए बिना देरी किये हुए उसका लंड अपने मुंह में ले लिया. वो अपने भाग्य को धन्य कर रही थी, क्योंकि अधिकतर उसे मात्र देखने और नापने के लिए ही बुलाया जाता था. पर लगता है, आज शोनाली बहुत अच्छे मूड में है. वो लंड चूसने में पारंगत थी और चाट चाट कर और चूस चूस कर कुछ ही देर में निखिल के लंड को अपने प्रताप में ले आयी.
"शोनाली, ये तैयार है."
"ठीक है नापो."
"हम्म्म, 11.२ इंच लम्बाई।"
"३ इंच गोलाई।"
"शोनाली, ये मापदंड पर खरा है."
"ओके, सोनम. तुम रिकॉर्ड के लिए फोटो लो, और प्रविष्टि कर लो. ये अत्यंत लोकप्रिय होने वाला है."
सोनम अपना कार्य संपन्न करके चली गई. आवेदक खड़ा हो गया पर उसका लंड गाउन के बाहर अभी भी तन्नाया हुआ था. शोनाली ने उसे बाँहों में लेकर एक गहरा चुम्बन लिया.
"मुझे तो पता भी नहीं था कि तुम इतना बड़ा लंड लिया घूमते हो."
"हाँ,, इस विषय में हम दोनों भाई बहुत धनी हैं."
"तो क्या तुम्हारा भाई भी? वो छोटू भी?"
"बिल्कुल "
"हम्म्म्म शायद उसे भी सदस्य बनाया जा सकता है. पर वो बाद में. हम अपना इंटरव्यू शुरू करते हैं."
"पहली बात ये कि ये क्लब हमारी महिला सदस्यों के सुख और आनंद के लिए है. तुम्हारा दायित्व होगा कि जिस सदस्या ने तुम्हें चुना हो, उसे पूर्ण रूप से प्रसन्न करना. कुछ की विशेष रुचियाँ रहती हैं, परन्तु मुझे विश्वास है कि इसमें तुम्हें भी आनंद आएगा। पर पहले उनकी इच्छा पूरी करना तुम्हारा दायित्व है."
"जी"
"और उन सब से पहले तुम्हें मुझे संतुष्ट करना होगा।" शोनाली ने अर्थ भरी मुस्कान से कहा, “क्योंकि मैं इस साक्षात्कार में ये सुनिश्चित करुँगी कि न केवल तुम्हें एक शक्तिशाली लंड प्राप्त है, बल्कि तुम इसके उपयोग में भी पारंगत हो.”
निखिल उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया. फिर उसने शोनाली का एक पांव उठाया और उसकी सैंडल निकाल दी. यही उसने दूसरे पांव के साथ किया. उसने शोनाली को सोफे पर बैठने का इशारा किया. फिर शोनाली के एक पैर को चूमने और चाटने लगा.
"ओह" शोनाली के मुंह से निकला.
"आपकी सेवा में निखिल प्रस्तुत है, देवी."
निखिल कुछ देर यूँ ही दोनों पांवों को चूमता और चाटता रहा. फिर वो खड़ा हो गया और शोनाली का हाथ पकड़कर उसे भी खड़ा कर दिया. उसने शोनाली का गाउन खोला और निकाल दिया. फिर दोबारा शोनाली को सोफे पर बैठा दिया और उसके पाँव फैलाकर अपने हाथ से उसकी चूत को सहलाने लगा. शोनाली एक तन्द्रा में आ गई. उसके बाद निखिल ने अपना मुंह उसकी एकदम चिकनी चूत पर लगाया और उसे चाटने लगा. उसने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डालकर उसे हलके हलके से चोदने लगा. साथ ही अपने मुंह से उसे चाटता जा रहा थे. फिर उसने अपने होंठों से भग्नासे को दबाया और मसलने लगा. शोनाली बेकाबू होकर झड़ने लगी. निखिल ने अपनी उंगली निकली और अपनी जीभ अंदर डाल दी और सडप सडप कर पानी पीने लगा.
"ओह माँ. क्या जादू है मेरी जीभ में. कहाँ से ट्यूशन ली है जो इस उम्र में इतना निपुण हो गया."
"कहीं नहीं आंटी , बस समझो होम ट्यूशन है."
"तू सुप्रिया को चोदता है?" शोनाली से आश्चर्य से पूछा.
"और नितिन भी. और हम दोनों नानी को भी चोदते हैं."
"ओह. शीलाजी तो अब ६५ की होगी ही. उसे भी तुमने नहीं बख्शा।"
"हम कौन हैं बख्शने वाले, उल्टा उन्होंने ने हमें प्रशिक्षित किया है."
ये सब बातें करते समय निखिल अपनी २ उंगलियां शोनाली की चूत में चला रहा था.
"और तेरे नाना?
"वो मां और मौसी को चोदते हैं."
