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Incest कैसे कैसे परिवार

अध्याय ९: मिश्रण - दिंची क्लब और दो परिवार

दिंची क्लब: पहला साक्षात्कार (Interview) :- पुरुष आवेदक.

एक सुन्दर मध्यम उम्र की सहायिका ने रोमियो के नए आवेदक को कमरे में ले जाकर कपड़े उतार कर गाउन पहनने को कहा. निखिल ने निसंकोच वहीँ अपने कपड़े उतारे और गाउन पहन लिया. सहायिका जिसका नाम सोनम था, ने निखिल के मुरझाये लंड को देखकर अपने सूखे होंठों पर जीभ चलाई. पर वो जानती थी कि आज उसका दिन नहीं है. वो अपनी भावनाएं मन में दबाकर कमरे से चली गई. कुछ ही समय पश्चात् शोनाली ने कमरे में प्रवेश किया. उसने भी वही गाउन पहना हुआ था.

"नमस्ते, मैडम! " निखिल ने उसका अभिवादन किया.

"नमस्ते रोमियो, ये अचरज का विषय है न कि हम यहाँ मिल रहे हैं. पर जो होता है, अच्छे के लिए ही होता है.”

तभी सोनम ने कमरे में फिर प्रवेश किया. उसके हाथ में एक फीता था.

"हमें पहले औपचारिकता पूरी करनी होगी. सोनम, प्लीज इनके लंड को चूसकर खड़ा करो और उसका नाप लो."

सोनम की आँखों में चमक आ गई. उसने हाथ पकड़कर आवेदक को सोफे पर बैठाया और उसके गाउन को साइड में करते हुए बिना देरी किये हुए उसका लंड अपने मुंह में ले लिया. वो अपने भाग्य को धन्य कर रही थी, क्योंकि अधिकतर उसे मात्र देखने और नापने के लिए ही बुलाया जाता था. पर लगता है, आज शोनाली बहुत अच्छे मूड में है. वो लंड चूसने में पारंगत थी और चाट चाट कर और चूस चूस कर कुछ ही देर में निखिल के लंड को अपने प्रताप में ले आयी.

"शोनाली, ये तैयार है."

"ठीक है नापो."

"हम्म्म, 11.२ इंच लम्बाई।"

"३ इंच गोलाई।"

"शोनाली, ये मापदंड पर खरा है."

"ओके, सोनम. तुम रिकॉर्ड के लिए फोटो लो, और प्रविष्टि कर लो. ये अत्यंत लोकप्रिय होने वाला है."

सोनम अपना कार्य संपन्न करके चली गई. आवेदक खड़ा हो गया पर उसका लंड गाउन के बाहर अभी भी तन्नाया हुआ था. शोनाली ने उसे बाँहों में लेकर एक गहरा चुम्बन लिया.

"मुझे तो पता भी नहीं था कि तुम इतना बड़ा लंड लिया घूमते हो."

"हाँ,, इस विषय में हम दोनों भाई बहुत धनी हैं."

"तो क्या तुम्हारा भाई भी? वो छोटू भी?"

"बिल्कुल "

"हम्म्म्म शायद उसे भी सदस्य बनाया जा सकता है. पर वो बाद में. हम अपना इंटरव्यू शुरू करते हैं."

"पहली बात ये कि ये क्लब हमारी महिला सदस्यों के सुख और आनंद के लिए है. तुम्हारा दायित्व होगा कि जिस सदस्या ने तुम्हें चुना हो, उसे पूर्ण रूप से प्रसन्न करना. कुछ की विशेष रुचियाँ रहती हैं, परन्तु मुझे विश्वास है कि इसमें तुम्हें भी आनंद आएगा। पर पहले उनकी इच्छा पूरी करना तुम्हारा दायित्व है."

"जी"

"और उन सब से पहले तुम्हें मुझे संतुष्ट करना होगा।" शोनाली ने अर्थ भरी मुस्कान से कहा, “क्योंकि मैं इस साक्षात्कार में ये सुनिश्चित करुँगी कि न केवल तुम्हें एक शक्तिशाली लंड प्राप्त है, बल्कि तुम इसके उपयोग में भी पारंगत हो.”

निखिल उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया. फिर उसने शोनाली का एक पांव उठाया और उसकी सैंडल निकाल दी. यही उसने दूसरे पांव के साथ किया. उसने शोनाली को सोफे पर बैठने का इशारा किया. फिर शोनाली के एक पैर को चूमने और चाटने लगा.

"ओह" शोनाली के मुंह से निकला.

"आपकी सेवा में निखिल प्रस्तुत है, देवी."

निखिल कुछ देर यूँ ही दोनों पांवों को चूमता और चाटता रहा. फिर वो खड़ा हो गया और शोनाली का हाथ पकड़कर उसे भी खड़ा कर दिया. उसने शोनाली का गाउन खोला और निकाल दिया. फिर दोबारा शोनाली को सोफे पर बैठा दिया और उसके पाँव फैलाकर अपने हाथ से उसकी चूत को सहलाने लगा. शोनाली एक तन्द्रा में आ गई. उसके बाद निखिल ने अपना मुंह उसकी एकदम चिकनी चूत पर लगाया और उसे चाटने लगा. उसने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डालकर उसे हलके हलके से चोदने लगा. साथ ही अपने मुंह से उसे चाटता जा रहा थे. फिर उसने अपने होंठों से भग्नासे को दबाया और मसलने लगा. शोनाली बेकाबू होकर झड़ने लगी. निखिल ने अपनी उंगली निकली और अपनी जीभ अंदर डाल दी और सडप सडप कर पानी पीने लगा.

"ओह माँ. क्या जादू है मेरी जीभ में. कहाँ से ट्यूशन ली है जो इस उम्र में इतना निपुण हो गया."

"कहीं नहीं आंटी , बस समझो होम ट्यूशन है."

"तू सुप्रिया को चोदता है?" शोनाली से आश्चर्य से पूछा.

"और नितिन भी. और हम दोनों नानी को भी चोदते हैं."

"ओह. शीलाजी तो अब ६५ की होगी ही. उसे भी तुमने नहीं बख्शा।"

"हम कौन हैं बख्शने वाले, उल्टा उन्होंने ने हमें प्रशिक्षित किया है."

ये सब बातें करते समय निखिल अपनी २ उंगलियां शोनाली की चूत में चला रहा था.

"और तेरे नाना?

"वो मां और मौसी को चोदते हैं."

"सुरेखा तो ऐसी नहीं लगती."

"अभी पिछले हफ्ते ही उनका उद्घाटन किया है. हम दोनों भाइयों को अभी तक अवसर नहीं मिला है. आंटी, आप मेरा लंड चूसोगी, प्लीज?"

"नेकी और पूछ पूछ. ला इधर ला" शोनाली ने उतावली होकर कहा.

निखिल खड़ा हो गया और अपना गाउन उतार फेंका. शोनाली सोफे पर आगे हुई और थोड़ी देर लंड को सहलाते हुए गपाक से में अपने मुंह में ले ली. पहले तो वो हल्के हलके से चूसी फिर भूखी शेरनी की तरह उसे चूमने और चाटने लगी. थोड़ी ही देर में निखिल का लंड लोहे की रॉड जैसा तन गया.

"चलो बिस्तर पर चलते है,"

दोनों बिस्तर की ओर बढे. वहां शोनाली ने एक तकिया अपनी गांड के नीचे लगाई और एक सिर के नीचे और पैर फैला दिए.

"आ जा मेरे घुड़सवार, चढ़ जा घोड़ी पर और दिखा कितना दम है तुझमें. मुझे ताबड़तोड़ और गहरी चुदाई पसंद है. है तेरे बस की?" शोनाली ने उसे उकसाते हुए कहा.

"मैं अपनी पूरी चेष्टा करूंगा. पर अभी तक किसी ने कमी नहीं निकाली. पर आप मुझे बीच में टोकना नहीं."

"अरे तेरे जैसे लौड़े दिन में तीन बार खाती हूँ. मैं क्यों टोकूंगी तुझे?"

निखिल ने अपना स्थान लिया, शोनाली की चूत पर अपने लंड को लगाकर, उसके दोनों मम्मों को हाथ में ले लिया.

"चलो आंटी, यात्रा पर चलते हैं."

कहते हुए उसने एक लम्बा शॉट मारा. धक्का इतना शक्तिशाली था कि पलंग हिल गया. और पूरा ११ इंच का मूसल एक ही बार में अंदर चला गया. शोनाली की तो आँखें बाहर आ गयीं और साँस रुक गयी. उसे लगा कि किसी ने उसकी चूत को चाकू से चीर दिया हो.

"अबे भोसड़ी के, कोई एक बार में पेलता है ऐसा मूसल."

"पर आंटी आप ही तो बोलीं थीं की आपको ऐसी चुदाई पसंद है और ऐसे लौड़े आप दिन में तीन बार लेती हैं. और मैं आज आपका सेवक हूँ. अपने जैसा चाहा था उसे पूरा किये बिना अब मैं नहीं रुकूंगा."

कहकर निखिल ने अपना पूरा लंड निकला और दोबारा उसी तेजी से पेल दिया. और फिर ये क्रम बिना रुके चलित हो गया. शोनाली संभल ही नहीं पा रही थी. गहरे, लम्बे और तेज धक्कों के आगे वो बेबस थी. पर उसकी चूत इस पर अनुकूल प्रतिक्रिया कर रही थी. उसका पानी छूटने लगा था. इससे हुआ ये कि निखिल के भीषण धक्के थोड़े आसान हो गए झेलने में.

"तू अपनी नानी को भी ऐसे ही चोदता है क्या, इस बेदर्दी से."

"अरे उन्हें तो हम तीनों को एक साथ चोदना पड़ता है. उनकी आयु पर मत जाओ वो आपके जैसी स्त्रियों को पानी पिला दे."

"देखती हूँ."

निखिल के धक्के अब असहज और भयावने हो रहे थे. पर अब शोनाली ने खेल समझ लिया था और पूरा साथ दे रही थी. वो रह रह कर झड़ रही थी और उसका शरीर अब एक गुड़िया की तरह उछल रहा था. कोई १० से १५ मिनट यूँ चोदने के बाद निखिल अपने शीर्ष पर पहुँच गया.

"मैं झड़ने वाला हूँ."

"शुक्र है" शोनाली ने मन में सोचा फिर बोली, "अंदर मत छोड़ना मेरे मुंह में छोड़ना."

"तो फिर उठिये."

निखिल ने अपने लंड को धीरे धीरे बाहर निकाला। जैसे ही उनका टोपा बाहर आया, शोनाली एक बार और झड़ गई. उसने निखिल को सोफे पर बैठाया और उसका लंड चूमने चाटने लगी. फिर मुंह में लेकर ऐसा दबाव बनाया कि निखिल का पानी छूटने लगा. शोनाली ने निसंकोच पूरा रस पी लिया और फिर उठकर सोफे पर बैठकर सुस्ताने लगी.

"तुमने सच में शक्तिशाली चुदाई की है, और मेरी हड्डियाँ हिला दीं. पर आनंद बहुत मिला. कुछ सदस्य तो तुम्हारे लिए पागल ही हो जाएँगी."

"आपने उकसाया न होता तो प्यार से करता."

"नहीं, मुझे क्लब में ऐसे ही चुदना पसंद है. क्या एक ड्रिंक लोगे? फिर इंटरव्यू का दूसरा चरण शुरू करेंगे."

"ठीक है."

शोनाली दोनों के लिए एक मंहगी व्हिस्की का पेग बनाकर आयी.

"हमारे परिवारों को मिलना चाहिए, एक बार." शोनाली मन में कुछ सोचते हुए एक घूँट लेकर बोली.

"नाना से पूछूंगा. मना तो नहीं करेंगे."

कुछ समय यूँ ही बातें करते हुए दोनों ने ड्रिंक ख़त्म की.

"मुझे तो अगले चरण से डर लग रहा है."

"क्यों आंटी?"

"क्लब की अधिकतर महिलाओं को गांड मरवाना अत्यधिक पसंद है. कुछ हैं जो केवल गांड ही मरवाती हैं, जो कुछ रोमियो को नहीं भाता। इसीलिए हमने ये टेस्ट रखा है. क्या तुम्हें गांड मारना पसंद है?"

"अत्यंत. नानी और मम्मी तो गांड मरवाने की रसिया हैं. जब तक दिन में एक बार उनकी गांड की खुजली नहीं मिटाई जाये वो बेचैन रहती हैं. आप चाहें तो उन सारी सदस्यों को जो सिर्फ गांड मरवाना पसंद करती है, मुझे दे सकती है."

"पर सुनो, ऐसी दरिंदगी से मत मारना कि चल न सकूं."

"आप बेफिक्र रहिये. इतने प्यार से मारूंगा कि आप मुझे मान जाएँगी."

"ठीक है. पर ठहरो, मुझे गांड मरवाते समय लंड चूसने अच्छा लगता है. मैं किसी को बुलाती हूँ. तुम्हे आपत्ति तो नहीं है."

"मुझे कोई आपत्ति नहीं है."

शोनाली ने सोनम को फोन लगाकर सचिन को भेजने के लिया कहा.

"दूसरे चरण के लिए लड़का फिट है?" सोनम ने पूछा. उसे शोनाली का स्वाद पता था.

"बिलकुल".

“चलो अब तुम मेरी गांड तैयार करो और सचिन की चिंता मत करना.”

"नो प्रॉब्लम, आंटी जी. बिस्तर पर चलें?"

"नहीं, यहीं कालीन पर. मुझे दो तकिये दो अपने घुटने के नीचे रखने के लिए. और टेबल पर पड़े जैल को भी ले लो."

निखिल बिस्तर पर से दो तकिये उठा लाया और जैल भी ले आया. शोनाली ने तकिये अपने घुटनों और हाथ के नीचे रखे और गांड को आसमान की ओर उठा दिया. निखिल उसके पीछे झुका और उसकी गांड पर अपना मुंह रखकर चाटने लगा. फिर दोनों हाथों से उसने उस रहस्यमई द्वार के पट खोले और अपनी जीभ से कुरेदने लगा. तभी शोनाली को कुछ याद आया. उसने निखिल से कहा कि ड्रावर के अंदर एक बट प्लग रखा है, उसे निकाल ले.

"जब मेरी गांड में अपना माल छोड़ोगे तो इसे लगा देना जिससे तुम्हारा माल अंदर ही रहे."

"ऐसा क्यों?"

"क्योंकि तुम्हारी सुमति आंटी को गांड से निकला हुआ वीर्य बहुत स्वादिष्ट लगता है. तो ये उनके लिए प्रसाद होगा. हर नए रोमियो के पानी को गांड में लेकर जाती हूँ. उन्हें कुछ समय तक गांड में रुका हुआ वीर्य तो और भी अधिक प्रिय है."

निखिल अचंभित हो गया, पर जाकर बट प्लग ले आया.

"ओके, अब शुरू हो जाये जहाँ पर छोड़े थे."

निखिल ने फिर अपना कार्यक्रम पुनरारंभ कर दिया. अपनी जीभ से शोनाली के गांड खोदने लगा और उसके आसपास के भूरे सिकुड़ी रेखाओं से बने हुए गांड के छेद को चाटने लगा. जब उसे लगा कि गांड अब लौड़ा खाने के लिए उपयुक्त है, तब उसने ट्यूब को शोनाली की गांड में डाला और ढेर सारा जैल उसमे भर दिया. फिर दो उँगलियों से उसे अच्छे से गांड के अंदर फैलाया और उसकी गांड को चौडाने लगा. तभी दरवाज़ा खुला और एक लड़का गाउन पहने हुए अंदर आया.

"हेलो शोनाली मैम! सोनम ने कहा आप गांड मरवाने वाली हो तो चूसने के लिए भी लंड चाहिए."

"आ जा सचिन. इससे मिल, ये निखिल है. और अब ये मेरी गांड मारने जा रहा है. तो तू सामने आ जा और दे दे अपना लंड मेरे मुंह में."

"हाय निखिल, आई ऍम सचिन." अपना गाउन उतारते हुए सचिन ने अपना परिचय दिया.

"हेलो सचिन." हाथ मिलते हुए निखिल ने उसे स्वीकार किया.

निखिल ने जब देखा की गांड मस्त तैयार है, तब उसने अपने लंड पर भी जैल लगाया और अच्छे से चिपड़कर चिकना कर दिया. उधर सचिन ने अपना लंड शोनाली के सामने प्रस्तुत किया जिसे शोनाली सहर्ष मुंह में लेकर पूरी तन्मयता से चूसने और चाटने लगी. निखिल ने अपने लंड को शोनाली लुपलुपाते हुए गांड के छेद पर रखा और हल्का सा दबाव बनाया. थोड़ा ठहर कर सुपाड़ा गप्प से अंदर चला गया. निखिल ने अत्यधिक संयम दिखते हुए अपने लंड को धीरे धीरे अंदर पेलना शुरू किया और लगभग ४-५ मिनट में जड़ तक समा दिया.

"ओह, वाह. क्या लंड है तेरा. बिलकुल गांड भर दी तूने अच्छे से. अब धीरे से पेलना, थोड़ा चलने के बाद तेज चुदाई करना." ये निर्देश देकर शोनाली वापिस सचिन के लंड पर पिल गई.

निखिल ने वैसा ही किया, हल्के धक्कों से प्रारम्भ करके धीरे धीरे गति बढ़ाने लगा. कुछ ही समय में वो अपना पूरा लंड तेजी के साथ शोनाली की गांड में पेल रहा था. तभी दरवाज़ा खुला और पार्थ अंदर आया, उसे शीघ्र ही कहीं जाना था तो वो थोड़ी ही बात करके निकल गया. निखिल ने अपना कार्यक्रम चलने दिया और लम्बे ताकतवर धक्कों से उसने शोनाली की गांड का कीमा बना दिया. शोनाली अब हर क्षण झड़ रही थी. सचिन ने बताया कि वो भी निकट है, पर शोनाली रुकी नहीं बल्कि और गहराई से चूसने लगी. तभी निखिल ने भी घोषणा की कि उसका भी निकलने वाला है.

"अंदर ही डालना और फिर बट प्लग से बंद कर देना गांड को मेरी." शोनाली ने उसे चेताया.

निखिल ने बगल से प्लग उठा लिया और एक हुंकार के साथ शोनाली की गांड में अपना पानी छोड़ दिया. लंड सिकुड़ने के बाद उसने बाहर निकला और प्लग से शोनाली की गांड का द्वार सील कर दिया. शोनाली ने अपनी गांड मटका कर और थोड़े अंदरूनी खिचांव से प्लग को ठीक से अंदर किया। उधर सचिन ने भी अपना माल शोनाली के मुंह में छोड़ा जिसे शोनाली ने एक अच्छी चुड़क्कड़ रंडी की तरह कुछ पिया और कुछ अपने चेहरे और वक्ष पर मल लिया.

सचिन ने शोनाली की ओर देखा, “लगता है निखिल ने भरपूर मॉल छोड़ा है आपकी सिस-इन-लॉ के लिए.”

“ओह, यस! शी विल बी वेरी हैप्पी!” शोनाली ने कहा.

फिर वो उठी और किसी पेशेवर विश्लेषक की तरह निखिल का फॉर्म लिया और उस पर उत्तीर्ण और आवेदन स्वीकृत लिखकर हस्ताक्षर कर दिए.

"निखिल, वेलकम टू दिंची क्लब." शोनाली ने उससे हाथ मिलाकर कहा.

सचिन ने भी हाथ बढ़ाया, "वेलकम ब्रो, तुम्हें यहाँ बहुत आनंद आएगा."

"धन्यवाद आप दोनों का. मुझे भी यही आशा है."

कहते हुए सब अपने कपडे पहनने के लिए निकल गए.
 
सुप्रिया सिंह का घर:

निखिल जब अपने घर पहुंचा तो बहुत रात हो चुकी थी. अपने कमरे की ओर बढ़ते हुए उसे अपनी माँ सुप्रिया के कमरे से सिसकारियों और फच फच की ध्वनि सुनाई दीं। वो मुस्क़ुराते हुए अपने कमरे में जाकर लेट गया. सम्भवतः नितिन उसकी माँ की चुदाई में व्यस्त था. उनकी माँ सच में एक अत्यंत कामुक स्त्री थी, चाहे जितना भी चुदे, अगली चुदाई के लिए सदैव तत्पर रहती थी. कभी कभी तो नितिन, वो और उनके नाना, तीनों भी उसे कम पड़ते थे. पर आज शोनाली आंटी को चोदकर बहुत आनंद मिला था. और अब तो उसकी झोली में और भी ऐसी ही गर्म और प्यासी औरतें गिरने वाली थीं।

उसकी माँ और नानी के सतत परिश्रम और प्रशिक्षण से नितिन और वो दोनों इस कला में अत्यंत पारंगत थे. ऐसा नहीं था कि वो और लड़कियों या महिलाओं को नहीं चोदते थे, पर उनके लंड को झेलना हर स्त्री के बस का नहीं था. इसी कारण उनकी ऑंखें हमेशा अपने दोस्तों की मम्मी या रिश्तेदार महिलाओ पर रहती थीँ . जहाँ उन्हें कोई भी लक्षण लगता कि वो उनकी चपेट में आ सकती है, तो वो अपना मोह जाल फैलाते थे और कुछ ही दिनों में वो आंटी अपने बिस्तर में उन्हें आमंत्रित कर लेती थी.

चूँकि उनकी माँ इतनी खुली थी तो उन स्त्रियों को वो अपने ही घर बुला लेते थे. अब ये समझना कठिन न होगा की नाना की कृपादृष्टि से उनका भी पूरा घर वीडियो से लैस था और कई बार जब उनमे से कोई नयी मुर्गी की चुदाई कर रहा होता था तो अन्य सब उनके नाना के घर में लाइव शो देखते. निखिल और नितिन अपनी पटायी औरत को वैसे तो अपने ही लिए पटाते थे, पर कभी कभी अधिक गर्म और प्यासी महिला उनके हत्थे चढ़ जाती तो वो दोनों एक साथ भी सवारी करते थे. जो भी स्त्री इन दोनों के बीच में पिस कर जाती, वो अपने जीवन का अनंत सुख पाती थी, हालाँकि उसकी चाल कुछ दिनों के लिए बदल जाती थी. यही सब सोचते हुए निखिल सो गया.

पर उसी घर के दूसरे कमरे में जैसे कोई घमासान युद्ध छिड़ा हुआ था. सुप्रिया घोड़ी के आसन में अपनी गांड उठाये और चेहरे को तकिये में दबाये हुए सिसक सिसक कर हल्की हल्की चीखें निकाल रही थी. अगर कोई सिर्फ उसका चेहरा देखता तो उसे दया आ जाती, पर उसकी गांड में अपना मोटा लम्बा लंड पेल रहे उस लड़के के मन में ऐसी कोई भावना नहीं थी. उसके लंड का हर वार लम्बा और वहशी था. वो अपना लंड लगभग पूरा बाहर निकलता और फिर बहुत तेज पाशविक गति से वापस गांड में ठूंस देता. उसकी गति इतनी तीव्र थी कि अंदर बाहर का एक चक्र पलक झपकते ही हो जाता था.

"क्यों मम्मी, मजा आ रहा है. कैसा लग रहा है मेरा लौड़ा अपनी गांड में लेकर?"

"तुम जानते हो मुझे तुम तीनों से गांड मरवाना कितना अच्छा लगता है तो पूछ क्यों रहा है. अपनी ताकत बातों में मत ख़राब कर, मेरी गांड पर ध्यान दे मादरचोद."

"वो तो मैं हूँ. मादरचोद. हम तीनों ही मादरचोद हैं. और नानीचोद भी." नितिन ने उसकी बात मानी और अब अपने पूरे जोश से गांड का माल हिलाने में लग गया.

उसे ये आश्चर्य था कि जो स्त्री औरत हर दिन चुदवाती हो और गांड मरवाती हो उसके दोनों छेद आज भी कैसे इतने तंग थे. वो स्त्रियों के राज से अनिभिज्ञ था. शीला ने सुप्रिया को चूत की मांस पेशियों के कुछ ऐसे व्यायाम सिखाये थे जिनके कारण उसकी चूत और गांड व्यायाम से लगभग २ घंटे में ही वापिस सिकुड़ जाती थी. शीला ने अपनी जवानी इसी प्रकार संभाले रखे थी. अनगिनत लौडों को अपने दोनों छेदों की यात्रा करवाने के बाद भी कोई उसकी चूत को भोसड़ा नहीं कह सकता था. नितिन अब चुदाई के उस चरण पर पहुँच चुका था जहाँ उसके लंड से पानी निकलने ही वाला था.

"मम्मी, मेरा होने वाला है. कहाँ छोडूं?"

"मू में, मू " सुप्रिया की आवाज़ धक्को से दब गयी थी.

नितिन ने अपनी गति कम की और फिर बहुत सावधानी से अपने लंड को बाहर खींचा और सुप्रिया के सामने जाकर खड़ा हो गया.

सुप्रिया ने करवट ली और बैठ गई, और लपक के नितिन के लंड को गपक लिया. वो एक भूखी भिखारन की तरह नितिन के लंड को चूस रही थी. उसे देखकर कोई वैश्या भी शर्मा जाती. कोई उसके इस रूप और उसके ऑफिस के रूप को देखकर सोच भी नहीं सकता थी कि वो दोनों एक ही स्त्री हैं. जैसे ही नितिन के लंड ने धार छोड़नी शुरू की सुप्रिया ने एक दो धारें अपने मुंह से पी लीं और फिर लंड निकालकर अपने चेहरे पर मलने लगी.

पिचकारियां उसके चेहरे के हर रोम को भिगा दे रही थीं. जब नितिन का रस ख़त्म हुआ तो सुप्रिया का पूरा चेहरा उसके वीर्य से ओतप्रोत था. सुप्रिया ने अपने हाथों से उसे इकठ्ठा किया और अपने मुंह में डाल लिया. कुछ उसने अपने स्तनों पर भी मल लिया. अब उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे. जैसे उसके अंदर का जानवर शांत हो गया हो.

"गांड फाड़ने में तुझे मजा आया?"

"अरे मम्मी, तुम्हारी गांड तो ऐसी ही कि हर समय अपने लौड़े को इसी में डाले रखूँ."

"तो तेरी नानी का क्या होगा?"

"अरे उनकी गांड के लिए निखिल है न."

दोनों हंसने लगे.

"निखिल से पता करेंगे क्या हुआ उसके नए काम का. कहीं इंटरव्यू के लिए गया था, किसी क्लब में."

"अब कल देखना, मुझे कालेज भी जाना है. मैं सोने जा रहा हूँ."

"चलो कल मिलते है."

थोड़ी देर में दोनों अपने अपने कमरों में तृप्ति की नींद में डूब गए.

शोनाली का घर:

कुछ समय पश्चात् सागरिका ने सबके लिए एक डबल ड्रिंक बनाया और इस बार खुद भी लिया.

"तो मॉम, कैसा रहा आज का इंटरव्यू?" सागरिका ने शोनाली से पूछा.

"एकदम फर्स्ट क्लास. और जॉय हमें सम्भवतः अपना पहला दामाद मिल गया है. सागरिका के लिए मुझे ऐसा लड़का मिला है जो हमारे परिवार के लिए बिल्कुल उपयुक्त है." कहकर उसने अपनी पूरी ड्रिंक एक ही साँस में समाप्त कर दी.

"और उसका नाम है ......”

सागरिका ने प्रश्न किया क्योंकि वो अब बहुत ज्यादा उत्सुक थी. उन लोगों की जीवन शैली में उपयुक्त बैठने वाला अगर कोई लड़का मिल जाये और वो भी जिसे उसकी माँ पसंद करे तो इससे अच्छा क्या हो सकता है.

"निखिल."

"कौन वो पार्थ का दोस्त?"

"और समर्थ और शीला का नाती."

"तीन नंबर वाले"

"हाँ, वही. और अब अच्छा समाचार. निखिल, उसका भाई नितिन और समर्थ भी हम ही लोगों के समान पारिवारिक सम्भोग में लिप्त हैं. सुप्रिया अपने घर में निखिल और नितिन से तो चुदवाती ही है और तो और समर्थ और शीला भी इसमें मिले हुए हैं. सुरेखा भी अभी कुछ ही दिनों पहले जुड़ी है. उसकी गाड़ी ५ दिन से यहीं है."

"शोनाली, ये तो बहुत ही शुभ समाचार है. पर क्या वो विवाह के लिए मानेंगे? हम बंगाली, वो ठाकुर, समर्थ मानेगें?"

"अरे ये भी तो समझो कि जिस प्रकार हमें सागरिका के लिए लड़का मिलने में समस्या आ रही ही, उसी प्रकार मुझे नहीं लगता कि उन्हें निखिल के लिए कम कठिनाई हो रही होगी."

"निखिल करता क्या है?"

"अरे अपने नाना का इतना बड़ा बिज़नेस है, उसी में जायेगा. पार्थ से पता करेंगे उसके बारे में."

"एक बात और, आज निखिल ने दिंची क्लब में रोमियो का काम ले लिया है."

सागरिका, उत्साह से, "मम्मी, तो क्या उसका लंड..."

"हाँ, ११ इंच से ज्यादा."

"और बहुत स्वादिष्ट भी. शोनाली की गांड के रस के साथ पिया था. ये अच्छा होगा, अपने दामाद से गांड मरवा कर उसकी पानी पियूँगी."

"दीदी, आपको अपनी गांड मरवाने के और दूसरों की गांड से पानी पीने के सिवाय कुछ और भी सूझता है?" जॉय ने थोड़ा चिढ़कर कहा. "हम लोग यहाँ गंभीर बात कर रहे हैं. प्लीज."

"सॉरी, मैं अपनी ख़ुशी नहीं संभल पायी." सुमति ने सहम कर कहा.

"अरे बुआ, तुम क्यों ऐसा सोचती हो. तुम्हे अपनी सुहागरात में अपनी गांड से कामरस पिलाऊंगी. चाहे वो जो भी हो." सागरिका सुमति के होंठ पर हल्का सा चुम्बन लेकर बोली.

"मेरी प्यारी गुड़िया." सुमति भाव विभोर हो उठी.

"तो करना क्या है?" जॉय ने पूछा.

"पहले पार्थ से बात करो. फिर समर्थ को उसके परिवार के सहित मिलने के लिए आमंत्रित करो. पर पार्थ की सहमति के पश्चात्."

"ठीक है. अब देर हो रही है, पार्थ से सुबह बात करेंगे. फिर देखते हैं."

"पापा, अगर आपको मेरी स्वीकृति चाहिए तो मैं अपनी हाँ अभी से देती हूँ. लड़का सुन्दर और सशक्त है, धनी परिवार से है, ११" लम्बा लंड लेकर घूमता है, अपनी माँ और नानी को चोदता है, और तो और मेरी मम्मी को पसंद है. प्यार साथ रहने से अपने आप ही पनप जायेगा."

"ठीक है. मुझे ख़ुशी है. अब कल पार्थ से समझ लें फिर निष्कर्ष निकालेंगे."
 
सुप्रिया का घर:

सुबह नाश्ते के लिए सुप्रिया निखिल और नितिन के साथ बैठी थी. तीनों अपने अपने काम पर जाने के लिए तैयार थे.

तभी सुप्रिया ने निखिल से पूछा, "तुम कहीं इंटरव्यू के लिए गए थे? नाना तुम्हें कब से हमारी कंपनी में आने को कह रहे हैं, वो क्यों नहीं करते."

"रिलैक्स मॉम. मैं आप लोगो के साथ ही काम करने वाला हूँ, बस कुछ दिन रुक जाओ. और जहाँ मैं गया था वो कोई नौकरी नहीं है."

"तो क्या है."

"एक क्लब है जहाँ जवान लड़के मध्यम आयु और उससे अधिक की महिलाओं का मनोरंजन करते हैं."

"और तुम उसमे कैसे चले गए?"

"पार्थ ने मुझे बताया था, वो क्लब में नए लड़कों को हर महीने शामिल कर रहे हैं, क्योंकि माँग बहुत है, तो उसने मुझसे पूछा था. और उस क्लब में प्रवेश के लिए लंड कम से कम १०" का होना चाहिए."

"और इस मानक पर तो तुम दोनों ही पूरे उतारते हो. फिर क्या हुआ?"

"क्या आप जानती हो कि उस क्लब में पार्थ की पार्टनर कौन है?"

"कौन?"

"उसकी मामी शोनाली."

"इंटरेस्टिंग."

"और मेरा इंटरव्यू शोनाली आंटी ने ही लिया था."

"ओके, वैरी वेरी इंटरेस्टिंग."

"इंटरव्यू क्या था मेरी चुदाई की क्षमता की परीक्षा थी. उनके मुंह, चूत और गांड तीनों को चोदना था."

"और उसमे तो तुम वैसी की बहुत काबिल हो."

"हाँ, पर मेरा कुछ और भी मानना है. शायद उनके घर में भी हमारी ही तरफ खुली चुदाई का वातावरण है."

"वैरी वैरी इंटरेस्टिंग."

"मुझे लगता है शोनाली या उनके घर से कोई संपर्क करेगा."

"तुमने क्या हमारे बारे में बता दिया?" सुप्रिया भड़क उठी.

"रिलैक्स, मॉम सामने वाले ने भी तो कुछ बताया होगा. वैसे भी उनका भी राज हमारे पास है."

"ओके. तुम्हारे नाना बहुत गुस्सा होने वाले हैं."

"मैं नानी से कहकर उन्हें मना लूंगा. नितिन से भी सहायता ले लूंगा मनाने के लिए."

"तुम्हारे मनाने का तरीका मुझे पता है. सौ प्रतिशत सफलता की कुंजी है. चलो मुझे देर हो रही है. शाम को मिलेंगे."

शोनाली का घर:

उधर शोनाली के घर भी सब नाश्ता कर रहे थे. सभी अच्छे मूड में थे और हंसी मजाक चल रहा था.

पार्थ ने सुमति से पूछा,"क्यों माँ, कल का स्वाद कैसा था?"

इससे पहले कि अन्य लोग समझते कि किस बारे में बात हो रही है, सुमति बोल पड़ी, "बहुत अच्छा था, शोनाली की गांड से पीकर मन खुश हो गया. किसका था?"

ये आखिरी सवाल उसने जॉय और सागरिका की ओर देखकर पूछा था, ये इशारा था कि बात करो.

"मेरा दोस्त है निखिल, क्लब में कल ज्वाइन किया है."

जॉय,"पार्थ, हम कल रात बात कर रहे थे. संभवतः निखिल के घर में भी हमारे जैसा पारिवारिक वातावरण है."

पार्थ, "मैं जानता हूँ. क्लब में लाने के पहले हम जो जाँच करते हैं, उसमे इसकी सम्भावना जताई गई है."

जॉय,"शोनाली का ये मानना है कि वो सागरिका के लिए उचित रहेगा. विवाह के लिए."

पार्थ, "क्या! मामी एक बार की चुदाई में ही शादी तक पहुँच गयी?"

शोनाली, "नहीं पार्थ, चुदवायी तो मैं बहुतों से हूँ क्लब में, पर अगर उनके घर में भी चुदाई का यही वातावरण है, तो दोनों परिवार एक दूसरे के लिए सही रहेंगे. किसी को भी अपनी जीवन शैली बदलनी नहीं होगी."

पार्थ,"मामी, आप बोल तो सही रही हो. बात बन भी सकती है. सागरिका ने क्या कहा?"

सागरिका, "दादा, मैं सहमत हूँ."

पार्थ कुछ सोचते हुए, "मम्मी और मामी मेरे विचार से आप दोनों एक बार निखिल की मम्मी से बात करो. हो सके तो उनके ऑफिस ही चली जाओ."

शोनाली, "सुप्रिया क्यों? समर्थ से न पूछें?"

पार्थ, "उसकी माँ सुप्रिया आंटी हैं, समर्थ अंकल नहीं. अगर उन्हें आवश्यक लगेगा तो वो पूछेंगी उनसे. और आप दोनों जाना, इससे उन्हें विश्वास होगा की आप गंभीर हो."

शोनाली, "फिर?"

पार्थ, "अगर उनकी प्रतिक्रिया सकारात्मक रही तो शुक्रवार को चाय पर बुलाओ. इस शनिवार क्लब में कोई कार्यक्रम नहीं है. तो मैं उसे सप्ताहांत के लिए बंद कर देता हूँ. अगर बात बनती लगे तो सप्ताहांत दोनों परिवार साथ गुजारेंगे। इससे अगर कोई भी संदेह हो कि आगे सम्बन्ध कैसे रहेंगे वो स्पष्ट हो जायेगा."

शोनाली, "ठीक है"

सुमति से अब रहा नहीं गया. वो बड़ी पुलकित स्वर में बोल ही पड़ी,"उड़ी बाबा, ये शनिवार तो मुझे खूब खाने मिलेगा."

सबने उसे एक अजीब निगाहों से देखा फिर हंसने लगे.

सुप्रिया का ऑफिस:

सुप्रिया अपने काम में व्यस्त थी जब उसका फोन बज उठा. उसने अनजान नंबर देखकर काट दिया. पर कुछ ही मिनटों में उसके ऑफिस का फोन घनघना उठा.

"हैलो। "

"सुप्रिया जी, मैं शोनाली बोल रही हूँ, संभ्रांत नगर के ५ नंबर घर से."

"हैलो शोनाली जी, कैसी हैं आप?" सुप्रिया ने पूछा. उसने निखिल से हुई उसकी सुबह की बात के बारे में सोचा,"वैरी इंटरेस्टिंग."

"मैं अच्छी हूँ. हम आपसे मिलना चाह रहे थे. क्या हम आ सकते हैं?"

"हम से आपका क्या मतलब है, और कौन."

"मेरी नन्द, सुमति भी आएंगी."

"ओके, आप लोग दोपहर ३ बजे आ जाएँ. तब चार बजे तक आपके साथ रह सकती हूँ."

"ठीक है, हम पहुँच जायेंगे. धन्यवाद."

"मुझे प्रसन्नता होगी." ये कहकर सुप्रिया ने फोन काट दिया।

वो सोचने लगी कि आखिर क्या बात हो सकती है. फिर अपनी सेक्रेटरी से तीन से चार बजे तक का समय बुक करने का बताकर उसने अपना ध्यान अपने काम की ओर लगा दिया. दोपहर के तीन बजे सेक्रेटरी ने बताया कि उससे मिलने दो महिलाएं आई है. सुप्रिया ने उन्हें भेजने का आग्रह किया और तीन कॉफ़ी लाने के लिया कहा. कुछ ही क्षणों में शोनाली और सुमति अंदर आये। शोनाली तो सुप्रिया से कई बार मिली थी और उसने आगे बढ़कर उससे हाथ मिलाया. पर सुमति सुप्रिया की सुंदरता से हतप्रभ रह गई. जब उसने सुप्रिया का हाथ अपने हाथ में महसूस किया तो वो अपनी तन्द्रा से निकली.

"क्या देख रही हैं, दीदी?" सुप्रिया ने उसे पुकारा.

"आप बहुत सुन्दर हो. बहुत सुन्दर."

"धन्यवाद, पर आपसे फिर भी कम ही लगूंगी इस मेकअप के बिना." सुप्रिया ने विनम्रता से कहा. "आइये बैठते हैं. अभी कॉफ़ी भी आ रही है. आप कॉफ़ी ही लेंगीं न, या कुछ और बोलूँ। "

"नहीं, कॉफ़ी ही सही है."

फिर तीनों बातें करने लगीं और जैसा स्त्रियों का स्वभाव है, बिना किसी विषय पर कॉफी आने तक उन्होंने १० मिनट बातें कर ली थीं. उसके बाद उन्होंने कॉफ़ी पीते हुए कुछ और हल्की फुल्की बातें की. कॉफ़ी समाप्त होने पर सुप्रिया ने सेक्रेटरी से ऑफिस बॉय से टेबल क्लियर करने को बोला। जब वो चला गया तो अपने पास पड़े रिमोट से सुप्रिया ने कमरा लॉक कर दिया.

"अब मेरी आज्ञा के बिना यहाँ कोई नहीं आएगा. अब बताइये आप मुझसे किसलिए मिलने के लिए उत्सुक थे." सुप्रिया ने शोनाली की आँखों में झांककर पूछा.

"हम अपनी बेटी सागरिका के लिए कोई योग्य लड़का देख रहे हैं." ये कहकर शोनाली ने अपने पर्स में से एक लिफाफा निकला और सुप्रिया को थमा दिया.

सुप्रिया ने खोला तो उसमें सागरिका के विभिन्न परिधानों में फोटो थे.

"आपकी बेटी बहुत सुन्दर है. जिस घर में जाएगी वहाँ चार चाँद लगा देगी."

"हमारा भी यही मानना है. और हम ये इच्छा रखते हैं कि वो आपके घर में चाँदनी लाये."

सुप्रिया भौंचक्की रह गई. उसने ये तो सोचा ही नहीं था.

"पर, पर.." सुप्रिया सोच रही थी कि उनके राज पर जो पर्दा इतने सालों से पड़ा है वो कहीं खुल न जाये.

"हम सब भी उसी प्रकार कौटुंबिक प्रेम में विश्वास रखते हैं, जिस तरह संभवतः आप." ये कहकर शोनाली थोड़ी झिझकी, फिर उसने सुमति की ओर देखा तो सुमति ने सहमति में सिर हिलाया. शोनाली ने अपने पर्स से एक और लिफाफा निकला और सुप्रिया के हाथों में दिया.