"सुरेखा तो ऐसी नहीं लगती."
"अभी पिछले हफ्ते ही उनका उद्घाटन किया है. हम दोनों भाइयों को अभी तक अवसर नहीं मिला है. आंटी, आप मेरा लंड चूसोगी, प्लीज?"
"नेकी और पूछ पूछ. ला इधर ला" शोनाली ने उतावली होकर कहा.
निखिल खड़ा हो गया और अपना गाउन उतार फेंका. शोनाली सोफे पर आगे हुई और थोड़ी देर लंड को सहलाते हुए गपाक से में अपने मुंह में ले ली. पहले तो वो हल्के हलके से चूसी फिर भूखी शेरनी की तरह उसे चूमने और चाटने लगी. थोड़ी ही देर में निखिल का लंड लोहे की रॉड जैसा तन गया.
"चलो बिस्तर पर चलते है,"
दोनों बिस्तर की ओर बढे. वहां शोनाली ने एक तकिया अपनी गांड के नीचे लगाई और एक सिर के नीचे और पैर फैला दिए.
"आ जा मेरे घुड़सवार, चढ़ जा घोड़ी पर और दिखा कितना दम है तुझमें. मुझे ताबड़तोड़ और गहरी चुदाई पसंद है. है तेरे बस की?" शोनाली ने उसे उकसाते हुए कहा.
"मैं अपनी पूरी चेष्टा करूंगा. पर अभी तक किसी ने कमी नहीं निकाली. पर आप मुझे बीच में टोकना नहीं."
"अरे तेरे जैसे लौड़े दिन में तीन बार खाती हूँ. मैं क्यों टोकूंगी तुझे?"
निखिल ने अपना स्थान लिया, शोनाली की चूत पर अपने लंड को लगाकर, उसके दोनों मम्मों को हाथ में ले लिया.
"चलो आंटी, यात्रा पर चलते हैं."
कहते हुए उसने एक लम्बा शॉट मारा. धक्का इतना शक्तिशाली था कि पलंग हिल गया. और पूरा ११ इंच का मूसल एक ही बार में अंदर चला गया. शोनाली की तो आँखें बाहर आ गयीं और साँस रुक गयी. उसे लगा कि किसी ने उसकी चूत को चाकू से चीर दिया हो.
"अबे भोसड़ी के, कोई एक बार में पेलता है ऐसा मूसल."
"पर आंटी आप ही तो बोलीं थीं की आपको ऐसी चुदाई पसंद है और ऐसे लौड़े आप दिन में तीन बार लेती हैं. और मैं आज आपका सेवक हूँ. अपने जैसा चाहा था उसे पूरा किये बिना अब मैं नहीं रुकूंगा."
कहकर निखिल ने अपना पूरा लंड निकला और दोबारा उसी तेजी से पेल दिया. और फिर ये क्रम बिना रुके चलित हो गया. शोनाली संभल ही नहीं पा रही थी. गहरे, लम्बे और तेज धक्कों के आगे वो बेबस थी. पर उसकी चूत इस पर अनुकूल प्रतिक्रिया कर रही थी. उसका पानी छूटने लगा था. इससे हुआ ये कि निखिल के भीषण धक्के थोड़े आसान हो गए झेलने में.
"तू अपनी नानी को भी ऐसे ही चोदता है क्या, इस बेदर्दी से."
"अरे उन्हें तो हम तीनों को एक साथ चोदना पड़ता है. उनकी आयु पर मत जाओ वो आपके जैसी स्त्रियों को पानी पिला दे."
"देखती हूँ."
निखिल के धक्के अब असहज और भयावने हो रहे थे. पर अब शोनाली ने खेल समझ लिया था और पूरा साथ दे रही थी. वो रह रह कर झड़ रही थी और उसका शरीर अब एक गुड़िया की तरह उछल रहा था. कोई १० से १५ मिनट यूँ चोदने के बाद निखिल अपने शीर्ष पर पहुँच गया.
"मैं झड़ने वाला हूँ."
"शुक्र है" शोनाली ने मन में सोचा फिर बोली, "अंदर मत छोड़ना मेरे मुंह में छोड़ना."
"तो फिर उठिये."
निखिल ने अपने लंड को धीरे धीरे बाहर निकाला। जैसे ही उनका टोपा बाहर आया, शोनाली एक बार और झड़ गई. उसने निखिल को सोफे पर बैठाया और उसका लंड चूमने चाटने लगी. फिर मुंह में लेकर ऐसा दबाव बनाया कि निखिल का पानी छूटने लगा. शोनाली ने निसंकोच पूरा रस पी लिया और फिर उठकर सोफे पर बैठकर सुस्ताने लगी.
"तुमने सच में शक्तिशाली चुदाई की है, और मेरी हड्डियाँ हिला दीं. पर आनंद बहुत मिला. कुछ सदस्य तो तुम्हारे लिए पागल ही हो जाएँगी."