इस बार सुप्रिया और भी आश्चर्य चकित हो गई. ये सागरिका की नंगी तस्वीरें थीं जिसमे वो अपने ही परिवार के सदस्यों के साथ संभोगरत थी. इन तस्वीरों में सागरिका के हर छेद की चुदाई के दृश्य थे.

"हम्म्म्म" सुप्रिया ने उन तस्वीरों को वापिस लिफाफे में रख दिया और सोच में पड़ गई.

उनकी जीवन शैली के अनुरूप लड़की मिलना बहुत कठिन था. सागरिका का रूप देखकर उसकी आंखे चौंधिया गयी थी. उसे विश्वास था कि निखिल और नितिन दोनों को वो अच्छी आएगी. पापा और मम्मी को भी न अच्छी लगने जैसी कोई बात थी नहीं. फिर परिवार धनी था तो किसी प्रकार से कोई समस्या आनी नहीं चाहिए थी.

"मुझे निखिल और अपने परिवार में बात करनी होगी. मुझे स्वयं से कोई कठिनाई नहीं लगती. पर हमें उन दोनों की आपस में और हमारे परिवारों की अनुकूलता देखनी होगी."

"हम समझते है. समाज में हमारी जीवन शैली प्रकट न हो, इसके लिए हम भी बहुत सावधान रहते हैं. आप सोचें और विचार करें." ये कहकर शोनाली ने दूसरा लिफाफा अपने पर्स में रख लिया.

सुप्रिया: "ठीक है. अब एक बात बताइये."

शोनाली: "अवश्य"

सुप्रिया: "क्या ये आपके कल निखिल के साथ समय बिताने का परिणाम है."

शोनाली: "आप किस प्रकार की भाषा में सुनना पसंद करेंगी."

सुप्रिया: "गन्दी और सटीक."

शोनाली: "हाँ, कल जब निखिल ने मुझे चोदा तो मुझे ऐसा अनुभव हुआ जो अनुपम था. उसने मेरी चूत को जिस ढंग से चोदा उससे कुझे ये विश्वास हो गया कि इतना सामर्थ्य बिना घरेलू प्रशिक्षण के नहीं आ सकता. उसके बाद जब उसने मेरी गांड मारी तो सच बताऊँ, मुझे आकाश गंगा का भ्रमण करा दिया. क्या चोदता है, अभी भी उस समय को सोचकर मेरी चूत और गांड में खुजली हो रही है."

शोनाली ने बात जारी रखते हुए कहा: "तब मैंने ये निश्चय किया कि अगर संभव हुआ तो मैं अपनी बेटी से निखिल का विवाह कराऊंगी जिससे वो इस सुख को जब चाहे पा सके."

सुप्रिया: "आपकी बात सही है. मेरे बेटों के लंड का ध्यान आते ही, मेरी भी चूत और गांड खुजलाने लगते हैं. वैसे तो मैं इसके लिए अपने साथ एक डिल्डो रखती हूँ, पर आज सोच रही हूँ की लड़के की माँ होने का लाभ उठाऊँ."

सुप्रिया अपनी पैंट निकलकर एक ओर बहुत सजा कर रख देती है. फिर अपनी पैंटी भी उतार देती है. अपने ऊपर के कपडे वो नहीं छूती.

"आपने अच्छा किया कि आप दोनों साथ आये. आपमें से एक अपने मुंह और जीभ से मेरी चूत की गर्मी शांत करेगा और दूसरा मेरी गांड की. क्या आप ये करेंगी?"

"दीदी को गांड अधिक प्रिय है, तो वो आपकी गांड की शांति करेंगी. मैं आपकी चूत को चाटकर आपको आनंद दूंगी." शोनाली ने कालीन पर लेटते हुए कहा. "आइये."

सुप्रिया ने बिना देरी किये अपनी चूत को शोनाली के मुंह पर रख दिया और शोनाली उसे बहुत ही प्रेम से चाटने लगी. और कुछ ही क्षणों में उसकी जीभ सुप्रिया की गुलाबी चूत के अंदर विचरण कर रही थी. सुप्रिया ने एक संतुष्टि की सांस ली. तभी उसने अपनी गांड पर किसी की सांसों की दस्तक महसूस हुई. फिर किसी की जीभ ने उसकी गांड के भूरे सितारे पर अपनी जीभ फिराई। सुप्रिया के शरीर में एक आनंद की लहर दौड़ गई.

सुमति गांड चाटने में बहुत पारंगत थी. उसका विश्वास था कि वो किसी को भी (पुरुष या स्त्री) को बिना छुए सिर्फ उसकी गांड चाट कर झड़ा सकती थी. सुमति सुप्रिया की गांड चारों ओर चाटती फिर उस पर फूंक मारती और जब इस फूँक से गांड चुलबुला जाती तो फिर से चाटने लगती. फिर उसने दोनों नितम्बो को पकड़कर बाहर की ओर धकेला, जिससे की गांड का छेद खुल कर सामने आ आया. सुमति ने अपने मुंह से थोड़ी लार उस छेद में डाल दी. सुप्रिया कांप गयी. फिर सुमति ने अपनी जीभ को अंदर डालकर उसे घुमाना प्रारम्भ किया. सुप्रिया एक हल्की की चीख के साथ शोनाली के मुंह में झड़ गयी.

पर सुमति का मन कहाँ भरा था. वो किसी भूखी भिखारन की तरह सुप्रिया की गांड को अंदर बाहर से चूस और चाट रही थी. चाटना, चूसना, फिर फूँकना सब एक ऐसे कटिबद्ध क्रम में हो रहा था की सुप्रिया की स्थिति बेकाबू हो चुकी थी.

"बस बस, अब और नहीं. आप वाकई गांड चाटने में बहुत दक्ष हैं. मेरा पानी २ बार निकल गया है.”

नीचे से शोनाली ने हामी भरते हुए उसकी चूत पर अपना आक्रमण चालू रखा. होने वाली समधन को वो इस स्थिति में लाकर छोड़ना चाहते थे कि वो कुछ सोचने की अवस्था में न रह पाए. सुमति ने सुप्रिया की गांड पूरी फैलाई और अपना मुंह को उसके ऊपर लगा कर जोर से चूसा जैसे की कोई वैक्यूम क्लीनर करता है. अब सुप्रिया की हालत पस्त हो गई. वो भरभरा के एक बार और झड़ी और एक तरफ लुढ़क गयी.

कुछ देर अपने आप को सँभालने के बाद सुप्रिया ने कहा, "सुमति जी, आपके जैसा गांड का पारखी मैंने आज तक नहीं देखा. आप सच में अद्वितीय है."

सुमति: "आपके जैसी सुन्दर गांड को बिना चखे मैं कैसे रह सकती थी. आपकी गांड जितनी बाहर से सुन्दर है अंदर से उतनी ही स्वादिष्ट."

सुप्रिया: "आपको मम्मी बहुत पसंद करने वाली है. पर अब हमें उठना होगा थोड़ी ही देर में मेरी एक मीटिंग है."

शोनाली और सुमति उठे और अपने कपडे ठीक किये, उन्होंने उतारे तो थे ही नहीं. सुप्रिया ने जल्दी से अपनी पैंटी और पैंट पहने, और एक रूम फ्रेशनर से कमरे को सुगंधित कर दिया और सेक्स की गंध दबा दी.

"तो क्या हम शुक्रवार को मिल सकते हैं"

"लगभग तय समझिये. मैं आज रात या कल सुबह तक निश्चित कर दूँगी."

"ओके, बाय सुप्रिया जी. मुझे आशा है कि आप संतुष्ट हो गयी होंगीं."

"१००% से अधिक. मेरे विचार से हम शीघ्र ही संबंधी बन सकते हैं."

ये सुनकर शोनाली और सुमति आनंदित और संतुष्ट होकर अपने घर की ओर निकल पड़े.
 
शोनाली का घर:

सुप्रिया का फोन रात नौ बजे के आसपास आया. उसने बताया कि समर्थ, शीला और वो स्वयं शुक्रवार की शाम ७ बजे मिलने आएंगे. उसने ये भी बताया कि सुरेखा का आना अभी निश्चित नहीं है, अपितु संभव है. शोनाली के आग्रह पर उसने ड्रिंक्स और रात्रि भोज दोनों के लिए सहमति दे दी. निखिल की ओर से अभी स्वीकारोक्ति नहीं मिली थी पर उसने सीधे मना भी नहीं किया था, जो उसके विचार से सकारात्मक था. अभी केवल बड़े लोग मिलकर बातें करेंगे, वैसे भी शुक्रवार को अधिकतर युवा बाहर ही रहते हैं, तो उनकी खुल कर बातें हो सकेंगी.

शोनाली ने फोन रखकर ये शुभ समाचार प्रसारित किया तो सबके चेहरे प्रसन्नता से खिल उठे. शोनाली ने पार्थ से क्लब में पार्टी के आयोजन के लिए पुष्टि की. पार्थ ने उसे बताया कि उसने सोनम और नूतन को दोनों दिन के लिए बुला लिया है. ये दोनों क्लब में ही कार्यरत हैं और कुछ विशेष परियोजनों में बुलाई जाती हैं.साथ ही कुछ रोमियो भी सहायक के रूप में उपस्थित रहेंगे.

ये सब विश्वासपात्र थे, जिन्हें पार्थ और शोनाली भली भांति जानते थे. इसी के साथ उसने श्रीमती सिमरन खन्ना को २० लोगों (जिसमे सहायक और अन्य शामिल थे) के खाने पीने का प्रबंध के लिए भी कह दिया है. सिमरन, जो एक केटरिंग कंपनी चलती थीं, भी क्लब की ही सदस्य थीं और इस प्रकार के प्राइवेट और गुप्त आयोजनों में उन्हें ही व्यवस्था दी जाती थी. हालाँकि उनके केवल बावर्ची ही रहते थे और परोसने का काम क्लब के सहायक और सहायिकाएं सिमरन के साथ करते थे.

क्लब का किचन क्लब के दूसरे हिस्से में था और गोपनीयता पर आंच आने का प्रश्न नहीं था. हालाँकि उसे सिमरन को शुक्रवार को बताना होगा। जब शोनाली को विश्वास हो गया कि सब कुछ नियंत्रण में तो वो जॉय के पास जाकर बैठ गयी.

"सोचो, अब सागरिका की शादी हो जाएगी और वो चली जाएगी." उसकी ऑंखें भर आयीं।

"दूर नहीं है, और ये भी देखो कि हमें कितना अच्छा परिवार मिला है. अब सब कुछ पहले जैसा ही रहेगा, शायद पहले से अच्छा."

"सच कहते हो. सब कुछ कितनी जल्दी हो गया."

"अभी कुछ हुआ नहीं है, बहुत आगे की मत सोचो. ये सोचो कि सम्भावना है."

तभी सागरिका और पार्थ सबके लिए शराब और खानपान ले आये और सब बैठ कर आगे आने वाले समय के बारे में सोचते हुए ड्रिंक्स लेकर खाना खाये और फिर सोने के लिए चले गए.

क्रमशः
 
खेल कक्ष:

कमरा बंद होने के बाद सब लोग बार की ओर बढ़े और अपने लिए अपनी पसंद की ड्रिंक बनाई. सब अपनी ड्रिंक पीते हुए बातें कर रहे थे. निखिल सागरिका से उसके भविष्य के बारे में पूछ रहा था. दोनों अपनी पसंद और नापसंद के बारे में भी बात कर रहे थे.

तभी समर्थ की आवाज आयी जिसने सबको उनकी ओर आकर्षित किया, "बातें तो और भी समय होती रहेंगीं. मेरे विचार से हम यहां बातें करने नहीं बल्कि ये जानने के लिए आये हैं कि हमारे परिवार एक दूसरे के कितना अनुरूप हैं. और अगर मैं गलत नहीं हूँ तो इसका अर्थ ये है कि हम एक दूसरे को चुदाई में संतुष्ट कर सकते हैं या नहीं."

सबने हाँ में हाँ मिलाई।

"तो फिर क्या करना है?"

"पापा, मैंने सोच रखा है. आप कहें तो बताऊँ?" सुप्रिया ने समर्थ के पास जाकर कहा.

"तुमने सब सोच रखा होगा, ये तो मैं जानता हूँ. अब हम सबको भी बताओ." समर्थ ने उसे अपनी बाँहों में लेकर उसके होंठों को चूमकर उत्तर दिया.

"पापा, आप हम सबसे बड़े है, तो अपनी होने वाली बहू पर सबसे पहले आपका ही अधिकार बनता है. इसीलिए सागरिका आपके साथ रहेगी." सुप्रिया ने बताया, "सागरिका, जाओ तुम नानाजी की पास जाओ."

सागरिका शर्माती हुई समर्थ के साथ खड़ी हो गई.

"अब मम्मीजी सबसे बड़ी है, तो इनको मैं पार्थ का साथ देती हूँ. पार्थ नानी जी के पास जाओ."

पार्थ जैसे ही शीला के पास पहुंचा शीला ने उसे अपनी बाँहों में भींच लिया.

"शोनाली और निखिल एक दूसरे का स्वाद ले चुके हैं, इसीलिए मैं निखिल को सुमति के साथ करती हूँ."

निखिल सुमति के पास गया. सुमति की तो आंखे ही चौंधिया गयीं.

"शोनाली को मैं अपने दूसरे बेटे नितिन का साथ देती हूँ, उसे पता होना चाहिए की मैं इतनी खुश और संतुष्ट कैसे रहती हूँ." नितिन ने शोनाली हो अपनी बाँहों में ले लिया और उसके होंठ चूम लिए.

"और मैं अपने आपको अपने समधी जॉय के हवाले करती हूँ. मुझे आशा है की वो अपना रिश्ता पक्का करने मैं मेरी सहायता करेंगे."जॉय सुप्रिया के पास आया और उसके हाथों को लेकर उन्हें चूम लिया.

पार्थ ने तभी घोषणा की, "जैसे ही हमने कमरा रिमोट से बंद किया है, सारे कैमरे चालू हो चुके हैं और हम सबका ये खेल रिकॉर्ड हो रहा है. अगर इसमें किसी को आपत्ति हो तो बताये, मैं उसे रोक दूंगा."

किसी ने आपत्ति नहीं जताई.

समर्थ ने अपनी दबंग आवाज में कहा, "अब इन कपड़ों की क्या आवश्यकता है?" ये कहकर उसने अपने कपडे उतार दिए और नंगा हो गया.

उसका अनुशरण करते हुए अन्य लोग भी अपने कपडे उतार कर खड़े हो गए. शोनाली ने एक ओर लगी कपड़ों की अलमारी की और इशारा किया और सबने एक एक करके अपने कपडे उसमें लटका दिए. समर्थ ने सागरिका का हाथ अपने हाथ में लिया और उसे सोफे पर बैठा दिया.

समर्थ: "देखें तो कैसा रस है हमारी होने वाली बहुरानी का. बेटी तुम्हारी चूत तो देखने से ही बहुत मीठी और रसीली लग रही है.. मैं स्वाद चख लूँ तुम्हारा?"

सागरिका: "नानाजी, आपकी ही चूत है, जैसा मन हो वैसा कीजिये."

समर्थ नीचे बैठकर ने सागरिका के दोनों पांव अपने कन्धों पर रखे और अपना मुंह सागरिका की जांघों के बीच डाल दिया. सभी लोग ठहर कर ये दृश्य देख रहे थे. तभी शीला ने पार्थ के लौंड़ों को हाथ से पकड़ा और उसे लेकर सोफे पर बैठ गई. अब शीला सागरिका के साथ बैठी थी, पार्थ ने अर्थ समझ कर शीला के आगे घुंटने तक दिया और अपना मुंह समर्थ जैसे ही शीला की जांघों में छुपा लिया. अन्य सभी यही विधि अपनाने के लिए अग्रसर हुए और कुछ ही क्षणों में जॉय सुप्रिया की, नितिन शोनाली की और निखिल सुमति के बीच में मुंह छुपा लिए. सभी स्त्रियां एक लाइन में बैठी थीं और सभी पुरुष उनकी चूतों में सिर घुसाए हुए थे.

शृंखला कुछ इस प्रकार से थी:

सागरिका - समर्थ, शीला - पार्थ, सुमति - निखिल, सुप्रिया - जॉय और शोनाली - नितिन.

हर पुरुष अपनी साथिन को अधिकतम मौखिक सुख देने का प्रयास कर रहा था. चूतें चाटी और चूसी जा रही थी.

उँगलियाँ चूतों में कहीं धीमी तो कहीं द्रुत गति से विचरण कर रही थी. कहीं जीभ चूत के पपोटों के साथ गाँड के भूरे सितारे को भी गीला कर थी. कहीं भगनासे को इस तरह निचोड़ा जा रहा थे कि उसकी मालकिन थरथरा उठती थी.

किसी ने चाटने के साथ एक ऊँगली चूत और एक गाँड में दाल रखी थी.

कहने का तात्पर्य ये है की हर पुरुष अपनी क्षमता का परिचय अपने नए साथी को कराना चाहता था. और ये कहना उचित होगा की ऐसा ध्यान पाने से महिलाएं आनंद की लहरों पर डोल रही थीं. पूरा कमरा अब स्त्रियों की सीत्कार और सिसकारियों से गुंजायमान था. हर स्त्री कुछ न कुछ बोल रही थी पर इस वातावरण में किसके मुंह से क्या निकल रहा था ये किसी को समझ नहीं आ रहा था.

हर पुरुष का चेहरा इस समय कामरस से भीगा हुआ था और स्त्रियों ने अपना पानी छोड़ने में कोई कंजूसी नहीं की थी. जब स्त्रियाँ शांत पड़ीं तो पुरुष अपना चेहरा उठाकर उनकी ओर देखने लगे. सबकी आँखों में संतुष्टि के भाव देखकर सभी पुरुषगण गर्व से फूल गए. फिर समर्थ उठे और उन्होंने शीला के पास जाकर उसका एक गहरा चुंबन लिया.

"ले भागवान, चख ले अपनी होने वाली बहू की चाशनी, बहुत मीठी है अपनी बहू."

"सच में बहुत मीठी है, पर मैं तो बाद में स्रोत से ही पियूँगी, तभी प्यास बुझेगी।" ये कहकर शीला ने अपने साथ बैठी सागरिका को अपने पास खींचा और उसके मुंह में मुंह डालकर उसे चूम लिया. "सच बेटी, बहुत दिन से किसी जवान लौंड़ोंकी का रस नहीं पिया, ये बुढ़िया तरस गई थी."

"नानी, आप कहाँ से बूढ़ी हो गयीं. और आप जब चाहे मुझे बुला लेना में आकर आपका भी रस पियूँगी और अपना भी पिलाऊंगी."

"बहुत अच्छे संस्कार दिए है शोनाली ने तुम्हें."

उधर समर्थ के कृत्य को संकेत मानकर पार्थ ने उठकर सुमति को चूमा, निखिल ने सुप्रिया को, जॉय ने शोनाली को और नितिन उठकर सागरिका के पास गया और उसका मन भर कर चुम्बन किया.

"देवर भाभी अभी से एक दूसरे से घुल मिल रहे हैं. इससे अधिक प्रसन्नता की क्या बात हो सकती है." शीला ने समीक्षा की.

"सच है माँ, ऐसा ही रहा तो घर स्वर्ग बन जायेगा."

"मैं जानती हूँ सुप्रिया दीदी, जिस घर में सागरिका जाएगी उसे स्वर्ग बना देगी." सुमति ने अपनी टिप्पणी की.

किसी को भी इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी.

कुछ समय के लिए सबने एक विराम लिया और कुछ लोग बाथरूम गए, कुछ ने अपने लिए एक ड्रिंक बनाई. कुछ उस बड़े कक्ष में यूँ ही चहलकदमी कर रहे थे. फिर एक एक करके सारे पुरुष इस बार सोफे पर बैठे, शृंखला वही थी, बस इस बार पुरुष सोफे पर थे. उनकी साथी स्त्रियों ने उनके पांवों के बीच अपना स्थान ग्रहण किया. स्पष्ट था की इस बार मौखिक सम्भोग का आनंद पुरुष उठाएंगे. और इसी के साथ इस सामूहिक सहवास का दूसरा चरण प्रारम्भ हुआ.

स्त्रियों ने अपने साथियों के लौंड़ों को प्यार से चूसना और चाटना शुरू कर दिया. इनमें से कुछ तो इस कला की पारखी थीं और अपने साथी को वो स्खलन के द्वार पर लाकर रोक देतीं और कुछ समय बाद दोबारा वहीँ लेकर आ जातीं। उनके साथी एक आनंद और पीड़ा की दो धाराओं में सवार थे. इसकी अग्रणी थी शीला जिसका लौड़े चूसने का उतना ही अनुभव था जितनी सागरिका और पार्थ की मिलकर आयु. और दूसरी भला उसकी शिष्य पुत्री के सिवा और कौन हो सकता था. सागरिका की जो कमी अनुभव की थी वो उसे अपने उत्साह और ऊर्जा से पूरी कर रही थी. अब समर्थ का लौड़े को चूसने वाली वो कोई पहली तो थी नहीं, पर ये अवश्य स्पष्ट था कि वो उसे हर रूप में सुख और संतुष्टि देने का प्रयास कर रही थी. और समर्थ के चेहरे के भाव उसकी सफलता को दर्शा रहे थे.

पार्थ को अब ये समझ आ गया था की उसके लौड़े पर अब पूरा वश शीला का है. अब जब वो चाहेगी तभी उसका पानी छूटेगा.

पार्थ ने अपने साथ बैठे निखिल से पूछा, "तुम कैसे इनके इस आक्रमण से अपने आपको सँभालते हो?"

निखिल: "सँभालने की आवश्यकता ही क्या है? हम सेक्स को स्पर्धा नहीं समझते. कभी जल्दी झड़ने में कोई शर्म नहीं मानते. इसे हम आनंद का एक साधन मानते हैं. हममें से कोई एक दूसरे से जीतने का प्रयास नहीं करता."

निखिल के ये बात सुनकर चटर्जी परिवार को थोड़ी सांत्वना मिली. जॉय को तो जैसे दूसरा जीवन मिल गया. उन्हें अब किसी प्रकार का प्रदर्शन नहीं करना था. सिंह परिवार की तरह इन दो दिनों केवल आनंद की उबलब्धि के लिए व्यतीत करने थे. रिश्ता हो या नहीं ये दिन उन्हें सदैव याद रहने चाहिए थे. इस स्वीकारोक्ति ने उनके सभी सदस्यों को तनावमुक्त कर दिया. और इसका प्रभाव उनके उत्साह पर पड़ा जो चौगुना हो गया.

अपने लौंड़ों को अपने साथी के मुंह से चुसवाते हुए अब लगभग दस मिनट तो निकल ही चुके थे. और पुरुषगण अपना बीज गिराने के लिए तैयार थे. उनके लौंड़ों की नसों और सुपाड़े को फूलता हुआ महसूस करने पर ये पता चल गया की वे सब झड़ने की कगार पर है. महिलाओं ने अपने आप को आते हुए सुनामी के लिए तैयार ही किया था कि एक एक करके सारे लौंड़ों अपना पानी छोड़ने लगे. इस स्वादिष्ट प्रोटीन युक्त प्रसाद की भेंट अपने मुंह में स्वीकारते हुए स्त्रियों ने एक बूँद भी बाहर न गिरने दी. पीने के बाद उन्होंने अपने हिस्से के लौड़े को एक बार और प्यार से चाटकर साफ किया और फिर अपने पांवों पर खड़ी हो गयीं.

शीला ने सागरिका से पूछा, "कैसा लगा मेरे पति का स्वाद बहू ?"

सागरिका: "बहुत अच्छा नानी जी. अब मुझे आपकी सुंदरता का रहस्य पता चल गया है."

शीला ने सागरिका को अपने गले से लगा लिया.

शीला: "और भी हैं इसके राज, एक बार तू बहू बनकर आ तो जा, देख तेरी सास को इसकी जवानी ही इसका साथ नहीं छोड़ती."

इसी तरह एक दूसरे से सब बातें कर रहे थे. समर्थ जॉय को एक ओर ले गया.,

समर्थ: "जॉय, तुम इतने सहमे से क्यों हो."

जॉय: "जी, लड़की का बाप हूँ, कुछ गलती न हो जाये."

समर्थ: "इस सोच को अपने मन से निकाल दो, अपने घर की लक्ष्मी हमें दे रहे हो और हम से ही डरते हो. संबंधों में मिठास रहनी चाहिए, औपचारिकता और डर नहीं. हमारे साथ वैसे ही रहो जैसे रहते हो. तुम हमसे छोटे नहीं हो. क्या मैं गलत कह रहा हूँ?"

जॉय: "बिल्कुल नहीं. अपने मेरे दिल को जीत लिया, नानाजी." ये कहकर जॉय नानाजी के गले से लग गया.

फिर दोनों लौट कर रणक्षेत्र में आ गए, जहाँ अगले चरण की तैयारी चल रही थीं.

शीला ने समर्थ को जॉय साथ वापिस आते देखा तो आँखों के इशारे से पूछा कि सब ठीक है? समर्थ ने हल्के गर्दन के इशारे से बताया कि अब ठीक है. शीला ने चैन की साँस ली.

समर्थ: "तो मेरी प्यारी बहूरानी अब क्या चाहती है?"

सागरिका: "जो मेरे प्यारे नानाजी चाहते हैं. मेरी चूत में आपका लंड."

शीला: "देखा मेरी बहूरानी को, घर में आने के पहले ही सबका मन जीत रही है? क्यों जॉय, क्या कहते हो."

जॉय: "माँ जी, आप बिल्कुल सही कह रही हैं, इसका स्वभाव ही बहुत मिलनसार है. और अगर सामने कोई लंड तानकर खड़ा हो तो फिर ये संकोच नहीं करती. जितनी जल्दी हो सके उसे अपनी चूत या गाँड में ले लेती है."

समर्थ ने जॉय को थम्स अप करके शाबाशी दी और सागरिका को बाँहों में लेकर उसके होंठों से अपने होंठ मिला दिए. दोनों ऐसे एक दूसरे को चूम रहे थे जैसे पृथ्वी का अंत निकट हो. समर्थ के हाथ सागरिका के वक्षस्थलों पर रेंग रहे थे. फिर उसने अपने हाथ पीछे किये और सागरिका के दोनों नितंबों को भरकर निचोड़ दिया. सागरिका की एक हल्की सी कराह निकल गयी और उसने चुम्बन को और भी गहरा करने का प्रयास किया. पर समय अब चुम्बन का नहीं, चुदाई का था. तो समर्थ ने उसका हाथ लिया और जमीन पर लगे मोटे गद्दों में से एक पर उसे ले जाकर बैठा दिया. फिर उसके साथ खुद बैठ चुम्बनों का आदान प्रदान पुनः आरम्भ हो गया.

फिर समर्थ ने सागरिका को लिटा दिया और अपना मोटा लम्बा लंड उसकी कमसिन गुलाबी चूत के मुंहाने रखा.

समर्थ: "बहू, डाल दूँ?"

सागरिका: "अब सोचिये मत, बना लीजिये आज मुझे अपनी. चोद दीजिये ये चूत।"

समर्थ ने अपने लंड को सागरिका की चूत में उतारना शुरू किया और कुछ ३-४ मिनट में पूरा लंड उसकी चूत में बैठ गया.

शीला ने जॉय को जाकर एक गहरा चुम्बन दिया, "कितने सुन्दर लग रहे हैं न दोनों?"

जॉय, जो अब खुल चुका था, ने शीला की गाँड दबाते हुए उसके चुम्बन का उत्तर दिया, "सचमुच, मुझे विश्वास है कि चुदवाती हुई आप भी बहुत ही सुंदर लगती होगी."

शीला: "ये देखने मैं अब तुम्हे ज्यादा प्रतीक्षा नहीं करनी होगी, आओ पार्थ, तुम्हारे मामा को मेरी चुदवाती हुई मुद्रा देखनी है."

ये कहकर शीला पार्थ को लेकर एक गद्दे पर जाकर बैठ गई.

सुमति ने निखिल, शोनाली ने नितिन को अपने अपने गद्दों पर बैठा दिया. सुप्रिया और जॉय दोनों देख रहे थे.

सुप्रिया: "कितना मनोरम दृश्य है."

जॉय: "अगर पारुल भी होती तो और सुन्दर होता."

सुप्रिया: "हाँ, पर देखा जाये तो फिर लौंड़ों की कमी पड़ जाती."

जॉय हंस दिया. "वो तो वैसे भी पड़ने ही वाली है. अगले हफ्ते वो वापिस जो आ रही है."

सुप्रिया: "जॉय, प्लीज उसे आने के बाद मुझसे मिलने भेजना."

जॉय: "अवश्य. पर अब हम अपने विषय में भी कुछ सोचें?" ये कहकर जॉय ने सुप्रिया को बाँहों लिया और चुम्बनों की बौछार कर दी.

उसका हाथ लेकर वो भी एक गद्दे पर बैठ गया. और फिर उसने चारों ओर देखा.

समर्थ अपने लंड को तीव्रता से सागरिका की चूत में पेल रहा था. वहीँ शीला के फैले हुए पांवों के बीच पार्थ का लंड उसकी चूत की गहराइयाँ नाप रहा था. सुमति ने निखिल को लिटा दिया था और वो उसके लंड पर सवार थी और आगे झुककर तेजी से अपनी गाँड उछालकर चुदवा रही थी. नितिन ने शोनाली को घोड़ी बनाया हुआ था और वो पीछे से उसकी चूत में अपना लंड पेल रहा था. चारों महिलाएं सिसकारियों और घुटी हुई चीखों से अपने आनंद का प्रदर्शन कर रहे थे. जॉय ने ये सब देखकर सुप्रिया को खड़े स्थिति में ही आगे झुका दिया और उसकी कमर को मजबूती से पकड़कर पीछे से उसकी चूत में एक ही झटके में लंड पेल दिया. अब पांचों जोड़े संभोगरत थे और आनंद में झूल रहे थे.

समर्थ: "जॉय, तेरी बेटी की चूत तो बहुत कसी है. बहुत मजा आ रहा है इसे चोदने में."

जॉय: "बाबू जी, आपकी बेटी की चूत भी कोई कम नहीं. क्या सट के जा रहा है मेरा लंड इसकी चूत में."

सागरिका: "नानाजी, थोड़ा और जोर से चोदिये न, आपका लंड बहुत मजा दे रहा है, थोड़ा और लम्बे धक्के मारिये. मेरी चूत फटेगी नहीं, सच में."

समर्थ ने ये सुनकर अपने धक्कों की गति और तेज कर दी. इस उम्र में भी उसकी शक्ति देखने वाली थी. उसके लम्बे और गहरे धक्के सागरिका की चूत को भरपूर सुख दे रहे थे. उसका पानी अब तक दो बार छूट चूका था.

वहीँ शीला अपने आप को पूरी तरह से पार्थ को समर्पित कर चुकी थी. पार्थ अब उसकी बूढी चूत को प्रबल शक्ति से चोद रहा था. चूँकि शीला को इस प्रकार की चुदाई पसंद थी और वो इसकी रोज की दिनचर्या थी, वो इस नए लंड का भरपूर आनंद ले रही थी.

शीला: "बहुत अच्छा पार्थ, तू तो बहुत बढ़िया चुदाई करता है बेटा। मेरे नातियों के साथ मिलकर एक दिन तुम मेरे तीनों छेद सील करना."

पार्थ: "नानी, आप जब कहोगी मैं आ जाऊँगा. आपके बस बुलाने की देर होगी, मैं सब काम छोड़कर आपकी सेवा में उपस्थित हो जाऊँगा."

शीला की पनियाई हुई चूत अब पार्थ को वो घर्षण नहीं दे पा रही थी. तो उसने अपना लंड बाहर निकाला और गद्दे पर बिछे हुए बिस्तर के कपडे से उसकी चूत को पोंछ कर सुखा दिया और फिर वापिस अपना पूरा लंड एक ही झटके में डाल कर बेरहमी से चोदने लगा.

शीला: "वाह रे मेरे शेर, अब फटेगी मेरी चूत सही से. चोद मुझे हरामी. दम लगाकर चोद। "

पार्थ भी कहाँ पीछे हटने वाला था. उसने ऐसी चुदाई शुरू की जिसे देखकर कमजोर ह्रदय के व्यक्ति को दौरा ही पड़ जाता. पर शीला को इसमें असीम सुख मिल रहा था.

सुमति भी निखिल के लंड पर पूरे जोरशोर से उछल रही थी. निखिल का लंड उसके पार्थ के लंड के ही जितना बड़ा और चौड़ा था और उसे इससे बहुत संतुष्टि मिल रही थी. पार्थ उसको अब इतना समय नहीं देता था. घर में तीन और चुदने को तैयार चूतें जो थीं. उसे अब उसको किसी ने किसी के साथ बाँटना ही पड़ता था, अकेले माँ बेटे की चुदाई को बहुत समय हो गया था. पर आज निखिल से चुदने में उसे वही समय याद आ रहा था. और अभी नितिन भी तो था. अब भविष्य में उसे इन तीनों में से किसी न किसी के साथ अकेली रात मिल ही जाएगी. यही सोचकर उसकी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी. वो आगे झुककर अपने मम्मी निखिल के मुंह में दबाकर उसके लंड पर जबरदस्त उठक बैठक कर रही थी. निखिल ने उसकी गाँड में एक ऊँगली डाली हुई थी जिससे वो उसके छेद को हल्के हल्के कुरेद रहा था.

सुमति फुसफुसा कर: "निखिल, मेरी गाँड जरूर मारना, उस दिन शोनाली की गाँड से तेरा रस पिया था, बहुत स्वादिष्ट था. पर मुझे अपनी गाँड से निकाल कर पीना है."

निखिल को याद आया की शोनाली ने अपनी गाँड को एक प्लग से बंद किया था क्लब में, जिससे उसका वीर्य बाहर न बहे. उसे समझ आ गया कि वो अवश्य सुमति के लिए सहेजी होगी. इतना प्यार और एक दूसरे का ध्यान रखने वाले परिवार की लड़की से शादी करने में कोई समस्या नहीं होने चाहिए.

निखिल: "बुआ, चिंता न करो. अब से मैं तुम्हें गाँड का इतना रस पिलवाऊंगा कि तुम्हारी सारी प्यास मिटा दूंगा. और नितिन और नाना से भी कहूंगा. आपके लिए अब कभी कमी नहीं होगी."

सुमति ये सुनकर बेहाल हो गई. उसकी गति अब कभी तेज तो कभी धीमी पड़ने लगी. ये समझकर कि शायद वो थक गई हो निखिल ने उसे पकड़कर एक करवट ली और सुमति अब नीचे थी और निखिल उसके ऊपर. अब तक निखिल सुमति के परिश्रम से ठहरा हुआ था पर अब उसने चूत में अपने लंडों को ऐसे पेलना शुरू किया कि सुमति का रोम रोम कांप गया.

शोनाली और जॉय भी अपने अपने साथी की पूरे जोश से चुदाई कर रहे थे. सुप्रिया की चूत इतने बार चुदने के बाद भी व्यायाम के कारण काफी कसी थी. और उसे चोदने में जॉय को बहुत आनंद आ रहा था. उसके साथ ही शोनाली नितिन को तेज चुदाई के लिए उकसा रही थी और नितिन अपनी पूरी ताकत उसकी चूत फाड़ने में झोंक रहा था.

पर आखिर ये सब कितनी देर चलता, एक एक करके सभी पुरुषों ने घोषणा की कि वो झड़ने वाले हैं. शीला ने सबको चेताया की चूत में कोई नहीं झड़ेगा बल्कि सब चेहरे पर अपना कामरस छोड़ेंगे. उसने महिलाओं को भी चेताया कि वो अपना मुंह बंद रखें और अपने चेहरे पर ही पूरा वीर्य इकठ्ठा करें. ये सुनकर जैसे जैसे जो झड़ने वाला होता वो अपने साथी के चेहरे के पास जाकर अपने लंडों की मुठ मरने लगता. सबसे पहले समर्थ की ही धार छूटी जिसने सागरिका के सुन्दर चेहरे पर गाढ़े सफ़ेद पानी का लेप कर दिया. उसके बाद जॉय ने सुप्रिया, निखिल ने सुमति, नितिन ने शोनाली और अंत में पार्थ ने शीला के चेहरे को अपने पानी से पोत दिया. शीला ने उसे अपने चेहरे और स्तनों पर अच्छे से माला और वही अन्य महिलाओं ने भी किया.

उसके बाद शीला उठी और सागरिका के पास जाकर उसका चेहरा और स्तन चाटकर साफ कर दिया और सागरिका से अपना चेहरा और स्तन चटवा लिए. फिर उसने बाकी तीनों महिलाओं के चेहरे और स्तन चाटकर साफ किये और अंत में लेट कर ऑंखें बंद करते हुए आनंद की अनुभूति करते हुए विश्राम करने लगी.

अन्य सभी लोग उठे और बार या बाथरूम की और अग्रसर हुए. कुछ ही देर में सब लोग वहीँ नंगे खड़े होकर अपनी अपनी ड्रिंक का पान करने लगे.

पार्थ: "नानी जी बहुत शांति से लेटी हैं. कोई परेशानी तो नहीं?"

समर्थ: "अरे नहीं, उसे लंडों का टॉनिक बहुत पसंद है. शराब से ज्यादा उसे इस टॉनिक से नशा होता है."

पार्थ: "सच में नानाजी, सबके अपने अपने स्वाद और पसंद होती है. मम्मी को गाँड मरवाकर उससे वीर्य पीना बहुत पसंद है. बल्कि हमारे यहाँ गाँड मारने के बाद उसका पूरा प्रसाद मम्मी को ही पिलाया जाता है."

समर्थ:" सुमति, लगता है अगले चरण में तुम्हे भरपूर भोजन मिलने वाला है. क्योंकि अगला राउंड गाँड खोलने का है."

सुमति की आँखों में एक चमक आ गयी जिसे देखकर कोई भी ये समझ सकता था कि वो इस समाचार से कितनी आनंदित हुई थी.

समर्थ ने शीला को पास बुलाया और उसके कान में कुछ कहा. शीला ने मुस्कुरा कर सिर हिलाया और सुमति की ओर देखकर मुस्कुराई. सुमति झेंप गई तो शीला उसे अपने साथ अलग ले गई.

शीला: "समर्थ ने मुझे क्या बोले जानती हो?"

सुमति: "नहीं माँ जी."

शीला हँसते हुए बोली," उन्होंने कहा कि इस बार गाँड का पानी अकेले न पियूँ बल्कि इस बार तुम्हें पीने दूँ, फिर अगली बार मैं पियूँ."

सुमति आश्चर्य से उसकी ओर देखने लगी.

शीला: "तुम क्या सोचती हो, तुम्हें ही सब उलटे शौक हैं. मेरे पास आना कभी मेरे देखोगी तो चौंक जाओगी."

सुमति: "माँ जी, इससे अधिक विकृत क्या हो सकता है?"

शीला ने सुमति को पास खींचा और उसके कान में कुछ कहा. सुमति की ऑंखें चौड़ी हो गयीं.

शीला: "इन सबका मजा लेना हो तो कभी आओ हमारी हवेली पर."

सुमति: "ज जज जज्जि माँ जी. आउंगी."

शीला: "चलो अब लंडों को तैयार करें, मेरी तो गाँड कल रात से खुजला रही है. समर्थ ने मुझे कल छुआ भी नहीं, अपनी ताकत बचने के लिए."
 
उधर एक ओर शोनाली और पार्थ में भी कुछ गुप्त बातचीत चल रही थी. शोनाली उसकी बात से सहमत नहीं लग रही थी.

पार्थ: "मामी, मैं एक बार नानाजी से पूछ लूंगा अलग से. अगर उन्होंने सहमति दे दी, तब तो आपको कोई आपत्ति नहीं होगी न?"

शोनाली बेमन से मान गई.

पार्थ: "नानी बुला रही हैं, न जाने माँ के साथ क्या खिचड़ी पका रही थीं."

शोनाली: "बाद में पता चल जायेगा."

इसी के साथ सब अपनी ड्रिंक्स समाप्त कर चुके होते हैं और अगले चरण में प्रवेश के लिए कमर कस लेते हैं.

शीला: "अब गाँड मारने की बारी है. पर इसमें एक ही शर्त है. सारे मर्द पानी गाँड में ही छोड़ेंगे."

सबने अपनी स्वीकृति दी.

शीला ने आगे कहा, "और गाँड से निकला सूप ये मेरी सुमति को पिलायेंगे. तो ख़बरदार अगर किसी ने एक बूँद भी बाहर निकाला. ये सुनकर शोनाली चौंक गई. वो तुरंत दरवाजे के पास गई और बाहर खड़े एक सहायक से कुछ कहा. कोई ५-७ मिनट में सहायक ने उसके हाथ में कुछ थमा दिया.

शोनाली, "ये प्लग है जिससे गाँड का पानी बाहर नहीं निकलता. मैंने सबके लिए एक एक लिया है. और ये वेसलीन की ट्यूब, इतने बड़े लंडों हमारी गाँड में बिना वेसलीन के नहीं लेने वाले हम." ये कहते हुए उसने पांचों प्लग और वेसलीन की ट्यूब बाँट दिए.

समर्थ: "मैं चाहूंगा कि महिलाएं अपने साथी का लंडों चूस कर खड़ा करें. और इस बीच सुमति और शीला उनकी गाँड तैयार करें. बाद में सुमति शीला की गाँड तैयार करेगी."

जॉय: "पर सुमति दीदी का क्या होगा, और वैसे भी ये दोनों तीन गाँड कैसे तैयार करेंगे?"