"आपने उकसाया न होता तो प्यार से करता."
"नहीं, मुझे क्लब में ऐसे ही चुदना पसंद है. क्या एक ड्रिंक लोगे? फिर इंटरव्यू का दूसरा चरण शुरू करेंगे."
"ठीक है."
शोनाली दोनों के लिए एक मंहगी व्हिस्की का पेग बनाकर आयी.
"हमारे परिवारों को मिलना चाहिए, एक बार." शोनाली मन में कुछ सोचते हुए एक घूँट लेकर बोली.
"नाना से पूछूंगा. मना तो नहीं करेंगे."
कुछ समय यूँ ही बातें करते हुए दोनों ने ड्रिंक ख़त्म की.
"मुझे तो अगले चरण से डर लग रहा है."
"क्यों आंटी?"
"क्लब की अधिकतर महिलाओं को गांड मरवाना अत्यधिक पसंद है. कुछ हैं जो केवल गांड ही मरवाती हैं, जो कुछ रोमियो को नहीं भाता। इसीलिए हमने ये टेस्ट रखा है. क्या तुम्हें गांड मारना पसंद है?"
"अत्यंत. नानी और मम्मी तो गांड मरवाने की रसिया हैं. जब तक दिन में एक बार उनकी गांड की खुजली नहीं मिटाई जाये वो बेचैन रहती हैं. आप चाहें तो उन सारी सदस्यों को जो सिर्फ गांड मरवाना पसंद करती है, मुझे दे सकती है."
"पर सुनो, ऐसी दरिंदगी से मत मारना कि चल न सकूं."
"आप बेफिक्र रहिये. इतने प्यार से मारूंगा कि आप मुझे मान जाएँगी."
"ठीक है. पर ठहरो, मुझे गांड मरवाते समय लंड चूसने अच्छा लगता है. मैं किसी को बुलाती हूँ. तुम्हे आपत्ति तो नहीं है."
"मुझे कोई आपत्ति नहीं है."
शोनाली ने सोनम को फोन लगाकर सचिन को भेजने के लिया कहा.
"दूसरे चरण के लिए लड़का फिट है?" सोनम ने पूछा. उसे शोनाली का स्वाद पता था.
"बिलकुल".
“चलो अब तुम मेरी गांड तैयार करो और सचिन की चिंता मत करना.”
"नो प्रॉब्लम, आंटी जी. बिस्तर पर चलें?"
"नहीं, यहीं कालीन पर. मुझे दो तकिये दो अपने घुटने के नीचे रखने के लिए. और टेबल पर पड़े जैल को भी ले लो."
निखिल बिस्तर पर से दो तकिये उठा लाया और जैल भी ले आया. शोनाली ने तकिये अपने घुटनों और हाथ के नीचे रखे और गांड को आसमान की ओर उठा दिया. निखिल उसके पीछे झुका और उसकी गांड पर अपना मुंह रखकर चाटने लगा. फिर दोनों हाथों से उसने उस रहस्यमई द्वार के पट खोले और अपनी जीभ से कुरेदने लगा. तभी शोनाली को कुछ याद आया. उसने निखिल से कहा कि ड्रावर के अंदर एक बट प्लग रखा है, उसे निकाल ले.
"जब मेरी गांड में अपना माल छोड़ोगे तो इसे लगा देना जिससे तुम्हारा माल अंदर ही रहे."
"ऐसा क्यों?"
"क्योंकि तुम्हारी सुमति आंटी को गांड से निकला हुआ वीर्य बहुत स्वादिष्ट लगता है. तो ये उनके लिए प्रसाद होगा. हर नए रोमियो के पानी को गांड में लेकर जाती हूँ. उन्हें कुछ समय तक गांड में रुका हुआ वीर्य तो और भी अधिक प्रिय है."
निखिल अचंभित हो गया, पर जाकर बट प्लग ले आया.
"ओके, अब शुरू हो जाये जहाँ पर छोड़े थे."
निखिल ने फिर अपना कार्यक्रम पुनरारंभ कर दिया. अपनी जीभ से शोनाली के गांड खोदने लगा और उसके आसपास के भूरे सिकुड़ी रेखाओं से बने हुए गांड के छेद को चाटने लगा. जब उसे लगा कि गांड अब लौड़ा खाने के लिए उपयुक्त है, तब उसने ट्यूब को शोनाली की गांड में डाला और ढेर सारा जैल उसमे भर दिया. फिर दो उँगलियों से उसे अच्छे से गांड के अंदर फैलाया और उसकी गांड को चौडाने लगा. तभी दरवाज़ा खुला और एक लड़का गाउन पहने हुए अंदर आया.
"हेलो शोनाली मैम! सोनम ने कहा आप गांड मरवाने वाली हो तो चूसने के लिए भी लंड चाहिए."