इससे पहले कि समर्थ उत्तर देता शोनाली बोल उठी. "मेरे पास इसका भी उपाय है. बस ५ मिनट दो मुझे."

ये कहकर उसने टेबल से अपन मोबाइल उठाया और एक मेसेज भेजा. कुछ ५-७ मिनट में कमरे का एक दरवाजा खुला और उससे एक नंगी औरत ने प्रवेश किया. ये कोई और नहीं सिमरन थी. शोनाली ने उसके पास जाकर उसे उसकी भूमिका समझाई। सिमरन ने बेझिझक इस स्वीकार कर लिया. अब इस चरण की तैयारी हो चुकी थी.

समर्थ गद्दे पर बैठ गए और सागरिका अपने घुटनों पर उनकी जांघों के बीच आ गई. उसने अपनी गाँड ऊपर उठाकर समर्थ का लंडों अपने मुंह में ले लिया. शीला ने अपनी होने वाली बहू के पीछे स्थान लिया और उसकी जांघों से ऊपर चाटना शुरू किया.

जॉय ने अपना स्थान ग्रहण किया, फिर सुप्रिया ने सागरिका की तरह उसका लंडों अपने मुंह में लिया और सुमति उसकी गाँड की ओर अग्रसर हुई. नितिन और शोनाली ने भी अपनी स्थिति तय की और इस बार शोनाली की गाँड के पीछे सिमरन थी.

पार्थ और निखिल ने अपने लिए एक ड्रिंक बनाई और दोनों एक ओर खड़े होकर सामने चलने वाले सेक्स शो को देखने लगे. पार्थ को अपने क्लब के लिए एक नया आइडिया भी मिल गया. वो हर पार्टी में ऐसे शो अपने सदस्य और रोमियो से करवा सकता था. उसने मन ही मन नानाजी का धन्यवाद किया और निखिल के साथ खेल देखने लगा.

सागरिका इस समय समर्थ के लंडों की पूरी श्रद्धा से चुसाई कर रही थी. ऐसा लंडों का कोई अंश नहीं था जिसे उसे अछूता छोड़ा हो. उसे चाटने और चूसने में जैसे एक लालच का पुट था. जैसे कि वो कहीं खो न जाये. उसके पीछे शीला नानी उसकी चूत से लेकर गाँड तक चाटे जा रही थी. अब शीला एक अलग ही अनुभवी और पारखी औरत थी. उसने अपने जीवन का लम्बा समय किसी न किसी लंड के छोर पर ही बिताया था. और कुछ यही उनके मुंह की भी महिमा थी. वो लंडों, चूत हो या गाँड सबको इतने प्रेम से चाटती और चूसती थीं कि कोई बिरला ही उनसे स्पर्धा कर सकता था.

पर उनका मुख्य ध्यान सागरिका की गाँड पर ही था. उसकी गाँड के भूरे सितारे नुमा प्रवेश द्वार को वो अपनी उँगलियों से सहलाती और फिर चाट लेती. कुछ देर में उसने सागरिका की गाँड को दो हाथों से खोला और अपनी लम्बी जीभ को अंदर डालकर उससे ही जैसे उसे चोदने लगी. खुले छेद को थूक से भरकर उसने पहले दो फिर तीन उँगलियाँ अंदर डाल कर गाँड को थोड़ा चौड़ा कर दिया. फिर अपने हाथ से वेसलीन की ट्यूब लेकर लगभग एक चौथाई ट्यूब को गाँड के अंदर खाली कर दिया और दो उँगलियों से उसे अच्छी तरह से रगड़ रगड़ कर चिकना कर दिया. इस पूरे उपक्रम में गाँड का छेद अब काफी खुल गया था और समर्थ के लंडों के प्रवेश के लिए अब उचित था.

वहीँ दूसरी ओर सुमति जहाँ एक अनुभवी स्त्री थी पर उसका अधिक प्रेम गाँड से था. गाँड से सम्बंधित हर क्रिया की वो विशेषज्ञ थी. उसकी इस कला का एक नमूना सुप्रिया देख ही चुकी थी, और अब वो उस अनुभव के लिए दोबारा तैयार थी. बस इस बार उसके मुंह में जॉय का तमतमाया हुआ लंड था. सुमति उसकी गाँड खोलकर अपनी जीभ से ऐसे चाट रही थी जैसे किसी स्वादिष्ट व्यंजन खाने के बाद लोग थाली चाटते है. एक एक मिली मीटर को उसने चाट कर चमका दिया. और जब लगा की अब कुछ बाकी नहीं बचा है, तो वेसलीन की ट्यूब से गाँड को अच्छे से तर किया और उँगलियों से अच्छे से अंदर फैला कर अपने भाई के लिए तैयार कर दिया.

शोनाली नितिन के भरी लंड को दिल लगाकर चूस रही थी. साथ ही वो उसे अपने मुंह ने पूरी तरह लेकर अच्छे से गीला भी कर रही थी. उसके पीछे सिमरन को गाँड चाटने में कोई दिलचस्पी नहीं थी, इसीलिए उसने सीधे से वेसलीन लगाकर शोनाली की गाँड को अच्छा चिकना कर दिया और तीन उँगलियों से छेद को चौड़ा भी कर दिया. ये गाँड अब चुदाई के लिए सबसे पहले तैयार हुई थी.

शीला ने सागरिका के नितम्ब पर एक हल्की चपत दी तो उसने समर्थ के लंड को अपने मुंह से निकाल दिया. समर्थ शीला के आगे खड़े हो गए और शीला ने वेसलीन से उनके लंड की अच्छी मालिश कर दी.

वहीँ जॉय और नितिन के साथ भी यही हुआ. अब तीन मोटे लंड तीन मखमली गाँड के लिए तैयार थे. शीला ने पार्थ को बुलाया और लिटा दिया. अब वो उसके लंड को चूम और चाट कर तैयार करने लगी. सुमति ने अपना स्थान शीला के पीछे लिया और अपना जादू दिखाना प्रारम्भ किया. शीला इस स्तर के गुदा प्रेम से अभी तक वंचित थी. कुछ ही क्षणों में उसकी गाँड इतनी उत्तेजित हो गई की रुकना असंभव सा लगने लगा. सुमति से उसकी मनस्थिति को समझा और गाँड में वेसलीन लगाकर तीन उँगलियों के प्रयोग से खोल दिया. फिर पार्थ उठकर पास आ गया और उसके लंड पर उसने बहुत प्रेम से वेसलीन लगाई.

सुमति: "बेटा, अच्छे से मारना नानी की गाँड, मेरी इज्जत का सवाल है. नहीं तो सब सोचेंगे कि मैंने तुझे कुछ सिखाया नहीं."

पार्थ: "अरे माँ, तुम चिंता न करो. नानी की मैं पूरे मन से सेवा करूँगा और उनकी गाँड का घी मथ दूंगा."

सुमति ने अब निखिल को अपने पास बुला लिया और उसके लंड पर जुट गई और सिमरन ने उसकी गाँड को तैयार करने का काम शुरू किया. कुछ ही देर में ये जोड़ा भी तैयार था. सिमरन ने सबसे विदा मांगी और बताया कि आधे घंटे में शाम का नाश्ता परोसा जायेगा.

समर्थ ने अपना लंड सागरिका की मुलायम गाँड पर रखा और बड़े ही प्रेम से अंदर धकेल दिया. प्लप्प की आवाज़ के साथ सुपाड़ा गाँड की झिल्ली को छेदते हुए अंदर चला गया. सागरिका थोड़ी कसमसाई पर आगे के लिए अपने को सँभालने लगी. अब उसकी गाँड पहली बार तो मारी नहीं जा रही थी, और पार्थ के लंड को भी वो ले चुकी थी. पर गाँड मरवाना थोड़ा ज्यादा पेचीदा होता है. समर्थ पर इस कला के पारखी थे. न जाने कितनी ही गाँड उनकी इस कला से परिचित थीं. वो अविरल बिना रुके अपने लंड को बहुत हल्के से गाँड में उत्तर रहे थे. सागरिका साँस रोके इस प्रहार के समाप्त होने की राह देख रही थी. उसे अपनी गाँड धीरे धीरे भरती हुई महसूस हो रही थी. अचानक ये प्रगति रुक गई. उसने समर्थ को आगे झुककर उसकी गर्दन पर चुम्बन लेते हुए महसूस किया.

फिर फुसफुसाते हुए समर्थ ने कहा,"बहू तुमने तो मेरा पूरा ही लंड ले लिया आसानी से." ये कहकर एक झटका मारा तो रहा सहा लंड भी जड़ तक जाकर बैठ गया. इसके साथ ही समर्थ ने सागरिका की चूत पर एक हाथ रखकर उसे मसलने के साथ गाँड में अपने लंड की चहलकदमी शुरू कर दी. धीरे धीरे उन्होंने अपनी गति बढ़ाई और उसी गति से सागरिका की चूत की रगड़ाई भी. सागरिका तो जैसे पागल ही हो गई, वो लगातार झड़ रही थी. न जाने कितना पानी था उसके शरीर में जो चूत के रास्ते बहा जा रहा था. समर्थ ने अपने पूरे जोश से सागरिका की गाँड यही कोई १० मिनट तक मारी और फिर एक ओर रखे प्लग को उठाया और अपना पानी सागरिका की गाँड में छोड़ दिया. लंड सिकुड़ जाने के बाद धीरे से बाहर निकालते हुए प्लग जो गाँड ने डाल कर उसे सील बंद कर दिया. सुमति के लिए पहला पकवान तैयार था.

पार्थ ने शीला की गाँड में अपना लंड टिकाया और एक बार जैसे ही प्रवेश हुआ उसने लंडों बाहर खींचकर एक लम्बे झटके में पूरा एक ही बार में पेल दिया. अब शीला की गाँड इतनी बार पिल चुकी थी कि उसे उसमें भी मजा ही आया. वो आनंद से चीख पड़ी.

शीला: “वाह रे मेरे शेर. फाड़ दे ये गाँड, मिटा दे इसकी खुजली. कल से लपलपा रही है लंड के लिए. तेरे नाना ने तो कल छुआ भी नहीं मुझे. आज के लिए बचा रहा था. अच्छे से चोद, चिंता न कर फटेगी नहीं. बहुत राही इस रास्ते से गुजर चुके हैं. जरा जोर से और कस के मार. हाँ यूँ अब आया मजा. बहुत अच्छा लंड है रे तेरा. सुमति, तेरी किस्मत कितनी अच्छी है जो ऐसे लंड वाले लड़के को पैदा किया.”

बस यूँ ही बोलते हुए शीला की चूत भी पानी छोड़ रही थी. पार्थ ने अपनी दो उँगलियों में भग्नासे को पकड़ कर मसल दिया. शीला चीखकर झड़ गयी. पार्थ उसकी गाँड पूरी बेरहमी से मार रहा था, और शीला को यही पसंद था. अगर गाँड मरवाने में आंसू न निकलें तो मारने वाले की औकात पर बात आ जाती है. पर पार्थ उसे उसकी इच्छा से अधिक गहराई और वहशी तरीके से चोद रहा था. पर आखिर कितनी देर टिकता. १० मिनट की इस भयंकर चुदाई के बाद पार्थ ने बताया की वो झड़ने वाला है. अपना पानी छोड़कर, उसने अपने लंड को निकला और प्लग से शीला की लगभग फटी गाँड को सील कर दिया. सुमति के लिए दूसरा पकवान तैयार था.

लगभग उसी समय जॉय ने भी अपना माल सुप्रिया की गाँड में उड़ेल दिया और उसे भी सुमति के भोज के लिए पैक कर दिया। शोनाली की गाँड नितिन ने भर कर पैक कर दी. अब सुमति के लिए एक ही व्यंजन चार स्वाद में परोसने के लिए तैयार थे. प्रतीक्षा थी तो सुमति की जिसकी गाँड में अभी भी निखिल का लंड अपनी पूरी कलाबाजियां दिखा रहा था. पर कुछ ही देर में उसने भी सुमति की गाँड को सींच दिया और उसे भी प्लग लगाकर पैक कर दिया.

अभी सारी महिलाएं अपने घुटनों पर ही थीं और सबकी गाँड अभी भी उठी हुई थी. शीला ने पहल करते हुए सुमति को घुटनों के बल बैठने को कहा. उसके बाद उसने एक एक करके सारे आदमियों को आगे करते हुए शीला से उनके लंडों चटवा कर साफ करवाए. फिर उसने निखिल को इशारा करके एक पेग बनाने को कहा और उसे एक बाउल (बड़ी कटोरी) में लाने को कहा. निखिल समझ गया और लेने चला गया.

शीला: “सुमति, आज मैं तुम्हे ये रस पीने का एक और तरीका सिखाती हूँ.”

निखिल ने वो शराब (लगभग २ पेग के बराबर) से भरा कटोरा जमीन पर रखा.

शीला ने उसके ऊपर निशाना साधा और अपनी गाँड से प्लग निकाल कर रुका हुआ वीर्य कटोरे में छोड़ दिया.

एक एक करके चारों महिलाओं ने अपनी गाँड में थमा वीर्य उस कटोरे में डाल दिया. अंत में बारी आयी सुमति की तो उसने देखा कि सब उसकी ही ओर देख रहे हैं.

“अरे माँ, देखो नानी ने तुम्हारी पसंद के खाने को एक नए अंदाज में बनवाया है.”

अंततः सुमति ने भी अपनी गाँड से कामरस उस कटोरे में भर दिया. जब ये सब चल रहा था तो नितिन और सागरिका सबके लिए नए ड्रिंक्स बना कर ले आये थे. अब ९ नंगे लोग अपने हाथों में ग्लास थामे खड़े थे. सुमति ने कांपते हाथों से अपना शराब, वीर्य और गाँड के रस का कॉकटेल उठाया.

“चियर्स!” सब ने जोर से चिल्लाकर सुमति को प्रेरित किया और अपने ग्लास एक बार में ही खाली कर दिए. सुमति ने भी अपना प्याला अपने मुंह से लगाकर गटागट पीना शुरू किया. पर अधिक होने के कारण पूरा नहीं पी पायी. बाकी जो बचा वो उसने अपने चेहरे पर डाल कर उसे कॉकटेल से धो दिया.

“कीमती पेय की बर्बादी.” ये कहकर शीला उसके पास आयी और उसकी ठुड्डी से लेकर ऊपर तक चाटकर खुद पी लिया.

“क्यों सुमति, कैसा लगा स्वाद?”

“अच्छा था, पर तुम लोग उसमे इतना सारा दारू क्यों डाला? क्या मुझे नशे में करके मेरी गाँड मारना चाहते हो?”

ये सुनकर सब खिलखिला उठे. और फिर बाथरूम में जाकर नहाकर, अपने कपडे पहनने लगे. कुछ ही देर में वे सब संभ्रांत व्यक्तियों की तरह शाम के नाश्ते के लिए डाइनिंग रूम की और बढ़ गए.

उनके पीछे, सहायकों ने कमरे को साफ किया और सभी उपयोग किये हुए बिस्तरों को हटाकर नए लगा दिए. २० मिनट में वो कमरा पहले जैसा ही हो गया था.

नाश्ते के समय यूँ ही हल्की फुल्की बातें चलती रहीं. समर्थ और सिमरन में आँखों से कुछ बात हुई. समर्थ और सिमरन कुछ देर के लिए गायब हो गए. उन्होंने प्रयास तो किया कि किसी को समझ न आये पर इतने चतुर लोगों से वो बच न पाए. जब कुछ देर बाद सिमरन आयी तो उसकी चाल बदली हुई थी. शोनाली ने उसे देखकर आंख मारी तो सिमरन भी मुस्कुरा दी. समर्थ भी कुछ ही देर में आ गए. सब उनकी ओर देखकर मुस्कुराने लगे.

समर्थ: “बेचारी, सुबह से काम में लगी थी. देखा तो सोचा थोड़ी उसकी मालिश कर दूँ.”

शीला: “अंदर बाहर दोनों से मसला लगता है. कैसी थी?”

समर्थ: “जैसे पुरानी शराब.”

सब लोग हंसने लगे.

यूँ ही शाम के ७ बज गए. पार्थ ने पूछा कि कौन क्या लेगा. सबने अपनी पसंद की ड्रिंक बता दी. उसके साथ ही सिमरन ने खाने के लिए भी भेज दिया. इस समय दोनों परिवार बिल्कुल एक ही लग रहे थे.

समर्थ: “मुझे ख़ुशी है कि हम लोग एक दूसरे से इतने जल्दी स्वाभाविक हो गए.”

जॉय: “बाबूजी, इसके लिए आपका और माँ जी का बहुत श्रेय है. “

समर्थ: "हम बुजुर्गों का काम भी यही होता है."

शाम ८. ३० तक यही सब चलता रहा उसके बाद सबने खाना खाया और कुछ देर के लिए बाहर लॉन में बैठ गए.

सुप्रिया: “अब रात के लिए मैंने ये जोड़े तय किये हैं. सब अपने कमरे में ही रहेंगें। इससे उन्हें अलग से बात करने का समय भी मिलेगा.

१, निखिल और सागरिका: इन्हें जीवन साथ बिताना है, इसीलिए अच्छा हो जो एक दूसरे से पूछना हो पूछ लें.

२. माँ जी और जॉय: अब जब ये समधन से अंतरंग हो चुके हैं तो उसकी माँ से भी मिल लें.

३. पापा और शोनाली: अब बेटी की माँ का भी नाप देख लें.

४. सुमति और नितिन: अब ये दो भाई हर मिठाई को बांटते है.

५. पार्थ और मैं: क्यूंकि मैं इसकी शक्ति और विवेक दोनों से अचंभित हूँ.

सब ने अपनी सहमति जताई और उठने लगे. तभी पार्थ ने समर्थ से कुछ बात करने के लिए एक ओर बुलाया. जब बात पूरी हो गई तो समर्थ के हाव भाव से लग रहा था कि वो सहमत है. बात समाप्त होने पर पार्थ ने शोनाली को थम्ब्स अप का इशारा किया. शोनाली और पार्थ ने समर्थ और सुप्रिया से कुछ समय माँगा और एक ओर चले गए. लगभग १५ मिनट में वे लोग वापिस आ गए. तब तक बाकी सब अपने कमरों में जा चुके थे. ये चारों भी अपने कमरों में चले गए.
 
अगले दिन सुबह:

अगले दिन सभी एक एक करके अपने कमरों से निकलकर सुबह के नाश्ते के लिए डाइनिंग रूम में पहुँच गए. इस बार समर्थ शीला, शोनाली जॉय साथ बैठे थे. ये देखकर सबको सुखद आश्चर्य हुआ कि सागरिका ने निखिल के साथ बैठने का निश्चय किया. सुप्रिया नितिन और सुमति पार्थ के साथ बैठी थी. सिमरन ने बहुत अच्छा नाश्ता लगवाया था और सबने भरपूर खाया.

निखिल और सागरिका एक साथ बोले: “हमें कुछ कहना है.”

सबकी दृष्टि उनकी ओर केंद्रित हो गई.

निखिल ने पहल की: “हम दोनों की ये शादी से सहमति है. कल रात हमने काफी देर बात की और ये महसूस किया कि हमारी सोच लगभग हर विषय में मिलती है.”

सागरिका: “दूसरा ये कि हमने देखा कि हमारे परिवार कितनी सरलता से एक दूसरे के करीब आ गए. आज ऐसा लग ही नहीं रहा कि एक सप्ताह पहले हम लोग एक दूसरे को ठीक से जानते तक न थे, सिवाय इसके कि हम पडोसी थे.”

निखिल: “इसीलिए हमने ये सोचा है कि हम दोनों एक दूसरे और दोनों परिवारों के साथ बहुत खुश रहेंगे. और तो और हमारी जीवन पद्धति पर भी कोई आंच नहीं आएगी.”

ये सुनकर शीला ने उठकर सागरिका को गले लगा लिया और अपने गले का हार निकलकर उसे पहना दिया. उसका माथा चूमा और सागरिका ने उसके पांव छूकर आशीर्वाद लिया. फिर सागरिका ने समर्थ और सुप्रिया के पांव छुए. सुप्रिया ने भी उसे गले से लगाकर अपने हाथ का कंगन उसे पहनाया.

सुप्रिया: ”शोनाली और जॉय, आज से सागरिका हमारे घर की बेटी हुई. आप मंगनी और शादी की समय निश्चित करिये.”

ये सुनकर सुमति और शोनाली दोनों रोने लगीं. परन्तु उनके इन आँसुओं में ख़ुशी थी और किसी ने भी उन्हें चुप करने का प्रयास नहीं किया. पार्थ निखिल के पास जाकर उसके गले लग गया.

“अब हम केवल दोस्त नहीं है, जीजा जी.”

निखिल ने हंसकर अपने मित्र को उत्तर दिया, “अब संभल के रहना साले साहब.”

जॉय ने उठकर अपने कमरे से एक डिब्बा लाया और निखिल के हाथों में एक बेशकीमती आयातित घड़ी पहना दी. फिर उसे गले से लगाकर उसके माथे को चूम लिया.

“बेटा मुझे आज इतनी ख़ुशी मिली है, जिसका मैं वर्णन नहीं कर सकता.”

सिमरन ने भी सबको गले मिलकर बधाई दी और विश्वास दिलाया कि अगर उसकी कंपनी से केटरिंग कराई जाएगी तो वो अपनी पूरी श्रध्दा से उसे सफल करेगी.

सब लोग एक हंसी ख़ुशी के वातावरण में न जाने कितनी देर बातें ही करते रहे. फिर पार्थ ने समर्थ से पूछा कि क्या जो कल बात की थी वो अभी भी वैध है. समर्थ ने हामी भरकर कहा कि अब तो १०० गुना अधिक वैध है. पार्थ ने शोनाली की ओर देखकर उसे सिर हिलाकर स्वीकृति दी.

दोपहर के खाने के पहले दो चक्र शराब के चले, इस मौके का सबने जी भर के आनंद लिया.

भोजन के पश्चात् सभी लोग खेल कक्ष में चले गए. सभी बिना कुछ कहे बिना अपने वस्त्रों से अलग हुए और उन्हें अलमारी में टांग दिया.

तभी शोनाली और पार्थ ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.

पार्थ: “कल मैंने नानाजी से कुछ पूछा था जिसकी उन्होंने मुझे अनुमति दे दी थी. इसीलिए आज का विशेष आयोजन हमारे दोनों परिवारों की स्त्रियों के लिए है.”

शोनाली: “सुमति दीदी ने कल माँ जी से हुई बात मुझे बताई थी, जो मैंने पार्थ को बताई.”

शीला के होठों पर एक मुस्कराहट और आँखों में चमक आ गई.

“इसीलिए, आज मैंने अपने क्लब के ६ रोमियो को अपनी सेवा के लिए और भी बुलाया है. हमारे चारों पुरुष सहायक, जो हमारे रोमियो भी हैं उनके साथ होंगे. दोनों सहायिकाएं भी उपस्थित रहेंगी. अब चूँकि हम सब व्यस्त होंगे तो पूरे कार्यकर्म का निर्देशन सिमरन जी करेंगी.”

ये कहकर उसने दो बार ताली बजाई। एक ओर का दरवाजा खुला जिसमें से सिमरन नंग धडंग अंदर आयी. उसके दोनों ओर उनकी दोनों सहायिकाएं सोनल और आतिशी भी नंगी खड़ी हो गयीं.

उसके बाद दरवाजे से १० नंगे लड़कों ने प्रवेश किया. और वो सब सिमरन के पीछे एक व्यूह में खड़े हो गए.

पार्थ: “आज हम सब अपने परिवार की महिलाओं को एक साथ तीन पुरुषों से सम्भोग का सुख देंगे. पर इसमें कुछ नियम हैं जो हर स्त्री के स्वभाव के अनुरूप होंगे:

१. गाँड का रस मम्मी को ही अर्पित होगा.

२. नानी माँ को अंत में वीर्य से नहलाया जायेगा.

३. चूत मारने के बाद के रस का सेवन केवल सागरिका के लिए होगा.

शोनाली: “मेरे विचार में ये नियम सही हैं और अगर किसी को कोई आपत्ति है तो बता सकता है.”

समर्थ: “मुझे ये देखकर प्रसन्नता होती है कि तुम हर कार्य एक नियम के अनुसार करते हो. मुझे किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं है.”

अन्य सबने भी अपनी स्वीकृति दी.

"इसमें से पहले सागरिका और नितिन, सुमति दीदी और पापा जी साथ होंगे क्यूंकि उन्हें अभी तक एक दूसरे का साथ नहीं मिला है. बाकी सब एक म्यूजिकल चेयर से जीते जायेंगे.”

ये कहकर शोनाली ने पाँचों स्त्रियों को एक गोले में खड़ा कर दिया. अब पुरुष लोग एक गोले में आ गए. शोनाली के कहने पर सिमरन ने एक गाना बजा दिया और सब आदमी गोले में घूमने लगे. इसमें होना ये था कि गाना रुकने पर जो भी आदमी जिस स्त्री के सम्मुख होता वो उसका साथी बन जाता. इसमें सागरिका और सुमति को केवल दो लोगों को चुनना था. तीन बार में सबके साथी निश्चित हो गए.

शोनाली के हिस्से में निखिल +२ आये , सुप्रिया को पार्थ +जॉय +१ मिले और शीला को तीनों नए रोमियो. २ २ रोमियो सागरिका और सुमति को भी मिले. .

और एक सामूहिक चुदाई का नंगा खेल प्रारम्भ करने के लिए बीच में आ गए.

कुछ ही समय में कमरा नंगे शरीरों का एक अखाडा बन गया था. पांचों महिलाएं एक गोल चक्र में एक दूसरे को देखती हुई बैठ गयीं. जब एक बार महिलाओं ने अपने हिस्से के लंड को चूस चाट कर कड़ा कर लिया तो उन्हें जल्द से जल्द अपने काम पर लगने के लिए उत्साहित करने लगीं.

शीला इस समय तीन रोमियो के बीच में सैंडविच बनी हुई थी. एक लंड उसकी चूत में था, एक गाँड में और एक मुंह में. सबसे बड़ी बात की तीनो लंडों १०” से बड़े थे यानि उसके शरीर में ३०” लंड भरे हुए थे. और वो सब उसके द्वारा उत्साहित किये जाने के कारण एक गहराई और बेदर्दी से उसके छेदों को मथ रहे थे. एक लंड जब चूत में घुसता तो गाँड वाला बाहर निकलता और इसी लय ने उसके दोनों छेदों का मंथन कर रखा था. उसके मुंह का लंड पहले तो शीला की दया पर निर्भर था पर बाद में उसने भी शीला का सिर पकड़कर उसे अपनी गति से चोदना शुरू कर दिया था.

यही कुछ स्थिति बाकी औरतों की भी थी. इस समय प्रेम और प्यार नहीं बल्कि शरीर का सहवास हो रहा था, सिर्फ जिस्म की भूख मिटाई जा रही थी. सिमरन एक घडी से समय देख रही थी. उसने ३ मिनट पूरे होने पर “CHANGE” की आवाज़ दी. ये सुनकर सबने अपने लंड बाहर निकाल लिए. फिर गाँड मारने वाले आदमी ने अगली औरत के पास जाकर अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया. जिसका लंड मुंह था वो नीचे लेट गया और चूत में लंड पेल दिया और जो चूत में था उसे गाँड में स्थान मिला.

(समझने के लिए: शीला की गाँड मारने वाले व्यक्ति ने अपने लंड को सुमति के मुंह में डाला. शीला की चूत मारने वाले ने गाँड में लंड डाला और सागरिका की गाँड मारने वाले ने अपना लंड शीला के मुंह में डाला.)

इसी प्रकार से हर 3 मिनट में सिमरन आवाज़ देती और हर आदमी अपने हिस्से का छेद बदल कर अगले निशान पर चला जाता. इस पूरे क्रम को पूरा करने में ४५ मिनट निकल गए और अब आदमियों से रुका नहीं जा रहा था. महिलाएं भी अब बदहवासी की ओर जा रही थीं. अंत में जो जहाँ से शुरू किया था वहीँ वापिस पहुँच चुका था. एक एक करके लंडो ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया और कुछ ही मिनटों में हर छेद पानी से लथपथ हो गया था. सागरिका अपने सामने आयी चूत से रस पिने लगी और सुमति गाँड. सब की साफ होने के बाद सब लोग निढाल पड़ गए.

सिमरन, सोनल और आतिशी ने गर्म पानी से गीले तौलिये लाये और सबके शरीर एक एक करके पोंछकर साफ किये. उसके बाद सबके लिए एक नया ड्रिंक बनाया और सबको दिया. अपना ड्रिंक पीते हुए सब यही सोच रहे थे कि क्या हम लोग विकृत तो नहीं हैं. दोपहर के लगभग तीन बज चुके थे और ५ बजे निकलना भी था तो यही तय किया कि अब अंतिम चरण का खेल शुरू किया जाये.

पर शीला ने अपनी मांग रख दी.

शीला: “देखो, ऐसा मौका बार बार नहीं आता, मैं अपनी एक इच्छा पूरी करना चाहती हूँ.”

समर्थ: “इतना खेलने के बाद अभी भी कुछ है जो बाकी है तुम्हारे मन में?”

शीला: “और क्या. मेरा मन एक साथ चार लंडों से चुदने का है. एक मुंह में, दो चूत और एक गाँड में.”

समर्थ: “इस उम्र में झेल पाओगी ये सब.”

शीला: “कोई नहीं, अगर झेल नहीं पायी तो कम से कम प्रयास करते हुए मरूंगी.”

समर्थ: “चुप कर. ऐसा क्यों बोलती है?”

शीला ने जॉय, पार्थ, निखिल और नितिन की ओर देखकर कहा, “करोगे इस बुढ़िया की इच्छा पूरी?”

जॉय: “अवश्य करेंगे, पर आप अपने आप को बूढ़ा समझना छोड़िये.”

ये कहकर चारों ने उसे घेर लिया.

घर के चारों पुरुषों ने उसे घेर कर लिटा दिया. सोनल और आतिशी आगे आयीं और सभी पुरुषों के लंड चूसकर अच्छे से खड़ा करने में लग गयीं. समर्थ बड़ी भूखी आँखों से दोनों को देख रहे थे.

शोनाली उनके पास गई, और धीरे से बोली, “आप का जब दिल करे बाबूजी, तब आप सोनम और आतिशी की मार लेना.”

समर्थ: “मुझे पता है कि तुम मुझे निराश नहीं करोगी.”

इस समय सामने जॉय ने अपना स्थान जमीन पर बनाया और सबने मिलकर सँभालते हुए शीला को उसके लंड पर बैठाया. निशाना गाँड पर था और कुछ ही मेहनत से जॉय का पूरा लंड शीला की गाँड में बैठ गया. अब बारी पार्थ और नितिन की थी दो लंड शीला की चूत में डालने की. कुछ अचरज भरी कलाबाजियों के साथ ये भी संभव हो गया और अब शीला की चूत में दो लंड थे और एक उसकी गांड में था. निखिल ने आगे आकर अपना लंड शीला के मुंह में घुसा दिया.

और अब शुरू हुआ भीषण चुदाई का वीभत्स नाच. वैसे भी सबके लौड़े एक से बढ़कर एक थे और जिस लयबद्ध तरीके से वो चोद रहे थे उससे ये प्रतीत होता था कि ये उन्होंने पहले भी किया हुआ है. शीला के मुंह में अगर निखिल का लंड न होता तो शायद उसकी चीखें क्लब को हिला देतीं. कुछ ही समय में शीला के झड़ने का सिलसिला थमा तो सबने एक दूसरा आसन में आक्रमण चालू रखा. इसी तरह से अलट पलट कर चारों मिलकर शीला को एक गुड़िया की तरह चोद रहे थे. तभी एक धक्के में गलती से नितिन का लंड चूत से बाहर तो आया पर चूत में जाने की स्थान पर नितिन ने उसे निखिल के लंड के साथ जो उसकी नानी की गाँड में पहले ही डला हुआ था उसके साथ मिला दिया. अब शीला की गाँड में दो लंड थे और चूत में एक.

(नीचे मैंने इस पराक्रम के कुछ चित्र भी लगाए हैं.)

इस प्रकार से शीला मंथन यही कोई बीस मिनट चला होगा. जिसके अंत तक शीला चुद चुद कर और झड़ झड़ कर निर्जीव सी हो गई थी. उधर सभी महिलाओं ने बाकी के लंड भी चूसकर झड़ने की कगार पर ला दिए थे. जब चुड़क्कड़ चार झड़ने के करीब पहुंचे तो वो हट जाते. जैसे ही आखिरी आदमी ने अपना लंड शीला के मुंह से निकाला, सब उसके इर्द गिर्द घेरा बनाकर खड़े हो गए और मुठ मारने लगे. एक एक करके हर पुरुष ने अपना गाढ़ा सफ़ेद वीर्य शीला के चेहरे और शरीर पर गिरा दिया. जब सब हटे तो शीला का चूत से ऊपर का पूरा शरीर कामरस से पुता हुआ था. पर शीला निढाल पड़ी थी.

सागरिका और सुप्रिया ने छाती और पेट, शोनाली ने चेहरा और सुमति ने चूत और गांड को चाटकर अच्छे से साफ कर दिया. सब खड़े होकर शीला के भोगे हुए शरीर को देख रहे थे.

कुछ देर में शीला ने आंख खोली और सबको अपनी ओर देखता पाया.

शीला: ” आऊवोह, मैं जीवित हूँ? मैं तो समझी थी कि मैं मर चुकी हूँ और फ़रिश्ते मुझे चोद रहे हैं.”

सुप्रिया: “अरे मम्मी तुम पूरी जिन्दा हो पर हाँ, फ़रिश्ते अवश्य तुम्हें चोद रहे थे.”

समर्थ ने हाथ बढाकर शीला को खड़ा किया.

समर्थ: “तो कैसा रहा तुम्हारा ये अनुभव?”

शीला: “अद्भुत, अद्वितीय, अकल्पनीय. मैं तो समझी थी कि मैं स्वर्ग में हूँ. पर इन लड़कों ने मुझ बुढ़िया की हड्डियां हिला डालीं ” फिर रूककर, “मुझे उसका नाम बताओ जिसने मेरी गाँड में दूसरा लंड डाला था.”

सब सहम गए, फिर नितिन ने हाथ खड़ा किया. शीला आगे बढ़ी और उसे चूम लिया.

“तूने मुझे वो सुख दिया जिसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी.”

पार्थ ने तभी कहा, “अब हमारे निकलने का समय हो रहा है, तो सब लोग नहाकर तैयार हो जाओ.”

सब एक एक करके तैयार हो गए. पार्थ ने सिमरन को बुलाकर कहा, “आपका इनाम पक्का है. अगले महीने के दूसरे शनिवार को सारे रोमियो आपकी सेवा में होंगे.”

तैयार होकर सब बाहर आये और एक दूसरे की गले मिलकर फिर रिश्ते की बधाई दी और अपनी गाड़ियों में सवार होकर अपने घर के लिए निकल गए.

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अध्याय १०: पहला घर - अदिति और अजीत बजाज २

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काफी देर के बाद कैमरे में उसकी दादी दिखी. कुछ देर बाद वो कपड़े बदले हुए फिर दिखी. फिर कुछ देर बाद उनके कमरे में उसे अपने पापा दिखाई दिए. उन्होंने आकर दादी को बाँहों में भर लिया और चूमने लगे. दादी भी उनका पूरा साथ दे रही थी.

दादी: “अदिति सो गयी है क्या?”

पापा: “हाँ, उसकी दवाई से नींद आती है.”

दादी: “बस अब दो और सप्ताह की बात है, फिर वो पहले जैसी ठीक हो जाएगी.”

पापा: “हाँ, पर दवा पता नहीं कितने दिन और लेना पड़े. न जाने वो इतने दिन बिना चुदाई के कैसे रह पाई.”

दादी: “अरे मैं थी न, हाँ ये सच है की वो तुम्हारे लंड की अब बहुत प्यासी है.”

पापा: “और ये?” कहकर पापा ने दादी की चूत को दबाया.

दादी: "और ये भी. अब इसकी उतनी चुदाई नहीं होती जितनी ये चाहती है. २ सप्ताह बाद तो और भी कम हो जाएगी.”

पापा: “घर में अकेले मेरे ही पास लंड थोड़े ही है? जैसे मुझे सिखाया था, अब गौतम को भी सिखा दो चुदाई के सूत्र.”

दादी: “मैं तो तैयार हूँ, पर गौतम न जाने क्या सोचेगा.”

पापा: “वही जो मैंने २४ साल पहले सोचा था. जवान लड़का है, चुदाई के लिए मना करे ये हो नहीं सकता.”

दादी: “पर अदिति? उसे ये शायद अच्छा न लगे.”

पापा: “नहीं, मेरे विचार से उल्टा ही होगा. अदिति ऑपरेशन से पहले कई बार गौतम को चोदने के लिए कह चुकी है.”

दादी: “अच्छा!”

पापा: “हाँ और वो ये भी चाहती है की मैं अनन्या की सील खोलूं.”

ये सारी बातें सुनकर गौतम के तो होश ही उड़ गए. यहाँ वो दादी को फंसा कर चोदने का प्लान बना रहा था, वहां उसकी माँ पहले ही उससे चुदने का कार्यक्रम बनाये हुए है. और अगर पापा अनन्या को चोद लेंगे तो हो सकता है कि उसका भी नंबर लग जाये.

उसने अपना ध्यान सामने चल रहे वीडियो पर लौटाया. अब तक उसके दादी और पापा नंगे हो चुके थे और एक दूसरे को चूमते हुए बिस्तर की ओर बढ़ रहे थे. बिस्तर पर जाकर दादी लेट गई और अपने पांव फैला लिए. अजीत ने अपना मुंह दादी की जांघों में डाल दिया. अब वीडियो पर इससे अधिक देखना संभव नहीं था. पर यही कुछ ५-७ मिनट बाद उसने दादी को कांपते हुए देखा और उसके बाद अजीत ने अपना सर जांघों के बीच से निकाल लिया. फिर अजीत ने अपना लंड शालिनी के मुंह के पास लाकर हिलाना शुरू किया. शालिनी ने उसके लंड को अपने मुंह में लिया और कोई ४-५ मिनट तक चूसा. उसके बाद अजीत ने अपने लंड को शालिनी की चूत में डाल दिया और दोनों चुदाई करने लगे.

अपनी दादी को इस तरह चुदते देखकर गौतम ने अपना लंड निकाला और मुठ मारने लगा. उसने सोचा कि जब उसकी दादी और माँ दोनों उससे चुदवाने को तत्पर हैं. अभी मम्मी को ठीक होने में समय है तो दादी पर ही पहले हमला किया जाये. उसने फिर ये वीडियो फॉरवर्ड किया और अगले दिन सुबह उसने राधा को दादी को मौखिक सहवास करते हुए देखा. तो उसका शक सही था. राधा पर भी वो हाथ साफ कर सकेगा या नहीं इस पर उसे शंका थी. उसने जब दोपहर के वीडियो में अपनी माँ और दादी को फिर मौखिक सम्भोग में लिप्त देखा तो उसने निर्णय कर लिया की वो अगले एक दो दिन में ही किसी प्रकार दादी की चुदाई कर ही लेगा.

यही सोचते हुए उसने वीडियो बंद किया और नींद में चला गया.

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अनन्या इस समय अपने मित्रों के साथ शहर के बाहर एक फार्म हाउस में थी. उसकी सहेली नताशा और उसके बॉयफ्रैंड्स जय और परम यहाँ थोड़ी मस्ती के लिए आये थे. अनन्या ने अभी तक किसी के साथ सेक्स नहीं किया था पर उसने हाथ से परम को कई बार झाड़ा था. परम जानता था कि अनन्या इससे अधिक नहीं करेगी, इसीलिए वो भी उस पर अधिक दबाव नहीं डालता था. अनन्या और परम दोनों अपने संबंधों के प्रति गंभीर भी नहीं थे और परम इसी कारण दूसरी लड़कियों से अपने सेक्स की भरपाई करता था. अनन्या को भी इसमें कोई आपत्ति नहीं थी. उसने अपना कौमार्य एक विशेष व्यक्ति के लिए संभाला हुआ था. और उसे विश्वास था कि एक दिन वही उसकी सील तोड़ेगा.

नताशा जय और परम दोनों से चुदवाती थी. और दोनों को ये बात पता थी. वैसे तो वो अकेले उनके साथ आना चाहती थी पर उसकी माँ इसकी अनुमति नहीं देने वाली थी. अनन्या के कारण उसे आने अनुमति मिली थी, पर उसकी माँ नहीं जानती थी कि बेटी और दो लड़कों के साथ जा रही थी और उसके मंतव्य ठीक नहीं थे. और ये इस समय दिखाई भी दे रहा था. चारों मित्र अपने हाथ में बियर लिए हुए थे. अनन्या एक कुर्सी पर बैठ कर अपनी बियर पी रही थी. कुछ ही देर पहले परम और उसने हस्त सम्भोग किया था, परम ने उसकी चूत बहुत अच्छे तरह से चाटकर उसको संतुष्ट किया था. पर उसे लग रहा था कि उसकी जवानी की आग बुझाने के लिए उसे ही पहला कदम लेना होगा. प्रश्न ये था कि अपने कौमार्य के उपहार को जीतने वाले से कैसे बताया जाये.

शाम को घर लौटते हुए उसने किसी प्रकार से उस व्यक्ति से इस पर बात करने का मन बना लिया. वैसे भी नताशा जय और परम को सम्भोग में संलग्न देखकर उसकी वासना जागृत हो गई थी. कब और कैसे की उधेड़बुन में वो अपने घर पहुँच गई. अगले दिन उसकी दादी का ६३वां जन्मदिन था.