"आ जा सचिन. इससे मिल, ये निखिल है. और अब ये मेरी गांड मारने जा रहा है. तो तू सामने आ जा और दे दे अपना लंड मेरे मुंह में."
"हाय निखिल, आई ऍम सचिन." अपना गाउन उतारते हुए सचिन ने अपना परिचय दिया.
"हेलो सचिन." हाथ मिलते हुए निखिल ने उसे स्वीकार किया.
निखिल ने जब देखा की गांड मस्त तैयार है, तब उसने अपने लंड पर भी जैल लगाया और अच्छे से चिपड़कर चिकना कर दिया. उधर सचिन ने अपना लंड शोनाली के सामने प्रस्तुत किया जिसे शोनाली सहर्ष मुंह में लेकर पूरी तन्मयता से चूसने और चाटने लगी. निखिल ने अपने लंड को शोनाली लुपलुपाते हुए गांड के छेद पर रखा और हल्का सा दबाव बनाया. थोड़ा ठहर कर सुपाड़ा गप्प से अंदर चला गया. निखिल ने अत्यधिक संयम दिखते हुए अपने लंड को धीरे धीरे अंदर पेलना शुरू किया और लगभग ४-५ मिनट में जड़ तक समा दिया.
"ओह, वाह. क्या लंड है तेरा. बिलकुल गांड भर दी तूने अच्छे से. अब धीरे से पेलना, थोड़ा चलने के बाद तेज चुदाई करना." ये निर्देश देकर शोनाली वापिस सचिन के लंड पर पिल गई.
निखिल ने वैसा ही किया, हल्के धक्कों से प्रारम्भ करके धीरे धीरे गति बढ़ाने लगा. कुछ ही समय में वो अपना पूरा लंड तेजी के साथ शोनाली की गांड में पेल रहा था. तभी दरवाज़ा खुला और पार्थ अंदर आया, उसे शीघ्र ही कहीं जाना था तो वो थोड़ी ही बात करके निकल गया. निखिल ने अपना कार्यक्रम चलने दिया और लम्बे ताकतवर धक्कों से उसने शोनाली की गांड का कीमा बना दिया. शोनाली अब हर क्षण झड़ रही थी. सचिन ने बताया कि वो भी निकट है, पर शोनाली रुकी नहीं बल्कि और गहराई से चूसने लगी. तभी निखिल ने भी घोषणा की कि उसका भी निकलने वाला है.
"अंदर ही डालना और फिर बट प्लग से बंद कर देना गांड को मेरी." शोनाली ने उसे चेताया.
निखिल ने बगल से प्लग उठा लिया और एक हुंकार के साथ शोनाली की गांड में अपना पानी छोड़ दिया. लंड सिकुड़ने के बाद उसने बाहर निकला और प्लग से शोनाली की गांड का द्वार सील कर दिया. शोनाली ने अपनी गांड मटका कर और थोड़े अंदरूनी खिचांव से प्लग को ठीक से अंदर किया। उधर सचिन ने भी अपना माल शोनाली के मुंह में छोड़ा जिसे शोनाली ने एक अच्छी चुड़क्कड़ रंडी की तरह कुछ पिया और कुछ अपने चेहरे और वक्ष पर मल लिया.
सचिन ने शोनाली की ओर देखा, “लगता है निखिल ने भरपूर मॉल छोड़ा है आपकी सिस-इन-लॉ के लिए.”
“ओह, यस! शी विल बी वेरी हैप्पी!” शोनाली ने कहा.
फिर वो उठी और किसी पेशेवर विश्लेषक की तरह निखिल का फॉर्म लिया और उस पर उत्तीर्ण और आवेदन स्वीकृत लिखकर हस्ताक्षर कर दिए.
"निखिल, वेलकम टू दिंची क्लब." शोनाली ने उससे हाथ मिलाकर कहा.
सचिन ने भी हाथ बढ़ाया, "वेलकम ब्रो, तुम्हें यहाँ बहुत आनंद आएगा."
"धन्यवाद आप दोनों का. मुझे भी यही आशा है."
कहते हुए सब अपने कपडे पहनने के लिए निकल गए.
दिंची क्लब: पहला साक्षात्कार (Interview) :- पुरुष आवेदक.
एक सुन्दर मध्यम उम्र की सहायिका ने रोमियो के नए आवेदक को कमरे में ले जाकर कपड़े उतार कर गाउन पहनने को कहा. निखिल ने निसंकोच वहीँ अपने कपड़े उतारे और गाउन पहन लिया. सहायिका जिसका नाम सोनम था, ने निखिल के मुरझाये लंड को देखकर अपने सूखे होंठों पर जीभ चलाई. पर वो जानती थी कि आज उसका दिन नहीं है. वो अपनी भावनाएं मन में दबाकर कमरे से चली गई. कुछ ही समय पश्चात् शोनाली ने कमरे में प्रवेश किया. उसने भी वही गाउन पहना हुआ था.
"नमस्ते, मैडम! " निखिल ने उसका अभिवादन किया.
"नमस्ते रोमियो, ये अचरज का विषय है न कि हम यहाँ मिल रहे हैं. पर जो होता है, अच्छे के लिए ही होता है.”
तभी सोनम ने कमरे में फिर प्रवेश किया. उसके हाथ में एक फीता था.
"हमें पहले औपचारिकता पूरी करनी होगी. सोनम, प्लीज इनके लंड को चूसकर खड़ा करो और उसका नाप लो."
सोनम की आँखों में चमक आ गई. उसने हाथ पकड़कर आवेदक को सोफे पर बैठाया और उसके गाउन को साइड में करते हुए बिना देरी किये हुए उसका लंड अपने मुंह में ले लिया. वो अपने भाग्य को धन्य कर रही थी, क्योंकि अधिकतर उसे मात्र देखने और नापने के लिए ही बुलाया जाता था. पर लगता है, आज शोनाली बहुत अच्छे मूड में है. वो लंड चूसने में पारंगत थी और चाट चाट कर और चूस चूस कर कुछ ही देर में निखिल के लंड को अपने प्रताप में ले आयी.
"शोनाली, ये तैयार है."
"ठीक है नापो."
"हम्म्म, 11.२ इंच लम्बाई।"
"३ इंच गोलाई।"
"शोनाली, ये मापदंड पर खरा है."
"ओके, सोनम. तुम रिकॉर्ड के लिए फोटो लो, और प्रविष्टि कर लो. ये अत्यंत लोकप्रिय होने वाला है."
सोनम अपना कार्य संपन्न करके चली गई. आवेदक खड़ा हो गया पर उसका लंड गाउन के बाहर अभी भी तन्नाया हुआ था. शोनाली ने उसे बाँहों में लेकर एक गहरा चुम्बन लिया.
"मुझे तो पता भी नहीं था कि तुम इतना बड़ा लंड लिया घूमते हो."
"हाँ,, इस विषय में हम दोनों भाई बहुत धनी हैं."
"तो क्या तुम्हारा भाई भी? वो छोटू भी?"
"बिल्कुल "
"हम्म्म्म शायद उसे भी सदस्य बनाया जा सकता है. पर वो बाद में. हम अपना इंटरव्यू शुरू करते हैं."
"पहली बात ये कि ये क्लब हमारी महिला सदस्यों के सुख और आनंद के लिए है. तुम्हारा दायित्व होगा कि जिस सदस्या ने तुम्हें चुना हो, उसे पूर्ण रूप से प्रसन्न करना. कुछ की विशेष रुचियाँ रहती हैं, परन्तु मुझे विश्वास है कि इसमें तुम्हें भी आनंद आएगा। पर पहले उनकी इच्छा पूरी करना तुम्हारा दायित्व है."
"जी"
"और उन सब से पहले तुम्हें मुझे संतुष्ट करना होगा।" शोनाली ने अर्थ भरी मुस्कान से कहा, “क्योंकि मैं इस साक्षात्कार में ये सुनिश्चित करुँगी कि न केवल तुम्हें एक शक्तिशाली लंड प्राप्त है, बल्कि तुम इसके उपयोग में भी पारंगत हो.”
निखिल उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया. फिर उसने शोनाली का एक पांव उठाया और उसकी सैंडल निकाल दी. यही उसने दूसरे पांव के साथ किया. उसने शोनाली को सोफे पर बैठने का इशारा किया. फिर शोनाली के एक पैर को चूमने और चाटने लगा.
"ओह" शोनाली के मुंह से निकला.
"आपकी सेवा में निखिल प्रस्तुत है, देवी."
निखिल कुछ देर यूँ ही दोनों पांवों को चूमता और चाटता रहा. फिर वो खड़ा हो गया और शोनाली का हाथ पकड़कर उसे भी खड़ा कर दिया. उसने शोनाली का गाउन खोला और निकाल दिया. फिर दोबारा शोनाली को सोफे पर बैठा दिया और उसके पाँव फैलाकर अपने हाथ से उसकी चूत को सहलाने लगा. शोनाली एक तन्द्रा में आ गई. उसके बाद निखिल ने अपना मुंह उसकी एकदम चिकनी चूत पर लगाया और उसे चाटने लगा. उसने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डालकर उसे हलके हलके से चोदने लगा. साथ ही अपने मुंह से उसे चाटता जा रहा थे. फिर उसने अपने होंठों से भग्नासे को दबाया और मसलने लगा. शोनाली बेकाबू होकर झड़ने लगी. निखिल ने अपनी उंगली निकली और अपनी जीभ अंदर डाल दी और सडप सडप कर पानी पीने लगा.
"ओह माँ. क्या जादू है मेरी जीभ में. कहाँ से ट्यूशन ली है जो इस उम्र में इतना निपुण हो गया."