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शालिनी का ६३वां जन्मदिन:

आज शालिनी का ६३वां जन्मदिन था. घर में ही एक छोटा सा आयोजन रखा गया था. शालिनी की चार सहेलियों को भी बुलाया था. शाम सात बजे पार्टी शुरू हुई थी. शराब और खाने में सब लोग व्यस्त थे. शालिनी को सबने अपनी ओर से उपहार दिए. उसने सबका धन्यवाद भी किया. तभी अनन्या और गौतम उसके पास आये और उसे गले लगकर उसके जन्मदिन की बधाई दी. अनन्या फिर चली गई, पर गौतम रुका रहा.

गौतम: “दादी, आपको मेरी ओर से लाखों बधाइयाँ. अगर आप बताओ नहीं तो कोई कह नहीं सकता कि आप ६३ साल की हो गई हो.”

शालिनी: “उसका कारण तुम सब हो, मुझे जितनी आनंद और सुख तुम सबने दिया है, उसके कारण मुझे अपनी आयु और अकेलेपन का आभास नहीं होता.”

गौतम: “दादी, मैं तो आपको और भी सुख देना चाहता हूँ.” उसकी इस बात में एक भिन्न ही अर्थ छुपा था.

दादी: “सच कहूँ तो मुझे तुमसे अपने इस जन्मदिन पर कुछ अलग उपहार चाहिए, ऐसा उपहार जो जब तक हम चाहें एक दूसरे को दे सकें.”

गौतम समझ गया कि दादी का संकेत किस ओर है. पर उसने निर्बोध भाव से पूछा, “क्या दादी?”

शालिनी ने अपनी सहेलियों की ओर देखा तो वो अपने आप में व्यस्त थीं. पर अदिति की ऑंखें उन पर थीं. अदिति ने हल्के से सिर हिलाकर अपनी ओर से हरी झंडी दिखा दी. शालिनी ने अपने दाएं हाथ से गौतम की पैंट के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़कर दबाते हुए कहा.

शालिनी: “मुझे तेरा लंड चाहिए. बोल देगा?”

गौतम: “दादी!!! मम्मी और पापा क्या कहेंगे?”

शालिनी: “उनकी इसमें अनुमति है. बस तुझे अपना मन बनाना है. अगर सच में तू मुझे उपहार देना चाहता है तो आज की रात मेरे साथ रह कर मुझे जी भर कर चोदना। क्या कहता है?”

गौतम: “दादी, मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ. आपके मांगे हुए उपहार से कैसे मना कर सकता हूँ.”

शालिनी: “तो पार्टी के बाद मेरे कमरे में आ जाना.”

उधर अदिति और अनन्या बात कर रहे थे.

अनन्या: “मम्मी, मुझे तुमसे कुछ पूछना है और कुछ मांगना भी है.”

अदिति: ”हाँ बोल.”

अनन्या: “यहाँ नहीं, थोड़ा आपके कमरे में चलें?”

अदिति ने अजीत को बताया और अनन्या के साथ अपने कमरे में आ गई.

अनन्या ने दरवाज़ा बंद किया,”मम्मी इससे पहले की मेरा साहस टूटे मैं एक बार में अपनी बात कह देती हूँ. मैं अभी भी कुंवारी हूँ. पर मुझे सेक्स की अब बहुत इच्छा रहती है. मैं चाहती हूँ कि एक विशेष व्यक्ति मेरे कौमार्य को भंग करे. और इसके लिए मुझे आपकी अनुमति और स्वीकृति दोनों चाहिए.”

अदिति: “मुझे गर्व है कि इस युग में भी तुमने अपना कौमार्य बचाकर रखा है. ये भी सच है कि तुम्हारी आयु सेक्स का सुख लेने की हो चुकी है. तो जो भी वो व्यक्ति है जिससे तुम इसे भंग करवाने की इच्छुक हो, तुम्हें उसे ये बात किसी माध्यम से बतानी चाहिए.”

अदिति का ये बात कहते हुए दिल टूट रहा था क्योंकि उसने अजीत को इस कार्य के लिए चुना हुआ था.

अनन्या: “मैं चाहती हूँ कि आप इसमें मेरी माध्यम बनें.”

अदिति अब अपने पति और बेटी की परस्पर विरोधी इच्छाओं के बीच फंस गई थी.

अदिति: “मैं तुम्हारी कैसे सहायता कर सकती हूँ?”

अनन्या: “क्योंकि वो विशेष व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि आपके पति और मेरे पापा हैं.”

अदिति का सिर घूम गया. वो धप्प से सोफे पर बैठ गई. फिर वो जोर जोर से हंसने लगी.

अनन्या: “मम्मी, क्या हुआ. ऐसे क्यों हंस रही हो?”

अदिति: ”मुझे इस बात की चिंता थी कि तुमने किसे चुना था क्योंकि मैंने भी किसी को चुना हुआ था इस शुभ कार्य के लिए.”

अनन्या: “तो हंस क्यों रही हो?”

अदिति: “क्योंकि मैंने जिसे चुना था वो भी तेरे पापा ही हैं.”

ये कहकर अदिति ने उठकर अनन्या को गले से लगा लिया.

अदिति: “आज पार्टी के बाद हमारे कमरे में आ जाना. शुभ काम में देरी नहीं करनी चाहिए.”

ये कहकर उसने अनन्या का हाथ लिया और दोनों पार्टी में लौट गए.

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शालिनी का कमरा:

पार्टी समाप्त होने के बाद शालिनी अपने कमरे में चली गई और कुछ ही देर में गौतम कपडे बदल कर आ गया. शालिनी उससे अपने कपड़े उतारकर लेटने के लिए कहती है और बाथरूम में घुस जाती है. गौतम कमरे में बिस्तर पर लेट गया. कमरे में रोशनी खिली हुई थी. वो इस समय नंगा था और उसके जवान कसरती शरीर पर उसका शानदार खड़ा हुआ लंड बहुत बड़ा और कड़ा लग रहा था. लगभग २२ साल की आयु में इसका भरपूर आनंद लिया और दिया था. पर आज कुछ विशेष था.

वो बाथरूम से उसकी दादी के निकलने की प्रतीक्षा कर रहा था. उन्होने अभी थोड़ी देर पहले टब में गर्म पानी से नहाया था. तभी बाथरूम का दरवाज़ा खुला और दो सुंदर पैर बाहर आए. बाहर आने वाली भीगी हुई स्त्री दिखने में कोई ४२-४३ वर्ष की रही होगी, पर गौतम जानता था कि वो ६३ वर्ष की थी. आज उनका जन्मदिन जो था. पर उन्होंने स्वयं को इस तरह से संभाल कर रखा था कि आयु उन पर हावी नहीं हुई थी. बाहर आकर उन्होंने कमरे की लाइट बंद कर दी. बाहर से चाँदनी रात की रोशनी कमरे को भिगोने लगी. वो खिड़की से बाहर देख रही थी और उनका शरीर चाँदनी में और भी ज़्यादा लुभावना लग रहा था. उसके स्तन तने हुए थे, लंबे बाल लगभग नितंबो को छू रहे थे.

गौतम की आँखें उन सुडोल नितंबों को ताक रही थीं, आयु का प्रभाव होते हुए भी वो बेहद आकर्षक थे. उन्होंने पलट कर गौतम की ओर देखा. उसकी आँखों में निमंत्रण था, और होठों पर एक मुस्कुराहट. उसका पहले से खड़ा लंड और अकड़ गया और वो बिस्तर से उठकर उसकी ओर बढ़ा. वो इस स्त्री के रोम रोम से प्यार करना चाहता था, वो उसे अपना बनाना चाहता था. वो उसे दिल भर कर चोदना चाहता था. गौतम उसके पीछे जाकर उन से चिपक गया. उसका लंड उन नितंबो में चुभने लगा था और उसका सीना पीठ पर सट गया. उसने अपनी बाहें कमर में डालकर उन्हें अपनी ओर खींचा.

उन के होठों से वो गर्दन और कानों के चुंबन लेते हुए उसने भर्राई हुई आवाज़ में कहा,"आइ लव यू, दादी."

"वैसे ही जैसे में चाहती हूँ कि तुम मुझे प्यार करो?" दादी ने पूछा, उनकी आँखों में निमंत्रण था और होंठ कंपकपा रहे थे.

“जैसा आप चाहती हो. और जैसा आप पापा से करती हो.” गौतम ने उत्तर दिया.

शालिनी एक पल के लिया ठिठक गई, फिर बोली, “हम्म्म, तुझे मेरे और अजीत के बारे में कैसे पता?”

गौतम: “कुछ दिन पहले आप दोनों को इस कमरे में आते हुए देखा था.”

शालिनी: “तो क्या, किसी बात के लिए आये होंगे.”

गौतम: “ऐसी क्या बात थी जिसके लिए नंगे आना पड़ा, और कपडे हाथ में लेकर?”

शालिनी समझ गई कि गौतम संभवतः सब कुछ जान चुका है.

शालिनी: “और क्या देखा?”

गौतम: “यही कि राधा आपके पास सुबह और मम्मी दोपहर को आती हैं. क्यों मैं सही समझ रहा हूँ न?”

शालिनी: “इसीलिए तू कुछ दिन काम पर नहीं गया था न ताकने के लिए कि मैं क्या करती हूँ.”

गौतम: “सही पकड़े हैं.”

शालिनी अब मुड़ी और दोनों एक दूसरे के सामने आ गए. उसके होंठ चूमते हुए बोली: “जब पकड़ी हूँ तो सजा भी दूंगी.”

गौतम: “दादी, मुझसे उपहार लेकर मुझे सजा दोगी ?”

शालिनी: “अजीत ने कहा है मैं तुझे वो सब सिखाऊं जो मैंने उसे बरसों पहले सिखाया था.”

गौतम: “तो देर किस बात की है?”

शालिनी ने गौतम का हाथ लेकर उसे बिस्तर पर खींचा। फिर उसने लेट कर अपने पांव फैलाकर गौतम को बुलाया.

शालिनी: “अगर किसी स्त्री को संतुष्ट करना है तो उसका सबसे पहला और सरल उपाय है उसकी चूत से प्यार करना. अगर किसी भी स्त्री को तुम अपने मुंह से संतुष्ट कर दोगे तो वो तुम्हें सदैव याद रखेगी और दोबारा तुमसे मिलना चाहेगी. तो मेरे प्यारे बच्चे अब अपनी दादी की चूत को ऐसे प्यार करो जैसे कि स्वर्ग का द्वार है.”

गौतम: “ये स्वर्ग का द्वार है, इसे समझने में मुझे कोई कठिनाई नहीं है.”

ये कहते हुए गौतम ने अपना मुंह दादी की चूत में लगाया और उसे चाटने लगा. अब ये कहना कि ये उसकी पहली चूत थी जिसे वो ये सुख दे रहा था गलत होगा. वो पिछले तीन सालों में कई चूतों का रस पी चुका था. और उसको सिखाने वाली उसकी आयु की लड़कियां ही नहीं, बल्कि कुछ मध्यम आयु की विवाहित स्त्रियाँ भी थीं. उन सब ने मिलकर उसे इस कला में बहुत पारंगत कर दिया था. और आज उसे उस कला को अपनी चहेती दादी पर प्रयोग करने का अवसर मिला था. गौतम उन्हें ये दिखाना चाहता था कि वो उन्हें हर प्रकार से संतुष्ट कर सकता है..

शालिनी भी गौतम के उपक्रम से ये समझ गई कि जिसे वो सिखाना चाहती है, वो पहले ही प्रशिक्षित है. पर उसने इस समय कुछ भी कहना उचित नहीं समझा बल्कि इसका पूर्ण आनंद लेने का निश्चय किया. प्रश्नोत्तर बाद में किये जा सकते थे. शालिनी ने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया और गौतम को समर्पित कर दिया. गौतम ने उसके इस बदले हुए भाव को समझ लिया. अब दादी उसके वश में होंगी.

शालिनी के मुंह से आनंद की सीतकारें निकल रही थीं. अपने प्यारे पोते को अपनी जांघों के बीच अपनी चूत पर जादू करता जो अनुभव कर रही थी. उसकी चूत पानी छोड़ रही थी और अभी तो केवल आरम्भ था. गौतम के अधक प्रयास उसे एक नयी स्वर्णिम ऊंचाइयों पर ले जा रहे थे. उन्होंने ये समझ लिया कि वो स्वयं गौतम को इससे श्रेष्ठ ज्ञान नहीं दे सकती थी.

गौतम न केवल अपनी जीभ बल्कि उँगलियों का भी बहुत ही सुन्दर उपयोग कर रहा था. उसकी जीभ अब शालिनी की चूत की गहराइयों में जाकर उसके अंदर की संवेदनशील नसों को छेड़ रही थी. साथ ही उसकी दो उँगलियाँ शालिनी के भगनासे पर ही थीं और कभी रगड़कर, तो कभी मसलकर वो अपनी दादी को वासना की ऊंचाई से नीचे नहीं उतरने दे रहा था. शालिनी ने अपनी गांड उठाई जिससे गौतम को कुछ सुगमता हो. परन्तु गौतम ने इसका अलग ही उपयोग किया. उसने अपने बाएँ हाथ को उसकी उठे नितम्बों के नीचे लगाया और बहुत ही हल्के हल्के उसकी गांड के छेद को सहलाने लगा. पर उसे इस हाथ से बहुत अच्छे से ये छेड़छाड़ करने में समस्या लगी. तो उसने दाएँ हाथ को नीचे लगाकर बाएँ हाथ से ऊपर का पराक्रम अबाधित रखा. अब चूँकि उसकी दाएँ हाथ की उँगलियाँ रस से गीली थी, तो शालिनी की गांड के भूरे सितारे पर उसकी सहलाने की गति भी बढ़ गयी.

शालिनी: “बेटा, मैं तो गयी.” कहते हुए शालिनी पूरी तरह से भरभरा कर झड़ने लगी. यही वो अवसर था जब गौतम ने अपनी बीच वाली उंगली को शालिनी की गांड में उतार दिया और उसे गोल गोल घुमाने लगा. अभी शालिनी का झड़ना समाप्त भी नहीं हुआ था कि इस अनायास आक्रमण ने उसे एक बार फिर रोमांच की ऊंचाई पर भेज दिया. और फिर वो एक झटके से उससे उतरी और उसकी चूत ने एक फव्वारा छोड़ा जिससे गौतम का सारा चेहरा भीग गया. पर गौतम कहाँ रुकने वाला था. उसने शालिनी के भगनासे को जोर से दबाया और गांड में उंगली से मैथुन करने लगा. शालिनी को अब कुछ भी बूझ नहीं रहा था. वो आनंद की इस पराकाष्ठा से आज तक अनिभिज्ञ थी. उसके तन और मन इस समय ऐसी लहरों में बह रहे थे जिसका उसने कभी अनुभव नहीं किया था.

अंततः उसका शरीर ढीला पड़ गया. अब उसमे कुछ शेष नहीं था. गौतम ने ये समझा और धीरे से गांड में से उंगली बाहर निकली और उसकी चूत पर एक गहरा चुम्बन लेते हुए शालिनी की जांघों से अलग हो गया.

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अदिति का कमरा:

पार्टी समाप्त होने ही अदिति अनन्या को अपने साथ ही लेकर अपने कमरे में चली आयी. उसने अजीत को ये बता दिया था कि अनन्या की भी वही इच्छा है जो उस दोनों की है. अजीत ये सुनकर बहुत प्रसन्न हो गया था. अजीत कमरे में पहले ही आ चुका था और अभी बाथरूम में था. अदिति ने अनन्या को अपने पास बैठाया और उसे समझाया कि पहली बार सम्भोग में कुछ दर्द होने की सम्भावना रहती है, परन्तु उसके बाद जीवन के असीमित आनंद का द्वार खुल जाता है.

उसने ये जानने का प्रयास किया कि क्या अनन्या घर के बाहर भी किसी से सम्बन्ध बनाना चाहती है. अनन्या ने कहा कि अभी उसने इस बारे में अधिक विचार नहीं किया है. हालाँकि उसके साथ की अधिकतर लड़कियाँ अपने बॉयफ्रेंड के साथ ये सुख लेती हैं, पर कुछ हैं जो उसकी ही तरह सोचती हैं और अपने को संजो के रखे हैं. इतने में अजीत बाथरूम से बाहर आया, उसने केवल एक तौलिया ही अपनी कमर के नीचे बांधा हुआ था और उसका धड़ नंगा था. और उसने माँ बेटी को बातें करते हुए देखा. अनन्या ने उसकी ओर देखा तो उसने अपनी ऑंखें झुका लीं. अदिति ने उसकी ठुड्डी पकड़कर उसका चेहरा ऊपर किया.

अदिति: “बेटी, ये वो खेल है जिसमें शर्म नहीं होनी चाहिए. बाकी समय तुम चाहे जितना भी शर्म और आदर रखो, पर जब भी चुदाई का समय हो तो उन सबको हटाकर केवल इसकी ओर ही ध्यान रखो. अगर कुछ भी और सोचोगी तो इस सुख से वंचित रह जाओगी.”

अनन्या ने स्वीकृति में सिर हिलाया। अदिति उसे अपने साथ बाथरूम में ले गई और उससे नहाकर आने के लिए कहा. फिर उसने अजीत को समझाया कि उसे बहुत प्यार और संयम से अनन्या का कौमार्य भंग करना है.

अदिति: “अनन्या अभी कली है, मेरे, माँ जी या मोनिका के जैसी नहीं है कि तुम एक बार में चढ़ाई कर दो.”

अजीत: “तुम शायद अपना पहला संसर्ग भूल रही हो, मैंने तुम्हें जिस तरह से पहली बार चोदा था, उस समय को याद करो.”

अदिति: “हाँ. बस वैसे ही.”

इतने में अनन्या बाहर आ गई, अब कोई और कपडा तो उसके पास था नहीं तो उसने अपने आप को एक तौलिये से ही लपेट रखा था. अजीत का लंड ये देखते ही फनफना गया. अदिति ने उसकी जांघ हल्के से थपथपाई और स्वयं स्नान के लिए चली गई. अजीत ने बार से तीन पेग बनाये और एक अनन्या को थमा दिया. अनन्या हालाँकि पार्टी में भी पी चुकी थी पर न जाने आज उसपर कोई नशा नहीं चढ़ा था. उसने तीन चार घूँट में ही अपना पेग समाप्त किया और एक और बना लिया. अदिति तब तक बाहर आ चुकी थी और वो भी केवल तौलिया ही लपेटे थी. उसने देख लिया कि अनन्या दूसरा पेग बना रही है. वो उसके पास गई और उसे समझाया कि पहली बार का सुख शराब के नशे में नहीं लेना चाहिए, अन्यथा उसे जीवन का पहला अनुभव उस प्रकार से याद नहीं रहेगा जैसा रहना चाहिए.

अनन्या ने माँ की बात को समझा और अपने पेग को चुस्कियों में पीना शुरू किया. अजीत और अदिति भी यही कर रहे थे.

अजीत: “अगर तुम्हें इसमें जरा सा भी संकोच है तो कोई आवश्यक नहीं कि हम ये करें.”

अनन्या ये सुनकर चौंक गई.

अनन्या: “नहीं, पापा. ये मेरा बहुत पहले का प्रण है. और मुझे नहीं लगता कि आज से कोई अच्छा समय आएगा. मम्मी ने मुझे बहुत कुछ समझाया है. मैं चाहती हूँ कि आज मुझे एक कली से फूल बना दें.”

ये कहती हुई वो आगे बढ़ी और अजीत के पास आकर उसने उसे चूम लिया. अजीत ने अपना ग्लास अदिति को दिया और अनन्या को अपनी बाँहों में लेकर चुम्बनों की बौछार कर दी. और इसी के साथ उसने अनन्या के शरीर से तौलिया खींच कर अलग कर दिया. अदिति की एक सिसकारी निकल गई. उसने कभी सोचा भी न था कि अनन्या निर्वस्त्र कितनी सुन्दर लगती होगी. उसके नंगे शरीर को देखकर अदिति की चूत भी पनिया गई. उधर बाप बेटी के चूमा चाटी में न जाने कब अजीत का तौलिया भी गिर गया. अनन्या ने जब अपनी नाभि पर कुछ चुभता हुआ पाया तो नीचे देखा. उसकी आंखे अपने पिता के लंड को देखकर फ़ैल गयीं. जय और परम जो अपने आपको बड़े महारथी समझते थे उसके पिता के आगे गौण ही थे. न जाने उसके मन में कहाँ से ये विचार आया कि अगर नताशा एक बार पापा का लंड झेल लेगी तो जो मुझे उलाहने देती है,उसकी बोलती ही बंद हो जाएगी. यही सोचते हुए उसने अजीत के तने हुए लंड को अपने हाथ में ले लिया.