"कहीं नहीं आंटी , बस समझो होम ट्यूशन है."
"तू सुप्रिया को चोदता है?" शोनाली से आश्चर्य से पूछा.
"और नितिन भी. और हम दोनों नानी को भी चोदते हैं."
"ओह. शीलाजी तो अब ६५ की होगी ही. उसे भी तुमने नहीं बख्शा।"
"हम कौन हैं बख्शने वाले, उल्टा उन्होंने ने हमें प्रशिक्षित किया है."
ये सब बातें करते समय निखिल अपनी २ उंगलियां शोनाली की चूत में चला रहा था.
"और तेरे नाना?
"वो मां और मौसी को चोदते हैं."
"सुरेखा तो ऐसी नहीं लगती."
"अभी पिछले हफ्ते ही उनका उद्घाटन किया है. हम दोनों भाइयों को अभी तक अवसर नहीं मिला है. आंटी, आप मेरा लंड चूसोगी, प्लीज?"
"नेकी और पूछ पूछ. ला इधर ला" शोनाली ने उतावली होकर कहा.
निखिल खड़ा हो गया और अपना गाउन उतार फेंका. शोनाली सोफे पर आगे हुई और थोड़ी देर लंड को सहलाते हुए गपाक से में अपने मुंह में ले ली. पहले तो वो हल्के हलके से चूसी फिर भूखी शेरनी की तरह उसे चूमने और चाटने लगी. थोड़ी ही देर में निखिल का लंड लोहे की रॉड जैसा तन गया.
"चलो बिस्तर पर चलते है,"
दोनों बिस्तर की ओर बढे. वहां शोनाली ने एक तकिया अपनी गांड के नीचे लगाई और एक सिर के नीचे और पैर फैला दिए.
"आ जा मेरे घुड़सवार, चढ़ जा घोड़ी पर और दिखा कितना दम है तुझमें. मुझे ताबड़तोड़ और गहरी चुदाई पसंद है. है तेरे बस की?" शोनाली ने उसे उकसाते हुए कहा.
"मैं अपनी पूरी चेष्टा करूंगा. पर अभी तक किसी ने कमी नहीं निकाली. पर आप मुझे बीच में टोकना नहीं."
"अरे तेरे जैसे लौड़े दिन में तीन बार खाती हूँ. मैं क्यों टोकूंगी तुझे?"
निखिल ने अपना स्थान लिया, शोनाली की चूत पर अपने लंड को लगाकर, उसके दोनों मम्मों को हाथ में ले लिया.
"चलो आंटी, यात्रा पर चलते हैं."
कहते हुए उसने एक लम्बा शॉट मारा. धक्का इतना शक्तिशाली था कि पलंग हिल गया. और पूरा ११ इंच का मूसल एक ही बार में अंदर चला गया. शोनाली की तो आँखें बाहर आ गयीं और साँस रुक गयी. उसे लगा कि किसी ने उसकी चूत को चाकू से चीर दिया हो.
"अबे भोसड़ी के, कोई एक बार में पेलता है ऐसा मूसल."
"पर आंटी आप ही तो बोलीं थीं की आपको ऐसी चुदाई पसंद है और ऐसे लौड़े आप दिन में तीन बार लेती हैं. और मैं आज आपका सेवक हूँ. अपने जैसा चाहा था उसे पूरा किये बिना अब मैं नहीं रुकूंगा."
कहकर निखिल ने अपना पूरा लंड निकला और दोबारा उसी तेजी से पेल दिया. और फिर ये क्रम बिना रुके चलित हो गया. शोनाली संभल ही नहीं पा रही थी. गहरे, लम्बे और तेज धक्कों के आगे वो बेबस थी. पर उसकी चूत इस पर अनुकूल प्रतिक्रिया कर रही थी. उसका पानी छूटने लगा था. इससे हुआ ये कि निखिल के भीषण धक्के थोड़े आसान हो गए झेलने में.
"तू अपनी नानी को भी ऐसे ही चोदता है क्या, इस बेदर्दी से."
"अरे उन्हें तो हम तीनों को एक साथ चोदना पड़ता है. उनकी आयु पर मत जाओ वो आपके जैसी स्त्रियों को पानी पिला दे."
"देखती हूँ."
निखिल के धक्के अब असहज और भयावने हो रहे थे. पर अब शोनाली ने खेल समझ लिया था और पूरा साथ दे रही थी. वो रह रह कर झड़ रही थी और उसका शरीर अब एक गुड़िया की तरह उछल रहा था. कोई १० से १५ मिनट यूँ चोदने के बाद निखिल अपने शीर्ष पर पहुँच गया.
"मैं झड़ने वाला हूँ."
"शुक्र है" शोनाली ने मन में सोचा फिर बोली, "अंदर मत छोड़ना मेरे मुंह में छोड़ना."
"तो फिर उठिये."
निखिल ने अपने लंड को धीरे धीरे बाहर निकाला। जैसे ही उनका टोपा बाहर आया, शोनाली एक बार और झड़ गई. उसने निखिल को सोफे पर बैठाया और उसका लंड चूमने चाटने लगी. फिर मुंह में लेकर ऐसा दबाव बनाया कि निखिल का पानी छूटने लगा. शोनाली ने निसंकोच पूरा रस पी लिया और फिर उठकर सोफे पर बैठकर सुस्ताने लगी.
"तुमने सच में शक्तिशाली चुदाई की है, और मेरी हड्डियाँ हिला दीं. पर आनंद बहुत मिला. कुछ सदस्य तो तुम्हारे लिए पागल ही हो जाएँगी."
"आपने उकसाया न होता तो प्यार से करता."
"नहीं, मुझे क्लब में ऐसे ही चुदना पसंद है. क्या एक ड्रिंक लोगे? फिर इंटरव्यू का दूसरा चरण शुरू करेंगे."
"ठीक है."
शोनाली दोनों के लिए एक मंहगी व्हिस्की का पेग बनाकर आयी.
"हमारे परिवारों को मिलना चाहिए, एक बार." शोनाली मन में कुछ सोचते हुए एक घूँट लेकर बोली.
"नाना से पूछूंगा. मना तो नहीं करेंगे."
कुछ समय यूँ ही बातें करते हुए दोनों ने ड्रिंक ख़त्म की.
"मुझे तो अगले चरण से डर लग रहा है."
"क्यों आंटी?"
"क्लब की अधिकतर महिलाओं को गांड मरवाना अत्यधिक पसंद है. कुछ हैं जो केवल गांड ही मरवाती हैं, जो कुछ रोमियो को नहीं भाता। इसीलिए हमने ये टेस्ट रखा है. क्या तुम्हें गांड मारना पसंद है?"
"अत्यंत. नानी और मम्मी तो गांड मरवाने की रसिया हैं. जब तक दिन में एक बार उनकी गांड की खुजली नहीं मिटाई जाये वो बेचैन रहती हैं. आप चाहें तो उन सारी सदस्यों को जो सिर्फ गांड मरवाना पसंद करती है, मुझे दे सकती है."
"पर सुनो, ऐसी दरिंदगी से मत मारना कि चल न सकूं."
"आप बेफिक्र रहिये. इतने प्यार से मारूंगा कि आप मुझे मान जाएँगी."
"ठीक है. पर ठहरो, मुझे गांड मरवाते समय लंड चूसने अच्छा लगता है. मैं किसी को बुलाती हूँ. तुम्हे आपत्ति तो नहीं है."
"मुझे कोई आपत्ति नहीं है."
शोनाली ने सोनम को फोन लगाकर सचिन को भेजने के लिया कहा.
"दूसरे चरण के लिए लड़का फिट है?" सोनम ने पूछा. उसे शोनाली का स्वाद पता था.
"बिलकुल".
“चलो अब तुम मेरी गांड तैयार करो और सचिन की चिंता मत करना.”
"नो प्रॉब्लम, आंटी जी. बिस्तर पर चलें?"
"नहीं, यहीं कालीन पर. मुझे दो तकिये दो अपने घुटने के नीचे रखने के लिए. और टेबल पर पड़े जैल को भी ले लो."
निखिल बिस्तर पर से दो तकिये उठा लाया और जैल भी ले आया. शोनाली ने तकिये अपने घुटनों और हाथ के नीचे रखे और गांड को आसमान की ओर उठा दिया. निखिल उसके पीछे झुका और उसकी गांड पर अपना मुंह रखकर चाटने लगा. फिर दोनों हाथों से उसने उस रहस्यमई द्वार के पट खोले और अपनी जीभ से कुरेदने लगा. तभी शोनाली को कुछ याद आया. उसने निखिल से कहा कि ड्रावर के अंदर एक बट प्लग रखा है, उसे निकाल ले.
"जब मेरी गांड में अपना माल छोड़ोगे तो इसे लगा देना जिससे तुम्हारा माल अंदर ही रहे."
"ऐसा क्यों?"
"क्योंकि तुम्हारी सुमति आंटी को गांड से निकला हुआ वीर्य बहुत स्वादिष्ट लगता है. तो ये उनके लिए प्रसाद होगा. हर नए रोमियो के पानी को गांड में लेकर जाती हूँ. उन्हें कुछ समय तक गांड में रुका हुआ वीर्य तो और भी अधिक प्रिय है."
निखिल अचंभित हो गया, पर जाकर बट प्लग ले आया.
"ओके, अब शुरू हो जाये जहाँ पर छोड़े थे."