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शालिनी का कमरा:

शालिनी अपनी साँसों को संभल रही थी. उसने मौखिक सम्भोग से कभी भी इतना आनंद नहीं पाया था.

शालिनी: “कहाँ से सीखा तूने ये सब.”

गौतम: “अरे दादी आप आम खाओ, गुठलियाँ न गिनो. क्या आपको अच्छा लगा?”

शालिनी: “अच्छा? ऐसा अनुभव मैंने जीवन में कभी भी नहीं लिया है.”

गौतम: “दादी, बात ये है कि मैं आपसे असीम प्रेम करता हूँ. ये सुख आपको इस कारण मिला, न कि मेरे कहीं से सीख कर आने से.” गौतम ने बात बनाते हुए कहा.

शालिनी समझ गई कि ये बताने वाला नहीं है. उसने अपने हाथ में गौतम का लंड पकड़ा और हल्के से सहलाते हुए पूछा.

शालिनी: “और इसका कैसे प्रयोग करते हैं वो भी तुझे भली भांति आता ही होगा.”

गौतम: “कुछ कुछ. पर जैसे आप सिखाओगी मैं वैसा ही करूँगा.”

शालिनी: “ह्म्म्मम्म, मेरा मन अब तेरे इस लंड को चूसने का है और फिर मैं चाहूंगी कि तू मुझे अच्छे से चोदे.”

गौतम: “दादी, आप जो चाहे वैसा करो.”

शालिनी: “चल सामने आकर खड़ा हो जा, जरा चूस कर देखूं तेरे लंड को कैसा स्वाद है.”

गौतम शालिनी के सामने जा खड़ा हुआ और शालिनी ने बिना समय नष्ट किये हुए उसके लंड को अपने मुंह में ले लिया. उसने ये प्रण किया कि जितना आनंद गौतम ने उसे दिया है, उससे अधिक वो उसे लौटाएगी. और गौतम ने जाना कि उसकी दादी क्या बला है. उसके लंड के टोपे, लम्बाई, चौड़ाई और अंडकोष हर स्थान पर मानो शालिनी के मुंह और हाथ एक ही समय चल रहे थे. वो लंड को अपने गले तक ले जाती और वहां उसके लंड को दबाती थी. गौतम अब तक जिन भी स्त्रियों के साथ संभोगरत हुआ था सबकी लंड चूसने की विभिन्न शैलियाँ थीं. पर आज वो उन सबके समावेश से बनी एक शैली को अनुभव कर रहा था. और ये कहना गलत नहीं होगा कि उसकी दादी उन सब बाकी स्त्रियों से कोसों आगे थीं.

शालिनी ने कुछ ही समय में गौतम को चरम पर ले आया. पर यहाँ उसने अपनी उँगलियों से कुछ ऐसा किया कि गौतम ले लंड में उफनता हुआ उबाल मानो शांत हो गया. यही क्रिया जब शालिनी ने तीसरी बार दोहराई तो गौतम से रहा नहीं गया.

गौतम: “दादी, अब और मत सताओ, मुझे झड़ जाने दो, प्लीज.”

शालिनी ने अपने पैतरे बदले और कुछ ही सेकण्ड में गौतम का ज्वालामुखी फूट पड़ा और अपना लावा शालिनी के मुंह में गिराने लगा. शालिनी ने उसके इस लावे को पूरा पी लिया. गौतम असमंजस में था क्यूंकि अभी तक कोई भी स्त्री उसका पूरा पानी नहीं पी पाई थी. शालिनी ने पूरा गटकने के बाद गौतम की ओर मुस्कुरा कर देखा.

“क्यों बेटा, कैसा लगा.”

“दादी आप सच में विलक्षण हो.”

“अब कितनी देर लगेगी तेरा फिर से खड़ा होने में?”

“बस समझो कुछ ही मिनट.”

“हूउउउनंनन, अब मेरी चूत कुलबुला रही है. अब जैसे ही तेरा लंड खड़ा हो जाये इसकी भी प्यास बुझा देना.”

“अवश्य दादी।”

अब जवान लड़के की लंड को खड़े होने में अधिक समय तो लगता नहीं, वो भी तब, जब उसके सपनों की अप्सरा उसके सामने निर्वस्त्र पड़ी हो. और जैसे ही गौतम को लगा कि अब वो दादी की चुदाई कर सकता है, उसने आगे बढ़कर अपने लंड को शालिनी के मुंह के पास लगा दिया.

गौतम: “दादी, थोड़ा इसे प्यार करो जिससे ये भी आपको उतना ही लौटा सके.”

शालिनी: “मुझे विश्वास है कि ये कई गुना लौटाने वाला है.”

ये कहते हुए शालिनी ने लंड मुंह में लेकर कुछ देर चूसा जिससे वो अच्छे से गीला भी हो जाये और अच्छा कड़क हो जाये जिससे वो उसकी चूत के पेंच ढीले कर सके. फिर गौतम ने अपना स्थान उस द्वार के समक्ष लिया जहाँ से कई वर्ष पहले उसके पिता ने संसार में कदम रखा था.

गौतम: “दादी, कैसी चुदाई पसंद करोगी, प्यार से या धुआंधार।”

शालिनी: “ये वाली तो धुआंधार होनी चाहिए, बाद में एक बार प्यार से भी चोदना। पर इस बार कोई दया नहीं दिखाना।”

गौतम ने ये सुनकर अपने लंड को दादी की चूत के ऊपर रखकर उसे उसकी लकीरों पर घिसा और जब लगा कि उसकी पंखुड़ियाँ खुल गयी है तो धीरे से अपने सुपाड़े को चूत में बैठाया. शालिनी साँस रोके उसके इस उपक्रम को देख रही थी. और जब गौतम को लगा कि उसका लंड अच्छे से बैठा है तो उसने दबाव बनाया और लंड को कोई ३-४ इंच तक अंदर धकेल दिया. शालिनी अब भी कामुक और प्रेम भरी आँखों से उसे ताक रही थी. अचानक उसके चेहरे के भाव आश्चर्य और कुछ दर्द के मिले जुले भावों में बदल गए. गौतम ने एक लम्बे और शक्तिशाली झटके से अपना शेष लंड उसकी चूत में जो उतार दिया था.

गौतम अब ठहरने वाला नहीं था. उसे उसकी दादी ने हरी झंडी दिखा दी थी और अगर अब उसे अपने निर्णय पर पुनर्विचार की इच्छा भी थी तो तीर धनुष से छूट चुका था. गौतम अपने लंड की पूरी लम्बाई का प्रयोग कर रहा था. उसकी गोलाई अच्छी होने से शालिनी की बूढी और खुली चूत को भी बहुत सट के जा रहा था. कुछ लोग शालिनी की चूत भोसड़ा कहते, पर उनके लंड गौतम जैसे नहीं थे. और ये भी था कि पिछले ३ सालों में उसकी चुदाई कम और चुसाई ज्यादा हुई थी. शालिनी अब इस पलंगतोड़ चुदाई से विचलित नहीं थी, पर उसकी बूढी हड्डियां इन धक्कों से चरमरा रही थीं. उसने गौतम के सीने पर हाथ रखकर उसकी गति कम करने का प्रयास किया.

पर ये असंभव था. गौतम ही स्वयं को रोकने में असमर्थ था. शालिनी की चूत भी उसके शरीर का साथ नहीं दे रही थी और लगातार पानी छोड़ रही थी. इसके कारण घर्षण कम हो गया और गौतम का लंड अब और सरलता से गंतव्य को भेदने में जुट गया. अंततः शालिनी ने भी अपनी चूत की गुहार सुनी और आनंद के झोंकों में बहने लगी.

शालिनी: “क्या राक्षस की तरह चोद रहा है. दादी हूँ मैं तेरी, थोड़ी तो दया कर.”

गौतम: “दादी मैंने आपसे पूछा ही था, आपने ने ही ऐसे चुदने की इच्छा की थी. और आपकी चूत तो इतना पानी छोड़ रही है जैसे नदी हो.”

शालिनी, अपनी कमर को अब उठाकर गौतम की चुदाई में लिप्त हो गई.

शालिनी: “बात मेरी चूत की नहीं. सच कहूं तो मेरी जो इच्छा थी वही पूरी हो रही है और बहुत आनंद आ रहा है. बात मेरी इन बूढी हड्डियों की है, जो इस उम्र में ऐसे व्यायाम की अभ्यस्त नहीं हैं.”

गौतम ने ये सुनकर अपनी गति धीमी कर ली और शालिनी के होंठ चूमकर बोला, “अरे दादी, एक बार ये हड्डियां खुल गयीं तो फिर आपको हर दिन ऐसी ही चुदाई चाहिए होगी. और जकड़ी हुई हड्डियों को खोलने के लिए ऐसी ही चुदाई करते हैं.”

गौतम ने फिर अपनी गति बढ़ा दी. शालिनी अब इतना झड़ चुकी थी कि उसकी चूत अब जैसे सूखने लगी. गौतम का लंड भी अब इस बढ़ते हुए घर्षण को पहचान गया और कुछ ४ मिनट की चुदाई के बाद अपना माल छोड़ने को उत्सुक हो उठा.

गौतम: “दादी, कहाँ निकालूँ?”

दादी “मेरे मुंह में छोड़. पता तो चले की अपने बाप से कितना मिलता है तेरा स्वाद.”

गौतम ने धक्के हल्के किया और फिर अपने लंड को बाहर निकला और शालिनी के मुंह पर लगा दिया. शालिनी ने उसे अपने मुंह में लेकर पूरी शक्ति से चूसना प्रारम्भ कर दिया. और बस कुछ क्षणों में गौतम के अपना लावा उसके मुंह में भर दिया. पूरा पानी शालिनी ने फिर से पी लिया. गौतम आकर दादी के साथ लेट गया.

गौतम: “दादी, पहले भी तो तुमने मेरे रस का स्वाद लिया था तब तो पता लग गया होगा की मेरे और पापा के स्वाद का अंतर. फिर अब ऐसा क्यों?”

शालिनी: “वो पहले का स्वाद था और ये बाद का. तू नहीं समझेगा इसका अंतर. अपनी माँ से पूछना कभी. या अनन्या से.”

गौतम चौंक कर: “अनन्या से?”

शालिनी उसके होंठ चूमकर और सीने पर अपना सिर रखकर बोली, “हाँ. जैसे तू आज मेरे बिस्तर में है, वैसे ही अनन्या तेरे पापा के बिस्तर में है. तेरी माँ आज उसके कौमार्य का भोग अपने पति को लगा रही है.”

गौतम: “वाओ!”

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अदिति का कमरा:

अजीत ने अनन्या को बिस्तर पर लिटाया और अपना चेहरा उसकी जांघों के बीच डाल दिया. चारों ओर उसे चूमते हुए उसने एक लम्बी साँस ली और अनन्या की अब तक अक्षत योनि की महक ली. आज के बाद ये असंभव हो जायेगा. उसने चेहरा उठाकर अदिति को बुलाया.

अजीत: “लो अपनी बेटी की कुंवारी चूत की सुगंध ले लो. और चाहो तो स्वाद भी चख लो. आज के बाद ये ऐसी न रहेगी.”

अदिति आगे झुकी और उसने भी एक साँस में अपनी बेटी की सुगंध भर ली. फिर उसने उसकी चूत पर अपनी जीभ से चाटा और पंखुड़ियां खोलकर अपनी जीभ अंदर डालकर अंदर का स्वाद चखा. फिर वो हट गई.

अदिति: “आज ये तुम्हारी ही है. पर मुझे ये अवसर देने के लिए धन्यवाद.”

अजीत ने अब अपने मुंह और जीभ से अनन्या की संकरी चूत को प्यार करना प्रारम्भ किया. और कुछ ही समय में अनन्या बिस्तर पर कसमसा रही थी. अजीत की जीभ उसकी चूत के हर कोने को खंगाल रही थी. अब उसके कॉलेज वाले दोस्त उसे बचकाना लग रहे थे. अजीत का पारखी और अनुभवी मौखिक आक्रमण उसके जीवन का प्रथम जीवंत सेक्स का अनुभव था. यही कारण है कि पूरी सृष्टि इस एक कार्य के लिए पागल है. अनन्या की कमसिन चूत अब पानी बहा रही थी और अजीत उसके बहाव में गोते लगते हुए उस जल से अपनी प्यास बुझा रहा था. एक ओर अदिति भी अपने तौलिये को फेंककर अपनी चूत को बाहर से मसल रही थी.

अचानक अनन्या का शरीर अकड़ गया और उसके कूल्हे और पैर कांपने लगे. उसकी चूत से एक लम्बी धार निकली जो अजीत के मुंह में समा गई. आज उसका पहला स्त्राव हुआ था. और फिर उसका शरीर ढीला पड़ गया.

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शालिनी का कमरा:

गौतम: “दादी, क्या मुझे भी अनन्या?”

शालिनी: “बच्चू, पहले मुझे और अपनी माँ को ही संभाल ले, ज्यादा लालच में न पड़। “

गौतम: “अरे दादी, मैं तो इसीलिए पूछ रहा था कि बाहर की गतिविधियाँ बंद करने की आवश्यकता तो नहीं. जब घर में ही…”

शालिनी: “बात तो तेरी सही है, कुछ दिन ठहर के देख.”

गौतम: “और राधा?”

शालिनी: “हम्म्म लगता है तू घर की किसी औरत को छोड़ने वाला नहीं. चल मैं उससे बात करुँगी. परन्तु उसके विषय में विश्वास के साथ नहीं कह सकती. क्योंकि किसी ने इस ओर कोई प्रयास नहीं किया. पता नहीं अब तक अनन्या का कौमार्य टूटा भी होगा या नहीं.”

इसी उधेड़बुन में दादी और पोता सोचते हुए निद्रामग्न हो गए.

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अदिति का कमरा:

और अब समय था अनन्या के कौमार्य के विच्छेदन का. अदिति ने बाथरूम में जाकर वहां से एक वेसलीन की शीशी लाई। पहले उसने अजीत के लंड को मुंह में लेकर अच्छे से चूसा और चाटकर कुछ हद तक गीला किया. पर एक कुँवारी चूत के लिए और चिकनाई की आवश्यकता तो समझते हुए, वेसलीन लगाकर उसे पर मला. फिर थोड़ी वेसलीन और लगाई और अजीत से कहा कि वो अपने लंड पर स्वयं ही मले.

फिर उसने अनन्या की कच्ची चूत पर वेसलीन लगाई और उसे एक ऊँगली से उसके अंदर भी मला। इतने में ही अनन्या एक बार झड़ गई. वो बहुत उत्सुक थी और रुक न पाई. अदिति ने उसके छोड़े हुए पानी और वेसलीन से उसकी चूत के अंदर अच्छे से मालिश की. जब उसे लगा कि अब वो अगले पड़ाव के लिए तैयार है, तो वो उठी और अजीत की ओर मुड़ी।

अदिति: “आपकी बेटी अब फूल बनने के लिए उत्सुक है. आइये और इसको अपने जीवन का वो सुख दीजिये, जिससे वो अभी तक अनिभिज्ञ रही है.”

अजीत ने अपने तने हुए लंड को अनन्या की चूत के ऊपर रगड़ा जिस कारण अनन्या कुनमुमनाने लगी.

अजीत हँसते हुए बोला, “कुछ ज्यादा ही बेचैन हो रही हो.”

अदिति बोल पड़ी, “क्यों न हो, उसका सपना जो पूरा होने जा रहा है. चलिए और आगे बढिये.”

अजीत ने अपने लंड को अनन्या की चूत में फंसाया और हल्के दबाव के साथ उसकी चूत की कोमल पंखुड़ियों को चीरते हुए सुपाड़े को अंदर प्रविष्ट कर दिया. अनन्या सिहर उठी. इतने दिनों का उसका सपना आज पूरा जो होने जा रहा था.

“पापा, थोड़ा जल्दी करो न, प्लीज.”

“नहीं बेटी, उसमें तुम्हे दर्द होगा. मैं जानता हूँ मुझे क्या करना है.” अजीत बोलते हुए अपने लंड को दबाते हुए अंदर धकेल रहा था.

एक घोंघे की गति से बढ़ाते हुए कुछ समय में लगभग ५ इंच लंड अनन्या की मखमली चूत में समा चुका था. अनन्या को अभी तक किसी प्रकार का दर्द नहीं हुआ था. अजीत ने अदिति को देखा और अदिति ने वस्तुस्थिति भांपते हुए अनन्या के पास बैठकर उसके हाथ अपने हाथों में ले किये और उन्हें सहलाने लगी. अनन्या समझ गई कि अब सच का सामना होने वाला है. उसने अपने मन को पक्का किया और अपने पापा को आँखों से संकेत किया कि वो आगे बढ़ें.

इस बार अजीत ने अपने लंड को बाहर खींचा और इस बार थोड़ा तेजी से अंदर बढ़ाया. पर लंड पिछली गहराई पर ही रुक गया, उसे अनन्या के कौमार्य की झिल्ली रोक रही थी. अजीत ने उसी क्रम को दोहराते हुए हर बार अपनी गति को बढ़ाते हुए लंड को अंदर और फिर बाहर किया. और फिर एक बार ही अचानक उसने एक तगड़ा धक्का लगाया, और अनन्या का शरीर अकड़ गया. उसने अदिति के हाथ को जोर से अपने हाथ में दबाया। इसके पैर छटपटाने लगे और आँखों में आँसू आ गए. उसकी सील टूट चुकी थी, उसके पापा का लंड अपने अंतिम अवरोध को तोड़कर आगे बढ़ चुका था.

अदिति उसके हाथ और माथे को सहला रही थी. अजीत रुका हुआ था और उसने झुककर अनन्या के होंठ चूमे और बाप बेटी एक दूसरे को चूमने लगे. जब अजीत को लगा कि समय सही है, उसने अपने लंड की चहलकदमी आरम्भ कर दी. अब उसका लंड अनन्या की चूत में हर बार थोड़ा बढ़ कर जा रहा था. कुछ ही समय में लंड की पूरी लम्बाई अनन्या की गहराई नाप रही थी. अनन्या को भी अब दर्द के स्थान पर एक नई संवेदना का अनुभव हो रहा था. ये हर उस अनुभव से अलग था जो उसने अपने जीवन में किये थे. कुछ अलग, कुछ मीठा सा. उसे लगा जैसे उसके शरीर की सभी कोशिकाएं उसके इस अंग में समा गई थी.

उसकी नई खुली चूत अब पानी से भरने लगी थी. अजीत के धक्कों से अब छप छप की ध्वनि आने लगी थी. अदिति ने अजीत की ओर प्रेम भरी आँखों से देखा और उसके होंठ चूम लिए. फिर उसने मुड़कर अपनी बेटी के होंठों पर अपने होंठ रखे. माँ बेटी एक प्रगाढ़ चुम्बन में लीन हो गए. अजीत अब आसानी से अपने लंड को अनन्या की चूत में पेल रहा थे, चूत से छूटता रस उसके प्रयास को सरल बना रहा था. पर इतने संकरे रास्ते के कारण अब उसका अधिक देर तक ठहरना संभव नहीं था. उसने अदिति को संकेत किया कि वो झड़ने वाला है.

अदिति ने अनन्या को बताया तो अनन्या ने कहा कि अंदर ही छोड़ो, वो गोली ले लेगी पर बाहर नहीं निकालें. ये सुनकर अजीत के लंड ने अपनी पिचकारी खाली करना शुरू कर दी और कुछ ही क्षणों में अनन्या की चूत में अपना पूरा रस डालकर अलग हो गया.

अदिति: “कैसी लगी मेरी बेटी को अपनी पहली चुदाई?”

अनन्या : “मम्मी, मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे मैं बादलों में तैर रही हूँ. इतना मजा आता है चुदाई में? मुझे नहीं लगता कि अब मैं एक दिन भी इसके बिना रह पाऊंगी.”

अदिति: “मुझे ख़ुशी है कि तुझे इतना आनंद आया. ला अब मैं तेरी चूत साफ कर दूँ.”

ये कहते हुए अदिति ने अनन्य की जांघों को फैलाया और झुककर उसकी चूत में अपना मुंह लगाकर चाटने लगी. अपनी बेटी और पति के इस मिश्रित रास को भोग लगाकर उसका मन उल्लास से भर गया. उसके अच्छे से चाटकर अनन्या की चूत को साफ कर दिया. फिर उसके फैले हुए पांवों के बीच खिली हुई पाव के सामान फूली हुई लाल गुलाबी चूत को देखकर अजीत और अदिति ने एक दूसरे को एक संतोष भाव से देखा.

अदिति ने अनन्या को आज उनके ही साथ सोने का आमंत्रण दिया और तीनों नंगे ही एक दूसरे की बाहों में सो गए. आज घर में सब सो रहे थे और सब अपने सपनों में एक ही दृश्य की कल्पना कर रहे थे. और वो था उन्मुक्त सेक्स का वातावरण। जीवन के नए आनंद के द्वार खुल चुके थे.

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