निखिल ने फिर अपना कार्यक्रम पुनरारंभ कर दिया. अपनी जीभ से शोनाली के गांड खोदने लगा और उसके आसपास के भूरे सिकुड़ी रेखाओं से बने हुए गांड के छेद को चाटने लगा. जब उसे लगा कि गांड अब लौड़ा खाने के लिए उपयुक्त है, तब उसने ट्यूब को शोनाली की गांड में डाला और ढेर सारा जैल उसमे भर दिया. फिर दो उँगलियों से उसे अच्छे से गांड के अंदर फैलाया और उसकी गांड को चौडाने लगा. तभी दरवाज़ा खुला और एक लड़का गाउन पहने हुए अंदर आया.
"हेलो शोनाली मैम! सोनम ने कहा आप गांड मरवाने वाली हो तो चूसने के लिए भी लंड चाहिए."
"आ जा सचिन. इससे मिल, ये निखिल है. और अब ये मेरी गांड मारने जा रहा है. तो तू सामने आ जा और दे दे अपना लंड मेरे मुंह में."
"हाय निखिल, आई ऍम सचिन." अपना गाउन उतारते हुए सचिन ने अपना परिचय दिया.
"हेलो सचिन." हाथ मिलते हुए निखिल ने उसे स्वीकार किया.
निखिल ने जब देखा की गांड मस्त तैयार है, तब उसने अपने लंड पर भी जैल लगाया और अच्छे से चिपड़कर चिकना कर दिया. उधर सचिन ने अपना लंड शोनाली के सामने प्रस्तुत किया जिसे शोनाली सहर्ष मुंह में लेकर पूरी तन्मयता से चूसने और चाटने लगी. निखिल ने अपने लंड को शोनाली लुपलुपाते हुए गांड के छेद पर रखा और हल्का सा दबाव बनाया. थोड़ा ठहर कर सुपाड़ा गप्प से अंदर चला गया. निखिल ने अत्यधिक संयम दिखते हुए अपने लंड को धीरे धीरे अंदर पेलना शुरू किया और लगभग ४-५ मिनट में जड़ तक समा दिया.
"ओह, वाह. क्या लंड है तेरा. बिलकुल गांड भर दी तूने अच्छे से. अब धीरे से पेलना, थोड़ा चलने के बाद तेज चुदाई करना." ये निर्देश देकर शोनाली वापिस सचिन के लंड पर पिल गई.
निखिल ने वैसा ही किया, हल्के धक्कों से प्रारम्भ करके धीरे धीरे गति बढ़ाने लगा. कुछ ही समय में वो अपना पूरा लंड तेजी के साथ शोनाली की गांड में पेल रहा था. तभी दरवाज़ा खुला और पार्थ अंदर आया, उसे शीघ्र ही कहीं जाना था तो वो थोड़ी ही बात करके निकल गया. निखिल ने अपना कार्यक्रम चलने दिया और लम्बे ताकतवर धक्कों से उसने शोनाली की गांड का कीमा बना दिया. शोनाली अब हर क्षण झड़ रही थी. सचिन ने बताया कि वो भी निकट है, पर शोनाली रुकी नहीं बल्कि और गहराई से चूसने लगी. तभी निखिल ने भी घोषणा की कि उसका भी निकलने वाला है.
"अंदर ही डालना और फिर बट प्लग से बंद कर देना गांड को मेरी." शोनाली ने उसे चेताया.
निखिल ने बगल से प्लग उठा लिया और एक हुंकार के साथ शोनाली की गांड में अपना पानी छोड़ दिया. लंड सिकुड़ने के बाद उसने बाहर निकला और प्लग से शोनाली की गांड का द्वार सील कर दिया. शोनाली ने अपनी गांड मटका कर और थोड़े अंदरूनी खिचांव से प्लग को ठीक से अंदर किया। उधर सचिन ने भी अपना माल शोनाली के मुंह में छोड़ा जिसे शोनाली ने एक अच्छी चुड़क्कड़ रंडी की तरह कुछ पिया और कुछ अपने चेहरे और वक्ष पर मल लिया.
सचिन ने शोनाली की ओर देखा, “लगता है निखिल ने भरपूर मॉल छोड़ा है आपकी सिस-इन-लॉ के लिए.”
“ओह, यस! शी विल बी वेरी हैप्पी!” शोनाली ने कहा.
फिर वो उठी और किसी पेशेवर विश्लेषक की तरह निखिल का फॉर्म लिया और उस पर उत्तीर्ण और आवेदन स्वीकृत लिखकर हस्ताक्षर कर दिए.
"निखिल, वेलकम टू दिंची क्लब." शोनाली ने उससे हाथ मिलाकर कहा.
सचिन ने भी हाथ बढ़ाया, "वेलकम ब्रो, तुम्हें यहाँ बहुत आनंद आएगा."
"धन्यवाद आप दोनों का. मुझे भी यही आशा है."
कहते हुए सब अपने कपडे पहनने के लिए निकल गए.